10. खुशबू रचते हैं हाथ… – Short Questions answer

अतिलघूउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘जूही की डाल-से खुशबूदार हाथ’ पंक्ति में किन लोगों के हाथों का वर्णन है?
उत्तरः ‘जूहू की डाल से खुशबूदार हाथ’ नव युवतियों की वय के हाथों का वर्णन किया है।

प्रश्न 2. ‘गन्दे मुहल्लों के गन्दे लोग’ कौन होते हैं? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तरः ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ का आशय है कि वे मजदूर जो खुशबूदार अगरबत्तियाँ बनाते हैं, वे ही अपने परिश्रम द्वारा सारे संसार को खुशबू देते हैं।
व्याख्यात्मक हल:
‘गुन्दे मुहल्ले के गन्दे लोग’ यहाँ अगरबत्तियाँ बनाने वाले निम्नवर्गीय लोगों को कहा गया है।

प्रश्न 3. खुशबू रचने वाले हाथ किन परिस्थितियों में तथा कहाँ रहते हैं ?
उत्तरः खुशबू रचने वाले हाथ कई गलियों के बीच कई नालियों के पार कूड़े-करकट के ढेरों के बाद बदबूदार इलाके में रहते हैं। इनकी अलग बस्ती होती है।

प्रश्न 4. ‘खुशबू’ ‘रचने वालों को’ ‘गंदे मुहल्ले के गंदे लोग’ क्यों कहा गया है?
उत्तरः ‘खुशबू रचने वालों को, गंदे मुहल्ले के गंदे लोग’ इसलिए कहा जाता है कि खुशबू रचने वाले लोग गन्दे मुहल्लों में रहते हैं और स्वयं भी गन्दे होते हैं।

प्रश्न 5. प्रस्तुत कविता में कवि ने किस विषमता का पर्दाफाश किया है ?
उत्तरः प्रस्तुत कविता में कवि ने सामाजिक विषमता का पर्दाफाश किया है।

प्रश्न 6. ‘गंदे मुहल्लों में खुशबुओं वाली अगरबत्तियाँ बनती हैं’, इस कथन में क्या विरोध है?
उत्तरः श्रमिक स्वयं दुख झेल कर दूसरों को सुखी करता है।
व्याख्यात्मक हल:
सारे संसार को खुशबू से महका देने वाली खुशबूदार अगरबत्तियों को बनाने वाले श्रमिकों की गरीबी के कारण कई नालियों के पार कूड़े-करकट के ढेरों के बाद बदबूदार इलाकों में रहना पड़ता है। ये लोग स्वयं भी गन्दे होते हैं। वहाँ के गंदे माहौल में रहना  इनकी मजबूरी होती है। वह स्वयं दुख सहता है और संसार को खुशबू से महकाकर सुखी करता है।

लघूउत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. ‘गंदगी में रहकर भी खुशबू का निर्माण’-कथा के द्वारा कवि देश की किस विषमता की ओर इशारा कर रहा है ?
उत्तरः गंदगी में रहने वाले ये मजदूर अगरबत्तियों का निर्माण कर खुशबू फैलाते हैं। कवि ने ऐसा कहकर देश में व्याप्त अर्थिक विषमता की ओर संकेत किया है और मजदूरों की दीन-हीन दशा की ओर कवि इशारा करता है।

प्रश्न 2. हमारे देश में मानसिक और शारीरिक श्रम करने वालों में किस प्रकार का भेदभाव किया जाता है? खुशबू रचते हाथ कविता के आलोक में लिखिए।
उत्तरः हमारे देश में मानसिक श्रम करने वाले को मध्य वर्ग का, पढ़ा-लिखा तथा सम्मानपूर्ण स्थान मिलता है जबकि शारीरिक श्रम करने वाले गरीब मजदूरों को निम्न वर्ग का, अशिक्षित जाहिल समझा जाता है। समाज में उन्हें सम्मान प्राप्त नहीं होता है।

प्रश्न 3. मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ कहाँ बनती हैं ?
उत्तरः देश की मशहूर खुशबूदार अगरबत्तियाँ जहाँ बनती हैं, वहाँ गन्दगी होती है। ये अगरबत्तियाँ चारों तरफ बदबू से भरी बस्तियों तथा कूड़े के ढेर वाली गलियों में बसे गंदे मोहल्लों में बनती है।

प्रश्न 4. जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल केसा होता है?
उत्तरः जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं वहाँ माहौल अत्यन्त गन्दा होता है। सुगन्धित अगरबत्तियाँ बनाने वाले लोग गन्दे मोहल्लों में रहते हैं। ये लोग स्वयं भी गन्दे होते हैं तथा दुनिया-भर की गन्दगी के बीच रहते हैं। वहाँ का माहौल रहने योग्य नहीं होता पर वहाँ रहना इनकी मजबूरी है।

प्रश्न 5. ‘पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?
उत्तरः कवि उन बच्चों के बारे में कहना चाहता है जिनके हाथ पीपल के नए-नए पत्तों की तरह कोमल होते हैं तथा अगरबत्ती बनाते-बनाते उनके हाथों की कोमलता एवं सुगन्ध गायब हो जाती है।

प्रश्न 6. ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता सामाजिक विषमताओं को किस प्रकार बेनकाब करती है ?
उत्तरः ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता समाज के निर्माण में योगदान करने वाले लोगों के साथ होने वाले उपेक्षा भाव को बेनकाब करती है। कवि सामाजिक और आर्थिक विषमता को मिटाने के प्रति लोगों को सचेष्ट करना चाहता है कि श्रमिक वर्ग को भी जीने के लिए उचित वातावरण मिलना चाहिए।

प्रश्न 7. जो लोग खुशबू की रचना, सजाने-सँवारने का काम करते हैं, उनके हाथ केसे होते हैं ?
अथवा
कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई?
उत्तरः जो लोग खुशबू की रचना, सजाने-सँवारने का काम करते है उनके हाथ निम्न प्रकार के होते हे। उनके हाथ घिसे नाखून वाले होते हैं। उभरी नसों वाले कटे-फटे, ज़ख्मों से फटे होते हैं। पीपल के पत्तों से कोमल होते हैं। जूही की डाली के समान नाजुक होते हैं।

प्रश्न 8. ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता में कवि किस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता है और क्यों ?
उत्तरः जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल बदबूदार होता है। वे दुनिया की निकृष्टतम बस्तियाँ हैं। इन गंदी बस्तियों में श्रमिक रहते हैं। वहाँ जीने की दशाएँ बेहद खराब हैं तथा श्रमिकों की दीन-हीन दशा की ओर कवि ध्यान आकर्षित करना चाहता है।

10. नए इलाके में…  – Short Questions answer

अति लघू उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. इस कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है ? 
उत्तर: इस कविता में निम्नलिखित पुराने निशानों का उल्लेख किया है-
(i) पीपल का पेड़,
(ii) ढहा हुआ मकान,
(iii) जमीन का खाली टुकड़ा,
(iv) बिना रंग वाला लोहे का फाटक,
(v) इक मंजिला मकान।

प्रश्न 2. कवि अपने घर के लिए कहाँ से मुड़ता था तथा उसका मकान कैसा था ?
उत्तर: कवि अपने घर के लिए खाली पड़े जमीन के टुकडे़ से बाएँ मुड़ता था। कवि का मकान एक मंजिला था उस पर बिना रंग वाला लोहे का फाटक चढ़ा था।

प्रश्न 3. ‘नए इलाके में’ शीर्षक कविता का मूल भाव लिखिए।
उत्तर: इस कविता को लिखने के पीछे कवि का उद्देश्य समाज के निचले तबके द्वारा किया जा रहा उत्कृष्ट कार्य प्रकाश में लाना है। कवि सामाजिक और आर्थिक विषमता के प्रति हमें सचेत और जागरूक करना चाहते हैं।

प्रश्न 4. कवि रास्ता क्यों भूल जाता है? 
उत्तर:  कवि रास्ता भूल जाता है क्योंकि  इस इलाके में नए-नए घर बन गए हैं |

प्रश्न 5. कवि निशानों की क्यों बात करता है?

उत्तर: तीव्रता से हो रहे बदलावों को बताने के लिए | 

लघू उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. कवि को क्या उम्मीद है ?
उत्तर: कवि को यह उम्मीद है कि कोई-न-कोई पूर्व परिचित व्यक्ति उसे अवश्य पहचान लेगा और उसे आवाज देकर बुलायेगा अर्थात इस परिर्वतनशील समय में भी कुछ-न-कुछ अवश्य बचा रह गया है।

प्रश्न 2. नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?
उत्तर: नए निर्माण होते इलाके में कवि के रास्ता भूलने का कारण हैμइन इलाकों में हर रोज नए-नए निर्माण होना, नए इलाके बसना तथा बनाए गए निशानों का न मिलना। अर्थात् कवि नए परिवर्तन के कारण रास्ता भूल जाता है।

प्रश्न 3. कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है?
उत्तर: कवि एक घर पीछे या दो घर आगे इसलिए चल देता है, क्योंकि नित्य नए परिवर्तन कवि की बनाई पहचान तथा पिछली बार के निशानों को मिटा देते हैं। इसलिए कवि अपने एक मंजिल रूपी घर तक नहीं पहुँच पाता।

प्रश्न 4. अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने कौन-कौन से निशान याद रखे थे । ‘नए इलाके में’ कविता के आधार पर उत्तर लिखिए । 
उत्तर: अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने निम्न निशान याद रखे थे। पीपल का पेड़, खाली पड़ा प्लाॅट या ढहा हुआ मकान तथा एक मंजिला बिना रंग के फाटक वाला मकान।

प्रश्न 5. स्मृति के भरोसे क्यों नहीं रहा जा सकता ?
उत्तर: स्मृति के भरोसे इस दुनिया में अधिक समय तक नहीं रहा जा सकता। यहाँ वास्तविकता का सामना करना ही पड़ता है। यहाँ पल-पल परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में स्मृति धोखा खा जाती है।

प्रश्न 6. कवि नए शहर में अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए किन-किन निशानों को खोजता है ?
उत्तर: 

  • पीपल का पेड़
  • ढहा हुआ घर
  • जमीन का खाली टुकड़ा/बिना रंग वाला लोहे का फाटक 

प्रश्न 7. व्याख्या कीजिए − यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि नए इलाके में उसकी स्मृति भी उसका साथ छोड़ देती है। यहाँ नित नई-नई इमारतें बन रही हैं। इस कारण से वह इस नए इलाके का जो रेखाचित्र बनाकर उसे याद रखता है, वह हर रोज़ बदल जाता है। इसलिए कवि को अब अपनी स्मृति पर भी भरोसा नहीं है। 

प्रश्न 8. व्याख्या कीजिए − समय बहुत कम है तुम्हारे पास आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने समय की कमी की ओर इशारा किया है क्योंकि उसने अपना काफी समय अपने घर को ढूँढने में बर्बाद कर दिया। आज के इस प्रगतिशील समय में हर इंसान प्रगति की सीढ़ियों को पार करने में लगा हुआ है परन्तु कवि अपनी पहचान भी भूल गया है। समय के इस अभाव के कारण वह किसी के भी साथ आत्मीय सम्बंध नहीं बना पाता है।

09. अग्नि पथ – Short Questions answer

अतिलघूउत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. अग्निपथ कविता में कवि किसको संबोधित कर रहा है?
उत्तरः अग्निपथ कविता में कवि जीवन पथ पर आगे बढ़ने वाले मुसाफिर को संबोधित कर रहा है।

प्रश्न 2. ‘घने वृक्ष’ और ‘एक पत्र-छाँह’ का क्या अर्थ है ?
उत्तरः ‘घने वृक्ष’ मार्ग में मिलने वाली सुविधा के प्रतीक हैं। इनका आशय है-जीवन की सुख-सुविधाएँ। ‘एक पत्र-छाँह’ का प्रतीकार्थ है-थोड़ी-सी सुविधा।

प्रश्न 3. ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ से क्या आशय है ?
उत्तरः ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ का आशय है – संकटों से पूरी तरह ग्रस्त मनुष्य। मार्ग में आने वाले कष्टों को झेलता हुआ तथा परिश्रम की थकान को दूर करता हुआ मनुष्य अपने-आप में सुन्दर होता है।

प्रश्न 4. ‘अग्निपथ’ कविता के माध्यम से कवि क्या सन्देश देना चाहते हैं ?
उत्तरः कवि यह सन्देश देना चाहते हैं कि हमें जीवन-पथ पर सँभलकर चलना है, अपनी मंज़िल तक पहुँचना है। क्योंकि जीवन संघर्षों तथा चुनौतियों से भरा हुआ है, इसमें सुख की कामना तथा विश्राम लक्ष्य प्राप्ति में बाधक है।

प्रश्न 5. ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों की पुनरावृत्ति क्यों की गई है ? ‘अग्निपथ’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तरः शब्दों की पुनरावृत्ति करके कवि कर्मठ व्यक्तियों को जीवन-पथ की कठिनाइयों से जूझने के लिए दृढ़ करके तैयार करना चाहता है। चाहे उनके मार्ग में अनगिनत कठिनाइयाँ उन्हें घेर लें, तब भी वह जीवनपथ पर संघर्ष से नहीं थकेगा।

लघूउत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. ‘‘पथ पर थम जाने से हम किस लाभ से वंचित रह जाते है’ ’कविता ‘अग्निपथ’ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तरः यह जीवन पथ अग्निपथ के समान संघर्षों, कष्टों, बाधाओं से भरा हुआ है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जो इस पथ की बाधाओं से घबराकर बीच में ही थम जाते हैं वे अपना लक्ष्य (मंजिल) प्राप्त नहीं कर पाते।

प्रश्न 2. ‘अग्निपथ’ में क्या माँगना चाहिए ?
उत्तरः ‘अग्निपथ’ अर्थात-संघर्षमयी जीवन में हमें चाहे अनेक घने वृक्ष मिलें, परंतु हमें एक पत्ते की छाया की भी इच्छा नहीं करनी चाहिए। किसी भी सहारे के सुख की कामना नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 3. यह कविता आपको क्यों प्रभावित करती है ?
उत्तरः इस कविता में जीवन को संघर्षमय, कष्टमय और दुःखमय बताया गया है तथा मनुष्य को इसकी चुनौतियों का सामना करने का आग्रह किया गया है। यह चुनौती सशक्त एवं प्रभावी बन पड़ी है।

प्रश्न 4. कवि ने ‘अग्निपथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है ?
उत्तरः कवि ने ‘अग्निपथ’ जीवन की कठिनाई से पूर्ण मार्ग के लिए प्रयुक्त किया है। वह मानता है कि जीवन में पग-पग पर संकट हैं, चुनौतियाँ और कष्ट हैं। इस प्रकार यह जीवन संघर्षपूर्ण है।

प्रश्न 5. कवि ने कौन-से दृश्य को सबसे महान् कहा है? ‘अग्निपथ’ कविता के आधार पर उत्तर लिखिए।
उत्तरः कवि ने संघर्षमयी जीवन को सबसे महान् कहा है, क्योंकि कभी यह जीवन पथ फूलों की शय्या है तो कभी काँटों की। पर हमें अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए। यह कविता हमें जीवन में संघर्ष करते हुए निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

प्रश्न 6. संघर्ष करते रहने वाला व्यक्ति क्या कभी थक सकता है ? यदि हाँ तो किन स्थितियों में।
उत्तरः सच्चा संघर्ष करने वाला व्यक्ति तब तक नहीं थकता जब तक उसे लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाती। उसके लिए थकावट लक्ष्य के मार्ग को त्यागना है न कि लक्ष्य पर चलने के लिए लंबा मार्ग अपनाना। वह केवल उन स्थितियों में थकता है जब उससे लक्ष्य के मार्ग पर चलते-चलते कोई चूक न हो जाये।

प्रश्न 7. ‘एक पत्र छाँह भी माँग मत’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः प्रस्तुत कविता में कवि ने संघर्षमय जीवन को ‘अग्निपथ’ कहते हुए मनुष्य को यह सन्देश दिया है कि राह में सुख रूपी छाँह की चाह न कर, अपनी मंजिल की ओर कर्मठतापूर्वक बिना थकान महसूस किए बढ़ते ही जाना चाहिए।

प्रश्न 8. ‘अग्निपथ’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तरः इस कविता का मूल भाव है निरन्तर संघर्ष करते हुए जियो। कवि जीवन को अग्निपथ अर्थात् आग से भरा पथ मानता है। इसमें पग-पग पर चुनौतियाँ और कष्ट हैं। मनुष्य को इन चुनौतियों से नहीं घबराना चाहिए और इनसे मुँह भी नहीं मोड़ना चाहिए बल्कि आँसू पीकर, पसीना बहाकर तथा खून से लथपथ होकर भी निरन्तर संघर्ष पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।

प्रश्न 9. ‘तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी!’ पंक्ति में कवि मनुष्य को क्या प्रेरणा देना चाहता है ?
उत्तरः ‘अग्निपथ’ संघर्षमय जीवन का प्रतीक है। जीवन-पथ पर आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास देता है सीमित सुख-साधनों में गुज़ारा करना तथा कठोर परिश्रम तथा निडरता की आवश्यकता है।

प्रश्न 10. अग्निपथ के मुसाफिर को क्या शपथ लेनी चाहिए और क्यों?
उत्तरः अग्निपथ के मुसाफिर को संघर्ष के रास्ते पर चलते रहने की शपथ लेनी चाहिए। तभी वह अपने लक्ष्य पर पहुँच पाएगा। वह जीवन भर संघर्ष से थकेगा नहीं। चाहे अनगिनत कठिनाइयाँ घेर लें। परन्तु वह जीवन रूपी पथ पर चलकर अपनी मंजिल को प्राप्त करेगा।

08. गीत – अगीत – Short Questions answer

प्रश्न 1: शुक और शुकी पेड़ पर क्या करते हैं? कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर:
 शुक पेड़ की घनी डाल पर बैठा सूरज की सतरंगी किरणों का स्पर्श पाकर मधुर गीत गाता है तथा घोंसले में बैठी शुकी शुक का गीत सुनकर प्रसन्न होती है। प्रेम में मग्न हो वह अंडों पर पंखों को फैलाकर उन्हें सेने लगती है। कवि कहना चाहता है कि पशु-पक्षियों में भी प्रेम एवं वात्सल्य की अनुभूति होती है।

प्रश्न 2: नदी और गुलाब क्या कर रहे हैं? कविता के आधार पर बताइए।
उत्तर:
 नदी अपने तटों से विरह की बात कर रही है। वह अपने कष्टों की बात तटों से सुनकर अपने मन को हल्का कर लेती है। दूसरी तरफ गुलाब अकेला खड़ा है। वह सोच रहा है कि यदि ईश्वर ने उसे स्वर दिया होता तो वह भी अपने मन की बात संसार को बता सकता था।

प्रश्न 3: नदी-तट पर खड़े गुलाब की मनोदशा क्या है?
उत्तर: 
नदी-तट पर खड़ा गुलाब यह सोचता है कि यदि ईश्वर ने उसे भी बोलने के लिए स्वर प्रदान किया होता तो वह भी अपने पतझर के सपनों के गीत संसार को सुना देता। स्वर न होने के कारण वह अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर सकता।

प्रश्न 4: ‘गीत-अगीत’ कविता में कवि की दुविधा क्या है? उसने अपनी दुविधा को किन उदाहरणों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है?
उत्तर: 
‘गीत-अगीत’ कविता में कवि की दुविधा है कि अपनी वेदना को मन-ही-मन अनुभव करना ठीक है या उसे प्रकट करना। वह निम्न उदाहरणों से अपनी दुविधा व्यक्त करता है- नदी और किनारा, निर्झरी और गुलाब, शुक और शुकी, विरही गायक और उसकी राधा।

प्रश्न 5: कवि ने ‘अगीत’ को गीत के समान महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर: 
कवि गीत को भावनाओं का प्रकटीकरण मानता है। इसमें भावनाओं का महत्त्व शब्दों से अधिक है। शब्द बाह्य है, भावना अन्दरूनी। बाह्य अलंकरण मात्र होता है। शब्द उमड़ने से पहले जो भावनाएँ हृदय में होती हैं, उन्हीं का महत्त्व होता है। ये भावनाएँ हर मनुष्य में होती हैं। शब्दों के माध्यम से प्रकटीकरण सभी नहीं कर पाते। हृदय में उमड़ने वाली भावनाएँ किसी गीत से कम नहीं होतीं। अतः ‘अगीत’ का महत्त्व गीत के समान ही है।

प्रश्न 6: प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंधों के बारे में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंधों के बारे में निम्नलिखित स्पष्टीकरण हैं-

  • प्रकृति का श्रृंगार पशु-पक्षी हैं और प्रकृति इनका शृंगार है।
  • प्रकृति की सुषमा को देखकर ही पशु-पक्षी मस्त होते हैं।
  • ये प्रकृति को अपने सुरों से संगीतमयी बनाते हैं।
  • प्रकृति के हर रूप के साथ रहकर पशु-पक्षी अपना स्नेह दर्शाते हैं।
  • पशु-पक्षी प्रकृति की सफाई करके पर्यावरण को शुद्ध भी करते हैं।


प्रश्न 7: ‘गीत-अगीत’ कविता में कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर:
 इस कविता में कवि ने गीत-अगीत में अंतर स्पष्ट किया है। गीत वह होता है, जिसे स्वर दिया जा सके तथा स्वर न पाने वाले को अगीत कहा जाता है। कवि ने प्रकृति, पक्षियों तथा मानवों का उदाहरण देकर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि जो भावनाएँ व्यक्त नहीं हो पातीं, उनका महत्त्व कम नहीं होता। वे दूसरे की प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

प्रश्न 8: मनुष्य प्रकृति के किस रूप से आंदोलित होता है?
उत्तर:
 मनुष्य प्रकृति के अनेक रूपों से आंदोलित होता है, जो निम्नलिखित हैं-

  • प्रकृति का मोहक व शांत वातावरण उसे शांति प्रदान करता है।
  • प्रात:कालीन सूर्य से उसे उल्लास व स्फूर्ति प्राप्त होती है।
  • घुमड़ते बादलों को देखकर मनुष्य प्रसन्न होता है। उसमें आशा का संचार होता है।
  • मनुष्य को प्रकृति अपने साथ हँसती रोती जान पड़ती है।


प्रश्न 9: गीत-अगीत में अंतर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
गीत व अगीत—दोनों ही के भाव सौंदर्यपूर्ण, ममता व प्रेम से परिपूर्ण हैं। प्रेमी की पुकार सुनकर प्रेमिका खिंची चली आती है और नीम की छाया में छिपकर उसका गीत सुनती है। गाने में लीन प्रेमी और सुनने में लीन प्रेमिका। एक शब्दों से अपना प्रेम प्रकट करता है तो दूसरा मौन रहकर गाया जाने वाला गीत है और मौन रहकर प्रेम की अभिव्यक्ति अगीत है। दोनों ही अत्यन्त सुंदर हैं।

07. दोहे – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. प्रेम की डोर किससे बँधी है?
उत्तरः
 प्रेम की डोर विश्वास से बँधी है।

प्रश्न 2. एक को साधने का क्या अर्थ है? रहीम के दोहे के अनुसार लिखिये। 
उत्तरः एक को साधने का अर्थ है किसी एक पर विश्वास करके कार्य करना, अर्थात् ईश्वर को मूल मानकर उनकी साधना करना।

प्रश्न 3. अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा? 
उत्तरः
 अवध नरेश श्री राम पर संकट आने पर यानि वनवास के दौरान वे कुछ समय के लिए चित्रकूट आ गए थे।

प्रश्न 4. नट किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
उत्तरः नट कुण्डली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है। वह कुण्डली में सिमट जाता है और छलाँग मारकर रस्सी के ऊपर चढ़ जाता है।

प्रश्न 5. सागर की बड़ाई क्यों नहीं होती?
उत्तर:
 उसके जल से किसी की प्यास न बुझने के कारण सागर की बड़ाई नहीं होती।

प्रश्न 6. रहीम के अनुसार हिरन अपना सर्वस्व कैसे न्यौछावर कर देता है? 
उत्तरः 
रहीम के अनुसार हिरन नाद पर प्रसन्न होकर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है।

प्रश्न 7. लाख कोशिश करने के बाद भी बिगड़ी बात नहीं बनती क्यों?
उत्तरः जिस प्रकार एक बार दूध के खराब होने पर उससे मक्खन नहीं बनाया जा सकता, उसी प्रकार लाख कोशिश करने पर भी बिगड़ी बात नहीं बनाई जा सकती।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रहीम ने प्रेम के सम्बन्ध में किसका उदाहरण दिया है? प्रेम और धागे में क्या समानता है?
उत्तरः इसके संबंध में रहीम ने धागे का उदाहरण दिया है। प्रेम धागे के समान कोमल और अखण्ड होता है। जिस प्रकार धागा यदि एक बार टूट गया तो फिर जुड़ नहीं पाता और यदि जोड़ भी दिया जाये तो उसमें गाँठ पड़ जाती है, वैसा ही प्रेम संबंध है। इसलिए प्रेम रूपी धागा कभी तोड़ना नहीं चाहिए।

प्रश्न 2. ‘रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय’ कवि रहीम ने क्यों कहा है?
उत्तरः रहीम के अनुसार मनुष्य को अपने मन की व्यथा अपने मन में ही छिपाकर रखनी चाहिए। उसे किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3. अपना दुःख दूसरों के सामने प्रकट क्यों नहीं करना चाहिए?
अथवा
हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है? 

उत्तरः अपना दुःख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि असंवेदनशील लोग प्रत्यक्षतः तो सहानुभूति प्रकट करते हैं परन्तु पीठ पीछे उपहास करते हैं। इस प्रकार दुःख कम होने की अपेक्षा बढ़ जाता है।

प्रश्न 4. एक के साधने से सब कैसे सध जाता है?
उत्तरः (i) एक काम को साधने से सब काम वैसे ही सँवर जाते हैं जैसे जड़ में पानी देने से फूल, पत्ती, पूर्ण पेड़ का विकास होता है।
(ii) एक ही परमात्मा के साधने से अन्य सारे काम स्वयं ही सध जाते हैं।
(iii) वही तो सबका मूल है।
(iv) जड़ (मूल) सींचने से फल-फूल स्वयं ही (वृक्ष) लहलहा उठते हैं। उसी प्रकार परमात्मा को साधने से सभी काम सध जाते हैं और पूरे हो जाते हैं।

प्रश्न 5. रहीम ने सागर जल की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तरः रहीम ने सागर के जल को व्यर्थ इसलिए कहा है, क्योंकि यह पीने के काम नहीं आता। सागर में अथाह जल होने पर भी लोग प्यासे मरते हैं। इसकी तुलना में पंक-जल गंदा होते हुए भी इसलिए धन्य है, क्योंकि इसे पीकर छोटे-छोटे जीवों की प्यास बुझती है। इस प्रकार यह जल उपयोगी है जबकि सागर के जल का कोई उपयोग नहीं है।

प्रश्न 6. ‘जहाँ काम आवै सुई, कहा करे तरवारि’-पंक्ति का आशय पठित दोहे के आधार पर कीजिए।
उत्तरः हर वस्तु का अपना महत्व होता है, सभी उपयोगी सिद्ध होते हैं। बड़े को देखकर छोटे को अनदेखा नहीं करना चाहिए। सुई की आवश्यकता पड़ने पर तलवार काम नहीं आती। जीवन में छोटी से छोटी वस्तु का अपना महत्व होता है।

प्रश्न 7. विपत्ति के समय अपनी ही सम्पत्ति क्यों काम आती है? 
उत्तरः दूसरे की सम्पत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता है। हो सकता है जरूरत के समय पर वह व्यक्ति ना नुकर करे। इसलिए विपत्ति के समय अपनी सम्पत्ति ही काम आती है।

प्रश्न 8. जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता है? 
उत्तरः 
जलहीन यानी पानी बिना कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर सकता, यद्यपि सूर्य ही कमल को खिलाता है। वह कमल खिलेगा जो पानी के मध्य स्थित है। अर्थात् दूसरा भी हमारी मदद तभी कर पाता है जब हमारे पास कुछ होता है। साधनहीन की कोई मदद नहीं करता।

प्रश्न 9. ‘मोती, मानुष, चून’ के सन्दर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः ‘मोती’ के सन्दर्भ में पानी का अर्थ चमक (कान्ति) है। इसी चमक से वह कीमती बनता है। ‘मानुष’ के सन्दर्भ में ‘पानी’ इज्जत, मान-सम्मान का प्रतीक बनकर आता है। इसी से मनुष्य का समाज में स्थान निश्चित होता है। ‘चून’ के सन्दर्भ में पानी ही उसे गूँदने के काम आता है और तभी इससे खाना पकना संभव होता है।

06. रैदास – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश

प्रश्न 1. कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को क्या माना है? ‘रैदास के पद’ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को चंदन माना है।

प्रश्न 2. रैदास के आधार पर बताइए कि चंदन को पानी की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तरः पानी की सहायता से ही उसका सुगंधित लेप बनाया जा सकता है।

प्रश्न 3. चन्दन की सुगंध अंग-अंग में बस जाने से रैदास का भाव क्या है? 
उत्तरः राम की भक्ति उनके शरीर के हर अंग में समा गई है।

प्रश्न 4. स्वयं को बाती कहकर रैदास क्या सिद्ध करना चाहते हैं?
उत्तरः मनुष्य ईश्वरीय कृपा से प्रकाशित होता है। रैदास यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे बाती की तरह ईश्वर के प्रेम में सदा जलते रहते हैं।

प्रश्न 5. सुहागे से मिलने पर सोने में क्या परिवर्तन आता है? 
उत्तरः सुहागा से मिलकर सोना शुद्ध व चमकीला हो जाता है।

प्रश्न 6. रैदास की भक्ति किस प्रकार की है? 
उत्तरः रैदास की भक्ति दास्य भाव की है।

प्रश्न 7. ‘रैदास’ ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?

अथवा

रैदास ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है? उनके स्वामी की कोई दो विशेषताएँ भी बताइए।
उत्तरः रैदास ने अपने स्वामी को गरीब निवाजु, लाल, गोविन्द, गुसाई, हरि आदि नामों से पुकारा है। स्वामी की नजर में भक्त की भक्ति श्रेष्ठ व उनका प्रेम सर्वाेपरि है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. कवि रैदास ने भगवान और भक्त की तुलना किन-किन चीजों से की है? 

अथवा

पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना किन-किन चीजों से की है, उनका उल्लेख कीजिए। 
उत्तरः रैदास के लाल की विशेषता है कि वह दीनदयालु, गरीब निवाजु हैं। ईश्वर समदर्शी है। जो नीची जाति वालों को भी अपनाकर उन्हें समाज में ऊँचा स्थान देता है। वह असंभव को भी संभव कर सकता है।

प्रश्न 2. रैदास ईश्वर के साथ किन-किन रूपों में एकाकार हो गए हैं? 
उत्तरः रैदास ईश्वर के साथ चंदन-पानी, घन वन-मोर, चाँद चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सुहागा-सोना आदि रूपों में एकाकार हो गए हैं।
व्याख्यात्मक हल:
रैदास की आत्मा परमात्मा के प्रेम में उसी तरह एकाकार हो गई है जिस तरह चंदन-पानी, घनवन-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सुहागा-सोना आदि एक दूसरे के बिना अधूरे व महत्वहीन हो जाने के कारण एकाकार हो गए हैं।

प्रश्न 3. रैदास की भक्ति में कौन-सा भाव उभरकर आया है? उनकी कविता से प्रमाण दीजिए।
उत्तरः दास्यमान, प्रमाण -‘तुम स्वामी हम दासा’
व्याख्यात्मक हल:
रैदास की भक्ति दास्य भाव की है। वे स्वयं को लघु, तुच्छ और दास कहते हैं। वे प्रभु को दीनदयाल, भक्तवत्सल कहते हैं व स्वयं को दास और प्रभु को उनका स्वामी बताते हुए कहते हैं-“तुम स्वामी हम दासा।”

प्रश्न 4. कवि रैदास ने प्रभु को निडर क्यों कहा है?

अथवा

रैदास के ‘लाल’ की क्या विशेषता है? 
उत्तरः कवि ने प्रभु को निडर कहा है क्योंकि वह दीन, दयालु, गरीब निवाजु है। वे समदर्शी हैं। वे नीची जाति वालों को भी अपनाकर उन्हें समाज में ऊँचा स्थान देते हैं। वह असंभव को भी संभव कर सकते हैं।

प्रश्न 5. रैदास ने ईश्वर की किस गरीब निवाज की अनोखी आदत का उल्लेख किया है? कवि ‘गरीब निवाजु’ किसे कहते हैं और क्यों?
उत्तरः गरीब को अमीर और राजा बना देता है।
व्याख्यात्मक हल:
कवि रैदास ने अपने प्रभु को ‘गरीब निवाजु’ कहा है। इसका अर्थ है-दीन-दुखियों, गरीबों पर दया करने वाला। प्रभु ने रैदास जैसे अछूत को संत की पदवी प्रदान कर उसे आदर, सम्मान का पात्र बना दिया। प्रभु गरीब को अमीर और राजा बना देता है।

प्रश्न 6. ‘जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ – रैदास की पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः इसका आशय यह है कि वह ईश्वर गरीब नवाज है जिन्हें अस्पृश्य, अछूत मानकर यह संसार ठुकराता है उन्हें वह अपनी शरण में लेकर उनका कल्याण करता है। उनके दुःख को देखकर द्रवित होता है। उनके दुःख को दूर करता है।

प्रश्न 7. अनेक साधु-सन्तों के नाम लेकर कवि क्या स्पष्ट करना चाहते हैं? 
उत्तरः अनेक साधु सन्तों के नाम लेकर कवि ईश्वर की दयालुता को स्पष्ट करना चाहते हैं। वे निम्न कोटि के व्यक्तियों को भी अपनी कृपा से उच्च पद प्रदान करते हैं। वे दीनदुखियों के सहायक हैं।
व्याख्यात्मक हल:
कवि कबीर, नामदेव, त्रिलोचन, सधना, सैनु जैसे गरीब व निम्न कोटि के व्यक्तियों को संत का सम्मान दिलाने के ईश्वरीय कृपा के गुण को बताकर प्रभु की महिमा का वर्णन करना चाहता है।

प्रश्न 8. रैदास के इन पदों का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए। 
उत्तरः रैदास के दो पद संकलित हैं। दोनों पदों में ईश्वर के गुणों का बखान करके उसका गुणगान किया गया है। प्रथम पद में ईश्वर को महान् एवं स्वयं को उसका दास बताया है। दूसरे पद में प्रभु को अछूतों, गरीबों तथा दीनों का उद्धारक बताया गया है प्रभु अपनी कृपा से अछूतों को भी समाज में सम्मानजनक पद दिलवा देता है। हमें उसी ईश्वर की पूजा-उपासना करनी चाहिए।

05. शुक्र तारे के सामान – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 
प्रश्न 1. ग्राम देवी के मणि भवन पर कौन-कौन से लोग गाँधी जी से मिलने आते थे । ‘शुक्र तारे के समान’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः ग्राम देवी के मणि भवन पर गाँधी जी से मिलने जुल्मों और अत्याचारों की कहानियाँ पेश करने के लिए पीड़ितों के दल के दल उमड़ते रहते थे।

प्रश्न 2. गाँधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई कहाँ नौकरी करते थे? 
उत्तरः गाँधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई सरकारी अनुवाद विभाग में नौकरी करते थे।

प्रश्न 3. अहमदाबाद से कौन से दो साप्ताहिक पत्र निकलते थे ?
उत्तरः अहमदाबाद से ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’ में दो साप्ताहिक पत्र निकलते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. गाँधी जी से ‘यंग इण्डिया’ के सम्पादक बनने की प्रार्थना क्यों की गयी थी?
उत्तरः गाँधी जी को ‘यंग इण्डिया’ के सम्पादक बनने की प्रार्थना इसलिए की थी, क्योंकि हार्नीमैन को देश-निकाला देने के बाद साप्ताहिक के लिए लिखने वालों की कमी रहने लगी थी। गाँधी जी भी अंग्रेजों के विरुद्ध लिखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इस प्रार्थना को स्वीकार कर लिया। 

प्रश्न 2. महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
उत्तरः महादेव भाई अपना परिचय ‘परि-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देते थे और इसमें गौरव का अनुभव करते थे। ऐसा व्यक्ति सभी प्रकार के काम सफलतापूर्वक कर लेता है। वे कभी-कभी स्वयं को गाँधी जी का ‘हम्माल’ (कुली) भी कहते थे।

प्रश्न 3. महादेव भाई के लेख व लिखावट की क्या विशेषताएँ थी? ‘शुक्र तारे के समान’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
महादेव जी की लिखावट की क्या विशेषताएँ थीं? 
उत्तरः महादेव जी द्वारा अखबारों में लिखे काॅलम बेज़ोड़ होते थे। वे गाँधी जी की सीख को पूरी तरह अपनाते थे कि किसी से भी कटुतापूर्ण विवाद न किया जाए। सत्यनिष्ठा से निकले तर्क को भी शालीनता के साथ, विवेक पूर्वक प्रस्तुत किया जाए। यही महादेव भाई के लेख व लिखावट की विशेषताएँ थीं।

प्रश्न 4. महादेव जी के किन गुणों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया?
उत्तरः महादेव भाई का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली था। वे लोगों से विनम्रता से मिलते थे। उनका सम्पर्क शुक्र तथा चन्द्रमा की भाँति शीतल व निर्मल था। उनके व्यक्तित्व की मोहिनी का नशा कई-कई दिनों तक उतरता ही न था। लोग उन्हें भुला नहीं पाते थे।

प्रश्न 5. पंजाब में फौजी शासन ने क्या कहर बरसाया ?
उत्तरः पंजाब में फौजी शासन ने काफी आतंक मचाया। पंजाब के अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्हें उम्र केद की सजा देकर काला-पानी भेज दिया गया। 1919 में जलियाँवाला बाग में निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया। ‘ट्रिब्यून’ के सम्पादक कालिनाथ राय को 10 साल की जेल की सजा दी गई।

प्रश्न 6. महादेव की साहित्यिक देन क्या है ?
उत्तरः महादेव को प्रथम श्रेणी की शिष्ट, सम्पन्न भाषा और मनोहारी लेखन-शैली की ईश्वरीय देन मिली थी। गाँधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का अंग्रेजी अनुवाद इन्होंने किया। नरहरि भाई के साथ उन्होंने टैगोर द्वारा रचित साहित्य का उलटना-पुलटना शुरू किया। टैगोर द्वारा रचित ‘विदाई का अभिशाप’ शीर्षक नाटिका, ‘शरद बाबू की कहानियाँ’ आदि अनुवाद उस समय की उनकी साहित्यिक देन हैं।

प्रश्न 7. महादेव भाई की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?
उत्तरः सन् 1934-35 में गाँधी जी वर्धा के महिला आश्रम में और मगनबाड़ी में रहने के बाद अचानक मगनबाड़ी से चलकर गाँव की सरहद पर एक पेड़ के नीचे जा बैठे। उसके बाद वहाँ एक-दो झोंपड़े बने और फिर धीरे-धीरे मकान बनकर तैयार हुए, तब तक महादेव भाई, दुर्गा बहन और चि. नारायण के साथ मगनबाड़ी में रहे। वही से वे वर्धा की असह्य गर्मी में रोज सुबह पैदल चलकर सेवाग्राम पहुँचते थे। वहाँ दिन भर काम करके शाम को वापस पैदल आते थे। आते-जाते पूरे 11 मील चलते थे। रोज-रोज का यह सिलसिला लम्बे समय तक चला। कुल मिलाकर इसका जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, वही उनकी अकाल मृत्यु का कारण बना।

प्रश्न 8. शुक्र तारे के समान किसे बताया गया और क्यों ? 
उत्तरः शुक्र तारे के समान महादेव भाई देसाई को बताया गया है, जो गाँधी जी के परम सहयोगी थे। आकाश के तारों में शुक्र का कोई जोड़ नहीं। शुक्र, चन्द्र का साथी। जिस प्रकार शुक्र तारा नक्षत्र मण्डल में ऐन शाम या सवेरे घण्टे दो घण्टे दिखता है, पर अपनी आभा-प्रभा से आकाश को जगमगा देता है, उसी प्रकार महादेव भाई आधुनिक भारत की स्वतन्त्रता के उषाकाल में अपने स्वभाव व विद्वता से देश-दुनिया को मुग्ध करके अचानक अस्त हो गए।

प्रश्न 9. महादेव देसाई कौन थे ? उनका योगदान क्या रहा है ?
उत्तरः महादेव भाई गाँधी जी के मंत्री थे, जो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी प्रतिभा का प्रकाश शुक्र तारे के समान था। उन्होंने सेवा धर्म का पालन किया। पीड़ितों के जुल्मों की कहानी की संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार कर गाँधी जी के सामने पेश कीं, गाँधी जी की यात्राओं के, गतिविधियों के विवरण भेजते थे। पूरी सत्यनिष्ठा से काम करने की तालीम थी। मंत्रमुग्ध करने वाला सुन्दर और शुद्ध लेखन, जेट की सी गति से लिखते थे। कम उम्र में उनकी मृत्यु हो गई।

04. वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकटरमन – Short Questions answer

प्रश्न 1: रमन् की खोज ‘रामन प्रभाव’ क्या है?
उत्तर: 
1921 में चंद्रशेखर वेंकट रामण के मस्तिष्क में समुद्र की नीली आभा में क्या कारण है, इस पर विचार करते समय उन्होंने ‘रमन् प्रभाव’ की खोज की। उनके अनुसार, जब एक वर्गीय प्रकाश की किरणें किसी तरल या ठोस पदार्थ से गुज़रती हैं, तो गुजरने के बाद उनके वर्ण में परिवर्तन आ जाता है। प्रकाश की किरण के फोटान से ऊर्जा निकलती है या मिल जाती है। ऊर्जा के निकलने या पाने  के हिसाब से उसका वर्ण परिवर्तित हो जाता है। यही रामन प्रभाव है।

प्रश्न 2: रमन् के जीवन से भावी पीढ़ी को क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर: 
रमन् वैज्ञानिक दृष्टि और प्रबल राष्ट्रीय चेतना की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। उनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम भी उनकी तरह अपने आसपास घट रही विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं का अवलोकन वैज्ञानिक दृष्टि से करें, प्रकृति के बीच छिपे वैज्ञानिक रहस्यों को खोलें तथा देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास हेतु प्रयास करें।

प्रश्न 3: ‘रमन् प्रभाव’ की खोज से वैज्ञानिक क्षेत्र किस प्रकार लाभान्वित हुआ?
उत्तर: 
‘रमन् प्रभाव’ की खोज से पदार्थों की आणविक और परमाणविक संरचना का अध्ययन करना सरल हो गया। साथ ही पदार्थों का संश्लेषण प्रयोगशाला में करना संभव हो गया तथा अनेक उपयोगी पदार्थों का कृत्रिम रूप से निर्माण किया जाने लगा।

प्रश्न 4: रमन् के व्यक्तित्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
 रमन् उच्चकोटि के वैज्ञानिक तथा शोधकर्ता थे। वे भावुक प्रकृति प्रेमी होने के कारण समुद्र की नीली आभा में घंटों खोए रहते थे। उनकी गणित व भौतिकी में विशेष रुचि थी। उनमें प्रबल राष्ट्रीय चेतना थी। उन्होंने वाद्ययंत्रों के कंपन का रहस्य खोजा। उन्होंने ‘रमन् प्रभाव’ की खोज की। वे शुद्ध शाकाहारी, मदिरा से परहेज़ रखने वाले तथा भारतीय पहनावे को धारण करने वाले व्यक्ति थे। वे आगामी पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत थे।

03. तुम कब जाओगे, अतिथि – Short Questions answer

अति लघू उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कैलेण्डर की तारीख फड़फड़ाने का क्या आशय है? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
कैलेण्डर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही थीं? 
उत्तरः बेचैनी से दिन बीत रहे हैं। लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से तारीखें बदल रहा था। ऐसा करके वह अतिथि को यह बताना चाह रहा था कि उसे यहाँ रहते हुए चौथा दिन शुरू हो गया है। तारीखें देखकर शायद उसे अपने घर जाने की याद आ जाए। यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देवता रूप बनाए रखता है, पर फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है।
व्याख्यात्मक हल:
अतिथि के जाने के इन्तजार में लेखक के दिन बहुत बेचैनी से बीत रहे हैं।
प्रश्न 2. स्नेहपूर्वक मिलने के बावजूद लेखक अपने मित्र के आने पर आशंका से क्यों ग्रस्त थे?
उत्तरः पता नहीं कब तक ठहरेगा।
व्याख्यात्मक हल:
मित्र के आने पर लेखक उससे बहुत स्नेह के साथ मिला लेकिन इसके साथ लेखक को अतिथि के अधिक दिन रुकने की शंका व भय था।

प्रश्न 3. डिनर पर मध्यमवर्गीय हिसाब से उच्च श्रेणी का भोजन क्यों परोसा गया? 
उत्तरः जिससे अतिथि के मन पर मेहमान नवाजी की छाप रहे और सम्भावना थी कि अतिथि एकाध दिन ही ठहरेंगे।

प्रश्न 4. लेखक का सौहार्द बोरियत में क्यों बदल गया? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः मेहमान के लम्बे समय तक टिकने व अनचाहा बोझ बनने के कारण।
व्याख्यात्मक हल:
लेखक का सौहार्द बोरियत में इसलिए बदल गया क्योंकि मेहमान को आए चार दिन हो चुके थे वह जाने का नाम नहीं ले रहा था अब वह एक अनचाहे बोझ के समान लग रहा था जिससे लेखक मुक्त होना चाहता था।

लघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. उफ, तुम कब जाओगे, अतिथि? इस प्रश्न के द्वारा लेखक ने पाठकों को क्या सोचने पर विवश किया है?
उत्तरः इस प्रश्न द्वारा लेखक ने पाठकों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि अच्छा अतिथि कौन होता है? वह, जो पहले से अपने आने की सूचना देकर आए और एक-दो दिन मेहमानी कराके विदा हो जाए न कि वह, जिसके आगमन के बाद मेज़बान वह सब सोचने को विवश हो जाए, जो इस पाठ का मेज़बान निरन्तर सोचता रहा। उफ! शब्द द्वारा मेज़बान की उकताहट को दिखाया गया है।

प्रश्न 2. अच्छा अतिथि कौन कहलाता है ? 
उत्तरः वास्तव में अच्छा अतिथि तो वही होता है जो पहले से अपने आने की सूचना देकर आए और एक या दो दिन की मेहमानी कराकर विदा ले।

प्रश्न 3. लेखक का बटुआ क्यों काँप गया? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
”अन्दर ही अन्दर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।“ कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तरः अतिथि के स्वागत-सत्कार में अधिक खर्च होने व आर्थिक स्थिति बिगड़ने के डर से लेखक का बटुआ काँप उठा।
व्याख्यात्मक हल:
जिस दिन अतिथि आया, मेजबान को उस दिन आशंका हुई कि कहीं वह कुछ दिन ठहरने की इच्छा से तो नहीं आया। उसकी आवभगत पर होने वाले खर्चे का अनुमान लगा कर लेखक भयभीत हो उठा था। उसे अपनी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की आशंका सताने लगी।

प्रश्न 4. मध्यम वर्गीय लोग अपने अतिथियों का स्वागत अपनी सीमा से बढ-चढ़कर क्यों करते हैं?उत्तरः मध्यमवर्ग में दिखावा छाया हुआ है इसलिए स्वागत-सत्कार में बजट बिगड़ जाता है और दो-चार दिन में ही हालत पतली हो जाती है।

प्रश्न 5. लेखक ने अतिथि का स्वागत किस प्रकार किया?
उत्तरः
 लेखक ने अतिथि का स्वागत एक स्नेह-सी मुस्कराहट के साथ किया तथा एक उच्च-मध्यम वर्ग के परिवार के समान उसे डिनर, लंच कराया तथा रात को सिनेमा भी दिखाने ले गया।

प्रश्न 6. अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने किस आशा के साथ अतिथि का सत्कार किया? और, किस रूप में?
उत्तरः
अगर विदा होते तो हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाते।
व्याख्यात्मक हल:
अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की और रात्रि में सिनेमा दिखाया। लेखक ने सोचा कि इसके बाद तुरंत भावभीनी विदाई होगी। वह अतिथि को विदा करने स्टेशन तक जाएँगे। इसी आशा के साथ लेखक ने दूसरे दिन भी अतिथि का सत्कार किया।

प्रश्न 7. कौन-सा आघात अप्रत्याशित था? इसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तरः तीसरे दिन अतिथि ने कहा कि वह धोबी को अपने कपड़े धोने के लिए देना चाहता है। यह एक अप्रत्याशित आघात था। इसमें मेहमान के कई दिन और रुकने की संभावना हो गई थी। इसके बाद लेखक अतिथि को देवता न मानकर मानव तथा राक्षस मानने लगा था। उसका अतिथि राक्षस का रूप लेता जा रहा था।

प्रश्न 8. ‘अतिथि सदैव देवता नहीं होता’ वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है। कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
‘अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।’ आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि आप इस बात से कहाँ तक सहमत हैं? 
उत्तरः यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देवता रूप बनाए रखता है, पर फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है। उसका मान-सम्मान होता है, और ज्यादा दिन तक टिकने पर वह राक्षस का रूप ले लेता है। तब वह राक्षस जैसा बुरा प्रतीत होता है। लेखक की इस बात से मैं पूरी तरह सहमत हूँ।

प्रश्न 9. ‘सम्बन्धों का संक्रमण के दौर से गुजरना’-पंक्ति से क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः सम्बन्धों का संक्रमण के दौर से गुजरने का अर्थ है सम्बन्धों में परिवर्तन आना, सम्बन्धों में दरार आना। पहले जो सम्बन्ध आत्मीयतापूर्ण थे, वे अब तिरस्कार में बदलने लगे। लेखक की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी और सम्बन्ध बिगड़ने लगे।

प्रश्न 10. घर की स्वीटनेस कब समाप्त हो जाती है? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः
 घर में किसी अतिथि के अधिक दिनों तक रुकने पर घर की मधुरता समाप्त हो जाती है। घर के सदस्यों को औपचारिकतावश शिष्टता का दिखावा करना पड़ता है और वे आराम से नहीं रह पाते।

प्रश्न 11. लेखक के मन में अतिथि को ‘गेट आउट’ कहने की बात क्यों आई ?
उत्तरः
 चार दिन की मेहमाननवाजी के पश्चात् लेखक की सहनशीलता जवाब दे गई, वह सोचने लगा कि अतिथि को शराफ़त से लौट जाना चाहिए अन्यथा ‘गेट आउट’ भी एक वाक्य है, जो इसे बोला जा सकता है।

प्रश्न 12. ‘अतिथि देवो भव’ उक्ति की व्याख्या करें। ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः लेखक परम्परा के अनुसार हर अतिथि को देवता के समान समझता था। अतिथि पूज्य होता है लेकिन समयाभाव व महँगाई के कारण लोग आज अतिथि का पहले जैसा आदर सत्कार नहीं कर पाते।

प्रश्न 13. अतिथि के टिके रहने पर परिस्थितियों में क्या परिवर्तन आया?
उत्तरः जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में निम्नलिखित परिवर्तन आए-
(i) खाने का स्तर गिरकर खिचड़ी तक आ गया था।
(ii) वह उसे गेट आउट! कहने के लिए भी तैयार था।
(iii) अतिथि में उसे राक्षस का रूप दिखाई देने लगा था। वह मनुष्य वाली हरकतों पर उतरने के लिए तैयार था।

02. एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा – Short Questions answer

अतिलघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. पाठ तथा लेखिका का नाम बताइए।
उत्तरः
 पाठ-एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा। लेखिका-बछेन्द्री पाल।

प्रश्न 2. लेखिका में किस चीज का आकर्षण था?
उत्तरः
 लेखिका में एवरेस्ट के प्रति कठिनतम चुनौतियों का सामना करने का आकर्षण था।

प्रश्न 3. बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ क्या देखा?
उत्तरः बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ एक भारी बर्फ का बड़ा फूल (प्लूम) देखा।

प्रश्न 4. अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था? 
उत्तरः अग्रिम दल का नेतृत्व उपनेता प्रेमचन्द कर रहे थे।

प्रश्न 5. कैंप चार कहाँ और कब लगाया गया? 
उत्तरः कैंप-चार को 29 अप्रैल, 1984 को साउथ कोल में लगाया गया था। यह कैंप 7900 मीटर की ऊँचाई पर स्थापित किया गया था।

प्रश्न 6. लेखिका को सफलता के क्षण में किसकी याद आयी?
उत्तरः लेखिका को सफलता के क्षण में अपने माता-पिता की याद आयी।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. डाॅ. मीनू मेहता ने क्या जानकारियाँ दीं? 
उत्तरः डाॅ. मीनू मेहता ने निम्न जानकारियाँ दीं:

  • एल्यूमिनियम की सीढ़ियों से अस्थाई पुल बनाना होगा।
  • लट्ठों और रस्सियों का उपयोग करना होगा।
  • बर्फ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधना होगा।
  • अग्रिम दल के अभियान्त्रिक कार्यों के बारे में पूरी जानकारी दी।

प्रश्न 2. तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ में क्या कहा ?
उत्तरः जब लेखिका ने स्वयं को नौसिखिया बताया तो तेनजिंग ने लेखिका के कंधे पर अपना हाथ रख तारीफ करते हुए कहा कि तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो, तुम्हें तो एवरेस्ट शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।

प्रश्न 3. बेस कैंप 3 में पर्वतारोहियों के साथ क्या दुर्घटना घटी ? 
उत्तरः जब लेखिका तथा दल के अन्य सदस्य सोए हुए थे तब रात में एक जोरदार धमाका हुआ। एक लम्बा बर्फ का पिण्ड ग्लेशियर से टूटकर उनके कैंप के ऊपर गिरा था जिसने कैंप को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। प्रत्येक व्यक्ति को चोट लगी थी परन्तु संयोगवश किसी की मृत्यु नहीं हुई थी।

प्रश्न 4. जय लेखिका को देखकर हक्का-बक्का क्यों रह गया? 
उत्तरः जय बछेन्द्री पाल का पर्वतारोही साथी था। उसे भी बछेन्द्री के साथ पर्वत-शिखर पर जाना था। शिखर कैम्प पर पहुँचने में उसे देर हो गई थी। वह सामान ढोने के कारण पीछे रह गया था। अतः बछेन्द्री उसके लिए चाय-जूस आदि लेकर उसे लेने के लिए पहुँची। जय ने यह कल्पना नहीं की थी कि बछेन्द्री उसकी चिन्ता करेगी। इसलिए जब उसने बछेन्द्री पाल को उसके लिए चाय-जूस लाया देखा तो वह हक्का-बक्का रह गया।

प्रश्न 5. साउथ पोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे शुरू की? 

अथवा

साउथ पोल कैंप पर पहुँचकर लेखिका ने क्या-क्या कार्य किए? 
उत्तरः साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने खाना, कुकिंग गैस तथा कुछ ऑक्सीजन सिलिण्डर इकट्ठे किए। अपने दल के दूसरे सदस्यों को मदद करने के लिए एक थर्मस में जूस और दूसरे में चाय भरने के लिए नीचे उतर गई।

प्रश्न 6. एवरेस्ट की चोटी पर कौन-सी समस्या खतरा बनकर खड़ी थी?
उत्तरः
 एवरेस्ट की चोटी शंकु के आकार की थी, जहाँ दो व्यक्तियों के एक साथ खड़े होने की जगह नहीं थी। हजारों मीटर सीधी ढलान पर फिसल जाने का डर था।

प्रश्न 7. चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी?
उत्तरः चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति डरावनी थी। चट्टानें सख्त और भुरभुरी थी हवा की गति तेज थी और चोटी शंकु के आकार की थी।

प्रश्न 8. एवरेस्ट शिखर पर पहुँचकर बछेन्द्री पाल ने स्वयं को किस प्रकार सुरक्षित रूप से स्थिर किया?
उत्तरः सँकरा व नुकीला होने के कारण। बर्फ के फावड़े से बर्फ की खुदाई की। घुटनों के बल बैठकर ‘सागरमाथे’ के शिखर का चुंबन किया।
व्याख्यात्मक हल:
एवरेस्ट शिखर सँकरा व नुकीला था। अतः वहाँ पहुँचकर स्वयं को सुरक्षित रूप से स्थिर करने के लिए बछेन्द्री पाल ने बर्फ के फावड़े से खुदाई की और उसके उपरान्त घुटनों के बल बैठकर ‘सागरमाथे’ के शिखर का चुंबन किया।

प्रश्न 9. कर्नल खुल्लर ने बछेन्द्री पाल को उसकी सफलता पर बधाई देते हुए क्या अनूठी बात कही
उत्तरः कर्नल खुल्लर ने बछेन्द्री पाल को बधाई देते हुए कहा कि मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता-पिता को बधाई देना चाहूँगा। वे बोले कि देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी, जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा।