कहानी का सारांश
- एक छोटी बच्ची, जिसका नाम नहीं बताया गया है, अपने दादाजी के साथ रहती है। वह अपने दादाजी से बहुत प्यार करती है और उन्हें “थाथा” बुलाती है।
- थाथा और बच्ची हमेशा साथ रहते हैं। वे साथ में खेलते हैं, बाहर जाते हैं, और कहानियां सुनते हैं।
- एक दिन, थाथा और बच्ची समुद्र तट पर जाते हैं। वे समुद्र में तैरते हैं, रेत में खेलते हैं, और मछलियों को देखते हैं।
- रात में, वे घर लौट आते हैं। थाथा बच्ची को अपनी गोद में लेकर उसे सोने के लिए कहते हैं। बच्ची थाथा से बहुत प्यार करती है और वह प्रार्थना करती है कि वह एक दिन उनके जैसी बन जाए।

कहानी का अर्थ
यह कहानी एक बच्ची और उसके दादाजी ‘थाथा’ के बीच के प्यारे और भावनात्मक रिश्ते को दर्शाती है। बच्ची अपने दादाजी के साथ रहती है और उन्हें प्यार से ‘थाथा’ कहती है। वे दोनों मिलकर कई मज़ेदार और कल्पनाशील गतिविधियाँ करते हैं — जैसे सिनेमा देखने जाना, चाँद पर जाने की बात करना, बारिश में भीगना, समुद्र तट पर खेलना, मछलियों से बातें करना और दौड़ लगाना।

दादाजी की मुस्कान, उनकी गोदी, और उनकी जादुई किताबें बच्ची के लिए किसी जादू से कम नहीं हैं। हर दिन उनके साथ एक नई कल्पना और अनुभव से भरा होता है। अंत में, बच्ची दादाजी से इतना प्रेम करती है कि वह प्रार्थना करती है कि एक दिन वह भी उनके जैसी बन सके।
शब्दार्थ
- थाथा: दादाजी
- चाँद: पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह
- समुद्र तट: समुद्र के किनारे का क्षेत्र
- ऊँची-नीची लहरें: समुद्र में उठने वाली लहरें
- चाँद हमारे साथ-साथ चलता है: चाँद हमेशा पृथ्वी के चारों ओर घूमता रहता है
- हवाएँ सीटी बजाती हैं: हवा जब तेजी से चलती है तो वह एक सीटी जैसी आवाज करती है
- मछलियाँ: पानी में रहने वाले जीव
- कलाबाज़ियाँ: एक प्रकार का खाद्य पदार्थ
- जादूई किताब: एक ऐसी किताब जिसमें जादू के बारे में लिखा होता है
- जादूगर: एक ऐसा व्यक्ति जो जादू कर सकता है