4. पर्वत प्रदेश में पावस – Short Questions answer

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न. 1. ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ के आधार पर इंद्र के इंद्रजाल का भाव लिखिए।
उत्तर: 
इंद्र के इंद्रजाल का भाव यह है कि इंद्र मानो जादू के खेल दिखा रहा है।

प्रश्न. 2. पर्वत प्रदेश में पावस के दृश्य को कवि ने इन्द्रजाल क्यों कहा है ? 
उत्तर: पावस के दृश्य को कवि ने इन्द्रजाल इसलिए माना है, क्योंकि इस ऋतु में प्रकृति  पल-पल अपना रूप बदलती है तो ऐसा लगता है, मानो वास्तविकता न होकर कोई माया जाल हो अर्थात् मानो इंद्र ने ही यह जाल फैलाया है।

प्रश्न. 3. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए ?
उत्तर:
 शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में इसलिए धँस गए, क्योंकि जो धुआँ बादलों के रूप में उठ रहा था उससे उन्हें तालाब जलता हुआ नजर आ रहा था और ऐसा लग रहा है जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। वे जलने से बचने के लिए धरती में धँस गए थे।

प्रश्न. 4. झरने कविता में किसके गौरव का गान कर रहे हैं ? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है ?
उत्तर: झरने पर्वतों (गिरि) का गौरव गान कर रहे हैं। बहते हुए झरने की तुलना मोती की लड़ियों से सुन्दर निर्झर जो झाग से भरे हैं उनसे की गई है।

प्रश्न. 5. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों ?
अथवा
कवि ने तालाब की तुलना दर्पण से क्यों की है ?
उत्तर: 
कवि ने तालाब की तुलना दर्पण से इसलिए की है क्योंकि जिस प्रकार दर्पण में हमें अपना प्रतिबिंब देखने को मिलता है उसी प्रकार तालाब में पर्वत का महाकाय प्रतिबिंब दिखता है।

प्रश्न. 6. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं ?
उत्तर:
 पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष नीरव आकाश को एकटक झाँककर देख रहे थे। वे अपनी जिज्ञासा और बढ़ती हुई ऊँचाई को प्रतिबिंबित करते हैं।

प्रश्न. 7. प्रतिबिंबित पहाड़ के दृश्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
 वर्षा-ऋतु में पर्वत के तालाब जल से भर गए हैं। तालाब के भीतर पहाड़ का प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहा है। उसे देखकर यों लगता है मानो करधनी के आकार वाला पहाड़ अपने हजारों फूलों के नयनों से तालाब रूपी दर्पण में अपने विशाल आकार को देख रहा है।

प्रश्न. 8. कवि ने उच्चाकांक्षा पर क्या व्यंग्य किया है ?
उत्तर:
 कवि ने मानव मन की उच्चाकांक्षा पर यह व्यंग्य किया है कि उच्चाकांक्षा वाले व्यक्ति पहाड़ी पेड़ों की तरह हमेशा कुछ चिंतित, मौन, खोए से प्रतीत होते हैं तथा वे हमेशा ऊँचा उठने की कामना से व्यग्र रहते हैं।

प्रश्न. 9. इंद्र को जलद-यान में विचरता हुआ क्यों दिखाया गया है ?
उत्तर
: कवि ने इंद्र को बादल रूपी विमान में घूम-घूमकर जादू बिखेरता दिखाया है। कवि ने यह कहा है कि वर्षा ऋतु के रंग-बिरंगे नित बदलते बादलों के रूप जादुई हैं। इन्हें जादू ही कहा जा सकता है। यह प्रभु का चमत्कार है, प्रकृति  का करिश्मा है।

प्रश्न. 10. इस पद्यांश में ‘मेखलाकार’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?
उत्तर:
 इस पद्यांश में ‘मेखलाकर’ शब्द पर्वतों की शृंखला के लिए प्रयोग किया है जो प्रकृति  की मेखला (करधनी) के रूप में प्रतीत होती है।

प्रश्न. 11. पर्वत किसमें अपना प्रतिबिम्ब देख रहा है ?
उत्तर: 
पर्वत तालाब रूपी जलदर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देख रहा है।

प्रश्न. 12. पल-पल क्या परिवर्तित हो रहा है ?
उत्तर: 
पल-पल प्राकृतिक दृश्य परिवर्तित हो रहे हैं।

प्रश्न. 13. किसे ‘गिरि का गौरव गाने वाले’ कहा गया है ?
उत्तर:
 पर्वत से झरने वाले झरनों को ‘गिरि का गौरव गाने वाले’ कहा गया है।

प्रश्न. 14. झरने क्या कर रहे हैं ?
उत्तर:
 झरने पर्वतों का यशगान कर रहे हैं।

प्रश्न. 15. झरने किसके समान लग रहे हैं ?
उत्तर:
 झरने पर्वतों के गले में पड़ी मोती की माला के समान लग रहे हैं।

प्रश्न. 16. ‘मद में नस-नस उत्तेजित कर’ पंक्ति का क्या आशय है ?
उत्तर: 
आशय-झरनों का सौंदर्य मादक, तन-मन को उल्लास, उमंग स्फूर्ति और उत्तेजना का संचार कर देता है।

प्रश्न. 17. वृक्ष आकाश की ओर कैसे देख रहे हैं ?
उत्तर: 
वृक्ष आकाश की ओर एकटक, अटल और चिंतित होकर देख रहे हैं।

प्रश्न. 18. ‘उड़ गया अचानक लो भूधर’ पंक्ति का क्या आशय है ?
उत्तर:
 आशय-पर्वतीय प्रदेशों में अचानक घने बादलों के आ जाने के कारण सारा दृश्य अदृश्य हो जाता है।

प्रश्न. 19. ‘रव-शेष रह गए हैं निर्झर’ पंक्ति का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
 पंक्ति का तात्पर्य है कि झरने की आवाज के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं पड़ रहा है।

प्रश्न. 20. प्रकृति  में कौन-कौन से परिवर्तन दिखायी दे रहे हैं ?
उत्तर: आकाश को धरती पर टूट पड़ता हुआ समझकर और तालाब को बादलों रूपी धुएँ में जलता समझकर शाल वृक्ष धरती में धँसते हुए प्रतीत हो रहे हैं।

प्रश्न. 21. कौन-से वृक्ष धरती में धँस गए ?
उत्तर:
 शाल के वृक्ष धरती में धँस गए।

प्रश्न. 22. इन्द्र देवता किसमें सवार होकर घूम रहे हैं ?
उत्तर:
 इन्द्र देवता जलदयान अर्थात् बादल रूपी विमान में सवार होकर घूम रहे हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न. 1. ‘पावस’ में गिरि का गौरव कौन गा रहा है और उत्तेजना का संचार वह कैसे कर पाता है?
उत्तर: (i) झरना
(ii) अपनी आवाज और गति से
व्याख्यात्मक हल:
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में बताया गया है कि जब पहाड़ों पर वर्षा ऋतु में बादल बरसते हैं तब पर्वतों से प्रवाहित होने वाले झरने गिरि का गौरव गाते हुए पृथ्वी पर गिरते हैं और अपनी आवाज और गति से नस-नस में उत्तेजना का संचार कर पाते हैं।

प्रश्न. 2. कवि पंत ने पर्वत की विशालता को किस प्रकार चित्रित किया है?
उत्तर:
 कवि पंत के अनुसार प्रकृति  पल-पल अपना रूप बदलती है। पर्वत मंडलाकार बहुत विशाल हैं। उस पर फूल रूपी हजारों आँखें अपनी परछाईं को तालाब में देख रही हैं। पर्वत की विशालता इस बात से पता चलती है कि उसे निहारने के लिए केवल दो जोड़ी आँखें नहीं हैं बल्कि हजारों आँखें हैं।

प्रश्न. 3. ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है ? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है ?
उत्तर:
 ‘मेखलाकार’ शब्द का अर्थ है- करधनी के आकार की पहाड़ की ढाल। कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ पर्वत और पर्वतमालाओं के सौंदर्य का वर्णन करने के लिए किया है। जब वर्षा ऋतु में पर्वतों के प्रकृति  वेश में पल-पल जो परिवर्तन होता है, उसको बताने के लिए किया है।

प्रश्न. 4. ”सहस्र दृग-सुमन“ से क्या तात्पर्य है ? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा ?
उत्तर: 
”सहस्र दृग-सुमन“ से तात्पर्य यहाँ हजारों पुष्प रूपी आँखों से है। कवि ने इस पद का प्रयोग पर्वत की चोटियों के विस्तृत रूप को देखकर किया होगा।

प्रश्न. 5. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-
(i) गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
है झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष अटल कुछ चिंता पर।

(ii) यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।
(iii) है टूटा पड़ा भू पर अंबर।
उत्तर: (i) कवि इन पंक्तियों के माध्यम से पर्वतों के ऊपर उग आए वृक्षों की शोभा के विषय में बताते हुए कह रहे हैं-पर्वतों के हृदय से उठ-उठकर वृक्ष ऊँचे हो गए हैं। जो तरु हैं वे ऊँची इच्छा वालों की तरह शांत आकाश की ओर एकटक भाव से झाँक रहे हैं। जैसे कोई महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति अपनी इच्छाओं के कारण ऊँचाई की ओर देखता हुआ आगे बढ़ता है।
(ii) कवि प्रस्तुत पंक्तियों में कह रहे हैं जैसे-बादल रूपी विमान आकाश में घूम रहा हो ऐसा लग रहा था जैसे कोई जादूगर अपना खेल दिखा रहा हो। जिस समय शाल के वृक्ष धरती में समा गए थे, उस समय तालाब से धुआँ उठ रहा था जो आकाश में बादल रूपी विमान बनकर बीच-बीच में घूम रहा था। जैसे इंद्रजाल वाला जादूगरी के खेल दिखा रहा हो।
(iii) ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ (‘वारिद’ से संकलित) कविता पाठ से ली गई है। इन पंक्तियों में कवि श्री सुमित्रानन्दन पंत जी कह रहे हैं, जो पहाड़ों के ऊपर बादल वर्षा करते हुए गर्जना कर रहे थे अब केवल झरनों के जल के गिरने का शब्द शेष रह गया था, वही स्वर सुनाई दे रहा था। ऐसा लगता था मानो पृथ्वी पर आकाश टूट पड़ा हो।

प्रश्न. 6. पावस ऋतु में प्रकृति  में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं ? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
 पावस ऋतु में प्रकृति  में पर्वत प्रदेश के स्वरूप में प्रकृति  का वेश बदल जाता है। ताल-तालाब जल से युक्त हो जाते हैं, पहाड़ों की चोटियों से जल की बूँदें झर-झर कर गिरती हैं, वृक्ष हरे-भरे हो जाते हैं, पशु-पक्षी, जीव-जन्तु ग्रीष्म के ताप से पावस ऋतु में मुक्त हो जाते हैं। चारों ओर प्रकृति  हरी-भरी हरियाली से युक्त हो जाती है। जो भूमि, पेड़-पौधे ग्रीष्म के प्रचंड तप से झुलस जाते हैं, वे हरे भरे एवं प्रसन्न दिखाई देते हैं।

प्रश्न. 7. बादलों के उठने तथा वर्षा होने का चित्रण ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ के आधार पर अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
 बादल अचानक पहाड़ों से इतने भयानक और विशाल आकार में गरजते हुए ऊपर उठे कि जैसे कोई पहाड़ बादल-रूपी पंख फड़-फड़ाकर आकाश में उड़ गया हो। थोड़ी ही देर में बादल इस तरह धरती पर बरस पड़े मानो आकाश ने धरती पर आक्रमण कर दिया हो। उस समय शाल के पेड़ डर के मारे धरती में धँस गए और तालाब से धुआँ उठने लगा।

प्रश्न. 8. वृक्ष आसमान की ओर चिंतित होकर क्यों देख रहे हैं? ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
 वृक्ष महत्वाकांक्षाओं के प्रतीक हैं इसलिए उन्हें पूरा करने के लिए उनमें चिंता है।
व्याख्यात्मक हल: 
वृक्ष आसमान की ओर चिंतित होकर इसलिए देख रहे हैं क्योंकि वे महत्त्वाकांक्षाओं के प्रतीक हैं और उन्हें अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा करने की चिंता है। वे हमेशा आगे बढ़ने व ऊँचा उठने की कामना से व्यग्र रहते हैं।

3. मनुष्यता – Short Questions answer

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न. 1. सरस्वती किसकी कथा कहती हैं?
उत्तर:
 सरस्वती उदार व्यक्ति की कथा कहती हैं।

प्रश्न. 2. उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
उत्तर: 
उदार व्यक्ति की पहचान उसके कार्यों से हो सकती है।

प्रश्न. 3. मनुष्यता कविता के अनुसार अनर्थ क्या है?
उत्तर:
 मनुष्यता कविता के अनुसार अनर्थ एक भाई का दूसरे भाई के कष्टों का हरण न करना है।

प्रश्न. 4. मनुष्यता कविता के अनुसार मनुष्य कौन है?
उत्तर:
 मनुष्यता कविता के अनुसार मनुष्य वह है जो मनुष्य के लिए मरता है।

मनुष्यता कवि – मैथिलीशरण गुप्तलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. ‘मनुष्यता’ कविता में कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा गया है और क्यों ?
अथवा
कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है ?

उत्तर: मनुष्यता कविता में कवि ने उस मृत्यु को सुमृत्यु कहा है जो व्यक्ति के मरने के बाद भी उसके काम आती है और उसके संसार में याद रखी जाती है। जब भी उस व्यक्ति की स्मृति ताजगी से याद आती है, उसे उसकी मौत के बाद भी जीवित महसूस करने का अनुभव होता है। इसीलिए कवि ने उस मृत्यु को सुमृत्यु कहा है।

प्रश्न 2. ‘मनुष्यता’ कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि पशु-प्रवृत्ति किसे कहा गया है और मनुष्य किसे माना गया है ?
उत्तर:
 कवि के अनुसार जो मनुष्य स्वयं अपने लिए ही नहीं जीता, बल्कि समाज के लिए जीता है, वह कभी नहीं मरा करता। ऐसा मनुष्य संसार में अमर हो जाता है, स्वयं अपने लिए खाना, कमाना और जीना तो पशु का स्वभाव है। सच्चा मनुष्य वह है जो सम्पूर्ण मनुष्यता के लिए जीता और मरता है।

प्रश्न 3. कवि ने उदार व्यक्ति की क्या पहचान बताई है?
उत्तर:
 मनुष्यता कविता में कवि ने उदार व्यक्ति की पहचान स्पष्ट करते हुए कहा है कि जो मनुष्य दूसरों के प्रति दया भाव, सहानुभूति, परोपकार की भावना, करुणा भाव, समानता, दानशीलता, विवेकशीलता, धैर्य, साहस, गुणों से परिपूर्ण होता है वह व्यक्ति उदार कहलाता है। ऐसे व्यक्ति की प्रशंसा समाज के लोगों द्वारा की जाती है तथा जो यश कीर्ति द्वारा समाज में आदर पाता है।

प्रश्न 4. कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
उत्तर:
 कवि ने निम्न पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए-
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।

प्रश्न 5. मैथिलीशरण गुप्त ने गर्व रहित जीवन बिताने के लिए क्या तर्क दिए हैं ?
उत्तर:
 मैथिलीशरण गुप्त ने गर्व रहित जीवन बिताने के लिए तर्क देते हुए कहा है कि संसार में रहने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि धन सपत्ति तुच्छ वस्तु है और हम सबके साथ सदैव ईश्वर है। हम अनाथ न होकर सनाथ हैं।

प्रश्न 6. ‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से आप क्या समझते हैं ? 
उत्तर: ‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से हम यह समझते हैं पृथ्वी पर निवास करने वाले, समस्त मानव प्राणी मनुष्य हैं जो बंधुत्व (भाई) भावना से युक्त हैं। यही सबसे बड़ा ज्ञान है। उदाहरणार्थ-संकट से ग्रस्त, आपदा से युक्त होने पर हम परिचित-अपरिचित व्यक्ति की सहायता करते हैं। यही मनुष्य मात्र के प्रति बंधुत्व भाव है।

प्रश्न 7. इतिहास में कैसे व्यक्तियों की चर्चा होती है और क्यों ? ‘मनुष्यता’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर: इतिहास में उन व्यक्तियों की चर्चा होती है जो इस संसार के प्राणियों के साथ एकता और आत्मीयता का भाव रखता हो। ऐसे उदार व्यक्ति की प्रशंसा उसे हमेशा सजीव बनाए रखती है। उसी की प्रशंसा चारों ओर सुनाई देती है सारा संसार भी उसी उदार व्यक्ति की पूजा करता है। उदार व्यक्ति सारे संसार में अखंडता का भाव भरता है।

प्रश्न 8. कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है ?
उत्तर:
 इस कविता में कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा दी है क्योंकि हम सभी एक ही परिवार के हैं और एक ही माँ की गोद में पले हैं। इससे हमें एक दूसरे के साथ मिलजुलकर रहना चाहिए और एक दूसरे की मदद करना चाहिए। हमें एकता की शक्ति से लगाव करना चाहिए ताकि हम दुनिया में अच्छाई फैला सकें।

प्रश्न 9. व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
जीवन व्यतीत करते समय व्यक्ति को निडर और मनुष्यता से युक्त होना चाहिए। वह महापुरुषों से प्रेरणा लेकर उदार और परोपकारी व्यक्ति बनना चाहिए। वह अभिमान रहित होकर सभी मनुष्यों को अपना बंधु मानते हुए सद्कर्म करते हुए जीवन व्यतीत करना चाहिए।

2. पद – Short Questions answer

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न. 1. कवयित्री अपने प्रभु से क्या प्रार्थना कर रही है ?
उत्तर:
 कवयित्री प्रभु से अपने दुःख दूर करने की प्रार्थना कर रही है।

प्रश्न. 2. ईश्वर ने किस-किसके दुःखों को दूर किया है ?
उत्तर:
 ईश्वर ने द्रोपदी, भक्त प्रहलाद, ऐरावत हाथी आदि के दुःखों को दूर किया है।

प्रश्न. 3. द्रौपदी की लाज रखने के लिए प्रभु ने क्या चमत्कार किया ?
उत्तर
: द्रौपदी की लाज बचाने के लिए प्रभु ने उसका चीर बढ़ाया।

प्रश्न. 4. कृष्ण ने नरहरि का रूप क्यों धारण किया ? 
उत्तर: कृष्ण ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरहरि का रूप धारण किया।

प्रश्न. 5. मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं ? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी क्यों करना चाहती हैं ?
उत्तर
: मीराबाई श्याम (श्रीकृष्ण) की चाकरी इसलिए करना चाहती हैं, क्योंकि उनकी चाकरी करने पर मीरा को नित्य दर्शन का लाभ मिलेगा, वृंदावन की कुंज गली में गोविन्द की लीलाओं को गा सकेंगी और उन्हें भक्ति भाव का साम्राज्य प्राप्त हो जाएगा।

प्रश्न. 6. मीरा कृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही हैं ?
उत्तर:
 मीरा कृष्ण से उन्हें अपनी सेविका बनाने के लिए प्रार्थना कर रही हैं।

प्रश्न. 7. ‘चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ’ का आशय क्या है ?
उत्तर:
 आशय-आपकी दासी बनकर बाग लगाऊँगी और रोज आपके दर्शन करूँगी।

प्रश्न. 8. मीरा कृष्ण की लीलाओं का गुणगान कहाँ करना चाहती हैं ?
उत्तर:
 मीरा कृष्ण की लीलाओं का गुणगान वृन्दावन की कुँज गलियों में करना चाहती हैं।

प्रश्न. 9. कृष्ण की चाकरी करने पर मीरा को कौन-सी जागीर प्राप्त होगी ? 
उत्तर: कृष्ण की चाकरी करने पर मीरा को कृष्ण  की भक्ति की जागीर प्राप्त होगी।

प्रश्न. 10. भाव-भक्ति को जागीर क्यों कहा गया है ? उसके लिए क्या आवश्यक है ?
उत्तर:
 किसी भी सच्चे भक्त के लिए सबसे बड़ी जागीर है-उसका भगवान। भगवान को पाने का सर्वाेत्तम साधन है-भक्ति। मीरा भावपूर्ण भक्ति की उपासिका थीं। उसी के माध्यम से वे अपने कृष्ण  को पा सकती थीं। इसलिए भाव-भक्ति उनके लिए जागीर के समान थी।

प्रश्न. 11. ‘मोर मुगट’ शब्द का तात्पर्य क्या है ?
उत्तर:
 ‘मोर मुगट’ शब्द का तात्पर्य है ‘मोर पंख से युक्त मुकुट’।

प्रश्न. 12. कृष्ण के गले में क्या पड़ा है ?
उत्तर: 
कृष्ण के गले में वैजन्ती माला पड़ी है।

प्रश्न. 13. मीरा ऊँचे-ऊँचे महलों के बीच-बीच में ‘बारी’ क्यों बनाना चाहती हैं ?
उत्तर:
 मीरा ऊँचे-ऊँचे महलों के बीच-बीच में ‘बारी’ बनकर श्रीकृष्ण  के दर्शन कर सकें।

प्रश्न. 14. ‘कुसुम्बी’ का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: 
‘कुसुम्बी’ का तात्पर्य है-गहरा लाल।

प्रश्न. 15. मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना करती हैं ?
उत्तर:
 मीरा श्रीकृष्ण से उन्हें यमुना के तट पर आधी रात के समय दर्शन देने की प्रार्थना करती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न. 1. ‘हरि आप हरो……’ पद में मीरा ने किन-किन पर की गई कृपा को स्मरण करते हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है ?
उत्तर:
 इस पद में हरि से अपनी पीड़ा को हरने की विनती करते समय मीरा उन्हें उनकी दया का स्मरण कराती हैं कि उन्होंने चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज बचाई थी, भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए नरसिंह रूप धारण किया था तथा डूबते गजराज को मगरमच्छ के मुँह से बचाया था। मीरा चाहती हैं कि उसी प्रकार कृष्ण अपनी इसी मर्यादा के अनुरूप उनकी (मीरा की) पीड़ा का भी हरण कर लें।

प्रश्न. 2. कौन-कौन से उदाहरण देकर मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है ?
अथवा
मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है ?
उत्तर: 
मीराबाई श्रीकृष्ण से बड़े ही विनम्र शब्दों में अपनी पीड़ा हरने के लिए प्रार्थना करती हुई कहती हैं, कि हे प्रभु! आप हमारी पीड़ा दूर करो। जिस प्रकार आपने द्रौपदी की लाज चीर बढ़ाकर की थी, भक्त प्रहलाद की रक्षा नरसिंह रूप धारण करके की थी, डूबते हुए हाथी की रक्षा की, मगरमच्छ को मारकर कुँजर की रक्षा की थी, उसी प्रकार आप मेरी भी रक्षा करें।

प्रश्न. 3. भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं-सोदाहरण सिद्ध कीजिए। 
उत्तर: भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाने के लिए उसे वस्त्र प्रदान किए। उसे सभा में निर्वस्त्र होने से बचा लिया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण किया तथा हिरण्यकश्यप का पेट फाड़ डाला। इसी भाँति उन्होंने डूबते हुए हाथी के मुख से हरि नाम सुनकर उसे मगरमच्छ के मुँह ये बचा लिया।

प्रश्न. 4. चाकरी से मीरा को क्या लाभ मिलेगा ?
उत्तर:
 चाकरी से मीरा को कृष्ण दर्शन का लाभ मिलेगा। वह नित्य श्रीकृष्ण के दर्शन कर सकेगी और वृन्दावन की कुंज गली में गोविन्द की लीलाओं को गा सकेगी। जिससे उसे भक्तिभाव का साम्राज्य प्राप्त हो जाएगा।

प्रश्न. 5. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है ?
उत्तर: 
मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन इस प्रकार किया है-श्रीकृष्ण का रूप-सौंदर्य और मुखाकृति आकर्षित करने वाली है, उन्होंने अपने सिर पर मोर के पंखों का मुकुट पहन रखा है, गले में वैजन्ती के पुष्पों की माला है, शरीर पर पीले रंग का वस्त्र अर्थात् पीताम्बर सुशोभित हो रहा है, हाथों में बाँसुरी को धारण कर वृंदावन में यमुना के तट पर गायें चराने जा रहे हैं।
प्रश्न. 6. मीरा कृष्ण के लिए कुसुम्बी साड़ी क्यों पहनना चाहती हैं ?
उत्तर:
 

  • कृष्ण भी पीताम्बर धारण करते हैं। 
  • कुसुम्बी साड़ी जोगन मीरा के अनुकूल है।

व्याख्यात्मक हल:
मीरा कृष्ण दर्शन के लिए कुसुम्बी साड़ी इसलिए पहनना चाहती है क्योंकि वह अपने आप को पीताम्बर धारण करने वाले कृष्ण के सामने जोगन के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। कुसुम्बी साड़ी जोगन मीरा के अनुकूल है क्योंकि कुसुम्बी का अर्थ है- गहरा लाल।

प्रश्न. 7. मीरा कृष्ण को अपना प्रियतम मानती हैं। उनकी भक्ति में प्रेम का पुट अधिक है- सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
 मीरा कृष्ण को अपना प्रियतम मानती हैं इसलिए वह उनके सुन्दर छबीले रूप की आराधना करती हैं और लाल साड़ी पहनकर उनसे यमुना तट पर मिलना चाहती हैं। इससे स्पष्ट है कि उनकी भक्ति में प्रेम का पुट अधिक है।

प्रश्न. 8. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए:
(क) हरि आप हरो जन री भीर।
द्रौपदी की लाज राखी, आप बढ़ायौ चीर।
भगत कारण रूप नर हरि, धर्यौ आप शरीर।
(ख) बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुज्जर पीर।
दासी मीरा लाल गिरधर, हरौ म्हारी भीर।।
(ग) चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी।।
उत्तर: 
(क) भाव- मीराबाई ईश्वर से भक्त एवं व्यक्तियों की पीड़ा दूर करने की प्रार्थना करती हुई कहती हैं कि द्रौपदी की लाज बचाने के लिए भगवान ने चीर बढ़ा दिया था तथा भक्त प्रहलाद की रक्षा हेतु नरसिंह का रूप हरि ने धारण किया था।
(ख)भाव- मीराबाई ईश्वर से प्रार्थना कर रही है कि जिस प्रकार डूबते गजराज की रक्षा मगरमच्छ को मारकर की थी उसी प्रकार आप अपनी दासी मीरा की पीड़ा को दूर करो।
(ग) भाव- मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं। अतः वह श्रीकृष्ण से उन्हें चाकर रखने की प्रार्थना करती हुई कहती हैं कि चाकरी करने पर उन्हें बदले में दर्शन पाने की इच्छा है। जो स्मरण पाएँगी उसे वे खर्च समझकर रख लेंगी। भक्ति-भाव की जागीर उन्हें प्राप्त हो जाएगी।

प्रश्न. 9. ‘द्रोपदी री लाज राखी’ के आधार पर भगवान के रक्षक-रूप का वर्णन कीजिए। मीरा के पद के आधार पर लिखिए।
उत्तर: कृष्ण अपने भक्तों और प्रियजनों की रक्षा करने वाले हैं। द्रोपदी की लाज बचाकर उन्होंने यह साबित कर दिया।
व्याख्यात्मक हल:
भगवान कृष्ण अपने भक्तों और प्रियजनों की रक्षा करते थे। एक बार पांडवों ने जुए में द्रौपदी को दाँव पर लगा दिया और हार गए। कौरव जीत गए। दुर्योधन ने अपने भाई दुःशासन को आदेश दिया कि वह द्रौपदी को सभा में खींच लाए और उसे निर्वस्त्र कर दे। तब किसी पांडव ने उसकी रक्षा न की। द्रौपदी ने मन ही मन कृष्ण को याद किया। कृष्ण प्रकट हुए। उन्होंने द्रौपदी का चीर बढ़ाकर उसकी लाज बचाई।

प्रश्न. 10. द्रौपदी की लाज बचाने के लिए कृष्ण ने क्या किया था? मीरा के पद के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 

  • चीर बढ़ाया
  • संकट में केवल प्रभु सहायक, उन्होंने उसके सम्मान की रक्षा की

व्याख्यात्मक हल:
द्रौपदी की लाज बचाने के लिए कृष्ण ने कौरवों की सभा में द्रौपदी चीर-हरण के समय द्रौपदी का चीर बढ़ाया था। इस प्रकार संकट के समय प्रभु ने भक्त की सहायता करके उसके सम्मान की रक्षा की थी।

यहाँ पढ़ें: “पद” पाठ की व्याख्या
पद पाठ का सार यहाँ से पढ़ें।

1. साखी – Short Questions answer

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: कबीर की साखी के सदंर्भ में स्पष्ट कीजिए कि मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है ? 
उत्तरः 
मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता प्राप्त होती है, क्योंकि मीठी वाणी सुनने में मधुर होती है जिसे सुनकर हमारा तन और मन प्रसन्न होता है। उसका प्रभाव व्यक्ति को संतोष एवं शान्ति प्रदान करता है। मीठी वाणी से सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करके असंभव कार्य को भी संभव किया जा सकता है।


प्रश्न 2: ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते ? कबीर की साखी के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः
 ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे नहीं देख पाते हैं क्योंकि मनुष्य अहंकारी, अज्ञानी व अविश्वासी है और स्वयं को इस संसार में महत्त्वपूर्ण मानता है।


प्रश्न 3: ‘कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढ़े वन माँहि।’ इस पंक्ति द्वारा कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं ? 
उत्तरः
 इस पंक्ति द्वारा कबीर यह संदेश देना चाहते हैं कि जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में स्थित रहती है किन्तु मृग इस तथ्य को जानता नहीं और वह उसे जंगल में ढूंढ़ता फिरता है। उसी प्रकार परमात्मा मनुष्य के हृदय में स्थित है परन्तु वह उसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे या अन्य तीर्थों पर खोजता फिरता है।


प्रश्न 4: संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुःखी कौन ? यहाँ ‘सोना’ और ‘जागना’ किसके प्रतीक हैं ? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है ? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तरः
 संसार में सुखी व्यक्ति वह है जो आनंदपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहा है। जो सुखी नहीं है, जिसके जीवन में आनंद नहीं है वह कबीर के अनुसार दुःखी है।
यहाँ सोने का अर्थ अज्ञानता की ‘नींद’ से है और जागना ‘ज्ञान से युक्त’ होने का प्रतीक है। इसका प्रयोग ‘साखी’ में अर्थ, सौंदर्य एवं संसार की नश्वरता, ईश्वर भक्ति के लिए किया गया है।


प्रश्न 5: कबीर के अनुसार, इस संसार में कौन दुःखी है, कौन सुखी ?
उत्तरः कबीर के अनुसार, इस संसार में सुखी वह है, जो अज्ञानी है। इसलिए वह संसार को ही अन्तिम सत्य मानकर उसे भोगता है और सुख अनुभव करता है। दूसरी ओर जो प्रभु के रहस्य को जान लेता है, वह विरह के कारण दिन-रात तड़पता है। इसलिए वह संसार की दृष्टि से दुःखी है।


प्रश्न 6: कबीर के अनुसार ‘निन्दक’ किस प्रकार हमारे स्वभाव को निखारने में सहायक होता है ? वे निन्दक के साथ कैसा व्यवहार करने का सुझाव देते हैं ? 
उत्तरः
 निन्दक अपनी आलोचनाओं से हमें हमारी बुराइयों का ज्ञान कराता है और हम उन्हें दूर कर लेते हैं। बुराइयों के दूर हो जाने से हमारा स्वभाव निर्मल हो जाता है, मन के सारे कलुष मिट जाते हैं। निंदक बिना साबुन-पानी का प्रयोग किए, अपनी आलोचनाओं से चित्त को निर्मल कर देता है। इसलिए कबीर निंदक को अपने निकट ही रखने का सुझाव देते हैं।


प्रश्न 7: कबीर के विचार से निन्दक को निकट रखने के क्या-क्या लाभ हैं ?
उत्तरः 
कबीर के विचार से निंदक को निकट रखने से निम्नलिखित लाभ हैं-
(क) निंदक निकट रहने पर बिना साबुन एवं पानी के हमारे स्वभाव को स्वच्छ तथा निर्मल करता है।
(ख) आलोचक हमारी कमजोरियाँ उजागर करता है, जिनको हम सुधार कर दूर कर लेते हैं।
(ग) बुराइयाँ दूर होने पर मनुष्य उच्च पद को प्राप्त करने योग्य बन जाता है।


प्रश्न 8: कबीर के अनुसार निन्दक कौन होता है ? उन्होंने उसे अपना सबसे बड़ा शुभचिंतक क्यों माना है ? 
उत्तरः
 निन्दक का कार्य हमेशा लोगों की निन्दा करना होता है। कबीर के अनुसार हमें सहनशील होकर अपनी निन्दा सुननी चाहिए। जब निन्दक उँगली उठाकर हमारी गलतियों के प्रति सचेत करता है तब हम अपने व्यवहार संबंधी दोषों के प्रति सतर्क हो जाते हैं और उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं।


प्रश्न 9: ‘एकै आषिर पीव का’ पढ़ै सु पंडित होइ’-इस पंक्ति के द्वारा कवि क्या कहना चाहता है ?
उत्तरः 
‘एकै आषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ।’-इस पंक्ति के द्वारा कवि यह कहना चाहता है जिस व्यक्ति ने प्रेम के एक अक्षर को पढ़ लिया है, वह विद्वान् हो जाता है। अर्थात् जिसने प्रेम का व्यावहारिक अनुभव (ज्ञान) प्राप्त कर लिया है, वही संसार में सबसे बड़ा विद्वान् है।


प्रश्न 10: कबीर के अनुसार संसार में क्या व्यर्थ है ? 
उत्तरः 
कबीर के अनुसार पुस्तकीय ज्ञान व्यर्थ है। इसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति ज्ञानी नहीं बनता। इसी प्रकार मुँह मुँड़ाना, राम-नाम का जप करना आदि भी व्यर्थ है। राम के ज्ञान के बिना इनका कोई मूल्य नहीं है।


प्रश्न 11:  कबीर की उद्धत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए। 
उत्तरः 
कबीर की साखियों की भाषा की विशेषता है कि यह जन-जन की भाषा है। उन्होंने जन चेतना और जन भावनाओं को अपनी सधुक्कड़ी भाषा द्वारा साखियों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। अपनी चमत्कारिक भाषा के कारण आज भी इनके दोहे लोगों की जुबान पर हैं।


प्रश्न 12: अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है ?
अथवा
कबीर ने निन्दकों को अपने समीप रखने की बात क्यों कही है ? 
उत्तरः अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए, कबीर ने यह उपाय सुझाया है कि हम अपने निंदक (आलोचकों) को अपने समीप रखें, जो समय-समय पर हमारी कमियों को बताकर हमारे स्वभाव को निर्मल रखे।


प्रश्न 13: कबीर के अनुसार, सच्चा ज्ञान क्या है ? 
उत्तरः कबीर के अनुसार, सच्चा ज्ञान पुस्तकों से प्राप्त नहीं होता है। पुस्तकें पढ़-पढ़ कर तो लोग जीवन को व्यर्थ ही गँवाते हैं। सच्चा ज्ञान ‘पी’ अर्थात् प्रिय से प्राप्त होता है अर्थात् जब हम ‘प्रिय’ अर्थात् ‘परमात्मा’ से प्रेम करना सीख जाते हैं तो हमें सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है।


प्रश्न 14: कवि किस ज्ञान को वास्तविक ज्ञान मानते हैं? 
उत्तरः कवि के अनुसार वास्तविक ज्ञान वह ज्ञान है जिससे मानव के मन में मानव के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है।


प्रश्न 15: ‘घर जाल्या आपणाँ, से क्या तात्पर्य है? 
उत्तरः ‘घर जाल्या आपणाँ, के माध्यम से कवि मनुष्य को ‘भौतिक आकर्षणों’ से विमुख करना चाहते हैं और मनुष्य को ज्ञान मार्ग की ओर अग्रसर होने का संदेश देना चाहते हैं।