2. न्याय की कुर्सी – Textbook Solutions

बातचीत के लिए

1. आपका प्रिय खेल कौन-सा है? आप उसे कैसे खेलते हैं?
उत्तर: 
मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है। इसे खेलने के लिए दो टीमें बनती हैं। एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी गेंदबाजी। बल्लेबाज गेंद को मारता है और रन बनाता है। गेंदबाज और फील्डर उसे आउट करने की कोशिश करते हैं। जो टीम ज्यादा रन बनाती है, वह जीतती है। मुझे यह खेल इसलिए पसंद है क्योंकि यह बहुत मजेदार है और दोस्तों के साथ खेलने में बहुत आनंद आता है।

2. क्या आपने कभी किसी समस्या का समाधान किया है? अपना अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर: हाँ, एक बार मेरे दो दोस्तों के बीच झगड़ा हो गया था क्योंकि दोनों एक ही खिलौने से खेलना चाहते थे। मैंने उनसे बात की और कहा कि वे बारी-बारी से उस खिलौने से खेलें। दोनों मान गए और फिर खुशी-खुशी खेले। इससे उनकी दोस्ती भी बनी रही।

3. यदि आप राजा के स्थान पर होते और आपको लड़के के बारे में पता चलता तो आप क्या करते?

उत्तर: अगर मैं राजा होता, तो मैं पहले लड़के से मिलता और उससे सीखता कि सच्चा न्याय कैसे किया जाता। मैं उसे बुलाकर अपने दरबार में काम करने का मौका देता और उससे सीखता कि सच्चा न्याय कैसे करते हैं। मैं उसका सम्मान करता, न कि उससे जलन करता।

4. लड़के के अंदर ऐसे कौन-कौन से गुण होंगे जिनके कारण वह सिंहासन पर बैठ पा रहा था?

उत्तर: लड़के के अंदर ये अच्छे गुण होंगे:

  • सच्चाई (वह झूठ नहीं बोलता था)
  • ईमानदारी (कभी चोरी नहीं की थी)
  • दया (कभी किसी को चोट नहीं पहुँचाई)
  • समझदारी (वह सोच-समझकर न्याय करता था)
  • भोला-भाला और साफ मन (उसका मन साफ और मासूम था, जैसे बच्चों का होता है)
  • न्यायप्रियता (वह सही और गलत में फर्क कर पाता था।)

पाठ से

नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर के आगे तारे का चिह्न  बनाइए। एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं –


उत्तर: 

सोचिए और लिखिए

1. सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे लेकिन राजा नहीं बैठ पाया। ऐसा क्यों?
उत्तर: 
सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे क्योंकि उनका मन साफ, भोला और ईमानदार था। उन्होंने कभी चोरी, झूठ या किसी को चोट नहीं पहुँचाई थी। लेकिन राजा ने चोरी की थी, झूठ बोला था और दूसरों को चोट पहुँचाई थी। इसलिए सिंहासन की मूर्तियों ने उसे बैठने से रोका, क्योंकि वह इसके योग्य नहीं था।

2. क्या राजा को प्रायश्चित करने के बाद सिंहासन पर बैठने का अधिकार मिलना चाहिए था? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर: 
नहीं, राजा को प्रायश्चित करने के बाद भी सिंहासन पर बैठने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए था। कारण यह है कि राजा ने प्रायश्चित तो किया, लेकिन उसका मन पूरी तरह साफ नहीं हुआ। अंत में उसने घमंड से सोचा कि वह लड़कों से बेहतर है और सिंहासन पर बैठने का हकदार है। यह दिखाता है कि उसमें विनम्रता और सच्ची समझ की कमी थी।

3. दोनों किसानों ने अपने झगड़े के निपटारे के लिए राजा के दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास जाने का फैसला क्यों किया?
उत्तर: 
दोनों किसानों ने लड़के के पास जाने का फैसला किया क्योंकि पूरे नगर में उस लड़के की न्याय-बुद्धि की तारीफ हो रही थी। लोग कहते थे कि उसके फैसले सही और निष्पक्ष होते हैं। इसलिए किसानों को उस पर भरोसा था कि वह उनके झगड़े का सही समाधान करेगा।


4. चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में क्यों उड़ गई?
उत्तर: 
चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में उड़ गई क्योंकि राजा ने घमंड में सोचा कि वह लड़कों से बेहतर है और सिंहासन पर बैठने का हकदार है। मूर्ति ने देखा कि राजा का मन अभी भी पूरी तरह साफ और ईमानदार नहीं हुआ। इसलिए उसने सिंहासन को लेकर उड़ान भर दी, ताकि वह गलत इंसान के हाथ न लगे।


5. इस कहानी को एक नया शीर्षक दीजिए और बताइए कि आपने यह शीर्षक क्यों चुना?
उत्तर: नया शीर्षक: 
“सच्चाई की कुर्सी”
कारण: मैंने यह शीर्षक चुना क्योंकि यह कहानी बताती है कि सिंहासन केवल सच्चे, ईमानदार और साफ मन वाले इंसान को ही स्वीकार करता है। यह कुर्सी सिर्फ न्याय ही नहीं, बल्कि सच्चाई और अच्छाई की भी प्रतीक है।

अनुमान और कल्पना

1. कहानी में सिंहासन की मूर्तियाँ उड़कर किसी और जगह चली जाती हैं। वे कहाँ जाती होंगी और वहाँ क्या करती होंगी?
उत्तर: 
मूर्तियाँ शायद किसी ऐसी जगह चली जाती होंगी जहाँ सच्चे और ईमानदार लोग रहते हों, जैसे कोई पवित्र जंगल या पहाड़ों पर बनी गुप्त गुफा। वहाँ वे सिंहासन की रक्षा करती होंगी और उसकी चमत्कारी शक्ति को सुरक्षित रखती होंगी। हो सकता है कि वे उन लोगों की तलाश करती हों जो सच्चे मन से न्याय कर सकें, और उन्हें सिखाती हों कि सही और गलत का फैसला कैसे करना है।

2. यदि इस कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता तो क्या होता?
उत्तर: 
अगर राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता, तो शायद वह और बेहतर राजा बन जाता। वह अपने पुराने गलत कामों, जैसे चोरी, झूठ और दूसरों को चोट पहुँचाने, को सुधारता। वह सच्चाई और ईमानदारी से अपनी प्रजा के लिए न्याय करता। लोग उसका और भी सम्मान करने लगते, और नगर में खुशहाली बढ़ जाती। लेकिन यह तभी हो सकता था, अगर उसका मन पूरी तरह साफ और घमंड से मुक्त हो जाता।

भाषा की बात

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए –

अब नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए –

(क) चौथी मूर्ति ने कहा ठहरो जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे वे भोले भाले थे उनके मन में कलुष नहीं था अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो
उत्तर: सही वाक्य: चौथी मूर्ति ने कहा, “ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था। अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो, तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो।”
विवरण:

  • “ठहरो!” में विस्मयादिबोधक चिह्न (!) और उद्धरण चिह्न (” “) लगाए गए क्योंकि मूर्ति जोर से बोल रही है।
  • “जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे” के बाद अल्पविराम (,) और “वे भोले-भाले थे” के बाद पूर्णविराम (।) लगाया गया ताकि वाक्य स्पष्ट हो।
  • “अगर तुमको विश्वास है” के बाद अल्पविराम (,) और अंत में पूर्णविराम (।) लगाया गया।

(ख) राजा बड़ी देर तक सोचता रहा फिर उसने मन ही मन कहा अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ मैं राजा हूँ मुझसे ज्यादा धनवान बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ
उत्तर: सही वाक्य: राजा बड़ी देर तक सोचता रहा। फिर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है, तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ? मैं राजा हूँ। मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”
विवरण:

  • “राजा बड़ी देर तक सोचता रहा” के बाद पूर्णविराम (।) लगाया गया क्योंकि यह एक पूरा वाक्य है।
  • “फिर उसने मन ही मन कहा” के बाद अल्पविराम (,) और उद्धरण चिह्न (” “) लगाए गए क्योंकि राजा का विचार शुरू हो रहा है।
  • “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है” के बाद अल्पविराम (,) और “तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ” के बाद प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाया गया क्योंकि यह सवाल है।
  • “मैं राजा हूँ” और “मुझसे ज्यादा धनवान बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा” के बाद पूर्णविराम (।) और प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाए गए।
  • अंत में पूर्णविराम (।) और उद्धरण चिह्न (” “) लगाए गए।

2. “तीसरी मूर्ति भी उड़ गई।” इस वाक्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

उत्तर: 


3. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इनमें विशेषण शब्द पहचानकर उनके नीचे रेखा खींचिए –
(क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
(ख) उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।
(ग) इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
(घ) राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था।
(ङ) बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।

उत्तर: (क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
(ख)
 उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।
(ग) 
इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
(घ) 
राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था।
(ङ)
 बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।

4. आपमें कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए जिससे आप कहानी के सिंहासन पर बैठ सकें? लिखिए –

उत्तर:

पाठ से आगे

1. कहानी में गाँव वाले न्याय करवाने या झगड़े सुलझाने बच्चों के पास जाया करते थे। आप अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए किन-किनके पास जाते हैं? आप उन्हीं के पास क्यों जाते हैं?
उत्तर: 
मैं अपनी समस्याएँ सुलझाने के लिए अपने माता-पिता, शिक्षक या बड़े भाई-बहन के पास जाता हूँ। अगर स्कूल में कोई परेशानी हो, जैसे दोस्तों के बीच झगड़ा, तो मैं अपने शिक्षक से बात करता हूँ। अगर घर में कोई छोटी-मोटी समस्या हो, जैसे होमवर्क में मदद चाहिए, तो मैं अपने माता-पिता या भाई-बहन से पूछता हूँ।
क्यों: मैं उनके पास इसलिए जाता हूँ क्योंकि वे समझदार हैं, मुझे सही सलाह देते हैं और मेरी मदद करते हैं। वे मेरे साथ ईमानदारी और प्यार से पेश आते हैं, जिससे मुझे भरोसा होता है कि मेरी समस्या का सही समाधान मिलेगा।

2. क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपके साथ अन्याय किया हो? आपने उस स्थिति का सामना कैसे किया?
उत्तर: 
हाँ, एक बार मेरे साथ ऐसा हुआ जब एक सहपाठी ने मुझ पर झूठा आरोप लगाया कि मैंने उसकी किताब चुरा ली है। मुझे बहुत बुरा लगा, लेकिन मैंने धैर्य नहीं खोया। मैंने शांति से अपने शिक्षक को सारी सच्चाई बताई। जब शिक्षक ने सभी से बात की, तो पता चला कि वह किताब उसी सहपाठी के बैग में थी। उस दिन मुझे समझ आया कि सच्चाई और धैर्य से ही किसी भी अन्याय का सामना किया जा सकता है।

पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत

आपने जो कहानी पढ़ी, वह हमारे देश की सैकड़ों वर्ष पुरानी एक पुस्तक पर आधारित है। उस पुस्तक का नाम है सिंहासन बत्तीसी।
इस पुस्तक में राजा भोज को भूमि में गड़ा राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है जिसमें बत्तीस मूर्तियाँ जड़ी होती हैं। प्रत्येक मूर्ति राजा भोज को राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाती है। इस पुस्तक की प्रत्येक कहानी बहुत रोचक है।

  • पुस्तकालय में से यह पुस्तक खोजकर पढ़िए और अपनी मनपसंद कहानी कक्षा में सुनाइए।
  • सिंहासन बत्तीसी की तरह भारत में अनेक पारंपरिक कहानियाँ प्रचलित हैं, जैसे पंचतंत्र, हितोपदेश, जातक कथाएँ आदि। इन्हें भी पुस्तकालय से ढूँढ़कर पढ़िए।

उत्तर: विद्यार्थी यह कार्य स्वयं करें और पुस्तकालय से पुस्तकें ढूँढ़कर पढ़ें। अपनी पसंदीदा कहानी कक्षा में ज़रूर सुनाएँ।

पता लगाकर कीजिए

“राजा ने आज्ञा दी कि सिंहासन को ले जाकर राजदरबार में रख दिया जाए।”
सिंहासन एक विशेष प्रकार की भव्य कुर्सी हुआ करती थी जिस पर राजा-महाराजा बैठा करते थे। आज भी हम बैठने के लिए अनेक प्रकार की वस्तुओं का उपयोग करते हैं। इनमें से कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इनका वर्णन कीजिए और यह भी लिखिए कि आपकी भाषा में इन्हें क्या कहते हैं।

उत्तर:

Tip: “आपकी भाषा में नाम” कॉलम में आप अपनी क्षेत्रीय भाषा जैसे भोजपुरी, अवधी, मैथिली, पंजाबी, तमिल आदि में जो बोला जाता है, वह लिख सकते हैं।

बुझो तो जानें

नीचे दी गई पहेलियों के जवाब दिए गए हैं। ये पहेलियाँ भारत की अलग-अलग भाषाओं से हैं और बहुत रोचक हैं। प्रत्येक पहेली को ध्यान से पढ़कर उसका जवाब समझाया गया है।

गोंड पहेली
न तो खाय न तो पीवैह, 
संग मा रेंगत है। 
(न खाती है, न पीती है, 
संग-संग चलती है)

उत्तर: छाया

मालबी पहेली
एक जानवर ऐसो, 
जिकी दूम पे पैसो। 
(एक जानवर ऐसा, 
जिसकी दुम पर पैसा)

उत्तर: मोर

निमाड़ी पहेली
हरो माथणो, लाल पेट, 
रस पी लेव भर-भर पेट। 
(हरे मटके का लाल पेट, 
रस पी लो भर-भर पेट)

उत्तर: तरबूज

बुंदेली पहेली
एक लकड़ी की ऐसी कहानी, 
ऊमें लुको है मीठो पानी। 
(एक लकड़ी की ऐसी कहानी, 
उसमें छिपा है मीठा पानी)

उत्तर: गन्ना

बघेली पहेली
एक दिया 
सबतर उंजियार। 
(एक दीपक से 
चारों ओर उजियारा)

उत्तर: सूरज

मेरा न्याय

  • अपनी कक्षा से किन्हीं दो ऐसी समस्याओं को चुनिए जिन पर न्याय किया जाना है।

उत्तर: समस्या 1: दो बच्चों के बीच एक किताब को लेकर झगड़ा।
समस्या 2: किसी ने दूसरों के लंच बॉक्स से खाना चुरा लिया।

  • कक्षा को दो समूहों में विभाजित कीजिए।

उत्तर: समूह 1: किताब के झगड़े का नाटक करेगा।
समूह 2: लंच बॉक्स चोरी की समस्या का नाटक करेगा।

  • दोनों समूह एक समस्या लेकर उस पर विचार करेंगे।

उत्तर: समूह 1: वे सोचेंगे कि किताब को बारी-बारी से कैसे बाँटें और झगड़ा कैसे सुलझे।
समूह 2: वे सोचेंगे कि चोर को कैसे पकड़ें और उसे सही सलाह कैसे दें।

  • तत्पश्चात दोनों समूह एक-एक कर नाटक-मंचन के द्वारा समस्या को सुलझाएँगे।

उत्तर: समूह 1: एक नाटक करेगा जिसमें दो बच्चे किताब के लिए लड़ते हैं, फिर एक समझदार दोस्त आकर बारी-बारी से पढ़ने का फैसला सुनाएगा।
समूह 2: एक नाटक करेगा जिसमें चोर पकड़ा जाता है, और सभी मिलकर उसे माफी माँगने और भविष्य में ऐसा न करने की सलाह देंगे।

  • दर्शक समूह प्रतिपुष्टि प्रदान करेंगे।

उत्तर: दर्शक समूह अपनी राय देगा कि नाटक कैसे था और समस्या का समाधान सही था या नहीं।

उत्तर: 

शिक्षण-संकेत: शिक्षक बच्चों को समस्याओं का चुनाव करने, संवाद लिखने, नाटक करने और समूह बनाने में मदद करें। यह भी ध्यान रखें कि हर बच्चा इस गतिविधि में हिस्सा ले सके।
अतिरिक्त सुझाव:

  • शिक्षक बच्चों को प्रोत्साहित करें कि वे अपने नाटक में मज़ेदार और सिखाने वाली बातें जोड़ें।
  • प्रत्येक समूह को अपनी प्रस्तुति के बाद दूसरों से सुझाव लेने के लिए कहें।

1. किरण – Textbook Solutions

बातचीत के लिए

1. आपको कैसे पता चलता है कि सुबह हो गई है?
उत्तर: मुझे पता चलता है कि सुबह हो गई है जब सूरज उगता है और उसकी किरणें मेरे कमरे में चमकने लगती हैं। पक्षी चहचहाने लगते हैं, और आसमान में हल्की रोशनी फैल जाती है। घर के लोग उठने लगते हैं, और बाहर से सुबह की आवाज़ें आने लगती हैं।


2. ऐसे कौन-कौन से कार्य हैं जो सूर्य के प्रकाश के बिना संभव नहीं हैं?
उत्तर: सूर्य के प्रकाश के बिना कई काम मुश्किल हैं, जैसे:

  • पौधों का बढ़ना, क्योंकि उन्हें सूरज की रोशनी चाहिए।
  • बाहर खेलना, क्योंकि रोशनी में सब कुछ साफ दिखता है।
  • कपड़े सुखाना, क्योंकि सूरज की गर्मी से कपड़े जल्दी सूखते हैं।
  • दिन में पढ़ाई या काम करना, क्योंकि रोशनी से आँखों को आसानी होती है।


3. सुबह और शाम में से आपको कौन-सा समय अधिक अच्छा लगता है और क्यों?
उत्तर: मुझे सुबह का समय ज्यादा अच्छा लगता है। सुबह की हवा ठंडी और ताज़ा होती है। सूरज की नरम किरणें धरती को सुनहरा बना देती हैं और सब कुछ बहुत सुंदर लगता है। यह समय नई शुरुआत का होता है, इसलिए मन भी खुश और शांत रहता है। कभी-कभी मैं सुबह की सैर पर भी जाता/जाती हूँ, जिससे मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है।

पाठ से

सही उत्तर पर सूरज का चित्र  बनाइए –

उत्तर: 

सोचिए और लिखिए

1. किरन ने दूसरी दुनिया में जाने की बात क्यों कही होगी?
उत्तर: 
किरन ने दूसरी दुनिया में जाने की बात इसलिए कही होगी क्योंकि सूरज की किरणें पृथ्वी के एक हिस्से में रात होने पर दूसरे हिस्से में जाती हैं, जहाँ उस समय सुबह होती है। यह पृथ्वी के घूमने की वजह से होता है। किरन यह बताना चाहती है कि वह कभी सोती नहीं और हमेशा बच्चों को जगाने का काम करती है।


2. “वहाँ शाम हो जाती है तो 
लौट यहाँ फिर आती हूँ।” 
उपर्युक्त पंक्तियों में ‘वहाँ’ और ‘यहाँ’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुए हैं?
उत्तर: ‘वहाँ’ 
का मतलब है – धरती का दूसरा हिस्सा (दूसरी जगह)।
‘यहाँ’ 
का मतलब है – वह जगह जहाँ बच्ची रहती है।

3. प्रकृति हमें प्रकाश, फल, फूल, लकड़ी, वायु, पानी और बहुत कुछ देती है। हम प्रकृति के लिए क्या-क्या कर सकते हैं? सोचिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: हम प्रकृति के लिए निम्नलिखित काम कर सकते हैं:

  • पेड़ लगा सकते हैं।
  • पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए।
  • कूड़ा कूड़ेदान में डालना चाहिए।
  • जानवरों और पेड़ों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।
  • बिजली और पानी का सही उपयोग करना चाहिए।

4. कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि किरन बालिका के साथ दिन भर रहती है? उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए।
उत्तर: कविता की ये पंक्तियाँ बताती हैं कि किरन बालिका के साथ दिन भर रहती है:
“कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं।”

समझ और अनुभव

1. “कहने लगी किरन यह सुनकर 
मैं ही कब सो पाती हूँ। 
तुम्हें सुलाकर एक दूसरी 
दुनिया में मैं जाती हूँ।”
किरन कितना परिश्रम करती है, यहाँ से वहाँ नियत समय पर प्रतिदिन आती-जाती है। आपको अपने आस-पास कौन-कौन परिश्रम करते दिखाई देते हैं?

उत्तर: मेरे आस-पास कई लोग मेहनत करते हैं, जैसे:

  • माँ घर का सारा काम करती हैं – खाना बनाती हैं, सफाई करती हैं।
  • पापा रोज़ ऑफिस जाते हैं ताकि हमें अच्छी चीज़ें मिल सकें।
  • टीचर रोज़ हमें सिखाते हैं और हमारा होमवर्क भी जांचते हैं।
  • सफाई कर्मचारी सड़क और स्कूल को साफ़ करते हैं।
  • पुलिस वाले दिन-रात हमारी सुरक्षा करते हैं।

ये सब लोग बिना रुके मेहनत करते हैं, जैसे किरण करती है।

2. वे कौन-कौन से लोग हैं जो किरन की भाँति आपको जगाते हैं, आपके साथ खेलते हैं और प्रोत्साहित करते हैं? उनके लिए आप क्या-क्या करते हैं, यह भी लिखिए।
उत्तर: मेरे जीवन में कई लोग किरन की तरह हैं:

  • मम्मी: वे सुबह मुझे प्यार से जगाती हैं, मेरे साथ पढ़ाई में मदद करती हैं और मुझे अच्छे काम करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
    मैं उनके लिए: उनकी मदद करता हूँ, जैसे बर्तन रखना या घर के छोटे-मोटे काम करना।
  • दोस्त: वे मेरे साथ स्कूल में खेलते हैं और मेरा हौसला बढ़ाते हैं।
    मैं उनके लिए: उनके साथ अच्छा व्यवहार करता हूँ, अपनी चीजें बाँटता हूँ और उनकी मदद करता हूँ।
  • शिक्षक: वे मुझे नई चीजें सिखाते हैं और मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं।
    मैं उनके लिए: उनकी बात मानता हूँ, समय पर होमवर्क करता हूँ और कक्षा में ध्यान देता हूँ।

3. आपके घर या प्रदेश में सूर्य अथवा चाँद से जुड़े किसी एक त्योहार का पता लगाइए और उसके बारे में लिखिए।
उत्तर: मेरे प्रदेश में छठ पूजा एक बहुत खास त्योहार है, जो सूर्य से जुड़ा है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।

  • कब मनाया जाता है: यह कार्तिक महीने में छठे दिन मनाया जाता है।
  • कैसे मनाया जाता है: लोग सूर्य भगवान की पूजा करते हैं। सुबह और शाम को नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य (जल) चढ़ाते हैं। वे फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद चढ़ाते हैं।
  • महत्व: यह त्योहार सूर्य को धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है, क्योंकि सूर्य हमें प्रकाश, गर्मी और जीवन देता है। लोग अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
  • मज़ा: इस त्योहार में सब लोग मिलकर गीत गाते हैं, और घर में स्वादिष्ट खाना बनता है।

अनुमान और कल्पना

1. यदि किरन कभी न आए या न जाए तो क्या होगा?
उत्तर: 
अगर किरन न आए तो:

  • हमेशा अंधेरा रहेगा।
  • पौधे नहीं उगेंगे, क्योंकि उन्हें सूरज की रोशनी चाहिए।
  • खाना नहीं बनेगा।
  • ठंड बढ़ जाएगी।

अगर किरन न जाए तो:

  • हमेशा दिन रहेगा, रात नहीं होगी।
  • लोग सो नहीं पाएँगे।
  • दिन-रात का चक्र रुक जाएगा।
  • प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा।

2. यदि आपको किरन के साथ दूसरी दुनिया में जाने का अवसर मिले तो आप कहाँ जाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर: 
मैं जाना चाहूँगा:

  • एक ऐसी जगह जहाँ रंग-बिरंगे फूल और पेड़ हों।
  • जहाँ जानवर और पक्षी खुशी से रहते हों।

क्यों जाना चाहूँगा:

  • मुझे प्रकृति से प्यार है।
  • वहाँ के बच्चों के साथ खेलना चाहूँगा।
  • उनके गीत सुनना और नई चीजें सीखना चाहूँगा।
  • किरन की रोशनी में वह जगह बहुत सुंदर लगेगी।

भाषा की बात

1. “कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं।”
‘शाम’ के लिए हम संध्या, साँझ, सायं जैसे शब्दों का भी प्रयोग करते हैं। मिलते-जुलते या समान अर्थ वाले ऐसे शब्दों को समानार्थी शब्द कहते हैं।
नीचे दिए गए शब्दों के समान अर्थ वाले शब्दों पर घेरा बनाइए –

उत्तर:


2. दिए गए रिक्त स्थानों की पूर्ति रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्दों से कीजिए –


उत्तर: 


3. “चिड़ियाँ गाती गीत चलीं
हवा चली, खिल उठे पेड़ सब।”
इन पंक्तियों को सामान्य बातचीत के रूप में लिखा जाए तो ऐसे लिखेंगे –
“चिड़ियाँ गीत गाती हुई उड़ रही थीं, हवा चलने लगी, हवा के चलने से पेड़-पौधों की पत्तियाँ भी हिलने लगीं जैसे कि वे प्रसन्नता से झूम रही हों।”
आप भी सामान्य ढंग से कही गई बात को कविता का रूप दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, इन पंक्तियों को पढ़िए –
“चंद्रमा चमक रहा है, तारे भी चमक रहे हैं, आकाश में प्रकाश ही प्रकाश हो गया है।”
आइए, इन पंक्तियों को कविता का रूप देने का प्रयास करते हैं –
“चंदा चमका तारे चमके चमका सारा अंबर”
आप भी सामान्य रूप से कही गई किसी बात को कविता के रूप में लिखने का प्रयास कीजिए।

उत्तर: सामान्य बातचीत में कही गई बात:
“सूरज उग आया है, उसकी रोशनी से धरती चमक रही है। पक्षी चहचहा रहे हैं और बच्चे खेलने निकल पड़े हैं।”
कविता के रूप में:
सूरज निकला, धरती हँसी
पंछी बोले, बजी खुशी।
बच्चे निकले खेल रचाने
हर कोना मुस्काने लगा।

आपकी बातचीत

कविता में बालिका, किरन से बात कर रही है। यदि आपको भी नीचे दिए गए विकल्पों में से किसी से बात करने का अवसर मिले तो आप किससे बात करना चाहेंगे? अपने चुने गए विकल्प के सामने सही का चिह्न (√) लगाइए –

  • अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आप इनसे क्या बातचीत करेंगे?
  • अपने सहपाठियों की सहायता से इस बातचीत का अभिनय भी कीजिए।

उत्तर: 

चर्चा: मैं चाँद से क्या बातचीत करूँगा?

  • चाँद इतना सुंदर और चमकीला कैसे दिखता है?
  • क्या वह सूरज की रोशनी से चमकता है?
  • चाँद पर रहना कैसा लगता है?
  • वह हर रात अपना आकार क्यों बदलता है?
  • चाँद से कहानियाँ सुनाने को कहूँगा।

अभिनय:

  • भूमिकाएँ: एक मैं (बालक/बालिका), दूसरा चाँद।
  • दृश्य: रात में छत पर चाँद से बात।
  • संवाद:
    • मैं: “चाँद, तुम इतने चमकीले कैसे हो?”
    • चाँद: “मैं सूरज की रोशनी उधार लेता हूँ!”
    • मैं: “तुम हर रात बदलते क्यों हो?”
    • चाँद: “यह मेरा खेल है, नया रूप दिखाता हूँ!”
  • प्रस्तुति: कक्षा में नाटक, सहपाठी तारे या बादल बनें।
  • मज़ा: “चंदा मामा दूर के…” गीत गाकर अभिनय को और मज़ेदार बनाएँ।

इसे भी जानिए

हमारी धरती गेंद की तरह गोल है। वह अपनी धुरी पर घूमती हुई सूर्य की परिक्रमा करती रहती है। सूर्य निरंतर प्रकाशित रहता है। पृथ्वी का जो भाग सूर्य की ओर आ जाता है, वहाँ दिन हो जाता है। चित्र में यदि बत्ती को सूर्य मान लें और गोलक को पृथ्वी तो प्रकाश गोलक के जिस भाग पर पड़ रहा है, वहाँ दिन है और दूसरे अँधेरे भाग में रात है।
अधिक जानने के लिए आप निम्न वीडियो लिंक पर भी जा सकते हैं- 
https://www.youtube.com/watch?v=NoCXddI2sg8&t=1s 
स्रोत – वीडियो – रात और दिन, एन.सी.ई.आर.टी. ऑफिसियल यूट्यूब चैनल

उत्तर: विद्यार्थी वीडियो देखकर स्वयं समझें और अपने शब्दों में बताने का प्रयास करें।

पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत

आपको ज्ञात ही होगा कि सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता से आप सुनीता विलियम्स के बारे में पुस्तकालय एवं अन्य स्रोतों से जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं जानकारी एकत्र करें।

मुख्य बिंदु:

  • सुनीता विलियम्स एक भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं।
  • उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका में हुआ।
  • उन्होंने अमेरिकी नौसेना में पायलट के रूप में कार्य किया।
  • बाद में वे नासा की अंतरिक्ष यात्री बन गईं।
  • वह अंतरिक्ष में सबसे ज़्यादा समय बिताने वाली महिलाओं में से एक हैं।
  • उन्होंने अंतरिक्ष में चहलकदमी (spacewalk) भी की है।
  • उन्हें कुत्तों से बहुत प्यार है और वे दौड़ने की शौकीन हैं।
  • उन्होंने अपने अंतरिक्ष मिशन में भारत का झंडा और भगवद्गीता भी साथ रखा था।