01. शुचिपर्यावरणम – Chapter Summary

प्रस्तुत पाठ आधुनिक संस्कृत कवि हरिदत्त शर्मा के रचना संग्रह ‘लसल्लतिका’ से संकलित है। इनमें कवि ने महानगरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिन्ता व्यक्त करते हुए और मानव कल्याण के लिए पर्यावरण शुद्धि व स्वच्छता का संदेश देकर शुद्ध पर्यावरण की ओर जनजागरण करने का प्रयास किया है।


महानगरों में दिन-रात दौड़ते हुए यातायात साधनों से मनुष्य का शारीरिक व मानसिक ह्रास हो गया है। इस कारण वहाँ रहना मनुष्यों के लिए दुष्कर हो गया है। काले धुएँ को छोड़ती असंख्य गाड़ियों के कोलाहलपूर्ण मार्गों पर चलना भी कठिन है। प्रदूषित वातावरण के कारण वायुमण्डल, जल, भोज्य पदार्थ और समस्त धरातल सब कुछ अति दूषित हो गया है। अतः प्रदूषण को दूर कर पर्यावरण को शुद्ध करना चाहिए। प्रदूषित पर्यावरण से दु:खी कवि की इच्छा है कि कुछ समय के लिए महानगर से दूर प्रकृति की गोद में, एकान्त वन में वास करें, जहाँ पवित्र व शुद्ध जलपूर्ण नदियाँ, झरने और जलाशय हैं। जहाँ पक्षियों के मधुर कलरव से वन प्रदेश गुञ्जित हैं। चकाचौंध पूर्ण इस वातावरण से दूर प्राकृतिक दृश्यों को निहारते हुए जीवन को रसमय करना चाहता है।

कवि की आशंका है कि इस प्रदूषित पर्यावरण में हमारी संस्कृति, प्राकृतिक छटा, पाषाणी सभ्यता लुप्त न हो जाए। सुखमय मानव जीवन की कामना करता हुआ कवि पर्यावरण को शुद्ध व सुरक्षित करने की प्रार्थना करता है।