लेखक परिचय
नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक बहुत बड़े नेता थे। उनका मुख्य उद्देश्य था भारत को अंग्रेजों की हुकूमत से आज़ाद कराना। उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व किया और सैनिकों को देश की आज़ादी के लिए लड़ने का हौसला दिया। नेताजी ने “दिल्ली चलो” और “जय हिंद” जैसे नारे देकर लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई। उन्होंने कहा था, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा,” जो बहुत प्रेरणादायक था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने एक ऐसा समाज और राष्ट्र बनाने का सपना देखा, जहाँ हर व्यक्ति स्वतंत्र और बराबर हो। उनके जीवन और काम को समझना भारत की आज़ादी की कहानी को समझना है।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस
मुख्य विषय
इस पाठ में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस स्वप्न के बारे में बताया गया है जिसमें वे एक ऐसा आज़ाद और समृद्ध भारत चाहते थे जहाँ सभी लोग बराबर हों, जात-पात न हो, महिलाओं को समान अधिकार मिले और हर व्यक्ति को शिक्षा और अवसर मिले। उन्होंने युवाओं को यह स्वप्न दिया ताकि वे अपने देश और समाज की सेवा करें और एक आदर्श राष्ट्र बनाएं। साथ ही, पाठ में नेताजी के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की भी जानकारी दी गई है।

कहानी का सार
नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहाँ हर व्यक्ति आज़ाद हो, खुशहाल हो और समाज व देश की सेवा में बराबर भाग ले सके। वे चाहते थे कि समाज में सभी लोग एक-दूसरे के साथ बराबरी से रहें। उन्होंने 29 दिसंबर, 1929 को मेदिनीपुर में युवक-सम्मेलन में युवाओं को एक खास बात कही थी। उसमें उन्होंने अपने सपने के बारे में बताया, जो बहुत प्रेरणादायक था। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
नेताजी कहते थे कि बहुत सारे लोगों ने सपने देखे हैं। उनके गुरु, देशबंधु चित्तरंजन दास ने भी एक सुंदर सपना देखा था। वह सपना उनकी ताकत और खुशी का कारण था। नेताजी कहते हैं कि हम, यानी आज के युवा, उनके सपने को पूरा करने वाले हैं। इसलिए हमारा भी एक सपना है। यह सपना हमें हर दिन प्रेरणा देता है। यह हमें उठने, काम करने, बोलने और लिखने की ताकत देता है।

नेताजी का सपना क्या था?
नेताजी का सपना था एक ऐसा समाज और देश बनाना, जो पूरी तरह आज़ाद और खुशहाल हो। वे चाहते थे कि:
- हर व्यक्ति आज़ाद हो: समाज में कोई भी व्यक्ति दबाव में न रहे। हर कोई अपनी मर्जी से जी सके और खुश रहे।
- जात-पात का भेदभाव न हो: समाज में कोई ऊँच-नीच न हो। सभी लोग एक-दूसरे के साथ बराबरी से रहें।
- महिलाएँ भी बराबर हों: औरतें भी पुरुषों की तरह समाज और देश के लिए काम करें। उन्हें भी वही अधिकार और सम्मान मिले, जो पुरुषों को मिलता है।
- पैसों की असमानता न हो: समाज में कुछ लोग बहुत अमीर और कुछ बहुत गरीब न हों। सभी को बराबर मौका मिले।
- सभी को शिक्षा मिले: हर व्यक्ति को पढ़ने और आगे बढ़ने का समान मौका मिले।
- काम की इज्जत हो: जो लोग मेहनत करते हैं, उनकी इज्जत हो। आलसी और कामचोर लोगों के लिए समाज में कोई जगह न हो।
- देश पूरी तरह आज़ाद हो: कोई बाहरी ताकत हमारे देश को नियंत्रित न करे। हमारा देश पूरी तरह स्वतंत्र हो।
- भारत आदर्श बने: हमारा देश न सिर्फ अपने लोगों की ज़रूरतें पूरी करे, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बने। यह दुनिया को दिखाए कि एक अच्छा समाज और देश कैसा होता है।
नेताजी कहते थे कि यह सपना उनके लिए एक सच्चाई की तरह है। इस सपने को पूरा करने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। इसके लिए वे हर मुश्किल को सह सकते हैं, हर त्याग कर सकते हैं। अगर इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी जान भी देनी पड़े, तो वे उसे भी स्वर्ग के समान मानते थे।
युवाओं को संदेश
नेताजी ने युवाओं से कहा, “मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है, सिवाय इस सपने के। यह सपना मुझे ताकत और खुशी देता है। यह मेरे छोटे से जीवन को भी खास बनाता है।” उन्होंने युवाओं से कहा कि वे यह सपना उन्हें उपहार के रूप में दे रहे हैं। उन्होंने युवाओं से इस सपने को स्वीकार करने और इसे पूरा करने की अपील की।
नेताजी का यह सपना आज भी हमें प्रेरणा देता है कि हम एक बेहतर समाज और देश के लिए मेहनत करें।

कहानी की मुख्य बातें
- आज़ाद और खुशहाल समाज: नेताजी चाहते थे कि ऐसा समाज बने जहाँ हर व्यक्ति आज़ाद हो और खुशी से जिए।
- सबके लिए समानता: समाज में कोई भेदभाव न हो, जैसे जाति का अंतर, और सभी को बराबर सम्मान मिले।
- नारी की आज़ादी: महिलाएँ भी पुरुषों की तरह बराबर अधिकार पाएँ और समाज व देश की सेवा में हिस्सा लें।
- सबको शिक्षा और अवसर: हर व्यक्ति को पढ़ने और आगे बढ़ने का बराबर मौका मिले।
- काम की इज्जत: मेहनत और काम करने वालों की कदर हो, और आलसी लोगों के लिए कोई जगह न हो।
- गरीबी का अंत: समाज में कोई गरीब न रहे, और सभी की जरूरतें पूरी हों।
- आज़ाद देश: देश किसी बाहरी प्रभाव से मुक्त हो और अपने नियम खुद बनाए।
- दुनिया के लिए मिसाल: भारत का समाज और देश ऐसा हो जो पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श बन जाए।
- स्वप्न की ताकत: नेताजी कहते थे कि यह सपना उन्हें ताकत और खुशी देता है। वे चाहते थे कि युवा इस सपने को अपनाएँ और इसे सच करें।
- त्याग और मेहनत: इस सपने को सच करने के लिए हर मुश्किल को सहने और मेहनत करने की जरूरत है।
कहानी से शिक्षा
नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने एक ऐसा समाज और देश का सपना देखा था जहाँ सभी लोग बराबर हों और स्वतंत्रता से जी सकें। वे चाहते थे कि सबको अच्छी शिक्षा मिले और महिलाएँ भी पूरी आज़ादी के साथ समाज में भाग लें। उनका सपना था कि जात-पात, अमीर-गरीब का भेद खत्म हो जाए। हमें भी उनके इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। हमें मिलकर देश और समाज की सेवा करनी है। इस तरह हम एक आदर्श और शक्तिशाली देश बना सकते हैं।

शब्दार्थ
- स्वप्न: सपना, कल्पना
- स्वाधीन: स्वतंत्र, आज़ाद
- संपन्न: समृद्ध, विकसित
- दृष्टि: नजर, दृष्टिकोण
- उद्बोधन: भाषण, संदेश
- नारी मुक्ति: महिलाओं की आज़ादी या स्वतंत्रता
- समान अवसर: बराबर के मौके
- युवक-सम्मेलन: युवा लोगों की सभा
- स्वर्गीय: दिवंगत, जो स्वर्ग को प्राप्त हो चुका हो
- देशबंधु: देश का मित्र या प्रिय व्यक्ति
- उत्तराधिकारी: वह जो किसी की जगह लेता है
- प्रेरणा: उत्साह देना, प्रेरित करना
- सर्वांगीण: पूर्ण, सभी दिशाओं से
- जातिभेद: जाति के आधार पर भेदभाव
- समता: समानता
- विषमता: असमानता, भेदभाव
- सुअवसर: अच्छा अवसर
- मर्यादा: सम्मान, सीमा
- अकर्मण्य: आलसी, काम न करने वाला
- विजातीय: बाहरी, विदेशी
- यंत्र: उपकरण, मशीन
- अभाव: कमी, न होना
- सार्थक: सफल, जिसका फल निकले
- अखंड: निरंतर, लगातार
- त्याग: बलिदान, छोड़ना
- प्राण: जीवन
- स्वर्ग समान: स्वर्ग जैसा, अत्यंत अच्छा
- क्षुद्र: छोटा, मामूली
- उपहारस्वरूप: उपहार की तरह