परिचय
“छुपन-छुपाई” एक सरल, मज़ेदार और बच्चों की दुनिया से जुड़ी कहानी है, जो दोस्तों के बीच खेले जाने वाले खेल और मासूमियत को दर्शाती है। यह कहानी बच्चों के बीच के रिश्तों, उनकी चतुराई, और खेल के दौरान होने वाली मस्ती को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है। कहानी यह दिखाती है कि छोटे-छोटे खेलों में भी कितनी खुशी और समझदारी छिपी होती है।

सारांश
कहानी की शुरुआत में कुछ बच्चे छुपन-छुपाई खेल रहे होते हैं। उस दिन जीत की बारी होती है सभी को ढूँढ़ने की। वह सौ तक गिनती करता है और फिर सबसे पहले कमरे में जाकर खोज शुरू करता है।
- कोई अलमारी के पीछे छिपा होता है,
- कोई पलंग के नीचे,
- कोई दादी के पीछे,
- और कोई चादर के पीछे।

जीत धीरे-धीरे सभी को खोज लेता है, लेकिन जया नहीं मिलती। वह उसे ढूँढ़ता हुआ आंगन तक आ जाता है और सोचने लगता है कि जया कहाँ छुपी है। उसी समय जया अचानक ऊपर से कूदती है और जीत को “धप्पा” मारती है। इसके बाद खेल फिर से शुरू हो जाता है, और बच्चे दोबारा मस्ती में लग जाते हैं।
कहानी का अर्थ
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि खेल बच्चों के जीवन का एक जरूरी हिस्सा है। इसके ज़रिए वे न सिर्फ मनोरंजन करते हैं, बल्कि एक-दूसरे के साथ सहयोग, चतुराई और धैर्य भी सीखते हैं। यह कहानी बच्चों की आपसी दोस्ती और हँसी-खुशी के पलों को सुंदर रूप में दिखाती है।
शब्दार्थ
- छुपन-छुपाई – बच्चों का एक खेल जिसमें कुछ बच्चे छिपते हैं और एक उन्हें ढूँढ़ता है
- गिनती – एक के बाद एक संख्या बोलना (जैसे: एक, दो, तीन…)
- अलमारी – लकड़ी या लोहे की चीजें रखने की बड़ी चीज
- पलंग – सोने या बैठने की बड़ी चारपाई
- आँगन – घर के अंदर का खुला हिस्सा
- धप्पा – छुपन-छुपाई में किसी को छूकर यह बताना कि वह पकड़ा गया
- सोचना – मन में विचार करना