उत्तरम् : “सङ्गच्छध्वं संवदध्वम्” इत्यस्य अभिप्रायः अस्ति यः मानवः समाजे ऐक्यभावेन मिलित्वा गच्छेत् तथा परस्परं सम्यक् विचारविनिमयं कुर्यात्। (“संगच्छध्वं संवदध्वम्” का अर्थ है कि सभी मनुष्य समाज में एकता के साथ मिलकर चलें और परस्पर अच्छे विचारों का आदान-प्रदान करें।)
(ग) सर्वे किं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवेयुः? (सभी लोग किसे त्यागकर एकता के भाव से जिएँ?)
उत्तरम् : सर्वे वैमनस्यं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवेयुः। (सभी लोग वैर-भाव को त्यागकर एकता के भाव से जीवन व्यतीत करें।)
(घ) अस्मिन् पाठे का प्रेरणा अस्ति? (इस पाठ में क्या प्रेरणा दी गई है?)
उत्तरम् : अस्मिन् पाठे मानवजातेः ऐक्यभावेन सहकार्यं कृत्वा सुखपूर्वकं जीवनं यापनस्य प्रेरणा अस्ति। (इस पाठ में मानव समाज को एकता के साथ मिलकर कार्य करते हुए सुखपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है।)
३. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) परमेश्वरः सर्वत्र व्याप्तः अस्ति। (परमेश्वर सर्वत्र व्याप्त है।)
उत्तरम्: कः सर्वत्र व्याप्तः अस्ति? (कौन सर्वत्र व्याप्त है?)
(ख) वयम् ईश्वरं नमामः। (हम ईश्वर को नमस्कार करते हैं।)
उत्तरम्: वयं कं नमामः? (हम किसे नमस्कार करते हैं?)
(ग) वयम् ऐक्यभावेन जीवामः। (हम एकता के भाव से जीते हैं।)
उत्तरम्: वयं कथं जीवामः? (हम कैसे जीते हैं?)
(घ) ईश्वरस्य प्रार्थनया शान्तिः प्राप्यते। (ईश्वर की प्रार्थना से शांति प्राप्त होती है।)
उत्तरम्: कस्य प्रार्थनया शान्तिः प्राप्यते? (किसकी प्रार्थना से शांति प्राप्त होती है?)
(ङ) अहं समाजाय श्रमं करोमि। (मैं समाज के लिए श्रम करता हूँ।)
उत्तरम्: कस्मै अहं श्रमं करोमि? (मैं किसके लिए श्रम करता हूँ?)
एक साथ चलो, एक स्वर में बोलो, तुम्हारे मन एक-दूसरे को जानें। जैसे प्राचीन काल में देवता अपने-अपने भाग को स्वीकार करके समन्वय के साथ कर्तव्यों का पालन करते थे।
इनका विचार समान हो, लक्ष्य की प्राप्ति समान हो, इनका मन सौहार्दपूर्ण हो, और इनका चित्त एक हो। मैं तुम्हारे सामूहिक विचार को संस्कारित करके प्रचारित करता हूँ और तुम्हारी सामूहिक प्रार्थना से ज्ञान-यज्ञ को सिद्ध करता हूँ।
(ङ) कपोतराजस्य नाम किम्? (कबूतरों के राजा का नाम क्या है?)
उत्तरम्: चित्रग्रीवः। (चित्रग्रीव)
(च) व्याधः कान् विकीर्य जालं प्रसारितवान्? (शिकारी ने किस पर जाल फैलाया?)
उत्तरम्: कपोतान्। (कबूतरों पर)
(छ) विपत्काले विस्मयः कस्य लक्षणम्? (विपत्ति के समय चकित हो जाना किसका लक्षण है?)
उत्तरम्: मूर्खस्य। (मूर्ख का)
(ज) चित्रग्रीवस्य मित्रं हिरण्यकः कुत्र निवसति? (चित्रग्रीव का मित्र हिरण्यक कहाँ रहता है?)
उत्तरम्: वने। (जंगल में)
(झ) चित्रग्रीवः हिरण्यकं कथं सम्बोधयति? (चित्रग्रीव हिरण्यक को किस तरह संबोधित करता है?)
उत्तरम्: प्रियसख। (प्रिय मित्र)
(ञ) पूर्वं केषां पाशान् छिनत्तु इति चित्रग्रीवः वदति? (चित्रग्रीव सबसे पहले किनके बंधन काटने को कहता है?)
उत्तरम्: शिशूनाम्। (बच्चों के)
२. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत –
(क) प्रश्न: यदा केदारक्षेत्रम् आरोहन्तः आसन् किम् अभवत्? हिंदी अनुवाद: जब वे लोग केदार क्षेत्र की ओर चढ़ रहे थे, तब क्या हुआ था?
उत्तरम्: यदा ते केदारक्षेत्रम् आरोहन्तः आसन्, तदा पर्वतेषु हिमवृष्टिः अभवत्। हिंदी अनुवाद: जब वे लोग केदार क्षेत्र की ओर चढ़ रहे थे, तब पर्वतों पर बर्फ़ गिरने लगी थी।
(ख) प्रश्न: सर्वे उच्चस्वरेण किं प्रार्थयन्त? हिंदी अनुवाद: सभी लोग ऊँचे स्वर में क्या प्रार्थना कर रहे थे?
उत्तरम्: सर्वे जनाः उच्चस्वरेण “ईश्वरः रक्षतु” इति प्रार्थयन्त। हिंदी अनुवाद: सभी लोग ऊँचे स्वर में “ईश्वर रक्षा करें” ऐसा प्रार्थना कर रहे थे।
(ग) प्रश्न: असम्भवं कार्यं कथं कर्तुं शक्यते इति नायकः उक्तवान्? हिंदी अनुवाद: असंभव कार्य को कैसे किया जा सकता है — ऐसा नायक ने क्या कहा?
उत्तरम्: नायकः उक्तवान् – “यत्र इच्छा तत्र मार्गः”, इत्यनेन असम्भव कार्यं अपि सम्भवम् भवति। हिंदी अनुवाद:नायक ने कहा – “जहाँ इच्छा है, वहाँ रास्ता है”, जिससे असंभव कार्य भी संभव हो सकता है।
(घ) प्रश्न: निर्जने वने तण्डुलकणान् दृष्ट्वा चित्रग्रीवः किं निरूपयति? हिंदी अनुवाद: निर्जन वन में चावल के दानों को देखकर चित्रग्रीव क्या बताता है?
उत्तरम्: चित्रग्रीवः निर्जने वने तण्डुलकणान् दृष्ट्वा तान् जालस्य संकेतः इति निरूपयति। हिंदी अनुवाद: चित्रग्रीव चावल के दानों को देखकर उन्हें जाल का संकेत बताता है।
(ङ) प्रश्न: किं नीतिवचनं प्रसिद्धम्? हिंदी अनुवाद: कौन-सा नीतिवचन प्रसिद्ध है?
उत्तरम्: “विपत्तौ विवेकः आवश्यकः” इति नीतिवचनं प्रसिद्धम्। हिंदी अनुवाद: “विपत्ति के समय विवेक आवश्यक होता है” यह नीति-वचन प्रसिद्ध है।
(च) प्रश्न: व्याधात् रक्षां प्राप्तुं चित्रग्रीवः कम् आदेशं दत्तवान्? हिंदी अनुवाद: शिकारी से बचने के लिए चित्रग्रीव ने किसे आदेश दिया?
उत्तरम्: चित्रग्रीवः हिरण्यकं आदेशं दत्तवान् यत् सः व्याधस्य जालं छिन्तु। हिंदी अनुवाद: चित्रग्रीव ने हिरण्यक को यह आदेश दिया कि वह शिकारी के जाल को काटे।
उत्तरम्: हिरण्यकः दुःखितं मित्रं दृष्ट्वा करुणया तूष्णीं स्थितः। हिंदी अनुवाद: हिरण्यक अपने दुःखी मित्र को देखकर करुणा से चुपचाप खड़ा रहा।
(ज) प्रश्न: पुलकितः हिरण्यकः चित्रग्रीवं कथं प्रशंसति? हिंदी अनुवाद: पुलकित हिरण्यक चित्रग्रीव की कैसे प्रशंसा करता है?
उत्तरम्: पुलकितः हिरण्यकः चित्रग्रीवं साहसी, धैर्यशीलः इति प्रशंसति। हिंदी अनुवाद: पुलकित होकर हिरण्यक चित्रग्रीव को साहसी और धैर्यवान कहकर उसकी प्रशंसा करता है।
(झ) प्रश्न: कपोताः कथं आत्मरक्षणं कृतवन्तः? हिंदी अनुवाद: कबूतरों ने आत्मरक्षा कैसे की?
उत्तरम्: कपोताः एकत्र मिलित्वा समवेतबलस्य उपयोगेन आत्मरक्षणं कृतवन्तः। हिंदी अनुवाद: कबूतरों ने मिलकर, सामूहिक बल का उपयोग करके आत्मरक्षा की।
(ञ) प्रश्न: नायकस्य प्रेरकवचनैः सर्वेऽपि किम् अकुर्वन्? हिंदी अनुवाद: नायक के प्रेरक वचनों से सभी ने क्या किया?
उत्तरम्: नायकस्य प्रेरकवचनैः प्रेरिताः सर्वेऽपि कठिन कार्ये अपि साहसं कृतवन्तः। हिंदी अनुवाद: नायक के प्रेरणादायक वचनों से सभी ने कठिन कार्य में भी साहस किया।
३. अधोलिखितानिवाक्यानिपठित्वाल्यप्प्रत्ययान्तेषुपरिवर्तयत –