04. मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय – अध्याय समाधान

बोध-प्रश्न 

प्रश्न 1: लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे? 
उत्तर: लेखक को तीन-तीन जबरदस्त हार्ट अटैक हुए थे, उनकी नब्ज़ और साँस भी बंद हो गई थी। डॉक्टरों ने तो उन्हें मृत घोषित कर दिया था पर डॉक्टर बोर्जेस के द्वारा दिए गए 900 वॉल्ट के शॉक से वह रिवाइव तो हो गए पर 60% हार्ट सदा के लिए नष्ट हो गया और शेष चालीस प्रतिशत पर तीन अवरोधों के साथ कोई भी डॉक्टर ऑपरेशन करने से हिचक रहे थे।

प्रश्न 2: ‘किताबों वाले कमरे’ में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी? 
उत्तर: लेखक को बचपन से ही किताबें पढ़ने और इकट्ठा करने का बड़ा शौक था। उन्होंने अपने घर के एक कमरे को छोटा-सा निजी पुस्तकालय बना लिया था। इस पुस्तकालय में बहुत सारे लेखकों की अलग-अलग तरह की किताबें थी। जैसे पुरानी कहानियों में राजा के प्राण तोते में होते थे, वैसे ही लेखक के प्राण इन किताबों में बसे थे। इसी कारण लेखक ने बेडरूम में न जाकर ‘किताबों वाले कमरे’ में रहने का निर्णय लिया।

प्रश्न 3: लेखक के घर कौन-कौन-सी पत्रिकाएँ आती थीं? 
उत्तर: लेखक के घर आर्यमित्र साप्ताहिक, वेदोदम, सरस्वती, गृहणी, बालसखा और चमचम (बाल पत्रिकाएँ) आती थीं।

प्रश्न 4: लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा?
उत्तर: लेखक के पिता नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाएँ मँगाते थे। लेखक के लिए खासतौर पर दो बाल पत्रिकाएँ बालसखा और चमचम आती थीं। इनमें राजकुमारों, दानवों, परियों आदि की कहानियाँ और रेखाचित्र होते थे। इससे लेखक को पत्रिकाएँ पढ़ने का शौक लग गया। पाँचवीं कक्षा में प्रथम आने पर उन्हें अंग्रेज़ी की दो किताबें पुरस्कार में मिलीं, जिन्होंने उन्हें नई दुनिया से परिचित कराया। पिताजी की प्रेरणा से उन्होंने किताबें इकट्ठी करना शुरू कर दिया।

प्रश्न 5: माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर क्यों चिंतित रहती थी?
उत्तर: लेखक स्कूल की किताबों को छोड़कर अन्य पत्रिकाओं को पढ़ने में अधिक रुचि लेने लगे थे। स्कूल की किताबें पढ़ने में उनका मन कम लगता था, जिससे माँ चिंतित हो गईं। उन्हें लगा कि कहीं लेखक साधु बनकर घर छोड़कर न चले जाएँ।

प्रश्न 6: स्कूल से इनाम में मिली अंग्रेज़ी की दोनों पुस्तकों ने किस प्रकार लेखक के लिए नयी दुनिया के द्वार खोल दिए?
उत्तर: पाँचवीं कक्षा में प्रथम आने पर लेखक को अंग्रेज़ी की दो किताबें इनाम में मिलीं। पहली किताब में दो बच्चे घोंसले की खोज में थे और विभिन्न पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते थे । दूसरी किताब, ‘ट्रस्टी द रग’, पानी के जहाजों के बारे में थी। एक ओर था पंछियों से भरा आसमान और दूसरी ओर गहरा सागर। इन दोनों किताबों ने लेखक के लिए एक नयी दुनिया के द्वार खोल दिए।

प्रश्न 7: ‘आज से यह खाना तुम्हारी अपनी किताबों का। यह तुम्हारी लाइब्रेरी है’ − पिता के इस कथन से लेखक को क्या प्रेरणा मिली?
उत्तर: लेखक को जब स्कूल से इनाम में दो अंग्रेजी की किताबें मिलीं, तो उनके पिता ने अलमारी का एक खाना खाली करके वे किताबें वहाँ रख दीं और कहा कि आज से यह तुम्हारी अपनी लाइब्रेरी है। लेखक को पहले से ही किताबें और पत्रिकाएँ पढ़ने में बहुत रूचि थी। पिता के इस कथन से उन्हें किताबें जमा करने की प्रेरणा मिली, जिसके कारण भविष्य में लेखक अपने एक कमरे में एक अच्छा-सा पुस्तकालय बनाने में सफ़ल हुए।

प्रश्न 8: लेखक द्वारा पहली पुस्तक खरीदने की घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: लेखक के पिता की मृत्यु के बाद आर्थिक तंगी के कारण अपने शौक की किताबें खरीदना असंभव था। एक ट्रस्ट से योग्य परंतु असहाय छात्रों को पाठ्यपुस्तक खरीदने के पैसे मिलते थे। इससे लेखक सेकंड-हैंड किताबें खरीदते थे। इंटरमीडिएट पास करके, जब लेखक ने किताबें बेचकर बी.ए. की सेकंड-हैंड बुकशॉप से किताबें खरीदी तो दो रूपए बच गए। उन दिनों ‘देवदास’ फिल्म लगी थी, जिसका गाना “दुःख के दिन बीतत नाही” लेखक अक्सर गुनगुनाते रहते थे, तो एक दिन उनकी माँ ने उन्हें समझाया कि दुख के दिन बीत जाएँगे। लेखक ने जब अपनी माँ को बताया कि यह एक फिल्म का गाना है, तो माँ ने फिल्में नापसंद होते हुए भी लेखक को ‘देवदास’ देखने की अनुमति दे दी। जब लेखक फिल्म देखने जा रहे थे तो पास ही एक दुकान पर ‘देवदास’ पुस्तक रखी थी।  फिल्म देखने की जगह लेखक ने दस आने में वह पुस्तक खरीद ली और बचे हुए पैसे माँ को दे दिए। इस प्रकार, लेखक ने अपनी पहली पुस्तक खरीदी।

प्रश्न 9: ‘इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा-भरा महसूस करता हूँ’ − का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
 लेखक अपनी बीमारी के समय अपने निजी पुस्तकालय में ही रह रहे थे। वहाँ उनके द्वारा सहेजी हज़ारों किताबें थीं। आज उनके पास हिंदी और अंग्रेजी की अलग-अलग विषयों पर ढेरों किताबें थीं। उन्हें देखकर लेखक को अपनी पुरानी यादें याद आतीं कि कितनी मेहनत से उन्होंने एक-एक किताब संजोयी थी। इन सब किताबों और इतने अलग-अलग विषयों और लेखकों के बीच वह खुद को अकेला न पाते, अपितु भरा-भरा महसूस करते।

03. कल्लू कुम्हार की उनाकोटी – अध्याय समाधान

बोध-प्रश्न 

प्रश्न 1: ‘उनाकोटी’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है? 
उत्तर: 
उनाकोटी का अर्थ है-एक कोटी, अर्थात् एक करोड़ से एक कम। इस स्थान पर भगवान शिव की एक करोड़ से एक कम मूर्तियाँ हैं। इतनी अधिक मूर्तियाँ एक ही स्थान पर होने के कारण यह स्थाने प्रसिद्ध है।

प्रश्न 2: पाठ के संद में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए। 
उत्तर: 
उनाकोटी में पहाड़ों को अंदर से काटकर विशाल आधार मूर्तियाँ बनाई गई हैं। अवतरण के धक्के से कहीं पृथ्वी धंसकर पाताल लोक में न चली जाए, इसके लिए शिव को राजी किया गया कि वे गंगा को अपनी जटाओं में उलझा लें और बाद में धीरे-धीरे बहने दें। शिव का चेहरा एक समूची चट्टान पर बना हुआ है। उनकी जटाएँ दो पहाड़ों की चोटियों पर फैली हैं। यहाँ पूरे साल बहने वाला जल प्रपात है, जिसे गंगा जल की तरह ही पवित्र माना जाता है।

प्रश्न 3: कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?
उत्तर: 
स्थानीय आदिवासियों के अनुसार कल्लू कुम्हार ने ही उनाकोटी की शिव मूर्तियों का निर्माण किया है। वह शिव का भक्त था। वह उनके साथ कैलाश पर्वत पर जाना चाहता था। भगवान शिव ने शर्त रखी कि वह एक रात में एक करोड़ शिव मूर्तियों का निर्माण करे। सुबह होने पर एक मूर्ति कम निकली। इस प्रकार शिव ने उसे वहीं छोड़ दिया। इसी मान्यता के कारण कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से जुड़ गया।

प्रश्न 4: ‘मेरी रीढ़ में एक झुझुरी-सी दौड़ गई’ −लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है?
उत्तर: 
लेखक राजमार्ग संख्या 44 पर टीलियामुरा से 83 किलोमीटर आगे मनु नामक स्थान पर शूटिंग के लिए जा रहा था। इस यात्रा में वह सी.आर.पी.एफ. की सुरक्षा में चल रहा था। लेखक और उसका कैमरा मैन हथियार बंद गाड़ी में चल रहे। थे। लेखक अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसके मन में डर के लिए जगह न थी। तभी एक सुरक्षा कर्मी ने निचली पहाड़ियों पर रखे दो पत्थरों की ओर ध्यान आकृष्ट करके कहा कि दो दिन पहले उनका एक जवान विद्रोहियों द्वारा मार डाला गया था। यह सुनकर लेखक की रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई।

प्रश्न 5: त्रिपुरा ‘बहुधार्मिक समाज’ का उदाहरण कैसे बना?
उत्तर: त्रिपुरा में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग बाहरी क्षेत्रों से आकर बस गए हैं। इस प्रकार यहाँ अनेक धर्मों का समावेश हो गया है। तब से यह राज्य बहुधार्मिक समाज का उदाहरण बन गया है।

प्रश्न 6: टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ? समाज कल्याण के कार्यों में उनका क्या योगदान था?
उत्तर: 
टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय जिन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ उनमें एक हैं- हेमंत कुमार जमातिया, जो त्रिपुरा के प्रसिद्ध लोक गायक हैं। जमातिया 1996 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत किए जा चुके हैं। अपनी युवावस्था में वे पीपुल्स लिबरेशन आर्गनाइजेशन के कार्यकर्ता थे, पर अब वे चुनाव लड़ने के बाद जिला परिषद के सदस्य बन गए हैं।
लेखक की मुलाकात दूसरी प्रमुख हस्ती मंजु ऋषिदास से हुई, जो आकर्षक महिला थीं। वे रेडियो कलाकार होने के साथसाथ नगर पंचायत की सदस्या भी थीं। लेखक ने उनके गाए दो गानों की शूटिंग की। गीत के तुरंत बाद मंजु ने एक कुशल गृहिणी के रूप में चाय बनाकर पिलाई।

प्रश्न 7: कैलाश नगर के ज़िलाधिका ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी?
उत्तर: 
कैलाशनगर के जिलाधिकारी ने लेखक को बताया कि यहाँ बुआई के लिए पारंपरिक आलू के बीजों के बजाय टी.पी.एस. नामक अलग किस्म के आलू के बीज का प्रयोग किया जाता है। इस बीज से कम मात्रा में ज्यादा पैदावार ली जा सकती है। यहाँ के निवासी इस तकनीक से काफी लाभ कमाते हैं।

प्रश्न 8: त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलू उद्योगों के विषय में बताइए?
उत्तर: 
त्रिपुरा के लघु उद्योगों में मुख्यतः बाँस की पतली-पतली सीकें तैयार की जाती हैं। इनका प्रयोग अगरबत्तियाँ बनाने में किया जाता है। इन्हें कर्नाटक और गुजरात भेजा जाता है ताकि अगरबत्तियाँ तैयार की जा सकें। त्रिपुरा में बाँस बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। इस बाँस से टोकरियाँ, सजावटी वस्तुएँ आदि तैयार की जाती हैं।

02. स्मृति – अध्याय समाधान

बोध प्रश्न  

प्रश्न 1: भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था? 
उत्तर: 
जिस वक्त लेखक झरबेरी से बेर तोड़ रहा था, तभी एक व्यक्ति ने पुकारकर कहा कि तुम्हारे भाई बुला रहे हैं, शीघ्र चले जाओ। यह सुनकर लेखक घर की ओर चलने लगा। लेखक के मस्तिष्क में भाई साहब की पिटाई का भय था। इसलिए वह सहमा – सहमा जा रहा था। उसे यह बात समझ नहीं आ रही थी, कि उससे क्या गलती हो गई है। उसे लग रहा था कि, कहीं उसके बेर खाने के अपराध में उसकी पेशी न हो रही हो। वह अनजाने भय से डरते – डरते घर में घुसा।

प्रश्न 2: मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी? 
उत्तर: 
मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली पूरी वानर टोली थी। उन बच्चों को यह मालुम था, कि कुएं  के भीतर सांप रहता था। लेखक ढेला फेंककर साँप से फुसकार करवा लेना बड़ा काम समझता था। बच्चों में ढेला फेंककर फुसकार सुनने की प्रवृत्ति जाग उठी थी। कुएं में ढेला फेंककर उसकी आवाज़ और उसे सुनने के बाद अपनी बोली की प्रतिध्वनि सुनने की आदत हो गई थी।

प्रश्न 3: ‘साँप ने फुसकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं’ – यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है? 
उत्तर: 
लेखक के साथ यह घटना 1908 में घटी। उसने यह बात अपनी माँ को 1915 में सात साल बाद बताई और लिखा शायद और भी बाद में होगा, इसलिए लेखक ने कहा कि उसे याद नहीं है कि ढेला फेंकने पर साँप को लगा या नहीं, उसने फुसकार मारी या नहीं क्योंकि इस समय लेखक बुरी तरह डर गया था। चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गई थी, जिन्हें उनके भाई ने डाकखाने में डालने के लिए दी थी। इससे उसकी घबराहट झलकती है।

प्रश्न 4: किन कारणों से लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया? 
उत्तर: लेखक को चिट्ठियाँ उसके भाई ने दी थी। डाकखाने जाते समय कुआँ सामने आया और लेखक ने ढेला उठाकर कुएँ में साँप पर फेंका  उस वक्त टोपी में रखी सभी चिट्ठियाँ कुएँ में जा गिरी। यह देख दोनों भाई सहमत उठे और रो पड़े। लेखक को भाई कि मार का भय था। अब वे और भी भयभीत हो गए। इसी मनोस्थिति के कारण उसने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का निर्णय किया।

प्रश्न 5: साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाईं?
उत्तर: 
साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने निम्नलिखित युक्तियाँ अपनाईं:

  • उसने डंडे से साँप को दबाने का ख्याल मन से निकाल दिया।
  • उसने साँप का फन पीछे होते ही, अपना डंडा चिट्ठियों की ओर किया और लिफाफे उठाने की कोशिश की।
  • डंडा लेखक की ओर से खींचे जाने पर साँप का आसन बदल गया और लेखक ने तुरंत लिफाफे और पोस्टकार्ड चुने लिया और उसे अपनी धोती के छोर में बांध लिया।


प्रश्न 6: कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 
चिट्ठियाँ सूखे कुएँ में गिर गई थीं। और कुएँ में साँप था। कुएँ में उतरकर चिट्ठियाँ लाना बड़ी हिम्मत का काम था। लेखक ने इस चुनौती को स्वीकार किया। लेखक ने छः धोतियों को जोड़कर डंडा बाँध दिया, एक सिरे को कुएँ में डालकर उसके दूसरे सिरे को कुएँ के चारों ओर घुमाने के बाद गाँठ लगाकर अपने छोटे भाई को पकड़ा दिया। लेखक इस धोती के ज़रिए कुएँ में उतर गया। जब वह भूमि से चार – पांच गज ऊपर था, उसने साँप को फन फैलाए देखा। वह कुछ वक्त ऊपर धोती पकड़े लटकता रहा, ताकि वह उसके आक्रमण से बच पाए। साँप को धोती पर लटककर मारना आसान नहीं था व डंडा चलाने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं थी। उसने चिट्ठियों को डंडे से खिसकाने कि कोशिश की साँप ही डंडे से चिपक गया। साँप का पिछला हिस्सा लेखक के हाथ को छू गया, और लेखक ने डंडा भी फेंक दिया। डंडा लेखक की ओर खींच आने से साँप का आसन बदल गया और लेखक ने जल्द ही पोस्टकार्ड और लिफाफे चुन लिए और अपनी धोती के छोर से बाँध लिया।

प्रश्न 7: इस पाठ को पढ़ने के बाद किन-किन बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है?
उत्तर: इस पाठ को पढ़ने के बाद निम्नलिखित बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है:

  • मौसम अच्छा होते ही खेतों में जाकर फल तोड़कर खाना।
  • स्कूल जाते समय रास्ते में शरारतें करना।
  • रास्ते में आए कुएँ, तालाब, पानी से भरे स्थानों पर पत्थर फेंकना, पानी में उछलना।
  • जानवरों को तंग करते हुए चलना।
  • अपने आपको सबसे बहादुर समझना आदि अनेकों बाल सुलभ शरारतों का पता चलता है।

प्रश्न 8: ‘मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उल्टी निकलती हैं’ −का आशय स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर: मनुष्य अपनी स्थिति का सामना करने के लिए स्वयं ही अनुमान लगाता है और अपने हिसाब से भावी योजनाएँ भी बनाता है। परन्तु ये अनुमान और योजनाएँ पूरी तरह से ठीक उतरे ऐसा नहीं होता। कई बार यह गलत भी हो जाती हैं। जो मनुष्य चाहता है, उसका उल्टा हो जाता है। अत: कल्पना और वास्तविकता में हमेशा अंतर होता है।

प्रश्न 9: ‘फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है’ − पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आश्य स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर: 
लेखक जब कुएँ में उतरा तो वह यह सोचकर उतरा था कि या तो वह चिट्ठियाँ उठाने में सफल होगा या साँप द्वारा काट लिया जाएगा। फल की चिंता किए बिना वह कुएँ में उतर गया और अपने दृढ़ विश्वास से सफल रहा। अत: मनुष्य को कर्म करना चाहिए। फल देने वाला ईश्वर होता है। मनचाहा फल मिले या नहीं यह देने वाले की इच्छा पर निर्भर करता है। लेकिन यह भी कहा जाता है, जो दृढ़ विश्वास व निश्चय रखते हैं, ईश्वर उनका साथ देता है।

1. गिल्लू – अध्याय समाधान

बोध प्रश्न 

प्रश्न 1: सोन जूही में लगी पीली कली को देख लेखिका के मन में कौन से विचार उमड़ने लगे? 
उत्तर: 
सोन जूही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका के मन में छोटे से जीव गिलहरी की याद आ गई, जिसे वह गिल्लू कहती थीं। सोनजुही की पिली काली मनमोहक होती है और गिल्लू उसकी लताओं में छिपकर बैठ जाता था और लेखिका के पास आते ही कूद कर कंधे पर बैठ जाता था।


प्रश्न 2: पाठ के आधार पर कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है? 
उत्तर: 
कौए को समादरित इसलिए कहा गया है क्योंकि वह छत पर बैठकर अपनी आवाज़ से प्रियजनों के आने की सुचना देता है। पितृपक्ष में लोग इसे आदर से बुलाकर भोजन देते हैं। इसे अनादरित इसलिए कहा गया है क्योंकि इसकी आवाज़ बहुत कड़वी होती है।

प्रश्न 3: गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया? 
उत्तर: 
लेखिका गिलहरी के घायल बच्चे को उठाकर अपने कमरे में ले आई उसका घाव रुई से पोंछा उस पर पेंसिलिन दवा लगाई फिर उसके मुँह में दूध डालने की कोशिश की परन्तु उसका मुँह खुल नहीं सका। कई घंटे के उपचार के बाद उसने एक बूँद पानी पिया। तीन दिन के बाद उसने आँखे खोली और धीरे-धीरे स्वस्थ हुआ।

प्रश्न 4: लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था?
उत्तर: 
लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू उनके पैरों के पास आकर खेलता फिर सर्र से पर्दे पर चढ़ जाता फिर उसी तेज़ी से उतरता। वह इसी तरह भाग दौड़ करता रहता जब तक लेखिका उसे पकड़ने के लिए उठ न जाती।

प्रश्न 5: गिल्लू को मुक्त करने की आवश्यकता क्यों समझी गई और उसके लिए लेखिका ने क्या उपाय किया?
उत्तर: 
बाहर की गिलहरियाँ खिड़की के जाली के पास बैठ कर चिक् चिक् करती। उन्हें देखकर गिल्लू उनके पास आकर बैठ जाता उसको इस तरह बाहर निहारते हुए देखकर लेखिका ने इसे मुक्त करना आवश्यक समझा। लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया जिससे गिल्लू बाहर आ जा सके।

प्रश्न 6: गिल्लू किन अर्थों में परिचारिका की भूमिका निभा रहा था?
उत्तर: 
लेखिका की अस्वस्थता में गिल्लू उनके सिराहने बैठ जाता और नन्हें पंजों से उनके बालों को सहलाता रहता। इस प्रकार वह सच्चे अर्थों में परिचारिका की भूमिका निभा रहा था।

प्रश्न 7: गिल्लू की किन चेष्टाओं से यह आभास मिलने लगा था कि अब उसका अंत समय समीप है?
उत्तर: 
गिल्लू ने दिन भर कुछ भी नहीं खाया न बाहर गया अंत समय की मुश्किल के बाद भी वह झूले से उतरकर लेखिका के बिस्तर पर आ गया और अपने ठंडे पंजों से उँगली पकड़कर हाथ से चिपक गयाजिसे पहले उसने घायल अवस्था में पकड़ा था। इन्हीं चेष्टाओं से आभास मिलने लगा कि अब उसका अंत समय समीप है।

प्रश्न 8: ‘प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया’ −का आश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इस कथन का आशय यह है कि सुबह होते होते गिल्लू की मृत्यु हो गई और वह हमेशा के लिए सो गया ताकि वह कहीं और जन्म लेकर नए जीवन को पा सके।

प्रश्न 9: सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?
उत्तर: 
सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू की समाधि बनाई गई क्योंकि यह लता गिल्लू को बहुत पसंद थी और साथ ही लेखिका को विश्वास था कि इस छोटे से जीव को इस बेल पर लगे फूल के रुप में देखेगी। जुही में जब पीले फूल लगेंगे तो लेखिका के समक्ष गिल्लू की स्मृति साकार हो जाएगी। इससे उन्हे संतोष मिलेगा।