13. तालाब – Chapter Notes

कहानी का सारांश

इस गाथा में एक छोटे से तालाब की बात है। तालाब में बहुत सारे जानवर रहते हैं, जैसे की केंचुआ, साँप, केकड़ा, मेंढ़क, कन्हजूर, मछली और बच्चे। बहुत सारे मच्छर भी तालाब में उड़ते हैं। यहां बहुत सारी बिल्लों और ऊँटों की भी बात की गई है। तालाब के किनारे एक पेड़ है, जिस पर मकड़ी के जाल लगे होते हैं और चिड़ियाएँ भी अपना घोंसला बनाती हैं। इस समय सारस भी आते हैं, जो तालाब के चारों ओर उड़ते रहते हैं। लेकिन जब सर्दियों का समय आता है, तो सारस चले जाते हैं। तब तालाब के चारों ओर सुकून और चहल-पहल नहीं रहता।
यह कहानी एक छोटे तालाब की है, जिसमें बहुत सारे जीव रहते हैं। इसमें केंचुआ, साँप, केकड़ा, मेंढ़क, कन्हजूर, मछली और बच्चे रहते हैं। तालाब के किनारे एक पेड़ है, जिस पर मकड़ी के जाल होते हैं और चिड़ियाएँ भी घोंसला बनाती हैं। ठंडी के दिनों में सारस आते हैं, जो तालाब में उड़ते रहते हैं। लेकिन सर्दियों में ये चले जाते हैं और तालाब में सुकून चला जाता है।

शब्दार्थ

  • जानवर: यह शब्द हमें बताता है कि यह बात किसी जीव के बारे में है, जैसे बिल्ला, कुत्ता, घोड़ा, बंदर आदि।
  • मच्छर: यह शब्द हमें बताता है कि यह जीव तालाब और औद्योगिक जल में पाया जाता है, जो हमें काटता है और खुजलाता है।
  • चिड़िया: यह शब्द हमें बताता है कि यह जीव पंखों वाला होता है, जो आकाश में उड़ता है और अलग-अलग ध्वनियों से चीर-चीर कर गाता है।
  • ऊँट: यह शब्द हमें बताता है कि यह जीव चाल चलन में सहारा देने वाला होता है, जो भारी वस्तुओं को भी ले जाता है।
  • घोंसला: यह शब्द हमें बताता है कि यह जगह है जहाँ जीव अपना घर बनाते हैं, जैसे चिड़िया के लिए उसका नेस्ट।