02.बगीचे का घोंघा- Chapter Notes

परिचय

इस पाठ में हम एक घोंघे की कहानी पढ़ेंगे, जो एक छोटे से बगीचे में रहता है। यह घोंघा अपने बगीचे के बाहर की दुनिया देखना चाहता है। यह कहानी हमें बताती है कि नई चीजें देखने और सीखने का साहस कैसे हमें नई दुनिया से परिचित करा सकता है। यह कहानी घोंघे के रोमांच और उसकी खोज के बारे में है।

प्रमुख बातें

  • घोंघा एक छोटे बगीचे में रहता है और उसे बगीचे का हर कोना पता है।
  • उसे बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते थे।
  • घोंघा बाहर की दुनिया के बारे में उत्सुक था और दीवार के छेद से बाहर निकलता है।
  • बाहर की दुनिया में उसे चींटियाँ, गिलहरी, और बड़े पेड़ जैसी नई चीजें दिखती हैं।
  • घोंघा दुनिया को मजेदार और अद्भुत पाता था और वहाँ रहने का फैसला करता है।

कहानी का सारांश

कहानी शुरू होती है एक छोटे और सुंदर बगीचे में, जहाँ एक घोंघा रहता है। उसने अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिताया है। बगीचा इतना छोटा है कि घोंघे को एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते हैं। वह बगीचे का हर कोना जानता है, लेकिन उसे लगता है कि बगीचे के बाहर की दुनिया कैसी होगी। उसकी माँ उसे बाहर जाने से मना करती थी, क्योंकि वह दुनिया उनकी दुनिया से बहुत अलग है। फिर भी, घोंघा साहस करता है और बाहर जाने का फैसला करता है।

घोंघा अपना सामान अपने शंख में बाँधता है और बगीचे की दीवार में एक छेद से बाहर निकलता है। बाहर निकलते ही वह एक बड़े मैदान को देखकर चकित हो जाता है। यह मैदान बच्चों के खेलने की जगह है, लेकिन घोंघे को यह बहुत बड़ा लगता है। वह कहता है, “वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है!”

जब एक सूखा पत्ता उस पर गिरता है, तो वह डर जाता है और चिल्लाता है, “उई!” लेकिन फिर हँसने लगता है और कहता है, “वाह! दुनिया तो कितनी मजेदार है!” वह उस सूखी-भूरी पत्ती के नीचे से बाहर निकल गया। थोड़ा आगे एक बड़ा-सा पत्थर पड़ा हुआ था। घोंघे को लगा यह कोई पहाड़ होगा। वह झट से उस पर चढ़ गया और देखने लगा। घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार लाल चींटियों को देखा। वे अपने लंबे-पतले पैरों से इधर-उधर आ-जा रहे थे। उसने देखा कि एक गिलहरी फुदक-फुदककर एक पेड़ पर चढ़ गई। उसने देखा कि एक गेंद लुड़कती हुई जा रही है और एक कुत्ता उसके पीछे भाग रहा है। “वाह! दुनिया में सब कुछ कितनी तेजी से चलता है,” घोंघे ने कहा। “बगीचे में तो सब कुछ धीरे-धीरे चलता था।”

घोंघा एक बहुत लंबा खजूर का पेड़ और एक बड़ा बड़ का पेड़ देखता है, जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह जाती हैं, और वह कहता है, “वाह, सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है!” अंत में, घोंघा फैसला करता है कि वह इस नई और रोमांचक दुनिया में ही रहेगा।

कहानी से शिक्षा

  • हिम्मत: नई चीजें देखने के लिए हिम्मत करनी चाहिए, जैसे घोंघे ने बगीचे के बाहर जाने की हिम्मत की।
  • खोज: दुनिया में बहुत कुछ नया और मजेदार है, जिसे हम खोज सकते हैं।
  • खुशी: छोटी-छोटी चीजें, जैसे सूखा पत्ता या चींटियों का चलना, भी हमें खुश कर सकती हैं।
  • सीखना: नई जगहों और चीजों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

शब्दार्थ

  • घोंघा: एक छोटा जीव जो अपने शंख में रहता है और धीरे-धीरे चलता है।
  • बगीचा: फूलों, पौधों और हरियाली वाली छोटी जगह।
  • छोर: किसी जगह का आखिरी हिस्सा।
  • छेद: दीवार या किसी चीज में बना छोटा सुराख।
  • आश्चर्य: हैरानी या चौंकने की बात।
  • अद्भुत: बहुत ही सुंदर और आश्चर्यजनक।
  • मैदान: खुली और बड़ी जगह।
  • सूखा पत्ता: पेड़ से गिरा हुआ सूखा पत्ता।
  • खजूर का पेड़: एक लंबा पेड़ जिसके फल खजूर कहलाते हैं।
  • बड़ का पेड़: बहुत बड़ा और चौड़ा पेड़।