07.नकली हीरे- पाठ्यपुस्तक समाधान

(पृष्ठ 81)

प्रश्न 1: राजा ने अपने पुत्र का सलाहकार किसे और क्यों चुना?
उत्तर: राजा ने एक नवयुवक दरबारी को अपने पुत्र का सलाहकार चुना, क्योंकि उसने सच्चा और ईमानदार उत्तर दिया था, जबकि बाकी दरबारियों ने झूठे उत्तर दिए थे।

प्रश्न 2: दरबारियों ने राजा के उधार के जौहरी से तुरंत जाँच करवाई। इससे उनके बारे में कौन-कौन सी बातें पता चलती हैं?
उत्तर:
 दरबारियों ने जौहरी से जाँच करवाकर यह पता किया कि सभी हीरे नकली थे, जो उन्होंने राजा से प्राप्त किए थे। इससे यह बात सामने आई कि उन्होंने झूठा उत्तर दिया था।

प्रश्न 3: नवयुवक दरबारी राजा का प्रश्न सुनकर भी चुपचाप क्यों खड़ा था?
उत्तर:
 नवयुवक दरबारी चुपचाप इसलिए खड़ा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि राजा को खुश करने के लिए वह झूठा उत्तर दे। उसने सच को कहा, जो दूसरों से अलग था।

प्रश्न 4: चित्रकथा के अनुसार कानपुर का राजा बहुत बुद्धिमान था क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तरः हाँ, मैं सहमत हूँ कि राजा बुद्धिमान था। क्योंकि उसने दरबारियों का सच जानने के लिए एक ऐसा प्रश्न पूछा, जिससे उनकी ईमानदारी और सच्चाई का परीक्षण किया जा सके। और फिर सही व्यक्ति को अपने पुत्र का सलाहकार चुना।

प्रश्न 5: जब राजा ने अपने पुत्र के सलाहकार की घोषणा की, तब सभी दरबारियों को कैसा लगा होगा? उन्होंने क्या-क्या सोचा होगा?
उत्तर:
 जब राजा ने सही सलाहकार की घोषणा की, तो दरबारियों को बहुत आश्चर्य हुआ होगा और वे शायद शर्मिंदा भी हुए होंगे। उन्होंने सोचा होगा कि अगर वे सच बोलते, तो उन्हें असली हीरे मिलते और वे भी सही सलाहकार बन सकते थे।

सोचिए और लिखिए

(पृष्ठ 81-82)

प्रश्न 1: चित्रकथा  के दिए गए अंश को ध्यान से देखिए —

इस अंश के बारे में अपने समूह में चर्चा कीजिए। अब नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए –

  • चित्रकथा के इस अंश में कुल कितने चित्र-खंड हैं? 

उत्तर: चित्रकथा के इस अंश में कुल तीन चित्र-खंड हैं। 

  • यहाँ मुख्य पात्र कौन-कौन हैं? 

उत्तर: यहाँ मुख्य पात्र राजा और दरबारी हैं।

  • बीच वाले चित्र-खंड में क्या हो रहा है? 

उत्तर: बीच वाले चित्र-खंड में राजा के हाथ में हीरा है

  • यहाँ केवल चित्रों को देखकर कौन-कौन सी बातें पता चल रही हैं?

उत्तर: चित्रों से यह पता चल रहा है कि राजा ने दरबारियों को हीरे दिए हैं और एक दरबारी चुप है, जो राजा से उत्तर देने में हिचकिचा रहा है।

प्रश्न 2: इस चित्रकथा का नाम “नकली हीरे” क्यों रखा गया है? आप भी इस चित्रकथा का कोई उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर: इस चित्रकथा का नाम ‘नकली हीरे’ इसलिए रखा गया है क्योंकि राजा ने उन दरबारियों को नकली हीरे दिए, जिन्होंने झूठ बोलकर राजा को प्रसन्न करने की कोशिश की थी। जब दरबारियों ने झूठे उत्तर दिए, तो राजा ने उनका इम्तिहान लिया और उन्हें नकली हीरे दिए।
एक उपयुक्त शीर्षक हो सकता है: “सच का इनाम”।

प्रश्न 3: राजा ने नकली हीरों का पुरस्कार किन्हें और क्यों दिया?
उत्तर: राजा ने नकली हीरे उन दरबारियों को दिए जिन्होंने झूठ बोला और राजा को खुश करने के लिए बढ़ा-चढ़ा कर उत्तर दिए। राजा ने यह दिखाने के लिए कि झूठ का कोई मूल्य नहीं है, उन्हें नकली हीरे दिए।

प्रश्न 4: राजा ने एक को छोड़कर अन्य सभी दरबारियों को नकली हीरे क्यों दिए? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर: 
राजा ने एक को छोड़कर बाकी सभी दरबारियों को नकली हीरे दिए क्योंकि उन्होंने झूठे उत्तर दिए थे। राजा चाहता था कि सभी दरबारी सच्चाई और ईमानदारी से काम करें, इसलिए उन्हे नकली हीरे देकर यह सिखाया कि झूठ बोलने पर सच्ची सफलता नहीं मिलती। केवल एक दरबारी ने सच्चा उत्तर दिया और उसे असली हीरा मिला।

शब्दों से मित्रता

(पृष्ठ 82)

प्रश्न: नीचे दिए गए शब्दों को उनके उपयुक्त अर्थों के साथ रेखाएँ खींचकर मिलाइए —
उत्तर:हमारी समझ

(पृष्ठ 81-83)

इन प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर पर सूरज का चित्र () बनाइए—

उत्तर:

भाषा की बात

(पृष्ठ 83-85)

प्रश्न 1: ‘काननपुर के बुद्धिमान और वृद्ध राजा का एक बेटा था’
‘काननपुर के बुद्धिमान और वृद्ध राजा का एक ही बेटा था’

(क) इन दोनों पंक्तियों को ध्यान से देखिए। दोनों में क्या अंतर है? 
उत्तर: पहली पंक्ति “काननपुर के बुद्धिमान और वृद्ध राजा का एक बेटा था।” में ‘एक’ शब्द से यह संकेत मिलता है कि राजा का केवल एक बेटा था, लेकिन इसमें किसी विशेषता की ओर संकेत नहीं किया गया है।
दूसरी पंक्ति “काननपुर के बुद्धिमान और वृद्ध राजा का एक ही बेटा था।” में ‘ही’ शब्द यह स्पष्ट करता है कि राजा का बेटा केवल एक ही था, और अन्य कोई बेटा नहीं था। ‘ही’ शब्द से यह स्थिति की विशेषता पर बल दिया गया है।

(ख) आप भी कक्षा में पाँच-पाँच के समूह बनाकर ‘ही’ शब्द वाले चार वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:  ‘ही’ शब्द वाले चार वाक्यः

  1. वह ही मेरी मदद कर सकता है।
  2. तुम्हारा नाम ही मेरी किताब में लिखा हुआ है।
  3. यह रास्ता ही सही है।
  4. मैंने ही उस किताब को पढ़ा है।

प्रश्न 2: नीचे दिए गए वाक्यों में से जो आपको अपने लिए सबसे उपयुक्त लगते हैं, उनके सामने सही का चिह्न (✓) लगाइए—

उत्तर:


प्रश्न 3: अब ऊपर दी गई सूची में से अपनी मनभावन गतिविधि को चुनकर उस पर एक अनुच्छेद लिखिए। आप एक से अधिक गतिविधियाँ भी चुन सकते हैं।
उत्तर: मैं एक बहुत ही उत्साही और जिज्ञासु व्यक्ति हूँ। मुझे कहानियाँ और कविताएँ पढ़ना बहुत पसंद है क्योंकि इनसे मेरी सोच और कल्पना की शक्ति बढ़ती है। मुझे रोचक कहानियाँ सुनाना और लिखना भी अच्छा लगता है, क्योंकि इससे मैं अपनी भावनाओं और विचारों को शब्दों के माध्यम से व्यक्त कर सकता हूँ।
साथ ही, मुझे घूमने-फिरने और खेलने का भी बहुत शौक है। जब मैं बाहर जाता हूँ, तो मुझे नई जगहों और उनके रहन-सहन को देखकर बहुत खुशी मिलती है। मुझे चित्रकारी करना भी अच्छा लगता है क्योंकि रंगों से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मुझे बहुत संतुष्टि देता है।
संगीत सुनने का भी मुझे बहुत शौक है, क्योंकि संगीत मेरी आत्मा को शांति और आनंद देता है। इसके अलावा, मुझे गीत गाना या वाद्ययंत्र बजाना भी बहुत अच्छा लगता है क्योंकि यह मेरी मानसिक स्थिति को बेहतर बनाता है और मुझे खुशी मिलती है।
अंत में, मुझे दूसरों के साथ काम करना और मित्र बनाना बहुत पसंद है, क्योंकि इससे मुझे समाज में घुलने-मिलने का अवसर मिलता है। मुझे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानने का भी बहुत शौक है, क्योंकि ये जीवन के सुंदर पहलुओं को समझने में मदद करते हैं।
इन सभी गतिविधियों के माध्यम से मैं न केवल अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत का ध्यान रखता हूँ, बल्कि नए अनुभव भी प्राप्त करता हूँ, जो जीवन को और भी रोचक बनाते हैं।

प्रश्न 4: “सब दरबारियों ने बारी-बारी से यही उत्तर दिया”
उपयुक्त पंक्ति में ‘बारी’ शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। आप भी नीचे दिए ऐसे शब्दों से वाक्य बनाइए—

  • धीरे-धीरे – …………………………………………………………………………………………..
  • भिन्न-भिन्न – …………………………………………………………………………………………..
  • साथ-साथ – …………………………………………………………………………………………..
  • बार-बार – …………………………………………………………………………………………..

उत्तर:

  • धीरे-धीरे – वह धीरे-धीरे अपनी किताबें पढ़ रहा था, ताकि ध्यान से समझ सके।
  • भिन्न-भिन्न – हमारे स्कूल में भिन्न-भिन्न प्रकार की खेल प्रतियोगिताएँ होती हैं।
  • साथ-साथ – वे दोनों साथ-साथ पढ़ाई करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।
  • बार-बार – उसने बार-बार अपनी गलतियाँ सुधारीं और अब वह सही तरीके से काम कर रहा है।

प्रश्न 5: “कृपा करके स्पष्ट उत्तर दीजिएगा!” कृपा जैसे शब्दों का प्रयोग विनम्रता दर्शाने के लिए किया जाता है। नीचे दिए गए ऐसे ही शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए और अपने समूह में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए उनका प्रयोग कीजिए—  

  • कृपया – ……………………………………………………..  
  • धन्यवाद – ……………………………………………………..  
  • क्षमा कीजिए –  ……………………………………………………..  
  • आपका आभार – ……………………………………………………..  

उत्तर: 

  • कृपया – कृपया मुझे अपनी किताब दिखाइए।
  • धन्यवाद – मुझे समय देने के लिए धन्यवाद।
  • क्षमा कीजिए – क्षमा कीजिए, मैं थोड़ी देर से आ पाया।
  • आपका आभार – आपके सहायता के लिए मेरा आभार।

पाठ की विशेषताएँ

(पृष्ठ 85)

नीचे इस चित्रकथा की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं। आप भी इस पाठ्यपुस्तक में से किसी कहानी अथवा कविता की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: 
आपकी चित्रकथा

(पृष्ठ 86)

नीचे दी गई चित्रकथा के संवाद लिखिए। इसके लिए आप अपनी मातृभाषा का प्रयोग भी कर सकते हैं।
उत्तर: 

खोजिए और आनंद लीजिए

(पृष्ठ 87-88)

प्रश्न 1: नीचे दिए गए एक जैसे चित्रों में पाँच अंतर खोजिए –
उत्तर: 

प्रश्न 2: नीचे दिए गए चित्र में पाठ में आए पाँच शब्द छिपे हैं। खोजकर लिखिए —
उत्तर: इस चित्र में छिपे पाँच शब्द हैं, जो पाठ “नकली हीरे” से जुड़े हैं। वे शब्द हैं:

  • ईमानदारी (अलमारी में किताबों के बीच लिखा है)
  • हीरा (दीवार पर टंगी तस्वीर में लिखा है)
  • चुप (बिल्ली के तन पर)
  • राजा (टेबल पर पड़े लेंप पर)
  • जाँच (तस्वीर में दिखाई गए हाथ पर)

पुस्तकालय से

(पृष्ठ 88)

प्रश्न 1:  क्या आपने कोई चित्रकथा पढ़ी है? यदि हाँ तो अपने सहपाठियों को उसके विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने “पंचतंत्र की कहानियाँ” नाम की चित्रकथा पढ़ी है। इसमें जानवरों की मजेदार और शिक्षाप्रद कहानियाँ होती हैं। हर कहानी से हमें कोई न कोई अच्छी सीख मिलती है, जैसे दोस्ती की ताकत, समझदारी से काम लेना और सच्चाई का महत्व। चित्रों के माध्यम से कहानी और भी रोचक लगती है।

प्रश्न 2: अपने विद्यालय के पुस्तकालय में से कोई अन्य चित्रकथा ढूँढिए और अपने सहपाठियों के साथ पढ़िए।
उत्तर: मैंने विद्यालय के पुस्तकालय से “अकबर-बीरबल की कहानियाँ” नामक चित्रकथा ढूंढी। इसमें बीरबल की चतुराई और अकबर के सवाल-जवाब के किस्से चित्रों के साथ बहुत सुंदर ढंग से दिखाए गए हैं। मैं इसे अपने सहपाठियों के साथ पढ़ा और सबको बहुत आनंद आया।