Class 6 Social Science Chapter 7 Question Answer in Hindi
भारत की सांस्कृतिक जड़ें Question Answer
कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ 7 के प्रश्न उत्तर (In Text)
पृष्ठ 105
प्रश्न 1.
वेद क्या हैं? इनका संदेश क्या है?
उत्तर:
वेद शब्द विद् से आया है, जिसका अर्थ है- ज्ञान अर्थात विद्या। इनका संदेश है कि-
(i) परम सत्य एक ही है किन्तु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं। सत्य ईश्वर का ही दूसरा नाम है। अतः ईश्वर एक है और मनीषी उसके अनेक नाम देते हैं।
(ii) ऋग्वेद के अंतिम मंत्रों में लोगों के बीच एकता का भी आह्वान किया गया है। इसके अन्तर्गत यह संदेश दिया गया है कि सब साथ मिलकर चलें, साथ मिलकर बोलें, एक हो हमारा मन, हमारे विचार मिलें, हमारा उद्देश्य एक हो, हमारा हृदय एक हो, हमारे विचार एक हों। अत: सभी सहमत हों।
प्रश्न 2.
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं. पू. में भारत में कौन-कौन से नए दर्शन/मत उभरे? इनके मूल सिद्धान्त क्या हैं?
उत्तर:
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. में निम्नलिखित दर्शन/मत
उभरे :-
(1) योग – प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वेदों से ‘योग’ का विकास हुआ जिसने किसी व्यक्ति की चेतना में ब्रह्म का आत्मबोध प्राप्त करने के उद्देश्य से अनेक विधियाँ विकसित की।
(2) बौद्ध मत – प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. लगभग ढाई सहस्त्राब्दी पूर्व ‘बौद्ध मत’ का आविर्भाव हुआ। इस मत के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध थे। बौद्धमत ने वेदों की प्रभुता स्वीकार नहीं की ओर स्वयं की पद्धति विकसित की।
इसके मूल सिद्धांत ये हैं-
- मानवीय जीवन कष्टों और दुःखों से भरा हुआ है।
- मानवीय कष्टों के कारण अविद्या और मोह हैं।
- आत्म संयम (निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन) अपनाकर हम इस मोह से मुक्ति पा सकते हैं।
- बौद्ध मत ने अहिंसा का विचार भी प्रतिपादित किया।
- वह व्यक्ति शुद्ध है जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं।
- स्वयं पर विजय पाना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
(3) जैन मत – प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं. पूर्व एक अन्य दर्शन, जिसने वेदों की प्रभुता को अस्वीकार किया, जैनमत का विकास हुआ। इसके प्रमुख प्रतिपादक ‘महावीर’ थे। जैनमत के मूल सिद्धांत ये हैं-
- अहिंसा – किसी भी जीव की हिंसा न की जाए और न उसके साथ कोई दुर्व्यवहार किया जाय और न ही उसे दूर हटाया जाए।
- अनेकांतवाद – सत्य के अनेक पक्ष हैं। इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता।
- अपरिग्रह – पार्थिव वस्तुओं से दूर रहने और स्वयं को जीवन में केवल अनिवार्य वस्तुओं तक ही सीमित रहने की सलाह है।
- जीवों की सम्बद्धता – सभी जीवों की आपसी सम्बद्धता तथा आपसी निर्भरता है।
(4) चार्वाक दर्शन – प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. भारत में एक अन्य दर्शन ‘चार्वाक दर्शन’ भी उभरा। इसके अनुसार यह भौतिक जगत ही एक मात्र सत्य है और इसलिए मृत्यु के पश्चात् जीवन का होना असंभव है।
प्रश्न 3.
लोक तथा जनजातीय परम्पराओं का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान रहा है?
उत्तर:
समाजशास्त्री आन्द्रे बेते ने लिखा है कि ‘भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाली हजारों जातियां और जनजातियां इतिहास के आरंभिक समय तथा उससे भी पहले से आपस में एक-दूसरे की धार्मिक आस्थाओं और प्रथाओं को प्रभावित करती रही हैं।’ न केवल हिंदू दर्शन के निर्माण के चरण में, बल्कि इसके पूरे विकास क्रम में हिंदू दर्शन जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ है। यथा-
(1) जनजातीय विश्वास, प्रथाओं तथा कलाओं का हिंदू दर्शन के साथ मेल-जोल होता रहा है। इन के बीच दोनों ओर से अबाधित आदान-प्रदान चलता रहा है। उदाहरण के लिए परंपरा के अनुसार पुरी (ओडिशा) के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजातीय देवता था। देवी माताओं के जिन विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, उनके लिए भी यही बात कही जा सकती है।
(2) लोक, जनजातियों और हिंदू विश्वास में अनेक समान प्रकार की संकल्पनाएं हैं। उदाहरण के लिए, तीनों में प्राकृतिक तत्वों, जैसे कि पर्वतों, नदियों, पेड़-पौधों, जीव-जन्तुओं तथा कुछ पत्थरों को भी पवित्र माना गया, क्योंकि इन सबमें चेतना है। जनजातियों द्वारा उन प्राकृतिक तत्वों से संबंधित देवताओं की पूजा की जाती है और हिंदू दर्शन इससे प्रभावित हुआ है। देवताओं की बहुलता तीनों में देखी जाती है।
(3) देवताओं की इतनी बहुलता के पश्चात, हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी परमात्मा की संकल्पना है। स्पष्ट है कि न केवल इसके निर्माण के चरण में बल्कि इसके पूरे विकास क्रम में हिंदू दर्शन लोक और जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ है। लोक और जनजातीय मान्यताएं एवं प्रथाएं भारतीय की सांस्कृतिक जड़ों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
पृष्ठ 109
प्रश्न 1.
क्या आप जानते हैं कि उस समाज को क्या कहते हैं, जहाँ लोग अपने नेता का चयन करते हैं? आपके विचार से लोगों को ऐसी स्थिति से कैसे लाभ होता है? यदि वे अपने द्वारा नहीं चुने गए नेता के अधीन रहते तो क्या हो सकता है?
उत्तर:
वह समाज, जहाँ लोग अपने नेता का चयन करते हैं. लोकतांत्रिक समाज कहलाता है। लोकतांत्रिक समाज में लोकतांत्रिक सरकार होती है जो जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों की सरकार होती है। लोकतांत्रिक समाज में सरकार अपने कार्यों के लिए जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। प्रजातंत्र में लोग सरकार द्वारा लिये गए निर्णयों पर प्रश्न उठा सकते हैं। साथ ही वे अपनी समस्याओं को हल करने के लिए अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से दूर करवा सकते हैं। यदि लोग अपने द्वारा चुने गए नेता के अधीन नहीं होते तो ऐसे समाज में राजा या रानी या कोई विदेशी व्यक्ति शासन चला रहा होता और वह अपने किये गए कार्यों के लिए समाज (जनता) के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा और न ही आप उसके द्वारा लिए गए प्रश्नों पर कोई प्रश्न उठा सकेंगे। ऐसा शासक निरंकुश होकर अत्याचारी भी हो सकता है।
पृष्ठ 114
प्रश्न 1.
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 114 पर ऊपर दर्शायी गई कृति में बुद्ध को कैसे दर्शाया गया है?
उत्तर:
इस कृति में बुद्ध को उपदेश देते हुए दर्शाया गया है।
प्रश्न 2.
क्या आप भारत के कुछ राज्यों या कुछ अन्य देशों के नाम बता सकते हैं, जहाँ आज भी बौद्ध मत एक प्रमुख मत है। इन स्थानों को विश्व के मानचित्र पर अंकित करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर:
आज भी बौद्ध मत महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्यों में एक प्रमुख मत हैं। यह मत श्रीलंका, थाइलैंड, इण्डोनेशिया, चीन, जापान तथा कोरिया आदि देशों में एक प्रमुख मत है। (विद्यार्थी विश्व के मानचित्र में इस स्थानों को स्वयं अंकित करें।)
भारत की सांस्कृतिक जड़ें कक्षा 6 प्रश्न उत्तर (Exercise)
प्रश्न 1.
यदि आप नचिकेता होते तो आप यम से कौन से | प्रश्न पूछते ? इन्हें 100-150 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
यदि हम नचिकेता होते तो यही प्रश्न पूछते कि मुझे मेरे पिता ने यम अर्थात आपको अर्पित कर दिया है। इस स्थिति में आप अब मेरे साथ क्या करेंगे, मुझे कहाँ ले जाऐंगे? मुझे अपने साथ ले जाऐंगे या नहीं? और यदि आप मुझे अभी अपने साथ नहीं ले जाऐंगे, तो मैं कहाँ जाऊं? आदि।
दूसरे मैं, यम अर्थात मृत्यु के देवता से यह प्रश्न करूँगा कि ‘शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?’ किसी व्यक्ति की मृत्यु क्यों होती है? क्या मृत्यु के बाद वह व्यक्ति अस्तित्वहीन हो जाता है अथवा मृत्यु के बाद भी उसका कोई अस्तित्व बना रहता है और यदि उसका कोई अस्तित्व बना रहता है, तो वह क्या है? उसका क्या नाम है तथा वह कहाँ रहता है तथा उसका क्या होता है?
प्रश्न 2.
बौद्ध मत के कुछ केन्द्रीय विचारों को समझाइए। इन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
बौद्ध मत के कुछ केन्द्रीय विचार ये हैं-
- मानवीय जीवन कष्टों और दुःखों से भरा हुआ मानवीय कष्ट के स्रोत अविद्या और मोह ‘इच्छा और लालसाएँ’ हैं। उन्होंने इन दोनों कारणों को दूर करने की विधि संकल्पित की। उन्होंने कहा कि आत्मसंयम (निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन) अपनाकर हम ऐसे मोह से मुक्ति पा सकते हैं।
- उन्होंने अहिंसा का विचार प्रतिपादित किया। जिसका मूल आशय यह है कि किसी को चोट या नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।
- वह व्यक्ति शुद्ध है, जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं।
- स्वयं पर विजय पाना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
प्रश्न 3.
बुद्ध के उस उद्धरण पर कक्षा में चर्चा कीजिए जो इस प्रकार है- “जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता, जबकि कई लोग यहाँ (पवित्र नदी में) स्नान करते हैं”। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सबको इसका अर्थ समझ में आ गया है।
उत्तर:
विद्यार्थी कक्षा में चर्चा कर इसके अर्थ को समझें । (संकेत-जल से या पवित्र नदी में स्नान करने से शरीर स्वच्छ होता है, लेकिन वह व्यक्ति के मन या आत्मा को शुद्ध नहीं करता है। जब व्यक्ति का मन शुद्ध होगा अर्थात वह जब तृष्णा से मुक्त होगा, तभी व्यक्ति शुद्ध होगा और इसका उपाय है, आत्मनियंत्रण।)
प्रश्न 4.
जैन मत के मुख्य विचारों को समझाइए। इन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जैन मत के मुख्य विचार ये हैं-
(1) अहिंसा – जैन मतावलम्बी को अहिंसा के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए अर्थात किसी भी जीव को न तो मारा जाय, न उसके साथ हिंसा की जाय, न दुर्व्यवहार किया जाए, न ही सताया जाए और न ही दूर हटाया जाय। क्योंकि सभी जीवन जीना चाहते हैं, सभी के लिए जीवन प्रिय है।
(2) अनेकांतवाद – अनेकांतवाद का अर्थ है- केवल एक पक्ष या दृष्टिकोण नहीं, अर्थात सत्य के अनेक पक्ष हैं और इसे केवल एक कथन द्वारा पूरी तरह समझाया नहीं जा सकता।
(3) अपरिग्रह – अपरिग्रह का अर्थ है- असंग्रह। इसके अन्तर्गत पार्थिव वस्तुओं से दूर और स्वयं को जीवन में केवल अनिवार्य वस्तुओं तक सीमित रहने की सलाह दी जाती है।
(4) जीवों की परस्पर संबद्धता एवं निर्भरता – जैन मत में सभी जीवों, मानवों से लेकर अदृश्य जीवों तक आपसी संबद्धता और आपसी निर्भरता पर भी बल दिया गया है, क्योंकि ये सभी एक-दूसरे के पूरक हैं और एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।
प्रश्न 5.
कक्षा में आंद्रे-बेते के कथन पर विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर:
विद्याथी कक्षा में इस पर विचार करें कि किस प्रकार जनजातीय धार्मिक आस्थाओं और प्रथाओं ने हिन्दू दर्शन के विकास क्रम को किस प्रकार प्रभावित किया है और जनजातीय धर्मों पर हिंदू दर्शन का क्या प्रभाव पड़ा?
प्रश्न 6.
अपने स्थानीय क्षेत्र में लोकप्रिय देवी-देवताओं तथा उनसे जुड़े त्यौहारों की एक सूची बनाइये।
उत्तर:
विद्यार्थी अपने विषयाध्यापक, माता-पिता व अभिभावकों से पता करके ऐसे त्यौहारों की सूची स्वयं बनाएं।
प्रश्न 7.
कक्षा की गतिविधि के रूप में अपने क्षेत्र या राज्य के दो या तीन जनजातीय समूहों की सूची बनाइए। इनमें से कुछ की परंपरा और विश्वास प्रणालियों के बारे में लिखिए।
उत्तर:
कक्षा की गतिविधि के रूप में यह कार्य विद्यार्थी स्वयं अपनी कक्षा में करें।
प्रश्न 8.
सही या गलत-
(1) वैदिक ऋचाओं को ताड़ पत्र की पांडुलिपियों पर लिखा गया है।
(2) वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं।
(3) वैदिक कथन ‘एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ में ब्रह्माण्ड की शक्तियों की एकता की मान्यता प्रकट होती है।
(4) बौद्ध मत वेदों से अधिक पुराना है।
(5) जैन मत का उद्भव बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में हुआ।
(6) बौद्ध और जैन मत दोनों ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सभी जीवों को नुकसान न पहुँचाने का समर्थन करते हैं।
(7) जनजातीय विश्वास परंपराएँ अलग और छोटे देवों तक सीमित हैं।
उत्तर:
(1) सत्य
(2) सत्य
(3) सत्य
(4) असत्य
(5) असत्य
(6) सत्य
(7) असत्य
भारत की सांस्कृतिक जड़ें Class 6 Question Answer
बहुविकल्पात्मक प्रश्न
1. सबसे पुराना वेद कौनसा है?
(अ) अथर्ववेद
(ब) यजुर्वेद
(स) ऋग्वेद
(द) सामवेद
उत्तर:
(स) ऋग्वेद
2. बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध का बचपन का नाम था –
(अ) वर्धमान
(ब) सिद्धार्थ
(स) राहुल
(द) शुद्धोदन
उत्तर:
(ब) सिद्धार्थ
3. महात्मा बुद्ध को बोधगया में किस वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ?
(अ) पीपल का वृक्ष
(ब) आम का वृक्ष
(स) नीम का वृक्ष
(द) बरगद का वृक्ष
उत्तर:
(अ) पीपल का वृक्ष
4. वेदों की ऋचाएँ किस क्षेत्र में रची गई?
(अ) सप्त सिंधु क्षेत्र में
(ब) गंगा-यमुना के क्षेत्र में
(स) नर्मदा के क्षेत्र में
(द) कावेरी के क्षेत्र में
उत्तर:
(अ) सप्त सिंधु क्षेत्र में
5. वैदिक ऋचाओं की रचना किस भाषा में की गई थी?
(अ) अंग्रेजी
(ब) हिन्दी
(स) बांग्ला
(द) संस्कृत
उत्तर:
(द) संस्कृत
6. वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित हैं-
(अ) बौद्ध धर्म के उपदेश
(ब) उपनिषद
(स) पुराण
(द) जैन धर्म के उपदेश
उत्तर:
(ब) उपनिषद
7. निम्न में से कौनसा जैन मतं के उपदेशों में शामिल नहीं है?
(अ) तृष्णा
(ब) अहिंसा
(स) अनेकांतवाद
(द) अपरिग्रह
उत्तर:
(अ) तृष्णा
8. ‘भौतिक जगत ही एक मात्र सत्य है और इसलिए मृत्यु के पश्चात् जीवन का होना असंभव हैं।’ यह कथन है-
(अ) हिंदू दर्शन का
(ब) बौद्ध मत का
(स) चार्वाक दर्शन का
(द) जैन मत का
उत्तर:
(स) चार्वाक दर्शन का
9. वर्ष 2011 में भारत के अधिकांश राज्यों में कितनी जनजातियां निवास करती थीं?
(अ) 104
(ब) 705
(स) 50
(द) 10
उत्तर:
(ब) 705
10. मूल रूप से जनजाति देवता थे-
(अ) इन्द्र
(ब) सूर्य
(स) चन्द्रमा
(द) पुरी के भगवान जगन्नाथ
उत्तर:
(द) पुरी के भगवान जगन्नाथ
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
1. वैदिक ऋचाओं की रचना ऋषियों और ऋषिकाओं द्वारा …………………………. भाषा के एक प्रारंभिक रूप में की गई थी।
उत्तर:
संस्कृत
2. ऋग्वेद के अंतिम मंत्रों में लोगों के बीच …………………………. का भी आह्वान किया गया।
उत्तर:
एकता
3. उपनिषदों में आत्मन् की कल्पना की गई है जो कि प्रत्येक जीव में निवास करता है, परन्तु …………………………. का ही स्वरूप होता है।
उत्तर:
ब्रह्म
4. बौद्ध मत ने वेदों की …………………………. को स्वीकार नहीं किया और अपनी स्वयं की पद्धति विकसित की।
उत्तर:
प्रभुता
5. ब्रह्म ही संसार, ऋचाओं, नदियों तथा अन्य चीजों का …………………………. करता है।
उत्तर:
निर्माण
6. बुद्ध ने …………………………. की स्थापना की, जो भिक्षुओं का एक समुदाय है।
उत्तर:
संघ
सत्य/असत्य कथन छांटिए
1. ‘जैन’ शब्द ‘जिन’ से आया है, जिसका अर्थ है-
उत्तर:
सत्य
2. सत्य का केवल एक ही पक्ष होता है।
उत्तर:
असत्य
3. चार्वाक दर्शन के अनुसार मृत्यु के पश्चात जीवन का होना असंभव है।
उत्तर:
सत्य
4. लोक और जनजातीय परम्पराओं तथा प्रमुख विचारधाराओं के बीच कोई सम्पर्क नहीं रहा है।
उत्तर:
असत्य
सही मिलान कीजिये
प्रश्न 1.
| I | II |
| 1. जैन मत | (अ) वेद |
| 2. वैदिक दर्शन | (ब) महात्मा बुद्ध |
| 3. एक जनजाति देवता | (स) महावीर स्वामी |
| 4. डोनी पोलो | (द) पुरी के भगवान जगन्नाथ |
| 5. बौद्ध मत | (य) जनजातियों के परमात्मा |
उत्तर:
| I | II |
| 1. जैन मत | (स) महावीर स्वामी |
| 2. वैदिक दर्शन | (अ) वेद |
| 3. एक जनजाति देवता | (द) पुरी के भगवान जगन्नाथ |
| 4. डोनी पोलो | (य) जनजातियों के परमात्मा |
| 5. बौद्ध मत | (ब) महात्मा बुद्ध |
प्रश्न 2.
| I | II |
| 1. एक भारतीय समाज- शास्त्री | (अ) वैदिक ऋचाएं |
| 2. सप्तसिंधु क्षेत्र | (ब) आंद्रे बेते |
| 3. भरत | (स) एक वैदिककालीन व्यवसायी |
| 4. आरोग्यकर्ता | (द) उपनिषद |
| 5. आत्मन की संकल्पना | (य) वैदिककालीन एक जन |
उत्तर:
| I | II |
| 1. एक भारतीय समाज- शास्त्री | (ब) आंद्रे बेते |
| 2. सप्तसिंधु क्षेत्र | (अ) वैदिक ऋचाएं |
| 3. भरत | (य) वैदिककालीन एक जन |
| 4. आरोग्यकर्ता | (स) एक वैदिककालीन व्यवसायी |
| 5. आत्मन की संकल्पना | (द) उपनिषद |
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
सबसे बड़ी संपत्ति क्या है?
उत्तर:
सबसे बड़ी सम्पत्ति है सच्चे ज्ञान की संपत्ति।
प्रश्न 2.
आध्यात्मिकता क्या है?
उत्तर:
आध्यात्मिकता हमारे वर्तमान व्यक्तित्व से परे एक गहरे या ऊँचे आयाम की खोज है।
प्रश्न 3.
आध्यात्मिक साधक कौन होता है?
उत्तर:
ऐसा व्यक्ति जो इस दुनिया के सत्य को जानना चाहता है, उसे आध्यात्मिक साधक कहा जाता है, वह एक ऋषि, संत, योगी, दार्शनिक आदि हो सकता है।
प्रश्न 4.
वेद क्या है?
उत्तर:
वेद शब्द विद् से आया है जिसका अर्थ है- ज्ञान अर्थात् विद्या।
प्रश्न 5.
वेद कितने हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
वेद चार हैं- (1) ऋग्वेद, (2) यजुर्वेद, (3) सामवेद (4) अथर्ववेद।
प्रश्न 6.
भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ कौनसे हैं?
उत्तर:
वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। विजेता।
प्रश्न 7.
2008 में यूनेस्को ने किसे ‘मानवीयता के मौखिक और अमूर्त विरासत की अनुपम कोटि’ के रूप में मान्यता दी?
उत्तर:
हजारों वर्षों से किए गए वैदिक पाठ शैली के मौखिक सुव्यवस्थित संप्रेषण को।
प्रश्न 8.
यूनेस्को का पूरा नाम क्या है?
उत्तर:
यूनेस्को का पूरा नाम है- संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन।
प्रश्न 9.
वैदिक ऋचाएँ देवताओं और देवियों को किस रूप से संबोधित करती हैं?
उत्तर:
काव्यात्मक रूप से।
प्रश्न 10.
प्रारंभिक वैदिक समाज किस प्रकार संगठित था?
उत्तर:
प्रारंभिक वैदिक समाज 30 से अधिक विभिन्न जनों (लोगों के एक बड़े समूहों) में संगठित था।
प्रश्न 11.
वैदिक ग्रंथों में उल्लिखित किन्हीं चार व्यवसायों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) किसान (2) बुनकर (3) कुम्हार (4) शिल्पकार।
प्रश्न 12.
उपनिषदों में प्राप्त, किन्हीं दो नई संकल्पनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
- पुनर्जन्म की संकल्पना
- कर्म और कर्मफल
प्रश्न 13.
वेदान्त क्या है?
उत्तर:
वेदान्त एक दर्शन है, जिसके अनुसार सब कुछ- मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्माण्ड- एक दैवीय तत्व है, जिसे ब्रह्म कहा जाता है।
प्रश्न 14.
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं. पूर्व किन-किन दर्शनों का विकास हुआ?
उत्तर:
प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं. पूर्व भारत में योग, बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन तथा चार्वाक दर्शन का विकास हुआ।
प्रश्न 15.
संन्यासी कौन होता है?
उत्तर:
संन्यासी वह व्यक्ति होता है जो चेतना का उच्चतर स्तर प्राप्त करने के लिए कठोर अनुशासन में रहता है।
प्रश्न 16.
भिक्षु से क्या आशय है?
उत्तर:
भिक्षु एक ऐसे व्यक्ति को कहा गया है जो दुनिया के सामान्य जीवन को त्याग, स्वयं को किसी धार्मिक या आध्यात्मिक लक्ष्य के लिए समर्पित कर अनुशासित जीवन के कठोर नियमों का पालन करता है।
प्रश्न 17.
एक जैन कथा में रोहिनेय की कहानी किस प्रकार के विचारों के महत्व को दर्शाती है?
उत्तर:
यह जैन कहानी सम्यक कर्म और सम्यक विचारों के महत्व को दर्शाती है और यह भी बताती है कि हर व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर मिलना चाहिए। प्रश्न 18. चार्वाक दर्शन का मूल विचार क्या है? उत्तर-चार्वाक दर्शन के अनुसार, यह भौतिक जगत ही एक मात्र सत्य है और इसलिए मृत्यु के पश्चात जीवन का होना असंभव है।
प्रश्न 19.
प्राचीन भारत में जनजातियां क्या थीं?
उत्तर:
प्राचीन भारत में जनजाति के लिए कोई शब्द नहीं था। जनजातियां केवल अलग-अलग जन थीं जो एक विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे वन या पहाड़ ।
प्रश्न 20.
2011 में भारत में कितनी जनजातियां निवास करती थीं?
उत्तर:
705 जनजातियाँ।
प्रश्न 21.
जातक कथाएँ क्या हैं?
उत्तर:
जातक कथाएं बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियां है और बड़े ही सरल तरीके से बौद्ध आदर्शों को व्यक्त करती हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
वेद क्या हैं?
उत्तर:
वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और वस्तुतः विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक हैं। वेदों में हजारों ऋचाएँ (कविताओं और गीतों के रूप में प्रार्थनाएँ) हैं। ये ऋचाएँ सप्तसिंधु क्षेत्र में रची गई। इनकी रचना पांचवीं से दूसरी सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. के बीच हुई।
प्रश्न 2.
वैदिक ऋचाओं की रचना किनके द्वारा और किस भाषा में की गई? यह ऋचाएं किनको संबोधित हैं?
उत्तर:
वैदिक ऋचाओं की रचना ऋषियों (कवि) और की संकल्पना। ऋषिकाओं (कवयित्रियों) द्वारा संस्कृत भाषा के एक प्रारंभिक रूप में की गई।
यह ऋचाएं अनेक देवताओं और देवियों, जैसे-इन्द्र, अग्नि, वरुण, मित्र, सरस्वती, ऊषा आदि को काव्यात्मक रूप से संबोधित हैं।
प्रश्न 3.
वैदिक दर्शन की कौनसी मान्यताएं विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण थीं?
उत्तर:
वैदिक दर्शन में कुछ मान्यताएं विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण थीं। यथा-
- परम सत्य एक ही है किन्तु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं। यह परम सत्य ही ईश्वर का दूसरा नाम था।
- ॠग्वेद के अंतिम मंत्रों में लोगों के बीच एकता का भी आह्वान किया गया है।
प्रश्न 4.
उपनिषद क्या हैं?
उत्तर:
उपनिषद वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित ग्रंथ हैं। उपनिषदों में आत्मन् की संकल्पना की गई है जो कि प्रत्येक जीव में निवास करती है, परन्तु वह ब्रह्म का ही स्वरूप है। इसके अनुसार दुनिया में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और परस्पर निर्भर है।
प्रश्न 5.
वेदान्त क्या है?
उत्तर:
वेदान्त एक दर्शन है जिसका जन्म वेदों से हुआ है। इसके अनुसार सब कुछ मानव जीवन, प्रकृति और ब्रह्माण्ड- एक दैवीय तत्व है, जिसे ब्रह्म अथवा कभी-कभी तत् भी कहा जाता है। इसे दो प्रसिद्ध मंत्रों द्वारा स्पष्ट किया गया है। ये हैं- ‘मैं ब्रह्म हूँ।’ और “वह ब्रह्म आप ही हैं।”
प्रश्न 6.
बुद्ध ने किस संस्था की स्थापना की?
उत्तर:
बुद्ध ने संघ की स्थापना की जो भिक्षुओं का एक समुदाय है, जिन्होंने स्वयं को बुद्ध के उपदेशों के पालन और प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। भारत और पूरे एशिया पर उनका गहरा प्रभाव था।
प्रश्न 7.
छांदोग्य उपनिषद् में ऋषि उद्दालक आरुणि ने अपने पुत्र श्वेतकेतु को ब्रह्म के स्वरूप को किस प्रकार समझाया?
उत्तर:
ऋषि उद्दालक आरुणि ने पुत्र श्वेतकेतु से कहा कि ब्रह्म अदृश्य रहते हुए भी सर्वव्यापी है। हमारे चारों तरफ जो कुछ भी है, एक ही तत्व-ब्रह्म से इसका उद्भव हुआ है और सभी में यही सूक्ष्म तत्व व्याप्त है।
प्रश्न 8.
कठोपनिषद में नचिकेता के प्रश्न कि ‘शरीर की मृत्यु के बाद क्या होता है?’ का यम ने क्या जबाव दिया?
उत्तर:
यम ने नचिकेता को कहा कि सभी जीवों में आत्मा निहित होती है। इसका न तो जन्म होता है और न मृत्यु होती है, यह अमर है। अतः शरीर की मृत्यु के बाद आत्मा रह जाती है।
प्रश्न 9.
बौद्ध मत और जैनमत के भिक्षुओं और भिक्षुणियों ने अपने-अपने मत का प्रसार-प्रचार किस प्रकार किया?
उत्तर:
दोनों मतों के भिक्षुओं और भिक्षुणियों ने देश के सुदूर स्थानों की यात्राएं की तथा अपने-अपने उपदेशों का प्रचार प्रसार किया। इनमें से कुछ लोगों ने विभिन्न स्थानों पर जाकर विहार बनाए और कुछ ने पत्थरों की गुफाओं में सन्यासी जीवन बिताया।
प्रश्न 10.
आज के समय में मानव वैज्ञानिक जनजाति की क्या परिभाषा देते हैं?
उत्तर:
आज के समय में मानव वैज्ञानिक जनजाति को उन परिवारों या वंशों का समूह मानते हैं, जो एक सामान्य उत्पत्ति, संस्कृति और भाषा को साझा करते हैं, और आपस में निकट संबंध बनाए रखते हुए समुदाय में रहते हैं। जिसका में एक मुखिया होता है और उनके पास अपनी कोई निजी सम्पत्ति नहीं होती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
प्रारंभिक वैदिक कालीन समाज के स्वरूप को प्रदेश की अनेक जनजातियां डोनीपोलो की पूजा करती हैं, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
- प्रारंभिक वैदिककालीन समाज विभिन्न जनों में संगठित था। ऋग्वेद में ही ऐसे 30 से अधिक जनों की सूची दी गई है। उदाहरणार्थ- भरत, पुरु, कुरु, यदु, तुर्वश आदि । प्रत्येक जन उपमहाद्वीप के उत्तरी-पश्चिमी भाग के एक विशेष क्षेत्र के साथ जुड़ा था।
- वेदों में राजा, सभा और समिति जैसे कुछ शब्दों के माध्यम से संकेत मिलते हैं, कि वैदिक समाज में एक शासन प्रथा प्रचलित थी।
- वैदिक ग्रंथों में अनेक व्यवसायों का उल्लेख मिलता है, जैसे- किसान, बुनकर, कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई आरोग्यकर्ता, नर्तक – नर्तकी, नाई, पुजारी आदि।
प्रश्न 2.
उपनिषद के दर्शन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
उपनिषद वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित हैं। उपनिषदों में भी आत्मन् की संकल्पना की गई है जो कि प्रत्येक जीव में निवास करता है, परन्तु ब्रह्म का ही स्वरूप होता है। इसके अनुसार इस दुनिया में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और परस्पर निर्भर है। इसकी एक महत्त्वपूर्ण प्रार्थना है जो ‘सर्वे भवन्तु सुखिन’ (सभी जीव सुखी रहें) के साथ आरंभ होती है और ‘सर्वे सन्तु निरामया’ (सब रोग व दुख से मुक्त रहें।) की कामना करती है। उपनिषदों में कुछ नई संकल्पनाएं भी प्राप्त होती हैं, जैसे कि- पुनर्जन्म और कर्म और कर्मफल की संकल्पनाएं।
प्रश्न 3.
भारत में जनजाति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
- प्राचीन भारत में जनजाति के लिए कोई शब्द नहीं था- जनजातियां केवल अलग-अलग जन थीं जो एक विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे- वन या पहाड़।
- भारत के संविधान में अंग्रेजी में इनके लिए ‘ट्राइब ‘ और ‘ट्राइबल कम्युनिटी’ और हिन्दी में ‘जनजाति’ शब्द का उपयोग किया गया है।
- आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 में भारत के अधिकांश राज्यों में 705 जनजातियां निवास करती थीं, जिनकी संख्या लगभग 104 मिलियन थी।
- जनजातीय विश्वास और प्रथाएँ प्रायः भूमि और उसकी विशेषताओं को पवित्र मानती हैं। उनमें प्रायः देवत्व की एक उच्च संकल्पना भी होती है।
प्रश्न 4.
‘हिंदू धर्म के समान जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है।’ उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनजातियों में देवताओं की बहुलता के बावजूद हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है। उदाहरण के लिए, अरुणाचल जो सूर्य और चन्द्रमा के मिले-जुले रूप माने गये और इन्हें आगे चलकर परमात्मा माना गया ।
पूर्वी भारत में मुंडा और संथाल जनजातियां अन्य दैविक शक्तियों के साथ सिंगबोंगा की पूजा करती हैं, जिन्हें वे परमेश्वर कहते हैं, जिन्होंने यह सम्पूर्ण विश्व बनाया है।
निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1.
राजकुमार सिद्धार्थ गौतम को ज्ञान की प्राप्ति किस प्रकार और कहाँ हुई?
उत्तर:
(1) लगभग ढाई सहस्त्राब्दी पूर्व राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में जन्म लिया। सिद्धार्थ गौतम राजमहल में एक सुरक्षित वातावरण में बड़े हुए। एक दिन 29 वर्ष की आयु में उन्होंने रथ पर बैठकर नगर में घूमने की इच्छा प्रकट की और उस समय उन्होंने अपने देखा। उन्होंने एक संन्यासी को भी देखा, जो प्रसन्न और जीवन में पहली बार एक वृद्ध एक रोगी और एक शव को शान्त लग रहा था।
(2) इन सबका अनुभव करने के बाद सिद्धार्थ ने अपने राजसी जीवन, अपनी पत्नी और बेटे को त्यागने का विचार, किया और घर त्याग कर दिया।
(3) घर त्याग कर सिद्धार्थ एक सन्यासी की तरह पैदल चलते हुए तथा अन्य संन्यासियों एवं विद्वानों से मिले तथा उन्होंने मानव जीवन में दुःखों के मूल कारण को जानना चाहा।
(4) अन्ततः बोधगया (बिहार) में एक पीपल के वृक्ष के नीचे कई दिनों तक ध्यानरत रहने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और उन्होंने अनुभव किया कि ‘अविद्या’ और ‘मोह’ ही मानवीय कष्ट के कारण हैं। सिद्धार्थ गौतम ने इन दोनों के दूर करने की विधि संकल्पित की। इसके बाद सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए।
प्रश्न 2.
राजकुमार वर्धमान को ‘अनंत ज्ञान’ की प्राप्ति कैसे हुई और ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्हें किस नाम से जाना जाने लगा?
उत्तर:
- राजकुमार वर्धमान का जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली (वर्तमान बिहार) नगर के समीप हुआ था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपना घर त्यागने और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज का निर्णय लिया।
- वर्धमान ने संन्यासी जीवन के अनुशासन का पालन किया और 12 वर्ष बाद उन्हें ‘अनंत ज्ञान’ या सर्वोपरि विवेक प्राप्त हुआ।
- अनंत ज्ञान की प्राप्ति के बाद उन्हें ‘महावीर’ या ‘महानायक’ के नाम से जाना जाने लगा और उन्होंने अपने अर्जित ज्ञान का उपदेश देना आरंभ किया।
- महावीर के मत को जैन मत जाना गया। जैन मत के उपदेशों में अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह और सभी जीवों की परस्पर संबद्धता एवं निर्भरता आदि शामिल हैं।
प्रश्न 3.
भारतीय जनजातीय धर्मों पर हुए हिंदू दर्शन के प्रभाव तथा हिन्दू दर्शन के विकास क्रम में जनजातीय आस्थाओं के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(1) भारत में लोक और जनजातीय परम्पराओं तथा हिंदू दर्शन की प्रमुख विचारधाराओं के बीच निरन्तर सम्पर्क होता रहा है। इस सम्पर्क के फलस्वरूप दोनों ही दिशाओं में देवताओं, संकल्पनाओं, दंतकथाओं और रीतियों का आपस में आदान-प्रदान होता रहा है।
उदाहरण के लिए, परम्परा के अनुसार पुरी के भगवान जगन्नाथ मूल रूप से जनजातीय देवता था। इसी प्रकार देवी माताओं के जिन विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, वे भी मूल रूप से जनजातीय देवियाँ थीं। दूसरी तरफ, महाभारत और रामायण के अनेक रूपों को तथा हिंदू देवों को कुछ जनजातियों द्वारा काफी समय पहले ही अपना लिया गया था।
(2) लोक, जनजातियों और हिंदू विश्वास में अनेक समान प्रकार की संकल्पनाएं थीं, जैसे तीनों में प्राकृतिक तत्वों को पवित्र माना गया। इसके कारण इन तीनों के परस्पर संपर्क इतने लम्बे समय से तथा इतनी सहजता से होते रहे।
(3) देवताओं में इतनी बहुलता के बावजूद, हिंदू धर्म के समान अनेक जनजातियों में भी उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना है। अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों द्वारा डोनीपोलो की पूजा करना, मध्यभारत के क्षेत्र में खंडोबा भगवान के सम्बन्ध में तथा पूर्वी भारत में मुंडा और संथाल जनजातियों द्वारा दैविक शक्तियों के साथ सिंगबोंगा की पूजा करना आदि उच्चतर देवत्व या परमात्मा की संकल्पना के उदाहरण हैं।
उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि जनजातीय धर्मों पर हुए हिंदू दर्शन के प्रभाव को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है तथा हिंदू दर्शन भी जनजातीय आस्थाओं से प्रभावित हुआ है।
भारत की सांस्कृतिक जड़ें Class 6 Notes
भारतीय संस्कृति अनेक सहस्त्राब्दियों वर्ष पुरानी है। अनेक विद्वानों के अनुसार इसकी कुछ जड़ें सिंधु- सरस्वती सभ्यता की ओर जाती हैं। आगे चलकर समय बीतने के साथ भारत में सैकड़ों प्रकार के जीवन-दर्शन उभरे। कुछ प्रारंभिक दर्शन जिन्होंने भारत को एक विशिष्ट व्यक्तित्व वाले देश के रूप में आकार दिया है। ये निम्न प्रकार हैं-
I. वेद और वैदिक संस्कृति
(क) वेद क्या हैं?
- वेद का अर्थ है- ज्ञान (विद्या)।
- वेद चार हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।
- ये भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं और वस्तुतः विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक।
- वेदों में हजारों कविताओं और गीतों (ऋचाओं) के रूप में प्रार्थनाएँ हैं। ये सप्त सिंधु क्षेत्र में रची गईं। इनका मौखिक पाठ किया जाता था।
- चारों वेदों में ऋग्वेद प्राचीनतम ग्रंथ है। वेदों की रचना पांचवीं से दूसरी सहस्त्राब्दी सा.सं. पू. के बीच हुई।
- ये ग्रंथ 100 से 200 पीढ़ियों तक गहन प्रशिक्षण के माध्यम मौखिक रूप बिना किसी परिवर्तन के आगे संप्रेषित किए गए।
- वैदिक ऋचाओं की रचना ऋषियों और ऋषिकाओं द्वारा संस्कृत भाषा के एक प्रारंभिक रूप में की गई।
- इन्होंने देवी और देवताओं को एक ही माना। इनका कहना था कि परम सत्य एक ही है किन्तु मनीषी इसे अनेक नाम देते हैं। सत्य ईश्वर का दूसरा नाम था।
- ॠग्वेद के अंतिम मंत्रों में लोगों के बीच एकता का भी आह्वान किया गया है।
(ख) वैदिक समाज-
- प्रारंभिक वैदिक समाज विभिन्न जनों (लोगों के बड़े समूहों) में संगठित था। ऋग्वेद में ही ऐसे 30 से अधिक जनों की सूची दी गई है।
- ये जन अपने समाज का शासन चलाते थे।
- वैदिक ग्रंथों में अनेक व्यवसायों का उल्लेख मिलता है, जैसे- किसान, बुनकर कुम्हार, शिल्पकार, बढ़ई, आरोग्यकर्ता, नाई, पुजारी आदि।
(ग) वैदिक दर्शन-
- वैदिक संस्कृति में अनेक अनुष्ठान (यज्ञ आदि) विकसित हुए। ये विभिन्न देवों के प्रति हितों और मंगल के लिए निर्देशित थे।
- दैनिक अनुष्ठान सामान्य रूप प्रार्थनाओं और अग्निदेव को आहुति के रूप में होते थे, जो समय के साथ अधिक जटिल होते चले गए।
- उपनिषद वैदिक संकल्पनाओं के आधार पर रचित हैं। इनसे कुछ नई संकल्पनाएं प्राप्त होती हैं, जैसे- पुनर्जन्म, और कर्म, वेदान्त दर्शन, आत्मा की संकल्पना तथा सर्वे भवन्ति सुखिनः की प्रार्थना तथा सबके लिए रोग और दुःख से मुक्ति की कामना।
- प्रथम सहस्त्राब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वेदों से योग का विकास हुआ।
- इन सभी दर्शनों से मिलकर ‘हिन्दू दर्शन’ बना।
II. बौद्ध मत
- कुछ अन्य दर्शनों का भी आविर्भाव हुआ, जिन्होंने वेदों की प्रभुता को स्वीकार नहीं किया और अपनी स्वयं की पद्धति विकसित की, उनमें से एक बौद्धमत है।
- बौद्धमत का प्रतिपादन लुंबिनी (नेपाल) के राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने किया। उनका जन्म 560 सा.सं.पू. का माना जाता है। 29 वर्ष की आयु में मानव जीवन में दुःखों के मूल कारण की खोज में अपना गृह त्याग दिया और सन्यासी हो गए। बोधगया में एक पीपल के वृक्ष के नीचे कई दिनों तक ध्यानरत रहने के बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
- उन्होंने अनुभव किया कि ‘अविद्या’ और ‘मोह’ मानवीय कष्ट के स्रोत हैं और इन दोनों कारणों को दूर करने की विधि संकल्पित की। इसके बाद वे बुद्ध के नाम से जाने गए। जिसका अर्थ- ज्ञानी या जागृत व्यक्ति।
- बुद्ध ने जो ज्ञान प्राप्त किया, उसका उपदेश देना प्रारंभ किया। उनके उपदेशों में ‘अहिंसा’ और ‘निष्ठापूर्वक आंतरिक अनुशासन’ पर बल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिसमें सत्य और धर्म निवास करते हैं, वह व्यक्ति शुद्ध हैं तथा स्वयं पर विजय पाना सबसे बड़ी उपलब्धि है।
- बुद्ध ने संघ की स्थापना की जो भिक्षुओं और भिक्षुणियों का एक समुदाय है। इन्होंने स्वयं को बुद्ध के उपदेशों के पालन व प्रसार के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया है।
III. जैन मत
- एक अन्य लोकप्रिय दर्शन जैन मत है। यद्यपि इस मत को अधिक प्राचीन माना जाता है। इसके अन्तिम प्रवर्तक महावीर स्वामी हैं। इनका जन्म छठी शताब्दी सा.सं.पू. के आरंभ में वैशाली नगर के समीप हुआ था। इनका बचपन का नाम वर्धमान था। 30 वर्ष की आयु में इन्होंने घर त्यागने और आध्यात्मिक खोज का निर्णय लिया। 12 वर्ष के बाद इन्हें अनंत ज्ञान प्राप्त हुआ और इन्हें महावीर के नाम से जाना जाने लगा।
- महावीर स्वामी ने अपने अर्जित ज्ञान का उपदेश देना प्रारंभ किया। उनके उपदेशों में अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह शामिल हैं। जैन मत में सभी जीवों की आपसी संबद्धता और आपसी निर्भरता पर भी बल दिया।
- बौद्ध मत और जैनमत, दोनों में ही भिक्षुओं और भिक्षुणियों ने देश के सुदूर स्थानों की यात्रा कर अपने-अपने उपदेशों का प्रचार-प्रसार किया। इन्होंने नए विहार बनाए या गुफाओं में सन्यासी का जीवन बिताया।
IV. अन्य मत
उस समय अन्य अनेक मत भी प्रचलित थे, जैसे चार्वाक दर्शन। इसके अनुसार भौतिक जगत ही एकमात्र सत्य है।
V. लोक और जनजातीय जड़ें
- प्राचीन भारत में ‘जनजाति’ के लिए कोई शब्द नहीं था, जनजातियां केवल अलग-अलग जन थीं, जो विशेष परिवेश में रहती थीं, जैसे- -वन या पहाड़।
- 2011 में भारत के अधिकांश राज्यों में 705 जनजातियां निवास करती थीं, जिनकी संख्या लगभग 104 मिलियन थी।
- हजारों वर्षों से जनजातीय विश्वास, प्रथाओं और कलाओं का हिंदू दर्शन के साथ मेलजोल होता रहा है। इनके बीच दोनों ओर से अबाधित आदान-प्रदान चलता रहा है। जनजातीय विश्वास, प्रथाएं आमतौर पर भूमि और उसकी विशेषताओं को पवित्र मानती हैं और उनमें प्रायः देवत्व की एक उच्च संकल्पना भी होती है।