1. स्वदेश – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-

  • सामाजिकता से
  • संवेदनहीनता से *
  • कठोरता से *
  • नैतिकता से 

उत्तर: संवेदनहीनता से, कठोरता से
इस पंक्ति में हृदय को पत्थर कहने का अर्थ है कि उसमें कोई भावना, संवेदना या प्यार नहीं है। ऐसा दिल जो अपने देश के लिए कुछ महसूस नहीं करता, वह सिर्फ एक कठोर पत्थर जैसा है।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

  • देश की प्रगति
  • देश के प्रति प्रेम * 
  • देश की सुरक्षा
  • देश की स्वतंत्रता

उत्तर: देश के प्रति प्रेम
कविता “स्वदेश” में कवि व्यक्ति के देशप्रेम, समर्पण, और कर्तव्यनिष्ठा को सबसे बड़ा मूल्य मानता है। वह कहता है कि जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम नहीं है, वह पत्थर के समान है। कवि ऐसे जीवन को व्यर्थ बताता है जिसमें देश के लिए कोई भावना, जोश या बलिदान का जज्बा न हो। वह व्यक्ति जो अपने देश के उत्थान और उद्धार के लिए कुछ नहीं करता, उसकी कोई सार्थकता नहीं है।

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी”- इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

  • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
  • देश की शासन व्यवस्था के लिए
  • देश के समस्त नागरिकों के लिए *
  • देश के सभी प्राणियों के लिए

उत्तर: देश के समस्त नागरिकों के लिए
पंक्ति “हम हैं जिसके राजा-रानी” में कवि देश के प्रत्येक नागरिक को संबोधित करता है। यहाँ ‘हम’ का तात्पर्य देशवासियों से है — वे लोग जो इस राष्ट्र के भाग्यविधाता हैं, जो देश के स्वामी और संरक्षक हैं। लोकतंत्र की भावना के अनुसार, हर नागरिक को देश की सत्ता में बराबरी का अधिकार होता है।
इसलिए, कवि यह भाव प्रकट करता है कि हर नागरिक अपने देश का राजा या रानी है, अर्थात देश का स्वाभिमानी, जिम्मेदार और सक्रिय हिस्सा है। यह पंक्ति राष्ट्रीय स्वाभिमान, नागरिक अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

  • जिसमें साहस की कमी है
  • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
  • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है *
  • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है

उत्तर: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
कविता “स्वदेश” का आरंभ ही इस पंक्ति से होता है: “वह हृदय नहीं है, पत्थर है — जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
यह स्पष्ट रूप से बताता है कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण नहीं है, वह भावनाशून्य है, जैसे एक निर्जीव पत्थर। कवि देशप्रेम को जीवन का सर्वोच्च भाव मानता है, और उसके बिना मनुष्य का जीवन निरर्थक और शुष्क माना गया है।
इसलिए, कविता के अनुसार देश-प्रेम रहित हृदय ही पत्थर के समान है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: 

  1. संवेदनहीनता और कठोरता से तात्पर्य है कि ऐसा हृदय दूसरों की पीड़ा या देश की चिंता नहीं करता। इसीलिए उसे “पत्थर” कहा गया है।
  2. कविता में बार-बार “स्वदेश” के लिए प्रेम, भाव, त्याग और कर्तव्य की बात की गई है, इसलिए इसका मुख्य भाव देशभक्ति ही है।
  3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति देश की जनता की गरिमा दर्शाती है, अतः ‘हम’ शब्द देश के सभी नागरिकों के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  4. कवि स्पष्ट कहते हैं- “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं”, अतः ऐसा हृदय ही पत्थर समान है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

उत्तर: 

पंक्तियों पर चर्चा

​कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में जीवन की अनित्यता को स्वीकार किया गया है। कवि कहता है कि मृत्यु निश्चित है — इसमें कोई संदेह नहीं। जैसे समय का दीपक हमेशा जलता रहता है, वैसे ही उसकी लौ में हर किसी को जलना ही है, यानी जीवन का अंत होना ही है। जैसे परवाना दीपक की लौ में जल जाता है, वैसे ही हर जीवन को अंत की ओर जाना है।
विचार: हमें मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। यह जीवन सीमित है, इसलिए इसे उद्देश्यपूर्ण और देश, समाज या मानवता के लिए समर्पित करना चाहिए।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में कवि आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना को बल देता है। वह कहता है कि हमारे पास सब कुछ है — शक्ति, साधन, साहस — तो फिर देश को स्वतंत्र और समृद्ध बनाने से कौन रोक सकता है? लेकिन यदि किसी के हृदय में देश के लिए प्रेम नहीं है, तो ऐसा हृदय पत्थर के समान है।
विचार: देश की रक्षा और प्रगति के लिए केवल शस्त्र ही नहीं, बल्कि सच्चा देशप्रेम भी जरूरी है। जब तक हृदय में देश के लिए प्रेम, त्याग और कर्तव्य की भावना नहीं होगी, तब तक कोई परिवर्तन संभव नहीं।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं ।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

उत्तर: अर्थ: यह पंक्ति एक संवेदनहीन और भावशून्य जीवन की आलोचना करती है। कवि कहता है कि जो हृदय भावनाओं से रिक्त है, जिसमें प्रेम, संवेदना और देशभक्ति का प्रवाह नहीं है — वह जीवित होकर भी निर्जीव है। ऐसा हृदय पत्थर जैसा है।
विचार: मनुष्य को भावनाओं से परिपूर्ण होना चाहिए, खासकर अपने देश के प्रति। केवल भौतिक जीवन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक, संवेदनशील और राष्ट्रप्रेम से भरा जीवन ही सच्चा जीवन है।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर: 
“हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में ‘हम’ शब्द भारत के नागरिकों के लिए प्रयोग हुआ है। कवि यह कहना चाहता है कि हम उसी देश के निवासी हैं, जो हमें सब कुछ देता है – अन्न, जल, प्रेम, ज्ञान और पहचान। इसलिए हम सब उस देश के ‘राजा-रानी’ हैं – यानी उसे सम्मान और गौरव के साथ अपना समझने वाले स्वाभिमानी नागरिक।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
 ‘संसार-संग चलना’ का अर्थ है – समय, समाज और दुनिया की गति के साथ तालमेल बनाए रखना, प्रगति और परिवर्तन के साथ चलना। जो व्यक्ति या राष्ट्र समय के साथ नहीं चलता, वह पिछड़ जाता है और उसकी पहचान मिट जाती है। इसलिए कवि कहता है कि जो संसार के साथ नहीं चलता, संसार उसे अपनाता नहीं और वह समाज में महत्वहीन बन जाता है।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर: 
इस पंक्ति का अर्थ है – जिस व्यक्ति का हृदय अपने देश पर प्रेम से नहीं पसीजता, जिसमें अपने देश के प्रति संवेदना नहीं है, वह इस धरती पर बोझ मात्र है। वह केवल जी रहा है, लेकिन उसका जीवन समाज या राष्ट्र के लिए कोई उपयोगी योगदान नहीं दे रहा।

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर: 
देश-प्रेम का अर्थ है – अपने देश के लिए सच्ची निष्ठा, सेवा और समर्पण का भाव रखना। इसका मतलब केवल भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मों से भी जुड़ा है – देश की रक्षा करना, उसकी उन्नति के लिए मेहनत करना, सामाजिक कुरीतियों का विरोध करना और देशवासियों के प्रति अपनत्व और सहयोग की भावना रखना।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर: इस कविता की निम्न विशेषताएँ हैं:

  • प्रेरणात्मक शैली: कविता पाठकों में देश-प्रेम, आत्मबल, और साहस की भावना जाग्रत करती है।
  • सशक्त भाषा और दोहराव: “वह हृदय नहीं है, पत्थर है…” जैसी पंक्तियाँ बार-बार आकर गहरा प्रभाव डालती हैं।
  • भावात्मकता: पूरी कविता में देश के प्रति भावुकता और गहरा जुड़ाव दिखाया गया है।
  • सामाजिक और नैतिक संदेश: यह कविता हमें आत्मनिरीक्षण करने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती है।
  • काव्यगत सौंदर्य: कविता में अनुप्रास, रूपक और प्रतीक जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है – जैसे “काल-दीप”, “परवाना”, “रस-धार” आदि।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर: 
इस पंक्ति में ‘खजाने’ से तात्पर्य केवल धन-दौलत या सोना-चाँदी नहीं है, बल्कि भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं से है। यह देश अपने प्राकृतिक संसाधनों (जैसे – नदियाँ, पर्वत, वन), ऐतिहासिक धरोहरों, साहित्य, कला, संगीत, शिक्षा, ज्ञान और मूल्यों का खजाना है, जिसे पूरी दुनिया सराहती है।विज्ञान की किताबें

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: 
‘उगे बढ़े’ शब्द देश के नागरिकों के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह देश हमारी जन्मभूमि है, यहीं हम पले-बढ़े, यहीं का अन्न-पानी खाया। इसलिए यह देश हमारे जीवन की जड़ है – हमारी पहचान, परवरिश और संस्कृति की नींव। इसी धरती ने हमें जीवन और विकास का अवसर दिया।

(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
 यहाँ ‘पत्थर’ एक रूपक है, जो उस व्यक्ति के हृदय के लिए प्रयुक्त हुआ है जिसमें देश के लिए प्रेम, संवेदना और समर्पण नहीं है। पत्थर में न तो भावना होती है, न ही प्रतिक्रिया। ऐसा हृदय निस्संवेदनशील, कठोर और निष्क्रिय होता है – जो देश के लिए कुछ नहीं करता।

(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
(संकेत – पत्थर — जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी। …)
उत्तर:

  • पत्थर कहेगाः “जब मैं नदी में था, तब पानी की धार ने मुझे गोल-मटोल बना दिया। पहाड़ों से लुढ़कते हुए मैंने समय की चोटें सहीं। किसी दिन मैं मंदिर की सीढ़ी बना, किसी दिन किसी इमारत की नींव। लेकिन कुछ लोगों ने मुझे नफरत और हिंसा के लिए भी इस्तेमाल किया।”
  • मैं पत्थर से कहूँगाः “तुम सहनशील हो, मजबूत हो तुमने समय को झेला है। पर अब मैं तुम्हें ऐसे काम में लगाऊँगा, जिससे शांति, कला और सेवा फैले। तुम नफरत का हथियार नहीं, प्रेम और निर्माण का आधार बनो।”

(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
 देश-प्रेम का संबंध केवल युद्ध से नहीं बल्कि देश के संसाधनों की रक्षा से भी है। इनमें शामिल हैं:

  • जल स्रोत: नदियाँ, झीलें, वर्षा जल
  • वन और वन्य जीव: जैव विविधता
  • संस्कृति और विरासत: ऐतिहासिक स्मारक, भाषाएँ, परंपराएँ
  • प्राकृतिक संसाधन: कोयला, लोहा, खनिज आदि
  • पर्यावरण: वायु, मिट्टी, जलवायु
  • शिक्षा और ज्ञान: विद्यालय, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय

कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें, 
हम हैं जिसके राजा-रानी।।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: 

  • कविता में लय और संगीतात्मकता आती है।
  • पाठकों या श्रोताओं को याद रखने में आसानी होती है।
  • कविता में मनोरंजन और आकर्षण बढ़ता है।
  • तुकबंदी के कारण भाव और विचार अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होते हैं।
  • उदाहरण: “दाना-पानी / राजा-रानी” — यह जोड़ी कविता को सुंदर और गेय बनाती है।

(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर: कविता को प्रभावशाली बनाने के अन्य प्रयोगः

  • प्रतीकात्मक भाषा: जैसे ‘पत्थर’, ‘परवाना’, ‘तोप-तलवार’
  • भावनात्मक अपील: देशभक्ति, त्याग, साहस को जगाना
  • पुनरावृत्ति: “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति बार-बार आती है जिससे विचार गहराता है।
  • आह्वान शैली: कविता पाठकों को प्रेरित करती है।
  • लय और गति: कविता की भाषा सरल, प्रवाहमयी और तेज़ है, जो संदेश को ताक़त देती है।

आपकी कविता

देश-प्रेम से जुड़े विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-
वह हृदय नहीं है पत्थर है, 
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

उत्तर: वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जिसने देश के लिए न सोचा,
उसका जीवन तो बेकार है।
जो मिट्टी हमें जीवन देती,
जिसमें खेला, पला बढ़ा।
उसी को भूल जाए कोई,
तो क्या उसका मन सच्चा?
भारत माँ की सेवा करना,
सबसे बड़ा धर्म है।
जो इसके लिए कुछ न कर पाए,
उसका जीवन तो शर्मनाक है।
चलो मिलकर कुछ ऐसा करें,
जिससे देश का मान बढ़े।
हमारे अच्छे कर्मों से,
भारत सुंदर और महान बने।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए –
उत्तर: 

(ख) विराम चिह्नों को समझें
“जो चल न सका संसार-संग
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत ‘जो चल न सका संसार के संग’)

उत्तर: 

(ग) शब्द-मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल-दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’ 
‘काल-दीप हरदम जलता है।’

  • अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।

उत्तर: पंक्तियाँ जिनमें ‘है’ पहले आया है – उदाहरणः
1. है जान एक दिन जाने को।
→ बदली हुई पंक्तिः जान एक दिन जाने को है।
2. है काल-दीप जलता हरदम
→ बदली हुई पंक्तिः काल-दीप हरदम जलता है।

अब कविता से और पंक्तियाँ चुनिएः
3. है जान एक दिन जाने को।
→ जान एक दिन जाने को है।
4. है काल-दीप जलता हरदम।
→ काल-दीप हरदम जलता है।
5. हैं माता-पिता बंधु जिसमें
→ माता-पिता बंधु जिसमें हैं।
6. है सब कुछ अपने हाथों में
→ सब कुछ अपने हाथों में है।

  • अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।

“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, 
जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
उत्तर: 
मूल पंक्तिः

  • “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, 
    जिस पर है दुनिया दीवानी।”

‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करकेः

  • “हैं ज्ञानी भी जो उस पर मरते, 
    है दीवानी दुनिया जो उस पर।”

परिवर्तन और सौंदर्य पर चर्चाः

  • जब ‘है, हैं’ को पहले रखा गया, तो लयात्मकता बढ़ी, नाटकीयता आई और काव्य-शैली अधिक प्रभावशाली बनी।
  • यह प्रयोग कविता को गीतात्मक और भावप्रधान बनाता है।

(घ) समानार्थी शब्द
कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

उत्तर: 

कविता का शीर्षक

“वह हृदय नहीं है पत्थर है, 
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर: कविता का शीर्षक – वैकल्पिक पंक्ति चयन और कारण
यदि मुझे इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो मैं चुनूँगाः
→ “वह हृदय नहीं है पत्थर है”
कारणः

  • प्रभावशाली और दोहराई गई पंक्ति: यह पंक्ति कविता में बार-बार आती है, जो इसे केंद्र बिंदु बनाती है। इससे कवि का मुख्य संदेश – देशभक्ति की अनुपस्थिति में मनुष्य का हृदय निष्ठुर हो जाता है – जोरदार ढंग से उभरता है।
  • भावनात्मक गहराई: यह पंक्ति पाठक के मन में झकझोरने वाला प्रभाव छोड़ती है, जो कविता के भाव को मजबूत बनाता है।
  • देश-प्रेम का केंद्रीय संदेश: पूरी कविता का मूल यही है कि स्वदेश-प्रेम ही जीवन को सार्थक बनाता है, और इस पंक्ति में यह बात सीधे, तीखे और मार्मिक तरीके से व्यक्त हुई है।

इसलिए “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस कविता के लिए एक उपयुक्त और अर्थपूर्ण वैकल्पिक शीर्षक हो सकता है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

उत्तर: 

(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर: मेरे द्वारा ऊपर दिए गए प्रत्येक (√) चिह्नित चित्र के साथ उसका तर्क भी दिया गया है। संक्षेप में, ‘स्वदेश प्रेम’ केवल बड़े-बड़े नारों या युद्ध में लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दैनिक जीवन में किए गए छोटे-छोटे कार्य भी शामिल हैं, जो देश, समाज और उसके नागरिकों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और सम्मान को दर्शाते हैं।

  • सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिकता: दूसरों की मदद करना, सामुदायिक कार्यों में भाग लेना, नियमों का पालन करना और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना—एक अच्छे नागरिक के गुण हैं, जो एक मजबूत और प्रगतिशील राष्ट्र की नींव रखते हैं।
  • राष्ट्रीय प्रतीकों और विरासत का सम्मान: अपने राष्ट्रध्वज का सम्मान करना और ऐतिहासिक स्थलों व प्राकृतिक संपदाओं की रक्षा करना—अपनी पहचान और गौरव को बनाए रखने के बराबर है।
  • योगदान और मेहनत: अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी और कड़ी मेहनत से काम करना (जैसे किसान का परिश्रम)—देश की अर्थव्यवस्था और समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • पर्यावरण चेतना: प्रकृति की देखभाल करना और पर्यावरण को बचाना—भविष्य की पीढ़ियों के लिए देश को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • सुरक्षा बलों के प्रति कृतज्ञता: जो लोग देश की रक्षा करते हैं, उनके प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त करना भी देशभक्ति का एक अहम हिस्सा है।

इन सभी कार्यों से मिलकर एक ऐसा समाज बनता है जो एकजुट, अनुशासित और अपनी भूमि के प्रति प्रेम व जिम्मेदारी की भावना से ओत-प्रोत होता है।

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, 
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?


उत्तर: 

अपनी भाषा अपने गीत

(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
उत्तर: 
हिंदी:

  • “सारे जहाँ से अच्छा” – मोहम्मद इक़बाल
  • “जन गण मन” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  • “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” – श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’

गुजराती:

  • “जय हिंद! जय हिंद!” – झवेरचंद मेघाणी
  • “હું છું ભારતીય” (मैं भारतीय हूँ) – आधुनिक देशभक्ति रचना

मराठी:

  • “झेंडा उंचा राहिला पाहिजे” – वि. स. खांडेकर
  • “माझा देश महान” – देशभक्ति गीत

बंगाली:

  • “आमार सोनार बांगला” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  • “एकला चलो रे” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

तमिल:

  • “தமிழா தமிழா” (तमिऴा तमिऴा) – लोकप्रिय तमिल देशभक्ति गीत
  • “விடுதலை விடுதலை” (विदुथलै विदुथलै) – स्वतंत्रता गीत

(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
उत्तर: कक्षा में विद्यार्थी निम्न में से किसी एक गीत को वाद्य यंत्रों या तालियों के साथ गा सकते हैं:

  • “सारे जहाँ से अच्छा”: यह गीत सरल, लोकप्रिय और भावपूर्ण है।
  • “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा”: समूह गायन के लिए उपयुक्त है।
  • क्षेत्रीय गीत: कोई विद्यार्थी अपनी मातृभाषा का देशभक्ति गीत गाकर प्रस्तुति दे सकता है।

तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास

राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न हुआ होगा।
उत्तरः

तिरंगा झंडा तब प्रसन्न हुआ होगा, जब मैंनेः

  • सुबह राष्ट्रगान के समय सावधान मुद्रा में खड़े होकर पूरे सम्मान से गान किया।
  • स्कूल में सफाई अभियान में भाग लिया और अपने आस-पास कचरा नहीं फैलाया।
  • अपने मित्र की पढ़ाई में मदद की और किसी से झगड़ा नहीं किया।
  • समय पर गृहकार्य पूरा किया और अध्यापकों का सम्मान किया।
  • पानी और बिजली की बचत की, जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।

तिरंगा झंडा तब उदास हुआ होगा, जब मैंनेः

  • स्कूल की प्रार्थना के समय ध्यान नहीं दिया और हँसी-मज़ाक किया।
  • प्लास्टिक की थैली का उपयोग किया और उसे ज़मीन पर फेंक दिया।
  • किसी साथी से रूखा व्यवहार किया।
  • मोबाइल या टीवी में ज़्यादा समय बर्बाद किया और पढ़ाई से ध्यान हटाया।

झरोखे से

आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।

उत्तरः विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

आपने स्वदेश’ कविता और खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर: ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ – दोनों में देश-प्रेम बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया है।

  • ‘स्वदेश’ कविता में कवि कहता है कि अगर किसी के दिल में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, तो वह पत्थर के जैसा है। यह कविता हमें सिखाती है कि अपने देश से प्यार करना बहुत जरूरी है।
  • ‘खादी गीत’ में बताया गया है कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आज़ादी की पहचान है। जब लोग विदेशी कपड़ों की जगह खादी पहनते थे, तो वे आज़ादी की लड़ाई में साथ देते थे।

दोनों कविताओं में यह बात साफ़ है कि देश के लिए कुछ भी करना, चाहे वह कविता लिखना हो, खादी पहनना हो, या देश की सेवा करना हो – यह सब देश-प्रेम के तरीके हैं।
आप सभी मिलकर ‘खादी गीत’ को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़ सकते हैं, और समझ सकते हैं कि लोग आज़ादी के समय अपने देश के लिए कितनी मेहनत और प्यार दिखाते थे।

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं-

  • सारे जहाँ से अच्छा
    https://www.youtube.com/watch?v=xestTq6jdjI
  • दीवानों की हस्ती
    https://www.youtube.com/watch?v=n4LOnShHEC4
  • झाँसी की रानी
    https://www.youtube.com/watch?v=QpTL2qBOiwc

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।