परिचय
इस पाठ में हम काननपुर के एक बुद्धिमान और वृद्ध राजा की कहानी पढ़ेंगे। राजा अपने बेटे के लिए एक ईमानदार सलाहकार चुनना चाहता है। वह अपने दरबारियों की परीक्षा लेता है और उन्हें नकली हीरे देता है। कहानी हमें सच्चाई और ईमानदारी की महत्ता सिखाती है। यह एक रोचक चित्रकथा है जो हमें सोचने और समझने के लिए प्रेरित करती है।

प्रमुख बातें
- काननपुर का राजा बुद्धिमान और वृद्ध है, और उसका एक ही बेटा है।
- राजा अपने बेटे के लिए एक सलाहकार चुनना चाहता है।
- राजा दरबारियों से पूछता है कि क्या वह बुद्धिमान और ईमानदार राजा है।
- सभी दरबारी राजा की तारीफ करते हैं, सिवाय एक युवा दरबारी के।
- राजा सभी को एक-एक हीरा देता है, लेकिन एक दरबारी चुपचाप खड़ा रहता है।
- बाद में पता चलता है कि सारे हीरे नकली थे, सिवाय उस युवा दरबारी को दिए गए हीरे के।
- राजा उस युवा दरबारी को अपने बेटे का सलाहकार चुनता है।
कहानी का सारांश
कहानी की शुरुआत काननपुर के एक बुद्धिमान और वृद्ध राजा से होती है, जिसका एक ही बेटा है। राजा जानता है कि वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेगा, इसलिए वह अपने बेटे के लिए एक ईमानदार और समझदार सलाहकार चुनना चाहता है। इसके लिए वह अपने दरबारियों की परीक्षा लेने का निर्णय करता है।
एक सुबह, राजा सभी दरबारियों को बुलाता है और उनसे एक सवाल पूछता है: “क्या मैं बुद्धिमान और ईमानदार राजा हूँ?” सभी दरबारी राजा को खुश करने के लिए एक जैसे जवाब देते हैं कि वह दुनिया के सबसे बुद्धिमान और ईमानदार राजा हैं। राजा प्रत्येक दरबारी को एक-एक हीरा देता है, और वे खुशी-खुशी दरबार से चले जाते हैं।

लेकिन एक युवा दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ा रहता है। जब राजा उससे उसका उत्तर पूछता है, तो वह कहता है कि राजा निश्चित रूप से बुद्धिमान और ईमानदार हैं, लेकिन पहले भी उनसे बेहतर राजा हो चुके हैं। यह उत्तर सुनकर राजा प्रसन्न होता है और उसे भी एक हीरा देता है।

अगली सुबह, दरबारी वापस आते हैं और शिकायत करते हैं कि उनके हीरे नकली हैं। जब उन्होंने बाजार में जाकर हीरों की जांच करवाई, तो उन्हें असलियत का पता चला। राजा समझाता है कि उसने जानबूझकर नकली हीरे दिए थे, ताकि वह दरबारियों की सच्चाई परख सके। सभी दरबारियों ने चापलूसी भरे झूठे उत्तर दिए थे, इसलिए उन्हें नकली हीरे मिले। केवल युवा दरबारी ने सच्चा और निर्भीक उत्तर दिया था, इसलिए उसे असली हीरा मिला। अंत में राजा उसी को अपने बेटे का सलाहकार चुनता है।

कहानी से शिक्षा
- ईमानदारी: हमें हमेशा सच बोलना चाहिए, भले ही वह सुनने में कठिन हो।
- साहस: सच बोलने के लिए हिम्मत चाहिए, जैसे युवा दरबारी ने दिखाया।
- बुद्धिमानी: सही निर्णय लेने के लिए समझदारी जरूरी है, जैसा राजा ने किया।
- विश्वास: सच्चाई और ईमानदारी से ही विश्वास जीता जा सकता है।
शब्दार्थ
- बुद्धिमान: समझदार, जो सही निर्णय ले सके।
- वृद्ध: उम्र में बड़ा, बूढ़ा।
- दरबारी: राजा के दरबार में काम करने वाले लोग।
- सलाहकार: जो सलाह देता है।
- ईमानदार: जो सच बोलता हो और सही काम करता हो।
- नकली: जो असली न हो, बनावटी।
- हीरा: एक कीमती पत्थर।
- प्रसन्न: खुश, संतुष्ट।
- जौहरी: हीरे-जवाहरात की जाँच करने वाला।
- विश्वसनीय: जिस पर भरोसा किया जा सके।