परिचय
इस पाठ में हम केरल के प्रसिद्ध त्योहार ओणम के बारे में पढ़ेंगे। यह त्योहार राजा महाबली की याद में मनाया जाता है, जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करते थे। ओणम के दौरान लोग फूलों की रंगोली बनाते हैं, स्वादिष्ट भोजन खाते हैं, नाच-गाना करते हैं और नौका-दौड़ का आनंद लेते हैं। यह कहानी हमें केरल की सुंदर प्रकृति, संस्कृति और ओणम की खुशियों के बारे में बताती है।

प्रमुख बातें
- ओणम केरल का प्रमुख त्योहार है, जो श्रावण महीने में मनाया जाता है।
- यह त्योहार राजा महाबली की याद में मनाया जाता है, जो अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते थे।
- बच्चे सुबह-सुबह फूल इकट्ठा करते हैं और आँगन में पक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाते हैं।
- लोग नए कपड़े पहनते हैं, विष्णु और महाबली की मूर्तियाँ सजाते हैं, और स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं।
- ओणम में नौका-दौड़, कथकली नृत्य, और खेल जैसे तलपंतुकली और कैकोट्टिकली खेले जाते हैं।
- एक लोकगीत में महाबली के शासन की अच्छाइयों का बखान किया जाता है।
- तिरुवोणम के तीसरे दिन महाबली के पाताल लोक लौटने के बाद आँगन की कलाकृतियाँ हटा ली जाती हैं।
कहानी का सारांश
कहानी की शुरुआत केरल के खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों से होती है। वर्षा के बादल छँटते हैं, ठंडी हवाएँ बहती हैं, और सूरज की रोशनी में समुद्र की लहरें चमकती हैं। नारियल के पेड़ लहलहाते हैं, और रंग-बिरंगी तितलियाँ फूलों पर मँडराती हैं। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ओणम के स्वागत की तैयारी कर रही है। किसान अपनी फसल काट चुके हैं, और खलिहान धान से भरे हैं।

ओणम का त्योहार एक पौराणिक कथा से जुड़ा है। प्राचीन काल में महाबली नाम के एक दयालु राजा थे, जिनका राज्य पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल लोक तक फैला था। उनकी प्रजा बहुत खुश थी। एक दिन महाविष्णु ने वामन का रूप धारण करके महाबली से तीन पग भूमि माँगी। महाबली ने तुरंत हाँ कर दी। महाविष्णु ने अपना वामन रूप छोड़कर विशाल त्रिविक्रम रूप लिया और दो पगों में स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल नाप लिया। तीसरे पग के लिए जगह न होने पर महाबली ने अपना सिर झुका दिया। महाविष्णु इस व्यवहार से खुश हुए और महाबली को पाताल लोक का राजा बना दिया। महाबली ने एक इच्छा जताई कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आएँ। तब से ओणम का त्योहार महाबली के स्वागत में मनाया जाता है।

श्रावण महीने के श्रावण नक्षत्र में ओणम शुरू होता है। सुबह-सुबह बच्चे नहा-धोकर लाल, पीले, सफेद फूल इकट्ठा करते हैं और आँगन में गोबर से लीपकर पक्कलम बनाते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं और विष्णु व महाबली की मूर्तियों को चावल के आटे और सफेद द्रोण-पुष्पों से सजाते हैं। ऊँचे दीपदान जलाए जाते हैं। ओणम का भोजन बहुत स्वादिष्ट होता है, जिसमें चावल, सब्जियाँ, खीर, पापड़ और फल शामिल होते हैं। लोग प्रीतिभोज का आयोजन करते हैं और फिर खेल-कूद, कविता, संगीत और नृत्य में हिस्सा लेते हैं।

केरल के पुरुष तलपंतुकली और किलिंतट्टुकली जैसे खेल खेलते हैं, जबकि महिलाएँ और लड़कियाँ तुम्बितुल्लल, कैकोट्टिकली और झूला झूलने का आनंद लेती हैं। आरन्मुला में नौका-दौड़ होती है, जहाँ हजारों लोग नावों की प्रतियोगिता देखने आते हैं। कथकली नृत्य भी ओणम का खास आकर्षण है। एक लोकगीत में महाबली के शासन की तारीफ की जाती है, जिसमें बताया जाता है कि उनके राज में कोई दुख, धोखा या छल-कपट नहीं था।

तिरुवोणम के तीसरे दिन लोग मानते हैं कि महाबली पाताल लोक लौट जाते हैं। इसलिए आँगन की कलाकृतियाँ हटा ली जाती हैं। केरलवासी ओणम की मधुर यादों को संजोकर अगले ओणम की प्रतीक्षा करते हैं और अपने काम में लग जाते हैं।
कहानी से शिक्षा
- एकता: ओणम हमें सिखाता है कि त्योहार मिल-जुलकर मनाने से खुशी बढ़ती है।
- प्रेम और दया: महाबली की तरह हमें अपनी प्रजा या लोगों से प्यार करना चाहिए।
- उत्साह: हमें ओणम की तरह हर पल को उत्साह और खुशी से जीना चाहिए।
- प्रकृति का सम्मान: केरल की सुंदर प्रकृति हमें सिखाती है कि हमें प्रकृति की देखभाल करनी चाहिए।
- सच्चाई और नम्रता: महाबली की नम्रता हमें सिखाती है कि सच्चाई और अच्छे व्यवहार से सम्मान मिलता है।
शब्दार्थ
- ओणम: केरल का प्रमुख त्योहार, जो महाबली के स्वागत में मनाया जाता है।
- पक्कलम: फूलों से बनी रंगोली।
- महाबली: एक दयालु राजा, जिनकी याद में ओणम मनाया जाता है।
- वामन: भगवान विष्णु का छोटा रूप।
- त्रिविक्रम: विष्णु का विशाल रूप।
- पाताल लोक: धरती के नीचे का संसार।
- नौका-दौड़: नावों की रेस, जो आरन्मुला में होती है।
- कथकली: केरल का प्रसिद्ध नृत्य।
- प्रीतिभोज: सभी के लिए बनाया गया बड़ा भोजन।
- द्रोण-पुष्प: छोटे सफेद फूल, जो सजावट के लिए इस्तेमाल होते हैं।
- तलपंतुकली: नारियल के पत्तों से बनी गेंद का खेल।
- कैकोट्टिकली: महिलाओं का एक नृत्य और खेल।