02. गोल – Textbook Solution

पाठ से

​मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉक्की नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?

  • वे अत्यंत क्रोधी थे।
  • वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
  • उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
  • वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

उत्तर: वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉक्की का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?

  • उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
  • उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
  • हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
  • उनकी खेल भावना के कारण

उत्तर: उनके हॉक्की खेलने के विशेष कौशल के कारण


(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मेजर ध्यानचंद की सफलता का मूल उनकी उत्कृष्ट खेल भावना थी। यह कई उदाहरणों से स्पष्ट होता है:

  • उन्होंने हिंसा के बदले गोल करके बदला लिया।
  • वे मानते थे कि खेल में गुस्सा अच्छा नहीं।
  • उन्होंने सफलता के मंत्र में खेल भावना को शामिल किया।
  • वे अक्सर गोल का श्रेय साथी खिलाड़ियों को देते थे।
  • उनका मानना था कि जीत-हार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की होती है।

इसी खेल भावना के कारण लोगों ने उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा और वे दुनिया भर के खेल प्रेमियों के चहेते बने। उनकी यह भावना उनके कौशल और व्यक्तित्व का अभिन्न अंग थी।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

(क) “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।”
उत्तर:  यह वाक्य यह समझाता है कि जो व्यक्ति गलत काम करता है, वह हमेशा इस चिंता में रहता है कि उसके साथ भी वैसा ही बुरा व्यवहार होगा।

(ख) “मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूं ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”
उत्तर:  यह पंक्ति बताती है कि मेजर ध्यानचंद का मानना था कि खेल में व्यक्तिगत लाभ से ज्यादा टीम की भावना और सहयोग महत्वपूर्ण है। यही कारण था कि उन्होंने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।

सोच-विचार के लिए

संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
उत्तर:  ध्यानचंद की सफलता का रहस्य उनकी लगन, साधना, और खेल भावना थी। उन्होंने खेल को सही भावना से खेला और हमेशा अपनी टीम को महत्व दिया।

(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
उत्तर:  ध्यानचंद हमेशा यह कोशिश करते थे कि वे गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दें ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। उन्होंने हमेशा टीम को प्राथमिकता दी और अपने व्यक्तिगत लाभ से पहले टीम की जीत को महत्व दिया।

संस्मरण की रचना

“उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।”
इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक आपसे यानी पाठक से अपनी यादों को साझा कर रहा है। इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देती हैं।

(क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर: 

  • यह संस्मरण व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है।
  • इसमें खेल भावना और अनुशासन का महत्व बताया गया है।
  • लेखक की सरलता और टीम भावना को दर्शाता है।
  • प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: 
विद्यार्थी के स्वयं करने योग्य।

शब्दों के जोड़े, निम्न प्रकार के

(क) “जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।”
इस वाक्य में ‘जैसे-जैसे’ और ‘वैसे-वैसे’ शब्दों के जोड़े हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार उपयोग में लाया गया है। ऐसे जोड़ों को ‘शब्द-युग्म’ कहते हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर: 

  1. धीरे-धीरे
  2. धीरे-धीरे
  3. छोटे-छोटे
  4. बड़े-बड़े
  5. साफ-साफ

(ख) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएं होती रहती हैं।”
इस वाक्य में भी आपको दो शब्द-युग्म दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन शब्द-युग्मों के दोनों शब्द आपस में मिलते-जुलते नहीं हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द आपस में मिलते-जुलते न हों।
उत्तर: 

  1. आना-जाना
  2. खाना-पीना
  3. उठना-बैठना
  4. सोना-जागना
  5. हंसना-रोना

(ग) हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बड़े मुझे घेरे लेते हैं।

इन वाक्यों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खिंची है, उन्हें ध्यान से पढ़िए एवं इन शब्दों को योजक की सहायता से भी लिख सकते हैं, जैसे— हार-जीत, बच्चे-बड़े आदि।
आप नीचे दिए गए शब्दों को योजक की सहायता से लिखिए—

  • अच्छा या बुरा
  • छोटा या बड़ा
  • अमीर या गरीब
  • उत्तर और दक्षिण
  • गुरु और शिष्य
  • अमृत या विष

उत्तर: शब्दों का योजक द्वारा संधि रूप:

  • अच्छा-बुरा
  • छोटा-बड़ा
  • अमीर-गरीब
  • उत्तर-दक्षिण
  • गुरु-शिष्य
  • अमृत-विष

बात पर बल देना

“मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।”
“मैंने तो अपना बदला ले लिया है।”
इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? ध्यान दीजिए और बताइए। सही पहचाना! दूसरे वाक्य में एक शब्द कम है। उस एक शब्द के न होने से वाक्य के अर्थ में भी थोड़ा अंतर आ गया है।
हम अपनी बात पर बल देने के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे— ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ आदि। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए। ध्यान दीजिए कि यदि उन वाक्यों में ये शब्द न होते तो उनके अर्थ पर इसका क्या प्रभाव पड़ता।
उत्तर: बात पर बल देने वाले शब्द ‘निपात’ कहलाते हैं।

  • मेरे इतना कहते ही खिलाड़ी घबरा गया।
  • अब हर समय मुझे ही देखते रहना ।
  • अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता ।
  • तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग ।
  • उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
  • मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।
  • लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।

यदि वाक्यों में ‘ही’ ‘भी’ ‘तो’ आदि शब्दों का प्रयोग न किया जाए तो ये सामान्य वाक्य का रूप ले लेते हैं और ये शब्द वाक्य को प्रभावी बनाते हैं।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?
उत्तर: यह छात्रों के विचार पर निर्भर करता है। कुछ छात्र कह सकते हैं कि वे बदला लेते और कुछ कह सकते हैं कि वे नहीं लेते।

(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?
उत्तर: यह छात्रों की पसंद पर निर्भर करता है। वे अपने पसंदीदा खेल और खिलाड़ी का नाम और कारण बता सकते हैं।

समाचार-पत्र से

(क) क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए।
उत्तर:  खेल के दो विशेष नियम

  1. गेंद को शरीर के किसी भी अंग से न छूना, न रोकना।
  2. गेंद को हवाई शॉट न मारना और न उसे हवा में शॉट खेलकर साथी खिलाड़ी को पास देना।

बाकी लकड़ी से आप गेंद को रोक सकते हैं या हिट कर सकते हैं। आगे जैसा कि बता चुके हैं, जो दल बीच की रेखा को पार करके विरोधी दल के क्षेत्र में अधिक से अधिक दबाव या प्रवेश बनाए रखता है, वह विजयी होता है।

(ख) मान लीजिए कि आप एक खेल-संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं। अपने समूह के साथ मिलकर कक्षा में उस खेल का आँखों देखा प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत- इस कार्य में आप आकाशवाणी या दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले खेल-प्रसारणों की कमेंट्री की शैली का उपयोग कर सकते हैं। बारी-बारी से प्रत्येक समूह कक्षा के सामने डेस्क या कुर्सियों पर बैठ जाएगा और पाँच मिनट के लिए किसी खेल के सजीव प्रसारण की कमेंट्री का अभिनय करेगा।)

उत्तर:  छात्र स्वयं करें

संदर्भ के लिए:
परिस्थिति: मान लीजिए कि मैं एक खेल-संवाददाता हूँ और क्रिकेट मैच का आँखों देखा हाल प्रस्तुत कर रहा हूँ।

कमेंट्री:
“नमस्कार, दोस्तों! मैं हूँ आपका खेल-संवाददाता और हम इस समय लाइव जुड़े हैं एक रोमांचक क्रिकेट मैच से! मैदान में जबरदस्त उत्साह है, दर्शक तालियों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। और यह रहा अगला गेंद… बल्लेबाज ने जोरदार शॉट मारा… और यह गया सीधा बाउंड्री लाइन के पार… चार रन!!! दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। गेंदबाज अगली गेंद के लिए तैयार… यह रही गेंद… और आउट!!! कैच आउट हो गया बल्लेबाज! शानदार फील्डिंग!! अब देखते हैं कि नया बल्लेबाज टीम को कैसे आगे बढ़ाता है।”

01. मातृभूमि – Textbook Solutions

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा बनाइए-

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
(i) चरण
(ii) वंशी
(iii) हिमालय
(iv) सिंधु
उत्तर:  सिंधु

सिंधु शब्द हिंद महासागर के लिए प्रयुक्त हुआ है क्योंकि यह प्राचीन काल से ही समुद्र के संदर्भ में इस्तेमाल होता रहा है।

(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से-
(i) भारत की प्रशंसा की गई है।
(ii) भारत के महापुरूषों की जय की गई है।
(iii) भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
(iv) भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।
उत्तर:  भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।

भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है क्योंकि कविता में भारत की नदियाँ, पर्वत, वन और अन्य प्राकृतिक तत्वों की महिमा का गुणगान किया गया है।


(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: (1) हिंद महासागर का प्राचीन नाम ‘सिंधु महासागर’ था जो प्राचीन भारतीयों द्वारा रखा गया था। भारत के नाम पर इस सागर का नाम ‘हिंद महासागर’ रखा गया। कविता में सोहनलाल द्विवेदी ने हिंद महासागर से अपनत्व के कारण इसे सिंधु नाम से पुकारा इसलिए ‘सिंधु’ शब्द का विकल्प, चयन करना उचित होगा।
(2) ‘मातृभूमि’ कविता में कवि सोहनलाल जी ने भारत के पर्वतों, नदियों, वृक्षों, मलय, पवन, घनी अमराइयों आदि की चर्चा अधिक की है इसलिए भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। विकल्प का चयन उचित है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर: 

  • हिमालय – भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
  • त्रिवेणी – तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
  • मलय पवन – दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
  • सिंधु – समुद्र, एक नदी का नाम।
  • गंगा-यमुना – भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
  • रघुपति – श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
  • श्रीकृष्ण – वसुदेव के पुत्र वासुदेव।
  • सीता – जनक की पुत्री, जानकी।
  • गीता – एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवदगीता’।
  • गौतम बुद्ध – एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी|”
उत्तर:  कवि ने भारत को ‘युद्ध भूमि मेरी’ कहा क्योंकि भारत की भूमि सदा संघर्ष की भूमि रही है यह हमें हर तरह के अभाव, अज्ञान और दुख से लड़ना सिखाती है। भारत पर कितने ही शासकों ने शासन किया लेकिन भारतीयों ने अपनी सभ्यता एवं संस्कृति पर आँच नहीं आने दी। कवि भारत को बुद्धभूमि कहा क्योंकि महात्मा बुद्ध ने भारतीयों को प्रेम, दया एवं अहिंसा का संदेश दिया ताकि भारत में अखंडता न रहे।
आत्मसम्मान व आंतरिक लगाव के कारण कवि इसे मातृभूमि की संज्ञा देता है। अंत में कवि इस पावन धरती को जन्मभूमि कहा क्योंकि वह इसी धरती पर जन्मा है और उसे भारत की गौरवमयी धरती पर जन्म लेने पर अत्यधिक गर्व है।

सोच-विचार के लिए

(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(i) कोयल कहाँ रहती है?
उत्तर: कोयल अमराइयों (आम के बगीचों) में रहती है, जहाँ वह मधुर गीत गाती है।

(ii) तन-मन कौन सँवारती है?
उत्तर: मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित पवन तन-मन को सँवारती है।

(iii) झरने कहाँ से झरते हैं?
उत्तर:  झरने पहाड़ियों से झरते हैं, जहाँ वे कल-कल करते हुए बहते हैं।

(iv) श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई थी।

(v) गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
उत्तर: गौतम बुद्ध ने दया, प्रेम और अहिसा का संदेश देकर भारत का यश बढ़ाया।


(ख) “नदियाँ लहर रही हैं 
पग पग छहर रही हैं?
‘लहर’ का अर्थ होता है— पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश
‘छहर’ का अर्थ होता है— बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना

कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए-

(i) कहाँ-कहाँ छटा छहर रही हैं?
उत्तर:
 प्रयागराज में जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का मिलन होता है, उसके आस-पास दूर-दूर तक लहरों अर्थात धाराएँ छहर रही हैं अर्थात उनकी सुंदरता चारों ओर छिटककर, बिखरकर मन – मोह रही है

(ii) किसका पानी लहर रहा है?
उत्तर: 
 प्रयागराज में जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का पानी लहरा – लहरा कर बह रहा है। ऐसा लगता है कि मानो ये तीनों नदियाँ मिलकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रही हैं।

कविता की रचना

“गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैंग
‘यमुन’ शब्द यहाँ ‘यमुना’ नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इस प्रकार से शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। यदि आप कविता को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिखिए। जैसे सबसे ऊपर इस कविता का एक शीर्षक है।

उत्तर: “नीचे चरण टेल झुक,
नित सिंधु झूमता है।”
‘सिंधु’ शब्द यहाँ ‘हिन्द महासागर’ के लिए आया है।
अमराइयाँ घनी हैं 
कोयल पुकारती है,
‘अमराइयाँ’ शब्द यहाँ ‘आम के पेड़’ के लिए आया है।
बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।
‘मलय’ शब्द यहाँ ‘सुगंधित’ लिए आया है।
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।
‘पुनीत’ शब्द यहाँ ‘पवित्र’ अथवा ‘शुद्ध’ के लिए आया है।
गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
‘जिसका’ शब्द यहाँ ‘भारत देश के लिए आया है।

मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए—

उत्तर:

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) “अमराइयाँ’ घनी हैं
कोयल पुकारती है”
कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
उत्तर: 
वसंत श्रतु के आने से वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि कोयल प्रसन्न होकर मधुर गीत गाकर अपने साथी व्र अन्य कोयल साथियों को पुकार रही होगी। कोयल मीठी और लयबद्ध स्वर में पुकार रही होगी।

(ख) “बहती मलय पवन है,
तन मन सँवारती है”
पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
उत्तर: 
पवन सभी जीव-जंतुओं और मानव का तन-मन सँचारती हैं। मलय पवन अपनी शीतल हवा और सुगंध से सभी औवों का शारीरिक और मानसिक ताजगी प्रदान करती हैं।

शब्दों के रूप

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-
“जगमग छटा निराली
पग पग छहर रही हैं।”

इन पंक्तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए-

  1. घर-घर: ___________________
  2. बाल-बाल: ___________________
  3. साँस-साँस:  ___________________
  4. देश-देश:  ___________________
  5. पर्वत-पर्वत:  ___________________

उत्तर: 

  1. घर-घर: प्रत्येक घर
  2. बाल-बाल: हर बाल (सही सलामत)
  3. साँस-साँस: हर साँस
  4. देश-देश: हर देश
  5. पर्वत-पर्वत: हर पर्वत

(ख) “वह युद्ध-भूमि मेरी, 
वह बुद्ध-भूमि मेरी”
कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए-
(संकेत — तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)
उत्तर: 

थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-
“जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।”
‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा -घड़ी।
उत्तर: 
चाँद-चाँदी, घट-घाट, चना-चीन, मेला – मैला, दान – दिन

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए।
(संकेत— प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)
उत्तर: मैं भारत के राजस्थान राज्य में रहता हूँ। यहाँ की मरुस्थलीय सुंदरता और रेत के टीलों की अद्भुत छटा देखते ही बनती है। यहाँ का खान-पान मुख्यतः दाल-बाटी-चूरमा और गट्टे की सब्जी है। राजस्थान का जलवायु गर्मी में बहुत तप्त और सर्दियों में ठंडी रहती है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध स्थान जयपुर का हवा महल और जैसलमेर का सोनार किला है।

(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?
उत्तर: मेरे मित्र का नाम रोहन है। उसकी सबसे अच्छी बात यह है कि वह हमेशा हर किसी की मदद करने को तैयार रहता है। वह पढ़ाई में बहुत होशियार है और हर मुश्किल विषय को आसानी से समझा लेता है।

वंशी-से

श्रीकृष्ण ने सुनाई
वंशी पुनीत गीता

‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एक ‘वाद्य’ यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं। इनके नाम शब्द-जाल से खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।

उत्तर: 

आज की पहेली

नीचे दिए गए अक्षरों को मिलाकर कोई सार्थक शब्द बनाइए। अक्षरों को आगे-पीछे किया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से किसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते हैं। पहला शब्द हमने आपके लिए पहले ही बना दिया है।
उत्तर: 

साझी समझ

आपने ‘मातृभूमि’ कविता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।
उत्तर: विविधता:
 ‘मातृभूमि’ कवित में भूमि को अनेक नामों से संबोधित किया गया है–स्वर्ण भूमि जन्म भूमि, कर्म भूमि, धर्म भूमि आदि।
समानता: दोनों कविताओं में भूमि के प्रति सम्मान का भाव प्रकट किया गया है।