7. मेरा बचपन – Textbook Solutions

बातचीत के लिए

1. लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे?
उत्तर: 
लेखक को रामलीला की तैयारियों में पात्रों की सजावट देखना और छोटे-मोटे काम करना सबसे अधिक उत्साहित करता होगा। जैसे कि पात्रों के लिए सामान लाना, उनकी सजावट में मदद करना, और उनके रंग-रूप को तैयार होते देखना। ये काम उन्हें इसलिए उत्साहित करते होंगे क्योंकि यह उत्सव का हिस्सा था और इसमें मजा और रौनक थी।

2. आपको लेखक के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?
उत्तर: 
मुझे लेखक के बचपन में गुल्ली-डंडा खेलना, आम के पेड़ों पर चढ़ना, और रामलीला की तैयारियों में हिस्सा लेना सबसे अच्छा लगा। ये बातें मुझे इसलिए अच्छी लगीं क्योंकि ये सरल और मजेदार थीं। गुल्ली-डंडा में कोई खर्च नहीं था, और पेड़ों पर चढ़ने में आजादी और रोमांच था। रामलीला में उत्साह और रंग-बिरंगी तैयारियाँ देखकर खुशी मिलती थी।

3. खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए आप क्या – क्या कर सकते हैं?
उत्तर: 
खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए हम ये कर सकते हैं:

  • खेल के नियमों का पालन करना।
  • सावधानी से खेलना, जैसे गुल्ली या डंडे को सही दिशा में मारना।
  • खेलने की जगह को खुला और सुरक्षित रखना, जहाँ पत्थर या गड्ढे न हों।
  • एक-दूसरे का ध्यान रखना और ज्यादा जोश में न खेलना।

4. लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?
उत्तर: 
लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठकर शायद लेखक की शरारतों और देर से घर आने की शिकायत करते होंगे। वे यह भी बात करते होंगे कि लेखक को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ खेलने में समय बिताना चाहिए। इसके अलावा, वे गाँव की खेती, मौसम, या रामलीला जैसे उत्सवों की बातें भी करते होंगे।

पाठ से

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-

1. लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु कितनी थी?
उत्तर: 
लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु 10 साल थी।

2. लेखक ने अपनी घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है?
उत्तर:
 लेखक ने बताया कि उनके घरवाले इसलिए क्रोधित होते थे क्योंकि वह गुल्ली-डंडा खेलने में इतना मस्त रहता था कि नहाने और खाने की सुध नहीं रहती थी।

3. लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में क्या अंतर है?
उत्तर:
 लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा बिना पैसे के खेला जा सकता है, सिर्फ पेड़ की टहनी से गुल्ली और डंडा बन जाता है। लेकिन विलायती खेलों के सामान बहुत महँगे होते हैं और उनके लिए खास मैदान या कोर्ट की जरूरत होती है।

4. इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?
उत्तर: लेखक ने अपने बचपन के इन अनुभवों को याद किया है:

  • कच्चे टूटे घर में रहना और पयाल का बिछौना।
  • नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना।
  • हलधर के साथ मौलवी साहब के पास पढ़ने जाना।
  • रामलीला की तैयारियों में हिस्सा लेना।
  • गुल्ली-डंडा खेलना और उसका आनंद लेना।

समझ और अनुभव

1. लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं?
उत्तर: 
मैंने भी अपने बचपन में पेड़ों पर चढ़कर फल तोड़े हैं और दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा जैसे खेल खेले हैं। मेले में जाकर उत्सव देखना और दोस्तों के साथ खेतों में दौड़ना भी मैंने किया है। ये काम मुझे बहुत मजेदार लगते थे।

2. लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए।
उत्तर:
 मैं कागज की नाव, कागज का हवाई जहाज, और लकड़ी के छोटे खिलौने बनाता हूँ। मैं कागज का हवाई जहाज बनाकर कक्षा में लाऊँगा और अपने दोस्तों के साथ उसे उड़ाकर खेलूँगा।

3. अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने वाली ‘थापी’ को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं ?
उत्तर: घर तथा पास-पड़ोस की वस्तुएँ जो खिलौनों की तरह उपयोग की जा सकती हैं:

  • दादा जी की छड़ी – हॉकी
  • गत्ते का डिब्बा – घर, कार
  • बोतल के ढक्कन – पहिये
  • प्लास्टिक की बोतलें – बॉलिंग पिन
  • चम्मच – ड्रमस्टिक आदि

4. लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं?
उत्तर:
 मैं अपने दोस्तों के साथ खेलने, साइकिल चलाने, और मेलों में झूले झूलने के काम बहुत उत्साह से करता हूँ। इसके अलावा, मैं नई कहानियाँ पढ़ने और अपने छोटे भाई-बहनों के साथ खेलने में भी बहुत उत्साह दिखाता हूँ।

मिलान कीजिए

नीचे दिए गए चित्रों का उनके उपयुक्त विवरण से मिलान कीजिए –
उत्तर: 

खान-पान

1. लेखक सवेरे सवेरे सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए –

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे।

2. आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए –

उत्तर:

आइए जानें

“मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” ‘दोपहर’ शब्द बना है ‘पहर’ से। ‘पहर’ का अर्थ होता है- दिन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय ।

1. एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर कितने पहर होते हैं ?
उत्तर: 
एक दिन और एक रात में कुल आठ पहर होते हैं।
विवरण: एक दिन और एक रात में 24 घंटे होते हैं। चूँकि एक पहर 3 घंटे का होता है, इसलिए 24 ÷ 3 = 8 पहर।

2. नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए-

उत्तर: 

तमाशा

“गुल्ली है जरा-सी, पर उसमें दुनिया भर की मिठाइयों की मिठास और तमाशों का आनंद भरा है।” तमाशा का अर्थ है- वह दृश्य जिसे देखने से मनोरंजन हो, जैसे मेला, नौटंकी आदि। नीचे दिए गए नामों को पढ़िए। इनमें से कौन-कौन से तमाशे आपने देखे हुए हैं? उन पर घेरा बनाइए –

उत्तर: 

Note: विद्यार्थी अपने द्वारा देखे गए खेल-तमाशों पर घेरा बनाएँगे।

रामलीला

आपने पाठ में ‘रामलीला’ के बारे में पढ़ा है। हमारे देश में और अन्य देशों में भी दीपावली के आस-पास स्थान-स्थान पर ‘रामलीला’ का आयोजन किया जाता है। आप भी अपनी कक्षा या विद्यालय में रामलीला का मंचन कीजिए। इसके लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-

  • आप विद्यालय की वर्दी में भी रामलीला का मंचन कर सकते हैं। किसी अतिरिक्त वस्तु या कपड़ों की आवश्यकता नहीं है।
  • पूरी रामकथा का मंचन संभव न हो तो प्रत्येक कक्षा या समूह भिन्न-भिन्न दृश्यों को प्रस्तुत कर सकता है।
  • आप अपने संवाद स्वयं बना सकते हैं।
  • इस कार्य में आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर: सुझावों के आधार पर रामलीला का मंचन कैसे करें:

  • विद्यालय की वर्दी में मंचन: आप अपनी स्कूल की वर्दी में ही रामलीला का मंचन कर सकते हैं। इसके लिए रंग-बिरंगे कपड़े या विशेष सामान की जरूरत नहीं है। आप साधारण कपड़ों में ही पात्रों का अभिनय कर सकते हैं।
  • भिन्न-भिन्न दृश्य: अगर पूरी रामकथा का मंचन मुश्किल हो, तो प्रत्येक कक्षा या समूह को एक अलग दृश्य दिया जा सकता है, जैसे राम का जन्म, सीता स्वयंवर, रावण वध आदि।
  • संवाद बनाना: आप अपने शिक्षकों या पुस्तकालय की किताबों की मदद से आसान और रोचक संवाद बना सकते हैं।
  • सहायता लेना: अपने अभिभावकों और शिक्षकों से कहानी, संवाद, और मंच सज्जा के लिए मदद लें। पुस्तकालय से रामायण की किताबें पढ़ें।

भाषा की बात

विलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है कि उनके सामान महँगे होते हैं।”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है। इन पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘विलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही हैं कि ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ संज्ञा शब्द हैं।
अब पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा शब्द चुनकर नीचे लिखिए-

उत्तर:

प्राथमिक चिकित्सा पेटी

कावेरी को कबड्डी खेलते हुए चोट लग जाती है। उसकी मित्र नीलोफर सभी से प्राथमिक चिकित्सा पेटी (फर्स्ट ऐड बॉक्स) माँगती है लेकिन वह किसी के पास नहीं थी। कावेरी को डॉक्टर के पास ले जाने के बाद नीलोफर सभी को प्राथमिक चिकित्सा पेटी दिखाती है और उसमें रखी हुई वस्तुओं तथा दवाइयों के बारे में बताती है।
अब आप प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली उन वस्तुओं व दवाइयों की एक सूची बनाइए जिनके बारे में नीलोफर ने सभी को बताया होगा। आप भी अपने लिए एक प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार कीजिए। इसके लिए आप अपने सहपाठियों तथा अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर: नीलोफर ने कावेरी को चोट लगने के बाद प्राथमिक चिकित्सा पेटी के बारे में बताया होगा। इसमें निम्नलिखित चीजें हो सकती हैं:

  • बैंड-एड (Band-Aid): छोटे घाव या खरोंच के लिए।
  • एंटीसेप्टिक क्रीम (Antiseptic Cream): घाव को साफ करने और संक्रमण रोकने के लिए।
  • कपास (Cotton): घाव साफ करने के लिए।
  • पट्टी (Bandage): बड़े घाव को बाँधने के लिए।
  • दर्द निवारक दवा (Painkiller): हल्के दर्द को कम करने के लिए।
  • डेटॉल या सैवлон (Dettol/Savlon): घाव को कीटाणुरहित करने के लिए।
  • कैंची: पट्टी या कपड़े काटने के लिए।
  • थर्मामीटर: बुखार चेक करने के लिए।
  • टेप: पट्टी को चिपकाने के लिए।
  • बर्नॉल (Burnol): जलन के लिए।

प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार करने के लिए:

  • एक छोटा डिब्बा लें और उसमें ये चीजें रखें।
  • अपने सहपाठियों और अभिभावकों से मदद लें।
  • सुनिश्चित करें कि दवाइयाँ ताजा हों और उनकी एक्सपायरी डेट चेक करें।

आपके खेल

1. ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके सही नामों से मिलाइए-
आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेला जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है।
उत्तर:

चर्चा:

  • कबड्डी: इस खेल में दो टीमें होती हैं। एक खिलाड़ी विपक्षी टीम के क्षेत्र में जाकर “कबड्डी-कबड्डी” बोलता है और उनके खिलाड़ी को छूकर अपनी साइड में लौटता है। मेरे क्षेत्र में इसे “कबड्डी” ही कहते हैं।
  • इकड़ी-दुकड़ी: इसमें पत्थरों को जमीन पर रखकर एक पत्थर को उछालकर दूसरों को इकट्ठा करना होता है। मेरे क्षेत्र में इसे “पिट्टो” भी कहते हैं।
  • लट्टू: इसमें लकड़ी का लट्टू रस्सी से घुमाया जाता है। मेरे क्षेत्र में इसे “लट्टू” या “बंबारम” कहते हैं।
  • पतंग: कागज की पतंग को धागे से उड़ाया जाता है। मेरे क्षेत्र में इसे “पतंग” या “गुड्डी” कहते हैं।

2. उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
 दिव्यांग मित्रों के साथ खेले जाने वाले आनंदमयी खेलों की सूची:

  • शतरंज: यह दिमागी खेल है, जिसमें कोई शारीरिक मेहनत नहीं चाहिए।
  • कैरम: बैठकर खेला जाने वाला खेल, जो सभी के लिए आसान है।
  • लूडो: पासों और गोटियों का खेल, जो हर कोई खेल सकता है।
  • पहेलियाँ (Puzzles): दिमागी कसरत के लिए मजेदार।
  • गाना या कहानी सुनाना: इसमें सभी साथ मिलकर गाना गाते या कहानियाँ सुनाते हैं।

सहायता: इन खेलों को चुनने और खेलने के लिए आप अपने शिक्षकों, मित्रों, और अभिभावकों से मदद ले सकते हैं।

पुस्तकालय से

अपने पुस्तकालय में जाकर प्रेमचंद की लिखी कहानियाँ पढ़िए तथा कक्षा में उनके बारे में चर्चा कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे तथा कक्षा में चर्चा करें।

इन्हें भी जानिए

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे।

पता लगाइए

अब आप चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए। इसके लिए आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर: चित्र में दिखाई गई इस प्रसिद्ध पैरालंपिक खिलाड़ी का नाम शीतल देवी है। ये भारत की एक पैरा आर्चर (तीरंदाज़) हैं।

  • जन्म: 10 जनवरी, 2007
  • जन्मस्थान: जम्मू-कश्मीर, भारत
  • खेल: तीरंदाजी
  • उपलब्धियाँ: पैरालंपिक खेल (पेरिस, 2024) – कांस्य पदक (2024, मिश्रित टीम)
  • विश्व चैंपियनशिप (प्लज़ेन): रजत पदक (2023)
  • एशियाई चैंपियनशिप (बैंकॉक): स्वर्ण पदक (2023, मिश्रित), रजत पदक (2023, व्यक्ति)
  • एशियाई पैरा खेल ( हांग्जो): स्वर्ण पदक (2022, व्यक्ति / मिश्रित), रजत पदक (2022, डबल्स)
  • पुरस्कार: अर्जुन पुरस्कार 2023, एशियाई पैरालंपिक समिति द्वारा वर्ष 2023 का सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट, विश्व तीरंदाजी द्वारा वर्ष 2023 की सर्वश्रेष्ठ महिला पैरा तीरंदाज़