Short & Long Question Answers: मेरा बचपन
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 1: लेखक को कौन-सा खेल सबसे प्रिय था?
उत्तर: लेखक को गुल्ली-डंडा सबसे प्रिय था। इसे खेलने के लिए ज्यादा सामान नहीं चाहिए था। बस पेड़ की टहनी से गुल्ली और डंडा बना लेते थे।
प्रश्न 2: लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ कहाँ पढ़ने जाते थे?
उत्तर: लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ मौलवी साहब के पास पढ़ने जाते थे। हलधर उनसे दो साल बड़े थे।
प्रश्न 3: लेखक को रामलीला क्यों पसंद थी?
उत्तर: लेखक को रामलीला इसलिए पसंद थी क्योंकि उसमें बहुत मजा आता था। वे पात्रों की सजावट भी देखते और छोटे-मोटे कामों में मदद करते थे।
प्रश्न 4: लेखक अपने बचपन में किस तरह के घर में रहते थे?
उत्तर: लेखक कच्चे और टूटे हुए घर में रहते थे। वे पयाल का बिछौना बिछाकर सोते थे।
प्रश्न 5: खेलों में अमीर-गरीब का कोई फर्क क्यों नहीं था?
उत्तर: क्योंकि सभी बच्चे मिलकर खेलते थे। न कोई दिखावा था और न ही कोई घमंड।
प्रश्न 6: लेखक सुबह-सुबह खाने में क्या खाते थे?
उत्तर: लेखक और उनका भाई सुबह मटर और जौ का चबेना खाते थे। यही उनका नाश्ता था।
प्रश्न 7: लेखक कहते हैं कि विदेशी खेलों की सबसे बड़ी कमी क्या है?
उत्तर: विदेशी खेलों को खेलने में बहुत पैसे खर्च होते हैं। जबकि भारतीय खेल जैसे गुल्ली-डंडा साधारण और सस्ते होते हैं।
प्रश्न 8: लेखक के पिता जी क्यों नाराज होते थे?
उत्तर: क्योंकि लेखक न नहाते थे, न ठीक से खाते थे। बस गुल्ली-डंडा खेलने में लगे रहते थे।
प्रश्न 9: गुल्ली-डंडा खेलते समय क्या खतरे हो सकते थे?
उत्तर: इस खेल में कभी-कभी चोट लग जाती थी। लेखक की आँख पर दाग पड़ा और कुछ दोस्तों को बैसाखी का सहारा भी लेना पड़ा।

प्रश्न 10: बचपन में लेखक किस बात पर सबसे ज़्यादा खुश होते थे?
उत्तर: लेखक बचपन में दोस्तों के साथ खेलने पर सबसे ज़्यादा खुश होते थे। उन्हें खासकर गुल्ली-डंडा खेलना बहुत अच्छा लगता था। खेल में उन्हें मिठाइयों से भी ज़्यादा मिठास मिलती थी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 1: लेखक ने अपने बचपन का घर और जीवन कैसा बताया है?
उत्तर: लेखक ने अपने बचपन का घर बहुत साधारण बताया है। वे कच्चे टूटे घर में रहते थे और पयाल का बिछौना बिछाकर सोते थे। वे नंगे पाँव खेतों में घूमते और आम के पेड़ों पर चढ़ते थे। उनका जीवन सादगी और मस्ती से भरा था। घर की गरीबी के बावजूद वे बहुत खुश रहते थे।

प्रश्न 2: रामलीला देखने में लेखक को क्या आनंद आता था?
उत्तर: लेखक को रामलीला बहुत पसंद थी। उनके घर के पास ही रामलीला का मैदान था। दोपहर से ही पात्रों की सजावट शुरू हो जाती थी। लेखक बड़े उत्साह से सजावट देखते और छोटे-मोटे कामों में मदद भी करते थे। उन्हें रामलीला का आनंद इतना आता था कि उसका उत्साह जीवनभर याद रहा।
प्रश्न 3: गुल्ली-डंडा खेल की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: गुल्ली-डंडा बहुत सरल और सस्ता खेल है। इसमें महंगे सामान या खास मैदान की जरूरत नहीं होती। बस टहनी काटकर गुल्ली और डंडा बना लिया जाता है। इसमें सभी बच्चे मिलकर खेलते थे। खेलते समय बहुत मजा आता था और भाईचारा बढ़ता था। लेखक इसे सभी खेलों का राजा मानते थे।
प्रश्न 4: लेखक ने भारतीय और अंग्रेजी खेलों की तुलना कैसे की है?
उत्तर: लेखक कहते हैं कि भारतीय खेल सरल और सस्ते होते हैं। इन्हें खेलने के लिए ज्यादा पैसे या साधन नहीं चाहिए। लेकिन अंग्रेजी खेलों में बहुत खर्च होता है। लोग आज विदेशी खेलों की ओर आकर्षित हो गए हैं। लेखक का मानना है कि हमें अपने देशी खेलों की कद्र करनी चाहिए।
प्रश्न 5: इस कहानी से हमें बचपन और खेलों के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि बचपन बहुत अनमोल होता है। उस समय की सादगी और खुशी जीवनभर याद रहती है। खेलों से भाईचारा, सहयोग और मिलजुलकर रहने की आदत बनती है। हमें केवल महंगे विदेशी खेलों के पीछे नहीं भागना चाहिए। बल्कि अपने देशी खेलों की भी कद्र करनी चाहिए।