02. संधि

संधि

“दो वर्णों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) या ध्वनि उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते है।” 
जैसे: 

हिम + आलय = हिमालय
अ + आ = आ
एक + एक = एकैक
अ + ए = ऐ

संधि के भेद

  • स्वर संधि दो स्वर वर्णों के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वरसंधि कहते हैं, जैसे: भानु + उदय = भानूदय, महा + इन्द्र = महेन्द्र।
  • व्यंजन संधि व्यंजन वर्ण के साथ स्वर या व्यंजन के मिलने से व्यंजन में जो विकार उत्पन्न होता है उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जैसे: अहम् + कार = अहंकार, जगत+आन्नद = जगदान्नद।
  • विसर्ग संधि विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से जो विकार होता है, उसे ‘विसर्ग संधि’ कहते हैं। जैसे: निः + चय = निश्चय, निः + तार = निस्तार।

संधि निर्णय

स्वर-संधि

  • अति + अध्कि  = अत्यध्कि
  • अति + अंत  = अत्यंत
  • अति + आवश्यक  = अत्यावश्यक
  • अनु + अय  = अन्वय
  • अभि + आगत  = अभ्यागत
  • आदि + अंत = आद्यंत
  • इति + आदि  = इत्यादि
  • उपरि + उक्त  = उपर्युक्त
  • उमा + ईश = उमेश
  • एक + ईश्वर = एकेश्वर
  • एक + अंकी = एकांकी
  • काम + अन्ध्  = कामन्ध्
  • कृप+ आचार्य = कृपाचार्य
  • कृष्ण + आनंद  = कृष्णानंद
  • खग + इन्द्र  = खगेन्द्र
  • गण + ईश  = गणेश
  • गै + इका  = गायिका
  • ग्राम + उद्धार   = ग्रामोद्धार
  • घन + आनन्द  = घनानन्द
  • चन्द्र + उदय   = चन्द्रोदय
  • चिर + आयु  = चिरायु
  • चे + अन  = चयन
  • छात्रा + आवास  = छात्रावास
  • जन्म + अंतर  = जन्मांतर
  • जल + आशय  = जलाशय
  • तथा + अपि  = तथापि
  • तथा + आगत  = तथागत
  • तथा + एव  = तथैव
  • त्रिगुण + अतीत  = त्रिगुणातीत
  • थान + ईश्वर  = थानेश्वर
  • दाव + अनल  = दावानल
  • दिन + अंत  = दिनांत
  • दीप + आवली  = दीपावली
  • दश + आनन   = दशानन
  • देव + इन्द्र   = देवेन्द्र
  • देश + अंतर  = देशांतर
  • धर्म + अन्ध्  = धर्मान्ध्
  • धर्म + आत्मा  = धर्मात्मा
  • ध्वज + उत्तोलन  = ध्वजोत्तोलन
  • नग + इन्द्र  = नगेन्द्र
  • नर + इन्द्र  = नरेन्द्र
  • नि + उन  = न्यून
  • ने + अन  = नयन
  • पंच + अमृत  = पंचामृत
  • पत्रा + आचार  = पत्राचार
  • पद + अध्किारी  = पदाधिकारी
  • पर + अर्थ  = परार्थ
  • परम + अर्थ  = परमार्थ
  • पीत + अंबर  = पीतांबर
  • पुण्य + आत्मा  = पुण्यात्मा
  • पौ + अन  = पावन
  • प्रति + एक  = प्रत्येक
  • पल + उदय  = पलोदय
  • ब्रह्म + अस्त्रा  = ब्रह्मास्त्रा
  • भो + अन  = भवन
  • मत + एक्य  = मतैक्य
  • मद + अंध्  = मदांध्
  • महा + आशय   = महाशय
  • महा + ट्टषि  = महर्षि
  • यथा + इष्ट  = यथेष्ट
  • योग + इन्द्र = योगेन्द्र
  • रजनी + ईश = रजनीश
  • रमा + ईश  = रमेश
  • राम + अयन = रामायण
  • रूद्र + अक्ष  = रूद्राक्ष
  • लम्ब + उदर  = लम्बोदर
  • वसुध+  एव    = वसुधैव
  • वि+  अर्थ = व्यर्थ
  • वि+  उत्पत्ति  = व्युत्पत्ति
  • शरण+  आगत = शरणागत
  • श्वेत+  अम्बर  = श्वेतांबर
  • सदा+  एव  = सदैव
  • सु+  आगत  = स्वागत
  • हिम+  अचल  = हिमाचल

व्यंजन-संधि

  • आ +  छादन = आच्छादन
  • उत् +  अय  = उदय
  • उत् +  ज्वल  = उज्जवल
  • उत् +  नति  =  उन्नति
  • ट्टक् +  वेद  =  ट्टग्वेद
  • किम् +  चित  =  किंचित
  • जगत् +  ईश   =  जगदीश
  • तत् +  हित  =  तद्धित
  • दिक्+  गज  =  दिग्गज
  • मर् +  अन   = मरण
  • वि +  छेद  = विच्छेद
  • सम् +  कल्प   =  संकल्प
  • सम् +  तोष   = संतोष
  • सम् +  लग्न   =  संलग्न
  • सम् +  कार =  संस्कार
  • सत् +  मार्ग   =  सन्मार्ग
  • सत् +  चित् आनंद  =  सच्चिदानंद

विसर्ग-संधि

  • अतः+  एव   =  अतएव
  • आविः+  कार  = आविष्कार
  • तपः+  वन =  तपोवन
  • दुः+  कर  =  दुष्कर
  • दुः+  जन   =  दुर्जन
  • नमः+  चय  =  निश्चय
  • पुरः+  कार  =  पुरस्कार
  • प्रातः+  काल =  प्रातःकाल
  • पुनः+  जन्म  =  पुनर्जन्म
  • भाः+  कर = भास्कर
  • मनः+  ज =  मनोज
  • मनः+  रथ  =  मनोरथ
  • यशः+ दा =  यशोदा
  • यशः+ धरा  =  यशोध्रा
  • बहिः+ कार =  बहिस्कार
  • श्रेयः+ कर =  श्रेयस्कर
  • सरः+ वर   =  सरोवर
  • स्वः+ ग =  स्वर्ग