परिचय

इस अध्याय में विभिन्न जीवों के पैरों की संख्या के बारे में बताया गया है। इसमें अध्यापिका और छात्र-छात्राओं के बीच जीवों और कीटों के पैरों की संख्या पर चर्चा की गई है। यह चर्चा बच्चों को यह समझने में मदद करती है कि विभिन्न जीवों के शरीर की संरचना कितनी अलग होती है।
व्याख्या
अध्याय की शुरुआत में, अध्यापिका बच्चों को यह बताती हैं कि जीवों के पैरों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। कुछ जीवों के पैर बिल्कुल नहीं होते, जबकि कुछ के कई सौ पैर भी हो सकते हैं। बच्चों की उत्सुकता और उनके जवाब इस बातचीत को और भी दिलचस्प बना देते हैं। इस चर्चा के माध्यम से, पाठकों को जीवों के बारे में बुनियादी बातें समझ में आती हैं और वे प्रकृति की अनोखी विविधता की कदर करना सीखते हैं।
धरती पर जीवों के पैरों की संख्या
- अध्यापिका बच्चों के साथ एक दिलचस्प बातचीत करती हैं, जिसमें वे उनसे पूछती हैं कि जीवों के पैरों की संख्या कितनी हो सकती है।
- बच्चे अपने अनुभव साझा करते हैं, जैसे कि बरसात में केंचुए कैसे पेट के बल सरकते हैं और उनके पैर नहीं होते।
- इस प्रकार, बच्चों को यह समझ में आता है कि कुछ जीव बिना पैरों के भी जीवन व्यतीत कर सकते हैं।


द्विपाद और चार पैरों वाले जीव
- अध्यापिका बच्चों को द्विपाद (दो पैरों वाले) और चतुष्पाद (चार पैरों वाले) जीवों के बारे में जानकारी देती हैं।
- वे बच्चों से पूछती हैं कि वे कौन-कौन से जीव जानते हैं जो द्विपाद या चतुष्पाद होते हैं।

- बच्चे अपने ज्ञान के अनुसार विभिन्न जीवों के नाम बताते हैं, जैसे कि कबूतर, तोता, गाय, भैंस, कुत्ता, बिल्ली, शेर आदि।
- इस चर्चा के माध्यम से, बच्चों को यह समझ में आता है कि ज्यादातर बड़े जानवर चार पैरों वाले होते हैं, जो उन्हें स्थिरता और चलने में मदद करते हैं, जबकि कुछ जीव दो पैरों पर भी चलते हैं।
कीटों के पैरों की संख्या
- अध्यापिका बच्चों से पूछती हैं कि कीटों के पैरों की संख्या कितनी होती है। बच्चे अपने अनुभवों को साझा करते हैं, जैसे कि चींटी के पैर कितने होते हैं।
- अध्यापिका उन्हें बताती हैं कि अधिकांश कीटों, जैसे चींटी, मक्खी, तितली, के छह पैर होते हैं। वे बच्चों से यह भी पूछती हैं कि क्या वे कोई ऐसा कीट जानते हैं जिसके पैर छह से अधिक होते हैं।
- इस चर्चा से बच्चों को यह ज्ञान मिलता है कि कीट छोटे होते हुए भी विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं और उनकी शारीरिक संरचना भी विभिन्न होती है।

कनखजूरा
- अध्यापिका बच्चों को कनखजूरा के बारे में बताती हैं, जिसके पैरों की संख्या अत्यधिक हो सकती है। वे बच्चों से पूछती हैं कि क्या उन्होंने कभी कनखजूरा देखा है। \

- इसके बाद, अध्यापिका उन्हें बताती हैं कि कनखजूरा आमतौर पर गीली और अंधेरी जगहों में पाया जाता है, जैसे कि गीले पेड़ के तने या गीली घास में। इस वजह से उसे देख पाना कठिन होता है।
- कनखजूरा के बारे में जानकर बच्चे यह समझते हैं कि धरती पर ऐसे भी जीव होते हैं जिनकी संरचना बहुत ही अनोखी होती है।
सारांश
यह अध्याय बच्चों को जीवों और कीटों के पैरों की संख्या के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। यह उनके ज्ञान को बढ़ाता है और उन्हें अपने आस-पास के पर्यावरण के प्रति और अधिक जागरूक बनाता है। इस प्रकार, बच्चों की समझ में सुधार होता है और वे जीवन की विविधता को और बेहतर तरीके से समझने लगते हैं।