07. मित्र को पत्र – पाठ का सार

कहानी का परिचय

यह कहानी एक पत्र के रूप में है, जिसे रूपम नाम का बच्चा अपने मित्र अभिषेक को लिखता है। इसमें वह अपनी गर्मी की छुट्टियों की यात्रा के बारे में बताता है।

कहानी का सारांश

रूपम ने अपने दोस्त अभिषेक को नमस्ते कहा और पूछा कि वह और उसका परिवार ठीक-ठाक है या नहीं। रूपम ने लिखा कि वह गर्मी की छुट्टियाँ मनाने अपने नाना-नानी के घर गुवाहाटी आया है।

गुवाहाटी असम का एक बड़ा और सुंदर शहर है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा है। यह नदी बहुत चौड़ी है और इसमें माजुली नाम का एक द्वीप स्थित है। माजुली भारत का सबसे बड़ा नदी में बना द्वीप है।

माजुली में रूपम ने एक मठ देखा, जहाँ लोग भगवान की पूजा करते हैं। वहाँ उसने सत्रिया नृत्य भी देखा, जो असम के प्रसिद्ध नृत्यों में से एक है। रूपम ने कामाख्या मंदिर भी देखा, जो एक पर्वत पर बना है। वहाँ बहुत से लोग पूजा करने आते हैं। वह उमानंद मंदिर भी गया, जहाँ पहुँचने के लिए नाव में बैठना और थोड़ा पैदल चलना पड़ता है।

चलते समय नानी ने रूपम को बताया कि खेलना बहुत जरूरी है। खेलने से शरीर स्वस्थ रहता है और पढ़ाई भी अच्छे से होती है। रूपम ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ खो-खो, पिट्ठू, क्रिकेट और फुटबॉल खेलता है।

खेल की बात करते ही रूपम को अभिषेक की याद आ गई। उसने लिखा कि वह जल्दी लौटेगा और उसे अपने सारे अनुभव बताएगा। अंत में रूपम ने सभी बड़ों को प्रणाम किया।

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि छुट्टियाँ केवल आराम करने के लिए नहीं होतीं, बल्कि नई जगहों को देखने और वहाँ की चीज़ों को जानने का अच्छा समय भी होती हैं। यात्रा करने से हमारा ज्ञान बढ़ता है और हम नए-नए अनुभव हासिल करते हैं। इस कहानी से यह भी सीख मिलती है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि खेलों से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और मन भी खुश रहता है। साथ ही हमें अपने दोस्तों और परिवार के साथ अपने अनुभव बाँटने चाहिए, जिससे हमारे रिश्ते और भी मजबूत होते हैं।

शब्दार्थ

  • सकुशल: ठीक-ठाक, सुरक्षित
  • महानगर: बड़ा शहर
  • द्वीप: चारों ओर पानी से घिरी ज़मीन
  • विश्वप्रसिद्ध: पूरी दुनिया में प्रसिद्ध
  • मठ: साधुओं का पूजा-स्थान
  • श्रद्धालु: भगवान को मानने वाले लोग
  • दर्शन: मंदिर जाकर भगवान को देखना
  • आवश्यक: ज़रूरी
  • सत्रिया नृत्य: असम का पारंपरिक नृत्य