11. हमारे ये कलामंदिर – Chapter Notes

कहानी परिचय

यह कहानी “हमारे ये कलामंदिर” अजंता और एलोरा की प्रसिद्ध गुफाओं के बारे में है। इसमें बताया गया है कि निशा अपनी मौसी के साथ दशहरे की छुट्टियों में इन गुफाओं को देखने जाती है। वहाँ पहुँचकर निशा देखती है कि पहाड़ों को काटकर सुंदर गुफाएँ और मंदिर बनाए गए हैं। गुफाओं की दीवारों पर बने चित्र बहुत ही सजीव और सुंदर हैं, जिनमें गौतम बुद्ध के जीवन, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और लोगों के चित्र बने हैं। इन चित्रों के रंग आज भी चमकदार दिखाई देते हैं। एलोरा की गुफाओं में हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित मूर्तियाँ और मंदिर बने हैं। कैलाश मंदिर तो पूरी एक चट्टान को काटकर बनाया गया है, जो बहुत अद्भुत लगता है। इस कहानी से हमें पता चलता है कि हमारे देश की कला बहुत पुरानी और महान है।

मुख्य विषय

इस कहानी का मुख्य विषय यह है कि भारत में बहुत पुराने समय से कला और वास्तुकला का कितना अद्भुत विकास हुआ था। अजंता और एलोरा की गुफाएँ और उनमें बनी चित्रकला और मूर्तियाँ देखकर पता चलता है कि हमारे पूर्वज कितने बुद्धिमान और कुशल कलाकार थे। गुफाओं में दीवारों पर बने चित्र इतने सजीव हैं कि वे आज भी हमें मंत्रमुग्ध कर देते हैं। एलोरा की गुफाओं में केवल बौद्ध धर्म से जुड़े ही नहीं, बल्कि हिंदू और जैन धर्म से संबंधित मंदिर और मूर्तियाँ भी हैं। कहानी यह भी बताती है कि ये कला केवल देखने में सुंदर ही नहीं, बल्कि यह हमारे इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली धरोहर भी है।

कहानी का सार

निशा की मौसी ने उसे छुट्टियों में अजंता और एलोरा की गुफाएँ दिखाने का वादा किया था। निशा ने किताबों में इन गुफाओं के बारे में पढ़ा था और उसे देखने की बड़ी उत्सुकता थी। दशहरे की छुट्टियाँ आईं तो निशा और मौसी अजंता और एलोरा जाने के लिए तैयार हो गईं। रेलगाड़ी से वे संभाजीनगर पहुँचे और वहाँ स्टेशन के पास ही रात बिताई। अगले दिन सुबह जल्दी उठकर वे बस से अजंता की ओर चल पड़ीं। अजंता शहर से लगभग सौ किलोमीटर दूर है।

अजंता पहुँचकर निशा ने एक बहुत ही सुंदर दृश्य देखा। वहाँ एक छोटी नदी बह रही थी और नदी में बड़े-बड़े शिलाखंड पड़े थे। नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी पर गुफाएँ बनी थीं, जिनका मुंह पूर्व की ओर था और प्रातःकाल सूर्य की किरणें उन पर पड़ रही थीं। गुफाओं के नीचे पानी से भरा एक कुंड था और घाटी में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे।

निशा और मौसी गुफाओं के अंदर गईं और देखा कि दीवारों पर सुंदर चित्र बने हुए थे। गौतम बुद्ध का घर छोड़कर तपस्या के लिए जाना, भिक्षुओं को उपदेश देना, साधु के रूप में भिक्षा माँगते हुए आदि दिखाए गए थे। साथ ही पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और स्त्रियों के चित्र भी बने थे। निशा बहुत आश्चर्यचकित हुई क्योंकि ये चित्र सैकड़ों साल बाद भी रंगीन और जीवंत थे। मौसी ने बताया कि ये गुफाएँ लगभग दो हजार वर्ष पुरानी हैं और उस समय रंग बनाने का तरीका बहुत खास था। चित्रों में हाथों की मुद्राएँ, आँखों के भाव, अंगों की लोच और मुखों पर सुख-दुख सभी दिखते थे, जैसे चित्र बोल उठेंगे।

कुछ गुफाएँ बहुत लंबी-चौड़ी थीं और कुछ छोटी। निशा को सबसे अधिक आश्चर्य यह देखकर हुआ कि ये गुफाएँ पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं और मूर्तियाँ भी पत्थर तराशकर बनाई गई थीं।

अजंता देखने के बाद निशा और मौसी संभाजीनगर लौट आईं और फिर अगले दिन एलोरा की गुफाएँ देखने गईं। एलोरा संभाजीनगर से लगभग चालीस किलोमीटर दूर है। वहाँ निशा ने देखा कि पहाड़ों को काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए थे। इन मंदिरों में सुंदर मूर्तियाँ थीं, जो केवल बौद्ध धर्म से ही नहीं, बल्कि हिंदू और जैन धर्म से भी संबंधित थीं। विशाल शिलाओं को तराशकर इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें और मूर्तियाँ बनाई गई थीं।

मौसी ने कैलाश मंदिर दिखाया और बताया कि यह मंदिर ऊँचे पहाड़ को ऊपर से काटकर बनाया गया है और एक ही चट्टान से इतनी बड़ी और सुंदर इमारत बनाई गई। निशा ने कहा कि यह अद्भुत है और यह गर्व की बात है कि हजारों साल पहले हमारे देश में कला इतनी विकसित थी।

अजंता और एलोरा देखकर निशा और मौसी घर लौट आईं, लेकिन निशा का मन अब भी उन बेजोड़ कलाकृतियों की ओर लगा रहा।

कहानी की मुख्य बातें

  • निशा और उसकी मौसी दशहरे की छुट्टियों में अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखने गईं।
  • वे छत्रपति संभाजीनगर रेल से पहुँचीं और वहाँ से बस से अजंता गईं, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर है।
  • अजंता में कुल 29 गुफाएँ हैं, जो पहाड़ी पर बनी थीं। वहाँ नदी, फूल और सुंदर दृश्य थे।
  • गुफाओं में गौतम बुद्ध के जीवन, पशु-पक्षी और अन्य सुंदर चित्र थे, जो 2000 साल पुराने थे।
  • चित्रों के प्राकृतिक पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बने थे, जो आज भी चमक रहे थे।
  • गुफाएँ और मूर्तियाँ पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं, जो बहुत आश्चर्यजनक था।
  • अजंता देखने के बाद वे संभाजीनगर लौटीं और फिर एलोरा गईं, जो 40 किलोमीटर दूर है।
  • एलोरा में लगभग 30 गुफाएँ और मंदिर हैं, जो बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से संबंधित थे।
  • कैलाश मंदिर बहुत प्रसिद्ध है, जो एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया था।
  • निशा को गर्व हुआ कि हजारों साल पहले भारत में इतनी सुंदर कला थी।

कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारे देश में प्राचीन समय से ही कला और संस्कृति का बहुत विकास हुआ था। लोग अपनी मेहनत और बुद्धिमानी से पहाड़ों को काटकर गुफाएँ और मंदिर बनाए, जिसमें सुंदर चित्र और मूर्तियाँ बनाई गईं। यह हमें यह भी सिखाता है कि कला का महत्व हमेशा रहता है और हमें अपनी पुरानी संस्कृति और कलाकृतियों को सँभालकर रखना चाहिए। साथ ही, यह कहानी हमें अपने इतिहास को जानने और उसका आदर करने की प्रेरणा देती है।

शब्दार्थ

  • उत्सुकता: अत्यधिक इच्छुक
  • विश्रामगृह: आराम करने का स्थान
  • मनोरम: सुंदर
  • शिलाखंड: चट्टान का टुकड़ा
  • कुंड: जलाशय/हौज
  • सजीव: जीवित
  • हाथों की मुद्रा: हाथों की विशेष आकृति
  • लोच: लचक
  • तराशना: पत्थर को काटकर आकार देना
  • कलाकृति: कला के माध्यम से बनाई गई वस्तु या चित्र
  • टकटकी लगाना: लगातार देखना