This poem is about a funny moment between a father and his child. The poem shows how the father forgets where he kept his spectacles, even though they are right on his head! It uses simple and funny words to make readers smile. The poem teaches us to be more careful and aware of things around us. It also shows how small mistakes can make us laugh and bring joy to everyday life.
Detailed Summary
First Stanza
Today our papa Is searching everywhere, He has lost his spectacles, It was his only pair!
The poet tells us that Papa has lost his spectacles. It was his only pair, so he is very worried. He is searching all around the house to find them.
Second Stanza
He can’t read the newspaper, He can’t watch TV, He can’t cut the vegetables, Oh! Where can it be?
This stanza tells us how Papa’s day is affected without his glasses. He cannot read, watch television, or even cut vegetables. The poet uses simple lines to show how one small problem is making everything difficult for Papa.
Third Stanza
He checked inside his pockets, He glanced under his chair, He searched near the window, He looked everywhere.
In this stanza, Papa is shown looking for his spectacles in many places. He checks his pockets, looks under the chair, and searches near the window. But he still cannot find them.
Fourth Stanza
I told him, “Stop, Papa!” I went up close, and said! “Papa, your spectacles Are right there on your head!”
In the final stanza, the child notices something very silly – the spectacles were on Papa’s head all along! The child tells him gently, and this makes the ending light and funny.
Try yourself:
Where does Papa search for his spectacles?
A.In his pockets
B.On the table
C.In the kitchen
D.Under the bed
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Theme/Message
The poem highlights the sweet and caring bond between a father and child. It shows how children can also help and support their parents in small but meaningful ways.
It brings out the humour in everyday life. The simple act of losing spectacles becomes a funny moment, reminding us to smile at small problems.
The child’s quick observation teaches us the importance of being aware. Sometimes, we search everywhere for something that is right in front of us.
It shows how staying calm and patient can solve problems. The child helps without getting angry or making fun, showing kindness and support.
The poem reminds us that family life is full of such small, funny moments. These moments create joy, laughter, and lasting memories.
Difficult Words
Spectacles: Glasses used to correct vision.
Frantic: Feeling or showing a lot of fear and worry.
Observe: To watch carefully.
Newspaper: A publication containing news and information.
लेखक परिचयप्रसिद्ध वैज्ञानिकजगदीशचन्द्र बसु का बचपन प्रकृति का अवलोकन करते हुए बीता। पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से प्रेम करते हुए उनकी शिक्षा आंशिक रूप से जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और विज्ञान कथा लेखन में स्वाभाविक रूप से हुई। वे एक बहुस्तरीय व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में एक निरंतर जीवनदानी और प्रेरणाप्रदाता के रूप में देखा जाता है, और वे अपने परिवार के प्रति जागरूक थे। इस प्रकार, जगदीशचन्द्र बसु ने न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से, बल्कि साहित्यिक दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठता की मिसाल प्रस्तुत की। ‘पेड़ की बात’ का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद संक्रांत ने किया है, जिसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने सर्वव्यापीता को भी सामने रखा।
मुख्य विषय
कहानी का मुख्य विषय पेड़ों का महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता है। जगदीशचन्द्र बसु हमें बताते हैं कि पेड़ न केवल हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं, बल्कि वे हमारे पर्यावरण को भी संतुलित रखते हैं। पेड़ हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जलवायु को नियंत्रित करते हैं, और जीवों को आश्रय देते हैं। कवि के अनुसार, पेड़ जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और हमें उनकी रक्षा करनी चाहिए।
कहानी का सार
बीज से पेड़ बनने की प्रक्रिया
लेखक ने बताया कि जब बीज को मिट्टी में बोया जाता है, तो वह धीरे-धीरे अंकुरित होता है। यह अंकुर मिट्टी के नीचे से ऊपर की ओर बढ़ता है। अंकुर का एक हिस्सा नीचे की ओर जड़ बनता है, जो मिट्टी में गहराई तक जाती है, जबकि दूसरा हिस्सा तने के रूप में ऊपर की ओर बढ़ता है। जड़ें मिट्टी से पोषक तत्व और पानी अवशोषित करती हैं, जिससे पेड़ का विकास होता है। तना पेड़ को मजबूती देता है और पत्तियों को सूरज की रोशनी तक पहुँचाता है।
पेड़-पौधों का भोजन ग्रहण करना
लेखक ने पेड़-पौधों के भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया का वर्णन किया है। पेड़-पौधों के “दाँत” नहीं होते, इसलिए वे ठोस भोजन नहीं कर सकते। वे मिट्टी से पानी और घुले हुए पोषक तत्वों को जड़ों के माध्यम से अवशोषित करते हैं। इसके अलावा, पत्तियाँ सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके “फोटोसिंथेसिस” की प्रक्रिया के माध्यम से ऊर्जा का उत्पादन करती हैं। पत्तियों में स्थित छोटे-छोटे रोमछिद्र (स्टोमेटा) हवा से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, जिसे पेड़ ऑक्सीजन में परिवर्तित करके वातावरण में छोड़ते हैं।
प्रकाश और पेड़-पौधे
प्रकाश पेड़-पौधों के जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेखक बताते हैं कि पेड़-पौधों की पत्तियाँ हमेशा प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रयास करती हैं। अगर किसी पौधे को अंधेरे में रखा जाए, तो वह प्रकाश की तलाश में अपनी दिशा बदलता है। वनस्पतियों में एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा होती है, जिसमें सभी पौधे सूर्य के प्रकाश को पाने के लिए तेजी से ऊपर की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं। बेल-लताएँ भी पेड़ों से लिपटकर ऊपर की ओर बढ़ती हैं ताकि वे भी सूर्य की रोशनी प्राप्त कर सकें।
पेड़-पौधों का पर्यावरणीय योगदान
पेड़-पौधे न केवल ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, बल्कि वे हमारे वातावरण को भी स्वच्छ रखते हैं। जब हम सांस लेते हैं, तो हम कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जो पेड़-पौधों के लिए भोजन का स्रोत बनता है। पेड़ इस कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके वातावरण को शुद्ध करते हैं। इसके अलावा, पेड़-पौधे अपनी पत्तियों और शाखाओं से पर्यावरण में सुखद सुगंध और हरियाली का अनुभव कराते हैं, जिससे मानव जीवन को मानसिक और शारीरिक संतुलन मिलता है।
पेड़-पौधों की संरचना और जीवन
लेखक ने बताया कि पेड़-पौधे भी जीवित होते हैं और उन्हें भी हमारी तरह भोजन, पानी, और प्रकाश की आवश्यकता होती है। पेड़-पौधे जड़ों, तनों, और पत्तियों के माध्यम से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। जैसे-जैसे पेड़ बड़ा होता है, वह अपनी शाखाओं और पत्तियों के माध्यम से बढ़ता जाता है और अंततः एक विशाल पेड़ बन जाता है।
प्राकृतिक संसाधनों का संचय
पेड़ अपने जीवन के दौरान अपने शरीर में रस और पोषक तत्वों का संचय करते हैं, जिससे वे अपनी संतानों, यानी बीजों को पोषण प्रदान कर सकते हैं। पेड़ अपने जीवन के अंत में भी अपनी संतानों के लिए सब कुछ समर्पित कर देता है।
पेड़ों का अंत
जब पेड़ का जीवन समाप्त होने को आता है, तो उसकी शाखाएँ और पत्तियाँ सूखने लगती हैं। धीरे-धीरे, पेड़ की शाखाएँ टूटने लगती हैं, और अंत में पूरा पेड़ जड़ सहित धरती पर गिर जाता है। लेकिन अपने जीवन के अंत से पहले, पेड़ अपनी संतानों के रूप में बीज छोड़ जाता है, जो आगे चलकर नए पेड़ बनते हैं।
कहानी की मुख्य घटनाएं
बीज का अंकुरित होना और पौधे में बदलना।
पौधे का तना और जड़ का विकास।
पेड़-पौधों का भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया।
पत्तियों का सूर्य के प्रकाश की ओर मुड़ना।
पेड़ों द्वारा विषाक्त वायु को शुद्ध करना।
पेड़ का संतान उत्पन्न करने के लिए फूलों का निर्माण।
मधुमक्खियों और तितलियों का पराग-कणों को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाना।
पेड़ का अंत में सुख कर गिर जाना।
कहानी से शिक्षाकहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन का प्रत्येक हिस्सा महत्वपूर्ण होता है और प्रकृति की हर छोटी-बड़ी चीज का अपना महत्व है। पेड़-पौधों की जीवन यात्रा हमें धैर्य, संघर्ष, और निस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा देती है। वे हमारे जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं। हमें पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए।
शब्दावली
अंकुर: बीज से निकलने वाला नया पौधा
तना: पौधे का ऊपर की ओर बढ़ने वाला हिस्सा
जड़: पौधे का मिट्टी के अंदर रहने वाला हिस्सा
तरल द्रव्य: पेड़-पौधों का द्रव भोजन
अंगारक वायु: पेड़ों द्वारा शुद्ध की जाने वाली विषाक्त वायु
पराग-कण: फूलों में पाए जाने वाले सूक्ष्म कण
मृदंग: वृक्ष का भोजन बनाने का अंग
संवर्द्धन: वृक्ष का विकास
निष्कर्ष“पेड़ की बात” कहानी हमें यह सिखाती है कि पेड़-पौधों का जीवन कितना महत्वपूर्ण है और वे हमारे पर्यावरण के लिए कितने आवश्यक हैं। उनकी निस्वार्थता और जीवन के प्रति उनका संघर्ष हमें प्रेरित करता है। हमें पेड़ों का संरक्षण करना चाहिए और उन्हें संरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। पेड़-पौधे हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और हमें उनके महत्व को समझना और उन्हें बचाना चाहिए।
लेखक परिचयआपने जो रोचक यात्रा-वृत्तांत पढ़ा है, वह हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा लिखा गया है। ‘दिनकर’ की रचनाओं की विशेषता भारत और उसकी संस्कृति है। उनकी रचनाओं में वीरता, उत्साह और देशभक्ति का भाव प्रमुख रूप से पाया जाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी भारत का गौरव-गान उनकी रचनाओं का प्रमुख विषय रहा। उन्होंने बच्चों के लिए भी पुस्तकें लिखी हैं, जैसे— मिर्च का मजा, पटाखों की छुट्टी और सूरत का ब्याह आदि।
मुख्य विषय
इस पाठ का मुख्य विषय प्रवासी भारतीयों की मातृभूमि के प्रति लगाव और उनकी संस्कृति का संरक्षण है। लेखक ने बताया है कि कैसे मॉरीशस जैसे देश में बसे भारतीय अपनी भारतीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखे हुए हैं। यह पाठ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
कहानी का सार
लेखक का यात्रा विवरण
कहानी “हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान” में लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ अपने मॉरिशस यात्रा के अनुभवों को साझा करते हैं। लेखक की यात्रा 15 जुलाई को दिल्ली से शुरू होती है। 16 जुलाई को वे मुंबई से और 17 जुलाई को नैरोबी (केन्या) से मॉरिशस के लिए रवाना होते हैं। नैरोबी में उनके पास एक रात और दो दिन ठहरने का समय होता है, इसलिए वे नैरोबी के नेशनल पार्क में घूमने जाते हैं।
नैरोबी का नेशनल पार्क एक विशाल जंगल है, जहाँ पेड़ों की कमी और घास की बहुतायत है। यहाँ वे सिंहों को देखने की कोशिश करते हैं। काफी समय तक सफर करने के बाद वे एक जगह पहुँचते हैं, जहाँ सिंह आराम कर रहे होते हैं। सिंहों की गतिविधियों को देखकर लेखक को एहसास होता है कि ये सिंह पर्यटकों की उपस्थिति से बिल्कुल अप्रभावित हैं। इसी दौरान कुछ दूर हिरनों का एक झुंड दिखता है, जिनके बीच एक जिराफ खड़ा होता है। जैसे ही सिंहों की नजर हिरनों पर पड़ती है, वे शिकार की तैयारी करने लगते हैं। हिरनों के झुंड में हलचल होती है, लेकिन वे तुरंत भागने के बजाय सतर्क होकर खड़े रहते हैं।
मॉरिशस का परिचय
मॉरिशस एक छोटा-सा द्वीप है जो हिंद महासागर में स्थित है। लेखक ने मॉरिशस को ‘हिंद महासागर का मोती’ और ‘भारत-सागर का सबसे खूबसूरत सितारा’ कहा है। मॉरिशस का क्षेत्रफल लगभग 720 वर्गमील है और यह द्वीप चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। मॉरिशस की अधिकांश जनसंख्या भारतीय मूल की है, जिनमें से 67 प्रतिशत लोग भारतीय वंश के हैं और उनमें से अधिकांश हिंदू हैं। इस कारण मॉरिशस को ‘छोटा-सा हिंदुस्तान’ भी कहा जा सकता है।
भारतीय संस्कृति का प्रभाव
मॉरिशस में भारतीय संस्कृति का गहरा प्रभाव है। यहां के लोग भारतीय त्योहारों को बड़े धूमधाम से मनाते हैं, जैसे दशहरा, और वे धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मॉरिशस के मध्य में स्थित ‘परी-तालाब’ नामक झील एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहां पर भक्तगण कांवड़ लेकर जाते हैं और वहां की पवित्र जल को अपने गांव के मंदिरों में चढ़ाते हैं। यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
भाषा और समाज
मॉरिशस में मुख्य भाषा फ्रेंच है, लेकिन अधिकांश भारतीय मूल के लोग भोजपुरी बोलते हैं, जो वहां की दूसरी सबसे प्रमुख भाषा है। यहां की भोजपुरी भाषा में फ्रेंच के शब्द भी मिलते हैं, जिससे यह भाषा और भी अनोखी बन जाती है। भारतीय मूल के लोगों ने मॉरिशस की कृषि, विशेषकर गन्ने की खेती और चीनी उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत और मॉरिशस के संबंध
लेखक ने मॉरिशस को भारत का एक हिस्सा माना है, क्योंकि वहां के लोग भारतीय संस्कृति और परंपराओं का पालन करते हैं। मॉरिशस में भारतीय संस्कृति को देखने के बाद लेखक को गर्व महसूस होता है, और वह इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारतीय संस्कृति कितनी जीवंत और स्थायी है।
कहानी की मुख्य घटनाएं
लेखक की यात्रा दिल्ली से शुरू होती है और वे नैरोबी (केन्या) में रुकते हैं, जहाँ वे नेशनल पार्क में सिंहों को देखते हैं।
लेखक नैरोबी से मॉरिशस पहुँचते हैं, जहाँ वे मॉरिशस की भारतीय संस्कृति और वहाँ के लोगों के बारे में बताते हैं।
मॉरिशस में भारतीय समुदाय की प्रमुखता, उनकी धार्मिकता, और उनकी सांस्कृतिक पहचान को कहानी में विस्तार से बताया गया है।
लेखक मॉरिशस के प्रमुख त्यौहार शिवरात्रि का वर्णन करते हैं, जिसमें भारतीय लोग परी-तालाब पर जाकर शिवजी की पूजा करते हैं।
लेखक मॉरिशस के मंदिरों और शिवालयों की स्वच्छता और सुरम्यता की प्रशंसा करते हैं, और भारत में भी ऐसे स्थानों को स्वच्छ रखने का आग्रह करते हैं।
कहानी से शिक्षाइस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारतीय संस्कृति और परंपराएँ अत्यंत प्राणवंत और चिरायु हैं, चाहे भारतीय कहीं भी क्यों न रहें। उन्होंने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा है और विदेश में भी अपनी संस्कृति को जीवित रखा है। यह हमें गर्व करने का अवसर देती है कि भारतीय अपनी पहचान को बनाए रखने में सक्षम हैं और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान रखते हैं।
शब्दावली
यात्रा वृत्तांत: एक यात्रा के दौरान के अनुभवों का वर्णन
नैरोबी: केन्या की राजधानी
सिंह: शेर
मॉरिशस: हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप राष्ट्र
परी-तालाब: मॉरिशस में स्थित एक झील, जिसे हिंदुओं ने धार्मिक महत्व दिया है
शिवरात्रि: हिंदुओं का एक प्रमुख धार्मिक पर्व
काँवर: शिवजी की पूजा के लिए जल भरने के लिए प्रयोग में आने वाला बर्तन
निष्कर्ष“हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान” एक प्रेरणादायक कहानी है, जो मॉरिशस में बसे भारतीय समुदाय की धार्मिकता, सांस्कृतिक पहचान, और स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। यह कहानी भारतीय संस्कृति की शक्ति और उसकी प्राणवत्ता का प्रतीक है, जो हमें अपनी पहचान पर गर्व करने का संदेश देती है। कहानी से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि भारतीय जहाँ भी जाते हैं, वहाँ अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेज कर रखते हैं, जिससे वह स्थान भी छोटा-सा हिंदुस्तान बन जाता है।
इस कविता के रचयिता श्याम नारायण पाण्डेय हैं, जिनका जन्म 1907 ई. में हुआ था। पाण्डेय जी वीर रस के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनकी सबसे चर्चित रचना है- ‘हल्दीधाटी’, जिसका प्रकाशन 1939 में हुआ था। ‘चेतक की वीरता’ शीर्षक कविता उसी रचना ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है। इस रचना ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था। पाण्डेय जी का निधन 1991 ई. में हुआ।
मुख्य विषय
“चेतक की वीरता” का मुख्य विषय है महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता और निष्ठा। यह कविता वीर रस में लिखी गई है और एक पशु के साहस तथा अपने स्वामी के प्रति उसकी निष्ठा को प्रदर्शित करती है। इसमें चेतक की कुशलता, निडरता और युद्ध में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका का वर्णन किया गया है। यह कविता पाठकों में देशभक्ति और वीरता की भावना को जागृत करती है।
कविता का सार‘चेतक की वीरता’ कविता में कवि ने चेतक की वीरता और उसकी अद्वितीय क्षमता का वर्णन किया है। चेतक युद्ध के मैदान में चौकड़ी भरकर अथवा छलांग लगाकर अपनी वीरता को दिखाता है, उसके चलने के तीव्र गति से ऐसा प्रतीत होता है जैसे मानो वह हवा से बातें कर रहा हो अथवा हवा का सामना कर रहा हो ।
राणा प्रताप का कोड़ा चेतक के तन पर कभी भी नहीं गिरता था, क्योंकि वह इतना समझदार था कि अपने स्वामी की आज्ञा को भली-भाँति समझ जाता था। वह शत्रुओं के मस्तक पर इस तरह से आक्रमण करता था जैसे मानो कोई आसमान से घोड़ा ज़मीन पर उतर आया हो अर्थात वह बहुत तेजी से अपने शत्रुओं के सिर पर प्रहार करता था।
अगर हवा के माध्यम से भी घोड़े की लगाम जरा-सी भी हिल जाती थी तो वह तुरंत अपनी सवारी को लेकर अर्थात राणा प्रताप को लेकर तीव्र गति से उड़ जाता था। अर्थात बहुत तेजी से दौड़ने लगता था । राणा प्रताप को जिस तरह मुड़ना होता वह उनकी आँखों के पुतली के घुमने से पूर्व ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता था, कहने का तात्पर्य यह है कि चेतक अपने स्वामी की हर प्रतिक्रिया को भली-भाँति समझ जाता था।
चेतक अपनी कौशलता और वीरता का परिचय अपनी चाल के द्वारा दिखाता । तीव्र गति से दौड़ना और निडर होकर अपने शत्रुओं पर आक्रमण करना यह उसकी वीरता का स्मारक था। वह निडर होकर युद्ध के समय में भयानक भालों और तलवारों से सुसज्जित सेनाओं के बीच में जाकर उन पर प्रहार करता और नहरों-नालों आदि को पार करता हुआ सरपट अर्थात बहुत तेज गति से बाधाओं में फँसने के बाद भी वह निकल जाता ।
युद्ध के क्षेत्र में ऐसा कोई स्थान नहीं था जहाँ पर चेतक ने अपने शत्रुओं पर प्रहार न किया हो। वह किसी एक स्थान पर दिखता तो पर जैसे ही शत्रु उस पर आक्रमण करने के लिए वहाँ पहुँचते तो वह वहाँ से तुरंत गायब हो जाता फिर वह कहीं दूसरी जगह दिखता। ठीक उसी प्रकार बाद में वहाँ से भी गायब हो जाता। अतः वह युद्ध के सभी स्थलों पर अपनी वीरता का परचम लहराता था ।
वह नदी की लहरों की भाँति आगे बढ़ता गया। वह जहाँ भी जाता कुछ क्षण के लिए रुक जाता फिर अचानक विकराल, बिजली की चमक की तरह बादल का रूप धारण करके अपने दुश्मनों पर प्रहार करता ।
घोड़े की टापों से दुश्मन पूरी तरह से घायल हो गए। उनके भाले और तरकस सभी ज़मीन पर पड़े थे। चेतक की वीरता का ऐसा पराक्रम देखकर बैरी दल दंग रह गया ।
कविता की व्याख्या
(1) रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था। गिरता न कभी चेतक-तन पर राणा प्रताग का कोड़ा था। वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर या आसमान पर घोड़ा था।
व्याख्या: कवि बताते हैं कि महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक युद्धभूमि में इतनी गति से दौड़ता था कि वह एक अनोखा घोड़ा बन गया था। चेतक इतनी तेज दौड़ता था कि ऐसा लगता था कि वह हवा के साथ मुकाबला कर रहा हो। वह हमेशा इतना सतर्क रहता था कि उसके शरीर पर कभी भी कोड़ा मारने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वह शत्रुओं के सिर के ऊपर से इस तरह दौड़ता था जैसे वह आकाश में दौड़ रहा हो। वह शत्रुओं के बीच से होते हुए एक छोर से दूसरे छोर तक इतनी तेजी से दौड़ता था कि वह किसी आकाशीय घोड़े की तरह प्रतीत होता था।
(2) जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। राणा की पुतली फिरी नहीं तब तक चेतक मुड़ जाता था। कौशल दिखलाया चालों में उड़ गया भयानक भालों में। निर्भीक गया वह ढालों में सरपट दौड़ा करवालों में।
व्याख्या: कवि चेतक की सजगता को बताते हुए कहता है कि यदि थोड़ी सी हवा से भी उसकी लगाम हिल जाती, तो वह तुरंत सवार के इशारे को समझकर हवा में उड़ जाता था। राणा प्रताप की आँख की पुतली के इशारे पर वह तुरंत दिशा बदल लेता था। चेतक अपनी चाल में इतना कुशल था कि वह भयंकर भालों के बीच से भी बिना किसी डर के निकल जाता था। वह ढालों की परवाह किए बिना निडरता से उनके बीच से दौड़ता चला जाता था। तलवारों के बीच भी वह बेखौफ दौड़ता रहा। किसी भी प्रकार की बाधा उसे रोक नहीं सकती थी। उसकी युद्ध-कला और साहस अविश्वसनीय था।
(3) है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं वह वहीं रहा है वहाँ नहीं। थी जगह न कोई जहाँ नहीं किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं। बढ़ते नद-सा वह लहर गया वह गया गया फिर ठहर गया। विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग। वैरी-समाज रह गया दंग घोड़े का ऐसा देख रंग।
व्याख्या: चेतक की यह विशेषता थी कि वह कभी भी एक जगह नहीं रुकता था। वह एक स्थान पर होता और अगले पल किसी और स्थान पर दिखाई देता। युद्धभूमि में ऐसी कोई जगह नहीं थी जहाँ वह नहीं पहुँचा हो, अर्थात वह हर जगह मौजूद रहता था। वह हर शत्रु के मस्तक पर दिखाई दे जाता था। वह एक तेज बहती नदी की तरह लहराता हुआ चलता था। कभी-कभी वह बीच में रुक भी जाता था, फिर अचानक वह शत्रु सेना पर भयंकर बझ्र की तरह टूट पड़ता था और शत्रुओं का संपूर्ण नाश कर देता था। वह शत्रु सेना पर घहरा कर बादल की तरह आक्रमण करता था। शत्रु के भाले और तरकश युद्धभूमि में गिर जाते थे, और घोड़े के पैरों की टापों से शत्रु का पूरा दल घायल हो जाता था। शत्रुओं का दल घोड़े की ऐसी वीरता देखकर हैरान रह जाता था।
कविता की मुख्य घटनाएं
चेतक की अद्वितीय चौकड़ी और निराला रूप।
हवा से तेज दौड़ने की क्षमता।
राणा प्रताप का कोड़ा चेतक पर कभी न गिरना।
चेतक का निर्भीक होकर भालों और ढालों में दौड़ना।
अरि की सेना पर वज्र-मय बादल की तरह टूट पड़ना।
वैरी समाज का चेतक के साहस से दंग रह जाना।
कविता से शिक्षा
‘चेतक की वीरता’ कविता हमें अदम्य साहस, वीरता और निर्भीकता की शिक्षा देती है। यह कविता यह भी सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें हार नहीं माननी चाहिए और अपने कौशल और साहस के बल पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
शब्दावली
चौकड़ी: तेज गति से दौड़ना
अरि: शत्रु
मस्तक: सिर
कौशल: निपुणता
भाला: एक प्रकार का हथियार
निषंग: तलवार की म्यान
हय-टाप: घोड़े के खुर की आवाज़
वीरता: बहादुरी
विकराल: भयानक
निष्कर्ष‘चेतक की वीरता’ कविता वीरता, साहस और अदम्य आत्मविश्वास का प्रतीक है। यह कविता न केवल चेतक के अद्वितीय गुणों का वर्णन करती है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और आत्मविश्वास के साथ विजय प्राप्त की जा सकती है। श्यामनारायण पाण्डेय की यह कविता भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में उत्साह और सांस्कृतिक एकता का संचार करने वाली है।
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (☆) बनाइए-
(1) “जैसे पौधे को भली-भांति सब भेद पता लग गया हो” पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?
उसे उलटा लटकाया गया था।
उसे किसी ने सजा दी थी।
बच्चे को गिला रखना नहीं आया।
प्रकाश ऊपर से आ रहा है।
उत्तर: उसे उलटा लटकाया गया था। (☆)
(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के जैसे कैसे हैं?
हमारे जैसे ही सांस लेते हैं।
हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।
हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।
उत्तर: हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं। (☆)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: पौधे को गमले में औंधा लटकाया गया था। पौधे का सिर नीचे लटक रहा था और जड़े ऊपर की तरफ थीं। एक-दो दिन बाद पौधे को इन सबके भेद का पता चल गया। इस पृथ्वी पर ऐसे जहरीले गैस होते हैं, जिनकी वजह से इस पृथ्वी पर जो जीव-जंतु रहते हैं, वे नष्ट हो जाएंगे। लेकिन, ये जहरीले गैस पेड़-पौधों के लिए उपयोगी होते हैं। पेड़-पौधे इन गैसों का सेवन करके सबको ऑक्सिजन प्रदान करते हैं।पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(क) “पेड़-पौधों के रेशे- रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है। उत्तर: चूँकि सूर्य की किरणों के स्पर्श से ही पेड़-पौधे पल्लवित और पुष्पित होते हैं, इसलिए पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूर्य का प्रकाश व्याप्त होता है। स्पष्ट है कि जब ईंधन जलाया जाता है, तो जो ताप बाहर निकलता है, वह सूर्य द्वारा प्रदत्त प्रकाश ही है।
(ख) “मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।’ उत्तर: मधुमक्खी और तितली के साथ पेड़-पौधों की घनिष्ठता दीर्घ काल से है। वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं, और मधुमक्खी और तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। पौधों, मधुमक्खियों और तितलियों के बीच यह रिश्ता अनंत काल से चला आ रहा है। मधुमक्खी के आगमन से पौधों को भी लाभ होता है, क्योंकि मधुमक्खियाँ एक फूल के पराग कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं, और पराग कण के बिना फूल पक नहीं सकता।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है? उत्तर: बीज के अंकुरित होने में सहयोग मिलता है-
मिट्टी में उपस्थित जल तथा द्रव्य पदार्थों का
सूर्य के प्रकाश का
मनुष्यों द्वारा छोड़ी गई अंगारक वायु (कार्बन डाईऑक्साइड का )
जड़ों द्वारा माटी से रसपान का ।
(ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं? उत्तर: हरी पत्तियों में उपस्थित क्लोरोफिल तथा सूर्य- के प्रकाश की सहायता से पौधे अपना भोजन बनाते हैं। हमारे प्रश्वास द्वारा छोड़ी गई अंगारक वायु यानी दूषित वायु ।लेख की रचना
इस लेख में एक के बाद एक विचार को लेखक ने सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया है। गमले को औंधा लटकाना या मूली काटकर बोना जैसे उदाहरण देकर बात कहना इस लेख का एक तरीका है। अपने तथ्य को वास्तविकता या व्यावहारिकता से जोड़ना भी इस लेख की विशेषता है।
(क) जैसे लेखक ने ‘पेड़ की बात’ कही है वैसे ही अपने आस-पास की चीजें देखिए और किसी एक चीज़ पर लेख लिखिए, जैसे-गेहूँ की बात। उत्तर: गेहु की बुवाई अक्तूबर महीने में की जाती है। गेहु की फसल रबी फसल की एक प्रमुख फसल है। गेहु का सबसे ज्यादा उत्पादन पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली में लिया जाता है। अक्तूबर के समय से गेहु की बुवाई की जाती है। इसकी फसल को सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसके बाद गेहु के लिए कीटनाशकों की छिड़काई करना जरूरी होता है। खेत में कीड़े न फैलें, इसके लिए कीटनाशक का भी उपयोग करना जरूरी होता है। जब गेहु पक जाते हैं तो उसमें कितनी नमी है, इसकी जांच करना जरूरी होता है।
(ख) उसे कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर: यह गतिविधि विद्यार्थियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए है।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए।
(क) “इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।” वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है? उत्तर: वृक्ष समाप्त होने के बाद भी हमारे लिए बहुत कुछ करते हैं। पेड़ों की लकड़ी, ईंधन तथा फर्नीचर बनाने के काम आती है। धरती पर गिरे बीज मिट्टी से द्रव्य पदार्थ लेकर पुनः पौधे के रूप में उगने लगते हैं और फिर एक नया पेड़ बन जाता है। यही चक्र चलता रहता है।
(ख) पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी? उत्तर: पेड़-पौधों के प्रति लेखक की रुचि जागृत होने का सबसे बड़ा कारण था- वातावरण से जुड़ना। पेड़ों की हरियाली, ताज़ी हवा और उपवन के खिले रंग-बिरंगे फूलों को देखकर वह प्रसन्न होते थे। धीरे-धीरे लेखक के मन में यह विचार आया होगा कि ये पेड़ कितने होंगे। प्रवाह चार्ट
बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा किजिये
शब्दों के रूप
नीचे दिए गए चित्र को देखिए यहाँ मिट्टी से जुड़े, कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं जो उसकी विशेषता बता रहे हैं। अब आप पेड़, सर्दी, सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए-
उत्तर: (i) पेड की विशेषता बताने वाले शब्द-
(ii) सर्दी की विशेषता बताने वाले शब्द-
(iii) सूर्य की विशेषता बताने वाले शब्द – पाठ से आगेमेरे प्रिय
नीचे दी गई तालिका से प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए-
आज की पहेली
इस शब्द सीढ़ी में पाठ में आए शब्द हैं। उन्हें पूरा कीजिए और पाठ में रेखांकित कीजिए-
उत्तर:
1. रात 2. तमाम 3. ममता 4. ताप 5. पल्लव 6. वसंत 7. तना 8. नाम 9. मज़बूत 10. तरल 11. लटक 12. कथा
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
(1) हिरण समूह में क्यों खड़े थे?
भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था।
वे भाग चुके हिरणों के लौटने की प्रतीक्षा में थे।
वे बीच खड़े असावधान जिराफ की रक्षा कर रहे थे।
सिंह उनसे उदासीन थे अत: उन्हें कोई खतरा नहीं था।
उत्तर: भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था।(★)
(2) मॉरिशस छोटे पैमाने पर भारतवर्ष ही है। कैसे?
गन्ने की खेती अधिकांशतः भारतीयों द्वारा की जाती है।
अधिकांश जनसंख्या भारत से जाने वालों की है।
सभी भारतीय परली तालाब पर एकत्र होते हैं।
भारत की बहुत-सारी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं।
उत्तर: भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं।(★)
(ख) अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: मैंने पहले प्रश्न का उत्तर इसलिए चुना कि हिरण समूह में खड़े थे ताकि वे सिंह के हमले से बच सकें। भागने पर उन पर सिंह का हमला होने का डर था, इसलिए वे स्थिर खड़े रहे। दूसरे प्रश्न का उत्तर मैंने इसलिए चुना क्योंकि मॉरिशस में भारत की कई विशेषताएँ पाई जाती हैं, जैसे वहाँ की जनसंख्या, भाषा, और संस्कृति में भारतीयता की झलक मिलती है, जिससे वह छोटे पैमाने पर भारत जैसा प्रतीत होता है।पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।” उत्तर: इस पंक्ति का मतलब है कि भारत में रहते हुए, हम अपनी संस्कृति की ताकत और महत्व को पूरी तरह से नहीं समझ पाते हैं। लेकिन जब हम मॉरिशस जैसे विदेशों में जाते हैं, तो हमें अपनी संस्कृति की असली ताकत और जीवन्तता का एहसास होता है। वहाँ भारतीय संस्कृति को देखकर हमें समझ में आता है कि हमारी संस्कृति कितनी मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाली है।सोच-विचार के लिए
इस यात्रा वृत्तांत को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए-
(क) “नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।” नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है? उत्तर: “नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है। ” नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में अंतर- नेशनल पार्क एक बहुत बड़ा जंगल होता है जो शहर से बाहर होता है। इसमें घास अधिक होती है, लेकिन पेड़ कम होते हैं। यहां अच्छी सड़कें होती हैं जहां पर्यटक गाड़ियाँ चला सकते हैं। नेशनल पार्क में शेर और हिरण स्वतंत्र रूप से घूमते हैं। चिड़ियाघर में पशु-पक्षी तथा शेर, हिरण अन्य जानवर एक सीमित क्षेत्र में ही रहते हैं। जिसके लिए कुछ निर्धारित स्थान निवास के लिए बनाए जाते हैं जो कि एक सीमित दायरा होता है।
(ख) “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बत बदतर समझे गए। वे कौन थे जिन्होंने लेखक और अन्य लोगों को पेड़-पौधों और खरपात से भी बदतर समझ लिया था? उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था? उत्तर: “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।” लेखक और अन्य लोग जब दस-बीस मील के भीतर हर सड़क छान लेने के बाद उस स्थान पर पहुँचे जहाँ सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुए थे, तो उन सिंहों को यह जानने की कोई इच्छा नहीं थी कि उन्हें देखने को आने वाले लोग कौन हैं। उन सिंहों ने कभी भी दृष्टिपात नहीं किया मानो ये लोग (लेखक और अन्य लोग) तुच्छातितुच्छ हो और उनकी नजर में आने के योग्य बिल्कुल नहीं है। एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली दूसरे ने देह को ताना, मगर उनकी और नजर नहीं उठाई। तब उन लोगों को लगा कि- हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।
(ग) “मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।” पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है? उत्तर: “मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं। ” मॉरिशस वह देश है जहाँ की जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं तथा जहाँ 53 प्रतिशत लोग हिंदू ही हैं। मॉरिशस में ऊख की खेती और उसके व्यवसाय को जो सफलता मिली है, भारतीयों के कारण मिली है। मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।
(घ) “उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।” भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदुस्तान जैसा कैसे बना दिया है? उत्तर: “उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला ” मॉरिशस वह देश है जिसकी राजधानी पोर्टलुई की गलियों के नाम- कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बंबई हैं तथा जिसके एक मोहल्ले का नाम काशी है। मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्म स्थान भी है। मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। मालिकों की इच्छा थी कि भारतीय लोग भी ईसाई बन जाएँ, लेकिन भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन ईसाई धर्म को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यों से कीजिए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
यात्रा-वृत्तांत की रचना
“इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर को चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा।” इन वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक की आँखों से स्वयं वह दृश्य देख रहे हैं। मानो हम स्वयं भी उस स्थान की यात्रा कर रहे हैं, जहाँ का वर्णन लेखक ने किया है। यह इस यात्रा-वृत्तांत की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि आप इस यात्रा-वृत्तांत को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत सी विशेषताए पता चलेंगी। इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और इसकी रचना पर ध्यान दीजिए। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिख लीजिए। जैसे- लेखक ने बताया है कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे और कब पहुँचा । उत्तर: इस पाठ की कुछ प्रमुख रचनात्मक विशेषताएँ इस प्रकार हैं: (क) लेखक की सिंहों से मुलाकात का वर्णन। (ख) लेखक द्वारा सिंहों और हिरनों के झुंड की गतिविधियों का वर्णन। (ग) लेखक के द्वारा मॉरिशस की भौगोलिक स्थिति का वर्णन। (घ) लेखक के द्वारा शिवरात्रि का वर्णन।अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) “मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्मस्थान भी । ” मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम इस तरह के क्यों रखे होंगे? उत्तर: मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम जैसे “बनारस,” “गोकुल,” और “ब्रह्मस्थान” इसलिए रखे होंगे क्योंकि मॉरिशस में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहते थे। इन नामों के माध्यम से उन्होंने अपनी भारतीय पहचान और धार्मिक आस्था को बनाए रखा है, जिससे वे अपने मूल देश की यादों और परंपराओं को संजोए रखते हैं।
(ख) “कोई सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुए और उन्हें घेरकर आठ-दस मोटरें खड़ी थीं । ” आपने पढ़ा कि केन्या का राष्ट्रीय पार्क पर्यटकों से भरा रहता है। पर्यटक जंगली जानवरों को घेरे रहते हैं। क्या इसका उन पशुओं पर कोई प्रभाव पड़ता होगा ? अपने उत्तर के कारण भी बताइए । (संकेत- राष्ट्रीय पार्क के बंदरों, सिंहों का व्यवहार भी बदल गया है। ) उत्तर: पर्यटकों द्वारा जंगली जानवरों को घेरे रहने का उन पशुओं पर प्रभाव पड़ता है। जानवरों का स्वाभाविक व्यवहार बदल सकता है, जैसे कि बंदर और सिंह मानव उपस्थिति के कारण अधिक आक्रामक या उदासीन हो सकते हैं। लगातार मानव संपर्क से उनकी प्राकृतिक प्रवृत्तियाँ कमज़ोर हो सकती हैं, और वे अपनी प्राकृतिक जीवन शैली से दूर हो सकते हैं।
(ग) “हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ बिल्कुल बेवकूफ की तरह खड़ा था ।” सिंहों के आस-पास होने के बाद भी जिराफ क्यों खड़ा रहा होगा? उत्तर: जिराफ सिंहों के आसपास होने के बावजूद खड़ा रहा होगा क्योंकि जिराफ़ को अपनी ऊंचाई और ताकत पर भरोसा होता है। वह शायद समझ रहा था कि सिंहों का हमला उस पर नहीं, बल्कि हिरनों पर होगा। इसके अलावा, जिराफ का बड़ा आकार और लंबी गर्दन उसे अधिक सुरक्षित महसूस करा सकती है।
(घ) “मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परी – तालाब हो गया है।” उस झील का नाम ‘परी – तालाब’ क्यों पड़ा होगा? उत्तर: उस झील का नाम ‘परी-तालाब’ इसलिए पड़ा होगा क्योंकि वहाँ के लोगों ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार उसे परियों से जोड़ दिया होगा। यह नामकरण उनकी आस्था और मान्यताओं का प्रतीक हो सकता है, जिससे उस स्थान को एक पवित्र और विशेष दर्जा मिला।
(ङ) आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग 50 साल पहले ‘परी – तालाब’ का नाम बदलकर ‘गंगा – तालाब’ कर दिया गया है। मॉरिशस के लोगों ने यह नाम क्यों रखा होगा? उत्तर: लगभग 50 साल पहले ‘परी-तालाब’ का नाम बदलकर ‘गंगा-तालाब’ इसलिए किया गया होगा क्योंकि मॉरिशस के हिंदू लोग गंगा नदी को बहुत पवित्र मानते हैं। गंगा-तालाब नाम रखने से वे उस तालाब को गंगा की पवित्रता और धार्मिक महत्व से जोड़ पाए, जिससे उनकी धार्मिक आस्था को और भी गहराई मिली।शब्दों की बात
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, पुस्तकालय, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।संज्ञा के स्थान पर
(क) “ हिरनों ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्ने हो उठे।” इन पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन वाक्यों में ये शब्द किनके लिए उपयोग किए गए हैं? ये शब्द ‘हिरनों’ के लिए उपयोग में लाए गए हैं। आप जानते ही हैं कि ‘हिरन’ यहाँ एक संज्ञा शब्द है। जो शब्द संज्ञा शब्दों के स्थान पर उपयोग में लाए जाते हैं, उन्हें ‘सर्वनाम ‘ कहते हैं। अब नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम शब्दों को पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए –
1. “हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है।” सर्वनाम: उन्हें
2. “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला ।” सर्वनाम: वे, उन्हें, उन्होंने
(ख) ऊपर दिए गए दोनों वाक्यों को सर्वनाम की जगह संज्ञा शब्द लगाकर लिखिए: उत्तर: “हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन बच्चों को भी पहननी पड़ती है।” “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। भारतीय अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने भारतीयों को भेज दिया था, उस द्वीप को भारतीयों ने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।”पहचान पाठ के आधार पर
आपने इस यात्रा-वृत्तांत में तीन देशों के नाम पढ़े हैं— भारत, केन्या और मॉरिशस। पुस्तकालय या कक्षा में उपलब्ध मानचित्र पर भारत को तो आप सरलता से पहचान ही लेंगे। पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर बाकी दोनों देशों को पहचानिए। उत्तर:
केन्या: पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक देश, जहाँ नैरोबी राजधानी है और वहाँ का नेशनल पार्क मशहूर है।
मॉरिशस: हिंद महासागर में स्थित एक छोटा-सा द्वीप देश, जो अपने भारतीय संस्कृति और गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
पाठ से आगेआपकी बात
(क) “वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा।” क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा, सुना या पढ़ा है जिसके बारे मे आपको लगता है कि आप उसे कभी नहीं भूल सकेंगे? अपने समूह मे बताइये। उत्तर: हम सब परिवार के लोग एक बार कर्नाटक हुब्ली मे गए थे तब वह पर हमने पत्थरो मे बने मंदिर, घर देखे। उसमे भी अलग अलग कृतियों का निर्माण किया गया था। वो जगह हम कभी नहीं भूल पाएंगे।
(ख) “हमें अफ्रीका के शेरों से मुलाकात कर लेनी चाहिए।” ‘मुलाकात’ शब्द का अर्थ है ‘मिलना’। लेकिन यहाँ ‘मुलाकात’ शब्द का भाव है- शेरों को पास से देखना। इसके लिए ‘अपनी आँखों से देखना’, ‘सजीव देखना’ ‘भेंट करना’ आदि शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है। अपनी बात को और अधिक सुंदर और अनोखा रूप देने के लिए शब्दों के इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं। आपने अब तक किन किन पशु पक्षियो से मुलाक़ात की है? वह मुलाक़ात कहा हुई थी बयाइए। उत्तर: हमने एक चिड़ियाघर मे शेर, चीता, बाघ इनसे मुलाक़ात की थी।
(ग) “यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।” आपको किन किन बातों पर गर्व होता है बताइये। (संकेत- ये बातें आपके बारे में हो सकती हैं, आपके परिवार के बारे में हो सकती हैं और किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी आदि के बारे में भी हो सकती हैं।) उत्तर: जब हमे परीक्षा मे मनचाही सफलता मिलती है तब हमे गर्व होता है। कई लोग हमारा देश देखने के लिए दूर से आते है उन्हे हमारे रिरि परंपराए अच्छी लगती है तब भी हमे बहुत गर्व महसूस होता है।प्रशंसा या सराहना विभिन्न प्रकार से
“यह द्वीप हिंद महासागर का मोती है, भारत – समुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।” इस पाठ में लेखक ने मॉरिशस की सराहना में यह वाक्य लिखा है | सराहना करने के लिए ‘दिनकर’ ने द्वीप की तुलना मोती और तारे से की है। किसी की सराहना अनेक प्रकार से की जा सकती है। आप आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए । पहले नाम लिखिए, फिर इनकी प्रशंसा में एक-एक वाक्य लिखिए। शर्त यह है कि प्रत्येक बार अलग तरह से प्रशंसा करनी है-
चित्रात्मक सूचना (इंफोग्राफिक्स)
नीचे दिए गए चित्र को देखिए। इसमें चित्रों के साथ-साथ बहुत कम शब्दों में कुछ जानकारी दी गई है । इसे ‘चित्रात्मक सूचना’ कहते हैं।
(क) इस ‘चित्रात्मक सूचना के आधार पर मॉरिशस के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए। (ख) अपनी पसंद के किसी विषय पर इसी प्रकार की ‘चित्रात्मक सूचना’ की रचना कीजिए, जैसे- आपका विद्यालय, कोई विशेष दिवस, आपके जीवन की कोई विशेष घटना आदि । (संकेत- यह कार्य आप अपने समूह में मिलकर कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी कागज़ पर चित्र चिपका सकते हैं और सूचना को कलात्मक रूप से कम शब्दों में लिख सकते हैं। चित्र बनाए भी जा सकते हैं। आप यह कार्य कंप्यूटर या मोबाइल फोन की सहायता से भी कर सकते हैं।) उत्तर: सन १८३४ मे २ नवंबर को एटलस नाम का जहाज कई भारतीय मज़दूरोनो को एलआरकर मॉरीशस पहुंचा। ब्रिसतीश शासक उन्हे वह पर गन्ने की खेती करने के लिए लेकर गए थे। इस वजह से वह पर भारतीय लोगों की संख्या ज्यादा है। वाहे के भर्तियों पर धर्म बदलने के लिए अनेक जुल्म किए गए लेकिन उन्होने अपना धर्म नहीं बदला। इन लोगों मे ज्यादा तर लोग बिहारी थे। इसके साथ साथ तमिल, टेलगु और मराठी लोगों की सख्या भी बहुत थी। मोरिशस के पहले प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम यह भी मूल भारतीय निवासी थे। मॉरीशस मे भारतीय मूल लोगों की आबादी ६८% है। इसी वजह से मॉरीशस की संस्कृति मे भोजपुरी गीत और हिन्दी फिल्मों का योगदान है।
पत्र
यहाँ ‘दिनकर’ का लिखा एक पत्र दिया जा रहा है। इसे पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर लिखिए। पत्र पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिलकर खोजिए –
(क) पत्र किसने लिखा है? उत्तर: पत्र रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है।
(ख) पत्र किसे लिखा गया है? उत्तर: पत्र चतुर्वेदी जी को लिखा गया है।
(ग) पत्र किस तिथि को लिखा गया है? उत्तर: पत्र 8-7-67 को लिखा गया है।
(घ) पत्र किस स्थान से लिखा गया है ? उत्तर: पत्र सफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली से लिखा गया है।
(ङ) पत्र पाने वाले के नाम से पहले किस शब्द का प्रयोग किया गया है? उत्तर: पत्र पाने वाले के नाम से पहले ‘मान्यवर’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
(च) पत्र-लेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए क्या शब्द लिखा है? उत्तर: पत्र – लेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए ‘आपका’ शब्द लिखा है।
उलझन सुलझाओ
(क) “जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे। ” जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंटों की उड़ान के बाद रात 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था। लेकिन वह पहुँचा लगभग दस बजे । क्यों? उत्तर: आप इसका कारण पता करने के लिए अपने शिक्षकों या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं। वस्तुतः नैरोबी और मॉरिशस के मानक समय में लगभग एक घंटे का अंतर है। जब नैरोबी में नौ बजते हैं तो मॉरिशस में 10 बजे होते हैं।
(ख) नीचे दो घड़ियों के चित्र दिए गए हैं। एक घड़ी भारत के समय को दिखा रही है। दूसरी घड़ी दिखा रही है कि उसी समय मॉरिशस में कितने घंटे और मिनट हुए हैं। इन घड़ियों के अनुसार नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
भारत में क्या समय हुआ है?
मॉरिशस में क्या समय हुआ है?
मॉरिशस और भारत के समय में कितने घंटे और मिनट का अंतर है?
सूर्योदय भारत में पहले होगा या मॉरिशस में?
जिस समय भारत में दोपहर के 12 बजे होंगे, उस समय मॉरिशस की घड़ियाँ कितना समय दिखा रही होंगी?
उत्तर:
भारत की घड़ी में 5:20 मिनट हुए हैं।
मॉरिशस की घड़ी में 3:50 मिनट हुए हैं।
मॉरिशस और भारत के समय में 1 घंटा 30 मिनट का अंतर है।
भारत में पहले सूर्योदय होगा ।
10:30 मिनट ।
आज की पहेली
आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। यहाँ एक वाक्य दिया गया है। आपको पता करना है कि इसका क्या अर्थ है-
उत्तर: मेरा भारत मेरा गौरव
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई रचनाओं को पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें-
चाँद का कुर्ता
मिर्च का मज़ा
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जीवनी
हिमालय के पर्वतीय प्रदेश की मनोरम यात्रा
उत्तर: छात्र/छात्राएँ क्यू. आर. कोड (QR Code) की सहायता से स्वयं करें।
अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करेंगे। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी। (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए –
(1) चतेक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?
चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
उत्तर: चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था। (★)
(2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?
चेतक
महाराणा प्रताप
कवि
शत्रु
उत्तर: महाराणा प्रताप (★)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने? उत्तर: महाराणा प्रताप का घोड़ा बहुत होशियार था। महाराणा प्रताप ने उसे कभी कोड़े नहीं मारे, क्योंकि वह हर वार से महाराणा प्रताप को बचा लेता था। वह इतनी तेजी से अपने शत्रु पर टूट पड़ता, जैसे हाथियों का दल बादल की तरह सब पर टूट पड़ता हो। ‘सवार’ का अर्थ है किसी की सवारी करना, किसी को अपनी पीठ पर बैठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना। इसी तरह चेतक महाराणा प्रताप को अपनी पीठ पर बैठाकर ले जाता था। पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा मे अपने विचार साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका मे लिखीए।
(क) “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।” उत्तर: चेतक शत्रु सेना में बिना डरे चला जाता था। उसे किसी का भी डर नहीं लगता था। अनगिनत भालों के बीच भी वह चला जाता था। वह सर्प की तरह एक जगह से दूसरी जगह चला जाता था। शत्रु सेना से उसे बिल्कुल भी भय नहीं लगता था।
(ख) “भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।” उत्तर: जब महाराणा प्रताप के हाथ से भाला गिर गया, तो राणा प्रताप निशस्त्र हो गए। यह बात चेतक के समझ में आ गई, और फिर वह हवा की तरह दौड़ने लगा। शत्रु सेना भी यह नहीं समझ पा रही थी कि यह क्या हो रहा है। चेतक का एकमात्र उद्देश्य राणा प्रताप के प्राणों की रक्षा करना था। मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही भावार्थ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
शीर्षक
यह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों? उत्तर: हाँ! यह कविता ‘हल्दीघाटी’ काव्यकृति का एक अंश है और इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ बिल्कुल सटीक है, क्योंकि इसमें चेतक के शौर्य, फुर्तीलेपन और समझदारी का वर्णन किया गया है। फिर भी, यदि कोई और शीर्षक दिया जाए, तो वह चेतक के बिना अधूरा सा लगेगा। ‘महाराणा प्रताप और चेतक’ इस शीर्षक का स्थान ले सकता है।कविता की रचना
“चेतक बन गया निराला था।” “पड़ गया हवा को पाला था।” “राणा प्रताप का कोड़ा था । ” ” या आसमान पर घोड़ा था । ” रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए । उत्तर: उड़ / मुड़ चालों / भालों ढ़ालों / करवालों यहाँ / वहाँ जहाँ / कहाँ लहर / ठहर निषंग / अंग दंग / रंग ।शब्द के भीतर शब्द
“या आसमान का घोड़ा था । ” ‘आसमान’ शब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छिपे हैं- आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि । अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए। उत्तर:
चौकड़ी: चौक, कड़ी
बादल: बाद, दल
मस्तक: मस्त, तक
दिखलाया: दिख, लाया, आया
करवाल: कर, रव, आल
विकराल: कर, कराल
पाठ से आगेआपकी बात
“जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।”
(क) ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें। उत्तर: ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ जैसे प्रयोग कविता को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। ये घोड़े की गति और शक्ति को दर्शाते हैं, जिससे कविता और भी जीवंत लगती है।
(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए। उत्तर: “कहीं भी, किसी भी प्रकार का युद्ध नहीं होना चाहिए। कोई भी युद्ध, चाहे वह वाक्-युद्ध हो या बाण-युद्ध, केवल विनाश ही लाता है। इससे हानि केवल किसी एक पक्ष को ही नहीं होती, बल्कि दोनों ही पक्षों को नुकसान उठाना पड़ता है। हार हो या जीत, किसी को कम तो किसी को अधिक नुकसान अवश्य होता है। इससे संबंधों में कड़वाहट आ जाती है और समाज तथा देश बिखर जाते हैं। इसका लाभ नकारात्मक शक्तियों को मिलता है, जिससे विकास रुक जाता है। सामरिक युद्ध में प्रयुक्त होने वाले हथियार इतने विनाशकारी होते हैं कि उनका प्रयोग पूरी मानव जाति के लिए खतरा बन सकता है। मानव समाज के ताने-बाने को बचाने के लिए समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत से करने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता।
“समानार्थी शब्द
कुछ शब्द समान अर्थ वाले होते हैं, जैसे— हय, अश्व और घोड़ा। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं। मल्हार यहाँ पर दिए गए शब्दों से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हों—
उत्तर:
आज की पहेली
बूझो तो जानें
तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान । दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।। उत्तर: जलज |
एक पक्षी ऐसा अलबेला, बिना पंख उड़ रहा अकेला। बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर । उत्तर: पतंग |
रात में हूँ दिन में नहीं, दीये के नीचे हूँ ऊपर नहीं बोलो बोलो – मैं हूँ कौन? उत्तर: अंधेरा |
मुझमें समाया फल, फूल और मिठाई सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई। उत्तर: गुलाबजामुन ।
सड़क है पर गाड़ी नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं। उत्तर: मानचित्र |खोजबीन के लिए
प्रश्न 1: महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए । उत्तर: महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के एक प्रसिद्ध राजा थे। उनका जन्म 9 मई 1540 को उदय सिंह द्वितीय और जयवंताबाई के घर हुआ था। उनके छोटे भाई शक्ति सिंह और जगमाल सिंह थे। महाराणा प्रताप का विवाह बिजोलिया की अजबदे पंवार से हुआ था। 1572 में उदय सिंह द्वितीय की मृत्यु के बाद मेवाड़ की गद्दी को लेकर कुछ समय तक विवाद चला। महाराणा प्रताप के अन्य सौतेले भाई भी गद्दी के दावेदार थे। हालांकि, उनके पिता के दरबार के वरिष्ठ रईस चाहते थे कि प्रताप ही राजगद्दी संभालें, क्योंकि वे उदय सिंह द्वितीय के सबसे बड़े पुत्र थे। इस प्रकार, 1 मार्च 1572 को, 32 वर्ष की आयु में, महाराणा प्रताप मेवाड़ के शासक बने। उदय सिंह द्वितीय के शासनकाल में मेवाड़ का उपजाऊ पूर्वी भाग मुगल साम्राज्य ने अपने अधीन कर लिया था, जबकि पश्चिमी भाग सिसोदिया राजपूतों के पास था। 1572 में ही मुगल सम्राट अकबर ने महाराणा प्रताप को मुगल साम्राज्य का जागीरदार बनाने के लिए कई प्रयास किए। उस क्षेत्र के अन्य राजपूत राजाओं ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी, लेकिन महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत रूप से अकबर के सामने समर्पण करने से इनकार कर दिया। इस कारण युद्ध अवश्यंभावी था। हल्दीघाटी के संकरे पहाड़ी दर्रे में हुए पहले युद्ध में हारकर महाराणा प्रताप को पीछे हटना पड़ा, लेकिन यह मुगलों के लिए पूर्ण विजय नहीं थी, क्योंकि वे प्रताप या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को पकड़ नहीं पाए थे। 1582 में महाराणा प्रताप ने मुगलों पर हमला करके देवर की मुगल चौकी पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उन्होंने उमलगढ़, उदयपुर और गोगुंदा को पुनः प्राप्त किया और चावंड को अपनी नई राजधानी बनाया। महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को 56 वर्ष की आयु में हुआ। उनका मुगल साम्राज्य के खिलाफ लगभग अकेले संघर्ष करना, बिना किसी अन्य राजपूत राज्य की सहायता के, राजपूत वीरता का एक अद्वितीय उदाहरण है। उनकी गुरिल्ला युद्ध रणनीति का अनुकरण बाद में छत्रपति शिवाजी ने भी किया।
प्रश्न 2: इस कविता में चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार पत्रिका पर लगाइए । उत्तर: नीलकंठ, गौरा, गिल्लू, वह चिड़िया जो, चालाक लोमड़ी।
(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है ? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?
सादगी
बल
उदारता
नीति-कुशलता
उत्तर: नीति-कुशलता (★)
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निर्णय का क्या कारण था?
परमात्मा की याद
बदनामी का भय
राज-काज संभालने योग्य शक्ति न रहना
चालीस वर्षों की नौकरी पूरा होना
उत्तर: राज-काज संभालने योग्य शक्ति न रहना (★)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर:
पाठ में उदारता के गुण को महत्त्व दिया गया है, और सुजानसिंह भी इसी गुण की तलाश कर रहे थे।
राज्य के दीवान सुजानसिंह बूढ़े होने के कारण अब वे राज-काज संभाल नहीं पा रहे थे।
शीर्षक
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए उत्तर: कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए। चूँकि प्रेमचंद द्वारा लिखित ‘परीक्षा’ शीर्षक कहानी का केंद्रीय भाव एक रियासत के दीवान के पद हेतु हर दृष्टि से योग्य, उदार, दयालु तथा नीतिकुशल व्यक्ति का चयन है, अतः इन्हीं कारणों से प्रेमचंद ने इस कहानी का शीर्षक ‘परीक्षा’ रखा होगा।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए? उत्तर: यद्यपि इस कहानी का प्रेमचंद द्वारा दिया गया शीर्षक ‘परीक्षा’ सर्वथा उपयुक्त है, तथापि यदि मुझे इस कहानी का कोई अन्य नाम देना होता तो मैं इसका शीर्षक ‘परख’ देता। इसका कारण यह है कि सुजानसिंह ने एक जौहरी के रूप में दया, आत्मबल तथा नीतिकुशलता को धारण करने वाले एक व्यक्ति की परख की।
पंक्तियों पर चर्चा
कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।” इस पंक्ति का क्या अर्थ है? उत्तर: दीवान सुजानसिंह ने कहा कि दीवान पद के लिए एक ऐसे योग्य व्यक्ति की आवश्यकता थी जो परोपकारी हो, जिसके मन में दुखी व गरीब लोगों के लिए दया का भाव हो। उन्होंने कहा जो व्यक्ति अपने स्वयं के बल पर भरोसा रखता हो और जो हर परिस्थिति में अपनी वीरता से अपने गुणों का प्रमाण देता हो। वो संसार में यश कमाता है। उसकी सदैव प्रसिद्धि फैलती है और ऐसे गुणवान व्यक्ति संसार में बहुत कम होते हैं।
सोच-विचार के लिए
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और लिखिए-
(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयास किए? उत्तर: नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के प्रयत्न किए। मिस्टर ‘अ’ जो नौ बजे दिन तक सोया करते थे, प्रातः काल में टहलने का उपक्रम करने लगे। मिस्टर ‘द’, ‘स’ और ‘ज’ से उनके घर के नौकर परेशान रहते थे, किंतु अब वे नौकरों से ‘आप’ और ‘जनाब’ संबोधन के साथ बातचीत कर रहे थे। मिस्टर ‘ल’ को किताब से घृणा थी, किंतु वे बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने में मशगूल थे। हर कोई अपने तरीके से स्वयं को योग्य सिद्ध करने की कोशिश कर रहा था।
(ख) “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं” खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं? उत्तर: खिलाड़ी की निगाह किसान की गाड़ी पर पड़ी, जो नाले में फँसी हुई थी। उसे किसान की सूरत देखते ही इस बात का अंदाज़ा हो गया कि बहुत प्रयास करने के बाद भी गाड़ी को नाले के कीचड़ और गड्ढे से नहीं निकाल पाया है।
(ग) “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या ।’ किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों? उत्तर: जब सरदार सुजानसिंह ने राजदरबार में दीवान के पद पर जानकीनाथ के चयन की घोषणा की, तो रियासत के कर्मचारियों और रईसों ने जानकीनाथ की तरफ़ देखा। उन आँखों में जानकीनाथ के प्रति आदर और सत्कार का भाव था। इसके ठीक विपरीत, दीवान के पद की प्राप्ति हेतु पधारे अन्य उम्मीदवारों की आँखों में जानकीनाथ के प्रति ईर्ष्या का भाव था ।
खोजबीन
कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि-
(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था। उत्तर: “युवक ने किसान की तरफ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।”
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे। उत्तर: “जिससे बात कीजिए, वह नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम देता था, लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?”
कहानी की रचना
“लोग पसीने से तर हो गए खून की गर्मी आँख और चेहरे से झलक रही थी।” इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक चित्रात्मक बातें आपको दिखाई देंगी। कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई देंगी? अपने समूह में मिलकर उनकी सूची बनाइए।
उत्तर: जब किसी पंक्ति को पढ़कर चित्र आँखों के आगे आने लगे तो वहाँ चित्रात्मकता होती है। पाठ में निम्न पंक्तियों में चित्रात्मकता प्रस्तुत होती है-
देवगढ़ में नए-नए और रंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे।
रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे और कंटोप देवगढ़ में अपनी सज-धज दिखाने लगे।
वह कभी बैलों को ललकारता, कभी पहियों को हाथ से धकेलता।
गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ती और अगर चढ़ती भी, तो कुछ दूर चढ़कर फिर खिसककर नीचे पहुँच जाती।
बेचारा इधर-उधर निराश होकर ताकता।
वह बार-बार झुंझलाकर बैलों को मारता।
किसान ने उनकी तरफ सहमी आँखों से देखा।
कीचड़ बहुत ज्यादा था। वह घुटने तक जमीन में गड़ गया।
उम्मीदवारों के कलेजे की धड़कन तेज हो रही थी।
उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।
समस्यान और समाधान
इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उसके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि –
(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा ? उत्तर: महाराज के दीवान सुजानसिंह अपनी उम्र और परमात्मा की याद के कारण अपना पद छोड़ना चाहते थे। राजा सुजानसिंह जैसे अनुभवी और नीतिकुशल दीवान को छोड़ना नहीं चाहते थे, उन्होंने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन वे नहीं माने। अंततः उन्होंने दीवान की बात मान ली, लेकिन शर्त यह लगा दी कि नया दीवान सुजानसिंह को ही खोजना होगा।
(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा? उत्तर: दीवान के सामने योग्य उम्मीदवार खोजने की समस्या थी। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने एक विज्ञापन निकाला, जिसमें लिखा था कि शिक्षा नहीं, बल्कि आचार, व्यवहार और गुणों को एक महीने तक परखकर उम्मीदवार चुना जाएगा।
(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा? उत्तर: नौकरी के लिए आए लोगों को अच्छा बनकर दिखाना था, इसके लिए उन्होंने झूठा दिखावा शुरू कर दिया। उन्होंने मीठा और नम्र व्यवहार अपनाया, प्रातःकाल उठकर पुस्तकें पढ़ना इत्यादि दिखावा करने लगे।
मन के भाव
“स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था” इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची हुई है। ये सभी नाम हैं, लेकिन दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं। ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं। आप कहानी में से ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
अभिनय
कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। यह भी बताया गया है कि इन दोनों ने वे बातें कैसे कही। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: किसान: (हाथ जोड़कर) महाराज, मेरी समस्या का समाधान कीजिए। युवक: (गंभीरता से) आपकी समस्या क्या है, बताइए। किसान: (दुःखी स्वर में) मेरी फसल बर्बाद हो गई है, और मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है। युवक: (सहानुभूति से) हम आपकी मदद करेंगे, चिंता न करें।
विपरीतार्थक शब्द
“ विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।” ‘कम’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘अधिक’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-:
कहावत
“ गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।” यह वाक्य एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश करने पर ही सफलता मिलती है। ऐसी ही एक और कहावत है, ” जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ ” अर्थात परिश्रम का फल अवश्य मिलता है। कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। आपके घर और पास-पड़ोस में भी लोग अनेक कहावतों का उपयोग करते होंगे। नीचे कुछ कहावतें और उनके भावार्थ दिए गए हैं। आप इन कहावतों को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
अधजल गगरी छलकत जाए जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा करता है।
अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत – समय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता ‘है।
एक अनार सौ बीमार कोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों।
जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं-जो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं, वे काम नहीं करते हैं।
जहाँ चाह, वहाँ राह-जब किसी काम को करने की इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है।
(संकेत – विज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी, लेकिन उम्मीदवार आ गए हजारों । इसे कहते हैं – एक अनार सौ बीमार ।) उत्तर:
ज्ञान में अधिक रुचि ना होने पर भी कुछ उम्मीदवार बड़े-बड़े ग्रंथों में डूबे रहते और अकड़कर चलते इसे कहते हैं – अधजल गगरी छलकत जाए।
जब पंडित जानकीनाथ का दीवान के लिए चुनाव हुआ तब अन्य उम्मीदवार सोचने लगे कि काश ! हमने उस समय किसान की मदद की होती तो आज हमारा चयन होता पर अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।
देवगढ़ में आए सभी उम्मीदवार नम्रता की मूर्ति बने हुए थे। परंतु जब किसान पर दया की बात आई तब सब पीछे हट गए। इसीलिए कहते हैं जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैं।
युवक घायल था परंतु दूसरों की मदद करने की उसकी चाह के कारण वो किसान की गाड़ी नाले से बाहर निकाल पाया। इसे कहते हैं- जहाँ चाह वहाँ राह।
पाठ से आगे
अनुमान या कल्पना से
(क) “ दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला ” देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है? उत्तर: देश के प्रसिद्ध पत्रों में दीवान सुजानसिंह जी ने विज्ञापन निकलवाया होगा, क्योंकि नए दीवान को चुनने की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी और इसी उद्देश्य के लिए उन्होंने यह उपाय सोचा होगा।
(ख) “इस विज्ञापन ने सारे में मुल्क तहलका मचा दिया ”। विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा? उत्तर: विज्ञापन में रियासत के नए दीवान के चयन के बारे में लिखा था कि दीवान का चयन शिक्षा की डिग्री के आधार पर नहीं, बल्कि आचार-व्यवहार के आधार पर किया जाएगा। लोगों को इस ऊँचे पद में किसी प्रकार का बंधन नहीं दिखा, इसीलिए सबमें खुशी की लहर दौड़ गई।
आगे की कहानी
‘परीक्षा’ कहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा। आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए। उत्तर: कहानी का अंत इस पर हुआ कि सुजानसिंह ने पंडित जानकीनाथ को दीवान घोषित कर उनकी अच्छाई सबको बताई। इसके बाद सभी ने पंडित जानकीनाथ की जयकार शुरू कर दी। राजा ने उन्हें दीवान के पद पर नियुक्त किया और बहुत से उपहार दिए। सुजानसिंह का भव्य विदाई समारोह हुआ और प्रजा ने अपने प्रिय दीवान को नम आँखों से विदाई दी। साथ ही नए दीवान पंडित जानकीनाथ को भी स्वीकार किया। जानकीनाथ भी पहले दीवान की तरह प्रजा का ध्यान रखते हुए कार्य करने लगे।
आपकी बात
(क) यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते ? उत्तर: यदि हम दीवान के स्थान पर होते तो हम उम्मीदवारों को कोई समस्या बताकर उसका हल ढूँढ़ने के लिए कहते, साथ ही उनके समक्ष न्याय के कुछ मुकदमे पेश करते और परखते कि वे कैसे न्याय करते हैं। साथ ही, हम ज्ञान के कुछ प्रश्न भी पूछ सकते थे।
(ख) यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे? गुणों की परख के लिए क्या-क्या करेंगे? उत्तर: यदि मुझे कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए, तो मैं उस बच्चे का चुनाव करूँगा जो पढ़ाई में अच्छा हो, सबसे प्यार से बात करता हो, और पढ़ाई तथा काम पूरा करने में दूसरों की मदद करता हो। इसके लिए हम उसे कुछ दिन मॉनिटर का कार्य देकर परख सकते हैं।
नया – पुराना
“कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ।” हमारे आस-पास अनेक वस्तुएँ ऐसी हैं जिन्हें लोग नया फैशन या पुराना चलन कहकर दो भागों में बाँट देते हैं। जो वस्तु आपके माता- -पिता या दादा-दादी के लिए नई हो, हो सकता है वह आपके लिए पुरानी हो, या जो उनके लिए पुरानी हो, वह आपके लिए नई हो। अपने परिवार या परिजनों से चर्चा करके नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए-
अच्छाई और दिखावा
“हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था । ” अपने समूह में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु अपनी लेखन – पुस्तिका में लिख लीजिए-
(क) हर व्यक्ति अपनी बुद्धि के अनुसार स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करता है। स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं? ( संकेत – मेहनत करना, कसरत करना, साफ़-सुथरे रहना आदि) उत्तर: लोग अपने को अच्छा दिखाने के लिए नए फैशन के कपड़े पहनते हैं, सबसे मीठा बोलने का प्रयास करते हैं, कसरत करके अपने शरीर को हष्ट-ट-पुष्ट बनाते हैं, और मेहनत करके खूब धन कमाते हैं, ताकि समाज में अपनी पहचान बना सकें।
(ख) क्या ‘स्वयं को अच्छा दिखाने में और ‘स्वयं के अच्छा होने’ में कोई अंतर है? कैसे? उत्तर: हाँ, स्वयं को अच्छा दिखाने में और स्वयं अच्छा होने में बहुत अंतर है। कुछ लोग अपने धन, बल और चालाकी से अच्छा बनने का दिखावा करते हैं और समाज में अपना महत्व स्थापित करते हैं। जबकि जो स्वयं अच्छे होते हैं, वे हमेशा सामान्य व्यवहार करते हैं, जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करते हैं और प्रेम से रहते हैं।
परिधान तरह-तरह के
“कोट उतार डाला ” ‘कोट’ एक परिधान का नाम है। कुछ अन्य परिधानों के नाम और चित्र नीचे दिए गए हैं। परिधानों के नामों को इनके सही चित्र के साथ मिलाइए। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? ‘लिखिए-
उत्तर:
आपकी परीक्षाएँ
हम सभी अपने जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। आप अपने अनुभवों के आधार पर कुछ परीक्षाओं के उदाहरण बताइए | यह भी बताइए कि किसने, कब, कैसे और क्यों वह परीक्षा ली। (संकेत- जैसे, किसी को विश्वास दिलाने के लिए उसके सामने साइकिल चलाकर दिखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा देना, किसी को किसी काम की चुनौती देना आदि। ) उत्तर: एक बार मैं पिकनिक पर गया। वहाँ रस्सी के सहारे सब नीचे उतर रहे थे और पहाड़ी पर चढ़ रहे थे। सबको पता था कि मैं ऊँचाई से डरता हूँ, लेकिन सभी को विश्वास दिलाने के लिए मैंने भी उस रस्सी के सहारे पहाड़ी पर चढ़ने का फैसला किया। यह मेरे लिए एक चुनौती थी, लेकिन मैंने हिम्मत से इसे पूरा किया। जब मैं पहाड़ी के ऊपर पहुँच गया, तो सबने मेरी तारीफ़ की। मैं हिम्मत की परीक्षा में पास हो गया।
आज की पहेली
आज आपकी एक रोचक परीक्षा है। यहाँ दिए गए चित्र एक जैसे हैं या भिन्न? इन चित्रों में कुछ अंतर हैं। देखते हैं आप कितने अंतर कितनी जल्दी खोज पाते हैं। उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।झरोखे से
पाठ में दिए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़ेंगे। इस कहानी में भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है। यह कहानी हमारे देश के बहुत होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे में है। इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है। उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।खोजबीन के लिए
पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से आप प्रेमचंद के बारे में और जान-समझ सकते हैं, साथ ही उनकी अन्य कहानियों का आनंद भी उठा सकते हैं.—
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर न-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
मुझे तुम पराया समझती हो।
मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।
मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।
मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
उत्तर: मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? (★)
(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
गाय चरा रहे थे।
माखन खा रहे थे।
मधबुन में भटक रहे थे।
मित्रों के संग खेल रहे थे।
उत्तर: माखन खा रहे थे। (★)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
माँ यशोदा जब कृष्ण के मुँह पर माखन लगा देखती हैं और उन्हें डाँटने लगती हैं, तो वे छींके तक हाथ न पहुँचने का बहाना बनाते हैं।
‘माखन खा रहे थे’ यह विकल्प सही है क्योंकि पद्यांश की शुरुआत ही इस पंक्ति से हुई है—‘मैया मैं नहिं माखन खायो’, अर्थात कृष्ण माँ से माखन न खाने की बात कर रहे हैं।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(क) ‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो ” उत्तर: यशोदा मैया से ग्वालिनों ने शिकायत की थी कि कान्हा रोज़ उनका माखन खा जाते हैं और ज़मीन पर भी गिराते हैं। श्रीकृष्ण हमेशा इनकार कर देते थे। आज कान्हा के मुँह पर माखन लगा हुआ था, तो माता यशोदा उनसे पूछती हैं कि उन्होंने माखन चुरा कर क्यों खाया। कान्हा इनकार कर देते हैं और अपनी बात के पक्ष में दलील देते हुए कहते हैं कि मुझे तो आप सुबह से ही गायों के पीछे, उनके साथ मधुबन में भेज देती हैं। मैं दिनभर वहीं रहता हूँ, तो फिर मैं यहाँ आकर माखन कैसे खा सकता हूँ?
(ख) ” सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ” उत्तर: ग्वालिनों के शिकायत करने पर माँ यशोदा परेशान हो जाती हैं कि जब घर में इतना माखन होता है, तो फिर भी कान्हा माखन चुराकर क्यों खाते हैं। कान्हा के मुँह पर माखन लगा देखकर वे उनसे पूछती हैं कि उन्होंने माखन क्यों चुराया। कान्हा विभिन्न बहाने बनाकर इनकार कर देते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। वे कहते हैं, ‘तू बहुत भोली है, जो इनकी बातों में आ गई है। मुझे पराया जानकर तेरे मन में मेरे लिए भेदभाव उत्पन्न हो गया है।’ फिर नाराज़ होकर कहते हैं, ‘मैं अब गाय चराने नहीं जाऊँगा, तुम अपनी यह लकुटि कमरिया ले लो।’ सूरदास जी कहते हैं कि बाल कृष्ण की दलीलें और उनके भोलेपन को देखकर माता यशोदा को उन पर प्यार आ जाता है।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है? उत्तर: इस पद में श्रीकृष्ण से माँ यशोदा पूछ रही हैं कि उन्होंने माखन चुराकर क्यों खाया। श्रीकृष्ण माखन चुराने की बात से साफ़ इनकार करते हुए कहते हैं—’माँ, मैंने माखन नहीं खाया है।’ वे कहते हैं, ‘मैं तो यहाँ था ही नहीं, मुझे तो प्रतिदिन सुबह ही आप गाय चराने के लिए मधुबन भेज देती हैं। पूरा दिन वहाँ रहकर मैं शाम को घर आता हूँ। मैं तो बहुत छोटा हूँ। ये ग्वाल-बाल झूठ बोल रहे हैं। इन्होंने ज़बरदस्ती यह माखन मेरे मुँह पर लगा दिया है।’ इस प्रकार, अपने विषय में तर्क देकर उन्होंने अपनी माँ को समझाने का प्रयास किया।
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया? उत्तर: सभी माताएँ अपने बच्चों से अटूट प्रेम करती हैं। बच्चों की भोली और प्यारी बातों पर माँ-बाप का स्नेह उमड़ पड़ता है। यहाँ भी बालक कृष्ण बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कह रहे हैं, ‘माँ, तुम बहुत भोली हो, जो इनकी बातों में आ गई हो और मुझे पराया जानकर भेदभाव कर रही हो।’ नाराज़ होने का नाटक करते हुए, लकुटि-कमरिया वापस करते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं, ‘आपने मुझे अपनी बातों से बहुत तंग किया है।’ पुत्र-प्रेम से व्याकुल होकर, उनकी प्यारी-प्यारी बातें सुनकर यशोदा मैया उन्हें गले से लगा लेती हैं।
कविता की रचना
” भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो । चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो । । इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए । ‘पठायो’ और ‘आयो’ दोनों शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को ‘तुक’ कहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है । अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी दिया है आदि । उत्तर: इस पद की सभी पंक्तियों के अंतिम शब्द एक जैसी ध्वनि वाले हैं, यथा—खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो। यह विशेषता ‘तुक’ कहलाती है। इससे पाठक व श्रोता को कविता प्रभावशाली लगती है। कवि सूरदास जी ने बहुत बारीकी से जाँच-परख कर बाल-सुलभ बातों को कविता का रूप दिया है। बालक अपनी बात को सिद्ध करने के लिए पहले वही तर्क देता है, जो उसकी आयु व कद के अनुरूप होते हैं। वह अपना दोष दूसरे पर डालने का प्रयास करता है। यदि फिर भी बात न बने, तो नाराज़गी दिखाता है। इन सब बातों का बखूबी वर्णन करते हुए, कवि ने अत्यंत सुंदरता से अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी दे दिया है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर: छात्र/छात्राएँ स्वयं करें।
अनुमान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे ? उत्तर: सभी बालक शरारती होते हैं। इन शरारतों में उनसे कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनके कारण उन्हें डाँटा जाता है, और डाँटना आवश्यक भी होता है। छोटे बच्चों को सही-गलत का ज्ञान नहीं होता। सही और गलत का परिचय उन्हें परिवार के बड़े सदस्य ही कराते हैं। बच्चे नासमझ होते हुए भी इतने चतुर अवश्य होते हैं कि अपनी बात को तर्कसंगत साबित करने के लिए कई तरह के बहाने बना सकें। श्रीकृष्ण भी छोटे बालक ही हैं, अतः स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए वे अपनी माँ यशोदा को तर्क देते हैं।
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा? उत्तर: जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले लगा लिया, तब माँ-बेटे प्रसन्नता से झूम उठे होंगे। यशोदा माता भी अपने पुत्र से नाराज़ नहीं रह सकती थीं। श्रीकृष्ण भी यह नहीं चाहते थे। वे भी माता यशोदा को हर्षित देखना चाहते थे । जिस बात को लेकर प्रश्न-उत्तर चल रहे थे, वह बात भी समाप्त हो गई होगी।
शब्दों के रूप
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
(क) ‘भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।
परे – _____________
कछु – _____________
छोटो – _____________
लै – _____________
बिधि – _____________
नहिं – _____________
भोरी – _____________
उत्तर:
परे – पड़े
कछु – कुछ
छोटो – छोटा
लै – लेना
बिधि – विधि, प्रकार
नहिं – नहीं
भोरी – भोली
(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए-
वर्ण – परिवर्तन
” तू माता मन की अति भोरी’ ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण- परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। उत्तर:
परे – पड़ना
भोरी – भोली
पंक्ति से पंक्ति
नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। उत्तर:
पाठ से आगे
आपकी बात
“मैया मैं नहिं माखन खायो ” यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन महीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए । उत्तर: हाँ, जीवन में कई बार ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जब हम सत्य कह रहे होते हैं तब भी लोग उस पर विश्वास नहीं कर पाते और यदि ऐसे में साक्ष्य न हो तो अच्छा-खासा सच भी झूठ की शंका के नीचे दबकर दम तोड़ देता है। इसके लिए काफी हद तक दोषी हम सभी हैं क्योंकि अधिकतर लोग अपनी आदत के कारण झूठ का सहारा लेते हैं। मैं विद्यालय अपनी साइकिल से जाता हूँ। आज मेरी वार्षिक परीक्षा थी। वर्षा हो रही थी । मैं घर से थोड़ी दूर ही गया था कि मैंने देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति सड़क के किनारे दुर्घटनाग्रस्त पड़े हैं। उनके पाँव से खून बह रहा था। मैंने उन्हें अस्पताल पहुँचाने का निश्चय किया। मैंने उन्हें अपनी साइकिल पर बिठाया और सरकारी अस्पताल ले गया। अधिक खून बह जाने के कारण वे अर्ध-मूर्च्छित से हो रहे थे। उन्हें अस्पताल छोड़कर मैं विद्यालय आया । उस समय तक मैं आधा घंटा देर से विद्यालय पहुँचा था । देर से आने के कारण मुझे विद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। मेरी बात पर स्कूल के गेट पर खड़े गार्ड ने विश्वास ही नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे विद्यालय के नियम के विरुद्ध नहीं जा सकते। तभी वहाँ पर हमारे पी.टी. सर आ गए। उन्हें मेरी बात पर विश्वास हो गया। उन्होंने प्रधानाध्यापक से बात की। विद्यालय से जब अस्पताल फ़ोन करके पूछा गया तो मेरी बात सत्य सिद्ध हुई। मुझे मेरे काम की शाबासी देते हुए प्रधानाचार्य जी ने मुझे परीक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया और अगले दिन मेरे कार्य की प्रशंसा प्रात:कालीन प्रार्थना सभा में भी की गई।
घर की वस्तुएँ
“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए ।
उत्तर: सर्वप्रथम दूध को जामन लगाकर दही बनाया जाता है। दही को मथने से माखन बनता है। माखन को हांड़ी या किसी बड़े बर्तन में डालकर गर्म किया जाता है। धीरे-धीरे वह घी में परिवर्तित होने लगता है। हांडी मैं बने घी को छान लिया जाता है और बची ‘करोनि’ को भी खा सकते हैं।
समय का माप
” चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।।”
(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए । (संकेत- कल, ऋतु, वर्ष, अब पखवाड़ा, दशक, वेला अवधि आदि ) उत्तर: अभी, प्रात: सांय, दोपहर, रात, कल, आज, परसो, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक, त्रैमासिक, छमाही वार्षिक आदि।
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे? उत्तर: दस से बारह घंटे ।
(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे? उत्तर: पाँच-छह बजे के बीच में।
(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा? उत्तर: सुबह के छह बजे से नौ बजे तक पहला पहर होता है।
हम सब विशेष हैं
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता । हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए- आपकी…………………………………………. आपके ………………………………….. आपके शिक्षक की ………………………. आपके मित्र की …………………….. उत्तर: आपकी– मुझे कहानियाँ और पुस्तकें पढ़ने-लिखने का शौक है। आपके किसी परिजन की- मेरे दादा जी एक कुशल व्यापारी हैं। वे अपने बल, बुद्धि और मेहनत के बूते एक सफल व्यापारी हैं। मेरे पापा और मेरे चाचा जी भी अब उनके साथ व्यापार में उनका सहयोग करते हैं। व्यापार में दादा जी से सीखकर अब वे दोनों भी कुशल व्यापारी बन गए हैं। आपके शिक्षक की- हमारे शिक्षक हमारे आदर्श हैं। वे हमारी पूरी कक्षा के आदर्श हैं। वे हम छात्रों को बहुत प्रेम से पढ़ाते हैं। अपने विषय पर उनका पूरा अधिकार है। वे हमें सरल और रोचक ढंग से पढ़ाते हैं। वे सभी छात्रों पर एक समान ध्यान देते हैं । यहाँ तक कि यदि हममें से किसी छात्र को कोई समस्या हो तो उस पर भी उनकी नज़र रहती है। आपके मित्र की- वैसे तो मेरे सारे सहपाठी मेरे मित्र हैं किंतु हम चार विद्यार्थियों का समूह अपनी मित्रता के लिए प्रसिद्ध हैं। हम चारों के परिवारिक संबंध भी बहुत अच्छे हैं। हम चारों हर समय एक-दूसरे की सहायता करने के लिए तत्पर रहते हैं।
(ख) एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना । तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे-
एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है।
एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
एक सहपाठी बहुत अटक अटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।
उत्तर:
मेरा एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा। मेरे परिवार से मुझे एक-दूसरे की सहायता करने के संस्कार मिले हैं। इसलिए उस पाठ को पहले मैं दो बार पढूँगा ताकि अपने उस सहपाठी को भली-भाँति समझा सकूँ। इसके पश्चात मैं अपने उस सहपाठी को पाठ समझाऊँगा।
एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता। अपने उस सहपाठी की पढ़ने में मदद करूँगा। उसे पढ़कर पाठ सुनाऊँगा और उसके लिए ब्रेल लिपि की पुस्तक लाऊँगा ।
एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है। इसके लिए हमें भरसक प्रयत्न करना है। उसे हम धीरे-धीरे बोलने का अभ्यास करवाकर कक्षा के भाषण को बोलने का भी अभ्यास करवाएँगे। बार-बार का अभ्यास उसे सफल बनाएगा और उसमें आत्मविश्वास की भावना बढ़ेगी और वह जीवन में सफलता की ओर अग्रसर होगा।
एक सहपाठी अटक–अटक कर बोलता है और उसे भाषण देना है। कहावत प्रसिद्ध है- ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।’ उसे एक ही वाक्य बार-बार बोलने का अत्यधिक अभ्यास करवाया जाएगा ताकि उसकी यह कमी दूर हो जाए और वह भाषण देने में सफल हो जाए ।
एक अन्य सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है। ऐसे सहपाठी को दौड़ने में कठिनाई तो बहुत होगी, किंतु बार-बार के अभ्यास से उसमें कुछ-न- कुछ सुधार अवश्य होगा।
एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है। हम उसे सुनने का उपकरण खरीदकर देकर उसकी सहायता कर सकते हैं।
आज की पहेली
दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं। नाम पूरे कीजिए-
उत्तर:
खोजबीन के लिए
सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें व पढ़ें। उत्तर: संकेत:
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए
(1) माँ एलेसेंड्रा के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?
वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं।
उन्हें असम, बिहू और सत्रिया नृत्य से बहुत प्रेम था।
उन्होंने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए।
वे अपने काम में सहायता के लिए बेटी को लाई थीं।
उत्तर: वे असम के जीवन के बारे में बहुत कुछ जानती थी। (★)
(2) “अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ देखा।” क्यों?
अनु के पास खिलौने थे।
दोनों की आयु एक समान थी।
दोनों को अंग्रेजी भाषा आती थी।
एंजेला अनु से असमिया भाषा सीखना चाहती थी।
उत्तर: दोनों की आयु एक समान थी। (★)
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
उत्तर: माँ एलेसेंड्रा और एंजेला जब भारत आ रहे थे तब माँ एलेसेंड्रा ने एंजेला को भारत के बारे में और असम के बारे में बहुत सारी जानकारी दी इन बातों से यह पता चलता है की माँ एलेसेंड्रा भारत की बारे में बहुत कुछ जानती थी। माँ एलेसेंड्रा और उसका परिवार मलंग इस गांव में घूमने के बाद दूसरे दिन उत्तरी असम की तरफ गए। तब उनकी मुलाकात असम की लेखिका रीना सेन से हुई। उनकी एक बेटी थी जो दस साल की थी। इस वजह से अनु और एंजेला ने तुरंत एक दूसरे की तरफ देखा। पाठ में से कुछ शब्द सुनकर स्तंभ में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समृड में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यांशों से कीजिए इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
मिलकर करें मिलान
Q1. पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यों से कीजिए। उत्तर:
पंक्तियों पर चर्चापाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।” उत्तर: असम अपने प्राकृतिक सौंदर्य, वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, असम में नृत्य और संगीत की भी एक समृद्ध परंपरा है जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
(ख) “पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत के साथ अपने भावनाओं को व्यक्त करते हैं।” उत्तर: नृत्य और संगीत प्रत्येक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से लोग अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करते हैं और इनमें जुड़ाव महसूस करते हैं।
सोच-विचार के लिए
(क)“एंजेला के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे।” उत्तर: जब एंजेला की मां ने उससे बिहू के बारे में पूछा, तब उसके मन में कई विचार थे, जैसे कि लोग हर उत्सव पर नृत्य और संगीत क्यों करते हैं और लड़कों के हाथ में कौन से वाद्य थे।
(ख) “बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है।” कैसे?
उत्तर: असम का बिहू नृत्य ग्रामीण जनजीवन के साथ-साथ फसल लगाने से लेकर बसंत के आगमन तक से जुड़ा हुआ है। भारत में जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा किसानों का है। असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है। सबसे पहले किसान बीज बोते हैं, फिर जब वे धान रोपते हैं और फिर अनाज तैयार हो जाने पर बिहू उत्सव आनंद से मनाया जाता है।
(ग)ऐसा लगता है कि भारत से जाने के बाद भी एंजेला के मन में असम ही छाया हुआ था। पाठ से इस कथन के समर्थन के लिए कुछ उदाहरण खोजकर लिखिए। उत्तर: बिहू नृत्य देखने के बाद उसने यह तय किया कि जब वह अपने घर पर बसंत के आगमन पर ऐसे नृत्य करेगी। जब एंजेला की मां साक्षात्कार लेने मे व्यस्त थी तब वह कई सारी बातों पर गौर कर रही थी। युवा वैष्णव मठ में नृत्य कर रहे थे तब वह सोच रही थी के काश वो भी उन साधुओं की तरह गा सकती और नृत्य कर सकती। एक रात वह एंजेला सत्रिया नृत्य देखने गई थी। तब उसे वह सब दिलचस्प लगा।
(घ) समय के बदलने के साथ-साथ सत्रिया नृत्य की परंपरा में क्या बदलाव आया है? उत्तर: बीसवीं शताब्दी में कुछ साधुओं ने मठों से बाहर जाकर बाहरी महिला और पुरुषों को सत्रीया नृत्य सिखाना शुरू किया। पहले तो ऐसे साधुओं को मठों से बाहर निकाल दिया गया। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे इस परंपरा में बदलाव हो गया। आधुनिक युग में तो महिलाएं भी मंच पर यह नृत्य कर सकती है।
निबंध की रचना
“गुवाहाटी के एक होटल में सामान्य होने के बाद वे उसी शाम पास के एक गाँव मेलांग में गए। गाँव पहुँचने पर मैंने एंजेला को बताया कि बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है। असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है।“
इस वाक्य में बिहू और असम का ऐसा रोचक और सटीक वर्णन किया गया है कि लगता है मानो हम कोई कहानी पढ़ रह है।
इस निबंध में वस्तु, घटना, दृश्य आदि का वर्णन किया गया है। इसमें जो कुछ भी स्वयं देखा गया हो, उसका वर्णन किया गया है। इस प्रकार के निबंधों में घटनाओं का विवरण होता है। इनमें आप जीवन की घटनाओं से मिलते हैं। इनकी भाषा बहुत सरल होती है। उदाहरण के लिए होली, दीपावली आदि के बारे में बताना। इस पाठ को फिर से पढ़िए और इसका बनावट पर ध्यान दीजिए। इसके की विशेषताओं को पहचानिए। अपने कक्षा में साझा कीजिए और लिखिए। इस पूरे पाठ में लेखक ने यात्रा शुरू करने से लेकर असम और गुवाहाटी तक के अनुभवों का कैसे वर्णन किया गया है। उत्तर: निबंध की रचना में लेखक ने एंजेला और उसकी माँ की यात्रा का विवरण दिया है। इसमें निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
वस्तु और दृश्य का वर्णन: लेखक ने असम के त्योहार और नृत्य का विस्तृत विवरण दिया है।
घटना का विवरण: लेखक ने एंजेला की यात्रा और उसके अनुभवों को कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है।
भाषा की सरलता: निबंध की भाषा सरल और स्पष्ट है जिससे पाठक आसानी से समझ सकते हैं।
व्यक्तिगत अनुभव: लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया है जिससे पाठक की निबंध में रूचि बढ़ती है।
इस प्रकार, निबंध की रचना में वस्तु, दृश्य और घटनाओं का सजीव वर्णन होता है जो पाठक को कहानी के साथ जोड़कर रखता है।
अनुमान या कल्पना से
(क)“बहू नृत्य और इसके उत्सव से अचंभित एंजेला और उसके परिवार ने इसके साथ-साथ लजीज पकवानों का पूरा आनंद लिया।” उत्तर: एंजेला बिहू नृत्य देखने गई थी। तब उसने देखा कि बरगद के पेड़ के नीचे एक मंच बनाया था। वह खुले आसमान के नीचे बैठी थी। उसे ऐसा लग रहा था की वह टाइम मशीन में बैठी हो। वह देख रही थी की लड़कों के हाथ में वाद्य यंत्र है और लड़कियो ने लाल और बादामी रंग की पोशाक पहनी है। यह सारा मौहोल देख वह अचंभित हो गई।
(ख) “जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ान पर थी।” एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा ने भारत की यात्रा से पहले कौन-कौन सी तैयारिया की होंगी? उत्तर: माँ एलेसेंड्रा के पास एक महीने का वक्त था। उन्होंने स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी दी होगी और एंजेला के स्कूल से उसकी छुट्टियों की अनुमति ली होगी। उन्होंने यात्रा के लिए जरूरी दस्तावेज़ संभाले होंगे। डॉक्यूमेंट्री से संबंधित उपकरणों और वस्तुओं को ध्यान से पैक किया होगा। इसके अलावा व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सामान रखा होगा। माँ ने भारत के असम राज्य में रहने के स्थान और शूटिंग के समय और स्थान की भी उचित जानकारी इकट्ठा की होगी। इससे समय की बचत होती है और डॉक्यूमेंट्री निर्माण भी सुचारू रूप से होने में मदद मिली होगी।
(ग) “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था।” बिहू नृत्य के लिए बरगद के पेड़ के नीचे वे मंच क्यों बनया गया होगा? उत्तर: हिंदू ग्रंथों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है। भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से बरगद के पेड़ को पूजा जाता है। यह विशाल वृक्ष होता है और फैलाव के कारण काफ़ी लोग इसके नीचे व आस-पास एकत्रित हो सकते हैं। बिहू नृत्य के लिए बरगद के पेड़ रूपी प्राकृतिक मंच से बेहतर और क्या हो सकता था। साथ ही इस पेड़ का सांस्कृतिक महत्त्व भी है।
शब्दों की बात
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हे करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और मित्रों की सहायता भी ले सकते हैं।
असम से जुड़े शब्द इस पाठ में अनेक शब्द से हैं जो असम से विशेष रूप से जुड़े हैं। अपने समूह में मिलकर उन शब्दों की पहचान कीजिए। इसके बाद उन्हें नीचे दिए गए स्थान पर लिखिए- (संकेत- असम के नृत्य, त्योहार, भाषा आदि।)
उत्तर:
तीन बिहू
“असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है।”
(क) एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा कौन-से बिहू के अवसर पर भारत आए थे? लिखिए।
उत्तर: एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा अप्रैल में बसंत बिहू के अवसर पर भारत आए थे।
(ख) तीनों बिहू के लिए लिखिए कि उस समय किसान खेतों में क्या कर रहे होते हैं? उत्तर: पहली बिहू में किसान बीज बोते हैं। दूसरी में वे धन रोपते हैं और तीसरी मे वह अनाज तैयार हो जाता हैं।
पाठ से आगे आपकी बात
अपने समूह में चर्चा कीजिए- (क) रीना आंटी की एक बिटिया थी- अनु” ‘बिटिया’ का अर्थ है ‘बेटी’। बेटी को प्यार से बुलाने के लिए और स्नेह जताने के लिए ‘बिटिया’ शब्द का प्रयोग भी किया जाता है। ‘बिटिया’ जैसा ही एक अन्य शब्द ‘बिट्टो’ भी है। आपके घर में आपको प्यार से किन-किन नामों से पुकारा जाता है? उत्तर: हमे अपने घर में प्यार से बेटी, सोनचिरैया, गुड़िया इन नामों से पुकारा जाता हैं।
(ख) आपके नाम का क्या अर्थ है? आपका नाम किसने रखा? पता करके बताइए। उत्तर: मेरा नाम ऐश्वर्या है। यह नाम मेरे दादा ने रखा है। इसका अर्थ अधिपत्य या फिर ईश्वरीता होता है।
(ग) “वे एक साथ खेल रहे थे” आप कौन-कौन से खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर खेलते हैं? बताइए। उत्तर: हम हमारे मित्रों के साथ पकड़म पकड़ाई, लुका छिपी, क्रिकेट, फुटबॉल, खो खो यह खेल खेलते है।
(घ) “असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।” आपने इस पाठ में बिहू और सत्रिया नृत्यों के बारे में तो पढ़ा है। आपके प्रांत में कौन-कौन से नृत्य प्रसिद्ध हैं? आपको कौन-सा नृत्य करना पसंद हैं? उत्तर: असम में यह नृत्य कई सालों से त्योहारों में प्रदर्शित किया जाता हैं। यह लोग अपनी खुशी जताने के लिए, आनंद मनाने के लिए यह नृत्य करते हैं। हमारे प्रांत में कथकली, भरतनाट्यम यह नृत्य प्रसिद्ध है। हमे कथकली अच्छा लगता हैं।
पूर्वोत्तर की यात्रा
असम भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित है। असम के अतिरिक्त पूर्वोत्तर भारत में सात अन्य राज्य भी हैं। आपको अवसर मिले तो इनमें से किसी राज्य की यात्रा कीजिए। आठ राज्यों के नाम हैं – अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर और असम । उत्तर: यात्रा स्वयं करके अनुभव प्राप्त करें।
टाइम मशीन
“उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह आश्चर्यजनक रूप से किसी टाइम-मशीन में आकर बैठ गई हो!” क्या आपने पहले कभी ‘टाइम-मशीन’ का नाम सुना है? टाइम-मशीन ऐसी काल्पनिक मशीन है, जिसमें बैठकर बीते हुए या आने वाले समय की दुनिया में पहुँचा जा सकता है। ‘टाइम-मशीन’ को अभी तक बनाया नहीं जा सका है। लेकिन अनेक लेखकों ने ‘टाइम-मशीन’ के बारे में कहानियाँ लिखी हैं, अनेक फ़िल्मकारों ने इसके बारे में फ़िल्में बनाई हैं।
(क) यदि आपको टाइम-मशीन मिल जाए तो आप उसमें बैठकर कौन-से समय में और कौन-से स्थान पर जाना चाहेंगे? क्यों? उत्तर: अगर हमे टाइम-मशीन मिल जाए तो हम अपने बचपन में अपने नाना के गांव जाना चाहेंगे। क्योंकि बचपन में मेरा कई सारा वक्त उसी जगह पर गुजरा है।
(ख) आपको यदि कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मिले जो अभी तक नहीं बनाई आप क्या बनाएँगे? क्यों बनाएँगे? उत्तर: यदि हमे कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मिले जो अभी तक नहीं बनाई है तो हम ऐसी वस्तु बनाएंगे जिसमे बैठकर हम एक जगह से दूसरी जगह किसी भी वक्त चंद मिनटों में जा सके। क्योंकि मुझे मेरे नाना के घर जाने की बहुत इच्छा होती है लेकिन मेरे छोटी होने के कारण कोई मुझे नही भेजता।
(ग) क्या आपने कभी किसी संग्रहालय की यात्रा की है? संग्रहालय ऐसा स्थान होता है जहाँ विभिन्न कालों की प्राचीन वस्तुएँ देखने को मिलती हैं।कभी-कभी संग्रहालय की यात्रा भी ‘टाइम-मशीन’ की यात्रा जैसी लगती है। उत्तर: हाँ, मैंने पटना स्थित राज्य संग्रहालय की यात्रा की है, पर खुदाई से प्राप्त प्राचीन भारत के कई अवशेष संग्रहित हैं।
खिलौने विभिन्न प्रकार के
“एंजेला को अनु के खिलौने बहुत अच्छे लगे, जो थोड़े अलग तरह के थे।”
(क) अनु के खिलौने कैसे थे? लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे? उत्तर: अनु के पास गुड़िया, लकड़ियों के खिलौने और नारियल की जटा से बने खिलौने थे। यह उसके लिए अनोखे खिलौने थे। लंदन में एंजेला के पास शायद अलग तरह के खैलौने होंगे। जिसमे कई सारी वीडियो गेम्स, इलेक्ट्रिक कार शामिल होंगी।
(ख) आप घर पर कौन-कौन से खिलौनों से खेलते रहे हैं? उनके नाम बताइए। उत्तर: मेरे घर छोटे छोटे बर्तन है, इसके साथ साथ मिट्टी के और लकड़ी के भी खिलौने है। हम घर पर गाड़ियों के साथ, बरतनों के साथ, कभी कभी मिट्टी के साथ भी खेलते है।
(ग) भारत के प्रत्येक प्रांत में हाथ से बच्चों के अनोखे खिलौने बनाए जाते हैं। आपके यहाँ बच्चों के लिए हाथ से बने कौन-कौन से खिलौने मिलते हैं? उत्तर: हमारे यहाँ हाथ से मिट्टी और लकड़ियों के खिलौने बनाए जाते हैं।
(घ) भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लिए अनोखे खिलौने बना लेते हैं। आप भी तो कागज़, मिट्टी आदि से कोई न कोई खिलौना बनाना जानते होंगे? आप अपने हाथों से बनाए किसी खिलौने को कक्षा में लाकर दिखाइए और उसे बनाने का तरीका सबको सिखाइए। उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
पत्र
(क) मान लीजिए आप एंजेला हैं। आप लंदन लौट चुकी हैं और आपको भारत की बहुत याद आ रही है। अपनी सखी अनु को पत्र लिखकर बताइए कि आपको कैसा अनुभव हो रहा है। उत्तर: एंजेला केंजिंग्टन, लंदन हाय अनु, कैसी हो..? मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है। मैं उन दिनों को बहुत याद कर रही हूं। मुझे फिर से वही पर आना है। जब अगली छुट्टियां मिलेगी तब मैं वहाँ पर आउंगी। मुझे वहाँ का नृत्य सबसे ज्यादा पसंद आया है। वही नृत्य मै अब मेरे सभी दोस्तों को भी सिखाऊंगी। तुम भी कभी लंदन आ जाना। मैं तुम्हे सभी जगहों पर घुमाऊंगी। तुम्हारी दोस्त एंजेला
(ख) आप जानते होंगे कि पत्र लिखने के लिए आवश्यक सामग्री जैसे – पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय लिफाफे आदि डाकघर से खरीदे जा सकते हैं। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर में जाइए और एक पोस्टकार्ड खरीदकर पत्र लिखने के लिए उसका उपयोग कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं करें।
(ग) क्या आपने कभी डाक टिकट देखा है ?
संसार के सभी देश डाक टिकट जारी करते हैं। भारत का डाक विभाग भी समय-समय पर डाक टिकट जारी करता है। डाक-टिकट किसी देश की संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं। इसलिए अनेक लोग देश-विदेश के डाक टिकटों को एकत्रित करना पसंद करते हैं।
नीचे भारत के विभिन्न लेखकों के सम्मान में जारी किए गए कुछ डाक टिकटों के चित्र दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए – (डाक टिकटों के चित्र के लिए पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या 90 पर देखें।)
(क) आपको इनमें से कौन-सा डाक टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों?
उत्तर: मुझे इनमें से सुभद्रा कुमारी चौहान जी पर जारी एक डाक टिकट सबसे अच्छा लगा क्योंकि वे मेरी प्रिय कवयित्री हैं। मुझे उनकी रचनाएँ पढ़ना बहुत पसंद है।
(ख) डाक टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है ?
उत्तर: डाक टिकटों पर लेखकों का छायाचित्र है तथा हिंदी और अंग्रेजी में उनका नाम लिखा हुआ है। इसके साथ ही टिकट जारी होने के वर्ष तथा लेखकों के जन्म और मृत्यु के वर्ष की जानकारी भी दी गई है।
आज की पहेली
आज हम आपके लिए लाए हैं, कुछ असमिया पहेलियाँ। इनमें कुछ पहेलियों को पढ़कर आपको लगे, अरे! ये पहेली तो मेरे घर पर भी बूझी जाती है ! तो कुछ पहेलियाँ आप पहली बार बूझेंगे। तो आइए, आनंद लेते हैं इन रंग-बिरंगी पहेलियों का-
उत्तर: विद्यार्थी पढ़कर स्वयं समझें ।
झरोखे से
“असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है।”
आपने पढ़ा है कि असम का रेशम (जिसे मूँगा सिल्क भी कहा जाता है) बहुत प्रसिद्ध है। क्या आप जानना चाहते हैं, यह क्या है, कैसे बनता है और क्यों प्रसिद्ध है? हाँ? तो पढ़िए आगे—
असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क
कुछ वर्ष पूर्व मेरी नियुक्ति गुवाहाटी हवाई अड्डे पर हुई थी। वहाँ पर प्रायः मैं महिलाओं को एक विशेष प्रकार की आकर्षक साड़ी पहने देखता था। यह साड़ी सदैव भूरे-सुनहरे रंग की झिलमिली- सी होती थी। उस पर अधिकतर पारंपरिक ढंग से लाल या काली बार्डर तथा हरे, लाल अथवा पीले रंग से बूटों आदि की कढ़ाई रहती थी। कुछ समय पश्चात जब मैं असम के एक विवाह समारोह में गया, तो वहाँ भी अधिकतर महिलाएँ उसी प्रकार की अन्य चमकीली भूरी-सुनहरी साड़ियाँ पहन कर आई थीं। अनेक पुरुषों ने भी उसी प्रकार के भूरे-सुनहरे रंग के कुर्ते पहने हुए थे। बस केवल रंगों में हल्के या गहरे का अंतर था। मैंने अपने एक असमी मित्र से छ कि यह कैसा भूरा- I-चमकीला कपड़ा है।
मित्र ने बताया कि यह भूरा नहीं बल्कि सुनहरा है। यह असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क है जो सभी प्रकार के रेशमों में सबसे महँगा होता है। मूँगा का असमिया भाषा में अर्थ है पीला या गहरा भूरा। और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि सम्पूर्ण विश्व में यह केवल असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है। यह असम को प्रकृति द्वारा दिया गया अनमोल और अद्वितीय उपहार है।
मित्र ने यह भी बताया कि मूँगा सिल्क की साड़ियों की एक खूबी यह है कि अन्य रेशमी कपड़ों के विपरीत इनको ‘ड्राई क्लीन’ कराने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि उन्हें घर पर ही धोया जा सकता है। हर धुलाई के बाद इनका निखार बढ़ता ही जाता है। एक साड़ी औसतन 50 वर्ष तक खराब नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि
मूँगा रेशम सभी प्रकार के प्राकृतिक रूप से तैयार किए जाने वाले कपड़ों में सबसे मज़बूत होता है। इसके अलावा इसे गर्मी या सर्दी किसी भी मौसम में पहना जा सकता है। असम के लोगों का मानना है कि मूँगा सिल्क के कपड़ों में अनेक औषधीय गुण भी होते हैं।
बिमल श्रीवास्तव, स्रोत पत्रिका, अप्रैल 2008
उत्तर: विद्यार्थी पढ़कर स्वयं समझें ।
साझी समझ
आपको इस लेख में दी गई कौन-सी जानकारी सबसे अच्छी लगी? क्यों? अपने समूह में बताइए ।
उत्तर: इस लेख में मूँगा सिल्क के संबंध में दी गई जानकारी ज्यादा अच्छी लगी। असम का मूँगा सिल्क सभी प्रकार के रेशमों से सबसे महँगा होता है और यह असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है। यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि इससे बनी साड़ी लगभग 50 वर्ष तक खराब नहीं होती और हर धुलाई के बाद इसका निखार बढ़ता ही जाता है। इसे सर्दी-गर्मी किसी भी मौसम में पहना जा सकता है।
खोजबीन के लिए
असम सहित पूर्वोत्तर भारत के बारे में आप और जान सकते हैं और भारत के पारंपरिक लोक संगीत का आनंद भी ले सकते है, जिन्हें इंटरनेट कड़ियों तथा क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें-