3. टोपी शुक्ला – Short Questions answer

प्रश्न 1: ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर बताइए कि इफ़्फ़न की दादी मिली-जुली संस्कृति में विश्वास क्यों रखती थीं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी नमाज़ व रोज़े की बड़ी पाबंद थीं, किंतु जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता के चेचक निकली तो वह उसके पलंग के पास एक पैर पर खड़ी हुई और उन्होंने माता का नाम लेकर कहा, “ माता, मोरे बच्चे को माफ़ करयो ।” उनकी ससुराल में उर्दू बोली जाती थी, किंतु वे पूरबी बोली ही बोलती थीं। कट्टर मौलवी परिवार में गाने-बजाने की रोक थी, किंतु इफ़्फ़न की छठी में उन्होंने खूब गाना बजाना किया था। इस सब बातों से सिद्ध होता है कि वे मिली-जुली संस्कृति पर विश्वास करती थीं ।

प्रश्न 2: इफ़्फ़न की दादी की मौत का समाचार सुनकर टोपी पर क्या प्रभाव पड़ा? टोपी ने इफ़्फ़न को क्या कहकर सांत्वना दी?
उत्तर:
 इफ़्फ़न की दादी की मौत का समाचार सुनकर टोपी का बालमन शोक से भर उठा। इफ़्फ़न तो उसी समय घर चला गया और टोपी जिमनेज़ियम में जाकर एक कोने में बैठकर रोने लगा। शाम को वह इफ़्फ़न के घर गया, तो एक दादी के न रहने से उसे सारा घर खाली – खाली सा लगा। इफ़्फ़न की दादी के प्रति उसके मन में बहुत प्रेम था, बदले में ऐसा ही प्रेम उसे उनसे भी प्राप्त हुआ था, किंतु कभी ऐसी ममता उसे अपनी दादी से नहीं मिली थी। इसी कारण उसने इफ़्फ़न को यह कहकर सांत्वना दी कि ‘तोरी दादी की जगह अगर हमरी दादी मर गई होती, त ठीक भया होता’ अर्थात उसकी यानी इफ़्फ़न की दादी की जगह उसकी दादी मर गई होतीं, तो ठीक होता ।

प्रश्न 3: टोपी और बूढ़ी नौकरानी दोनों में एक-दूसरे के प्रति सद्भाव होने का क्या कारण था ? इनके व्यवहार से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: 
घर में टोपी और बूढ़ी नौकरानी दोनों की ही दशा एक जैसी थी। दोनों को ही घर के छोटे-बड़े सब डाँट-फटकार लेते थे। बूढ़ी नौकरानी सीता को तो यह सब चुपचाप सह लेने का अनुभव था। इसी कारण जब भी टोपी किसी बात पर दादी या घर के अन्य सदस्य का विरोध करता और उसे माँ रामदुलारी से पिटाई खानी पड़ती, तब सीता उसे अपनी कोठरी में ले जाकर समझाया करती थी। सीता के आँचल में जाकर टोपी को भी सुकून मिलता था। इनके व्यवहार से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पीड़ा या कष्ट की स्थिति में एक-दूसरे का सहारा बनने से एक संबल मिलता है। इस प्रकार व्यक्ति को लगता है कि कोई तो है जो हमारे साथ है और जिससे वह अपना दुख-दर्द बाँट सकता है।

प्रश्न 4: ठाकुर हरिनाम सिंह कौन था? उसके लड़कों ने टोपी शुक्ला से दोस्ती क्यों नहीं की? यह उनकी किस भावना का व्यंजक है?
उत्तर: 
ठाकुर हरिनाम सिंह को इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद बनारस का नया कलेक्टर बनाया गया था। ठाकुर हरिनाम सिंह के लड़के इफ़्फ़न के समान सभ्य नहीं थे, उन्हें अपने पिता के कलेक्टर होने का घमंड था। इसी घमंडी मानसिकता के चलते उन्हें टोपी अपने किसी चपरासी के बेटे के समान लगा, उन्होंने दोस्ती करने आए टोपी के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया और बाद में अपने अलसेशियन कुत्ते से कटवा दिया। यह उनकी अपने आप को ऊँचा तथा दूसरों को तुच्छ समझने की दूषित भावना का व्यंजक है।

प्रश्न 5: टोपी के पिता को भी यह पसंद नहीं था कि टोपी इफ़्फ़न से दोस्ती रखे, पर उन्होंने इसका फ़ायदा कैसे उठाया?
उत्तर: 
टोपी के पिता और घर के अन्य सदस्यों को बिलकुल भी यह पसंद नहीं था कि टोपी किसी मुसलमान के लड़के से दोस्ती करे या उसके घर आए-जाए पर टोपी को जाति-धर्म से क्या लेना-देना था। टोपी के पिता ने जैसे ही जाना कि इफ्फ़न के पिता कलेक्टर हैं तो उन्होंने अपने क्रोध को दबाया और तीसरे दिन ही दुकान के लिए कपड़े और चीनी का परमिट ले आए।

प्रश्न 6: इफ़्फ़न की दादी को मरने से पहले कौन-सी वस्तुएँ याद आईं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी पूरा जीवन अपने मायके से जुड़ी यादों को दिल में सहेजे रही थीं। इसलिए मरने से पहले उन्हें अपने मायके की कच्ची हवेली, अपने द्वारा लगाया गया आम का बीजू पेड़ आदि याद आए । वे अपने मायके की मिट्टी से भावात्मक रूप से जुड़ी थीं। इसी समय जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता सय्यद मुरतुज़ा हुसैन ने उनसे यह पूछा कि मरने के बाद लाश करबला जाएगी या नज़फ़, तो इस बात पर वे भड़ककर कहने लगीं कि यदि उससे उनकी लाश न सँभाली जाए, तो उनके मायके भेज दे।

प्रश्न 7: टोपी ने मुन्नी बाबू की किस असलियत से घर वालों से छिपाकर रखा था, और क्यों?
उत्तर: 
एक बार टोपी ने मुन्नी बाबू को रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाते देख लिया था, इस बात को छुपाने के लिए मुन्नी बाबू ने टोपी को इकन्नी की रिश्वत भी दी थी। इस रिश्वत का तो टोपी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, किंतु टोपी चुगलखोर नहीं था इसीलिए उसने अपने घरवालों को इसकी जानकारी नहीं दी थी।

प्रश्न 8: कैसे कहा जा सकता है कि इफ़्फ़न की दादी मिली-जुली संस्कृति में विश्वास रखने वाली महिला थीं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी नमाज़ व रोज़े की बड़ी पाबंद थीं, किंतु जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता के चेचक निकली तो वह उसके पलंग के पास एक पैर पर खड़ी हुई और उन्होंने माता का नाम लेकर कहा, “ माता, मोरे बच्चे को माफ़ करयो ।” उनकी ससुराल में उर्दू बोली जाती थी, किंतु वे पूरबी बोली ही बोलती थीं। कट्टर मौलवी परिवार में गाने-बजाने की रोक थी, किंतु इफ़्फ़न की छठी में उन्होंने खूब गाना बजाना किया था। इस सब बातों से सिद्ध होता है कि वे मिली-जुली संस्कृति पर विश्वास करती थीं ।

प्रश्न 9: इफ़्फ़न की दादी एक ज़मींदार की बेटी थीं। अपने ससुराल के वातावरण में अपने को ढालने में उन्हें किन असुविधाओं का सामना करना पड़ा? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी एक ज़मींदार की बेटी थीं। उनके मायके में सभी बहुत उदार थे। धार्मिक कट्टरता कहीं दूर-दूर तक नहीं थी, जबकि उनकी ससुराल का वातावरण धार्मिक कट्टरता से भरा था । यहाँ खाने-पीने से लेकर रीति-रिवाजों की पाबंदी थी। वे अपने मायके में खूब घी पिलाई काली हाँडी में जमाई गई दही जी भरकर खा लेती थीं, किंतु मौलवी परिवार में वे ऐसा नहीं कर पाती थीं। वे पूरबी बोलती थीं, जबकि मौलवी परिवार में उर्दू बोली जाती थी तथा पूरबी बोली को अनपढ़ व गँवारों की भाषा माना जाता था । इसी कारण ससुराल में उनकी आत्मा सदा बेचैन रही तथा वहाँ के वातावरण में वे कभी पूरी तरह नहीं ढल सकीं।

प्रश्न 10: इफ़्फ़न की दादी की मौत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: 
टोपी को अपनी दादी से कभी अपनापन नहीं मिला था, वे उसे बात-बात पर अपमानित करती रहती थीं, जबकि इफ़्फ़न की दादी से उसे भरपूर दुलार मिलता था और उनका एक-एक शब्द उसे शक्कर का खिलौना प्रतीत होता था । वह इफ़्फ़न के घर जाकर उन्हीं के पास बैठता था तथा अपनत्व व ममता का असीम सुख प्राप्त किया करता था। इसी आत्मिक लगाव के कारण इफ़्फ़न की दादी की मौत के बाद टोपी को उसका घर खाली खाली – सा लगा।

प्रश्न 11: इफ़्फ़न की दादी टोपी को अपने ही परिवार के सदस्यों के उपहास से किस तरह बचाती?
उत्तर: 
टोपी जबे इफ्फ़न के घर जाता तो वह इफ्फ़न की दादी के पास ही बैठने की कोशिश करता। वह इफ्फ़न की अम्मी और उसकी बाजी के पास न जाता न बैठता। वे दोनों प्रायः टोपी को उसकी बोली के लिए छेड़ती और हँसती। जब बात बढ़ने लगती तो दादी ही बीच-बचाव करती और कहती कि तू उधर जाता ही क्यों है। इस तरह वे टोपी को अपने परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए उपहास से टोपी को बचाती थी।

प्रश्न 12: टोपी पढ़ने में बहुत तेज़ था, फिर भी वह दो बार फ़ेल हो गया। उसकी पढ़ाई में क्या बाधाएँ आ जाती थीं?
उत्तर: 
टोपी पढ़ने में बहुत तेज़ था, फिर भी वह दो बार फेल हो गया क्योंकि पहले साल उसे पढ़ने ही नहीं दिया गया। वह जब भी पढ़ने बैठता, उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम निकल आता था या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती थी, जो घर के नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी और रामदुलारी रही सही कसर उसका छोटा भाई भैरव उसकी कॉपियों के पन्नों से हवाई जहाज़ बनाकर पूरा कर डालता था तथा दूसरे वर्ष परीक्षा के दिनों में उसे टाइफाइड हो गया था।

प्रश्न 13: टोपी को अध्यापक घृणा की दृष्टि से क्यों देखते थे? अंग्रेज़ी के अध्यापक ने उसे एक दिन क्या कहकर अनुत्साहित किया और क्यों?
उत्तर:
 टोपी के अध्यापक उसके नवीं कक्षा में फेल हो जाने के कारण उसे बुद्ध समझने लगे थे। उन्होंने एक सच्चे अध्यापक का कर्तव्य निभाते हुए उसकी परेशानियों को समझकर उन्हें दूर करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उससे चिढ़कर घृणा करने लगे। उनके मन में टोपी के प्रति ज़रा सी भी सहानुभूति नहीं थी । अंग्रेज़ी के अध्यापक ने एक बार उसे यह कहकर अनुत्साहित किया कि वह जवाब देने के लिए हाथ न उठाए, वह दो साल से यही पुस्तक पढ़ रहा है, तो उसे तो सारे जवाब ज़बानी याद हो गए होंगे, उसके सहपाठियों को अगले वर्ष हाईस्कूल का इम्तिहान देना है, उससे तो वे अगले साल भी पूछ लेंगे। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वे एक अच्छे अध्यापक नहीं थे, वे टोपी से घृणा करते थे और टोपी के द्वारा बार-बार उत्तर देने के लिए हाथ उठाने से वे झल्लाहट से भर उठे थे।

प्रश्न 14: इफ़्फ़न के पूर्वजों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
 इफ़्फ़न के दादा परदादा बहुत प्रसिद्ध मौलवी थे। वे काफ़िरों के देश में पैदा हुए और काफ़िरों के देश में मरे। वे यह वसीयत करके मरे कि लाश करबला ले जाई जाए। उनकी आत्मा ने इस देश में एक साँस तक न ली। उस खानदान में जो पहला हिंदुस्तानी बच्चा पैदा हुआ वह बढ़कर इफ़्फ़न का बाप हुआ। इसके बाद इफ़्फ़न और अन्य सदस्यों के रूप में यह परिवार भारत को होकर रह गया।

प्रश्न 15: टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही ? ‘टोपी शुक्ला’ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर:
 इफ़्फ़न की दादी स्नेहिल स्वभाव की थी। वह बच्चों से अत्यधिक स्नेह करती थीं। वह इफ़्फ़न के साथ टोपी को भी अपने पास बैठाकर कहानियाँ सुनाती थीं । यहाँ तक कि इफ़्फ़न के परिवार का कोई सदस्य कभी टोपी को उसकी बोली पर छेड़ता जब भी वह टोपी का ही पक्ष लेती थीं। टोपी की भाँति वह भी पूरबी बोली बोलती थीं जिससे टोपी को उनसे अपनेपन का एहसास होता था। जबकि टोपी की दादी का स्वभाव अच्छा न था । वह हमेशा टोपी को डाँटती – फटकारती रहती थीं। वह परंपराओं में बँधे होने के कारण कट्टर हिंदू थीं। वह टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने से भी रोकती थीं। इन्हीं सब कारणों से टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात कही ।

प्रश्न 16: टोपी एक दिन के लिए ही सही अपने बड़े भाई मुन्नी बाबू से क्यों बड़ा होना चाहता था?
उत्तर: 
इफ़्फ़न से दोस्ती करने के कारण जब टोपी की पिटाई हो रही थी तभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू ने दादी से शिकायत करते हुए कहा था कि यह (टोपी) एक दिन रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खा रहा था तो टोपी को बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वह कबाब को हाथ तक नहीं लगाता है। कबाब तो स्वयं मुन्नी बाबू ने खाया था। यह बात घर न बताने के लिए उसने इकन्नी रिश्वत दी थी। इसका मजा चखाने के लिए टोपी मुन्नी बाबू से बड़ा होना चाहता था।

प्रश्न 17: कलेक्टर साहब के लड़के टोपी के दोस्त क्यों नहीं बन सके?
उत्तर:
 कलेक्टर साहब के लड़के टोपी के दोस्त इसलिए नहीं बन सके क्योंकि वे तीनों बहुत घमंडी थे। उन्हें अपने पिता के पद तथा आर्थिक स्थिति पर गुमान था । वे बार-बार जानबूझकर टोपी से उसके पिता के पद के विषय में पूछते थे और वह भी अपमानजनक भाषा में। एक बार तो उन्होंने टोपी पर अपना कुत्ता छोड़ दिया था। उन्हें मानवीय संबंधों और दोस्ती की गरिमा का बिलकुल ज्ञान नहीं था ।

प्रश्न 18: टोपी ने दुबारा कलेक्टर साहब के बँगले की ओर रुख क्यों नहीं किया? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
दुबारा टोपी कलेक्टर साहब के बँगले की ओर नहीं गया क्योंकि नए कलेक्टर साहब के बेटों ने टोपी को अपने कुत्ते से कटवा दिया था और टोपी को पेट में चौदह इंजेक्शन लगवाने पड़े थे तथा कलेक्टर के बेटों ने टोपी को मारा भी था ।

प्रश्न 19: अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की दादी की इच्छा पूरी क्यों नहीं हो पाई ? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी के पति एक मौलवी थे और मौलवी के घर गाना-बजाना नहीं हो सकता था। दादी के अनुसार उनके पति हर अवसर पर बस मौलवी ही बने रहते थे । यही कारण था कि वे अपने बेटे की शादी में गाना-बजाना नहीं कर पाईं।

प्रश्न 20: टोपी मुन्नी बाबू की किस असलियत से परिचित था? उसने इसके बारे में घरवालों को जानकारी क्यों नहीं दी ? यह भी बताइए कि मुन्नी बाबू से टोपी की अनबन होने का क्या कारण था?
उत्तर: 
टोपी मुन्नी बाबू की इस असलियत से परिचित था कि वे कबाब खाते हैं क्योंकि उसने एक बार मुन्नी बाबू को रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाते हुए देख लिया था । इसके लिए मुन्नी बाबू ने उसे इकन्नी दी थी कि वह यह बात घर जाकर न कहे। ऐसा नहीं है कि टोपी ने इकन्नी को रिश्वत के रूप में स्वीकार करके मुन्नी बाबू की असलियत को घरवालों से छिपाकर रखा था, बल्कि बात यह थी कि वह भ्रातृभाव व भोलेपन के कारण मुन्नी बाबू की चुगली नहीं कर सका था । मुन्नी बहुत चतुर था। इस कारण जब ‘अम्मी’ संबोधन पर दादी ने टोपी को डाँटना शुरू किया, तो उसको लगा कि कहीं टोपी कबाब वाली बात दादी को न बता दे। इसी कारण उसने पहले ही झूठा आरोप टोपी पर लगा दिया कि उसने टोपी को एक दिन कबाब खाते हुए देखा है। यह आरोप सरासर झूठ था, जिसका टोपी विरोध कर रहा था। इसी कारण मुन्नी बाबू और टोपी में अनबन हुई थी।

2. सपनों के–से दिन – Short Questions answer

प्रश्न 1: पी०टी० अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 
पी०टी० साहब बहुत ही सख़्त व अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे । विद्यालय में वे ज़रा-सी गलती होने पर विद्यार्थियों की चमड़ी उधेड़ देते थे । विद्यालय की प्रार्थना सभा में वे बच्चों को पंक्तिबद्ध खड़ा करते थे और यदि कोई बच्चा थोड़ी-सी भी शरारत करता, तो उसकी खाल खींच लेते थे । स्काउट परेड के आयोजन में इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती थी। बच्चों को अपने मार्गदर्शन में कुशलतापूर्वक परेड करवाते थे और परेड के समय बच्चों को ‘शाबाशी’ भी दे देते थे इसलिए बच्चों को उनकी यही ‘शाबाशी’ फ़ौज के तमगों-सी लगती थी और कुछ समय के लिए उनके मन में पी०टी० साहब के प्रति आदर का भाव जाग जाता था ।

प्रश्न 2: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि बच्चों की रुचि पढ़ाई में क्यों नहीं थी? माँ-बाप को उनकी पढ़ाई व्यर्थ क्यों लगती थी?
उत्तर: 
‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर बच्चों की रुचि पढ़ाई-लिखाई में इसलिए नहीं थी क्योंकि विद्यालय में उन्हें बुरी तरह दंडित किया जाता था। ज़रा-सी गलती होने पर उनकी चमड़ी उधेड़ दी जाती थी तथा उन्हें नई कक्षा में जाने पर भी पुरानी पुस्तकें व कॉपियाँ दी जाती थीं, जिनसे आती गंध नई कक्षा की सारी उमंग दूर कर देती थी। माँ-बाप पढ़ाई के प्रति जागरूक नहीं थे और सोचते थे कि वे छह महीने में पंडित घनश्याम दास से बच्चे को दुकान का हिसाब रखने की लिपि सिखवा देंगे, इसी कारण उन्हें बच्चों की पढ़ाई व्यर्थ लगती थी ।

प्रश्न 3: पी०टी० साहब की चारित्रिक विशेषताओं और कमियों का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए ।
उत्तर: 
‘सपनों के से दिन’ पाठ में पी०टी० साहब अनुशासनप्रिय, पक्षी प्रेमी, निश्चित व बेहद सख़्त अध्यापक के रूप में पाठकों के सामने आते हैं। वे अनुशासनप्रिय थे और चाहते थे कि स्कूल का प्रत्येक बच्चा अनुशासित रहे। वे पक्षियों से बहुत प्रेम करते थे, उन्होंने तोते पाले हुए थे और पूरा दिन वे तोतों को बादाम की गिरियाँ भिगो-भिगोकर खिलाते तथा उनसे बातें करते रहते थे। मुअत्तल होने के बाद भी उनके चेहरे पर ज़रा-सी भी चिंता नहीं दिखाई दी थी। इन सब विशेषताओं के अतिरिक्त उनके चरित्र में बच्चों के प्रति बेहद सख्ती की भावना रखने की कमी दिखाई देती है । वे ज़रा सी ग़लती हो जाने पर बच्चों की चमड़ी उधेड़ देते थे तथा कई बार बच्चों को ठुड्डों तथा बैल्ट के बिल्ले से मारा करते थे ।

प्रश्न 4: मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए जो तरीका था, वह आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन-मूल्यों के अनुसार उचित है या अनुचित ? तर्कसहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
 मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए बुरी तरह शारीरिक दंड देने का तरीका था, यह तरीका आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन मूल्यों के अनुसार बिल्कुल भी उचित नहीं है। इससे पुराने ज़माने के समान आज के बच्चों के मन में भी स्कूल के प्रति भय तथा पढ़ाई के प्रति अरुचि का भाव आ सकता है । आज की शिक्षा-व्यवस्था में विद्यार्थियों को अनुशासन जैसा जीवन-मूल्य सिखाने के लिए मनोवैज्ञानिक युक्तियों को अपनाने की व्यवस्था है। आज अध्यापक बच्चों को प्यार-दुलार के सहारे ही अनुशासित बनाने का प्रयास करते हैं ।

प्रश्न 5: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि पी०टी० साहब की ‘शाबाश’ बच्चों को फौज़ के तमगों-सी क्यों लगती थी?
उत्तर: 
पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज के तमगों-सी इसलिए लगती थी क्योंकि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे । वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी सी ग़लती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे, तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने फ़ौज के सारे लोग तमगे जीत लिए हों ।

प्रश्न 6: लेखक के बचपन के समय बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
अपने बचपन के दिनों में लेखक जिन बच्चों के साथ खेलता था, उनमें अधिकांश तो स्कूल जाते ही न थे और जो कभी गए भी वे पढ़ाई में अरुचि होने के कारण किसी दिन अपना बस्ता तालाब में फेंककर आ गए और फिर स्कूल गए ही नहीं। उनका सारा ध्यान खेलने में रहता था। इससे स्पष्ट है कि लेखक के बचपन के दिनों में बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।

प्रश्न 7: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के लेखक का मन पुरानी किताबों से क्यों उदास हो जाता है ?
उत्तर: 
लेखक का मूल पुरानी किताबों से इसलिए उदास हो जाता है क्योंकि लेखक को पुरानी किताबों से आती विशेष गंध उसे परेशान करती थी। आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर होने के कारण लेखक नई किताब नहीं खरीद पाता था । अन्य विद्यार्थियों की तरह लेखक में भी नई किताबों से पढ़ने की उमंग और उत्साह होता था, परंतु पुरानी किताबों को देखकर वह उदास हो जाता था।

प्रश्न 8: ख़ुशी से जाने की जगह न होने पर भी, लेखक को कब और क्यों स्कूल जाना अच्छा लगने लगा ?
उत्तर: 
लेखक खुशी से स्कूल जाना नहीं चाहता था । लेखक के लिए वह खुशी से जाने वाला स्थान नहीं था क्योंकि शिक्षकों की डाँट फटकार और पिटाई के कारण लेखक के मन में एक भय सा बैठ गया था इसके बावजूद जब उनके पी०टी० सर स्काउटिंग का अभ्यास करवाते थे, विद्यार्थियों को पढ़ाने-लिखने के बदले उनके हाथों में नीली-पीली झंडियाँ पकड़ा देते थे और विद्यार्थियों से परेड करवाते थे । पी०टी० साहब के संचालन में विद्यार्थी लेफ्ट राइट परेड करते हुए अपने आपको किसी फ़ौजी से कम नहीं समझते। इस दौरान लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगता था ।

प्रश्न 9: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति बच्चों की क्या धारणा बन जाती है?
उत्तर: 
यह सत्य है कि मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति बच्चों के मन में एक भय बैठ जाता है। बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाती है और पढ़ाई छोड़ देने की भावना भी पनपने लगती है। उनके मन में शिक्षक के प्रति घृणा का भाव भी उत्पन्न होने लगता।

प्रश्न 10: ‘सपनो के से दिन’ पाठ के लेखक गुरुदयाल सिंह एवं उनके साथियों को पीटी साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमग़ों जैसी क्यों लगती थी ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज की तमगों-सी इसलिए लगती थी कि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे। वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी-सी गलती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने फ़ौज के सारे तमगे जीत लिए हों ।

प्रश्न 11: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि स्काउट परेड करते समय लेखक स्वयं को ‘महत्त्वपूर्ण आदमी’ फ़ौजी जवान क्यों समझता था?
उत्तर: 
परेड करना बच्चों को बहुत अच्छा लगता था । मास्टर प्रीतमचंद लेखक जैसे स्काउटों को परेड करवाते थे तो इन बच्चों को बहुत अच्छा लगता था । जब प्रीतमचंद सीटी बजाते हुए बच्चों को मार्च करवाते थे, राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अबाउट टर्न कहते थे। तब बच्चे छोटे-छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ करते हुए ठक-ठककर अकड़कर चलते थे, तो उन्हें ऐसा लगता था मानो वे विद्यार्थी नहीं, बल्कि फ़ौजी जवान हों । धुली वर्दी, पॉलिश किए बूट और जुर्राबों को पहनकर बच्चे फ़ौजी जैसा महसूस करते थे।

प्रश्न 12: गरमी की छुट्टियों के पहले और आखिरी दिनों में लेखक ने क्या अंतर बताया है?
उत्तर: 
लेखक ने बताया है कि तब गरमी की छुट्टियाँ डेढ़-दो महीने की हुआ करती थीं। छुट्टियों के शुरू के दो-तीन सप्ताह तक बच्चे खूब खेल-कूद किया करते थे। वे सारा समय खेलने में बिताया करते थे। छुट्टियों के आखिरी पंद्रह-बीस दिनों में अध्यापकों द्वारा दिए गए कार्य को पूरा करने का हिसाब लगाते थे और कार्य पूरा करने की योजना बनाते हुए उन छुट्टियों को भी खेलकूद में बिता देते थे।

प्रश्न 13: फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से क्यों काँप उठते थे? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर: 
चौथी श्रेणी में मास्टर प्रीतमचंद बच्चों को फ़ारसी पढ़ाते थे । वे स्वभाव से काफ़ी सख्त थे। अगर बच्चे उनकी आशाओं पर पूरे नहीं उतरते थे, तो वे बच्चों को कड़ी सजा देते थे। बच्चों के मन में जो उनका भय समाया हुआ था उसके कारण फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे काँप उठते थे। फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से इसलिए काँप उठते थे क्योंकि मास्टर प्रीतमचंद ने फ़ारसी का शब्द रूप याद करके न लाने पर उनकी बुरी तरह पिटाई की थी, जबकि यह देखकर हेडमास्टर शर्मा जी ने उन्हें मुअत्तल भी कर दिया था, फिर भी बच्चों के मन में डर होने के कारण वे सोचते थे कि मुअत्तल होने के बावजूद कहीं मास्टर प्रीतमचंद उन्हें पढ़ाने के लिए न आ जाएँ। उनका यह डर तब समाप्त होता था जब मास्टर नौहरिया राम जी या फिर हेडमास्टर जी कक्षा में आ जाते थे।

प्रश्न 14: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर मास्टर प्रीतमचंद के व्यवहार की उन बातों का उल्लेख कीजिए, जिनके कारण विद्यार्थी उनसे नफ़रत करते थे।
उत्तर:
 पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज की तमगों सी इसलिए लगती थी कि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे । वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी-सी गलती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे, तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने किसी फ़ौज के सारे तमगे जीत लिए हैं ।

प्रश्न 15: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि छुट्टियों में लेखक कहाँ जाया करता था और वहाँ उसकी दिनचर्या क्या रहती थी।
उत्तर: 
अपने स्कूल की छुट्टियों में लेखक अपनी नानी के घर जाया करता था । लेखक की नानी उसे बहुत प्यार करती थी। वह ननिहाल के छोटे से तालाब में जाकर दोपहर तक नहाया करता था । नानी के घर दूध, घी खूब खाने को मिलता था। वहाँ दिन भर खेलना, खाना और नहाने के सिवा और कोई काम मक्खन, न होता था ।

प्रश्न 16: छात्रों के नेता ओमा के सिर की क्या विशेषता थी? ‘सपनों के से दिन’ के आधार पर बताइए ।
उत्तर: 
ओमा लेखक के बचपन का मित्र था । वे दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे । ओमा बहुत शरारती छात्र था। वह दूसरे विद्यार्थियों को मारता पीटता था और वह गंदी-गंदी गालियाँ भी दिया करता था । वह अत्यंत अनुशासनहीन छात्र था। वह बहुत ताकतवर भी था । वह चंचल स्वभाव का बालक था, जिसे पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं लगता था। कक्षा में शिक्षक द्वारा दिए गए काम को ओमा कभी पूरा नहीं कर पाता था । शिक्षक के द्वारा पिटाई खाने को वह आसान समझता था । उनकी पिटाई का उस पर कोई असर नहीं पड़ता था क्योंकि उसका शरीर बहुत मज़बूत था, उसका ‘सिर’ भी बहुत बड़ा था । वह लड़ाई में ‘सिर’ से ही वार करता था इसलिए बच्चे ‘ओमा’ को ‘रेल – बंबा’ कहकर पुकारते थे।

प्रश्न 17: पीटी मास्टर प्रीतमचंद को देखकर बच्चे क्यों डरते थे?
उत्तर: 
पीटी मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल के समय में कभी भी हमने मुसकराते या हँसते न देखा था। उनका ठिगना कद, दुबला पतला परंतु गठीला शरीर, माता के दागों से भरा चेहरा और बाज-सी तेज आँखें, खाकी वरदी, चमड़े के चौड़े पंजों वाले बूट-सभी कुछ ही भयभीत करने वाला हुआ करता। उनका ऐसा व्यक्तित्व बच्चों के मन में भय पैदा करता और वे डरते थे।

प्रश्न 18: हेडमास्टर ने प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?
उत्तर:
 हेडमास्टर शर्मा जी ने देखा कि प्रीतमचंद ने छात्रों को मुरगा बनवाकर शारीरिक दंड दे रहे हैं तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश दिया। उन्होंने प्रीतमचंद के निलंबन का आदेश रियासत की राजधानी नाभा भेज दिया। वहाँ के शिक्षा विभाग के डायरेक्टर हरजीलाल के आदेश की मंजूरी मिलना आवश्यक था। तब तक प्रीतमचंद स्कूल नहीं आ सकते थे।

प्रश्न 19: हेडमास्टर शर्मा जी का छात्रों के साथ कैसा व्यवहार था?
उत्तर: 
हेडमास्टर शर्मा जी अनुशासन प्रिय परंतु विनम्र व्यक्ति थे। वे बच्चों को मारने-पीटने में विश्वास नहीं रखते थे। वे बहुत प्रेम से छात्रों को पढ़ाते थे और नाराज़गी भी आँखों से ही प्रकट करते थे। बहुत गुस्सा होने पर गाल पर हल्की-सी चपत लगाकर बच्चों को सुधार देते थे । वे क्रूरता से कोसों दूर थे और इसी कारण मास्टर प्रीतमचंद की बर्बरता वे सहन नहीं कर सके और उन्होंने तुरंत प्रभाव से विद्यालय से निकलवा दिया। वे एक अच्छे प्रशासक, गुरु तथा उदारमना थे।

प्रश्न 20: ग़रीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना क्यों कठिन था ? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
ग़रीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना इसलिए कठिन था क्योंकि एक तो निर्धनता ही सबसे बड़ी बाधा थी। शुल्क, गणवेश आदि खरीदने के लिए ऐसे परिवार पैसे व्यय नहीं करते थे। दूसरे बच्चों को ही पढ़ाई में रुचि नहीं थी और न ही परिवार वाले पढ़ाई की अनिवार्यता मानते और समझते थे। बच्चों के थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें किसी पारिवारिक व्यवसाय, कहीं हिसाब-किताब लिखने आदि में झोंक दिया जाता था।

1. हरिहर काका – Short Questions answer

प्रश्न 1: हरिहर काका को पुलिस सुरक्षा क्यों प्रदान की गई?
उत्तर:
 हरिहर काका पर दो बार आक्रमण किया गया था, जिसमें बाल-बाल उनकी जान बची। एक बार ठाकुरबारी के साधु-संतों ने हरिहर काका का अपहरण कर लिया था और जान से मारने की कोशिश की। इसी प्रकार अपनी ज़मीन भाइयों के नाम नहीं करने पर उनके सगे भाइयों ने उन्हें कह दिया कि वे हरिहर को मारकर ज़मीन में गाड़ देंगे। अगर समय पर पुलिस नहीं आती, तो शायद हरिहर काका की जान भी जा सकती थी । हरिहर काका की जान की सुरक्षा व अपहरण से बचाने के लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई।

प्रश्न 2: लेखक ठाकुरबारी से घनिष्ठ संबंध क्यों न बना सका?
उत्तर: 
लेखक मन बहलाने के लिए कभी-कभी ठाकुरबारी में जाता था लेकिन वहाँ के साधु-संत उसे फूटी आँखों नहीं सुहाते। वे काम-धाम करने में कोई रुचि नहीं लेते हैं। ठाकुर जी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूड़ी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें अगर कुछ आता है तो सिर्फ बात बनाना आता है। ठाकुरबारी के साधु-संतों की अकर्मण्यता और उनकी बातूनी आदतों के कारण लेखक ठाकुरबारी से अपना घनिष्ठ संबंध नहीं बना सकता।

प्रश्न 3: हरिहर काका की दयनीय स्थिति का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
 हरिहर काका की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। इस भरी दुनिया में वे अकेले रहने लगे। उनके मन में भय, उदासी, हताशा व निराशा ने घर कर लिया था। उनका एक बार अपहरण भी कर लिया गया था। उनके भाइयों ने और ठाकुरबारी के साधु, संतों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा भी था। उनको जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इसके अतिरिक्त उनकी दो-दो पत्नियाँ स्वर्ग सिधार चुकी थी। वे निःसंतान थे। इस भरी दुनिया में वे अकेले रहने पर विवश थे। वे मज़बूर व लाचार थे, असहाय थे।

प्रश्न 4: हरिहर काका ने सबसे बात करना बंद क्यों कर दिया था?
उत्तर:
 हरिहर काका के साथ उनके भाइयों ने और परिवार के अन्य सदस्यों ने दुर्व्यवहार किया था, हरिहर काका को जान से मारने की कोशिश की थी। हरिहर काका को जान से मारने की कोशिश की थी। हरिहर काका को जिस महंत पर विश्वास था उसने भी काका के विश्वास को तोड़ा था । हरिहर काका पूरी तरह सदमें में थे। उनके मन में रिश्तों के प्रति कडुवाहट और अविश्वास की भावना घर कर गई थी इसीलिए काका ने सबसे बात करना बंद कर दिया था। वे उदास परेशान व निराश रहने लगे थे।

प्रश्न 5: हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर किस तरह उतारा? उनकी इस प्रतिक्रिया को आप कितना उचित समझते हैं?
उत्तर:
 हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर उतारते हुए कहा, ‘समझ रही हो कि मुफ्त में खिलाती हो, तो अपने मन से यह बात निकाल देना। मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है। उसमें तो मैं दो-चार नौकर रख लूं, आराम से खाऊँ, तब भी कमी नहीं होगी। मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ। मेरे धन पर तो तुम सब मौज कर रही हो, लेकिन अब मैं तुम सब को बताऊँगा।” उनकी इस प्रतिक्रिया को उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे बात बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना अधिक थी।

प्रश्न 6: ठाकुरबारी के विषय में लोगों के क्या विचार थे?
उत्तर: 
ठाकुरबारी के विषय में लोगों के मन में बहुत अंधविश्वास भरा था। लोगों को लगता था कि अगर उनके घर पुत्र का जन्म हुआ है तो ठाकुर जी की कृपा से । अगर मुकदमों में जीत हुई है तो ठाकुर जी की कृपा से। अगर उनके खेतों में अच्छी फ़सल आई है तो वह भी ठाकुर जी की कृपा से ही आई है। अगर ‘लड़की’ की शादी तय हुई है तो वह ठाकुर जी की कृपा से ही तय हुई है। लोगों के खलिहान में फ़सल आने पर प्रथम फ़सल ठाकुर जी के नाम ही कर दिया जाता था ।

प्रश्न 7: परिवार वालों से हरिहर काका के असंतुष्ट होने की बात महंत को कैसे पता चली? यह सुनकर महंत ने क्या किया?
उत्तर: 
हरिहर काका जिस वक्त घर की औरतों को खरी-खोटी सुना रहे थे, उसी वक्त ठाकुरबारी के पुजारी जी उनके दालान पर ही विराजमान थे। वार्षिक हुमाध के लिए वह घी और शकील लेने आए थे। उन्होंने लौटकर महंत जी को विस्तार के साथ सारी बात बताई। उनके कान खड़े हो गए। यह सुनकर हाथ आए अवसर का लाभ उठाने के लिए महंत जी ने टीका तिलक लगाया और कंधे पर रामनामी लिखी चादर डाल ठाकुरबारी से चल पड़े।

प्रश्न 8: हरिहर काका का दिल जीतने के लिए ठाकुरबारी के महंत जी ने क्या-क्या उपाय अपनाया?
उत्तर: 
हरिहर काका का दिल जीतने के लिए महंत जी ने स्वादिष्ट भोजन खिलाने और धर्म-चर्चा करने जैसे उपाय अपनाए। उन्होंने रात में हरिहर काका को भोग लगाने के लिए जो मिष्टान्न और व्यंजन दिए, वैसे उन्होंने कभी नहीं खाए थे। घी टपकते मालपुए, रस बुनिया, लड्डू, छेने की तरकारी, दही, खीर…। इन्हें पुजारी जी ने स्वयं अपने हाथों से खाना परोसा था। पास में बैठे महंत जी धर्म-चर्चा से मन में शांति पहुँचा रहे थे।

प्रश्न 9: हरिहर काका परिवार वालों का बदलता व्यवहार आपको क्या सोचने के लिए विवश करता है? कहानी के आधार पर बताएँ ।
उत्तर:
 हरिहर काका के परिवार वालों का बदलता व्यवहार समाज की संवेदनहीनता एवम् स्वार्थपरता का परिचय देता है। आधुनिक समाज में रिश्तों का महत्त्व बहुत कम हो गया है। लोगों के मन में धन के प्रति लालच की भावना बढ़ गई है। हमारे चारों तरफ़ अविश्वास का वातावरण बढ़ रहा है। इसलिए हमें सावधान रहने की आवश्यकता है । हरिहर काका की भाँति रह रहे बड़े बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता होने की आवश्यकता है।

प्रश्न 10: हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में हो रही देरी के बारे में महंत जी ने क्या अनुमान लगाया? इसके लिए उन्हें क्या विकल्प नजर आया?
उत्तर:
 हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में जो देरी हो रही थी, उसके बारे में महंत जी ने यह अनुमान लगाया कि हरिहर धर्म-संकट में पड़ गया है। एक ओर वह चाहता है कि ठाकुर जी को लिख दें, किंतु दूसरी ओर भाई के परिवार के माया-मोह में बँध जाता है। इस स्थिति में हरिहर का अपहरण कर जबरदस्ती उससे लिखवाने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं। बाद में हरिहर स्वयं राजी हो जाएगा।

प्रश्न 11: उम्र का फासला भी आत्मीय संबंधों के बीच बाधा नहीं बनता – कथावाचक और हरिहर काका के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
 कथावाचक और हरिहर काका के बीच बड़े ही मधुर व आत्मीय संबंध थे । हरिहर काका के प्रति कथावाचक की दोस्ती और कथावाचक के प्रति हरिहर काका का अनन्य प्रेम यह स्पष्ट कर देता है कि उम्र का फासला आत्मीय संबंधों के बीच बाधा नहीं बन सकता। हरिहर काका लेखक को (जब वह छोटा था) अपने कंधों पर बैठा कर घुमाते थे । वे दोनों आपस में खुल कर बातें करते थे।

प्रश्न 12: ‘यह कहानी अंध भक्ति और ठाकुरबारी के चरित्र को उजागर करती है’ सोदाहरण स्पष्ट करें।
उत्तर: 
लोग ठाकुरबारी के प्रति मान्यता रखते थे कि उनकी कृपा से ही लोगों को पुत्र की प्राप्ति होगी, मुकद्दमों में जीत होगी, अच्छी फसल होगी, लड़की की शादी अच्छे घर में होगी, लड़कों को नौकरी मिलेगी आदि अंधविश्वासों से लोग भरे हुए थे। उनका मानना था कि ठाकुरबारी में प्रवेश करते ही उनके सारे पाप धुल जाते हैं और वे पवित्र हो जाते हैं। जबकि सत्य यह था कि ठाकुरबारी के साधु-संत कोई काम-धाम नहीं करते थे, दोनों जून हलवा पूड़ी खाते थे, दिन भर बातें बनाते थे और आराम से पड़े रहते थे।

प्रश्न 13: महंत जी ने हरिहर काका का अपहरण किस तरह करवाया?
उत्तर:
 हरिहर काका से उनकी जमीन का वसीयत करवाने के लिए महंत जी ने उनके अपहरण का रास्ता अपनाया। इसके लिए आधी रात के आसपास ठाकुरबारी के साधु-संत और उनके पक्षधर भाला, आँडासा और बंदूक से लैस एकाएक हरिहर काका के दालान पर आ धमके। हरिहर काका के भाई इस अप्रत्याशित हमले के लिए तैयार नहीं थे। इससे पहले कि वे जवाबी कार्रवाई करें और गुहार लगाकर अपने लोगों को जुटाएँ, तब तक ठाकुरबारी के लोग उनको पीठ पर लादकर चंपत हो गए।

प्रश्न 14: हरिहर काका को छुड़ाने में असफल रहने पर उनके भाई क्या सोचकर पुलिस के पास गए?
उत्तर: 
हरिहर काका के भाई उन्हें ठाकुरबारी से छुड़ा पाने में असफल रहे तो वे यह सोचकर पुलिस के पास गए कि जब वे पुलिस के साथ ठाकुरबारी पहुँचेंगे तो ठाकुरबारी के भीतर से हमले होंगे और साधु-संत रँगे हाथों पकड़ लिए जाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ठाकुरबारी के अंदर से एक रोड़ा भी बाहर नहीं आया। शायद पुलिस को आते हुए उन्होंने देख लिया था।

प्रश्न 15: भाइयों की किन बातों से हरिहर काका का दिल पसीज गया और वे ठाकुरबारी से घर लौट आए?
उत्तर:
 ठाकुरबारी में एक सुंदर कमरे में एक सुंदर पलंग पर बैठे हरिहर काका सेवकों से घिरे हुए थे। उसी समय सुबह तड़के ही तीनों भाई ठाकुरबारी जाकर हरिहर काका के पैर पकड़कर रोने लगे। अपनी पत्नियों की गलती के लिए माफ़ी माँगी तथा दंड देने की बात कही। साथ ही खून के रिश्ते की भी माया फैलाई, जिससे हरिहर काका का दिल पसीज गया और वे ठाकुरबारी से घर लौट आए।

प्रश्न 16: तीसरी शादी करने से हरिहर काका ने क्यों मना कर दिया?
उत्तर:
 तीसरी शादी करने से हरिहर काका ने मना कर दिया क्योंकि उनकी उम्र धीरे-धीरे ढल रही थी तथा धार्मिक संस्कारों की वजह से भाईयों का परिवार अपना ही परिवार मान लिया था। वह इत्मीनान और प्रेम से अपने भाइयों के परिवार के साथ ही रहना चाहते थे। उनके भाई और भाईयों की पत्नियाँ भी हरिहर काका की खूब देखभाल करने लगीं थीं ।

प्रश्न 17: हरिहर काका ने खाने की थाली बीच आँगन में क्यों फेंक दी ?
उत्तर:
 हरिहर काका ने अपनी खाने से भरी थाली बीच आँगन में फेंक दी थी क्योंकि उन्हें, उनके छोटे भाई की पत्नी रूखा-सूखा खाना लाकर परोस दिया जिसमें केवल भात, मट्ठा और आचार था, जबकि उसने अपने पति को सुंदर-सुंदर व्यंजन खाने को दिए थे। यह देखते ही हरिहर काका के बदन में आग लग गई और क्रोध से भर गए थे।

प्रश्न 18: गाँव के नेता जी ने हरिहर काका के समक्ष क्या प्रस्ताव रखा?
उत्तर:
 गाँव के नेता जी ने हरिहर काका के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि तुम्हारी ज़मीन में “हरिहर उच्च विद्यालय” नाम से एक हाईस्कूल खोल दिया जाएगा। इससे तुम्हारा नाम अमर हो जाएगा। तुम्हारी ज़मीन का सही उपयोग होगा और गाँव के विकास के लिए गाँव को एक स्कूल मिल जाएगा।

प्रश्न 19: ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाए गए हरिहर काका अपने घर के किस वातावरण से अनजान थे?
उत्तर: 
ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाने के बाद अपने ही घर में हरिहर काका के बारे में नया वातावरण तैयार हो रहा था। उन्हें ठाकुरबारी से जिस दिन वापस लाया गया था, उसी दिन से उनके भाई और रिश्ते-नाते के लोग समझाने लगे थे कि विधिवत अपनी जायदाद वे अपने भतीजों के नाम लिख दें। वह जब तक ऐसा नहीं करेंगे तब तक महंत की गिद्ध-दृष्टि उनके ऊपर लगी रहेगी।

प्रश्न 20: ठाकुरबारी के साधु-संतों का कौन-सा आचरण लेखक के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न कर रहा था?
उत्तर: 
ठाकुरबारी में अपना मन बहलाने के लिए फालतू समय काटने के लिए हरिहर काका व लेखक भी जाते थे। परंतु साधु-संतों का आचरण लेखक के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न कर रहा था क्योंकि साधु-संतों करने में कोई रुचि नहीं थी। ठाकुरजी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूरी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें अगर कुछ आता है, तो सिर्फ़ बाते बनाना आता था।