07. दोहे –अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 73

प्रश्न  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये – 

(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?
 उत्तर: 
प्रेम का धागा एक बार टूटने पर, जब भी उसे जोड़ने की कोशिश की जाती है, तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। वह पहले जैसा नहीं जुड़ पाता, क्योंकि इसमें अविश्वास और संदेह की दरार आ जाती है।

(ख) हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?

उत्तर: हमें अपना दुख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कोई लाभ नहीं होता। जब हम अपनी मन की बातें दूसरों से साझा करते हैं, तो वे उनका मजाक उड़ाते हैं।

(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तर: रहीम ने सागर की तुलना में पंक जल को महान इसलिए कहा है, क्योंकि यह छोटा होने के बावजूद लोगों और जीव-जंतुओं की प्यास को बुझाता है। जबकि सागर विशाल होने के बावजूद किसी की प्यास नहीं बुझा पाता।

(घ) एक को साधने से सब कैसे सध जाता है?
उत्तर: कवि का मानना है कि ईश्वर एक है और उसकी साधना करनी चाहिए। जैसे जड़ को सींचने से फल-फूल मिलते हैं, वैसे ही एक ईश्वर की पूजा करने से सभी काम सफल होते हैं।

(ड़) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नही कर पाता?
 उत्तर: 
जलहीन कमल की रक्षा सूर्य इसलिए नहीं कर पाता क्योंकि उसके पास कोई सामर्थ्य नहीं होता। मदद केवल वही करता है, जिसके पास आंतरिक बल होता है।

(च) अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?
 उत्तर: 
अपने पिता के वचन को निभाने के लिए अवध नरेश को चित्रकूट जाना पड़ा।

(छ) ‘नट’ किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
 उत्तर
: ‘नट’ कुंडली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है।

(ज) ‘मोती, मानुष, चून’ के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
 उत्तर: 
मोती का अर्थ है चमक या आब। इसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं है। ‘मानुष’ के संदर्भ में पानी का अर्थ मान-सम्मान है। अगर मानुष का पानी अर्थात सम्मान समाप्त हो जाए, तो उसका जीवन व्यर्थ है। ‘चून’ के संदर्भ में पानी का अर्थ अस्तित्व से है। पानी के बिना आटा नहीं गूँथा जा सकता।

प्रश्न 2. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −

(क) टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।
उत्तर: कवि इस पंक्ति द्वारा बता रहा है कि प्रेम का धागा एक बार टूटने पर फिर से जुड़ना कठिन होता है। अगर जुड़ भी जाए, तो पहले जैसा प्रेम नहीं रह जाता।

(ख) सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।
उत्तर: कवि का कहना है कि अपने दुखों को किसी को नहीं बताना चाहिए। दूसरे लोग सहायता नहीं करेंगे और उसका मजाक भी उड़ाएंगे।

(ग) रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।
उत्तर: इन पंक्तियों द्वारा कवि एक ईश्वर की आराधना पर जोर देते हैं। जड़ को सींचने से पूरे पेड़ पर प्रभाव पड़ता है।

(घ) दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
उत्तर: दोहा एक ऐसा छंद है जिसमें अक्षर कम होते हैं, पर उनमें गहरा अर्थ छिपा होता है।

(ङ) नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
उत्तर: जिस तरह संगीत की मोहिनी तान पर रीझकर हिरण अपने प्राण तक त्याग देता है, उसी तरह मनुष्य धन कला पर मुग्ध होकर धन अर्जित करने को अपना उद्देश्य बना लेता है।

(च)  जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।
उत्तर: हर छोटी वस्तु का अपना अलग महत्व होता है। कपड़ा सिलने का कार्य तलवार नहीं कर सकती, वहाँ सुई ही काम आती है।

(च) पानी गए न उबरै, मोती, मानुष, चून।
उत्तर: जीवन में पानी के बिना सब कुछ बेकार है। इसे बनाकर रखना चाहिए। पानी के बिना मोती, सम्मान और आटा सब व्यर्थ हैं।

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प्रश्न  3. निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है −

(क) जिस पर विपदा पड़ती है वही इस देश में आता है। 
उत्तर− ”जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस।”

(ख) कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती।
उत्तर− ”बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।”

(ग) पानी के बिना सब सूना है अत: पानी अवश्य रखना चाहिए।
उत्तर− ”रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।”

4. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −

उदाहण : कोय  कोई जे – जोज्यों—–कछु—————-नहिं—–कोय—————-धनि—–आखर—–जिय—–थोरे—-होय—–माखन—-तरवारि—-सींचिबो—-मूलहिं——पिअत—-पिआसो—–बिगरी—-आवे—–सहाय—-ऊबरै—–बिनु—-बिथा—–अठिलैहैं—-परिजाय——- —–

उत्तरज्यों-जैसेकछु-कुछनहि-नहींकोय-कोईधनि-धन्यआखर-अक्षरजिय-जीथोरे-थोड़ेहोय-होनामाखन-मक्खनतरवारि-तलवारसींचिबो-सींचनामूलहिं-मूल कोपिअत-पीनापिआसो-प्यासाबिगरी-बिगड़ीआवे-आएसहाय-सहायकऊबरै-उबरनाबिनु-बिनाबिथा-व्यथाअठिलैहैं-हँसी उड़ानापरिजाए-पड़ जाए