07. जलाते चलो – Textbook Solutions

पाठ से
मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?

  • भलाई के कार्य करते रहना
  • दीवाली के दीपक जलाना
  • बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
  • तिमिर तले तक दीप चलाते रहना 

उत्तर: भलाई के कार्य करते रहना (★)

(2) “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
यह वाक्य किससे कहा गया है?

  • तिमिर से
  • युगों से
  • दीपकों से
  • दीवार से

उत्तर: मनुष्यों से (★)

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण सहित बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: 
(1) मैंने ‘भलाई के कार्य करते रहना’ उत्तर इसलिए चुना क्योंकि कविता का शीर्षक भी ‘जलाते चलो’ है। पूरी कविता में बुराई, अनाचार, पाप, लोभ आदि बुराइयों को मिटाकर भलाई के कार्य करने की प्रेरणा दी गयी है।
(2) मैंने ‘मनुष्यों से’ उत्तर इसलिए चुना क्योंकि मानव नेही प्रेम रूपी प्रकाश का दीपक जलाकर ‘तिमिर’ अर्थात अंधकार, बुराइयों आदि की चुनौती को स्वीकार किया था।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।


पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-


“दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी,
जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।”
उत्तर: “दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी”:
यह पंक्ति बताती है कि दिये और तूफ़ान की लड़ाई, जो प्रतीकात्मक रूप से संघर्ष और आत्मविपरीतता का प्रतिनिधित्व करती है, यह एक पुरानी कहानी है और यह भविष्य में भी चलती रहेगी। यह जीवन के संघर्षपूर्ण पहलुओं को दर्शाती है।
“जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”:
यहाँ दीप की लौ की चमक को स्वर्ण के समान बताया गया है, जो पहली बार जलने के बाद भी स्थायी और उज्ज्वल रहती है। यह संकेत करता है कि एक बार स्थापित किए गए अच्छे कार्य या सच्चाई का प्रकाश समय के साथ भी कायम रहता है।
“रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”:
इस पंक्ति का अर्थ है कि अगर धरती पर एक भी दीप जलता रहे, तो अंधेरे (रात) के समाप्त होने की संभावना बनी रहती है। यह आशा और उम्मीद की बात करती है कि एक छोटा सा प्रकाश भी अंधेरे को दूर कर सकता है और जीवन में उजाला ला सकता है।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेख पुस्तक में लिखिए—

(क) कविता में अंधेरे या तिमिर के लिए किस स्थिति के उदाहरण दिए गए हैं?
उत्तर:

  • अमावस
  • निशा
  • तिमिर की सरिता
  • तिमिर की शिला
  • पवन
  • तूफ़ान

(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
उत्तर: यह कविता जीवनरूपी दीप में स्नेह व अपनापन रूपी तेल भरकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। निराशा के बीच ही आशा की एक किरण दिखाई देती है। मानव और विश्व कल्याण हेतु हमें महापुरुषों के पदचिह्नों पर चलना होगा। प्रेम, सद्भावना और मानवीय सौहार्द से यह जीवन खुशहाल बनता है। नई पीढ़ी इतिहास में हुए महान लोगों से प्रेरणा लेकर एक सुंदर भविष्य की नींव रखेगी। कविता मनुष्य के हृदय में विश्व बंधुत्व की आशा जाग्रत करती है।

(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
उत्तर: मनुष्य को आशा का दीपक जलाकर रखना चाहिए। स्नेह से भरे दीपक चारों ओर रोशनी फैलाएं, जबकि बिना स्नेह वाले विद्युत दीपक को बुझा देना चाहिए, क्योंकि कृत्रिम चीजें बाधाएं उत्पन्न करती हैं।

कविता की रचना

“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा ।”
इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।
आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2-4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।

उत्तर: विद्यार्थी पढ़कर स्वयं कविता की विशेषतओं की सूची बनाएँ और उसे कक्षा में साझा करें।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी पढ़कर स्वयं कविता की विशेषतओं की सूची बनाएँ और उसे कक्षा में साझा करें।

मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए।
उत्तर:

अनुमान या कल्पना से

(क) “दिये और तूफान की यह कहानी 
चली आ रही और चलती रहेगी”
दीपक और तूफान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
उत्तर: दिये और तूफ़ान की कहानी से अभिप्राय-अमीर-गरीब, सत्य-असत्य, हिंसा – अहिंसा, पाप-पुण्य आदि अच्छाई और बुराई से है।
अच्छाइयों और बुराइयों का टकराव होना स्वाभाविक है। इनके टकराव की कहानी युगों-युगों से चली आ रही है और आगे भी ऐसे ही चलती रहेगी।

(ख) “जली जो प्रथम बार लौ दीप की 
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
उत्तर: दीपक की यह सोने जैसी लौ आशा और उम्मीद का प्रतीक है। यह लौ अनगिनत सालों से जल रही है। हमारा जीवन अच्छे भविष्य की आशा का सहारा लेकर ही चलता है। यदि किसी कारणवश किसी की आशा और उम्मीद समाप्त हो जाए तो वह व्यक्ति सकारात्मक विचारों को छोड़कर निराशावादी बन जाता है। ऐसा व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो जाता है। इसलिए सभी के जीवन में आशा और उम्मीद की लौ जलाना और जलना दोनों आवश्यक है चाहे वह लौ मंद-मंद ही जले।

शब्दों के रूप

“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
“अमावस” का अर्थ है “अमावस्या”। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनमें मिलते-जुलते दूसरे शब्द खोजकर लिखिए।
शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।
1. दिया ______
2. उजेला ______
3. अनगिन _____
4. ______
5. _____
6. _______
उत्तर:
1. दिया – दीप
2. उजेला – उजाला
3. अनगिन – अनगिनत
4. दिन – दिवस
5. धरा – धरती
6. सिल – शिला

अर्थ की बात

(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर”
इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए ।
उत्तर:
 “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर” पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़ने से पंक्ति के अर्थ में बदलाव आ जाता है। ‘जलाते चलो’ से अभिप्राय है कि आप जा रहे है। स्नेह भर-भर के दीपक जलाते चलो किंतु ‘ रहो’ शब्द का प्रयोग करने से कार्य की निरंतरता का बोध हो रहा है। अर्थात आप हमेशा ही स्नेह के दिये जलाते रहें। यह प्रक्रिया रुके नहीं, सतत चलती रहे।
(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।

नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थ वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा—
1. बहाते चलो ________ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का _____ मिलेगा। (तट, तीर, किनारा)
उत्तर: 
नाव, किनारा

2.रहेगा _____ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
कभी तो निशा को ______ मिलेगा।। (प्रात:, सुबह, सवेरा)
उत्तर: 
धरा, सवेरा

3. जला दीप पहला तुम्हीं ने _____ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती _____ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
उत्तर: 
तिमिर, प्रथम

प्रतीक

(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा

निशा का अर्थ है — रात

सवेरा का अर्थ है — सुबह

आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ‘सुबह’ के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत — निशा से जुड़ा है ‘अंधेरा’ और सवेरा से जुड़ा है ‘उजाला’)

उत्तर: (क) निशा (अर्थात अँधेरा): यह जीवन में आने वाली कठिनाइयों, संघर्ष, और समस्याओं का प्रतीक हो सकता है।
यह निराशा, दुख, या जीवन में आने वाली कठिन घड़ियों का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है।
सवेरा (अर्थात उजाला): यह उम्मीद, नई शुरुआत, और सकारात्मकता का प्रतीक हो सकता है।
यह सफलता, समाधान, और जीवन में आने वाली खुशियों का भी संकेत कर सकता है।

(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।

उत्तर:

(ग) अपने समूह में मिलकर ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए।(संकेत – नीचे दिए गए चित्र देखिए और इन पर विचार कीजिए ।)


पंक्ति से पंक्ति

“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी ।
” अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए-

  1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर ।
  2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर ।
  3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
  4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।

उत्तर: 

  1. तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
  2. तुम ये दिये स्नेह से भर-भरकर जलाते चलो।
  3. इन्हें बुझाओ, नहीं तो इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।
  4. मगर आज विश्व पर दिवस के समय ही अमावस की रात-सी क्यों घिरी आ रही है?

सा/सी/से का प्रयोग

“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”
इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमें ‘सी’ शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है।
अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा / सी / से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: 

  1. वह बच्चा फूल-सा मासूम है।
  2. उसका चेहरा चाँद-सा चमक रहा है।
  3. उसकी आवाज़ शहद-सी मीठी है।
  4. वह व्यक्ति पर्वत-सा अडिग है।
  5. नदी का पानी आईना-सा साफ़ है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।”
यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए ।
उत्तर: 
मेरे द्वारा किए जाने वाले कुछ अच्छे कार्य-

  • मैं प्रातःकाल उठकर अपने घर के बड़ों के चरण-स्पर्श करता हूँ।
  • इसके पश्चात नहा-धोकर मैं घर के पौधों को पानी देता हूँ।
  • विद्यालय से आकर मैं अपना लंच बॉक्स और पानी की बोतल रसोई घर में रखता हूँ।
  • हमारे घर के पास एक वृद्ध आश्रम है। मेरी माँ और हम दोनों भाई-बहन वहाँ जाकर कुछ समय उन लोगों के साथ व्यतीत करते हैं।
  • शाम के समय मैं अपनी माँ के गृह कार्य में मदद करता हूँ। रात के समय सभी के कमरों में पानी रखकर आना मेरा काम है।

(ख) इस कविता में निरश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए ।
उत्तर: 
मेरी ही कक्षा में पढ़ने वाला मेरा मित्र अमित काफी समय से विद्यालय नहीं आ रहा था । अध्यापिका से पूछने पर पता चला कि उसके पापा काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे। बीमारी के चलते वे अपने व्यापार पर ध्यान नहीं दे पाए और उनके व्यापार के साझीदार उनके मित्र ने ही उन्हें धोखा दे दिया। नया सत्र आरंभ हुए दो महीने हो गए थे। नए पाठ्यक्रम का अमित को कुछ पता नहीं था। वह काफी होनहार छात्र है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जी ने उसकी फ़ीस माफ़ कर दी। पुस्तकों व अन्य सामान हम सहपाठियों ने उसे लेकर दे दिए। अपने पिता की बीमारी के कारण वह जीवन से निराश हो गया था। हमारे अध्यापक मंडल व हम मित्रों ने उसका हौंसला बढ़ाया। जो पाठ्यक्रम हो चुका था, उसकी फोटो कॉपी करवा कर हमने उसे दी। वह मेरे घर के पास ही रहता है। मेरे पापा हम दोनों को विद्यालय छोड़कर आते हैं और लाते भी हैं। मेरे पापा ने मुझे कुछ पुस्तकें लाकर दी थीं, जिनमें संकट के समय हार न मानने की प्रेरणा दी गई है। मैं प्रतिदिन उन पुस्तकों की कुछ पंक्तियाँ अमित को समझाता हूँ और लिखकर भी देता हूँ। अब उसके पापा काफ़ी ठीक हो गए हैं। मेरे मित्र में भी हिम्मत का संचार हो रहा है।

(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
उत्तर: 
मेरी मां ने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। वह कहती हैं कि हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। बीती हुई घटनाओं से कुछ सीखो और आगे बढ़ो। मुझे खेल की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। लेकिन मुझे डर भी बहुत लग रहा था। तब मेरी मां ही है जिसने मुझे प्रोत्साहित किया। उसने कहा की निराश मत होना हार, जीत तो चलता ही रहता है। लेकिन डर की वजह से खेल में शामिल ही ना होना यह गलत बात है। तुम हिस्सा लो और आज से खेल की तैयारी करनी शुरू करो।

अमावस्या और पूर्णिमा

(क) “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह
कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे। क्या चंद्रमा प्रतिदिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं। चंद्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है। आप जानते ही हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की ।
आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। लेकिन पृथ्वी के कारण सूर्य के कुछ प्रकाश को चंद्रमा तक जाने में रुकावट आ जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जो प्रतिदिन घटती-बढ़ती रहती है। सूरज का जो प्रकाश बिना रुकावट चंद्रमा तक पहुँच जाता है, उसी से चंद्रमा चमकदार दिखता है। इसी छाया और उजले भाग की आकृति में आने वाले परिवर्तन को चंद्रमा की कला कहते हैं।
चंद्रमा की कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा ‘दिखने लगता है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों को ‘कृष्ण पक्ष’ को कहते हैं। ‘कृष्ण’ शब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों को ‘शुक्ल पक्ष’ कहते हैं। ‘शुक्ल’ शब्द का एक अर्थ ‘उजला’ भी है।

उत्तर: अमावस्या और पूर्णिमा चंद्रमा के दो महत्वपूर्ण चरण हैं। अमावस्या वह समय है जब चंद्रमा का कोई भाग दिखाई नहीं देता, और पूर्णिमा वह समय है जब चंद्रमा पूरी तरह से प्रकाशित होता है। इन दोनों स्थितियों के बीच कई चरण होते हैं, जो प्रकृति के अद्भुत चक्र का हिस्सा हैं।
इसका यह अर्थ है कि जीवन में अंधकार (अमावस्या) और प्रकाश (पूर्णिमा) दोनों का होना स्वाभाविक है। अमावस्या हमें जीवन में संघर्ष और धैर्य का महत्व सिखाती है, जबकि पूर्णिमा यह सिखाती है कि हर कठिनाई के बाद उजाला आता है। यह चंद्रमा की सुंदरता और जीवन के संघर्षों को दर्शाता है।

(ख) अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए—
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)


उत्तर:

  • अमावस्या: यह वह चरण है जब चंद्रमा बिल्कुल दिखाई नहीं देता।
  • पूर्णिमा: यह वह चरण है जब चंद्रमा पूरा और चमकीला दिखता है।
  • कृष्ण पक्ष: यह चंद्रमा का वह चरण है जब पूर्णिमा के बाद चंद्रमा धीरे-धीरे घटने लगता है।
  • शुक्ल पक्ष: यह चंद्रमा का वह चरण है जब अमावस्या के बाद चंद्रमा धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

चित्र में पहचान:

  • सबसे काले चरण को अमावस्या कहेंगे।
  • सबसे चमकीले पूर्ण चंद्रमा को पूर्णिमा कहेंगे।
  • अमावस्या से पूर्णिमा के बीच वाले चरण शुक्ल पक्ष कहलाते हैं।
  • पूर्णिमा से अमावस्या के बीच वाले चरण कृष्ण पक्ष कहलाते हैं।

वर्त्तमान पत्र

(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर: इस महीने में कुल 31 दिन हैं।

(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस तारीख और वार को पड़ रही है?
उत्तर: पूर्णिमा 6 तारीख को और अमावस्या 21 तारीख को पड़ रही है।

(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
उत्तर: कृष्ण पक्ष की सप्तमी 14 तारीख को और शुक्ल पक्ष की सप्तमी 28 तारीख को है। दोनों में 14 दिनों का अंतर है।

(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर: कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं।

(ङ) ‘बसंत पंचमी’ की तारीख बताइए।
उत्तर: बसंत पंचमी 26 तारीख को है।

आज की पहेली

“समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तम्हारे पवन ने बुझाए ।”
‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा ।
नीचे एक अक्षर – जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।


उत्तर:


पवन, मारुत, बयार, समीर, हवा, वायु, वात, अनिल ।

खोजबीन के लिए

कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

  • हम सब सुमन एक उपवन के
  • बढ़े चलो
  • रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
  • रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2

उत्तर: यह पंक्ति हमें एकता और समरसता का संदेश देती है। इसमें यह बताया गया है कि हम सभी एक बगीचे के फूलों की तरह हैं, जो एक साथ मिलकर अपनी सुंदरता और सुगंध से दुनिया को बेहतर बनाते हैं।
यह कविताएं चाँद के बदलते रूपों का वर्णन करती हैं। इनमें बताया गया है कि चंद्रमा अमावस्या से पूर्णिमा तक और फिर पूर्णिमा से अमावस्या तक अपने विभिन्न रूपों को दिखाता है। यह प्रकृति की अनोखी प्रक्रिया का परिचय कराती हैं, जो हमारे जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है।

06. मेरी माँ – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) “किन्तु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।” बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी?

  • भारत माता के साथ रहने की
  • अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की
  • अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की
  • भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की

उत्तर: अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की (★)

(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?

  • देश की सेवा करें
  • कभी किसी के प्राण न लेना
  • कभी किसी से झूठ न बोलना
  • सदा सत्य बोलना

उत्तर: कभी किसी के प्राण न लेना (★) 

(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
उत्तर: पहले प्रश्न का उत्तर पाठ में स्पष्ट रूप से दिया गया है जहाँ बिस्मिल कहते हैं कि उनकी इच्छा है कि वे अपनी माँ की सेवा कर सकें, लेकिन यह पूरी होती नहीं दिखाई देती।
दूसरे प्रश्न का उत्तर भी पाठ में स्पष्ट है जहाँ लिखा है कि उनकी माँ का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राणहानि न हो।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा में अपने विचार साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।”
उत्तर:
 बिस्मिल की माँ के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा थी। क्रांतिकारी जीवन की प्रेरणा और सहयोग बिस्मिल को अपनी माँ से मिला। उन्होंने खुद को पूरी तरह से देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया।

(ख) “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”
उत्तर: 
बिस्मिल की माता जी ने उन्हें सबसे महत्वपूर्ण आदेश दिया था कि कभी किसी की जान न जाए। उन्होंने सिखाया था कि दुश्मन को भी मौत की सजा न मिले। बिस्मिल ने कुछ लोगों को मौत की सजा देने की प्रतिज्ञा ली थी, लेकिन उनकी माँ ने उनसे वादा लिया कि वे बदले में किसी की जान नहीं लेंगे।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
प्रश्न 1: बिस्मिल की माता जी जब ब्याह कर आईं तो उनकी ‘आयु काफ़ी कम थी।

(क) फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?
उत्तर: बिस्मिल की माँ का विवाह ग्यारह वर्ष की आयु में हुआ था, और ससुराल आते ही उन्होंने लगन से गृहकार्य सीख लिया और परिवार के काम-काज को कुशलतापूर्वक संभालने लगीं। बिस्मिल के जन्म के कुछ वर्षों बाद उन्होंने हिंदी पढ़ना सीखा और फिर बिस्मिल और उनकी बहनों को भी पढ़ाना शुरू कर दिया।

(ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?
उत्तर: बिस्मिल की माँ की इच्छाशक्ति बहुत दृढ़ थी। विवाह के कुछ वर्षों बाद, उन्होंने घर पर ही शिक्षित सहेलियों के संपर्क में आकर देवनागरी की किताबें पढ़ना सीख लिया। माताजी बहुत परिश्रमी थीं और गृहकार्य के बाद बचे समय में पढ़ाई करती थीं। इस प्रकार उन्होंने प्रबल इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

प्रश्न 2: बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माता जी ने कैसे सहयोग दिया?
उत्तर: 
बिस्मिल के व्यक्तित्व को आकार देने में उनकी माँ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। जीवन के हर मोड़ पर उन्होंने अपने पुत्र बिस्मिल को प्रेरित किया। कम उम्र में ही बिस्मिल ने अपनी माँ से प्रेरणा लेकर साहस, वीरता और देश सेवा का मार्ग चुना। अपनी जन्मभूमि के लिए समर्पित बेटे पर उनकी माँ को गर्व था। उन्होंने संकट के समय भी बिस्मिल को धैर्य बनाए रखने की सीख दी।

प्रश्न 3: आज से कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्व को समझती थीं, बताइए कैसे? 
उत्तर:
 बिस्मिल की माँ ने बचपन से ही उनमें प्रेम, साहस और दृढ़ता के गुण विकसित किए। अपने कम उम्र में विवाह के बावजूद, उन्होंने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ खुद को शिक्षित किया। बाद में, उन्होंने बिस्मिल और उनकी बहनों को भी पढ़ाया-लिखाया। अपनी शिक्षा और वाणी से उन्होंने बिस्मिल के जीवन में सकारात्मक मूल्यों का विकास किया। माँ के इस प्रोत्साहन के कारण ही रामप्रसाद धर्म के मार्ग पर चलकर अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके।

प्रश्न 4: हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं? 
उत्तर: 
रामप्रसाद बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली सशक्त महिला थीं। वे बिस्मिल को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं। शिक्षा के अलावा, वे उन्हें देशसेवा के लिए विभिन्न सम्मेलनों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। बिस्मिल की बहनों को भी उन्होंने छोटी उम्र में ही शिक्षा दी। अपनी माँ के स्वतंत्र और उदार विचारों के कारण ही बिस्मिल स्वाधीनता संग्राम की क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा ले सके और देश की आज़ादी के लिए संकल्पित हुए।

आत्मकथा की रचना
यह पाठ रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक अंश है। आत्मकथा यानी अपनी कथा। दुनया में अनेक लोग अपनी आत्मकथा लिखते हैं, कभी अपने लिए, तो कभी दूसरों के पढ़ने के लिए।

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की ऐसी सूचियाँ बनाइए जिनसे पता लगे कि लेखक अपने बारे में क्या कह रहा है।
उत्तर: आत्मकथा की रचना के लिए पाठ से पंक्तियाँ चुनना:

  • “मेरी माताजी देवी हैं।”
  • “मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है।”
  • “अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था, चाहे कुछ हो जाए, सत्य बात कह देता था।”
  • “लखनऊ कांग्रेस में जाने के लिए मेरी बड़ी इच्छा थी।”

(ख) अपने समूह की सूचियों को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: अध्यापक की सहायता से विद्यार्थीगण इस गतिविधि को पूर्ण करेंगे।

शब्द-प्रयोग तरह-तरह के

(क) “माता जी उनसे अक्षर-बोध करतीं।” इस वाक्य में अक्षर-बोध का अर्थ है- अक्षर का बोध या ज्ञान।
एक अन्य वाक्य देखिए— “जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं।” इस वाक्य में पढ़ना-लिखना अर्थात पढ़ना और लिखना।
हम लेखन में शब्दों को मिलाकर छोटा बना लेते हैं जिससे समय, स्याही, कागज़ आदि की बचत होती है। संक्षेपीकरण मानव का स्वभाव भी हैं। इस पाठ से ऐसे शब्द खोजकर सूची बनाइए।
उत्तर: 

  • डाँट-फटकार
  • काम-काज
  • उठना-बैठना
  • अंदर-बाहर
  • देश सेवा
  • पालन-पोषण

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के मित्रों के नाम खोजिए और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ के कुछ प्रसिद्ध मित्र थे:

  • शफाकउल्ला खान – काकोरी षड्यंत्र में साथी, क्रांतिकारी गतिविधियों में सहयोगी
  • चंद्रशेखर आजाद – हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य, साथी क्रांतिकारी
  • भगत सिंह – युवा क्रांतिकारी, बिस्मिल से प्रेरित
  • राजेंद्र लाहिड़ी – काकोरी षड्यंत्र में साथी

पुस्तकालय या इंटरनेट से

आप पुस्तकालय से रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा खोजकर पढ़िए।
देशभक्तों से संबंधित अन्य पुस्तकें, जैसे— उनके पत्र, आत्मकथा, जीवनी आदि पढ़िए और अपने मित्रों से साझा कीजिए।
उत्तर: 
रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा “निज जीवन की एक छटा”
अन्य देशभक्तों की आत्मकथाएँ या जीवनियाँ, जैसे:

  • ‘मेरे संस्मरण’ – भगत सिंह
  • ‘आत्मकथा’ – जवाहरलाल नेहरू
  • ‘सत्य के प्रयोग’ – महात्मा गाँधी

शब्दों की बात

आप अपनी माँ को क्या कहकर संबोधित करते हैं? अन्य भाषाओं में माँ के लिए प्रयुक्त संबोधन और माँ के लिए शब्द ढूँढ़िए।
क्या उनमें कुछ समानता दिखती है? हाँ, तो क्या?
उत्तर:

यहाँ दी गई वर्ग पहेली में पाठ से बारह विशेषण दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर पाठ में रेखांकित कीजिए।
उत्तर:

  • हिंदी: माँ
  • अंग्रेजी: Mother, Mom
  • संस्कृत: मातृ, जननी
  • बंगाली: मा
  • तमिल: आई
  • पंजाबी: माँ
  • गुजराती: बा
  • कश्मीरी: मोज
  • उड़िया: आई 
  • तेलुगु: अम्मा
  • मलयालम: अम्मा

अधिकांश शब्दों में ‘म’ ध्वनि की समानता दिखाई देती है।

आज की पहेली

झरोखे से

ऐ मातृभूमि !
ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो, सदा विजय हो ।
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो।
अज्ञान की निशा में, दुख भरी दिशा में;
संसार के हृदय में, तेरी प्रभा उदय हो।
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो।
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो।
वह भक्ति दे कि ‘बिस्मिल’ सुख में तुझे न भूले,
वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो।
– रामप्रसाद ‘बिस्मिल’
व्याख्या:
 यह कविता देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को व्यक्त करती है। कवि मातृभूमि की जय और विजय की कामना करता है। वह चाहता है कि मातृभूमि का प्रकाश अज्ञान और दुःख को दूर करें। कवि प्रार्थना करता है कि वह सुख में मातृभूमि को न भूलें और दुःख में कायर न हो।खोजबीन के लिए

माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ पुस्तकालय से खोजें और अपनी पत्रिका बनाएँ।
पाठ पर आधारित गतिविधियों को छात्र – छात्राएँ मिलकर अपने शिक्षकों की सहायता से पूर्ण करें।
उत्तर: 
माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ हैं, जैसे:

  • ‘माँ’ – मुंशी प्रेमचंद की कहानी
  • ‘माँ कह एक कहानी’ – सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता
  • ‘मेरी माँ’ – सुमित्रानंदन पंत की कविता
  • ‘माँ का आँचल’ – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविता
  • ‘माँ की याद’ – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता

04. हार की जीत – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए—

(1) सुल्तान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?

  • बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
  • बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
  • बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
  • बाबा भारती असावधान हो गए।

उत्तर: बाबा भारती असावधान हो गए। (★)

(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?

  • बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
  • बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
  • बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
  • बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।

उत्तर: बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया। (★)

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: बाबा भारती ने घोड़े को खो दिया, तो अब उन्हें चोरी का डर नहीं रहा । प्रशंसा चाहना एक सामान्य मानवीय भावना है, जो यह दर्शाता है कि बाबा भारती भी सामान्य मनुष्यों की तरह भावनाओं से युक्त थे।

शीर्षक

(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर: सुदर्शन ने इस कहानी को ‘हार की जीत’ इसलिए नाम दिया होगा क्योंकि बाबा भारती ने खड्गसिंह से घोड़ा खो दिया लेकिन उन्होंने खड्गसिंह को ऐसा संदेश दिया जिससे खड्गसिंह ने घोड़ा वापस कर दिया। यह वास्तव में बाबा भारती की नैतिक जीत थी, भले ही उन्होंने भौतिक रूप से हार मान ली थी।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
उत्तर: मैं इस कहानी को “विश्वास की शक्ति” नाम दूंगा क्योंकि कहानी का मुख्य संदेश विश्वास की शक्ति और ईमानदारी के महत्व को दर्शाता है।

(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
उत्तर: बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से यह वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा ताकि लोगों का गरीबों पर से विश्वास न उठ जाए।

पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-

  • “भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
  • “बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से । “
  • “वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
  • “बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
  • “उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”

उत्तर:

  • “भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”

अर्थ: यह पंक्ति बाबा भारती के घोड़े के प्रति गहरे लगाव को दर्शाती है। वे अपना अधिकांश समय भगवान की भक्ति में बिताते थे, और शेष समय पूरी तरह से घोड़े की देखभाल में।

  • “बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”

अर्थ: यह वाक्य दोनों पात्रों की मनोदशा को दर्शाता है। बाबा को अपने घोड़े पर गर्व था, जबकि खड्गसिंह घोड़े की असाधारण सुंदरता से चकित था।

  • “वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”

अर्थ: यह वाक्य खड्गसिंह के चरित्र की मूल प्रवृत्ति को दर्शाता है। वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।

  • “बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”

अर्थ: यह वाक्य बाबा भारती की असहायता और दुःख को व्यक्त करता है। वे जानते हैं कि वे खड्गसिंह को रोक नहीं सकते, इसलिए वे अपने प्रिय घोड़े को खोने की पीड़ा महसूस कर रहे हैं।

  • “उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”

अर्थ: यह वाक्य बाबा भारती की आदत और वर्तमान स्थिति के बीच के अंतर को दर्शाता है। वे अनजाने में घोड़े की देखभाल करने जा रहे थे, लेकिन फिर उन्हें याद आया कि घोड़ा अब उनके पास नहीं है।

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

“दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”

(क) किस-किस के आँसुओं का मिलन हो गया था?
उत्तर: बाबा भारती और खड्गसिंह के आँसुओं का मिलन हो गया था।

(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
उत्तर: बाबा भारती के आँसू खुशी और राहत के थे क्योंकि उन्हें उनका घोड़ा वापस मिल गया था, जबकि खड्गसिंह के आँसू पश्चाताप और शर्मिंदगी के थे।

दिनचर्या

(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।
उत्तर: बाबा भारती की दिनचर्या कुछ इस प्रकार हो सकती है:

  • सुबह जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करना।
  • भगवान का भजन करना और प्रार्थना करना।
  • घोड़े सुल्तान की देखभाल करना, उसे खाना खिलाना और उसके साथ समय बिताना।
  • दिन के समय गाँव के लोगों से मिलना और उनकी समस्याएँ सुनना।
  • शाम को सुल्तान के साथ घूमने जाना।
  • रात में भगवान का भजन करते हुए सोना।

(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।
उत्तर: दिनचर्या:
सुबह:

  • 6:00 AM: उठकर ताजगी के लिए कुछ मिनट ध्यान और योग करता हूँ।
  • 6:30 AM: नाश्ते के लिए फल और ओट्स या पोहा बनाता हूँ।
  • 7:00 AM: ताजगी से नहाकर तैयार होता हूँ और दिनभर की योजनाओं को जांचता हूँ।

दोपहर:

  • 12:00 PM: हल्का भोजन करता हूँ जिसमें दाल, चावल और सब्जियाँ शामिल होती हैं।
  • 1:00 PM: थोड़ी देर आराम करता हूँ या पढ़ाई करता हूँ।
  • 2:00 PM: काम या अध्ययन की गतिविधियों में व्यस्त रहता हूँ।

शाम:

  • 5:00 PM: ताजगी के लिए हल्की चाय या स्नैक के साथ शाम की चहलकदमी करता हूँ।
  • 6:00 PM: काम के परिणामों की समीक्षा करता हूँ और अगले दिन के लिए तैयारी करता हूँ।

रात:

  • 8:00 PM: रात के खाने में परिवार के साथ बैठकर भोजन करता हूँ।
  • 9:00 PM: आराम के लिए एक अच्छी किताब पढ़ता हूँ या टीवी देखता हूँ।
  • 10:00 PM: सोने से पहले थोड़ा ध्यान करता हूँ और अगले दिन की योजनाओं को आखिरी बार देखता हूँ।
  • 10:30 PM: सो जाता हूँ।

कहानी की रचना

(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर: इस कहानी की कई बातें मुझे बहुत पसंद आईं:

  • बाबा भारती का करुणा और दया भाव: कहानी में बाबा भारती का गरीब और अपाहिज व्यक्ति की मदद करने का भाव दर्शाता है कि वे कितने दयालु और करुणावान थे। यह दिखाता है कि सच्ची मानवता क्या होती है।
  • खड्गसिंह का परिवर्तन: कहानी का वह भाग जहाँ खड्गसिंह अपने किए पर पछताता है और बाबा भारती का घोड़ा वापस कर देता है, बहुत प्रेरणादायक है। यह दिखाता है कि किसी की सच्चाई और ईमानदारी कैसे एक व्यक्ति को बदल सकती है।
  • घोड़े सुल्तान की भूमिका: सुल्तान घोड़े का वर्णन और उसकी विशेषताएँ कहानी में जान डाल देती हैं। यह कहानी के भावनात्मक पहलू को और भी मजबूत बनाता है।
  • नैतिक शिक्षा: कहानी में दी गई नैतिक शिक्षा कि सच्चाई और ईमानदारी हमेशा जीतती है, मुझे बहुत पसंद आई। यह हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हमें अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए।
  • लेखक की भाषा शैली: सुदर्शन की लेखन शैली और संवाद बहुत प्रभावी और सजीव हैं। यह कहानी को पढ़ने में अधिक रोचक बनाते हैं।

इन सभी बातों ने मिलकर इस कहानी को बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक बना दिया है।

(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे— शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
उत्तर: इस कहानी के संवाद सरल, प्रभावी और सजीव हैं। संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनाएँ और विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त होते हैं, जिससे कहानी में वास्तविकता का अनुभव होता है।

मुहावरे कहानी से

(क) कहानी से चुनकर कुछ महावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
उत्तर: 

  • लट्टू होना: किसी चीज पर बहुत मोहित होना
  • हृदय पर साँप लोटना: अत्यधिक जलन या ईर्ष्या होना
  • फूले न समाना: अत्यधिक खुशी होना
  • मुँह मोड़ लेना: किसी से संबंध तोड़ लेना
  • मुख खिल जाना: खुशी से चेहरा चमक उठना
  • न्योछावर कर देना: समर्पित कर देना

(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
उत्तर: 

  • वह नई कार देखकर लट्टू हो गया।
  • उसकी सफलता देखकर मेरे हृदय पर साँप लोट गया।
  • परीक्षा में अच्छे अंक पाकर वह फूले न समा रहा था।
  • उसने धोखा देने वाले मित्र से मुँह मोड़ लिया।
  • पुरस्कार मिलने पर उसका मुख खिल गया।
  • उसने अपनी सारी संपत्ति गरीबों पर न्योछावर कर दी।

कैसे-कैसे पात्र

इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं— बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुल्तान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए।

उत्तर:

पाठ से आगे

सुलतान की कहानी

मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती ? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए ।
(संकेत- आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं – मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ…..)

उत्तर: मेरा नाम सुल्तान है। मैं एक घोड़ा हूँ और मेरे स्वामी बाबा भारती हैं। बाबा भारती मुझसे बहुत प्रेम करते हैं और मेरी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ते। एक दिन, खड्गसिंह नाम का डाकू मुझे चुराने आया। उसने चालाकी से बाबा को धोखा देकर मुझे ले जाने की कोशिश की, लेकिन बाबा की ईमानदारी और विश्वास ने उसे बदल दिया। अंततः, खड्गसिंह ने मुझे वापस लौटा दिया। इस घटना ने मुझे सिखाया कि सच्चाई और ईमानदारी हमेशा जीतती है।

मन के भाव

(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था।

  • चकित
  • अधीर
  • डर
  • प्रसन्नता
  • करुणा
  • निराशा

उत्तर: 

  • चकित: जब बाबा भारती ने देखा कि अपाहिज व्यक्ति घोड़े को लेकर भाग गया।
  • प्रसन्नता: जब बाबा भारती को उनका घोड़ा वापस मिल गया।
  • अधीर: जब बाबा भारती ने देखा कि उनका प्रिय घोड़ा सुल्तान गायब है।
  • करुणा: जब अपाहिज व्यक्ति ने बाबा भारती से मदद मांगी।
  • डर: जब बाबा भारती को लगा कि खड्गसिंह उनका घोड़ा चुरा ले जाएगा।
  • निराशा: जब बाबा भारती को लगा कि उनका घोड़ा चला गया है।

(ख) आप उपयुक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
उत्तर: 

  • करुणा: जब मैं किसी गरीब व्यक्ति को देखता हूँ।
  • आश्चर्य: जब मुझे कोई अप्रत्याशित उपहार मिलता है।
  • डर: जब मैं अंधेरे में अकेला होता हूँ।
  • प्रसन्नता: जब मैं अपने दोस्तों के साथ खेलता हूँ।
  • निराशा: जब मैं परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाता हूँ।

झरोखे से

आप जानते ही हैं कि लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। आइए, उनकी लिखी एक कविता पढ़ते हैं—
उत्तर:

वह चली हवा
वह चली हवा,
वह चली हवा |
ना तू देखे
ना मैं देखूँ
पर पत्तों ने तो देख लिया
वरना वे खुशी मनाते क्यों?
वह चली हवा,
वह चली हवा |
– सुदर्शन

साझी समझ

आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा ? आपस में चर्चा कीजिए और अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: कविता की अच्छाइयाँ:

  • सरलता और सुंदरता: कविता की भाषा सरल और प्रभावशाली है। “वह चली हवा, वह चली हवा” के दोहराव से कविता की लय और संगीतात्मकता को बढ़ावा मिलता है। यह सरलता कविता को हर किसी के समझने योग्य बनाती है।
  • प्राकृतिक दृश्य का चित्रण: हवा के गुजरने का दृश्य पत्तों की खुशी के माध्यम से व्यक्त किया गया है। यह प्राकृतिक दृश्य को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत करता है, जहाँ हवा की उपस्थिति को उसकी निरंतरता और प्रभाव के साथ जोड़ा गया है।
  • भावनात्मक प्रभाव: कविता में “पर पत्तों ने तो देख लिया वरना वे खुशी मनाते क्यों?” यह पंक्ति पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि चीजें भले ही हमें न दिखाई दें, लेकिन उनका प्रभाव स्पष्ट होता है। यह विचारशीलता और गहराई को जोड़ती है।
  • मूल्यांकन और प्रेरणा: कविता में छिपी हुई सच्चाई और संदेश यह है कि अक्सर हमें अपने आस-पास की चीजें ठीक से समझ में नहीं आतीं, लेकिन उनके प्रभाव को हम महसूस कर सकते हैं। यह सिखाती है कि सच्चाई और प्रभाव को समझने के लिए गहराई से देखने की आवश्यकता होती है।

खोजबीन के लिए

सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
उत्तर: 
सुदर्शन की कविताएँ और अन्य रचनाएँ उनके साहित्यिक योगदान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी रचनाएँ विविध विषयों और भावनाओं को छूने वाली होती हैं। यदि आप उनकी कुछ अन्य रचनाएँ पढ़ना और समझना चाहते हैं, तो निम्नलिखित संसाधनों की सहायता ले सकते हैं:

  • पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड: पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड को स्कैन करके आप सुदर्शन की अन्य रचनाओं को ऑनलाइन देख सकते हैं। ये कोड अक्सर सीधे लिंक या डिजिटल संग्रह की ओर ले जाते हैं जहाँ आप उनकी कविताएँ और लेख पढ़ सकते हैं।
  • इंटरनेट: सुदर्शन की रचनाओं को इंटरनेट पर खोजने के लिए आप विभिन्न साहित्यिक वेबसाइट्स और ब्लॉग्स का उपयोग कर सकते हैं। Google पर “सुदर्शन कविताएँ” या “सुदर्शन की रचनाएँ” सर्च करके आपको उनकी अन्य रचनाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है।
  • पुस्तकालय: यदि आपके पास एक पुस्तकालय की सुविधा है, तो आप वहाँ सुदर्शन की रचनाओं की पुस्तकें खोज सकते हैं। पुस्तकालय में साहित्यिक संग्रह में अक्सर प्रसिद्ध लेखकों और कवियों की रचनाएँ होती हैं।

03. पहली बूँद – Textbook Solutions

पाठ से
मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए:

1. कविता में ‘नव-जीवन की ले अगँडाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

  • बादल
  • अंकुर
  • बूँद
  • पावस

उत्तर:  अंकुर ★

2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पतुली- से ये जलधर’ में ‘काली पतुली’ है—

  • बारिश की बूँदें
  • वृद्ध धरती
  • नगाड़ा
  • बादल

उत्तर: बारिश की बूँदें ★ 

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
उत्तर:  “अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई” – यह पंक्ति स्पष्ट रूप से अंकुर के बारे में बात करती है।
“काली पुतली-से ये जलधर” – यहाँ जलधर का अर्थ बादल है, जो काली आँखों की पुतली के समान दिखते हैं।

मिलान करें

कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान किजिये


पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए:

“आसमान में उड़ता सागर, लगा बदलियों के स्वर्णिम पर, 
बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बाली धरती की तरुणाई।”
उत्तर:  इस पंक्ति का अर्थ है कि आकाश में जल से भरे बादलों के बीच बिजली इस तरह चमक रही है जैसे सागर ने सुनहरे पंख लगाकर उड़ान भर ली हो। बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों की तरह प्रतीत होती है, जो धरती की युवा शक्ति और सुंदरता को जाग्रत कर रही है।

“नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। 
करुणा-द्रवित अश्रु बहाकर, धरती की जड़-प्यास बुझाई।”
उत्तर:  इस पंक्ति का अर्थ है कि नीला आकाश नीली आँखों जैसा दिखाई देता है और काले बादल उन आँखों की काली पुतलियों जैसे लगते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो ये बादल धरती के दुःखों को देखकर द्रवित हो गए हों और करुणा के आँसू बनकर वर्षा के रूप में बह पड़े हों। इन आँसुओं ने धरती की सूखी और प्यासी जड़ों को तृप्त कर दिया।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए:

बारिश की पहली बूँद से धरती का हरित रूप कैसे प्रकट होता है?
उत्तर: बारिश की पहली बूँद धरती पर गिरते ही, धरती हरी-भरी और नई-जीवन का प्रतीक बन जाती है। यह बूँदें धरती को तरोताजा कर देती हैं और उसमें नयी ऊर्जा भर देती हैं।

कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
उत्तर: प्रस्तुत कविता के अनुसार, नीले आकाश को नीली आँखों के समान और काले बादल को उन नीली-नीली आँखों की काली पुतली के समान बताया गया है।

कविता की रचना

‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्तिका भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता है— समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं।
इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।

उत्तर: ‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई”
धरती से अंकुर का निकलना और उसे नव-जीवन की अंगड़ाई लेते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति में नए जीवन के जन्म और विकास को मानवीय क्रियाओं के माध्यम से दर्शाता है।
“हरी दूब पुलकी-मुसकाई”
हरी घास को मुस्कुराते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति के जीवंत होने और खुशी व्यक्त करने का भाव प्रस्तुत करता है।
“नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर”
आकाश को नीली आँखों के रूप में और बादलों को काली पुतलियों के रूप में चित्रित किया गया है। यह दृश्य प्राकृतिक तत्वों को मानवीय अंगों से जोड़कर एक अनूठा और कल्पनाशील चित्र प्रस्तुत करता है।
“करुणा-विगलित ‘अश्रु बहाकर”
बारिश की बूँदों को करुणा से भरे आँसुओं के रूप में दर्शाया गया है। यह दृश्य बारिश को एक भावनात्मक रूप देता है, जो धरती के प्रति सहानुभूति दर्शाता है।
“बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को फिर से ललचाई”
धरती को एक बूढ़ी महिला के रूप में दर्शाया गया है जो फिर से युवा और हरी-भरी होने के लिए लालायित है। यह दृश्य प्रकृति के पुनर्जन्म और नवीनीकरण की प्रक्रिया को मानवीय इच्छाओं के रूप में प्रस्तुत करता है।

शब्द एक अर्थ अनेक

‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ कविता की इस पंक्ति में ‘फूटने’ का अर्थ पौधे का अंकुरण है। ‘फूट’ का प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसे— फूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों, जैसे— अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो।
उत्तर:

  • दोस्तों में फूट पड़ गई।
  • उसका सिर फूट गया।
  • धरती से जल की धारा फूट पड़ी।
  • दीवार से टकराते ही उसकी एक आँख फूट गई।

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर’ कविता की इस पंक्ति में ‘जलधर’ शब्द आया है। ‘जलधर’ दो शब्दों से बना है, जल और धर इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र; दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलिए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल।
शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता से ‘धर’ से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:

शब्द पहेली

दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें

क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र
नगाड़ा

ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द
नयन

ग. जल को धारण करने वाला
जलधर

घ. एक प्रकार की घास
दूब

ङ. आँसू का समानार्थी
अश्रु

च. आसमान का समानार्थी शब्द
अंबर

पाठ से आगे

आपकी बात

(क)  बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
उत्तर: बारिश आने पर मुझे बहुत अच्छा लगता है। ठंडी-ठंडी बूँदों का स्पर्श बहुत सुखदायक होता है और मुझे यह समय बहुत आनंददायक लगता है। 

(ख)  आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।
उत्तर: मुझे सर्दी की ऋतु सबसे अधिक प्रिय है क्योंकि इस समय मौसम ठंडा और सुहावना होता है। गर्म कपड़े पहनने का मजा आता है और कई प्रकार के गर्म व्यंजन खाने को मिलते हैं।

समाचार माध्यमों से

(क) प्रत्येक मौसम समाचार के विभिन्न माध्यमों (इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट या सोशल मीडिया) के प्रमुख समाचारों में रहता है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठंड के समाचार देते दिखाई देते हैं। आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार।

  • अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है उसका आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: अत्यधिक गर्मी के समय मैंने देखा कि लोग छाया की तलाश में रहते हैं और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं। सर्दी के समय लोग आग के पास बैठकर खुद को गर्म रखते हैं। बारिश के समय लोग छतरी लेकर चलते हैं और बारिश से बचने के लिए शेल्टर की तलाश करते हैं।

सृजन

नाम देना भी सृजन है। ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और इसे एक नाम दीजिए।


उत्तर: रेगिस्तानी लिली या मरुस्थल का जीवन

खोजबीन

आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।
उत्तर:
 ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली, तबला, हारमोनियम, गिटार आदि।

आइए इंद्रधनुष बनाएँ

बारिश की बूँदें न केवल जीव-जंतुओं को राहत पहुँचाती हैं बल्कि धरती को हरा-भरा भी बनाती हैं। कभी-कभी ये बूँदें आकाश में बहुरंगी छटा बिखेरती हैं जिसे ‘इंद्रधनुष’ कहा जाता है। आप भी एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए और उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए | इसे कोई प्यारा सा नाम भी दीजिए।
उत्तर:

कितना प्यारा है इंद्रधनुष

आशाओं का संचार करता है
खुशियों का विस्तार करता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष,
जो प्रेम की पुकार बनता है।

वर्षा के बाद आकाश को सजाता है
बचपन के किस्सों को फिर से दोहराता है
रंग-बिरंगे रंगों से रंगकर सारा संसार,
इंद्रधनुष समृद्धि के गीत गुनगुनाता है,

प्रकृति का महिमामंडन करता है
निराशाओं का खंडन करता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष,
जो जीवन के हर पल का उत्सव बनाता है।

वीरता के किस्सों को सुनाता है
प्रेम का उत्सव मनाता है
कितना प्यारा है इंद्रधनुष
जो हमें आशावादी रहना सिखाता है।

02. गोल – Textbook Solution

पाठ से

​मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉक्की नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?

  • वे अत्यंत क्रोधी थे।
  • वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
  • उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
  • वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

उत्तर: वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉक्की का जादूगर’ कहना क्यों शुरू कर दिया?

  • उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
  • उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
  • हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
  • उनकी खेल भावना के कारण

उत्तर: उनके हॉक्की खेलने के विशेष कौशल के कारण


(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मेजर ध्यानचंद की सफलता का मूल उनकी उत्कृष्ट खेल भावना थी। यह कई उदाहरणों से स्पष्ट होता है:

  • उन्होंने हिंसा के बदले गोल करके बदला लिया।
  • वे मानते थे कि खेल में गुस्सा अच्छा नहीं।
  • उन्होंने सफलता के मंत्र में खेल भावना को शामिल किया।
  • वे अक्सर गोल का श्रेय साथी खिलाड़ियों को देते थे।
  • उनका मानना था कि जीत-हार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की होती है।

इसी खेल भावना के कारण लोगों ने उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा और वे दुनिया भर के खेल प्रेमियों के चहेते बने। उनकी यह भावना उनके कौशल और व्यक्तित्व का अभिन्न अंग थी।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

(क) “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।”
उत्तर:  यह वाक्य यह समझाता है कि जो व्यक्ति गलत काम करता है, वह हमेशा इस चिंता में रहता है कि उसके साथ भी वैसा ही बुरा व्यवहार होगा।

(ख) “मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूं ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”
उत्तर:  यह पंक्ति बताती है कि मेजर ध्यानचंद का मानना था कि खेल में व्यक्तिगत लाभ से ज्यादा टीम की भावना और सहयोग महत्वपूर्ण है। यही कारण था कि उन्होंने खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।

सोच-विचार के लिए

संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
उत्तर:  ध्यानचंद की सफलता का रहस्य उनकी लगन, साधना, और खेल भावना थी। उन्होंने खेल को सही भावना से खेला और हमेशा अपनी टीम को महत्व दिया।

(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
उत्तर:  ध्यानचंद हमेशा यह कोशिश करते थे कि वे गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दें ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। उन्होंने हमेशा टीम को प्राथमिकता दी और अपने व्यक्तिगत लाभ से पहले टीम की जीत को महत्व दिया।

संस्मरण की रचना

“उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।”
इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक आपसे यानी पाठक से अपनी यादों को साझा कर रहा है। इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देती हैं।

(क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर: 

  • यह संस्मरण व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है।
  • इसमें खेल भावना और अनुशासन का महत्व बताया गया है।
  • लेखक की सरलता और टीम भावना को दर्शाता है।
  • प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: 
विद्यार्थी के स्वयं करने योग्य।

शब्दों के जोड़े, निम्न प्रकार के

(क) “जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।”
इस वाक्य में ‘जैसे-जैसे’ और ‘वैसे-वैसे’ शब्दों के जोड़े हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार उपयोग में लाया गया है। ऐसे जोड़ों को ‘शब्द-युग्म’ कहते हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर: 

  1. धीरे-धीरे
  2. धीरे-धीरे
  3. छोटे-छोटे
  4. बड़े-बड़े
  5. साफ-साफ

(ख) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएं होती रहती हैं।”
इस वाक्य में भी आपको दो शब्द-युग्म दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन शब्द-युग्मों के दोनों शब्द आपस में मिलते-जुलते नहीं हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द आपस में मिलते-जुलते न हों।
उत्तर: 

  1. आना-जाना
  2. खाना-पीना
  3. उठना-बैठना
  4. सोना-जागना
  5. हंसना-रोना

(ग) हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बड़े मुझे घेरे लेते हैं।

इन वाक्यों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खिंची है, उन्हें ध्यान से पढ़िए एवं इन शब्दों को योजक की सहायता से भी लिख सकते हैं, जैसे— हार-जीत, बच्चे-बड़े आदि।
आप नीचे दिए गए शब्दों को योजक की सहायता से लिखिए—

  • अच्छा या बुरा
  • छोटा या बड़ा
  • अमीर या गरीब
  • उत्तर और दक्षिण
  • गुरु और शिष्य
  • अमृत या विष

उत्तर: शब्दों का योजक द्वारा संधि रूप:

  • अच्छा-बुरा
  • छोटा-बड़ा
  • अमीर-गरीब
  • उत्तर-दक्षिण
  • गुरु-शिष्य
  • अमृत-विष

बात पर बल देना

“मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।”
“मैंने तो अपना बदला ले लिया है।”
इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? ध्यान दीजिए और बताइए। सही पहचाना! दूसरे वाक्य में एक शब्द कम है। उस एक शब्द के न होने से वाक्य के अर्थ में भी थोड़ा अंतर आ गया है।
हम अपनी बात पर बल देने के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे— ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’ आदि। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए। ध्यान दीजिए कि यदि उन वाक्यों में ये शब्द न होते तो उनके अर्थ पर इसका क्या प्रभाव पड़ता।
उत्तर: बात पर बल देने वाले शब्द ‘निपात’ कहलाते हैं।

  • मेरे इतना कहते ही खिलाड़ी घबरा गया।
  • अब हर समय मुझे ही देखते रहना ।
  • अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता ।
  • तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग ।
  • उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
  • मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।
  • लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।

यदि वाक्यों में ‘ही’ ‘भी’ ‘तो’ आदि शब्दों का प्रयोग न किया जाए तो ये सामान्य वाक्य का रूप ले लेते हैं और ये शब्द वाक्य को प्रभावी बनाते हैं।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?
उत्तर: यह छात्रों के विचार पर निर्भर करता है। कुछ छात्र कह सकते हैं कि वे बदला लेते और कुछ कह सकते हैं कि वे नहीं लेते।

(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?
उत्तर: यह छात्रों की पसंद पर निर्भर करता है। वे अपने पसंदीदा खेल और खिलाड़ी का नाम और कारण बता सकते हैं।

समाचार-पत्र से

(क) क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तक में लिखिए।
उत्तर:  खेल के दो विशेष नियम

  1. गेंद को शरीर के किसी भी अंग से न छूना, न रोकना।
  2. गेंद को हवाई शॉट न मारना और न उसे हवा में शॉट खेलकर साथी खिलाड़ी को पास देना।

बाकी लकड़ी से आप गेंद को रोक सकते हैं या हिट कर सकते हैं। आगे जैसा कि बता चुके हैं, जो दल बीच की रेखा को पार करके विरोधी दल के क्षेत्र में अधिक से अधिक दबाव या प्रवेश बनाए रखता है, वह विजयी होता है।

(ख) मान लीजिए कि आप एक खेल-संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं। अपने समूह के साथ मिलकर कक्षा में उस खेल का आँखों देखा प्रस्तुत कीजिए।
(संकेत- इस कार्य में आप आकाशवाणी या दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले खेल-प्रसारणों की कमेंट्री की शैली का उपयोग कर सकते हैं। बारी-बारी से प्रत्येक समूह कक्षा के सामने डेस्क या कुर्सियों पर बैठ जाएगा और पाँच मिनट के लिए किसी खेल के सजीव प्रसारण की कमेंट्री का अभिनय करेगा।)

उत्तर:  छात्र स्वयं करें

संदर्भ के लिए:
परिस्थिति: मान लीजिए कि मैं एक खेल-संवाददाता हूँ और क्रिकेट मैच का आँखों देखा हाल प्रस्तुत कर रहा हूँ।

कमेंट्री:
“नमस्कार, दोस्तों! मैं हूँ आपका खेल-संवाददाता और हम इस समय लाइव जुड़े हैं एक रोमांचक क्रिकेट मैच से! मैदान में जबरदस्त उत्साह है, दर्शक तालियों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। और यह रहा अगला गेंद… बल्लेबाज ने जोरदार शॉट मारा… और यह गया सीधा बाउंड्री लाइन के पार… चार रन!!! दर्शकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। गेंदबाज अगली गेंद के लिए तैयार… यह रही गेंद… और आउट!!! कैच आउट हो गया बल्लेबाज! शानदार फील्डिंग!! अब देखते हैं कि नया बल्लेबाज टीम को कैसे आगे बढ़ाता है।”

01. मातृभूमि – Textbook Solutions

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा बनाइए-

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
(i) चरण
(ii) वंशी
(iii) हिमालय
(iv) सिंधु
उत्तर:  सिंधु

सिंधु शब्द हिंद महासागर के लिए प्रयुक्त हुआ है क्योंकि यह प्राचीन काल से ही समुद्र के संदर्भ में इस्तेमाल होता रहा है।

(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से-
(i) भारत की प्रशंसा की गई है।
(ii) भारत के महापुरूषों की जय की गई है।
(iii) भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
(iv) भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।
उत्तर:  भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।

भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है क्योंकि कविता में भारत की नदियाँ, पर्वत, वन और अन्य प्राकृतिक तत्वों की महिमा का गुणगान किया गया है।


(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: (1) हिंद महासागर का प्राचीन नाम ‘सिंधु महासागर’ था जो प्राचीन भारतीयों द्वारा रखा गया था। भारत के नाम पर इस सागर का नाम ‘हिंद महासागर’ रखा गया। कविता में सोहनलाल द्विवेदी ने हिंद महासागर से अपनत्व के कारण इसे सिंधु नाम से पुकारा इसलिए ‘सिंधु’ शब्द का विकल्प, चयन करना उचित होगा।
(2) ‘मातृभूमि’ कविता में कवि सोहनलाल जी ने भारत के पर्वतों, नदियों, वृक्षों, मलय, पवन, घनी अमराइयों आदि की चर्चा अधिक की है इसलिए भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। विकल्प का चयन उचित है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

उत्तर: 

  • हिमालय – भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
  • त्रिवेणी – तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
  • मलय पवन – दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
  • सिंधु – समुद्र, एक नदी का नाम।
  • गंगा-यमुना – भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
  • रघुपति – श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
  • श्रीकृष्ण – वसुदेव के पुत्र वासुदेव।
  • सीता – जनक की पुत्री, जानकी।
  • गीता – एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवदगीता’।
  • गौतम बुद्ध – एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-
“वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी|”
उत्तर:  कवि ने भारत को ‘युद्ध भूमि मेरी’ कहा क्योंकि भारत की भूमि सदा संघर्ष की भूमि रही है यह हमें हर तरह के अभाव, अज्ञान और दुख से लड़ना सिखाती है। भारत पर कितने ही शासकों ने शासन किया लेकिन भारतीयों ने अपनी सभ्यता एवं संस्कृति पर आँच नहीं आने दी। कवि भारत को बुद्धभूमि कहा क्योंकि महात्मा बुद्ध ने भारतीयों को प्रेम, दया एवं अहिंसा का संदेश दिया ताकि भारत में अखंडता न रहे।
आत्मसम्मान व आंतरिक लगाव के कारण कवि इसे मातृभूमि की संज्ञा देता है। अंत में कवि इस पावन धरती को जन्मभूमि कहा क्योंकि वह इसी धरती पर जन्मा है और उसे भारत की गौरवमयी धरती पर जन्म लेने पर अत्यधिक गर्व है।

सोच-विचार के लिए

(क) कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(i) कोयल कहाँ रहती है?
उत्तर: कोयल अमराइयों (आम के बगीचों) में रहती है, जहाँ वह मधुर गीत गाती है।

(ii) तन-मन कौन सँवारती है?
उत्तर: मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित पवन तन-मन को सँवारती है।

(iii) झरने कहाँ से झरते हैं?
उत्तर:  झरने पहाड़ियों से झरते हैं, जहाँ वे कल-कल करते हुए बहते हैं।

(iv) श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने गीता सुनाई थी।

(v) गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
उत्तर: गौतम बुद्ध ने दया, प्रेम और अहिसा का संदेश देकर भारत का यश बढ़ाया।


(ख) “नदियाँ लहर रही हैं 
पग पग छहर रही हैं?
‘लहर’ का अर्थ होता है— पानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश
‘छहर’ का अर्थ होता है— बिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना

कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए-

(i) कहाँ-कहाँ छटा छहर रही हैं?
उत्तर:
 प्रयागराज में जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का मिलन होता है, उसके आस-पास दूर-दूर तक लहरों अर्थात धाराएँ छहर रही हैं अर्थात उनकी सुंदरता चारों ओर छिटककर, बिखरकर मन – मोह रही है

(ii) किसका पानी लहर रहा है?
उत्तर: 
 प्रयागराज में जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का पानी लहरा – लहरा कर बह रहा है। ऐसा लगता है कि मानो ये तीनों नदियाँ मिलकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रही हैं।

कविता की रचना

“गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैंग
‘यमुन’ शब्द यहाँ ‘यमुना’ नदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इस प्रकार से शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। यदि आप कविता को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिखिए। जैसे सबसे ऊपर इस कविता का एक शीर्षक है।

उत्तर: “नीचे चरण टेल झुक,
नित सिंधु झूमता है।”
‘सिंधु’ शब्द यहाँ ‘हिन्द महासागर’ के लिए आया है।
अमराइयाँ घनी हैं 
कोयल पुकारती है,
‘अमराइयाँ’ शब्द यहाँ ‘आम के पेड़’ के लिए आया है।
बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।
‘मलय’ शब्द यहाँ ‘सुगंधित’ लिए आया है।
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।
‘पुनीत’ शब्द यहाँ ‘पवित्र’ अथवा ‘शुद्ध’ के लिए आया है।
गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
‘जिसका’ शब्द यहाँ ‘भारत देश के लिए आया है।

मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए—

उत्तर:

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) “अमराइयाँ’ घनी हैं
कोयल पुकारती है”
कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?
उत्तर: 
वसंत श्रतु के आने से वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि कोयल प्रसन्न होकर मधुर गीत गाकर अपने साथी व्र अन्य कोयल साथियों को पुकार रही होगी। कोयल मीठी और लयबद्ध स्वर में पुकार रही होगी।

(ख) “बहती मलय पवन है,
तन मन सँवारती है”
पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है?
उत्तर: 
पवन सभी जीव-जंतुओं और मानव का तन-मन सँचारती हैं। मलय पवन अपनी शीतल हवा और सुगंध से सभी औवों का शारीरिक और मानसिक ताजगी प्रदान करती हैं।

शब्दों के रूप

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-
“जगमग छटा निराली
पग पग छहर रही हैं।”

इन पंक्तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए-

  1. घर-घर: ___________________
  2. बाल-बाल: ___________________
  3. साँस-साँस:  ___________________
  4. देश-देश:  ___________________
  5. पर्वत-पर्वत:  ___________________

उत्तर: 

  1. घर-घर: प्रत्येक घर
  2. बाल-बाल: हर बाल (सही सलामत)
  3. साँस-साँस: हर साँस
  4. देश-देश: हर देश
  5. पर्वत-पर्वत: हर पर्वत

(ख) “वह युद्ध-भूमि मेरी, 
वह बुद्ध-भूमि मेरी”
कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए-
(संकेत — तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)
उत्तर: 

थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-
“जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।”
‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा -घड़ी।
उत्तर: 
चाँद-चाँदी, घट-घाट, चना-चीन, मेला – मैला, दान – दिन

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए।
(संकेत— प्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)
उत्तर: मैं भारत के राजस्थान राज्य में रहता हूँ। यहाँ की मरुस्थलीय सुंदरता और रेत के टीलों की अद्भुत छटा देखते ही बनती है। यहाँ का खान-पान मुख्यतः दाल-बाटी-चूरमा और गट्टे की सब्जी है। राजस्थान का जलवायु गर्मी में बहुत तप्त और सर्दियों में ठंडी रहती है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध स्थान जयपुर का हवा महल और जैसलमेर का सोनार किला है।

(ख) अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?
उत्तर: मेरे मित्र का नाम रोहन है। उसकी सबसे अच्छी बात यह है कि वह हमेशा हर किसी की मदद करने को तैयार रहता है। वह पढ़ाई में बहुत होशियार है और हर मुश्किल विषय को आसानी से समझा लेता है।

वंशी-से

श्रीकृष्ण ने सुनाई
वंशी पुनीत गीता

‘वंशी’ बाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एक ‘वाद्य’ यानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं। इनके नाम शब्द-जाल से खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।

उत्तर: 

आज की पहेली

नीचे दिए गए अक्षरों को मिलाकर कोई सार्थक शब्द बनाइए। अक्षरों को आगे-पीछे किया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से किसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते हैं। पहला शब्द हमने आपके लिए पहले ही बना दिया है।
उत्तर: 

साझी समझ

आपने ‘मातृभूमि’ कविता को भी पढ़ा और ‘वंदे मातरम्’ को भी अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।
उत्तर: विविधता:
 ‘मातृभूमि’ कवित में भूमि को अनेक नामों से संबोधित किया गया है–स्वर्ण भूमि जन्म भूमि, कर्म भूमि, धर्म भूमि आदि।
समानता: दोनों कविताओं में भूमि के प्रति सम्मान का भाव प्रकट किया गया है।

10. परीक्षा – Chapter Notes

लेखक परिचय

‘परीक्षा’ प्रेमचंद द्वारा रचित एक कहानी है, जो सच्चे नेतृत्व, विनम्रता और आंतरिक गुणों के महत्व पर आधारित है।। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि असली नेतृत्व बाहरी दिखावे या योग्यता में नहीं, बल्कि व्यक्ति के आंतरिक गुणों में निहित होता है। प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के महान लेखक माने जाते हैं। उनका असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। अपने लेखन में उन्होंने समाज की कुरीतियों और सामाजिक विषमताओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। उनकी कहानियाँ आम जनजीवन, गरीबी, समाज और जीवन की सच्चाइयों को सामने लाती हैं। 

मुख्य विषय

कहानी का मुख्य विषय समाज में सच्ची योग्यता और सेवा भावना की पहचान है। एक सच्चे और समझदार व्यक्ति की पहचान उसके कार्यों और दूसरों के प्रति सहानुभूति में निहित होती है। इस कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि पद या प्रतिष्ठा केवल योग्यता के आधार पर ही मिलने चाहिए, और जो सही मायनों में दयालु और सक्षम हैं, वही इस प्रकार के उच्च पद के हकदार होते हैं।

कहानी का सारकहानी की शुरुआत दवेगढ़ रियासत के दीवान, सरदार सुजानसिंह, से होती है। वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं और अपनी बढ़ती उम्र के कारण अपने पद से सेवानिवृत्त होना चाहते हैं। दीवान साहब, जो वर्षों से रियासत की सेवा कर रहे हैं, राजा से निवेदन करते हैं कि वे उनके स्थान पर एक योग्य उत्तराधिकारी का चयन करें। राजा, दीवान साहब की अनुभवशीलता और उनके प्रति विश्वास को देखते हुए, उन्हें ही नए दीवान का चयन करने की जिम्मेदारी सौंपते हैं।

विज्ञापन के बाद, देशभर से कई उम्मीदवार दवेगढ़ में एकत्रित होते हैं। ये सभी अपने श्रेष्ठता और योग्यताओं को विभिन्न तरीकों से प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग अपने कपड़ों और फैशन से, जबकि कुछ अपने ज्ञान और समझ से, अपनी योग्यताओं को दिखाने का प्रयास करते हैं। उम्मीदवार इस सोच में होते हैं कि यदि वे बाहरी रूप से अच्छे दिखें और अपने व्यवहार में श्रेष्ठता दिखाएं, तो उन्हें दीवान के पद के लिए चुना जा सकता है।

नया दीवान खोजने की प्रक्रिया

नए दीवान की नियुक्ति के लिए एक सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया जाता है। इस विज्ञापन में स्पष्ट किया जाता है कि उम्मीदवार के लिए स्नातक होना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसे शारीरिक रूप से स्वस्थईमानदार, और जिम्मेदार होना चाहिए। उम्मीदवारों को बताया जाता है कि उनकी योग्यता के साथ-साथ उनके चरित्र का भी परीक्षण किया जाएगा।

किसान की मदद का दृश्य

कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब सभी उम्मीदवार एक खेल में व्यस्त होते हैं। उसी समय, एक गरीब किसान अपनी गाड़ी लेकर वहां से गुजरता है। दुर्भाग्यवश, उसकी गाड़ी कीचड़ में फंस जाती है और वह उसे बाहर निकालने में असमर्थ होता है। वह बार-बार प्रयास करता है, लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार जाती हैं। वह आसपास के लोगों से मदद की उम्मीद करता है, लेकिन सभी उम्मीदवार, जो अपनी छवि और प्रतिष्ठा को बनाए रखने में व्यस्त होते हैं, उसकी परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं।

उसी समय, एक युवक, जो खेल के दौरान घायल हो गया था, उस किसान की परेशानी को देखता है। उस युवक के अंदर करुणा और साहस का भाव उमड़ता है। वह बिना किसी हिचकिचाहट के किसान की मदद के लिए आगे बढ़ता है। वह अपने कपड़े उतारकर, पूरी ताकत से गाड़ी को धक्का देने लगता है। अंततः, उसकी मदद से किसान की गाड़ी कीचड़ से बाहर निकल जाती है।

सच्चे नेतृत्व का चयन

इस घटना को गुप्त रूप से देख रहे दीवान सरदार सुजानसिंह, उस युवक की निःस्वार्थता और दयालुता से प्रभावित होते हैं। उन्हें एहसास होता है कि सच्चे नेतृत्व के लिए केवल बाहरी योग्यता नहीं, बल्कि आंतरिक गुण भी आवश्यक हैं। वह युवक, जिसने बिना किसी स्वार्थ के किसान की मदद की, उन्हें रियासत के दीवान के रूप में सही उम्मीदवार लगता है।

अंततः, दीवान साहब राजा के दरबार में सभी उम्मीदवारों के सामने उस युवक को नए दीवान के रूप में घोषित करते हैं। यह घोषणा अन्य उम्मीदवारों को चौंका देती है, क्योंकि वे समझ नहीं पाते कि केवल एक साधारण से दिखने वाले युवक को क्यों चुना गया। लेकिन दीवान साहब स्पष्ट करते हैं कि सच्चा नेता वही है, जिसमें करुणा, साहस, और निःस्वार्थ सेवा की भावना हो।

कहानी की मुख्य घटनाएं

  • दीवान सरदार सुजानसिंह की सेवा निवृत्ति की प्रार्थना।
  • नए दीवान के लिए विज्ञापन का प्रकाशन।
  • सैकड़ों उम्मीदवारों का देवगढ़ में आना।
  • उम्मीदवारों की जांच और रहन-सहन।
  • किसान की गाड़ी कीचड़ में फंसना।
  • एक युवक द्वारा किसान की मदद।

कहानी से शिक्षाकहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्चा नेतृत्व वही है जिसमें दया, साहस और आत्मबल हो। बाहरी दिखावा महत्वहीन होता है, जबकि इंसान का आचरण और व्यवहार ही उसकी वास्तविक पहचान होती है। निःस्वार्थ सेवा और परोपकार ही सच्ची मानवता है।

शब्दावली

  1. दीवान: राज्य का प्रमुख मंत्री
  2. विनय: निवेदन
  3. रहन-सहन: जीवन शैली
  4. आत्मबल: आत्मा की शक्ति
  5. उदारता: दानशीलता
  6. नसीब: भाग्य
  7. संकल्प: दृढ़ निश्चय

निष्कर्षइस कहानी का निष्कर्ष यह है कि समाज में ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो निःस्वार्थ सेवा, दया, और साहस के साथ कार्य करें। बाहरी दिखावा और नकली आदर्शों से कुछ नहीं होता, बल्कि सच्चे आदर्शों और नैतिक मूल्यों का पालन करना ही महत्वपूर्ण है। प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से यही संदेश देने का प्रयास किया है कि दयालु और साहसी व्यक्ति ही समाज का सच्चा नेता होता है।

09. मैया मैं नहीं माखन खायो – Chapter Notes

कवि परिचयसूरदास एक प्रतिष्ठित संत, कवि और गायक थे। उन्हें हिंदी भक्ति साहित्य के महत्वपूर्ण कवियों में गिना जाता है। वे भगवान कृष्ण के परम भक्त थे और उनके पदों में कृष्ण की बाल लीलाओं का गहरा वर्णन किया गया है। उनके काव्य में प्रेम, भक्ति और करुणा का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है।

मुख्य विषय

इस कविता का प्रमुख विषय भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी मासूमियत को दर्शाना है। इसके अलावा, यह कविता माँ और बेटे के रिश्ते की मिठास और उनके बीच के विश्वास को भी प्रस्तुत करती है।

कविता का सार’मैया मैं नहिं माखन खायो’ कविता में सूरदास जी ने बालक कृष्ण और उनकी माँ यशोदा के बीच हुए संवाद को बहुत ही सरल और सुंदर शब्दों में वर्णित किया है। कविता की शुरुआत में कृष्ण अपनी माँ से कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। वे बताते हैं कि सुबह से ही वे गैयन (गायों) के पीछे मधुबन (वन) में चले गए थे और वहां चार पहर तक बंसीवट (वृक्ष) के पास भटकते रहे। शाम होने पर वे घर लौटे।

कृष्ण कहते हैं कि वे छोटे बच्चे हैं, उनकी बाहें छोटी हैं, और वे छींके से माखन नहीं निकाल सकते। ग्वाल-बाल (गाय चराने वाले बालक) उनके विरुद्ध हैं और जबरदस्ती उनके मुख पर माखन लगा दिया। कृष्ण अपनी माँ को यह भी कहते हैं कि वह दिल से बहुत भोली हैं और दूसरों की बातों पर जल्दी विश्वास कर लेती हैं।

अंत में, कृष्ण अपनी माँ को उनकी कमरिया (दुपट्टा) देते हुए कहते हैं कि उन्होंने उन्हें बहुत नचाया है। यशोदा, सूरदास के अनुसार, इस मासूमियत भरे उत्तर को सुनकर हंस पड़ती हैं और कृष्ण को अपने गले से लगा लेती हैं।

पद की व्याख्या

मैया मैं नहिं माखन खायो ।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो ।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो ।।
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो ।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो ।।
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो ।
जिय तेरे कछु भेद उपज हैं, जानि परायो जायो।।
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो ।
सूरदास तब बिहाँस जसोदा, लै उर कंठ लगायो।।

व्याख्या: कवि सूरदास जी के पदों में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत ही मनमोहक चित्रण किया गया है। माता यशोदा उनके बाल- विनोद को देखकर बहुत खुश होती हैं। इस पद में कवि ने श्रीकृष्ण के नटखट स्वभाव का सुंदर वर्णन किया है। सूरदास जी श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। इस पद में श्रीकृष्ण माखन चुराकर खाते हैं। जब उनकी चोरी पकड़ी जाती है, तो माता यशोदा उनसे माखन चुराने का कारण पूछती हैं। श्रीकृष्ण मना करते हुए कहते हैं, “माँ, मैंने माखन नहीं खाया है। तुम मुझे रोज़ सुबह गायों के पीछे मधुबन भेज देती हो, और वहां बंसीवट के पास चार पहर (पूरा दिन) बिता देता हूँ। फिर शाम को घर लौटता हूँ।” माँ पूछती हैं, “फिर तेरे मुँह पर माखन कैसे लगा?” तो कृष्ण चंचलता से उत्तर देते हैं, “मैंने माखन नहीं खाया। मैं तो बहुत छोटा हूँ, मेरे हाथ भी छोटे हैं। मैं कैसे ऊँचे छीके से माखन चुरा सकता हूँ? ग्वाल-बालों ने मिलकर अपनी शरारत के कारण मुझसे माखन चुराकर मेरे मुँह पर लगा दिया है। माँ, तुम तो बहुत भोली हो, जो इनकी बातों में आ जाती हो।” फिर कृष्ण माँ से कहते हैं, “तुम मुझे पराया समझकर इनकी बातों में आकर ऐसा कह रही हो।” फिर नाराज़गी दिखाते हुए कहते हैं, “ये अपनी लंकुटी और कमरिया ले लो, तुमने मुझे बहुत परेशान किया है।” इस पर माता यशोदा हँस पड़ती हैं और कृष्ण को प्यार से गले से लगा लेती हैं। बच्चों की शरारत और ज्ञान- भरी बातों को सुनकर माता-पिता का क्रोध समाप्त हो जाता है और वे प्रसन्न हो जाते हैं।

कविता की मुख्य घटनाएं

  • कृष्ण का माखन चोरी का आरोप खंडन।
  • गायों के पीछे वन जाने का विवरण।
  • ग्वाल-बाल द्वारा जबरदस्ती मुख पर माखन लगाना।
  • यशोदा की भोलेपन पर टिप्पणी।
  • यशोदा का कृष्ण को गले लगाना।

कविता से शिक्षा

  • सच्चाई और मासूमियत की शक्ति।
  • माता-पिता और बच्चों के बीच का स्नेहपूर्ण रिश्ता।
  • किसी भी परिस्थिति में सच्चाई का साथ न छोड़ना।
  • निर्दोषता की अहमियत और मूल्य।

शब्दावली

  • माखन: मक्खन
  • गैयन: गायें
  • मधुबन: वन या जंगल
  • बंसीवट: वृक्ष
  • बैर: विरोधी
  • छीको: छींका, वह स्थान जहाँ माखन रखा जाता है
  • पतियायो: विश्वास करना
  • बिहँसि: हँसना

निष्कर्ष‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ कविता भगवान श्रीकृष्ण के बचपन की मासूमियत और सच्चाई को उजागर करती है। सूरदास जी ने इस कविता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सच्चाई और सरलता हमेशा दिल को छूती है और यही वास्तविकता है। कृष्ण और यशोदा के इस प्रेमपूर्ण संवाद से हमें यह सीख मिलती है कि माता-पिता और बच्चों के बीच का स्नेह कभी नहीं टूटना चाहिए और हमें सच्चाई का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

08. सत्रिया और बिहू नृत्य – Chapter Notes

लेखक परिचय

जया मेहता एक जानी-मानी लेखिका हैं जिनका भारतीय संस्कृति और नृत्य कला में गहरा रुचि है। उन्होंने अपने लेखन के जरिए असम की संस्कृति, विशेष रूप से सत्रिया और बिहू नृत्य, को व्यापक रूप से परिचित कराया है। उनके लेखन में भारतीय परंपरा, लोक कला और क्षेत्रीय नृत्य शैलियों का गहरा ज्ञान और समझ प्रकट होती है।

अनुवादक: शिवेंद्र कुमार सिंह

शिवेंद्र कुमार सिंह एक अनुभवी अनुवादक हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य में कई महत्वपूर्ण कृतियों का अनुवाद किया है। उनका अनुवाद सरल और स्पष्ट भाषा में होता है, जिससे पाठक मूल भाव को आसानी से समझ पाते हैं।

मुख्य विषय

इस पाठ का मुख्य विषय असम के पारंपरिक नृत्य – सत्रिया और बिहू – की महत्ता और सांस्कृतिक विशेषताएँ हैं। सत्रिया नृत्य असम की प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है, जिसमें भक्ति भाव और शास्त्रीय तत्वों का समावेश है। वहीं, बिहू नृत्य असम के किसानों द्वारा फसल कटाई के दौरान मनाए जाने वाले त्योहार का हिस्सा है, जो जीवंतता और उल्लास का प्रतीक है। इस पाठ के माध्यम से इन दोनों नृत्यों के जरिए असम की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें समुदाय, परंपरा और प्रकृति के साथ गहरा संबंध दिखाया गया है।

कहानी का सारयह कहानी एंजेला नाम की एक छोटी लड़की की है, जो लंदन में रहती थी। एंजेला का जीवन लंदन में काफी सामान्य था; उसका स्कूल उसके घर के पास है, और वह अपने दोस्तों जेम्स और कीरा के साथ समय बिताने में खुश रहती है। ये तीनों बच्चे मिलकर कल्पनाओं की दुनिया में खो जाने वाले खेल खेलते हैं। एंजेला को उन कहानियों में बहुत मज़ा आता है जिनमें ताजमहल, एफिल टॉवर, या कोलोजियम जैसी जगहों की यात्रा शामिल होती है। वह अपनी माँ, एलेसेंड्रा, से बहुत प्रभावित थी, जो एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता थीं और लंदन की प्रतिष्ठित ‘ब्रिटिश एकेडमी’ से मिली सहायता के साथ असम की नृत्य परंपराओं पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने जा रही थीं।

एक दिन अचानक, एंजेला की माँ उसे बताती हैं कि वे असम की यात्रा पर जा रहे हैं। एंजेला इस खबर से चौंक गई क्योंकि यह यात्रा अचानक और जल्दबाजी में तय हुई थी। एंजेला और उसका परिवार नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी पहुँचा, जहाँ वे एक होटल में ठहरे।

गुवाहाटी पहुँचने के बाद, एंजेला को असम की खूबसूरती और वहाँ की संस्कृति का अनुभव करती है।। उसकी माँ उसे बताती हैं कि असम, पूर्वोत्तर भारत का एक सुंदर राज्य है, जो अपने समृद्ध वन्यजीवन, रेशम, चाय के बागानों और नृत्य परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। वे मलंग गाँव में बोहाग बिहू त्योहार देखने गए, जो असम में नए साल के आगमन और बसंत ऋतु का प्रतीक है। यह त्योहार मुख्यतः किसानों द्वारा मनाया जाता है और साल में तीन बार आयोजित किया जाता है—जब बीज बोए जाते हैं, धान रोपा जाता है और फसल तैयार होती है।

गाँव में पहुँचकर एंजेला त्योहार के जीवंत माहौल को देखकर आश्चर्यचकित हो जाती है। वहाँ एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे मंच सजा था, जहाँ पुरुष और महिलाएँ पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते हुए रंगीन परिधानों में नृत्य कर रहे थे। यह दृश्य एंजेला को अत्यंत आकर्षक और जादुई प्रतीत होता है, मानो वह किसी टाइम मशीन में बैठकर अतीत की सैर कर रही हो। नृत्य देखते-देखते वह उसमें खो जाती है और महसूस करती है कि वह भी इस नृत्य का हिस्सा बन जाए।

एंजेला की माँ, एलेसेंड्रा, डॉक्यूमेंट्री के लिए जानकारी जुटाने में व्यस्त रहती हैं। इसी दौरान एंजेला अपनी नई दोस्त अनु के साथ समय बिताने लगती है। अनु असम की एक लड़की है, जो प्रसिद्ध लेखिका रीना सेन की बेटी है। दोनों लड़कियाँ शीघ्र ही घुलमिल जाती हैं और एक-दूसरे की भाषा व संस्कृति को समझने लगती हैं। अनु के लकड़ी के तीर-कमान और नारियल की जटा से बने घर जैसे खिलौने एंजेला को बहुत अनोखे लगते हैं, क्योंकि उसने ऐसे खिलौने पहले कभी नहीं देखे थे।

इसके बाद वे उत्तर असम के एक मठ में जाते हैं, जहाँ सत्रिया नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। पहले यह नृत्य केवल मठों में पुरुष साधु ही करते थे, लेकिन अब महिलाएँ भी इसमें भाग लेने लगी हैं। एंजेला और अनु इस नृत्य से इतने प्रभावित होते हैं कि वे स्वयं भी इसे सीखने का प्रयास करते हैं और इसके विभिन्न पात्रों की नकल करने लगते हैं।

  वह असम की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, विशेषकर बिहू और सत्रिया नृत्य, से इतनी प्रभावित होती है कि जब वह लंदन लौटती है, तो अपनी कक्षा में इन नृत्यों का प्रदर्शन करती है। वह अपनी माँ की रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखती और उन पलों को याद करती। उसकी माँ, एलेसेंड्रा, एंजेला की इस गहरी रुचि को समझती हैं और उसके लिए एक विशेष योजना बनाती हैं।

कहानी की मुख्य घटनाएं

  • एंजेला और उसका परिवार लंदन से असम के लिए रवाना होते हैं।
  • असम में बिहू त्योहार का अनुभव और उसका अद्भुत नृत्य।
  • उत्तरी असम में सत्रिया नृत्य का फ़िल्मांकन और रीना सेन के परिवार से मुलाकात।
  • एंजेला और अनु की दोस्ती और असमिया खिलौनों के साथ खेलना।
  • सत्रिया नृत्य का प्रदर्शन और जय-विजय की कहानी का नाटकीय प्रदर्शन।
  • एंजेला और अनु का सत्रिया नृत्य सीखना और लंदन में अपने सहपाठियों के साथ साझा करना।

कहानी से शिक्षाइस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दुनिया की विविध संस्कृतियों को जानना और समझना एक अद्वितीय अनुभव हो सकता है। नृत्य, संगीत, और कला के माध्यम से हम किसी भी संस्कृति की गहरी समझ प्राप्त कर सकते हैं। यह कहानी सिखाती है कि यात्रा के दौरान हमें नई चीजें सीखने और अनुभव करने का अवसर मिलता है।

शब्दावली

  • डॉक्यूमेंट्री: एक प्रकार की फिल्म जो वास्तविक घटनाओं और व्यक्तियों पर आधारित होती है।
  • बिहू: असम का एक प्रसिद्ध कृषि आधारित त्योहार।
  • सत्रिया: असम का एक पारंपरिक नृत्य, जो वैष्णव मठों में प्रचलित है।
  • वैष्णव मठ: भगवान विष्णु के अनुयायियों का मठ।
  • संक्टरियम: मठ का एक विशेष भाग जहाँ धार्मिक गतिविधियाँ होती हैं।

निष्कर्ष“सत्रिया और बिहू नृत्य” कहानी एक सांस्कृतिक यात्रा की अद्भुत कथा है, जो एंजेला और उसके परिवार की असम यात्रा के माध्यम से भारतीय नृत्य परंपरा को उजागर करती है। इस कहानी से हमें भारतीय नृत्य और त्योहारों की समृद्ध परंपरा की झलक मिलती है, और यह हमें दुनिया की विविध संस्कृतियों को जानने और समझने के लिए प्रेरित करती है।

06. मेरी माँ – Chapter Notes

लेखक परिचय

‘रामप्रसाद बिस्मिल’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी थे। उनका जीवन संघर्ष, साहस और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने अंग्रेज़ों के अत्याचारों का सामना करते हुए अपनी आत्मकथा लिखी, जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। ‘सरफरोशी की तमन्ना’ जैसे गीत के रचनाकार रामप्रसाद बिस्मिल भी उन वीरों में शामिल थे। केवल तीस वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया। असाधारण प्रतिभा के स्वामी रामप्रसाद बिस्मिल न केवल एक महान कवि और लेखक थे, बल्कि उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें उनकी आत्मकथा विशेष रूप से प्रसिद्ध रही। ‘मेरी माँ’ उनकी आत्मकथा का एक महत्वपूर्ण भाग है।

मुख्य विषय

इस आत्मकथा का प्रमुख विषय देशभक्ति, मातृप्रेम, नैतिकता और संघर्ष है। बिस्मिल की माँ ने उन्हें सदैव सत्य के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। यह आत्मकथा उनकी माँ के महान आदर्शों और देशभक्ति के प्रति उनके अडिग समर्पण को प्रदर्शित करती है।

कहानी का साररामप्रसाद बिस्मिल का जन्म उस समय हुआ जब भारत पर अंग्रेजों का आधिपत्य था। छोटी आयु से ही वे अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हो गए। उनके शौर्य और देशभक्ति की अनेक कहानियाँ हैं। भगत सिंह भी उनकी प्रशंसा करते थे और कहते थे कि यदि बिस्मिल किसी अन्य देश या समय में जन्मे होते तो वे सेनाध्यक्ष बनते।

बिस्मिल ने जेल में रहते हुए अपनी आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ लिखी। इस पुस्तक ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए और लोगों में स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। जेल में भी बिस्मिल ने अंग्रेजों के अत्याचारों का सामना किया। उनकी आत्मकथा ने उन्हें अमर बना दिया। यह आत्मकथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है।

उनके जीवन में माता-पिता का विशेष योगदान था। उनकी माताजी ने उन्हें सदैव प्रोत्साहित किया और कठिनाइयों के बावजूद उनका साथ दिया। उनके पिताजी ने एक बार एक अनैतिक कार्य करने के लिए कहा, परंतु बिस्मिल ने सत्य का पालन किया और उसे करने से मना कर दिया।

रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ अपनी माँ को एक साहसी और दृढ़ निश्चयी महिला के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिन्होंने न केवल अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना किया, बल्कि अपने बेटे को भी जीवन के संघर्षों से निपटने के लिए तैयार किया। उनकी माँ एक अनपढ़ गाँव की लड़की थीं, जो कम उम्र में विवाह करके शहर आईं और धीरे-धीरे अपने घर-परिवार के कामकाज को समझा और संभाला। उन्होंने अपनी रुचि और जिज्ञासा के चलते हिंदी पढ़ना-लिखना भी सीखा, जो उस समय की ग्रामीण महिलाओं के लिए असामान्य था।

माँ ने उन्हें हमेशा सत्य, ईमानदारी और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। जब रामप्रसाद ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया, तब भी उनकी माँ ने उनका पूरा समर्थन किया, भले ही यह उनके लिए आसान नहीं था। उनकी माँ का यह कहना कि “कभी किसी के प्राण नहीं लेने चाहिए, चाहे वह शत्रु ही क्यों न हो,” उनके विचारों की उदारता और उच्च नैतिकता को दर्शाता है।

माँ के संस्कार और उनके दिए हुए शिक्षाओं ने रामप्रसाद को एक मजबूत और साहसी इंसान बनाया। उन्होंने बताया कि उनकी माँ ने उन्हें कभी गलत काम करने के लिए नहीं कहा और हमेशा सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। इस पाठ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनकी माँ ने न केवल उन्हें जीवन के व्यावहारिक सबक सिखाए, बल्कि उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी दिया।

कहानी की मुख्य घटनाएं

  • रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत।
  • भगत सिंह द्वारा बिस्मिल की प्रशंसा।
  • बिस्मिल की जेल में आत्मकथा ‘निज जीवन की एक झलक’ का लेखन और प्रकाशन।
  • माताजी का योगदान और उनका प्रोत्साहन।
  • पिताजी द्वारा अनैतिक कार्य के लिए मना करने पर बिस्मिल का सत्य का पालन करना।

कहानी से शिक्षा

  • सत्य और निष्ठा का पालन करना।
  • कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने लक्ष्यों से न डिगना।
  • माताओं का प्रोत्साहन और मार्गदर्शन बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण होता है।
  • स्वतंत्रता और देशभक्ति के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करना।

शब्दावली

  • स्वतंत्रता सेनानी: देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति।
  • आत्मकथा: किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवन की कहानी का लेखन।
  • अत्याचार: किसी पर किए गए अन्यायपूर्ण और क्रूर कार्य।
  • प्रोत्साहन: किसी को आगे बढ़ने और कुछ करने के लिए उत्साहित करना।
  • सत्य: सचाई, जो वास्तव में हो।

निष्कर्षरामप्रसाद बिस्मिल का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य, निष्ठा, और साहस के साथ जीवन जीना चाहिए। उनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान अमूल्य था। उनकी आत्मकथा ‘निज जीवन की एक छटा’ आज भी प्रेरणा स्रोत है। उनकी माताजी का योगदान उनके जीवन में महत्वपूर्ण था, जिसने उन्हें देशभक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। बिस्मिल का जीवन एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी का जीवन था, जिसने अपनी मातृभूमि के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया।