Class 6 Social Science Chapter 4 Question Answer in Hindi
इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Question Answer
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 4 के प्रश्न उत्तर (in Text)
पृष्ठ 59
प्रश्न 1.
हम ऐतिहासिक काल की गणना किस प्रकार करते हैं?
उत्तर:
हम ऐतिहासिक काल की गणना ईसा मसीह के जन्म के समय से करते हैं। ईसा के जन्म के बाद के वर्षों की गणना अंग्रेजी में ए.डी. से किया जाता रहा है परन्तु अब विश्वभर में इसे अंग्रेजी में कॉमन ऐरा अथवा सी.ई.. कहा जाता है। उदाहरण के लिए भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ। इसे हम 1947 ई., सन् 1947 अथवा 1947 सी.ई. लिख सकते हैं।
इसी प्रकार ईसा मसीह की पारंपरिक तिथि से पूर्व के वर्षों की गणना अवरोही (उलटे) क्रम में की जाती है। इसे बी.सी. या बी. सी. ई. या स. सं.पू. से इंगित किया जाता है। उदाहरण के लिए 560 बी.सी.ई (सामान्य संवत पूर्व) गौतम बुद्ध के जन्म की अनुमानित तिथि है। इसका अर्थ है- गौतम बुद्ध या जन्म 560 + 2024 – 1 = 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।
प्रश्न 2.
इतिहास को समझने के लिए विभिन्न स्रोत हमारी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?
उत्तर:
हम ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विभिन्न स्रोतों से जानकारी एकत्रित करते हैं। जब इतिहासकार 1500 वर्ष पूर्व के किसी राजा या रानी, प्राचीन स्मारक, युद्ध अथवा व्यापार की कुछ वस्तुओं के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करते हैं, तो वे बड़े ध्यान से अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार इतिहासकार जिस कालखंड का अध्ययन कर रहे होते हैं, वे उसके इतिहास का पुनर्निमाण करने का प्रयास करते हैं। इतिहासकारों के साथ-साथ ही पुरातत्व विज्ञानी मानव, पौधों एवं पशुओं द्वारा अपने द्वारा छोड़े गए अवशेषों का उत्खनन करके अतीत का अध्ययन करते हैं। इसी प्रकार पुरालेख शास्त्री प्राचीन अभिलेखों को पढ़कर, मानव विज्ञानी मानव समाजों व संस्कृतियों का अध्ययन कर तथा जीवाश्म विज्ञानी जीवाश्म के रूप में करोड़ों वर्ष पूर्व के पेड़ों, पशुओं और मानवों के अवशेषों का अध्ययन कर तथा भू-विज्ञानी पृथ्वी के भौतिक स्वरूपों का अध्ययन कर इतिहास को समझने में अपना योगदान देते हैं।
प्रश्न 3.
आदिमानव किस प्रकार रहते थे?
उत्तर:
आदिमानव एक दूसरे की सहायता करने के लिए टोलियों अथवा समूहों में रहते थे। वे मुख्यतः आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे तथा भोजन और आश्रय की निरंतर खोज करते रहते थे। यह समूह अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
उन्होंने अग्नि का उपयोग किया तथा पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियों एवं ब्लेड्स, नुकीले तीरों एवं अन्य उपकरणों का निर्माण कर अपने जीवन को सरल बनाया। समय के साथ, आदि मानवों ने पत्थर एवं मनकों की माला, पशुओं के दांतों के पेंडेंट आदि जैसे सधारण आभूषण बना लिये थे तथा कभी-कभी वे दूसरे समूहों के साथ इनका आदान- प्रदान करने लगे।
पृष्ठ 60
प्रश्न 1.
आपको क्या लगता है, अतीत को समझने में हमें वर्तमान विश्व को समझने में कैसे सहायता मिलेगी?
उत्तर:
इतिहास अतीत एवं वर्तमान के मध्य एक अनवरत संवाद है। यह आज के समाज और कल (बीते समय) के समाज के मध्य संवाद है। अतः हम अतीत के आलोक में ही वर्तमान समाज को पूर्णत: समझ सकते हैं।
पृष्ठ 67
प्रश्न 1.
क्या आपने कभी अपने घर अथवा आस-पास पुराने सिक्कों, पुस्तकों, वस्त्रों, आभूषणों अथवा बर्तनों को देखा है? इन वस्तुओं अथवा पुराने घरों एवं भवनों से हम किस प्रकार की सूचनाएं एकत्र कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, हमने अपने घर पुराने सिक्कों, पुस्तकों, वस्त्रों, आभूषणों अथवा बर्तनों को देखा है। इन वस्तुओं अथवा पुराने घरों एवं भवनों से हम निम्न प्रकार की सूचनाएं एकत्र कर सकते हैं।
हम पुराने सिक्कों, पुस्तकों, वस्त्रों, आभूषणों एवं बर्तनों से के हैं और उस समय का शासक कौन था। पुस्तकों से हम हम ये सूचनाएं एकत्र कर सकते हैं कि सिक्के किस समय प्राचीन समय के जीवन, रहन-सहन, खान-पान, आदि की सूचनाएं एकत्र कर सकते हैं तथा पुराने घरों एवं भवनों से हम यह सूचनाएं एकत्र कर सकते हैं कि उस समय लोग किस प्रकार के घरों में निवास करते थे, घर बनाने की क्या तकनीकें थी, आदि।
पृष्ठ 68
प्रश्न 1.
पृष्ठ 69 पर इतिहास के स्त्रोतों से संबंधित कुछ चित्र दिए गए हैं। ये वस्तुएं कौन-कौन सी हैं एवं आपके अनुसार क्या दर्शाती हैं? चित्र के सम्मुख दिए गए स्थान में वस्तु से संबंधित प्राप्त जानकारी को लिखिए।
उत्तर:
[नोट : विद्यार्थी स्वयं हल करें।]
पृष्ठ 70
प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 70 पर दिए गए चित्र में शैलाश्रय के आरंभिक मानव से संबंधित कुछ गतिविधियों को देखिए। आप इनमें से किस-किस गतिविधि को पहचान सकते हैं? प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
इस शैलाश्रय में सबसे ऊपर एक महिला शैल चित्र बना रही है जिसमें शिकार करते हुए आदिमानवों के प्रतीक व आकृतियां हैं तथा दूसरे चित्र में पशुओं के चित्र हैं। बाएं तरफ ऊपर की गतिविधि में अग्नि को दिखाया गया है। संभवतः इसमें शिकार में प्राप्त मांस को भूना जा रहा है। नीचे की गतिविधि में ऐसा लग रहा है कि शिकार कर लाए गए पशु से मांस निकाला जा रहा है। दायीं तरफ की एक गतिविधि में दो बालक बैठे हुए फल व अन्य खाद्य वस्तु खा रहे हैं तथा दायीं तरफ संभवतः पानी पिलाया जा रहा है।
पृष्ठ 71
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 72 पर दिए गए चित्र का अवलोकन कीजिए।
प्रश्न 1.
यह कुछ सहस्त्राब्दी पूर्व के कृषक समुदाय की गतिविधियों को प्रदर्शित करता है। उन गतिविधियों को सूचीबद्ध कीजिए जिनकी आप पहचान कर सकते हैं।
उत्तर:
- दांयी ओर सबसे ऊपर कृषक समुदाय के निवासियों की झोंपड़ियां हैं।
- एक कृषक कुल्हाड़ी जैसे हथियार से मोटी लकड़ी को छोटे-छोटे पतले टुकड़े बना रहा है ताकि वे चूल्हें में जलाने के काम आ सकें।
- घरों के बाहर दो बच्चे कोई खेल खेल रहे हैं।
- महिला चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन में कुछ पका रही है तथा एक बर्तन में संभवतः आटा गूंथ रही है।
- एक पुरुष कंधे पर हथौड़ा रखे हुए कुत्ता तथा भेड़ों को ले जा रहा था। भेड़ चारा खा रही हैं।
- बायीं तरफ मध्य में कोई खड़ी फसल काटी जा रही हैं तथा एक महिला व एक पुरुष कटी फसल के गट्ठर बनाकर सिर पर रखकर ले जा रहे हैं।
- बायीं तरफ ऊपर पालतू पशु गाय आदि चारा खा रहे हैं।
इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत कक्षा 6 प्रश्न उत्तर (Exercise)
प्रश्न 1.
एक परियोजना के रूप में अपने आस-पास उपलब्ध इतिहास के स्रोतों का उपयोग करते हुए अपने परिवार (यदि आप गाँव में रहते हैं, तो गाँव) का इतिहास लिखिए। परियोजना के लिए अपने शिक्षक से मार्गदर्शन हेतु निवेदन कीजिए।
उत्तर:
अपने परिवार या गाँव का इतिहास शिक्षक की सहायता लेकर विद्यार्थी स्वयं लिखें।
प्रश्न 2.
क्या हम इतिहासकारों की तुलना जासूसों से कर सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
उत्तर:
हाँ, हम इतिहासकारों की तुलना जासूसों से कर सकते हैं क्योंकि जिस प्रकार जासूस विभिन्न स्थानों की छिपी हुई जानकारी लाकर देते हैं, उसी प्रकार इतिहासकार विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर किसी देश के अतीत के इतिहास को उजागर करते हैं।
प्रश्न 3.
तिथियों के साथ कुछ अभ्यास- (i) समय रेखा पर निम्नलिखित तिथियों को कालक्रमानुसार लगाइए 323 सा.सं., 323 सा.सं.पू., 100 सा.सं., 100 सा.सं.पू., 1900 सा.सं.पू., 1090 सा.सं., 2024 सा.सं.
उत्तर:
(ii) यदि सम्राट चन्द्रगुप्त का जन्म 320 सा.सं.पू. में हुआ तो बताइए उनका सम्बन्ध किस शताब्दी से था? उनका जन्म बुद्ध के जन्म से कितने वर्ष पश्चात् हुआ?
उत्तर:
सम्राट चन्द्रगुप्त का जन्म चौथी शताब्दी सा.सं.पू. में हुआ, बुद्ध का जन्म 560 सां.सं.पू. हुआ और सम्राट चन्द्रगुप्त का जन्म 320 सा.सं.पू. में हुआ। अतः सम्राट चन्द्रगुप्त का जन्म बुद्ध के जन्म से (560-320) 240 वर्ष पश्चात् हुआ।
(iii) झांसी की रानी का जन्म 1828 सा.सं. में हुआ। उनका सम्बन्ध किस शताब्दी से है। उनका जन्म भारत की स्वतंत्रता से कितने वर्ष पूर्व हुआ?
उत्तर:
झांसी की रानी के जन्म का सम्बन्ध 19वीं शताब्दी से है। उनका जन्म भारत की स्वतंत्रता (1947) से 119 वर्ष पहले हुआ।
(iv) 12000 वर्ष पूर्व’ को तिथि के रूप में बदलिए।
उत्तर:
12000 वर्ष पूर्व से अभिप्राय है, आज से 12000 वर्ष पहले आज 2024 का वर्ष है तो 12000 में से 2024 घटायेंगे तथा उसमें 1 जोड़ेंगे। इस प्रकार 12000 2024 9977 सा.सं. पू. आयेगा। अतः 12000 वर्ष पूर्व की तिथि होगी 9977 सा.सं.पू.।
प्रश्न 4.
किसी निकटतम संग्रहालय के भ्रमण की योजना बनाइए । संग्रहालय की प्रदर्शनियों के विषय में पहले से कुछ जानकारी जुटा लीजिए। इस भ्रमण के दौरान टिप्पणियां तैयार कीजिए। भ्रमण के पश्चात् एक संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए और उसमें भ्रमण से जुड़ी स्मृतियों व रोचक बातों या घटनाओं को रेखांकित कीजिए।
उत्तर:
इसे विद्यार्थी स्वयं भ्रमण की योजना बनाकर किसी संग्रहालय का भ्रमण करें और उस पर अपनी संक्षिप्त रिपोर्ट लिखें।
प्रश्न 5.
अपने विद्यालय में किसी पुरातत्व विज्ञानी अथवा इतिहासकार को आमंत्रित कीजिए और उनसे स्थानीय इतिहास एवं उसे जानना क्यों महत्त्वपूर्ण है, इस विषय में व्याख्यान देने का आग्रह कीजिए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने कक्षाध्यापक की सहायता से यह कार्य करें।
पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति Class 6 Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न
1. पृथ्वी के भौतिक स्वरूपों का अध्ययन करते हैं—
(अ) जीवाश्म विज्ञानी
(ब) भू-विज्ञानी
(स) मानव विज्ञानी
(द) पुरातत्व विज्ञानी
उत्तर:
(ब) भू-विज्ञानी
2. मानव समाज एवं संस्कृतियों का अतीत से लेकर वर्तमान तक अध्ययन करते हैं-
(अ) पुरातत्व विज्ञानी
(ब) भू-विज्ञानी
(स) मानव विज्ञानी
(द) जीवाश्म विज्ञानी
उत्तर:
(स) मानव विज्ञानी
3. आज के समय में समय की गणना के लिए विश्वभर में सामान्यतः किस तिथि पत्र का उपयोग होता है?
(अ) ग्रेगोरियन तिथि पत्र
(ब) मुस्लिम तिथि पत्र
(स) चीनी तिथि पत्र
(द) हिन्दू तिथि पत्र
उत्तर:
(अ) ग्रेगोरियन तिथि पत्र
4. पश्चिम में सामान्यतः किसके जन्म वर्ष से कैलेंडर का आरंभ माना जाता है-
(अ) सुकरात
(ब) ईसा मसीह
(स) प्लेटो
(द) अरस्तू
उत्तर:
(ब) ईसा मसीह
5. ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में जानकारी एकत्र करने का मौखिक स्रोत है-
(अ) लोक साहित्य
(ब) कविता नाटक
(स) वैज्ञानिक व तकनीकी लेख
(द) ऐतिहासिक लेख
उत्तर:
(अ) लोक साहित्य
6. निम्न में कौनसा पुरातात्विक स्त्रोत नहीं है.-
(अ) मूर्तिकला
(ब) उत्खनन की मूर्तियां
(स) उत्खनन के मृदभांड
(द) स्मारक
उत्तर:
(अ) मूर्तिकला
7. होमोसेपियंस (मानव) पृथ्वी पर रह रहे हैं-
(अ) 10 लाख वर्ष पूर्व से
(ब) 1 करोड़ वर्ष पूर्व से
(स) 3 लाख वर्ष पूर्व से
(द) 15 लाख वर्ष पूर्व से
उत्तर:
(स) 3 लाख वर्ष पूर्व से
8. आदिमानव ने अग्नि का आविष्कार किया-
(अ) 3 लाख वर्ष पूर्व
(ब) 6500 वर्ष पूर्व
(स) 15 लाख वर्ष पूर्व
(द) 10 लाख वर्ष पूर्व
उत्तर:
(द) 10 लाख वर्ष पूर्व
9. आदिमानव रहते थे-
(अ) गुफाओं में
(ब) झोंपड़ियों में
(स) कच्ची ईंटों के मकानों में
(द) पक्के मकानों में
उत्तर:
(अ) गुफाओं में
10. निम्न में कौनसा इतिहास का कलात्मक स्रोत नहीं है?
(अ) वंशावली
(ब) चित्रकला
(स) पट्टिका
(द) मूर्तिकला
उत्तर:
(अ) वंशावली
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. पृथ्वी का एक बहुत लंबा इतिहास है जिसमें से हम मानवों का इतिहास …………………………. और एक बहुत छोटा सा भाग है।
उत्तर:
नवीनतम
2. जीव-जन्तुओं के पदचिन्हों या पौधों के अवशेष चिन्ह जो कि मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं, वे …………………………. कहलाते हैं।
उत्तर:
जीवाश्म
3. …………………………. किसी भी 100 वर्षों का कालखंड है।
उत्तर:
शताब्दी
4. ऐसा व्यक्ति जो अतीत का अध्ययन करता है और उसके विषय में लिखता है, …………………………. कहलाता है।
उत्तर:
इतिहासकार
5. आदि मानव मुख्यतः आखेटक एवं …………………………. संग्राहक थे।
उत्तर:
खाद्य
6. …………………………. युग एक लाख वर्ष पूर्व से लेकर 12000 वर्ष पूर्व तक रहा।
उत्तर:
हिम
सत्य/असत्य कथन छांटिए
1. आदिमानव समूह के रूप में अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
उत्तर:
सत्य
2. त्यौहारों की तिथियों की गणना एवं अन्य मांगलिक कार्यों के लिए ग्रेगोरियन तिथिपत्र का ही उपयोग किया जाता है।
उत्तर:
असत्य
3. पश्चिम में सामान्यतः विक्रमादित्य के जन्म वर्ष से कैलेंडर का आरंभ माना जाता है।
उत्तर:
असत्य
4. समय रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में भी सहायक होती है।
उत्तर:
सत्य
सही मिलान कीजिये
प्रश्न 1.
| I | II |
| 1. ए. डी. | (अ) ईसा के जन्म के पूर्व के वर्षों को इंगित |
| 2. बी. सी. | (ब) ईसा के जन्म के बाद के वर्षों को इंगित |
| 3. शताब्दी | (स) 1000 वर्षों का कालखण्ड |
| 4. सहस्त्राब्दी | (द) स्मारक |
| 5. इतिहास का स्रोत | (य) 100 वर्षों का कालखंड |
उत्तर:
| I | II |
| 1. ए. डी. | (ब) ईसा के जन्म के बाद के वर्षों को इंगित |
| 2. बी. सी. | (अ) ईसा के जन्म के पूर्व के वर्षों को इंगित |
| 3. शताब्दी | (द) स्मारक |
| 4. सहस्त्राब्दी | (स) 1000 वर्षों का कालखण्ड |
| 5. इतिहास का स्रोत | (य) 100 वर्षों का कालखंड |
प्रश्न 2.
| I | II |
| 1. मौखिक स्रोत | (अ) समाचार पत्र |
| 2. साहित्यिक स्रोत | (ब) लोक साहित्य |
| 3. कलात्मक स्रोत | (स) कविता एवं नाटक |
| 4. पुरातात्विक स्रोत | (द) पट्टिका (पैनल) |
| 5. आधुनिक इतिहास के स्रोत | (य) उत्खनन से प्राप्त उपकरण |
उत्तर:
| I | II |
| 1. मौखिक स्रोत | (ब) लोक साहित्य |
| 2. साहित्यिक स्रोत | (स) कविता एवं नाटक |
| 3. कलात्मक स्रोत | (द) पट्टिका (पैनल) |
| 4. पुरातात्विक स्रोत | (य) उत्खनन से प्राप्त उपकरण |
| 5. आधुनिक इतिहास के स्रोत | (अ) समाचार पत्र |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
इतिहास से क्या आशय है?
उत्तर:
इतिहास मानव के अतीत का अध्ययन है।
प्रश्न 2.
पृथ्वी पर मछली कशेरुकी का उद्भव कब हुआ?
उत्तर:
लगभग 475 करोड़ वर्ष पहले।
प्रश्न 3.
आदिमानव पृथ्वी पर कब से रह रहे हैं?
उत्तर:
लगभग 1 करोड़ वर्ष पहले से।
प्रश्न 4.
आदिमानव ने अग्नि का आविष्कार कब किया?
उत्तर:
लगभग दस लाख वर्ष पहले।
प्रश्न 5.
पृथ्वी पर मानव ने लेखन कब से प्रारंभ किया?
उत्तर:
लगभग 6500 वर्ष पहले से।
प्रश्न 6.
जीवाश्म किसे कहते है?
उत्तर:
जीव-जन्तुओं के पदचिन्हों या पौधों के अवशेष चिन्ह जो मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं, जीवाश्म कहे जाते हैं।
प्रश्न 7.
भू-विज्ञानी कौन होते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के भौतिक स्वरूपों एवं पृथ्वी के अन्य हिस्सों का अध्ययन करने वालों को भू-विज्ञानी कहा जाता है।
प्रश्न 8.
आदिमानव अपने जीवन के लिए किस पर निर्भर थे?
उत्तर:
आदिमानव अपने जीवन के लिए खाने योग्य पौधों एवं फलों के संग्रह व आखेट पर निर्भर थे।
प्रश्न 9.
आदिमानव कहां निवास करते थे?
उत्तर:
आदि मानव समूह में अस्थायी शिविरों तथा गुफाओं में रहते थे।
प्रश्न 10.
आदिमानव के जीवन को किनके निर्माण ने सरल बना दिया?
उत्तर:
अग्नि के आविष्कार, पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियों ब्लेड्स एवं नुकीले तीरों व अन्य उपकरणों के निर्माण ने आदि मानव के जीवन को सरल बना दिया।
प्रश्न 11.
आदिमानव ने किस प्रकार के आभूषण बना लिये थे?
उत्तर:
आदिमानवों ने समय के साथ पत्थर एवं मनकों की माला, पशुओं के दांतों के पेंडेंट आदि साधारण आभूषण बना लिए थे।
प्रश्न 12.
पृथ्वी पर हिम युग कब से कब तक रहा?
उत्तर:
पृथ्वी पर हिम युग लगभग एक लाख वर्ष पूर्व से लेकर 12000 वर्ष पूर्व तक रहा।
प्रश्न 13.
आदिमानव एक स्थान पर कहाँ बसने प्रारंभ हुए?
उत्तर:
आदिमानव एक स्थान पर सबसे पहले नदियों के किनारे बसने प्रारंभ हुए।
प्रश्न 14.
आदिमानव के नदियों के किनारे बसने के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर:
आदिमानवों ने जल की उपलब्धता और मृदा का अधिक उपजाऊ होने के कारण नदियों के किनारे बसना प्रारंभ किया।
प्रश्न 15.
एक स्थान पर बसने के बाद आदि मानवों ने क्या प्रारंभ कर दिया था?
उत्तर:
एक स्थान पर बसने के बाद आदि मानवों ने अनाज उगाना तथा गाय, बकरी आदि जैसे जानवरों का घरेलूकरण भी आरंभ कर दिया था।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
भू-विज्ञानी कौन होते हैं?
उत्तर:
भू-विज्ञानी- पृथ्वी के भौतिक स्वरूपों, जैसे- मृदा, पत्थरों, पहाड़ियों, पर्वतों, नदियों, महासागरों एवं पृथ्वी के अन्य हिस्सों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक होते हैं।
प्रश्न 2.
जीवाश्म विज्ञानी किसका अध्ययन करते हैं?
उत्तर:
जीव-जन्तुओं के पदचिन्हों या पौधों के अवशेष चिन्ह जो कि मृदा अथवा शिलाओं की परतों के बीच संरक्षित पाए जाते हैं, उन्हें जीवाश्म कहते हैं और जीवाश्म विज्ञानी जीवाश्म के रूप में करोड़ों वर्ष पूर्व के पेड़ों एवं पशुओं व मानवों के अवशेषों का ही अध्ययन करते हैं।
प्रश्न 3.
मानव विज्ञानी से क्या आशय है?
उत्तर:
मानव विज्ञानी से आशय उस वैज्ञानिक व्यक्ति से है। जो मानव समाजों एवं संस्कृतियों का अतीत से लेकर वर्तमान तक अध्ययन करते हैं।
प्रश्न 4.
पुरातत्व विज्ञानी अतीत का अध्ययन किस प्रकार करते हैं?
उत्तर:
पुरातत्व विज्ञानी मानव, पौधों एवं पशुओं द्वारा अपने पीछे छोड़े गए अवशेषों, जैसे-घड़े, मनके, मूर्तियाँ, खिलौने, हड्डियाँ, पशुओं एवं मानवों के दांत, घरों एवं ईंटों के हिस्से आदि वस्तुओं का उत्खनन करके अतीत का अध्ययन करते हैं।
प्रश्न 5.
अतीत की घटनाओं को चिन्हित करने के लिए | समय रेखा एक सुविधाजनक उपकरण क्यों है?
उत्तर:
अतीत की घटनाओं को चिन्हित करने के लिए समय- रेखा एक सुविधाजनक उपकरण है क्योंकि यह किसी विशेष अवधि में तिथियों और घटनाओं के अनुक्रम को दिखाता है।
प्रश्न 6.
शताब्दी से आप क्या समझते हैं? इतिहास में इसकी गणना कैसे की जाती है?
उत्तर:
शताब्दी किसी भी 100 वर्षों का कालखण्ड है। इतिहास में, 1 सा. सं. (सामान्य संवत्) से लेकर प्रत्येक सौ वर्षों के लिए शताब्दी की गणना की जाती है। उदाहरणार्थ, वर्तमान में हम 21वीं शताब्दी में हैं, जो 2001 से आरंभ होकर 2100 तक चलेगी। ईसा पूर्व की गणना करने के लिए हम 1 सा.सं. पू. से आरंभ करके समय में पीछे की ओर लौटते हैं।
प्रश्न 7.
आनुवंशिकी क्या है?
उत्तर:
आनुवंशिकी जीव विज्ञान की वह शाखा है जो यह अध्ययन करती है कि किस प्रकार पौधों, जानवरों या मनुष्यों की कुछ विशेषताएं एवं गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं।
प्रश्न 8.
इतिहास के विभिन्न स्रोतों में कौन योगदान देता है?
उत्तर:
इतिहास के अध्ययन के मौखिक, साहित्यिक, कलात्मक, पुरातात्विक, शिलालेख, आदि अनेक प्रकार के स्रोत हैं। इन स्रोतों के अध्ययन में इतिहासकार, पुरातत्व विज्ञानी, पुरालेख शास्त्री, मानव विज्ञानी, साहित्य व भाषा के विशेषज्ञ आदि अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
ग्रेगोरियन कैलेंडर क्या हैं?
उत्तर:
ग्रेगोरियन कैलेंडर का आरंभ ईसा मसीह के जन्म से माना जाता है। इस कैलेंडर का उपयोग समय की गणना में अब विश्वभर में होता है। इसमें 365 दिन मिलकर 12 माह का निर्माण करते हैं एवं प्रत्येक चार वर्ष में एक अतिवर्ष होता है। इस प्रकार जो वर्ष 4 से पूर्ण विभाजित हो जाएगा, वह अधिवर्ष होगा।
प्रश्न 2.
समय रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में सहायक होती है। कैसे? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समय रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में भी सहायक होती है। उदाहरण के लिए निम्नलिखित चिन्हित समय रेखा पर हम तिथियां देखे बिना भी यह बता सकते हैं कि बुद्ध का जन्म, ईसा मसीह से पहले हुआ था।
प्रश्न 3.
इतिहास के स्रोत से क्या आशय है ? इतिहास के पुरातात्विक स्त्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
इतिहास के स्रोत से आशय कोई स्थान, व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु जिसके माध्यम से हम अतीत की किसी घटना अथवा कालखंड से संबंधित जानकारी एकत्र करते हैं, उसे इतिहास का स्रोत कहते हैं।
इतिहास के अध्ययन के पुरातात्विक स्त्रोत – इतिहास के अध्ययन के प्रमुख पुरातात्विक स्रोत ये हैं – (1) प्राचीन स्मारक या टीला (2) उत्खनन में मिले मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष, उपकरण एवं हथियार, मूर्तियां एवं आभूषण, मृदभांड एवं खिलौने, निवास स्थान एवं शवाधान, ताम्रपत्र, सिक्के आदि।
प्रश्न 4.
पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिक अध्ययनों ने इतिहास के पुनर्निर्माण में अधिक से अधिक योगदान दिया है। इस कथन को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिक अध्ययनों ने इतिहास के पुनर्निर्माण में अधिक से अधिक योगदान दिया है। उदाहरण के लिए, प्राचीन जलवायु का अध्ययन, उत्खनन की गई सामग्री का रासायनिक अध्ययन और प्राचीन मानव की आनुवंशिकी के अध्ययन ने इतिहास के अध्ययन को एक नया दृष्टिकोण दिया है जिससे इतिहास के और पूरक स्रोत प्राप्त हुए हैं।
प्रश्न 5.
समाचार पत्र और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किस प्रकार के इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं?
उत्तर:
जब इतिहासकार आधुनिक इतिहास (साधारणत: पिछली दो या तीन शताब्दियों का इतिहास) का अध्ययन करते हैं, तो समाचार पत्र एक अन्य महत्त्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। इसी प्रकार पिछले कुछ दशकों के अतीत का अध्ययन के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टी.वी., इंटरनेट आदि) का भी उपयोग किया जा सकता है।
निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
‘पृथ्वी के इतिहास से मानवों का इतिहास नवीनतम और एक छोटा सा भाग है।’ इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी का इतिहास – पृथ्वी का जन्म लगभग 454 अरब वर्ष पूर्व का माना जाता है। इसके बाद पृथ्वी पर जीवन का विकास हुआ। इसे मोटे रूप से तीन प्रमुख चरणों में वर्गीकृत किया जा सकता है । यथा—
(अ) अरबों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का विकास- लगभग 3.79 अरब वर्ष पूर्व प्रथम कोशिकाओं का उद्भव हुआ और लगभग 2.33 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर वातावरणीय ऑक्सीजन का विकास हुआ और लगभग 1 अरब वर्ष पूर्व जीवाणु का उद्भव हुआ।
(ब) करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का उद्भव – पृथ्वी पर लगभग 825 करोड़ वर्ष पूर्व स्पंज एवं कवक का विकास हुआ लगभग 760 करोड़ वर्ष पूर्व यहाँ प्रवाल का उद्भव हुआ और लगभग 480 करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर मछली कशेरुकी का उद्भव हुआ, 400 करोड़ वर्ष पूर्व उभयचर कीटों का विकास हुआ और 375 करोड़ वर्ष पूर्व शार्क मछली का उद्भव हुआ। यहाँ लगभग 320 करोड़ वर्ष पहले सरीसृप व डायनासोर का उद्भव हुआ, लगभग 190 करोड़ वर्ष पूर्व पक्षियों का और 170 करोड़ वर्ष पूर्व स्तनवायी जीवों, 100 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर फूल एवं मधुमक्खियों तथा 1 करोड़ वर्ष पूर्व आदि मानव का उद्भव हुआ।
(स) वर्षों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का विकास आदि मानव ने पृथ्वी पर 10 लाख वर्ष पूर्व अग्नि का आविष्कार किया और 3 लाख वर्ष पूर्व यहाँ मानव (होमोसेपियंस) का विकास हुआ। इस प्रकार पृथ्वी पर मानवों का इतिहास केवल 3 लाख वर्ष पूर्व से लेकर वर्तमान 2024 ई. वर्ष तक है जो पृथ्वी के इतिहास का नवीनतम और एक छोटा सा भाग है।
प्रश्न 2.
पृथ्वी पर जीवन के विकास / उद्भव के कुछ चरणों को समय रेखा पर दिखाइए।
उत्तर:
प्रश्न 3.
ग्रेगोरियन कैलेण्डर की गणना में एक प्रमुख समस्या क्या है तथा उसका निवारण किस प्रकार किया जाता है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रेगोरियन कैलेण्डर की गणना सरल होती है क्योंकि सामान्यतः ईसा मसीह के जन्म वर्ष से कैलेंडर का आरंभ माना जाता है। इस बिन्दु से आगे के वर्षों की गणना की जाती है और इसे अंग्रेजी में ‘ए डी’ या ‘सी.ई’ से इंगित किया जाता है और ईसा मसीह की तिथि के पूर्व के वर्षों की गणना उल्टे (अवरोही) क्रम में की जाती है और इसे अंग्रेजी में बी. सी. ई. से इंगित किया जाता है।
ग्रेगोरियन कैलेण्डर की गणना में एक समस्या रहती है। ग्रेगोरियन तिथि पत्र में कोई भी वर्ष शून्य के रूप में चिन्हित नहीं किया गया है। वर्ष 1 सा.सं. (सी.ई.), 1 सा.सं. पू. (बी.सी.ई.) के तुरन्त बाद आता है। यदि हम 2 सा.सं. पू. से लेकर 2 सा.सं. तक समय रेखा बनाएँ तो यह देखेंगे कि शून्य वर्ष की अनुपस्थिति के कारण इन दो तिथियों के मध्य केवल 3 वर्ष ही होंगे। इसलिए किसी भी सा.सं.पू. तथा सा.सं. की तिथियों के बीच के वर्षों की गणना करते समय हमें सदैव दोनों को जोड़कर उनके योग में से 1 घटा देंगे। ऊपर दी गई स्थिति में 2 + 2 – 1 = 3 मानेंगे। उदाहरण के लिए 560 सा.सं. पू. गौतम बुद्ध के जन्म की अनुमानित तिथि है और आज हम 2024 सा.सं. में हैं, तो महात्मा बुद्ध का जन्म आज से 560 + 2024 – 1 = 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।
प्रश्न 4.
‘इतिहासकार जिस कालखण्ड का अध्ययन कर रहे होते हैं, वे उसके इतिहास को पुनर्निर्माण करने का प्रयास करते हैं। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इतिहासकार जिस कालखण्ड का अध्ययन कर रहे होते हैं, वे उसके इतिहास का पुनर्निर्माण करने का प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए जब इतिहासकार 1500 वर्ष पूर्व के किसी राजा या रानी, प्राचीन स्मारक, युद्ध या व्यापार की कुछ वस्तुओं के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करते हैं, तो वे बड़े ध्यान से इतिहास के अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित करने का प्रयास करते हैं। कभी-कभी ये स्रोत एक दूसरे की पुष्टि करते हैं, तो कभी यह एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएं प्रदान करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाय। इस प्रकार इतिहासकार इतिहास का पुनर्निर्माण करने का प्रयास करते हैं।
प्रश्न 5.
हिम युग के पश्चात् मानव के लिए जीने योग्य परिस्थितियों में किस प्रकार सुधार आया और मानव सभ्यता का विकास किस प्रकार हुआ?
अथवा
मानव सभ्यता के विकास क्रम पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी पर हिम युग लगभग एक लाख वर्ष पूर्व से लेकर 12000 वर्ष पूर्व तक रहा। इसके उपरांत मानव के जीने योग्य परिस्थितियों में सुधार हुआ और विश्व के कई हिस्सों में उन्होंने एक स्थान पर बसना तथा अनाज उगाना प्रारंभ कर दिया तथा उन्होंने गाय, बकरी आदि जानवरों का घरेलूकरण भी आरंभ कर दिया। भोजन की अधिक उपलब्धता के कारण ये मानव समूह अपने आकार व संख्या में बढ़ गए। जल की उपलब्धता तथा मृदा के अधिक उपजाऊ होने के कारण ये प्रायः नदियों के किनारे ही बसे। यही कारण है कि मानव की प्रारंभिक सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित हुई।
मानव सभ्यता का विकास क्रम-
(1) सरदार या मुखिया का निर्धारण- नदियों के किनारे बसने पर मानव समुदायों का विकास हुआ और समाज जटिल होता गया। समाज में सरदार अथवा मुखिया बने जो सामाजिक कल्याण के लिए उत्तरदायी थे। वे सभी सामूहिक रूप से सामुदायिक कल्याण का कार्य करते थे।
(2) बड़े गाँवों तथा कस्बों का विकास- जैसे-जैसे समय बीतता गया, पल्ली (उपग्राम) बड़े गांवों में परिवर्तित हो गए एवं इनमें से कुछ छोटे कस्बों में परिवर्तित हो गए जो मुख्यतः भोजन, वस्त्र एवं उपकरण आदि वस्तुओं का आदान- प्रदान करने लगे। इस प्रकार वस्तु विनिमय प्रणाली का विकास किया।
(3) संप्रेषण एवं आवागमन तंत्र का विकास – धीरे-धीरे इन गाँवों व कस्बों में संप्रेषण एवं आवागमन तंत्र का विकास हुआ।
(4) तकनीक का विकास तथा मृदभाण्ड, टिकाऊ उपकरण एवं आभूषणों का निर्माण- अब मृदभाण्ड एवं मिट्टी की अन्य वस्तुओं को बनाने एवं धातुओं के उपयोग (पहले तांबा और फिर लोहा) की तकनीक का आगमन हुआ जिससे टिकाऊ उपकरण, दैनिक उपयोग की वस्तुओं एवं आभूषणों का बनाना सरल हो गया।
इस प्रकार मानव सभ्यता का विकास अनेक चरणों में हुआ और सभ्यता के विकास के इन प्रारंभिक चरणों में अनेक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।
इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत Class 6 Notes
(अ) हम अतीत का अध्ययन किस प्रकार करते हैं?
(1) पृथ्वी का एक बहुत लम्बा इतिहास है जिसमें हम मानवों का इतिहास नवीनतम और एक छोटा सा भाग है।
(2) जो लोग पृथ्वी के इतिहास का अध्ययन करते हैं, वे पृथ्वी के अतीत के साथ हमारे अतीत को भी समझने में सहायता करते हैं। पृथ्वी के अतीत और हमारे अतीत का अध्ययन लोग विभिन्न गतिविधियों के अध्ययन के माध्यम से करते हैं। इन्हें निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है— (i) भू-विज्ञानी (ii) जीवाश्म विज्ञानी (iii) मानव विज्ञानी और (iv) पुरातत्व विज्ञानी। इसके अतिरिक्त इतिहासकार, आनुवंशिकी आदि भी इतिहास की जानकारी प्रदान करते हैं।
(ब) इतिहास में समय की गणना किस प्रकार की जाती है?
(1) प्रत्येक समाज एवं संस्कृति के पास समय की गणना की अपनी प्रणालियां रही हैं। आज के समय में विश्व भर में सामान्यतः ग्रेगोरियन कैलेंडर (तिथि पत्र) का उपयोग होता है, साथ ही त्यौहारों की तिथियों की गणना एवं अन्य मांगलिक कार्यों के लिए हिन्दू, मुस्लिम, यहूदी, चीनी आदि अन्य तिथिपत्रों का उपयोग किया जाता है।
(2) पश्चिम में, सामान्यतः ईसा मसीह के जन्म वर्ष से कैलेंडर का आरंभ माना जाता है। इस बिन्दु से आगे के वर्षों की गणना के लिए अंग्रेजी में ए.डी. लगाकर की जाती है, जो ईसा के जन्म के बाद के वर्षों को इंगित करता है। वर्तमान में इसे सी.ई. कहा जाता है। इस पाठ्य पुस्तक में सी.ई. के लिए सामान्य संवत (सां.सं.) शब्दों का प्रयोग किया गया है।
ईसा मसीह के जन्म की पारंपरिक तिथि से पूर्व के वर्षों की गणना उल्टे क्रम में की जाती है जिस बी.सी.ई. से इंगित किया जाता है। इस पाठ्य पुस्तक में इसके लिए सामान्य संवत पूर्व (सा.सं.पू.) शब्द का प्रयोग किया गया है।
(3) इस प्रकार की घटनाओं को चिन्हित करने के लिए समय रेखा एक सुविधाजनक उपकरण है, क्योंकि यह किसी विशेष अवधि में तिथियों एवं घटनाओं के अनुक्रम को दिखाता है। समय रेखा ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम को समझने में भी सहायक होती है।
(4) इतिहास में लंबी अवधि का अध्ययन करने के लिए हम सामान्यतः शताब्दी (100 वर्षों का कालखंड) या सहस्त्राब्दी (1000 वर्षों का कालखंड) शब्दों का प्रयोग करते हैं।
(स) इतिहास के स्रोत क्या-क्या हैं?
(1) इतिहास के स्रोत से आशय उस स्थान व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु से है जिसके माध्यम से हम अतीत की किसी घटना अथवा कालखंड से संबंधित जानकारी एकत्र करते हैं।
(2) हम ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यथा-
(i) मौखिक स्रोत – वंशावली तथा लोक साहित्य |
(ii) साहित्यिक स्त्रोत – भारतीय साहित्य तथा विदेशी विवरण
(iii) कलात्मक स्रोत – चित्रकला, मूर्तिकला तथा पट्टिका
(iv) पुरातात्विक स्रोत उत्खनन, संरचना तथा शिलालेख आदि।
(v) इसके अतिरिक्त पिछली दो तीन शताब्दियों के इतिहास के अध्ययन के लिए समाचार-पत्र एक अन्य महत्त्वपूर्ण स्रोत हो सकता है। पिछले कुछ दशकों के अध्ययन के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी उपयोग किया जा सकता है।
(3) इतिहासकार – इतिहासकार उस व्यक्ति को कहते हैं जो अतीत का अध्ययन करता है एवं उसके विषय में लिखता है। वह बड़े ध्यान से अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित करने का प्रयास करता है। संशय की स्थिति में वह अपने विश्वास के आधार पर निर्णय लेता है।
(4) आनुवंशिकी – यह जीव विज्ञान की वह शाखा है जो यह अध्ययन करती है कि किस प्रकार पौधों, जानवरों या मनुष्यों की कुछ विशेषताएं एवं गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचते हैं।
(द) मानव इतिहास का प्रारंभ-
- होमो सेपियंस (मानव) लगभग तीन लाख वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं।
- आदिमानव टोलियों (समूहों) में रहते थे तथा आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे तथा भोजन और आश्रय की निरंतर खोज में रहते थे।
- यह समूह अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
- इन्होंने अग्नि का उपयोग किया। पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियों एवं ब्लेड्स, नुकीले तीरों एवं अन्य उपकरणों का निर्माण कर जीवन को सरल बनाया। समय के साथ आदिमानवों ने पत्थर एवं मनकों की माला, पशुओं के दांतों के पेंडेंट आदि आभूषण बना लिए।
(य) पहली उपज –
- एक समय पृथ्वी पर ठंड थी एवं इसका एक बड़ा भाग बर्फ से ढंका हुआ था। इसलिए हमें ‘हिम युग’ कहा जाता था था। हिम युग लगभग एक लाख वर्ष पूर्व से लेकर 12000 वर्ष पूर्व तक रहा।
- बाद में जब जलवायु गरम होने लगी तो हिम का कुछ भाग पिघल गया, जिसके कारण तत्कालीन नदियो में जल भराव हो गया जो बाद में समुद्र में समाहित हो गई।
- इसके बाद आदिमानव ने एक स्थान पर बसना और अनाज उगाना आरंभ किया तथा उन्होंने गाय, बकरी आदि जानवरों को पालना शुरू किया। जल की उपलब्धता तथा मृदा के उपजाऊपन के कारण ये प्रायः नदियों के किनारे बसने लगे।
- धीरे-धीरे समुदायों का विकास हुआ, जो सामूहिक रूप से सामुदायिक कल्याण के लिए कार्य करते थे।
- समय के साथ पल्ली (एक छोटी बस्ती) बड़े गांवों में बदली। अब आदिमानव भोजन, वस्त्र, उपकरण आदि वस्तुओं का आदान-प्रदान करने लगे। धीरे-धीरे इन गांवों में संप्रेषण एवं आवागमन तंत्र विकसित हुआ।