03.नीम- Chapter Notes

परिचय

‘नीम’ कविता हरीश निगम जी ने लिखी है। यह कविता हमें नीम के पेड़ की खासियतों और उससे मिलने वाली सीख के बारे में बताती है। नीम का पेड़ न केवल हवा को शुद्ध करता है, बल्कि हमें उदारता, खुशमिजाजी और मदद जैसे अच्छे गुण भी सिखाता है। यह कविता बच्चों को प्रकृति से जुड़ने और नीम के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करती है।

कविता की व्याख्यापहला प्रसंग

लहराता-बलखाता नीम, 
दिनभर हँसता-गाता नीम।
चिड़िया, कौआ, तोता सबसे, 
अपना नेह जताता नीम।
नहीं डॉक्टर फिर भी देखो, 
कितने रोग भगाता नीम।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि नीम का पेड़ हमेशा हवा में लहराता और बलखाता है, जैसे वह खुशी से गा रहा हो। यह पक्षियों जैसे चिड़िया, कौआ और तोता से दोस्ती करता है और उनसे प्यार जताता है। नीम कोई डॉक्टर नहीं है, फिर भी इसकी पत्तियाँ, छाल और बीज बहुत सी बीमारियाँ दूर करने में मदद करते हैं। यह हमें बताता है कि नीम कितना उपयोगी और दयालु है।

दूसरा प्रसंग

चले प्रदूषित वायु कभी तो, 
उसको शुद्ध बनाता नीम।
कड़वे तन में मन को मीठा, 
रखना हमें सिखाता नीम।
हवा चले तो झूम-झूमके, 
सब का मन बहलाता नीम।

व्याख्या: नीम का पेड़ प्रदूषित हवा को साफ करके पर्यावरण को स्वच्छ रखता है। भले ही इसकी पत्तियाँ कड़वी हों, यह हमें अपने व्यवहार को मीठा और अच्छा रखना सिखाता है। जब हवा चलती है, तो नीम की पत्तियाँ खुशी से झूमती हैं और सबके मन को आकर्षित करती हैं।

तीसरा प्रसंग

लेता नहीं किसी से कुछ भी, 
पर कितना दे जाता नीम।

व्याख्या: नीम का पेड़ बिना किसी से कुछ लिए सबको बहुत कुछ देता है। यह हमें ठंडी छाया, साफ हवा, दवाओं जैसे गुण और सुंदरता देता है। नीम हमें बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करना सिखाता है।

कविता से शिक्षा

  • प्रकृति का सम्मान: नीम हमें प्रकृति की देखभाल और उसका सम्मान करना सिखाता है।
  • उदारता: नीम की तरह हमें बिना स्वार्थ के दूसरों की मदद करनी चाहिए।
  • खुशी: नीम हमें हमेशा खुश रहने और दूसरों को खुशी देने की सीख देता है।
  • अच्छे व्यवहार की सीख: नीम हमें कड़वाहट छोड़कर मीठा और अच्छा व्यवहार करना सिखाता है।
  • पर्यावरण की रक्षा: नीम की तरह हमें हवा को साफ और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करनी चाहिए।

शब्दार्थ

  • लहराता: हवा में हिलना-डुलना।
  • बलखाता: लचकना, मुड़ना।
  • नेह: प्यार, स्नेह।
  • प्रदूषित: गंदा, अशुद्ध।
  • वायु: हवा।
  • शुद्ध: साफ, स्वच्छ।
  • कड़वे: तीखा, कसैला स्वाद।
  • झूम-झूमके: हिलना, झूमना।
  • उदारता: दूसरों को बिना स्वार्थ के देना।
  • रोग: बीमारी।
  • तन: शरीर।
  • मन: दिल, भावनाएँ।

02.बगीचे का घोंघा- Chapter Notes

परिचय

इस पाठ में हम एक घोंघे की कहानी पढ़ेंगे, जो एक छोटे से बगीचे में रहता है। यह घोंघा अपने बगीचे के बाहर की दुनिया देखना चाहता है। यह कहानी हमें बताती है कि नई चीजें देखने और सीखने का साहस कैसे हमें नई दुनिया से परिचित करा सकता है। यह कहानी घोंघे के रोमांच और उसकी खोज के बारे में है।

प्रमुख बातें

  • घोंघा एक छोटे बगीचे में रहता है और उसे बगीचे का हर कोना पता है।
  • उसे बगीचे के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते थे।
  • घोंघा बाहर की दुनिया के बारे में उत्सुक था और दीवार के छेद से बाहर निकलता है।
  • बाहर की दुनिया में उसे चींटियाँ, गिलहरी, और बड़े पेड़ जैसी नई चीजें दिखती हैं।
  • घोंघा दुनिया को मजेदार और अद्भुत पाता था और वहाँ रहने का फैसला करता है।

कहानी का सारांश

कहानी शुरू होती है एक छोटे और सुंदर बगीचे में, जहाँ एक घोंघा रहता है। उसने अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिताया है। बगीचा इतना छोटा है कि घोंघे को एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते हैं। वह बगीचे का हर कोना जानता है, लेकिन उसे लगता है कि बगीचे के बाहर की दुनिया कैसी होगी। उसकी माँ उसे बाहर जाने से मना करती थी, क्योंकि वह दुनिया उनकी दुनिया से बहुत अलग है। फिर भी, घोंघा साहस करता है और बाहर जाने का फैसला करता है।

घोंघा अपना सामान अपने शंख में बाँधता है और बगीचे की दीवार में एक छेद से बाहर निकलता है। बाहर निकलते ही वह एक बड़े मैदान को देखकर चकित हो जाता है। यह मैदान बच्चों के खेलने की जगह है, लेकिन घोंघे को यह बहुत बड़ा लगता है। वह कहता है, “वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है!”

जब एक सूखा पत्ता उस पर गिरता है, तो वह डर जाता है और चिल्लाता है, “उई!” लेकिन फिर हँसने लगता है और कहता है, “वाह! दुनिया तो कितनी मजेदार है!” वह उस सूखी-भूरी पत्ती के नीचे से बाहर निकल गया। थोड़ा आगे एक बड़ा-सा पत्थर पड़ा हुआ था। घोंघे को लगा यह कोई पहाड़ होगा। वह झट से उस पर चढ़ गया और देखने लगा। घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार लाल चींटियों को देखा। वे अपने लंबे-पतले पैरों से इधर-उधर आ-जा रहे थे। उसने देखा कि एक गिलहरी फुदक-फुदककर एक पेड़ पर चढ़ गई। उसने देखा कि एक गेंद लुड़कती हुई जा रही है और एक कुत्ता उसके पीछे भाग रहा है। “वाह! दुनिया में सब कुछ कितनी तेजी से चलता है,” घोंघे ने कहा। “बगीचे में तो सब कुछ धीरे-धीरे चलता था।”

घोंघा एक बहुत लंबा खजूर का पेड़ और एक बड़ा बड़ का पेड़ देखता है, जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह जाती हैं, और वह कहता है, “वाह, सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है!” अंत में, घोंघा फैसला करता है कि वह इस नई और रोमांचक दुनिया में ही रहेगा।

कहानी से शिक्षा

  • हिम्मत: नई चीजें देखने के लिए हिम्मत करनी चाहिए, जैसे घोंघे ने बगीचे के बाहर जाने की हिम्मत की।
  • खोज: दुनिया में बहुत कुछ नया और मजेदार है, जिसे हम खोज सकते हैं।
  • खुशी: छोटी-छोटी चीजें, जैसे सूखा पत्ता या चींटियों का चलना, भी हमें खुश कर सकती हैं।
  • सीखना: नई जगहों और चीजों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

शब्दार्थ

  • घोंघा: एक छोटा जीव जो अपने शंख में रहता है और धीरे-धीरे चलता है।
  • बगीचा: फूलों, पौधों और हरियाली वाली छोटी जगह।
  • छोर: किसी जगह का आखिरी हिस्सा।
  • छेद: दीवार या किसी चीज में बना छोटा सुराख।
  • आश्चर्य: हैरानी या चौंकने की बात।
  • अद्भुत: बहुत ही सुंदर और आश्चर्यजनक।
  • मैदान: खुली और बड़ी जगह।
  • सूखा पत्ता: पेड़ से गिरा हुआ सूखा पत्ता।
  • खजूर का पेड़: एक लंबा पेड़ जिसके फल खजूर कहलाते हैं।
  • बड़ का पेड़: बहुत बड़ा और चौड़ा पेड़।

01.चिड़िया का गीत- Chapter Notes

परिचय

इस कविता के कवि निरंकार देव ‘सेवक’ जी हैं। यह कविता हमें एक छोटी चिड़िया के माध्यम से दुनिया को समझने का संदेश देती है। चिड़िया की यात्रा से हमें यह सीख मिलती है कि जैसे-जैसे हम नई चीजें देखते और सीखते हैं, हमारा ज्ञान और समझ बढ़ती है।

कविता की व्याख्या

पहला प्रसंग

सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: जब चिड़िया अंडे में थी, तो उसे लगता था कि उसका अंडा ही पूरी दुनिया है। इसका मतलब है कि शुरुआत में हमारी सोच छोटी होती है। हम वही जानते हैं जो हमारे पास होता है। जैसे-जैसे हम नई चीजें सीखते हैं, हमारी समझ बढ़ती है।

दूसरा प्रसंग

फिर मेरा घर बना घोंसला
सूखे तिनकों से तैयार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: जब चिड़िया घोंसले में आई, तो उसे लगा कि घोंसला ही उसकी पूरी दुनिया है। इसका मतलब है कि जब हम सिर्फ अपने घर और आसपास की जगहों को जानते हैं, तो हमें लगता है कि यही सब कुछ है। लेकिन असल में, यह सिर्फ हमारी सोच का पहला कदम है।

तीसरा प्रसंग

फिर मैं निकल गई शाखों पर
हरी-भरी थीं जो सुकुमार
तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: चिड़िया जब घोंसले से बाहर निकली और हरे-भरे पेड़ों की शाखाओं को देखा, तो उसने सोचा कि ये शाखाएँ ही उसकी दुनिया हैं। इसका मतलब है कि जब हम अपने घर से बाहर जाते हैं, तो दुनिया थोड़ी बड़ी लगने लगती है, लेकिन फिर भी हमारी समझ पूरी नहीं होती।

चौथा प्रसंग

आखिर जब मैं आसमान में
उड़ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार।

व्याख्या: जब चिड़िया आसमान में उड़ने लगी और दूर-दूर तक गई, तो उसे समझ में आया कि दुनिया बहुत बड़ी है। इसका मतलब है कि जब हम नई जगहों पर जाते हैं और नई चीजें सीखते हैं, तो हमारी सोच बढ़ती है। दुनिया हमारी सोच से कहीं बड़ी है।

कविता से शिक्षा

  • सीखने की चाह: हमें हमेशा नई चीजें सीखनी चाहिए और दुनिया के बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए।
  • समझ का विकास: जैसे-जैसे हम नई जगहों पर जाते हैं, हमारी सोच और समझ बढ़ती है। हमें अपनी सोच को छोटा नहीं रखना चाहिए।
  • नए अनुभव: नई चीजों को देखना और करना हमें दुनिया की सच्चाई सिखाता है।
  • धैर्य और प्रगति: चिड़िया ने धीरे-धीरे दुनिया को समझा। हमें भी धीरे-धीरे और धैर्य से सीखते रहना चाहिए।

शब्दार्थ

  • आकार: रूप, आकृति
  • संसार: दुनिया
  • इतना-सा: बहुत छोटा
  • घोंसला: पक्षियों का घर
  • सूखे तिनके: सूखी टहनियाँ
  • शाखाएँ: पेड़ की डालियाँ
  • सुकुमार: कोमल, नाजुक
  • पंख पसार: पंख फैलाना