04. Short & Long Question Answers: साङकेन

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: वल्लरी के पिताजी कहाँ काम करते थे?
उत्तर: वल्लरी के पिताजी अरुणाचल प्रदेश के चौखाम गाँव में अधिकारी थे। उन्होंने अपने परिवार को दिल्ली से वहाँ बुला लिया था।

प्रश्न 2: चौखाम गाँव दिल्ली से किस प्रकार अलग था?
उत्तर: चौखाम गाँव शांत और हरा-भरा था। वहाँ भीड़-भाड़ और शोर नहीं था, लोग हमेशा मुस्कुराते रहते थे।

प्रश्न 3: वल्लरी चाऊतान के घर क्यों गई?
उत्तर: वल्लरी अपने पिताजी के साथ चाऊतान के घर गई थी। वहाँ चाऊतान के माता-पिता ने उनका स्वागत किया और पकवान खिलाए।

प्रश्न 4: शोभायात्रा में लोग क्या लेकर जा रहे थे?
उत्तर: शोभायात्रा में लोग पालकियों में भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ लेकर जा रहे थे। सभी लोग गाकर और बजाकर बहुत खुश थे।


प्रश्न 5: मंदिर किस प्रकार सजाया गया था?
उत्तर: मंदिर बाँस और खपच्चियों (लकड़ी की पट्टियों) से बनाया गया था। उसे फूलों और हरी टहनियों से सजाया गया था।

प्रश्न 6: लोग त्योहार में किस प्रकार आनंद मना रहे थे?
उत्तर: लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे, चावल का आटा लगा रहे थे और गीत-नृत्य कर रहे थे। सब बहुत प्रसन्न थे।

प्रश्न 7: वल्लरी को साङकेन का त्योहार किस त्योहार जैसा लगा?
उत्तर: वल्लरी को साङकेन का त्योहार अपने शहर की होली जैसा लगा। क्योंकि दोनों में पानी और रंगों से खेला जाता है।

प्रश्न 8: साङकेन का त्योहार कितने दिन मनाया जाता है?
उत्तर: साङकेन का त्योहार तीन दिन तक मनाया जाता है। तीसरे दिन मूर्तियाँ फिर से बौद्ध-विहार ले जाई जाती हैं।

प्रश्न 9: त्योहार के अंत में भिक्षु लोगों को क्या देते हैं?
उत्तर: त्योहार के अंत में भिक्षु गाँव वालों को आशीर्वाद देते हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि सब खुश रहें और खेती अच्छी हो।

प्रश्न 10: चाऊतान के माता-पिता ने वल्लरी का स्वागत कैसे किया?
उत्तर: चाऊतान के माता-पिता ने वल्लरी और उसके पिताजी का बहुत प्यार से स्वागत किया। उन्होंने स्वादिष्ट पकवान खिलाए। वे बहुत खुश थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: वल्लरी ने चौखाम गाँव में क्या-क्या देखा?
उत्तर: वल्लरी ने चौखाम गाँव में हरियाली, फूल और शांत वातावरण देखा। वह अपने दोस्त चाऊतान के घर गई। वहाँ के लोगों ने उसका स्वागत किया और स्वादिष्ट पकवान खिलाए। उसने खिड़की से शोभायात्रा देखी, जिसमें मूर्तियाँ मंदिर ले जाई जा रही थीं। उसे गाँव का त्योहार और लोगों की खुशी देखकर बहुत अच्छा लगा।

प्रश्न 2: शोभायात्रा का दृश्य कैसा था?
उत्तर: शोभायात्रा में लोग गाते-बजाते और नाचते हुए जा रहे थे। उनके कंधों पर पालकियाँ थीं जिनमें भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ थीं। रास्ते भर लोग आनंद मना रहे थे। जब वे मंदिर पहुँचे तो भिक्षुओं ने मंत्र पढ़कर मूर्तियों की पूजा की। पूरा वातावरण बहुत पवित्र और खुशियों से भरा था।

प्रश्न 3: साङकेन का त्योहार कैसे मनाया जाता है?
उत्तर: साङकेन का त्योहार तीन दिन तक चलता है। इसमें लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं और मंदिर सजाते हैं। वे एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और चावल का आटा लगाते हैं। सब मिलकर गाते और नाचते हैं। आखिरी दिन मूर्तियाँ वापस बौद्ध-विहार ले जाई जाती हैं। फिर भिक्षु सबको आशीर्वाद देते हैं।

प्रश्न 4: वल्लरी ने साङकेन की तुलना होली से क्यों कि?
उत्तर: वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और आटे से खेल रहे थे। उसे अपने शहर की होली याद आ गई जिसमें लोग रंग और पानी से खेलते हैं। होली में भी लोग मिठाइयाँ बाँटते और खुशियाँ मनाते हैं। दोनों त्योहारों में नया साल शुरू होता है और लोग मिलकर आनंद मनाते हैं। इस कारण उसने तुलना कि।


प्रश्न 5: इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि सभी त्योहारों का उद्देश्य खुशी फैलाना और लोगों को जोड़ना होता है। हमें अलग-अलग परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। जब हम साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं तो दोस्ती और प्यार बढ़ता है। अतिथियों का स्वागत और उनका आदर करना भी अच्छी आदत है। त्योहार हमें एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।