कहानी का परिचय
कहानी का नाम “आलू की सड़क” है। यह कहानी एक भालू और बंदर की है। भालू को अपने नानी के घर जाना था, लेकिन उसे रास्ते में आलू गिरते हुए मिलते हैं। बंदर रास्ते में उसे देखकर यह जानने की कोशिश करता है कि भालू कहाँ जा रहा था। इस कहानी में आलू के गिरने और बंदर की जिज्ञासा को दिखाया गया है।

कहानी का सारांश
कहानी में एक भालू अपने नानी के घर जा रहा था। उसने पीठ पर आलू भरे हुए थे, लेकिन बोरे में छेद था। इसलिए जैसे-जैसे भालू चलता गया, आलू गिरते गए। रास्ते में एक बंदर पेड़ पर बैठा था, उसने भालू से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है।

लेकिन भालू ने कुछ नहीं कहा, बस आलू गिरने की आवाज़ सुनाई दी। बंदर ने देखा कि आलू रास्ते में गिर रहे हैं और वह खुश होकर भालू के पीछे-पीछे चलने लगा, ताकि यह जान सके कि भालू कहाँ जा रहा है।
कहानी से शिक्षा
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी के पीछे बिना कारण नहीं जाना चाहिए और बिना अनुमति के किसी के सामान को नहीं छेड़ना चाहिए। साथ ही, इस कहानी में हमें यह भी सीखने को मिलता है कि कभी-कभी हमें खुद सोचकर काम करना चाहिए और सही कारणों को जानने की कोशिश करनी चाहिए।

शब्दार्थ
- धप्प: चलने की आवाज़
- टप्प: गिरने की आवाज़
- मन-ही-मन: अपने मन में