12. Short & Long Question Answers: गंगा की कहानी

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1: गंगा नदी का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तर: गंगा का जन्म हिमालय की गोद में गंगोत्री के गोमुख से हुआ। यहाँ से वह नन्ही धारा के रूप में बहना शुरू करती है। लोग इसे भागीरथी भी कहते हैं।

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प्रश्न 2: देवप्रयाग में गंगा से कौन-सी नदी मिलती है?
उत्तर: देवप्रयाग में अलकनंदा नदी गंगा से मिलती है। यहाँ से गंगा की धारा और भी बड़ी हो जाती है।

प्रश्न 3: हरिद्वार में कौन-सा प्रसिद्ध मेला लगता है?
उत्तर: हरिद्वार में बारह साल बाद कुंभ मेला लगता है। इस मेले में देशभर से लाखों लोग आते हैं।

प्रश्न 4: गंगानहर कहाँ से निकलती है और उसका क्या उपयोग है?
उत्तर: गंगानहर हरिद्वार से निकलती है। यह लाखों एकड़ खेतों को पानी देती है और किसानों के लिए बहुत उपयोगी है।

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प्रश्न 5: कानपुर के कारखानों में गंगा का पानी किस काम आता है?
उत्तर: कानपुर के कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने गंगा से पानी लेते हैं। इस तरह गंगा उद्योगों की ज़रूरतें पूरी करती है।

प्रश्न 6: प्रयागराज में गंगा का संगम किस नदी से होता है?
उत्तर: प्रयागराज में गंगा का संगम यमुना नदी से होता है। यहाँ हर बारह साल में कुंभ मेला भी लगता है।

प्रश्न 7: गंगा नदी का जल कब गंदा हो जाता है?
उत्तर: गंगा का जल शहरों और कारखानों का गंदा पानी मिलने से गंगा का जल दूषित हो जाता है। काशी तक पहुँचते-पहुँचते जल मटमैला हो जाता है।

प्रश्न 8: गंगा की धाराएँ बंगाल में जाकर क्या रूप लेती हैं?
उत्तर: बंगाल में गंगा की दो धाराएँ बनती हैं। एक धारा बांग्लादेश में पद्मा कहलाती है और दूसरी कोलकाता में हुगली कहलाती है।

प्रश्न 9: गंगा को भारतवासी क्यों पवित्र मानते हैं?
उत्तर: भारतवासी गंगा को माँ की तरह पूजते हैं। वे मानते हैं कि गंगा का जल जीवनदायिनी और पवित्र है।

प्रश्न 10: गंगोत्री में गंगा का क्या महत्व है?
उत्तर: गंगोत्री में गंगा का भव्य मंदिर है। यहाँ देशभर से लोग दर्शन करने आते हैं और इसे बहुत पवित्र मानते हैं।

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प्रश्न 1: गंगा की यात्रा गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी तक कैसे होती है?
उत्तर: गंगा का जन्म गंगोत्री के गोमुख से होता है। फिर वह देवप्रयाग, ऋषिकेश और हरिद्वार से होकर बहती है। हरिद्वार से गंगानहर निकलती है जो खेतों को सींचती है। कानपुर में गंगा उद्योगों को पानी देती है और प्रयागराज में यमुना से मिलती है। वाराणसी और बिहार से होकर गंगा पश्चिम बंगाल पहुँचती है। अंत में उसकी दो धाराएँ बनकर बंगाल की खाड़ी में समा जाती हैं।

प्रश्न 2: गंगा के किनारे बसे नगरों और तीर्थों के बारे में लिखिए।
उत्तर: गंगा के किनारे कई प्रसिद्ध नगर और तीर्थ बसे हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार पवित्र तीर्थ हैं। हरिद्वार में कुंभ मेला लगता है। कानपुर में बड़े-बड़े उद्योग हैं जो गंगा से पानी लेते हैं। प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम होता है। वाराणसी भी गंगा के किनारे बसा एक बड़ा तीर्थ है।

प्रश्न 3: गंगा को जीवनदायिनी नदी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: गंगा खेतों को पानी देकर अन्न उगाने में मदद करती है। वह कारखानों और लोगों की ज़रूरतें पूरी करती है। साधु-संतों और लोगों को तीर्थस्थलों पर जल देती है। गंगानहर लाखों खेतों को सींचती है। गंगा लोगों की आस्था और संस्कृति से जुड़ी है। इसी कारण इसे जीवनदायिनी नदी कहा जाता है।

प्रश्न 4: गंगा का जल कैसे दूषित होता है और लोग इसे साफ करने के लिए क्या कर रहे हैं?
उत्तर: गंगा का जल कारखानों और शहरों के गंदे पानी से दूषित हो जाता है। गंगोत्री से निकलने पर यह स्वच्छ और चमकीला होता है, लेकिन काशी पहुँचते-पहुँचते मटमैला हो जाता है। अब लोग इसकी स्वच्छता के लिए प्रयास कर रहे हैं। सरकार और समाज मिलकर सफाई अभियान चला रहे हैं। उद्देश्य यही है कि गंगा का जल फिर से निर्मल और पवित्र बने।

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प्रश्न 5: गंगा से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: गंगा हमें सिखाती है कि जल जीवन के लिए बहुत जरूरी है। हमें नदियों और पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। गंगा की तरह हमें भी सबका भला करना चाहिए। अगर हम नदियों को गंदा करेंगे तो यह हमारे लिए ही हानिकारक होगा। लगातार प्रयास से सब कुछ फिर से साफ और सुंदर बनाया जा सकता है। हमें गंगा को स्वच्छ और सुरक्षित रखना चाहिए।

11. Short & Long Question Answers: हमारे ये कलामंदिर

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प्रश्न 1: कहानी “हमारे ये कलामंदिर” किसके बारे में है?
उत्तर: यह कहानी अजंता और एलोरा की गुफाओं के बारे में है। इसमें निशा अपनी मौसी के साथ इन गुफाओं को देखने जाती है। वहाँ की कला और सुंदरता का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 2: निशा और मौसी कहाँ छुट्टियाँ बिताने गईं?
उत्तर: वे दशहरे की छुट्टियों में अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखने गईं। वहाँ उन्होंने प्राचीन गुफाएँ, मंदिर और सुंदर चित्र देखे।

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प्रश्न 3: अजंता की गुफाएँ किस स्थान पर बनी हुई हैं?
उत्तर: अजंता की गुफाएँ एक पहाड़ी पर बनी हुई हैं। वहाँ पास में एक नदी और रंग-बिरंगे फूलों से भरी घाटी है।

प्रश्न 4: अजंता की गुफाओं में कौन-से चित्र बने हैं?
उत्तर: वहाँ गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े चित्र बने हैं। इसके साथ ही पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और लोगों के चित्र भी बनाए गए हैं।

प्रश्न 5: इन चित्रों की खासियत क्या है?
उत्तर: इन चित्रों के रंग सैकड़ों साल बाद भी चमकते हैं। इन्हें देखकर लगता है जैसे चित्र बोल उठेंगे।

प्रश्न 6: एलोरा की गुफाओं में कौन-सी मूर्तियाँ और मंदिर हैं?
उत्तर: एलोरा की गुफाओं में बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़े मंदिर और मूर्तियाँ हैं। ये सब पहाड़ को काटकर बनाई गई हैं।

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प्रश्न 7: कैलाश मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
उत्तर: कैलाश मंदिर एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है। यह बहुत अद्भुत और अनोखी कलाकृति है।

प्रश्न 8: निशा को गुफाएँ देखकर कैसा लगा?
उत्तर: निशा बहुत आश्चर्यचकित और खुश हुई। उसे गर्व हुआ कि हमारे देश की कला इतनी महान है।

प्रश्न 9: इन गुफाओं के चित्र किससे बनाए गए थे?
उत्तर: ये चित्र पत्तों, फूलों और जड़ी-बूटियों से बने रंगों से बनाए गए थे। इस कारण वे आज भी सुंदर और चमकदार हैं।

प्रश्न 10: कहानी से हमें क्या पता चलता है?
उत्तर: कहानी से हमें पता चलता है कि भारत की कला बहुत पुरानी और महान है। हमारे पूर्वज बहुत कुशल कलाकार थे।

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प्रश्न 1: अजंता की गुफाओं की सुंदरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर: अजंता की गुफाएँ पहाड़ी पर बनी हैं और उनके पास एक नदी बहती है। गुफाओं के सामने सूर्य की किरणें पड़ती हैं जिससे वे चमकती हैं। अंदर दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन, पेड़-पौधे और पशु-पक्षियों के चित्र बने हैं। चित्र बहुत सजीव लगते हैं। ये चित्र लगभग 2000 साल पुराने हैं लेकिन आज भी चमकदार हैं। इन्हें देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो जाता है।

प्रश्न 2: निशा और मौसी की यात्रा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: दशहरे की छुट्टियों में निशा और मौसी अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखने गईं। वे रेल से संभाजीनगर पहुँचीं और वहाँ से बस से अजंता गईं। उन्होंने वहाँ सुंदर गुफाएँ, नदी, फूल और चित्र देखे। अगले दिन वे एलोरा की गुफाओं में पहुँचीं। वहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन मंदिर और मूर्तियाँ थीं। कैलाश मंदिर देखकर वे बहुत प्रभावित हुईं।

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प्रश्न 3: एलोरा की गुफाओं के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर: एलोरा संभाजीनगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। यहाँ लगभग 30 गुफाएँ और मंदिर हैं। इन गुफाओं में बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी मूर्तियाँ हैं। कैलाश मंदिर यहाँ का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यह पूरी एक ही चट्टान को तराशकर बनाया गया है। इसकी विशालता और सुंदरता देखकर हर कोई चकित रह जाता है।

प्रश्न 4: इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारत की कला और संस्कृति बहुत महान है। हमारे पूर्वजों ने कठिन परिश्रम से गुफाएँ, मंदिर और सुंदर चित्र बनाए। हमें अपनी इस पुरानी धरोहर को सँभालकर रखना चाहिए। इससे हमें अपने इतिहास और संस्कृति पर गर्व होता है। यह भी सिखाता है कि कला का महत्व हमेशा बना रहता है।

प्रश्न 5: अजंता और एलोरा की गुफाएँ हमारे इतिहास और संस्कृति को कैसे दर्शाती हैं?
उत्तर: अजंता की गुफाओं में बुद्ध के जीवन से जुड़े चित्र और प्राकृतिक दृश्य बने हैं। एलोरा की गुफाओं में बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म की मूर्तियाँ और मंदिर हैं। कैलाश मंदिर एक अद्भुत कलाकृति है। इन गुफाओं से हमें पता चलता है कि हमारे पूर्वज कितने कुशल कलाकार थे। ये गुफाएँ हमारे इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली धरोहर हैं। इसलिए हमें इन पर गर्व करना चाहिए।

10. Short & Long Question Answers: तीन मछलियाँ

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प्रश्न 1: कहानी “तीन मछलियाँ” किस ग्रंथ से ली गई है?
उत्तर: यह कहानी पंचतंत्र से ली गई है। इसमें तीन मछलियाँ और उनके स्वभाव का वर्णन है। कहानी हमें समझदारी और मेहनत का महत्व बताती है।


प्रश्न 2: तीनों मछलियों के नाम क्या थे?
उत्तर: तीनों मछलियों के नाम अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति और यद्भविष्य थे। ये तीनों आपस में अच्छी दोस्त थीं और सरोवर में रहती थीं।

प्रश्न 3: अनागतविधाता का स्वभाव कैसा था?
उत्तर: अनागतविधाता बहुत बुद्धिमान थी। वह हमेशा पहले से सोचकर किसी भी समस्या का उपाय कर लेती थी। इसी कारण वह संकट से बच गई।

प्रश्न 4: प्रत्युत्पन्नमति ने मुसीबत से कैसे बचाव किया?
उत्तर: प्रत्युत्पन्नमति ने मरे होने का नाटक किया। मछुआरों ने उसे मरा समझकर पानी में फेंक दिया और वह बच गई।

प्रश्न 5: यद्भविष्य का व्यवहार कैसा था?
उत्तर: यद्भविष्य आलसी थी। वह भाग्य पर भरोसा करती थी और समय पर कोई उपाय नहीं करती थी। इसी कारण वह मुसीबत में फंस गई।

प्रश्न 6: मछुआरे सरोवर में क्यों आए थे?
उत्तर: मछुआरे सरोवर में मछलियाँ पकड़ने आए थे। उन्होंने तय किया कि अगली सुबह जाल डालकर मछलियाँ ले जाएँगे।


प्रश्न 7: अनागतविधाता ने सभा में क्या सलाह दी?
उत्तर: अनागतविधाता ने कहा कि सबको दूसरा सरोवर खोजकर वहाँ चले जाना चाहिए। इस तरह मछुआरों के जाल से बचा जा सकता है।

प्रश्न 8: प्रत्युत्पन्नमति ने अनागतविधाता की बात क्यों नहीं मानी?
उत्तर: प्रत्युत्पन्नमति ने सोचा कि वह समय आने पर कोई उपाय कर लेगी। इसलिए उसने सरोवर छोड़कर जाने से इनकार कर दिया।

प्रश्न 9: अनागतविधाता क्यों बच गई?
उत्तर: अनागतविधाता ने पहले ही मछुआरों का खतरा समझ लिया था। उसने समय रहते दूसरा सरोवर खोज लिया और वहीं चली गई। इस कारण वह बच गई।

प्रश्न 10: यद्भविष्य का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: यद्भविष्य ने कोई योजना नहीं बनाई। मछुआरों ने उसे पकड़ लिया और वह अपनी जान नहीं बचा सकी।

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प्रश्न 1: कहानी की तीनों मछलियों के स्वभाव में क्या अंतर था?
उत्तर: तीनों मछलियों के स्वभाव अलग-अलग थे। अनागतविधाता समझदार थी और पहले से उपाय कर लेती थी। प्रत्युत्पन्नमति की बुद्धि तेज थी और वह समय आने पर उपाय करती थी। लेकिन यद्भविष्य आलसी थी और केवल भाग्य पर भरोसा करती थी। इन तीनों के स्वभाव से हमें अलग-अलग परिणाम देखने को मिलते हैं।


प्रश्न 2: जब मछुआरे सरोवर में आए तो तीनों मछलियों ने क्या निर्णय लिया?
उत्तर: मछुआरे जाल डालने की योजना बना रहे थे। यह सुनकर तीनों मछलियाँ आपस में विचार करने लगीं। अनागतविधाता ने तुरंत सरोवर छोड़ने की सलाह दी। प्रत्युत्पन्नमति ने कहा कि वह यहीं रहेगी और समय आने पर उपाय करेगी। यद्भविष्य ने कहा कि जो होगा, भाग्य में लिखा है। इस तरह तीनों ने अलग-अलग निर्णय लिए।

प्रश्न 3: प्रत्युत्पन्नमति ने संकट से कैसे छुटकारा पाया?
उत्तर: जब मछुआरों ने जाल डाला, तो प्रत्युत्पन्नमति भी उसमें फँस गई। लेकिन उसने चतुराई से अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और मरे होने का नाटक किया। मछुआरे उसे मरा समझकर पानी में फेंक गए। इस तरह वह अपनी तेज बुद्धि से संकट से बच गई।

प्रश्न 4: यद्भविष्य की गलती क्या थी और उसका क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: यद्भविष्य बहुत आलसी थी और केवल भाग्य पर भरोसा करती थी। उसने न तो पहले से कोई योजना बनाई और न ही समय पर कोई उपाय किया। उसने सोचा कि शायद मछुआरे आए ही नहीं। लेकिन जब मछुआरे आए तो वह उनके जाल में फँस गई। इस कारण उसकी जान नहीं बच सकी।

प्रश्न 5: इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि संकट से बचने के लिए पहले से सोच-विचार और योजना बनाना जरूरी है। मेहनत और समझदारी हमेशा लाभ देती है। जो लोग समय पर सही निर्णय लेते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं। लेकिन आलस्य और भाग्य पर भरोसा करने से मुसीबत आ सकती है। इसलिए हमें हमेशा सतर्क और चतुर रहना चाहिए।

09. Short & Long Question Answers: न्याय

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प्रश्न 1: कहानी “न्याय” किसने लिखी है?
उत्तर: कहानी “न्याय” प्रसिद्ध लेखक विष्णु प्रभाकर जी ने लिखी है। इसमें राजकुमार सिद्धार्थ के दयालु स्वभाव को दिखाया गया है।

प्रश्न 2: राजकुमार सिद्धार्थ किस स्थान के राजकुमार थे?
उत्तर: सिद्धार्थ कपिलवस्तु के राजकुमार थे। वे बहुत दयालु और करुणा से भरे हुए थे।

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प्रश्न 3: हंस को किसने घायल किया और कैसे?
उत्तर: हंस को सिद्धार्थ के चचेरे भाई देवदत्त ने घायल किया। उसने उस पर तीर चलाया था।

प्रश्न 4: सिद्धार्थ ने घायल हंस के लिए क्या किया?
उत्तर: सिद्धार्थ ने हंस को अपनी गोद में उठाया। उन्होंने तीर निकालकर उसकी मरहम-पट्टी की।

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प्रश्न 5: देवदत्त क्यों कहता था कि हंस उसका है?
उत्तर: देवदत्त कहता था कि हंस पर तीर उसने चलाया है। इसलिए वह उसका शिकार है।

प्रश्न 6: सिद्धार्थ ने देवदत्त को हंस क्यों नहीं दिया?
उत्तर: सिद्धार्थ ने कहा कि हंस उनकी शरण में आया है। उन्होंने उसे बचाया है, इसलिए वह उनका है।

प्रश्न 7: हंस पर झगड़े का फैसला किसके पास ले जाया गया?
उत्तर: यह मामला कपिलवस्तु के महाराज शुद्धोदन के पास ले जाया गया। वहाँ मंत्री ने न्याय किया और फैसला सुनाया।

प्रश्न 8: सभा में हंस ने किसे चुना और क्यों?
उत्तर: हंस स्वयं उड़कर सिद्धार्थ की गोद में बैठ गया। क्योंकि सिद्धार्थ ने उसे बचाया था।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 9: मंत्री ने हंस का फैसला कैसे किया?
उत्तर: मंत्री ने कहा कि हंस उसी का है जिसके पास वह खुद जाना चाहे। हंस सिद्धार्थ के पास गया।

प्रश्न 10: सिद्धार्थ के मित्र (सखा) ने घायल हंस की मदद के लिए क्या किया?
उत्तर: सिद्धार्थ के सखा ने तुरंत राजवैद्य के पास जाकर मरहम लाने का काम किया। इससे पता चलता है कि वह भी दयालु और मददगार था।

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प्रश्न 1: कहानी “न्याय” की शुरुआत कैसे होती है?
उत्तर: कहानी की शुरुआत कपिलवस्तु के राज-उद्यान से होती है। वहाँ सिद्धार्थ अपने मित्र के साथ बैठे थे। वे प्रकृति की सुंदरता की बातें कर रहे थे। तभी अचानक एक हंस पर तीर लगता है। वह घायल होकर सिद्धार्थ की गोद में गिर जाता है। सिद्धार्थ करुणा से उसकी देखभाल करते हैं।

प्रश्न 2: देवदत्त और सिद्धार्थ के बीच विवाद क्यों हुआ?
उत्तर: विवाद तब हुआ जब हंस घायल होकर सिद्धार्थ के पास आया। देवदत्त ने दावा किया कि हंस उसका है क्योंकि उसने उस पर तीर चलाया था। सिद्धार्थ ने कहा कि जिसने बचाया वही असली मालिक है। दोनों अपनी बात पर अड़े रहे। इसलिए मामला राजा के दरबार में पहुँचा।

प्रश्न 3: सभा में क्या हुआ और हंस ने किसे चुना?
उत्तर: सभा में पहले देवदत्त ने हंस को बुलाया, लेकिन वह डरकर नहीं गया। फिर सिद्धार्थ ने प्यार से उसे पुकारा। हंस तुरंत उड़कर उनकी गोद में बैठ गया। यह देखकर सभी प्रसन्न हो गए। इससे साबित हुआ कि दया और प्रेम सबसे बड़े हैं।

प्रश्न 4: कहानी के अंत में क्या निर्णय हुआ?
उत्तर: कहानी के अंत में मंत्री ने कहा कि हंस ने स्वयं सिद्धार्थ को चुना है। महाराज ने इस निर्णय को स्वीकार किया। सभा में जय-जयकार हुई। सिद्धार्थ ने हंस को प्रेम से गले लगाया। वहीं देवदत्त शर्मिंदा होकर चुप रह गया। इस तरह करुणा और न्याय की जीत हुई।

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प्रश्न 5: कहानी “न्याय” से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: यह कहानी हमें बताती है कि जीव-जंतुओं पर दया करना जरूरी है। दूसरों को चोट पहुँचाना या मारना गलत है। जो दूसरों की रक्षा करता है वही सच्चा नायक होता है। सिद्धार्थ का व्यवहार हमें अहिंसा का मार्ग दिखाता है। न्याय हमेशा दया और करुणा से जुड़ा होना चाहिए।

08. Short & Long Question Answers: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा

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प्रश्न 1: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?
उत्तर: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है। यह उद्यान अपनी सुंदरता और जानवरों के लिए प्रसिद्ध है।

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प्रश्न 2: काजीरंगा किस जानवर के लिए दुनिया भर में मशहूर है?
उत्तर: काजीरंगा एक सींग वाले गैंडे के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ गैंडों की संख्या सबसे अधिक है।

प्रश्न 3: अरूप चाचा ने पहली बार गैंडे को देखकर कैसा अनुभव किया?
उत्तर: उन्होंने पहली बार गैंडे को देखकर बहुत खुशी और उत्साह महसूस किया। गैंडे की मोटी चमड़ी उन्हें कवच जैसी लगी।

प्रश्न 4: महावत ने गैंडे के बारे में कौन-सी कहानी सुनाई?
उत्तर: महावत ने बताया कि भगवान कृष्ण ने गैंडे को युद्ध के लिए तैयार किया था। लेकिन आदेश न मानने के कारण उसे जंगल भेज दिया गया।

प्रश्न 5: पहले गैंडों का शिकार क्यों किया जाता था?
उत्तर: पहले लोग मानते थे कि गैंडे के सींग में औषधीय गुण हैं। इसी लालच में गैंडों का शिकार बहुत हुआ।

प्रश्न 6: लेखक ने उद्यान में किस प्रकार के हिरण देखे?
उत्तर: उन्होंने भौंकने वाला हिरण, बौना सूअर हिरण, दलदली हिरण और साँभर हिरण देखा। यह चारों प्रजातियाँ खास थीं।

प्रश्न 7: मादा गैंडे के साथ उसके बच्चे को क्यों खतरनाक माना गया?
उत्तर: मादा गैंडा अपने बच्चे की रक्षा के लिए हिंसक हो सकती है। इसलिए पास जाकर देखना खतरनाक था।

प्रश्न 8: गैंडे की त्वचा कैसी दिखाई देती है?
उत्तर: गैंडे की त्वचा बहुत मोटी होती है। यह कवच जैसी दिखती है और उसे मज़बूत बनाती है।


प्रश्न 9: जंगली हाथियों का झुंड कैसा था?
उत्तर: हाथियों के झुंड में बच्चे भी थे। एक बड़ा हाथी पूरे झुंड की सुरक्षा कर रहा था।

प्रश्न 10: काजीरंगा में रॉयल बंगाल टाइगर क्यों नहीं दिखे?
उत्तर: वहाँ रॉयल बंगाल टाइगर रहते हैं, लेकिन वे रात में बाहर निकलते हैं। इसलिए लेखक उन्हें नहीं देख पाए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1: अरूप चाचा ने हाथी पर बैठकर उद्यान घूमते समय क्या-क्या देखा?
उत्तर: अरूप चाचा सुबह-सुबह हाथी पर बैठकर उद्यान देखने गए। वहाँ उन्होंने हिरणों और जंगली भैंसों के झुंड देखे। सबसे खास उन्हें गैंडा देखकर लगा, जिसकी मोटी चमड़ी कवच जैसी थी। महावत ने उन्हें गैंडे की कहानी भी सुनाई। यह अनुभव उनके लिए बहुत नया और रोमांचक था।

प्रश्न 2: गैंडों की संख्या क्यों कम हो गई और अब वे कहाँ सबसे अधिक पाए जाते हैं?
उत्तर: गैंडों का शिकार उनके सींग के लालच में बहुत किया गया। लोग मानते थे कि सींग में औषधीय गुण हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे गलत बताया। इस शिकार से गैंडों की संख्या तेजी से घट गई। अब आधे से अधिक गैंडे काजीरंगा में पाए जाते हैं। इसलिए यह उद्यान गैंडों का सुरक्षित घर बन गया है।

प्रश्न 3: जीप सफारी में लेखक ने कौन-कौन से जीव और पक्षी देखे?
उत्तर: जीप सफारी के समय लेखक एक बील पर पहुँचे। वहाँ सैकड़ों पक्षियों का झुंड था। उन्होंने पेलिकन, सारस, बगुले और कलहोन देखे। पानी में ऊदबिलाव भी खेल रहे थे। लौटते समय उन्होंने जंगली हाथियों का झुंड देखा। यह सब उनके लिए अद्भुत दृश्य थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 4: काजीरंगा के जानवर हमें क्या सिखाते हैं?
उत्तर: काजीरंगा के जानवर आपस में शांति और भाईचारे से रहते हैं। वे बिना लड़ाई-झगड़े के जंगल साझा करते हैं। यह हमें भी सिखाता है कि मनुष्यों को मिल-जुलकर रहना चाहिए। हमें जानवरों और प्रकृति से प्रेम करना चाहिए। उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

प्रश्न 5: इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस कहानी का मुख्य संदेश प्रकृति और जानवरों से प्रेम करना है। लेखक बताते हैं कि सभी जानवर जंगल में शांति से रहते हैं। हमें उनसे सीख लेकर आपसी मेल-जोल और भाईचारे से जीना चाहिए। साथ ही पर्यावरण और वन्यजीवन की रक्षा करनी चाहिए। तभी आने वाली पीढ़ियाँ भी इन सुंदर जीवों को देख पाएँगी।

07. Short & Long Question Answers: मेरा बचपन

Short & Long Question Answers: मेरा बचपन

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प्रश्न 1: लेखक को कौन-सा खेल सबसे प्रिय था?
उत्तर: लेखक को गुल्ली-डंडा सबसे प्रिय था। इसे खेलने के लिए ज्यादा सामान नहीं चाहिए था। बस पेड़ की टहनी से गुल्ली और डंडा बना लेते थे।

प्रश्न 2: लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ कहाँ पढ़ने जाते थे?
उत्तर: लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ मौलवी साहब के पास पढ़ने जाते थे। हलधर उनसे दो साल बड़े थे।

प्रश्न 3: लेखक को रामलीला क्यों पसंद थी?
उत्तर: लेखक को रामलीला इसलिए पसंद थी क्योंकि उसमें बहुत मजा आता था। वे पात्रों की सजावट भी देखते और छोटे-मोटे कामों में मदद करते थे।

प्रश्न 4: लेखक अपने बचपन में किस तरह के घर में रहते थे?
उत्तर: लेखक कच्चे और टूटे हुए घर में रहते थे। वे पयाल का बिछौना बिछाकर सोते थे।

प्रश्न 5: खेलों में अमीर-गरीब का कोई फर्क क्यों नहीं था?
उत्तर: क्योंकि सभी बच्चे मिलकर खेलते थे। न कोई दिखावा था और न ही कोई घमंड।

प्रश्न 6: लेखक सुबह-सुबह खाने में क्या खाते थे?
उत्तर: लेखक और उनका भाई सुबह मटर और जौ का चबेना खाते थे। यही उनका नाश्ता था।

प्रश्न 7: लेखक कहते हैं कि विदेशी खेलों की सबसे बड़ी कमी क्या है?
उत्तर: विदेशी खेलों को खेलने में बहुत पैसे खर्च होते हैं। जबकि भारतीय खेल जैसे गुल्ली-डंडा साधारण और सस्ते होते हैं।

प्रश्न 8: लेखक के पिता जी क्यों नाराज होते थे?
उत्तर: क्योंकि लेखक न नहाते थे, न ठीक से खाते थे। बस गुल्ली-डंडा खेलने में लगे रहते थे।

प्रश्न 9: गुल्ली-डंडा खेलते समय क्या खतरे हो सकते थे?
उत्तर: इस खेल में कभी-कभी चोट लग जाती थी। लेखक की आँख पर दाग पड़ा और कुछ दोस्तों को बैसाखी का सहारा भी लेना पड़ा।

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प्रश्न 10: बचपन में लेखक किस बात पर सबसे ज़्यादा खुश होते थे?
उत्तर: लेखक बचपन में दोस्तों के साथ खेलने पर सबसे ज़्यादा खुश होते थे। उन्हें खासकर गुल्ली-डंडा खेलना बहुत अच्छा लगता था। खेल में उन्हें मिठाइयों से भी ज़्यादा मिठास मिलती थी।

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प्रश्न 1: लेखक ने अपने बचपन का घर और जीवन कैसा बताया है?
उत्तर: लेखक ने अपने बचपन का घर बहुत साधारण बताया है। वे कच्चे टूटे घर में रहते थे और पयाल का बिछौना बिछाकर सोते थे। वे नंगे पाँव खेतों में घूमते और आम के पेड़ों पर चढ़ते थे। उनका जीवन सादगी और मस्ती से भरा था। घर की गरीबी के बावजूद वे बहुत खुश रहते थे।

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प्रश्न 2: रामलीला देखने में लेखक को क्या आनंद आता था?
उत्तर: लेखक को रामलीला बहुत पसंद थी। उनके घर के पास ही रामलीला का मैदान था। दोपहर से ही पात्रों की सजावट शुरू हो जाती थी। लेखक बड़े उत्साह से सजावट देखते और छोटे-मोटे कामों में मदद भी करते थे। उन्हें रामलीला का आनंद इतना आता था कि उसका उत्साह जीवनभर याद रहा।

प्रश्न 3: गुल्ली-डंडा खेल की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: गुल्ली-डंडा बहुत सरल और सस्ता खेल है। इसमें महंगे सामान या खास मैदान की जरूरत नहीं होती। बस टहनी काटकर गुल्ली और डंडा बना लिया जाता है। इसमें सभी बच्चे मिलकर खेलते थे। खेलते समय बहुत मजा आता था और भाईचारा बढ़ता था। लेखक इसे सभी खेलों का राजा मानते थे।

प्रश्न 4: लेखक ने भारतीय और अंग्रेजी खेलों की तुलना कैसे की है?
उत्तर: लेखक कहते हैं कि भारतीय खेल सरल और सस्ते होते हैं। इन्हें खेलने के लिए ज्यादा पैसे या साधन नहीं चाहिए। लेकिन अंग्रेजी खेलों में बहुत खर्च होता है। लोग आज विदेशी खेलों की ओर आकर्षित हो गए हैं। लेखक का मानना है कि हमें अपने देशी खेलों की कद्र करनी चाहिए।

प्रश्न 5: इस कहानी से हमें बचपन और खेलों के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि बचपन बहुत अनमोल होता है। उस समय की सादगी और खुशी जीवनभर याद रहती है। खेलों से भाईचारा, सहयोग और मिलजुलकर रहने की आदत बनती है। हमें केवल महंगे विदेशी खेलों के पीछे नहीं भागना चाहिए। बल्कि अपने देशी खेलों की भी कद्र करनी चाहिए।

06. Short & Long Question Answers: चतुर चित्रकार

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1: कविता चतुर चित्रकार के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस कविता के कवि रामनरेश त्रिपाठी जी हैं। उन्होंने इसमें एक चित्रकार की चतुराई और साहस को बहुत सुंदर ढंग से दिखाया है।

प्रश्न 2: चित्रकार जंगल में क्या कर रहा था?
उत्तर: चित्रकार जंगल की सुनसान जगह पर चित्र बना रहा था। वह नदी, पहाड़ और पेड़–पौधों के चित्र बना रहा था।

प्रश्न 3: चित्रकार को देखकर सबसे पहले शेर ने क्या किया?
उत्तर: शेर चित्रकार के सामने बैठ गया। वह ध्यान से चित्रकार की ओर देखने लगा।

प्रश्न 4: चित्रकार ने शेर को क्या कहकर बैठाया?
उत्तर: चित्रकार ने कहा कि वह शेर का सुंदर चित्र बनाएगा। यह सुनकर शेर शांति से बैठ गया।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 5: शेर ने कब अपनी पीठ घुमाई?
उत्तर: जब चित्रकार ने कहा कि अब पीछे का चित्र बनाना है। यह सुनकर शेर ने पीठ घुमाई।

प्रश्न 6: चित्रकार शेर से कैसे बच निकला?
उत्तर: शेर के पीठ घुमाते ही चित्रकार धीरे-धीरे झील किनारे पहुँचा। वह नाव पकड़कर वहाँ से भाग निकला।

प्रश्न 7: शेर ने चित्रकार को क्या आवाज़ लगाई?
उत्तर: शेर ने कहा कि “कागज़ और कलम तो लेता जा।” उसने चित्रकार को डरपोक भी कहा।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 8: चित्रकार ने शेर को क्या जवाब दिया?
उत्तर: चित्रकार ने कहा कि इन्हें तुम ही रखो। तुम जंगल में बैठकर चित्र बनाने का अभ्यास करो।

प्रश्न 9: कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कविता से हमें सीख मिलती है कि कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए। हमें चतुराई और समझदारी से काम लेना चाहिए।

प्रश्न 10: चित्रकार ने हिंसा करने की बजाय क्या किया?
उत्तर: उसने शेर को मारने के बजाय अपनी चतुराई से धोखा दिया। इस तरह वह शेर से बच निकला।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1: चित्रकार की बहादुरी और चतुराई कविता में कैसे दिखाई देती है?
उत्तर: चित्रकार जंगल में चित्र बना रहा था कि तभी शेर आ गया। वह पहले तो डर गया, लेकिन तुरंत हिम्मत दिखाकर बोला कि मैं तुम्हारा चित्र बनाऊँगा। शेर उसकी बात मानकर बैठ गया। चित्रकार ने बहाना बनाकर शेर से पीठ घुमा ली। मौका मिलते ही वह नाव पकड़कर भाग निकला। इससे उसकी बहादुरी और चतुराई साफ दिखाई देती है।

प्रश्न 2: कविता के अनुसार शेर किस तरह चित्रकार के धोखे में आ गया?
उत्तर: चित्रकार ने शेर से कहा कि वह उसका सुंदर चित्र बनाएगा। यह सुनकर शेर खुशी से बैठ गया। फिर चित्रकार ने कहा कि अब पीछे का चित्र बनाना है। शेर ने आँखें मूँदकर पीठ फेर ली। उसी समय चित्रकार धीरे से निकल गया। इस तरह शेर धोखे में आ गया।

प्रश्न 3: चित्रकार ने नाव पकड़कर भागते समय क्या अनुभव किया?
उत्तर: चित्रकार नाव तक पहुँचते ही राहत की साँस लेने लगा। उसे लगा कि अब वह सुरक्षित है। उसने जल्दी-जल्दी नाव चलाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह शेर से दूर निकल गया। शेर उसे देखता ही रह गया। चित्रकार को चतुराई से जीतने की खुशी मिली।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 4: कविता में शेर और चित्रकार की बातचीत से क्या संदेश मिलता है?
उत्तर: शेर ने गुस्से में चित्रकार से कहा कि कागज़–कलम तो लेता जा। इस पर चित्रकार ने कहा कि इन्हें तुम ही रखो और जंगल में अभ्यास करो। इससे पता चलता है कि चित्रकार न केवल बहादुर था, बल्कि मजाकिया भी था। उसने डर के समय भी अपना संयम नहीं खोया। यह हमें कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की सीख देता है।

प्रश्न 5: कविता से हमें कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्या सीख मिलती है?
उत्तर: कविता में चित्रकार शेर से सामना करता है। वह डरने के बजाय अपनी चतुराई का उपयोग करता है। उसने शेर को मारने या हिंसा करने की जगह समझदारी दिखाई। सही समय पर योजना बनाकर वह बच निकलता है। इससे हमें सीख मिलती है कि मुश्किल समय में धैर्य और चतुराई ज़रूरी है। घबराने की बजाय समझदारी से सोचना ही असली बुद्धिमानी है।

05. Short & Long Question Answers: सुंदरिया

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: हीरासिंह कौन था और कहाँ रहता था?
उत्तर: हीरासिंह हरियाणा के एक गाँव का गरीब किसान था। उसके पास सुंदरिया नाम की प्यारी गाय थी।

प्रश्न 2: हीरासिंह ने दिल्ली जाकर कौन-सा काम किया?
उत्तर: हीरासिंह दिल्ली जाकर एक सेठ के यहाँ चौकीदार बन गया। इससे उसे कुछ पैसे मिलने लगे।

प्रश्न 3: जवाहरसिंह सुंदरिया को क्या कहकर बुलाता था?
उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया को “मौसी” कहकर बुलाता था। वह उससे बहुत प्यार करता था।

प्रश्न 4: हीरासिंह ने सुंदरिया को बेचने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर: हीरासिंह गरीब था और सुंदरिया के लिए चारा नहीं जुटा पाता था। मजबूरी में उसने उसे बेचने का सोचा।


प्रश्न 5: सेठ ने सुंदरिया को देखकर क्या कहा?
उत्तर: सेठ सुंदरिया को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने कहा कि गाय सचमुच बहुत सुंदर और स्वस्थ है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 6: सुंदरिया दूसरे लोगों के साथ दूध क्यों नहीं देती थी?
उत्तर: सुंदरिया अपने मालिक हीरासिंह से बहुत प्यार करती थी। इसलिए वह उसके बिना खुश नहीं रहती थी और दूध भी कम देती थी।

प्रश्न 7: जब सुंदरिया ने दूध ड्योढ़ी में गिरा दिया तो सेठ ने क्या सोचा?
उत्तर: सेठ को लगा कि हीरासिंह झूठ बोल रहा है। लेकिन असल में सुंदरिया अपने मालिक के बिना दुखी थी।

प्रश्न 8: सुंदरिया रात को हीरासिंह के पास क्यों आई?
उत्तर: सुंदरिया रात को हीरासिंह के पास ऐसे आई, मानो वह कह रही हो कि मुझे अपने मालिक के पास ही रहना है। उसने अपनी आँखों से दुख जताया।

प्रश्न 9: हीरासिंह ने आखिर में क्या निर्णय लिया?
उत्तर: हीरासिंह ने तय किया कि वह सुंदरिया को गाँव वापस ले जाएगा। सेठ के पैसे धीरे-धीरे चुका देगा।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 10: जब सेठ ने हीरासिंह से गाय वापस ले जाने को कहा, तो उसने क्या उपाय किया?
उत्तर: कहानी से हमें सच्चा प्यार और अपनापन सीखने को मिलता है। पैसा रिश्तों और विश्वास से बड़ा नहीं होता।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: हीरासिंह और सुंदरिया के बीच कैसा संबंध था?
उत्तर: हीरासिंह सुंदरिया को अपने परिवार का हिस्सा मानता था। उसका बेटा भी गाय को मौसी कहता था। गरीबी के कारण उसने उसे बेचा, लेकिन दिल से वह उसे कभी अलग नहीं कर पाया। सुंदरिया भी अपने मालिक से बहुत प्यार करती थी। उसके बिना वह खुश नहीं रहती थी। यह रिश्ता सच्चे अपनापन और विश्वास का था।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 2: सुंदरिया ने सेठ के घर दूध क्यों कम देना शुरू किया?
उत्तर: शुरू में सुंदरिया ने हीरासिंह के सामने खूब दूध दिया। लेकिन जब उसे घोसी के पास भेजा गया तो उसने दूध कम देना शुरू किया। उसका दिल टूट गया था क्योंकि मालिक उसके पास नहीं था। गाय भी इंसानों की तरह भावनाएँ समझती है। वह अपने मालिक के बिना खुश नहीं थी।

प्रश्न 3: सेठ को क्यों लगा कि हीरासिंह ने धोखा दिया है?
उत्तर: सेठ ने देखा कि सुंदरिया ज्यादा दूध नहीं दे रही थी। उसे लगा कि हीरासिंह ने दूध के बारे में झूठ बोला है। असल में गाय अपने मालिक से दूर होकर ठीक से दूध नहीं देती थी। लेकिन सेठ यह बात समझ नहीं पाया। इसीलिए उसने सोचा कि हीरासिंह ने उसे धोखा दिया है।

प्रश्न 4: वह घटना बताइए जब सुंदरिया हीरासिंह के पास वापस आई।
उत्तर: एक रात सुंदरिया खूँटे से छूटकर ड्योढ़ी में आ गई। वह सीधे हीरासिंह के पास खड़ी हो गई। उसकी आँखें कह रही थीं कि वह बहुत दुखी है। जैसे वह अपने मालिक से माफी माँग रही हो। हीरासिंह उसे देखकर भावुक हो गया। वह उसकी गर्दन से लिपटकर रोने लगा।

प्रश्न 5: इस कहानी से हमें कौन-कौन-सी शिक्षा मिलती है?
उत्तर: कहानी हमें सिखाती है कि जानवर भी परिवार का हिस्सा होते हैं। उन्हें भी प्यार और अपनापन चाहिए। हमें समझना चाहिए कि पैसा ही जीवन में सबसे ज़रूरी नहीं है। असली खुशी रिश्तों और विश्वास में है। ईमानदारी और सच्चाई से काम करना चाहिए। सच्चा प्यार कभी टूट नहीं सकता।

04. Short & Long Question Answers: साङकेन

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)

प्रश्न 1: वल्लरी के पिताजी कहाँ काम करते थे?
उत्तर: वल्लरी के पिताजी अरुणाचल प्रदेश के चौखाम गाँव में अधिकारी थे। उन्होंने अपने परिवार को दिल्ली से वहाँ बुला लिया था।

प्रश्न 2: चौखाम गाँव दिल्ली से किस प्रकार अलग था?
उत्तर: चौखाम गाँव शांत और हरा-भरा था। वहाँ भीड़-भाड़ और शोर नहीं था, लोग हमेशा मुस्कुराते रहते थे।

प्रश्न 3: वल्लरी चाऊतान के घर क्यों गई?
उत्तर: वल्लरी अपने पिताजी के साथ चाऊतान के घर गई थी। वहाँ चाऊतान के माता-पिता ने उनका स्वागत किया और पकवान खिलाए।

प्रश्न 4: शोभायात्रा में लोग क्या लेकर जा रहे थे?
उत्तर: शोभायात्रा में लोग पालकियों में भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ लेकर जा रहे थे। सभी लोग गाकर और बजाकर बहुत खुश थे।


प्रश्न 5: मंदिर किस प्रकार सजाया गया था?
उत्तर: मंदिर बाँस और खपच्चियों (लकड़ी की पट्टियों) से बनाया गया था। उसे फूलों और हरी टहनियों से सजाया गया था।

प्रश्न 6: लोग त्योहार में किस प्रकार आनंद मना रहे थे?
उत्तर: लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे, चावल का आटा लगा रहे थे और गीत-नृत्य कर रहे थे। सब बहुत प्रसन्न थे।

प्रश्न 7: वल्लरी को साङकेन का त्योहार किस त्योहार जैसा लगा?
उत्तर: वल्लरी को साङकेन का त्योहार अपने शहर की होली जैसा लगा। क्योंकि दोनों में पानी और रंगों से खेला जाता है।

प्रश्न 8: साङकेन का त्योहार कितने दिन मनाया जाता है?
उत्तर: साङकेन का त्योहार तीन दिन तक मनाया जाता है। तीसरे दिन मूर्तियाँ फिर से बौद्ध-विहार ले जाई जाती हैं।

प्रश्न 9: त्योहार के अंत में भिक्षु लोगों को क्या देते हैं?
उत्तर: त्योहार के अंत में भिक्षु गाँव वालों को आशीर्वाद देते हैं। वे प्रार्थना करते हैं कि सब खुश रहें और खेती अच्छी हो।

प्रश्न 10: चाऊतान के माता-पिता ने वल्लरी का स्वागत कैसे किया?
उत्तर: चाऊतान के माता-पिता ने वल्लरी और उसके पिताजी का बहुत प्यार से स्वागत किया। उन्होंने स्वादिष्ट पकवान खिलाए। वे बहुत खुश थे।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)

प्रश्न 1: वल्लरी ने चौखाम गाँव में क्या-क्या देखा?
उत्तर: वल्लरी ने चौखाम गाँव में हरियाली, फूल और शांत वातावरण देखा। वह अपने दोस्त चाऊतान के घर गई। वहाँ के लोगों ने उसका स्वागत किया और स्वादिष्ट पकवान खिलाए। उसने खिड़की से शोभायात्रा देखी, जिसमें मूर्तियाँ मंदिर ले जाई जा रही थीं। उसे गाँव का त्योहार और लोगों की खुशी देखकर बहुत अच्छा लगा।

प्रश्न 2: शोभायात्रा का दृश्य कैसा था?
उत्तर: शोभायात्रा में लोग गाते-बजाते और नाचते हुए जा रहे थे। उनके कंधों पर पालकियाँ थीं जिनमें भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों की मूर्तियाँ थीं। रास्ते भर लोग आनंद मना रहे थे। जब वे मंदिर पहुँचे तो भिक्षुओं ने मंत्र पढ़कर मूर्तियों की पूजा की। पूरा वातावरण बहुत पवित्र और खुशियों से भरा था।

प्रश्न 3: साङकेन का त्योहार कैसे मनाया जाता है?
उत्तर: साङकेन का त्योहार तीन दिन तक चलता है। इसमें लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं और मंदिर सजाते हैं। वे एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और चावल का आटा लगाते हैं। सब मिलकर गाते और नाचते हैं। आखिरी दिन मूर्तियाँ वापस बौद्ध-विहार ले जाई जाती हैं। फिर भिक्षु सबको आशीर्वाद देते हैं।

प्रश्न 4: वल्लरी ने साङकेन की तुलना होली से क्यों कि?
उत्तर: वल्लरी ने देखा कि लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और आटे से खेल रहे थे। उसे अपने शहर की होली याद आ गई जिसमें लोग रंग और पानी से खेलते हैं। होली में भी लोग मिठाइयाँ बाँटते और खुशियाँ मनाते हैं। दोनों त्योहारों में नया साल शुरू होता है और लोग मिलकर आनंद मनाते हैं। इस कारण उसने तुलना कि।


प्रश्न 5: इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि सभी त्योहारों का उद्देश्य खुशी फैलाना और लोगों को जोड़ना होता है। हमें अलग-अलग परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। जब हम साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं तो दोस्ती और प्यार बढ़ता है। अतिथियों का स्वागत और उनका आदर करना भी अच्छी आदत है। त्योहार हमें एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।

03. Short & Long Question Answers: चाँद का कुरता

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1: कविता ‘चाँद का कुरता’ (झिंगोला) किसने लिखी है?
उत्तर: यह कविता प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखी है।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 2: चाँद ने माँ से क्या सिलवाने की ज़िद की?
उत्तर: चाँद ने माँ से ऊन का मोटा झिंगोला (कुरता) सिलवाने की ज़िद की।

प्रश्न 3: चाँद को झिंगोले की ज़रूरत क्यों थी?
उत्तर: क्योंकि रात को तेज हवा चलती है और ठंड से चाँद ठिठुर जाता है।

प्रश्न 4: अगर नया झिंगोला न मिले, तो चाँद ने क्या कहा?
उत्तर: उसने कहा कि कोई किराए का (भाड़े का) झिंगोला ही ला दो।

प्रश्न 5: माँ ने चाँद को किस नाम से पुकारा?
उत्तर: माँ ने उसे “सलोने” यानी प्यारे और सुंदर बेटे कहकर पुकारा।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Type Questions)
प्रश्न 6: माँ चाँद की नाप लेने से क्यों डरती थी?
उत्तर: क्योंकि चाँद का आकार रोज़ बदलता रहता है।

प्रश्न 7: माँ ने चाँद के बदलते आकार का कौन-सा उदाहरण दिया?
उत्तर: कभी चाँद एक अंगुल-भर चौड़ा दिखता है और कभी एक फुट मोटा।

प्रश्न 8: किस दिन चाँद बिल्कुल दिखाई नहीं देता?
उत्तर: अमावस्या के दिन चाँद बिल्कुल दिखाई नहीं देता।

प्रश्न 9: माँ ने चाँद से कौन-सा कठिन सवाल पूछा?
उत्तर: माँ ने पूछा कि उसकी नाप किस दिन ली जाए, जब उसका आकार रोज़ बदलता रहता है।

प्रश्न 10: कविता का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: कविता मज़ेदार ढंग से बताती है कि चाँद का आकार बदलता रहता है, इसलिए उसके लिए एक ही नाप का कुरता बनाना असंभव है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1: चाँद ने अपनी माँ से झिंगोला क्यों माँगा?
उत्तर: चाँद को रात में ठंडी “सन-सन” हवा बहुत सताती थी। वह ठिठुर-ठिठुर कर अपना आसमान का सफर पूरा करता था। इसलिए उसने माँ से ऊन का मोटा झिंगोला सिलवाने की ज़िद की। उसका कहना था कि झिंगोले से उसे ठंड से बचाव होगा और वह आराम से यात्रा कर पाएगा।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Type Questions)
प्रश्न 2: चाँद की ज़िद सुनकर माँ ने क्या कहा?
उत्तर: माँ ने प्यार से कहा, “भगवान तुम्हारी रक्षा करें, कहीं तुझ पर जादू-टोना न हो जाए।” माँ ने उसकी बात को मज़ाक और स्नेह से टालने की कोशिश की। उसने यह भी कहा कि असली समस्या यह है कि चाँद का आकार रोज़ बदलता रहता है, इसलिए नाप लेना मुश्किल है।

प्रश्न 3: माँ ने चाँद के बदलते आकार का वर्णन कैसे किया?
उत्तर: माँ ने कहा कि कभी चाँद बहुत छोटा होता है, तो कभी बड़ा। कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, तो कभी एक फुट मोटा। कभी वह आधा दिखता है, तो कभी पूरा। और अमावस्या को तो बिल्कुल दिखाई भी नहीं देता।

प्रश्न 4: माँ ने झिंगोला सिलवाने में कौन-सी कठिनाई बताई?
उत्तर: माँ ने कहा कि झिंगोला सिलने के लिए नाप लेना ज़रूरी है। लेकिन चाँद का आकार रोज बदलता है। ऐसे में एक ही नाप का झिंगोला बनाना असंभव है। वह कुरता किसी दिन ढीला होगा, किसी दिन तंग, और किसी दिन तो बिल्कुल बेकार।

प्रश्न 5: इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर काम सही समय और सही समझ के साथ होना चाहिए। यदि कोई चीज़ हमेशा बदलती रहती है, तो उसके लिए स्थायी हल निकालना मुश्किल होता है। यह कविता हँसी-मज़ाक के माध्यम से हमें स्थिरता, धैर्य और समझदारी का महत्व समझाती है।