5. कबीर के दोहे – Worksheet Solutions

रिक्त स्थान भरें (Fill in the Blanks)

प्रश्न 1: कबीर का जन्म __________ में हुआ माना जाता है।
उत्तर: 
काशी (वाराणसी)

प्रश्न 2: कबीर कहते हैं कि __________ सबसे बड़ा पाप है।
उत्तर: 
झूठ

प्रश्न 3: खजूर का पेड़ न छाया देता है, न __________ फल देता है।
उत्तर: 
पास से

प्रश्न 4: कबीर के अनुसार गुरु को भगवान से भी __________ स्थान दिया गया है।
उत्तर: 
पहले

प्रश्न 5: कबीर कहते हैं कि मन एक __________ की तरह है।
उत्तर: 
पक्षी

सही या गलत (True or False)

प्रश्न 1: कबीर करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ ही दोहे कहते थे।
उत्तर: 
सही

प्रश्न 2: कबीर ने कहा है कि बहुत अधिक बोलना और बहुत अधिक चुप रहना दोनों ही हानिकारक हैं।
उत्तर: 
सही

प्रश्न 3: कबीर के अनुसार गुरु का महत्व भगवान से कम है।
उत्तर: 
गलत

प्रश्न 4: कबीर ने निंदक को अपने पास से दूर रखने की सलाह दी।
उत्तर: 
गलत

प्रश्न 5: कबीर के अनुसार अच्छी संगति से अच्छा फल और बुरी संगति से बुरा फल मिलता है।
उत्तर: 
सही

मिलान कीजिए (Match the Following)

उत्तर:

एक शब्द उत्तर (One Word Answers)

प्रश्न 1: कबीर की रचनाएँ किस ग्रंथ में मिलती हैं?
उत्तर: 
कबीर ग्रंथावली

प्रश्न 2: “साँच बराबर तप नहीं” पंक्ति में किसका महत्व बताया गया है?
उत्तर:
 सत्य

प्रश्न 3: खजूर का पेड़ किसके उदाहरण के रूप में लिया गया है?
उत्तर: 
बेकार बड़ेपन

प्रश्न 4: जो हमारी गलतियाँ बताता है, उसे कबीर क्या कहते हैं?
उत्तर: निंदक

प्रश्न 5: “सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय” पंक्ति में किसका गुण बताया गया है?
उत्तर: 
साधु

प्रश्न और उत्तर (Questions and Answers)

प्रश्न 1: कबीर ने झूठ को सबसे बड़ा पाप क्यों बताया?
उत्तर: 
क्योंकि झूठ से विश्वास टूटता है और बुरे कामों की शुरुआत होती है।

प्रश्न 2: कबीर ने खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर क्या समझाया?
उत्तर: 
केवल ऊँचा होना या पद पाना ही सम्मान नहीं, बल्कि दूसरों के काम आना ही सच्चा बड़ा होना है।

प्रश्न 3: गुरु को भगवान से भी पहले प्रणाम क्यों करना चाहिए?
उत्तर:
 क्योंकि गुरु ही हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग बताते हैं।

प्रश्न 4: कबीर के अनुसार निंदक को अपने पास क्यों रखना चाहिए?
उत्तर: 
क्योंकि वह हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारने में मदद करता है।

प्रश्न 5: कबीर ने संगति का क्या महत्व बताया है?
उत्तर: 
जैसा संग मिलेगा वैसा ही स्वभाव और फल प्राप्त होगा।