दीपकम् Class 8 Chapter 13 Question Answers Deepakam Sanskrit NCERT
अभ्यासात् जायते सिद्धिः
१. अधोलिखितप्रश्नानाम्उत्तराणिएकपदेनद्विपदेनवाउत्तरत–
(क) उरसि किं तन्त्रं भवति? (छाती में कौन-सी प्रणाली होती है?)
उत्तर – वायुबलतन्त्रम्। (वायु-बल प्रणाली।)
(ख) नाभिप्रदेशे स्थिताः मांसपेश्यः किं नोदयन्ति? (नाभि क्षेत्र में स्थित मांसपेशियाँ किसे प्रेरित करती हैं?)
उत्तर – श्वासप्रवृत्तिम्। (श्वसन की प्रक्रिया।)
(ग) आस्यस्य आभ्यन्तरे वार्णानाम् उत्पत्त्यर्थं द्वितीयं तत्त्वं किम् अस्ति? (मुँह के अंदर वर्णों की उत्पत्ति के लिए दूसरा तत्त्व क्या है?)
उत्तर – करणम्। (करण (उच्चारण का साधन)।)
(घ) आस्ये कति स्थानानि सन्ति? (मुँह में कितने उच्चारण स्थान होते हैं?)
उत्तर – षट् स्थानानि। (छह स्थान।)
(ङ) स्थानस्य कार्यनिदर्शनार्थं किं समुचितम् उदाहरणम् अस्ति? (उच्चारण-स्थान के कार्य को समझाने के लिए कौन-सा उपयुक्त उदाहरण है?)
उत्तर – मुरली। (बांसुरी।)
(च) करणानि मुरल्याः कस्य भागम् इव व्यवहरन्ति? (मुरली में करण किस भाग के समान कार्य करते हैं?)
उत्तर – अङ्गुलीभागस्य। (अंगुलियों के भाग के समान।)
२. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत।
(क) करणं किं भवति? (करण क्या होता है?)
उत्तरम् – करणं तदङ्गं भवति, यत् वर्णस्य उच्चारणसमये स्थानं स्पृशति वा समीपं याति। (करण वह अंग होता है, जो वर्ण के उच्चारण के समय स्थान को स्पर्श करता है या उसके समीप पहुँचता है।)
(ख) उरः श्वासकोशस्थितं वायुं कुत्र निःसारयति? (छाती (उरः) फेफड़ों में स्थित वायु को कहाँ बाहर निकालती है?)
उत्तरम् – उरः श्वासकोशे स्थितं वायुं ऊर्ध्वं निःसारयति। (छाती फेफड़ों में स्थित वायु को ऊपर की ओर बाहर निकालती है।)
(ग) मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि कीदृशं व्यवहरन्ति? (बांसुरी के छिद्र किस प्रकार कार्य करते हैं?)
उत्तरम् – मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि आस्यस्य स्थानानि इव व्यवहरन्ति। (बांसुरी के छिद्र मुँह के उच्चारण स्थानों की तरह कार्य करते हैं।)
(घ) केषां वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति? (किन वर्णों के उच्चारण में जीभ प्रायः निष्क्रिय रहती है?)
उत्तरम् – कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति। (गले का, होठों का, नासिका का वर्णों के उच्चारण में जीभ प्रायः निष्क्रिय रहती है।)
(ङ) तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं सामान्यं करणं किम् अस्ति? (तालव्य, मूर्धन्य और दन्त्य वर्णों के उच्चारण में सामान्य करण क्या होता है?)
उत्तरम् – तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं सामान्यं करणं जिह्वा भवति। (तालव्य, मूर्धन्य और दन्त्य वर्णों के उच्चारण के लिए सामान्य करण “जीभ” होती है।)
(च) कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणार्थं स्थानस्य करणस्य च मध्ये किं भवति? (कण्ठ्य, ओष्ठ्य और नासिक्य वर्णों के उच्चारण में स्थान और करण के बीच क्या संबंध होता है?)
उत्तरम् – कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां च वर्णानाम् उच्चारणे स्थानमेव करणं भवति। (कण्ठ्य, ओष्ठ्य और नासिक्य वर्णों के उच्चारण में स्थान ही करण के रूप में कार्य करता है।)
३. अधोलिखितेषुवाक्येषुआम् / नइतिलिखित्वाउचितभावंसूचयत–
(ग) ब्रह्मलोके केन सम्मानं भवति ? (ब्रह्मलोक में किससे सम्मान मिलता है?)
उत्तरम्: सम्यग्वर्णप्रयोगेण। (वर्णों के शुद्ध प्रयोग से।)
(घ) अधमाः पाठकाः कति भवन्ति ? (अधम पाठक कितने होते हैं?)
उत्तरम्: षट्। (छह।)
(ङ) धैर्यं केषां गुणः ? (धैर्य किसका गुण है?)
उत्तरम्: पाठकानाम्। (पाठकों का।)
३. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत–
(क) व्याघ्री दंष्ट्राभ्यां कान् नयति ? (व्याघ्री (मादा बाघ) अपने दाँतों से किसे ले जाती है?)
उत्तरम्: व्याघ्री दंष्ट्राभ्यां पुत्रान् नयति। (व्याघ्री अपने दाँतों से अपने बच्चों को ले जाती है।)
(ख) वर्णाः कथं प्रयोक्तव्याः ? (वर्णों (अक्षरों) का उच्चारण कैसे करना चाहिए?)
उत्तरम्: वर्णाः स्पष्टतया न च पीडयित्वा प्रयोक्तव्याः। (वर्णों का उच्चारण स्पष्ट रूप से और बिना कठोरता के करना चाहिए।)
(ग) पाठकानां षट्-गुणाः के भवन्ति ? (पाठकों के कौन-कौन से छह गुण होते हैं?)
उत्तरम्: पाठकानां षट् गुणाः – माधुर्यम्, अक्षरव्यक्तिः, पदच्छेदः, सुस्वरः, धैर्यम्, लयसमर्थता च भवन्ति। (पाठकों के छह गुण होते हैं – मधुरता, स्पष्ट अक्षर उच्चारण, पदों का सही विभाजन, अच्छा स्वर, धैर्य और लय की समझ।)
(घ) के अधमाः पाठकाः भवन्ति ? (कौन अधम (निम्न कोटि के) पाठक होते हैं?)
उत्तरम्: गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठश्च अधमाः पाठकाः भवन्ति। (जो गाने की तरह पढ़ते हैं, बहुत तेज पढ़ते हैं, सिर हिलाकर पढ़ते हैं, लिखकर पढ़ते हैं, अर्थ नहीं समझते और धीमे स्वर में पढ़ते हैं — वे अधम पाठक होते हैं।)
(ङ) ‘स्वजनः’ ‘श्वजनः’ च इत्यनयोः अर्थदृष्ट्या कः भेदः ? (‘स्वजन’ और ‘श्वजन’ इन दोनों में अर्थ की दृष्टि से क्या अंतर है?)
उत्तरम्: ‘स्वजनः’ इत्यस्य अर्थः बान्धवः, ‘श्वजनः’ इत्यस्य अर्थः शुनकः अस्ति। (‘स्वजन’ का अर्थ होता है अपना या संबंधी, और ‘श्वजन’ का अर्थ होता है कुत्ता।)
(च) ‘सकलं’ ‘शकलं’ च इत्यनयोः अर्थदृष्ट्या कः भेदः ? (‘सकलं’ और ‘शकलं’ इन दोनों में अर्थ की दृष्टि से क्या अंतर है?)
उत्तरम्: ‘सकलं’ इत्यस्य अर्थः सम्पूर्णम्, ‘शकलं’ इत्यस्य अर्थः खण्डः अस्ति। (‘सकलं’ का अर्थ है सम्पूर्ण (पूरा), और ‘शकलं’ का अर्थ है टुकड़ा (खंडित)।)
४. अधोलिखितानि लक्षणानि पाठकस्य गुणाः वा दोषाः वा इति विभजत–
(ङ) सपरिवारः वीरवरः कुत्र गतवान्? (वीरवर अपने परिवार के साथ कहाँ गया?)
उत्तरम् – सपरिवारः वीरवरः स्वगृहं गतवान्। (वीरवर अपने परिवार सहित अपने घर गया।)
३. अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत-
(क) भगवति ! न “मे” प्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा । उत्तरम् – राज्ञः
हिंदी अनुवाद – हे माँ! मुझे राज्य और जीवन से कोई प्रयोजन नहीं है। (यहाँ “मे” = मम = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)
(ख) वत्स ! अनेन “ते” सत्त्वोत्कर्षेण भृत्यवात्सल्येन च परं प्रीतास्मि । उत्तरम् – राज्ञः हिंदी अनुवाद – बेटा! तुम्हारी इस उत्कृष्ट शक्ति और सेवक-प्रेम से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ। (यहाँ “ते” = तव = तुम्हारे; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)
(ग) धन्याहं “यस्या” ईदृशो जनको भ्राता च । उत्तरम् – वीरवत्या हिंदी अनुवाद – मैं धन्य हूँ जिसके ऐसे पिता और भाई हैं। (यहाँ “यस्या” = जिसकी; प्रयुक्तः = वीरवती, पुत्री के लिए)
(घ) तदेतत्परित्यक्तेन “मम” राज्येनापि किं प्रयोजनम् ! उत्तरम् – राज्ञः हिंदी अनुवाद – यह सब त्याग देने के बाद मेरे राज्य का भी क्या उपयोग है? (यहाँ “मम” = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)
(ङ) “अयम्” अपि सपरिवारो जीवतु । उत्तरम् – वीरवरः हिंदी अनुवाद – यह राजपुत्र भी अपने परिवार सहित जीवित रहे। (यहाँ “अयम्” = यह; प्रयुक्तः = वीरवरः)
४. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत
(क) नेदानीं राज्यभङ्गस्ते भविष्यति। (अब तुम्हारा राज्य टूटेगा नहीं।)
अन्वय: ते राज्यभङ्गः अब भविष्यति नहीं। (तुम्हारा राज्य अब नहीं टूटेगा।)
(ख) तेन पातितं स्वशिरः स्वकरस्थखड्गेन। (उसने अपने हाथ में रखे तलवार से अपना सिर काटा।)
अन्वय: तेन स्वकरस्थखड्गेन स्वशिरः पातितम्। (उसने अपने सिर को अपने हाथ में रखे तलवार से काटा।)
(ग) तदा ममायुःशेषेणापि जीवतु राजपुत्रो वीरवरः सह पुत्रेण पत्न्या दुहित्रा च। (तब मेरे शेष जीवन से भी राजकुमार वीरवर अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री के साथ जीवित रहे।)
अन्वय: तदा राजपुत्रः वीरवरः मम आयुःशेषेणापि सह पुत्रेण पत्न्या च दुहित्रा जीवतु। (तब राजकुमार वीरवर मेरे शेष जीवन से भी अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री के साथ जीवित रहा।)
(घ) तत्क्षणादेव देवी गताऽदर्शनम्। (उसी समयदेवी अदृश्य हो गई।)
अन्वय: देवी तत्क्षणादेव गताऽदर्शनम्। (देवी उसी समयअदृश्य हो गई।)
(ङ) महीपतिस्तस्मै प्रायच्छत् समग्रकर्णाटप्रदेशं राजपुत्राय वीरवराय। (राजा ने राजकुमार वीरवर को समग्र कर्नाट प्रदेश दिया।)
अन्वय: महीपतिः तस्मै राजपुत्राय वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् प्रायच्छत्। (राजा ने राजकुमार वीरवर को समग्र कर्नाट प्रदेश दिया।)
(च) जायन्ते च म्रियन्ते च मादृशाः क्षुद्रजन्तवः। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्मते और मरते हैं।)
अन्वय: मादृशाः क्षुद्रजन्तवः जायन्ते च म्रियन्ते च। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्मते और मरते हैं।)
(क) शूद्रकः कीदृशः राजा आसीत्? (शूद्रक कैसा राजा था?)
उत्तरम् – शूद्रकः महापराक्रमी, नानाशास्त्रवित्, पूतचरित्रः च राजा आसीत्। (शूद्रक एक अत्यंत पराक्रमी, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता और शुद्ध चरित्र वाला राजा था।)
(ख) वीरवरः कस्य समीपं गन्तुम् इच्छति स्म? (वीरवर किसके पास जाना चाहता था?)
उत्तरम् – वीरवरः राज्ञः समीपं गन्तुम् इच्छति स्म। (वीरवर राजा के पास जाना चाहता था।)
(ग) राज्ञः शूद्रकस्य ‘का ते सामग्री ?” इति प्रश्नस्य उत्तरं वीरवरः किम् अयच्छत् ? (राजा शूद्रक द्वारा पूछे गए “तुम्हारी सामग्री क्या है?” इस प्रश्न का उत्तर वीरवर ने क्या दिया?)
उत्तरम् – वीरवरः उक्तवान् – “इमौ बाहू, एषः खड्गः च मम सामग्री।” (वीरवर ने उत्तर दिया – “मेरी सामग्री ये दोनों भुजाएँ और यह तलवार है।”)
(घ) वीरवरः स्वगृहं कदा गच्छति स्म ? (वीरवर अपने घर कब जाता था?)
उत्तरम् – वीरवरः यदा राजा आदेशं ददाति तदा एव स्वगृहं गच्छति स्म। (वीरवर तभी अपने घर जाता था जब राजा उसे आदेश देता था।)
(ङ) वीरवरः स्ववेतनस्य अर्धं केभ्यः यच्छति स्म ? (वीरवर अपने वेतन का आधा भाग किसे देता था?)
उत्तरम् – वीरवरः स्ववेतनस्य अर्धं देवेभ्यः यच्छति स्म। (वीरवर अपने वेतन का आधा भाग देवताओं को अर्पित करता था।)
उत्तरम् – राजलक्ष्मीः शूद्रकस्य भुजच्छायायां सुमहता सुखेन अवसत्। (राजलक्ष्मी राजा शूद्रक की भुजाओं की छाया में बहुत सुखपूर्वक रहती थी।)
(छ) राजलक्ष्म्याः दुःखस्य कारणं श्रुत्वा बद्धाञ्जलिः वीरवरः किम् अवदत् ? (राजलक्ष्मी के दुःख का कारण सुनकर हाथ जोड़कर वीरवर ने क्या कहा?)
उत्तरम् – वीरवरः उक्तवान् – “भगवति ! अस्त्यत्र कश्चिदुपायः येन भगवत्याः पुनः चिरवासः भवेत्?” (वीरवर ने कहा – “माता! क्या कोई उपाय है जिससे आप यहाँ फिर से लंबे समय तक रह सकें?”)
३. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत
(क) आसीत् शोभावती नाम काचन नगरी । अन्वयः – काचित् नगरी शोभावती नाम आसीत्।
हिंदी अनुवाद – एक नगरी थी जिसका नाम शोभावती था।
(ख) प्रतिदिनं सुवर्णशतचतुष्टयं देव ! अन्वयः – हे देव! प्रतिदिनं सुवर्णशतानां चतुष्टयं भवति।
हिंदी अनुवाद – हे देव! प्रतिदिन चार सौ स्वर्ण मुद्राएँ (वेतन) होती हैं।
(ग) देव! दिनचतुष्टयस्य वेतनार्पणेन प्रथममवगम्यतां स्वरूपमस्य वेतनार्थिनो राजपुत्रस्य, किमुपपन्नमेतत् वेतनं न वेति। अन्वयः – हे देव! प्रथमं दिनचतुष्टयस्य वेतनस्य अर्पणेन, अयम् वेतनार्थी राजपुत्रः उपपन्नम् अस्ति वा न इति स्वरूपं अवगम्यताम्।
हिंदी अनुवाद – हे देव! पहले चार दिन का वेतन देकर इस राजपुत्र की योग्यता जानी जाए कि यह वेतन उचित है या नहीं।
हिंदी अनुवाद – तब वह (असौ) उस रोने की आवाज़ का अनुसरण करते हुए चला गया। ‘असौ’ शब्द ‘अस्मात्’ (उससे) का रूप है, जो पञ्चमी (अपादान कारक) में प्रयुक्त हुआ है।
हिंदी अनुवाद – इस (राजा के) भुजाओं की छाया में मैं लंबे समय से बहुत सुख से निवास कर रही हूँ। ‘एतस्य’ शब्द ‘एषः’ (यह) का षष्ठी (सम्बन्ध कारक) रूप है, जिसका अर्थ है ‘इसका’।
हिंदी अनुवाद : परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं, परोपकार के लिए नदियाँ पानी बहाती हैं। परोपकार के लिए गायें दूध देती हैं, और यह शरीर भी परोपकार के लिए है।
(ख) राजा शूद्रकः प्रथमं वीरवरस्य वृत्त्यर्थं प्रार्थनां न स्वीकरोति।
उत्तर: कार्ये कर्मणि निर्वृत्ते यो बहून्यपि साधयेत्।
पूर्वकार्याविरोधेन स कार्यं कर्तुमर्हति॥
हिंदी अनुवाद : जो कार्य को पूर्ण करने के बाद भी अनेक कार्य करता है, वह पूर्व कार्यों के विरोध के बिना ऐसा कार्य करने के योग्य है।
(ग) एकदा कोऽपि वीरवरः नाम राजपुत्रः वृत्तिं प्राप्तुं राज्ञः शूद्रकस्य समीपं गच्छति।
उत्तर: कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे॥
हिंदी अनुवाद : यहाँ कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीना चाहिए। ऐसा करने पर तुम्हारे साथ और कोई उपाय नहीं है, और कर्म मनुष्य को नहीं बांधता।
(घ) सः तस्य कर्तव्यनिष्ठां साक्षात् पश्यति।
उत्तर: यथा छायातपौ नित्यं सुसंबद्धौ परस्परम्।
एवं कर्म च कर्ता च संश्लिष्टावितरेतरम्॥
हिंदी अनुवाद : जैसे छाया और ताप हमेशा परस्पर जुड़े रहते हैं, वैसे ही कर्म और कर्ता भी परस्पर संबद्ध होते हैं।
(ङ) राजा मन्त्रिणां मन्त्रणया वीरवराय वृत्तिं यच्छति।
उत्तर: कार्ये कर्मणि निर्वृत्ते यो बहून्यपि साधयेत्।
पूर्वकार्याविरोधेन स कार्यं कर्तुमर्हति॥
हिंदी अनुवाद : जो कार्य को पूर्ण करने के बाद भी अनेक कार्य करता है, वह पूर्व कार्यों के विरोध के बिना ऐसा कार्य करने के योग्य है।
(क) भारतवर्षे जनाः कथं निरामयाः भवन्ति? भारतवर्ष में लोग कैसे निरोग रहते हैं?
(ख) अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्। अंत में वह वैद्य वाग्भट के आश्रम के पास गया।
(ग) तव उत्कृष्टेन आयुर्वेदज्ञानेन अहम् अतीव सन्तुष्टः अस्मि। तुम्हारे उत्कृष्ट आयुर्वेद ज्ञान से मैं अत्यंत संतुष्ट हूँ।
(घ) महर्षेः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः। तुमने महर्षि चरक का नाम अवश्य सुना होगा।
(ङ) लघुद्रव्याणि अतिमात्रं सेवनेन हानिकराणि जायन्ते। हल्के पदार्थ भी यदि अधिक मात्रा में खाए जाएँ तो हानिकारक हो जाते हैं।
३. अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत
(क) मधुरां वाणीं श्रुत्वा चिकित्सानिरतः वाग्भटः किम् अकरोत्? (मधुर आवाज सुनकर वैद्य वाग्भट ने क्या किया?)
उत्तरम् – मधुरां वाणीं श्रुत्वा वाग्भटः प्राङ्गणम् आगत्य सर्वासु दिक्षु अपश्यत्। (मधुर आवाज़ सुनकर वाग्भट प्रांगण में आए और चारों दिशाओं में देखने लगे।)
(ख) वाग्भटः झटिति किम् अकरोत्? (वाग्भट ने तुरंत क्या किया?)
उत्तरम् – वाग्भटः झटिति तस्मै विहगाय मधुराणि फलानि समर्पितवान्। (वाग्भट ने तुरंत उस पक्षी को मीठे फल अर्पित किए।)
(ग) छात्राः पुनः जिज्ञासया आचार्यं किम् अपृच्छन्? (छात्रों ने फिर जिज्ञासावश आचार्य से क्या पूछा?)
उत्तरम् – छात्राः पुनः आचार्यं अपृच्छन् – “हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् इति – एतेषां कः आशयः?” (छात्रों ने फिर जिज्ञासा से पूछा – “हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् — इनका क्या अर्थ है?”)
(घ) भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते संक्षेपेण किं प्रदत्तवान्? (भगवान धन्वंतरि ने हमारे लिए संक्षेप में क्या प्रदान किया?)
उत्तरम् – भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते स्वास्थ्यरक्षणाय सूत्ररूपेण सन्देशम् दत्तवान्। (भगवान धन्वंतरि ने हमारे लिए स्वास्थ्य रक्षा हेतु सूत्र रूप में संदेश दिया।)
(ङ) ऋषयः नित्यं कां प्रार्थनां कुर्वन्ति? (ऋषि लोग प्रतिदिन कौन सी प्रार्थना करते हैं?) उत्तरम् – ऋषयः नित्यं “सर्वे भवन्तु सुखिनः…” इत्यादि प्रार्थनां कुर्वन्ति। (ऋषि लोग प्रतिदिन “सभी सुखी हों…” ऐसी प्रार्थना करते हैं।)
पाठात् यथोचितानि विशेषणपदानि विशेष्यपदानि वा चिन्त्वा रिक्तस्थानानि पूरयत —
🔸 हिंदी प्रश्न – सात बहनों और भाई के समूह में कौन-कौन से राज्य हैं? 🔸 उत्तर – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा बहनें हैं; सिक्किम भाई है।
(ख) इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थं कथ्यन्ते? 👉 उत्तरम् – एतेषां सामाजिक-सांस्कृतिक-साम्यं च भौगोलिकवैशिष्ट्यं च दृष्ट्वा, एतानि सप्तभगिन्यः इति कथ्यन्ते।
🔸 हिंदी प्रश्न – इन राज्यों को ‘सात बहनें’ क्यों कहा जाता है? 🔸 उत्तर – इनकी सामाजिक-सांस्कृतिक समानता और भौगोलिक विशेषताओं को देखकर इन्हें ‘सात बहनें’ कहा जाता है।
🔸 हिंदी प्रश्न – उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में कौन लोग निवास करते हैं? 🔸 उत्तर – गारो, खासी, नागा, मिजो, लेप्चा आदि जनजातियाँ उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में निवास करती हैं।
(घ) पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः केषु निष्णाताः सन्ति? 👉 उत्तरम् – पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः स्वलीलाकलासु च पर्वपरम्परासु च निष्णाताः सन्ति।
🔸 हिंदी प्रश्न – पूर्वोत्तर राज्यों के लोग किन चीज़ों में दक्ष होते हैं? 🔸 उत्तर – पूर्वोत्तर के लोग अपनी लोक-कलाओं और पर्व-परंपराओं में दक्ष होते हैं।
🔸 हिंदी प्रश्न – बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग कहाँ होता है? 🔸 उत्तर – सात बहन राज्यों में बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग वस्त्र, आभूषण और घर बनाने में किया जाता है।
🔸 हिंदी अनुवाद – प्रश्न – इस वाक्य में ‘सन्ति’ (हैं) क्रिया का समानार्थी कौन-सा शब्द है? उत्तर – ‘वर्तन्ते’ शब्द ‘सन्ति’ के समान अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।
२. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
(क) संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति ? (संस्कृत भाषा किनके जीवन की आशा है?)
उत्तरम् – संस्कृतभाषा वेदव्यासवाल्मीकि-मुनीनां, कालिदासबाणादिकवीनां, पौराणिकसामान्यजनानां च जीवनस्य आशा अस्ति। (संस्कृत भाषा वेदव्यास, वाल्मीकि जैसे मुनियों, कालिदास, बाण आदि कवियों तथा पौराणिक व सामान्य जनों के जीवन की आशा है।)
(ख) केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति ? (किनके विचार लोगों को प्रेरित करते हैं?)
उत्तरम् – वेदविषयवेदान्तविचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति। (वेद और वेदान्त विषयक विचार लोगों को प्रेरित करते हैं।)
(ग) कैः रसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते ? (किन रसों से समृद्ध साहित्य परंपरा शोभायमान होती है?)
उत्तरम् – नवरसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते। (नौ रसों से समृद्ध साहित्य परंपरा शोभायमान होती है।)
(घ) संस्कृतभाषा केषु शास्त्रेषु विहरति ? (संस्कृत भाषा किन शास्त्रों में विचरण करती है?)
उत्तरम् – संस्कृतभाषा वैद्यव्योमशास्त्रादिषु शास्त्रेषु विहरति। (संस्कृत भाषा चिकित्सा, खगोल आदि शास्त्रों में विचरण करती है।)
(ङ) संस्कृतभाषायाः कानि कानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि ? (संस्कृत भाषा के कौन-कौन से संबोधन शब्द यहाँ प्रयोग हुए हैं?)
उत्तरम् – अयि, मातः, भगिनि इत्येतानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि। (“अयि”, “मातः”, “भगिनि” जैसे संबोधन शब्द यहाँ प्रयुक्त हुए हैं।)
३. रेखाङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत –
(क) मुनिगणाः “संस्कृतभाषायाः” विकासं कृतवन्तः। (मुनियों ने संस्कृत भाषा की उन्नति की।)
प्रश्न: मुनिगणाः कस्य विकासं कृतवन्तः? (मुनियों ने किसकी उन्नति की?)
(ख) सामान्यजनानां जीवनं “काव्यैः” प्रभावितम् अस्ति। साधारण लोगों का जीवन काव्यों से प्रभावित है।)
प्रश्न: सामान्यजनानां जीवनं किम् प्रभावितम् अस्ति? (साधारण लोगों का जीवन क्या प्रभावित करता है?)
(ग) कवयः अपि “उपादेयानि” काव्यानि रचितवन्तः। (कवियों ने भी उपयोगी काव्य रचे।)
प्रश्न: कवयः अपि किम् काव्यानि रचितवन्तः? (कवियों ने कौन से काव्य रचे?)
(घ) संस्कृतभाषा “पृथिव्यां” विहरति। (संस्कृत भाषा पृथ्वी पर विचरण करती है।)
प्रश्न: संस्कृतभाषा क्व विहरति? (संस्कृत भाषा कहाँ विचरण करती है?)
(ङ) संस्कृतभाषा “विविधभाषाः” परिपोषयति। (संस्कृत भाषा विविध भाषाओं को पोषित करती है।)
प्रश्न: संस्कृतभाषा काश्चन भाषाः परिपोषयति? (संस्कृत भाषा किन-किन भाषाओं को पोषित करती है?)
(च) वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणि “शास्त्राणि” सन्ति। (वेद और वेदांग आदि गंभीर शास्त्र हैं।)
प्रश्न: वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणि किम् सन्ति? (वेद और वेदांग आदि गंभीर क्या हैं?)
४. अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखत-
दीपकम् Class 8 Chapter 6 Question Answers Deepakam Sanskrit NCERT
डिजिभारतम् – युगपरिवर्त
अभ्यासात् जायते सिद्धिः
१. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत
(क) प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये कीदृशी प्रौद्योगिकी प्रयुक्ता अस्ति? (प्रधानमंत्री संग्रहालय में कैसी तकनीक का उपयोग हुआ है?) उत्तरम् – अद्यतनप्रौद्योगिकीः (अत्याधुनिक तकनीक)
(ख) हॉलोग्राम्-द्वारा कस्य भाषणं दृश्यते? (होलोग्राम के माध्यम से किसका भाषण दिखाई देता है?) उत्तरम् – प्रधानमन्त्रिणः (प्रधानमंत्री का)
(ग) कस्याः प्रभावः दैनन्दिनजीवने दृश्यते? (किसका प्रभाव दैनिक जीवन में दिखता है?) उत्तरम् – प्रौद्योगिक्याः (तकनीक का।)
(घ) भारत-सर्वकारस्य महत्त्वाकाङ्क्षिणी योजना का अस्ति? (भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना क्या है?) उत्तरम् – डिजिटलइण्डिया (डिजिटल इंडिया।)
(ङ) ‘फास्टॅग्’ इत्यस्य उपयोगेन कस्य सङ्ग्रहणं भवति? (‘फास्टैग’ के उपयोग से किसका संग्रह होता है?) उत्तरम् – शुल्कस्य (टोल शुल्क का।)
२. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत-
प्रश्न – प्रधानमंत्री संग्रहालय में कौन-कौन सी डिजिटल तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं?
उत्तर – प्रधानमंत्री संग्रहालय में होलोग्राम, संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR), कृत्रिम बुद्धि (AI), संवाद यंत्र, डिजिटल प्रक्षेपण आदि डिजिटल तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं।
(ख) जनाः किमर्थं साङ्गणिक-अपराधेन पीडिताः भवन्ति?
उत्तरम् – जनाः प्रायः लोभात् भयात् वा साङ्गणिक-अपराधेन पीडिताः भवन्ति।
हिंदी अनुवाद
प्रश्न – लोग साइबर अपराधों से क्यों पीड़ित होते हैं?
उत्तर – लोग प्रायः लालच या डर के कारण साइबर अपराधों से पीड़ित होते हैं।
प्रश्न – डिजिटल भारत में शिक्षा के क्षेत्र में किन-किन प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए?
उत्तर – डिजिटल भारत में शिक्षा के क्षेत्र में दीक्षा, स्वयं, स्वयं-प्रभा, ई-पाठशाला, राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय, निष्ठा, पीएम ई-विद्या जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए।
(च) ग्राम्य-क्षेत्रेषु डिजिटल-सेवानां समस्या कथं निराकर्तुं शक्यते?
उत्तरम् – ग्राम्य-क्षेत्रेषु डिजिटल-सेवानां समस्या अन्तर्जालस्य उत्तरोत्तरविस्तारेण निराकर्तुं शक्यते।
हिंदी अनुवाद
प्रश्न – ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है?
उत्तर – ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की समस्याओं का समाधान इंटरनेट के निरंतर विस्तार से किया जा सकता है।
३. अधः दत्तान् शब्दान् सम्यक् संयोजयत – तालिका सहित
फास्टैग से राजमार्गों पर टोल टैक्स का स्वतः और त्वरित संग्रह किया जाता है।
ङ.
वीआर् (VR)
आभासीया-वास्तविकताया: अनुभवाय प्रयुक्तं यन्त्रम्
वीआर (वर्चुअल रियलिटी) एक ऐसा उपकरण है जो आभासी वास्तविकता का अनुभव कराता है।
४. अधः प्रदत्तमञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत
यूपीआय्, दीक्षा, प्रधानमन्त्रिणः भाषणं, स्वचालितं पारदर्शकं च, जीवन
(क) प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये हॉलोग्राम्-द्वारा प्रधानमन्त्रिणः भाषणं दृश्यते। 📘 प्रधानमंत्री संग्रहालय में होलोग्राम के माध्यम से प्रधानमंत्री का भाषण देखा जाता है।
(ख) डिजिटल्-भारतस्य आर्थिकसमावेशनं सुगमं कर्तुं यूपीआय् प्रणाली अस्ति। 📘 डिजिटल भारत के आर्थिक समावेशन को सरल बनाने के लिए यूपीआई प्रणाली है।
(ग) डिजिटल्-शासनं स्वचालितं पारदर्शकं च सेवां प्रददाति। 📘 डिजिटल शासन स्वचालित और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करता है।
(घ) डिजिटल-भारतस्य शिक्षाक्षेत्रे दीक्षा नाम डिजिटल्-शैक्षिकमञ्चः अस्ति। 📘 डिजिटल भारत के शिक्षा क्षेत्र में ‘दीक्षा’ नामक डिजिटल शैक्षिक मंच है।
(ङ) भारतस्य डिजिटल-परिवर्तनं सर्वाणि जीवन क्षेत्राणि स्पृशति। 📘 भारत का डिजिटल परिवर्तन जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
(क) हॉलोग्राम् कृत्रिमबुद्धेः एकः प्रकारः अस्ति। ✗ हिंदी अनुवाद – हॉलोग्राम कृत्रिम बुद्धि का एक प्रकार है। ✗ (गलत)
(ख) वर्धित-वास्तविकतायाः उपयोगिता ऐतिहासिक-घटनानां प्रत्यक्षानुभवाय। ✓ हिंदी अनुवाद – संवर्धित वास्तविकता का उपयोग ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष अनुभव के लिए होता है। ✓ (सही)
(ग) डिजिटल – प्रक्षेपण – मानचित्रं भारतस्य विकासयात्रां प्रदर्शयति। ✓ हिंदी अनुवाद – डिजिटल मानचित्र भारत की विकास यात्रा को दिखाता है। ✓ (सही)
(घ) फ़ास्टॅग् इति राजमार्गेषु स्वचालितविधिना मार्गशुल्कस्य शीघ्रं संग्रहणं करोति। ✓ हिंदी अनुवाद – फास्टैग राजमार्गों पर टोल शुल्क का त्वरित संग्रह करता है। ✓ (सही)
(ङ) डिजी-लॉकर् इत्यस्य माध्यमेन केवलम् आधार-पत्रं सुरक्षितुं शक्यते। ✗ हिंदी अनुवाद – डिजी-लॉकर से केवल आधार-पत्र नहीं, अन्य प्रमाणपत्र भी सुरक्षित किए जा सकते हैं। ✗ (गलत)
(छ) भारतस्य डिजिटल-परिवर्तनं केवलं शासने प्रभावं करोति, नागरिकजीवने न। ✗ हिंदी अनुवाद – डिजिटल परिवर्तन केवल शासन में नहीं, नागरिक जीवन में भी होता है। ✗ (गलत)
(छ) उमङ्ग, माय्-गव्, जेम् इत्यादयः ई-शासन-मञ्चाः सन्ति। ✓ हिंदी अनुवाद – उमंग, माय गव, जेम आदि ई-शासन मंच हैं। ✓ (सही)
(ख) मानवाः केषां साहाय्येन कार्याणि शीघ्रं कुर्वन्ति ? (मनुष्य किनकी सहायता से कार्यों को शीघ्रता से करते हैं?) उत्तरम् – मानवाः अन्तर्जालस्य, सचलदूरवाण्याः, सङ्गणकस्य च साहाय्येन कार्याणि शीघ्रं कुर्वन्ति। (मनुष्य इंटरनेट, मोबाइल और कंप्यूटर की सहायता से कार्य शीघ्रता से करता है।)
(ग) ई-अधिगम-प्रणाल्याः प्रयोगं के कुर्वन्ति ? (ई-लर्निंग प्रणाली का उपयोग कौन करता है?) उत्तरम् – विद्यार्थिनः ई-अधिगम-प्रणाल्याः प्रयोगं कुर्वन्ति। (विद्यार्थी ई-लर्निंग प्रणाली का उपयोग करते हैं।)
प्रश्न: किस प्रकार का व्यक्ति स्थिर बुद्धि (स्थितधी) वाला कहा जाता है?
उत्तर: जो व्यक्ति दुःख में विचलित नहीं होता, सुख में स्पृहा (लालच) नहीं करता, और राग, भय, क्रोध से मुक्त होता है — वह स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि वाला) कहलाता है।
(क) श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः। (जो श्रद्धालु और इंद्रियों को वश में रखने वाला है, वह ज्ञान प्राप्त करता है।) सन्दर्भ: श्लोक ४।
(ख) अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च चैव वाङ्मयं तप उच्यते। (जो वचन उद्वेगहीन, सत्य, प्रिय और हितकारी हो, वह वाचिक तप कहा जाता है।) सन्दर्भ: श्लोक ८।
(ग) सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः। (जो सदा संतुष्ट, योगी, आत्मा को वश में रखने वाला और दृढ़ निश्चयी है।) सन्दर्भ: श्लोक ६।
(घ) क्रोधात् भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। (क्रोध से मोह होता है, मोह से स्मृति का भ्रम होता है।) सन्दर्भ: श्लोक २।
(ङ) तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। (इसे प्रणाम, प्रश्न और सेवा से जानो।) सन्दर्भ: श्लोक ३।