10. नए इलाके में… खुशबू रचते हैं हाथ – अध्याय समाधान

प्रश्न-अभ्यास

(1) नए इलाके में

प्रश्न 1: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?
उत्तर: कवि नए बसते इलाकों में रास्ता इसलिए भूल जाता है क्योंकि यहाँ नित नए निर्माण होते रहते हैं। नित नई घटनाएँ घटती रहती हैं। अपने ठिकाने पर जाने के लिए जो निशानियाँ बनाई गई होती हैं, वे जल्दी ही मिट जाती हैं। पीपल का पेड़ हो या ढहा हुआ मकान या खाली प्लाट, सबमें शीघ्र ही परिवर्तन हो जाता है। इसलिए वह प्रायः रास्ता भूल जाता है।

(ख) कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: इस कविता में पीपल का पेड़, ढह गया घर, ज़मीन का खाली टुकड़ा, बिना रंग वाले लोहे के फाटक वाला मकान आदि पुराने निशानों का उल्लेख है।

(ग) कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है?
उत्तर: कवि एक घर पीछे या दो घर आगे इसलिए चला जाता है क्योंकि नए इलाके में उसके घर तक पहुँचने की जो निशानियाँ थीं, वे सब मिट चुकी थीं। उसने कई निशानियाँ बना रखी थीं, जैसे—एक मंजिला मकान की पहचान बिना रंगा हुआ लोहे का फाटक। लेकिन इनमें से कुछ भी नहीं बचा था। प्रतिदिन हो रहे परिवर्तनों के कारण वह अपना घर नहीं ढूँढ पाया और कभी आगे निकल जाता तो कभी पीछे।

(घ) ‘वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: वसंत का गया पतझड़ और बैसाख का गया भादों को लौटा से अर्थ है कि ऋतु परिवर्तन में समय लगता है। कवि काफी समय बाद घर लौटा है। पहले जो परिवर्तन महीनों में होते थे, अब वह दिनों में हो जाते हैं और कवि तो काफी समय बाद आया है।

(ड़) कवि ने इस कविता में ‘समय की कमी’ की ओर क्यों इशारा किया है?
उत्तर: कवि ने इस कविता में समय की कमी की ओर इशारा किया है क्योंकि उसने अपना घर ढूँढ़ने में काफी समय बर्बाद कर दिया। प्रगति की इस दौड़ में व्यक्ति अपनी पहचान भी भूल गया है। समय का अभाव रहता है इसलिए किसी से आत्मीयता भी नहीं बना पाता है।

(च) इस कविता में कवि ने शहरों को किस विडंबना की ओर संकेत किया है?
उत्तर: इस कविता में कवि ने शहरों की इस विडंबना की ओर संकेत किया है कि जीवन की सहजता समाप्त होती जा रही है, बनावटी चीज़ों के प्रति लोगों का लगाव बढ़ता जा रहा है। सब आगे निकलना चाहते हैं, आपसी प्रेम, आत्मियता घटती जा रही है। लोगों की और रहने के स्थान की पहचान खोती जा रही है। स्वार्थ केन्द्रित लोगों के पास दूसरे के लिए समय ही नहीं है। आज की चीज़ कल पुरानी पड़ जाती है, कुछ भी स्थाई नहीं है।

प्रश्न 2: व्याख्या कीजिए −

(क) यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि आज दुनिया में इतनी तीव्र गति से बदलाव हो रहा है कि साल भर का बदलाव एक दिन में हो जाता है। इस बदलाव को देखकर अपनी जानी-पहचानी वस्तुएँ भूलने का भ्रम होने लगता है। यहाँ तक कि सुबह का गया शाम को लौटने पर वह अपना मकान न ढूंढ़ पाने पर लगता है कि एक ही दिन में पुरानी पड़ गई है, क्योंकि कल तक तो कुछ न कुछ फिर नया बन जाएगा।

(ख) समय बहुत कम है तुम्हारे पास
आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि कहता है कि तेजी से बदलती दुनिया और उसके साथ तालमेल बिठाने के क्रम में लोगों के पास समय बहुत कम बचा है। कवि देखता है कि आकाश में काले बादल छाये चले आ रहे हैं। वर्षा की पूरी संभावना है। ऐसे में लोग छतों पर आएँगे। अब उनमें से कोई कवि को पहचानकर पुकार लेगा कि आ जाओ, तुम्हारा घर यहीं है, जिसे तुम खोज नहीं पा रहे हो।

योग्यता विस्तार

प्रश्न: पाठ में हिंदी महीनों के कुछ नाम आए हैं। आप सभी हिंदी महीनों के नाम क्रम से लिखिए।
उत्तर: हिंदी महीनों के नाम क्रम से इस प्रकार हैं:

  • चैत्र
  • वैशाख
  • ज्येष्ठ
  • आषाढ़
  • श्रावण
  • भाद्रपद
  • आश्विन
  • कार्तिक
  • अगहन
  • पौष
  • माघ
  • फाल्गुन

(2) खुशबु रचते हैं हाथ 

प्रश्न 1: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) ‘खुशबु रचनेवाले हाथ’ कैसी परिस्थितियों में तथा कहाँ-कहाँ रहते हैं?
उत्तर: खुशबू रचते हाथ अपना जीवनयापन बड़ी ही निम्न परिस्थितियों में करते हैं। खुशबू रचने वाले हाथ बदबूदार, तंग और नालों के पास रहते हैं। इनका घर कूड़े-कर्कट और बदबू से भरे गंदे नालों के पास होता है यहाँ इतनी बदबू होती है कि सिर फट जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में खुशबू रचने वाले हाथ रहते हैं।

(ख) कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई है?
उत्तर: कविता में निम्न प्रकार के हाथों की चर्चा हुई है – उभरी नसों वाले हाथ, पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ, गंदे कटे-पिटे हाथ, घिसे नाखूनों वाले हाथ, जूही की डाल से खूशबूदार हाथ,जख्म से फटे हाथ आदि।

(ग) कवि ने यह क्यों कहा है कि ‘खुशबू रचते हैं हाथ’?
उत्तर: ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ ऐसा कवि ने इसलिए कहा है जिन हाथों से दुनिया भर में खुशबू फैलाई जाती है, वे हाथ गंदे हैं, गंदी जगहों पर रहते हैं और अभावग्रस्त जीवन जीने को विवश हैं।

(घ) जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल कैसा होता है?
उत्तर: जहाँ अगरबत्तियाँ बनती है वहाँ का माहौल बड़ा ही गंदगी से भरा और प्रदूषित होता है। इनका घर कूड़े कर्कट, बदबूदार, तंग और बदबू से भरे गंदे नालों के पास होता है। यहाँ इतनी बदबू होती है कि सिर फट जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में रहने के बाद भी ये दूसरों के जीवन में खुशबू बिखरने का काम करते हैं।

(ङ) इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस कविता को लिखने का उद्देश्य है-समाज के मजदूर वर्ग और अन्य लोगों के बीच घोर विषमता का चित्रण तथा दुनिया भर में अपनी बनाई अगरबत्तियों के माध्यम से सुगंध फैलाने वाले मजदूर वर्ग का घोर गरीबी में गंदगी के बीच जीवन बिताना तथा समाज द्वारा उनकी उपेक्षा की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित कराना।

प्रश्न 2:  व्याख्या कीजिए −
(क) (i) पीपल के पत्ते-से नए-नए हाथ
जूही की डाल से खुशबूदार हाथ
उत्तर: निम्न पंक्तियों के जरिए कवि ने हमारा ध्यान उन बच्चों और महिलाओं की ओर आकर्षित करना चाहा है जिनके हाथ पीपल के नए पत्तों और जूही की डाल के समान सुन्दर और खुशबूदार हैं। परन्तु गरीबी के कारण ये अत्यंत श्रम करने के लिए मजबूर हैं।

(ii) दुनिया की सारी गंदगी के बीच
दुनिया की सारी खुशबू
रचते रहते हैं हाथ 
उत्तर: कवि ने इन पंक्तियों में खुशबू बनाने वाले मजदूरों के बारे में बताया है कि ये मजदूरों को दुनिया की सारी गंदगी के बीच रहने को विवश हैं। ऐसे गंदे स्थानों पर रहकर वे सारी दुनिया में सुगंध बिखेरते हैं। ये मज़दूर गंदी जगहों पर रहकर गंदे हाथों से काम करके दुनिया को खुशी और सुगंध बाँट रहे हैं।

(ख) कवि ने इस कविता में ‘बहुवचन’ का प्रयोग अधिक किया है। इसका क्या कारण है?
उत्तर: कवि ने इस कविता में गलियों, नालों, नाखूनों, गंदे हाथ, अगरबत्तियाँ, मुहल्लों, गंदे लोग’ जैसे बहुवचन’ शब्दों का प्रयोग किया है क्योंकि ऐसे लोग, स्थान, वस्तुएँ एक नहीं अनेकों होती हैं। ऐसे गरीब और उपेक्षित लोग अनेक स्थानों पर काम करते दिखाई देते हैं।

(ग) कवि ने हाथों के लिए कौन-कौन से विशेषणों का प्रयोग किया है।
उत्तर: कवि ने हाथों के लिए कई विशेषणों का प्रयोग किया है; जैसे-

  • उभरी नसों वाले
  • घिसे नाखूनों वाले
  • पीपल के पत्ते से नए-नए
  • जूही की डाल जैसे खुशबूदार
  • गंदे कटे-पिटे
  • ज़ख्म से फटे हुए

योग्यता-विस्तार

प्रश्न: अगरबत्ती बनाना, माचिस बनाना, मोमबत्ती बनाना, लिफ़ाफ़े बनाना, पापड़ बनाना, मसाले कूटना आदि लघु उद्योगों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर: 
आस पड़ोस में रहने वाले किसी मज़दूर या कर्मचारी से बात करके जानिए और उनकी फैक्ट्री में जाकर देखिए। संभव हो तो घर में बनाने का प्रयास कीजिए।

9. अग्नि पथ –अध्याय समाधान

प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(क) कवि ने ‘अग्नि पथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है?
उत्तर: कवि ने ‘अग्नि पथ’ को मनुष्य की जीवंत कठिनाइयों के प्रतीक के रूप में उपयोग किया है। यह पथ जीवन की कठिनाइयों और बाधाओं का प्रतीक है जिसे मनुष्य अपने साहस और आत्म-बल से आगे बढ़ता है। अग्नि पथ का मार्ग कठिन और संघर्ष से भरा हुआ है, लेकिन इसी मार्ग पर जीवन की असली सफलता और सार्थकता प्राप्त होती है।

(ख) ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर: ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि यही कहना चाहता है कि मनुष्य को अपनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए किसी भी प्रकार की अनपेक्षित चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। उसे इस मार्ग में बिना किसी सहारे, सुखों की अभिलाषा और हर परिस्थिति का सामना करते हुए अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।

(ग) ‘एक पत्र-छाँह भी माँग मत’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘एक पत्र छाह भी माँग मत’ − पंक्ति का आशय है कि मनुष्य अपनी कठिनाइयों का सामना स्वयं करना चाहिए। इसलिए अपनी कठिनाइयों का सामना स्वयं ही करना चाहिए। यदि थोड़ा भी आश्रय मिल जाए तो उसकी अवहेलना न करके धन्य मानना चाहिए।

प्रश्न 2: निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −

(क) तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी

उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि कष्टों से भरे मार्ग पर रुकना और थमना नहीं चाहिए। मनुष्य को केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित कर आने वाली चुनौतियों से न घबराकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

(ख) चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ,लथपथ 

उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि संघर्षमय मार्ग में सबसे सुन्दर दृश्य यही हो सकता है कि मनुष्य अपना पसीना बहाते हुए उस मार्ग पर बढ़े चला जा रहा है। शरीर से पसीना बहाते हुए और खून से लथपथ होते हुए भी मनुष्य निरंतर अपने मार्ग में आगे बढ़ते जा रहा है क्योंकि ऐसा ही मनुष्य सफलता प्राप्त करता है।

प्रश्न 3: इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कविता का मूलभाव है-निरंतर संघर्ष करते रहो। कवि जीवन को आग-भरा पथ मानता है। इसमें पग-पग पर चुनौतियाँ और कष्ट हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह इन चुनौतियों से न घबराए। न ही इनसे मुँह मोड़े। बल्कि वह आँसू पीकर, पसीना बहाकर तथा खून से लथपथ होकर भी निरंतर संघर्ष करता रहे।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न: ‘जीवन संघर्ष का ही नाम है’ इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा का आयोजन कीजिए।
उत्तर: 

  • पहला छात्र: जीवन संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
  • दूसरा छात्र: मेरे विचार से, संघर्ष करना मजबूरी है, आवश्यकता नहीं। कौन जबरदस्ती संघर्ष करना चाहता है?
  • तीसरा छात्र: हर आदमी संघर्ष टालना चाहता है।
  • पहला छात्र: मेरा मतलब है, जीवन में संघर्ष के बिना काम नहीं चलता। उससे बचा नहीं जा सकता।

परियोजना कार्य

प्रश्न: ‘जीवन संघर्षमय है, इससे घबराकर थमना नहीं चाहिए’ इससे संबंधित अन्य कवियों की कविताओं को एकत्र कर एक एलबम बनाइए।
उत्तर:
 शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविता ‘सच है महज़ संघर्ष ही’ पढ़िए।

08. गीत – अगीत –अध्याय समाधान

पृष्ठ संख्या: 115

प्रश्न अभ्यास  

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये –

(क) नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे संबंधित पंक्तियों को लिखिए।
 उत्तर

“देते स्वर यदि मुझे विधाता,
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता।”

(ख) जब शुक गाता है, तो शुकी के हृदय पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर
जब शुक गाता है तो शुकी का ह्रदय प्रसन्नता से फूल जाता है। वह उसके प्रेम में मग्न हो जाती है। शुकी के ह्रदय में भी गीत उमड़ता है, पर वह स्नेह में सनकर ही रह जाता है। शुकी अपने गीत को अभिव्यक्त नहीं कर पाती वह शुक के प्रेम में डूब जाती है पर गीत गाकर उत्तर नहीं दे पाती है।

(ग) प्रेमी जब गीत गाता है, तब प्रेमिका की क्या इच्छा होती है?
उत्तर
प्रेमी प्रेमभरा गीत गाता है तब उसकी प्रेमिका की यह इच्छा होती है कि वह भी उस प्रेमगीत का एक हिस्सा बन जाए।वह गीत की कड़ी बनना चाहतीहै।

(घ) प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति-चित्रण को लिखिए।
उत्तर
‘गीत अगीत’ कविता के प्रथम छंद में प्रकृति का मनोहारी चित्रण है। सामने नदी बह रही है माने वह अपने कल-कल स्वर में वेदना प्रकट करती है। वह तटों को अपनी विरह व्यथा सुनाती है। उसके किनारे उगा गुलाब का पौधा हिलता रहता है मानो कह रहा हो विधाता ने मुझे भी स्वर दिया होता तो मैं भी अपनी व्यथा कह पाता। नदी गा-गाकर बह रही है और गुलाब चुपचाप खड़ा है।

(ङ) प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों का अनन्य सम्बन्ध है।  दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। पशु-पक्षी अपने भोजन और आवास के लिए प्रकृति पर ही निर्भर करते हैं, प्रकृति पर उनका जीवन निर्भर है। कई मायनों में पशु-पक्षी प्रकृति को शुद्ध भी रखते हैं।

(च) मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
मनुष्य को प्रकृति अनेक रूपों में आंदोलित करती है। मनुष्य को प्रकृति का शांत वातावरण लुभाता है। संध्या उसके मन में प्रेम जगाता है। प्रकृति में व्याप्त संगीत मनुष्य के हृदय को आनंदित करता है। प्रकृति मनुष्य के सुख-दुःख में उसका साथ निभाती लगती है।

(छ) सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
गीत, अगीत में बस मामूली सा अतंर है। जब मन के भाव प्रकट होते हैं, तब वे ‘गीत’ का रूप ले लेते हैं। जब हम उन भावों को मन ही मन अनुभव करते हैं, पर कह नहीं पाते, तब वह ‘अगीत’ बन जाता है। वैसे अगीत का कोई अस्तित्व नहीं होता, क्योंकि कभी न कभी उन्हें गाया भी जा सकता है। दोनों में देखने में अंतर है। जिस भावना या मनोदशा में गीत बनता है वह ही अगीत होता है।

(ज) ‘गीत-अगीत’ के केंद्रीय भाव को लिखिए।
 उत्तर

गीत-अगीत कविता का केन्दिय भाव यह है कि गीत रचने की मनोदशा ज्य़ादा महत्व रखती है, उसको महसूस करना आवश्यक है। जैसे कवि को नदी के बहने में भी गीत का होना जान पड़ता है। उसे शुक, शुकी के क्रिया कलापों में भी गीत नज़र आता है। कवि प्रकृति की हर वस्तु में गीत गाता महसूस करता है। उनका कहना है जो गाया जा सके वह गीत है और जो न गाया जासके वह अगीत है। 

प्रश्न 2. संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए –

(क) अपने पतझर के सपनों का
 मैं भी जग को गीत सुनाता

उत्तर
प्रस्तुत पंद्याश ‘रामधारी सिंह दिनकर’ द्वारा रचित ‘गीत-अगीत’ से लिया गया है। इसमें कवि एक गुलाब के पौधे की व्यथा का वर्णन करता है। इन पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि नदी के किनारे उगा गुलाब का पौधा उसके कल-कल बहने के स्वर को समझता है कि वह अपनी बात तटों से कह रही है। अगर उसे भी स्वर मिला होता तो वह भी पतझड़ की व्यथा को सुना पाता। उसके भाव गीत न होकर अगीत ही रह जाते हैं। 

(ख) गाता शुक जब किरण बसंत
 छूती अंग पर्ण से छनकर

उत्तर
प्रस्तुत पंद्याश ‘रामधारी सिंह दिनकर’ द्वारा रचित ‘गीत अगीत’ से लिया गया है। यहाँ कवि शुक तथा शुकी के प्रसंग के माध्यम से गीतों के महत्व को प्रस्तुत किया है। कवि के अनुसार शुक जब डाल पर बैठकर किरण बंसती का गीत गाता है तो शुकी पर उसकी स्वर लहरी का प्रभाव पड़ता है और उसमें सिरहन होने लगती। उसकी स्वर लहरी पत्तों से छन छन कर शुकी के अंगों में समा जाती है। अर्थात शुक का गीत शुकी को इतना आकर्षक लगता कि वह उसी में खो जाती थी।

(ग) हुई न क्यों में कडी गीत की
 विधना यों मन में गुनती है

उत्तर
प्रस्तुत काव्यांश ‘रामधारी सिंह दिनकर’ द्वारा रचित ‘गीत अगीत’ कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने बताया कि एक प्रेमी जब संध्या के समय गीत गाता है तो उसका प्रभाव उसकी प्रेमिका पर पड़ता है। प्रेमी प्रेमिका के माध्यम से कवि ने गीतों के महत्व को स्पष्ट किया है। जब संध्या के समय प्रेमी गीत गाता है तो उसके गीत से मंत्रमुग्ध सी उसकी प्रेमिका उसकी ओर खिचीं चली आती है और उसके मन में एक इच्छा जन्म लेने लगती है कि काश वह उस गीत को गा सकती वह भी उसकी कड़ी बन पाती।

प्रश्न 3. निम्नलिखित उदाहरण में ‘वाक्य-विचलन’को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए −

(क) देते स्वर यदि मुझे विधाता
 यदि विधावा मुझे स्वर देते।

(ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर
उस धनी डाल पर शुक बैठा है।

(ग) गूँज रहा शुक का स्वर वन में
शुक का स्वर वन में गूँज रहा है।

(घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
मैं गीत की कड़ी क्यों न हो सकी।

(ङ) शुकी बैठ अंडे है सेती
शुकी बैठ कर अंडे सेती है।

07. दोहे –अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 73

प्रश्न  1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये – 

(क) प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?
 उत्तर: 
प्रेम का धागा एक बार टूटने पर, जब भी उसे जोड़ने की कोशिश की जाती है, तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। वह पहले जैसा नहीं जुड़ पाता, क्योंकि इसमें अविश्वास और संदेह की दरार आ जाती है।

(ख) हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?

उत्तर: हमें अपना दुख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कोई लाभ नहीं होता। जब हम अपनी मन की बातें दूसरों से साझा करते हैं, तो वे उनका मजाक उड़ाते हैं।

(ग) रहीम ने सागर की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तर: रहीम ने सागर की तुलना में पंक जल को महान इसलिए कहा है, क्योंकि यह छोटा होने के बावजूद लोगों और जीव-जंतुओं की प्यास को बुझाता है। जबकि सागर विशाल होने के बावजूद किसी की प्यास नहीं बुझा पाता।

(घ) एक को साधने से सब कैसे सध जाता है?
उत्तर: कवि का मानना है कि ईश्वर एक है और उसकी साधना करनी चाहिए। जैसे जड़ को सींचने से फल-फूल मिलते हैं, वैसे ही एक ईश्वर की पूजा करने से सभी काम सफल होते हैं।

(ड़) जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नही कर पाता?
 उत्तर: 
जलहीन कमल की रक्षा सूर्य इसलिए नहीं कर पाता क्योंकि उसके पास कोई सामर्थ्य नहीं होता। मदद केवल वही करता है, जिसके पास आंतरिक बल होता है।

(च) अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?
 उत्तर: 
अपने पिता के वचन को निभाने के लिए अवध नरेश को चित्रकूट जाना पड़ा।

(छ) ‘नट’ किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
 उत्तर
: ‘नट’ कुंडली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है।

(ज) ‘मोती, मानुष, चून’ के संदर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
 उत्तर: 
मोती का अर्थ है चमक या आब। इसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं है। ‘मानुष’ के संदर्भ में पानी का अर्थ मान-सम्मान है। अगर मानुष का पानी अर्थात सम्मान समाप्त हो जाए, तो उसका जीवन व्यर्थ है। ‘चून’ के संदर्भ में पानी का अर्थ अस्तित्व से है। पानी के बिना आटा नहीं गूँथा जा सकता।

प्रश्न 2. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −

(क) टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।
उत्तर: कवि इस पंक्ति द्वारा बता रहा है कि प्रेम का धागा एक बार टूटने पर फिर से जुड़ना कठिन होता है। अगर जुड़ भी जाए, तो पहले जैसा प्रेम नहीं रह जाता।

(ख) सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।
उत्तर: कवि का कहना है कि अपने दुखों को किसी को नहीं बताना चाहिए। दूसरे लोग सहायता नहीं करेंगे और उसका मजाक भी उड़ाएंगे।

(ग) रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।
उत्तर: इन पंक्तियों द्वारा कवि एक ईश्वर की आराधना पर जोर देते हैं। जड़ को सींचने से पूरे पेड़ पर प्रभाव पड़ता है।

(घ) दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
उत्तर: दोहा एक ऐसा छंद है जिसमें अक्षर कम होते हैं, पर उनमें गहरा अर्थ छिपा होता है।

(ङ) नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
उत्तर: जिस तरह संगीत की मोहिनी तान पर रीझकर हिरण अपने प्राण तक त्याग देता है, उसी तरह मनुष्य धन कला पर मुग्ध होकर धन अर्जित करने को अपना उद्देश्य बना लेता है।

(च)  जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।
उत्तर: हर छोटी वस्तु का अपना अलग महत्व होता है। कपड़ा सिलने का कार्य तलवार नहीं कर सकती, वहाँ सुई ही काम आती है।

(च) पानी गए न उबरै, मोती, मानुष, चून।
उत्तर: जीवन में पानी के बिना सब कुछ बेकार है। इसे बनाकर रखना चाहिए। पानी के बिना मोती, सम्मान और आटा सब व्यर्थ हैं।

पृष्ठ संख्या: 95

प्रश्न  3. निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्तियों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है −

(क) जिस पर विपदा पड़ती है वही इस देश में आता है। 
उत्तर− ”जा पर बिपदा पड़त है, सो आवत यह देस।”

(ख) कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती।
उत्तर− ”बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।”

(ग) पानी के बिना सब सूना है अत: पानी अवश्य रखना चाहिए।
उत्तर− ”रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।”

4. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −

उदाहण : कोय  कोई जे – जोज्यों—–कछु—————-नहिं—–कोय—————-धनि—–आखर—–जिय—–थोरे—-होय—–माखन—-तरवारि—-सींचिबो—-मूलहिं——पिअत—-पिआसो—–बिगरी—-आवे—–सहाय—-ऊबरै—–बिनु—-बिथा—–अठिलैहैं—-परिजाय——- —–

उत्तरज्यों-जैसेकछु-कुछनहि-नहींकोय-कोईधनि-धन्यआखर-अक्षरजिय-जीथोरे-थोड़ेहोय-होनामाखन-मक्खनतरवारि-तलवारसींचिबो-सींचनामूलहिं-मूल कोपिअत-पीनापिआसो-प्यासाबिगरी-बिगड़ीआवे-आएसहाय-सहायकऊबरै-उबरनाबिनु-बिनाबिथा-व्यथाअठिलैहैं-हँसी उड़ानापरिजाए-पड़ जाए

06. रैदास –अध्याय समाधान

पृष्ठ संख्या: 89

प्रश्न अभ्यास 

प्रश्न.1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए −
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।
(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए −

(घ) दूसरे पद में कवि ने ‘गरीब निवाजु’ किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।
(ङ) दूसरे पद की ‘जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
(च) ‘रैदास’ ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?
(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −
मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसइआ

उत्तर. 
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना निम्नलिखित चीज़ों से की गई हैं:
(i) भगवान की घन बन से, भक्त की मोर से
(ii) भगवान की चंद्र से, भक्त की चकोर से
(iii) भगवान की दीपक से, भक्त की बाती से
(iv) भगवान की मोती से, भक्त की धागे से
(v) भगवान की सुहागे से, भक्त की सोने से
(vi) भगवान की चंदन से, भक्त की पानी से
(ख)
(ग)
(घ) ‘गरीब निवाजु’ का अर्थ है, गरीबों पर दया करने वाला। कवि ने भगवान को ‘गरीब निवाजु’ कहा है क्योंकि ईश्वर ही गरीबों का उद्धार करते हैं, सम्मान दिलाते हैं, सबके कष्ट हरते हैं और भवसागर से पार उतारते हैं
(ङ) ‘जाकी छोति जगत कउ लागै’ का अर्थ है जिसकी छूत संसार के लोगों को लगती है और ‘ता पर तुहीं ढरै’ का अर्थ है उन पर तू ही (दयालु) द्रवित होता है। पूरी पंक्ति का अर्थ है गरीब और निम्नवर्ग के लोगों को समाज सम्मान नहीं देता। उनसे दूर रहता है। परन्तु ईश्वर कोई भेदभाव न करके उन पर दया करते हैं, उनकी मद्द करते हैं, उनकी पीड़ा हरते हैं।
(च) रैदास ने अपने स्वामी को गुसईया, गरीब निवाज़, गरीब निवाज़ लाला प्रभु आदि नामों से पुकारा है।
(छ)

प्रश्न.2. नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए −
(क) जाकी अँग-अँग बास समानी
(ख) जैसे चितवत चंद चकोरा
(ग) जाकी जोति बरै दिन राती
(घ) ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै
(ङ) नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
उत्तर (क) कवि के अंग-अंग मे राम-नाम की सुगंध व्याप्त हो गई है। जैसे चंदन के पानी में रहने से पानी में उसकी सुगंध फैल जाती है, उसी प्रकार राम नाम के लेप की सुगन्धि उसके अंग-अंग में समा गयी है।
(ख) चकोर पक्षी अपने प्रिय चाँद को एकटक निहारता रहता है, उसी तरह कवि अपने प्रभु राम को भी एकटक निहारता रहता है। इसीलिए कवि ने अपने को चकोर कहा है।
(ग) ईश्वर दीपक के समान है जिसकी ज्योति हमेशा जलती रहती है। उसका प्रकाश सर्वत्र सभी समय रहता है।
(घ) भगवान को लाल कहा है कि भगवान ही सबका कल्याण करता है इसके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों को ऊपर उठाने का काम करता हो।
(ङ) कवि का कहना है कि ईश्वर हर कार्य को करने में समर्थ हैं। वे नीच को भी ऊँचा बना लेता है। उनकी कृपा से निम्न जाति में जन्म लेने के उपरांत भी उच्च जाति जैसा सम्मान मिल जाता है।

प्रश्न 3. रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर. 

  • पहले पद का केंद्रिय भाव:
    (i) जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती।
    (ii) कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है।
    (iii) भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है।
  • दूसरे पद  का केंद्रिय भाव:
    (i) प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं।
    (ii) वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं।
    (iii) ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।

05. शुक्र तारे के सामान –अध्याय समाधान

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न 1: महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
उत्तर: महादेव भाई अपना परिचय गांधीजी के ‘हम्माल’ और ‘पीर-बावर्ची-खर’ के रूप में देते थे।

प्रश्न 2: ‘यंग इंडिया’ साप्ताहिक में लेखों की कमी क्यों रहने लगी थी?
उत्तर: अंग्रेजी संपादक हार्नीमैन ‘यंग इंडिया’ के लिए लिखते थे, जिन्हें देश निकाले की सजा देकर इंग्लैंड भेज दिया गया था। इस कारण ‘यंग इंडिया’ साप्ताहिक में लेखों की कमी रहने लगी।

प्रश्न 3: गांधीजी ने ‘यंग इंडिया’ प्रकाशित करने के विषय में क्या निश्चय किया?
उत्तर: गाँधीजी ने ‘यंग इंडिया’ को सप्ताह में दो बार छापने का निश्चय किया क्योंकि सत्याग्रह आंदोलन में व्यस्त रहने के कारण उनके कार्य बहुत बढ़ गए थे।

प्रश्न 4: गांधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई कहाँ नौकरी करते थे?
उत्तर: गाँधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई सरकार के अनुवाद विभाग में नौकरी करते थे।    

प्रश्न 5: महादेव भाई के झोलों में क्या भरा रहता था?
उत्तर: महादेव भाई के झोलों में ताजे राजनीतिक घटनाओं, जानकारियों, चर्चाओं से संबंधित पुस्तकें, समाचार पत्र, मासिक पत्र आदि भरे रहते थे।

प्रश्न 6: महादेव भाई ने गांधीजी की कौन-सी प्रसिद्ध पुस्तक का अनुवाद किया था?
उत्तर: महादेव भाई ने गांधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का अंग्रेजी अनुवाद किया।

प्रश्न 7: अहमदाबाद से कौन-से दो साप्ताहिक निकलते थे?
उत्तर: अहमदाबाद से निकलने वाले साप्ताहिक पत्र थे – ‘यंग इंडिया’ तथा ‘नव जीवन’।

प्रश्न 8: महादेव भाई दिन में कितनी देर काम करते थे?
उत्तर: महादेव भाई दिन में 17-18 घंटे काम करते थे।

प्रश्न 9: महादेव भाई से गांधीजी की निकटता किस वाक्य से सिद्ध होती है?
उत्तर: महादेव भाई से गांधीजी की निकटता इस वाक्य से सिद्ध होती है – ‘ए रे जखम जोगे नहि जशे’ – यह घाव कभी योग से भरेगा नहीं।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

प्रश्न 1: गांधीजी ने महादेव को अपना वारिस कब कहा था? 
उत्तर: 
महादेव भाई 1917 में गांधी के पास पहुँचे। गांधी जी ने उन्हें पहचानकर उत्तराधिकारी का पद सौंपा। 1919 में जलियाँबाग कांड के दौरान जब गांधी जी पंजाब जा रहे थे तब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने उसी समय महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।

प्रश्न 2: गांधीजी से मिलने आनेवालों के लिए महादेव भाई क्या करते थे?
उत्तर: महादेव भाई सबसे पहले मिलनेवालों से मिलते थे, उनकी समस्याएँ सुनते थे और फिर उनकी समस्याओं की संक्षिप्त टिप्पणी तैयार कर गांधीजी को दिखाते थे। इसके बाद वह आने वालों से गांधीजी की मुलाकात करवाते थे।

प्रश्न 3: महादेव भाई की साहित्यिक देन क्या है?
उत्तर: महादेव भाई देश-विदेश के अग्रगण्य समाचार-पत्र में गांधी जी की प्रतिदिन की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते रहते थे। उन्होंने ‘सत्य का प्रयोग’ का अंग्रेज़ी अनुवाद किया जो कि गांधीजी की आत्मकथा थी। वे प्रतिदिन डायरी लिखते थे यह साहित्यक देन डायरी और अनगिनत अभ्यास पुस्तकें आज भी मौजूद हैं। शरद बाबू, टैगोर आदि की कहानियों का भी अनुवाद किया, ‘यंग इंडिया’ में लेख लिखे।

प्रश्न 4: महादेव भाई की अकाल मृत्यु का कारण क्या था?
उत्तर: महादेव भाई बेहद गर्मी में वर्धा से पैदल चलकर सेवाग्राम आते थे और वापस भी जाते थे। 11 मील रोज गर्मी में पैदल चलने से उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा और इसके कारण उनकी अकाल मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5: महादेव भाई के लिखे नोट के विषय में गांधीजी क्या कहते थे?
उत्तर: महादेव भाई के द्वारा लिखित नोट बहुत ही सुंदर और इतने शुद्ध होते थे कि उनमें कॉमी और मात्रा की भूल और छोटी गलती भी नहीं होती थी। गांधी जी दूसरों से कहते कि अपने नोट महादेव भाई के लिखे नोट से ज़रूर मिला लेना।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60) शब्दों  लिखिए –

प्रश्न 1: पंजाब में फ़ौजी शासन ने क्या कहर बरसाया?
उत्तर: पंजाब में फ़ौजी शासन ने काफी आतंक मचाया। पंजाब के अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्हें उम्र कैद की सज़ा देकर काला पानी भेज दिया गया। 1919 में जलियाँवाला बाग में सैकड़ों निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया। ‘ट्रिब्यून’ के संपादक श्री कालीनाथ राय को 10 साल की जेल की सज़ा दी गई।

प्रश्न 2: महादेव जी के किन गुणों ने उन्हें सबका लाड़ला बना दिया था?
उत्तर: महादेव भाई गांधी जी के लिए पुत्र के समान थे। वे गांधी का हर काम करने में रुचि लेते थे। गांधी जी के साथ देश भ्रमण तथा विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। वे गांधी जी की गतिविधियों पर टिप्पणी करते थे। महादेव जी की लिखावट बहुत सुंदर, स्पष्ट थी। वे इतना शुद्ध लिखते थे कि उसमें मात्रा और कॉमा की भी अशुधि नहीं होती थी। वे पत्रों का जवाब जितनी शिष्टता से देते थे, उतनी ही विनम्रता से लोगों से मिलते थे। वे विरोधियों के साथ भी उदार व्यवहार करते थे। उनके इन्हीं गुणों ने उन्हें सभी का लाडला बना दिया।

प्रश्न 3: महादेव जी की लिखावट की क्या विशेषताएँ थीं ?
उत्तर: महादेव जी की लिखावट बहुत सुंदर थी। उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था। उनके लिखे नोटों में कॉमा- हलंत तक की गलती नही होती थी। वाइसराय को जाने वाले पत्र गांधीजी हमेशा महादेव जी से ही लिखाते थे। उनका लेखन सबको मंत्रमुग्ध कर देता था। बड़े-बड़े सिविलियन और गवर्नर कहा करते थे कि सारी ब्रिटिश सर्विसों में उनके समान अक्षर लिखने वाला कोई नहीं था।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −

प्रश्न 1: ‘अपना परिचय उनके ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देने में वे गौरवान्वित महसूस करते थे।’
उत्तर: लेखक गांधीजी के निजी सचिव की निष्ठा, समर्पण और उनकी प्रतिभा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि वे स्वयं को गाँधीजी का निजी सचिव ही नहीं बल्कि एक ऐसा सहयोगी, ऐसा मित्र मानते थे जो सदा उनके साथ परछाई की तरह रहे। वे गांधीजी की हर गतिविधि में उनका साथ देते थे। उन पर टीका टिप्पणी भी करते थे। यहां तक कि गांधीजी अपने हर पत्र जो कि वायसराय को भेजे जाने होते थे, उन्हें महादेव से ही लिखवाना पसंद करते थे। इस कारण महादेव स्वयं को गांधीजी के ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ कहते थे, उनमें गौरव का अनुभव था।

प्रश्न 2: इस पेशे में आमतौर पर स्याह को सफ़ेद और सफ़ेद को स्याह करना होता था।
उत्तर: लेखक का तात्पर्य सफ़ेद से अच्छे कार्यों से है व स्याह से बुरे कार्यों से है। एक वकील के पेशे में उसका काम गलत को सही और सही को गलत साबित करना होता है। बुरे कामों को भी सही करार दे दिया जाता है तथा सही को भी  तमाम सबूतों और गवाहों के माध्यम से गलत साबित किया कर दिया जाता है। इस पेशे में पूरी तरह सच्चाई से काम नहीं होता। मकसद केवल जीत होती है इसलिए गाँधीजी ने इस पेशे को छोड़ दिया था।

प्रश्न 3: देश और दुनिया को मुग्ध करके शुक्रतारे की तरह ही अचानक अस्त हो गए।
उत्तर: महादेव जी को एक शुक्रतारे की तरह माना गया है। जिस प्रकार शुक्रतारे की आयु लघु होती है, उसी प्रकार महादेव जी भी अकाल ही मृत्यु को प्राप्त हो गए थे पर शुक्रतारे की ही भाँति वे अपने लघु जीवन की छाप हर दिल पर छोड़ गए। उन्होंने ऐसे-ऐसे कार्य किए जिससे लोग उनके जाने के बाद भी उन्हें याद करते रहे।

प्रश्न 4: उन पत्रों को देख देखकर दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय लंबी साँस उसाँस लेते रहते थे।
उत्तर: महादेव जी द्वारा लिखे पत्र बेहद अद्वितीय व अद्भुत होते थे। उनकी लिखावट बहुत ही सुन्दर थी व उनके लेखन में अल्पविराम तक की गलती नहीं होती थी। गाँधीजी जो भी पत्र वाइसराय को उनसे लिखवाकर भेजते थे तो वे सभी इतने प्रभावित होते थे कि लम्बी साँसे लेने लगते थे।

भाषा अध्यन

प्रश्न 1: ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्दों का निर्माण कीजिए–

  • सप्ताह – साप्ताहिक
  • साहित्य – __________
  • व्यक्ति    –  __________
  • राजनीति –  __________
  • अर्थ –   __________                 
  • धर्म –  __________
  • मास –  __________

 उत्तर: 

  • सप्ताह  – साप्ताहिक
  • साहित्य – साहित्यिक
  • व्यक्ति – वैयक्तिक
  • राजनीति – राजनीतिक  
  • अर्थ – आर्थिक                
  • धर्म – धार्मिक
  • मास – मासिक

प्रश्न 2: नीचे दिए गए उपसर्गों का उपयुक्त प्रयोग करते हुए शब्द बनाइए − 
अ, नि, अन, दुर, वि, कु, पर, सु, अधि

  • आर्य –  __________
  • डर –  __________
  • क्रय –  __________    
  • उपस्थित –  __________
  • नायक –  __________
  • आगत –  __________
  • मार्ग –  __________
  • लोक –  __________
  • भाग्य –  __________

उत्तर:

  • आर्य – अनार्य
  • डर – निडर
  • क्रय – विक्रय
  • उपस्थित – अनुपस्थित   
  • नायक – अधिनायक 
  • आगत – स्वागत
  • मार्ग – कुमार्ग
  • लोक –  परलोक
  • भाग्य – सौभाग्य

प्रश्न 3: निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −

  • आड़े हाथों लेना –  __________
  • दाँतों तले अँगुली दबाना –  __________
  • लोहे के चने चबाना –  __________
  • अस्त हो जाना –  __________
  • मंत्र-मुग्ध करना –  __________

उत्तर:

  • आड़े हाथों लेना: चोर के पकड़े जाने पर पुलिस ने उसे आड़े हाथों लिया।
  • दाँतों तले अंगुली दबाना: जंगल सफ़ारी के दौरान ‘बाघ’ के आने की आवाज़ सुनकर सभी लोगों ने अपने दाँतों तले अंगुली दबा ली।    
  • लोहे के चने चबाना: कारगिल के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना को लोहे के चने चबाने पड़े।
  • अस्त हो जाना: भारतीय वैज्ञानिकों की अथक मेहनत के कारण अब ‘कोरोना’ नामक महामारी का सूर्य अस्त होने वाला है।
  • मंत्र-मुग्ध करना: अटल जी ने विदेश में हिंदी भाषण देकर भारतियों को मन्त्र-मुग्ध कर दिया।

प्रश्न 4: निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए −

  • वारिस –  __________
  • मुकाम –  __________
  • तालीम –  __________
  • जिगरी –  __________
  • फ़र्क –  __________
  • गिरफ़्तार –  __________

उत्तर:

  • वारिस – वंश, उत्तराधिकारी
  • मुकाम – लक्ष्य, मंज़िल
  • तालीम –  शिक्षा, ज्ञान, सीख
  • जिगरी  –  पक्का, घनिष्ठ
  • फ़र्क  –  अंतर, भेद
  • गिरफ़्तार  –  कैद, बंदी

प्रश्न 5: उदाहरण के अनुसार वाक्य बदलिए − 
उदाहरण: गाँधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।
गाँधीजी महादेव भाई को अपना वारिस कहा करते थे।

  1. महादेव भाई अपना परिचय ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देते थे।
  2. पीड़ितों के दल-के-दल ग्रामदेवी के मणिभवन पर उमड़ते रहते थे।
  3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकलते थे।
  4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते थे।
  5. गांधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे।

उत्तर:

  1. महादेव भाई अपना परिचय पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में दिया करते थे।
  2. पीड़ितों के दल-के-दल गामदेवी के भवन पर उमड़ा करते थे।
  3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकला करते थे।
  4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधी जी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी किया करते थे।
  5. गांधी जी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाया करते थे।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1: गांधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर: 
विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2: जलियाँवाला बाग में कौन-सी घटना हुई थी? जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर:
 देश को स्वतंत्रता दिलाने के प्रयास में जलियाँवाला बाग में एक आम सभा आयोजित की गई थी। इसमें हजारों लोग शामिल हुए। इस सभा में बच्चे, बूढ़े, नवयुवक, स्त्री-पुरुष ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लोग शांतिपूर्वक सभा कर रहे थे, तभी जनरल डायर ने उपस्थित जनसमूह पर गोली चलाने का निर्देश दे दिया। इस नरसंहार में हजारों लोग मारे गए। इस दिन को भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में काले दिन के रूप में जाना जाता है। इससे देश में अंग्रेजों के प्रति घृणा तथा स्वतंत्रता प्राप्ति की ललक और प्रगाढ़ हो उठी।

प्रश्न 3: अहमदाबाद में बापू के आश्रम के विषय में चित्रात्मक जानकारी एकत्र कीजिए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4: सूर्योदय के 2-3 घंटे पहले पूर्व दिशा में या सूर्यास्त के 2-3 घंटे बाद पश्चिम दिशा में एक खूब चमकाता हुआ ग्रह दिखाई देता है, वह शुक्र ग्रह है। छोटी दूरबीन से इसकी बदलती हुई कलाएँ देखी जा सकती हैं, जैसे चंद्रमा की कलाएँ।
उत्तर: 
छात्र शुक्र ग्रह को देखकर इसकी कलाएँ स्वयं देखें।

प्रश्न 5: वीराने में जहाँ बत्तियाँ न हों वहाँ अँधेरी रात में जब आकाश में चाँद भी दिखाई न दे रहा हो तब शुक्र ग्रह (जिसे हम शुक्र तारा भी कहते हैं) के प्रकाश से अपने साए को चलते हुए देखा जा सकता है। कभी अवसर मिले तो इसे स्वयं अनुभव करके देखिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं ऐसा अनूठा अनुभव करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: सूर्यमंडल में नौ ग्रह हैं। शुक्र सूर्य से क्रमशः दूरी के अनुसार दूसरा ग्रह है और पृथ्वी तीसरा। चित्र सहित परियोजना पुस्तिका में अन्य ग्रहों के क्रम लिखिए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2: ‘स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी का योगदान’ विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर: 
छात्र उक्त विषय पर स्वयं परिचर्चा का आयोजन करें।

प्रश्न 3: भारत के मानचित्र पर निम्न स्थानों को दर्शाएँ-
अहमदाबाद, जलियाँवाला बाग (अमृतसर), कालापानी (अंडमान), दिल्ली, शिमला, बिहार, उत्तर प्रदेश।

उत्तर:

04. वैज्ञानिक चेतना के वाहक: चन्द्र शेखर वेंकट रमन –अध्याय समाधान

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर एक-दो पंक्तियों  में दीजिए – 

प्रश्न 1: रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा और क्या थे?
उत्तर: रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी होने के साथ-साथ एक जिज्ञासु वैज्ञानिक और कुशल शोधकर्ता भी थे।

प्रश्न 2: समुद्र को देखकर रामन् के मन में कौन-सी दो जिज्ञासाएँ उठीं?
उत्तर: समुद्र को देखकर रामन् के मन में उठने वाली दो जिज्ञासाएँ थीं-

  • समुद्र का रंग नीला क्यों होता है?
  • समुद्र का रंग नीला ही होता है, और कुछ क्यों नहीं ?


प्रश्न 3: रामन् के पिता ने उनमें किन विषयों की सशक्त नींव डाली?
उत्तर: रामन् के पिता ने उनमें गणित और भौतिकी विषयों की सशक्त नींव डाली।

प्रश्न 4: वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् क्या करना चाहते थे?
उत्तर: वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् यह बताना चाहते थे कि भारतीय वीणा, मृदंगम् आदि वाद्ययंत्र विदेशी पियानो आदि की तुलना में घटिया नहीं हैं।

प्रश्न 5: सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे रामन् की क्या भावना थी?
उत्तर: 
सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे भावना यह थी कि वे अध्ययन के साथ-साथ शोध एवं प्रयोगों से अपनी जिज्ञासा शांत करने तथा विज्ञान के प्रचार-प्रसार की थी।

प्रश्न 6: ‘रामन् प्रभाव’ की खोज के पीछे कौन-सा सवाल हिलोरें ले रहा था?
उत्तर: ‘रामन् प्रभाव’ की खोज के पीछे यह सवाल हिलोरें ले रहा था कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है?

प्रश्न 7: प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने क्या बताया?
उत्तर: प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने बताया कि प्रकाश अति सूक्ष्म कणों की तीव्र धारा के समान है। इन अति सूक्ष्म कणों की तुलना उन्होंने बुलेट से की है।

प्रश्न 8: रामन् की खोज ने किन अध्ययनों को सहज बनाया?
उत्तर: रामन् की खोज ने अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्ययन को सहज बना दिया।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए –

प्रश्न 1: कॉलेज के दिनों में रामन् की दिली इच्छा क्या थी?
उत्तर: 
रामन् ने कॉलेज के दिनों से ही शोधकार्यों में रुचि लेना शुरू कर दिया था। उनकी दिली इच्छा थी कि वे अपना सारा जीवन शोधकार्यों को ही समर्पित कर दें।

प्रश्न 2: वाद्ययंत्रों पर की गई खोजों से रामन् ने कौन-सी भ्रांति तोड़ने की कोशिश की?
उत्तर: रामन् ने वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर खोज करके इस भ्रांति को तोड़ा कि विदेशी वाद्ययंत्रों की ध्वनियाँ भारतीय वाद्ययंत्रों की तुलना में अधिक उन्नत हैं और भारतीय वाद्ययंत्र उनसे घटिया हैं।

प्रश्न 3: रामन् के लिए नौकरी संबंधी कौन-सा निर्णय कठिन था?
उत्तर: रामन् से जब आशुतोष मुखर्जी ने उनसे सरकारी नौकरी को छोड़कर कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर का पद लेने के लिए आग्रह किया तो यह उनके लिए कठिन समस्या बन गई। उस समय रामन् जिस सरकारी पद पर थे उसकी हैसियत बहुत अधिक थी और वहां पर सुविधाएं भी बहुत मिलती थीं परंतु कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद की ना तो उतनी उस समय हैसियत थी और ना ही इतनी सुविधाएं मिलती थीं, अतः उनके लिए यह बहुत ही कठिन निर्णय था।

प्रश्न 4: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को समय-समय पर किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?
उत्तर: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को समय-समय पर निम्नलिखित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:

  • 1924 में उन्हें रॉयल सोसाइटी की सदस्यता प्रदान की गई।
  • 1920 में उन्हें सर की उपाधि दी गई।
  • 1930 में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
  • रॉयल सोसाइटी का ह्यूज पदक प्रदान किया गया।
  • सोवियत संघ का अंतरराष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार मिला।


प्रश्न 5: रामन् को मिलनेवाले पुरस्कारों ने भारतीय-चेतना को जाग्रत किया। ऐसा क्यों कहा गया है?
उत्तर: रामन् को मिलने वाले पुरस्कारों ने भारतीयों के अंदर से अवधारणा को निकाल दिया कि वे अंग्रेजों से किसी मायने में कम है। उन्होंने विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को भी एक मार्ग दिखाया। रामन् को मिलने वाले पुरस्कारों ने भारतीय चेतना को जागृत किया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50 -60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1: रामन् के प्रारंभिक शोधकार्य को आधुनिक हठयोग क्यों कहा गया है?
उत्तर: रामन् के प्रारंभिक शोध कार्य को आधुनिक हठ योग इसलिए कहा गया है क्योंकि वे एक सरकारी अफसर थे, इसलिए उनकी दिनचर्या बहुत व्यस्त थी। लेकिन वे जब भी फुर्सत पाते तो इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस की प्रयोगशाला में काम करते। उपकरणों के अभाव में उनकी वैज्ञानिक एवं अनुसंधान रुचि से वंचित नहीं हो सके।

प्रश्न 2: रामन् की खोज ‘रामन् प्रभाव’ क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: रामन् प्रभाव वह प्रभाव है जो रावण के उस प्रश्न के उत्तर के रूप में आया था जो उनके मस्तिष्क में तब कौन था जब वे समुद्र की यात्रा पर थे किस समुद्र के पानी का रंग नीला ही क्यों होता है? इस प्रभाव के अनुसार प्रकाश एकवर्णीय किरण है यदि वह इसी तरह लिया ठोस रावेदार पदार्थ से गुजरती है तो वह या तो ऊष्मा को ग्रहण करती है या उसका त्याग करती हैं इस प्रकार उसके वर्ण में परिवर्तन आ जाता है।

प्रश्न 3: ‘रामन् प्रभाव’ की खोज से विज्ञान के क्षेत्र में कौन-कौन से कार्य संभव हो सके?
उत्तर: “रामन् प्रभाव” की खोज से विज्ञान के क्षेत्र में निम्नलिखित कार्य संभव हो सके:

  • विभिन्न पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन सहज हो गया।
  • पदार्थों की आंतरिक संरचना जानने के बाद अब उनका प्रयोगशाला में कृत्रिम उत्पादन संभव हो सका।
  • रामन् स्पेक्ट्रोस्कोपी का विकास हुआ जो एक अत्याधुनिक त्रुटि रहित तकनीक है।


प्रश्न 4: देश को वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन प्रदान करने में सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के शोधपत्रों एवं उन्हें मिले पुरस्कारों से भारतीयों में भी विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जागी है। अब लोगों को भरोसा हो गया कि भारतीय भी कुछ कर सकते हैं। उनका जीवन विज्ञान के प्रति एक समर्पित कहानी के रूप में उभरा, जिसने कई युवाओं को आकर्षित किया। उन्होंने बेंगलुरु में रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट नामक शोध संस्थान की स्थापना की। भौतिक शास्त्र में अनुसंधान के लिए इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स नामक शोध पत्र का आरंभ किया। करंट साइंस नामक पत्रिका भी शुरू की। भारत में वैज्ञानिक चेतना और दृष्टिकोण के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिए।

प्रश्न 5: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन से प्राप्त होने वाले संदेश को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन से हमें यह संदेश प्राप्त होता है कि परिस्थिति चाहे जो भी हो हमें अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए और पूर्ण मेहनत से उसे प्राप्त करने का उपयोग करना चाहिए।किसी भी सुख सुविधा से बढ़कर हमारे लिए देश हित होना चाहिए। हमें एक उत्कृष्ट दृष्टा होना चाहिए एवं इसके साथ ही एक जिज्ञासु मनुष्य भी होना चाहिए जो अपने आसपास हो रही घटनाओं पर प्रश्न उठा सके।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न 1: उनके लिए सरस्वती की साधना सरकारी सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण थी।
उत्तर: यह कथन सर वेंकट रामन् के बारे में है, जिसका आशय यह है कि उन्होंने अपनी सारी सुख सुविधाएं छोड़कर बच्चों को विद्यादान देना उचित समझा। जो उनकी विद्या अर्थात माता सरस्वती में आस्था का प्रमाण है।

प्रश्न 2: हमारे पास ऐसी न जाने कितनी ही चीज़ें बिखरी पड़ी हैं, जो अपने पात्र की तलाश में हैं।
उत्तर: सर रामन् ने वाद्य यंत्रों पर शोध किया, उनके पीछे की विज्ञान को उजागर किया एवं जल पर रामन् प्रभाव की खोज कर दुनिया को यह संदेश दिया कि जो भी हमारे आस पास हो रहा है उसके पीछे कोई न कोई विज्ञान अवश्य है। जिसे हमें उजागर करना है और विश्व को एक नया ज्ञान प्रदान करना है।

प्रश्न 3: यह अपने आपमें एक आधुनिक हठयोग का उदाहरण था।
उत्तर: डॉ. रामन् सरकारी नौकरी करते हुए भी बहू बाजार स्थित प्रयोगशाला जाते थे। उस प्रयोगशाला में कामचलाऊ उपकरणों तथा इच्छाशक्ति द्वारा अपने शोध कार्यो को संपन्न करते थे। इससे लेखक ने अपने आपमें एक आधुनिक हठयोग का उदाहरण बताया है।

(घ) उपयुक्त शब्द का चयन करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कॉपी, इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ इंडिया साइंस, फिलॉसफिकल मैगजीन, भौतिकी ,रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट

प्रश्न 1: रामन् का पहला शोध पत्र ____ में प्रकाशित हुआ था।
उत्तर: 
रामन् का पहला शोध पत्र फिलोसॉफिकल मैगजीन में प्रकाशित हुआ था।

प्रश्न 2: रामन् की खोज ___ के क्षेत्र में क्रांति के समान थी।
उत्तर:
 रामन् की खोज भौतिकी के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी।

प्रश्न 3: कोलकाता की मामूली सी प्रयोगशाला का नाम_____ था।
उत्तर:
 कोलकाता की मामूली सी प्रयोगशाला का नाम इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस था।

प्रश्न 4: रामन् द्वारा स्थापित शोध संस्थान ____ नाम से जाना जाता है।
उत्तर: 
रामन् द्वारा स्थापित शोध संस्थान रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 5: पहले पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए____ का सहारा लिया जाता था।
उत्तर: 
पहले पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन करने के लिए इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का सहारा लिया जाता था।

भाषा अध्यन

प्रश्न 1: नीचे कुछ समानदर्शी शब्द दिए जा रहे हैं जिनका अपने वाक्य में इस प्रकार प्रयोग करें कि उनके अर्थ का अंतर स्पष्ट हो सके।
(क) प्रमाण – ………………………..
(ख) प्रणाम – ………………………..
(ग) धारणा – ………………………..
(घ) धारण – ………………………..
(ङ) पूर्ववर्ती – ………………………..
(च) परवर्ती – ………………………..
(छ) परिवर्तन – ………………………..
(ज) प्रवर्तन – ………………………..

उत्तर: 
(क) प्रमाण: प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता है?
(ख) प्रणाम: अपने से बड़ों को प्रणाम करें।
(ग) धारणा: किसी के विषय में पहले से बनाई गई धारणा हमेशा सच नहीं होती।
(घ) धारण: सन्यासी हमेशा गेरुआ वस्त्र धारण करते हैं।
(ड़) पूर्ववर्ती: भारत के पूर्ववर्ती इलाके संवेदनशील हैं।
(च) परवर्ती: इस अध्यापक के परवर्ती अध्यापक इतने अच्छे नहीं थे।
(छ) परिवर्तन: समाज में परिवर्तन आना उसके विकास के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
(ज) प्रवर्तन: सम्राटों ने अपने-अपने समय में मुद्राओं का प्रवर्तन किया।


प्रश्न 2: रेखांकित शब्द के विलोम शब्द का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए −
(क) मोहन के पिता मन से सशक्त होते हुए भी तन से ………….. हैं।
(ख) अस्पताल के अस्थायी कर्मचारियों को ………….. रुप से नौकरी दे दी गई है।
(ग) रामन् ने अनेक ठोस रवों और …………… पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।
(घ) आज बाज़ार में देशी और ………………. दोनों प्रकार के खिलौने उपलब्ध हैं।
(ङ) सागर की लहरों का आकर्षण उसके विनाशकारी रुप को देखने के बाद ………..में परिवर्तित हो जाता है।

उत्तर:
(क) मोहन के पिता मन से सशक्त होते हुए भी तन से अशक्त हैं।
(ख) अस्पताल के अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी रुप से नौकरी दे दी गई है।
(ग) रामन् ने अनेक ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।
(घ) आज बाज़ार में देशी और विदेशी दोनों प्रकार के खिलौने उपलब्ध हैं।
(ङ) सागर की लहरों का आकर्षण उसके विनाशकारी रुप को देखने के बाद विकर्षण में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 3: नीचे दिए उदाहरण में रेखांकित अंश में शब्द-युग्म का प्रयोग हुआ है −
उदाहरण : चाऊतान को गानेबजानेमें आनंद आता है।
उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित शब्द-युग्मों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
सुख-सुविधा ………………………..
अच्छा-खासा ………………………..
प्रचार-प्रसार ……………………….
आस-पास ……………………….

उत्तर:
सुख-सुविधा: माँ अपने बच्चे की सुख-सुविधा का ध्यान रखती हैं ।
अच्छा-खासा: नेताजी का विश्व-भर में अच्छा-खासा प्रभाव था।
प्रचार-प्रसार: विज्ञापन प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम है।
आस-पास: हमें आस-पास की घटनाओं से परिचित होना चाहिए।

प्रश्न 4: प्रस्तुत पाठ में आए अनुस्वार और अनुनासिक शब्दों को निम्न तालिका में लिखिए −
उत्तर:

प्रश्न 5: पाठ में निम्नलिखित विशिष्ट भाषा प्रयोग आए हैं। सामान्य शब्दों में इनका आशय स्पष्ट कीजिए −
घंटों खोए रहते, स्वाभाविक रुझान बनाए रखना, अच्छा-खासा काम किया, हिम्मत का काम था, सटीक जानकारी, काफ़ी ऊँचे अंक हासिल किए, कड़ी मेहनत के बाद खड़ा किया था, मोटी तनख्वाह
उत्तर:

  1. घंटों खोए रहते: बहुत देर तक ध्यान में लीन रहते।
  2. स्वाभाविक रुझान बनाए रखना: सहज रूप से रुचि बनाए रखना।
  3. अच्छा खासा काम किया: अच्छी मात्रा में ढेर सारा काम किया।
  4. हिम्मत का काम था: कठिन काम था।
  5. सटीक जानकारी: बिल्कुल सही और प्रामाणिक जानकारी।
  6. काफ़ी ऊँचे अंक हासिल किए: बहुत अच्छे अंक पाए।
  7. कड़ी मेहनत के बाद खड़ा किया था: बहुत मेहनत करने के बाद शोध संस्थान की स्थापना की थी।
  8. मोटी तनख्वाह: बहुत अधिक आय या वेतन।


प्रश्न 6: पाठ के आधार पर मिलान कीजिए −

उत्तर:


प्रश्न 7: पाठ में आए रंगों की सूची बनाइए। इनके अतिरिक्त दस रंगों के नाम और लिखिए।
उत्तर: पाठ में आए रंग: बैंजनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल
दस रंगों के नाम: काला, सफेद, गुलाबी, कत्थई, फिरोजी, भूरा, लाल, खाकी, मोंगिया, स्लेटी

प्रश्न 8: नीचे दिए गए उदाहरण ‘ही’ का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।
उदाहरण: उनके ज्ञान की सशक्त नींव उनके पिता ने ही तैयार की थी।
उत्तर:
1. राम के कारण ही यह कार्य संभव हो सका।
2. तुम ही जाकर ले आओ।
3. उस छात्र ने ही मोहन को मारा।
4. गीता ही अकेली जा रही है।
5. केवल वह ही जाएगा।

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: विज्ञान को मानव विकास में योगदान’ विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: छात्र कक्षा में चर्चा करें:

  • कि विज्ञान के बिना मानव जीवन कैसा था?
  • बिना आग और बिजली के जीवन कैसा था?
  • बिना सड़कों और पुलों के जीवन कैसा था?
  • बिना स्वचालित वाहनों और मोटरकारों के जीवन कैसा था?
  • बिना समाचार पत्र, रेडियो, टी.वी. के जीवन कैसा था?
  • बिना वायुयान, टेलीफोन और मोबाइल के जीवन कैसा था?


प्रश्न 2: भारत के किन-किन वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार मिला है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:

1. सर चंद्रशेखर वेंकटरमने  – भौतिकी में
2. वेंकटरमन रामकृष्ण – रसायनशास्त्र में
3. डॉ. हरगोविंद खुराना  –  चिकित्साशास्त्र में
4. डॉ. चंद्रशेखर सुब्रह्मण्यम  – भौतिकी में
5. सर रोनाल्ड रॉस – फिजियोलोजी में

प्रश्न 3: न्यूटन के आविष्कार के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर: 
न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के बारे में सारी दुनिया जानती है। हालांकि उनकी सबसे पहली खोज परावर्तक दूरबीन के बारे में थी। उनकी दूरबीन केवल 6 इंच लंबी थी किंतु यह 30 इंच लंबी सामान्य दूरबीन से भी अधिक दूर तथा सुस्पष्ट देख सकती थी। उनकी दूरबीन का मॉडल आज भी प्रयोग में लाया जाता है। न्यूटन ने गणित के क्षेत्र में कैलकुलस नामक गणन विधि भी विकसित की।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों की सूची उनके कार्यों/योगदानों के साथ बनाइए।
उत्तर:

  1. सर चंद्रशेखर वेंकटरमन – ठोस और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरणों के प्रभाव का अध्ययन किया।
  2. होमी जहाँगीर भाभा – परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग की दिशा में काम किया। ‘टाटा इंस्टिट्यूट’ और ‘भाभा रिसर्च सेंटर’ की स्थापना की।
  3. जगदीशचंद्र बोस – सिद्ध किया कि पौधों में भी संवेदना होती है। पौधों की धड़कन रिकॉर्ड करने के लिए यंत्र बनाया।
  4. मेघनाद साहा – नाभिकीय भौतिकी और आयोनाइजेशन सूत्र पर कार्य किया।
  5. मोक्षागुंडम विश्वश्वरैया – प्रबुद्ध इंजीनियर, जिन्होंने कृष्णराजा सागर बाँध का डिज़ाइन बनाया और सिंचाई के नए तरीके खोजे। भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स जैसे कई उद्योग विकसित किए।
  6. सत्येंद्र नाथ बोस – भारतीय भौतिकविद्, जो आइंस्टाइन के सिद्धांतों के लिए प्रसिद्ध हैं। एक परमाणु के छोटे भाग का नाम ‘बोसोन’ उनके नाम पर रखा गया।
  7. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर – भौतिकी और एप्लाइड गणित में कार्य किया। उनकी खोजें तारों की उत्पत्ति समझने में मददगार हैं।
  8. विक्रम साराभाई – अंतरिक्ष विज्ञान में कार्य किया, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। ‘थुम्बा’ में पहला राकेट लॉन्चिंग स्टेशन शुरू किया। उनके प्रयास से स्पूतनिक लॉन्च किया गया।
  9. श्री निवास रामानुजम – महान गणितज्ञ, जिन्होंने संख्यात्मक सिद्धांत दिए।
  10. डॉ. शांतिस्वरूप भटनागर – भारत में 12 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ स्थापित कीं और खाद्य पदार्थों के संसाधन पर काम किया।
  11. हरगोविंद खुराना – चिकित्सा और शरीर विज्ञान के क्षेत्र में कार्य किया। प्रोटीन निर्माण आनुवांशिकी पर शोध किया।


प्रश्न 2: भारत के मानचित्र में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली और कलकत्ता (कोलकाता) की स्थिति दर्शाएँ।
उत्तर:


प्रश्न 3: पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में हुए उन वैज्ञानिक खोजों, उपकरणों की सूची बनाइए, जिसने मानव जीवन बदल दिया हैं।
उत्तर: 
पिछले बीस-पच्चीस वर्षों में इतनी वैज्ञानिक खोजें और जीवन को सुखमय बनाने वाले उपकरण हमारे सामने आए हैं, जिन्होंने मनुष्य के रहन-सहन का ढंग ही बदल दिया है। मोबाइल फ़ोन इनमें से एक है। इसके अलावा कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, डी.वी.डी, एल.ई.डी. टेलीविजन, वातानुकूलित आवागमन के साधन, चिकित्सा उपकरण आदि हैं।

03. तुम कब जाओगे, अतिथि –अध्याय समाधान

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

प्रश्न 1:अतिथि कितने दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है?
उत्तर: अतिथि चार दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है।

प्रश्न 2: कैलेंडर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही हैं?
उत्तर: कैलेंडर की तारीखें अपनी सीमा में नम्रता से फड़फड़ा रही हैं। मानों वे भी अतिथि को बता रही हों कि तुम्हें यहाँ आए। दो-तीन दिन बीत चुके हैं।

प्रश्न 3: पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?
उत्तर:
 पति ने स्नेह से भीगी मुस्कान के साथ गले मिलकर और पत्नी ने आदर से नमस्ते करके उनका स्वागत किया।

प्रश्न 4: दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई?
उत्तर: 
दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की गई।

प्रश्न 5: तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
उत्तर: 
अतिथि ने तीसरे दिन कहा कि वह अपने कपड़े धोबी को देना चाहता है।

प्रश्न 6: सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?
उत्तर: 
सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर लेखक उच्च मध्यमवर्गीय डिनर से खिचड़ी पर आ गया। यदि इसके बाद भी अतिथि नहीं गया, तो लेखक को उपवास की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए।

प्रश्न 1: लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
उत्तर: लेखक अपने अतिथि को भावभीनी विदाई देना चाहता था। वह चाहता था कि अतिथि को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन तक जाया जाए। उसे बार-बार रुकने का आग्रह किया जाए, किंतु वह न रुके।

प्रश्न 2: पाठ में आए निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए:
(क) अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।
(ख) अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।
(ग) लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें।
(घ) मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी।
(ङ) एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।
उत्तर: (क) बिना सूचना दिए अतिथि को आया देख लेखक परेशान हो गया। वह सोचने लगा कि अतिथि की आवभगत में उसे अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा जो उसकी जेब के लिए भारी पड़ने वाला है।
(ख) अतिथि देवता होता है पर अपना देवत्व बनाए रखकरे। यदि अतिथि अगले दिन वापस नहीं जाता है और मेजबान के लिए पीड़ा का कारण बनने लगता है तो मनुष्य न रहकर राक्षस नज़र आने लगता है। देवता कभी किसी के दुख का कारण नहीं बनते हैं।
(ग) जब अतिथि आकर समय से नहीं लौटते हैं तो मेजबान के परिवार में अशांति बढ़ने लगती है। उस परिवार का चैन खो जाता है। पारिवारिक समरसता कम होती जाती है और अतिथि का ठहरना बुरा लगने लगता है।
(घ) पहले दिन के बाद से ही लेखक को अतिथि का रुकना भारी पड़ रहा था। दूसरा तीसरा दिन तो जैसे तैसे बीता पर अगले दिन वह सोचने लगा कि यदि अतिथि पाँचवें दिन रुका तो उसे गेट आउट कहना पड़ेगा।
(ड़) देवता कुछ ही समय ठहरते हैं और दर्शन देकर चले जाते हैं। अतिथि कुछ ही समय के लिए देवता होते हैं, ज्यादा दिन ठहरने पर मनुष्य के लिए वह भारी पड़ने लगता है तब किसी भी तरह अतिथि को जाना ही पड़ता है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50 – 60 शब्दों में) लिखिए।

प्रश्न 1: कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: तीसरे दिन मेहमान का यह कहना कि वह धोबी से कपड़े धुलवाना चाहता है, एक अप्रत्याशित आघात था। यह फरमाइश एक ऐसी चोट के समान थी जिसकी लेखक ने आशा नहीं की थी। इस चोट का लेखक पर यह प्रभाव पड़ा कि वह अतिथि को राक्षस की तरह मानने लगा। उसके मन में अतिथि के प्रति सम्मान की बजाय बोरियत, बोझिलता और तिरस्कार की भावना आने लगी। वह चाहने लगा कि यह अतिथि इसी समय उसका घर छोड़कर चला जाए।


प्रश्न 2: ‘संबंधों का संक्रमण के दौर से गुज़रना’ − इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
उत्तर: संबंधों का संक्रमण दौर से गुजरने का आशय है-संबंधों में बदलाव आना। इस अवस्था में कोई वस्तु अपना मूल स्वरूप खो बैठती है और कोई दूसरा रूप ही अख्तियार कर लेती है। लेखक के घर आया अतिथि जब तीन दिन से अधिक समय रुक गया तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई। लेखक ने उससे अनेकानेक विषयों पर बातें करके विषय का ही अभाव बना लिया था। इससे चुप्पी की स्थिति बन गई, जो बोरियत लगने लगी। इस प्रकार उत्साहजनक संबंध बदलकर अब बोरियत में बदलने लगे थे।

प्रश्न 3: जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन आए?
उत्तर: जब अतिथि चार दिन के बाद भी घर से नहीं टला तो लेखक़ के व्यवहार में निम्नलिखित परिवर्तन आए:

  • उसने अतिथि के साथ मुसकराकर बात करना छोड़ दिया। मुस्कान फीकी हो गई। बातचीत भी बंद हो गई।
  • शानदार भोजन की बजाय खिचड़ी बनवाना शुरू कर दी।
  • वह अतिथि को ‘गेट आउट’ तक कहने को तैयार हो गया। उसके मन में प्रेमपूर्ण भावनाओं की जगह गालियाँ आने लगीं।

भाषा-अध्यन

प्रश्न 1: निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्याय लिखिए:
चाँद, ज़िक्र, आघात, ऊष्मा, अंतरंग।
उत्तर: 

  • चाँद: राकेश, शशि।
  • ज़िक्र: उल्लेख, वर्णन।
  • आघात: हमला, चोट।
  • ऊष्मा: गर्मी, घनिष्ठता, ताप।
  • अंतरंग: घनिष्ठ, आंतरिक।

प्रश्न 2: निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए −उत्तर:


प्रश्न 3: निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं में ‘तुम’ के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
(क) तुम अपने भारी चरण-कमलों की छाप मेरी ज़मीन पर अंकित कर चुके
(ख) तुम मेरी काफ़ी मिट्टी खोद चुके
(ग) आदर-सत्कार के जिस उच्च बिंदु पर हम तुम्हें ले जा चुके थे
(घ) शब्दों का लेन-देन मिट गया और चर्चा के विषय चुक गए
(ङ) तुम्हारे भारी-भरकम शरीर से सलवटें पड़ी चादर बदली जा चुकी और तुम यहीं हो।
उत्तर: 
छात्र स्वयं चुकना क्रिया के विभिन्न प्रयोगों को ध्यान से देखें और वाक्य से रचना को समझें।

प्रश्न 4: निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं में ‘तुम’ के प्रयोग पर ध्यान दीजिए –
(क) लॉण्ड्री पर दिए कपड़े धुलकर आ गए और तुम यहीं हो।
(ख) तुम्हें देखकर फूट पड़ने वाली मुस्कुराहट धीरे-धीरे फीकी पड़कर अब लुप्त हो गई है।
(ग) तुम्हारे भरकम शरीर से सलवटें पड़ी चादर बदली जा चुकी।
(घ) कल से मैं उपन्यास पढ़ रहा हूँ और तुम फिल्मी पत्रिका के पन्ने पलट रहे हो।
(ङ) भावनाएँ गलियों का स्वरूप ग्रहण कर रही हैं, पर तुम जा नहीं रहे।
उत्तर: 
उपर्युक्त वाक्यों में ‘तुम’ के सभी प्रयोग लेखक के घर आए अतिथि के लिए हुए हैं।

योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1: ‘अतिथि देवो भव’ उक्ति की व्याख्या करें तथा आधुनिक युग के संदर्भ में इसका आकलन करें।
उत्तर: 
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता का दर्जा दिया गया है। उसे देवता के समान मानकर उसका आदर सत्कार किया जाता है। आज के युग में मनुष्य मशीनी जीवन जी रहा है। उसके पास अपने परिवार के लिए समय नहीं रह गया है तो अतिथि के लिए समय कैसे निकाले। इसके अलावा जब अपनी जरूरतें पूरी करना कठिन हो रहा है तो अतिथि का सत्कार जेब काटने लगता है। ऐसे में मनुष्य को अतिथि से दूर ही रहना चाहिए।

प्रश्न 2: विद्यार्थी अपने घर आए अतिथियों के सत्कार का अनुभव कक्षा में सुनाएँ।
उत्तर: 
घर में मेहमान आने पर सबसे पहले मैं उन्हें अभिवादन करूँगा। इसके बाद मैं उनका परिचय जानकर ड्राइंग रूम में बैठाऊँगा। उनसे बात-चीत करूँगा। उनके पूछे जाने पर पिताजी के घर पर होने न होने के बारे में बताऊँगा। इसके साथ ही उन्हें जल लाकर दूँगा। कुछ देर बैठने के बाद उनके लिए अल्पाहार लेकर आऊँगा। इसके बाद उनके आने के उद्देश्य के बारे में पूछूँगा। यदि वे मेरी मदद चाहते हैं, तो मैं अवश्य करूँगा। अन्यथा, मैं पिताजी के आने का इंतजार करने के लिए उनसे विनम्रता से कहूँगा। यदि वे बैठना चाहेंगे तो ठीक है, नहीं तो उन्हें घर के दरवाजे तक छोड़कर उन्हें अभिवादन करके फिर पधारना कहकर वापस आ जाऊँगा।

प्रश्न 3: अतिथि के अपेक्षा से अधिक रूक जाने पर लेखक की क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ हुईं, उन्हें क्रम से छाँटकर लिखिए।
उत्तर: 
अतिथि के अपेक्षा से अधिक एक जाने पर लेखक परेशान एवं दुखी हो गया। उसने इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप-

  • अतिथि को एस्ट्रोनॉट्स के समान बताकर जल्द चले जाने के बारे में सोचा।
  • वह आतिथ्य सत्कार में होने वाले खर्च को सोचकर परेशान हो गया।
  • उसे अतिथि देवता कम, मानव और कुछ अंशों में दानवे नज़र आने लगा।
  • पाँचवें दिन रुकने पर उसने अतिथि को गेट आउट कहने तक का मन बना लिया।

02. एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा –अध्याय समाधान


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –
प्रश्न 1: अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?
उत्तर: अग्रिम दल का नेतृत्व प्रेमचंद कर रहे थे।

प्रश्न 2: लेखिका को सागरमाथा नाम क्यों अच्छा लगा?
उत्तर: सागरमाथा’ का तात्पर्य है-समुद्र का माथा अर्थात् सबसे ऊँचा स्थान। हिमालय के सबसे ऊँचे पर्वत को सागरमाथा कहना पूरी तरह सार्थक था। इसलिए लेखिका को यह नाम अच्छा लगा।

प्रश्न 3: लेखिका को ध्वज जैसा क्या लगा?
उत्तर: लेखिका को एक बड़े भारी बर्फ़ का बड़ा फूल (प्लूमपर्वत शिखर पर लहराता हुआ ध्वज जैसा लगा।

प्रश्न 4: हिमस्खलन से कितने लोगो की मृत्यु हुई और कितने लोग घायल हुए?
उत्तर:  हिमस्खलन से दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई और नौ लोग घायल हुए।

प्रश्न 5: मृत्यु के अवसाद देखकर कर्नल खुल्लर ने क्या कहा?
उत्तर: पर्वतारोहियों में से दो व्यक्तियों की मृत्यु की बात सुनकर अन्य आरोहियों के चेहरे पर आए अवसाद को देखकर कर्नल खुल्लर ने कहा, कि एवरेस्ट जैसे महान अभियान के खतरों और कभी-कभी तो मृत्यु को भी आदमी को सहज भाव से स्वीकारना चाहिए।

प्रश्न 6: रसोई सहायक की मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर: रसोई सहायक की मृत्यु जलवायु अनुकूल न होने के कारण हुई।

प्रश्न 7: कैंप- चार कहाँ और कब लगाया गया?
उत्तर: कैंप-चार 7900 मीटर ऊँची ‘साउथ कोल’ नामक जगह पर 29 अप्रैल को लगाया गया था।

प्रश्न 8: लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय किस तरह दिया?
उत्तर: लेखिका ने शेरपा कुली को अपना परिचय यह कह कर दिया कि वह बिल्कुल ही नौसिखिया है और एवरेस्ट उसका पहला अभियान है।

प्रश्न 9: लेखिका की सफलता पर कर्नल खुल्लर ने उसे किन शब्दों में बधाई दी?
उत्तर: लेखिका की सफलता पर बधाई देते हुए कर्नल खुल्लर ने कहा“मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे मातापिता को बधाई देना चाहूँगा देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में जाओगी जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा। “

लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30) शब्दों में लिखिए –
प्रश्न 1: नज़दीक से एवरेस्ट को देखकर लेखिका को कैसा लगा?
उत्तर: नज़दीक से एवरेस्ट को देखने पर लेखिका भौंचक्की रह गई। उसे टेढ़ी-मेढ़ी चोटियाँ ऐसी लग रही थीं मानो कोई बरफ़ीली नदी बह रही हो।

प्रश्न 2: डॉ. मीनू मेहता ने क्या जानकारियाँ दीं?
उत्तर: डॉ. मीनू मेहता ने लेखिका को अल्युमिनियम की सीढ़ियों से अस्थायी पुलों का निर्माण करने, लट्टों और रस्सियों का उपयोग करने, बर्फ़ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधने तथा अग्रिम दल के अभियांत्रिकीकार्यों की विस्तृत जानकारी दी।

प्रश्न 3: तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ़ में क्या कहा?
उत्तर: तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ में कहा, “तुम पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो। तुम्हें तो पहले ही प्रयास में शिखर पर पहुँच जाना चाहिए।

प्रश्न 4: लेखिका को किनके साथ चढ़ाई करनी थी?
उत्तर: लेखिका को अपने दल तथा जय और मीनू के साथ चढ़ाई करनी थी। परन्तु वे लोग पीछे रह गए थे। उनके पास भारी बोझ था और वे बिना ऑक्सीजन के आ रहे थे। इस कारण उनकी गति कम हो गई थी। उनकी स्थिति देखकर लेखिका चिंतित थी।

प्रश्न 5: लोपसांग ने तंबू का रास्ता कैसे साफ़ किया?
उत्तर: लोपसांग ने तंबू का रास्ता साफ़ करने के लिए अपनी स्विस छुरी निकाली। उन्होंने लेखिका के आसपास जमे बड़े-बड़े हिमपिंडों को हटाया और लेखिका के चारों ओर जमी कड़ी बरफ़ की खुदाई किया। उन्होंने बड़ी मेहनत से लेखिका को बरफ़ की कब्र से खींच निकाला।

प्रश्न 6: साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे शुरु की?
उत्तर: साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने खाना, कुकिंग गैस तथा कुछ ऑक्सीजन सिलिण्डर इकट्ठे किए। अपने दल के दूसरे सदस्यों को मदद करने के लिए एक थर्मस में जूस और दूसरे में चाय भरने के लिए नीचे उतर गई।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नो का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1: उपनेता प्रेमचंद ने किन स्थितियों से अवगत कराया?
उत्तर: उपनेता प्रेमचंद ने अभियान दल को खंभु हिमपात की स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि उनके दल ने कैंप-एक जो हिमपात के ठीक ऊपर है, वहाँ तक का रास्ता साफ़ कर दिया है और फल बनाकर, रस्सियाँ बाँधकर तथा इंडियों से रास्ता चिन्हित कर, सभी बड़ी कठिनाइयों का जायजा ले लिया गया है। उन्होंने इस पर भी ध्यान दिलाया कि ग्लेशियर बरफ़ की नदी है और बरफ़ का गिरना अभी जारी है। हिमपात में अनियमित और अनिश्चित बदलाव के कारण अभी तक के किए गए सभी काम व्यर्थ हो सकते हैं और हमें रास्ता खोलने का काम दोबारा करना पड़ सकता है।

प्रश्न 2: हिमपात किस तरह होता है और उससे क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर: बर्फ़ के खंडों का अव्यवस्थित ढंग से गिरना ही हिमपात कहलाता है। ग्लेशियर के बहने से बर्फ में हलचल मच जाती है। इस कारण बर्फ़ की बड़ी-बड़ी चट्टानें तत्काल गिर जाती हैं। इस अवसर पर स्थिति ऐसी खतरनाक हो जाती है कि धरातल पर दरार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। अकसर बर्फ़ में गहरी-चौड़ी दरारें बन जाती हैं। हिमपात से पर्वतारोहियों की कठिनाइयाँ बहुत अधिक बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 3: लेखिका के तम्बू में गिरे बर्फ़ पिंड का वर्णन किस तरह किया गया?
उत्तर: लेखिका ने तंबू में गिरे बरफ़ के पिंड का वर्णन करते हुए कहा है कि वह ल्होत्से की बरफ़ीली सीधी ढलान पर लगाए गए नाइलान के तंबू के कैंप-तीन में थी। उसके तंबू में लोपसांग और तशारिंग उसके तंबू में थे। अचानक रात साढ़े बारह बजे उसके सिर में कोई सख्त चीज़ टकराई और उसकी नींद खुल गई। तभी एक जोरदार धमाका हुआ और उसे लगा कि एक ठंडी बहुत भारी चीज़ इसके शरीर को कुचलती चल रही थी। इससे उसे साँस लेने में कठिनाई होने लगी।

प्रश्न 4: लेखिका को देखकर ‘की’ हक्का-बक्का क्यों रह गया?
उत्तर: जय बचेंद्री पाल का पर्वतारोही साथी था। उसे भी बचेंद्री के साथ पर्वत-शिखर पर जाना था। शिखर कैंप पर पहुँचने में उसे देर हो गई थी। वह सामान ढोने के कारण पीछे रह गया था। अतः बचेंद्री उसके लिए चाय-जूस आदि लेकर उसे रास्ते में लिवाने के लिए पहुँची। जय को यह कल्पना नहीं थी कि बचेंद्री उसकी चिंता करेंगी और उसे लिवी लाने के लिए आएँगी। इसलिए जब उसने बचेंद्री पाल को चाय-जूस लिए आया देखा तो वह हक्का-बक्का रह गया।

प्रश्न 5: एवेरेस्ट पर चढ़ने के लिए कितने कैंप बनाये गए? उनका वर्णन कीजिए।
उत्तर: एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कुल 6 कैंप बनाए गए थे:

  • बेस कैंप- यह मुख्य कैंप था।
  • कैंप-1 −यह कैंप 6000 मीटर की ऊँचाई पर बनाया गया। यह हिमपात के ठीक ऊपर था। इसमें सामान जमा था।
  • कैंप-2 −यह चढ़ाई के रास्ते में था।
  • कैंप-3 −इसे ल्होत्से की बर्फ़ीली सीधी ढ़लान पर लगाया गया था। यह रंगीन नायलॉन से बना था। यहीं ल्होत्से ग्लेशियर से टूटकर बर्फ़ पिंड कैंप पर आ गिरा था।
  • कैंप-4 −यह समुद्र तट से 7900 मीटर की ऊँचाई पर था। साउथ कोल स्थान पर लगने के कारण साउथ कोल कैंप कहलाया।
  • शिखर कैंप − यह अंतिम कैंप था। यह एवरेस्ट के ठीक नीचे स्थित था।

प्रश्न 6: चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी?
उत्तर: जब बचेंद्री पाल एवरेस्ट की चोटी पर पहुँची तो वहाँ चारों ओर तेज़ हवा के कारण बर्फ़ उड़ रही थी। बर्फ़ इतनी अधिक थी कि सामने कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। पर्वत की शंकु चोटी इतनी तंग थी कि दो आदमी वहाँ एक साथ खड़े नहीं हो सकते थे। नीचे हजारों मीटर तक ढलान ही ढलान थी। अतः वहाँ अपने आपको स्थिर खड़ा करना बहुत कठिन था। उन्होंने बर्फ के फावड़े से बर्फ़ तोड़कर अपने टिकने योग्य स्थान बनाया।

प्रश्न 7: सम्मिलित अभियान में सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय बचेंद्री के किस कार्य से मिलता है।
उत्तर: एवरेस्ट पर विजय पाने के अभियान के दौरान लेखिको बचेंद्री पाल अपने साथियो ‘जय’, की ‘मीनू’ के साथ चढाई कर रही थी, परंतु वह इनसे पहले साउथ कोल कैंप पर जा पहुँची क्योंकि वे बिना ऑक्सीजन के भारी बोझ लादे चढ़ाई कर रहे थे। लेखिका ने दोपहर बाद इन सदस्यों की मदद करने के लिए एक थरमस को जूस से और दूसरे को गरम चाय से भर लिया और बरफ़ीली हवा में कैंप से बाहर निकल कर उन सदस्यों की ओर नीचे उतरने लगी। उसके इस कार्य से सहयोग एवं सहायता की भावना का परिचय मिलता है।


(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए  

प्रश्न 1: एवरेस्ट जैसे महान अभियान में खतरों को और कभी-कभी तो मृत्यु भी आदमी को सहज भाव से स्वीकार करनी चाहिए।
उत्तर: यह कथन अभियान दल के नेता कर्नल खुल्लर का है। इन शब्दों का उल्लेख उन्होंने शेरपा कुली की मृत्यु के समाचार के बाद कहा था। उन्होंने सदस्यों के उत्साहवर्धन करते हुए अभियान के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को वास्तविकता से परिचित करना चाहा। एवरेस्ट की चढ़ाई कोई आसान काम नहीं हैयह जोखिम भरा अभियान होता है। यहाँ इतने खतरे हैं कि कभी कभी मृत्यु भी हो सकती है। इसके लिए तैयार रहना चाहिए विचलित नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 2: सीधे धरातल पर दरार पड़ने का विचार और इस दरार का गहरे-चौड़े हिम-विदर में बदल जाने का मात्र खयाल ही बहुत डरावना था। इससे भी ज़्यादा भयानक इस बात की जानकारी थी कि हमारे संपूर्ण प्रयास के दौरान हिमपात लगभग एक दर्जन आरोहियों और कुलियों को प्रतिदिन छूता रहेगा।
उत्तर: इस कथन का आशय है कि हिमपात के कारण बर्फ़ के खंडो के दबाव से कई बार धरती के धरातल पर दरार पड़ जाती है। यह दरार गहरी और चौड़ी होती चली जाती है और हिम विदर में बदल जाती है यह बहुत खतरनाक होते हैं और भी ज़्यादा खतरनाक बात तब होती है जब पता रहे कि पूरे प्रयासों के बाद यह भयंकर हिमपात पर्वतारोहियों व कुलियों को परेशान करता रहेगा ।

प्रश्न 3: बिना उठे ही मैंने अपने थैले से दुर्गा माँ का चित्र और हनुमान चालीसा निकाला। मैंने इनको अपने साथ लाए लाल कपड़े में लपेटा, छोटी-सी पूजा-अर्चना की और इनको बर्फ़ में दबा दिया। आनंद के इस क्षण में मुझे अपने माता-पिता का ध्यान आया।
उत्तर: लेखिका एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचकर घुटनों के बल बैठ कर बर्फ़ पर अपना माथा लगाया और चुंबन किया। उसके बाद एक लाल कपड़े में माँ दुर्गा का चित्र और हनुमान चालीसा को लपेटा और छोटी से पूजा करके बर्फ़ में दबा दिया। इस रोमांचक यात्रा के सफलता पर वह बहुत खुश थी और सुख के क्षणों में उसने अपने माता पिता को याद किया। 

भाषा अध्यन

प्रश्न 1: इस पाठ में प्रयुक्त निम्नलिखित शब्दों की व्याख्या पाठ का संदर्भ देकर कीजिए−
निहारा है, धसकना, खिसकना, सागरमाथा, जायज़ा लेना, नौसिखिया
उत्तर:

  • निहारा है: प्रसन्नतापूर्वक देखा है।
    जब बचेंद्री पाल ने हिमालय की शोभा पर मुग्ध होकर उसे प्रशंसा के भाव से देखा तो उसके लिए निहारना’ शब्द का प्रयोग किया।
  • धसकना: नीचे को धंसना।
    जब धरती का कुछ हिस्सा नीचे की ओर दब जाता है तो उसे धसकना कहते हैं।
  • खिसकना: अपनी जगह से हटकर परे चले जाना।
    हिमपात आने पर कभी-कभी बड़े-बड़े हिमखंड खिसक जाते हैं।
  • सागरमाथा: संसार का सबसे ऊँचा स्थान।
    जिस स्थान से बचेंद्री पाल ने हिमालय की चढाई आरंभ की, वह समुद्र तल का सर्वोच्च स्थान है। इसलिए उसे समुद्र का माथा ठीक ही कहा गया है।
  • जायज़ा लेना: जाँच-परख करना।
    बचेंद्री पाल के अभियान-दल के पहुँचने से पहले एक अग्रिम दल जाता था। वह सारी परिस्थिति का जायजा लेता था।
  • नौसिखिया: नया-नया, अनजान, अनाड़ी।
    तेनजिंग के सामने बचेंद्री पाल ने स्वयं को नौसिखिया पर्वतारोही कहा।

प्रश्न 2: निम्नलिखित पंक्तियों में उचित विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए −
(क) उन्होंने कहा तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो तुम्हें तो शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए
(ख) क्या तुम भयभीत थीं
(ग) तुमने इतनी बड़ी जोखिम क्यों ली बचेंद्री

उत्तर: (क) उन्होंने कहा, “तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो। तुम्हें तो शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।’
(ख) “क्या तुम भयभीत थीं?”
(ग) “तुमने इतनी बड़ी जोखिम क्यों ली बचेंद्री ?”


प्रश्न 3: नीचे दिए उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित शब्द-युग्मों का वाक्य में प्रयोग कीजिए −
उदाहरण : हमारे पास एक वॉकी-टॉकी था।
टेढ़ी-मेढ़ी
गहरे-चौड़े
आस-पास
हक्का-बक्का
इधर-उधर
लंबे-चौड़े

उत्तर: टेढ़ी-मेढ़ी: यह पगडंडी बहुत टेढ़ी-मेढ़ी है।
गहरे-चौड़े: वहाँ गहरे-चौड़े गड्ढे थे।
आस-पास: गाँव के आस-पास खेत हैं।
हक्का-बक्का: उसको वहाँ देखकर मैं हक्का-बक्का रह गया।
इधर-उधर: इधर-उधर की बातें करना बंद करो।
लंबे-चौड़े: यहाँ बहुत लंबे-चौड़े मैदान हैं।

प्रश्न 4: उदाहरण के अनुसार विलोम शब्द बनाइए −
उदाहरण : अनुकूल − प्रतिकूल

उत्तर:


प्रश्न 5:  निम्नलिखित शब्दों में उपयुक्त उपसर्ग लगाइए −
जैसे : पुत्र − सुपुत्र
वास व्यवस्थित कूल गति रोहण रक्षित

उत्तर:


प्रश्न 6: निम्नलिखित क्रिया विशेषणों का उचित प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए −
अगले दिन, कम समय में, कुछ देर बाद, सुबह तक
(क) मैं ………….. यह कार्य कर लूँगा।
(ख) बादल घिरने के ………….. ही वर्षा हो गई।
(ग) उसने बहुत …………… इतनी तरक्की कर ली।
(घ) नाङकेसा को ………….. गाँव जाना था।

उत्तर: (क) मैं अगले दिन यह कार्य कर लूँगा।
(ख) बादल घिरने के कुछ देर बाद ही वर्षा हो गई।
(ग) उसने बहुत कम समय में इतनी तरक्की कर ली।
(घ) नाङकेसा को सुबह तक गाँव जाना था।

योग्यता विचार

प्रश्न 1: इस पाठ में आए दस अंग्रेजी शब्दों का चयन कर उनके अर्थ लिखिए।
उत्तर:

  • बेस कैम्प – आधारभूत या मुख्य पड़ाव
  • ग्लेशियर – हिमनद, बर्फीली नदी
  • स्ट्रेचर – मरीजों को लाने-ले जाने का उपकरण
  • साउथ – दक्षिण
  • कुकिंग गैस – खाना पकाने वाली गैस
  • ऑक्सीजन – प्राणवायु, जीवनदायिनी गैस
  • कुर्सी – बैठा उठने वाला
  • वॉकी-टॉकी – बात करने का एक उपकरण
  • सिलिंडर – बेलनाकार बर्तन

प्रश्न 2: पर्वतारोहण से संबंधित दस चीजों के नाम लिखिए।
उत्तर: पर्वतारोहण से जुड़ी चीजें:

  1. रस्सी 
  2. फावड़ा 
  3. ऑक्सीजन टैंक 
  4. बैकपैक 
  5. वॉकी-टॉकी 
  6. थर्मस
  7. एल्यूमिनियम की सीढ़ी 
  8. स्लीपिंग बैग 
  9. चाकू 
  10. स्ट्रेचर 

प्रश्न 3: तेनजिंग शेरपा की पहली चढ़ाई के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर: तेनजिंग नॉर्गे शेरपा एक प्रसिद्ध पर्वतारोही थे, जिन्होंने 29 मई 1953 को सर एडमंड हिलेरी के साथ माउंट एवरेस्ट की पहली सफल चढ़ाई की थी। यह पहली बार था जब किसी ने दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर पहुंचने में सफलता प्राप्त की थी। तेनजिंग शेरपा का जन्म 1914 में नेपाल के खुम्बु क्षेत्र में हुआ था, और उन्हें पर्वतारोहण का बहुत अच्छा अनुभव था। वे अपने अद्वितीय पर्वतारोहण कौशल और साहस के लिए जाने जाते हैं।

प्रश्न 4: इस पर्वत का नाम ‘एवरेस्ट’ क्यों पड़ा? जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर: माउंट एवरेस्ट का नाम सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया है, जो भारतीय सर्वेक्षण के प्रमुख थे। 1865 में इस पर्वत को एवरेस्ट नाम दिया गया था। इससे पहले, इसे ‘पार्बत’ और ‘सागरमाथा’ जैसे नामों से जाना जाता था। सर जॉर्ज एवरेस्ट ने इस पर्वत का सर्वेक्षण किया और इसकी ऊँचाई को मापने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसलिए, उनकी उपलब्धियों के सम्मान में इस पर्वत का नाम ‘एवरेस्ट’ रखा गया।परियोजना कार्य

प्रश्न 1: आगे बढ़ती भारतीय महिलाओं की पुस्तक पढ़कर उनसे संबंधित चित्रों को संग्रह कीजिए एवं संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करके लिखिए
(क) पी. टी. उषा
(ख) आरती साहा
(ग) किरण बेदी
उत्तर: (क) 
पी.टी. ऊषा भारत की श्रेष्ठ धाविका थी। उसने एशियार्ड खेलों में कई स्वर्ण पदक जीते व ओलंपिक खेलों में चौथे स्थान पर रही।
(ख) आरती साहा इंग्लिश चैनल पार करने वाली पहली भारतीय और एशियाई महिला थीं। उन्होंने 42 किलोमीटर का यह चैनल 16 घंटे 20 मिनट में तैरकर पार किया।
(ग) किरण बेदी भारतीय पुलिस सेवा में अपनी ईमानदारी और साहस के कारण जानी जाती है। आजकल वे भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने में लगी हुई हैं।

प्रश्न 2: रामधारी सिंह दिनकर का लेख-‘हिम्मत और जिंदगी’ पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3: ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर:

  1. पहला छात्र-मनुष्य मन की खुशी चाहता है। इसलिए मनुष्य कहलाता है।
  2. दूसरा छात्र-मनुष्य तन का कष्ट उठाकर भी मन को प्रसन्न करना चाहता है।
  3. तीसरा छात्र-तन और मन दोनों का परस्पर गहरा संबंध है।
  4. चौथा छात्र-मन ही इंजन है जिसके आधार पर तन गति करता है।

01. दुःख का अधिकार –अध्याय समाधान

पृष्ठ संख्या. 17 
प्रश्न अभ्यास 

मौखिक 

निम्नलिखित प्रश्नो के उत्तर एक-दो  पंक्तियों में दीजिए –

प्रश्न.1. किसी की पोशाक देखकर हमें क्या पता चलता है?
उत्तर. किसी की पोशाक को देखकर हमें समाज में उसके अधिकार और दर्जे का पता चलता है।

प्रश्न.2. खरबूजे बेचने वाली स्त्री से कोई ख़रबूज़े क्यों नही खरीद रहा था?
उत्तर. ख़रबूज़े बेचने वाली स्त्री से कोई ख़रबूज़े इसलिए नही खरीद रहा था क्योंकि वह मुँह छिपाए सिर को घुटनो पर रख फफक-फफककर रो रही थी।

प्रश्न.3. उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?
उत्तर. उस स्त्री को देखकर लेखक के मन में एक व्यथा सी उठी और वो उसके रोने का कारण जानने का उपाय सोचने लगा।

प्रश्न.4. उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था?
उत्तर. उस स्त्री के लड़के की मृत्यु खेत में पके खरबूज चुनते समय साँप के काटने से हुई ।

प्रश्न.5. बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नही देता? 
उत्तर. बुढ़िया के परिवार में एकमात्र कमाने वाला बेटा मर गया था। ऐसे में पैसे वापस न मिलने के डर के कारण कोई उसे उधार नही देता।


लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए –

प्रश्न.1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?
उत्तर. 

  • मनुष्य के जीवन में पोशाक मात्र एक शरीर ढकने का साधन नही है बल्कि समाज में उसका दर्जा निश्चित करती है। 
  • पोशाक से मनुष्य की हैसियत, पद तथा समाज में उसके स्थान का पता चलता है। पोशाक मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारती है।

प्रश्न.2. पोशाक हमारे हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?
उत्तर. पोशाक हमारे लिए बंधन और अड़चन तब बन जाती है जब हम अपने से कम दर्ज़े या कम पैसे वाले व्यक्ति के साथ उसके दुख बाँटने की इच्छा रखते हैं। लेकिन उसे छोटा समझकर उससे बात करने में संकोच करते हैं और उसके साथ सहानुभूति तक प्रकट नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न.3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नही जान पाया?
उत्तर. लेखक की पोशाक रोने का कारण जान पाने की बीच अड़चन थी। वह फुटपाथ पर बैठकर उससे पूछ नही सकता था। इससे उसके प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती। इस वजह से वह उस स्त्री के रोने का कारण नही जान पाया।

प्रश्न.4. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?
उत्तर.  भगवाना शहर के पास डेढ़ बीघा भर ज़मीन में खरबूज़ों को बोकर परिवार का निर्वाह करता था। खरबूज़ों की डालियाँ बाज़ार में पहुँचाकर लड़का स्वयं सौदे के पास बैठ जाता था।


प्रश्न 5. लड़के के मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी?
उत्तर. बुढ़िया बहुत गरीब थी। लड़के की मृत्यु पर घर में जो कुछ था सब कुछ खर्च हो गया। लड़के के छोटे-छोटे बच्चे भूख से परेशान थे, बहू को तेज़ बुखार था। ईलाज के लिए भी पैसा नहीं था। इन्हीं सब कारणों से वह दूसरे ही दिन खरबूज़े बेचने चल दी।

प्रश्न.6. बुढ़िया के दुःख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
उत्तर. लेखक को बुढ़िया के दुःख को देखकर अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद इसलिए आई क्योंकि उसके बेटे का भी देहांत हुआ था। दोनों के शोक मानाने का ढंग अलग था। धनी परिवार के होने की वजह से वह उसके पास शोक मनाने को असीमित समय था और बुढ़िया के पास शोक का अधिकार नही था।


(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न.1. बाजार के लोग खरबूजे बेचने वाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर. बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचने वाली स्त्री के बारे में तरह-तरह की बातें कह रहे थे। कोई घृणा से थूककर बेहया कह रहा था, कोई उसकी नीयत को दोष दे रहा था, कोई कमीनी, कोई रोटी के टुकड़े पर जान देने वाली कहता, कोई कहता इसके लिए रिश्तों का कोई मतलब नहीं है, परचून वाला लाला कह रहा था, इनके लिए अगर मरने-जीने का कोई मतलब नही है तो दुसरो का धर्म ईमान क्यों ख़राब कर रही है।

प्रश्न.2. पास-पड़ोस की दूकान से पूछने पर लेखक को क्या पता चला?
उत्तर. पास-पड़ोस की दूकान से पूछने पर लेखक को पता चला कि बुढ़िया का जवान बेटा सांप के काटने से मर गया है। वह परिवार में एकमात्र कमाने वाला था। उसके घर का सारा सामान बेटे को बचाने में खर्च हो गया। घर में दो पोते भूख से बिलख रहे थे। इसलिए वो खरबूजे बेचने बाजार आई है।


प्रश्न.3. लड़के को बचाने के लिए बुढ़िया ने क्या- क्या उपाय किए ?
उत्तर. लड़के के मृत्यु होने पर बुढ़िया पागल सी हो गयी। वह जो कर सकती थी उसने किया। वह ओझा को बुला लायी | झाड़ना-फूंकना हुआ नागदेवता की पूजा भी हुई। घर में जितना अनाज था दान दक्षिणा में समाप्त हो गया। परन्तु उसका बेटा बच न सका।

प्रश्न.4. लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा कैसे लगाया?
उत्तर. लेखक उस पुत्र-वियोगिनी के दु:ख का अंदाज़ा लगाने के लिए पिछले साल अपने पड़ोस में पुत्र की मृत्यु से दु:खी माता की बात सोचने लगा जिसके पास दु:ख प्रकट करने का अधिकार तथा अवसर दोनों था परन्तु यह बुढ़िया तो इतनी असहाय थी कि वह ठीक से अपने पुत्र की मृत्यु का शोक भी नहीं मना सकती थी।


प्रश्न.5. इस पाठ का शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. 

  • इस पाठ का शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ पूरी तरह से सार्थक सिद्ध होता है क्योंकि यह अभिव्यक्त करता है कि दु:ख प्रकट करने का अधिकार व्यक्ति की परिस्थिति के अनुसार होता है। यद्यपि दु:ख का अधिकार सभी को है। 
  • गरीब बुढ़िया और संभ्रांत महिला दोनों का दुख एक समान ही था। दोनों के पुत्रों की मृत्यु हो गई थी परन्तु संभ्रांत महिला के पास सहूलियतें थीं, समय था। इसलिए वह दु:ख मना सकी परन्तु बुढ़िया गरीब थी, भूख से बिलखते बच्चों के लिए पैसा कमाने के लिए निकलना था। 
  • उसके पास न सहूलियतें थीं न समय। वह दु:ख न मना सकी। उसे दु:ख मनाने का अधिकार नहीं था। इसलिए शीर्षक पूरी तरह सार्थक प्रतीत होता है।

पृष्ठ संख्या. 18

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न.1.जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है।
उत्तर. यहाँ लेखक ने पोशाक की तुलना वायु की लहरों से की है। जिस प्रकार पतंग के कट जाने पर वायु की लहरें उसे कुछ समय के लिए उड़ाती रहती हैं, एकाएक धरती से टकराने नही देतीं ठीक उसी प्रकार किन्हीं ख़ास परिस्थतियों में पोशाक हमें नीचे झुकने से रोकती हैं।

प्रश्न.2. इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई,धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है।
उत्तर. इस वाक्य में गरीबी पर चोट की गयी है। गरीबों को कमाने के लिए रोज घर से निकलना पड़ता है । परन्तु लोग कहते हैं उनके लिए रिश्ते-नाते कोई मायने नही रखते हैं। वे सिर्फ पैसों के गुलाम होते हैं। रोटी कमाना उनके लिए सबसे बड़ी बात होती है।

प्रश्न.3. शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और… दुखी होने का भी एक अधिकार होता है।
उत्तर. 

  • शोक करने, गम मनाने के लिए सहूलियत चाहिए। यह व्यंग्य अमीरी पर है क्योंकि अमीर लोगों के पास दुख मनाने का समय और सुविधा दोनों होती हैं। इसके लिए वह दु:ख मनाने का दिखावा भी कर पाता है और उसे अपना अधिकार समझता है। 
  • जबकि गरीब विवश होता है। वह रोज़ी रोटी कमाने की उलझन में ही लगा रहता है। उसके पास दु:ख मनाने का न तो समय होता है और न ही सुविधा होती है। इसलिए उसे दु:ख का अधिकार भी नहीं होता है।

भाषा अध्यन

2. निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए −

उत्तर.
पृष्ठ संख्या. 19

प्रश्न.3. निम्नलिखित उदाहरण के अनुसार पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए –

उत्तर.


प्रश्न.4. पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए −बंद दरवाज़े खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना।
उत्तर.

  • बंद दरवाज़े खोल देना − प्रगति में बाधक तत्व हटने से बंद दरवाज़े खुल जाते हैं।
  • निर्वाह करना − परिवार का भरण-पोषण करना
  • भूख से बिलबिलाना − बहुत तेज भूख लगना (व्याकुल होना)
  • कोई चारा न होना − कोई और उपाय न होना
  • शोक से द्रवित हो जाना − दूसरों का दु:ख देखकर भावुक हो जाना।

प्रश्न.5. निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −

उत्तर.
(क)
(i) छन्नी-ककना − मकान बनाने में उसका छन्नी-ककना तक बिक गया।
(ii) अढ़ाई-मास − वह विदेश में अढ़ाई-मास ही रहा।
(iii) पास-पड़ोस − पास-पड़ोस अच्छा हो तो समय अच्छा कटता है।
(iv) दुअन्नी-चवन्नी − आजकल दुअन्नी-चवन्नी को कौन पूछता है।
(v) मुँह-अँधेरे − वह मुँह-अँधेरे उठ कर चला गया।
(vi) झाड़-फूँकना − गाँवों में आजकल भी लोग झाँड़ने-फूँकने पर विश्वास करते हैं।
(ख)
(i) फफक-फफककर − बच्चे फफक-फफककर रो रहे थे।
(ii) तड़प-तड़पकर − आंतकियों के लोगों पर गोली चलाने से वे तड़प-तड़पकर मर रहे थे।
(iii) बिलख-बिलखकर − बेटे की मृत्यु पर वह बिलख-बिलखकर रो रही थी।
(iv) लिपट-लिपटकर − बहुत दिनों बाद मिलने पर वह लिपट-लिपटकर मिली।


प्रश्न.6. निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इस प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए :

उत्तर.
(क)

(ख)