15. भारत – पाठ का सार

परिचय

इस कविता “भारत तू है हमको प्यारा” को सोहन लाल त्रिवेदी जी ने लिखा है। इसमें भारत देश की सुंदरतापेड़-पौधेनदियाँ और उसकी संस्कृति की बात की गई है। यह कविता हमें भारत की महानता और पवित्रता के बारे में सिखाती है।

पहला प्रसंग:

“भारत तू है हमको प्यारा,

तू है सब देशों से न्यारा।

मुकुट हिमालय तेरा सुंदर,

धोता तेरे चरण समुद्र।”

व्याख्या: यहाँ कवि ने भारत के प्रति अपने प्यार और श्रद्धा को प्रकट किया है। भारत के लिए हिमालय मुकुट जैसा है और समुद्र इसके चरणों को धोता है, जो इसकी विशालता और सुंदरता को दर्शाता है।

दूसरा प्रसंग:

“गंगा यमुना की है धारा,

जिनसे है पावन जग सारा।

अन्न, फूल, फल, जल हैं प्यारे,

तुझमें रत्न जवाहर न्यारें।”

व्याख्या: इस हिस्से में कवि गंगा और यमुना की पवित्रता का वर्णन कर रहा है। इन नदियों से सारा संसार पावन होता है। भारत के पास बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं, जैसे अन्न, फूल, फल और जल, जो इसकी अनमोल संपत्ति हैं।

तीसरा प्रसंग:

“राम कृष्ण का अंतर्यामी,

तेरे सभी पुत्र हैं नामी।

हम सदैव तेरा गुण गाएँ,

सब विधि तेरा सुयश बढ़ाएँ।”

व्याख्या: यहाँ कवि भगवान राम और कृष्ण का नाम लेते हुए भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का गुणगान करता है। भारत के सभी नागरिक महान और नामी हैं। कवि कहता है कि हम हमेशा भारत का गुणगान करते रहेंगे और उसकी महिमा को बढ़ाएँगे।

सारांश:

इस कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, उसके संसाधनों और उसकी परंपराएँ और रीति-रिवाज का वर्णन किया गया है। यह कविता हमें सिखाती है कि हमें अपने देश पर गर्व करना चाहिए और उसकी महिमा को सदैव बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।