कहानी का सारांश

इस कहानी में, सोमारू और कमली जंगल घूमने गए। वहाँ उन्हें बहुत भूख लगी। वे एक गाय से दूध मांगने गए, पर गाय ने कहा कि वह दूध दे नहीं सकती क्योंकि उसे घास चाहिए। तब सोमारू और कमली घास लाने गए, पर वह सूखी हुई थी और घास ने पानी की भी तलाश की। फिर वे पानी लाने गए, पर नदी भी सूखी हुई थी और पानी की तलाश में बरसात की आवश्यकता थी। तब वे बादल लाने गए, पर बादल टँगे थे और मेंढक की सहायता चाहिए थी। फिर वे मेंढक के पास गए, पर मेंढक ने उन्हें डर से बाहर नहीं जाने दिया क्योंकि वह कहते थे कि उन्हें बच्चे पत्थर मारते हैं। लेकिन सोमारू और कमली ने मेंढक को माफ कर दिया और उसे टँगे करने के लिए कहा। मेंढक टँगे करने लगा और बादल आकर बरसात कर दी। नदी में पानी बहने लगा और घास हरी हो गई। फिर सोमारू और कमली ने गाय को वही हरी हुई घास दी और गाय ने उन्हें दूध दिया। फिर वे खुशी-खुशी अपने घर की ओर बढ़ गए।
इस कहानी में हमें सिखने को मिलता है कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए और हमें उनके साथ दोस्ती करनी चाहिए।
शब्दार्थ
- जंगल – एक जगह जहाँ पेड़-पौधों और जानवर होते हैं।
- भूख – जब हमें खाने की तमन्ना होती है।
- गाय – एक पालतू जानवर जो दूध देती है।
- घास – पालतू जानवरों के खाने का खास आहार।
- पानी – जीवन के लिए जरूरी द्रव्य, हम पीते हैं।
- नदी – एक प्रकार का बड़ा पानी का जलस्रोत, जो बहता है।
- बादल – जो आकाश में दिखाई देते हैं और बरसात लाते हैं।
- मेंढक – एक प्रकार का छोटा सा जानवर, जो टँगे करके बरसात लाने में मदद करता है।
- डर – जब हमें किसी चीज़ से डर लगता है या हमें डरावना लगता है।
- माफ करो – जब हम किसी से अपनी गलती के लिए माफी मांगते हैं और किसी के दोष को माफ कर देते हैं।