13. बच्चे काम पर जा रहे हैं –अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न 1. कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने तथा विचार करने से आपके मन-मस्तिष्क में जो चित्र उभरता है उसे लिखकर व्यक्त कीजिए।
 उत्तर 
कविता की पहली दो पंक्तियों को पढ़ने और विचार करने से बाल मजदूरी का चित्र उभरता है। बच्चों के प्रति चिंता और करुणा का भाव उमड़ता है। छोटी सी उम्र में ही इन्हें अपना और परिवार का पेट भरने के लिए, न चाहते हुए भी, इन्हें ठंड में सुबह-सुबह उठकर काम पर जाना पड़ता है।

प्रश्न 2. कवि का मानना है कि बच्चों के काम पर जाने की भयानक बात को विवरण की तरह न लिखकर सवाल के रूप में पूछा जाना चाहिए कि ‘काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?’ कवि की दृष्टि में उसे प्रश्न के रूप में क्यों पूछा जाना चाहिए ?
 उत्तर 
बच्चों की इस स्थिति का जिम्मेदार समाज है। कवि द्वारा विवरण मात्र देकर उनकी जरूरी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं की जा सकती। इसके लिए समाज को इस समस्या से जागरूक करने और ठोस समाधान ढूंढने के लिए बात को प्रश्न रूप में ही पूछा जाना उचित होगा। लोगों को बैठकर विमर्श कर इस समस्या का उचित समाधान करना होगा।

प्रश्न 3. सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से बच्चे वंचित क्यों हैं ?
 उत्तर  
सुविधा और मनोरंजन के उपकरणों से बच्चों के वंचित रहने के मुख्य कारण सामाजिक व्यवस्था और आर्थिक मज़बूरी है। समाज के गरीब तबके के बच्चों को न चाहते हुए भी अपने माता-पिता का हाथ बँटाना पड़ता है। जहाँ जीविका के लिए इतनी मेहनत करनी पड़े तब सुख-सुविधाओं की कल्पना करना असंभव सा लगता है।

प्रश्न 4. दिन-प्रतिदिन के जीवन में हर कोई बच्चों को काम पर जाते देख रहा/रही है, फिर भी किसी को कुछ अटपटा नहीं लगता। इस उदासीनता के क्या कारण हो सकते हैं ?
 उत्तर  
इस उदासीनता के कई कारण  हैं। लोग आत्मकेंद्रित होने के साथ संवेदनहीन भी हो रहे हैं। उन्हें सिर्फ अपने काम से मतलब होता है। दुसरो के कष्टो को वे जानने समझने का प्रयास नही करते। कई लोगो में जागरूकता की भी कमी है। उन्हें यह भी नही पता की पढाई हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। वे सिर्फ ईश्वर और बच्चों के भाग्य को दोष देते हैं।

प्रश्न 5. आपने अपने शहर में बच्चों को कब-कब और कहाँ-कहाँ काम करते हुए देखा है?
उत्तर  मैंने अपने शहर में बच्चों को अनेक स्थलों पर काम करते देखा है। चाय की दुकान पर, होटलों पर, विभिन्न दुकानों पर, घरों में, निजी कार्यालयों में। मैंने उन्हें सुबह से देर रात तक, हर मौसम में काम करते देखा है।

प्रश्न 6. बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान क्यों है?
 उत्तर
 बच्चे इस देश का भविष्य हैं। यदि बच्चे पढ़ लिख नही पाते तब हमारे देश की आने वाली पीढ़ी भी पिछड़ी होगी, देश का भविष्य अंधकारपूर्ण होगा। उन्हें उनके बचपन से वंचित रखना अपराध तथा अमानवीय कर्म है। इसलिए बच्चों का काम पर जाना धरती के एक बड़े हादसे के समान है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7. काम पर जाते किसी बच्चे के स्थान पर अपने-आप को रखकर देखिए। आपको जो महसूस होता है उसे लिखिए।

उत्तर- आज मुझे स्कूल जाना था। मैंने होम वर्क भी पूरा कर लिया था। परंतु क्या करूं? पिताजी बीमार हैं। माँ उनकी देखभाल में व्यस्त हैं। न पिता काम पर जा पा रहे हैं और न माँ। माँ ने मुझे अपनी जगह बर्तन-सफाई के काम पर भेज दिया। मैं यह काम नहीं करना चाहती और उस मोटी आंटी के घर में तो बिलकुल नहीं करना चाहती जिसने दरवाजे पर कुत्ता बाँध रखा है। मेरे घुसते ही कुत्ता भौंकने लगता है। डरते-डरते अंदर जाती हूँ तो मालकिन ऐसे पेश आती है जैसे मैं लड़की ने हूँ, बल्कि उसकी खरीदी हुई गुलाम हूँ।अगर मजबूरी न होती, तो मैं काम-धंधे की ओर मुड़कर भी न देखती।

12. मेघ आए –अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न 1: बादलों के आने पर प्रकृति में जिन गतिशील क्रियाओं को कवि ने चित्रित किया है, उन्हें लिखिए।
उत्तर: 
बादलों के आने पर प्रकृति में भिन्न-भिन्न परिवर्तन होते हैं। बादलों के आगमन की सूचना बयार नाचते-गाते देती है। जैसे ही बादल आते हैं, लोग अतिथि सत्कार के लिए अपने घर के दरवाज़े और खिड़कियाँ खोल देते हैं। वृक्ष कभी गर्दन झुकाकर तो कभी उठाकर बादलों को देखने का प्रयास करते हैं। आंधी आकर धूल को उड़ाती है। अन्य प्राकृतिक तत्वों के साथ नदी ठिठक गई है और घूँघट सरकाकर आंधी को देखने की कोशिश करती है। सबसे बड़ा सदस्य होने के नाते बूढ़ा पीपल आगे बढ़कर आंधी का स्वागत करता है। तालाब पानी से भर जाते हैं। आकाश में बिजली चमकती है और वर्षा के बूंद मिलन के आँसू बहाते हैं।

प्रश्न 2: निम्नलिखित किसके प्रतीक हैं ? धूल, पेड़, नदी, लता, ताल 
 उत्तर:

  1. धूल – स्त्री
  2. पेड़- नगरवासी
  3. नदी – स्त्री
  4. लता – मेघ की प्रतिक्षा करती नायिका
  5. ताल – सेवक

प्रश्न 3: लता ने बादल रूपी मेहमान को किस तरह देखा और क्यों ?
उत्तर: 
लता ने बादल रुपी मेहमान को किवाड़ की ओट से देखा क्योंकि वह मेघ के देर से आने के कारण व्याकुल हो रही थी तथा संकोचवश उसके सामने नहीं आ सकती थी।

प्रश्न 4: भाव स्पष्ट कीजिए –
(क) क्षमा करो गाँठ खुल गई अब भरम की 
(ख) बाँकी चितवन उठा, नदी ठिठकी, घूँघट सरके।

उत्तर: 
(क) नायिका को यह भ्रम था कि उसके प्रिय अर्थात् मेघ नहीं आएँगे परन्तु बादल रूपी नायक के आने से उसकी सारी शंकाएँ मिट जाती है और वह क्षमा याचना करने लगती है।
(ख) मेघ के आने का प्रभाव सभी पर पड़ा है। नदी ठिठककर कर जब ऊपर देखने की चेष्टा करती है तो उसका घूँघट सरक जाता है और वह तिरछी नज़र से आए हुए आंगतुक को देखने लगती है। 

प्रश्न 5: मेघ रूपी मेहमान के आने से वातावरण में क्या परिवर्तन हुए ? 
उत्तर: 
मेघ रूपी मेहमान के आने से हवा के तेज बहाव के कारण आँधी चलने लगती है। इससे दरवाजे और खिड़कियां खुलने लगती हैं, और पेड़ अपने संतुलन खो देते हैं। नदी और तालाब के पानी में उथल-पुथल होनी लगती है, जबकि पीपल का पुराना पेड़ भी झुक जाता है। अंततः, बिजली कड़कने के साथ वर्षा होती है।

प्रश्न 6: मेघों के लिए ‘बन-ठन के, सँवर के’ आने की बात क्यों कही गई है?
उत्तर: 
गाँव में मेघ की प्रतीक्षा बहुत दिनों तक की जाती है। जिस प्रकार दामाद (मेहमान) बहुत समय बाद आते हैं, उसी प्रकार मेघ भी देर से आते हैं। अतिथि जब घर आते हैं, तो संभवतः उनके देर होने का कारण उनका बन-ठन कर आना होता है। कवि ने मेघों में सजीवता डालने के लिए मेघों के ‘बन-ठन के, सँवर के’ आने की बात कही है।

प्रश्न 7: कविता में आए मानवीकरण तथा रूपक अलंकार के उदाहरण खोजकर लिखिए।
 उत्तर:

मानवीकरण अलंकार :

  1. आगे-आगे नाचती बयार चली यहाँ बयार का स्त्री के रुप में मानवीकरण हुआ है।
  2. मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
    मेघ का दामाद के रुप में मानवीकरण हुआ है।
  3. पेड़ झुक झाँकने लगे गरदन उचकाए।
    पेड़ो का नगरवासी के रुप में मानवीकरण किया गया है।
  4. धूल भागी घाघरा उठाए।
    धूल का स्त्री के रुप में मानवीकरण किया गया है।
  5. बूढ़े पीपल ने आगे बढ़कर जुहार की
    पीपल का पुराना वृक्ष गाँव के सबसे बुज़र्ग आदमी के रुप में है।
  6. बोली अकुलाई लता
    लता स्त्री की प्रतीक है।

रूपक अलंकार:

  1. क्षितिज अटारी
    यहाँ क्षितिज को अटारी के रुपक द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
  2. दामिनी दमकी
    दामिनी दमकी को बिजली के चमकने के रुपक द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
  3. बाँध टूटा झर-झर मिलन के अश्रु ढरके।
    झर-झर मिलन के अश्रु द्वारा बारिश को पानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 8: कविता में जिन रीति-रिवाजों का मार्मिक चित्रण हुआ है, उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर: कविता में रीति-रिवाजों के माध्यम से वर्षा ऋतु का चित्रण किया गया है। जब मेहमान आते हैं, तो पूरे गाँव में उलास और उमंग का माहौल होता है। सभी लोग अपने-अपने तरीकों से मेहमान के स्वागत में जुट जाते हैं। गाँव की स्त्रियाँ मेहमान से पर्दा करने लगती हैं, बुजुर्ग झुककर उनका स्वागत करते हैं, और उनके पैरों को धोने के लिए परात में पानी लाया जाता है। इस प्रकार, इस कविता में कुछ ग्रामीण रीति-रिवाजों का चित्रण हुआ है।

प्रश्न 9: कविता में कवि ने आकाश में बादल और गाँव में मेहमान (दामाद) के आने का जो रोचक वर्णन किया है, उसे लिखिए।
उत्तर: 
कविता में मेघ और दामाद के आगमन में समानता बताई गई है। जब गाँव में मेघ दिखते हैं तो गाँव के सभी लोग उत्साह के साथ उसके आने की खुशियाँ मनाते हैं। हवा के तेज़ बहाव से पेड़ अपना संतुलन खो बैठते हैं, नदियों तथा तालाबों के जल में उथल-पुथल होने लगती है। मेघों के आगमन पर प्रकृति के अन्य अव्यव भी प्रभावित होते हैं। ठीक इसी प्रकार किसी गाँव में जब कोई दामाद आता है तो गाँव के सभी सदस्य उसमें बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं। स्त्रियाँ चिक की आड़ से दामाद को देखने का प्रयत्न करती है, गाँव के सबसे बुज़र्ग आदमी सर्वप्रथम उसके समक्ष जाकर उसका आदर-सत्कार करते हैं। पूरी सभा का केन्द्रिय पात्र वहीं होता है।

प्रश्न 10: काव्य-सौंदर्य लिखिए –
 पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
 मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में पाहुन अर्थात् दामाद के रूप में प्रकृति का मानवीकरण हुआ है। कवि ने प्रस्तुत कविता में चित्रात्मक शैली का उपयोग किया है। इसमें बादलों के सौंदर्य का मनोरम चित्रण हुआ है। कविता की भाषा सरल तथा सहज होने के साथ ग्रामीण भाषा जैसे पाहुन शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है। यहाँ पर बन ठन में ब वर्ण की आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 11: वर्षा के आने पर अपने आसपास के वातावरण में हुए परिवर्तनों को ध्यान से देखकर एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर: वर्षा के आने पर वातावरण में ठंड बढ़ जाती है। पेड़-पौधे ताजगी से भरपूर दिखाई देने लगते हैं। गड्ढों में पानी भर जाता है, और सड़कें चमकने लगती हैं। बच्चों का झुंड बारिश का मजा लेते हुए दिखाई देता है। हालांकि, सड़कों पर पानी जमा होने के कारण चलने में असुविधा होती है और यातायात संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। वातावरण में गर्मी की समाप्ति होने से लोगों को राहत मिलती है।

प्रश्न 12: कवि ने पीपल को ही बड़ा बुजुर्ग क्यों कहा है ? पता लगाइए।
उत्तर: 
पीपल वृक्ष की आयु सभी वृक्षों से बड़ी होती है। गाँवों में पीपल की पूजा की जाती है इसी कारण गाँव में पीपल वृक्ष का होना अनिवार्य माना जाता है इसीलिए पुराना और पूजनीय होने के कारण पीपल को बड़ा बुजुर्ग कहा गया है।

प्रश्न 13: कविता में मेघ को ‘पाहुन’ के रूप में चित्रित किया गया है। हमारे यहाँ अतिथि (दामाद) को विशेष महत्त्व प्राप्त है, लेकिन आज इस परंपरा में परिवर्तन आया है। आपको इसके क्या कारण नजर आते हैं, लिखिए।
उत्तर: 
हमारे यहाँ अतिथि को देवता तुल्य मन गया है। लोग आज भी इस परंपरा का पालन करते हैं। परन्तु बदलते समाज में इस व्यवस्था में कई  परिवर्तन आएँ हैं । इसके कई कारण है जैसे संयुक्त परिवारों का टूटना, शहरीकरण, पाश्चात्य संस्कृति की और बढ़ता झुकाव, महँगाई, और व्यस्तता ऐसे कुछ कारण है। जिसके फलस्वरूप आज का मनुष्य केवल अपने बारे में ही सोचता है। उसके पास दूसरों को देने के लिए समय तथा इच्छा का अभाव हो चला है और परिणामस्वरूप यह परम्परा धीरे-धीरे गायब होती जा रही है।

भाषा अध्यन

प्रश्न 14: कविता में आए मुहावरों को छाँटकर अपने वाक्यों में प्रयुक्त कीजिए।
उत्तर:

  1. बन-ठन के  – (तैयारी के साथ) मेहमान हमेशा बन-ठन के  हैं ।
  2. सुधि लेना  – (खबर लेना) मैंने अपने प्रिया मित्र की कई दिनों तक सुधि नहीं ली है।
  3. गाँठ खुलना  – (समस्या का समाधान होना) आपसी बातचीत द्वारा मन की कई गाँठे खुल जाती है।
  4. बाँध टूटना  – (धैर्य समाप्त होना) कई घंटे बिजली कटी होने से मोहन के सब्र का बाँध टूट गया।

प्रश्न 15: कविता में प्रयुक्त आँचलिक शब्दों की सूची बनाइए।
उत्तर:

बयार, पाहुन, उचकाना, जुहार, सुधि-लीन्हीं, किवार, अटारी, बन ठन, बाँकी, परात।

प्रश्न 16: मेघ आए कविता की भाषा सरल और सहज है – उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 

‘मेघ आए’ कविता की भाषा सरल तथा सहज है। निम्नलिखित उदाहरणों द्वारा इसे स्पष्ट किया जा सकता है

1.  मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
2.  पाहुन ज्यों आए हो गाँव में शहर के।
3. पेड़ झुककर झाँकने लगे गरदन उचकाए।
4. बरस बाद सुधि लीन्हीं
5.  पेड़ झुककर झाँकने लगें

उपर्युक्त पंक्तियों में ज़्यादातर आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया गया है। कहीं-कहीं पर गाँव का माहौल स्थापित करने के लिए ग्रामीण भाषा का भी प्रयोग किया गया है जिसे समझने में कठिनाई नही होती है।

11. ग्राम श्री – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न 1: कवि ने गाँव को ‘हरता जन मन’ क्यों कहा है ?
उत्तर: 
कवि ने गाँव को ‘हरता जन-मन’ इसलिए कहा है क्योंकि उसकी शोभा अनुराग है। खेतों में दूर-दूर तक मखमली हरियाली फैली हुई है, जिस पर सूरज की धूप चमक रही है। इस शोभा के कारण पूरी वसुधा प्रसन्न दिखाई देती है। इसके कारण गेहूँ, जौ, अरहर, सनई, और सरसों की फसलें उग आई हैं। तरह-तरह के फूलों पर रंगीन तितलियाँ मँडरा रही हैं। आम, बेर, आड़, और अनार जैसे मीठे फल पैदा होने लगे हैं। आलू, गोभी, बैंगन, मूली, पालक, धनिया, लौकी, सेम, टमाटर, और मिर्च भी खूब फल-फूल रहे हैं। गंगा के किनारे तरबूजों की खेती फैलने लगी है। पक्षी आनंद विहार कर रहे हैं, और ये सब दृश्य मनमोहक बन पड़े हैं। इसलिए गाँव सचमुच जन-मन को हरता है।

प्रश्न 2: कविता में किस मौसम के सौंदर्य का वर्णन है ?
 उत्तर: 
कविता में सरदी के मौसम के सौंदर्य का वर्णन है। इसी समय गुलाबी धूप हरियाली से मिलकर हरियाली पर बिछी चाँदी की उजली जाली का अहसास कराती है और पौधों पर पड़ी ओस हवा से हिलकर उनमें हरारक्त होने का भान होता है। इसके अलावा खेत में सब्ज़ियाँ तैयार होने, पेड़ों पर तरह-तरह के फल आने, तालाब के किनारे रेत पर मँगरौठ नामक पक्षी के अलसीकर सोने से पता चलता है कि यह सरदी के मौसम का ही वर्णन है। 

प्रश्न 3: गाँव को ‘मरकत डिब्बे सा खुला’ क्यों कहा गया है ?
 उत्तर: 
गाँव को ‘मरकत डिब्बे सा खुला’ कहा गया है क्योंकि ‘मरकत‘ का अर्थ ‘पन्ना’ नामक हरे रंग के रत्न से है। इस रत्न के खुले डिब्बे से सभी चीज़ें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। मरकत के हरे रंग की तुलना गाँव की हरियाली से की गई है। गाँव का वातावरण भी मरकत के खुले डिब्बे की तरह हरा-भरा और खुला-खुला सा लगता है। इसलिए, गाँव को ‘मरकत डिब्बे सा खुला’ कहा गया है।

प्रश्न 4: अरहर और सनई के खेत कवि को कैसे दिखाई देते हैं ?
उत्तर: 
अरहर और सनई के खेत कवि को सोने की किंकणियों के समान दिखाई देते हैं। अरहर और सनई फलीदार फ़सलें हैं। इनकी फ़सलें पकने पर, जब हवा चलती है, तो इनमें से मधुर आवाज़ आती है। यह मधुर आवाज़ किसी स्त्री की कमर में बँधी करधनी से आती हुई प्रतीत होती है। इन्हीं मधुर आवाज़ों के कारण कवि को अरहर और सनई के खेत धरती की करधनी जैसे दिखाई देते हैं।

प्रश्न 5:भाव स्पष्ट कीजिए –
 (क) बालू के साँपों से अंकित
 गंगा की सतरंगी रेती
 (ख) हँसमुख हरियाली हिम-आतप
 सुख से अलसाए-से सोए

उत्तर:
(क) प्रस्तुत पंक्तियों में गंगा नदी के तट वाली ज़मीन को सतरंगी कहा गया है। रेत पर टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ हैं, जो सूरज की किरणों के प्रभाव से चमकने लगती हैं। ये रेखाएँ टेढ़ी चाल चलने वाले साँपों के समान प्रतीत होती हैं।
(ख) इन पंक्तियों में गाँव की हरियाली का वर्णन प्रस्तुत किया गया है। सूरज के प्रकाश में जगमगाती हुई हँसमुख सी प्रतीत होती है। सर्दी की धूप भी खिली-खिली है ऐसे में लगता है जैसे दोनों आलस्य से भरकर सोए हुए हों।

प्रश्न 6: निम्न पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है ?
 तिनकों के हरे हरे तन पर
 हिल हरित रुधिर है रहा झलक

उत्तर:
हरे हरे – पुनरुक्ति अलंकार है।
हिल हरित – अनुप्रास अलंकार है।
तिनकों के तन पर – मानवीकरण अलंकार है
‘हरित रुधिर’-रुधिर का रंग हरा बताने के कारण विरोधाभास अलंकार है।

प्रश्न 7: इस कविता में जिस गाँव का चित्रण हुआ है वह भारत के किस भू-भाग पर स्थित है ?
 उत्तर

इस कविता में उत्तरी भारत के गाँव का चित्रण हुआ है। उत्तरी भारत, भारत के खेती प्रधान राज्यों में प्रमुख है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8: भाव और भाषा की दृष्टि से आपको यह कविता कैसी लगी ? उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
 उत्तर: 
प्रस्तुत कविता भाव और भाषा दोनों की दृष्टि से अत्यंत सहज और आकर्षक है। इसमें प्रकृति का लुभावना और सुन्दर वर्णन किया गया है। कवि ने प्रकृति का मानवीकरण किया है, जिससे पाठक को गहराई से जुड़ने का अनुभव होता है। कविता की भाषा भी अत्यंत सरल, मधुर तथा प्रवाहमयी है। इसके अलावा, अलंकारों का प्रयोग करके कविता के सौंदर्य में और वृद्धि हुई है।

प्रश्न 9: आप जहाँ रहते हैं उस इलाके के किसी मौसम विशेष के सौंदर्य को कविता या गद्य में वर्णित कीजिए।
उत्तर: मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। हमारा गाँव उस क्षेत्र में है जो यमुना नदी से मात्र एक-डेढ़ किलोमीटर ही दूर है। इस क्षेत्र में सरदी और गरमी दोनों ही खूब पड़ती हैं। मुझे गरमी का मौसम पसंद है। गरमी में यमुना के दोनों किनारों पर सब्जियों की खेती की जाती है जिससे हरियाली बढ़ जाती है। इन खेतों में जाकर खीरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज आदि तोड़कर खाने का अपना अलग ही आनंद होता है। दोस्तों के साथ यमुना के उथले पानी में नहाने, रेत पर उछलने-कूदने और लोटने का मज़ा अलग ही है। इस ऋतु में सुबह-शाम जल क्रीड़ा करते हुए पक्षियों को निहारना सुखद लगता है। आम, फालसा, लीची आदि फल इसी समय खाने को मिलते हैं। यहाँ की हरियाली आँखों को बहुत अच्छी लगती है।

10. कैदी और कोकिला –अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1: कोयल की कूक सुनकर कवि की क्या प्रतिक्रिया थी ?
उत्तर: 
कोयल की कूक सुनकर कवि को ऐसा लगता है जैसे कोयल उसके लिए कोई संदेशा लेकर आई है। सन्देश महत्वपूर्ण है नहीं तो कोयल सुबह होने तक का इंतज़ार करती।

प्रश्न 2: कवि ने कोकिल के बोलने के किन कारणों  की संभावना बताई ?
उत्तर:

कवि ने कोयल के बोलने की निम्न संभावनाएँ बताई हैं:

  • कोकिला कोई संदेशा पहुँचाना चाहती है।
  • उसने दावानल की लपटें देख लीं है।
  • समस्या अत्यंत गंभीर है इसलिए वह सुबह होने की प्रतीक्षा नहीं कर पाती है।
  • क्रांतिकारीयों के मन में देश-प्रेम की भावना को और मजबूत करने आई है।

प्रश्न 3: किस शासन की तुलना तम के प्रभाव से की गई है और क्यों ?
उत्तर: 
अंग्रेज़ो के शासन की तुलना ताम के प्रभाव से की गयी है क्योंकि अँगरेज़ सरकार की कार्य प्रणाली अन्धकार की तरह काली है। यहाँ अन्धकार का मतलब अन्याय से है । अँग्रेज शासन प्रणाली अन्यायपूर्ण थी।


प्रश्न 4: कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जाने वाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 
कविता के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि तत्कालीन समाज में अंग्रेज़ों द्वारा भारतीय कैदियों को तरह तरह की यातनाएँ दी जाती थी। कैदियों से पशुओं की तरह काम करवाया जाता था। उन्हें अँधेरी कोठरियों में कैदियों को जंजीरों से बाँध कर रखा जाता था। कोठरियां भी बहुत छोटी होती थीं और खाने को भी कम दिया जाता था।

प्रश्न 5: भाव स्पष्ट कीजिए।
(क) मृदुल वैभव की रखवाली-सी, कोकिल बोलो तो!
(ख) हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जुआ, खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कुँआ।
उत्तर:

(क) मृदुल वैभव की रखवाली से यहाँ कवि का तात्पर्य कोयल की मीठी तथा कोमल आवाज़ से है। उसकी आवाज़ में मिठास होने के बाद भी जब वह वेदना पूर्ण आवाज़ में चीख़ उठती है तो कवि उससे उसकी वेदना का कारण पूछता है।
(ख) अंग्रेज़ी सरकार कवि से पशुओं के समान परिश्रम करवाते हैं। कवि के पेट पर जुआ बाँधकर कुँए से पानी निकाला जाता है। परन्तु इससे भी वे दु:खी नहीं होते तथा अंग्रेज़ी सरकार के षड़यंत्र को विफल कर उनकी अकड़ को समाप्त कर देना चाहते हैं।

प्रश्न 6: अद्धरात्रि में कोयल की चीख से कवि को क्या अंदेशा होते है ?
उत्तर: 
अद्धरात्रि में कोयल के चीखने से कवि को अनेकों अंदेशे होते है जैसे शायद कोयल पागल तो नहीं हो गयी है, या शायद वह किसी कष्ट में है या कोई सन्देश लेकर आईं हैं या यह भी हो सकता है कि वह क्रांतिकारियों के दुःख से द्रवित होकर चीख रही हो।

प्रश्न 7: कवि को कोयल से ईर्ष्या क्यों हो रही है ?
उत्तर: 
कवि कोयल की स्वतंत्रता से ईर्ष्या महसूस कर रहा है। कोयल आकाश में स्वतंत्रता से उड़ान भर रही है, जबकि कवि एक जेल की काल कोठरी में बंद है। कोयल अपने आनंद को गाकर प्रकट कर सकती है, लेकिन कवि के लिए तो रोना भी एक बड़ा गुनाह है, जिसके लिए उसे दंड मिल सकता है।

प्रश्न 8: कवि के स्मृति-पटल पर कोयल के गीतों की कौन सी मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं, जिन्हें वह अब नष्ट करने पर तुली है ?
उत्तर: 
कवि के स्मृति पटल पर कोयल के गीतों की कुछ मधुर स्मृतियाँ अंकित हैं। कोयल हरी डाली पर बैठकर अपनी मधुर वैभवशाली आवाज़ से संपूर्ण सृष्टि को अलंकृत करती है, उसके मधुर गीतों से उसकी खुशी झलकती है, वह स्वतंत्रता पूर्वक अपना गीत गाती है परन्तु अब वह अपनी इन विशेषताओं को नष्ट करने पर तुली है। वह बावली सी प्रतीत हो रही है।

प्रश्न 9: हथकड़ियों को गहना क्यों कहा गया है ?
उत्तर: 
कवि ने हथकड़ियों को गहना कहा है क्योंकि उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। अँगरेज़ सरकार ने उन्हें हथकड़ियाँ पहनाई हैं, जो उनके लिए एक गौरव की बात है। इसलिए, हथकड़ियों को गहना कहा गया है।

प्रश्न 10: ‘कलि तू …..ऐ आली!’ – इन पंक्तियों में ‘काली’ शब्द की आवृत्ति से उत्पन्न चमत्कार का विवेचन कीजिए।
उत्तर: 
इन कविता की पंक्तियों में कवि ने नौ बार काली शब्द का प्रयोग किया है। शब्द तो एक ही है परन्तु भिन्न -भिन्न अर्थों में इसका प्रयोग किया गया है। कही पर यह शब्द अँग्रेज सरकार के काले शासन को संबोधित कर रहा है तो कहीं वातावरण की कालिमा और निराशा को उजागर कर रहा है।

प्रश्न 11; काव्य – सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
(क) किस दानावल की ज्वालाएँ हैं दीखीं ?
(ख) तेरे गीत कहावें वाह, रोना भी है मुझे गुनाह!
देख विषमता तेरी – मेरी बजा रही तिस पर रणभेरी!

उत्तर:
(क) यहाँ कवि कोयल की वेदना पूर्ण आवाज़ पर अपनी आशंका व्यक्त कर रहा है। अपनी प्रश्नात्मक शैली से कवि कोयल के कष्ट का अनुमान लगा रहा है। कवि ने विम्बात्मक शैली का प्रयोग किया है, भाषा में सहजता तथा सरलता है।
(ख) प्रस्तुत काव्य पंक्तियों में कवि ने अपने तथा कोयल के जीवन की विषमताओं की ओर संकेत किया है। कवि ने यहाँ तुकबंदी का प्रयोग किया है, अपनी तथा कोयल के जीवन की तुलना की है तथा सरल भाषा का प्रयोग किया है।

रचना  और अभिव्यक्ति

प्रश्न 12: कवि जेल के आसपास अन्य पक्षियों का चहकना भी सुनता होगा लेकिन उसने कोकिला की ही बात क्यों की है ?
उत्तर: 

  • यहाँ कोकिला भारत माता का प्रतीक है। कोकिला रात के समय नहीं बोलती है, और उसकी आवाज़ से कवि को वेदना की अनुभूति होती है। 
  • अत: रात को उसका इस प्रकार से करुण स्वर में गाना आने वाले किसी संकट का प्रतीक है। कोकिला की आवाज़ अन्य पक्षियों से अधिक मधुर तथा भिन्न है। इसलिए कवि ने कोकिला की ही बात कही है।

प्रश्न 13: आपके विचार से स्वतंत्रता सेनानियों और अपराधियों के साथ एक-सा व्यवहार क्यों किया जाता होगा ?
उत्तर: 

  • अँगरेज़ सरकार के लिए स्वंतंत्रता सेनानी और अपराधी एक जैसे थे। दोनों उनकी व्यवस्था में खलल डालने काम करते थे।  सरकार के लिए दोनों ही दोषी थे। सरकार क्रांतिकारियों की आज़ादी की माँग को दबाना चाहती थी। 
  • स्वतंत्रता सैनानियों के मनोबल को तोड़ने के लिए तथा भारत पर अपनी सत्ता कायम रखने के लिए वे दोनों के साथ समान व्यवहार करती थी।

कैदी और कोकिला पाठ को इस वीडियो की मदद से पूरा समझें।

9. सवैयें – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न 1: ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन-किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है ?
उत्तर: कवि को ब्रजभूमि से गहरा प्रेम है। वह इस जन्म में ही नहीं, बल्कि अगले जन्म में भी ब्रजभूमि का वासी बने रहना चाहता है। ईश्वर से उसकी यह कामना है कि अगले जन्म में उसे ग्वाला, गाय, पक्षी, या पत्थर बनाएँ; वह हर हाल में ब्रजभूमि में रहना चाहता है। इसके अलावा, वह ब्रजभूमि के वन, बाग़, सरोवर और करील-कुंजों पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने को भी तैयार है।

प्रश्न 2: कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण हैं?
उत्तर: कवि का ब्रज के वन, बाग़ और तालाब को निहारने का कारण यह है कि इसकी यादें कृष्ण से जुड़ी हुई हैं। कभी कृष्ण इन्हीं स्थानों पर विहार किया करते थे। इसीलिए कवि इन्हें देखकर धन्य हो जाते हैं।

प्रश्न 3: एक लकुटी और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है?
उत्तर: श्री कृष्ण रसखान जी के आराध्य देव हैं। उनके द्वारा डाले गए कंबल और पकड़ी हुई लाठी उनके लिए बहुत मूल्यवान हैं। श्री कृष्ण लाठी व कंबल डाले हुए ग्वाले के रूप में सुशोभित हो रहे हैं। यह संसार के समस्त सुखों को मात देने वाला है, और उन्हें इस रूप में देखकर वह अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। भगवान के द्वारा धारण की गई वस्तुओं का मूल्य भक्त के लिए परम सुखकारी होता है।

प्रश्न 4: सखी ने गोपी से कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया था ? अपने शब्दों में वर्णन कीजिये।
उत्तर: सखी ने गोपी से आग्रह किया था कि वह कृष्ण के समान सर पर मोरपंखों का मुकुट धारण करें। गले में गुंजों की माला पहने। तन पर पीले वस्त्र पहने। हाथों में लाठी थामे और पशुओं के संग विचरण करें।

प्रश्न 5: आपके विचार से कवि पशु, पक्षी, पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है ?
उत्तर: मेरे विचार से रसखान कृष्ण के अनन्य भक्त हैं। उन्हें किसी भी रूप में कृष्ण सान्निध्य प्राप्त करना है। इसमें उनकी भक्ति-भावना तृप्त होती है। इसलिए वे पशु, पक्षी या पहाड़ बनकर भी कृष्ण का संपर्क चाहतें हैं।

प्रश्न 6: चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं ?
उत्तर: चौथे सवैये के अनुसार कृष्ण का रूप अत्यंत मोहक है तथा उनकी मुरली की धुन बड़ी मादक है। इन दोनों से बचना गोपियों के लिए अत्यंत कठिन है। गोपियाँ कृष्ण की सुन्दरता तथा तान पर आसक्त हैं इसलिए वे कृष्ण के समक्ष विवश हो जाती हैं।

प्रश्न 7: भाव स्पष्ट कीजिए:
(क) ‘कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं।’
(ख) ‘माइ री वा मुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै।’
उत्तर: (क) भाव यह है कि रसखान जी ब्रज की काँटेदार झाड़ियों व कुंजन पर सोने के महलों का सुख न्योछावर करदेना चाहते हैं। अर्थात् जो सुख ब्रज की प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने में है वह सुख सांसारिक वस्तुओं को निहारने में दूर-दूर तक नहीं है।
(ख) भाव यह है कि कृष्ण की मुस्कान इतनी मोहक है कि गोपी से वह झेली नहीं जाती है अर्थात् कृष्ण की मुस्कान पर गोपी इस तरह मोहित हो जाती है कि लोक लाज का भी भय उनके मन में नहीं रहता और गोपी कृष्ण की तरफ़ खीची चली जाती है।

प्रश्न 8: ‘कालिंदी कूल कदम्ब की डारन’ में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: ‘कालिंदी कूल कदम्ब की डारन’ में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति होने के कारण अनुप्रास अलंकार है।

प्रश्न 9: काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिये: ‘या मुरली मुरलीधर की अधरन धरी अधरा न धरौंगी।’
उत्तर: 

  • गोपी अपनी सखी के कहने पर कृष्ण के समान वस्त्राभूषण तो धारण कर लेगीं परन्तु कृष्ण की मुरली को अधरों पर नहीं रखेगीं। उसके अनुसार उसे यह मुरली सौत की तरह प्रतीत होती है अत:वह सौत रूपी मुरली को अपने होठों से नहीं लगाना चाहती है।
  • काव्य में ब्रज भाषा तथा सवैया का सुन्दर प्रयोग हुआ है जिससे चाँद की छटा निराली हो गयी है। ‘ल’ और ‘म’ वर्ण की आवृत्ति होने के कारण यहाँ पर अनुप्रास अलंकार है।

08. वाख – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 
प्रश्न 1: ‘रस्सी’ यहाँ पर किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है ?
उत्तर: रस्सी यहाँ पर मानव के शरीर के लिए प्रयुक्त हुई है और यह रस्सी कच्ची तथा नाशवान है अर्थात् यह कब टूट जाए कहा नहीं जा सकता है।

प्रश्न 2: कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं ?
उत्तर: कवयित्री इस संसारिकता तथा मोह के बंधनों से मुक्त नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में, वह प्रभु भक्ति को सच्चे मन से नहीं कर पा रही हैं। इसलिए, उसे लगता है कि उसके द्वारा की जा रही सारी साधना व्यर्थ हो रही है, और इस कारण उसके द्वारा किए जा रहे मुक्ति के प्रयास भी विफल होते जा रहे हैं।

प्रश्न 3: कवयित्री का ‘घर जाने की चाह’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: कवयित्री का घर जाने की चाह से तात्पर्य है प्रभु से मिलना। कवयित्री इस भवसागर को पार करके अपने परमात्मा की शरण में जाना चाहती है।

प्रश्न 4: भाव स्पष्ट कीजिए –
(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।
(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं,न खाकर बनेगा अंहकारी।

उत्तर: (क) कवयित्री कहती है कि इस संसार में आकर वह सांसारिकता में उलझकर रह गयी और जब अंत समय आया और जेब टटोली तो कुछ भी हासिल न हुआ अब उसे चिंता सता रही है कि भवसागर पार करानेवाले मांझी अर्थात् ईश्वर को उतराई के रूप में क्या देगी।
(ख) प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति के लिए मध्यम मार्ग अपनाने को कह रही है। कवयित्री कहती है कि मनुष्य को भोग विलास में पड़कर कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है। मनुष्य जब सांसारिक भोगों को पूरी तरह से त्याग देता है तब उसके मन में अंहकार की भावना पैदा हो जाती है। अत:भोग-त्याग, सुख-दुःख के मध्य का मार्ग अपनाने की बात यहाँ पर कवयित्री कर रही है।

प्रश्न 5: बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललदय ने क्या उपाय सुझाया है
उत्तर:

  • कवयित्री के अनुसार ईश्वर को अपने अन्त:करण में खोजना चाहिए। जिस दिन मनुष्य के हृदय में ईश्वर भक्ति जागृत हो गई अज्ञानता के सारे अंधकार स्वयं ही समाप्त हो जाएँगे। 
  • जो दिमाग इन सांसारिक भोगों को भोगने का आदी हो गया है और इसी कारण उसने ईश्वर से खुद को विमुख कर लिया है, प्रभु को अपने हृदय में पाकर स्वत: ही ये साँकल (जंजीरे) खुल जाएँगी और प्रभु के लिए द्वार के सारे रास्ते मिल जाएँगे। 
  • इसलिए सच्चे मन से प्रभु की साधना करो, अपने अन्त:करण व बाह्य इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर हृदय में प्रभु का जाप करो, सुख व दुख को समान भाव से भोगों। यही उपाय कवियत्री ने सुझाए हैं।

प्रश्न 6: ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं, लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्ति नहीं होती। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है ?
उत्तर: यह भाव साधना की कठिनाइयों और लक्ष्यों की प्राप्यता को दर्शाता है। इसमें कहा गया है:

आई सीधी रह से, गई न सीधी राह।
सुषम-सेतु पर खड़ी थी, बीत गया दिन आह!
जेब टटोली, कौड़ी न पाई।
माझी को दूँ, क्या उतराई?

प्रश्न 7: ‘ज्ञानी’ से कवयित्री का अभिप्राय है ?
उत्तर:

  • यहाँ कवयित्री ने ज्ञानी से अभिप्राय उस ज्ञान को लिया है जो आत्मा व परमात्मा के सम्बन्ध को जान सके ना कि उस ज्ञान से जो हम शिक्षा द्वारा अर्जित करते हैं। 
  • कवयित्री के अनुसार भगवान कण-कण में व्याप्त हैं पर हम उसको धर्मों में विभाजित कर मंदिरों व मस्जिदों में ढूँढते हैं। 
  • जो अपने अन्त:करण में बसे ईश्वर के स्वरुप को जान सके वही ज्ञानी कहलाता है और वहीं उस परमात्मा को प्राप्त करता है। तात्पर्य यह है कि ईश्वर को अपने ही हृदय में ढूँढना चाहिए और जो उसे ढूँढ लेते हैं वही सच्चे ज्ञानी हैं।

07. साखियाँ एवं सबद – अध्याय समाधान

साखियाँ 

प्रश्न 1: ‘मानसरोवर’ से कवि का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: मानसरोवर से कवि का अभिप्राय हृदय रूपी तालाब से है, जो हमारे मन में स्थित है।

प्रश्न 2: कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है ?
उत्तर: कवि के अनुसार, सच्चे प्रेमी की कसौटी यह है कि उससे मिलने पर मन की सारी मलिनता नष्ट हो जाती है। इस प्रक्रिया में, पाप धुल जाते हैं और सद्भावनाएँ जाग्रत हो जाती हैं।

प्रश्न 3: तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है ?
उत्तर: तीसरे दोहे में कवि ने अनुभव से प्राप्त ज्ञान को महत्त्व दिया है। यह ज्ञान जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायक होता है।

प्रश्न 4: इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है ?
उत्तर: इस संसार में सच्चा संत वह है जो साम्प्रदायिक भेद-भाव, तर्क-वितर्क और वैर-विरोध के झगड़ों में न पड़कर, निश्छल भाव से प्रभु की भक्ति में लीन रहता है।

प्रश्न 5: अंतिम दो दोहों के माध्यम से से कबीर ने किस तरह की संकीर्णता की ओर संकेत किया है ?
उत्तर:
अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने निम्नलिखित संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है:
(क) अपने-अपने मत को श्रेष्ठ मानने की संकीर्णता और दूसरे के धर्म की निंदा करने की संकीर्णता।
(ख) ऊंचे कुल के अहंकार में जीने की संकीर्णता।

प्रश्न 6: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या उसके कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिये।
उत्तर: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है। आज तक हजारों राजा पैदा हुए और मर गए। परन्तु लोग जिन्हें जानते हैं, वे हैं – राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर आदि। इन्हें इसलिए जाना गया क्योंकि ये केवल कुल से ऊँचे नहीं थे, बल्कि इन्होंने ऊँचें कर्म किए। इनके विपरीत कबीर, सूर, युल्सी बहुत सामान्य घरों से थे। इन्हें बचपन में ठोकरें भी कहानी पड़ीं। परन्तु फ़िर भी वे अपने श्रेष्ठ कर्मों के आधार पर संसार-भर में प्रसिद्ध हो गए। इसलिए हम कह सकते हैं कि महत्व ऊँचे कर्मों का होता है, कुल का नहीं।

प्रश्न 7: काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
‘हस्ती चढ़िये ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि।
स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झख मारि।’
उत्तर: 

  • इसमें कवि ने एक सशक्त चित्र उपस्थित किया है। सहज साधक मस्ती से हाथी पर चढ़े हुए जा रहे हैं।
    और संसार-भर के कुत्ते भौंक-भौंककर शांत हो रहे हैं परंतु वे हाथी का कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे। यह चित्र निंदकों पर व्यंग्य है और साधकों के लिए प्रेरणा है।
  • सांगरूपक अलंकार का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया गया है
    ज्ञान रूपी हाथी
    सहज साधना रूपी दुलीचा
    निंदक संसार रूपी श्वान
    निंदा रूपी भौंकना
  • ‘झख मारि’ मुहावरे का सुंदर प्रयोग।
  • ‘स्वान रूप संसार है’ एक सशक्त उपमा है।

सबद

प्रश्न 8: मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढता फिरता है ?
उत्तर: मनुष्य अपने धर्म-संप्रदाय और सोच-विचार के अनुसार ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, काबा, कैलाश जैसे पूजा स्थलों और धार्मिक स्थानों पर खोजता है। ईश्वर को पाने के लिए कुछ लोग योग साधना करते हैं तो कुछ सांसारिकता से दूर होकर संन्यासी-बैरागी बन जाते हैं और इन क्रियाओं के माध्यम से ईश्वर को पाने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न 9: कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है ?
उत्तर: कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है। उनके अनुसार, ईश्वर न तो मंदिर में है, न मसजिद में; न काबा में है, न कैलाश आदि तीर्थ यात्रा में। वह न कर्म करने में मिलता है, न योग साधना से, और न ही वैरागी बनने से। ये सब उपरी दिखावे हैं, जो केवल ढोंग हैं। इनमें मन लगाना व्यर्थ है।

प्रश्न 10: कबीर ने ईश्वर को सब स्वाँसों की स्वाँस में क्यों कहा है?
उत्तर: कबीर ने ‘सब स्वाँसों की स्वाँस’ में यह बताया है कि ईश्वर हर जगह व्याप्त हैं और सभी मनुष्यों के भीतर मौजूद हैं। जब तक मनुष्य की साँस (जीवन) चलती है, तब तक ईश्वर उनकी आत्मा में विद्यमान हैं।

प्रश्न 11: कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से क्यों की ?
उत्तर: कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से की है क्योंकि सामान्य हवा में स्थिति परिवर्तन की क्षमता नहीं होती। परन्तु जब हवा तीव्र गति से आँधी के रूप में चलती है, तब स्थिति बदल जाती है। आँधी में वह क्षमता होती है कि वह सब कुछ उड़ा सके। ज्ञान में भी प्रबल शक्ति होती है, जिससे वह मनुष्य के अंदर व्याप्त अज्ञानता के अंधकार को दूर कर देती है।

प्रश्न 12: ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर: ज्ञान की आँधी का मनुष्य के जीवन पर यह प्रभाव पड़ता है कि उसके सारी शंकाए और अज्ञानता का नाश हो जाता है। वह मोह के सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है। मन पवित्र तथा निश्छल होकर प्रभु भक्ति में तल्लीन हो जाता है।

प्रश्न 13: भाव स्पष्ट कीजिए –
(क) ‘हिति चित्त की द्वै थूँनी गिराँनी, मोह बलिंडा तूटा।’
(ख) ‘आँधी पीछै जो जल बूठा, प्रेम हरि जन भींनाँ।’
उत्तर:
(क) यहाँ ज्ञान की आँधी के कारण मनुष्य के मन पड़े प्रभाव के फलस्वरूप मनुष्य के स्वार्थ रूपी दोनों खंभे तूट गए तथा मोह रूपी बल्ली भी गिर गई। इससे कामना रूपी छप्पर नीचे गिर गया। उसके मन की बुराईयाँ नष्ट हो गई और उसका मन साफ़ हो गया।
(ख) ज्ञान रूपी आंधी के पश्चात भक्ति रूपी जल की वर्षा हुई जिसके प्रेम में हरी के सब भक्त भीग गए। अर्थात् ज्ञान की प्राप्ति के बाद मन शुद्ध हो जाता है।


रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 14: संकलित साखियों और पदों के आधार पर कबीर के धार्मिक और सांप्रदायिक रदायिक सद्भाव सम्बन्धी विचारों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: 

  • कबीर ने अपने विचारों दवारा जन मानस की आँखों पर धर्म तथा संप्रदाय के नाम पर पड़े परदे को खोलने का प्रयास किया है। 
  • उन्होंने हिंदु- मुस्लिम एकता का समर्थन किया तथा धार्मिक कुप्रथाओं जैसे मूर्तिपूजा का विरोध किया है। ईश्वर मंदिर, मस्जिद तथा गुरुद्वारे में नहीं होते हैं बल्कि मनुष्य की आत्मा में व्याप्त हैं। 
  • कबीर ने हर एक मनुष्य को किसी एक मत, संप्रदाय, धर्म आदि में न पड़ने की सलाह दी है। 
  • ये सारी चीजें मनुष्य को राह से भटकाने तथा बँटवारे की और ले जाती है अत: कबीर के अनुसार हमें इन सब चक्करों में नहीं पड़ना चाहिए। 
  • मनुष्य को चाहिए की वह निष्काम तथा निश्छल भाव से प्रभु की आराधना करें।

भाषा अध्यन

प्रश्न 15: निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए:
पखापखी, अनत, जोग, जुगति, बैराग, निरपख
उत्तर:
1. पखापखी – पक्ष-विपक्ष
2. अनत – अन्यत्र
3. जोग – योग
4. जुगति – युक्ति
5. बैराग – वैराग्य
6. निरपख – निष्पक्ष

06. मेरे बचपन के दिन – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न 1: ‘मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।’ इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि –
 (क) उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी ?
 (ख) लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं ?
उत्तर

(क) उस समय लड़कियों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उस समय का समाज पुरुष प्रधान था। पुरुषों को समाज में ऊँचा दर्जा प्राप्त था। पुरुषों के सामने नारी को अत्यंत हीन दृष्टि से देखा जाता था। इसका एक कारण समाज में व्याप्त दहेज-प्रथा भी थी। इसी कारण से लड़कियों के जन्म के समय या तो उसे मार दिया जाता था या तो उन्हें बंद कमरे की चार दीवारी के अंदर कैद करके रखा जाता था। शिक्षा को पाने का अधिकार भी केवल लड़कों को ही था। कुछ उच्च वर्गों की लड़कियाँ ही शिक्षित थी परन्तु उसकी संख्या भी गिनी चुनी थी। ऐसी लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
(ख) आज लड़कियों के जन्म के संबंध में स्थितियाँ थोड़ी बदली हैं। आज शिक्षा के माध्यम से लोग सजग हो रहें हैं। लड़का-लड़की का अंतर धीरे-धीरे हो रहा हैं। आज लड़कियों को लड़कों की तरह पढ़ाया-लिखाया भी जाता है। परंतु लड़कियों के साथ भेदभाव पूरी-तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज भ्रूण-हत्याएँ हो रही हैं, इस लिए सरकार कड़े कानून बना रहीं है।लड़कियों के जन्म को रोकने के लिए हो रही हैं। देश में लड़के-लड़कियों का अनुपात बिगड़ता जा रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि महानगरों में सबसे कम लड़कियाँ चंडीगढ़ में हैं, जो देश का एक उन्नत शहर माना जाता है। वहाँ न शिक्षा कम है, न धन-वैभव। वास्तव में लड़कियों के जन्म को रोकना वहाँ के निवासियों की मानसिकता पर निर्भर करता है। 

प्रश्न 2: लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाई ?
उत्तर
लेखिका को बचपन में उर्दू पढने के लिए मौलवी रखा गया परन्तु उनकी इसमें रूचि न होने के कारण वो उर्दू-फारसी नही सीख  पायी।

प्रश्न 3: लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ?
 उत्तर

लेखिका की माता अच्छे संस्कार वाली महिला थीं। वे धार्मिक स्वभाव की महिला थीं। वे पूजा-पाठ किया करती थीं। वे ईश्वर में आस्था रखती थीं। सवेरे “कृपानिधान पंछी बन बोले” पद गाती थीं। प्रभाती गाती थीं। शाम को मीरा के पद गाती थीं। वे लिखा भी करती थीं। लेखिका ने अपनी माँ के हिंदी-प्रेम और लेखन गायन के शौक का वर्णन किया है। उन्हें हिंदी तथा संस्कृत का अच्छा ज्ञान था। इसलिए इन दोनों भाषाओं का प्रभाव महादेवी पर भी पड़ा।

प्रश्न 4: जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसे क्यों कहा है ?
 उत्तर

पहले हिंदु- मुस्लिम को लेकर इतना भेदभाव नहीं था। हिंदु और मुस्लिम दोनों एक ही देश में प्रेम पूर्वक रहते थे। स्वतंत्रता के पश्चात् हिंदु और मुस्लिम संबन्धों में बदलाव आ गया है। आपसी फूट के कारण देश दो हिस्सों में बँट गया − पाकिस्तान मुस्लिम प्रधान देश के रुप में प्रतिष्ठित है तथा हिंदुस्तान में हिंदुओं का वर्चस्व कायम है। ऐसी परिस्थिति में हिंदु तथा मुस्लिम दो अलग-अलग धर्मों के लोगों का प्रेमपूर्वक रहना स्वप्न समान प्रतीत होता है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 5 : ज़ेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। ज़ेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं / होते तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती ?
 उत्तर

जेबुन्निसा के स्थान पर अगर मैं महादेवी के लिए कुछ काम करती तो मैं संबंधों के आधार पर उनसे अपेक्षा करती। अगर मैं नौकरानी के रूप में उनकी सहायता करती, तो उनसे मजदूरी के साथ-साथ प्रेम  और आदर की भी अपेक्षा करती। अगर सखी के रूप में उनकी सहायता करती तो बस उनसे प्रेम और स्नेह चाहती। यदि उनकी प्रशंसिका या कनिष्ठ साथिन के रूप में सहायता करती तो कभी-कभी उनसे कविता भी सुन लेती तथा पढ़ाई में सहायता ले लेती।

प्रश्न 6 : महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे / करेंगी ?
 उत्तर

हमारा भी देश के प्रति कई कर्तव्य हैं। अगर मुझे भी देशहित या आपदा निवारण के सहयोग में अपने पुरस्कार को त्याग करना पड़े तो इसमें मुझे प्रशन्नता होगी। आखिर मेरा कुछ तो देश या लोगो के काम आ पाया। देश प्रेम के आगे पुरस्कार का कोई मूल्य नहीं।

प्रश्न 7 : लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर
लेखिका “महादेवी वर्मा” के छात्रावास का परिवेश बहुभाषी था। कोई हिंदी बोलता था तो किसी की भाषा उर्दू थी। वहाँ कुछ मराठी लड़किया भी थीं, जो आपस में मराठी बोलती थीं। अवध की लड़कियाँ आपस में अवधी बोलती थीं। बुंदेलखंड की लड़कियाँ बुंदेली में बात करती थीं। अलग-अलग प्रांत के होने के बावजूद भी वे आपस में हिंदी में ही बातें करती थीं। छात्रावास में उन्हें हिंदी तथा उर्दू दोनों की शिक्षा दी जाती थी।

प्रश्न 8 : महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की कोई स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
उत्तर:
हमारे विद्यालय में गणतंत्र दिवस की पूर्ण संध्या पर ही गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था। उसमें मुझे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता ‘हम जंग न होने देंगे’ का पाठ करना था। मैंने अपने हिंदी अध्यापक की देख-रेख में इसका अभ्यास तो किया था पर मन में भय-सा बना था। वैसे भी विद्यालय के सदस्यों और छात्र-छात्राओं के बीच इस तरह कविता पढ़ने का मेरा पहला अवसर था। कार्यक्रम शुरू होने पर जब उद्घोषक कोई नाम बुलाती तो दिल धड़क उठता। जब मेरा नाम बुलाया गया तो काँपते पैरों से मंच पर गया। पहली दो लाइनें पढ़ते ही आत्मविश्वास जाग उठा। फिर जब कविता पूरी की तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुझे एक सुखद अनुभूति हो रही थी।

प्रश्न 9: महादेवी ने कवि सम्मेलनों में कविता पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपने जो बेचैनी अनुभव की होगी, उस पर डायरी का एक पृष्ठ लिखिए।
उत्तर: 

26 जनवरी, 20–

आज विद्यालय में गणतंत्र दिवस का आयोजन है। सभी छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त सैकड़ों अतिथि भी मंडप में पधारे हैं। सामने मेरे माता-पिता तथा अनेक परिचित जन बैठे हैं। मैं मंच के पीछे अपनी बारी की प्रतीक्षा में बैठी हूँ। मुझे कविता बोलनी है। हालाँकि मैंने पहले भी मंच पर कविता बोली है, परंतु जाने क्यों, आज मेरा दिल धक्-धक् कर रहा है। मेरे शरीर में हरकत हो रही है। जैसे-जैसे मेरे बोलने का समय निकट आ रहा है, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही है। अब मैं न तो मंच का कोई कार्यक्रम सुन पा रही हूँ, न और किसी की बात सुन रही हूँ। मेरा सारा ध्यान अपना नाम सुनने में लगा है। डर भी लग रहा है कि कहीं मैं कविता भूल न जाऊँ। इसलिए मैंने लिखित कविता हाथ में ले ली है। यदि भूलने लगूंगी तो इसका सहारा ले लूंगी। लो, मेरा नाम बुल चुका है। मैं स्वयं को सँभाल रही हूँ। मेरे कदमों में आत्मविश्वास आ गया है। अब मैं नहीं भूलूंगी।

भाषा अध्यन
प्रश्न 10. पाठ से निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द ढूँढ़कर लिखिए – विद्वान, अनंत, निरपराधी, दंड, शांति।
 उत्तर

1.  विद्वान – मूर्ख  2. अनंत – संक्षिप्त

3. निरपराधी – अपराधी

4. दंड – पुरस्कार

5. शांति – अशांति

प्रश्न 11. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग/प्रत्यय अलग कीजिए और मूल शब्द बताइए –
 निराहारी, साम्प्रदायिकता, अप्रसन्नता, अपनापन, किनारीदार, स्वतंत्रता
उत्तर-
                                          उपसर्ग              प्रत्यय              मूल शब्द
निराहारी                  –            निऱ                   ई                    आहार
सांप्रदायिकता           –             x                    इक, ता              संप्रदाय
अप्रसन्नता                –            अ                    ता                     प्रसन्न
अपनापन                –             x                    पन                    अपना
किनारीदार              –             x                   दार                    किनारी
स्वतंत्रता                  –            स्व                  ता                      तंत्र। 

प्रश्न 12. निम्नलिखित उपसर्ग-प्रत्ययों की सहायता से दो -दो शब्द लिखिए –
 उपसर्ग – अन्, अ, सत्, स्व, दुर्
 प्रत्यय – दार, हार, वाला, अनीय
 उत्तर

1. अन् – अन्वेषण, अनशन 2. अ – असत्य, अन्याय
3. सत् – सत्चरित्र, ,सत्कर्म
4. स्व – स्वराज, स्वाधीन
5. दुर् – दुर्जन, दुर्व्यवहार

प्रत्यय −
1. दार – किनारेदार, दुकानदार
2. हार – पालनहार, तारनहार
3. वाला – फलवाला, मिठाईवाला
4. अनीय – दर्शनीय, आदरनीय

प्रश्न 13. पाठ में आए सामासिक पद छाँटकर विग्रह कीजिए –
 पूजा-पाठ पूजा और पाठ

उत्तर
(1) पूजा-पाठ = पूजा और पाठ
(2) उर्दू-फ़ारसी  = उर्दू और फ़ारसी
(3) पंचतंत्र  = पाँच तंत्रो से बना है जो
(4) दुर्गा-पूजा = दुर्गा की पूजा
(5) छात्रावास  = छात्रों का आवास

05. प्रेमचंद के फटे जूते – अध्याय समाधान

प्रश्न-अभ्यास  

प्रश्न 1: हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्द चित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती हैं ?
उत्तर: प्रेमचंद के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएं:

  • प्रेमचंद सादगीयुक्त जीवन जीते थे। वे प्रदर्शनवाद से दूर रहते थे।
  • प्रेमचंद एक उच्च विचार वाले व्यक्ति थे।
  • प्रेमचंद एक सर्वोत्तम साहित्यकार के साथ एक स्वाभिमानी व्यक्ति भी थे।
  • वे हर मुश्किल परिस्थिति का बेधड़क सामना करते थे।
  • उनका व्यक्तित्व संघर्षशील था।


प्रश्न 2: सही कथन के सामने (✓) का निशान लगाइए –
(क) बाएँ पाँव का जूता ठीक है मगर दाहिने जूते में बड़ा छेद हो गया है जिसमें से अँगुली बाहर निकल आई है। 
(ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए। 
(ग) तुम्हारी यह व्यंग्य मुसकान मेरे हौसले बढ़ाती है। 
(घ) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ अँगूठे से इशारा करते हो ?

उत्तर: (ख) लोग तो इत्र चुपड़कर फोटो खिंचाते हैं जिससे फोटो में खुशबू आ जाए। (✓)

प्रश्न 3: नीचे दी गई पंक्तियों में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए – 
(क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं।
(ख) तुम परदे का महत्व नहीं जानते, हम पर्दे पर कुर्बान हो रहे हैं।

(ग) जिसे तुम घृणित समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो ?
उत्तर: (क) यहाँ जूतों का आशय धन से है और टोपी प्रतिष्ठा, मर्यादा और गौरव का प्रतीक है। इज़्ज़त का महत्व धन, संपत्ति से ऊँचा होता है। परन्तु आज समाज में संपत्ति को इज़्ज़त से ऊपर रखा जाता है और इसी कारण समृद्ध लोगों को हमेशा से ही धनवानों के आगे झुकना पड़ा है। 
(ख) प्रेमचंद ने अपनी वास्तविकता को कभी परदे में नहीं रखा, अर्थात कभी ढकने का प्रयास नहीं किया। वे  जैसे असल ज़िन्दगी में थे, लोगों से मिलते वक़्त भी वैसे ही थे। वे भीतर – बाहर एक सामान थे। एक ओर प्रेमचंद को कोई चिंता नहीं थी कि लोग उनके फ़टे जूतों के बारे क्या सोचेंगे और दूसरी ओर कुछ लोग अपनी कमियों को छिपाने के लिए तरह – तरह की चीज़ें करते हैं।
(ग) लेखक कहता है-प्रेमचंद ने समाज में जिसे भी घृणा-योग्य समझा, उसकी ओर हाथ की अंगुली से नहीं, बल्कि अपने पांव की अंगुली से इशारा किया। अर्थात् उसे अपनी ठोकरों पर रखा, अपने जूते की नोक पर रखा, उसके विरुद्ध संघर्ष किए रखा।

प्रश्न 4: पाठ में एक जगह लेखक सोचता है कि ‘फोटो खिंचाने कि अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी ?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि ‘नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी।’ आपके अनुसार इस संदर्भ में प्रेमचंद के बारे में लेखक के विचार बदलने की क्या वजहें हो सकती हैं ?
उत्तर: 
मेरे विचार से प्रेमचंद के बारे में लेखक का विचार यह रहा होगा कि समाज की परंपरा-सी है कि वह अच्छे अवसरों पर पहनने के लिए अपने वे कपड़े अलग रखता है, जिन्हें वह अच्छा समझता है। प्रेमचंद के कपड़े ऐसे न थे जो फ़ोटो खिंचाने लायक होते। ऐसे में घर पहनने वाले कपड़े और भी खराब होते। लेखक को तुरंत ही ध्यान आता है कि प्रेमचंद सादगी पसंद और आडंबर तथा दिखावे से दूर रहने वाले व्यक्ति हैं। उनका रहन-सहन दूसरों से अलग है, इसलिए उसने टिप्पणी बदल दी।

प्रश्न 5: आपने यह व्यंग्य पढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बात आकर्षित करती है ?
उत्तर: 
मुझे इस व्यंग्य की सबसे आकर्षक बात लगती है-विस्तारण शैली। लेखक एक संदर्भ से दूसरे संदर्भ की ओर बढ़ता चला जाता है। वह बूंद में समुद्र खोजने का प्रयास करता है।। जैसे बीज में से क्रमश: अंकुर का, फिर पल्लव का, फिर पौधे और तने का; तथा अंत में फूल-फल का विकास होता चला जाता है, उसी प्रकार इस निबंध में प्रेमचंद के फटे जूते से बात शुरू होती है। वह बात खुलते-खुलते प्रेमचंद के पूरे व्यक्तित्व को उद्घाटित कर देती है। बात से बात निकालने की यह व्यंग्य शैली बहुत आकर्षक बन पड़ी है।

प्रश्न 6: पाठ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग किन संदर्भो को इंगित करने के लिए किया गया होगा ?
उत्तर: टीला शब्द ‘राह’ आनेवाली बाधा का प्रतीक है। जिस तरह चलते-चलते रास्ते में टीला आ जाने पर व्यक्ति को उसे पार करने के लिए विशेष परिश्रम करते हुए सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है, उसी प्रकार सामाजिक विषमता, छुआछूत, गरीबी, निरक्षरता, अंधविश्वास आदि भी मनुष्य की उन्नति में बाधक बनती हैं। इन्हीं बुराइयों के संदर्भ में ‘टीले’ शब्द का प्रयोग हुआ है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 7: प्रेमचंद के फटे जूते को आधार बनाकर परसाई जी ने यह व्यंग्य लिखा है। आप भी किसी व्यक्ति की पोशाक को आधार बनाकर एक व्यंग्य लिखिए।
उत्तर:
 हमारे एक दूर के रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। अक्सर नए कपडे, संपत्ति और चकाचौंध वाली वस्तुओं को लेकर दिखावा करते हैं। वे हमारे घर, राजस्थान के एक गांव आए।। अब हम ठहरे सादा जीवन जीने वाले लोग। उन्होंने हमारे कपड़ों को लेकर एवं हमारे गांव में मिलते पोशाकों को लेकर मज़ाक उड़ाया परन्तु अगले ही दिन उनके बच्चों को हमारे गांव के बाजार में एक पोशाक  पसंद आ गई और लेने की ज़िद करने लगे और उनके माता – पिता को वह खरीदनी पड़ी। एक ओर उन्होंने मज़ाक बनाया और अब उसी पोशाक को खरीदा। 

प्रश्न 8: आपकी दृष्टि में वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?
उत्तर: 
आज की दुनिया दिखावे के प्रति ज़्यादा जागरूक है। लोग आपका सम्मान आपकी वेश-भूषा से करते हैं, अर्थात व्यक्ति का मान-सम्मान और चरित्र भी वेश-भूषा पर निर्भर करता है। आजकल सादगी से जीवन जीने वालों को पिछड़ा  समझा जाता है। 

भाषा अध्यन

प्रश्न 9: पाठ में आए मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:

  • व्यंग्य – मुस्कान (मज़ाक उडाना): रोहन ने सीमा को व्यंगय भरी मुस्कान से देखा।
  • अंगुली का इशारा (कुछ बताने की कोशिश): राम ने श्याम को अंगुली का इशारा किया।
  • अटक जाना (स्थिर हो जाना): वृन्दावन को देख श्यामा की नज़र अटक गई।
  • बाजू से निकलना (कठिनाइयों से दूर भागना): वीर मुश्किल वक्त में डटकर सामना करने के बजाय बाजू से निकल गया।


प्रश्न 10: प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने जिन विशेषणों का उपयोग किया है उनकी सूची बनाइए।
उत्तर: 
प्रेमचंद के व्यक्तित्व को उभारने के लिए लेखक ने निम्नलिखित विशेषणों का उपयोग किया है:

  • महान कलाकार 
  • उपन्यास सम्राट
  • जनता के लेखक
  • साहित्यिक पुरखे
  • युग – प्रवर्तक

पाठेतर सक्रियता

प्रश्न: महात्मा गांधी भी अपनी वेशभूषा के प्रति एक अलग सोच रखते थे, इसके पीछे क्या कारण रहे होंगे, पता लगाइए।
उत्तर: 
महात्मा गाँधी जीवन में सादगी को बहुत महत्त्व देते थे। वे इसलिए भी सादे और कम कपड़े पहना करते थे क्योंकि भारत के बहुत से गरीब लोगों के पास तन ढकने के लिए वस्त्र नहीं थे। वे कहा करते थे-इस देश में कुछ लोगों के पास एक भी वस्त्र नहीं है। तब कीमती और अधिक वस्त्र रखना उनके साथ अन्याय करना है।

प्रश्न: महादेवी वर्मा ने ‘राजेंद्र बाबू’ नामक संस्मरण में पूर्व राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद का कुछ इसी प्रकार चित्रण किया गया है, उसे पढ़िए।
उत्तर: 
छात्र ‘राजेंद्र बाबू’ संस्मरण पुस्तकालय से लेकर पढ़ें।

प्रश्न: अमृतराय लिखित प्रेमचंद की जीवनी ‘प्रेमचंद-कलम का सिपाही’ पुस्तक पढिए।
उत्तर: 
छात्र प्रेमचंद की जीवनी स्वयं पढ़ें।

04. साँवले सपनों की याद – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1:  किस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया ? 
उत्तर. एक बार बचपन में सालिम अली की एयरगन से एक गौरैया घायल होकर गिर पड़ी । इस घटना ने सालिम अली के जीवन की दिशा को बदल दिया ।  वे गौरैया की देखभाल, सुरक्षा और खोजबीन में जुट गए | उसके बाद उनकी रूचि पूरे पक्षी-संसार की और मुड़ गयी। वे पक्षी-प्रेमी बन गए।


प्रश्न 2: सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्याबरण से संबंधित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं?
उत्तर. 
सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के सामने केरल की साइलेंट-वैली संबन्धी खतरों की बात उठाई होगी। उस समय केरल पर रेगिस्तानी हवा के झोंको का खतरा मंडरा रहा था। वहाँ का पर्यावरण दूषित हो रहा था। प्रधानमंत्री को वातावरण की सुरक्षा का ध्यान था। पर्यावरण के दूषित होने के खतरे के बारे में सोचकर उनकी आँखे नम हो गई।


प्रश्न 3:  लॉरेंस की पत्नी फ्रीदा ने ऐसा क्यों कहा होगा की “मेरी छत पर बैठने वाली गोरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है?”
उत्तर. 
लॉरेंस की पत्नी फ्रीडा जानती थी कि लॉरेंस को गौरैया से बहुत प्रेम था। वे अपना काफी समय गौरैया के साथ बिताते थे। गौरैया भी उनके साथ अंतरंग साथी जैसा व्यवहार करती थी। उनके इसी पक्षी-प्रेम को उद्घाटित करने के लिए उन्होंने यह वाक्य कहा।

प्रश्न 4: आशय स्पष्ट कीजिए –
(क) वो लारेंस की तरह, नैसर्गिक जिंदगी का प्रतिरूप बन गए थे।
(ख) कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा !
(ग) सलीम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे।
उत्तर 

(क) लॉरेंस का जीवन बहुत सीधा-साधा था, प्रकृति के प्रति उनके मन में जिज्ञासा थी। सालिम अली का व्यक्तित्व भी लॉरेंस की तरह ही सुलझा तथा सरल था।
(ख) यहाँ लेखक का आशय है कि मृत व्यक्ति को कोई जीवित नहीं कर सकता। हम चाहे कुछ भी कर लें पर उसमें कोई हरकत नहीं ला सकते।
(ग) सलीम अली प्रकृति के खुले संसार में खोंज करने के लिए निकले । उन्होंने स्वयं को किसी सीमा में कैद नहीं किया । वे एक टापू की तरह किसी स्थान विशेष या पशु-पक्षी विशेष में सीमित नहीं थे । उन्होंने अथाह सागर की तरह प्रकृति में जो-जो अनुभव आयी, उन्हें सँजोया । उनका कार्यक्षेत्र बहुत विशाल था ।

प्रश्न 5: इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा-शैली की चार विशेषताएँ बताइए।
उत्तर. 

लेखक की भाषा-शैली की विशेषताएँ:

  • इनकी शैली चित्रात्मक है। पाठ को पढ़ते हुए इसकी घटनाओं का चित्र उभर कर हमारे सामने आता है।
  • लेखक ने भाषा में हिंदी के साथ-साथ कहीं-कहीं उर्दू तथा कहीं-कहीं अंग्रेज़ी के शब्दों का प्रयोग भी किया है।
  • इनकी भाषा अत्यंत सरल तथा सहज है
  • अपने मनोभावों को प्रस्तुत करने के लिए लेखक ने अभिव्यक्ति शैली का सहारा लिया है।

प्रश्न 6: इस पाठ में लेखक ने सलीम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर. 

  • सलीम अली अनन्य प्रकृति-प्रेमी थे। प्रकृति तथा पक्षियों के प्रति उनके मन में कभी न खत्म होने वाली जिज्ञासा थी। लेखक के शब्दों में, “उन जैसा ‘बर्ड-वाचर’ शायद कोई हुआ है।
  • “उन्हें दूर आकाश में उड़ते पक्षियों की खोंज करने का तथा उनकी सुरक्षा के उपाय खोजने का असीम चाव था । वे स्वभाव से परम घुमक्कड़ और यायावर थे । 
  • लम्बी यात्राओं ने उनके शरीर को कमज़ोर कर दिया था। व्यवहार में वे सरल-सीधे और भोले इंसान थे। वे बाहरी चकाचौंध और विशिष्टता से दूर थे।

प्रश्न 7:  “साँवले सपनों की याद” शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिये।
उत्तर. 

  • “साँवले सपनों की याद” एक रहस्यात्मक शीर्षक है। यह रचना लेखक जाबिर हुसैन द्वारा अपने मित्र सलीम अली की याद में लिखा गया संस्मरण है। साँवले सपने” मनमोहक इच्छाओं के प्रतीक हैं।  ये सपने प्रसिद्द पक्षी-प्रेमी सलीम अली से संबंधित हैं।  
  • सलीम अली जीवन-भर सुनहरे पक्षियों की दुनिया में खोए रहे।  वे उनकी सुरक्षा और खोंज के सपनों में खोए रहे।  ये सपने हर किसी को नहीं आते।  हर कोई पक्षी-प्रेम में इतना नहीं डूब सकता।  इसलिए आज जब सलीम अली नहीं रहे तो लेखक को उन साँवले सपनों की याद आती है जो सलीम अली की आँखों में बसते थे।
  • ये शीर्षक सार्थक तो है किन्तु गहरा रहस्यात्मक है।  चन्दन की तरह घिस-घिस कर इसके अर्थ तथा प्रभाव तक पहुँचा जा सकता है।

रचना और अभिव्यक्तिप्रश्न 8:  प्रस्तुत पाठ सलीम अली की पर्यावरण के प्रति चिंता को भी व्यक्त करता है। पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं ?

उत्तर.
पर्यावरण को बचाने के लिए हम निम्नलिखित योगदान दे सकते हैं:

  • हमें पेड़ों की कटाई को रोकना होगा।
  • वायु को शुद्ध करने के लिए पेड़-पौधे लगाने चाहिए।
  • प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का कम-से-कम प्रयोग करेंगे।
  • जल प्रदूषित नहीं होने देना चाहिए।
  • हमें आस पास के वातावरण को साफ़ सुथरा रखने के लिए कूड़ेदान का प्रयोग करना चाहिये।