लेखक परिचयआपने जो रोचक यात्रा-वृत्तांत पढ़ा है, वह हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखा गया है। ‘दिनकर’ की रचनाओं की विशेषता भारत और उसकी संस्कृति है। उनकी रचनाओं में वीरता, उत्साह और देशभक्ति का भाव प्रमुख रूप से पाया जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी भारत का गौरव-गान उनकी रचनाओं का प्रमुख विषय रहा। उन्होंने बच्चों के लिए भी पुस्तकें लिखी हैं, जैसे— मिर्च का मजा, पटाखों की छुट्टी और सूरत का ब्याह आदि।

मुख्य विषय
इस पाठ का मुख्य विषय प्रवासी भारतीयों की मातृभूमि के प्रति लगाव और उनकी संस्कृति का संरक्षण है। लेखक ने बताया है कि कैसे मॉरीशस जैसे देश में बसे भारतीय अपनी भारतीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखे हुए हैं। यह पाठ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
कहानी का सार
लेखक का यात्रा विवरण
कहानी “हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान” में लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ अपने मॉरिशस यात्रा के अनुभवों को साझा करते हैं। लेखक की यात्रा 15 जुलाई को दिल्ली से शुरू होती है। 16 जुलाई को वे मुंबई से और 17 जुलाई को नैरोबी (केन्या) से मॉरिशस के लिए रवाना होते हैं। नैरोबी में उनके पास एक रात और दो दिन ठहरने का समय होता है, इसलिए वे नैरोबी के नेशनल पार्क में घूमने जाते हैं।
नैरोबी का नेशनल पार्क एक विशाल जंगल है, जहाँ पेड़ों की कमी और घास की बहुतायत है। यहाँ वे सिंहों को देखने की कोशिश करते हैं। काफी समय तक सफर करने के बाद वे एक जगह पहुँचते हैं, जहाँ सिंह आराम कर रहे होते हैं। सिंहों की गतिविधियों को देखकर लेखक को एहसास होता है कि ये सिंह पर्यटकों की उपस्थिति से बिल्कुल अप्रभावित हैं। इसी दौरान कुछ दूर हिरनों का एक झुंड दिखता है, जिनके बीच एक जिराफ खड़ा होता है। जैसे ही सिंहों की नजर हिरनों पर पड़ती है, वे शिकार की तैयारी करने लगते हैं। हिरनों के झुंड में हलचल होती है, लेकिन वे तुरंत भागने के बजाय सतर्क होकर खड़े रहते हैं।
मॉरिशस का परिचय
मॉरिशस एक छोटा-सा द्वीप है जो हिंद महासागर में स्थित है। लेखक ने मॉरिशस को ‘हिंद महासागर का मोती’ और ‘भारत-सागर का सबसे खूबसूरत सितारा’ कहा है। मॉरिशस का क्षेत्रफल लगभग 720 वर्गमील है और यह द्वीप चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। मॉरिशस की अधिकांश जनसंख्या भारतीय मूल की है, जिनमें से 67 प्रतिशत लोग भारतीय वंश के हैं और उनमें से अधिकांश हिंदू हैं। इस कारण मॉरिशस को ‘छोटा-सा हिंदुस्तान’ भी कहा जा सकता है।

भारतीय संस्कृति का प्रभाव
मॉरिशस में भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव है। यहां के लोग भारतीय त्योहारों को बड़े धूमधाम से मनाते हैं, जैसे दशहरा, और वे धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मॉरिशस के मध्य में स्थित ‘परी-तालाब’ नामक झील एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहां पर भक्तगण कांवड़ लेकर जाते हैं और वहां की पवित्र जल को अपने गांव के मंदिरों में चढ़ाते हैं। यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
भाषा और समाज
मॉरिशस में मुख्य भाषा फ्रेंच है, लेकिन अधिकांश भारतीय मूल के लोग भोजपुरी बोलते हैं, जो वहां की दूसरी सबसे प्रमुख भाषा है। यहां की भोजपुरी भाषा में फ्रेंच के शब्द भी मिलते हैं, जिससे यह भाषा और भी अनोखी बन जाती है। भारतीय मूल के लोगों ने मॉरिशस की कृषि, विशेषकर गन्ने की खेती और चीनी उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारत और मॉरिशस के संबंध
लेखक ने मॉरिशस को भारत का एक हिस्सा माना है, क्योंकि वहां के लोग भारतीय संस्कृति और परंपराओं का पालन करते हैं। मॉरिशस में भारतीय संस्कृति को देखने के बाद लेखक को गर्व महसूस होता है, और वह इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारतीय संस्कृति कितनी जीवंत और स्थायी है।
कहानी की मुख्य घटनाएं
- लेखक की यात्रा दिल्ली से शुरू होती है और वे नैरोबी (केन्या) में रुकते हैं, जहाँ वे नेशनल पार्क में सिंहों को देखते हैं।
- लेखक नैरोबी से मॉरिशस पहुँचते हैं, जहाँ वे मॉरिशस की भारतीय संस्कृति और वहाँ के लोगों के बारे में बताते हैं।
- मॉरिशस में भारतीय समुदाय की प्रमुखता, उनकी धार्मिकता, और उनकी सांस्कृतिक पहचान को कहानी में विस्तार से बताया गया है।
- लेखक मॉरिशस के प्रमुख त्यौहार शिवरात्रि का वर्णन करते हैं, जिसमें भारतीय लोग परी-तालाब पर जाकर शिवजी की पूजा करते हैं।
- लेखक मॉरिशस के मंदिरों और शिवालयों की स्वच्छता और सुरम्यता की प्रशंसा करते हैं, और भारत में भी ऐसे स्थानों को स्वच्छ रखने का आग्रह करते हैं।
कहानी से शिक्षाइस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारतीय संस्कृति और परंपराएँ अत्यंत प्राणवंत और चिरायु हैं, चाहे भारतीय कहीं भी क्यों न रहें। उन्होंने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा है और विदेश में भी अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। यह हमें गर्व करने का अवसर देती है कि भारतीय अपनी पहचान को बनाए रखने में सक्षम हैं और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान रखते हैं।
शब्दावली
- यात्रा वृत्तांत: एक यात्रा के दौरान के अनुभवों का वर्णन
- नैरोबी: केन्या की राजधानी
- सिंह: शेर
- मॉरिशस: हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप राष्ट्र
- परी-तालाब: मॉरिशस में स्थित एक झील, जिसे हिंदुओं ने धार्मिक महत्व दिया है
- शिवरात्रि: हिंदुओं का एक प्रमुख धार्मिक पर्व
- काँवर: शिवजी की पूजा के लिए जल भरने के लिए प्रयोग में आने वाला बर्तन
निष्कर्ष“हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान” एक प्रेरणादायक कहानी है, जो मॉरिशस में बसे भारतीय समुदाय की धार्मिकता, सांस्कृतिक पहचान, और स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। यह कहानी भारतीय संस्कृति की शक्ति और उसकी प्राणवत्ता का प्रतीक है, जो हमें अपनी पहचान पर गर्व करने का संदेश देती है। कहानी से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि भारतीय जहाँ भी जाते हैं, वहाँ अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेज कर रखते हैं, जिससे वह स्थान भी छोटा-सा हिंदुस्तान बन जाता है।