1. नीचे दिए गए चित्र को देखिए और इसमें दिखाए गए पानी के स्रोत का नाम बताइए –
उत्तर:
2. आपके निवास स्थान के आस-पास कौन-सी नदी /नदियाँ बहती है/हैं? उत्तर: यह उत्तर आपके निवास स्थान पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप दिल्ली में रहते हैं, तो आप कह सकते हैं: मेरे निवास स्थान के आस-पास यमुना नदी बहती है।
3. आपके घर में पानी कहाँ से आता है? उत्तर: मेरे घर में पानी नल के जरिए आता है, जो नदी या जलाशय से लिया जाता है।
4. आप नदियों के जल को प्रदूषित होने से किस प्रकार बचा सकते हैं? इस बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए। उत्तर: हम नदियों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:
नदियों में कचरा या गंदा पानी नहीं डालना चाहिए।
कारखानों का गंदा पानी नदियों में जाने से रोकना चाहिए।
नदी के किनारे साबुन या डिटर्जेंट से कपड़े धोने से बचना चाहिए।
लोगों को नदियों को साफ रखने के लिए जागरूक करना चाहिए।
पाठ से
1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर जल की बूँद का चित्र () बनाइए । एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं-
उत्तर:
2. नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
(क) गंगा नदी के किनारे बसे कुछ नगरों के नाम लिखिए। उत्तर: ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, भागलपुर, कोलकाता आदि नगर गंगा नदी के किनारे बसे हुए हैं।
(ख) गंगा के तट पर बसे औद्योगिक नगरों से गंगा को क्या हानि हुई है? उत्तर: गंगा के तट पर बसे औद्योगिक नगरों से गंगा प्रदूषित हो गई है क्योंकि कारखानों से निकलने वाला गंदा पानी गंगा नदी में ही डाला जाता है। इसके कारण गंगा का चमकीला रंग मटमैला हो गया है।
(ग) कुंभ का मेला कब-कब और कहाँ-कहाँ लगता है? उत्तर: कुंभ मेला हरिद्वार और प्रयागराज में हर बारह साल में आयोजित किया जाता है। इसके अतिरिक्त उज्जैन और नासिक में भी हर बारह साल में कुंभ मेला लगता है।
(घ) गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।” उपर्युक्त वाक्य से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए- (i) यहाँ पर चाँदी जैसे चमकीले रूप से क्या तात्पर्य है? (ii) काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमकीला रंग मटमैला क्यों हो जाता है? उत्तर: (i) चाँदी जैसे चमकीले रूप से तात्पर्य है कि गंगोत्री से निकलते समय गंगा का पानी बहुत साफ, स्वच्छ और चमकदार होता है। (ii) काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमकीला रंग मटमैला हो जाता है क्योंकि कारखानों और शहरों का गंदा पानी गंगा में मिल जाता है, जिससे उसका जल दूषित हो जाता है।
3. पाठ के आधार पर सही कथन के आगे () का और गलत कथन के आगे () का चिह्न लगाइए-
उत्तर:
मिलान कीजिए
स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ का आपस में मिलान कीजिए- उत्तर:
भाषा की बात
1. इस वाक्य को पढ़िए- “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” इस वाक्य में ‘होता’ शब्द ‘होना’ क्रिया का रूप है। निम्नलिखित वाक्यों में ‘होना’ क्रिया के विभिन्न रूपों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर:
2. पाठ में ‘हिमालय’ शब्द ‘हिम’ और ‘आलय’ शब्दों से मिलकर बना है। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों को मिलाकर नया शब्द बनाइए-
अब अपने बनाए हुए शब्दों का अपनी लेखन – पुस्तिका में वाक्यों में प्रयोग कीजिए। उत्तर:
वाक्य
पुस्तकालय: हमारे स्कूल में एक बड़ा पुस्तकालय है।
देवालय: गंगोत्री में गंगा का एक प्रसिद्ध देवालय है।
विद्यालय: मेरा विद्यालय गंगा के किनारे बसा है।
भोजनालय: रास्ते में एक भोजनालय में हमने खाना खाया।
मेघालय: मेघालय एक सुंदर पहाड़ी राज्य है।
3. नीचे गंगा नदी के दृश्य में कुछ शब्द लिखे गए हैं। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए- उत्तर: गंगा नदी भारत की एक पवित्र नदी है, जिसका उद्गम स्थल हिमालय के गोमुख नामक स्थान से होता है। यह नदी उत्तर भारत के कई राज्यों से होकर बहती है और अनेक तीर्थ स्थानों को जोड़ती है। गंगा का निर्मल और चमकीला जल लोगों को आकर्षित करता है। गंगा तट पर बसे कई प्रसिद्ध नगर; जैसे- हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ का वातावरण बहुत शांत है। यह नदी कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में भी उपयोगी है, क्योंकि इसका जल सिंचाई और उद्योगों में काम आता है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतवासियों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। इसके जल को लोग अमृत के समान मानते हैं। गंगा का संरक्षण करना हम सबका कर्तव्य है।
4. “मैं काम कर रहा हूँ।” “मेरे कर में लेखनी है । ” यहाँ पहले वाक्य में ‘कर’ शब्द का प्रयोग क्रिया के रूप में हुआ है तथा दूसरे वाक्य में ‘कर’ शब्द का अर्थ ‘हाथ’ है। ‘कर’ का एक अन्य अर्थ ‘टैक्स’ भी होता है। इस प्रकार आपने देखा कि अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग के कारण एक ही शब्द के भिन्न-भिन्न अर्थ हो सकते हैं। अब आप भी अपनी पाठ्यपुस्तक और अन्य स्रोतों से ऐसे शब्दों की एक सूची तैयार कीजिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए । उत्तर:
शब्द: पत्र
अर्थ 1 (पत्र = चिट्ठी): मैंने अपने दोस्त को एक पत्र लिखा।
अर्थ 2 (पत्र = पत्ता): पेड़ से एक हरा पत्र गिरा।
शब्द: कन्या
अर्थ 1 (कन्या = लड़की): कन्या स्कूल जा रही थी।
अर्थ 2 (कन्या = राशि): मेरी राशि कन्या है।
शब्द: माला
अर्थ 1 (माला = हार): मंदिर में फूलों की माला चढ़ाई गई।
अर्थ 2 (माला = जप): दादी माला जप रही थीं।
समझ और अनुभव
1. गंगा नदी के साथ तीर्थ स्थलों के जुड़ने के क्या कारण हो सकते हैं? उत्तर: गंगा नदी के साथ तीर्थ स्थल इसलिए जुड़े हैं क्योंकि इसे पवित्र माना जाता है। लोग गंगा में स्नान करके अपने पाप धोने और मोक्ष की प्राप्ति की कामना करते हैं। इसके किनारे शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता भी तीर्थ स्थलों को आकर्षक बनाती है।
2. यदि नदियाँ दिन-प्रतिदिन प्रदूषित होती रहेंगी तो हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा? उत्तर: अगर नदियाँ प्रदूषित होती रहेंगी, तो हमें साफ पानी नहीं मिलेगा। इससे पीने का पानी, खेती और कारखानों के लिए पानी की कमी हो सकती है। साथ ही, जल प्रदूषण से बीमारियाँ बढ़ेंगी और पर्यावरण को भी नुकसान होगा।
3. पाठ में ‘कानपुर’ को भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर कहा गया है। यहाँ ‘औद्योगिक नगर’ से क्या आशय है? उत्तर: ‘औद्योगिक नगर’ से आशय है कि कानपुर में बहुत सारे कारखाने हैं, जैसे कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने। ये कारखाने वहाँ की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।
कलाकारी
नीचे ‘जल संरक्षण’ विषय पर एक चित्र दिया गया है। आप भी दिए गए स्थान पर कोई चित्र बनाकर जल संरक्षण का एक उपाय सुझाइए-
उत्तर:
उपाय: नदियों को साफ रखने के लिए हमें कचरा नदी में नहीं डालना चाहिए। नदी के किनारे सफाई अभियान चलाकर और कारखानों के गंदे पानी को रोककर जल संरक्षण किया जा सकता है।
गंगा से बातचीत
गंगा अपने चमकीले रंग को मटमैला होते देखकर दुखी है। यदि आपको कभी गंगा नदी से बात करने का अवसर मिले तो आपकी क्या बातचीत होगी? उत्तर:
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
1. विद्यालय के पुस्तकालय, अभिभावकों तथा अन्य स्रोतों से गंगा की सहायक नदियों के बारे में पता लगाइए। साथ ही यह भी पता कीजिए कि उनका उद्गम स्थान कौन-सा है और उनके किनारे कौन-कौन से प्रसिद्ध नगर स्थित हैं। उत्तर: गंगा की सहायक नदियों के बारे में:
सहायक नदियाँ: यमुना, अलकनंदा, रामगंगा, कोसी, गोमती, घाघरा।
उद्गम स्थान:
यमुना: यमुनोत्री (हिमालय, उत्तराखंड)
अलकनंदा: सतोपंथ ग्लेशियर, उत्तराखंड
रामगंगा: नैनीताल (उत्तराखंड)
कोसी: गोसाईंथान (नेपाल, हिमालय)
गोमती: गोमती का उद्गम माधोटांडा, पिलिभीत (उत्तर प्रदेश)
2. नदियों को साफ करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पता कीजिए। इसके लिए आप पुस्तकालय, शिक्षकों-अभिभावकों एवं अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: नदियों को साफ़ रखने के लिए बनाई गई योजनाएँ:
नमामि गंगे योजना
यमुना एक्शन प्लान
जल शक्ति अभियान
गंगा एक्शन प्लान
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना
अमृत योजना
आपकी अभिव्यक्ति
दिए गए चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए और इस पर आधारित कोई अनुच्छेद, कहानी अथवा कविता अपने शब्दों में लिखिए-
उत्तर: हरियाली की चादर ओढ़े, जंगल की ये डाली है। पक्षी गाते गीत सुरीले, प्रकृति की ये लाली है। पेड़, पहाड़, झरने झर-झर, हर कोना एक कहानी है। हिरण, हाथी, बाघ व रीछ, सबकी अपनी निशानी है। जंगल देता प्राण हमें, वायु, जल और छाया। अगर बचाएँ इसको हम, तो सुखमय हो जीवन माया। कटते पेड़ हैं रोज यहाँ, रुकना अब ज़रूरी है। जंगल का मतलब जीवन है, यह बात जनहित में जारी है।
1. आपकी छुट्टियाँ कब-कब होती हैं? आप छुट्टियों में कहाँ-कहाँ जाते हैं? उत्तर: मेरी छुट्टियाँ गर्मियों में और दशहरे-दिवाली में होती हैं। मैं अपने नाना-नानी के गाँव जाता हूँ या कभी-कभी किसी हिल स्टेशन जैसे नैनीताल घूमने जाता हूँ। वहाँ बहुत मज़ा आता है।
2. अजंता और एलोरा की गुफाओं के भीतर दीवारों पर अत्यंत सुंदर चित्र बने थे। आपके घर और घर के आस-पास कौन-कौन से चित्र बने या लगे हैं? उत्तर: मेरे घर में दीवारों पर भगवान गणेश और फूलों के चित्र लगे हैं। मेरे कमरे में कार्टून और पक्षियों के चित्र भी हैं। बाहर आँगन में रंगोली बनती है।
3. आपके घर में कौन-कौन और कहाँ-कहाँ चित्रकारी करते हैं? (जैसे – कागज़ पर, धरती पर, दीवारों पर, मिट्टी की वस्तुओं पर, कपड़ों पर आदि)। उत्तर: मेरी मम्मी रंगोली बनाती हैं। मैं और मेरी बहन कागज़ पर चित्र बनाते हैं। मेरे भाई दीवारों पर पोस्टर चिपकाते हैं। त्योहारों पर मम्मी मिट्टी के दीयों पर भी चित्रकारी करती हैं।
4. गुफाओं के चित्र देखते ही निशा के मुँह से ‘वाह!’ क्यों निकला? आपके मुँह से कब-कब ‘वाह!’ निकलता है? उत्तर: निशा के मुँह से ‘वाह!’ निकला क्योंकि गुफाओं के चित्र बहुत सुंदर और सजीव थे। मेरे मुँह से ‘वाह!’ तब निकलता है जब मैं कोई खूबसूरत फूल, नया खिलौना या सुंदर दृश्य देखता हूँ।
पाठ से
दिए गए प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के आगे सूरज का चित्र () बनाइए-
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए-
1. अजंता में निशा ने क्या-क्या देखा? उत्तर: निशा ने अजंता में एक छोटी-सी नदी, बड़े-बड़े शिलाखंड, 29 गुफाएँ, और गुफाओं में सुंदर चित्र देखे। चित्रों में गौतम बुद्ध, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, और स्त्रियों के चित्र थे। गुफाओं के नीचे एक कुंड और घाटी में रंग-बिरंगे फूल भी थे।
2. कैलाश मंदिर के बारे में आपको कौन-सी बात सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगी? उत्तर: कैलाश मंदिर के बारे में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इसे एक ही चट्टान को ऊपर से तराशकर बनाया गया है। यह बहुत बड़ा और सुंदर मंदिर है।
3. मौसी जी ने छोटी और बड़ी गुफा के बारे में क्या बताया? उत्तर: मौसी जी ने बताया कि कुछ गुफाएँ बहुत लंबी-चौड़ी थीं और कुछ छोटी थीं। ये सभी गुफाएँ पहाड़ों को काटकर बनाई गई थीं।
4. क्या कारण है कि अजंता की गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में बनाया गया है? उत्तर: अजंता की गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में बनाया गया ताकि सुबह की सूरज की किरणें गुफाओं के अंदर पड़ सकें और चित्रों को रोशनी मिले।
5. अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लिए यातायात के कौन-कौन से साधनों का प्रयोग कर सकते हैं? उत्तर: अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लिए रेलगाड़ी और बस का प्रयोग किया जा सकता है। निशा ने छत्रपति संभाजीनगर तक रेलगाड़ी और वहाँ से अजंता-एलोरा तक बस का उपयोग किया।
अनुमान और कल्पना
1. यदि अजंता की दीवारों के चित्र बोल सकते तो वे हमें क्या कहानियाँ सुनाते? उत्तर: अगर अजंता के चित्र बोल सकते, तो वे गौतम बुद्ध की कहानियाँ, उनके उपदेश, और उस समय के लोगों की जिंदगी के बारे में बताते। वे पशु-पक्षियों, फूलों, और प्राकृतिक सुंदरता की कहानियाँ भी सुनाते।
2. मान लीजिए कि आप हजारों वर्ष पहले के संसार में चले गए हैं और आपको अजंता की गुफाओं में एक नया चित्र बनाने का अवसर मिला है। आप क्या बनाएँगे और क्यों? उत्तर: मैं एक सुंदर फूलों का बगीचा और उसमें खेलते हुए पक्षियों का चित्र बनाऊँगा। मैं यह बनाऊँगा क्योंकि प्रकृति की सुंदरता मुझे बहुत पसंद है, और यह चित्र देखने वालों को खुशी देगा।
भाषा की बात
1. पाठ में से कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें उनके मिलते-जुलते अर्थों के साथ रेखाएँ खींचकर मिलाइए- उत्तर:
2. “निशा और मौसी ने स्टेशन पर ही विश्रामगृह में रात बिताई।” यहाँ ‘विश्रामगृह’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘विश्राम’ और ‘गृह’। विश्राम का अर्थ है – आराम। गृह का अर्थ है- घर। अतः विश्रामगृह का अर्थ हुआ आराम करने का घर या स्थान। पाठ में से ऐसे ही दो शब्दों के मेल से बने अन्य शब्दों को खोजकर उनके अर्थ लेखन – पुस्तिका में लिखिए। उत्तर:
रेलगाड़ी: रेल का अर्थ है लोहे की पटरी। गाड़ी का अर्थ है – वाहन। अतः रेलगाड़ी का अर्थ हुआ – लोहे की पटरी पर चलने वाला वाहन ।
शिलाखंड: शिला का अर्थ है – पत्थर या चट्टान। खंड का अर्थ है टुकड़ा। अतः शिलाखंड का अर्थ हुआ – पत्थर या चट्टान का बड़ा टुकड़ा।
3. निशा ने आश्चर्यचकित होकर कहा- “दो हजार वर्ष! पर आज भी इनके रंग ज्यों के त्यों कैसे हैं?” ‘ज्यों का त्यों’ का अर्थ है कोई परिवर्तन न होना। इसी प्रकार के कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए अपनी लेखन – पुस्तिका में वाक्य लिखिए-
उत्तर:
ज्यों का त्यों: बारिश के बाद भी गरमी का हाल ज्यों का त्यों रहा।
जैसे का तैसा: यदि कोई बुरा व्यवहार करे तो हर बार जैसे का तैसा करना उचित नहीं है।
बिलकुल वैसा ही: मुझे बिलकुल वैसा ही खिलौना चाहिए, जैसा मैंने टीवी पर देखा था।
वैसा का वैसा: नानी का घर आज भी बिलकुल वैसा का वैसा है।
जैसे थे वैसे ही: वर्षों बाद मिलने के बाद भी शर्मा जी जैसे थे वैसे ही मिले।
वास्तविक रूप में: हमें किसी व्यक्ति को वास्तविक रूप में समझने के लिए समय देना चाहिए ।
4. “ऐसे सजीव चित्र थे कि लगता था अभी बोल पड़ेंगे।” “इन मूर्तियों की कारीगरी देखते ही बनती थी।” रेखांकित अंशों को ध्यान में रखते हुए अब नीचे दिए गए वाक्यांशों से वाक्य बनाइए- बच्चे ने इतनी अच्छी कविता सुनाई कि सब सुनकर दंग रह गए।
उत्तर:
दंग रह जाना: मैं ताजमहल की सुंदरता देखकर दंग रह गया।
ऐसा जैसे सपना हो: पहाड़ों के बीच वह शांत झील ऐसी दिख रही थी जैसे सपना हो।
प्रशंसा के योग्य होना: जिन्होंने बाढ़ पीड़ितों की मदद की, वे सभी प्रशंसा के योग्य हैं।
आँखें न हटा पाना: मंच पर उसका नृत्य देखकर लोग आँखें नहीं हटा पाए ।
दिल को छू जाना: फिल्म का अंत इतना भावुक था कि वह सीधे दिल को छू गया।
कल्पना से परे होना: उसकी सफलता की कहानी सचमुच कल्पना से परे है।
मन मोह लेना: बच्चे की मुसकान ने सबका मन मोह लिया ।
दृश्य भूल न पाना: ताजमहल को पहली बार देखने का दृश्य भूल पाना मेरे लिए असंभव है।
दृष्टि थम जाना: झरने का सुंदर दृश्य देखकर मेरी दृष्टि वहीं थम गई।
5. नीचे एक वर्ग पहेली दी गई है। इस वर्ग पहेली में कुछ विशेषण शब्द छिपे हुए हैं। शब्दों को खोजिए और उन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
उत्तर:
अद्भुत: जादूगर का प्रदर्शन इतना अद्भुत था कि सभी दर्शक देखते ही रह गए।
सुंदर: वह बगीचा सुंदर फूलों से ढका हुआ था।
कठिन: इस पहाड़ी का रास्ता बहुत कठिन है, इसलिए हमें सावधानी से चलना होगा।
सजीव: वह चित्र इतना सजीव था कि लगा जैसे वह व्यक्ति अभी बोल उठेगा।
विशाल: उस किले के विशाल दरवाज़े अब भी मज़बूत खड़े हैं।
रंग-बिरंगा: मेले में बच्चों ने रंग-बिरंगे गुब्बारे खरीदे।
बेजोड़: उस खिलाड़ी का प्रदर्शन इस टूर्नामेंट में बेजोड़ रहा ।
बड़ी: सीमा अपनी बहनों में सबसे बड़ी है।
मनोरम: पहाड़ों के बीच बहती नदी का दृश्य बड़ा मनोरम लग रहा था।
छोटी: पहाड़ी के ऊपर एक छोटी-सी झोंपड़ी बनी हुई थी।
प्रसिद्ध: बनारस की प्रसिद्ध बनारसी साड़ी देश – विदेश में पसंद की जाती है।
चित्र का वर्णन
आपने पाठ में अजंता के चित्रों का सुंदर वर्णन पढ़ा। नीचे अजंता का एक प्रसिद्ध चित्र दिया गया है। इसका वर्णन अपने शब्दों में लेखन – पुस्तिका में कीजिए-
उत्तर: यह भित्ति चित्र बोधिसत्व पद्मपाणि का है। इस चित्र में इन्हें शांत तथा सौम्य रूप में दर्शाया गया है। उनके मुख पर गहरी शांति और आँखों में करुणा झलकती है। उनके मस्तक पर रत्न जड़ित एक मुकुट है। उनके हाथ में कमल का फूल है जिस कारण इन्हें पद्मपाणि भी कहा जाता है। उन्होंने सुंदर आभूषण कंठमाला, बाजूबंद आदि पहने हुए हैं। चित्र की पृष्ठभूमि में कुछ अनुयायी दिखाई दे रहे हैं।
मानचित्र
आपने पाठ में अजंता का वर्णन पढ़ा। नीचे अजंता का एक मानचित्र दिया गया है। इस वर्णन और मानचित्र की सहायता से नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए-
1. नदी का क्या नाम है? उत्तर: नदी का नाम वाघोरा नदी है।
2. कुल कितनी गुफाएँ दिखाई गई हैं? उत्तर: मानचित्र में 30 गुफाएँ दिखाई गई हैं।
3. चारों दिशाओं में से कौन-सी दिशा का संकेत दिया गया है? उत्तर: उत्तर दिशा का संकेत दिया गया है।
4. “आप यहाँ हैं” से क्या आशय है? उत्तर: “आप यहाँ हैं” का मतलब है कि यह वह स्थान है जहाँ से आप गुफाओं की ओर जा रहे हैं, जैसे प्रवेश द्वार।
5. कुंड का क्या नाम है ? उत्तर: कुंड का नाम सतकुंड है।
आइए मापें
लंबाई मापने के फीते की सहायता से अपने समूह के साथ मिलकर कक्षा में इन्हें मापिए और लिखिए –
उत्तर:
रंगों का संसार
आपने पाठ में पढ़ा कि रंगों को प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग करके भी बनाया जा सकता है। आगे रंग बनाने की कुछ विधियाँ दी गई हैं। अपने अभिभावकों की सहायता से इनका प्रयोग करके आप भी प्राकृतिक रंग बनाइए- उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें
पुस्तकालय से
इस पाठ में आपने अजंता एलोरा के बारे में पढ़ा और उसके बारे में जाना। अब भारत के अन्य दर्शनीय स्थानों के बारे में अपने पुस्तकालय में खोजबीन कीजिए और उनके बारे में पढ़िए। साथ ही कक्षा में उनके बारे में चर्चा भी कीजिए। उत्तर: मैंने पुस्तकालय में भारत के अन्य दर्शनीय स्थानों जैसे ताजमहल, खजुराहो के मंदिर, और हंपी के खंडहरों के बारे में पढ़ा। ये जगहें हमारी संस्कृति और कला को दर्शाती हैं। कक्षा में मैंने अपने दोस्तों के साथ इनके बारे में चर्चा की।
धन्यवाद कार्ड
निशा को उसकी मौसी ने अजंता और एलोरा की गुफाएँ दिखाईं। इस कारण निशा ने अपनी मौसी को धन्यवाद कार्ड लिखा। अब आप भी अपने किसी संबंधी को धन्यवाद कार्ड लिखिए-
उत्तर: प्रिय / पूज्य चाचा जी मुझे आपका भेजा हुआ जन्मदिन का उपहार मिल गया है। आपने जो सुंदर बैग मुझे भेजा, वह मुझे बहुत अच्छा लगा। जब भी हम मिलते हैं, आप मुझे कहानी सुनाते हैं, मेरे साथ खेलते हैं, मुझे खूब हँसाते हैं। मुझे अच्छा लगता है कि मेरे पास आप जैसे प्यारे चाचा जी हैं। मैं जल्द ही आपसे मिलने आऊँगा / आऊँगी। आपका भतीजा / आपकी भतीजी रोहन / रोशनी
हमारी धरोहर
हमारे देश में बहुत सुंदर ऐतिहासिक स्मारक एवं कलाकृतियाँ हैं। ये हमारे देश की शोभा एवं गौरव बढ़ाते हैं। यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भी इनकी सुंदरता को बनाए रखें। इन स्मारकों को छूने, इनकी दीवारों को खुरचने अथवा कुछ भी अंकन करने से इन्हें हानि पहुँचती है। इसलिए इन पर्यटन स्थलों का भ्रमण करते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए। उत्तर: विद्यार्थी ध्यान दें – हमारी धरोहर को समझें और सुरक्षित रखें।
आपकी अभिव्यक्ति
क्या आपने कभी कोई रेल यात्रा की है? अपनी किसी रेल यात्रा का कोई रोचक अनुभव साझा कीजिए। यदि आपने रेल यात्रा नहीं की हो तो अपने किसी मित्र या परिवार के सदस्य के अनुभव भी लिख सकते हैं। उत्तर: पिछली छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ दिल्ली से जयपुर रेलगाड़ी से गई । यह मेरी पहली लंबी ट्रेन यात्रा थी। मैं बहुत उत्साहित थी। हम सुबह – सुबह स्टेशन पहुँचे। स्टेशन पर बहुत भीड़ थी। तरह-तरह की आवाज़ें आ रही थीं- अनाउंसमेंट की, चायवाले की, यात्रियों की आदि। हमारी रेलगाड़ी अपने नियत समय पर प्लेटफ़ॉर्म पर आ गई थी और हम अपनी सीट पर बैठ गए थे। जैसे ही ट्रेन चली, खिड़की से बाहर के दृश्य देखने में बहुत सुंदर लग रहे थे। खेतों में काम करते लोग, हरे-भरे पेड़, खेलते हुए बच्चे दिखाई दे रहे थे। जब रेलगाड़ी पुल के ऊपर से गुजरी तो नीचे बहती नदी को देखकर बहुत अच्छा लगा। मम्मी ने घर से बना हुआ खाना निकाला- आलू की सब्ज़ी, पूड़ी और आम का अचार । सबने मिलकर खाया। जब हम जयपुर पहुँचे तो मन खुशियों से भर गया था। यह यात्रा मेरे लिए बहुत यादगार रही।
आपकी चित्रकारी
हिंदी की गिनती मिलाकर चित्र पूरा कीजिए और उसमें अपनी रुचि के रंग भरिए –
1. क्या आपने कभी नदी, पोखर या समुद्र तट का भ्रमण किया है? आपने वहाँ क्या – क्या देखा? उत्तर: हाँ, मैंने एक बार नदी का भ्रमण किया था। वहाँ मैंने साफ पानी, तैरती मछलियाँ, हरे-भरे पेड़ और चहकते पक्षी देखे। पानी में छोटी-छोटी मछलियाँ तैर रही थीं और किनारे पर रंग-बिरंगे पत्थर थे।
2. क्या किसी कार्य को भाग्य के भरोसे छोड़ना चाहिए? अपने उत्तर का कारण दीजिए । उत्तर: नहीं, किसी कार्य को भाग्य के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। हमें अपनी मेहनत और बुद्धि से काम करना चाहिए। जैसे यद्भविष्य ने भाग्य पर भरोसा किया और उसकी जान नहीं बची, लेकिन प्रत्युत्पन्नमति ने बुद्धि से अपनी जान बचाई।
3. यद्भविष्य मछुआरों से अपने प्राण नहीं बचा पाई। यदि उसके स्थान पर आप होते तो मछुआरों से अपने प्राण कैसे बचाते? उत्तर: अगर मैं यद्भविष्य की जगह होता, तो मैं अनागतविधाता की तरह पहले ही दूसरी मछलियों के साथ दूसरे सरोवर में चला जाता। अगर जाल में फँस जाता, तो प्रत्युत्पन्नमति की तरह मरी हुई मछली बनकर अपनी जान बचाता।
4. आपको कौन – सी मछली सबसे अच्छी लगी और क्यों? उत्तर: मुझे प्रत्युत्पन्नमति सबसे अच्छी लगी क्योंकि उसने अपनी तेज बुद्धि से मुसीबत के समय अपनी जान बचाई। वह बहुत चतुर थी।
पाठ से
1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर मछली का चित्र () बनाइए । एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं।
उत्तर:
2. स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ में आपस में संबंध रखने वाले शब्दों का मिलान कीजिए- उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. प्रत्युत्पन्नमति पहले से ही समस्या का समाधान करने की आवश्यकता क्यों नहीं समझती थी? उत्तर: प्रत्युत्पन्नमति की बुद्धि बहुत तेज थी। वह मुसीबत के समय तुरंत उपाय निकाल लेती थी, इसलिए उसे पहले से समाधान सोचने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
2. सभी मछलियों के भयभीत होने का क्या कारण था? उत्तर: सभी मछलियाँ इसलिए भयभीत थीं क्योंकि उन्होंने मछुआरों की बात सुनी कि वे अगले दिन जाल डालकर सभी मछलियों को पकड़ने आएँगे।
3. ‘जो होना होगा सो तो होगा ही’, यह किस मछली का मानना या और वह ऐसा क्यों मानती थी ? उत्तर: यह यद्भविष्य का मानना था। वह ऐसा इसलिए मानती थी क्योंकि वह आलसी थी और मेहनत या चिंतन करना नहीं चाहती थी। वह सब कुछ भाग्य पर छोड़ देती थी।
4. अनागतविधाता ने मछुआरों की योजना से बचने के लिए क्या उपाय सुझाया ? उत्तर: अनागतविधाता ने सुझाया कि सभी मछलियाँ सवेरा होने से पहले सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चली जाएँ।
5. प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों से बचने के लिए क्या उपाय किया? उत्तर: प्रत्युत्पन्नमति ने मरी हुई मछली की तरह अपना शरीर सिकोड़ लिया और आँखें बंद कर लीं। मछुआरों ने उसे मरा समझकर सरोवर में फेंक दिया।
भाषा की बात
1. कहानी में आए कुछ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण तथा क्रिया शब्द नीचे शब्द सरोवर में दिए गए हैं। इनकी पहचान करते हुए उन्हें उनके संबंधित परिवार के स्थान पर लिखिए-
उत्तर:
2. कहानी में आए एकवचन और बहुवचन शब्दों की खोज करते हुए निम्न तालिका को दिए गए उदाहरण के अनुसार पूर्ण कीजिए-
उत्तर:
3. नीचे दिए गए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर:
4. दिए गए विराम चिह्नों में से उचित विराम चिह्न का प्रयोग करते हुए नीचे दिए गए वाक्यों को पुनः अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
(क) एक समय की बात है (ख) पहला मछुआरा बोला अरे देखो इस सरोवर में कितनी बड़ी बड़ी मछलियाँ हैं (ग) मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता प्रत्युत्पन्नमति यद्भविष्य और बड़ी बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं (घ) हाँ हाँ और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं दूसरा मछुआरा बोला (ङ) मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं उत्तर: (क) एक समय की बात है। (ख) पहला मछुआरा बोला, “अरे! देखो इस सरोवर में कितनी बड़ी-बड़ी मछलियाँ हैं।” (ग) मछुआरों ने सरोवर में अनागतविधाता, प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और बड़ी-बड़ी स्वस्थ मछलियाँ देखीं। (घ) “हाँ, हाँ, और इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह हमने पहले कभी नहीं देखीं,” दूसरा मछुआरा बोला। (ङ) मछुआरों की बातें तीनों मछलियों ने सुन लीं।
अनुमान और कल्पना
1. प्रत्युत्पन्नमति ने मछुआरों से बचने की जो योजना बनाई, यदि वह उसमें सफल न होती तो उसकी अन्य योजना क्या हो सकती थी? उत्तर: अगर प्रत्युत्पन्नमति की योजना सफल न होती, तो वह जाल में फँसकर तेजी से तैरने की कोशिश करती और जाल को तोड़ने की कोशिश करती। या फिर वह पानी के नीचे छिपकर मछुआरों का ध्यान भटकाने की कोशिश करती।
2. क्या आपने समुद्र देखा है? अनुमान लगाकर बताइए कि समुद्र में इतना अधिक जल कहाँ से आता है। उत्तर: हाँ, मैंने समुद्र देखा है। मेरे अनुमान से समुद्र में इतना अधिक जल नदियों, बारिश और बर्फ के पिघलने से आता है। नदियाँ पहाड़ों और जंगलों से पानी लाती हैं, और बारिश का पानी भी समुद्र में जाकर मिलता है।
3. अपनी सूझ-बूझ के कारण प्रत्युत्पन्नमति मछुआरों से बच सरोवर में अपनी मित्र अनागतविधाता के पास पहुँच गई। होगी? अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
प्रत्युत्पन्नमति: “अनागतविधाता! तुम्हारी सलाह सही थी। मैंने अपनी बुद्धि से मछुआरों से जान बचाई। मैंने मरी हुई मछली की तरह व्यवहार किया, और उन्होंने मुझे सरोवर में फेंक दिया!”
अनागतविधाता: “वाह, प्रत्युत्पन्नमति! तुम्हारी बुद्धि तो कमाल है। मैंने तो पहले ही सबको चेतावनी दी थी कि हमें यहाँ से चले जाना चाहिए।”
प्रत्युत्पन्नमति: “हाँ, लेकिन यद्भविष्य ने मेरी बात नहीं मानी और वह पकड़ी गई। हमें अब और मछलियों को समझाना होगा कि भाग्य पर भरोसा करने से काम नहीं चलेगा।”
अनागतविधाता: “बिल्कुल! हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और अपनी बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।”
बूझो तो जानें
1. नीचे पानी में तैरती हुई मछलियों को ध्यान से देखिए और बताइए कि इनमें से बिलकुल एक जैसी दो मछलियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर: अंक 2 और 4 की मछलियाँ
पुस्तकालय से
1. विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर कहानी में आए निम्नलिखित शब्दों के अर्थ शब्दकोश की सहायता से लिखिए- उत्तर:
आपकी अभिव्यक्ति
खट्टे हैं अंगूर
जैसा कि आपने इस पाठ के परिचय में पढ़ा, पंचतंत्र की रचना प्राचीन काल में की गई थी। समय के साथ पंचतंत्र का प्रसार अरब देशों एवं यूरोप समेत विश्व के अनेक भागों में हुआ। प्राचीन यूनान (वर्तमान ग्रीस) में रचित और संपूर्ण यूरोप में प्रचलित ईसप की दंतकथाएँ भी पंचतंत्र की प्रेरणा से ही रची गईं और कालांतर में संपूर्ण विश्व में प्रसारित हुईं। आपने इन्हीं दंतकथाओं में से एक कहानी ‘लोमड़ी और अंगूर’ या ‘खट्टे हैं अंगूर’ के नाम से पढ़ी या सुनी होगी। दिए गए चित्र की सहायता से ‘खट्टे हैं अंगूर’ कहानी को अपने शब्दों में कविता या कहानी के रूप में लिखिए। इस गतिविधि में आप अपने शिक्षक या अभिभावक की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर: एक जंगल में एक लोमड़ी रहती थी। वह बहुत चालाक थी, लेकिन थोड़ी आलसी भी थी। एक दिन वह भूखी-प्यासी जंगल में घूम रही थी। उसे दूर से एक बगीचा दिखा, जहाँ एक ऊँचे पेड़ पर रसीले अंगूरों की लटकती बेलें थीं। अंगूर इतने सुंदर और पके हुए थे कि लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। लोमड़ी ने सोचा, “वाह! ये अंगूर तो बहुत स्वादिष्ट लग रहे हैं। मैं इन्हें खा लूँगी।” वह पेड़ के पास गई और अंगूरों तक पहुँचने के लिए जोर-जोर से उछलने लगी। लेकिन बेल बहुत ऊँची थी, और लोमड़ी कितनी भी कोशिश कर ले, वह अंगूरों तक नहीं पहुँच पाई। पहली बार उछलने पर वह थोड़ा ऊपर गई, लेकिन अंगूर अभी भी दूर थे। दूसरी बार उसने और जोर लगाया, लेकिन फिर भी नाकाम रही। कई बार कोशिश करने के बाद लोमड़ी थक गई। उसका मन खट्टा हो गया। उसने गुस्से में कहा, “हुंह! ये अंगूर तो खट्टे हैं। इन्हें खाने से क्या फायदा? ये तो बेकार हैं!” यह कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई, लेकिन सच तो यह था कि अंगूर खट्टे नहीं थे। लोमड़ी केवल अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसा कह रही थी।
सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी असफलता को स्वीकार करना चाहिए और बहाने नहीं बनाना चाहिए। मेहनत और धैर्य से हम अपने लक्ष्य को पा सकते हैं।
1. जब शाम होती है तो आपको प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं ? उत्तर: जब शाम होती है तो प्रकृति में अनेक परिवर्तन दिखाई देते हैं, जैसे: धूप कम हो जाती है, छाया बढ़ जाती है, ठंडी हवा चलने लगती है, वातावरण शांत हो जाता है, पक्षी अपने घोंसलों में लौटने लगते हैं।
2. क्या आपने कभी किसी पशु-पक्षी को बचाया है? उनसे जुड़ा कोई अनुभव साझा कीजिए । उत्तर: हाँ, एक बार मैंने एक घायल गौरैया को बचाया था। वह मेरे घर के पास गिरी थी। मैंने उसे उठाया, पानी पिलाया और एक डिब्बे में रखकर उसकी देखभाल की। कुछ दिन बाद वह ठीक होकर उड़ गई। मुझे बहुत खुशी हुई।
3. यदि आप मंत्री के स्थान पर होते तो न्याय कैसे करते ? उत्तर: यदि मैं मंत्री के स्थान पर होता, तो सबसे पहले दोनों का पक्ष सुनता तथा इस बात पर निर्णय लेता कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। सिद्धार्थ ने निर्दोष हंस के प्राणों की रक्षा की थी, इसलिए मैं हंस उसे दे देता।
4. इस नाटक में सभी पात्र पुरुष हैं। यदि किन्हीं दो पात्रों को महिला पात्र के रूप में प्रस्तुत करना हो तो आप किन्हें बदलकर प्रस्तुत करना चाहेंगे और क्यों ? उत्तर: मैं सखा और प्रतिहारी को महिला पात्र के रूप में प्रस्तुत करना चाहूँगा। सखा को इसलिए क्योंकि वह सिद्धार्थ का बहुत अच्छा दोस्त है और दयालु है, जो एक महिला पात्र के रूप में भी अच्छा लगेगा। प्रतिहारी को इसलिए क्योंकि वह महाराज की मदद करती है और यह भूमिका एक महिला भी बखूबी निभा सकती है।
सोचिए और लिखिए
1. हंस को घायल देखकर सिद्धार्थ ने क्या किया? उत्तर: हंस को घायल देखकर सिद्धार्थ ने उसे अपनी गोद में लिया, उसके शरीर से तीर निकाला और स्नेह से उसकी देखभाल की। उन्होंने अपने सखा को राजवैद्य से मरहम लाने को भी कहा।
2. अंततः हंस सिद्धार्थ को ही क्यों मिला? उत्तर: अंततः हंस सिद्धार्थ को इसलिए मिला क्योंकि उसने घायल हंस पर दया और करुणा दिखाकर उसकी देखभाल की तथा उसके प्राणों की रक्षा की। ‘मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है’ यह कथन सिद्धार्थ की हंस के प्रति सहृदयता को दर्शाता है। उसकी दयालुता के कारण ही हंस बच गया था। अतः सत्य और न्याय के कारण हंस सिद्धार्थ को मिला।
3. कहानी को अपने ढंग से प्रवाह चार्ट के रूप में लिखिए- उत्तर:
अनुमान और कल्पना
1. जिस समय आकाश में हंस को तीर लगा उस समय उसके अन्य साथियों ने आपस में क्या बातें की होंगी? उत्तर: जिस समय आकाश में हंस को तीर लगा उस समय उसके अन्य साथी आपस में इस प्रकार की बातें कर रहे होंगे –
“हमें जल्दी से भागना चाहिए, वरना अगला तीर हमें भी लग सकता है।”
‘हमारा साथी घायल हो गया, काश हम कुछ कर पाते !”
“किस निर्दयी ने यह तीर चलाया और हमारे साथी को घायल कर दिया ।”
“देखो, वह एक दयालु लड़के के पास गिरा है, शायद वह उसकी मदद करेगा।”
“काश, कोई उसे बचा ले!”
2. हंस देवदत्त के पास उड़कर क्यों नहीं गया? उत्तर: हंस देवदत्त के पास इसलिए नहीं गया क्योंकि देवदत्त ने उसे तीर मारकर घायल किया था। हंस उससे डर गया था और उसे सिद्धार्थ पर भरोसा था, क्योंकि सिद्धार्थ ने उसकी जान बचाई थी।
3. राजा शुद्धोदन ने निर्णय के बाद सिद्धार्थ से क्या कहा होगा ? उत्तर: राजा शुद्धोदन ने शायद सिद्धार्थ से कहा होगा, “सिद्धार्थ, मुझे तुम पर गर्व है। तुमने दया और करुणा से हंस की जान बचाई। तुमने सही न्याय दिखाया।”
4. एक रात सिद्धार्थ मीठी नींद सो रहे हैं। उनके सपने में हंस आता है और सिद्धार्थ के साथ न्याय वाले दिन का अपना अनुभव सुनाता है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि हंस ने सिद्धार्थ से क्या-क्या बातें की होंगी? उत्तर:
भाषा की बात
1. पाठ में हंस और हँस शब्द आए हैं। हंस में अनुस्वार का प्रयोग हुआ है और हँस में चंद्रबिंदु का प्रयोग हुआ है। अब आप इस पाठ में आए अनुस्वार एवं चंद्रबिंदु वाले शब्दों को खोजिए और अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। उनका वाक्यों में भी प्रयोग कीजिए । उत्तर: अनुस्वार वाले शब्द: हंस, संध्या, संन्यासी, मंत्र वाक्य:
उद्यान में एक सुंदर हंस उड़ रहा था।
संध्या का समय बहुत सुहावना था।
गुरुजी ने कहा कि सिद्धार्थ पिछले जन्म में संन्यासी था।
मंत्री ने सभा में हंस का फैसला किया।
चंद्रबिंदु वाले शब्द: हँस, हँसकर वाक्य:
सिद्धार्थ ने हँस को प्यार से देखा।
सखा ने हँसकर कहा कि वह बहुत बातें जानता है।
2. रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
उत्तर:
3. नीचे दिए गए चित्रों और शब्दों को जोड़कर मुहावरे / लोकोक्ति बनाइए । अपनी रुचि के किन्हीं पाँच मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
उत्तर: मुहावरे/लोकोक्तियाँ: (क) मगरमच्छ के आँसू बहाना। (ख) आँख मिचौनी खेलना। (ग) एक और एक ग्यारह। (घ) अक्ल बड़ी या भैंस। (ङ) बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद ! (च) नौ-दो ग्यारह होना। (छ) लाल-पीला होना। (ज) दाँतों तले उँगली दबाना। (झ) पेट में चूहे दौड़ना। (ञ) सूरज को दीया दिखाना।
पाँच मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग:
सौरभ ने अपनी गलती छुपाने के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाए।
आज सुबह से ही मौसम आँख मिचौनी खेल रहा है।
हम दोनों मिलकर इस काम को अवश्य कर लेंगे। वो कहते हैं न- एक और एक ग्यारह होते हैं।
केवल ताकत से काम नहीं चलता, सोच-समझ भी ज़रूरी है- आखिरकार अक्ल बड़ी या भैंस!
राधिका ने अनमोल चित्र को रद्दी समझकर फेंक दिया, सही बात है – बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।
पाठ से आगे
1. ‘हंस वाली घटना के बाद सिद्धार्थ, देवदत्त को एक संदेश देना चाहते हैं। आपके अनुसार सिद्धार्थ ने देवदत्त को क्या संदेश लिखकर भेजा होगा-
उत्तर:
2. बगीचे में सुंदर-सुंदर गुलाब के फूल लगे हैं। प्रमोद को ये फूल बहुत सुंदर लगते हैं। वह उन फूलों को तोड़कर अपने पास रख लेता है। करुणा को भी फूल बहुत पसंद हैं। वह प्रतिदिन फूलों को खाद-पानी देकर उनकी देखभाल करने का निर्णय लेती है। आप इन फूलों से अपना प्रेम कैसे दर्शाएँगे एवं क्यों? अपनी कक्षा के साथियों के साथ चर्चा कर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: मैं करुणा की तरह फूलों की देखभाल करूँगा। मैं उन्हें रोज पानी दूँगा, खाद डालूँगा और उनकी रक्षा करूँगा। फूलों को तोड़ने से वे मुरझा जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करने से वे लंबे समय तक सुंदर रहते हैं। इससे प्रकृति भी खुश रहती है और बगीचा सुंदर दिखता है।
3. कुछ पक्षियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। कई पक्षी तो ऐसे हैं जो विलुप्त होने की स्थिति में आ गए हैं, उदाहरण के लिए गौरैया। चित्रों के माध्यम से नीचे कुछ ऐसे संकेत दिए गए हैं जो पक्षियों की दिन-प्रतिदिन कम होती संख्या के लिए उत्तरदायी हैं। चित्रों को देखकर अपने सहपाठियों के साथ इन कारणों पर चर्चा कीजिए। यह भी पता लगाइए कि पक्षियों के बचाव और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए कैसे योगदान दे सकते हैं। उत्तर: कारण:
पतंग के माँझे से पक्षियों को चोट लग जाती है। वे घायल हो जाते हैं। कभी-कभी गंभीर चोट के कारण वे मर भी जाते हैं।
पेड़-पौधे, पक्षियों का प्राकृतिक घर होते हैं। आजकल पेड़-पौधों के कटने के कारण पक्षियों के आवास स्थल नष्ट हो जाते हैं। उनको रहने के लिए घोंसला बनाने का स्थान नहीं मिल पाता है।
कारखानों और फ़ैक्टरियों के कारण वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण तथा जल प्रदूषण होता है। इसके कारण तेज़ शोर और प्रदूषण से पक्षी ऐसे इलाके को छोड़ देते हैं या बीमार हो जाते हैं।
मोबाइल टावर/संचार टावर का विकिरण (रेडिएशन), इलेक्ट्रॉनिक विकिरण या विद्युत चुंबकीय तरंगें पक्षियों की मार्गदर्शन शक्ति को प्रभावित करती हैं, जिससे वे उड़ने की दिशा भूल जाते हैं। लगातार आने वाली विकिरण के कारण पक्षी अपने घोंसले छोड़ देते हैं। वे अंडे नहीं दे पाते हैं और बच्चों की देखभाल नहीं कर पाते हैं।
पक्षियों के बचाव और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए हम निम्न प्रकार से योगदान दे सकते हैं:
पतंग उड़ाने के लिए धारदार माँझे का प्रयोग न करना ।
ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करना ।
पक्षियों को घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान देना ।
पेड़ों की कटाई रोकना तथा वृक्षारोपण करना।
प्लास्टिक और रसायनों का कम उपयोग करना।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
1. अपने सहपाठियों के साथ पुस्तकालय में जाइए और गौतम बुद्ध से संबंधित जातक कथाओं को पढ़िए। उत्तर: हम पुस्तकालय में गए और गौतम बुद्ध की जातक कथाएँ पढ़ीं। इन कथाओं में बुद्ध के पिछले जन्मों की कहानियाँ हैं, जो दया, करुणा और नैतिकता सिखाती हैं। जैसे, एक कथा में बुद्ध एक हिरण के रूप में दूसरों की जान बचाते हैं।
2. राजा विक्रमादित्य भी अपने न्याय के लिए प्रसिद्ध थे। राजा विक्रमादित्य के न्याय से जुड़ी कथाओं को पुस्तकालय सहायक एवं सहपाठियों की सहायता से ढूंढ़िए और उन्हें पढ़कर आपस में इन कथाओं पर बातचीत कीजिए। उत्तर: हमने पुस्तकालय में विक्रमादित्य की कहानियाँ पढ़ीं। एक कहानी में उन्होंने एक गरीब और अमीर के बीच सही फैसला किया, जिससे दोनों को न्याय मिला। हमने कक्षा में चर्चा की कि उनका न्याय निष्पक्ष और बुद्धिमानी भरा था।
3. आपके घर अथवा आसपास ऐसे कौन-से व्यक्ति हैं जिनके पास लोग अपनी समस्याओं को सुलझाने हेतु सहायता के लिए जाते हैं? उनके बारे में अभिभावकों से पूछिए और कक्षा में साझा कीजिए। उत्तर: मेरे गाँव में एक बुजुर्ग दादाजी हैं, जिनके पास लोग अपनी समस्याएँ लेकर जाते हैं। वे शांत मन से सबकी बात सुनते हैं और सही सलाह देते हैं। लोग उनकी बुद्धिमानी और दयालुता के कारण उन पर भरोसा करते हैं।
मैं भी सिद्धार्थ
1. नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं जो सहायता, समझदारी और करुणा से संबंधित हैं। कक्षा में अपने समूह में इन पर संवाद कीजिए एवं किसी एक चित्र पर कुछ पंक्तियाँ भी लिखिए।
उत्तर: चित्र 1 में गर्मियों में घर की छत की मुँडेर पर पक्षियों के लिए एक पात्र में पानी भरकर रखा है। ऐसा करने से पक्षियों को पीने के लिए पानी मिल जाता है, जिससे उसकी जान बचती है। तेज गरमी में जब नदियों, तालाबों और गड्ढों में पानी सूख जाता है तब पक्षियों के पास पानी की कमी हो जाती है, वे प्यास से तड़पते हैं, यहाँ तक कि मर भी जाते हैं। ऐसे में पक्षियों के लिए पानी भरकर रखना एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण और करुणामय कार्य है। यह कार्य हमें संवेदनशील और ज़िम्मेदार बनाता है।
2. नाटक के प्रथम दृश्य में सिद्धार्थ और उनका सखा राज उद्यान के सौंदर्य का देख-सुनकर आनंद ले रहे हैं। यदि उनका कोई सखा देखने-सुनने में असमर्थ होता तो सिद्धार्थ उसे इस आनंद का अनुभव कैसे करवाते? कक्षा में चर्चा कीजिए। उत्तर: सिद्धार्थ अपने सखा को उद्यान का अनुभव करवाने के लिए उसे फूलों की खुशबू सूँघने को कहते। वे हवा की ठंडक और पक्षियों की आवाज़ का वर्णन करते। शायद वे सखा का हाथ पकड़कर उसे पेड़ों और फूलों को छूने देते ताकि वह प्रकृति को महसूस कर सके।
मेरा पक्षी
अपने अभिभावक और शिक्षक की सहायता से निम्न चित्रों को देखते हुए अपने लिए कागज का एक पक्षी बनाइए-
1. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए। इसमें कौन-से पशु-पक्षी दिखाए गए हैं?
उत्तर:
इस चित्र में ये पशु-पक्षी दिखाए गए हैं:
पेलिकन
हाथी
गैंडा
तेंदुआ
कठफोड़वा (पक्षी)
भेड़िया
हिरन
बाघ
2. आपने इस पशु-पक्षियों को कहाँ-कहाँ देखा है ? उत्तर: मैंने इन पशु-पक्षियों में से कुछ को चिड़ियाघर, राष्ट्रीय उद्यानों, या टीवी और किताबों में देखा है।
3. इस पाठ में पशुओं के स्वभाव के बारे में क्या-क्या बताया गया है? उत्तर: पाठ में बताया गया है कि:
हिरण और जंगली भैंसें संदेह की दृष्टि से देखती हैं और पास आने पर दूर हट जाती हैं।
गैंडे शांत रहते हैं, लेकिन मादा गैंडा अपने बच्चे के साथ होने पर हिंसक हो सकती है।
जंगली हाथी अपने झुंड की रक्षा के लिए निगरानी करते हैं।
4. आप कहाँ-कहाँ की यात्रा पर जाना चाहेंगे और क्यों? उत्तर: मैं काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जिम कॉर्बेट, और सुंदरबन जाना चाहूँगा। मुझे वहाँ जंगली जानवरों जैसे गैंडे, बाघ, और हाथियों को देखना अच्छा लगेगा। साथ ही, प्रकृति का आनंद लेना और नई चीजें सीखना चाहूँगा।
पाठ से
निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर तारे का चित्र () बनाइए। यहाँ एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं।
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
(क) यह पाठ एक पत्र है। यह पत्र किसने, किसे और क्यों लिखा है? उत्तर: यह पत्र चाचा अरूप ने अपने भतीजे-भतीजियों को लिखा है। उन्होंने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की अपनी यात्रा के अनुभव को साझा करने और वहाँ के पशु-पक्षियों के बारे में बताने के लिए यह पत्र लिखा। (ख) मादा गैंडा कब और क्यों हिंसक हो जाती है? उत्तर: मादा गैंडा अपने बच्चे के साथ होने पर हिंसक हो जाती है, क्योंकि वह अपने बच्चे की रक्षा करना चाहती है।
(ग) भारतीय गैंडों की संख्या क्यों घट रही है? उत्तर: भारतीय गैंडों की संख्या इसलिए घट रही है, क्योंकि लोग उनके सींग के लिए उनका शिकार करते थे। लोग मानते थे कि सींग में औषधीय गुण हैं।
(घ) भगवान कृष्ण ने हाथी के स्थान पर गैंडे को रणक्षेत्र में भेजने का विचार क्यों छोड़ दिया? उत्तर: भगवान कृष्ण ने गैंडे को रणक्षेत्र में भेजने का विचार इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि गैंडा उनके निर्देशों का पालन नहीं कर सका।
(ङ) प्रथम दिन की यात्रा के बाद लेखक का मन क्यों नहीं भरा ? उत्तर: प्रथम दिन की यात्रा के बाद लेखक का मन इसलिए नहीं भरा, क्योंकि वह काजीरंगा के पशु-पक्षियों और प्रकृति को और अधिक देखना चाहते थे।
2. दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए । यहाँ पक्षी से संबंधित एक प्रश्न दिया गया है। अब आप भी अपनी लेखन – पुस्तिका में इस पक्षी से संबंधित तीन और प्रश्नों का निर्माण कीजिए-
उदाहरण – यह चित्र किस पक्षी का है? उत्तर:
यह पक्षी कहाँ पाया जाता है?
इस पक्षी का रंग कैसा है?
यह पक्षी क्या खाता है?
भाषा की बात
1. कोष्ठक में से उचित शब्द का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
उत्तर:
2. “सामने जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा।” यहाँ ‘झुंड’ शब्द का प्रयोग हाथियों के समूह के लिए किया गया है। भिन्न-भिन्न समूहों के लिए ऐसे ही कुछ अन्य शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जैसे – अंगूरों का गुच्छा, जूतों की
(क) नीचे दिए गए चित्रों का सही नामों के साथ मिलान कीजिए। उत्तर:
(ख) अब मिलान किए गए समूह वाले शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए। जैसे – मेले में लोगों की बहुत भीड़ थी। उत्तर:
छत्ता: बच्चे ने गलती से मधुमक्खियों के छत्ते पर पत्थर मार दिया।
गुच्छा: मेरे घर की चाबियों का गुच्छा कहीं खो गया है।
गट्ठर: औरतें सिर पर लकड़ियों का गट्ठर उठाकर जंगल से लौट रही थीं।
झुंड: जंगल में हाथियों का झुंड नदी पर पानी पीने आया ।
रेवड़: पहाड़ी रास्ते पर भेड़ों का रेवड़ आगे बढ़ रहा था।
कक्षा: सभी छात्र कक्षा में पढ़ रहे थे।
3. घोड़ा घास खाता है। घोड़ा शाकाहारी है। ऊपर दिए गए वाक्यों में एक ही बात दो प्रकार से व्यक्त की गई है, जैसे- ‘घोड़ा घास खाता है’ वाक्य में ‘घास खाने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द ‘शाकाहारी’ का प्रयोग किया गया है। अनेक शब्दों के लिए इस प्रकार के एक शब्द के प्रयोग से वाक्य के अर्थ में कोई अंतर नहीं आता। अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित वाक्यांशों के स्थान पर तालिका में से एक शब्द चुनकर वाक्यों को पुनः लिखिए।
उत्तर: (क) काजीरंगा का सौंदर्य दर्शनीय है। (ख) रश्मि का कार्य प्रशंसनीय है। (ग) गौरव को उसके सहपाठी मृदुभाषी लड़का मानते हैं। (घ) विद्यालय में साप्ताहिक श्रमदान किया जाता है। (ङ) मेरा अग्रज सैनिक है।
पाठ से आगे
1. इस पत्र में बहुत-से प्राणियों के नाम आए हैं। आप उन प्राणियों को किस नाम से पुकारते हैं? अपने अभिभावकों की सहायता से कुछ पशु-पक्षियों के नाम यहाँ लिखिए- उत्तर:
2. नीचे भारत के मानचित्र में कुछ प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान दर्शाए गए हैं। इसमें दी गई सूचनाओं को समझते हुए दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(क) हाथियों के लिए प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान कौन-से राज्य में स्थित है ? उत्तर: हाथियों के लिए प्रसिद्ध पेरियार राष्ट्रीय उद्यान केरल में स्थित है।
(ख) सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है और यह किसलिए प्रसिद्ध है? उत्तर: सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल में स्थित है और यह रॉयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है।
(ग) भारत का सबसे पुराना और प्रथम राष्ट्रीय उद्यान कौन – सा है और यह किस राज्य में स्थित है ? उत्तर: भारत का सबसे पुराना और प्रथम राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान है, जो उत्तराखंड में स्थित है।
(घ) स्तंभ ‘क’ और स्तंभ ‘ख’ का उचित मिलान कीजिए।
उत्तर:
यह भी जानें
राष्ट्रीय उद्यान एक ऐसा क्षेत्र है जिसे सरकार द्वारा प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यहाँ उपस्थित पेड़-पौधे, पशु-पक्षी अपनी प्राकृतिक अवस्था में संरक्षित रहते हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान के अनुसार वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं। उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
1. विद्यालय के पुस्तकालय में जाकर भारत के किसी एक पक्षी अभयारण्य के बारे में पढ़िए। अपने समूह में मिलकर वहाँ पाए जाने वाले पशु-पक्षियों के चित्र एकत्रित कर या बनाकर उन्हें अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। आप अपनी प्रस्तुति में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं-
(क) पक्षी अभयारण्य क्या है? उत्तर: पक्षी अभयारण्य एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा की जाती है।
(ख) इनकी स्थापना करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? उत्तर: पक्षियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने, उनके प्रजनन और आवास को सुरक्षित करने के लिए इनकी स्थापना की गई।
(ग) वर्तमान में भारत में कुल कितने राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य हैं ? उत्तर: भारत में लगभग 70 पक्षी अभयारण्य हैं।
(घ) भारत के पाँच प्रसिद्ध राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य कौन-से हैं? उत्तर:
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)
सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्य (हरियाणा)
नल सरोवर पक्षी अभयारण्य (गुजरात)
चिल्का झील (ओडिशा)
वेदांथंगल पक्षी अभयारण्य (तमिलनाडु)
(ङ) इनमें कौन-से पशु-पक्षी पाए जाते हैं ? उत्तर: इनमें साइबेरियन क्रेन, सारस, बगुला, पेलिकन, फ्लेमिंगो, और कई प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं।
2. नीचे दिए गए बादलों में मछली और बंदर का चित्र बनाया गया है। अब आप भी दिए गए बिंदुओं को मिलाकर चित्र पूरा कीजिए और उसमें रंग भरिए।
1. लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे? उत्तर: लेखक को रामलीला की तैयारियों में पात्रों की सजावट देखना और छोटे-मोटे काम करना सबसे अधिक उत्साहित करता होगा। जैसे कि पात्रों के लिए सामान लाना, उनकी सजावट में मदद करना, और उनके रंग-रूप को तैयार होते देखना। ये काम उन्हें इसलिए उत्साहित करते होंगे क्योंकि यह उत्सव का हिस्सा था और इसमें मजा और रौनक थी।
2. आपको लेखक के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं? उत्तर: मुझे लेखक के बचपन में गुल्ली-डंडा खेलना, आम के पेड़ों पर चढ़ना, और रामलीला की तैयारियों में हिस्सा लेना सबसे अच्छा लगा। ये बातें मुझे इसलिए अच्छी लगीं क्योंकि ये सरल और मजेदार थीं। गुल्ली-डंडा में कोई खर्च नहीं था, और पेड़ों पर चढ़ने में आजादी और रोमांच था। रामलीला में उत्साह और रंग-बिरंगी तैयारियाँ देखकर खुशी मिलती थी।
3. खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए आप क्या – क्या कर सकते हैं? उत्तर: खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए हम ये कर सकते हैं:
खेल के नियमों का पालन करना।
सावधानी से खेलना, जैसे गुल्ली या डंडे को सही दिशा में मारना।
खेलने की जगह को खुला और सुरक्षित रखना, जहाँ पत्थर या गड्ढे न हों।
एक-दूसरे का ध्यान रखना और ज्यादा जोश में न खेलना।
4. लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे? उत्तर: लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठकर शायद लेखक की शरारतों और देर से घर आने की शिकायत करते होंगे। वे यह भी बात करते होंगे कि लेखक को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, न कि सिर्फ खेलने में समय बिताना चाहिए। इसके अलावा, वे गाँव की खेती, मौसम, या रामलीला जैसे उत्सवों की बातें भी करते होंगे।
पाठ से
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
1. लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु कितनी थी? उत्तर: लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु 10 साल थी।
2. लेखक ने अपनी घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है? उत्तर: लेखक ने बताया कि उनके घरवाले इसलिए क्रोधित होते थे क्योंकि वह गुल्ली-डंडा खेलने में इतना मस्त रहता था कि नहाने और खाने की सुध नहीं रहती थी।
3. लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में क्या अंतर है? उत्तर: लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा बिना पैसे के खेला जा सकता है, सिर्फ पेड़ की टहनी से गुल्ली और डंडा बन जाता है। लेकिन विलायती खेलों के सामान बहुत महँगे होते हैं और उनके लिए खास मैदान या कोर्ट की जरूरत होती है।
4. इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है? उत्तर: लेखक ने अपने बचपन के इन अनुभवों को याद किया है:
कच्चे टूटे घर में रहना और पयाल का बिछौना।
नंगे पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना।
हलधर के साथ मौलवी साहब के पास पढ़ने जाना।
रामलीला की तैयारियों में हिस्सा लेना।
गुल्ली-डंडा खेलना और उसका आनंद लेना।
समझ और अनुभव
1. लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं? उत्तर: मैंने भी अपने बचपन में पेड़ों पर चढ़कर फल तोड़े हैं और दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा जैसे खेल खेले हैं। मेले में जाकर उत्सव देखना और दोस्तों के साथ खेतों में दौड़ना भी मैंने किया है। ये काम मुझे बहुत मजेदार लगते थे।
2. लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए। उत्तर: मैं कागज की नाव, कागज का हवाई जहाज, और लकड़ी के छोटे खिलौने बनाता हूँ। मैं कागज का हवाई जहाज बनाकर कक्षा में लाऊँगा और अपने दोस्तों के साथ उसे उड़ाकर खेलूँगा।
3. अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने वाली ‘थापी’ को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं ? उत्तर: घर तथा पास-पड़ोस की वस्तुएँ जो खिलौनों की तरह उपयोग की जा सकती हैं:
दादा जी की छड़ी – हॉकी
गत्ते का डिब्बा – घर, कार
बोतल के ढक्कन – पहिये
प्लास्टिक की बोतलें – बॉलिंग पिन
चम्मच – ड्रमस्टिक आदि
4. लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं? उत्तर: मैं अपने दोस्तों के साथ खेलने, साइकिल चलाने, और मेलों में झूले झूलने के काम बहुत उत्साह से करता हूँ। इसके अलावा, मैं नई कहानियाँ पढ़ने और अपने छोटे भाई-बहनों के साथ खेलने में भी बहुत उत्साह दिखाता हूँ।
मिलान कीजिए
नीचे दिए गए चित्रों का उनके उपयुक्त विवरण से मिलान कीजिए – उत्तर:
खान-पान
1. लेखक सवेरे सवेरे सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए –
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे।
2. आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए –
उत्तर:
आइए जानें
“मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” ‘दोपहर’ शब्द बना है ‘पहर’ से। ‘पहर’ का अर्थ होता है- दिन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय ।
1. एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर कितने पहर होते हैं ? उत्तर: एक दिन और एक रात में कुल आठ पहर होते हैं। विवरण: एक दिन और एक रात में 24 घंटे होते हैं। चूँकि एक पहर 3 घंटे का होता है, इसलिए 24 ÷ 3 = 8 पहर।
2. नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए-
उत्तर:
तमाशा
“गुल्ली है जरा-सी, पर उसमें दुनिया भर की मिठाइयों की मिठास और तमाशों का आनंद भरा है।” तमाशा का अर्थ है- वह दृश्य जिसे देखने से मनोरंजन हो, जैसे मेला, नौटंकी आदि। नीचे दिए गए नामों को पढ़िए। इनमें से कौन-कौन से तमाशे आपने देखे हुए हैं? उन पर घेरा बनाइए –
उत्तर:
Note: विद्यार्थी अपने द्वारा देखे गए खेल-तमाशों पर घेरा बनाएँगे।
रामलीला
आपने पाठ में ‘रामलीला’ के बारे में पढ़ा है। हमारे देश में और अन्य देशों में भी दीपावली के आस-पास स्थान-स्थान पर ‘रामलीला’ का आयोजन किया जाता है। आप भी अपनी कक्षा या विद्यालय में रामलीला का मंचन कीजिए। इसके लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-
आप विद्यालय की वर्दी में भी रामलीला का मंचन कर सकते हैं। किसी अतिरिक्त वस्तु या कपड़ों की आवश्यकता नहीं है।
पूरी रामकथा का मंचन संभव न हो तो प्रत्येक कक्षा या समूह भिन्न-भिन्न दृश्यों को प्रस्तुत कर सकता है।
आप अपने संवाद स्वयं बना सकते हैं।
इस कार्य में आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर: सुझावों के आधार पर रामलीला का मंचन कैसे करें:
विद्यालय की वर्दी में मंचन: आप अपनी स्कूल की वर्दी में ही रामलीला का मंचन कर सकते हैं। इसके लिए रंग-बिरंगे कपड़े या विशेष सामान की जरूरत नहीं है। आप साधारण कपड़ों में ही पात्रों का अभिनय कर सकते हैं।
भिन्न-भिन्न दृश्य: अगर पूरी रामकथा का मंचन मुश्किल हो, तो प्रत्येक कक्षा या समूह को एक अलग दृश्य दिया जा सकता है, जैसे राम का जन्म, सीता स्वयंवर, रावण वध आदि।
संवाद बनाना: आप अपने शिक्षकों या पुस्तकालय की किताबों की मदद से आसान और रोचक संवाद बना सकते हैं।
सहायता लेना: अपने अभिभावकों और शिक्षकों से कहानी, संवाद, और मंच सज्जा के लिए मदद लें। पुस्तकालय से रामायण की किताबें पढ़ें।
भाषा की बात
“विलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है कि उनके सामान महँगे होते हैं।” इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है। इन पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘विलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही हैं कि ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ संज्ञा शब्द हैं। अब पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा शब्द चुनकर नीचे लिखिए-
उत्तर:
प्राथमिक चिकित्सा पेटी
कावेरी को कबड्डी खेलते हुए चोट लग जाती है। उसकी मित्र नीलोफर सभी से प्राथमिक चिकित्सा पेटी (फर्स्ट ऐड बॉक्स) माँगती है लेकिन वह किसी के पास नहीं थी। कावेरी को डॉक्टर के पास ले जाने के बाद नीलोफर सभी को प्राथमिक चिकित्सा पेटी दिखाती है और उसमें रखी हुई वस्तुओं तथा दवाइयों के बारे में बताती है। अब आप प्राथमिक चिकित्सा पेटी में रखी जाने वाली उन वस्तुओं व दवाइयों की एक सूची बनाइए जिनके बारे में नीलोफर ने सभी को बताया होगा। आप भी अपने लिए एक प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार कीजिए। इसके लिए आप अपने सहपाठियों तथा अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: नीलोफर ने कावेरी को चोट लगने के बाद प्राथमिक चिकित्सा पेटी के बारे में बताया होगा। इसमें निम्नलिखित चीजें हो सकती हैं:
बैंड-एड (Band-Aid): छोटे घाव या खरोंच के लिए।
एंटीसेप्टिक क्रीम (Antiseptic Cream): घाव को साफ करने और संक्रमण रोकने के लिए।
कपास (Cotton): घाव साफ करने के लिए।
पट्टी (Bandage): बड़े घाव को बाँधने के लिए।
दर्द निवारक दवा (Painkiller): हल्के दर्द को कम करने के लिए।
डेटॉल या सैवлон (Dettol/Savlon): घाव को कीटाणुरहित करने के लिए।
कैंची: पट्टी या कपड़े काटने के लिए।
थर्मामीटर: बुखार चेक करने के लिए।
टेप: पट्टी को चिपकाने के लिए।
बर्नॉल (Burnol): जलन के लिए।
प्राथमिक चिकित्सा पेटी तैयार करने के लिए:
एक छोटा डिब्बा लें और उसमें ये चीजें रखें।
अपने सहपाठियों और अभिभावकों से मदद लें।
सुनिश्चित करें कि दवाइयाँ ताजा हों और उनकी एक्सपायरी डेट चेक करें।
आपके खेल
1. ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके सही नामों से मिलाइए- आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेला जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है। उत्तर:
चर्चा:
कबड्डी: इस खेल में दो टीमें होती हैं। एक खिलाड़ी विपक्षी टीम के क्षेत्र में जाकर “कबड्डी-कबड्डी” बोलता है और उनके खिलाड़ी को छूकर अपनी साइड में लौटता है। मेरे क्षेत्र में इसे “कबड्डी” ही कहते हैं।
इकड़ी-दुकड़ी: इसमें पत्थरों को जमीन पर रखकर एक पत्थर को उछालकर दूसरों को इकट्ठा करना होता है। मेरे क्षेत्र में इसे “पिट्टो” भी कहते हैं।
लट्टू: इसमें लकड़ी का लट्टू रस्सी से घुमाया जाता है। मेरे क्षेत्र में इसे “लट्टू” या “बंबारम” कहते हैं।
पतंग: कागज की पतंग को धागे से उड़ाया जाता है। मेरे क्षेत्र में इसे “पतंग” या “गुड्डी” कहते हैं।
2. उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं। उत्तर:दिव्यांग मित्रों के साथ खेले जाने वाले आनंदमयी खेलों की सूची:
शतरंज: यह दिमागी खेल है, जिसमें कोई शारीरिक मेहनत नहीं चाहिए।
कैरम: बैठकर खेला जाने वाला खेल, जो सभी के लिए आसान है।
लूडो: पासों और गोटियों का खेल, जो हर कोई खेल सकता है।
पहेलियाँ (Puzzles): दिमागी कसरत के लिए मजेदार।
गाना या कहानी सुनाना: इसमें सभी साथ मिलकर गाना गाते या कहानियाँ सुनाते हैं।
सहायता: इन खेलों को चुनने और खेलने के लिए आप अपने शिक्षकों, मित्रों, और अभिभावकों से मदद ले सकते हैं।
पुस्तकालय से
अपने पुस्तकालय में जाकर प्रेमचंद की लिखी कहानियाँ पढ़िए तथा कक्षा में उनके बारे में चर्चा कीजिए। उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे तथा कक्षा में चर्चा करें।
इन्हें भी जानिए
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे।
पता लगाइए
अब आप चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए। इसके लिए आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: चित्र में दिखाई गई इस प्रसिद्ध पैरालंपिक खिलाड़ी का नाम शीतल देवी है। ये भारत की एक पैरा आर्चर (तीरंदाज़) हैं।
एशियाई पैरा खेल ( हांग्जो): स्वर्ण पदक (2022, व्यक्ति / मिश्रित), रजत पदक (2022, डबल्स)
पुरस्कार: अर्जुन पुरस्कार 2023, एशियाई पैरालंपिक समिति द्वारा वर्ष 2023 का सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट, विश्व तीरंदाजी द्वारा वर्ष 2023 की सर्वश्रेष्ठ महिला पैरा तीरंदाज़
1. चित्रकार की कौन-सी विशेषता आपको सबसे अधिक अच्छी लगी और क्यों? उत्तर: मुझे चित्रकार की चतुराई सबसे अच्छी लगी। उसने डरने की बजाय दिमाग से काम लिया और शेर को चित्र बनाने का बहाना देकर अपनी जान बचाई। यह दिखाता है कि मुश्किल समय में समझदारी कितनी जरूरी है।
2. शेर ने चित्रकार को ‘कायर – डरपोक’ कहा। क्या आपको लगता है कि चित्रकार वास्तव में कायर और डरपोक था या वह चतुर और समझदार था? अपने उत्तर का कारण बताइए। उत्तर: मुझे लगता है कि चित्रकार कायर और डरपोक नहीं, बल्कि चतुर और समझदार था। उसने शेर से जान बचाने के लिए हिम्मत और चतुराई से काम लिया। अगर वह सचमुच डरपोक होता, तो वह शेर के सामने कुछ न बोल पाता और भागने की योजना न बना पाता।
3. आपके अनुसार ऐसे कौन-कौन से कार्य हैं, जिनका निरंतर अभ्यास करने से उनमें कुशलता बढ़ जाती है? उत्तर: कुछ कार्य जिनमें अभ्यास से कुशलता बढ़ती है, वे हैं:
चित्र बनाना
लिखना
खेलना (जैसे क्रिकेट या फुटबॉल)
गाना
पढ़ाई करना
4. यदि झील के किनारे नाव न होती तो चित्रकार शेर से अपनी जान बचाने के लिए क्या उपाय करता? उत्तर: अगर नाव न होती, तो चित्रकार शायद पेड़ पर चढ़ जाता या शेर को और लंबे समय तक बातों में उलझाकर जंगल में कहीं छिप जाता। वह अपनी चतुराई से कोई और रास्ता जरूर ढूंढता।
पाठ से
नीचे दिए गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरों पर तारे का चित्र () बनाइए-
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
1. चित्रकार जिस वातावरण में चित्र बना रहा था, उसका वर्णन कीजिए। उत्तर: चित्रकार जंगल की एक सुनसान जगह पर चित्र बना रहा था। वहाँ नदी, पहाड़ और पेड़-पौधे थे। यह जगह बहुत शांत थी, जहाँ कोई इंसान या शोर नहीं था। वहाँ की खूबसूरती को चित्रकार अपने चित्रों में उतार रहा था। 2. चित्रकार ने शेर को जंगल में चित्रकला का अभ्यास करने के लिए क्यों कहा होगा? उत्तर: चित्रकार ने शेर को चिढ़ाने और मजाक करने के लिए कहा कि वह कागज़-कलम रखे और जंगल में चित्रकला का अभ्यास करे। वह शेर को यह दिखाना चाहता था कि वह उससे डरता नहीं है और अपनी चतुराई से उसका जवाब दे सकता है।
3. आपको इस कविता की कौन-सी घटना सबसे रोचक लगी? उत्तर: मुझे सबसे रोचक घटना वह लगी जब चित्रकार ने शेर को पीठ फेरने के लिए कहा और चुपके से नाव में बैठकर भाग गया। यह बहुत मजेदार था क्योंकि शेर को चित्रकार की चतुराई का पता ही नहीं चला।
4. चित्रकार ने शेर से बचने के लिए क्या किया? उत्तर: चित्रकार ने शेर से बचने के लिए चतुराई से काम लिया। उसने शेर को चित्र बनाने का बहाना देकर उसे बैठने को कहा। फिर उसने शेर से मुँह दूसरी तरफ करने को कहा और चुपके से झील के किनारे रखी नाव में बैठकर भाग गया।
अनुमान और कल्पना
1. चित्रकार ने शेर को ‘जंगल के सरदार’ नाम से क्यों पुकारा होगा? उत्तर: चित्रकार ने शेर को ‘जंगल का सरदार’ इसलिए पुकारा होगा क्योंकि शेर जंगल का सबसे ताकतवर और डरावना जानवर होता है। यह नाम शेर की ताकत और रुतबे को दिखाता है, और चित्रकार ने शायद उसे खुश करने के लिए ऐसा कहा।
2. यदि चित्रकार जंगल में रुक जाता और शेर से मित्रता करने का प्रयत्न करता तो क्या होता? उत्तर: अगर चित्रकार रुककर शेर से मित्रता करने की कोशिश करता, तो शायद शेर उसकी बात मान लेता या फिर गुस्सा होकर उस पर हमला कर देता। यह इस बात पर निर्भर करता कि शेर कितना भूखा या गुस्सैल था। लेकिन चित्रकार की चतुराई से शायद वह मित्रता कर पाता।
3. यदि शेर को भी चित्रकला में रुचि होती तो वह कौन-से चित्र बनाना पसंद करता ? उत्तर: अगर शेर को चित्रकला में रुचि होती, तो वह शायद जंगल, अपने शिकार, या अपनी ताकत दिखाने वाले चित्र बनाना पसंद करता, जैसे जंगल में दहाड़ते हुए अपना चित्र या अन्य जानवरों के साथ अपने राज का चित्र।
4. यदि चित्रकार के स्थान पर आप होते तो शेर से बचने के लिए क्या करते? उत्तर: अगर मैं चित्रकार की जगह होता, तो मैं भी चतुराई से काम लेता। मैं शेर को कोई कहानी सुनाने या उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करता। फिर चुपके से पेड़ पर चढ़ जाता या जंगल में छिप जाता ताकि शेर मुझे न पकड़ सके।
भाषा की बात
1. कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इनमें छिपे मुहावरे पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए- (क) “उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गए होश ।” (ख) “नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।” (ग) “चित्रकार ने नाव पकड़कर ली जी भर के साँस ।” (घ) “इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर ।” उत्तर: (क) “उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गए होश।” (ख) “नदी, पहाड़, पेड़, पत्तों का, रह न गया कुछ जोश।” (ग) “चित्रकार ने नाव पकड़कर ली जी भर के साँस।” (घ) “इधर शेर था धोखा खाकर, झुंझलाहट में चूर ।”
2. अब इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए अपने मन से नए-नए वाक्य बनाइए । उत्तर: (क) उड़ गए होश: परीक्षा का कठिन पेपर देखकर छात्रों के होश उड़ गए। (ख) रह न गया कुछ जोश: विरोधी की ताकत देखकर सैनिकों में रह न गया कुछ जोश। (ग) ली जी भर के साँस: अस्पताल से ठीक होकर लौटे बेटे को देखकर माँ ने जी भर के साँस ली। (घ) धोखा खाकर: राघव ने व्यापारी से धोखा खाकर आगे से हर सौदे में सावधानी बरतने का निश्चय किया।
3. नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए-
इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र ।
चित्रकार चुपके से खिसका, जैसे कोई चोर ।
जल्दी-जल्दी नाव चलाकर, निकल गया वह दूर ।
इन पंक्तियों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है, वे क्रिया शब्द हैं जिन्हें ‘आने’ या ‘जाने’ के कार्य को बताने के लिए उपयोग में लाया जाता है।
‘आ गया’ शब्द का प्रयोग अचानक आने को दर्शाने के लिए किया गया है।
‘खिसका’ शब्द ‘ धीरे-धीरे हटने ‘ या ‘ बिना किसी को पता लगे’ जाने का भाव प्रकट करता है।
‘निकल गया’ शब्द तेज़ी से दूर जाने का संकेत देता है।
‘आने’ और ‘जाने’ के कार्य को बताने के लिए इसी प्रकार के अनेक क्रिया शब्दों का प्रयोग किया जाता है। आगे दिए गए ऐसे ही क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए- उत्तर:
4. “ फिर उसको कुछ हिम्मत आई, देख उसे चुपचाप” उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए । यहाँ जिन शब्दों को रेखांकित किया गया है, वे शब्द संज्ञा शब्दों क्रमशः ‘चित्रकार’ और ‘शेर’ के लिए प्रयुक्त हुए हैं। आप जानते ही होंगे कि संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाने वाले ऐसे शब्दों को ‘सर्वनाम’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित संज्ञा शब्दों को हटाकर उचित सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए-
उत्तर:
कविता से कहानी
1. ‘चतुर चित्रकार’ कविता में आपने शेर और चित्रकार की कहानी का आनंद लिया। अब इस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: एक बार की बात है, एक चित्रकार जंगल की एक सुनसान जगह पर नदी, पहाड़ और पेड़-पौधों के सुंदर चित्र बना रहा था। वह अपने काम में मगन था। तभी वहाँ एक बड़ा सा शेर आ गया। चित्रकार पहले तो बहुत डर गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने शेर से कहा, “जंगल के राजा, रुको! मैं तुम्हारा सुंदर चित्र बनाता हूँ।” शेर खुश होकर बैठ गया और चित्रकार की ओर देखने लगा। चित्रकार ने चतुराई से काम लिया। उसने कहा, “अब तुम्हारा सामने का हिस्सा बन गया है। अब पीछे का चित्र बनाने के लिए मुँह दूसरी तरफ करो।” शेर ने वैसा ही किया। जैसे ही शेर ने मुँह घुमाया, चित्रकार चुपके से झील के किनारे रखी नाव में बैठा और तेजी से नाव चलाकर दूर चला गया। शेर को जब देर लगी, तो उसने पलटकर देखा और गुस्से में चिल्लाया, “अरे कायर चित्रकार, अपना कागज़-कलम तो ले जा!” चित्रकार ने हँसते हुए जवाब दिया, “इसे तुम ही रखो और जंगल में चित्रकला सीखो!” इस तरह चित्रकार ने अपनी चतुराई से अपनी जान बचाई।
2. इस कहानी के अंत में चित्रकार नाव में बैठकर दूर चला जाता है। अपनी कल्पना से इस कहानी का अंत बदलकर लिखिए। उदाहरण के लिए-
उत्तर:
चित्रकार शेर से मित्रता कर लेता है। चित्रकार पूरे साहस के साथ शेर का चित्र पूरा करता है । वह बोला, “ जंगल के सरदार! आपका चित्र बनाते हुए मुझे एहसास हुआ कि आप शक्तिशाली होने के साथ – साथ बहुत शांत और धैर्यवान भी हैं। क्या आप मेरे मित्र बनेंगे ?” शेर ने हैरानी से उसकी ओर देखकर कहा, आज तक सब मुझसे डरकर भाग जाते थे, तुम पहले हो जिसने निडरता से मेरी ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया है।” शेर ने तुरंत चित्रकार से हाथ मिला लिया।
शेर चित्र बनाने में चित्रकार की सहायता करता है। चित्रकार शेर का चित्र बनाने में लीन था। शेर उसके द्वारा बनाए जा रहे चित्र को देखता जा रहा था । तभी वह बोला, “काश ! मैं भी तुम्हारी तरह इतना सुंदर चित्र बना पाता । ” चित्रकार चौंक गया। उसने शेर की आँखों में छिपा हुआ कलाकार ढूँढ़ लिया । वह मुसकराया और बोला, “जिस प्रकार तुम इस जंगल को पहचानते हो, उतनी खूबसूरती से मैं नहीं जानता । यह पकड़ो ब्रश और अपनी कल्पना को पंख दो।” इस प्रकार शेर चित्र पूरा करने में चित्रकार की सहायता करता है और अद्भुत चित्र बनाता है।
बातचीत
नीचे दी गई शेर और चित्रकार के मध्य बातचीत को अपनी कल्पना से पूरा कीजिए-
उत्तर:
तुलना
चित्रकार और शेर की विशेषताओं की तुलना कीजिए और उचित स्थान पर सही (√) या गलत (X) का चिह्न लगाइए –
उत्तर:
पाठ से आगे
1. चित्रकार अपनी चतुराई का प्रयोग करके संकट से बच गया था। क्या कभी आपने किसी संकट का सामना करने के लिए अपनी चतुराई दिखाई है? उस अनुभव को कक्षा में साझा कीजिए। उत्तर: एक बार मैं अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था, तभी हमारी गेंद पड़ोस के बगीचे में चली गई। वहाँ एक गुस्सैल कुत्ता था। मैंने डरने की बजाय चतुराई से काम लिया। मैंने कुत्ते का ध्यान भटकाने के लिए एक पत्थर दूसरी तरफ फेंका। कुत्ता उस ओर दौड़ा, और मैं जल्दी से गेंद उठाकर वापस आ गया। इस तरह मैंने अपनी चतुराई से संकट से बचाव किया।
2. क्या आपने कभी किसी की संकट में सहायता की है? बताइए कि आपने कैसे सहायता की थी। उत्तर: एक बार मेरा दोस्त स्कूल में अपनी किताब भूल गया और उसे डर था कि टीचर डांटेंगी। मैंने उसकी मदद के लिए अपनी किताब उसके साथ शेयर की और हमने साथ मिलकर पढ़ाई की। इससे उसका डर कम हो गया और टीचर ने हमारी तारीफ भी की।
चित्रकार का विद्यालय
1. कल्पना कीजिए कि चित्रकार ने जंगल में एक चित्रकला विद्यालय खोला है। आप इस विद्यालय का कोई नाम सुझाइए और इसके बारे में कुछ वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। उत्तर: विद्यालय का नाम: जंगल रंग विद्यालय जंगल रंग विद्यालय जंगल के बीच में बना है। यहाँ चित्रकार सभी पशु-पक्षियों को चित्र बनाना सिखाता है। इस विद्यालय में हर कोई अपनी कल्पना से सुंदर चित्र बना सकता है। यहाँ पेड़-पौधों, नदी और पहाड़ों के चित्र बनाए जाते हैं। सभी जानवर यहाँ खुशी-खुशी सीखते हैं और दोस्ती करते हैं।
2. इस विद्यालय के बारे में एक आकर्षक विज्ञापन बनाइए जिसे पढ़कर जंगल के पशु-पक्षियों में इस विद्यालय में प्रवेश लेने की इच्छा जाग जाए। (जैसे- प्रवेश जारी है। एक अनोखा विद्यालय, आपके पड़ोस में, आइए और सीखिए…) उत्तर:
खोजबीन
अपने अभिभावकों के साथ पशु-पक्षियों से संबंधित भारतीय वृत्तचित्र (डॉक्युमेंट्री ) देखिए और उससे प्राप्त जानकारी कक्षा में साझा कीजिए। उत्तर: मैंने अपने माता-पिता के साथ एक भारतीय वृत्तचित्र देखा, जिसका नाम था “जंगल की कहानियाँ”। इसमें भारत के जंगलों में रहने वाले बाघ, मोर, हिरण और कई पक्षियों के बारे में बताया गया। मैंने सीखा कि बाघ जंगल का राजा होता है और वह अपने इलाके की रक्षा करता है। मोर अपने रंग-बिरंगे पंखों से सबको आकर्षित करता है। यह भी पता चला कि हमें जंगल और जानवरों को बचाने के लिए पेड़-पौधों की देखभाल करनी चाहिए। कक्षा में मैं यह बताऊँगा कि जंगल हमारे लिए कितने ज़रूरी हैं।
जंगल में शांति और सुरक्षा
मान लीजिए, शेर और चित्रकार अच्छे मित्र हैं। वे चाहते हैं कि जंगल में सुख-शांति रहे। आप उन्हें जंगल में शांति के लिए क्या उपाय सुझाएँगे? कम से कम तीन सुझाव अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। (संकेत – ऐसे उपाय सोचिए जिनसे जंगल के पेड़-पौधे, हवा-पानी और पशु-पक्षी सुरक्षित रहें ।) उत्तर:
पेड़-पौधों की रक्षा करें: शेर और चित्रकार जंगल के सभी जानवरों को बता सकते हैं कि पेड़-पौधों को नुकसान न पहुँचाएँ। इससे हवा और पानी साफ रहेगा और सभी को रहने की अच्छी जगह मिलेगी।
सबके लिए खाना सुनिश्चित करें: शेर सभी जानवरों को सिखा सकता है कि वे एक-दूसरे का शिकार कम करें और जंगल में फल-फूल और छोटे पौधों को खाने की आदत डालें। इससे झगड़े कम होंगे।
जंगल में सफाई रखें: चित्रकार जंगल में चित्रकला के जरिए जानवरों को सिखा सकता है कि वे जंगल को साफ रखें और कचरा न फैलाएँ। इससे जंगल सुंदर और सुरक्षित रहेगा।
पुस्तकालय से
पुस्तकालय से अपने शिक्षक की सहायता से पंचतंत्र अथवा हितोपदेश में से उन कहानियों को ढूँढ़िए जिनमें पशु-पक्षियों और मनुष्यों के मध्य संवाद हों। उत्तर: विद्यार्थी शिक्षक की सहायता से स्वयं करें।
पुस्तकालय जाएँ और पंचतंत्र व हितोपदेश की किताबें निकालें।
अनुक्रमणिका (सूची) देखकर वे कहानियाँ ढूँढ़ें जिनमें पशु-पक्षियों और मनुष्यों के बीच संवाद हों।
हर ऐसी कहानी का शीर्षक, पुस्तक का नाम, लेखक/संपादक, पृष्ठ संख्या लिखें।
कम से कम 3–5 कहानियों की सूची तैयार करें और कक्षा में प्रस्तुत करें।
उदाहरण के लिए: “ऋषि और चूहा”, “बुद्धिमान तोता” जैसी कथाएँ (जहाँ जानवर/पक्षी मनुष्य से बातें करते हैं) खोजें।
आज की पहेली
1. चित्रकार जिस जंगल में गया था, वहाँ कौन-कौन से पेड़ हो सकते थे? आइए इस पहेली से पता लगाते हैं। इस पहेली को इसी कविता के कवि ने रचा है। अपने समूह में मिलकर पहेली बूझिए – बाबूलाल मदन मुरलीधर इलाचंद्र हुबलाल । गिरिजाशंकर बेनीमाधव दंडपाणि यशपाल।। गणपति काशीराम कलापी टहलराम घनश्याम । लेकर गए एक से दूने, कितने थे कुल आम? उत्तर: 16383 आम कैसे:
कुल नाम = 14 व्यक्ति।
“एक से दूने” = 1, 2, 4, 8, … (हर बार दुगुना)।
ऐसे 14 पदों का योग = 214 − 1 = 16384 − 1 = 16383।
2. ऊपर दी गई कविता में 12 पेड़ों के नाम छिपे हैं। उन नामों को ढूँढ़िए, जैसे – गणपति, कलापी और टहलराम शब्दों में से ‘पीपल’ निकलता है। कोई एक अक्षर कई नामों के लिए भी प्रयुक्त हो सकता है। उत्तर: पेड़ों के नाम: आम, पीपल, नीम, शीशम, जामुन, बबूल, कटहल, महुआ, बेल, इमली, बरगद, कदंब
1. जवाहरसिंह अपनी गाय को मौसी कहकर बुलाता है। आप अपने घर या आस-पास के पशु-पक्षियों को क्या कहकर पुकारते हैं ? उत्तर: मेरे घर पर एक कुत्ता है। उसको हम लोग ब्राउनी कहकर बुलाते हैं। वहीं गायें तथा साँड़ भी आते हैं, उन्हें हम लोग उनके रंग तथा डील-डौल के आधार पर विभिन्न नामों से पुकारते हैं; जैसे- बछड़ा तथा बछिया के जोड़े को हीरा – मोती तथा बड़े दुलारे साँड़ को भोलू । पड़ोस की पालतू बिल्ली को म्याऊँ तथा पालतू तोते को मिट्ठू आदि ।
2. सुंदरिया के दूर चले जाने के बाद जवाहरसिंह को कैसा लगा होगा? जब आपका कोई प्रिय आपसे दूर हो जाए तो आपको कैसा लगता है? उत्तर: जवाहरसिंह को सुंदरिया के दूर जाने पर बहुत दुख हुआ होगा, क्योंकि वह उसे मौसी कहता था और उससे बहुत प्यार करता था। जब मेरा कोई प्रिय मुझसे दूर जाता है, तो मुझे उदासी और खालीपन महसूस होता है।
3. जवाहरसिंह सुंदरिया की देखभाल के लिए क्या-क्या करता होगा? उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया को चारा देता होगा, उसे नहलाता होगा, उसका गोशाला साफ करता होगा और उसे प्यार से पुचकारता होगा।
4. आप अपने आस-पास के पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या करते हैं? उत्तर: मैं अपनी छत पर पक्षियों तथा बंदरों के पीने के लिए बरतन में पानी रखता हूँ। घर में खाने के बाद बचे खाद्य-पदार्थ–रोटी, चावल, सब्ज़ी, कच्ची सब्ज़ी के बचे हिस्से आदि घर के बाहर एक बरतन में रखता हूँ, जिसे गली में आने वाली गायें, साँड़ तथा कुत्ते खाते हैं। मैं अपने घर के आस-पास पाले गए पशु-पक्षियों को प्यार करता हूँ, उनकी देखरेख में उनके मालिकों की मदद करता हूँ। अगर कोई इन पालतू पशु-पक्षियों को मारता या परेशान करता है तो मैं उसे ऐसा करने से रोकता हूँ।
पाठ से
नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर पर () का चिह्न बनाइए। प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं –
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. हीरासिंह गाय को बेचने से क्यों डर रहा था? उत्तर: हीरासिंह सुंदरिया को बेचने से इसलिए डर रहा था क्योंकि उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहता था और उससे बहुत प्यार करता था। उसे डर था कि जवाहरसिंह को गाय के बेचे जाने से बहुत दुख होगा।
2. सेठ हीरासिंह की गाय को देखकर क्यों प्रसन्न हुआ? उत्तर: सेठ सुंदरिया को देखकर प्रसन्न हुआ क्योंकि वह बहुत सुंदर, स्वस्थ और आकर्षक थी। उसने पंद्रह सेर से ज्यादा दूध दिया, जो सेठ को बहुत अच्छा लगा।
3. “तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा?” सेठ ने हीरासिंह से ऐसा क्यों कहा? उत्तर: सेठ ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि सुंदरिया ने घोसी के साथ कम दूध दिया, जबकि हीरासिंह ने कहा था कि वह पंद्रह सेर से ज्यादा दूध देती है। सेठ को लगा कि हीरासिंह ने उसे गलत जानकारी दी। 4. सेठ के कुछ कहने से पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर क्यों चल दिया? उत्तर: हीरासिंह गाय को लेकर इसलिए चल दिया क्योंकि वह सुंदरिया से बहुत प्यार करता था और उसे घोसी के साथ नहीं छोड़ना चाहता था। वह नहीं चाहता था कि सुंदरिया को कोई तकलीफ हो और उसका अपमान हो।
सुंदरिया और हीरासिंह
1. कहानी में सुंदरिया की बहुत-सी विशेषताओं का पता चलता है। उन विशेषताओं को नीचे लिखिए। उत्तर:
2. अब आप हीरासिंह की विशेषताओं को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। उत्तर: हीरासिंह की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
हीरासिंह मेहनती और ईमानदार है।
वह अपने परिवार और सुंदरिया से बहुत प्यार करता है।
वह गरीब है, लेकिन अपने बच्चों और गाय की देखभाल करना चाहता है।
वह सुंदरिया को बेचने के लिए मजबूर था, लेकिन उसे बहुत दुख हुआ।
वह साहसी है, क्योंकि उसने सेठ से साफ-साफ अपनी बात कही।
समझ और अनुभव
1. क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी हमारी भावनाएँ समझते हैं? कोई अनुभव साझा कीजिए। उत्तर: हाँ, पशु-पक्षी हमारी भावनाएँ समझते हैं। जैसे, जब मैं दुखी होता हूँ तो हमारा पालतू कुत्ता मेरे पास आकर चुपचाप बैठ जाता है।
2. जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर क्यों संबोधित करता होगा? उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर संबोधित करता होगा क्योंकि वह उसे परिवार का सदस्य मानता था और बहुत प्यार करता था। 3. नगरों में बड़े पशुओं को पालतू बनाने वाले लोग कम क्यों हैं? उत्तर: नगरों में बड़े पशुओं को पालतू बनाने वाले लोग कम हैं क्योंकि शहरों में जगह कम होती है, चारे का प्रबंध करना कठिन होता है और लोग काम में बहुत व्यस्त रहते हैं।
4. पशु-पक्षी मनुष्य की तरह बोल तो नहीं पाते परंतु वे भी आपस में अपनी बातें करते होंगे। क्या आप सहमत हैं? उदाहरण दीजिए। उत्तर: हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। पशु-पक्षी अपनी आवाजों और हाव-भाव से बात करते हैं। उदाहरण के लिए, मेरे घर के पास दो बिल्लियाँ अक्सर म्याऊँ-म्याऊँ करके बात करती हैं, जैसे एक-दूसरे को कुछ बता रही हों। पक्षी भी सुबह चहचहाकर एक-दूसरे से बात करते हैं।
अनुमान और कल्पना
1. गाय का नाम ‘सुंदरिया’ किसने एवं क्यों रखा होगा? उत्तर: सुंदरिया का नाम शायद जवाहरसिंह ने रखा होगा क्योंकि वह उसे बहुत प्यार करता था। उसने यह नाम इसलिए रखा होगा क्योंकि गाय बहुत सुंदर और आकर्षक थी।
2. हीरासिंह के घर से सुंदरिया की विदाई के दृश्य की कल्पना कीजिए। उत्तर: जब सुंदरिया को ले जाने का समय आया, जवाहरसिंह उदास हो गया होगा। वह सुंदरिया को गले लगाकर रो रहा होगा और कह रहा होगा, “मौसी, तुम जल्दी वापस आना।” हीरासिंह भी चुपके से आँसू पोंछ रहा होगा। सुंदरिया बार-बार पीछे मुड़कर जवाहरसिंह और घर की ओर देख रही होगी, जैसे वह भी नहीं जाना चाहती हो। पूरा परिवार उदास होकर सुंदरिया को विदा करता होगा।
3. सुंदरिया को वापस घर लेकर जाते हुए हीरासिंह को कैसा लग रहा होगा एवं क्यों? उत्तर: सुंदरिया को वापस घर ले जाते हुए हीरासिंह को बहुत खुशी और राहत महसूस हो रही होगी क्योंकि वह अपनी प्यारी गाय को वापस अपने परिवार के पास ले जा रहा था। उसे थोड़ा दुख भी हो रहा होगा क्योंकि उसे सेठ के पैसे तनख्वाह से चुकाने थे, लेकिन सुंदरिया को अपने साथ देखकर उसे सुकून मिल रहा होगा।
भाषा की बात
1. नीचे दिए गए मुहावरों का प्रयोग कहानी में किया गया है। कहानी में इन्हें ढूँढ़िए और इनके अर्थ लिखकर अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्य बनाइए-
उत्तर: लाज से गड़ जाना:
अर्थ: शर्मिंदगी महसूस करना।
वाक्य: जब मैंने गलत जवाब दिया, तो मैं कक्षा में लाज से गड़ गया।
दूध देने में कामधेनु:
अर्थ: बहुत अधिक दूध देने वाली।
वाक्य: हमारी गाय दूध देने में कामधेनु है, वह रोज़ दस लीटर दूध देती है।
जी भर जाना:
अर्थ: बहुत उदास होना।
वाक्य: अपने दोस्त को विदा करते समय मेरा जी भर गया।
एकटक देखना:
अर्थ: लगातार और ध्यान से देखना।
वाक्य: बच्चा नई खिलौना गाड़ी को एकटक देख रहा था।
आँख लगना:
अर्थ: नींद आ जाना।
वाक्य: किताब पढ़ते-पढ़ते रात को मेरी आँख लग गई।
2. नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं। वाक्यों में रेखांकित शब्द से मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द चुनकर वाक्य पुनः लिखिए-
(क) सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को जलन होती थी। (प्रसन्नता/ईर्ष्या) उत्तर: सुंदरिया की सुंदरता से कई लोगों को ईर्ष्या होती थी।
(ख) वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो। (प्रबंध/संकेत) उत्तर: वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का प्रबंध कर दो।
3. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ आया? अपने विचार समूह में साझा कीजिए-
(क) रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था। उत्तर:
अर्थ: इस वाक्य का मतलब है कि हीरासिंह ने सुंदरिया को बेचकर पैसे तो ले लिए, लेकिन उसे बहुत दुख और उदासी महसूस हो रही थी। वह मन ही मन सुंदरिया को बेचने के फैसले से परेशान था।
विचार: हीरासिंह को सुंदरिया से बहुत लगाव था। वह उसे सिर्फ एक गाय नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानता था। पैसे लेने के बावजूद उसका मन दुखी था, क्योंकि वह सुंदरिया को खोना नहीं चाहता था। यह दिखाता है कि प्यार और रिश्ते पैसे से ज्यादा कीमती होते हैं।
(ख) गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए। उत्तर:
अर्थ: हीरासिंह सेठ से कह रहा है कि उसे सुंदरिया की देखभाल करने का काम दे दिया जाए, भले ही इसके लिए उसकी तनख्वाह कम कर दी जाए।
विचार: यह वाक्य हीरासिंह के सुंदरिया के प्रति गहरे प्यार को दर्शाता है। वह सुंदरिया को अपने पास रखना चाहता था, ताकि वह उसकी देखभाल कर सके। वह पैसे से ज्यादा सुंदरिया की खुशी और अपनी नजदीकी को महत्व देता था।
(ग) गाय ने उसकी ओर देखा । जैसे पूछना चाहती थी – “क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?” उत्तर:
अर्थ: जब सुंदरिया को घोसी के साथ भेजा जा रहा था, उसने हीरासिंह की ओर देखा, जैसे वह पूछ रही हो कि क्या उसे सचमुच घोसी के साथ जाना चाहिए।
विचार: यह वाक्य सुंदरिया और हीरासिंह के बीच गहरे भावनात्मक रिश्ते को दिखाता है। सुंदरिया को भी लगता था कि वह अपने परिवार से अलग हो रही है, और वह हीरासिंह से आखिरी बार पुष्टि करना चाहती थी। यह दर्शाता है कि पशु भी इंसानों की भावनाओं को समझते हैं।
(घ) फिर गाय के गले पर सिर रखकर बोला – “सुंदरिया, देख… मेरी ओछी मत करा। मैं दूर हूँ तो क्या ! इसमें मुझे सुख है?” उत्तर:
अर्थ: हीरासिंह सुंदरिया से कह रहा है कि वह कम दूध देकर उसका अपमान न करे। भले ही वह अब उसका मालिक न हो, उसे सुंदरिया की अच्छी देखभाल और सम्मान में खुशी मिलती है।
विचार: यह वाक्य हीरासिंह की भावनाओं और सुंदरिया के प्रति उसकी चिंता को दर्शाता है। वह चाहता है कि सुंदरिया सेठ के यहाँ भी उतना ही दूध दे जितना वह पहले देती थी, ताकि उसकी इज्जत बनी रहे। यह दिखाता है कि हीरासिंह को सुंदरिया की खुशी और सम्मान की बहुत फिक्र थी।
समूह में साझा करने के लिए विचार:
इन वाक्यों से पता चलता है कि हीरासिंह और सुंदरिया के बीच सिर्फ मालिक और पशु का रिश्ता नहीं था, बल्कि एक गहरा भावनात्मक बंधन था।
पशु भी हमारी भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ हमारा रिश्ता परिवार जैसा हो सकता है।
पैसों की जरूरत के बावजूद, प्यार और लगाव की कीमत ज्यादा होती है, जैसा कि हीरासिंह की कहानी में दिखता है।
बच्चों से पूछा जा सकता है कि क्या उनके पास भी कोई ऐसा पालतू जानवर है, जिससे वे ऐसा ही प्यार करते हैं, और वे उसकी देखभाल कैसे करते हैं।
4. रेखांकित शब्द किसके लिए प्रयोग किए गए हैं? पहचानकर लिखिए-
उत्तर:
पाठ से आगे
1. नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। इनको देखते हुए अपने समूह में चर्चा कर यह सुझाइए कि हम पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। आप इनके अतिरिक्त भी कुछ और बिंदु जोड़ सकते हैं।
उत्तर: पशु-पक्षी भी हमारी तरह जीते-जागते जीव होते हैं। हम उनकी देखभाल कई तरीकों से कर सकते हैं; जैसे:
हम चिड़ियों के लिए पेड़ पर घर (बर्ड हाउस) बना सकते हैं और गर्मियों में उनके लिए पानी रख सकते हैं। उन्हें दाना डालना भी एक अच्छा काम है।
पालतू जानवरों जैसे कुत्ते और बिल्ली को समय पर खाना खिलाना, नहलाना और साफ़ रखना चाहिए। ठंड के दिनों में हम उन्हें गरम कपड़े पहना सकते हैं।
गाय और बकरी जैसे जानवरों को हम फल-सब्ज़ियों के छिलके खिलाकर उनका पेट भर सकते हैं।
अगर कोई पक्षी या जानवर घायल हो जाए, तो हमें उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
निष्कर्ष: हमें पशु-पक्षियों से प्यार करना चाहिए और उनके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। उनकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है।
2. आपके घर में दूध कहाँ से आता है? यह भी पता कीजिए कि किन-किन पशुओं का दूध पीने के लिए उपयोग किया जाता है। उत्तर: हमारे घर में दूध आमतौर पर गाय या भैंस से आता है। कुछ घरों में लोग डेयरी (दूध का केंद्र) से भी दूध लाते हैं। किन-किन पशुओं का दूध पीने के लिए उपयोग किया जाता है:
गाय
भैंस
बकरी (कुछ लोग बकरी का दूध पीते हैं)
ऊँट (कुछ क्षेत्रों में ऊँट का दूध पीया जाता है)
3. किसी गौशाला अथवा दुग्ध उत्पादन केंद्र (डेयरी फार्म) का भ्रमण कर पता कीजिए कि पशुओं का लालन-पालन कैसे किया जाता है। आप इस गतिविधि में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: मैंने अपने शिक्षक और माता-पिता के साथ पास की गौशाला का भ्रमण किया। वहाँ हमने देखा कि पशुओं का लालन-पालन इस तरह से किया जाता है:
चारा और पानी: गायों और भैंसों को हर दिन ताजा घास, भूसा, और दाना खिलाया जाता है। उन्हें साफ पानी पीने के लिए दिया जाता है।
साफ-सफाई: गोशाला को रोजाना साफ किया जाता है ताकि पशु स्वस्थ रहें। उनके बिस्तर (भूसे) को बदलते रहते हैं।
देखभाल: पशुओं को नहलाया जाता है और उनकी नियमित जांच की जाती है। अगर कोई बीमार हो जाए, तो डॉक्टर को बुलाया जाता है।
दूध निकालना: सुबह और शाम को पशुओं से दूध निकाला जाता है। कुछ जगहों पर मशीनों से और कुछ जगहों पर हाथ से दूध दुहा जाता है।
वातावरण: पशुओं को धूप और हवा के लिए खुली जगह दी जाती है, और ठंड में उनकी देखभाल के लिए गर्म कपड़े या कंबल का इंतजाम होता है।
छात्रों को सुझाव: अपने शिक्षक या अभिभावक के साथ नजदीकी गौशाला या डेयरी फार्म पर जाएँ और वहाँ की जानकारी नोट करें, जैसे पशुओं की नस्ल, उनकी संख्या, और दूध उत्पादन का तरीका।
कल्पना की उड़ान
सेठ के घर से लौटकर जाते हुए हीरासिंह सुंदरिया को बहुत प्यार करता है, उसको सहलाता है एवं उससे बातें करता है। यदि सुंदरिया भी बोल सकती तो कल्पना कीजिए कि सुंदरिया और हीरासिंह के बीच क्या बातचीत होती।
उत्तर:
नाटक-मंचन
आपने ‘सुंदरिया’ कहानी पढ़ी। इस कहानी को नाटक के रूप में बदलकर कक्षा में अपने समूह के साथ नाटक-मंचन कीजिए। उत्तर: नाटक: सुंदरिया पात्र:
हीरासिंह: गरीब किसान
जवाहरसिंह: हीरासिंह का बेटा
सुंदरिया: हीरासिंह की गाय (किसी छात्र द्वारा अभिनय)
सेठ: दूध का मालिक
घोसी: गाय को संभालने वाला व्यक्ति
दृश्य 1: घर में (हीरासिंह और जवाहरसिंह घर में)
हीरासिंह: (चिंतित होकर) अब क्या करूँ? मेरे पास इतना चारा नहीं है। सुंदरिया को बेच दूँ या…?
जवाहरसिंह: (उदास होकर) पापा, सुंदरिया मेरी मौसी है। मैं उसे नहीं बेचने दूँगा।
हीरासिंह: ठीक है, मैं सोचता हूँ कि नौकरी करके पैसे कमाऊँ और गाय को हमारे पास रखूँ।
दृश्य 2: सेठ के घर
सेठ: हीरासिंह, हरियाणा की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो।
हीरासिंह: (गाय की ओर देख कर) मेरी नजर में एक गाय है।
सेठ: कैसी गाय?
हीरासिंह: (गर्व से) वह इतनी सुंदर है कि दूध देने में कामधेनु है। पंद्रह सेर दूध देती है।
सेठ: वाह! इसे लाओ।
दृश्य 3: गाय को घर से ले जाना
(हीरासिंह सुंदरिया को सहलाते हुए)
हीरासिंह: सुंदरिया, अब हम थोड़े दिन के लिए दूर जाएंगे, पर मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूँगा।
सुंदरिया: (गाय के अभिनय से) मुँह उठाकर हीरासिंह की ओर देखती है, जैसे कह रही हो – “क्या सचमुच मैं तुम्हारे साथ जाऊँ?”
हीरासिंह: (गाय के गले पर सिर रखकर) देखो, मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है।
दृश्य 4: डेयरी में दूध देना
सेठ: (चौंक कर) तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा? गाय ने पूरा दूध नहीं दिया।
हीरासिंह: (शर्माते हुए) मैंने खुद पंद्रह सेर दूध दिया था।
घोसी: (बोलता है) कल रात मैंने गाय को बाँधा था, लेकिन उसने फिर भी दूध गिरा दिया।
हीरासिंह: (गाय से) सुंदरिया, अब घर वापस चलो।
(हीरासिंह सुंदरिया को सहलाता है और दोनों खुशी-खुशी चले जाते हैं)
अंत: सभी पात्र: (मंच की ओर देखकर) जानवर भी हमारे परिवार का हिस्सा होते हैं। हमें उनसे प्यार और दया से पेश आना चाहिए।
बूझो पहेली
राग सुरीला रंग से काली, सबके मन को भाती। बैठ पेड़ की डाली पर जो, मीठे गीत सुनाती। उत्तर: कोयल
जल-थल दोनों में है रहता, धीमी जिसकी चाल। खतरा पाकर सिमट जाए झट, बन जाता खुद ढाल। उत्तर: कछुआ
लकड़ी का एक ऐसा घर, जो है जल में चलता। सबको अपने साथ बिठाकर, पार सभी को करता। उत्तर: नाव
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
इस पाठ में दूध की मात्रा को ‘सेर’ द्वारा दर्शाया गया है जो मापन की एक प्राचीन भारतीय इकाई थी। इसी प्रकार वस्तुओं की मात्रा के मापन की और भी प्राचीन भारतीय इकाइयाँ प्रचलित थीं। आप पुस्तकालय से मापन से संबंधित पुस्तकें ढूँढ़कर मापन की अन्य प्राचीन भारतीय इकाइयों का पता लगाइए। इसके लिए आप अपने शिक्षक और अभिभावक की भी सहायता ले सकते हैं। कक्षा में सहपाठियों के साथ इसे साझा कीजिए। उत्तर: विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक की सहायता से मापन की प्राचीन भारतीय इकाइयों; जैसे – रत्ती, माशा, तोला, मन आदि की जानकारी प्राप्त करें तथा सहपाठियों से साझा करें।
भूल-भुलैया
जवाहरसिंह ने सुंदरिया के बारे में जानने के लिए अपने पिता हीरासिंह को पत्र लिखा है। महिला डाकिया उस पत्र को हीरासिंह तक पहुँचाना चाहती है। आपको इस पहेली को हल करते हुए उसे बाहर निकालना है ताकि वह हीरासिंह तक पहुँच सके।
उत्तर:
हाथी और चींटी
उत्तर: चींटी ने हेलमेट पहन रखा था।
चींटी बनें हाथी नहीं। ट्रैफिक नियमों का पालन करें। आप क्या-क्या कर सकते हैं- चलने के लिए सड़क के किनारे बनी पटरियों का उपयोग करें। यदि आपको सड़क पार करनी हो तो सावधानी बरतें। लाल बत्ती होने की प्रतीक्षा करें। जब लाल बत्ती जलती है, तब वाहनों को रुकना होता है। आप सड़क के दोनों ओर देखें तथा जेब्रा क्रॉसिंग के चिह्न पर चलकर सड़क पार करें। यदि आप अपने अभिभावकों के साथ हों तो उनका हाथ अवश्य पकड़ें। सड़क पार करते समय न तो बातचीत करें और न ही दौड़ें, वरना ध्यान भटक सकता है। अब आप नीचे दिए गए सड़क संकेतों (रोड साइन) को पहचानिए और समझिए –
उत्तर: हम ट्रैफिक नियमों का पालन करके सुरक्षित रह सकते हैं। इसके लिए हम निम्नलिखित काम कर सकते हैं:
सड़क के किनारे बनी पटरियों (फुटपाथ) का उपयोग करके चलें।
सड़क पार करते समय सावधानी बरतें और लाल बत्ती होने तक इंतजार करें।
लाल बत्ती जलने पर वाहन रुकते हैं, इसलिए उस समय सड़क पार करें।
सड़क के दोनों ओर देखें और जेब्रा क्रॉसिंग पर चलकर सड़क पार करें।
अगर अभिभावकों के साथ हों, तो उनका हाथ पकड़ें।
सड़क पार करते समय न बात करें और न दौड़ें, ताकि ध्यान न भटके।
सड़क संकेतों (रोड साइन) को पहचानिए और समझिए:
पैदल क्रॉसिंग
अर्थ: यह संकेत बताता है कि यह जगह पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने के लिए है।
क्या करें: जेब्रा क्रॉसिंग पर सावधानी से चलें।
रुकिए
अर्थ: यह संकेत वाहन चालकों को रुकने का आदेश देता है, खासकर जहाँ खतरा हो सकता है।
क्या करें: अगर पैदल हैं, तो रुककर वाहनों को गुजरने दें।
हेलमेट पहनिए
अर्थ: यह संकेत बाइक या स्कूटर चलाने वालों को हेलमेट पहनने की सलाह देता है।
क्या करें: अगर साइकिल चलाते हैं, तो हेलमेट पहनें।
सुरक्षा पेटी अनिवार्य है
अर्थ: यह संकेत कार में बैठने वालों को सीट बेल्ट पहनने का नियम बताता है।
क्या करें: कार में बैठते समय हमेशा सीट बेल्ट बाँधें।
सार्वजनिक पैदल पथ (फुटपाथ)
अर्थ: यह संकेत पैदल यात्रियों के लिए बनी सुरक्षित पगडंडी को दर्शाता है।
क्या करें: हमेशा फुटपाथ पर चलें, सड़क पर नहीं।
फुटपाथ पर चलें
अर्थ: यह संकेत पैदल यात्रियों को सलाह देता है कि वे सड़क के किनारे बने फुटपाथ का उपयोग करें।
क्या करें: सड़क के बीच में न चलें, फुटपाथ पर रहें।
ये संकेत हमें सुरक्षित रखने में मदद करते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से समझें और मानें!
1. त्योहारों पर घरों में कई प्रकार की मिठाइयाँ और नमकीन बनाई जाती हैं। आपको कौन-सी मिठाइयाँ और नमकीन अच्छी लगती हैं? वे किस त्योहार पर बनाई जाती हैं? उत्तर: मुझे मिठाइयों में लड्डू और जलेबी बहुत पसंद हैं। लड्डू बेसन या सूजी के बनते हैं और बहुत मीठे होते हैं। जलेबी गोल-गोल और चाशनी में डूबी होती है। नमकीन में मुझे मठरी और नमकपारे अच्छे लगते हैं, जो कुरकुरे होते हैं। ये चीजें अक्सर दीवाली और होली पर बनती हैं। दीवाली पर मम्मी लड्डू और जलेबी बनाती हैं, और होली पर नमकपारे और गुजिया बनती है। कहानी में भी चाऊतान की माँ ने स्वादिष्ट पकवान बनाए थे, जो साङकेन के त्योहार पर खाए गए। हर त्योहार पर लोग अपने पसंदीदा पकवान बनाकर खुशी मनाते हैं।
2. आप कौन-से त्योहार मनाते हैं? उनमें और साङकेन में कौन-कौन सी समानताएँ हैं? उत्तर: मैं होली, दीवाली, रक्षाबंधन, और दशहरा जैसे त्योहार मनाता हूँ। ये सब बहुत मजेदार होते हैं। साङकेन और मेरे त्योहारों में कुछ समानताएँ हैं:
खुशी मनाना: कहानी में साङकेन में लोग नाचते-गाते हैं और पानी डालकर मस्ती करते हैं। होली में भी हम रंग और पानी डालकर मस्ती करते हैं।
नया साल: साङकेन में नया साल शुरू होता है, जैसे होली में भी कुछ जगहों पर नया साल मनाया जाता है।
पकवान खाना: साङकेन में चाऊतान की माँ ने पकवान बनाए। दीवाली और होली में भी हम मिठाइयाँ और नमकीन खाते हैं।
मिलजुलकर रहना: साङकेन में लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, जैसे रक्षाबंधन में हम बहन-भाई मिलकर राखी बाँधते हैं।
हर त्योहार में लोग प्यार और खुशी बाँटते हैं, जैसे साङकेन में लोग करते हैं।
3. हमारे देश में अनेक अवसरों पर शोभायात्राएँ (जुलूस) निकाली जाती हैं। आपने कौन-कौन सी शोभायात्राएँ देखी हैं? उनके बारे में अपने अनुभव बताइए। उत्तर: मैंने गणेश चतुर्थी और दशहरा के समय शोभायात्राएँ देखी हैं। इनमें लोग भगवान की मूर्तियाँ लेकर गीत गाते और नाचते हुए चलते हैं। ये शोभायात्राएँ बहुत रंगीन और मज़ेदार होती हैं, जिससे लोगों को बहुत खुशी होती है।
4. आप नया वर्ष कब और कैसे मनाते हैं? उत्तर: मैं नया वर्ष 1 जनवरी को मनाता/मनाती हूँ। हम परिवार के साथ मिलकर पार्टी करते हैं, रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं। कुछ लोग नए साल की शुरुआत में मंदिर जाकर पूजा भी करते हैं।
पाठ से
प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सामने तारे का चिह्न () बनाइए –
उत्तर:
पाठ से
(क) साङकेन का त्योहार मनाते समय वल्लरी को होली की याद क्यों आई? उत्तर: साङकेन के त्योहार में लोग एक-दूसरे पर पानी डाल रहे थे और चेहरों पर चावल का आटा लगा रहे थे। यह देखकर वल्लरी को होली की याद आई, क्योंकि होली में भी लोग रंगीन पानी और गुलाल डालकर मस्ती करते हैं। दोनों त्योहारों में खुशी और मस्ती एक जैसी थी।
(ख) वल्लरी को चौखाम और दिल्ली में क्या अंतर लगा? उत्तर: दिल्ली में वल्लरी को बहुत भीड़, गाड़ियों का शोर और लंबी-लंबी कतारें दिखीं। लेकिन चौखाम में हर तरफ हरियाली, फूल और शांति थी। चौखाम के लोग हमेशा मुस्कुराते थे, जो दिल्ली से बहुत अलग था।
(ग) मंदिर की सजावट कैसे की गई थी? उत्तर: मंदिर की दीवारें बाँस और बाँस की खपच्चियों से बनी थीं। उनमें हरी-हरी टहनियाँ लगाई गई थीं। टहनियों पर रंग-बिरंगे फूल सजाए गए थे। मंदिर बहुत सादा और सुंदर था।
(घ) आपको कौन-कौन आशीर्वाद देते हैं? वे क्या आशीर्वाद देते हैं? उत्तर: मुझे मेरे मम्मी-पापा, दादा-दादी और गुरुजी आशीर्वाद देते हैं। वे कहते हैं, “तुम हमेशा खुश रहो, अच्छे नंबर लाओ और स्वस्थ रहो।” कहानी में भिक्षु लोगों को आशीर्वाद देते हैं कि उनकी खेती अच्छी हो, वे बीमार न हों और नए साल में खुशी मनाएँ।
2. नीचे पाठ की कुछ पंक्तियों के भावार्थ दिए गए हैं। उदाहरण के अनुसार पाठ की उन पंक्तियों को लिखिए जो दिए गए भावार्थ पर आधारित हैं –
उत्तर:
भाषा की बात
1. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी लेखन-पुस्तिका में वाक्यों को पुनः लिखिए –
(क) एक दिन वल्लरी को उसके मित्र चाऊतान ने अपने घर बुलाया। उत्तर: एक दिन वल्लरी को उसके दोस्त चाऊतान ने अपने आवास बुलाया।
(ख) हमारे गाँव के लोगों ने नदी के किनारे एक मंदिर बनाया है। उत्तर: हमारे पिंड के लोगों ने सरोवर के तट पर एक मंदिर बनाया है।
(ग) बीच-बीच में पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ सजाई गई थीं। उत्तर: बीच-बीच में वृक्षों की हरी-भरी डालियाँ सजाई गई थीं।
(घ) आज हमारे यहाँ साङकेन का त्योहार है। उत्तर: आज हमारे यहाँ साङकेन का उत्सव है।
2. दिए गए उदाहरण को समझकर वाक्यों को पूरा कीजिए –
उत्तर:
3. रेखांकित शब्दों के वचन बदलकर वाक्य पूरा कीजिए –
उत्तर:
4. जब किसी की बात ज्यों की त्यों लिखी जाती है तब एक चिह्न लगाया जाता है। इसे उद्धरण चिह्न कहते हैं। उदाहरण के लिए – चाऊतान बोला, “आज से हमारा नया वर्ष आरंभ होता है।” पाठ में आए ऐसे चार वाक्य खोजकर लेखन-पुस्तिका में लिखिए। उत्तर:
वल्लरी ने चाऊतान से पूछा, “ये लोग कहाँ जा रहे हैं? बहुत प्रसन्न दिख रहे हैं।”
चाऊतान ने बताया, “अभी एक-दो दिन पहले ही हमारे गाँव के लोगों ने नदी के किनारे एक मंदिर बनाया है।”
वल्लरी ने चाऊतान से कहा, “चाऊतान भाई, लगता है कि लोग होली का त्योहार मना रहे हैं।”
चाऊतान बोला, “तुम्हें मालूम नहीं, आज हमारे यहाँ साङकेन का त्योहार है।”
5. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें हिंदी वर्णमाला के क्रम में लिखिए, जैसे – कलम, खरगोश, गगन… करेला, समय, मठ, तट, नमकीन, जल, वन, मटका उत्तर:
जल
तट
नमकीन
मटका
मठ
करेला
वन
समय
पाठ से आगे
1. आपके घर में त्योहारों के लिए कौन-कौन सी तैयारियाँ की जाती हैं? उत्तर: मेरे घर में त्योहारों के लिए कई तैयारियाँ की जाती हैं। जैसे:
घर की साफ-सफाई की जाती है।
घर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया जाता है।
विशेष पकवान और मिठाइयाँ बनाई जाती हैं।
पूजा की तैयारी की जाती है।
नए कपड़े खरीदे जाते हैं।
रिश्तेदारों और मित्रों को बुलाया जाता है।
2. आपके घर पर त्योहारों के समय कौन-कौन, क्या-क्या काम करता है? सूची बनाइए। उत्तर:
मम्मी: पकवान बनाती हैं और घर को सजाती हैं।
पापा: बाजार से ज़रूरी चीज़ें लाते हैं और सजावट के लिए लाइट लगाते हैं।
मैं: फूलों की माला बनाता हूँ और दीये सजाता हूँ।
दादा-दादी: पूजा की तैयारी करते हैं और सबको आशीर्वाद देते हैं।
भाई-बहन: घर को साफ करते हैं और मेहमानों का स्वागत करते हैं।
3. हमारे देश में लोग अनेक प्रकार से अभिवादन करते हैं। उदाहरण के लिए, ‘नमस्ते’ बोलकर। आपके राज्य में क्या बोलकर अभिवादन किया जाता है? एक सूची बनाइए – इस कार्य के लिए आप अपने मित्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं। उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. इस पाठ में आपको सबसे अच्छा क्या लगा और क्यों? उत्तर: इस पाठ में मुझे सबसे अच्छा शोभायात्रा लगा, क्योंकि इसमें लोग नाचते-गाते और खुश होकर चल रहे थे। मुझे यह अच्छा लगा क्योंकि यह देखकर मन खुश हो गया। साथ ही, लोग एक-दूसरे पर पानी डालकर मस्ती कर रहे थे, जो साङकेन के त्योहार को और मजेदार बनाता था। यह होली की तरह लगता था, और मुझे त्योहारों में मस्ती करना बहुत पसंद है।
2. नीचे दिए गए उदाहरण को देखकर आगे की कड़ी बनाइए-
उत्तर:
3. अपने मित्र को साङकेन के बारे में पूरे दिन का आँखों देखा वर्णन अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखकर बताइए। आपकी सहायता के लिए कुछ मुख्य संकेत बिंदु नीचे दिए गए हैं – स्वागत, पकवान, शोभायात्रा, मूर्तियाँ, मंदिर, एक-दूसरे पर पानी डालना, मिल-जुलकर खुशी मनाना, पालकी, बाँस की खपच्चियाँ, भगवान बुद्ध का मंदिर, बौद्ध भिक्षु, होली, आशीर्वाद, घर, फूल आप इन शब्दों के अतिरिक्त अन्य शब्दों की भी सहायता ले सकते हैं। ये शब्द आपकी अपनी भाषा से भी हो सकते हैं। उत्तर: साङकेन पर्व का आँखों देखा वर्णन प्रिय मित्र, मैं आज तुम्हें एक बहुत ही सुंदर और यादगार अनुभव के बारे में बताना चाहता हूँ। हाल ही में मैंने साङकेन पर्व में भाग लिया, जो मुख्यतः अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ भागों में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान बुद्ध के नए वर्ष के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। यह बिल्कुल होली की तरह होता है, लेकिन इसमें पानी डालकर एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दी जाती हैं। पर्व की शुरुआत बहुत ही भव्य तरीके से हुई। सबसे पहले, सभी ने बौद्ध मंदिर में इकट्ठा होकर भगवान बुद्ध की मूर्ति को साफ किया। वहाँ बहुत ही सुंदर पालकी सजाई गई थी जिसमें भगवान बुद्ध की मूर्ति को रखकर शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के मार्ग को फूलों से सजाया गया था और लोग बाँस की खपच्चियों से बने सुंदर सजावटी सामान लिए चल रहे थे। रास्ते में सभी लोग एक-दूसरे पर पानी डालकर साङकेन की शुभकामनाएँ दे रहे थे। यह पानी पवित्र माना जाता है और इसे डालना आशीर्वाद देने और बुराइयों को धो देने का प्रतीक है। सभी ने मिल-जुलकर खुशी मनाई। बच्चे, बूढ़े, जवान — सभी उत्साहित थे। पर्व के बाद, हम सबने स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लिया। वहाँ पर पारंपरिक मिठाइयाँ, चावल से बनी चीज़ें और खास बौद्ध व्यंजन परोसे गए। बौद्ध भिक्षुओं ने हमें शांति और प्रेम का संदेश दिया और आशीर्वाद भी दिया। सच कहूँ तो, इस दिन ने मेरे दिल में एक अलग ही जगह बना ली। साङकेन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सद्भावना, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। तुमसे मिलकर मैं और भी विस्तार से यह अनुभव बाँटना चाहूँगा। तुम्हारा मित्र, [अपना नाम लिखें]
मेरी कलाकारी
यहाँ कुछ प्राणियों के चित्र दिए गए हैं जिन्हें सूखे पत्तों से बनाया गया है। इन प्राणियों को पहचानिए और पत्तों से किसी भी प्राणी की आकृति बनाकर नीचे दिए गए स्थान पर चिपकाइए।
उत्तर: इस चित्र में सूखे पत्तों से बनाए गए तीन प्राणी दिखाए गए हैं:
पहला प्राणी: मोर (Peacock) – इसकी पूँछ में कई पत्तियाँ लगी हैं।
दूसरा प्राणी: कछुआ (Turtle) – इसका खोल गोल आकृति में बना है और चारों ओर पत्तियाँ हैं।
तीसरा प्राणी: हाथी (Elephant) – इसका शरीर और पैर बड़े पत्तों से बने हैं।
पुस्तकालय से
नीचे दिए गए बिंदुओं के आधार पर अरुणाचल प्रदेश के बारे में शिक्षकों और पुस्तकालय की सहायता से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाइए।
उत्तर: अरुणाचल प्रदेश के बारे में जानकारी
राजधानी: ईटानगर
पड़ोसी राज्य:
असम
नगालैंड
मिज़ोरम
म्यांमार (देश)
भूटान (देश)
चीन (देश)
भाषा: हिंदी, अंग्रेज़ी, और प्रमुख जनजातीय भाषाएँ (जैसे न्याशी, आदि, अपातानी)
मुख्य फसल: धान (चावल), मक्का, गेहूँ, दालें, और गन्ना
त्योहार:
लोसर (तिब्बती नववर्ष)
साङकेन (जल उत्सव)
सोलुंग (आदि जनजाति का त्योहार)
न्योकुम (न्याशी जनजाति का त्योहार)
नृत्य:
पोनुंग नृत्य
ब्यू नृत्य
याक नृत्य
परिधान:
पारंपरिक बुनाई वाले कपड़े
पुरुष अक्सर लंबी जैकेट, सश (कमरबंद) और सिर पर पारंपरिक टोपी पहनते हैं।
महिलाएँ रंग-बिरंगे कपड़े पहनती हैं और गहनों में मोतियों का इस्तेमाल करती हैं।
बुझो पहेली
उत्तर: बर्तन:
एक 4 लीटर का
एक 3 लीटर का
लक्ष्य: 5 लीटर दूध नापना
हल:
3 लीटर वाला बर्तन भर लिया (अब उसमें 3 लीटर दूध है)
इस 3 लीटर दूध को 4 लीटर वाले में डाल दिया
3 लीटर → 4 लीटर वाले में
फिर से 3 लीटर वाला बर्तन भर लिया
अब इसमें से 1 लीटर 4 लीटर वाले में डाला
अब 4 लीटर वाला पूरा भर गया
3 लीटर वाले में 2 लीटर बच गया
4 लीटर वाले को खाली कर दिया
अब 3 लीटर वाले में बचे 2 लीटर को 4 लीटर वाले में डाल दिया
फिर से 3 लीटर वाला बर्तन भर लिया
उसमें से 2 लीटर फिर 4 लीटर वाले में डाल दिया (अब 4 लीटर वाला पूरा भर गया)
1 लीटर बचा
अब यह 1 लीटर किसी पतीले में डाल दिया
फिर से 3 लीटर वाला बर्तन भर लिया
इस 3 लीटर को भी पतीले में डाल दिया
पतीले में अब कितना दूध है? 1 लीटर + 3 लीटर = 5 लीटर दूध!
ज्योति ने अपने दोस्तों से कहा: “दूधवाले भैया ने 4 लीटर और 3 लीटर वाले बर्तन को कई बार भरकर और खाली करके, पतीले में बिल्कुल 5 लीटर दूध नाप दिया!”
1. आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों? उत्तर: आकाश मुझे सुबह और शाम को बहुत सुंदर लगता है। सुबह सूरज उगता है तो आसमान गुलाबी और नारंगी हो जाता है। शाम को सूरज डूबते वक्त भी रंग-बिरंगा हो जाता है। रात में चाँद और तारे चमकते हैं, जो बहुत सुंदर लगते हैं। बारिश के बाद इंद्रधनुष देखकर भी आकाश बहुत अच्छा लगता है।
2. चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा? उत्तर: सूरज अपनी माँ से कहेगा, “माँ, मुझे बहुत गर्मी लगती है। दिन में मैं बहुत चमकता हूँ और पसीना आता है। मेरे लिए हल्का और ठंडा कपड़ा सिलवा दो, ताकि मुझे गर्मी न लगे।”
3. आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं? उत्तर: मैंने आकाश में कई बदलाव देखे हैं। सुबह आसमान हल्का नीला होता है, फिर दिन में गहरा नीला। शाम को यह लाल, गुलाबी या नारंगी हो जाता है। रात में तारे और चाँद दिखते हैं। कभी बादल आते हैं, तो आसमान ढक जाता है। बारिश के बाद इंद्रधनुष भी बनता है। चाँद का आकार भी रोज बदलता है।
4. जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं? उत्तर: जब मैं मम्मी-पापा के साथ कपड़े खरीदने जाता हूँ, तो मैं ये देखता हूँ:
कपड़ा आरामदायक और नरम हो।
मेरे साइज़ का हो, न ज्यादा टाइट, न ज्यादा ढीला।
रंग और डिज़ाइन अच्छा हो, जो मुझे पसंद हो।
मौसम के हिसाब से हो, जैसे गर्मी में हल्का और सर्दी में गर्म।
कीमत भी ठीक हो, जो मम्मी-पापा के बजट में हो।
कविता से
नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प हैं। इनमें एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं। सही विकल्प पर चाँद का चित्र () बनाइए –
उत्तर:
सोचिए और लिखिए
1. कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है? उत्तर: “घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है, नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।” इन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद कभी-कभी बिलकुल दिखाई ही नहीं देता।
2. सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है? उत्तर: झिंगोले के अलावा चाँद माँ से टोपी, मफलर, दस्ताने, गरम पायजामा या स्वेटर भी माँग सकता है, ताकि उसे ठंड न लगे।
3. जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है? उत्तर: जाड़े के मौसम में चाँद को तेज हवा में बहुत ठंड लगती है। वह ठिठुर-ठिठुरकर रात की यात्रा करता है और कांपता रहता है, इसलिए उसे गरम कपड़ों की जरूरत महसूस होती है।
4. चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है? उत्तर: चाँद रात के समय आसमान में चलने और चमकने की जो यात्रा करता है, वही यात्रा पूरी करने की बात कर रहा है। वह रोज़ रात को आसमान में निकलता है और एक जगह से दूसरी जगह जाता है।
अभिभावक और आप
जब नीचे दी गई बातें एवं घटनाएँ होती हैं तब आपके अभिभावक क्या-क्या कहते या करते हैं? अपने-अपने अनुभव कक्षा में साझा कीजिए।
1. जब आप ठंडी रात में सोते समय अपने पैरों से कंबल या रजाई उतार फेंकते हैं। उत्तर: माँ धीरे से आकर फिर से रजाई ओढ़ा देती हैं और कहती हैं, “बेटा, ऐसे सोए तो बीमार हो जाओगे।”
2. जब आप ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं। उत्तर: पापा या माँ कहते हैं, “अभी ठंड है, आइसक्रीम खाओगे तो गला खराब हो जाएगा। गर्मियों में दिलवाएँगे।”
3. जब आप दूध पीने, हरी सब्जियाँ और फल आदि खाने से कतराते हैं। उत्तर: माँ कहती हैं, “अगर सेहत बनानी है तो सब कुछ खाना होगा। हरी सब्जियाँ और फल शरीर के लिए बहुत ज़रूरी हैं।”
4. जब आप देर तक सोते हैं। उत्तर: पापा कहते हैं, “इतनी देर तक नहीं सोते! जल्दी उठो, वरना समय पर स्कूल नहीं जा पाओगे।”
5. जब कोई आपके घर आपकी शिकायत करने आता है। उत्तर: माँ-पापा पहले ध्यान से बात सुनते हैं, फिर प्यार से समझाते हैं, “बेटा, ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर गलती हुई है तो माफ़ी माँग लो और दोबारा मत करना।”
6. जब आपके अच्छे कामों के लिए आपकी प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मिलता है। उत्तर: माँ-पापा बहुत खुश होते हैं और कहते हैं, “हमें तुम पर गर्व है! ऐसे ही मेहनत करते रहो।” कभी-कभी मिठाई भी लाते हैं या गले लगाते हैं।
अनुमान और कल्पना
1. आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे? उत्तर: मैं माँ से कहूँगा, “माँ, चाँद बहुत दुखी है। वह ठंड में काँप रहा है। उसका कोई कपड़ा नहीं है। आप उसकी मदद कीजिए। उसे गर्म ऊन का कुरता सिल दीजिए, ताकि वह सर्दी में आराम से आसमान में घूम सके।”
2. गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है? उत्तर: चाँद अपनी माँ से कहेगा, “माँ, गर्मी में मुझे बहुत पसीना आता है और बारिश में मैं भीग जाता हूँ। मेरे लिए कुछ हल्का और ठंडा कपड़ा लाओ, और बारिश से बचने के लिए छाता भी दो।” वह ये चीज़ें माँग सकता है:
हल्का सूती कुरता (गर्मी के लिए)
टोपी या हैट (धूप से बचने के लिए)
रेनकोट या छाता (वर्षा से बचने के लिए)
पंखा (गर्मी में ठंडक के लिए)
3. चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा? उत्तर: चाँद जानता था कि उसका आकार हर दिन बदलता रहता है – कभी छोटा, कभी बड़ा। इसलिए वह सोचता था कि अगर माँ नया कुरता सिल देगी, तो वह हर दिन फिट नहीं आएगा। इसलिए उसने कहा कि “किराए पर ले आओ”, ताकि जब जरूरत हो तब ही उसे पहन सके।
4. यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता? उत्तर: अगर माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता, तो वह हर दिन उसे पहन नहीं पाता। जब वह छोटा होता, तब कुरता बड़ा पड़ता। जब वह बड़ा होता, तब कुरता छोटा हो जाता। इसलिए वह कुरता कभी भी ठीक से नहीं आता और चाँद परेशान हो जाता।
भाषा की बात
1. “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ।” कविता की इस पंक्ति में ‘भर’ शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आप ‘भर’ की सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए, जैसे – पानी गिलास भर है, उसने दिन भर पढ़ाई की आदि। उत्तर:‘भर’ शब्द के पाँच वाक्य:
गिलास पानी से भर है।
उसने दिन भर पढ़ाई की।
कमरे में धूप भर आई।
मैदान बच्चों से भर गया।
वह खुशी से आँसू भर आया।
2. नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान से पढ़िए – (क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” (ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” अपनी बात पर बल देने के लिए हम इस प्रकार के कुछ शब्दों का प्रयोग दो बार करते हैं, जैसे- जल्दी चलो, जल्दी-जल्दी चलो आदि। अब आप ऐसे ही पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। उत्तर:दोहराव वाले शब्दों का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य:
वह धीरे-धीरे चल रहा है।
बच्चा धीरे-धीरे मुस्कराया।
उन्होंने जल्दी-जल्दी खाना खाया।
हम धीरे-धीरे आगे बढ़े।
हवा तेज़-तेज़ चलने लगी।
3. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर उन्हें दिए गए स्थानों में लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
उत्तर: वाक्यों में प्रयोग संज्ञा
हठ: मैंने हठ करके मम्मी से नई साइकिल माँगी।
चाँद: रात को चाँद बहुत चमक रहा था।
दिन: रविवार को मैं दिन भर खेलता हूँ।
माता: मेरी माता मुझे बहुत प्यार करती हैं।
आसमान: आसमान में रंग-बिरंगे पक्षी उड़ रहे थे।
सफर: हमारा सफर बहुत मजेदार था।
मौसम: आज का मौसम बहुत ठंडा है।
जाड़ा: जाड़ा आने पर मैं गर्म कपड़े पहनता हूँ।
माँ: मेरी माँ मुझे रोज़ कहानी सुनाती हैं।
ऊन: ऊन का स्वेटर बहुत गर्म होता है।
झिंगोला: चाँद ने अपनी माँ से झिंगोला माँगा।
यात्रा: हमारी स्कूल की यात्रा बहुत मज़ेदार थी।
सर्वनाम
यह: यह किताब बहुत अच्छी है।
मुझे: मम्मी ने मुझे नया खिलौना दिया।
कोई: कोई मेरी किताब ले गया।
मैं: मैं रोज़ स्कूल जाता हूँ।
विशेषण
एक: मेरे पास एक सुंदर पेन है।
मोटा: मेरा कुत्ता बहुत मोटा हो गया है।
पूरी: मैंने पूरी किताब पढ़ ली।
क्रिया
कर: मैं रोज़ होमवर्क करता हूँ।
बैठा: वह पार्क में पेड़ के नीचे बैठा था।
बोला: उसने मुझसे धीरे से बोला।
है: यह मेरा पसंदीदा खेल है।
सिलवा: मम्मी ने मुझे नया कुरता सिलवाया।
ठिठुर-ठिठुरकर: ठंड में मैं ठिठुर-ठिठुरकर घर लौटा।
करता: वह रोज़ सुबह दौड़ता है।
हूँ: मैं स्कूल में बहुत खुश हूँ।
चाँद का झिंगोला
1. मान लीजिए कि चाँद, झिंगोले के लिए माँ, कपड़े के दुकानदार और दर्जी से संवाद करता है। बातचीत के कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। आप इन्हें आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा में भी लिख सकते हैं।
उत्तर:
उत्तर:
उत्तर:
2. अब आप इन संवादों पर कक्षा में शिक्षक की सहायता से अभिनय कीजिए। उत्तर: विद्यार्थी इस संवाद को कक्षा में शिक्षक की सहायता से दो पात्रों – चाँद और दर्जी – के रूप में बाँटकर अभिनय करेंगे। वे मंच पर खड़े होकर संवादों को याद करेंगे और अभिनय के माध्यम से उन्हें जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगे। शिक्षक बच्चों को संवाद बोलने के सही तरीके, भाव-भंगिमा, हाव-भाव और आवाज़ के उतार-चढ़ाव की मदद से अभिनय में मार्गदर्शन देंगे। अभिनय करते समय चाँद मासूम और जिज्ञासु दिखेगा, जबकि दर्जी समझदार और विनोदी होगा। इससे बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ेगी।
कविता से आगे
1. क्या चाँद की तरह आप भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करते हैं? आप अपनी माँ को इसके लिए कैसे मनाते हैं? उत्तर: हाँ, मैं भी कभी-कभी अपनी माँ से हठ करता हूँ, जैसे जब मुझे कोई खिलौना चाहिए होता है। मैं उन्हें प्यार से कहता हूँ, “प्लीज़ मम्मी!” और कभी-कभी रो भी पड़ता हूँ। फिर माँ मुझे समझाकर या कभी-कभी चीज़ दिलाकर मना लेती हैं।
2. आपकी माँ आपको किसी काम के लिए कैसे मनाती हैं? उत्तर: मेरी माँ मुझे प्यार से बुलाती हैं और समझाती हैं कि काम करने से मैं अच्छा बच्चा बनूंगा। कभी-कभी वे कहती हैं कि अगर मैं काम कर लूंगा तो मुझे मेरी पसंद की कोई चीज़ मिल सकती है, जैसे कहानी सुनना या टॉफी मिलना।
3. गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए आपकी माँ आपको क्या कहती अथवा क्या-क्या करती हैं? उत्तर: गरमी में माँ कहती हैं कि टोपी पहन लो और ठंडा पानी पीओ। सर्दी में वे मुझे स्वेटर, टोपी और मोज़े पहनाती हैं। वर्षा में वे मुझे रेनकोट पहनाती हैं या छाता देती हैं ताकि मैं भीग न जाऊँ।
सोचिए, समझिए और बताइए
1. कविता में चाँद अपनी माँ से बातें कर रहा है। मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा? उत्तर: अगर चाँद बोल नहीं सकता, तो वह अपनी माँ को अपनी बात इस तरह बताएगा:
इशारों से: चाँद अपनी माँ को ठंड लगने का इशारा करने के लिए काँपने का नाटक करेगा, जैसे वह ठिठुर रहा हो।
चमक से: वह अपनी चमक को तेज़-धीमा करके दिखाएगा कि उसे ठंड लग रही है और उसे गर्म कपड़े चाहिए।
आकाश में चित्र बनाकर: चाँद तारों के साथ मिलकर आसमान में कुरते का आकार बनाएगा, ताकि माँ समझ जाए कि उसे झिंगोला चाहिए।
हवा के साथ संदेश भेजकर: वह हवा को धीरे से माँ के पास भेजेगा, जो ठंडी होगी, ताकि माँ को पता चले कि उसे ठंड लगती है।
2. मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा? उत्तर: अगर चाँद का मित्र देख नहीं सकता, तो चाँद उसे अपने बदलते आकार के बारे में इस तरह समझाएगा:
स्पर्श से: चाँद अपने मित्र को अलग-अलग आकार के गोल पत्थर या गेंद छूने देगा। वह कहेगा, “देखो, कभी मैं इतना छोटा होता हूँ जैसे ये छोटी गेंद, और कभी इतना बड़ा जैसे ये बड़ी गेंद।”
आवाज़ से: चाँद अलग-अलग आवाज़ें निकालेगा, जैसे छोटा होने पर धीमी आवाज़ और बड़ा होने पर ज़ोर की आवाज़, ताकि मित्र समझे कि उसका आकार बदल रहा है।
हवा के ज़रिए: चाँद हवा को अपने मित्र के पास भेजेगा। जब वह छोटा होगा, हल्की हवा भेजेगा, और जब बड़ा होगा, तेज़ हवा भेजेगा।
कहानी सुनाकर: चाँद कहेगा, “मेरे मित्र, मैं हर रात बदलता हूँ। कभी मैं एक छोटी-सी रोटी जैसा हूँ, कभी पूरी थाली जैसा, और कभी बिल्कुल छिप जाता हूँ जैसे बादल में!”
पढ़िए और समझिए
1. चाँद के लिए कुरता सिलना एक कठिन कार्य है। इसलिए चाँद की माँ ने उसका कुरता सिलवाने के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसे पढ़िए और इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद की माँ की सहायता कीजिए –
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें
2. अब एक रोचक विज्ञापन तैयार कीजिए जिसमें आप अपने लिए कोई वस्तु मँगवा रहे हों। उत्तर: विशेष विज्ञापन मुझे चाहिए एक उड़ने वाली साइकल! क्या आपके पास ऐसी जादुई साइकल है जो हवा में उड़ सके, पहाड़ों पर चढ़ सके, और बटन दबाते ही स्कूल पहुँचा दे? अगर हाँ, तो तुरंत मुझसे संपर्क करें! साइकल रंग-बिरंगी होनी चाहिए, और उसमें घंटी भी हो जो बोले – “चलो मस्ती की सैर पर!” संपर्क करें: आर्यन कुमार, कक्षा 5 स्कूल: बाल विकास विद्यालय फोन: 1234567890
आपकी कलाकारी
आइए, चाँद के लिए एक कुरता बनाएँ। सामग्री: रंगीन कागज, गोंद, कैंची, ग्लिटर, कपड़े के छोटे टुकड़े
उत्तर: विद्यार्थी कृपया स्वयं प्रयास करें या बड़ों की सहायता लें।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
1. पुस्तकालय में चाँद, सूरज, तारे, आकाश आदि पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य उपलब्ध होंगी। उन पुस्तकों को ढूँढ़कर पढ़िए और उनके बारे में कक्षा में भी चर्चा कीजिए। उत्तर: मैं अपने स्कूल के पुस्तकालय में जाऊँगा और चाँद, सूरज, तारे और आकाश के बारे में किताबें ढूँढूँगा। कुछ किताबें जो मुझे मिल सकती हैं, वे हैं:
“हमारा सौरमंडल”: इस किताब में चाँद, सूरज और तारों की मजेदार जानकारी होगी, जैसे चाँद का आकार क्यों बदलता है।
“आकाश की कहानियाँ”: इसमें तारों और नक्षत्रों की कहानियाँ होंगी, जो रात के आकाश को और रोचक बनाती हैं।
“चाँद की सैर”: यह किताब चाँद के बारे में बच्चों के लिए लिखी गई होगी, जिसमें उसकी सतह और यात्रा की बातें होंगी।
कक्षा में चर्चा: मैं कक्षा में अपने दोस्तों को बताऊँगा कि चाँद हर रात अपना आकार बदलता है, जैसे कविता में चाँद ने अपनी माँ से झिंगोला माँगा था। मैं बताऊँगा कि चाँद की सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिन्हें क्रेटर कहते हैं। मैं यह भी कहूँगा कि सूरज एक बड़ा तारा है, जो हमें रोशनी और गर्मी देता है। अगर कोई मज़ेदार कहानी किताब में मिले, जैसे तारों का कोई जादुई गाँव, तो उसे भी साझा करूँगा।
2. अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मित्रों की सहायता से चाँद तथा सूरज की बदलती स्थितियों की और भी जानकारी प्राप्त कीजिए। यह भी पता लगाइए कि चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं। आप अपने माता-पिता या अभिभावक से भी इनके बारे में बात कर सकते हैं। उत्तर: मैं अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी, मित्रों और मम्मी-पापा से चाँद और सूरज के बारे में और जानकारी लूँगा। यहाँ कुछ जानकारी है जो मैं इकट्ठा कर सकता हूँ:
चाँद की बदलती स्थिति: चाँद हर रात अपना आकार बदलता दिखता है, जैसे कविता में चाँद छोटा-बड़ा होता है। इसे चंद्रमा की कलाएँ (phases) कहते हैं।
नया चाँद (अमावस्या): जब चाँद बिल्कुल दिखाई नहीं देता।
अर्धचंद्र: जब चाँद आधा दिखता है।
पूर्णिमा: जब चाँद पूरा गोल और चमकदार होता है। यह बदलाव इसलिए होता है क्योंकि चाँद सूरज की रोशनी को पृथ्वी पर अलग-अलग कोणों से दिखाता है, जब वह पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है।
सूरज की बदलती स्थिति: सूरज सुबह पूर्व में उगता है और शाम को पश्चिम में डूबता है। दिन में उसकी स्थिति बदलती रहती है क्योंकि पृथ्वी घूमती है। गर्मियों में सूरज ज़्यादा ऊँचा और चमकदार होता है, जबकि सर्दियों में नीचे और कम गर्म।
चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse):
क्या है?: जब पृथ्वी, चाँद और सूरज के बीच में आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। इससे चाँद कुछ समय के लिए लाल या काला दिखता है।
कब होता है?: चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन हो सकता है, जब सूरज, पृथ्वी और चाँद एक सीध में होते हैं।
क्यों होता है?: पृथ्वी की छाया चाँद को ढक लेती है, जिससे वह दिखना बंद हो जाता है या उसका रंग बदल जाता है।
उदाहरण: मेरे शिक्षक ने बताया कि 2025 में 29 मार्च और 21 सितंबर को चंद्र ग्रहण हो सकता है (यह जानकारी मैं पुस्तकालय की किताबों से या मम्मी-पापा से और पक्की करूँगा)।
सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse):
क्या है?: जब चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच में आता है, तो चाँद सूरज की रोशनी को ढक लेता है। इससे सूरज कुछ समय के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से छिप जाता है।
कब होता है?: सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन होता है, जब चाँद, सूरज और पृथ्वी एक सीध में होते हैं।
क्यों होता है?: चाँद सूरज के सामने आ जाता है और उसकी रोशनी को पृथ्वी तक आने से रोकता है।
उदाहरण: मेरे मम्मी-पापा ने बताया कि सूर्य ग्रहण को बिना खास चश्मे के नहीं देखना चाहिए, वरना आँखें खराब हो सकती हैं। 2025 में 29 मार्च को एक सूर्य ग्रहण हो सकता है (मैं पुस्तकालय में इसकी तारीख पक्की करूँगा)।
कैसे जानकारी लूँगा:
शिक्षक से: मैं अपने साइंस टीचर से पूछूँगा कि चाँद और सूरज की स्थिति क्यों बदलती है।
पुस्तकालय प्रभारी से: मैं उनसे बच्चों के लिए आसान किताबें माँगूँगा, जैसे “The Moon Book” या “Solar System for Kids”।
मित्रों से: अपने दोस्तों से पूछूँगा कि उन्होंने चाँद या सूरज के बारे में क्या-क्या पढ़ा या देखा।
मम्मी-पापा से: मैं उनसे पूछूँगा कि उन्होंने चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण कब देखा और कैसा लगा।
कक्षा में चर्चा: मैं कक्षा में बताऊँगा कि चाँद का आकार बदलने का कारण उसकी सूरज की रोशनी को दिखाने की स्थिति है। मैं चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की मजेदार बातें भी साझा करूँगा, जैसे चंद्र ग्रहण में चाँद लाल क्यों हो जाता है। अगर कोई तस्वीर या मॉडल मिले, तो उसे भी कक्षा में दिखाऊँगा।
बुझो तो जानें
1. तन है मेरा हरा-भरा, रस से रहता सदा भरा। भीतर से हूँ मैं लाल, प्यास बुझाकर पूछें हाल। उत्तर: तरबूज
2. हम दोनों हैं पक्के मित्र, करते रहते काम विचित्र। पाँच-पाँच सेवक हैं साथ, लेकिन करते कभी न बात। उत्तर: हाथ का पंजा