9. आदमी का अनुपात – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?

  • पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण
  • ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म *
  • सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
  • समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला

उत्तर: ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
कविता में बताया गया है कि मानव और पृथ्वी ब्रह्मांड की विशालता में बहुत छोटे हैं। यह अनुपात कमरे, घर, मोहल्ले, नगर, देश, पृथ्वी और ब्रह्मांड के संदर्भ में समझाया गया है।

(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?

  • पृथ्वी और सूर्य
  • देश और नगर
  • घर और कमरा
  • मानव और ब्रह्मांड *

उत्तर: मानव और ब्रह्मांड
कविता का मुख्य विषय मानव की छोटी सी स्थिति और ब्रह्मांड की विशालता के बीच का अनुपात है। यह दिखाता है कि मानव कितना छोटा है, फिर भी वह अहंकार और नफरत में लिप्त रहता है।

(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?

  • त्याग, ज्ञान और प्रेम में
  • सेवा और परोपकार में
  • ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घुणा में *
  • उदारता, धर्म और न्याय में

उत्तर: ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
कविता में कहा गया है कि मानव अपने छोटे आकार के बावजूद ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसे नकारात्मक भावों में डूबा रहता है।

(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?

  • वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता। *
  • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
  • वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
  • वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है। *

उत्तर: वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।, वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
कविता बताती है कि मानव ब्रह्मांड में अपनी छोटी स्थिति को भूलकर अहंकारी हो जाता है और अपनी सीमाओं को नहीं समझता। वह दूसरों पर शासन करने और दीवारें खड़ी करने की कोशिश करता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: हमने अपने दोस्तों के साथ चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:

  • ब्रह्मांड में मानव का स्थान अत्यंत सूक्ष्म है इसलिए सही है क्योंकि कविता में बताया गया है कि मानव का आकार कमरे, घर, मोहल्ले, शहर, देश, पृथ्वी और ब्रह्मांड की विशालता की तुलना में बहुत छोटा है। यह अनुपात कविता के पहले और दूसरे प्रसंग में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।
  • कविता में मानव और ब्रह्मांड के अनुपात को दिखाया गया है इसलिए सही है क्योंकि कविता का मुख्य विषय यह है कि मानव कितना छोटा है, फिर भी वह नकारात्मक भावनाओं में डूबा रहता है। यह बात पूरे कविता में पृथ्वी, नक्षत्रों और ब्रह्मांड के संदर्भ से समझाई गई है।
  • मानव ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में लिप्त रहता है इसलिए सही है क्योंकि कविता के तीसरे प्रसंग में कवि कहते हैं कि मानव अपने छोटे आकार के बावजूद इन नकारात्मक भावनाओं को अपने भीतर समेटे रहता है और दूसरों पर हावी होने की कोशिश करता है।
  • मानव का सबसे बड़ा दोष अपनी सीमाओं को न समझना और अहंकारी होना है इसलिए सही है क्योंकि कविता में दिखाया गया है कि मानव ब्रह्मांड की विशालता में अपनी छोटी स्थिति को भूलकर अहंकार करता है, दीवारें खड़ी करता है और दूसरों पर शासन करना चाहता है।
  • कविता हमें मिल-जुलकर रहने की सीख देती है इसलिए सही है क्योंकि कवि का उद्देश्य यह दिखाना है कि जब हम इतने विशाल ब्रह्मांड में छोटे हैं, तो हमें झगड़ों और नफरत के बजाय प्रेम और विश्वास के साथ रहना चाहिए। यह संदेश कविता की शिक्षा में स्पष्ट है।

पंक्तियों पर चर्चा

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। अपने समूह में इनके अर्थ पर चर्चा कीजिए और लिखिए-

(क) “अनगिन नक्षत्रों में/पृथ्वी एक छोटी/करोड़ों में एक ही।”
उत्तर: 
यह पंक्ति कविता के दूसरे प्रसंग से है, जिसमें कवि ब्रह्मांड की विशालता के सामने पृथ्वी की छोटी स्थिति को दर्शाते हैं। “अनगिन नक्षत्रों” से तात्पर्य है अनगिनत तारे और ग्रह, जिनमें हमारी पृथ्वी सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। “करोड़ों में एक ही” यह बताता है कि पृथ्वी ब्रह्मांड में बहुत मामूली और अद्वितीय है। यह पंक्ति हमें हमारी छोटी स्थिति को समझाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि इतने विशाल ब्रह्मांड में हमारी आपसी लड़ाइयाँ कितनी बेमानी हैं।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
उत्तर: 
यह पंक्ति तीसरे प्रसंग से है, जिसमें कवि मानव के अहंकार और विभाजनकारी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। “संख्यातीत शंख सी दीवारें” का अर्थ है कि इंसान अपने चारों ओर अनगिनत और मजबूत दीवारें खड़ी करता है, जो उसे दूसरों से अलग करती हैं। यह दीवारें सामाजिक, सांस्कृतिक या वैचारिक हो सकती हैं। “अपने को दूजे का स्वामी बताता है” से पता चलता है कि इंसान दूसरों पर हावी होने और खुद को श्रेष्ठ समझने की कोशिश करता है।

(ग) “देशों की कौन कहे/एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”

उत्तर: यह पंक्ति भी तीसरे प्रसंग से है और मानव की अलगाव की प्रवृत्ति को और गहराई से दर्शाती है। कवि कहते हैं कि इंसान न केवल देशों के बीच दीवारें खड़ी करता है, बल्कि एक छोटे से कमरे में भी दो अलग-अलग दुनियाएँ बना लेता है। इसका मतलब है कि लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में मतभेद पैदा कर लेते हैं और एक-दूसरे से दूरी बना लेते हैं।

मिलकर करें मिलान

नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।
उत्तर:

अनुपात

इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।
उत्तर:

मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए चित्र में दिए गए गुणों में से ये गुण और मूल्य ज़रूरी होंगे

  • सहअस्तित्व: ताकि सभी जीवों और प्रकृति के साथ मिल-जुलकर रह सके।
  • विस्तार: सोच और दृष्टिकोण को सीमाओं से परे बढ़ाने के लिए।
  • सौहार्द: आपसी प्रेम और दोस्ती बनाए रखने के लिए।
  • विविधता: अलग-अलग विचारों, संस्कृतियों और लोगों को स्वीकार करने के लिए।
  • विशालता: मन और हृदय को बड़ा बनाने के लिए।
  • संतुलन: जीवन में सही तालमेल बनाए रखने के लिए।
  • समावेशिता: हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने के लिए।
  • स्वतंत्रता: सोचने और कार्य करने की आज़ादी के लिए।
  • सहनशीलता: मतभेद और कठिनाइयों को धैर्य से सहने के लिए।
  • शांति: बिना लड़ाई-झगड़े के जीवन जीने के लिए।

क्यों ये चुने?
क्योंकि कविता का संदेश है कि हम ब्रह्मांड में बहुत छोटे हैं, फिर भी आपसी झगड़े और अहंकार में समय बर्बाद करते हैं। अगर हम इन गुणों को अपनाएँ, तो हम अपने भीतर की सीमाओं को पार कर सकते हैं और ब्रह्मांड जैसी विशाल सोच और जीवनशैली पा सकते हैं।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
उत्तर: कविता के अनुसार मानव खुद को सीमाओं में बाँधता चला जाता है क्योंकि उसके अंदर ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास जैसे नकारात्मक भाव भरे रहते हैं। इन भावों के कारण वह अपने चारों ओर “संख्यातीत शंख सी दीवारें” खड़ी करता है, मतलब अनगिनत मजबूत दीवारें जो उसे दूसरों से अलग करती हैं। वह खुद को दूसरों का स्वामी समझता है और छोटी-छोटी जगहों जैसे एक कमरे में भी दो अलग दुनियाएँ रच लेता है। इससे वह अपनी छोटी स्थिति को भूलकर और ज्यादा सीमित हो जाता है, जबकि ब्रह्मांड इतना विशाल है।

(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं चुनूंगा: “यह है अनुपात आदमी का विराट से”।
क्यों: यह पंक्ति मुझे हर दिन याद दिलाएगी कि मैं ब्रह्मांड की विशालता में कितना छोटा हूं, इसलिए मुझे अहंकार, ईर्ष्या या नफरत नहीं रखनी चाहिए। यह मुझे विनम्र बनाएगी और मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा देगी, ताकि मैं छोटी बातों पर न लड़ूं।

(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा- व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
उत्तर: मुझे कविता का भाव चिंता का लगा।
क्यों: कवि मानव की छोटी स्थिति को ब्रह्मांड से तुलना करके दिखाते हैं और उसकी नकारात्मक आदतों पर ध्यान दिलाते हैं, लेकिन क्रोध की बजाय चिंता जताते हैं कि इतने विशाल ब्रह्मांड में हम क्यों लड़ते हैं। यह चिंता मानवता के बेहतर भविष्य के लिए है, जैसे एक बुद्धिमान शिक्षक की सलाह, न कि व्यंग्य या करुणा।

(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।
उत्तर: मेरे अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी हो सकता है। जैसे, लोग ईर्ष्या या अहंकार से दोस्तों या परिवार के बीच मतभेद पैदा कर दीवारें खड़ी कर लेते हैं, जो रिश्तों को तोड़ती हैं। उदाहरण के लिए, समाज में जाति, धर्म या अमीर-गरीब की दीवारें बन जाती हैं, जो लोगों को अलग करती हैं। कविता में यह प्रतीक है कि इंसान खुद को दूसरों से अलग करके अपनी दुनिया सीमित कर लेता है, जबकि हमें इन दीवारों को गिराकर एकजुट होना चाहिए।

(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर: हाँ, सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ज्यादा प्रभावी हैं क्योंकि वे लोगों को जोड़ती हैं और प्रगति लाती हैं, जबकि नकारात्मक वाली बाँटती हैं।
उदाहरण:

  • सहयोग से परिवर्तन: भारत की स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी ने अहिंसा और सहयोग की नीति अपनाई। लाखों लोग एकजुट होकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़े, जिससे 1947 में आजादी मिली। बिना सहयोग के यह संभव नहीं था, और इससे समाज में एकता बढ़ी।
  • सहिष्णुता से परिवर्तन: नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और सत्ता में आने पर बदला लेने की बजाय सहिष्णुता दिखाई। उन्होंने सभी जातियों को साथ लिया, जिससे देश में शांति आई और नया संविधान बना। इससे समाज में घृणा कम हुई और विकास तेज हुआ, जैसे अर्थव्यवस्था में सुधार और शिक्षा का प्रसार।

ये उदाहरण दिखाते हैं कि सहयोग और सहिष्णुता से समाज मजबूत और खुशहाल बनता है।

अनुमान और कल्पना

(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?
उत्तर: मैं बदलूंगा:

  • ईर्ष्या और घृणा को हटाकर सभी में प्रेम और समझ डालूंगा, क्योंकि इससे युद्ध और झगड़े खत्म होंगे।
  • अहंकार को कम करके विनम्रता बढ़ाऊंगा, ताकि लोग ब्रह्मांड की विशालता समझें और खुद को बड़ा न समझें।
  • स्वार्थ को समर्पण में बदलूंगा, क्योंकि इससे पर्यावरण की रक्षा होगी और गरीबी कम होगी।

क्यों: ये बदलाव मानव को कविता की तरह छोटी दीवारों से बाहर निकालेंगे और ब्रह्मांड में शांति लाएंगे, ताकि हम सब मिलकर आगे बढ़ें।

(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं अपने घर को सबसे ज्यादा याद करूंगा।
क्यों: घर वह जगह है जहाँ परिवार के साथ प्यार और सुरक्षा मिलती है। अंतरिक्ष की अकेली यात्रा में घर की याद मुझे भावनात्मक ताकत देगी, जैसे बचपन की यादें या माँ का बनाया खाना। कविता में जैसे कमरा सबसे छोटी इकाई है, वैसे घर मेरी जड़ें हैं, जो ब्रह्मांड की विशालता में मुझे छोटा लेकिन जुड़ा हुआ महसूस कराएंगी।

(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है- वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उत्तर: एक छोटी बच्ची नाम रिया कविता की सीमाओं को पार करती है। वह पहले कमरे से बाहर निकलती है, घर छोड़कर मोहल्ले में जाती है, फिर शहर, प्रदेश और देश पार करती है। पृथ्वी से उड़कर अनगिनत नक्षत्रों में घूमती है, आकाशगंगा की परिधि को छूती है। लाखों ब्रह्मांडों में जाती है, जहाँ अनगिनत पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ हैं। वह देखती है चमकते तारे, रंग-बिरंगे ग्रह, अजीब जीव और अनंत शांति। यात्रा में वह समझती है कि ईर्ष्या की दीवारें कितनी बेकार हैं। लौटकर वह सबको बताती है कि हमें मिलकर रहना चाहिए, क्योंकि ब्रह्मांड में सब जुड़े हैं। यह यात्रा उसे सिखाती है कि सीमाएँ सिर्फ मन में हैं।

(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए – “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
उत्तर: मैं ब्रह्मांड में एक छोटा सा कण हूँ। कविता पढ़कर मुझे लगता है कि मेरा जीवन कमरे की तरह छोटा है, जो घर, शहर, देश और पृथ्वी से जुड़ा है, लेकिन ब्रह्मांड की करोड़ों पृथ्वियों और अनगिनत तारों में नगण्य। फिर भी, यह छोटापन मुझे प्रेरित करता है कि मैं अपनी नकारात्मक आदतों को छोड़कर दूसरों से जुड़ूं। ब्रह्मांड की विशालता में मैं एक चमकता सितारा बन सकता हूँ, अगर प्रेम और सहयोग से जीऊं। यह अनुपात मुझे विनम्र बनाता है और बताता है कि जीवन की असली खुशी एकता में है, न कि दीवारों में।

(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं महात्मा गांधी जैसे व्यक्ति को भेजना चाहूंगा (या अगर जीवित तो कोई शांतिदूत जैसे दलाई लामा को)।
क्यों: वे सहिष्णुता, सहयोग और अहिंसा के प्रतीक हैं, जो कविता की नकारात्मक भावनाओं के विपरीत हैं। दूसरे संसार में वे पृथ्वी की अच्छाइयाँ फैलाएंगे, जैसे शांति और एकता, और वहाँ की समस्याओं को हल करने में मदद करेंगे। इससे ब्रह्मांड में मानवता का अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

(च) कविता में ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर: अगर एक दिन के लिए ये भाव खत्म हो जाएं, तो:

  • लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे, गरीबी और भूख कम होगी क्योंकि स्वार्थ नहीं रहेगा।
  • युद्ध और झगड़े रुक जाएंगे, क्योंकि ईर्ष्या और घृणा गायब होगी।
  • समाज में एकता बढ़ेगी, जैसे सभी मिलकर पर्यावरण बचाएंगे और नई खोजें करेंगे।
  • परिवार और दोस्त मजबूत होंगे, क्योंकि अहंकार की दीवारें गिर जाएंगी।

कुल मिलाकर, समाज शांत और खुशहाल बनेगा, जैसे कविता का सपना।

(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव ‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’- दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।
उत्तर: 

  • चित्र: पोस्टर के बीच में एक छोटा इंसान खड़ा हो, चारों ओर विशाल ब्रह्मांड के साथ तारे, ग्रह और आकाशगंगा। इंसान के चारों ओर टूटी हुई दीवारें दिखें।
  • प्रतीक: एक छोटा कमरा जो ब्रह्मांड में तैर रहा हो (लघुता के लिए), और टूटते शंख (दीवारों के लिए)।
  • शब्द: ऊपर लिखा हो “यह है अनुपात आदमी का विराट से”, नीचे “दीवारें गिराओ, एकजुट हो जाओ”।

यह पोस्टर मूल भाव को सरलता से दर्शाएगा।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए –
उत्तर: 

सृजन

(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए, जैसे- पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए- “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
उत्तर: 
क्रम: कमरा → घर → मोहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड
विशेषताएँ:

  • कमरा: रहने की छोटी-सी जगह, जहाँ कुछ लोग साथ होते हैं।
  • घर: परिवार के साथ रहने का स्थान।
  • मोहल्ला: पड़ोसी, आपसी सहयोग और छोटी सामाजिक इकाई।
  • नगर: व्यापार, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र।
  • प्रदेश: एक बड़ा इलाका, अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा के साथ।
  • देश: विविधता से भरा, अनेक राज्यों और संस्कृतियों वाला।
  • पृथ्वी: सभी जीव-जंतुओं और मनुष्यों का घर।
  • ब्रह्मांड: अनगिनत तारे, ग्रह और आकाशगंगाओं का विशाल विस्तार।

एक पंक्ति का उत्तर: “मैं इस चित्र में पृथ्वी पर हूँ क्योंकि यह मेरा घर है और यहाँ सभी जीव एक साथ रहते हैं।”

(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभकैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
उत्तर: 
कहानी: ब्रह्मांड में मानव
एक छोटे से गाँव के एक छोटे से कमरे में बैठा था रवि, जिसके मन में अनगिनत सवाल थे। वह खिड़की से बाहर तारों भरे आकाश को देखता और सोचता, “मैं इस विशाल ब्रह्मांड में कितना छोटा हूँ?” एक रात, जब वह तारों को गिन रहा था, एक चमकता हुआ उल्कापिंड उसके सामने आ गिरा। उसमें से एक रहस्यमयी रोशनी निकली और रवि को अपने साथ ब्रह्मांड की सैर पर ले गई। उसने देखा कि उसका कमरा, गाँव, और यह पृथ्वी अनगिनत ग्रहों और तारों में बस एक बिंदु है।

(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर: 
एक ऐसी दुनिया जिसमें कोई दीवार न हो
ऐसी दुनिया में कोई भेदभाव नहीं होगा। लोग धर्म, जाति, या अमीरी-गरीबी के आधार पर अलग नहीं होंगे। हर कमरे, घर, और गाँव में लोग एक-दूसरे के साथ खुलकर बात करेंगे, जैसे एक बड़ा परिवार। हर व्यक्ति का विचार सुना जाएगा, और सहयोग से समस्याएँ हल होंगी। पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी मिलकर काम करेंगे, जैसे जंगल बचाना या नदियाँ साफ करना। बच्चे बिना डर के खेलेंगे, और बूढ़े अपनी कहानियाँ सुनाएँगे। यह दुनिया प्रेम, विश्वास और एकता से भरी होगी, जहाँ हर कोई एक-दूसरे का साथी होगा, न कि प्रतिद्वंद्वी।

(घ) एक चित्र श्रृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे-

प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
उत्तर: चित्र श्रंखला: आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड
आकार का अनुपात:

  • आदमी: एक व्यक्ति खड़ा हो, आकार 1 इकाई। पृष्ठभूमि में उसका चेहरा बड़ा दिखे, जो उसकी भावनाएँ (ईर्ष्या, प्रेम) दर्शाए।
  • कमरा: व्यक्ति कमरे में बैठा हो, कमरा 10 गुना बड़ा। दीवारों पर परिवार की तस्वीरें और खिड़की से बाहर का दृश्य।
  • घर: कमरा घर का हिस्सा, घर 100 गुना बड़ा। व्यक्ति खिड़की से बाहर झाँकता हो, बगीचे में पेड़ दिखें।
  • पड़ोसी: घर पड़ोस में, पड़ोस 1000 गुना बड़ा। व्यक्ति और पड़ोसी एक साथ त्योहार मनाते दिखें।
  • क्षेत्र: पड़ोस क्षेत्र का हिस्सा, क्षेत्र 10,000 गुना बड़ा। व्यक्ति बाजार में छोटा सा दिखे, मंदिर या पार्क पृष्ठभूमि में।
  • नगर: क्षेत्र नगर में, नगर 100,000 गुना बड़ा। व्यक्ति स्मारक के पास छोटा सा, शहर की भीड़ में।
  • देश: नगर देश में, देश 1,000,000 गुना बड़ा। व्यक्ति नक्शे पर एक बिंदु, पहाड़ और नदियाँ दिखें।
  • पृथ्वी: देश पृथ्वी पर, पृथ्वी 1,000,000,000 गुना बड़ी। व्यक्ति पृथ्वी पर एक धब्बा, महासागर और बादल दिखें।
  • ब्रह्मांड: पृथ्वी ब्रह्मांड में, ब्रह्मांड अनंत। व्यक्ति अदृश्य, तारे, ग्रह और आकाशगंगाएँ चमकती हों।

कविता की रचना

‘दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे-
इन पंक्तियों में चिह्न पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस चिह्न को पहले कहीं देखा है? इस चिह्न को ‘निदेशक चिह्न’ कहते हैं। यह एक प्रकार का विराम चिह्न है जो किसी बात को आगे बढ़ाने या स्पष्ट करने के लिए उपयोग होता है। यह किसी विषय की अतिरिक्त जानकारी, जैसे- व्याख्या, उदाहरण या उद्धरण देने के लिए उपयोग होता है। इस कविता में इस चिह्न का प्रयोग एक ठहराव, सोच का संकेत और आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है। यह संकेत देता है कि अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है जो पाठक को सोचने पर विवश करेगा।
इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे- अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है, बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं आदि।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: कविता की अन्य विशेषताएँ:

  • निदेशक चिह्न का प्रयोग: कविता में ‘-‘ (निदेशक चिह्न) का उपयोग ठहराव और विचार को गहराई देने के लिए किया गया है, जैसे “दो व्यक्ति कमरे में – कमरे से छोटे-“.
  • पंक्तियों में ‘में’ का बार-बार प्रयोग: अधिकतर पंक्तियाँ ‘में’ शब्द के साथ खत्म होती हैं, जैसे “कमरा है घर में”, जो एक लय और क्रम बनाता है।
  • छोटी पंक्तियाँ: कविता की पंक्तियाँ छोटी और सरल हैं, जो पाठक को विचार करने का समय देती हैं।
  • विस्तार का क्रम: कविता छोटे से बड़े की ओर बढ़ती है (आदमी से ब्रह्मांड तक), जो अनुपात को स्पष्ट करती है।
  • प्रतीकात्मक भाषा: ‘दीवारें’ और ‘शंख’ जैसे शब्द प्रतीक के रूप में मानव के अलगाव और अहंकार को दर्शाते हैं।
  • सार्वभौमिक संदेश: कविता मानवता को एकता और विनम्रता की सीख देती है, जो सभी के लिए प्रासंगिक है।
  • भावनात्मक प्रभाव: कविता में चिंता और प्रेरणा का मिश्रण है, जो पाठक को अपनी स्थिति पर विचार करने को मजबूर करता है।

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए-
उत्तर: 

कविता का सौंदर्य

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए। इन प्रश्नों से आप कविता का आनंद और अच्छी तरह से ले सकेंगे।

(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।
उत्तर: कविता में ब्रह्मांड की विशालता को निम्नलिखित तरीकों से व्यक्त किया गया है:

  • क्रमिक विस्तार: कविता में छोटे से बड़े की ओर बढ़ते क्रम (आदमी, कमरा, घर, मोहल्ला, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी, ब्रह्मांड) का उपयोग करके ब्रह्मांड की विशालता दिखाई गई है। उदाहरण: “दो व्यक्ति कमरे में, कमरे से छोटे- कमरा है घर में…”
  • संख्याओं का प्रतीकात्मक उपयोग: “अनगिन नक्षत्रों में”, “करोड़ों में एक ही”, और “लाखों ब्रह्मांडों में” जैसे शब्द अनगिनत तारों और ब्रह्मांडों की विशालता को दर्शाते हैं।
  • प्रतीकात्मक शब्द: “परिधि नभ गंगा की” में आकाशगंगा को नदी की तरह विशाल और अनंत बताया गया है, जो ब्रह्मांड की व्यापकता को प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त करता है।
  • अनुपात की तुलना: “यह है अनुपात आदमी का विराट से” पंक्ति में मानव की छोटी स्थिति को ब्रह्मांड की विशालता से तुलना करके इसकी महत्ता दिखाई गई है।
  • अतिशयोक्ति: “कितनी ही पृथ्वियाँ, कितनी ही भूमियाँ, कितनी ही सृष्टियाँ” में अतिशयोक्ति के माध्यम से ब्रह्मांड में अनगिनत ग्रहों और सृष्टियों की विशालता को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है”
“अपने को दूजे का स्वामी बताता है” 
“एक कमरे में 
दो दुनिया रचाता है”
कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए।

उत्तर: नई क्रियाओं के साथ कविता:
दो व्यक्ति कमरे में
कमरे से छोटे-
मन में बंधन बुनते हैं,
खुद को अलग ठहराते हैं।

अनगिन सपनों में
दिल एक छोटा,
करोड़ों में एक ही।
फिर भी वह बँटवारा करता है,
अपने को सबसे बड़ा गढ़ता है।

देशों की कौन कहे,
एक कमरे में
दो दिलों को तोड़ता है,
अपनी राहें अलग करता है।

आपके शब्द

“सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की”
आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है।
आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।

उत्तर: दो शब्दों से बने नए शब्द:

  • तारामंडल (तारा + मंडल) – तारों का समूह जो आकाश में चमकता है।
  • सूर्योदय (सूर्य + उदय) – सूरज के उगने की प्रक्रिया।
  • नदीतट (नदी + तट) – नदी का किनारा।
  • चंद्रप्रकाश (चंद्र + प्रकाश) – चाँद की रोशनी।
  • जीवनस्रोत (जीवन + स्रोत) – जीवन का आधार, जैसे पानी या प्रकृति।
  • आकाशदीप (आकाश + दीप) – आकाश में चमकने वाला तारा।
  • पृथ्वीपुत्र (पृथ्वी + पुत्र) – पृथ्वी पर जन्मा मानव।
  • विश्वहृदय (विश्व + हृदय) – विश्व का भावनात्मक केंद्र।

आपके प्रश्न

“हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ”
क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।

उत्तर:  मन में आने वाले प्रश्न:

  • क्या ब्रह्मांड में और भी पृथ्वी जैसे ग्रह हैं?
  • क्या हर ब्रह्मांड में जीवन संभव है?
  • तारों की संख्या कितनी हो सकती है?
  • क्या हम कभी दूसरे ब्रह्मांड में जा पाएंगे?
  • आकाशगंगा के बाहर का जीवन कैसा होगा?
  • क्या हर सृष्टि में इंसान जैसे प्राणी होते हैं?
  • ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई?
  • क्या समय हर ब्रह्मांड में एक जैसा चलता है?

उत्तर ढूँढने का प्रयास: अपने शिक्षक से ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना पर चर्चा करें। पुस्तकालय में “कॉसमॉस” (कार्ल सागन) जैसी किताबें पढ़ें। इंटरनेट पर नासा या इसरो की वेबसाइट पर तारों, ग्रहों और आकाशगंगा की जानकारी खोजें।

विशेषण और विशेष्य

“पृथ्वी एक छोटी”
यहाँ ‘छोटी’ शब्द ‘पृथ्वी’ की विशेषता बता रहा है अर्थात ‘छोटी’ ‘विशेषण’ है। ‘पृथ्वी’ एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है। अर्थात ‘पृथ्वी’ ‘विशेष्य’ शब्द है।
अब आप नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए –

उत्तर: 

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो- जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।
उत्तर: 
एक स्थिति: पढ़ाई का दबाव और नींद का समय।
स्कूल में परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत सारी पढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन नींद के लिए समय बहुत कम मिलता है। उदाहरण के लिए, एक छात्र को 10 चैप्टर पढ़ने हैं, लेकिन उसके पास केवल 2 घंटे हैं, जिससे तनाव बढ़ता है और नींद पूरी नहीं होती। यह अनुपात बिगड़ने से स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों प्रभावित होते हैं।

(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत- किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)
उत्तर:
 विराटता लाने के उपाय:

  • सबको शामिल करना: परिवार में सभी की राय सुनना, जैसे बच्चों और बुजुर्गों की बातों को महत्व देना।
  • सहायता करना: मोहल्ले में किसी जरूरतमंद को खाना या कपड़े देना, जैसे गरीब बच्चों को किताबें देना।
  • जाति-धर्म से ऊपर उठना: विद्यालय में सभी दोस्तों के साथ बराबरी से व्यवहार करना, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
  • सामूहिक गतिविधियाँ: मोहल्ले में पेड़ लगाने या सफाई अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें सभी भाग लें।
  • सकारात्मक सोच: दूसरों की गलतियों को माफ करना और छोटी बातों पर न लड़ना, ताकि एकता बनी रहे।

(ग) करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर: 
भाव: यह पंक्ति पढ़कर मन में आश्चर्य और जिम्मेदारी का भाव आता है। पृथ्वी ब्रह्मांड में अनोखी और छोटी है, जिस पर जीवन है। यह हमें इसकी कीमत समझाता है और इसे बचाने की प्रेरणा देता है।
पृथ्वी को सुरक्षित रखने के उपाय:

  • पेड़ लगाना: अपने घर और स्कूल में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाऊंगा ताकि हवा साफ रहे।
  • प्लास्टिक कम करना: प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले इस्तेमाल करूंगा।
  • पानी बचाना: नहाते समय कम पानी इस्तेमाल करूंगा और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा।
  • जागरूकता फैलाना: दोस्तों और परिवार को पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित करूंगा, जैसे बिजली बचाने के लिए।
  • कचरा प्रबंधन: कचरे को रीसाइकिल करना और गीले-सूखे कचरे को अलग करना सिखूंगा।

(घ) कविता हमें अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?
उत्तर: 
मैं निम्नलिखित गुणों को प्रबल करूंगा:

  1. विनम्रता: दूसरों की अच्छाइयों को स्वीकार करूंगा और खुद को उनसे बेहतर न समझूंगा।
  2. सहानुभूति: दूसरों के दुख-दर्द को समझकर उनकी मदद करूंगा, जैसे किसी दोस्त को पढ़ाई में सहायता देना।
  3. सहयोग: समूह कार्यों में सबके साथ मिलकर काम करूंगा, जैसे स्कूल के प्रोजेक्ट में।
  4. सम्मान: हर व्यक्ति की राय और पृष्ठभूमि का सम्मान करूंगा, चाहे वह मेरे से अलग हो।
  5. आत्म-जागरूकता: अपनी गलतियों को स्वीकार करूंगा और सुधारने की कोशिश करूंगा ताकि अहंकार न आए।

(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे- डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?
उत्तर: 
मेरे जीवन की तीन दीवारें:

  • डर: असफल होने का डर, जैसे नई चीजें आजमाने से डरना (नया खेल या भाषण देना)।
  • संकोच: नए लोगों से बात करने में झिझक, जैसे स्कूल में नए दोस्त बनाने में।
  • आलस्य: पढ़ाई या काम को टालने की आदत, जिससे समय बर्बाद होता है।

उन्हें तोड़ने की योजना:

  • डर: छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर शुरू करूंगा, जैसे हफ्ते में एक बार नई चीज आजमाना (जैसे डांस क्लास जॉइन करना)। असफलता को सीखने का हिस्सा मानूंगा।
  • संकोच: रोज एक नए व्यक्ति से छोटी बातचीत शुरू करूंगा, जैसे क्लास में किसी को ‘हाय’ कहना। ग्रुप गतिविधियों में हिस्सा लूंगा।
  • आलस्य: समय-सारिणी बनाकर पढ़ाई और काम को छोटे हिस्सों में बांटूंगा। हर काम पूरा करने पर खुद को छोटा इनाम दूंगा, जैसे पसंदीदा गाना सुनना।

समाज में ऐसी दीवारें: हाँ, समाज में भी दीवारें हैं, जैसे:

  • जाति-धर्म की दीवारें: लोग जाति या धर्म के आधार पर एक-दूसरे से अलगाव रखते हैं।
  • लिंग भेदभाव: लड़के-लड़कियों में असमान व्यवहार।
  • आर्थिक असमानता: अमीर-गरीब के बीच दूरी।

समाज की दीवारें गिराने के उपाय:

  • जागरूकता फैलाना: स्कूल में नाटक या भाषण के जरिए जाति-धर्म की एकता पर जोर देना।
  • समान व्यवहार: सभी को बराबर मौके देना, जैसे खेल या प्रोजेक्ट में सबको शामिल करना।
  • सहायता करना: गरीब बच्चों को पढ़ाने या उनके लिए किताबें दान करने जैसे कार्य करना।
  • सामुदायिक आयोजन: मोहल्ले में सभी को मिलाने वाले कार्यक्रम, जैसे सांस्कृतिक मेला, आयोजित करना।

संख्यातीत शंख

“संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है”
शंख का अर्थ है- 100 पद्म की संख्या।
नीचे भारतीय संख्या प्रणाली एक तालिका के रूप में दी गई है।

तालिका के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए –

1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर: 
तालिका के अनुसार, 15 शून्यों वाली संख्या पद्म कहलाती है (10¹⁵)।

2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
उत्तर: 
तालिका के अनुसार, महाशंख 10¹⁹ है, जिसमें 19 शून्य होते हैं।

3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?
उत्तर: 
एक लाख (105 = 100,000) में 100 हजार (100 × 1000) होते हैं।

4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
उत्तर: 

  • सबसे छोटी संख्या: एक (1, 10⁰)।
  • सबसे बड़ी संख्या: महाशंख (10¹⁹)।

5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
उत्तर: 

  • दस करोड़ = 10⁸ = 100,000,000
  • एक अरब = 10⁹ = 1,000,000,000

जोड़ने पर: 100,000,000 + 1,000,000,000 = 1,100,000,000 = 11 अरब।

समावेशन और समानता

जैसे पृथ्वी अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह विशेष आवश्यकता वाला हो या न हो, समाज का एक महत्वपूर्ण भाग है।
एक समूह चर्चा आयोजित करें जिसमें सभी मानवों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता पर बल दिया जाए। (भले ही उनका जेंडर, आय, मत, विश्वास, शारीरिक रूप, रंग या आकार-प्रकार आदि कैसा भी हो)

उत्तर: समूह चर्चा: सभी मानवों के लिए समान अवसर
चर्चा का विषय: प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसका जेंडर, आयु, मत, विश्वास, शारीरिक रूप, रंग या आकार-प्रकार कुछ भी हो, समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें समान अवसरों की आवश्यकता पर बल देना चाहिए।
चर्चा बिंदु:

  • समानता का महत्व: हर व्यक्ति को शिक्षा, रोज़गार और सम्मान का समान अवसर मिलना चाहिए। उदाहरण: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूल में विशेष शिक्षक और सुविधाएँ मिलें।
  • भेदभाव खत्म करना: जेंडर (लड़का-लड़की), रंग (गोरा-काला), या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जैसे, कार्यस्थल पर सभी को समान वेतन मिले।
  • शारीरिक विविधता का सम्मान: शारीरिक अक्षमता वाले लोगों को रैंप, लिफ्ट जैसी सुविधाएँ देना। उदाहरण: बसों में विशेष सीटें।
  • जागरूकता और शिक्षा: स्कूलों में बच्चों को समावेशन सिखाना, जैसे सभी धर्मों के त्योहारों को एक साथ मनाना।
  • सामाजिक एकता: सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करना, जैसे खेलकूद या सांस्कृतिक उत्सव, जहाँ सभी शामिल हों।

निष्कर्ष: समान अवसरों से समाज में एकता बढ़ेगी, और हर व्यक्ति अपनी क्षमता दिखा सकेगा। यह कविता की तरह दीवारें तोड़ने और विशाल दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देता है।

आज की पहेली

पता लगाइए कि कौन-सा अंतरिक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा-
उत्तर: यह सही मार्ग इस प्रकार है:

  • पहला अंतरिक्ष यान (नीला) ग्रह “पृथ्वी” पर जाएगा।
  • दूसरा अंतरिक्ष यान (लाल) ग्रह “मंगल” पर जाएगा।
  • तीसरा अंतरिक्ष यान (हरे रंग का) ग्रह “शनि” पर जाएगा।

झरोखे से

आइए, अब पढ़ते हैं प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाबः।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

गिरिजा कुमार माथुर की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय या इंटरनेट पर खोजकर पढ़िए और कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर: गिरिजा कुमार माथुर एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार थे, जिन्होंने कविताओं, नाटकों, निबंधों और अनुवादों में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी रचनाओं को पुस्तकालयों और इंटरनेट पर खोजकर पढ़ा जा सकता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कविता संग्रह:
    • ‘मंजीर’ (1941) – उनकी पहली कविता संग्रह, जिसमें शुरुआती रचनाएँ शामिल हैं।
    • ‘नाश और निर्माण’
    • ‘धूप के धान’
    • ‘शैलपंख चमकीले’
    • ‘जो बंध न सका’
    • ‘साक्षी रहे वर्तमान’
    • ‘भीतर नदी की यात्रा’
    • ‘मैं वक्त के सामने हूँ’ – यह संग्रह उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1991) से सम्मानित कराया।
    • ‘छाया मत छूना मन’
  • नाटक:
    • ‘जन्म कैद’
  • अन्य रचनाएँ:
    • ‘नई कविता: सीमाएँ और संभावनाएँ’
    • उन्होंने अंग्रेजी गीत “We Shall Overcome” का हिंदी में अनुवाद “हम होंगे कामयाब” के रूप में किया, जो दूरदर्शन पर प्रसिद्ध हुआ।
  • आत्मकथा:
    • ‘मुझे और अभी कहना है’ – उनकी जीवन यात्रा का वर्णन।

इन रचनाओं को पढ़ने के लिए आप स्थानीय पुस्तकालयों में हिंदी साहित्य की खंडों की जाँच कर सकते हैं या इंटरनेट पर निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं:

  • डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (archive.org) पर ‘मैं वक्त के सामने हूँ’ और ‘गगनचल’ जैसे कार्य उपलब्ध हैं।
  • रेक्ख्ता (rekhta.org) और काव्यालय (kaavyaalaya.org) पर उनकी कविताएँ और जीवनी पढ़ी जा सकती है।
  • शोधगंगा (shodhganga.inflibnet.ac.in) पर उनके काव्य और शिल्प पर शोध पत्र उपलब्ध हैं।

कक्षा में साझा करने के लिए सुझाव:

  • अपनी पसंद की एक कविता (जैसे ‘आज हैं केसर रंग रंगे वन’) को पढ़कर सुनाएँ और उसका अर्थ समझाएँ।
  • उनकी रचनाओं में मानवता, प्रकृति और आधुनिकता के तत्वों पर चर्चा करें।
  • ‘हम होंगे कामयाब’ गीत के संदेश को कक्षा में गाकर या समझाकर प्रस्तुत करें।

इन रचनाओं से हम गिरिजा कुमार माथुर के साहित्यिक योगदान और उनके विचारों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

खोजबीन के लिए

  • हम होंगे कामयाब एक दिन
    https://www.youtube.com/watch?v=xlTlzqvMa-Q
    https://www.youtube.com/watch?v=dJ7BW1CgoWI
  • कल्पना जो सितारों में खो गई
    https://www.youtube.com/watch?v=Xhv0L2frHn8
  • सुनीता अंतरिक्ष में
    https://www.youtube.com/watch?v=I1cDmCthPaA
  • ब्रह्माण्ड और पृथ्वी
    https://www.youtube.com/watch?v=b8udjzy7zCA
  • हौसलों की उड़ान-मंगलयान
    https://www.youtube.com/watch?v=JTCk48RT1Ws

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं दिए गए यूट्यूब लिंक का उपयोग कर आप महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं के बारे में और जान सकते हैं।