बातचीत के लिए
1. जवाहरसिंह अपनी गाय को मौसी कहकर बुलाता है। आप अपने घर या आस-पास के पशु-पक्षियों को क्या कहकर पुकारते हैं ?
उत्तर: मेरे घर पर एक कुत्ता है। उसको हम लोग ब्राउनी कहकर बुलाते हैं। वहीं गायें तथा साँड़ भी आते हैं, उन्हें हम लोग उनके रंग तथा डील-डौल के आधार पर विभिन्न नामों से पुकारते हैं; जैसे- बछड़ा तथा बछिया के जोड़े को हीरा – मोती तथा बड़े दुलारे साँड़ को भोलू । पड़ोस की पालतू बिल्ली को म्याऊँ तथा पालतू तोते को मिट्ठू आदि ।
2. सुंदरिया के दूर चले जाने के बाद जवाहरसिंह को कैसा लगा होगा? जब आपका कोई प्रिय आपसे दूर हो जाए तो आपको कैसा लगता है?
उत्तर: जवाहरसिंह को सुंदरिया के दूर जाने पर बहुत दुख हुआ होगा, क्योंकि वह उसे मौसी कहता था और उससे बहुत प्यार करता था। जब मेरा कोई प्रिय मुझसे दूर जाता है, तो मुझे उदासी और खालीपन महसूस होता है।
3. जवाहरसिंह सुंदरिया की देखभाल के लिए क्या-क्या करता होगा?
उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया को चारा देता होगा, उसे नहलाता होगा, उसका गोशाला साफ करता होगा और उसे प्यार से पुचकारता होगा।
4. आप अपने आस-पास के पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या करते हैं?
उत्तर: मैं अपनी छत पर पक्षियों तथा बंदरों के पीने के लिए बरतन में पानी रखता हूँ। घर में खाने के बाद बचे खाद्य-पदार्थ–रोटी, चावल, सब्ज़ी, कच्ची सब्ज़ी के बचे हिस्से आदि घर के बाहर एक बरतन में रखता हूँ, जिसे गली में आने वाली गायें, साँड़ तथा कुत्ते खाते हैं। मैं अपने घर के आस-पास पाले गए पशु-पक्षियों को प्यार करता हूँ, उनकी देखरेख में उनके मालिकों की मदद करता हूँ। अगर कोई इन पालतू पशु-पक्षियों को मारता या परेशान करता है तो मैं उसे ऐसा करने से रोकता हूँ।
पाठ से





नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर पर () का चिह्न बनाइए। प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं –
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. हीरासिंह गाय को बेचने से क्यों डर रहा था?
उत्तर: हीरासिंह सुंदरिया को बेचने से इसलिए डर रहा था क्योंकि उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहता था और उससे बहुत प्यार करता था। उसे डर था कि जवाहरसिंह को गाय के बेचे जाने से बहुत दुख होगा।
2. सेठ हीरासिंह की गाय को देखकर क्यों प्रसन्न हुआ?
उत्तर: सेठ सुंदरिया को देखकर प्रसन्न हुआ क्योंकि वह बहुत सुंदर, स्वस्थ और आकर्षक थी। उसने पंद्रह सेर से ज्यादा दूध दिया, जो सेठ को बहुत अच्छा लगा।
3. “तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा?” सेठ ने हीरासिंह से ऐसा क्यों कहा?
उत्तर: सेठ ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि सुंदरिया ने घोसी के साथ कम दूध दिया, जबकि हीरासिंह ने कहा था कि वह पंद्रह सेर से ज्यादा दूध देती है। सेठ को लगा कि हीरासिंह ने उसे गलत जानकारी दी।
4. सेठ के कुछ कहने से पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर क्यों चल दिया?
उत्तर: हीरासिंह गाय को लेकर इसलिए चल दिया क्योंकि वह सुंदरिया से बहुत प्यार करता था और उसे घोसी के साथ नहीं छोड़ना चाहता था। वह नहीं चाहता था कि सुंदरिया को कोई तकलीफ हो और उसका अपमान हो।
सुंदरिया और हीरासिंह


1. कहानी में सुंदरिया की बहुत-सी विशेषताओं का पता चलता है। उन विशेषताओं को नीचे लिखिए।
उत्तर:
2. अब आप हीरासिंह की विशेषताओं को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: हीरासिंह की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- हीरासिंह मेहनती और ईमानदार है।
- वह अपने परिवार और सुंदरिया से बहुत प्यार करता है।
- वह गरीब है, लेकिन अपने बच्चों और गाय की देखभाल करना चाहता है।
- वह सुंदरिया को बेचने के लिए मजबूर था, लेकिन उसे बहुत दुख हुआ।
- वह साहसी है, क्योंकि उसने सेठ से साफ-साफ अपनी बात कही।
समझ और अनुभव
1. क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी हमारी भावनाएँ समझते हैं? कोई अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षी हमारी भावनाएँ समझते हैं। जैसे, जब मैं दुखी होता हूँ तो हमारा पालतू कुत्ता मेरे पास आकर चुपचाप बैठ जाता है।
2. जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर क्यों संबोधित करता होगा?
उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर संबोधित करता होगा क्योंकि वह उसे परिवार का सदस्य मानता था और बहुत प्यार करता था।
3. नगरों में बड़े पशुओं को पालतू बनाने वाले लोग कम क्यों हैं?
उत्तर: नगरों में बड़े पशुओं को पालतू बनाने वाले लोग कम हैं क्योंकि शहरों में जगह कम होती है, चारे का प्रबंध करना कठिन होता है और लोग काम में बहुत व्यस्त रहते हैं।
4. पशु-पक्षी मनुष्य की तरह बोल तो नहीं पाते परंतु वे भी आपस में अपनी बातें करते होंगे। क्या आप सहमत हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। पशु-पक्षी अपनी आवाजों और हाव-भाव से बात करते हैं। उदाहरण के लिए, मेरे घर के पास दो बिल्लियाँ अक्सर म्याऊँ-म्याऊँ करके बात करती हैं, जैसे एक-दूसरे को कुछ बता रही हों। पक्षी भी सुबह चहचहाकर एक-दूसरे से बात करते हैं।
अनुमान और कल्पना
1. गाय का नाम ‘सुंदरिया’ किसने एवं क्यों रखा होगा?
उत्तर: सुंदरिया का नाम शायद जवाहरसिंह ने रखा होगा क्योंकि वह उसे बहुत प्यार करता था। उसने यह नाम इसलिए रखा होगा क्योंकि गाय बहुत सुंदर और आकर्षक थी।
2. हीरासिंह के घर से सुंदरिया की विदाई के दृश्य की कल्पना कीजिए।
उत्तर: जब सुंदरिया को ले जाने का समय आया, जवाहरसिंह उदास हो गया होगा। वह सुंदरिया को गले लगाकर रो रहा होगा और कह रहा होगा, “मौसी, तुम जल्दी वापस आना।” हीरासिंह भी चुपके से आँसू पोंछ रहा होगा। सुंदरिया बार-बार पीछे मुड़कर जवाहरसिंह और घर की ओर देख रही होगी, जैसे वह भी नहीं जाना चाहती हो। पूरा परिवार उदास होकर सुंदरिया को विदा करता होगा।
3. सुंदरिया को वापस घर लेकर जाते हुए हीरासिंह को कैसा लग रहा होगा एवं क्यों?
उत्तर: सुंदरिया को वापस घर ले जाते हुए हीरासिंह को बहुत खुशी और राहत महसूस हो रही होगी क्योंकि वह अपनी प्यारी गाय को वापस अपने परिवार के पास ले जा रहा था। उसे थोड़ा दुख भी हो रहा होगा क्योंकि उसे सेठ के पैसे तनख्वाह से चुकाने थे, लेकिन सुंदरिया को अपने साथ देखकर उसे सुकून मिल रहा होगा।
भाषा की बात
1. नीचे दिए गए मुहावरों का प्रयोग कहानी में किया गया है। कहानी में इन्हें ढूँढ़िए और इनके अर्थ लिखकर अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्य बनाइए-

उत्तर:
लाज से गड़ जाना:
- अर्थ: शर्मिंदगी महसूस करना।
- वाक्य: जब मैंने गलत जवाब दिया, तो मैं कक्षा में लाज से गड़ गया।
दूध देने में कामधेनु:
- अर्थ: बहुत अधिक दूध देने वाली।
- वाक्य: हमारी गाय दूध देने में कामधेनु है, वह रोज़ दस लीटर दूध देती है।
जी भर जाना:
- अर्थ: बहुत उदास होना।
- वाक्य: अपने दोस्त को विदा करते समय मेरा जी भर गया।
एकटक देखना:
- अर्थ: लगातार और ध्यान से देखना।
- वाक्य: बच्चा नई खिलौना गाड़ी को एकटक देख रहा था।
आँख लगना:
- अर्थ: नींद आ जाना।
- वाक्य: किताब पढ़ते-पढ़ते रात को मेरी आँख लग गई।
2. नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं। वाक्यों में रेखांकित शब्द से मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द चुनकर वाक्य पुनः लिखिए-
(क) सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को जलन होती थी। (प्रसन्नता/ईर्ष्या)
उत्तर: सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को ईर्ष्या होती थी।
(ख) वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो। (प्रबंध/संकेत)
उत्तर: वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का प्रबंध कर दो।
(ग) सुंदरिया मेरी रुसवाई क्यों कराती है? (प्रशंसा / अपमान)
उत्तर: सुंदरिया मेरा अपमान क्यों कराती है?
(घ) सुंदरिया को देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा। (भावुक / प्रसन्न)
उत्तर: सुंदरिया को देखकर हीरासिंह भावुक हो उठा।
(ङ) आप मुझसे जितने महीने चाहें, कसकर चाकरी करवाएँ। (नौकरी / बागवानी)
उत्तर: आप मुझसे जितने महीने चाहें, कसकर नौकरी करवाएँ ।
3. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ आया? अपने विचार समूह में साझा कीजिए-
(क) रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था।
उत्तर:
- अर्थ: इस वाक्य का मतलब है कि हीरासिंह ने सुंदरिया को बेचकर पैसे तो ले लिए, लेकिन उसे बहुत दुख और उदासी महसूस हो रही थी। वह मन ही मन सुंदरिया को बेचने के फैसले से परेशान था।
- विचार: हीरासिंह को सुंदरिया से बहुत लगाव था। वह उसे सिर्फ एक गाय नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानता था। पैसे लेने के बावजूद उसका मन दुखी था, क्योंकि वह सुंदरिया को खोना नहीं चाहता था। यह दिखाता है कि प्यार और रिश्ते पैसे से ज्यादा कीमती होते हैं।
(ख) गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।
उत्तर:
- अर्थ: हीरासिंह सेठ से कह रहा है कि उसे सुंदरिया की देखभाल करने का काम दे दिया जाए, भले ही इसके लिए उसकी तनख्वाह कम कर दी जाए।
- विचार: यह वाक्य हीरासिंह के सुंदरिया के प्रति गहरे प्यार को दर्शाता है। वह सुंदरिया को अपने पास रखना चाहता था, ताकि वह उसकी देखभाल कर सके। वह पैसे से ज्यादा सुंदरिया की खुशी और अपनी नजदीकी को महत्व देता था।
(ग) गाय ने उसकी ओर देखा । जैसे पूछना चाहती थी – “क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?”
उत्तर:
- अर्थ: जब सुंदरिया को घोसी के साथ भेजा जा रहा था, उसने हीरासिंह की ओर देखा, जैसे वह पूछ रही हो कि क्या उसे सचमुच घोसी के साथ जाना चाहिए।
- विचार: यह वाक्य सुंदरिया और हीरासिंह के बीच गहरे भावनात्मक रिश्ते को दिखाता है। सुंदरिया को भी लगता था कि वह अपने परिवार से अलग हो रही है, और वह हीरासिंह से आखिरी बार पुष्टि करना चाहती थी। यह दर्शाता है कि पशु भी इंसानों की भावनाओं को समझते हैं।
(घ) फिर गाय के गले पर सिर रखकर बोला – “सुंदरिया, देख… मेरी ओछी मत करा। मैं दूर हूँ तो क्या ! इसमें मुझे सुख है?”
उत्तर:
- अर्थ: हीरासिंह सुंदरिया से कह रहा है कि वह कम दूध देकर उसका अपमान न करे। भले ही वह अब उसका मालिक न हो, उसे सुंदरिया की अच्छी देखभाल और सम्मान में खुशी मिलती है।
- विचार: यह वाक्य हीरासिंह की भावनाओं और सुंदरिया के प्रति उसकी चिंता को दर्शाता है। वह चाहता है कि सुंदरिया सेठ के यहाँ भी उतना ही दूध दे जितना वह पहले देती थी, ताकि उसकी इज्जत बनी रहे। यह दिखाता है कि हीरासिंह को सुंदरिया की खुशी और सम्मान की बहुत फिक्र थी।
समूह में साझा करने के लिए विचार:
- इन वाक्यों से पता चलता है कि हीरासिंह और सुंदरिया के बीच सिर्फ मालिक और पशु का रिश्ता नहीं था, बल्कि एक गहरा भावनात्मक बंधन था।
- पशु भी हमारी भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ हमारा रिश्ता परिवार जैसा हो सकता है।
- पैसों की जरूरत के बावजूद, प्यार और लगाव की कीमत ज्यादा होती है, जैसा कि हीरासिंह की कहानी में दिखता है।
- बच्चों से पूछा जा सकता है कि क्या उनके पास भी कोई ऐसा पालतू जानवर है, जिससे वे ऐसा ही प्यार करते हैं, और वे उसकी देखभाल कैसे करते हैं।
4. रेखांकित शब्द किसके लिए प्रयोग किए गए हैं? पहचानकर लिखिए-

उत्तर:

पाठ से आगे

1. नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। इनको देखते हुए अपने समूह में चर्चा कर यह सुझाइए कि हम पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। आप इनके अतिरिक्त भी कुछ और बिंदु जोड़ सकते हैं।
उत्तर: पशु-पक्षी भी हमारी तरह जीते-जागते जीव होते हैं। हम उनकी देखभाल कई तरीकों से कर सकते हैं;
जैसे:
- हम चिड़ियों के लिए पेड़ पर घर (बर्ड हाउस) बना सकते हैं और गर्मियों में उनके लिए पानी रख सकते हैं। उन्हें दाना डालना भी एक अच्छा काम है।
- पालतू जानवरों जैसे कुत्ते और बिल्ली को समय पर खाना खिलाना, नहलाना और साफ़ रखना चाहिए। ठंड के दिनों में हम उन्हें गरम कपड़े पहना सकते हैं।
- गाय और बकरी जैसे जानवरों को हम फल-सब्ज़ियों के छिलके खिलाकर उनका पेट भर सकते हैं।
- अगर कोई पक्षी या जानवर घायल हो जाए, तो हमें उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
निष्कर्ष: हमें पशु-पक्षियों से प्यार करना चाहिए और उनके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है।
2. आपके घर में दूध कहाँ से आता है? यह भी पता कीजिए कि किन-किन पशुओं का दूध पीने के लिए उपयोग किया जाता है।
उत्तर: हमारे घर में दूध आमतौर पर गाय या भैंस से आता है। कुछ घरों में लोग डेयरी (दूध का केंद्र) से भी दूध लाते हैं।
किन-किन पशुओं का दूध पीने के लिए उपयोग किया जाता है:
- गाय
- भैंस
- बकरी (कुछ लोग बकरी का दूध पीते हैं)
- ऊँट (कुछ क्षेत्रों में ऊँट का दूध पीया जाता है)
3. किसी गौशाला अथवा दुग्ध उत्पादन केंद्र (डेयरी फार्म) का भ्रमण कर पता कीजिए कि पशुओं का लालन-पालन कैसे किया जाता है। आप इस गतिविधि में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: मैंने अपने शिक्षक और माता-पिता के साथ पास की गौशाला का भ्रमण किया। वहाँ हमने देखा कि पशुओं का लालन-पालन इस तरह से किया जाता है:
- चारा और पानी: गायों और भैंसों को हर दिन ताजा घास, भूसा, और दाना खिलाया जाता है। उन्हें साफ पानी पीने के लिए दिया जाता है।
- साफ-सफाई: गोशाला को रोजाना साफ किया जाता है ताकि पशु स्वस्थ रहें। उनके बिस्तर (भूसे) को बदलते रहते हैं।
- देखभाल: पशुओं को नहलाया जाता है और उनकी नियमित जांच की जाती है। अगर कोई बीमार हो जाए, तो डॉक्टर को बुलाया जाता है।
- दूध निकालना: सुबह और शाम को पशुओं से दूध निकाला जाता है। कुछ जगहों पर मशीनों से और कुछ जगहों पर हाथ से दूध दुहा जाता है।
- वातावरण: पशुओं को धूप और हवा के लिए खुली जगह दी जाती है, और ठंड में उनकी देखभाल के लिए गर्म कपड़े या कंबल का इंतजाम होता है।
छात्रों को सुझाव: अपने शिक्षक या अभिभावक के साथ नजदीकी गौशाला या डेयरी फार्म पर जाएँ और वहाँ की जानकारी नोट करें, जैसे पशुओं की नस्ल, उनकी संख्या, और दूध उत्पादन का तरीका।
कल्पना की उड़ान

सेठ के घर से लौटकर जाते हुए हीरासिंह सुंदरिया को बहुत प्यार करता है, उसको सहलाता है एवं उससे बातें करता है। यदि सुंदरिया भी बोल सकती तो कल्पना कीजिए कि सुंदरिया और हीरासिंह के बीच क्या बातचीत होती।
उत्तर:

नाटक-मंचन
आपने ‘सुंदरिया’ कहानी पढ़ी। इस कहानी को नाटक के रूप में बदलकर कक्षा में अपने समूह के साथ नाटक-मंचन कीजिए।
उत्तर: नाटक: सुंदरिया
पात्र:
- हीरासिंह: गरीब किसान
- जवाहरसिंह: हीरासिंह का बेटा
- सुंदरिया: हीरासिंह की गाय (किसी छात्र द्वारा अभिनय)
- सेठ: दूध का मालिक
- घोसी: गाय को संभालने वाला व्यक्ति
दृश्य 1: घर में
(हीरासिंह और जवाहरसिंह घर में)
- हीरासिंह: (चिंतित होकर) अब क्या करूँ? मेरे पास इतना चारा नहीं है। सुंदरिया को बेच दूँ या…?
- जवाहरसिंह: (उदास होकर) पापा, सुंदरिया मेरी मौसी है। मैं उसे नहीं बेचने दूँगा।
- हीरासिंह: ठीक है, मैं सोचता हूँ कि नौकरी करके पैसे कमाऊँ और गाय को हमारे पास रखूँ।
दृश्य 2: सेठ के घर
- सेठ: हीरासिंह, हरियाणा की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो।
- हीरासिंह: (गाय की ओर देख कर) मेरी नजर में एक गाय है।
- सेठ: कैसी गाय?
- हीरासिंह: (गर्व से) वह इतनी सुंदर है कि दूध देने में कामधेनु है। पंद्रह सेर दूध देती है।
- सेठ: वाह! इसे लाओ।
दृश्य 3: गाय को घर से ले जाना
(हीरासिंह सुंदरिया को सहलाते हुए)
- हीरासिंह: सुंदरिया, अब हम थोड़े दिन के लिए दूर जाएंगे, पर मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूँगा।
- सुंदरिया: (गाय के अभिनय से) मुँह उठाकर हीरासिंह की ओर देखती है, जैसे कह रही हो – “क्या सचमुच मैं तुम्हारे साथ जाऊँ?”
- हीरासिंह: (गाय के गले पर सिर रखकर) देखो, मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है।
दृश्य 4: डेयरी में दूध देना
- सेठ: (चौंक कर) तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा? गाय ने पूरा दूध नहीं दिया।
- हीरासिंह: (शर्माते हुए) मैंने खुद पंद्रह सेर दूध दिया था।
- घोसी: (बोलता है) कल रात मैंने गाय को बाँधा था, लेकिन उसने फिर भी दूध गिरा दिया।
- हीरासिंह: (गाय से) सुंदरिया, अब घर वापस चलो।
(हीरासिंह सुंदरिया को सहलाता है और दोनों खुशी-खुशी चले जाते हैं)
अंत: सभी पात्र: (मंच की ओर देखकर) जानवर भी हमारे परिवार का हिस्सा होते हैं। हमें उनसे प्यार और दया से पेश आना चाहिए।
बूझो पहेली
राग सुरीला रंग से काली,
सबके मन को भाती।
बैठ पेड़ की डाली पर जो,
मीठे गीत सुनाती।
उत्तर: कोयल
जल-थल दोनों में है रहता,
धीमी जिसकी चाल।
खतरा पाकर सिमट जाए झट,
बन जाता खुद ढाल।
उत्तर: कछुआ
लकड़ी का एक ऐसा घर,
जो है जल में चलता।
सबको अपने साथ बिठाकर,
पार सभी को करता।
उत्तर: नाव
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
इस पाठ में दूध की मात्रा को ‘सेर’ द्वारा दर्शाया गया है जो मापन की एक प्राचीन भारतीय इकाई थी। इसी प्रकार वस्तुओं की मात्रा के मापन की और भी प्राचीन भारतीय इकाइयाँ प्रचलित थीं। आप पुस्तकालय से मापन से संबंधित पुस्तकें ढूँढ़कर मापन की अन्य प्राचीन भारतीय इकाइयों का पता लगाइए। इसके लिए आप अपने शिक्षक और अभिभावक की भी सहायता ले सकते हैं। कक्षा में सहपाठियों के साथ इसे साझा कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक की सहायता से मापन की प्राचीन भारतीय इकाइयों; जैसे – रत्ती, माशा, तोला, मन आदि की जानकारी प्राप्त करें तथा सहपाठियों से साझा करें।
भूल-भुलैया

जवाहरसिंह ने सुंदरिया के बारे में जानने के लिए अपने पिता हीरासिंह को पत्र लिखा है। महिला डाकिया उस पत्र को हीरासिंह तक पहुँचाना चाहती है। आपको इस पहेली को हल करते हुए उसे बाहर निकालना है ताकि वह हीरासिंह तक पहुँच सके।


उत्तर:
हाथी और चींटी


उत्तर: चींटी ने हेलमेट पहन रखा था।
चींटी बनें हाथी नहीं। ट्रैफिक नियमों का पालन करें। आप क्या-क्या कर सकते हैं-
चलने के लिए सड़क के किनारे बनी पटरियों का उपयोग करें। यदि आपको सड़क पार करनी हो तो सावधानी बरतें। लाल बत्ती होने की प्रतीक्षा करें। जब लाल बत्ती जलती है, तब वाहनों को रुकना होता है। आप सड़क के दोनों ओर देखें तथा जेब्रा क्रॉसिंग के चिह्न पर चलकर सड़क पार करें। यदि आप अपने अभिभावकों के साथ हों तो उनका हाथ अवश्य पकड़ें। सड़क पार करते समय न तो बातचीत करें और न ही दौड़ें, वरना ध्यान भटक सकता है।
अब आप नीचे दिए गए सड़क संकेतों (रोड साइन) को पहचानिए और समझिए –

उत्तर: हम ट्रैफिक नियमों का पालन करके सुरक्षित रह सकते हैं। इसके लिए हम निम्नलिखित काम कर सकते हैं:
- सड़क के किनारे बनी पटरियों (फुटपाथ) का उपयोग करके चलें।
- सड़क पार करते समय सावधानी बरतें और लाल बत्ती होने तक इंतजार करें।
- लाल बत्ती जलने पर वाहन रुकते हैं, इसलिए उस समय सड़क पार करें।
- सड़क के दोनों ओर देखें और जेब्रा क्रॉसिंग पर चलकर सड़क पार करें।
- अगर अभिभावकों के साथ हों, तो उनका हाथ पकड़ें।
- सड़क पार करते समय न बात करें और न दौड़ें, ताकि ध्यान न भटके।
सड़क संकेतों (रोड साइन) को पहचानिए और समझिए:
- पैदल क्रॉसिंग
- अर्थ: यह संकेत बताता है कि यह जगह पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने के लिए है।
- क्या करें: जेब्रा क्रॉसिंग पर सावधानी से चलें।
- रुकिए
- अर्थ: यह संकेत वाहन चालकों को रुकने का आदेश देता है, खासकर जहाँ खतरा हो सकता है।
- क्या करें: अगर पैदल हैं, तो रुककर वाहनों को गुजरने दें।
- हेलमेट पहनिए
- अर्थ: यह संकेत बाइक या स्कूटर चलाने वालों को हेलमेट पहनने की सलाह देता है।
- क्या करें: अगर साइकिल चलाते हैं, तो हेलमेट पहनें।
- सुरक्षा पेटी अनिवार्य है
- अर्थ: यह संकेत कार में बैठने वालों को सीट बेल्ट पहनने का नियम बताता है।
- क्या करें: कार में बैठते समय हमेशा सीट बेल्ट बाँधें।
- सार्वजनिक पैदल पथ (फुटपाथ)
- अर्थ: यह संकेत पैदल यात्रियों के लिए बनी सुरक्षित पगडंडी को दर्शाता है।
- क्या करें: हमेशा फुटपाथ पर चलें, सड़क पर नहीं।
- फुटपाथ पर चलें
- अर्थ: यह संकेत पैदल यात्रियों को सलाह देता है कि वे सड़क के किनारे बने फुटपाथ का उपयोग करें।
- क्या करें: सड़क के बीच में न चलें, फुटपाथ पर रहें।
ये संकेत हमें सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से समझें और मानें!