8. नए मेहमान – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ किस संदर्भ में कहा?

  • अतिथियों की सेवा करने के कारण *
  • किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
  • आज्ञाकारिता के भाव के कारण *
  • गरमी को चुपचाप सहने के कारण

उत्तर: अतिथियों की सेवा करने के कारण, आज्ञाकारिता के भाव के कारण
बच्चों ने बिना बहस किए अतिथियों के लिए पानी लाकर दिया और उनकी बात मानी, इसलिए मेहमानों को वे सीधे और अच्छे लगे।

2. “एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी…” विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?

  • उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं *
  • पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं *
  • लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
  • अतिथियों का अपमान करते हैं

उत्तर: उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं, पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
विश्वनाथ पड़ोसियों को निर्दयी कहता है क्योंकि वे उनकी परेशानी पर खुश होते हैं और छत पर बच्चों को सोने की जगह देने जैसे छोटे सहयोग से भी मना करते हैं।

3. “ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।” रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?

  • मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण *
  • रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण *
  • अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण *
  • उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण

उत्तर: मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण, रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण, अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
रेवती मेहमानों के आने की कामना नहीं करती क्योंकि घर छोटा है, व्यवस्था की कमी है, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, और मेहमानों के कारण काम बढ़ जाता है।

4. “हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।” रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?

  • पानी की कमी होने की
  • पड़ोसियों के चिल्लाने की
  • मेहमानों के आने की *
  • गरमी के कारण बीमारी की

उत्तर: मेहमानों के आने की
रेवती दरवाजे की खटखट सुनकर चिंतित होती है और प्रार्थना करती है कि कोई मेहमान न आए, क्योंकि मेहमानों की वजह से पहले से परेशान परिवार को और मुश्किल हो सकती है।

5. इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?

  • संवाद *
  • कथा
  • वर्णन
  • मंचन

उत्तर: संवाद
संवाद एक रचना को नाटक का रूप देते हैं क्योंकि यह पात्रों के बीच बातचीत से कहानी को जीवंत बनाता है।

(ख) हो सकता है कि आप सभी ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अब अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हमने अपने दोस्तों के साथ चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:

  1. आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को ‘सीधे लड़के’ कहा क्योंकि वे अतिथियों की सेवा कर रहे थे, कोई सवाल नहीं पूछ रहे थे और आज्ञाकारी थे इसलिए सही है क्योंकि एकांकी में प्रमोद और किरण मेहमानों के लिए पानी लाते हैं, पंखा चलाते हैं और उनकी बात मानते हैं, जो उनकी सीधेपन को दिखाता है।
  2. विश्वनाथ ने पड़ोसियों को निर्दयी कहा क्योंकि वे कष्ट में प्रसन्न होते हैं और सहयोग नहीं करते इसलिए सही है क्योंकि एकांकी में पड़ोसी छत पर खाट बिछाने की अनुमति नहीं देते और विश्वनाथ की परेशानी में कोई मदद नहीं करते, जो उनके निर्दयी स्वभाव को दर्शाता है।
  3. रेवती मेहमान न आने की कामना करती है क्योंकि घर में जगह की कमी है, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और मेहमानों से काम बढ़ जाता है इसलिए सही है क्योंकि एकांकी में रेवती सिरदर्द और गरमी से परेशान है, और मेहमानों की खातिरदारी से उसकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
  4. रेवती मेहमानों के आने को मुसीबत मानती है इसलिए सही है क्योंकि एकांकी में वह दरवाजे की खटखट सुनकर चिंतित होती है और मेहमानों की खातिरदारी को गरमी और बीमारी के बीच अतिरिक्त बोझ मानती है।
  5. संवाद किसी रचना को नाटक का रूप देता है इसलिए सही है क्योंकि एकांकी में पात्रों की बातचीत (जैसे विश्वनाथ और रेवती की बातें, मेहमानों के साथ संवाद) कहानी को जीवंत बनाती है और पात्रों की भावनाओं व परिस्थितियों को सामने लाती है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए।

  • “पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”

उत्तर: अर्थ: विश्वनाथ कहता है कि वह बहुत सारा पानी पी रहा है, लेकिन गरमी इतनी ज्यादा है कि प्यास नहीं बुझ रही। यह पंक्ति शहर की भीषण गरमी और पानी की कमी को दर्शाती है।

  • “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”

उत्तर: अर्थ: रेवती कहती है कि पूरा शहर इतना गर्म है कि लगता है आग की बारिश हो रही है। यह गरमी की तीव्रता और असहजता को दिखाता है।

  • “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”

उत्तर: अर्थ: रेवती अपने दुखी जीवन की तुलना चने भूनने से करती है, जैसे वे गरमी और मुश्किलों में जल रहे हैं। यह उनकी तकलीफ और मजबूरी को बताता है।

  • “आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”

उत्तर: अर्थ: नन्हेमल ठंडा पानी पीने के बाद कहता है कि गरमी में पानी पीने से राहत मिलती है। यह पंक्ति पानी की अहमियत और गरमी की परेशानी को दर्शाती है।

कक्षा में साझा करने के लिए: इन पंक्तियों से पता चलता है कि एकांकी में गरमी और गरीबी की वजह से परिवार कितना परेशान है। आप अपने सहपाठियों से पूछ सकते हैं कि क्या वे इन पंक्तियों से परिवार की मजबूरी और गरमी की तीव्रता को समझ पाए।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनसे मिलते-जुलते भाव दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 की उनके सही भाव वाली पंक्तियों से रेखा खींचकर मिलाइए-
उत्तर: 

सोच-विचार के लिए

(क) “शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।” नन्हेमल का ‘ऐसे ही मकान’ से क्या आशय है?
उत्तर:  नन्हेमल का मतलब है कि शहरों में छोटे, तंग और कम सुविधाओं वाले मकान आम हैं। विश्वनाथ का मकान छोटा है, जिसमें जगह की कमी, गरमी और हवा न होने की समस्या है। नन्हेमल यह कहकर शहरों की सामान्य मकान स्थिति को दर्शाता है।

(ख) पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: 

  • शिकायत: पड़ोसी को शिकायत है कि विश्वनाथ के मेहमान उनकी छत पर गंदा पानी फैलाते हैं और उनकी खाट पर लेट जाते हैं।
  • उचित या अनुचित: पड़ोसी का व्यवहार अनुचित है।
  • तर्क:
    • पड़ोसी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करते हैं और विश्वनाथ के मेहमानों की गलती को बार-बार उजागर करते हैं, बिना उनकी मजबूरी समझे।
    • वे सहयोग करने की बजाय झगड़ा करते हैं, जैसे छत पर खाट बिछाने से मना करना।
    • हालांकि, छत पर गंदगी फैलाना गलत है, लेकिन पड़ोसी को इसे समझदारी से सुलझाना चाहिए था, न कि चिल्लाना।

(ग) एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?
उत्तर: विश्वनाथ उन्हें इसलिए घर में आने देता है क्योंकि:

  • भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान माना जाता है, और विश्वनाथ अतिथि सत्कार की परंपरा निभाता है।
  • उसे लगता है कि शायद कोई परिचित ने उन्हें भेजा हो, जैसे संपतराम या जगदीशप्रसाद।
  • वह मेहमानों को रात में भटकने से बचाने के लिए उन्हें अंदर बुलाता है।

(घ) एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं?
उत्तर: 

  • विश्वनाथ: “मैं संपतराम को नहीं जानता।”
  • नन्हेमल: “संपतराम को जानने की… क्यों, वह तो आपसे मिले हैं।”
  • विश्वनाथ: “मैं कविराज तो नहीं हूँ?”
  • नन्हेमल: “हमें याद नहीं आ रहा। हमें तो जो पता दिया था उसी के सहारे आ गए।”
  • विश्वनाथ: “जिनके यहाँ आपको जाना था, वह काम क्या करते हैं?”
  • बाबूलाल: “मेरे सामने तो कोई बात ही नहीं हुई। मैं तो सामान लेने चला गया था।”

ये संवाद दिखाते हैं कि नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ को ठीक से नहीं जानते और गलत जगह आ गए हैं।

(ङ) एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।
उत्तर:

  • “ओफ, बड़ी गरमी है!”
  • “सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
  • “प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
  • “यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
  • “सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
  • “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
  • “फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।”

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से मँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?
उत्तर: एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी रेवती को अतिथियों के लिए भोजन बनाने को कहता है और उसकी अस्वस्थता को देखते हुए बाजार से खाना मंगवाने का सुझाव भी देता है, लेकिन उसने खुद खाना बनाने के बारे में नहीं सोचा। इसके कई कारण हो सकते हैं। उस समय के भारतीय समाज में रसोई का काम ज्यादातर महिलाओं का माना जाता था, इसलिए विश्वनाथ ने शायद इस रिवाज के कारण खुद खाना बनाने की नहीं सोची। साथ ही, वह खुद गरमी और थकान से परेशान था और उसे रसोई का काम करने का अनुभव या आदत नहीं रही होगी। रेवती की तबीयत खराब होने के बावजूद, विश्वनाथ ने बाजार से खाना मंगवाने का विकल्प सुझाया, जो उसकी चिंता को दिखाता है, लेकिन सामाजिक मान्यताओं के कारण उसने खुद खाना बनाने की जिम्मेदारी नहीं ली।

(ख) एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?
उत्तर: एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के लिए पानी लाता है और अपनी छोटी बहन का ध्यान रखता है। उसे ये जिम्मेदारियाँ शायद इसलिए दी गईं क्योंकि वह परिवार का सबसे बड़ा बेटा है और समझदार माना जाता है। प्रमोद का आज्ञाकारी स्वभाव, जैसे मेहमानों के लिए पानी लाना और पंखा चलाना, दिखाता है कि वह जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है। विश्वनाथ और रेवती गरमी, बीमारी और मेहमानों की खातिरदारी से परेशान थे, इसलिए उन्होंने प्रमोद को ये काम सौंपे। साथ ही, यह भी संभव है कि परिवार में बच्चों को छोटी-मोटी जिम्मेदारियाँ सिखाने की परंपरा रही हो, ताकि वे भविष्य में परिवार की मदद कर सकें।

(ग) “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ” भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?

उत्तर: रेवती अपने भाई के लिए कहती है, “कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ,” भले ही वह भीषण गरमी और सिरदर्द से परेशान थी। वह भोजन बनाने को तैयार हुई क्योंकि वह अपने भाई से बहुत प्यार करती थी और उसका आदर करना अपना कर्तव्य समझती थी। भारतीय संस्कृति में मेहमानों और रिश्तेदारों की खातिरदारी को बहुत महत्व दिया जाता है, और रेवती नहीं चाहती थी कि उसका भाई भूखा सोए। उसने अपनी तकलीफ को नजरअंदाज कर अपने भाई की भूख और आराम को प्राथमिकता दी। यह भी संभव है कि वह अपने परिवार की इज्जत बनाए रखना चाहती थी, ताकि भाई को लगे कि उसका स्वागत अच्छे से हुआ।

(घ) एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली कुछ पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं? अपने वाक्यों को दिए गए उचित स्थान पर लिखिए-

उत्तर: 

एकांकी की रचना

इस एकांकी के आरंभ में पात्र-परिचय, स्थान, समय और विश्वनाथ और रेवती के घर के विषय में बताया गया है, जैसे कि-

  • “गरमी की ऋतु, रात के आठ बजे का समय। कमरे के पूर्व की ओर दो दरवाजे…”
  • विश्वनाथ – उफ्फ, बड़ी गरमी है (पंखा जोर-जोर से करने लगता है) इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है। मकान है कि भट्टी!
    (पश्चिम की ओर से एक स्त्री प्रवेश करती है)
  • रेवती – (आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई) पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।

एकांकी की इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इन्हें पढ़कर स्पष्ट पता चल रहा है कि पहली पंक्ति समय और स्थान आदि के विषय में बता रही है। इसे रंगमंच-निर्देश कहते हैं। वहीं दूसरी पंक्तियों से स्पष्ट है कि ये दो लोगों द्वारा कही गई बातें हैं। इन्हें संवाद कहा जाता है। ये ‘नए मेहमान’ एकांकी का एक अंश है।
एकांकी एक प्रकार का नाटक होता है जिसमें केवल एक ही अंक या भाग होता है। इसमें किसी कहानी या घटना को संक्षेप में दर्शाया जाता है। आप इस एकांकी में ऐसी अनेक विशेषताएँ खोज सकते हैं। (जैसे- इस एकांकी में कुछ संकेत कोष्ठक में दिए गए हैं, पात्र-परिचय, अभिनय संकेत, वेशभूषा संबंधी निर्देश आदि)

(क) अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर: “नए मेहमान” एकांकी की विशेषताएँ:

  • एक अंक वाली रचना: यह एकांकी केवल एक अंक में पूरी होती है और कहानी संक्षेप में प्रस्तुत की गई है।
  • पात्र-परिचय: एकांकी की शुरुआत में पात्रों का परिचय दिया गया है, जैसे विश्वनाथ (45 वर्ष, गंभीर), रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल आदि।
  • स्थान और समय का वर्णन: रंगमंच-निर्देश में स्थान (भारत का बड़ा नगर, घर का कमरा) और समय (गरमी की ऋतु, रात 8 बजे) बताया गया है।
  • संवाद-प्रधान: कहानी मुख्य रूप से पात्रों के संवादों (जैसे विश्वनाथ और रेवती की बातचीत) से आगे बढ़ती है।
  • अभिनय संकेत: कोष्ठक में पात्रों के हाव-भाव और गतिविधियों के निर्देश दिए गए हैं, जैसे “(आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई)”।
  • वेशभूषा निर्देश: पात्रों के कपड़ों का वर्णन है, जैसे विश्वनाथ का कुरता-धोती और नन्हेमल-बाबूलाल की मैली धोती।
  • सामाजिक मुद्दों का चित्रण: एकांकी में मध्यवर्गीय परिवार की परेशानियाँ (गरमी, छोटा मकान, मेहमानों की खातिरदारी) दिखाई गई हैं।
  • संक्षिप्त कहानी: यह एक छोटी-सी घटना (अनजान मेहमानों का आना) पर आधारित है, जो एक रात में पूरी होती है।
  • हास्य और व्यंग्य: नन्हेमल और बाबूलाल के संवादों में हल्का हास्य और गलतफहमी का तत्व है।
  • वास्तविकता का चित्रण: एकांकी में गरमी, तंग मकान और पड़ोसियों की शिकायत जैसी रोजमर्रा की समस्याएँ वास्तविक लगती हैं।

(ख) आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य आपको सही लग रहे हैं, उनके सामने ‘हाँ’ लिखिए। जो वाक्य सही नहीं लग रहे हैं, उनके सामने ‘नहीं’ लिखिए।
उत्तर: 

अभिनय की बारी

(क) क्या आपने कभी मंच पर कोई एकांकी या नाटक देखा है? टीवी पर फिल्में और धारावाहिक तो अवश्य देखे होंगे ! अपने अनुभवों से बताइए कि यदि आपको अपने विद्यालय में ‘नए मेहमान’ एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे। (उदाहरण के लिए इस एकांकी में आप क्या-क्या जोड़ेंगे जिससे यह और अधिक रोचक बने, कौन-से पात्र जोड़ेंगे या पात्रों की वेशभूषा क्या रखेंगे?)
उत्तर: यदि मुझे अपने विद्यालय में “नए मेहमान” एकांकी का मंचन करना हो, तो मैं निम्नलिखित तैयारियाँ करूँगा:

  1. मंच सज्जा (Stage Setup):
    • कमरे का दृश्य: एक छोटा-सा कमरा दिखाने के लिए एक मेज, दो कुर्सियाँ, और एक पलंग रखूँगा। मेज पर कुछ किताबें और अखबार होंगे, जैसा एकांकी में बताया गया है।
    • पंखा: एक पुराना टेबल फैन मेज पर रखूँगा, जो धीमी हवा देता हो, ताकि गरमी का एहसास हो।
    • दरवाजे: पूर्व और दक्षिण की ओर दो दरवाजों का आभास देने के लिए पर्दे या बोर्ड का इस्तेमाल करूँगा।
    • प्रकाश व्यवस्था: गरमी दिखाने के लिए मंच पर पीली या गर्म रोशनी का उपयोग करूँगा।
  2. पात्रों की वेशभूषा:
    • विश्वनाथ: 45 साल का मध्यवर्गीय पुरुष, कुरता-धोती (पसीने से गीली), गंभीर चेहरा। एक साधारण बनियान और पसीने से भीगा रुमाल साथ में होगा।
    • रेवती: साड़ी (हल्की और साधारण), आँचल से पसीना पोंछने के लिए रुमाल। सिरदर्द दिखाने के लिए हल्का मेकअप (थका हुआ चेहरा)।
    • नन्हेमल: मैली धोती, काली बंडी, सफेद पगड़ी, मूँछें और माथे पर सलवट दिखाने के लिए मेकअप।
    • बाबूलाल: मैली धोती, अधकटी मूँछें, साधारण कमीज़, और पसीने से गीला लुक।
    • प्रमोद और किरण: स्कूल यूनिफॉर्म या साधारण कपड़े, क्योंकि वे बच्चे हैं।
    • आगंतुक (रेवती का भाई): साधारण कमीज़-पैंट, थका हुआ लुक, क्योंकि वह लंबा सफर करके आया है।
  3. क्या जोड़ा जा सकता है:
    • पृष्ठभूमि ध्वनि: गरमी दिखाने के लिए पंखे की हल्की आवाज़ या बाहर से गर्म हवा की आवाज़ जोड़ी जा सकती है।
    • नया पात्र: एक पड़ोसी का किरदार थोड़ा बढ़ाया जा सकता है, जो मंच पर आकर विश्वनाथ से बहस करे। इससे हास्य और तनाव बढ़ेगा।
    • रोचकता के लिए: नन्हेमल और बाबूलाल के संवादों में और हास्य जोड़ा जा सकता है, जैसे उनकी गलतफहमी को और मज़ेदार तरीके से दिखाना।
    • प्रॉप्स: एक पानी का घड़ा और गिलास मंच पर रखूँगा, ताकि पात्र बार-बार पानी पीने की बात करें तो वह वास्तविक लगे।
  4. अभिनय की तैयारी:
    • पात्रों को उनके हाव-भाव सिखाएँ, जैसे रेवती का सिर दबाना, विश्वनाथ का पंखा झलना, और नन्हेमल का पगड़ी से पसीना पोंछना।
    • संवादों को जोर-शोर से बोलने की प्रैक्टिस करवाऊँगा, ताकि गरमी और परेशानी का एहसास दर्शकों तक पहुँचे।

(ख) अब आपको अपने-अपने समूह में इस एकांकी को प्रस्तुत करने की तैयारी करनी है। इसके लिए आपको यह सोचना है कि कौन किस पात्र का अभिनय करेगा। आपके शिक्षक आपको तैयारी के बाद अभिनय के लिए निर्धारित समय देंगे (जैसे 10 मिनट या 15 मिनट)। आपको इतने ही समय में एकांकी प्रस्तुत करनी है। बारी-बारी से प्रत्येक समूह एकांकी प्रस्तुत करेगा।
सुझाव-

  • आप एकांकी को जैसा दिया गया है, बिलकुल वैसा भी प्रस्तुत कर सकते हैं या इसमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन भी कर सकते हैं।
  • एकांकी के लिए आस-पास की वस्तुओं का ही उपयोग कर लेना है, जैसे- कुर्सी, मेज आदि।
  • स्थान की कमी हो तो अभिनेता बच्चे अपने स्थान पर खड़े-खड़े भी संवाद बोल सकते हैं।
  • आप चाहें तो अपने अभिनय को अपने शिक्षक की सहायता से रिकॉर्ड करके उसे अपने परिवार या संबंधियों के साथ साझा भी कर सकते हैं।

उत्तर: 
1. पात्रों का चयन
अपने समूह में आप ये पात्र बाँट सकते हैं:

  • विश्वनाथ – गृहपति, 45 वर्ष, गंभीर स्वभाव
  • रेवती – विश्वनाथ की पत्नी
  • प्रमोद – बेटा
  • किरण – बेटी
  • नन्हेमल – पहला अतिथि
  • बाबूलाल – दूसरा अतिथि
  • पड़ोसी – गुस्सैल पड़ोसी
  • आगंतुक (रेवती का भाई) – अंत में आने वाला असली मेहमान

अगर आपके पास लोग कम हैं, तो एक व्यक्ति दो छोटे पात्रों का रोल निभा सकता है।

2. मंच-सज्जा (Stage Setup)

  • कुर्सी – बैठने के लिए
  • मेज – पंखा, किताबें, गिलास आदि रखने के लिए
  • पलंग या चारपाई – बच्चे को सुलाने के लिए (कुर्सियों को पास रखकर भी बना सकते हैं)
  • पुराना पंखा – असली हो तो अच्छा, नहीं तो कागज़ का बना सकते हैं
  • गिलास/लोटा – पानी पिलाने के लिए
  • तौलिया/दुपट्टा – पसीना पोंछने के लिए

3. प्रस्तुति की समय-योजना (10–12 मिनट)

  • शुरुआत (2 मिनट) – विश्वनाथ और रेवती की गरमी और मकान की समस्या पर बातचीत
  • अतिथियों का आगमन (3 मिनट) – नन्हेमल और बाबूलाल का प्रवेश, बच्चों से बातचीत, पानी मँगाना
  • पड़ोसी के साथ झगड़े वाला दृश्य (2 मिनट) – छत पर पानी फैलने की शिकायत
  • गलत पहचान का खुलासा (2 मिनट) – पता चलता है कि मेहमान गलत घर आ गए हैं
  • असली मेहमान का आना (1–2 मिनट) – रेवती का भाई आता है, अंत में सब खुश होते हैं

4. अभिनय के सुझाव

  • संवाद बोलते समय चेहरा और हाव-भाव स्पष्ट रखें।
  • गरमी दिखाने के लिए बार-बार पसीना पोंछने का अभिनय करें।
  • पानी पीने, पंखा झलने, झगड़ने और हैरानी जताने वाले भाव अच्छी तरह से दिखाएँ।
  • समय का ध्यान रखें — ज़रूरी दृश्यों को ही रखें।

5. वैकल्पिक बदलाव (अगर समय कम है)

  • बीच के कुछ संवाद छोटे कर दें।
  • पड़ोसी वाला दृश्य हटाकर सीधे गलत पहचान वाले हिस्से पर जाएँ।

भाषा की बात

“सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।”
“चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
“यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्द गरमी की प्रचंडता को दर्शा रहे हैं कि तापमान अत्यधिक है।
एकांकी में इस प्रकार के और भी प्रयोग हुए हैं जहाँ शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न किया गया है, उन प्रयोगों को छाँटकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर: एकांकी में कुछ शब्द और वाक्य गरमी की तीव्रता को विशेष प्रभाव के साथ दर्शाते हैं। नीचे ऐसे प्रयोगों की सूची दी गई है, जो मेरी लेखन पुस्तिका में लिखे जा सकते हैं:

  1. “मकान है कि भट्टी!”
    • प्रभाव: यहाँ “भट्टी” शब्द मकान की अत्यधिक गरमी को दर्शाता है, जैसे वह आग से जल रहा हो। यह अतिशयोक्ति से गरमी की तीव्रता दिखाता है।
  2. “प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।”
    • प्रभाव: “बुझने का नाम नहीं लेती” से लगातार प्यास की तीव्रता और पानी पीने के बाद भी राहत न मिलने का भाव उभरता है।
  3. “पत्ता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी।”
    • प्रभाव: “पत्ता तक नहीं हिल रहा” और “साँस बंद हो जाएगी” से हवा की कमी और गरमी से घुटन का माहौल बनता है।
  4. “फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।”
    • प्रभाव: “पसीने से नहा गया” से अत्यधिक पसीना बहने और गरमी की असहनीयता का चित्रण होता है।
  5. “सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
    • प्रभाव: “पानी ही तो जान है” से गरमी में पानी की अहमियत और राहत का भाव उभरता है।
  6. “चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।”
    • प्रभाव: “तप रही हैं” से दीवारों का गर्म होना और माहौल की तपिश स्पष्ट होती है।

★ मुहावरे
“आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ।”
“लाखों के आदमी खाक में मिल गए।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित वाक्यांश ‘रात-दिन एक करना’ तथा ‘खाक में मिलना’ मुहावरों का प्रायोगिक रूप है। ये वाक्य में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रहे हैं। एकांकी में आए अन्य मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

उत्तर: एकांकी में कुछ और मुहावरे भी हैं, जो विशेष प्रभाव पैदा करते हैं। नीचे उनकी पहचान, अर्थ और मेरे अपने वाक्यों में प्रयोग दिए गए हैं:

  1. मुहावरा:“जान में जान आई”
    • वाक्य: “आह! अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।”
    • अर्थ: राहत या ताजगी महसूस होना।
    • मेरा वाक्य: गर्मी में ठंडा पानी पीने के बाद मेरी जान में जान आई।
  2. मुहावरा:“गला सूखा जा रहा है”
    • वाक्य: “पंडित जी, गला सूखा जा रहा है। स्टेशन पर पानी भी नहीं मिला।”
    • अर्थ: बहुत प्यास लगना।
    • मेरा वाक्य: इतनी देर धूप में चलने के बाद मेरा गला सूखा जा रहा है।
  3. मुहावरा:“प्राण सूखे जा रहे हैं”
    • वाक्य: “ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।”
    • अर्थ: अत्यधिक प्यास या थकान से परेशान होना।
    • मेरा वाक्य: गर्मी में स्कूल से लौटकर मेरे प्राण सूखे जा रहे थे।
  4. मुहावरा:“सिर फटा जा रहा है”
    • वाक्य: “सिर फटा जा रहा है।” (रेवती का सिरदर्द)
    • अर्थ: बहुत तेज़ दर्द या परेशानी होना।
    • मेरा वाक्य: इतना काम करने के बाद मेरा सिर फटा जा रहा है।

★ बात पर बल देना
“वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा।”
उपर्युक्त वाक्य से रेखांकित शब्द ‘ही‘ हटाकर पढ़िए-
“वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा”
(क) दो-दो के जोड़े में चर्चा कीजिए कि वाक्य में ‘ही’ के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और ‘ही’ हटा देने से क्या कमी आई?

उत्तर: वाक्य: “वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर ही रहा।”

  • ‘ही’ का प्रभाव: ‘ही’ शब्द से आगंतुक (रेवती का भाई) के दृढ़ निश्चय और मेहनत पर बल मिलता है। यह दिखाता है कि उसने बहुत कोशिश करके ही विश्वनाथ का घर ढूँढ़ा।
  • ‘ही’ हटाने की कमी: “वह तो कहो, मैं भी ढूँढ़कर रहा” में दृढ़ता और निश्चय का भाव कम हो जाता है। वाक्य सामान्य हो जाता है और ढूँढ़ने की मेहनत का महत्व कम लगता है।

(ख) नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर ‘ही’ का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगे-

  • “तुम नहाने तो जाओ।”

उपर्युक्त वाक्य में ‘तो’ का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें-
“तुम तो नहाने जाओ।”
“तुम नहाने जाओ तो।”
‘ही’ और ‘तो’ के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।

​उत्तर: 

  1. वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे।
    • अर्थ: और किसी के अतिथि नहीं।
    • नया वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि ही यहाँ रुकेंगे।
  2. वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे।
    • अर्थ: यहाँ के अतिरिक्त और कहीं नहीं।
    • नया वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि यहाँ ही रुकेंगे।
  3. वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे।
    • अर्थ: यहाँ रुकना निश्चित है।
    • नया वाक्य: विश्वनाथ के अतिथि यहाँ रुकेंगे ही

‘तो’ का प्रयोग और अर्थ में परिवर्तन:

  • मूल वाक्य: “तुम नहाने तो जाओ।”
    • अर्थ: नहाने पर जोर देना, जैसे यह जरूरी है।
  • परिवर्तन 1: “तुम तो नहाने जाओ।”
    • अर्थ: ‘तो’ पहले आने से यह बल देता है कि तुम्हें विशेष रूप से नहाने जाना चाहिए।
  • परिवर्तन 2: “तुम नहाने जाओ तो।”
    • अर्थ: ‘तो’ अंत में आने से यह सुझाव देता है कि नहाने जाने पर कुछ और होगा, जैसे फिर खाना तैयार होगा।

‘ही’ और ‘तो’ के अन्य प्रयोग:

  1. ‘ही’ का प्रयोग:
    • मैं स्कूल ही जाऊँगा। (स्कूल जाना निश्चित है।)
    • यह किताब मैंने ही पढ़ी है। (और किसी ने नहीं पढ़ी।)
  2. ‘तो’ का प्रयोग:
    • तुम पढ़ाई तो कर लो। (पढ़ाई पर जोर।)
    • तुम तो पढ़ाई कर लो। (तुम्हें विशेष रूप से पढ़ना चाहिए।)
    • तुम पढ़ाई कर लो तो। (पढ़ाई करने पर कुछ और होगा।)

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) “रेवती – ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।
विश्वनाथ – क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।”
उपर्युक्त संवाद से पता चलता है कि विश्वनाथ दुविधा की स्थिति में है। क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर: हाँ, मेरे सामने भी एक बार ऐसी दुविधा आई थी। एक दिन मेरे घर के बाहर एक अनजान व्यक्ति आया और बोला कि वह मेरे पापा के दोस्त का रिश्तेदार है। उसने कुछ मदद माँगी, लेकिन उसका व्यवहार और बातें ठीक नहीं लग रही थीं। मैं दुविधा में था कि उसकी मदद करूँ या पहले पापा से पूछूँ। मैंने उससे कुछ सवाल पूछे, लेकिन वह साफ जवाब नहीं दे रहा था, जैसे नन्हेमल और बाबूलाल विश्वनाथ को ठीक जवाब नहीं देते। आखिरकार, मैंने पापा से बात की और पता चला कि वह कोई जान-पहचान वाला नहीं था। इस अनुभव से मैंने सीखा कि अनजान लोगों पर भरोसा करने से पहले पूरी जानकारी लेनी चाहिए।

(ख) एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
उत्तर: 
नन्हेमल और बाबूलाल एक-दूसरे के साथ हँसी-मज़ाक और तालमेल दिखाते हैं, जो उनकी दोस्ती को दर्शाता है। मेरे अच्छे मित्र हैं – रोहन, प्रिया, और अनुज। 
वे मुझे प्रिय हैं क्योंकि:

  • रोहन: हमेशा मेरी मदद करता है, जैसे स्कूल प्रोजेक्ट में सहयोग देना या मुश्किल समय में हिम्मत बढ़ाना।
  • प्रिया: बहुत समझदार है और मेरी बातें ध्यान से सुनती है। वह हमेशा मज़ेदार कहानियाँ सुनाकर हँसाती है।
  • अनुज: मेरे साथ खेल में हिस्सा लेता है और कभी झूठ नहीं बोलता, जिससे मुझें उस पर भरोसा है।

ये दोस्त मेरे लिए खास हैं क्योंकि वे मेरे साथ खुशी और दुख में साथ रहते हैं।

(ग) आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
उत्तर: 
किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले मैं ये तैयारियाँ करता हूँ:

  • सूचना देना: पहले फोन करके बता देता हूँ कि मैं कब आ रहा हूँ, ताकि उन्हें असुविधा न हो।
  • समय का ध्यान: उनके सुविधाजनक समय पर जाने की कोशिश करता हूँ।
  • उपहार: अगर लंबे समय बाद मिलने जा रहा हूँ, तो छोटा-सा उपहार, जैसे मिठाई या फल, ले जाता हूँ।
  • जरूरी सामान: अपने कपड़े, पानी की बोतल, और जरूरी चीजें साथ रखता हूँ, ताकि मेजबान पर बोझ न पड़े।
  • व्यवहार: वहाँ जाकर सम्मान और शिष्टाचार के साथ बात करता हूँ, जैसे नन्हेमल और बाबूलाल को करना चाहिए था।

(घ) विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
उत्तर: 
एकांकी में पड़ोसी विश्वनाथ की मदद नहीं करते, बल्कि छत पर गंदगी की शिकायत करते हैं। 
मैं अपने पड़ोसियों का इस तरह सहयोग करता हूँ:

  • मदद करना: अगर पड़ोसी को बाजार से कुछ सामान चाहिए, तो मैं लाने में मदद करता हूँ।
  • खास मौके: त्योहारों पर मिठाई बाँटता हूँ या उनके घर जाकर बधाई देता हूँ।
  • आपातकाल: अगर किसी पड़ोसी को कोई परेशानी हो, जैसे बिजली या पानी की समस्या, तो मैं अपने माता-पिता के साथ उनकी मदद करता हूँ।
  • शांति बनाए रखना: अपने घर से शोर न हो और उनकी जगह का ध्यान रखता हूँ।

(ङ) नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
उत्तर: नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य नहीं है क्योंकि वे बिना साफ बताए आते हैं, बहुत माँग करते हैं (जैसे खाना, पानी, नहाने की व्यवस्था), और गलतफहमी पैदा करते हैं। 
मेरे अनुसार, सामान्य अतिथियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए:

  • पहले सूचना देना: मेजबान को पहले बता देना चाहिए कि वे आ रहे हैं।
  • शिष्टाचार: मेजबान के साथ सम्मान से बात करनी चाहिए और उनकी परेशानी को समझना चाहिए।
  • कम माँग: मेजबान की स्थिति को देखते हुए कम से कम माँग करनी चाहिए, जैसे ज्यादा खाना या सुविधाएँ न माँगना।
  • सहयोग: अगर मेजबान परेशान हैं, तो उनकी मदद करनी चाहिए, जैसे बर्तन उठाने में सहायता करना।
  • आभार: जाने से पहले मेजबान का धन्यवाद करना चाहिए।

सावधानी और सुरक्षा

(क) विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
उत्तर: यदि मैं विश्वनाथ की जगह होता, तो मैं नन्हेमल और बाबूलाल को घर में बुलाने से पहले निम्नलिखित सावधानियाँ बरतता:

  • परिचय पूछना: मैं उनसे स्पष्ट रूप से पूछता कि वे कौन हैं, कहाँ से आए हैं, और किससे मिलने आए हैं। अगर वे ठीक जवाब न दें, तो मैं उन्हें घर में नहीं बुलाता।
  • सत्यापन: अगर वे किसी परिचित का नाम लेते (जैसे संपतराम), तो मैं उस व्यक्ति से फोन पर संपर्क करके पुष्टि करता कि क्या वह उन्हें भेजा है।
  • सीमित स्वागत: मैं उन्हें बाहर ही बिठाता, जैसे बरामदे में, और पानी या चाय देता, लेकिन घर के अंदर तभी बुलाता जब उनकी पहचान पक्की हो।
  • सुरक्षा: अगर रात का समय होता, तो मैं परिवार के किसी सदस्य को साथ रखता ताकि अकेले न रहूँ।

ऐसा करने से मैं अनजान लोगों को घर में बुलाने की गलती से बचता और अपनी व परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करता।

(ख) आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?
उत्तर: माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में अगर कोई अपरिचित व्यक्ति आए, तो मैं ये सावधानियाँ बरतूँगा:

  • दरवाजा न खोलना: मैं अपरिचित व्यक्ति से दरवाजे के बाहर ही बात करूँगा, बिना दरवाजा पूरी तरह खोले।
  • पहचान पूछना: मैं पूछूँगा कि वे कौन हैं, किससे मिलने आए हैं, और क्यों आए हैं।
  • माता-पिता से संपर्क: मैं तुरंत माता-पिता को फोन करके बताऊँगा और उनकी सलाह लूँगा।
  • पड़ोसी की मदद: अगर कुछ गलत लगे, तो मैं पड़ोसी को बुलाऊँगा या उनकी मदद लूँगा।
  • अकेले न रहना: मैं अपने भाई-बहन या किसी और को साथ रखूँगा ताकि अकेला न रहूँ।
  • सुरक्षा उपाय: अगर व्यक्ति संदिग्ध लगे, तो मैं पुलिस या आपातकाल नंबर पर कॉल करने के लिए तैयार रहूँगा।

ये सावधानियाँ मुझे और मेरे घर की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

सृजन

(क) आपने यह एकांकी पढ़ी। इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (जैसे- एक दिन मेरे घर में मेहमान आ गए…)
उत्तर: एक दिन की बात है, जब गर्मी का मौसम था और रात के आठ बज रहे थे। मेरे घर में मैं (विश्वनाथ), मेरी पत्नी रेवती, और मेरे बच्चे प्रमोद और किरण थे। घर छोटा-सा था, और गर्मी इतनी थी कि लगता था दीवारें तप रही हैं। रेवती का सिरदर्द हो रहा था, और मैं पंखा झल रहा था। तभी दरवाजे पर खटखट हुई। दो अनजान लोग, नन्हेमल और बाबूलाल, मेरे घर आ गए। वे बोले कि वे किसी संपतराम के दोस्त हैं, लेकिन मुझे वे पहचान में नहीं आए। फिर भी, मैंने मेहमाननवाजी के लिए उन्हें अंदर बुला लिया।
वे दोनों बहुत बातूनी थे और गर्मी से परेशान होकर पानी माँगने लगे। प्रमोद ने उनके लिए पानी लाया, और किरण को सुलाने की कोशिश की। रेवती को चिंता थी कि ये लोग कौन हैं, लेकिन मैंने सोचा शायद कोई परिचित ने भेजा हो। नन्हेमल और बाबूलाल ने खाना और नहाने की बात शुरू की, जिससे रेवती और परेशान हो गई। पड़ोसियों ने भी शिकायत की कि मेरे मेहमान उनकी छत पर गंदा पानी फैलाते हैं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
आखिर में, एक और मेहमान आया, जो रेवती का भाई निकला। रेवती ने अपनी तकलीफ भूलकर उसके लिए खाना बनाने की बात की। इस तरह, उस रात मेरे छोटे से घर में अनजान और अपनों, दोनों तरह के मेहमानों का आना-जाना लगा रहा। यह घटना मुझे मेहमाननवाजी और सावधानी का महत्व सिखा गई।

तार से संदेश

“क्या मेरा तार नहीं मिला?”
रेवती के भाई ने अपने आने की सूचना तार द्वारा भेजी थी। ‘तार’ संदेश भेजने का एक माध्यम था। जिसके द्वारा शीघ्रता से किसी के पास संदेश भेजा जा सकता था, किंतु अब इसका प्रचलन नहीं है।

(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर: 
एकांकी में रेवती के भाई का कहना, “क्या मेरा तार नहीं मिला?” दर्शाता है कि टेलीग्राफ (तार) संदेश भेजने का एक सामान्य साधन था। भारत में टेलीग्राफ का उपयोग 20वीं सदी के मध्य तक, खासकर 1940-1980 के दशक में, बहुत आम था। 2013 में भारत में टेलीग्राफ सेवा बंद हो गई। चूंकि एकांकी में टेलीग्राफ का जिक्र है और यह मध्यवर्गीय परिवार की जिंदगी को दर्शाता है, जिसमें आधुनिक तकनीक (जैसे मोबाइल फोन) का जिक्र नहीं है, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह एकांकी लगभग 40 से 70 वर्ष पहले (1950-1980 के बीच) लिखी गई होगी।

(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर
: आजकल संदेश भेजने के निम्नलिखित साधन सुलभ हैं:

  • मोबाइल फोन: व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे ऐप्स के जरिए तुरंत टेक्स्ट, फोटो, वीडियो भेजे जा सकते हैं।
  • ईमेल: जीमेल, याहू मेल आदि के जरिए औपचारिक और अनौपचारिक संदेश भेजे जाते हैं।
  • एसएमएस: छोटे टेक्स्ट संदेश मोबाइल नेटवर्क के जरिए।
  • सोशल मीडिया: फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X) पर मैसेज या पोस्ट के जरिए संदेश।
  • वीडियो कॉल: जूम, गूगल मीट, स्काइप आदि से तुरंत बातचीत।
  • पत्र: भारतीय डाक सेवा के जरिए पारंपरिक पत्र भेजे जा सकते हैं।
  • वॉयस मैसेज: व्हाट्सएप, फोन कॉल, या अन्य ऐप्स के जरिए आवाज में संदेश।

(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर: 
मैं किसी को संदेश भेजने के लिए सबसे ज्यादा व्हाट्सएप का उपयोग करता हूँ। यह आसान, तेज़, और मुफ्त है। मैं टेक्स्ट, फोटो, या वॉयस मैसेज भेज सकता हूँ, और ग्रुप चैट में कई लोगों से एक साथ बात कर सकता हूँ। अगर कुछ औपचारिक हो, जैसे स्कूल या प्रोजेक्ट से संबंधित, तो मैं ईमेल का उपयोग करता हूँ। कभी-कभी दोस्तों के साथ मज़े के लिए इंस्टाग्राम पर भी मैसेज करता हूँ।

(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।
उत्तर: 
प्रिय दादाजी,
नमस्ते!
आशा है आप स्वस्थ और खुश हैं। मैं यह पत्र आपको इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि मुझे आपके साथ बिताए पल बहुत याद आ रहे हैं। स्कूल में सब ठीक है, और मैंने हाल ही में एक नाटक “नए मेहमान” पढ़ा, जिसमें एक परिवार की मेहमाननवाजी की कहानी है। यह पढ़कर मुझे आपकी बताई कहानियाँ याद आईं, जब आप मेहमानों के लिए खाना बनवाते थे।
मुझे याद है, आप हमेशा कहते हैं कि मेहमान भगवान का रूप होते हैं। इस नाटक में भी यही भाव था, लेकिन कुछ मेहमान अनजान थे, जिससे थोड़ी परेशानी हुई। आपके पास भी कोई ऐसी कहानी हो तो बताइएगा। मैं जल्दी ही छुट्टियों में आपसे मिलने आऊँगा। मम्मी-पापा और छोटी बहन भी आपको नमस्ते कह रहे हैं।
आपका प्यार,
[आपका नाम]
[आपका पता]
दिनांक: 13 अगस्त, 2025

नाप, तौल और मुद्राएँ

“जबकि नत्थामल के यहाँ साढ़े नौ आने गज बिक रही थी।”
उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। रेखांकित शब्द ‘साढ़े नौ’, ‘आने’, ‘गज’ में ‘साढ़े नौ’ भारतीय भाषा में अंतरराष्ट्रीय अंक (9.5) को दर्शा रहा है तो वहीं ‘आने’ शब्द भारतीय मुद्रा और ‘गज’ शब्द लंबाई नापने का मापक है।

(क) पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
उत्तर: 
एक रुपये में 16 आने होते थे। (यह पुरानी भारतीय मुद्रा प्रणाली थी, जो अब प्रचलन में नहीं है।)

(ख) चार आने में कितने पैसे होते हैं?
उत्तर: 
1 रुपया = 16 आने = 64 पैसे
तो 4 आने = 16 पैसे होते थे।

(ग) आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है? पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: 
मेरे आस-पास “गज” शब्द का प्रयोग ज्यादातर कपड़ा नापने के संदर्भ में किया जाता है। कपड़े की दुकानों में, जैसे साड़ी या सूट के कपड़े की लंबाई नापने के लिए दुकानदार “गज” में माप बताते हैं। उदाहरण के लिए, “यह साड़ी 5 गज की है।” इसके अलावा, कुछ लोग पुराने ज़माने में जमीन या खेत नापने के लिए भी “गज” का उपयोग करते थे, लेकिन अब यह कम आम है।

(घ) बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं?

उत्तर: 1 गज = 3 फीट होती है।

झरोखे से

कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन सादगी भरा था, परंतु वे अपने आतिथ्य के लिए जाने जाते थे। उनके घर में कोई अतिथि आ जाए तो वे उसके सत्कार के लिए जी-जान से जुट जाते थे। महादेवी वर्मा की पुस्तक पथ के साथी से निराला के आतिथ्य भाव का एक छोटा-सा अंश पढ़िए-
उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा रही है। आपके घर जब अतिथि आते हैं तो आप उनका अभिवादन कैसे करते हैं, अपनी भाषा में बताइए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि अतिथियों को आप अपने राज्य, क्षेत्र का कौन-सा पारंपरिक व्यंजन खिलाना चाहते हैं।
उत्तर: भारत में ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा बहुत पुरानी है, जिसमें मेहमान को भगवान का रूप माना जाता है। जब मेरे घर में कोई अतिथि आते हैं, तो मैं उनका अभिवादन इस तरह करता हूँ: सबसे पहले हाथ जोड़कर “नमस्ते” या “प्रणाम” कहता हूँ। अगर वे बड़े हैं, तो पैर छूकर आशीर्वाद लेता हूँ। फिर उन्हें अंदर बुलाकर आराम से बिठाता हूँ और पानी या चाय ऑफर करता हूँ। अगर वे दूर से आए हैं, तो उनके थकान के बारे में पूछता हूँ और घर की कोई स्पेशल डिश बनवाने की कोशिश करता हूँ।
सहपाठियों के साथ चर्चा के लिए: मैं अपने राज्य (उत्तर प्रदेश) का पारंपरिक व्यंजन अतिथियों को खिलाना चाहता हूँ, जैसे “कचौड़ी-सब्जी” या “लिट्टी-चोखा”, क्योंकि ये स्वादिष्ट और घरेलू होते हैं। अपने सहपाठियों से पूछें कि वे अपने क्षेत्र का कौन-सा व्यंजन (जैसे पंजाब का मक्की दी रोटी, राजस्थान का दाल-बाटी, या दक्षिण भारत का इडली-सांभर) मेहमानों को खिलाना पसंद करेंगे। चर्चा में बताएं कि ये व्यंजन क्यों स्पेशल हैं और कैसे बनते हैं। इससे हमें अलग-अलग राज्यों की संस्कृति के बारे में पता चलेगा।

खोजबीन के लिए

इस एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए। इसके लिए आप अपने अभिभावक, अध्यापक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर: एकांकी में ‘आने’, ‘गज’ और ‘तार’ शब्दों का इस्तेमाल पुराने समय की मुद्रा, माप और संचार के संदर्भ में हुआ है। मैंने इनके बारे में विस्तार से जानकारी इकट्ठी की, जिसमें इंटरनेट की मदद ली। नीचे विवरण दिया है:

  • आने (Anna): ‘आने’ पुरानी भारतीय मुद्रा की एक इकाई थी, जो ब्रिटिश इंडिया में 1835 से 1957 तक इस्तेमाल होती थी। यह 16 आने से 1 रुपया बनता था। प्रत्येक आना 4 पैसे के बराबर होता था, और 1 रुपया कुल 64 पैसे का होता था। 1957 में डेसिमल सिस्टम आने के बाद, 1 रुपया = 100 पैसे हो गया, और ‘आने’ का उपयोग बंद हो गया। एकांकी में नन्हेमल ‘साढ़े नौ आने गज’ कहता है, जो कपड़े की कीमत बताता है। यह पुरानी मुद्रा प्रणाली को दर्शाता है।
  • गज (Gaj): ‘गज’ लंबाई नापने की एक पुरानी इकाई है, जो मुगल काल से भारत में इस्तेमाल होती है। यह 1 यार्ड के बराबर है, जो लगभग 3 फीट या 0.914 मीटर होती है। भारत में मुख्य रूप से कपड़ा नापने (जैसे साड़ी, धोती) और जमीन मापने में इस्तेमाल होता था। आज भी रियल एस्टेट और टेक्सटाइल में ‘गज’ शब्द आम है, जैसे “200 गज का प्लॉट”। एकांकी में ‘गज’ कपड़े की लंबाई के लिए यूज हुआ है।
  • तार (Tar/Telegraph): ‘तार’ टेलीग्राफ का हिंदी नाम है, जो बिजली की मदद से दूर तक संदेश भेजने का पुराना साधन था। भारत में पहला टेलीग्राफ लाइन 1850 में कलकत्ता से डायमंड हार्बर के बीच शुरू हुआ। 1854 में यह पब्लिक के लिए खुला, और मुंबई से पुणे तक पहला संदेश भेजा गया। ब्रिटिश काल में यह बहुत महत्वपूर्ण था, जैसे 1857 की क्रांति में इस्तेमाल। 2013 में भारत में टेलीग्राफ सेवा बंद हो गई, क्योंकि मोबाइल और इंटरनेट ने इसकी जगह ले ली। एकांकी में रेवती का भाई ‘तार’ का जिक्र करता है, जो पुराने समय के संचार को दिखाता है।

7. मत बाँधो – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?

  • सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
  • सपनों को भूल जाना चाहिए
  • सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए *
  • सपने देखना अच्छी बात है *

उत्तर: सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए, सपने देखना अच्छी बात है
कविता “मत बाँधो” का मुख्य भाव यह है कि सपनों को आज़ाद छोड़ना चाहिए ताकि वे हमें नई प्रेरणा और ऊँचाइयों तक ले जाएँ। सपने केवल कल्पनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे हमें कुछ नया करने की ताकत देते हैं। कविता कहती है कि सपनों को रोकना नहीं चाहिए, इसलिए “सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए” और “सपने देखना अच्छी बात है” सही उत्तर हैं।

2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?

  • प्रेम की
  • शिक्षा की
  • सपनों की *
  • अधिकारों की

उत्तर: सपनों की
कविता में महादेवी वर्मा बार-बार सपनों की आज़ादी की बात करती हैं। वे कहती हैं कि सपनों के पंख न काटो और उनकी गति न रोकें। इसलिए सही उत्तर है “सपनों की”।

3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?

  • सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
  • सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
  • सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
  • सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं

उत्तर: सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं, सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं, सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
सपनों को पंखों से जोड़ा गया है क्योंकि पंख पक्षियों को उड़ने में मदद करते हैं। ठीक वैसे ही, सपने हमें जीवन में ऊँचा उठने, नई प्रेरणा लेने और नई जगहों तक पहुँचने में मदद करते हैं। सपने हमें कुछ नया करने की ताकत देते हैं और सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं। 

4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?

  • जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
  • जहाँ अतुलनीय धन संपत्ति हो
  • जहाँ परस्पर सहयोग एवं स‌द्भाव हो *
  • जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों *

उत्तर: जहाँ परस्पर सहयोग एवं स‌द्भाव हो, जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
कविता में “स्वर्ग” का मतलब है एक ऐसी जगह जहाँ लोग एक-दूसरे के साथ प्यार, सहयोग और अच्छे भाव से रहें। सपने हमें ऐसी दुनिया बनाने की प्रेरणा देते हैं जहाँ सभी एक-दूसरे की मदद करें और संवेदनशील हों।

5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?

  • वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
  • वह और गहरा हो सकता है
  • उसकी उड़ान रुक सकती है
  • वह बढ़कर पौधा बन सकता है *

उत्तर: वह बढ़कर पौधा बन सकता है
कविता में कहा गया है कि अगर बीज को मिट्टी में गिरने से रोका जाए, तो वह पेड़ नहीं बन सकता। बीज जब धूल (मिट्टी) में गिरता है, तो वह पौधा बनकर बड़ा हो सकता है। इसलिए सही उत्तर है “वह बढ़कर पौधा बन सकता है”।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हमने अपने दोस्तों के साथ चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:

  • सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए इसलिए सही है क्योंकि कविता “मत बाँधो” कहती है कि सपनों को रोकने से उनकी सुंदरता और शक्ति खत्म हो जाती है। सपनों को आज़ाद छोड़ने से वे हमें प्रेरणा देते हैं और जीवन को बेहतर बनाते हैं।
  • सपने देखना अच्छी बात है इसलिए सही है क्योंकि सपने हमें नई उम्मीद और कुछ नया करने की ताकत देते हैं, जैसा कि कविता में बताया गया है।
  • सपनों की स्वतंत्रता इसलिए सही है क्योंकि कविता बार-बार कहती है कि सपनों के पंख न काटो और उनकी गति न रोकें, ताकि वे ऊँचाइयों तक उड़ सकें।
  • सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं, सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं, और पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं इसलिए सही हैं क्योंकि कविता में सपनों को पंखों से जोड़ा गया है, जो हमें ऊँचा उठने और नई राह दिखाने का प्रतीक है।
  • जहाँ परस्पर सहयोग एवं स‌द्भाव हो और जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों इसलिए सही है क्योंकि कविता में “स्वर्ग” का मतलब ऐसी दुनिया है जहाँ लोग एक-दूसरे की मदद करें और प्यार से रहें।
  • बीज धूल में गिरकर पौधा बन सकता है इसलिए सही है क्योंकि कविता कहती है कि अगर बीज को मिट्टी में गिरने से रोका जाए, तो वह पेड़ नहीं बन सकता। बीज को आज़ादी देने से ही वह बड़ा हो सकता है, जैसे सपनों को।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है? 
बीज धूलि में गिर जाता जो 
वह नभ में कब उड़ पाता है?”

उत्तर: इस पंक्ति का मतलब है कि खुशबू हवा में उड़ जाती है और वापस नहीं आती। बीज अगर मिट्टी में गिरता है तभी वह बड़ा पेड़ बन सकता है। यानी कुछ चीजें अपनी जगह पर रहकर ही सही काम कर पाती हैं। सपनों को भी अपनी जगह और आज़ादी चाहिए ताकि वे सफल हो सकें।

(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह 
तारों में फिर मिल जायेगा, 
मेघों से रंग औ’ किरणों से 
दीप्ति लिए भू पर आयेगा।”
उत्तर: इस पंक्ति का मतलब है कि सपने खुला आसमान में उड़ते हैं, बादलों और तारों के बीच घूमते हैं। वे बादलों से रंग और सूरज की किरणों से चमक लेकर फिर धरती पर लौटते हैं। यानी सपने हमें नई ऊर्जा और सुंदरता देते हैं जो हमारे जीवन को रोशन करते हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से मिलाइए।
उत्तर:

सोच-विचार के लिए

कविता को पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
उत्तर: ये संबोधन सपनों के लिए किए गए हैं। कवयित्री महादेवी वर्मा हमें कह रही हैं कि अपने या दूसरों के सपनों को रोकना या सीमित नहीं करना चाहिए। जैसे कोई व्यक्ति अपने सपनों को डर या बाधाओं से बाँध देता है, तो वे पूरे नहीं हो पाते। उदाहरण के लिए, अगर कोई बच्चा बड़ा वैज्ञानिक बनना चाहता है, तो हम उसके सपनों के पंख नहीं काटने चाहिए, बल्कि उसे आज़ादी देनी चाहिए। ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि सपने आज़ाद रहकर ही फलते-फूलते हैं।

(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
उत्तर: सपनों की गति न बाँधने की बात इसलिए कही गई होगी क्योंकि अगर हम सपनों को रोकते हैं, तो वे अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पाते। कवयित्री कहती हैं कि सपने जैसे पक्षी हैं, जिन्हें उड़ने की आज़ादी चाहिए। अगर हम उन्हें बाँध दें, तो वे हमें नई प्रेरणा, सुंदरता या सफलता नहीं दे पाएंगे। जैसे बीज को मिट्टी में गिरने से रोकने पर वह पेड़ नहीं बनता, वैसे ही सपनों को बाँधने से जीवन में कुछ नया नहीं होता। इससे हमारा जीवन सीमित और बोरिंग रह जाता है। कविता हमें सिखाती है कि सपनों की गति रोकने से उनकी चमक और महत्व खत्म हो जाता है, इसलिए उन्हें खुलकर जीने दें।

(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
उत्तर: कविता में सौरभ (खुशबू), बीज, धुआँ और अग्नि के उदाहरण से सपनों को अलग बताकर उनकी विशेषता दिखाई गई है, क्योंकि सपने इनसे ज्यादा जीवंत और रचनात्मक होते हैं। 
मेरी दृष्टि में सपनों की और विशेषताएँ ये हो सकती हैं:

  • व्यक्तिगत और अनोखे: सपने हर इंसान के अपने होते हैं, जैसे कोई दो खुशबू या बीज एक जैसे नहीं, लेकिन सपने हमारी सोच और भावनाओं से बनते हैं।
  • बदलने वाले: सपने समय के साथ बदल सकते हैं या बड़े हो सकते हैं, जबकि धुआँ या अग्नि एक बार जलकर खत्म हो जाते हैं।
  • प्रेरणा देने वाले: सपने हमें मेहनत करने की ताकत देते हैं और जीवन को नई दिशा दिखाते हैं, जो सौरभ या बीज जैसी चीजों में नहीं होती।
  • असीमित: सपने किसी सीमा में नहीं बंधे, वे कल्पना से शुरू होकर वास्तविकता बन सकते हैं, जैसे कोई व्यक्ति चाँद पर जाने का सपना देखता है और वैज्ञानिक बनकर उसे पूरा करता है।

ये विशेषताएँ सपनों को इन उदाहरणों से अलग बनाती हैं, क्योंकि सपने हमारे मन की रचना हैं और हमें बेहतर इंसान बनाती हैं।

(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?
उत्तर: कविता में ‘आरोहण’ (ऊपर उठना) और ‘अवरोहण’ (नीचे आना) दोनों को महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि सपनों में उतार-चढ़ाव ही उन्हें सच्चा बनाते हैं। आरोहण से मतलब है ऊँचाई की ओर जाना और अवरोहण से नीचे आकर वास्तविकता से जुड़ना। 
मैंने इन्हें सार्थक होते देखा है:

  • आरोहण का उदाहरण: मैंने एक दोस्त को देखा जो डॉक्टर बनने का सपना देखता था। उसने मेहनत की और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया – यह आरोहण था, जहाँ उसका सपना ऊँचा उठा और उसे प्रेरणा मिली। इससे उसकी जिंदगी में नई उम्मीद आई।
  • अवरोहण का उदाहरण: वही दोस्त पढ़ाई के दौरान असफलताओं से गुजरा, जैसे परीक्षा में कम नंबर आना। लेकिन वह नीचे आकर (अवरोहण) फिर से मेहनत करता और सीखता। इससे उसका सपना मजबूत हुआ और आज वह डॉक्टर है।

(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
उत्तर: हाँ, मैं पूरी तरह सहमत हूँ कि सपने दोनों गतियाँ (ऊपर-नीचे) रखते हैं और उड़कर ‘आँखों में लौटकर’ यानी हमारी सोच और नजर में वास्तविकता बन जाते हैं। सपने पहले कल्पना में उड़ते हैं, फिर मेहनत से हकीकत बनते हैं और हमें नई चमक देते हैं।
मेरा अनुभव का उदाहरण: मेरे एक पड़ोसी अंकल ने सपना देखा था कि वे अपना छोटा सा बिजनेस शुरू करेंगे। शुरू में सपना ऊँचा उड़ा (कल्पना में), लेकिन पैसे की कमी से नीचे आया। फिर उन्होंने मेहनत की, लोन लिया और दुकान खोली। आज वह सफल हैं और कहते हैं कि सपना उनकी आँखों में चमक बनकर लौटा, क्योंकि अब वे रोज़ अपनी दुकान देखकर खुश होते हैं। इससे उनका जीवन वास्तविकता में सुंदर हो गया।

शीर्षक

कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
उत्तर: 
मेरा नया शीर्षक: मैं इस कविता का नाम ‘सपनों की उड़ान’ रखूँगा।
क्यों सोचा: मैंने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि कविता में बार-बार सपनों को आज़ाद छोड़ने और उनकी उड़ान को रोकने से मना किया गया है। जैसे “इन सपनों के पंख न काटो” और “मुक्त गगन में विचरण कर” जैसी पंक्तियाँ हैं, जो बताती हैं कि सपने ऊँचा उड़कर हमें नई प्रेरणा और सुंदरता देते हैं। ‘सपनों की उड़ान’ शीर्षक से यह साफ हो जाता है कि कविता सपनों की आज़ादी और उनकी ताकत की बात करती है। यह नाम आसान और कविता के भाव को अच्छे से दर्शाता है।

अनुमान और कल्पना से

(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
उत्तर: 

  • ​रखना चाहूँगा: मैं अपने संसार में पेड़-पौधे, साफ हवा, स्कूल, अस्पताल और दोस्तों को रखूँगा। कारण यह है कि पेड़ हमें ऑक्सीजन देंगे, साफ हवा से हम स्वस्थ रहेंगे, स्कूल से पढ़ाई होगी, अस्पताल से बीमारी ठीक होगी और दोस्तों से खुशी मिलेगी।
  • नहीं रखना चाहूँगा: मैं प्रदूषण, लड़ाई-झगड़ा और गरीबी को नहीं रखूँगा। कारण यह है कि प्रदूषण से बीमारी होगी, लड़ाई से दुख होगा और गरीबी से लोग परेशान रहेंगे। मैं चाहता हूँ कि मेरा संसार खुशहाल हो।

(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए।
उत्तर: 

  • कौन-सी कला: मैं चित्रकला सीखना चाहूँगा।
  • कैसे सुंदर बनेगा: चित्रकला से मैं अपनी भावनाएँ और सपने रंगों में दिखा सकूँगा। जब मैं सुंदर चित्र बनाऊँगा, तो मेरी खुशी बढ़ेगी और लोग मेरी तारीफ करेंगे। इससे मेरा मन शांत और जीवन रंगीन होगा। मैं सोचता हूँ कि यह मुझे नई सोच और दोस्तों से प्यार भी देगा।

(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में/ फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
उत्तर: 

  • ​परिवर्तन: अगर मुझे बीते समय में लौटने का मौका मिले, तो मैं अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दूँगा और गलतियों को कम करूँगा। मैं अपने माता-पिता से ज्यादा बात करूँगा ताकि उन्हें दुख न हो। मैं खेल-कूद में भी समय बचाऊँगा ताकि स्वस्थ रहूँ।
  • क्यों: मैं सोचता हूँ कि पढ़ाई में मेहनत से मेरा भविष्य बेहतर होगा। माता-पिता से प्यार से रिश्ते अच्छे रहेंगे और खेल से सेहत बनी रहेगी। इससे मेरा जीवन पहले से खुशहाल होगा।

(घ) “बीज धूलि में गिर जाता जो वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत- धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि।)
उत्तर: 

  • ​ज़रूरी चीजें: अगर सपने बीज की तरह हैं, तो उन्हें उगने के लिए मेहनत (धूप), लगन (पानी), धैर्य (हवा) और सही मार्गदर्शन (मिट्टी) की ज़रूरत होगी।
  • क्यों: मेहनत से सपने पूरे होते हैं, लगन से हम लगातार कोशिश करते हैं, धैर्य से मुश्किलों को सहते हैं और मार्गदर्शन से सही दिशा मिलती है। जैसे बीज इनसे पेड़ बनता है, वैसे ही सपने हकीकत बनते हैं।

(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प/भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर: 

  • ​बुरे सपनों का असर: बुरे सपनों या विचारों से नरक जैसी स्थिति बन सकती है। इससे लड़ाई-झगड़ा, दुख और गलत काम बढ़ सकते हैं। जैसे अच्छे सपने हमें प्रेरणा देते हैं, वैसे बुरे सपने हमें गलत राह पर ले जा सकते हैं।
  • बचने का तरीका: बुरे सपनों से बचने के लिए हमें अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए, अच्छे दोस्तों के साथ रहना चाहिए और अपने मन को शांत रखने के लिए प्रार्थना या खेल करना चाहिए। इससे हम सकारात्मक सोच अपनाएंगे और बुरे विचारों से दूर रहेंगे।

(च) “इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
उत्तर: 

  • दुनिया कैसी होगी: अगर हर किसी को सपने देखने और पूरा करने की आज़ादी मिले, तो दुनिया बहुत खुशहाल और रंगीन होगी। लोग वैज्ञानिक, कलाकार, डॉक्टर बनेंगे और नई चीजें बनाएंगे। कोई दुख या गरीबी नहीं होगी, सब एक-दूसरे की मदद करेंगे।
  • महत्वपूर्ण बातें: उस दुनिया में मेहनत, प्यार, सहयोग और शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण होंगे। मेहनत से सपने पूरे होंगे, प्यार से रिश्ते मजबूत होंगे, सहयोग से सबकी मदद होगी और शिक्षा से नई सोच आएगी।

(छ) “इन सपनों के पंख न काटो /इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
उत्तर: 

  • ​यह क्या है: मेरे विचार से यह एक सुझाव और थोड़ा-सा आदेश दोनों है। कवयित्री हमें सलाह दे रही हैं कि सपनों को आज़ाद रखें, लेकिन “मत बाँधो” और “न काटो” शब्दों से यह भी लगता है कि हमें इसे गंभीरता से मानना चाहिए।
  • किससे कही जा रही है: यह बात हम सब लोगों से कही जा रही है – माता-पिता, शिक्षक, दोस्त और खुद से भी। इसका मतलब है कि हमें अपने और दूसरों के सपनों को रोकने से बचना चाहिए ताकि हर कोई अपने सपनों को उड़ा सके।

कविता की रचना

  • “सौरभ उड़ जाता है नभ में…”
  • “बीज धूलि में गिर जाता जो…”
  • “अग्नि सदा धरती पर जलती…”

उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: 
हमने अपने समूह के साथ कविता “मत बाँधो” की विशेषताओं पर चर्चा की और ये सूची बनाई:

  • प्रकृति के उदाहरण: कविता में सौरभ (खुशबू), बीज, अग्नि और धुआँ जैसे प्रकृति के उदाहरण हैं, जो सपनों को समझाने में मदद करते हैं। जैसे “सौरभ उड़ जाता है नभ में” से हम खुशबू की उड़ान का चित्र देखते हैं।
  • सपनों की आज़ादी: कविता बार-बार सपनों को रोकने से मना करती है, जैसे “इन सपनों के पंख न काटो”, जो सपनों की स्वतंत्रता दिखाती है।
  • शब्द-चित्र: पंक्तियाँ जैसे “बीज धूलि में गिर जाता जो” से हम बीज के पेड़ बनने का दृश्य सोच सकते हैं, जो कविता को खूबसूरत बनाता है।
  • प्रश्नात्मक शैली: “फिर वह लौट कहाँ आता है?” जैसे सवाल पूछकर कवयित्री हमें सोचने के लिए मजबूर करती हैं।
  • उत्साह और प्रेरणा: “स्वर्ग बनाने का शिल्प” जैसे शब्द हमें नई ऊर्जा और अच्छे काम करने की प्रेरणा देते हैं।

हमने अपनी सूची कक्षा में साझा की। दूसरे समूहों ने भी अपनी बातें बताई, जैसे कुछ ने कहा कि कविता में भावनाएँ भी खूबसूरती से दिखती हैं। इससे हमारी समझ और बढ़ी।

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
उत्तर: 

शब्दों की बात

“इसका आरोहण मत रोको 
इसका अवरोहण मत बाँधो!”
उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है- नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ है- ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना।

(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।

  • पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर _____ कर विजय प्राप्त की।
  • नदियाँ विशाल पर्वतों से _____  करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
  • अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया ____ क्रम कहलाती है।

इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।
उत्तर: 

  • पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
  • नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
  • अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।

अपने सार्थक वाक्य:

  • मैंने पहाड़ पर आरोहण किया और ऊपर से बहुत सुंदर दृश्य देखा।
  • सूरज की किरणें आकाश से अवरोहण करती हैं और धरती को रोशन करती हैं।
  • मेरे दोस्त ने सीढ़ियों से आरोहण करके छत पर झंडा फहराया।

(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए-
“वह नभ में कब उड़ पाता है?”
“धूम गगन में मँडराता है।”
‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?

उत्तर: समानार्थी शब्द: आकाश, व्योम
नई पंक्तियाँ:

  • वह आकाश में कब उड़ पाता है?
    (यहाँ “नभ” को “आकाश” से बदला, लय वैसी ही बनी रही।)
  • धूम व्योम में मँडराता है।
    (यहाँ “गगन” को “व्योम” से बदला, लेकिन “मँडराता है” की लय के लिए “धूम” को यथावत रखा।)

परिवर्तन की ज़रूरत: लय बनाए रखने के लिए शब्दों की लंबाई और ध्वनि पर ध्यान देना पड़ा। जैसे “आकाश” और “व्योम” को “नभ” और “गगन” के साथ जोड़ा, लेकिन अगर पंक्ति लंबी लगे तो बीच में “और” या “जैसे” जैसे शब्द जोड़ सकते हैं, जैसे – “वह आकाश में और उड़ पाता है?” (लेकिन यहाँ मूल लय को बनाए रखा गया)।

(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत- ‘मत डरो’)
उत्तर: क्रियाएँ:

  • मत डरो
  • मत रुको
  • मत छोड़ो
  • मत हारो
  • मत भूलो

क्यों: ये सभी क्रियाएँ हमें सकारात्मक सोच और मेहनत की प्रेरणा देती हैं। जैसे “मत डरो” से डर छोड़ने का हौसला मिलता है और “मत रुको” से आगे बढ़ने की ताकत मिलती है, जो कविता के सपनों को आज़ाद रखने के भाव से मेल खाती है।

(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत- जोड़ना)
उत्तर: 
क्रियाएँ: बाँधना, जोड़ना, रस्सी से बाँधना, कसना, टाई करना
(हमने समूह में चर्चा की और ये शब्द चुने।)
वाक्य:

  • मैंने गाय को रस्सी से बाँधा ताकि वह न भागे।
  • उसने दो डोरियाँ जोड़कर एक लंबी रस्सी बनाई।
  • पेड़ की डाल को कसकर बाँधा गया ताकि वह टूटे नहीं।
  • मेरे भाई ने अपनी जूतों की डोर टाई की।
  • हमने तंबू को पत्थरों से बाँधा ताकि हवा उसे उड़ा न ले।

(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
उत्तर: कविता से शब्द और उनके उलटे:

  • धरती → उलट कर तिरध (लेकिन अर्थ नहीं बनता, इसलिए सही नहीं)
  • नभ → उलट कर भन (अर्थ नहीं बनता)
  • पंख → उलट कर खनप (अर्थ नहीं बनता)
  • सौरभ → उलट कर भरउस (अर्थ नहीं बनता)

निष्कर्ष: कविता में ज्यादा शब्द ऐसे नहीं मिले जो उलटने से अर्थ दें। ‘मत’ और ‘तम’ एकमात्र उदाहरण है। समूह में चर्चा से पता चला कि हिंदी में उलटने से अर्थ देने वाले शब्द कम होते हैं, जैसे ‘राम’ → ‘मार’ (अर्थ: मारना), लेकिन कविता में यह लागू नहीं होता।

काल परिवर्तन

“सौरभ उड़ जाता है नभ में”
उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी-
भूतकाल – सौरभ उड़ गया है नभ में
भविष्य काल – सौरभ उड़ जाएगा नभ में
कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।

उत्तर: हमने कविता “मत बाँधो” को ध्यान से पढ़ा और वर्तमान काल में लिखी गई पंक्तियों को ढूँढा। इन पंक्तियों को भूतकाल और भविष्य काल में बदला है। नीचे दिए गए हैं:

1. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “सौरभ उड़ जाता है नभ में”

  • भूतकाल: सौरभ उड़ गया है नभ में
  • भविष्य काल: सौरभ उड़ जाएगा नभ में

2. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “बीज धूलि में गिर जाता जो”

  • भूतकाल: बीज धूलि में गिर गया जो
  • भविष्य काल: बीज धूलि में गिर जाएगा जो

3. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “अग्नि सदा धरती पर जलती”

  • भूतकाल: अग्नि सदा धरती पर जली
  • भविष्य काल: अग्नि सदा धरती पर जलेघी

4. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “धूम गगन में मँडराता है”

  • भूतकाल: धूम गगन में मँडराया है
  • भविष्य काल: धूम गगन में मँडराएगा

5. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल जायेगा”

  • भूतकाल: मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिल गया
  • भविष्य काल: मुक्त गगन में विचरण कर यह तारों में फिर मिलेगा

6. मूल पंक्ति (वर्तमान काल): “मेघों से रंग औ’ किरणों से दीप्ति लिए भू पर आयेगा”

  • भूतकाल: मेघों से रंग औ’ किरणों से दीप्ति लिए भू पर आया
  • भविष्य काल: मेघों से रंग औ’ किरणों से दीप्ति लिए भू पर आएगा

Note: हमने कविता से वर्तमान काल की पंक्तियाँ चुनीं, जहाँ क्रिया जैसे “जाता है”, “गिर जाता जो”, “जलती”, “मँडराता है” आदि हैं। इन्हें भूतकाल में “गया”, “गिर गया”, “जली” और भविष्य काल में “जाएगा”, “गिर जाएगा”, “जलेघी” जैसे रूपों में बदला। इससे कविता का समय बदल गया, लेकिन भाव वही रहा। हमने ध्यान रखा कि शब्दों की लय बनी रहे।

शब्दकोश से

“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प”
शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं- 1. हाथ से कोई चीज बनाकर तैयार करने का काम – दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे- बरतन बनाना, कपड़े सिलना, गहने गढ़ना आदि। 2. कला संबंधी व्यवसाय। 3. दक्षता, कौशला 4. निर्माण, सर्जन, सृष्टि, रचना। 5. आकार, आवृत्ति। 6. अनुष्ठान, क्रिया, धार्मिक कृत्य।
अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए-
1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी
2. शिल्पकला
3. शिल्पकौशल
4. शिल्पगृह या शिल्पगेह
5. शिल्पविद्या
6. शिल्पशाला या शिल्पालय

उत्तर: ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े शब्दों के अर्थ:

  1. शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी
    • अर्थ: वह व्यक्ति जो कारीगरी, हुनर या कला का काम करता हो। जैसे- मूर्ति बनाने वाला, बर्तन बनाने वाला, चित्रकार या कोई भी कारीगर।
    • उदाहरण: मूर्तिकार एक शिल्पकार है जो पत्थर से सुंदर मूर्तियाँ बनाता है।
  2. शिल्पकला
    • अर्थ: वह कला जिसमें हाथ से सुंदर और उपयोगी चीजें बनाई जाती हैं। जैसे- मूर्तिकला, चित्रकला, बुनाई या कढ़ाई।
    • उदाहरण: शिल्पकला में मिट्टी के बर्तन बनाना एक सुंदर कला है।
  3. शिल्पकौशल
    • अर्थ: किसी कला या काम में विशेष निपुणता, दक्षता या कौशल।
    • उदाहरण: कारीगर का शिल्पकौशल देखकर लोग उसकी तारीफ करते हैं।
  4. शिल्पगृह या शिल्पगेह
    • अर्थ: वह स्थान या घर जहाँ शिल्प का काम होता हो, जैसे- कारीगर का कार्यस्थल।
    • उदाहरण: शिल्पगृह में कारीगर मिट्टी के दीये बनाते हैं।
  5. शिल्पविद्या
    • अर्थ: शिल्प या कला से संबंधित ज्ञान या शिक्षा।
    • उदाहरण: शिल्पविद्या सीखने के लिए उसने कला स्कूल में दाखिला लिया।
  6. शिल्पशाला या शिल्पालय
    • अर्थ: वह जगह जहाँ शिल्प का काम सिखाया या किया जाता हो, जैसे- कार्यशाला।
    • उदाहरण: शिल्पशाला में लोग मूर्तियाँ और हस्तकला की चीजें बनाना सीखते हैं।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत- गाँठ बाँधना)
उत्तर: 
‘बाँधने’ का प्रयोग हम निम्नलिखित स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं:

  • गाँठ बाँधना: जैसे- रस्सी में गाँठ बाँधना या कपड़े को बाँधना।
  • पशुओं को बाँधना: जैसे- गाय या बकरी को रस्सी से खूँटे से बाँधना।
  • बाल बाँधना: जैसे- चोटी या जूड़ा बाँधना।
  • राखी बाँधना: जैसे- भाई के कलाई पर राखी बाँधना।
  • पट्टी बाँधना: जैसे- चोट पर पट्टी बाँधना।
  • सपनों को बाँधना: जैसे- किसी की इच्छाओं या सपनों को रोकना।

(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अर्थात वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर: 
अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए मैं निम्नलिखित प्रयास करूँगा:

  • घर के लिए:
    1. घर को साफ-सुथरा रखना।
    2. परिवार के साथ मिलकर समय बिताना और हँसी-खुशी का माहौल बनाना।
    3. छोटे-छोटे पौधे लगाकर घर को हरा-भरा करना।
    4. सभी के साथ प्यार और सम्मान से बात करना।
  • आस-पड़ोस के लिए:
    1. पड़ोसियों की मदद करना, जैसे- जरूरत पड़ने पर सामान लाना।
    2. मोहल्ले में साफ-सफाई के लिए सबको प्रेरित करना।
    3. त्योहारों पर एक-दूसरे के साथ खुशियाँ बाँटना।
    4. झगड़े से बचना और शांति बनाए रखना।
  • विद्यालय के लिए:
    1. स्कूल में साफ-सफाई रखना और कूड़ा न फैलाना।
    2. दोस्तों और शिक्षकों के साथ अच्छा व्यवहार करना।
    3. स्कूल में पेड़-पौधे लगाने में मदद करना।
    4. सभी को मिलकर खेलने और पढ़ने का मौका देना।

(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।
उत्तर: मेरा सपना है कि मैं एक डॉक्टर बनूँ। अगर यह सपना सच हो गया, तो मैं गरीब और जरूरतमंद लोगों का मुफ्त में इलाज करूँगा। मैं गाँवों में मेडिकल कैंप लगाऊँगा, जहाँ लोगों को मुफ्त दवाइयाँ और स्वास्थ्य जाँच की सुविधा मिलेगी। इससे कई लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और खुशी मिलेगी।

चर्चा-परिचर्चा

“सपनों में दोनों ही गति है/ उड़कर आँखों में आता है।” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।
उत्तर: मेरे कुछ ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए मैं दूसरों को जोड़ना चाहूँगा:

  • स्वच्छ भारत का सपना: मैं चाहता हूँ कि मेरा गाँव या शहर पूरी तरह साफ और हरा-भरा हो। इसके लिए मैं अपने दोस्तों, पड़ोसियों और स्कूल के साथियों को जोड़कर साफ-सफाई अभियान चलाऊँगा। हम मिलकर कूड़ा हटाएँगे और पेड़ लगाएँगे।
  • शिक्षा का सपना: मैं चाहता हूँ कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले। इसके लिए मैं अपने दोस्तों और शिक्षकों के साथ मिलकर गरीब बच्चों को मुफ्त किताबें और पढ़ाई की सुविधा देने का काम करूँगा।
  • गरीबी हटाने का सपना: मैं चाहता हूँ कि कोई भूखा न रहे। इसके लिए मैं अपने साथियों के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों को खाना और कपड़े बाँटने का काम करूँगा।

इन सपनों को पूरा करने के लिए मैं अपने दोस्तों, परिवार और समाज के लोगों को प्रेरित करूँगा ताकि हम सब मिलकर एक बेहतर समाज बना सकें।

सृजन

(क) विराम चिह्न का फेरबदल-
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्व होता है। विराम चिह्नों के प्रयोग से वाक्य या पंक्ति का अर्थ स्पष्ट हो जाता है और परिवर्तित भी हो जाता है, जैसे- ‘रोको मत, जाने दो’ में रोको मत के बाद अल्पविराम चिह्न (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि बिना रोके जाने दिया जाए। वहीं ‘रोको, मत जाने दो’ में रोको के बाद अल्पविराम (,) का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि जाने से रोका जाए। नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।

उत्तर: 

  1. बच्चे सड़क पार कर रहे हैं, कार रुकी हुई है
    शीर्षक: “रुको मत, जाने दो”
    विराम चिह्न: यहाँ ‘रुको मत’ के बाद कोई अल्पविराम नहीं होगा क्योंकि यहाँ रोकने का आदेश नहीं है। इसका अर्थ है बिना रोके आगे बढ़ो।
  2. आदमी एक बोर्ड पढ़ रहा है जिसमें लिखा है “यह क्षेत्र वि…”
    शीर्षक: “रुको, मत जाने दो”
    विराम चिह्न: यहाँ ‘रुको’ के बाद अल्पविराम (,) लगाया जाएगा क्योंकि यहाँ रोकने का आदेश दिया गया है, यानी उसे रुका जाना चाहिए।
  3. परिवार सैनिक का स्वागत कर रहा है
    शीर्षक: “रुको, मत जाने दो”
    विराम चिह्न: ‘रुको’ के बाद अल्पविराम (,) लगाया जाएगा क्योंकि यहाँ रोकने का आदेश है, जो सैनिक परिवार से जुड़ा भाव दर्शाता है।
  4. मतदान केंद्र के बाहर लोग खड़े हैं
    शीर्षक: “रुको मत, जाने दो”
    विराम चिह्न: यहाँ ‘रुको मत’ एक साथ है, मतलब मत रुको और आगे बढ़ो। इसलिए कोई अल्पविराम नहीं।
  5. ट्रैफिक पुलिस गाड़ी को रोक रहा है
    शीर्षक: “रुको, मत जाने दो”
    विराम चिह्न: ‘रुको’ के बाद अल्पविराम (,) क्योंकि ट्रैफिक पुलिस गाड़ी को रोक रहा है।
  6. अंधा व्यक्ति बच्चे के साथ सड़क पार कर रहा है
    शीर्षक: “रुको मत, जाने दो”
    विराम चिह्न: ‘रुको मत’ साथ में है, मतलब रोको मत और आगे बढ़ने दो, इसलिए कोई अल्पविराम नहीं।

(ख) कविता आगे बढ़ाएँ
नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक कविता तैयार कीजिए।
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो।

उत्तर: इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो।
जैसे नदिया बहती है मुक्त
सागर तक पहुँचने को रुक।
सपने भी तो हैं नदिया जैसे
उड़ते हैं मन के आकाश में ऐसे।

रोक न इनकी राह सुहानी
इनमें बस्ती है जिंदगानी।
हर सपना लाता है रंग नया
दिल में जगाता है उमंग नया।
छू लेगा यह तारों का मेला
जब उड़ेगा खुला सा झमेला।

इन सपनों को दे दो उड़ान
बन जाएँ ये जीवन का सम्मान।
धरती से उठकर गगन तक जाए
हर दिल में नई रोशनी लाए।
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो।

(ग) खोया-पाया
मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।

उत्तर: प्रति,
प्रधानाचार्य महोदय,
[स्कूल का नाम],
[स्कूल का पता]
विषय: खोए हुए सपने की रिपोर्ट
माननीय महोदय,
सादर नमस्ते! मैं [आपका नाम], कक्षा [आपकी कक्षा] का विद्यार्थी हूँ। मैं आपको सूचित करना चाहता हूँ कि मेरा एक बहुत महत्वपूर्ण सपना खो गया है। यह सपना था कि मैं एक डॉक्टर बनकर गरीब लोगों की मुफ्त में मदद करूँ।
सपने का विवरण:

  • क्या खोया: मेरा सपना (डॉक्टर बनने का)
  • कब खोया: पिछले कुछ दिनों से मुझे लग रहा है कि यह सपना मेरे मन से कहीं खो गया है।
  • कहाँ खोया: शायद स्कूल के खेल के मैदान, पुस्तकालय या कक्षा में, जहाँ मैं अक्सर समय बिताता हूँ।
  • विशेष जानकारी: यह सपना मेरे लिए बहुत खास था। यह मुझे हमेशा प्रेरणा देता था कि मैं मेहनत करूँ और दूसरों की मदद करूँ।

मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि इस सपने को ढूँढने में मेरी मदद करें। अगर किसी को यह सपना मिले, तो कृपया मुझे या स्कूल कार्यालय को सूचित करें। मैं अपने सपने को फिर से पाने के लिए बहुत उत्सुक हूँ।
आपका सहयोग मेरे लिए बहुत मायने रखता है। धन्यवाद।
दिनांक: 13 अगस्त, 2025
आपका आज्ञाकारी,
[आपका नाम]
[कक्षा और अनुक्रमांक]

वाद-विवाद

(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है- “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”
एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे-
समूह 1- व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।
समूह 2- स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उत्तर: वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन
विषय: “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”
आयोजन का तरीका:

  1. कक्षा में 8 विद्यार्थियों को दो समूहों में बाँटें (प्रत्येक समूह में 5 विद्यार्थी)।
    • समूह 1: विषय के विपक्ष में (व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है)।
    • समूह 2: विषय के पक्ष में (स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं)।
  2. प्रत्येक समूह को 5 मिनट का समय दें ताकि वे अपने तर्क तैयार करें।
  3. वाद-विवाद की शुरुआत समूह 1 से हो, फिर समूह 2 बोले। दोनों समूह बारी-बारी से अपने तर्क देंगे।
  4. प्रत्येक विद्यार्थी को 1-2 मिनट बोलने का मौका दें।
  5. शिक्षक या एक तटस्थ विद्यार्थी निर्णायक की भूमिका निभाए और अंत में विजेता समूह की घोषणा करे।
  6. समय सीमा: पूरी गतिविधि 20-25 मिनट में पूरी हो।

समूह 1 (विपक्ष) के तर्क:

  • व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण जरूरी है क्योंकि गलत विचार समाज में अशांति फैला सकते हैं।
  • बिना नियंत्रण के लोग गलत कामों के बारे में सोच सकते हैं, जैसे चोरी या हिंसा।
  • स्कूल और परिवार में बच्चों के विचारों को सही दिशा देना जरूरी है।
  • अगर हर कोई अपनी मर्जी से सोचे, तो समाज में एकता नहीं रहेगी।
  • नियंत्रण से ही व्यक्ति सही और गलत का अंतर समझ पाता है।

समूह 2 (पक्ष) के तर्क:

  • कल्पना और विचारों को बाँधना गलत है क्योंकि इससे नई खोजें और प्रगति रुक जाएगी।
  • स्वतंत्र विचारों से ही वैज्ञानिकों ने आविष्कार किए, जैसे बिजली या इंटरनेट।
  • हर व्यक्ति की कल्पना उसे खास बनाती है और उसे रोकना उसकी आजादी छीनना है।
  • सपने और विचार हमें बेहतर इंसान बनाते हैं, जैसे महादेवी वर्मा ने कविता में कहा।
  • स्वतंत्र विचार समाज को नई दिशा देते हैं और सुखद भविष्य बनाते हैं।

(ख) विद्यार्थी वाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।
उत्तर: वाद-विवाद का अनुभव
आज हमारी कक्षा में “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसकी कल्पना और विचारों को नहीं” विषय पर वाद-विवाद हुआ। यह बहुत मजेदार और ज्ञानवर्धक अनुभव था। मैं समूह 2 में था, जो विषय के पक्ष में बोला। हमने तर्क दिया कि स्वतंत्र विचार और कल्पना से ही समाज में प्रगति होती है। दूसरा समूह विपक्ष में था और उसने कहा कि विचारों पर नियंत्रण जरूरी है ताकि गलत काम न हों। दोनों समूहों ने जोरदार तर्क दिए। मुझे अपने विचार रखने में बहुत मजा आया और मैंने सीखा कि कैसे अपनी बात को स्पष्ट और आत्मविश्वास से कहना चाहिए। इस गतिविधि से हमें एक-दूसरे के विचार समझने का मौका मिला और यह भी पता चला कि सपनों और विचारों की आजादी कितनी जरूरी है। मैं भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों में हिस्सा लेना चाहूँगा।

देखना-सुनना-समझना…

(क) “धूम गगन में मॅडराता है।”
सुगंध का अनुभव सूंघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं-

  • वर्षा की बूँदों का
  • धुएँ के उड़ने का
  • खेल के रोमांच का

उत्तर: ​​​​

  • वर्षा की बूँदों का अनुभव:
    • मैं उन्हें बाहर ले जाऊँगा और बारिश की बूँदों को उनके हाथों या चेहरे पर छूने दूँगा।
    • बारिश की आवाज सुनवाऊँगा, जैसे छत पर टप-टप की ध्वनि।
    • मैं बोलकर बताऊँगा कि बारिश कैसे ठंडी और ताज़ा लगती है, जैसे- “बूँदें छोटी-छोटी और ठंडी हैं, जैसे पानी के छोटे मोती।”
  • धुएँ के उड़ने का अनुभव:
    • मैं उन्हें धुएँ की गंध सूँघने दूँगा, जैसे अगरबत्ती या लकड़ी जलने की गंध।
    • हवा में धुएँ की हल्की गर्मी को उनके हाथों से छूने दूँगा।
    • मैं बताऊँगा कि धुआँ हल्का और हवा में ऊपर उठता हुआ लगता है, जैसे बादल।
  • खेल के रोमांच का अनुभव:
    • मैं उन्हें खेल की आवाजें सुनवाऊँगा, जैसे दर्शकों की तालियाँ या खिलाड़ियों की चीख-पुकार।
    • खेल के दौरान हवा में गेंद की गति को छूने दूँगा, जैसे फुटबॉल को हल्के से छूना।
    • मैं बोलकर खेल का रोमांच बताऊँगा, जैसे- “गेंद तेजी से जा रही है, और सभी जोर से चिल्ला रहे हैं!”

(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव
विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए। दलों के नाम रखें- कल्पना और आकांक्षा।
‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय (हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए। निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।

उत्तर: 
खेल का तरीका:

  1. कक्षा में विद्यार्थियों को दो दलों में बाँटें: कल्पना और आकांक्षा। प्रत्येक दल में बराबर विद्यार्थी हों।
  2. कल्पना दलसे एक विद्यार्थी आएगा और कविता “मत बाँधो” की किसी पंक्ति का भाव मूक अभिनय (हाव-भाव, इशारों) से दिखाएगा। उदाहरण:
    • पंक्ति: “इन सपनों के पंख न काटो”
      अभिनय: विद्यार्थी पक्षी की तरह हाथ फड़फड़ाएगा और फिर कैंची से काटने का इशारा करेगा।
  3. आकांक्षा दल को 30 सेकंड में यह पहचानना होगा कि कौन सी पंक्ति दिखाई जा रही है।
  4. सही उत्तर देने पर आकांक्षा दल को 1 अंक मिलेगा। गलत होने पर कल्पना दल को मौका मिलेगा।
  5. फिर आकांक्षा दल से एक विद्यार्थी अभिनय करेगा और कल्पना दल पहचानेगा।
  6. खेल को 5-6 बार दोहराएँ और सबसे ज्यादा अंक पाने वाला दल जीतेगा।

आपदा प्रबंधन

“अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!”
आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है।

(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि-

  • कहीं अचानक आग लग जाए
  • आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए
  • भूकंप आ जाए

उत्तर: 

  • अचानक आग लग जाए:
    • तुरंत नजदीकी निकास द्वार की ओर जाएँ।
    • नीचे झुककर चलें ताकि धुआँ साँस में न जाए।
    • गीला कपड़ा मुँह पर रखें।
    • चिल्लाकर दूसरों को सावधान करें और शिक्षक की मदद लें।
    • अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का इस्तेमाल करें, अगर जानते हों।
  • क्षेत्र में बाढ़ आ जाए:
    • ऊँचे स्थान पर चले जाएँ, जैसे छत या पहाड़ी।
    • बिजली के उपकरणों से दूर रहें।
    • जरूरी सामान (खाना, पानी, कपड़े) साथ रखें।
    • रेडियो या फोन से समाचार सुनें और बचाव दल की मदद लें।
    • बाढ़ के पानी में न चलें, क्योंकि वह खतरनाक हो सकता है।
  • भूकंप आ जाए:
    • तुरंत मेज या मजबूत फर्नीचर के नीचे छिप जाएँ।
    • सिर को हाथों से ढकें।
    • खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें।
    • भूकंप रुकने तक बाहर न निकलें।
    • खुले मैदान में जाएँ, अगर इमारत से बाहर निकलना सुरक्षित हो।

(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूँगा या करूँगी?” एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
उत्तर: सूची आधारित योजना:

  • भूकंप आने पर
    • घबराऊँगा/घबराऊँगी नहीं।
    • तुरंत किसी मज़बूत मेज़ या टेबल के नीचे बैठ जाऊँगा/जाऊँगी।
    • खिड़की, शीशे और ऊँची अलमारियों से दूर रहूँगा/रहूँगी।
    • झटके रुकने तक सुरक्षित स्थान पर ही रहूँगा/रहूँगी।
  • आग लगने पर
    • तुरंत पास के बड़ों या शिक्षकों को बताऊँगा/बताऊँगी।
    • फायर ब्रिगेड (101) पर कॉल करूँगा/करूँगी।
    • धुएँ से बचने के लिए रूमाल या कपड़े से नाक ढकूँगा/ढकूँगी।
    • लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करूँगा/करूँगी, सीढ़ियों से बाहर निकलूँगा/निकलूँगी।
  • बाढ़ आने पर
    • ऊँचे स्थान पर चला जाऊँगा/जाऊँगी।
    • बिजली के उपकरण और स्विच से दूर रहूँगा/रहूँगी।
    • पानी में चलने से बचूँगा/बचूँगी, जब तक बहुत ज़रूरी न हो।
  • तूफ़ान या चक्रवात आने पर
    • घर के अंदर सुरक्षित स्थान पर रहूँगा/रहूँगी।
    • दरवाज़े और खिड़कियाँ बंद रखूँगा/रखूँगी।
    • बैटरी वाला टॉर्च और रेडियो पास में रखूँगा/रखूँगी।

चित्र आधारित योजना

  • ज़रूरी नंबर पर कॉल करो
  • खिड़कियों से दूर रहो
  • सीढ़ियों से बाहर निकलो, लिफ्ट मत लो
  •  टॉर्च और ज़रूरी सामान पास रखो

शिल्प

“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!”
हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए-
उत्तर: 

(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई वेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों, उसके विषय में लिखिए।
https://nationalcraftsmuseum.nic.in/

उत्तर: हस्तशिल्प कार्यशाला की रिपोर्ट
रिपोर्ट: 
मैंने अपने परिवार के साथ पास के एक हस्तशिल्प कार्यशाला का भ्रमण किया, जहाँ मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं। यह कार्यशाला बहुत सुंदर थी। वहाँ कारीगर मिट्टी को चाक पर घुमाकर बर्तन, दीये और मूर्तियाँ बना रहे थे। मैंने देखा कि वे मिट्टी को गीला करके उसे नरम करते हैं, फिर चाक पर आकार देते हैं। एक कारीगर ने मुझे चाक चलाना भी सिखाया। यह बहुत मजेदार था, लेकिन मुश्किल भी। मैंने सीखा कि मिट्टी के बर्तन बनाने में धैर्य और कौशल चाहिए। कारीगरों ने बताया कि यह शिल्प कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। मैंने वहाँ से एक छोटा मिट्टी का दीया खरीदा। यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय
रिपोर्ट: 
मैंने राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की वेबसाइट देखी। मुझे मधुबनी चित्रकला सबसे अच्छी लगी। ये चित्र रंग-बिरंगे और बहुत सुंदर हैं। इनमें प्रकृति, जानवर और गाँव की जिंदगी को दिखाया जाता है। मुझे एक चित्र में सूरज और पक्षियों का डिज़ाइन बहुत पसंद आया, क्योंकि यह रंगों से भरा था और देखकर खुशी हुई। मधुबनी कला बिहार की है और इसे बनाने में बहुत मेहनत लगती है। यह कला हमारी संस्कृति को दिखाती है और मुझे गर्व महसूस हुआ।

झरोखे से

अभी आपने जो कविता पढ़ी उसे लिखा है महादेवी वर्मा ने। अब पढ़िए इन्हीं के द्वारा लिखी एक कहानी गिल्लू’ का अंश-

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरी पढ़िए और अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
उत्तर: 
मैंने पुस्तकालय से ‘गिल्लू’ कहानी पढ़ी। यह एक छोटे गिलहरी (गिल्लू) की कहानी है, जिसे महादेवी वर्मा ने पाला। गिल्लू बहुत चंचल और प्यारा था। वह महादेवी जी की थाली से चावल खाता था और काजू उसका पसंदीदा खाना था। मेरे दोस्तों के साथ चर्चा में हमने बताया कि यह कहानी हमें पशु-पक्षियों से प्यार करना सिखाती है। गिल्लू का महादेवी जी के साथ लगाव हमें यह भी सिखाता है कि जानवर भी परिवार की तरह हो सकते हैं। हम सभी को यह कहानी बहुत पसंद आई।

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से आप महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं के विषय में जान, समझ सकते हैं-

  • महादेवी वर्मा कवचित्री जीवन और लेखन हिंदी | भाग – 1
    https://www.youtube.com/watch?v=stQL9KgVZHg
  • महादेवी वर्मा कवयित्री जीवन और लेखन हिंदी | भाग – 2
    https://www.youtube.com/watch?v=_uqB5M9ZX60
  • कविता मंजरी, बारहमासा
    https://www.youtube.com/watch?v=bjgVp0W-Muw
  • गिल्लू – महादेवी वर्मा
    https://www.youtube.com/watch?v=uxpOlfd05K8
  • महादेवी वर्मा, भारतीय कवयित्री
    https://www.youtube.com/watch?v=mWwpjfSYNT4

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं दिए गए यूट्यूब लिंक का उपयोग कर आप महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं के बारे में और जान सकते हैं।

6. एक टोकरी भर मिट्टी – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर के सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक सही उत्तर हो सकते हैं।

1. ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?

  • झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
  • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी
  • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था *
  • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था

उत्तर: वह अहाते का विस्तार करना चाहता था
ज़मींदार साहब अपने महल के आस-पास की जगह (अहाता) बढ़ाना चाहते थे। इसलिए झोंपड़ी हटानी थी, ताकि जगह मिले।

2. वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी?

  • क्रोध और झगड़ा करके
  • अदालत से अनुमति लेकर
  • विनती और नम्रता से *
  • चुपचाप उठाकर ले गई

उत्तर: विनती और नम्रता से
वृद्धा ने बड़ी नम्रता और विनती करके अनुमति मांगी, क्योंकि वह डरती थी और सम्मानपूर्वक बात करना चाहती थी।

3. वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भावना को दर्शाता है?

  • दया
  • लगाव *
  • गुस्सा
  • डर

उत्तर: लगाव
पोती अपने घर से बहुत जुड़ी थी। उसने झोंपड़ी को अपना घर माना था, इसलिए उसका व्यवहार लगाव यानी प्यार और जुड़ाव दिखाता है।

4. कहानी का अंत कैसा है?

  • दुखद
  • सुखद *
  • प्रेरणादायक *
  • सकारात्मक

उत्तर: सुखद, प्रेरणादायक
अंत में जमींदार साहब ने अपनी गलती मान ली और झोंपड़ी वापस दे दी। यह एक खुशहाल और प्रेरणादायक अंत है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हमने अपने दोस्तों से चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:

  • झोंपड़ी हटाने की वजह अहाते का विस्तार था क्योंकि ज़मींदार अपने महल को बड़ा करना चाहता था।
  • वृद्धा ने बड़ी नम्रता से अनुमति मांगी ताकि झोंपड़ी की मिट्टी ले जा सके।
  • पोती का व्यवहार लगाव दिखाता है क्योंकि वह अपने घर और झोंपड़ी से जुड़ी है।
  • कहानी का अंत सुखद और प्रेरणादायक है क्योंकि जमींदार ने अपनी गलती स्वीकार की और झोंपड़ी लौटाई।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।
उत्तर: 


(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर: मैं अपने मित्रों के साथ अपने उत्तर मिलाऊंगा और चर्चा करूंगा। मैंने निष्कर्ष इस तरह चुने हैं:

  1. “अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी” के लिए “वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी” चुना, क्योंकि कहानी में साफ है कि पोती वृद्धा का एकमात्र सहारा है।
  2. “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया” के लिए “ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया” चुना, क्योंकि जमींदार ने पैसे से वकीलों की मदद ली थी।
  3. “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है” के लिए “वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर जमींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया” चुना, क्योंकि वृद्धा ने मिट्टी से जमींदार को सबक सिखाया।
  4. “जमींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे” के लिए “धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था” चुना, क्योंकि जमींदार का घमंड उसे गलत राह पर ले गया।
  5. “कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी” के लिए “अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर जमींदार ने क्षमा माँगी” चुना, क्योंकि जमींदार को अपनी गलती का एहसास हुआ।
  6. “उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” के लिए “वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है” चुना, क्योंकि यह जमींदार को सोचने पर मजबूर करता है।
  7. “कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ” के लिए “वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया” चुना, क्योंकि वृद्धा ने शांति से मदद मांगी।
  8. “उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी” के लिए “झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई” चुना, क्योंकि वृद्धा की यादें उसे रोने पर मजबूर कर देती हैं।

मैं अपने मित्रों से पूछूंगा कि उन्होंने क्या चुना और क्यों। अगर उनका जवाब अलग है, तो हम साथ में सोचेंगे कि कौन-सा निष्कर्ष कहानी से ज्यादा मेल खाता है।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
उत्तर: मेरा अर्थ: मुझे लगता है कि वृद्धा ने यह पंक्ति जमींदार को समझाने के लिए कही। वह कह रही है कि अगर एक टोकरी मिट्टी भी जमींदार नहीं उठा सकते, तो पूरी झोंपड़ी का भार, जो हजारों टोकरियों के बराबर है, वे जिंदगी भर कैसे संभाल पाएंगे। इसका मतलब है कि जमींदार ने गलती की है और उसे यह भार उठाने का हक नहीं है। यह वृद्धा का एक चतुर तरीका था जमींदार को अपनी गलती का एहसास कराने का।
समूह में साझा करने के विचार: मैं अपने समूह में कहूंगा कि यह पंक्ति दिखाती है कि वृद्धा ने जमींदार को सबक सिखाया। हम बात करेंगे कि क्या यह तरीका सही था और क्या जमींदार को सचमुच समझ आया।

(ख) “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
उत्तर: मेरा अर्थ: मुझे लगता है कि पहले जमींदार को गुस्सा आया क्योंकि वह वृद्धा को पसंद नहीं करते थे। लेकिन जब वृद्धा ने हाथ जोड़कर और पैरों पर गिरकर मदद मांगी, तो जमींदार का दिल पिघल गया। उन्होंने खुद टोकरी उठाने की कोशिश की, लेकिन वह बहुत भारी थी और वे नहीं उठा सके। इसका मतलब है कि जमींदार को अपनी ताकत और गलती का अहसास हुआ।
समूह में साझा करने के विचार: मैं अपने समूह में कहूंगा कि यह पंक्ति दिखाती है कि जमींदार में थोड़ी अच्छाई थी, जो वृद्धा की विनती से जगी। हम चर्चा करेंगे कि क्या जमींदार का मन बदलना सही था और क्या उन्हें वृद्धा की मदद करनी चाहिए थी।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
उत्तर: 
मेरे विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह इसलिए प्रभावशाली है क्योंकि उसने अपनी समझदारी और धैर्य से जमींदार को अपनी गलती का एहसास कराया। उसने मिट्टी की टोकरी का इस्तेमाल करके जमींदार को सिखाया कि अन्याय का बोझ उठाना आसान नहीं है।

(ख) वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
उत्तर: 
वृद्धा की पोती ने खाना छोड़ दिया था क्योंकि उसे अपनी पुरानी झोंपड़ी की बहुत याद आती थी। जब झोंपड़ी छिन गई, तो वह उदास हो गई और कहा कि वह सिर्फ अपने घर की रोटी खाएगी। इसलिए उसने खाना-पीना बंद कर दिया।

(ग) ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया?
उत्तर: 
जमींदार ने वकीलों की मदद से अदालत में केस लड़ा। उसने वकीलों को पैसे देकर उनकी थैली गरम की और कानूनी चाल चलकर वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।

(घ) “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…”। द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है? यहाँ जमींदार
उत्तर: 
जमींदार का सिर हिलाना इसका मतलब है कि उन्होंने वृद्धा को बोलने की इजाजत दे दी। यह दिखाता है कि वह उसकी बात सुनने को तैयार था, हालांकि पहले वह नाराज था। यह एक छोटा सा संकेत था कि जमींदार का मन थोड़ा नरम हो रहा था।

(ङ) “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर:
 पहले जमींदार का व्यवहार अहंकारी और कठोर था। वह वृद्धा को जबरदस्ती झोंपड़ी से निकालना चाहता था और उसकी परवाह नहीं करता था। लेकिन जब उसने खुद टोकरी उठाने की कोशिश की और असफल रहा, तो उसका मन बदलने लगा। उसे दया आई और वह वृद्धा की मदद करने को तैयार हुआ, जो उसके व्यवहार में नरमी लाया।

(च) “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया?
उत्तर: 
जमींदार ने यह किया क्योंकि उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। वृद्धा की बातों और टोकरी की घटना ने उसे समझाया कि उसका अन्याय सही नहीं था। पछतावा होने पर उसने वृद्धा से माफी मांगी और झोंपड़ी लौटा दी।

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि वृद्धा की पोती जमींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
उत्तर: 
अगर वृद्धा की पोती जमींदार से बात करती, तो शायद वह कहती, “महाराज, मेरी दादी की झोंपड़ी हमारा घर है। वहाँ मेरे माता-पिता की यादें हैं। कृपया हमें वहाँ रहने दें, वरना मैं और मेरी दादी दुखी रहेंगी।” वह अपनी उदासी और प्यार से जमींदार का मन बदलने की कोशिश करती।

(ख) यदि आप जमींदार की जगह होते तो क्या करते?
उत्तर: 
अगर मैं जमींदार होता, तो मैं वृद्धा से प्यार से बात करता। मैं उसकी झोंपड़ी न लेता और उसे वहीं रहने देता। अगर मुझे जगह चाहिए होती, तो मैं कहीं और बनवाता, ताकि वृद्धा और उसकी पोती को दुख न हो।

(ग) जमींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
उत्तर: 
जमींदार को टोकरी नहीं उठा पाया होगा क्योंकि वह बहुत भारी थी। शायद उसने पहले कभी इतना मेहनत का काम नहीं किया था, और उसका अहंकार उसे कमजोर बना रहा था। यह भी हो सकता है कि मिट्टी का वजन उसकी ताकत से ज्यादा था।

(घ) “झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है…”। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेत- मिट्टी किस बात का प्रतीक हो सकती है? मिट्टी के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)
उत्तर: 
यहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं है, बल्कि कुछ और भी छिपा है। मिट्टी वृद्धा की यादों, दुखों और झोंपड़ी के महत्व का प्रतीक बनती है। वृद्धा कहना चाहती है कि जमींदार ने उसका घर छीना, जो उसके लिए बहुत कीमती था, और इसका बोझ जमींदार कभी नहीं उठा सकता।

(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
उत्तर: 
उस समय भारत में स्त्रियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था:

  • विधवा होने पर सहारा न मिलना
  • संपत्ति पर अधिकार न होना
  • आर्थिक रूप से निर्भर रहना
  • समाज में उनकी भावनाओं की अनदेखी होना
  • अकेले बच्चों का पालन-पोषण करना कठिन होना

बदली कहानी

कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-

  • यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता

उत्तर: अगर जमींदार टोकरी उठाने से मना कर देता, तो वह गुस्से में वृद्धा को वहाँ से भगा देता। वृद्धा उदास होकर चली जाती और अपनी पोती को मिट्टी नहीं दे पाती। पोती और दुखी होकर बीमार पड़ जाती। शायद पड़ोस के लोग जमींदार की बुराई करते और उसे दबाव में झोंपड़ी वापस देनी पड़ती।

  • यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता

उत्तर: अगर जमींदार टोकरी उठा लेता, तो वह अपनी ताकत दिखाने के लिए खुश होता। लेकिन वृद्धा कहती कि अगर एक टोकरी का बोझ इतना भारी है, तो झोंपड़ी का भार कैसे संभालेगा? जमींदार शर्मिंदा होता और सोचता कि उसने गलत किया। अंत में वह वृद्धा से माफी मांगकर झोंपड़ी लौटा देता।

  • यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता

उत्तर: अगर जमींदार मिट्टी देने से मना कर देता, तो वृद्धा रोती हुई चली जाती। पोती का हाल और बिगड़ता और वह बीमार पड़ जाती। वृद्धा को पड़ोसियों से मदद मांगनी पड़ती। शायद लोग जमींदार के खिलाफ शिकायत करते और उसे मजबूरी में मिट्टी देनी पड़ती।

  • यदि ज़मींदार एक स्त्री होती

उत्तर: अगर जमींदार एक स्त्री होती, तो शायद वह वृद्धा की दुखभरी बात सुनकर जल्दी दया दिखाती। वह टोकरी उठाने की कोशिश करती और असफल होने पर वृद्धा की मदद करती। हो सकता है वह झोंपड़ी वापस दे देती, क्योंकि स्त्री होने के नाते उसे वृद्धा की भावनाएँ समझ आतीं।

  • यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोपड़ी वापस माँगती

उत्तर: अगर पोती जमींदार से झोपड़ी माँगती, तो वह रोते हुए कहती, “महाराज, यह मेरा घर है, मेरे माता-पिता की यादें यहाँ हैं। कृपया इसे हमें लौटा दें।” जमींदार उसकी मासूमियत देखकर पिघल जाता और झोंपड़ी वापस दे देता।

अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
उत्तर: हमने समूह में “यदि पोती जमींदार से अपनी झोपड़ी वापस माँगती” स्थिति चुनी। हमने मिलकर इस बदली हुई कहानी को लिखा:
एक दिन वृद्धा की पोती जमींदार के पास गई। वह रोते हुए बोली, “महाराज, यह झोपड़ी हमारा घर है। मेरे माता-पिता यहाँ मरे, और मेरी दादी का सहारा यही है। कृपया इसे हमें लौटा दें, वरना मैं और दादी दुखी रहेंगी।” जमींदार ने उसकी आँखों में आँसू देखे और उसका छोटा चेहरा देखकर दया आ गई। वह बोला, “बच्ची, तुम सही कहती हो। मैंने गलती की।” फिर उसने वृद्धा को बुलाया और कहा, “मैं तुम्हारी झोपड़ी वापस देता हूँ। तुम यहाँ खुश रहो।” वृद्धा और पोती खुशी से झोपड़ी में लौट आईं और फिर से अपने घर में रोटी पकाने लगीं। जमींदार ने सीखा कि बच्चों और बूढ़ों का दुख देखकर मन बदलना चाहिए।
हमने सोचा कि पोती की मासूमियत जमींदार को जल्दी समझा सकती थी, और यह कहानी का सुखद अंत होता।

‘कि’ और ‘की’ का उपयोग

इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-

अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए-
उत्तर:

मुहावरे

बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”

(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: 

  • बाल की खाल निकालने वाले का मतलब है कि वकील बहुत छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते थे।
  • थैली गरम कर का मतलब है कि जमींदार ने वकीलों को बहुत सारा पैसा दिया।

(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।

  • बाल बाँका न होना – कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।

उत्तर: वृद्धा की झोंपड़ी में आग लगने वाली थी, लेकिन बारिश की वजह से बाल बाँका न हुआ।

  • बाल बराबर – बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।

उत्तर: जमींदार की सोच में बाल बराबर दया थी, जो बाद में दिखाई दी।

  • बाल बराबर फर्क होना – ज़रा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना।

उत्तर: वृद्धा और जमींदार की सोच में बाल बराबर फर्क था, लेकिन दोनों का दुख एक जैसा था।

  • बाल-बाल बचना- कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।

उत्तर: जमींदार की गलती से वृद्धा को झोंपड़ी खोने से बाल-बाल बचा

काल

नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-

  • इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी
  • इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई
  • इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ

यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं।
काल के तीन भेद होते हैं-

  1. भूतकाल – यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
  2. वर्तमान काल – यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
  3. भविष्य काल – यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।

नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए-

(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली
उत्तर: 

  • वर्तमान काल: वह गिड़गिड़ाकर बोल रही है।
  • भविष्य काल: वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।

(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी
उत्तर: 

  • वर्तमान काल: श्रीमान् आज्ञा दे रहे हैं।
  • भविष्य काल: श्रीमान् आज्ञा देंगे।

(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी
उत्तर: 

  • वर्तमान काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही है।
  • भविष्य काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बहेगी।

(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई
उत्तर: 

  • वर्तमान काल: ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हो रही है।
  • भविष्य काल: ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी।

(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी
उत्तर: 

  • वर्तमान काल: वे वृद्धा से क्षमा माँग रहे हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे रहे हैं।
  • भविष्य काल: वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस देंगे।

वचन की पहचान

“उनके मन में कुछ दया आ गई।”
“उनकी आँखें खुल गईं।”
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।
आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए-

​उत्तर: 

कहानी की रचना

“यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो…”
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए….’ का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों और प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है। अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।

(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर: 

  • प्रश्नोत्तरी शैली का प्रयोग
  • वर्णनात्मकता से दृश्य सजीव बनाना
  • गहरी भावनाओं का चित्रण (करुणा, ममता, पछतावा)
  • संवादों के माध्यम से कहानी को आगे बढ़ाना
  • नाटकीय मोड़ों का समावेश
  • पात्रों का स्पष्ट और प्रभावी चित्रण
  • अधूरे वाक्यों से रहस्य और जिज्ञासा उत्पन्न करना
  • सामाजिक संदेश देना

(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-

​उत्तर: 

शब्दकोश का उपयोग

आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए-

उत्तर: 

भावों की पहचान

“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…”
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-

उत्तर: 

वाक्य विस्तार

‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं-
‘वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।’
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे-
‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।’
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।

1. एक झोंपड़ी थी।
उत्तर: गाँव के किनारे पीपल के पेड़ के नीचे सूखी घास और मिट्टी से बनी एक छोटी-सी झोंपड़ी थी।

2. श्रीमान् टहल रहे थे।
उत्तर: श्रीमान् हाथ में छड़ी लिए आँगन में इधर-उधर टहलते हुए गहरी सोच में डूबे हुए थे।

3. वह खाने लगेगी।
उत्तर: अब जब उसे विश्वास हो गया कि कोई उसका साथ देगा, वह धीरे-धीरे रोटी खाने लगेगी।

4. वृद्धा भीतर गई।
उत्तर: वृद्धा काँपते कदमों से झोंपड़ी के अँधेरे हिस्से में भीतर गई और टोकरी एक कोने में रख दी।

5. आगे बढ़े।
उत्तर: ज़मींदार साहब थोड़ा रुककर वृद्धा की ओर देखे और फिर धीमे-धीमे उसकी ओर आगे बढ़े।

संवाद फोन पर

(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
उत्तर: 
ज़मींदार: हेलो बेटा, मैं ज़मींदार साहब बोल रहा हूँ।
पोती: जी, कहिए।
ज़मींदार: देखो, तुम्हें इतने दिन से भूखा रहना ठीक नहीं है।
पोती: लेकिन दादी के साथ जो हुआ, उससे मेरा मन नहीं है खाने का।
ज़मींदार: मैं समझता हूँ, मुझसे गलती हुई है, पर अब सब ठीक हो जाएगा।
पोती: सच में?
ज़मींदार: हाँ, मैं वादा करता हूँ, दादी की झोंपड़ी पर कोई हक़ नहीं करूँगा।
पोती: अगर ऐसा है, तो मैं खाना खा लूँगी।
ज़मींदार: यही समझदारी है बेटा, अब दादी को चिंता नहीं होगी।

(ख) कल्पना कीजिए कि ज़मींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
उदाहरण-

  • मित्र – इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है?
  • ज़मींदार – मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।

उत्तर: मित्र: यार, वो वृद्धा की झोंपड़ी मत हड़पना, गलत बात है।
ज़मींदार: लेकिन उसकी ज़मीन बहुत काम की है।
मित्र: इंसानियत ज़्यादा काम की होती है, पैसा तो आता-जाता है।
ज़मींदार: मुझे लगता है तुम सही कह रहे हो…
मित्र: हाँ, दादी को उनकी जगह रहने दो, दुआ मिलेगी।
ज़मींदार: ठीक है, मैं झोंपड़ी नहीं लूँगा।

पोती की भावनाएँ

“मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।”

(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर: जिलाधिकारी को पत्र
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
[शहर का नाम]
विषय: मेरे घर को बचाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं [अपना नाम] आपकी क्षेत्र की निवासी हूँ। मेरा घर एक छोटी-सी झोंपड़ी है जिसमें मैं अपनी दादी के साथ रहती हूँ। यह घर मेरे जीवन की सबसे कीमती पूँजी है। हाल ही में हमारे गाँव के ज़मींदार साहब ने हमारी झोंपड़ी पर अपना हक़ जताना शुरू कर दिया है।
महोदय, इस घर में मेरे माता-पिता की यादें बसी हैं। यहीं मेरा बचपन बीता है और यहीं मेरी दादी ने मुझे पाला-पोसा है। यदि यह घर हमसे छिन गया, तो हम बेसहारा हो जाएँगे।
आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया हमारी झोंपड़ी को ज़मींदार से बचाने की कृपा करें। हमें न्याय और अपने घर में रहने का अधिकार दिलाएँ।
सधन्यवाद,
भवदीया
[नाम]
[गाँव का नाम]
तिथि: [तारीख]

(ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए-
उत्तर: दैनंदिनी (डायरी)
मेरी दैनंदिनी

  • 2 मई – आज दादी घर लौटीं तो बहुत परेशान थीं। चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं। मैंने कई बार पूछा, तब उन्होंने बताया कि ज़मींदार साहब हमारी झोंपड़ी लेने की सोच रहे हैं। यह सुनकर मेरा दिल धक से रह गया।
  • 3 मई – आज मैं सुबह से चुप हूँ। खाना-पीना अच्छा नहीं लग रहा। यह घर मेरी दुनिया है। अगर यह चला गया तो हम कहाँ जाएँगे? दादी मुझे समझाती रहीं, पर मैं जानती हूँ, उनके दिल में भी डर है।
  • 4 मई – मैंने निश्चय कर लिया है कि अपनी झोंपड़ी को बचाने के लिए जो भी करना पड़े, करूँगी। मैंने जिलाधिकारी को पत्र लिखने का सोचा है। उम्मीद है कोई तो हमारी आवाज़ सुनेगा।
  • 5 मई – आज मन में थोड़ी आशा जगी है। सुना है कि गाँव के लोग भी हमारे साथ हैं। शायद मिलकर हम अपना घर बचा लें।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
उत्तर: 
मेरा घर मेरे लिए सिर्फ़ ईंट और दीवारों का बना ढाँचा नहीं, बल्कि मेरी यादों और खुशियों का खज़ाना है। यहाँ मेरी हर हँसी, हर आँसू, और हर त्योहार की महक बसी हुई है। बचपन में दीवारों पर बनाई गई मेरी रंग-बिरंगी चित्रकारी, आँगन में खेली गई गिल्ली-डंडा, और बरामदे में बैठकर दादी की कहानियाँ सुनना — यह सब मेरे घर को मेरे जीवन का सबसे प्रिय स्थान बनाता है।

(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: 
एक बार हमारे स्कूल की लाइब्रेरी में एक पुरानी किताब थी, जिसमें मेरी पसंदीदा कहानियाँ थीं। मैं हर दिन उसे पढ़ने जाती थी। बाद में वह किताब नवीनीकरण के कारण लाइब्रेरी से हटा दी गई। उस दिन मुझे सचमुच बहुत दुख हुआ, जैसे अपना कोई दोस्त खो दिया हो।

(ग) कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
उत्तर: 
एक बार हमारे पड़ोस में एक अंकल ने गुस्से में आकर अपने दोस्त से बहुत बुरी तरह बातें कर दीं। बाद में जब गुस्सा शांत हुआ, तो उन्हें अपने शब्दों पर पछतावा हुआ। वे तुरंत दोस्त के घर गए, माफ़ी माँगी और फिर से दोस्ती कायम हो गई। इस पश्चाताप का परिणाम यह निकला कि दोनों के रिश्ते पहले से भी मजबूत हो गए।

(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
उत्तर: एक बार मैंने अपनी छोटी बहन से गुस्से में उसका खिलौना छीन लिया और तोड़ दिया। बाद में जब वह रोने लगी तो मुझे बहुत पछतावा हुआ। मैंने अपनी बचत से उसे नया खिलौना खरीदा और उससे माफ़ी माँगी। उस दिन मैंने सीखा कि गुस्से में किया गया काम अक्सर हमें ही दुखी कर देता है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में धैर्य रखना ज़रूरी है।

न्याय और समता

कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।

(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
उत्तर: अन्याय का उदाहरण:
मैंने समाचार पत्र में पढ़ा था कि एक किसान की ज़मीन पर दबंगों ने अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया। किसान ने पुलिस और प्रशासन से मदद माँगी, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और दबाव के कारण उसे अपनी ज़मीन वापस पाने में कई साल लग गए। यह देखकर लगा कि लालच और शक्ति का गलत इस्तेमाल किसी की मेहनत और अधिकार छीन सकता है।

(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर: ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए मैं और मेरे आस-पास के लोग यह कर सकते हैं:

  • पीड़ित व्यक्ति का साथ देकर उसे कानूनी सलाह और मदद दिलाना।
  • इस मामले को मीडिया और सोशल मीडिया पर उठाकर लोगों का ध्यान दिलाना।
  • सामूहिक रूप से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मिलकर न्याय की माँग करना।
  • अपने अधिकारों और कानून की जानकारी रखना ताकि किसी के साथ अन्याय न हो सके।

(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर: मेरे अनुसार, असली ताकत वह है जो किसी को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सहारा देने में काम आए। दया से हम लोगों का विश्वास जीतते हैं और न्याय से उनका सम्मान। जो व्यक्ति या समाज दूसरों के साथ निष्पक्षता और करुणा से व्यवहार करता है, वही लंबे समय तक मजबूत और सम्मानित बना रहता है। शक्ति का अर्थ सिर्फ बल या धन नहीं, बल्कि इंसानियत और न्यायप्रियता है।

घर-घर की कहानी

क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।

उत्तर: मेरे घर की कहानी
मैंने अपनी दादी से बात की। उनका बचपन का घर गाँव में था। वह घर लकड़ी और ईंट से बना था, जो 1945 में बनाया गया था। दादाजी और दादी ने मिलकर घर बनाने में बहुत मेहनत की थी। उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार वालों की मदद ली थी।
हमारा आज का घर शहर में है। दादी यहाँ 1990 से रह रही हैं। दादाजी नौकरी के कारण शहर आए और घर बनाया। पहले वे किराए पर रहते थे। अब हम सब इस घर में खुश रहते हैं।
कक्षा में मैंने अपनी यह कहानी सुनाई। सबकी कहानियाँ भी बहुत अच्छी थीं।

न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता

“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।”
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उदाहरण:
सार्वजनिक शिकायत सुविधा – भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https://pgportal.gov.in
जनसुनवाई – प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभकिया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
https://jansunwai.up.nic.in/
सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ- भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है-
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
उत्तर: कहानी “एक टोकरी भर मिट्टी” में जमींदार ने वकीलों को पैसे देकर वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया। यह अन्याय था। ऐसे अन्याय से बचने के लिए भारत में कई सरकारी सुविधाएँ हैं, जिनके बारे में जानना और दूसरों को बताना जरूरी है। 
यहाँ कुछ आसान तरीके बताए गए हैं:

  • सार्वजनिक शिकायत सुविधा (CPGRAMS): अगर कोई सरकारी विभाग गलत करे, जैसे जमीन पर कब्जा या अन्याय, तो आप वेबसाइट pgportal.gov.inपर शिकायत कर सकते हैं।
    • यहाँ केंद्र या राज्य सरकार के खिलाफ शिकायत दर्ज करें।
    • 22 भारतीय भाषाओं में शिकायत लिख सकते हैं।
    • मोबाइल ऐप भी है। रजिस्टर करें, शिकायत डालें और ट्रैक करें।
    • उदाहरण: अगर कोई अफसर रिश्वत माँगे या जमीन का गलत कागज बनाए, यहाँ शिकायत करें।
  • जनसुनवाई (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में jansunwai.up.nic.inपर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
    • मोबाइल OTP से रजिस्टर करें।
    • शिकायत डालें, जैसे जमीन विवाद या सरकारी योजना में गड़बड़ी।
    • स्थिति चेक करें और जवाब न मिले तो रिमाइंडर भेजें।
    • यह हिंदी में है और आसान है।
  • सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ: गरीब, विधवा, या अनाथ लोगों के लिए सरकार की योजनाएँ हैं। eshram.gov.inपर देखें:
    • असंगठित कामगारों को पेंशन, बीमा, और आर्थिक मदद मिलती है।
    • आधार कार्ड और बैंक खाता देकर रजिस्टर करें।
    • उदाहरण: वृद्धा जैसी महिलाओं को पेंशन या बच्चों को शिक्षा मदद मिल सकती है।

दूसरों को जागरूक कैसे करें?

  • घर में बात करें: अपने परिवार को बताएँ कि अगर कोई अन्याय हो, तो डरें नहीं, शिकायत करें।
  • पड़ोसियों को बताएँ: खासकर गरीब या कम पढ़े-लिखे लोगों को इन वेबसाइटों के बारे में समझाएँ।
  • NGO या स्कूल में जागरूकता: स्थानीय NGO या स्कूल में इन सुविधाओं के बारे में पोस्टर या छोटी मीटिंग करें।
  • मोबाइल का उपयोग: जिनके पास इंटरनेट है, उन्हें ऐप डाउनलोड करने में मदद करें।

उदाहरण: अगर कोई वृद्धा जैसी स्थिति में हो, तो उसे pgportal.gov.in पर शिकायत करने को कहें। अगर उत्तर प्रदेश में हैं, तो jansunwai.up.nic.in पर जाएँ। सामाजिक मदद के लिए eshram.gov.in पर रजिस्टर करें।
इन सुविधाओं से गरीब और कमजोर लोग न्याय पा सकते हैं और करुणा का भाव समाज में बढ़ेगा।

आज की पहेली

नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए-
उत्तर: 

खोजबीन के लिए

हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी-पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर: मैंने अपने स्कूल के पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों वाली किताब ढूंढी। हितोपदेश विष्णु शर्मा ने लिखी है, और इसमें पशु-पक्षियों की कहानियां हैं जो हमें जीवन का सबक सिखाती हैं। मैंने इसमें से “धूर्त गीदड़ और हाथी की कहानी” पढ़ी। यह बहुत मजेदार और सीख देने वाली है। अब मैं कक्षा में इसे सुना रहा हूं:
एक जंगल में ब्रह्मवन नाम की जगह पर कर्पूरतिलक नाम का एक बड़ा हाथी रहता था। कुछ गीदड़ों ने उसे देखा और सोचा, “अगर यह हाथी मर जाए तो हम चार महीने तक इसका मांस खाकर जी सकते हैं।” उनमें से एक बूढ़ा और चालाक गीदड़ बोला, “मैं इसे अपनी बुद्धि से मार दूंगा।”
वह गीदड़ हाथी के पास गया और झुककर प्रणाम किया। हाथी ने पूछा, “तुम कौन हो?” गीदड़ ने कहा, “महाराज, जंगल के सभी जानवरों ने पंचायत की है। वे आपको राजा बनाना चाहते हैं क्योंकि आपमें राजा के सब गुण हैं। आप मजबूत, धर्मी और नीति जानने वाले हैं। राजा के बिना जंगल नहीं चल सकता। कृपा करके हमारे साथ चलिए, हम आपको राजतिलक करेंगे।”
हाथी राज्य का लालच में फंस गया और गीदड़ के पीछे-पीछे चल पड़ा। गीदड़ उसे एक गहरी कीचड़ वाली जगह पर ले गया, जहां हाथी फंस गया। हाथी चिल्लाया, “मित्र, अब क्या करूं? मैं मर रहा हूं।” गीदड़ हंसा और बोला, “महाराज, मेरी पूंछ पकड़कर निकलो। तुमने मेरी बात पर विश्वास किया, अब दुष्टों की संगत का फल भोगो।”
फिर सभी गीदड़ों ने मिलकर फंसे हाथी को मार डाला और खा लिया।
इस कहानी से सीख मिलती है कि कभी दुष्टों की बातों में नहीं आना चाहिए, वरना नुकसान होता है। जैसे श्लोक में कहा गया है: “यदासत्संगरहितो भविष्यसि भविष्यसि। तदासज्जनगोष्ठिषु पतिष्यसि पतिष्यसि।” मतलब, अच्छे लोगों की संगत करो तो जीओगे, बुरों की संगत में पड़ोगे तो मरोगे।

5. कबीर के दोहे – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।।” इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?

  • श्रम का महत्व
  • गुरु का महत्व *
  • ज्ञान का महत्व 
  • भक्ति का महत्व

उत्तर: गुरु का महत्व
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि गुरु और भगवान दोनों सामने हों तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें भगवान का रास्ता दिखाते हैं। इसलिए, इस दोहे का मुख्य विषय “गुरु का महत्व” है।

(2) “अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।।” इस दोहे का मूल संदेश क्या है?

  • हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है
  • बारिश और धूप से बचना चाहिए
  • हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है *
  • हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए

उत्तर: हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
कबीर इस दोहे में बताते हैं कि किसी भी चीज की अधिकता (जैसे ज्यादा बोलना, चुप रहना, बारिश या धूप) हानिकारक होती है। इसलिए, जीवन में हर चीज में संतुलन रखना जरूरी है।

(3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर।।” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?

  • समय का सदुपयोग करना
  • दूसरों के काम आना *
  • परिश्रम और लगन से काम करना
  • सभी के प्रति उदार रहना

उत्तर: दूसरों के काम आना
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि केवल बड़ा होना काफी नहीं है, जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा तो है, लेकिन न छाया देता है न फल आसानी से मिलता है। इसका मतलब है कि हमें दूसरों की मदद करने वाला बनना चाहिए।

(4) ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया औरन को सीतल करें आपहुँ सीतल होय।।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

  • लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं
  • दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है *
  • किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है
  • सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है

उत्तर: दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
कबीर कहते हैं कि हमें ऐसी बातें बोलनी चाहिए जो घमंड रहित हों और दूसरों को शांति दें। इससे न केवल सुनने वालों को, बल्कि हमें भी मानसिक शांति मिलती है।

(5) ‘साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पापा जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।।” इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

  • सत्य और झूठ में झूठ में कोई अंतर नहीं होता है
  • सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है *
  • बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं
  • सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है *

उत्तर: सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है, सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि सच्चाई सबसे बड़ी साधना है और झूठ सबसे बड़ा पाप। जो सत्य बोलता है, उसके हृदय में सच्चा ज्ञान और गुरु का वास होता है। इसलिए, “सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं” और “सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है” दोनों सही हैं।

(6) “निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना निर्मल करै सुभाय ।।” यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?

  • आलोचना से बचना चाहिए
  • आलोचकों को दूर रखना चाहिए
  • आलोचकों को पास रखना चाहिए *
  • आलोचकों की निंदा करनी चाहिए

उत्तर: आलोचकों को पास रखना चाहिए
कबीर कहते हैं कि जो हमारी आलोचना करता है, उसे पास रखना चाहिए, क्योंकि वह हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारने में मदद करता है। यह बिना किसी खर्च के हमारे स्वभाव को साफ करता है।

(7) “साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहे थोथा देइ उड़ाय।।” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?

  • मन की कल्पनाओं का
  • मुख-सुविधाओं का
  • विवेक और सूझबूझ का *
  • कठोर और क्रोधी स्वभाव का

उत्तर: विवेक और सूझबूझ का
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि साधु को सूप की तरह होना चाहिए, जो अच्छे दानों को रखता है और भूसी को उड़ा देता है। यहाँ सूप “विवेक और सूझबूझ” का प्रतीक है, जो अच्छे गुणों को अपनाने और बुरे को छोड़ने की क्षमता को दर्शाता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: हमने अपने दोस्तों से चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:

  1. गुरु का महत्व वाला उत्तर इसलिए चुना क्योंकि बिना गुरु के हम भगवान के बारे में नहीं जान सकते।
  2. हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है इसलिए सही है क्योंकि किसी भी चीज़ की अधिकता बुरी होती है।
  3. दूसरों के काम आना वाला उत्तर इसलिए सही है क्योंकि केवल ऊँचा पद पाना काफी नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी होना जरूरी है।
  4. दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है इसलिए सही है क्योंकि मधुर वाणी सबको खुश और शांत रखती है।
  5. सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है सही है क्योंकि सच बोलना सबसे बड़ा धर्म है और यह हमें अच्छा इंसान बनाता है।
  6. सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है सही है क्योंकि सच्चाई अपनाने से मन में ज्ञान और पवित्रता आती है।
  7. आलोचकों को पास रखना चाहिए इसलिए सही है क्योंकि वे हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारते हैं।
  8. विवेक और सूझबूझ सही है क्योंकि जैसे सूप अच्छा रखकर बुरा अलग कर देता है, वैसे ही हमें भी अच्छी बातें अपनानी चाहिए और बुरी छोड़नी चाहिए।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: 


(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए-

उत्तर: 

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय। 
जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।”
उत्तर: अर्थ:
 कबीर कहते हैं कि मन एक पक्षी की तरह है, जो कहीं भी उड़ सकता है। लेकिन जैसी संगति (साथ) में रहता है, वैसा ही परिणाम मिलता है। अगर अच्छे लोगों के साथ रहें, तो अच्छे विचार और फल मिलते हैं। अगर बुरी संगति करें, तो बुरे परिणाम मिलते हैं।
उदाहरण: अगर कोई बच्चा मेहनती दोस्तों के साथ पढ़ता है, तो वह भी मेहनत करता है। लेकिन अगर वह आलसी लोगों के साथ रहे, तो वह आलसी बन सकता है।

(ख) “साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। 
जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।”
उत्तर: अर्थ: 
कबीर कहते हैं कि सच्चाई सबसे बड़ी पूजा है और झूठ सबसे बड़ा पाप। जिसके दिल में सच्चाई होती है, उसे सच्चा ज्ञान अपने आप मिल जाता है।
उदाहरण: अगर कोई सच बोलता है, तो लोग उस पर भरोसा करते हैं, और उसका मन शांत रहता है। लेकिन झूठ बोलने से विश्वास टूटता है और मन बेचैन रहता है।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
उत्तर: 
हाँ, मैं इससे सहमत हूँ। गुरु हमें सही रास्ता दिखाते हैं और भगवान तक पहुँचने का मार्ग बताते हैं। बिना गुरु के हम भगवान को नहीं समझ सकते। उदाहरण के लिए, एक शिक्षक हमें पढ़ाकर अच्छा इंसान बनाता है, जो हमें सही और गलत का ज्ञान देता है। इसलिए गुरु का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है।

(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।

उत्तर: सिर्फ बड़ा या अमीर होना ही काफी नहीं है। इंसान में दूसरों की मदद करने की भावना, दयालुता, और नम्रता होनी चाहिए। जैसे, अगर कोई धनी है, लेकिन दूसरों की मदद नहीं करता, तो उसका बड़ा होना बेकार है। एक अच्छा इंसान वही है जो दूसरों के लिए छाया और फल की तरह काम आए। उदाहरण: एक अमीर व्यक्ति स्कूल बनवाकर बच्चों को पढ़ने में मदद करता है, तो वह सही मायने में बड़ा है।

(ग) “ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: हाँ, शब्दों का प्रभाव दूसरों और खुद पर भी पड़ता है। अगर हम अच्छे और शांत शब्द बोलते हैं, तो दूसरों को सुख मिलता है और हमारा मन भी शांत रहता है।
उदाहरण: एक बार मैंने अपने दोस्त को गुस्से में कड़वी बात कह दी, तो वह उदास हो गया और मुझे भी बुरा लगा। लेकिन जब मैंने माफी माँगी और प्यार से बात की, तो हम दोनों खुश हुए। इससे मुझे समझ आया कि अच्छे शब्द सबके लिए अच्छे हैं।

(ङ) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय ।।” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: संगति का हमारे विचारों और कामों पर बहुत असर पड़ता है। अच्छी संगति से अच्छे विचार आते हैं और बुरे लोग हमें गलत रास्ते पर ले जा सकते हैं।
उदाहरण: मेरा एक दोस्त हमेशा किताबें पढ़ता था और मुझे भी पढ़ने की सलाह देता था। उसकी संगति से मैंने पढ़ाई में मेहनत शुरू की और मेरे नंबर अच्छे आए। लेकिन एक बार मैं कुछ आलसी बच्चों के साथ रहा, तो मेरा पढ़ाई में मन नहीं लगा।

दोहों की रचना

“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। 
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूपा।।”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे- दोहों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक-समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।

(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें –

(1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे- राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
उत्तर: 
एक ही अक्षर से शुरू होने वाले शब्द:

  • “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” (साँच और झूठ में ‘स’ और ‘झ’ अक्षर से शुरू।)
  • “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” (साधू और सूप में ‘स’ अक्षर।)

(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (जैसे- बार-बार)
उत्तर:  
एक शब्द दो बार आया:

  • “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” (बराबर दो बार।)
  • “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” (अति दो बार।)

(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे- जल, जाल) एक ही पंक्ति में आए हैं।
उत्तर: 
लगभग एक जैसे शब्द (मात्रा का अंतर):

  • “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” (साँच और झूठ में मात्रा का अंतर।)
  • “सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।” (सार और थोथा।)

(4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों (जैसे- अच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
उत्तर: 
विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग:

  • “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” (साँच और झूठ।)
  • “सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।” (सार और थोथा।)

(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है। (जैसे- दूध जैसा सफेद)
उत्तर: 
तुलना:

  • “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” (साधु की तुलना सूप से।)
  • “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” (मन की तुलना पक्षी से।)

(6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (जैसे- मुख चंद्र है)
उत्तर: 
कोई अन्य नाम देना:

  • “गुरु गोविंद दोऊ खड़े…” (भगवान को गोविंद नाम।)
  • “जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।” (ज्ञान को गुरु नाम।)

(7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (जैसे- ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप’)
उत्तर: 
शब्द की वर्तनी में अंतर: “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” (‘चुप’ की जगह ‘चूप’।)

(8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
उत्तर: उदाहरण द्वारा समझाना:

  • “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” (खजूर का पेड़ उदाहरण।)
  • “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” (सूप का उदाहरण।)

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर: इन विशेषताओं को अपने समूह में बनाई गई सूची के साथ कक्षा में साझा करें। सभी दोस्तों के साथ मिलकर इन दोहों की और विशेषताएँ ढूँढें और चर्चा करें कि ये दोहे हमें क्या सिखाते हैं।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागों पाँया”

  • यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?

उत्तर: मैं पहले गुरु को प्रणाम करता क्योंकि गुरु ही हमें भगवान का रास्ता दिखाते हैं। बिना गुरु के हम भगवान को नहीं समझ सकते। गुरु का सम्मान करना इसलिए जरूरी है क्योंकि वे हमें सही मार्ग दिखाते हैं।

  • यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?

उत्तर: अगर गुरु या शिक्षक न होते, तो हमें सही-गलत का ज्ञान नहीं मिलता। हम गलत रास्ते पर जा सकते थे और अच्छा जीवन जीने का तरीका नहीं सीख पाते। समाज में अज्ञान और भटकाव बढ़ जाता।

(ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।”

  • यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तर: बहुत ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति दूसरों को परेशान कर सकता है और लोग उससे दूरी बना सकते हैं। बहुत चुप रहने वाला व्यक्ति अपनी बात नहीं कह पाता, जिससे उसकी जरूरतें या समस्याएँ छिपी रहती हैं। दोनों ही स्थिति में रिश्ते खराब हो सकते हैं और लोग गलत समझ सकते हैं।

  • यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर: ज्यादा बारिश से बाढ़ आ सकती है, फसलें खराब हो सकती हैं और घर-मकान डूब सकते हैं। कम बारिश से सूखा पड़ सकता है, पानी की कमी हो सकती है और फसलें नहीं उग पातीं।

  • आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर: ज्यादा मोबाइल या मल्टीमीडिया के इस्तेमाल से आँखें खराब हो सकती हैं, नींद कम हो सकती है, पढ़ाई और काम में ध्यान नहीं रहता, और परिवार-दोस्तों से दूरी बढ़ सकती है।

(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”

  • झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तर: झूठ बोलने से लोगों का भरोसा टूटता है। दोस्त, परिवार या शिक्षक आप पर विश्वास नहीं करते। इससे रिश्ते खराब हो सकते हैं और मन में बेचैनी रहती है।

  • कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?

उत्तर: मैं शिक्षक को सच बताऊँगा कि मेरा उत्तर गलत था और अंक देना सही नहीं है। सच बोलने से मन शांत रहता है और शिक्षक का सम्मान बढ़ता है।

(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”

  • यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?

उत्तर: अगर सब मधुर और शांतिपूर्ण बातें करें, तो लोगों में प्यार और विश्वास बढ़ेगा। झगड़े और गलतफहमियाँ कम होंगी। समाज में खुशी और एकता बढ़ेगी।

  • क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।

उत्तर: हाँ, कभी-कभी कटु वचन बोलना जरूरी हो सकता है, जैसे जब कोई गलत काम कर रहा हो और उसे रोकना हो। उदाहरण के लिए, अगर कोई दोस्त गलत रास्ते पर जा रहा हो, तो उसे सख्ती से समझाना पड़ सकता है।

(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।”

  • यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?

उत्तर: मैं कहूँगा कि बड़ा होना केवल ऊँचे पद या धन से नहीं होता। जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा है पर किसी को छाया या फल नहीं देता, वैसे ही बड़ा इंसान वही है जो दूसरों की मदद करता है। बड़प्पन दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने में है, न कि घमंड करने में।

  • खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।

उत्तर: खजूर और नारियल के पेड़ फल देते हैं, जैसे खजूर और नारियल, जो खाने में उपयोगी हैं। उनकी पत्तियाँ और लकड़ी घर बनाने, छप्पर बनाने और अन्य कामों में उपयोग होती हैं।

  • आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?

उत्तर: मैं ऐसी विशेषताओं पर ध्यान दूँगा:

  • वह ईमानदार और जिम्मेदार हो।
  • सबके साथ अच्छा व्यवहार करे।
  • पढ़ाई में अच्छा हो और दूसरों की मदद करे।
  • अनुशासन बनाए रखे और सबको साथ लेकर चले।

(च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाया”

  • यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा?

उत्तर: जो हमारी गलतियाँ बताता है, वह हमें सुधारने में मदद करता है। इससे हम अपनी कमियाँ जानकर बेहतर इंसान बन सकते हैं।

  • यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?

उत्तर: अगर कोई गलतियाँ न बताए, तो लोग अपनी कमियों को नहीं सुधार पाएँगे। इससे समाज में गलत काम बढ़ सकते हैं और लोग एक-दूसरे से सीख नहीं पाएँगे।

(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”

  • कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?

उत्तर: अगर मेरे पास सूप जैसी विशेषता होगी, तो मैं अच्छी बातें और गुण अपनाऊँगा और बुरी आदतें छोड़ दूँगा। मेरा स्वभाव शांत और अच्छा होगा, मैं दूसरों की मदद करूँगा और समाज में सम्मान पाऊँगा।

  • यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: बिना सोचे-समझे हर बात मान लेने से हम गलत रास्ते पर जा सकते हैं। हमें धोखा मिल सकता है और हम गलत आदतें सीख सकते हैं।

(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।”

  • यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?

उत्तर: मैं अपने मन को शांत और सुंदर जगह, जैसे पहाड़ों या नदियों के पास ले जाना चाहूँगा। वहाँ मेरा मन शांत होगा और अच्छे विचार आएँगे।

  • संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?

उत्तर: अच्छी संगति से हमें अच्छे विचार, अच्छी आदतें और सफलता मिलती है। बुरी संगति से गलत रास्ते, बुरी आदतें और असफलता मिल सकती है।

वाद-विवाद

“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। 
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”

(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
उत्तर: कबीर का यह दोहा आज के समय में भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें जीवन में संतुलन रखने की सीख देता है। आजकल लोग सोशल मीडिया, बातचीत, या काम में अक्सर हद से ज्यादा बोलते हैं या जरूरत से ज्यादा चुप रहते हैं। यह दोहा सिखाता है कि न तो बहुत ज्यादा बोलना अच्छा है, न ही बहुत चुप रहना। इसी तरह, प्रकृति में भी ज्यादा बारिश या धूप नुकसान करती है। आज के समय में यह हमें समय, शब्दों, और संसाधनों का सही इस्तेमाल करना सिखाता है ताकि हमारा जीवन और समाज बेहतर बने।
वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन:
1. गतिविधि का ढांचा:

  • पक्ष समूह: यह समूह इस बात का समर्थन करेगा कि वाणी, व्यवहार, और हर चीज में संतुलन जरूरी है, जैसा दोहे में कहा गया है।
  • विपक्ष समूह: यह समूह इस बात का समर्थन करेगा कि कुछ परिस्थितियों में ज्यादा बोलना या चुप रहना जरूरी हो सकता है।
  • निर्णायक समूह: यह समूह दोनों पक्षों के तर्क सुनकर यह तय करेगा कि कौन से तर्क ज्यादा सटीक और प्रभावी हैं।

2. वाद-विवाद के नियम:

  • प्रत्येक समूह को 5-7 मिनट का समय मिलेगा अपने तर्क प्रस्तुत करने के लिए।
  • दोनों समूह को अपने तर्क साधारण भाषा में और उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करने होंगे।
  • निर्णायक समूह निष्पक्ष होकर तर्कों की सटीकता, स्पष्टता, और प्रभाव को देखेगा।
  • सभी को एक-दूसरे की बात सम्मान के साथ सुननी होगी।

3. पक्ष के तर्क (दोहे का समर्थन):

  • वाणी में संतुलन जरूरी है: बहुत ज्यादा बोलने से लोग हमारी बात को गंभीरता से नहीं लेते। उदाहरण: सोशल मीडिया पर बेकार की बहस करने से लोग परेशान होते हैं।
  • चुप रहने की भी सीमा: जरूरी बातें न कहने से गलतफहमियाँ बढ़ती हैं। उदाहरण: अगर कोई गलत काम हो रहा हो और हम चुप रहें, तो वह और बढ़ सकता है।
  • प्रकृति में संतुलन: ज्यादा बारिश से बाढ़ और कम बारिश से सूखा पड़ता है। उसी तरह, जीवन में हर चीज में संतुलन जरूरी है।
  • आज के समय में प्रासंगिकता: आज लोग मोबाइल, टीवी, या काम में हद से ज्यादा समय बिताते हैं, जो उनकी सेहत और रिश्तों को नुकसान पहुँचाता है। संतुलन से ही खुशहाल जीवन संभव है।
  • मन की शांति: संतुलित बोलने और व्यवहार से मन शांत रहता है, और लोग हमारा सम्मान करते हैं।

4. विपक्ष के तर्क (दोहे से असहमति):

  • कभी ज्यादा बोलना जरूरी: कुछ स्थितियों में, जैसे किसी को समझाना हो या कोई गलत काम रोकना हो, तो ज्यादा बोलना पड़ सकता है। उदाहरण: एक शिक्षक को बच्चों को समझाने के लिए ज्यादा बोलना पड़ता है।
  • चुप रहना भी फायदेमंद: कई बार चुप रहने से विवाद टल जाते हैं। उदाहरण: अगर कोई गुस्से में बहस कर रहा हो, तो चुप रहना बेहतर होता है।
  • प्रकृति में अति की जरूरत: कुछ जगहों पर ज्यादा बारिश फसलों के लिए अच्छी होती है, जैसे धान की खेती में। ज्यादा धूप भी कुछ फसलों के लिए जरूरी होती है।
  • आज के समय में जरूरत: आज के डिजिटल युग में ज्यादा बोलना (जैसे मार्केटिंग या प्रचार) जरूरी है ताकि लोग आपकी बात सुनें।
  • स्थिति पर निर्भर: हर स्थिति में संतुलन संभव नहीं होता। कभी-कभी अति की जरूरत पड़ती है, जैसे आपातकाल में ज्यादा मेहनत करना।

5. निर्णायक समूह की भूमिका:

  • दोनों समूहों के तर्कों को ध्यान से सुनें।
  • तर्कों की स्पष्टता, उदाहरणों की प्रासंगिकता, और दोहे के संदेश से जुड़ाव का मूल्यांकन करें।
  • यह तय करें कि कौन सा समूह अपने विचारों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करता है और दोहे के महत्व को सही से समझाता है।
  • अंत में, एक संक्षिप्त टिप्पणी दें कि दोनों पक्षों में से कौन सा ज्यादा प्रभावी रहा और क्यों।

6. गतिविधि का संचालन:

  • तैयारी: शिक्षक या समूह लीडर दोहे को समझाए और वाद-विवाद का विषय बताए।
  • समूह विभाजन: कक्षा को तीन समूहों में बाँटें—पक्ष, विपक्ष, और निर्णायक।
  • चर्चा का समय: प्रत्येक समूह को 10 मिनट तैयारी के लिए दें, जिसमें वे अपने तर्क और उदाहरण लिख लें।
  • प्रस्तुति: पक्ष और विपक्ष बारी-बारी से अपने तर्क पेश करें। प्रत्येक समूह से 2-3 छात्र बोल सकते हैं।
  • निर्णायक की टिप्पणी: अंत में निर्णायक समूह अपना फैसला सुनाए और बताए कि कौन सा समूह बेहतर था।
  • निष्कर्ष: शिक्षक सभी को दोहे का महत्व समझाएँ और बताएँ कि संतुलन आज के जीवन में कैसे उपयोगी है।

7. अपेक्षित परिणाम:

  • छात्र दोहे के गहरे अर्थ को समझेंगे और इसे अपने जीवन में लागू करना सीखेंगे।
  • वाद-विवाद से उनकी सोचने, बोलने, और तर्क करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • वे संतुलन के महत्व को समझेंगे, जैसे कि सोशल मीडिया, पढ़ाई, और रिश्तों में संयम रखना।

Note: इस गतिविधि को मज़ेदार बनाने के लिए शिक्षक कुछ मजेदार उदाहरण जोड़ सकते हैं, जैसे सोशल मीडिया पर ज्यादा पोस्ट करने या चुप रहने की कहानियाँ। इससे छात्र और रुचि लेंगे।


(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे-

  • पक्ष – वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
  • विपक्ष – अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।

उत्तर: 
पक्ष (वाणी पर संयम रखना आवश्यक है):

  • बहुत ज्यादा बोलने से लोग परेशान हो सकते हैं और हमारी बात का महत्व कम हो जाता है।
  • संयम से बोली गई बातें दूसरों को प्रभावित करती हैं और सम्मान बढ़ता है।
  • उदाहरण: एक अच्छा वक्ता कम और सटीक बोलकर सबका ध्यान खींचता है।

विपक्ष (अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है):

  • जरूरी बातें न कहने से गलतफहमियाँ बढ़ती हैं और रिश्ते खराब हो सकते हैं।
  • चुप रहने से हमारी समस्याएँ या विचार छिपे रहते हैं, जिससे मौके खो सकते हैं।
  • उदाहरण: अगर कोई गलत काम हो रहा हो और हम चुप रहें, तो वह गलत काम बढ़ सकता है।

(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।
​उत्तर: 
पक्ष:

  • ज्यादा बोलने से लोग हमारी बात को गंभीरता से नहीं लेते।
  • संयमित बोलने से हमारी बात का असर बढ़ता है।
  • कम बोलकर हम गलतियाँ करने से बच सकते हैं।

विपक्ष:

  • जरूरी बातें न कहने से लोग हमें समझ नहीं पाते।
  • चुप रहने से हमारी समस्याएँ अनसुलझी रह सकती हैं।
  • मौन रहने से गलत कामों को रोकने का मौका खो सकता है।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए-

उत्तर: 

चर्चा का तरीका: इन शब्दों को अपने मित्रों के साथ साझा करें और चर्चा करें कि ये शब्द कबीर के जीवन और उनके दोहों से कैसे जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, पूछें कि “कवि” कैसे कबीर की रचनाओं को दर्शाता है या “सच्चाई” उनके संदेश का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ में मिलकर इन शब्दों के अर्थ और उपयोग के बारे में बात करें।

दोहे और कहावतें

“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। 
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”
इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है। यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत- ‘जैसा संग वैसा रंग’ (व्यक्ति जिस संगति में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है।) की तरह प्रयुक्त होती है। कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।

  • अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।

उत्तर: अन्य कहावतों के साथ वाक्य:

  1. कहावत: “जैसी करनी, वैसी भरनी”
    • वाक्य: रमेश ने हमेशा मेहनत की, इसलिए उसे परीक्षा में अच्छे अंक मिले। जैसी करनी, वैसी भरनी।
  2. कहावत: “जल में रहकर मगर से बैर नहीं करते”
    • वाक्य: स्कूल में सबके साथ दोस्ती रखनी चाहिए, क्योंकि जल में रहकर मगर से बैर नहीं करते।
  3. कहावत: “अंधे के आगे रोना, अपना दीया खोना”
    • वाक्य: राहुल को बार-बार समझाया, पर वह नहीं माना। यह तो अंधे के आगे रोना, अपना दीया खोना है।
  4. कहावत: “नीम हकीम, खतरा-ए-जान”
    • वाक्य: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना ठीक नहीं, क्योंकि नीम हकीम, खतरा-ए-जान।
  5. कहावत: “कर भला, हो भला”
    • वाक्य: दूसरों की मदद करने से हमारा भी भला होता है, क्योंकि कर भला, हो भला।

सबकी प्रस्तुति

पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए-

  • गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।
  • भाव-नृत्य प्रस्तुति ।
  • कविता पाठ करना।
  • संगीत के साथ प्रस्तुत करना।
  • अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।)

उत्तर: चुना गया दोहा: “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।”
अर्थ: हमें ऐसी बातें बोलनी चाहिए जो घमंड रहित हों, दूसरों को शांति दें और हमें भी शांति मिले।

प्रस्तुति के तरीके:

  1. गायन (लोकगीत शैली में):
    • समूह के बच्चे इस दोहे को लोकगीत की धुन में गा सकते हैं। उदाहरण के लिए, ढोलक या मंजीरे के साथ इसे भक्ति भजन की तरह प्रस्तुत करें।
    • तैयारी: एक साधारण धुन बनाएँ, जैसे “राम भक्ति” वाले भजनों की तरह, और दोहे को बार-बार गाएँ।
  2. भाव-नृत्य प्रस्तुति:
    • कुछ बच्चे नृत्य के जरिए दोहे का भाव दिखा सकते हैं। जैसे, एक बच्चा गुस्से में कटु बातें बोलने का अभिनय करे, और दूसरा बच्चा मधुर बातें बोलकर उसे शांत करे।
    • तैयारी: नृत्य में हाथों और चेहरे के भावों से “शांति” और “घमंड खोने” का संदेश दिखाएँ।
  3. कविता पाठ:
    • बच्चे इस दोहे को कविता की तरह जोर-जोर से और भाव के साथ पढ़ें। हर पंक्ति के बाद इसका अर्थ समझाएँ।
    • तैयारी: दोहे को स्पष्ट और धीमे स्वर में पढ़ने की प्रैक्टिस करें, ताकि सभी समझ सकें।
  4. संगीत के साथ प्रस्तुति:
    • गिटार, हारमोनियम या कीबोर्ड के साथ दोहे को गीत की तरह प्रस्तुत करें।
    • तैयारी: एक साधारण संगीत बनाएँ और दोहे को गाने की रिहर्सल करें।
  5. अभिनय:
    • दृश्य: एक दोस्त (राहुल) गुस्से में अपने दोस्त (अनिल) से कड़वी बातें बोलता है। अनिल उसे शांत करता है और समझाता है कि मधुर बातों से सब ठीक हो सकता है।
    • संवाद:
      • राहुल (गुस्से में): “तू हमेशा गलत करता है, मुझे तुझसे बात नहीं करनी!”
      • अनिल (शांत स्वर में): “राहुल, गुस्से से कुछ नहीं होगा। ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। शांत बातों से हम दोनों को सुकून मिलेगा।”
    • तैयारी: बच्चे किरदारों को बाँट लें और संवादों की रिहर्सल करें।

प्रस्तुति का आयोजन:

  • कक्षा को 4-5 समूहों में बाँटें, और प्रत्येक समूह को एक प्रस्तुति का तरीका चुनने दें।
  • हर समूह को 5-7 मिनट की प्रस्तुति के लिए समय दें।
  • शिक्षक बच्चों को प्रोत्साहित करें और अंत में प्रत्येक प्रस्तुति पर टिप्पणी करें कि दोहे का संदेश कितना अच्छे से समझाया गया।
  • बच्चों को बारी-बारी से प्रस्तुति देने का मौका दें ताकि सभी भाग लें।

Note: प्रस्तुति को मज़ेदार और रचनात्मक बनाएँ। बच्चों को रंग-बिरंगे कपड़े, प्रॉप्स (जैसे मंजीरे, ढोलक, या कागज से बनी चीजें) इस्तेमाल करने दें। इससे वे उत्साहित होंगे और दोहे का संदेश अच्छे से समझेंगे।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
उत्तर: हाँ, मेरे जीवन में मेरे पिताजी ने मुझे सही दिशा दिखाई। जब मैं पढ़ाई में परेशानी में था, उन्होंने मुझे धैर्य रखने और मेहनत करने की सलाह दी। उनकी बातों से मुझे प्रेरणा मिली और मैंने अपनी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए। वे मुझे हर कदम पर सही रास्ता दिखाते हैं, जैसे एक गुरु।

(ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, एक बार मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि मैं समय पर होमवर्क नहीं करता, जिससे मेरी आदत खराब हो रही थी। पहले मुझे बुरा लगा, लेकिन फिर मैंने सोचा और सुधार करने की कोशिश की। अब मैं समय पर काम करता हूँ और मेरी पढ़ाई में सुधार हुआ। उसकी सलाह ने मुझे बेहतर बनाया।

(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे- मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर: हाँ, मेरे दोस्तों ने मेरे व्यवहार को प्रभावित किया। जब मैं उनके साथ पढ़ाई करने लगा, तो मेरी आदतें अच्छी हुईं। वे मेहनती थे, तो मैं भी मेहनत करने लगा। लेकिन एक बार गलत दोस्तों के साथ रहने से मैं समय बर्बाद करने लगा। इससे मुझे समझ आया कि संगति का असर बहुत होता है।

सृजन

(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” 
इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत- किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।)
उत्तर: कहानी: रमेश एक क्रिकेट टीम का हिस्सा था। एक दिन मैच में उनकी टीम हार के कगार पर थी। कप्तान ने कहा, “चलो, गेंद से छेड़छाड़ कर दें ताकि हम जीत जाएँ।” लेकिन रमेश ने मना कर दिया। उसने कहा, “नहीं, यह गलत है। सच बोलना और नियमों का पालन करना ही सही है।” टीम ने उसे डराया कि बिना इस चीज़ के वे हार जाएँगे, लेकिन रमेश डटा रहा। आखिर में टीम ने बिना धोखे खेला और हारी, पर रमेश को सुकून मिला। बाद में लोग उसकी ईमानदारी की तारीफ करने लगे और उसे सम्मान मिला। रमेश ने सीखा कि सत्य का साथ कभी व्यर्थ नहीं जाता।

(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” 
इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर: साक्षात्कार (काल्पनिक): मैंने अपने शिक्षक श्रीमान शर्मा से बात की। मैंने पूछा, “आपने हमें क्या सिखाया?” उन्होंने कहा, “मैंने तुम्हें मेहनत, ईमानदारी और सबके साथ मिलकर काम करना सिखाया।” मैंने पूछा, “आपके लिए सबसे बड़ी खुशी क्या है?” उन्होंने जवाब दिया, “जब मेरे छात्र सफल होते हैं और मेरा नाम लेते हैं।”
निबंध: मेरा प्रेरणादायक शिक्षक श्रीमान शर्मा हैं। वे हमें सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के सबक भी सिखाते हैं। उन्होंने मुझे मेहनत और ईमानदारी का महत्व समझाया। जब मैं परीक्षा में फेल हुआ, तो उन्होंने मुझे हिम्मत दी और सही रास्ता दिखाया। उनके कारण मैंने मेहनत शुरू की और अच्छे अंक लाए। वे मेरे गुरु हैं, जो मुझे भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं। उनका योगदान मेरे जीवन का आधार है।

कबीर हमारे समय में

(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
उत्तर: सूची:

  • सोशल मीडिया और झूठी तारीफ
  • पर्यावरण प्रदूषण
  • मोबाइल और समय की बर्बादी
  • शिक्षा और ईमानदारी
  • एकता और भाईचारा

(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
​उत्तर: 

  1. सोशल मीडिया और झूठी तारीफ:
    • सोशल पर झूठी तारीफ का खेल, मन को भटकाए दिन रात।
    • सच का साथ छोड़ कर, बने मनुष्य पाखंडी रात।
  2. पर्यावरण प्रदूषण:
    • नदियाँ रोएं, हवा हो काली, प्रदूषण ने सब मारा।
    • पेड़ लगाओ, धरती बचाओ, जीवन बनाओ सुहाना।
  3. मोबाइल और समय की बर्बादी:
    • मोबाइल हाथ में, समय खो गया, जीवन हुआ सूना।
    • छोड़ो फोन, करो काम, जीवन बनेगा सुहाना।
  4. शिक्षा और ईमानदारी:
    • शिक्षा सिखाए सच का रास्ता, ईमान बने आधार।
    • झूठ छोड़ो, ज्ञान बढ़ाओ, जीवन हो सफल संसार।
  5. एकता और भाईचारा:
    • एकता में है शक्ति, भाईचारे से जीवन।
    • मिलकर रहें सब, दूर हो झगड़ा, बने समाज सुंदर गीत।

साइबर सुरक्षा और दोहे

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए-

(क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर: इंटरनेट पर ज्यादा बोलने या अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने से कई संकट हो सकते हैं:

  • व्यक्तिगत जानकारी चोरी हो सकती है, जैसे नाम, पता या फोटो।
  • गलत लोगों को यह जानकारी मिल सकती है, जो हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  • झूठी खबरें फैलने से लोगों में भ्रम और डर फैल सकता है।
  • ऑनलाइन ठगी या हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है।

चर्चा: कक्षा में पूछें कि क्या किसी ने कभी ज्यादा कुछ ऑनलाइन शेयर किया और क्या परेशानी हुई। सभी अपने विचार साझा करें।


(ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?
उत्तर: 

  • आवश्यकता: इंटरनेट पर बहुत सी जानकारी होती है, जिसमें अच्छी और बुरी दोनों होती हैं। जैसे सूप अच्छे दाने और भूसी को अलग करता है, वैसे हमें सही जानकारी चुननी चाहिए। गलत जानकारी से धोखा, डर, या नुकसान हो सकता है।
  • कैसे तय करें:
    • स्रोत देखें: अगर वेबसाइट या खबर किसी विश्वसनीय जगह (जैसे सरकारी साइट) से है, तो वह सही हो सकती है।
    • तथ्य जांचें: अगर कोई बात कई जगह लिखी हो और सबूत हों, तो वह उपयोगी है।
    • शक हो तो टालें: अगर कोई ईमेल या लिंक संदिग्ध लगे, तो उसे न खोलें।
    • शिक्षक या माता-पिता से पूछें: अगर कुछ समझ न आए, तो बड़े लोगों से सलाह लें।

चर्चा: कक्षा में पूछें कि किसी ने कभी गलत जानकारी पर भरोसा किया या नहीं। सभी मिलकर साइबर सुरक्षा के नियम बनाएँ, जैसे क्या शेयर करना सुरक्षित है।

आज के समय में

नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए-
उत्तर: 

खोजबीन के लिए

अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कबीर के बारे में और जान-समझ सकते हैं-

  • संत कबीर
    https://www.youtube.com/watch?v=FGMEpPJJQmk&t=2595&ab_ channel-NCERTOFFICIAL
  • कबीर वाणी
    https://www.youtube.com/watch?v=UNEIIugmwV0&t=13s&ab_ hannel-NCERTOFFICIAL
    https://www.youtube.com/watch?v=3QsynIvp62Y&t=8s&ab_ v = 3 t = 8 channel-NCERTOFFICIAL
    https://www.youtube.com/watch?v=UQA8DdnqiYg&t=11s&ab_ channel-NCERTOFFICIAL
    https://www.youtube.com/watch?v=JhWy6BYvosU&t=1555&ab_ channel-NCERTOFFICIAL
    https://www.youtube.com/watch?v=gnU7w-RHhyU&t=14s&ab_ t = 1 channel-NCERTOFFICIAL
  • कबीर की साखियाँ
    https://www.youtube.com/watch?v=ngF88zXnfQ0&ab_channel=NCERTOFFICIAL
  • दोहे कबीर, रहीम, तुलसी
    https://www.youtube.com/watch?v=cnrjLCkggr4&t=12s&ab_ t = 12 channel-NCERTOFFICIAT

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं खोजबिन करें या कक्षा में समझें।

4. हरिद्वार – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर के सामने तारा (*) लगाया गया है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के साथ सरल भाषा में व्याख्या दी गई है, जो कक्षा 8 के छात्रों के लिए समझने में आसान होगी।

1. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?

  • लेखक के अनुसार सज्जन लोग बिना पूछे स्वादिष्ट रसीले फल देते हैं।
  • लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं। *
  • लेखक का मानना था कि हरिद्वार के सभी दुकानदार बहुत सज्जन थे।
  • लेखक को पत्थर मारकर पके हुए फल तोड़कर खाना पसंद था।

उत्तर: लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।
भारतेंदु ने हरिद्वार के वृक्षों की तुलना सज्जन (अच्छे) लोगों से की है। जैसे सज्जन लोग बुराई के बदले भी अच्छाई करते हैं, वैसे ही ये वृक्ष पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। यहाँ वे वृक्षों की उदारता को मानवीय गुणों से जोड़ रहे हैं, न कि दुकानदारों या फल तोड़ने की बात कर रहे हैं।

2. “वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?

  • शारीरिक थकान और मानसिक बेचैनी
  • आर्थिक संतोष और मानसिक विकास
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव *
  • सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक प्रेम

उत्तर: मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव
वैराग्य (दुनिया से दूरी) और भक्ति (ईश्वर के प्रति प्रेम) का मतलब है कि लेखक को हरिद्वार में शांति और आध्यात्मिक (धार्मिक) अनुभव हुआ। गंगा और प्रकृति की सुंदरता ने उनके मन को शांत और ईश्वर के करीब किया, न कि थकान या सामाजिक प्रेम की भावना दी।

3. “पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?

  • संतुष्टि में सुख होता है। *
  • सुखी लोग पत्थर पर भोजन करते हैं।
  • लेखक के पास सोने की थाली नहीं थी।
  • पत्थर पर रखा भोजन अधिक स्वादिष्ट होता है।

उत्तर: संतुष्टि में सुख होता है।
लेखक कहते हैं कि गंगा के किनारे पत्थर पर भोजन करने का सुख सोने की थाली से भी ज्यादा था। इसका मतलब है कि सादगी और प्रकृति के बीच मिलने वाली संतुष्टि (खुशी) सबसे बड़ी होती है, न कि भोजन स्वादिष्ट था या सोने की थाली की कमी थी।

4. “एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?

  • अंधविश्वास और लालच
  • मानवता और देशप्रेम
  • सादगी और आत्मनिर्भरता *
  • स्वच्छता और प्रकृति प्रेम *

उत्तर: सादगी और आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
लेखक ने खुद खाना बनाकर सादगी से गंगा के पास बैठकर खाया – यह सादगी और स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) को दिखाता है। साथ ही, उन्होंने प्रकृति के पास रहकर स्वच्छ वातावरण में भोजन किया – यह प्रकृति प्रेम और स्वच्छता को भी बढ़ावा देता है।

5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?

  • राजनीतिक
  • आध्यात्मिक *
  • सामाजिक
  • प्राकृतिक *

उत्तर: आध्यात्मिक
हरिद्वार की सुंदरता (प्राकृतिक अनुभव) और वहाँ मिली शांति, भक्ति और ज्ञान (आध्यात्मिक अनुभव) – दोनों ही लेखक के अनुभव का मुख्य भाग हैं।

5. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?

  • कठिन शब्दों का प्रयोग और बोझिलता
  • मुहावरों का अधिक प्रयोग
  • सरलता और चित्रात्मकता *
  • जटिलता और संक्षिप्तता

उत्तर: सरलता और चित्रात्मकता
लेखक ने अपने अनुभवों को ऐसे लिखा है कि पढ़ने वाले के मन में चित्र बन जाएँ। भाषा सरल और भावों से भरी हुई है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: 

  1. हमने यह उत्तर इसलिए चुने क्योंकि लेखक ने वृक्षों की उदारता की तुलना सज्जनों से की है, जो बिना किसी स्वार्थ के फल देते हैं।
  2. “वैराग्य और भक्ति” जैसे शब्द बताते हैं कि लेखक आध्यात्मिक भावों से भर गया था।
  3. “पत्थर पर भोजन” का वर्णन यह स्पष्ट करता है कि सच्चा सुख साधनों में नहीं, संतोष में होता है।
  4. गंगा के तट पर भोजन करना सादगी, प्रकृति के प्रति प्रेम और आत्मीयता को दर्शाता है।
  5. पूरी यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति, आध्यात्मिकता और भक्ति का वर्णन प्रमुख है, इसलिए यह अनुभव आध्यात्मिक और प्राकृतिक दोनों था।
  6. पत्र की भाषा में सरलता और चित्रात्मकता है, जिससे पाठक दृश्य को कल्पना में देख सकता है।

मिलकर करें मिलान

पाठ से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आपस में चर्चा कीजिए और इनके उपयुक्त संदर्भों से इनका मिलान कीजिए-
उत्तर: 

मिलकर करें चयन

(क) पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं- एक सही और एक भ्रामक। अपने समूह में इन पर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।

उत्तर: 

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
उत्तर: 

  • अर्थ: भारतेंदु कहते हैं कि हरिद्वार की कुशा (एक विशेष प्रकार की घास, जो पूजा में उपयोग होती है) बहुत अनोखी है। इसकी खुशबू दालचीनी और जावित्री जैसी मसालों की तरह शानदार है। वे कहते हैं कि यह दिखाता है कि हरिद्वार इतनी पवित्र जगह है कि यहाँ की साधारण घास भी सुगंधित और खास है।
  • विचार: यह पंक्ति हरिद्वार की पवित्रता और खासियत को दर्शाती है। लेखक बताते हैं कि इस तीर्थस्थल की हर चीज़, यहाँ तक कि घास भी, सामान्य नहीं है। यहाँ की प्रकृति में एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति है, जो हर चीज़ को सुंदर और पवित्र बनाती है। मुझे लगता है कि लेखक यह कहना चाहते हैं कि हरिद्वार की पवित्रता इतनी गहरी है कि यहाँ की छोटी-छोटी चीज़ें भी असाधारण हो जाती हैं। यह हमें सिखाता है कि पवित्र स्थानों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि वहाँ की हर चीज़ में कुछ खास होता है।
  • समूह में साझा करने के लिए: मैं अपने दोस्तों से कहूँगा कि यह पंक्ति दिखाती है कि हरिद्वार की प्रकृति और आध्यात्मिकता कितनी खास है। हम इस पर चर्चा कर सकते हैं कि क्या हमने कभी ऐसी जगह देखी है, जहाँ की साधारण चीज़ें भी खास लगी हों, जैसे कोई मंदिर या नदी।

(ख) “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
उत्तर: 

  • अर्थ: भारतेंदु हरिद्वार के वृक्षों की तारीफ करते हैं और कहते हैं कि इनका जन्म धन्य है, क्योंकि ये हमेशा लोगों की मदद करते हैं। ये वृक्ष फल, फूल, खुशबू, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी, और जड़ देते हैं। यहाँ तक कि जलने के बाद भी उनकी राख और कोयला लोगों के लिए उपयोगी होता है। कोई भी इनसे खाली हाथ नहीं लौटता।
  • विचार: यह पंक्ति वृक्षों की उदारता और हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती है। लेखक वृक्षों को ऐसे लोगों की तरह देखते हैं, जो बिना स्वार्थ के सब कुछ दे देते हैं। मुझे लगता है कि यह हमें प्रकृति का सम्मान करना और उसकी कीमत समझना सिखाता है। यह पंक्ति यह भी बताती है कि हरिद्वार की प्रकृति पवित्र और उपयोगी है, जो लोगों की हर जरूरत पूरी करती है। यह हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि हमें भी दूसरों की मदद बिना स्वार्थ के करनी चाहिए, जैसे ये वृक्ष करते हैं।
  • समूह में साझा करने के लिए: मैं अपने दोस्तों से कहूँगा कि यह पंक्ति वृक्षों की उदारता को दिखाती है और हमें सिखाती है कि हमें भी दूसरों की मदद करनी चाहिए। हम इस पर चर्चा कर सकते हैं कि प्रकृति हमारी कैसे मदद करती है और हम उसका ख्याल कैसे रख सकते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…”
लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है? कब-कब?
(संकेत – किसी स्थान से लौटने के बाद भी उसी के विषय में सोचते रहना)

उत्तर: इस वाक्य से पता चलता है कि लेखक का मन हरिद्वार की पवित्रता, शांति और सुंदरता से इतना प्रभावित हुआ कि वह वहाँ से लौटने के बाद भी मन से वहीं बना रहा। उसका मन हरिद्वार की यादों में ही बसा रहा।
मेरी अनुभूति: हाँ, मुझे भी ऐसा अनुभव हुआ है। जब मैं किसी सुंदर जगह जैसे पहाड़ों या किसी शांत गाँव से लौटती हूँ, तो कई दिन तक वहीं की बातें, लोग, दृश्य और अनुभव मन में चलते रहते हैं। ऐसा लगा जैसे मैं वहाँ से लौटी ही नहीं।

(ख) “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।”
लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है? क्या अब भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर: इस कथन का अर्थ है कि वहाँ के पंडे लालच नहीं करते, वे कम में भी खुश रहते हैं।
आज के समय में ऐसा व्यवहार बहुत कम देखने को मिलता है। आज कई लोग अधिक पैसा कमाने की होड़ में रहते हैं। फिर भी कुछ लोग आज भी संतोषी होते हैं – जैसे गाँवों के कुछ दुकानदार या मंदिरों के पुजारी, जो कम में भी खुश रहते हैं और सेवा भाव रखते हैं।
उदाहरण: मेरे गाँव के पास एक मंदिर के पुजारी हैं, जो केवल भक्ति से पूजा कराते हैं और दान में जो भी मिले, उसी से संतुष्ट रहते हैं। ऐसे लोग आज भी समाज में हैं, पर बहुत कम।

(ग) “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।”
आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है? उस स्थान में कौन-कौन सी विशेषताएँ होंगी जो उसे ‘टिकने योग्य’ बनाती होंगी?
(संकेत – केवल आराम, सुविधा या कोई और कारण भी।)

उत्तर: लेखक ने इस स्थान को ‘टिकने योग्य’ इसलिए कहा क्योंकि वहाँ चारों ओर से शीतल हवा आती थी, स्थान शांत था, आरामदायक था और वहाँ से हरिद्वार की सुंदरता का आनंद लिया जा सकता था।
अनुमानित विशेषताएँ:

  • वहाँ प्राकृतिक वातावरण था।
  • गर्मी या भीड़ नहीं थी।
  • शांत, सुरक्षित और स्वच्छ स्थान था।
  • मन को प्रसन्न करने वाला वातावरण था।

इसलिए लेखक को वहाँ ठहरना अच्छा लगा।

(घ) “फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।”
इस वाक्य के माध्यम से आपको वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझ रही हैं?

उत्तर: इस वाक्य से वृक्षों की उपयोगिता और उदारता का पता चलता है। पेड़ जीवन भर और मृत्यु के बाद भी लोगों की मदद करते हैं। वे बिना कुछ माँगे फल, फूल, छाया देते हैं। यहाँ तक कि जब पेड़ जल जाते हैं, तब भी उनकी राख और कोयले से लोग लाभ उठाते हैं।
मेरी समझ: यह हमें सिखाता है कि हमें भी वृक्षों की तरह निःस्वार्थ सेवा करनी चाहिए और प्रकृति का आदर करना चाहिए। वृक्ष सच्चे सज्जन और समाज के सेवक होते हैं।

अनुमान और कल्पना से

(क) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।”
कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?

उत्तर: यदि मैं हरिद्वार में हूँ, जहाँ हरे-भरे पहाड़ हैं, तो मैं ये चीज़ें करना चाहूँगा:

  • गंगा में स्नान: मैं हरि की पैड़ी पर जाकर गंगा में स्नान करूँगा, क्योंकि यह पवित्र और ठंडा जल मेरे मन को शांति देगा।
  • पहाड़ों पर सैर: मैं हरे-भरे पर्वतों पर चढ़कर प्रकृति की सुंदरता देखूँगा, जैसे चहचहाते पक्षी और लहलहाती वनस्पतियाँ।
  • मंदिर दर्शन: मैं चण्डिका देवी मंदिर और विल्वेश्वर महादेव मंदिर जाऊँगा, ताकि वहाँ की आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर सकूँ।
  • गंगा आरती: मैं शाम को हरि की पैड़ी पर गंगा आरती देखूँगा, क्योंकि दीयों की रोशनी और भक्ति का माहौल बहुत सुंदर होता है।
  • प्रकृति का आनंद: मैं गंगा के किनारे बैठकर ठंडी हवा और पानी की आवाज़ का मज़ा लूँगा, जैसे भारतेंदु ने अपने अनुभव में बताया। 

(ख) “जल के छलके पास ही ठंढे-ठंढे आते थे।”
कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।

उत्तर: मैं गंगा के तट पर हरि की पैड़ी के पास बैठा हूँ। गंगा का ठंडा, साफ़ पानी बह रहा है, और उसकी छोटी-छोटी लहरें मेरे पास आकर छींटे मार रही हैं। पानी के ये छींटे मेरे चेहरे पर पड़ते हैं, जो इतने ठंडे और ताज़ा हैं कि मुझे गर्मी और थकान भूल जाती है। हल्की हवा चल रही है, जो गंगा के पानी की ठंडक को मेरे पास लाती है। चारों ओर पक्षियों की चहचहाहट और गंगा की कल-कल की आवाज़ सुनाई दे रही है। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी शांत और पवित्र दुनिया में हूँ। मैं अपने हाथों से पानी छूता हूँ, और उसकी शीतलता मेरे मन को शांति देती है। मैं सोचता हूँ कि गंगा माँ मुझे अपनी गोद में बुला रही हैं। यह अनुभव इतना सुंदर है कि मैं इसे हमेशा याद रखना चाहता हूँ।

(ग) “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।”
यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?

उत्तर: यदि पेड़-पौधे मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें, तो दुनिया बहुत रोचक और अलग होगी:

  • बातचीत: पेड़ हमसे बात करेंगे। उदाहरण के लिए, एक बरगद का पेड़ कह सकता है, “मुझे पानी दो, मैं तुम्हें छाया दूँगा!” या कोई फल का पेड़ कहेगा, “मेरे फल खाओ, लेकिन मेरी डालियाँ मत तोड़ो!”
  • उदारता: जैसे भारतेंदु ने कहा, पेड़ सज्जनों की तरह रहेंगे। अगर कोई उन पर पत्थर फेंके, तो वे गुस्सा होने की बजाय और फल दे सकते हैं, जैसे कहें, “तुम्हें और फल चाहिए? लो!”
  • शिकायतें: पेड़ शायद शिकायत करें कि लोग उनकी छाल या लकड़ी काटते हैं। वे कह सकते हैं, “हमें दर्द होता है, कृपया हमें बख्श दो!”
  • पर्यावरण की रक्षा: पेड़ इंसानों को सिखाएँगे कि उनकी देखभाल कैसे करनी है। वे कह सकते हैं, “ज़्यादा पेड़ लगाओ, ताकि हमारा परिवार बढ़े!”

(घ) “यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं- एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से।” 
इस पाठ में ‘गंगा’ शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?

उत्तर: भारतेंदु ने ‘गंगा’ के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ का उपयोग इसलिए किया होगा:

  • सम्मान और पवित्रता: गंगा को हिंदू धर्म में माँ और देवी माना जाता है। ‘श्री’ और ‘जी’ लगाना गंगा के प्रति सम्मान और उनकी पवित्रता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि लेखक गंगा को सिर्फ़ नदी नहीं, बल्कि एक पवित्र शक्ति मानते हैं।
  • आध्यात्मिक भावना: हरिद्वार एक तीर्थस्थल है, और गंगा वहाँ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। ‘श्री’ और ‘जी’ का उपयोग लेखक की भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करता है।
  • सांस्कृतिक परंपरा: भारत में पवित्र नदियों, जैसे गंगा, यमुना, को सम्मान देने के लिए ‘जी’ या ‘माँ’ जैसे शब्द जोड़े जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

(ङ) कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।
उत्तर: अगर मैं किसी श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित मित्र के साथ हरिद्वार गया/गई होता/होती, तो मैं इन बातों का ध्यान रखता/रखती:

  • उन्हें रास्ता सुरक्षित तरीके से दिखाता/दिखाती।
  • हरिद्वार का वातावरण, गंगा की ठंडक, हवा की ताजगी उन्हें स्पर्श से महसूस कराता/कराती।
  • मंदिरों में आरती का कंपन और घंटियों की ध्वनि उन्हें अनुभव करवाता/करवाती।
  • उनके लिए विशेष गाइड या संकेत भाषा (sign language) की मदद लेता/लेती।
  • उन्हें गंगा जल का स्पर्श, फूलों की खुशबू, प्रसाद का स्वाद और चप्पलों की ध्वनि से यात्रा का आनंद दिलवाता/दिलवाती।

लिखें संवाद

(क) “मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।”
लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।

उत्तर: 
लेखक: (गंगा जल में हाथ डुबोते हुए) कल्लू जी, देखिए न! इस जल की शीतलता जैसे मन की सारी थकावट दूर कर दे।
कल्लू जी: बिल्कुल! लगता है जैसे गंगा माँ हमें स्वयं स्नेह से बुला रही हैं। कितना शांत, कितना पवित्र वातावरण है!
लेखक: और वह देखिए — सामने के पर्वतों पर कितनी हरियाली है! लगता है जैसे वे हमें आलिंगन दे रहे हों।
कल्लू जी: (मुस्कुराते हुए) यह भूमि सच में पुण्यभूमि है। यहाँ के पेड़-पौधे, जल, हवा — सबमें एक भक्ति की सुगंध है।
लेखक: सही कहा आपने। यहाँ आकर मैं जैसे अपने अंदर उतर गया हूँ। ऐसा लग रहा है, जैसे मेरी आत्मा गंगा में स्नान कर रही है।
कल्लू जी: और संतों का वैराग्य देखिए — धन का लोभ नहीं, केवल संतोष। क्या आजकल ऐसा कहीं देखने को मिलता है?
लेखक: सचमुच, इस यात्रा ने मेरी सोच को बदल दिया है। लगता है जैसे मन को कोई नया रास्ता मिल गया हो।

(ख) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।”
लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए- जैसे पर्वत बोल रहे हों।

उत्तर: 
लेखक: (पर्वतों को निहारते हुए) हे पर्वतों! तुम्हारी ऊँचाई और स्थिरता को देखकर मन श्रद्धा से भर जाता है।
पर्वत: (मुस्कराते हुए) धन्यवाद, पथिक! हम सदियों से यहीं खड़े हैं — स्थिर, शांत और साक्षी।
लेखक: क्या आप कभी थकते नहीं? न गर्मी से, न वर्षा से, न सर्दी से?
पर्वत: नहीं, क्योंकि हमारा काम है सहना और सँभालना। हम धरती की रीढ़ हैं — तुम्हें छाया, हवा, जल और शांति देते हैं।
लेखक: तुम्हारे ऊपर की हरियाली, झरनों की ध्वनि और हवा की गंध — सबकुछ मंत्रमुग्ध कर देता है।
पर्वत: यह सब तुम्हारे मन की निर्मलता पर निर्भर करता है। जब मन शांत होता है, तब ही प्रकृति की आवाज़ सुनाई देती है।
लेखक: मैं धन्य हो गया। तुम्हारी गोद में बैठकर मैं खुद को खोज रहा हूँ।
पर्वत: खोजते रहो, पथिक। जब तक भीतर प्रकृति न जागे, तब तक सच्चा सुख नहीं मिलता।

‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग

इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-

  • विशेष आश्चर्य का विषय यह है कि यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं।
  • यों तो वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैं।

आप जानते ही हैं कि एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ है’ का प्रयोग किया जाता है और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का। सोचिए, ‘गंगा’ शब्द एकवचन है, फिर भी इसके साथ ‘हैं’ क्यों लिखा गया है?
इसका कारण यह है कि कभी-कभी हम आदर-सम्मान प्रदर्शित करने के लिए एकवचन संज्ञा शब्दों को भी बहुवचन के रूप में प्रयोग करते हैं। इसे ‘आदरार्थ बहुवचन’ प्रयोग कहते हैं। उदाहरण के लिए-

  • मेरे पिता जी सो रहे हैं।
  • भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं।

अब ‘आदरार्थ बहुवचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
उत्तर: 

3. एक आशीर्वाद – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. कविता में किसे संबोधित किया गया है?

  • युवा वर्ग को
  • नागरिकों को
  • बच्चों को *
  • श्रमिकों को

उत्तर: बच्चों को
कविता में कवि एक बच्चे को संबोधित कर आशीर्वाद दे रहे हैं कि उसके सपने बड़े हों, वह सीखे, मचले और अपने पैरों पर खड़ा हो। यह सब बातें बच्चों से संबंधित हैं।

2. “तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है?

  • कल्पना की उड़ान भरना
  • आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना *
  • बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना
  • बड़े लक्ष्य निर्धारित करना *

उत्तर: आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना, बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
हाँ ‘स्वप्न’ का मतलब केवल कल्पना करना नहीं, बल्कि ऐसे सपने जो जीवन में कुछ पाने की प्रेरणा दें। कवि चाहता है कि बच्चा बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने की कोशिश करे, यानी लक्ष्य तय करे और आगे बढ़े।

3. “उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है-

  • चुनौतियों को स्वीकार करना *
  • प्रकाश का प्रसार करना
  • अग्नि के ताप का अनुभव करना
  • कष्टों से नहीं घबराना *

उत्तर: चुनौतियों को स्वीकार करना, कष्टों से नहीं घबराना
दीये की ओर आकर्षित होकर उँगली जलाना प्रतीक है – जब कोई बच्चा किसी चीज़ को सीखने या पाने की कोशिश करता है तो वह गलती कर सकता है, चोट खा सकता है, पर यह अनुभव उसे मजबूत बनाता है। इससे आशय है कि जीवन की कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए।

4. “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है?

  • अपने पैरों पर खड़े होना
  • सफलता प्राप्त करना *
  • कठिनाइयों का सामना करना
  • आत्मनिर्भर होना *

उत्तर: सफलता प्राप्त करना, आत्मनिर्भर होना
यहाँ भाव यह है कि बच्चा दूसरों पर निर्भर न रहे, बल्कि खुद आत्मनिर्भर बने और अपने जीवन के फैसले खुद ले। साथ ही, वह जीवन में सफलता प्राप्त करे, यानी अपने सपनों को पूरा करे।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: 
मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि मुझे कविता की पंक्तियों से यही अर्थ समझ में आया।

  1. कविता में “बच्चों को” संबोधित किया गया है, क्योंकि कवि ने सीधे-सीधे एक छोटे बच्चे को “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” कहकर आशीर्वाद दिया है। इसमें बच्चे की सीखने की उम्र, ज़िद करना, रोशनी से ललचाना जैसी बातें कही गई हैं, जो छोटे बच्चों से जुड़ी होती हैं।
  2. ‘स्वप्न’ का मतलब आकांक्षा और लक्ष्य से है, क्योंकि कविता केवल कल्पना की उड़ान नहीं, बल्कि उन्हें सच में बदलने की बात कर रही है। कवि चाहता है कि बच्चा सपने देखे और उन्हें पाने के लिए मेहनत करे, इसीलिए ‘बड़े लक्ष्य निर्धारित करना’ भी सही उत्तर है।
  3. ‘उँगली जलाना’ एक प्रतीक है, जिससे यह दिखाना है कि सीखने की कोशिश में थोड़ी चोट या गलती हो सकती है, लेकिन उससे डरना नहीं चाहिए। इसलिए “चुनौतियों को स्वीकार करना” और “कष्टों से नहीं घबराना” सही लगता है।
  4. “अपने पाँवों पर खड़े होना” आत्मनिर्भरता और सफलता का प्रतीक है। जब कोई अपने बलबूते पर जीवन जीना सीखता है, तभी वह अपने पैरों पर खड़ा होता है। इसलिए मैंने इन दोनों विकल्पों को सही माना।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए।
उत्तर:

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “जा, 
तेरे स्वप्न बड़े हों”
उत्तर: 
इस पंक्ति में कवि किसी बच्चे या युवा को आशीर्वाद दे रहे हैं कि उसके सपने छोटे न हों, बल्कि बड़े और ऊँचे हों। ऐसे सपने जो उसकी सोच को ऊँचाई दें और जीवन को एक उद्देश्य दें। इसका अर्थ यह भी है कि हमें अपने जीवन में ऊँचे लक्ष्य रखने चाहिए और उन्हें पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

(ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”
उत्तर: 
इस पंक्ति का अर्थ है कि केवल कल्पनाओं और भावनाओं की दुनिया में रहना पर्याप्त नहीं है। हमें वास्तविक जीवन की ज़मीन पर आकर चलना यानी जीना सीखना चाहिए। इसका मतलब है कि हमें जीवन की सच्चाइयों को समझकर व्यावहारिक बनना चाहिए और यथार्थ का सामना करना चाहिए।

(ग) “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए 
रूठना-मचलना सीखें”
उत्तर: 
इस पंक्ति में कवि यह कहना चाहते हैं कि हमें बड़ी और मुश्किल लगने वाली चीज़ों को पाने की जिद करनी चाहिए। जो सच्चाइयाँ दूर या असंभव लगती हैं, उनके लिए भी मेहनत, कोशिश और लगन से आगे बढ़ना चाहिए। यही संघर्ष हमें जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने की दिशा में ले जाता है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। आपके अनुसार बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यों?
उत्तरः
 मेरे अनुसार बड़े सपने वे होते हैं जो केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए भी उपयोगी हों। 
जैसे:

  • डॉक्टर बनकर बीमार लोगों की सेवा करना
  • वैज्ञानिक बनकर नई खोजें करना जो दुनिया को बेहतर बनाएँ
  • शिक्षक बनकर बच्चों को अच्छा नागरिक बनाना
  • खिलाड़ी बनकर देश का नाम रोशन करना

बड़े सपने हमें मेहनत, लगन, और अनुशासन के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

(ख) “हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ / उँगली जलाएँ” पंक्ति में ललक की बात की गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों?
(संकेत – योजना, प्रयास आदि)
उत्तरः 
सिर्फ इच्छा या ललक होना ही काफी नहीं है। किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए जरूरी हैं –

  • योजना बनाना: ताकि हमें पता हो कि हमें कौन-कौन से कदम उठाने हैं।
  • निरंतर प्रयास करना: बिना थके और बिना रुके।
  • धैर्य और साहस रखना: क्योंकि रास्ते में कई कठिनाइयाँ आती हैं।
  • सही मार्गदर्शन और सीखना: ताकि हम गलतियों से सीख सकें और आगे बढ़ सकें।

इन सबके बिना हमारा सपना अधूरा रह सकता है।

(ग) कल्पना कीजिए, आपका सपना ही आपका मित्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
उत्तरः 
मैं अपने सपने से कहूँगा –
“तू हमेशा मेरे साथ रहना। जब मैं थक जाऊँ तो मुझे हिम्मत देना, और जब मैं हार मानने लगूँ तो मुझे याद दिलाना कि तू मुझे कितना प्यारा है। तू मुझसे कभी दूर मत जाना। मैं तुझे पाने के लिए हर कोशिश करूँगा और कभी हार नहीं मानूँगा।”

(घ) यदि आप किसी को आशीर्वाद देना चाहते हो तो आप किसे और क्या आशीर्वाद दोगे और क्यों?
उत्तरः 
मैं अपने छोटे भाई को आशीर्वाद देना चाहूँगा –
“तू हमेशा सच्चा, मेहनती और आत्मनिर्भर बने। तेरे सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने की ताकत तुझमें हो।”
क्योंकि मैं चाहता हूँ कि वह अपने जीवन में आगे बढ़े और अपने सपनों को साकार करे।

कविता की रचना

इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देंगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तरः कविता की अन्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

  • मानवीकरण (Personification): कवि ने सपनों को इंसान की तरह दर्शाया है जो हँसते, मुस्कुराते, मचलते, रूठते और अपने पैरों पर खड़े होते हैं।
    उदाहरण: “उँगली जलाएँ”, “मचलना सीखें”, “मुस्कुराएँ”, “अपने पाँवों पर खड़े हों”।
  • प्रेरणात्मक शैली: पूरी कविता एक आशीर्वाद और प्रेरणा की तरह है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करती है।
  • संदेशात्मक भाषा: कविता केवल भावनात्मक नहीं है, बल्कि इसमें जीवन का एक सशक्त संदेश है – बड़े सपने देखो, मेहनत करो, और सच्चाई को अपनाओ।
  • कल्पना और यथार्थ का मेल: कविता में कल्पनाशीलता (चाँद-तारे जैसे सपने) के साथ-साथ यथार्थ की ज़मीन पर चलने की सीख भी दी गई है।
  • भावनात्मक गहराई: कविता में स्नेह, आशा, चिंता और प्रेरणा का सुंदर संगम है – जैसे कोई माता-पिता अपने बच्चे को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे हों।

सृजन

इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे- चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए।

उत्तरः सूरज
सूरज को
उगते देखा है,
चमकते देखा है,
धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते देखा है।
सूरज को
धरती को गर्म करते देखा है,
पेड़ की छाया बनाते देखा है,
पानी को सूखाते देखा है।
सूरज को
शाम को ढलते देखा है,
आसमान में रंग भरते देखा है,
चुपचाप छिपते देखा है।

इसी तरह आप ‘नदी’, चाँद, तितली, हवा, पंछी आदि किसी भी संज्ञा शब्द पर अपनी कविता बना सकते हैं।

कविता का शीर्षक

इस कविता का शीर्षक ‘एक आशीर्वाद’ है जो कविता में कहीं भी प्रयुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्ति या शब्द चुनेंगे और क्यों?
उत्तरः यदि कविता ‘एक आशीर्वाद’ का शीर्षक कविता की ही किसी पंक्ति या शब्द से चुनना हो, तो मैं “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति को शीर्षक के रूप में चुनूँगा।
कारणः

  • यह कविता की पहली पंक्ति है और पूरे भाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
  • इसमें स्नेह, प्रेरणा और आशीर्वाद – तीनों भाव समाहित हैं।
  • यह पंक्ति कविता के मुख्य संदेश को सामने लाती है – कि व्यक्ति के सपने बड़े हों और वह उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़े।
  • यह पंक्ति पाठक या श्रोता को आकर्षित करती है और उन्हें आगे पढ़ने या सुनने के लिए प्रेरित करती है।

इसलिए “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” कविता के लिए एक प्रभावशाली और उपयुक्त शीर्षक होगा।

भाषा की बात

(क) नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए-
उत्तरः 

(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए हैं। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ न देते हों-

उत्तरः

आना-जाना

‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूर्ण क्रियाएँ हैं। कक्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और उन्हें चार्ट पेपर पर चिपकाकर अपनी कक्षा में लगाइए।
उत्तरः 
समूह – ‘आना’ (क्रिया आधारित वाक्य):

  • मैं सुबह स्कूल समय पर आया।
  • मेरे घर मेहमान आए और सब बहुत खुश हुए।
  • माँ बाजार से फल लाकर आई।
  • बारिश की पहली बूंदें जैसे ही गिरीं, ठंडी हवा आने लगी।
  • परीक्षा का परिणाम आया, तो मुझे बहुत खुशी हुई।

समूह – ‘जाना’ (क्रिया आधारित वाक्य):

  • मैं शाम को पार्क में खेलने गया।
  • पिताजी ऑफिस जाते समय मुझे टिफिन देने बोले।
  • हम गर्मियों की छुट्टियों में दादी के घर गए।
  • सभी छात्र पिकनिक पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
  • वह चुपचाप कहीं चला गया और किसी को बताया भी नहीं।

डायरी

हँसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?

उत्तरः डायरी लेखन – “हँसे, मुस्कुराए, गाए”
तिथि: 30 जुलाई 2025
स्थान: मेरा घर / विद्यालय
प्रिय डायरी,
आज का दिन बहुत रोचक और भावनाओं से भरा हुआ था।

  • सुबह जब मैंने अपने छोटे भाई की मज़ेदार हरकत देखी, तो मैं जोर से हँस पड़ा
  • स्कूल में जब अध्यापिका ने मेरी प्रशंसा की, तो मैं खुशी से मुस्कुरा दिया।
  • संगीत की कक्षा में हम सबने मिलकर एक प्यारा गीत गाया, जो दिल को बहुत भाया।
  • लंच में जब मेरा मनपसंद खाना नहीं था, तो मैं थोड़ी देर के लिए रूठ गया
  • खेलते समय जब मैं आउट हो गया, तो मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं थोड़ी देर मचला भी, पर फिर सब ठीक हो गया।
  • दिन का अंत बहुत अच्छा रहा क्योंकि माँ ने मुझे मेरी पसंद की कहानी सुनाई, जिससे मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गई।

आज का दिन बहुत अच्छा और यादगार रहा।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का आशीर्वाद दिया गया है। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तरः मुझे मेरे माता-पिता, अध्यापक और परिजनों से निम्नलिखित प्रकार के आशीर्वाद मिलते हैं:

  • “ईश्वर करे तू खूब पढ़े और ऊँचाई तक पहुँचे।”
  • “तू सदा सच्चाई के रास्ते पर चले।”
  • “हर मुश्किल से लड़ने की ताकत तुझमें हो।”
  • “तेरा मन पढ़ाई में लगे और तू सबका आदर करे।”
  • “भगवान तुझे हर खुशी दे और तेरा आत्मविश्वास हमेशा बना रहे।”

ये सभी आशीर्वाद मुझे आत्मबल देते हैं और मेरे जीवन के लक्ष्यों को पाने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

(ख) आप भी अपने से छोटों के प्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते हैं, उन्हें लिखिए।
उत्तरः मैं अपने से छोटों को इस प्रकार शुभेच्छाएँ देता हूँ:

  • तुम हमेशा खुश रहो।
  • अपने सपनों को कभी छोटा मत समझना।
  • पढ़ाई में मन लगाना और हमेशा अव्वल आना।
  • जो भी चाहो, उसमें सफलता ज़रूर मिले।
  • हमेशा सच्चाई पर चलना और बड़ों का सम्मान करना।

सपनों की बातें

(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें। परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए-

  • किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?

उत्तरः

  1. कड़ी मेहनत करनी होगी।
  2. नियमित पढ़ाई और अनुशासन ज़रूरी होगा।
  3. कठिन विषयों (जैसे विज्ञान, गणित) की गहराई से समझ बनानी होगी।
  4. आत्मविश्वास बनाए रखना होगा।
  • किस तरह से योजना बनानी होगी?

उत्तरः

  1. लक्ष्य के अनुसार पढ़ाई का समय तय करना होगा।
  2. समय का सही प्रबंधन सीखना होगा।
  3. चरणबद्ध योजना बनानी होगी (जैसे – रोज़ का अध्ययन, साप्ताहिक लक्ष्य, मॉक टेस्ट आदि)।
  4. लंबी परीक्षाओं (जैसे NEET/UPSC) के लिए रणनीति बनानी होगी।
  • किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है?

उत्तरः

  1. माता-पिता से भावनात्मक और आर्थिक सहयोग।
  2. अध्यापकों से मार्गदर्शन और शंका समाधान।
  3. दोस्तों/साथियों से प्रेरणा और सहयोगात्मक अध्ययन।
  4. कोचिंग, पुस्तकालय, ऑनलाइन संसाधनों से शैक्षिक सहायता।
  • लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?

उत्तरः 

  1. प्रतियोगिता और परीक्षा का दबाव।
  2. कभी-कभी आत्मविश्वास में कमी आना।
  3. समय की कमी, थकावट या एकाग्रता की कमी।
  4. असफलता के डर से निराशा आना।

हमारे सपने

आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं। वे उन्हें पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं। अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं।
उत्तरः 

सबके सपने

प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत-से लोग सहयोग देते हैं, जैसे- शाक विक्रेता, स्वच्छताकर्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकर्मी आदि। इनमें से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते हैं? उनकी एक सूची भी बनाइए।
उत्तरः साक्षात्कार: एक स्वच्छताकर्मी से बातचीत
नाम: रामू यादव
काम: नगर निगम में स्वच्छता का कार्य
स्थान: हमारे मोहल्ले का मुख्य बाज़ार
प्रमुख बिंदु: रामू जी सुबह 6 बजे काम पर लग जाते हैं। वे रोज़ सड़कें साफ करते हैं, कचरा उठाते हैं और मोहल्ले को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि उनका सपना है कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर एक अच्छा जीवन जिएँ। वह चाहते हैं कि समाज स्वच्छता कर्मचारियों का सम्मान करे।
साक्षात्कार के समय पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न:

  • आपका नाम क्या है?
  • आप कब से यह काम कर रहे हैं?
  • आपका रोज़ का काम कब शुरू होता है और कितने बजे तक चलता है?
  • आपको अपने काम में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ आती हैं?
  • आपका परिवार में कौन-कौन है?
  • आपका सपना क्या है?
  • आपके बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है?
  • आपको अपने काम से जुड़ी कौन सी बात सबसे अच्छी लगती है?
  • आप समाज से क्या उम्मीद करते हैं?
  • आप लोगों से क्या संदेश देना चाहेंगे?

झरोखे से

आपने पढ़ा कि ‘एक आशीर्वाद’ कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढ़िए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद्बोधन जिसमें वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं, बल्कि सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया के विषय में भी बताते हैं-
उत्तरः विद्यार्थी इस प्रेरक उद्बोधन को स्वयं पढ़ने का प्रयास करें और समझें कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सपनों को पूरा करने के लिए क्या सुझाव देते हैं।

साझी समझ

आपने ‘एक आशीर्वाद’ कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तरः ​​​​कक्षा चर्चा के मुख्य बिंदु (एक आशीर्वाद कविता और डॉ. कलाम के भाषण पर):

  • दोनों में सपनों का महत्व बताया गया है।
    कविता में बताया गया है कि जब कोई सच्चा सपना देखा जाता है, तो वह आशीर्वाद बन जाता है। डॉ. कलाम भी कहते हैं कि सपना वह नहीं जो नींद में आए, बल्कि सपना वह है जो आपको सोने न दे।
  • संघर्ष और मेहनत की प्रेरणा:
    दोनों रचनाओं में यह बात उभर कर आती है कि जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए कठिन मेहनत करनी पड़ती है।
  • डॉ. कलाम का जीवन उदाहरण है:
    उन्होंने एक छोटे से गाँव से उठकर देश के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया – यह दिखाता है कि अगर सपना सच्चा हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कुछ भी संभव है।
  • सपने सिर्फ अपने लिए नहीं, समाज के लिए भी होने चाहिए।
    कविता और भाषण दोनों में यह संदेश है कि हमारा सपना ऐसा हो जो दूसरों की भलाई में भी योगदान दे।

खोजबीन के लिए

कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकूद, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में ख्याति प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्रा के बारे में लिखा है। उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़िए।
उत्तरः कुछ प्रसिद्ध व्यक्तियों के सपनों को साकार करने की यात्रा:

पढ़ने के लिए सुझाव:

  • पुस्तकालय में इन महान व्यक्तियों की जीवनी (Biography) पढ़ सकते हैं।
  • इंटरनेट पर इनके इंटरव्यू, वीडियो और लेख आसानी से मिलते हैं।

2. दो गौरैया – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि-

  • घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
  • घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं *
  • पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
  • घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं *

उत्तर: घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं, घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
पिताजी द्वारा घर को “सराय” कहने का कारण यह है कि घर में विभिन्न पक्षी (जैसे गौरैया, तोते, कौवे) और जीव-जंतु (चूहे, चमगादड़, छिपकलियाँ, चीटियाँ आदि) बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते रहते हैं। यहाँ घर की बनावट का विशाल होना या मालिक न होना इस संदर्भ में उपयुक्त नहीं है। पाठ में स्पष्ट है कि जीव-जंतुओं की मौजूदगी और उनका स्वतंत्र रूप से आना-जाना ही घर को सराय जैसा बनाता है।

(2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?

  • माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
  • लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
  • जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे *
  • मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे

उत्तर: जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
कहानी में लेखक कहता है कि वे तो जैसे घर में मेहमान हैं, असली मालिक तो कोई और ही हैं। यह कथन व्यंग्य में उन पक्षियों और जीव-जंतुओं की ओर संकेत करता है जिन्होंने घर में डेरा जमा रखा है।

(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?

  • दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
  • पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया *
  • दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
  • माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया

उत्तर: पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
पिताजी गौरैयों को भगाने के लिए लाठी और शोर का प्रयोग करते हैं, जबकि माँ उन्हें रोकती हैं, मजाक करती हैं और अंत में गंभीर होकर कहती हैं कि अब उन्हें मत भगाओ

(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?

  • माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ *
  • माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे *
  • माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी *
  • माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था

उत्तर: माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ, माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे, माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
माँ को गौरैयों की मासूम हरकतें बहुत प्यारी लगती थीं और पिताजी की कोशिशें उन्हें मजेदार लगती थीं। इसलिए वे कभी व्यंग्य करती थीं, कभी हँसती थीं, ताकि पिताजी को रोक सकें।

(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?

  • दूसरों पर निर्भर रहना
  • असफलताओं से हार मान लेना
  • अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना *
  • संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना

उत्तर: अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
गौरैयाँ बार-बार भगाए जाने पर भी हार नहीं मानतीं, वे फिर-फिर लौटती हैं, नए रास्ते तलाशती हैं। यह उनकी जिजीविषा, संघर्ष-शक्ति और निरंतर प्रयास का प्रतीक है – जो जीवन के लिए आवश्यक गुण हैं।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:

  1. कहानी में बार-बार यह दिखाया गया है कि घर में कई जीव-जंतु (जैसे चूहे, कबूतर, गौरैया आदि) आते-जाते रहते हैं, इसलिए पिताजी ने घर को “सराय” कहा।
  2. गौरैयों ने घर के पंखे में घोंसला बना लिया और वहीं बस गईं, जिससे यह प्रतीत होता है कि घर के असली मालिक वही हैं।
  3. माँ पक्षियों के प्रति सहानुभूति रखती थीं, जबकि पिताजी उन्हें बार-बार भगाने की कोशिश करते रहे।
  4. माँ का व्यवहार व्यंग्यात्मक होते हुए भी गौरैयों को बचाने का माध्यम था।
  5. गौरैयों का बार-बार लौट आना यह दर्शाता है कि जीवन में असफलताओं से हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि लगातार प्रयास करते रहना ही संघर्षशीलता की पहचान है।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।
उत्तर:


(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर: चयन का कारण:

  • ये वाक्य प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गए हैं, अतः उनका अर्थ सीधा न होकर प्रसंग के अनुसार व्याख्यायित करना पड़ता है।
  • अधिकतर अर्थ प्राकृतिक और व्यवहारिक स्थितियों पर आधारित हैं, जैसे चूहों का शोर, पक्षियों का चहकना आदि।
  • ‘राग मल्हार’ का प्रयोग यहाँ गौरैयों की चहचहाहट को सुंदरता से प्रस्तुत करने के लिए किया गया है, न कि शास्त्रीय संगीत के अभ्यास को दर्शाने के लिए।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
उत्तर: 
यह कथन स्थायित्व और अपनत्व को दर्शाता है। पहले गौरैयाँ केवल मकान का निरीक्षण कर रही थीं, इसलिए उन्हें हटाना आसान होता, पर अब उन्होंने वहाँ घोंसला बना लिया है, यानी अब वे इस स्थान को अपना घर मान चुकी हैं। जब कोई व्यक्ति या जीव किसी स्थान, भावना या संबंध से जुड़ जाता है, तो उसे वहाँ से हटाना कठिन हो जाता है। यह बात केवल पक्षियों पर ही नहीं, बल्कि मनुष्यों पर भी लागू होती है।

(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
उत्तर:
 यह पंक्ति पिताजी की सोच और उनकी रणनीति को दर्शाती है। उनका मानना था कि यदि गौरैयों को एक दिन घर में घुसने से रोक दिया जाए, तो वे खुद ही घर छोड़ देंगी। यह सोच मानव प्रवृत्ति को दिखाती है, जहाँ हम मानते हैं कि किसी समस्या को अनदेखा कर देने या थोड़ी देर के लिए रोक देने से वह अपने आप सुलझ जाएगी। लेकिन यह विचार गलत है, क्योंकि अपनापन और संघर्ष की भावना इतनी जल्दी नहीं टूटती। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि अस्थायी रोकथाम से स्थायी बदलाव नहीं आता।

(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
उत्तर: 
यह कथन क्रूर निर्णय और अंतिम उपाय को दर्शाता है। पिताजी यह मानते हैं कि केवल डराने या भगाने से गौरैयों को हटाया नहीं जा सकता, उन्हें हटाना है तो उनका घोंसला यानी उनका घर तोड़ना पड़ेगा। यह बात गहरी है—किसी का घर तोड़ना उसके अस्तित्व पर चोट करना होता है। यह पंक्ति दर्शाती है कि कई बार लोग समस्याओं को हल करने के लिए कठोर और असंवेदनशील उपाय अपनाते हैं।
यह बात इंसानों पर भी लागू होती है—जब किसी को हटाना हो, तो लोग उसका आधार, जैसे घर, नौकरी या सम्मान छीन लेते हैं।

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा – घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तर: 
मुझे इस कहानी में माँ का पात्र सबसे अच्छा लगा। वे संयमित, संवेदनशील और व्यावहारिक हैं। उन्हें पक्षियों और जीव-जंतुओं के प्रति गहरी करुणा है। वे पिताजी की चिड़चिड़ाहट और नाराज़गी का बड़े धैर्य से सामना करती हैं और व्यंग्य तथा हास्य के माध्यम से माहौल को हल्का बनाए रखती हैं। माँ की यह विशेषता मुझे बहुत अच्छी लगी कि वे संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में भी मानवीयता और सहानुभूति नहीं खोतीं। वे न केवल गौरैयों की सुरक्षा करती हैं, बल्कि परिवार में संतुलन भी बनाए रखती हैं।

(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर:
 लेखक के घर में चिड़िया ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बनाया। उसने वहीं इसलिए घोंसला बनाया होगा क्योंकि वह जगह ऊँचाई पर, सुरक्षित, गर्म और शांत थी। वहाँ इंसानों की सीधी पहुँच नहीं थी, इसलिए वह अंडे देने और बच्चों को पालने के लिए उपयुक्त लगी होगी।

(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
उत्तर: 
हाँ, मुझे लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों की तरह अपने घर और परिवार का महत्व समझते हैं। कहानी में गौरैयों ने पहले घर का निरीक्षण किया, फिर वहाँ घोंसला बनाकर अंडे दिए। जब अंडों से बच्चे निकले, तो माता-पिता खतरे के बावजूद बार-बार लौटकर उन्हें चुग्गा देने आते रहे। एक बार जब बच्चों ने “चीं-चीं” करके पुकारा, तो गौरैया और गौरैयाँ तुरंत लौट आए। यह व्यवहार उनके पारिवारिक जुड़ाव और ममता को दर्शाता है। इससे स्पष्ट होता है कि पशु-पक्षी भी अपने परिवार और घर के लिए उतने ही संवेदनशील होते हैं, जितने कि मनुष्य।

(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: 
इस कथन से पिताजी के दृढ़ निश्चयी, आत्मविश्वासी और जुझारू स्वभाव का पता चलता है। वे आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं और लगातार प्रयास करते रहते हैं। गौरैयों को हटाने के लिए उन्होंने कई उपाय किए, परंतु जब कोई उपाय सफल नहीं हुआ, तब भी उन्होंने शांति बनाए रखी और स्थिति को स्वीकार कर लिया। इससे उनकी धैर्यशीलता और व्यवहारिकता भी झलकती है।

(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
उत्तर: 
गौरैयों के व्यवहार में बदलाव तब आया जब उनके घोंसले को तोड़ने की कोशिश की गई और उनके अंडों से बच्चे निकल आए। पहले वे चहकती थीं और मल्हार गाती थीं, पर अंडों के फूटने के बाद वे गुमसुम हो गईं, दुबली और काली भी पड़ गईं। यह बदलाव उनकी चिंता, थकावट और बच्चों की सुरक्षा को लेकर आया।

(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
उत्तर: 
गौरैयों ने निम्नलिखित स्थानों से घर में प्रवेश किया था:

  • दरवाजों के नीचे के खुले स्थानों से
  • टूटे हुए रोशनदान से
  • रसोईघर (किचन) के खुले दरवाजे से
  • अन्य खुले दरवाजों और खिड़कियों से

(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर: 
इस कहानी को लेखक स्वयं सुना रहा है, अर्थात यह प्रथम पुरुष (first person) में लिखी गई है। इसका पता हमें बार-बार आने वाले “मैं” शब्द से चलता है। 
उदाहरण के लिए:

  • “मैंने भागकर दोनों दरवाजे बंद कर दिए।”
  • “मैंने सिर उठाकर ऊपर की ओर देखा।”
  • “मैंने देखा, पिताजी स्टूल से उतर आए हैं।”

इन वाक्यों से स्पष्ट है कि लेखक स्वयं इस कहानी का प्रेक्षक (देखने वाला) और कथावाचक (कहने वाला) दोनों है।

(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर: 
माँ बार-बार कह रही थीं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी क्योंकि उन्होंने वहाँ घोंसला बनाया था और उसमें अंडे भी दे दिए थे। माँ जानती थीं कि जब कोई पक्षी अंडे देता है, तो वह अपने बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाता, चाहे कोई भी खतरा हो। माँ को यह भी समझ थी कि जानवर और पक्षी अपने घर और बच्चों से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। इसलिए माँ को यकीन था कि गौरैयाँ नहीं जाएँगी।

अनुमान और कल्पना से

(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
उत्तर: मैं उन्हें देखकर बहुत खुश होता। मैं कभी उन्हें तंग न करता और उनके लिए दाना-पानी रखने की कोशिश करता। मैं यह भी ध्यान रखता कि उनके घोंसले के पास शांति बनी रहे, ताकि वे बिना डर के वहाँ रह सकें।

(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
(प्राणियों के नाम- चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)

उत्तर: घर में अलग-अलग प्राणियों के घुसने पर लोगों का व्यवहार उनके स्वभाव और प्रभाव पर निर्भर करेगा:

  • चूहा / मच्छर / कॉकरोच / मक्खी: इन्हें तुरंत भगाने या मारने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि ये बीमारी फैलाते हैं और गंदगी करते हैं।
  • कुत्ता: यदि वह पालतू है, तो उसे अपनाया जाएगा; लेकिन अगर आवारा है, तो लोग उसे डराकर बाहर करने की कोशिश करेंगे।
  • तितली: इसे देखकर खुशी होगी; कोई उसे धीरे से बाहर छोड़ सकता है ताकि उसे नुकसान न पहुँचे।
  • बिल्ली: कुछ लोग डरकर उसे भगाने की कोशिश करेंगे, और कुछ उसे बाहर निकालने की शांति से कोशिश करेंगे, खासकर यदि वह बार-बार घर में आती हो।
  • कबूतर: आमतौर पर लोग उसे नुकसान नहीं पहुँचाते; दरवाजा/खिड़की खोलकर शांति से बाहर निकालने का प्रयास करेंगे।

(ग) मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
उत्तर: लेखक को हैरानी तब हुई जब उसने देखा कि घोंसले में दो नन्हीं गौरैयाँ हैं, जो चीं-चीं करके अपने माता-पिता को बुला रही थीं।
कारण: लेखक को यह अनुमान नहीं था कि घोंसले में बच्चे होंगे। यह दृश्य नवजीवन, मासूमियत और पारिवारिक स्नेह से भरा हुआ था, जिससे लेखक चकित रह गया।


(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर: माँ को गौरैयों के प्रति दया और स्नेह था, इसलिए उन्होंने उन्हें घर से निकालने में पिताजी की सहायता नहीं की। वे नहीं चाहती थीं कि नन्ही गौरैयों को कोई नुकसान पहुँचे। माँ ने व्यंग्य और मज़ाक के ज़रिए पिताजी को रोकने की कोशिश की — यह उनकी समझदारी, करुणा और कोमल हृदय को दर्शाता है।

(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत- आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
उत्तर: मैंने देखा कि एक कुत्ता हमेशा एक दुकान के बाहर बैठा रहता है। वह वहाँ से हिलता भी नहीं। मैंने अनुमान लगाया कि शायद वह उस दुकान के मालिक का पालतू है या उसे वहाँ से रोज़ाना खाना मिलता है। वह हर आने-जाने वाले को ध्यान से देखता है, लेकिन किसी पर भौंकता नहीं। इससे लगता है कि वह शांत और समझदार स्वभाव का है।

(च) “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर: 

संवाद और अभिनय

नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-

(क) “वे अभी भी झाँक जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं” — नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?
उत्तर: नन्हीं गौरैयाएँ शायद कह रही होंगी:

  • “देखो बहन, यह हमारा घर है!”
  • “माँ-बाबा कहाँ चले गए?”
  • “हम अकेले हैं, डर लग रहा है!”
  • “चीं-चीं! कोई हमें खाना दे दो!”
  • “क्या हमें यहीं रहना है अब?”

(ख) “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” घोंसले से झाँकती गौरैयाएँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?
उत्तरः घोंसले से झाँकती गौरैयाएँ आपस में शायद कह रही होंगी:

  • “अरे! यह आदमी इतनी उछल-कूद क्यों कर रहा है?”
  • “लगता है यह हमें यहाँ से भगाना चाहता है!”
  • “मुझे तो हँसी आ रही है, यह तो खुद उड़ने की कोशिश कर रहा है!”
  • “हम कहीं नहीं जाएँगे, अब तो यही हमारा घर है!”

(ग) “एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आई और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?
उत्तरः पहली बार घर में घुसने पर गौरैयाओं ने आपस में शायद यह बातें की होंगी:

  • “वाह! कितना खुला, शांत और सुरक्षित घर लगता है!”
  • “इस कोने में घोंसला बनाना ठीक रहेगा।”
  • “पहले अच्छे से देख लो, कहीं कोई खतरा तो नहीं?”
  • “सब ठीक है, चलो अब यहीं रहेंगे!”

(घ) “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्ही-नन्ही चोंचों में चुगा डालने लगे।” गौरैयाँ और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?
उत्तरः माँ-बाप गौरैयाओं और उनके बच्चों के बीच संवाद:
बच्चे:

  • “माँ, आप आ गए! हमें बहुत भूख लगी थी!”
  • “चीं-चीं! आपने हमें अकेला क्यों छोड़ दिया?”
  • “हमें डर लग रहा था!”

माँ-बाप:

  • “हम यहीं हैं, बच्चों। अब डरने की ज़रूरत नहीं!”
  • “लो, यह चुगा खाओ और आराम से बैठो!”
  • “हम फिर दाना लाने जा रहे हैं, जल्दी लौटेंगे।”

बदली कहानी

मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तरः अगर अंडों से बच्चे न निकले होते, तो पिताजी शायद बिना झिझक घोंसला तोड़ देते। गौरैयाँ कई बार लौटकर आतीं, लेकिन घोंसला न पाकर दुखी हो जातीं और अंततः किसी और सुरक्षित स्थान की खोज में उड़ जातीं। माँ यह सब चुपचाप देखतीं, मन में पीड़ा होती, पर कुछ कहतीं नहीं। लेखक के मन में यह घटना गहराई से बैठ जाती। घर एक बार फिर शांत हो जाता, लेकिन गौरैयों की चहचहाहट की कमी सबको खलने लगती। धीरे-धीरे पिताजी भी सोचने लगते कि उन्होंने कुछ बेहद सुंदर और जीवन्त खो दिया। कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती, जहाँ पश्चाताप, खालीपन और प्रकृति से जुड़ाव की टूटन का गहरा एहसास छा जाता।

कहने के ढंग/क्रिया विशेषण

“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।”
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रिया विशेषण शब्द है।
अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
उत्तरः माँ ने बर्तन झिड़ककर रसोई से बाहर रख दिए।

(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
उत्तरः शिक्षक ने छात्रों को गंभीरता से पढ़ाई करने की सलाह दी।

(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
उत्तरः राहुल गुस्से में किताब पटककर चला गया।

अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
(संकेत- धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)
उत्तरः 

  • धीरे से: वह धीरे से कमरे में दाखिल हुआ ताकि कोई जाग न जाए।
  • जोर से: बच्चा खेलते-खेलते जोर से हँस पड़ा।
  • अटकते हुए: परीक्षा में उसने उत्तर अटकते हुए दिया।
  • चिल्लाकर: वह चिल्लाकर बोला, “यह मेरी चीज़ है!”
  • शरमाकर: लड़की शरमाकर नीचे देखने लगी।
  • सहमकर: वह तेज आवाज सुनकर सहमकर पीछे हट गया।
  • फुसफुसाते हुए: बच्चे आपस में फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे।

घर के प्राणी

कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?

(क) बिल्ली – फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) __________________________________________
(ग) __________________________________________
(घ) __________________________________________
(ङ) __________________________________________

उत्तरः (क) बिल्ली – “फिर आऊँगी” कहकर चली जाती है — जैसे कोई व्यक्ति वादा कर के जाता है।
(ख) चूहे – भागदौड़ करते हैं, धमाचौकड़ी मचाते हैं — जैसे बच्चे खेलते समय शोर मचाते हैं।
(ग) चमगादड़ – उल्टे लटके रहते हैं, छुपने की जगह ढूंढते हैं — जैसे कोई डरपोक व्यक्ति कोना पकड़ ले।
(घ) कबूतर – कोठी के कोने में कब्जा करके बैठते हैं — जैसे किरायेदार बिना पूछे रहने लग जाए।
(ङ) गौरैया – निरीक्षण करती हैं, घोंसला बनाती हैं, बच्चों की देखभाल करती हैं — जैसे कोई परिवार नया घर देखकर उसमें रहने का निर्णय लेता है।

हेर-फेर मात्रा का

“माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।”
“पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।
अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

  • नाच – नाचा – नचा
  • हार – हरा – हारा
  • पिता – पीता
  • चूक – चुक
  • नीचा – नीचे
  • सहसा – साहस

उत्तरः 

  • नाच – नाचा – नाच
    नाच (संज्ञा):
     मुझे नाच देखना बहुत पसंद है।
    नाचा (क्रिया – भूतकाल): वह खुशी में पूरे गाँव में नाचा।
  • हार – हारा
  • हार (संज्ञा): उसने माँ को फूलों की हार भेंट की।
    हारा (क्रिया): वह चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी से हारा।
  • पिता – पीता
    पिता (संज्ञा): 
    मेरे पिता बहुत अनुशासनप्रिय हैं।
    पीता (क्रिया): वह रोज़ दूध पीता है।
  • चुक – चूक
  • चुक (क्रिया – भूतकाल): मैं समय पर टिकट लेना चुक गया।
    चूक (संज्ञा): यह तुम्हारी बड़ी चूक थी कि तुम समय पर नहीं पहुँचे।
  • नीचा – नीचे
    नीचा (विशेषण): उसने अपनी गलती मानकर सिर नीचा कर लिया।
    नीचे (क्रिया/क्रिया विशेषण): किताब मेज़ के नीचे रखी है।
  • सहसा – साहस
    सहसा (क्रिया विशेषण):
     सहसा जोर की आवाज़ आई और सब चौंक गए।
    साहस (संज्ञा): कठिन समय में साहस नहीं खोना चाहिए।

वाद-विवाद

कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं-
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।”
कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद का विषय है-
“माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”

उत्तरः 
पक्ष में तर्क (निकालना चाहिए था):

  • स्वच्छता का प्रश्न: पक्षियों से गंदगी फैलती है, जिससे बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • घरेलू नुकसान: उनके घोंसले से सीलन, बदबू या दीवार की खराबी हो सकती है।
  • मानव प्राथमिकता: यह मनुष्यों का घर है, अन्य प्राणी अपने प्राकृतिक स्थानों पर रहें।
  • नियंत्रण आवश्यक: यदि एक बार घोंसला बना, तो हर साल आते रहेंगे।

विपक्ष में तर्क (नहीं निकालना चाहिए था):

  • सह-अस्तित्व की भावना: मनुष्य और पक्षी दोनों एक ही पारिस्थितिकी तंत्र के अंग हैं।
  • ममता और जीवन का सम्मान: अंडों के साथ घोंसला तोड़ना अमानवीयता है।
  • प्रजातियों का संरक्षण: गौरैया जैसी पक्षियों की संख्या घट रही है, उनका संरक्षण जरूरी है।
  • माँ का दृष्टिकोण: ये जीव घर को जीवंत और आनंदमय बनाते हैं।

कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।
उत्तरः छात्रों के संवाद (उदाहरण):

  • पक्ष: “अगर हर कोई अपने घर में पक्षियों को घोंसला बनाने देगा, तो घर, घर नहीं रहेगा — जंगल बन जाएगा।”
  • विपक्ष: “लेकिन अगर हर कोई उन्हें भगाएगा, तो ये मासूम पक्षी जाएँगे कहाँ?”
  • पक्ष: “गौरैया गंदगी फैलाती हैं, बच्चों की सेहत के लिए यह ठीक नहीं।”
  • विपक्ष: “तो क्या हम केवल अपने आराम के लिए किसी के जीवन को उजाड़ दें?”

कहानी की रचना

“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।”
इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।

(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तरः कहानी की प्रमुख विशेषताएँ (बिंदुवार सूची):

  • प्रकृति और जीवों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश
    – कहानी हमें यह सिखाती है कि मनुष्य को अन्य जीवों के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।
  • मानव स्वभाव में बदलाव की झलक
    – पिताजी की सोच में जो परिवर्तन आया, वह एक मानवीय भावनात्मक विकास दर्शाता है।
  • सहज और सरल भाषा, बाल दृष्टिकोण के अनुकूल
    – भाषा शैली बच्चों के दृष्टिकोण से बहुत प्रभावी है।
  • प्रत्येक पात्र का अलग व्यवहार और शैली
    – माँ का स्नेह, पिताजी का कठोरता से बदलाव, और लेखक की निरीक्षण क्षमता साफ झलकती है।
  • पक्षियों के व्यवहार को मानवीय रूप देना
    – जैसे गौरैया बच्चों से बातें कर रही हों, ऐसा चित्रण कहानी को रोचक बनाता है।
  • व्यंग्य और हल्के हास्य का प्रयोग
    – माँ द्वारा पिताजी की हरकतों पर हँसना कहानी को हल्का-फुल्का बनाता है।
  • भावनात्मकता और करुणा का सुंदर चित्रण
    – माँ का घोंसले को न तोड़ने का आग्रह और लेखक का अंत में भावुक होना।
  • रचनात्मक कल्पना और भावनात्मक प्रतीक
    – जैसे गौरैया मल्हार गा रही हो – यह कल्पना कहानी को काव्यात्मक बनाती है।
  • घरेलू वातावरण और दिनचर्या का यथार्थ चित्रण
    – कहानी में एक सामान्य घर की सजीव झलक मिलती है।
  • छोटे विवरणों में गहराई
    – छोटे संवाद और घटनाएँ भी बड़ा प्रभाव छोड़ती हैं, जैसे बच्चे चीं-चीं करते हैं और माँ मुस्कराती हैं।

(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।
उत्तरः विशेषताओं के उदाहरण सहित वर्णन

  • जीव-जंतुओं का मानवीकरण
    उदाहरण: “अब एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगी। पिताजी कहने लगे कि मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं।”
    विश्लेषण: गौरैयों को मानवीय गुण दिया गया है, जैसे कि वे मकान का निरीक्षण कर रही हों, जो मानव व्यवहार को दर्शाता है।
  • हास्य का समावेश
    उदाहरण: “माँ फिर हँस दी। ‘तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो। एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो।'”
    विश्लेषण: माँ का पिताजी के असफल प्रयासों पर व्यंग्य और हँसी कहानी में हास्य उत्पन्न करता है।
  • मानवीय भावनाओं का चित्रण
    उदाहरण: “पिताजी के हाथ ठिठक गए। … पिताजी स्टूल पर से नीचे उतर आए हैं। और घोंसले के तिनकों में से लाठी निकालकर उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया है और चुपचाप कुर्सी पर आकर बैठ गए हैं।”
    विश्लेषण: नन्हीं गौरैयों को देखकर पिताजी का गुस्सा सहानुभूति में बदल जाता है, जो उनकी मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।
  • प्रकृति और मानव के बीच संबंध
    उदाहरण: “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चाँचों में चुग्गा डालने लगे।”
    विश्लेषण: गौरैयों का अपने बच्चों की देखभाल करना और मानव परिवार का इसे देखना प्रकृति और मानव के बीच स्नेहपूर्ण संबंध को दर्शाता है।
  • सामाजिक व्यंग्य
    उदाहरण: “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
    विश्लेषण: माँ का यह व्यंग्य पिताजी की असफल कोशिशों पर हल्का-सा सामाजिक कटाक्ष है, जो उनकी सीमाओं को उजागर करता है।

नोट: प्रत्येक विशेषता के लिए कहानी से प्रासंगिक उदाहरण चुने गए हैं, जो संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से विशेषता को दर्शाते हैं।

आपकी बात

उत्तरः 

पाठ से आगे

(क) “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तरः मेरे घर के पास कई तरह के पक्षी आते हैं — कबूतर, मैना, कोयल और कभी-कभी तोते भी। मैंने उन्हें कई बार सुबह-सुबह चहचहाते, पेड़ों की डालियों पर फुदकते और अपने बच्चों को दाना खिलाते देखा है।
उनके व्यवहार में कई भाव दिखाई देते हैं:

  • प्रेम और ममता: जब वे अपने बच्चों को चोंच से खाना खिलाते हैं।
  • सावधानी और सतर्कता: जब कोई पास जाता है, तो वे फुर्र से उड़ जाते हैं।
  • खुशी: सुबह के समय वे चहचहाकर जैसे खुशियाँ बाँटते हैं।
  • मिल-जुलकर रहना: कई बार वे एक साथ दाना चुगते हैं, लेकिन आपस में लड़ते नहीं।

(ख) “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तरः हाँ, मैं अपनी छोटी बहन के साथ अपना कमरा और खिलौने साझा करता हूँ। कभी-कभी मैं अपनी किताबें दोस्तों को पढ़ने के लिए भी देता हूँ।
साझेदारी में कभी-कभी समस्याएँ आती हैं, जैसे:

  • कोई मेरी चीज़ बिना पूछे ले लेता है।
  • दोनों को एक ही चीज़ एक साथ चाहिए होती है।

इन समस्याओं का समाधान मैं इस तरह करता हूँ:

  • मैं उनसे शांतिपूर्वक बात करता हूँ।
  • हम समय बाँट लेते हैं, जैसे एक चीज़ को आधा-आधा समय उपयोग करना।
  • अगर बात नहीं बनती, तो माँ-पापा से मदद लेता हूँ।

साझा करने से हम दूसरों की ज़रूरत को समझते हैं और हमारे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं।

(ग) परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तरः हाँ, एक बार स्कूल में एक नया लड़का आया था। वह बहुत चुपचाप और अकेला रहता था। पहले मुझे लगा कि वह घमंडी है, इसलिए मैं उससे बात नहीं करता था।
फिर एक दिन वह मुझसे पेंसिल माँगने आया। जब मैंने उससे बात की, तो पता चला कि वह बहुत शर्मीला है, लेकिन बहुत दयालु और मददगार भी है। उसके बाद हम अच्छे दोस्त बन गए।
इस घटना से मुझे यह सीख मिली कि किसी को अच्छी तरह जाने बिना उसके बारे में राय नहीं बनानी चाहिए।

चिड़ियों का घोंसला

घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।

(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूंढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी – उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)

उत्तरः 

(ख) विभिन्न पक्षियों के घोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तरः 
1. गौरैया (House Sparrow)

  • घोंसले का आकार: छोटा और गोल
  • घोंसले की सामग्री: सूखी घास, रुई, पंख और धागे
  • स्थान: छत, रोशनदान या पुरानी अलमारियों में
  • विशेषता: घरों के पास रहना पसंद करती है

2. कबूतर (Pigeon)

  • घोंसले का आकार: बड़ा, खुला और साधारण
  • घोंसले की सामग्री: सूखी टहनियाँ और डंडियाँ
  • स्थान: खिड़कियों, मुंडेरों या रोशनदानों में
  • विशेषता: इंसानों के आस-पास रहना पसंद करते हैं

3. बुलबुल (Red-vented Bulbul)

  • घोंसले का आकार: प्याले जैसा सुंदर
  • घोंसले की सामग्री: नाजुक तिनके, धागे, पत्तियाँ
  • स्थान: झाड़ियों या छोटे पेड़ों में
  • विशेषता: बहुत सुरिली आवाज में चहकती है

4. अबाबील (Swallow)

  • घोंसले का आकार: गोल और चिपका हुआ
  • घोंसले की सामग्री: मिट्टी और लार
  • स्थान: दीवार या छत के कोनों में
  • विशेषता: समूह में घोंसले बनाते हैं

5. मैना (Common Myna)

  • घोंसले का आकार: बड़ा और आरामदायक
  • घोंसले की सामग्री: सूखी लकड़ियाँ, पत्ते, कागज़
  • स्थान: पेड़ों के खोखलों या दीवार की दरारों में
  • विशेषता: मनुष्यों के आसपास रहना पसंद करती है

मल्हार

“जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”
‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक प्रसिद्ध राग का नाम है। यह राग वर्षा ऋतु से जुड़ा है। आप जानते ही हैं कि आपकी हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम मल्हार भी इसी राग के नाम पर है।
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से राग मल्हार को सुनिए और इसका आनंद लीजिए-
https://www.youtube.com/watch?v=3iQHe2hIJGM
https://www.youtube.com/watch?v=pHbXFAhQtpl
https://www.youtube.com/watch?v=7K3SYX8THkw

उत्तरः विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

हास्य-व्यंग्य

“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे! माँ ने व्यंग्य से कहा।”
आप समझ गए होंगे कि इस वाक्य में माँ ने पिताजी से कहा है कि वे चिड़ियों को नहीं निकाल सकते। इस प्रकार से कही गई बात को ‘व्यंग्य करना’ कहते हैं।
व्यंग्य का अर्थ होता है- हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी, बुराई या विडंबना को उजागर करना।
व्यंग्य में बात को सीधे न कहकर उलटा या संकेतात्मक ढंग से कहा जाता है ताकि उसमें चुटकीलापन भी हो और गंभीर सोच की संभावना भी बनी रहे। अनेक बार व्यंग्य में हास्य भी छिपा होता है।

(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तरः

  • “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
  • “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहीं घोंसला बना लिया है!”
  • “चूहे धमाचौकड़ी मचाते हैं, जैसे पूरी कोठी उन्हीं की हो!”
  • “पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे।”
  • “हम नीचे उतरकर आए, तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”
  • “माँ मुस्कराकर बोलीं – अब तो ये कहीं नहीं जाएँगी!”

(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।
उत्तरः

आज की पहेली

नीचे दी गई चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।
उत्तरः

झरोखे से

‘दो गौरैया’ कहानी में आपने पढ़ा कि ‘दो गौरैया’ लेखक के घर में बिन बुलाए अतिथि की तरह आ जाती हैं। पिछले कई वर्षों से गाँव-नगरों में इन नन्हीं चिड़ियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। इसलिए भारत सरकार ने इनके संरक्षण के लिए 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ घोषित किया है। आइए, पढ़ते हैं ‘विश्व गौरैया दिवस’ पर प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा प्रकाशित लेख का एक अंश-
उत्तरः विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग कर इस लेख को पूरा पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
https://www.pib.gov.in/Press ReleasePage.aspx?PRID=2112370

उत्तरः कक्षा में हम सभी मिलकर यह प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा प्रकाशित लेख पढ़ सकते हैं। फिर चर्चा कर सकते हैं कि:

  • विश्व गौरैया दिवस क्यों घोषित किया गया?
  • सितम्बर में गौरैयों की संख्या घटने के कारण क्या चुनौतियाँ हैं?
  • हमें अपने आस-पास किन-किन तरीकों से इनके संरक्षण में योगदान देना चाहिए?

इस तरह हम लेख पढ़ने के साथ ही विचार-विमर्श करके विषय को सम्पूर्ण रूप से समझ सकते हैं।

1. स्वदेश – Textbook Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-

  • सामाजिकता से
  • संवेदनहीनता से *
  • कठोरता से *
  • नैतिकता से 

उत्तर: संवेदनहीनता से, कठोरता से
इस पंक्ति में हृदय को पत्थर कहने का अर्थ है कि उसमें कोई भावना, संवेदना या प्यार नहीं है। ऐसा दिल जो अपने देश के लिए कुछ महसूस नहीं करता, वह सिर्फ एक कठोर पत्थर जैसा है।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?

  • देश की प्रगति
  • देश के प्रति प्रेम * 
  • देश की सुरक्षा
  • देश की स्वतंत्रता

उत्तर: देश के प्रति प्रेम
कविता “स्वदेश” में कवि व्यक्ति के देशप्रेम, समर्पण, और कर्तव्यनिष्ठा को सबसे बड़ा मूल्य मानता है। वह कहता है कि जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम नहीं है, वह पत्थर के समान है। कवि ऐसे जीवन को व्यर्थ बताता है जिसमें देश के लिए कोई भावना, जोश या बलिदान का जज्बा न हो। वह व्यक्ति जो अपने देश के उत्थान और उद्धार के लिए कुछ नहीं करता, उसकी कोई सार्थकता नहीं है।

3. “हम हैं जिसके राजा-रानी”- इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?

  • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
  • देश की शासन व्यवस्था के लिए
  • देश के समस्त नागरिकों के लिए *
  • देश के सभी प्राणियों के लिए

उत्तर: देश के समस्त नागरिकों के लिए
पंक्ति “हम हैं जिसके राजा-रानी” में कवि देश के प्रत्येक नागरिक को संबोधित करता है। यहाँ ‘हम’ का तात्पर्य देशवासियों से है — वे लोग जो इस राष्ट्र के भाग्यविधाता हैं, जो देश के स्वामी और संरक्षक हैं। लोकतंत्र की भावना के अनुसार, हर नागरिक को देश की सत्ता में बराबरी का अधिकार होता है।
इसलिए, कवि यह भाव प्रकट करता है कि हर नागरिक अपने देश का राजा या रानी है, अर्थात देश का स्वाभिमानी, जिम्मेदार और सक्रिय हिस्सा है। यह पंक्ति राष्ट्रीय स्वाभिमान, नागरिक अधिकार और उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?

  • जिसमें साहस की कमी है
  • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
  • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है *
  • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है

उत्तर: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
कविता “स्वदेश” का आरंभ ही इस पंक्ति से होता है: “वह हृदय नहीं है, पत्थर है — जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
यह स्पष्ट रूप से बताता है कि जिस हृदय में अपने देश के प्रति प्रेम और समर्पण नहीं है, वह भावनाशून्य है, जैसे एक निर्जीव पत्थर। कवि देशप्रेम को जीवन का सर्वोच्च भाव मानता है, और उसके बिना मनुष्य का जीवन निरर्थक और शुष्क माना गया है।
इसलिए, कविता के अनुसार देश-प्रेम रहित हृदय ही पत्थर के समान है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: 

  1. संवेदनहीनता और कठोरता से तात्पर्य है कि ऐसा हृदय दूसरों की पीड़ा या देश की चिंता नहीं करता। इसीलिए उसे “पत्थर” कहा गया है।
  2. कविता में बार-बार “स्वदेश” के लिए प्रेम, भाव, त्याग और कर्तव्य की बात की गई है, इसलिए इसका मुख्य भाव देशभक्ति ही है।
  3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति देश की जनता की गरिमा दर्शाती है, अतः ‘हम’ शब्द देश के सभी नागरिकों के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  4. कवि स्पष्ट कहते हैं- “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं”, अतः ऐसा हृदय ही पत्थर समान है।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

उत्तर: 

पंक्तियों पर चर्चा

​कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में जीवन की अनित्यता को स्वीकार किया गया है। कवि कहता है कि मृत्यु निश्चित है — इसमें कोई संदेह नहीं। जैसे समय का दीपक हमेशा जलता रहता है, वैसे ही उसकी लौ में हर किसी को जलना ही है, यानी जीवन का अंत होना ही है। जैसे परवाना दीपक की लौ में जल जाता है, वैसे ही हर जीवन को अंत की ओर जाना है।
विचार: हमें मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि जीवन को सार्थक बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। यह जीवन सीमित है, इसलिए इसे उद्देश्यपूर्ण और देश, समाज या मानवता के लिए समर्पित करना चाहिए।

(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।”

उत्तर: अर्थ: इन पंक्तियों में कवि आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना को बल देता है। वह कहता है कि हमारे पास सब कुछ है — शक्ति, साधन, साहस — तो फिर देश को स्वतंत्र और समृद्ध बनाने से कौन रोक सकता है? लेकिन यदि किसी के हृदय में देश के लिए प्रेम नहीं है, तो ऐसा हृदय पत्थर के समान है।
विचार: देश की रक्षा और प्रगति के लिए केवल शस्त्र ही नहीं, बल्कि सच्चा देशप्रेम भी जरूरी है। जब तक हृदय में देश के लिए प्रेम, त्याग और कर्तव्य की भावना नहीं होगी, तब तक कोई परिवर्तन संभव नहीं।

(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं ।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”

उत्तर: अर्थ: यह पंक्ति एक संवेदनहीन और भावशून्य जीवन की आलोचना करती है। कवि कहता है कि जो हृदय भावनाओं से रिक्त है, जिसमें प्रेम, संवेदना और देशभक्ति का प्रवाह नहीं है — वह जीवित होकर भी निर्जीव है। ऐसा हृदय पत्थर जैसा है।
विचार: मनुष्य को भावनाओं से परिपूर्ण होना चाहिए, खासकर अपने देश के प्रति। केवल भौतिक जीवन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक, संवेदनशील और राष्ट्रप्रेम से भरा जीवन ही सच्चा जीवन है।

सोच-विचार के लिए

कविता को पुन: ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए।

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर: 
“हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में ‘हम’ शब्द भारत के नागरिकों के लिए प्रयोग हुआ है। कवि यह कहना चाहता है कि हम उसी देश के निवासी हैं, जो हमें सब कुछ देता है – अन्न, जल, प्रेम, ज्ञान और पहचान। इसलिए हम सब उस देश के ‘राजा-रानी’ हैं – यानी उसे सम्मान और गौरव के साथ अपना समझने वाले स्वाभिमानी नागरिक।

(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
 ‘संसार-संग चलना’ का अर्थ है – समय, समाज और दुनिया की गति के साथ तालमेल बनाए रखना, प्रगति और परिवर्तन के साथ चलना। जो व्यक्ति या राष्ट्र समय के साथ नहीं चलता, वह पिछड़ जाता है और उसकी पहचान मिट जाती है। इसलिए कवि कहता है कि जो संसार के साथ नहीं चलता, संसार उसे अपनाता नहीं और वह समाज में महत्वहीन बन जाता है।

(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर: 
इस पंक्ति का अर्थ है – जिस व्यक्ति का हृदय अपने देश पर प्रेम से नहीं पसीजता, जिसमें अपने देश के प्रति संवेदना नहीं है, वह इस धरती पर बोझ मात्र है। वह केवल जी रहा है, लेकिन उसका जीवन समाज या राष्ट्र के लिए कोई उपयोगी योगदान नहीं दे रहा।

(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर: 
देश-प्रेम का अर्थ है – अपने देश के लिए सच्ची निष्ठा, सेवा और समर्पण का भाव रखना। इसका मतलब केवल भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मों से भी जुड़ा है – देश की रक्षा करना, उसकी उन्नति के लिए मेहनत करना, सामाजिक कुरीतियों का विरोध करना और देशवासियों के प्रति अपनत्व और सहयोग की भावना रखना।

(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर: इस कविता की निम्न विशेषताएँ हैं:

  • प्रेरणात्मक शैली: कविता पाठकों में देश-प्रेम, आत्मबल, और साहस की भावना जाग्रत करती है।
  • सशक्त भाषा और दोहराव: “वह हृदय नहीं है, पत्थर है…” जैसी पंक्तियाँ बार-बार आकर गहरा प्रभाव डालती हैं।
  • भावात्मकता: पूरी कविता में देश के प्रति भावुकता और गहरा जुड़ाव दिखाया गया है।
  • सामाजिक और नैतिक संदेश: यह कविता हमें आत्मनिरीक्षण करने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती है।
  • काव्यगत सौंदर्य: कविता में अनुप्रास, रूपक और प्रतीक जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है – जैसे “काल-दीप”, “परवाना”, “रस-धार” आदि।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और लिखिए।

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर: 
इस पंक्ति में ‘खजाने’ से तात्पर्य केवल धन-दौलत या सोना-चाँदी नहीं है, बल्कि भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं से है। यह देश अपने प्राकृतिक संसाधनों (जैसे – नदियाँ, पर्वत, वन), ऐतिहासिक धरोहरों, साहित्य, कला, संगीत, शिक्षा, ज्ञान और मूल्यों का खजाना है, जिसे पूरी दुनिया सराहती है।विज्ञान की किताबें

(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर: 
‘उगे बढ़े’ शब्द देश के नागरिकों के लिए प्रयुक्त हुआ है। यह देश हमारी जन्मभूमि है, यहीं हम पले-बढ़े, यहीं का अन्न-पानी खाया। इसलिए यह देश हमारे जीवन की जड़ है – हमारी पहचान, परवरिश और संस्कृति की नींव। इसी धरती ने हमें जीवन और विकास का अवसर दिया।

(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
 यहाँ ‘पत्थर’ एक रूपक है, जो उस व्यक्ति के हृदय के लिए प्रयुक्त हुआ है जिसमें देश के लिए प्रेम, संवेदना और समर्पण नहीं है। पत्थर में न तो भावना होती है, न ही प्रतिक्रिया। ऐसा हृदय निस्संवेदनशील, कठोर और निष्क्रिय होता है – जो देश के लिए कुछ नहीं करता।

(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
(संकेत – पत्थर — जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी। …)
उत्तर:

  • पत्थर कहेगाः “जब मैं नदी में था, तब पानी की धार ने मुझे गोल-मटोल बना दिया। पहाड़ों से लुढ़कते हुए मैंने समय की चोटें सहीं। किसी दिन मैं मंदिर की सीढ़ी बना, किसी दिन किसी इमारत की नींव। लेकिन कुछ लोगों ने मुझे नफरत और हिंसा के लिए भी इस्तेमाल किया।”
  • मैं पत्थर से कहूँगाः “तुम सहनशील हो, मजबूत हो तुमने समय को झेला है। पर अब मैं तुम्हें ऐसे काम में लगाऊँगा, जिससे शांति, कला और सेवा फैले। तुम नफरत का हथियार नहीं, प्रेम और निर्माण का आधार बनो।”

(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
 देश-प्रेम का संबंध केवल युद्ध से नहीं बल्कि देश के संसाधनों की रक्षा से भी है। इनमें शामिल हैं:

  • जल स्रोत: नदियाँ, झीलें, वर्षा जल
  • वन और वन्य जीव: जैव विविधता
  • संस्कृति और विरासत: ऐतिहासिक स्मारक, भाषाएँ, परंपराएँ
  • प्राकृतिक संसाधन: कोयला, लोहा, खनिज आदि
  • पर्यावरण: वायु, मिट्टी, जलवायु
  • शिक्षा और ज्ञान: विद्यालय, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय

कविता की रचना

“जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें, 
हम हैं जिसके राजा-रानी।।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’ कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: 

  • कविता में लय और संगीतात्मकता आती है।
  • पाठकों या श्रोताओं को याद रखने में आसानी होती है।
  • कविता में मनोरंजन और आकर्षण बढ़ता है।
  • तुकबंदी के कारण भाव और विचार अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होते हैं।
  • उदाहरण: “दाना-पानी / राजा-रानी” — यह जोड़ी कविता को सुंदर और गेय बनाती है।

(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर: कविता को प्रभावशाली बनाने के अन्य प्रयोगः

  • प्रतीकात्मक भाषा: जैसे ‘पत्थर’, ‘परवाना’, ‘तोप-तलवार’
  • भावनात्मक अपील: देशभक्ति, त्याग, साहस को जगाना
  • पुनरावृत्ति: “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति बार-बार आती है जिससे विचार गहराता है।
  • आह्वान शैली: कविता पाठकों को प्रेरित करती है।
  • लय और गति: कविता की भाषा सरल, प्रवाहमयी और तेज़ है, जो संदेश को ताक़त देती है।

आपकी कविता

देश-प्रेम से जुड़े विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-
वह हृदय नहीं है पत्थर है, 
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

उत्तर: वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जिसने देश के लिए न सोचा,
उसका जीवन तो बेकार है।
जो मिट्टी हमें जीवन देती,
जिसमें खेला, पला बढ़ा।
उसी को भूल जाए कोई,
तो क्या उसका मन सच्चा?
भारत माँ की सेवा करना,
सबसे बड़ा धर्म है।
जो इसके लिए कुछ न कर पाए,
उसका जीवन तो शर्मनाक है।
चलो मिलकर कुछ ऐसा करें,
जिससे देश का मान बढ़े।
हमारे अच्छे कर्मों से,
भारत सुंदर और महान बने।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए –
उत्तर: 

(ख) विराम चिह्नों को समझें
“जो चल न सका संसार-संग
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत ‘जो चल न सका संसार के संग’)

उत्तर: 

(ग) शब्द-मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल-दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’ 
‘काल-दीप हरदम जलता है।’

  • अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।

उत्तर: पंक्तियाँ जिनमें ‘है’ पहले आया है – उदाहरणः
1. है जान एक दिन जाने को।
→ बदली हुई पंक्तिः जान एक दिन जाने को है।
2. है काल-दीप जलता हरदम
→ बदली हुई पंक्तिः काल-दीप हरदम जलता है।

अब कविता से और पंक्तियाँ चुनिएः
3. है जान एक दिन जाने को।
→ जान एक दिन जाने को है।
4. है काल-दीप जलता हरदम।
→ काल-दीप हरदम जलता है।
5. हैं माता-पिता बंधु जिसमें
→ माता-पिता बंधु जिसमें हैं।
6. है सब कुछ अपने हाथों में
→ सब कुछ अपने हाथों में है।

  • अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।

“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, 
जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
उत्तर: 
मूल पंक्तिः

  • “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, 
    जिस पर है दुनिया दीवानी।”

‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करकेः

  • “हैं ज्ञानी भी जो उस पर मरते, 
    है दीवानी दुनिया जो उस पर।”

परिवर्तन और सौंदर्य पर चर्चाः

  • जब ‘है, हैं’ को पहले रखा गया, तो लयात्मकता बढ़ी, नाटकीयता आई और काव्य-शैली अधिक प्रभावशाली बनी।
  • यह प्रयोग कविता को गीतात्मक और भावप्रधान बनाता है।

(घ) समानार्थी शब्द
कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

उत्तर: 

कविता का शीर्षक

“वह हृदय नहीं है पत्थर है, 
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर: कविता का शीर्षक – वैकल्पिक पंक्ति चयन और कारण
यदि मुझे इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो मैं चुनूँगाः
→ “वह हृदय नहीं है पत्थर है”
कारणः

  • प्रभावशाली और दोहराई गई पंक्ति: यह पंक्ति कविता में बार-बार आती है, जो इसे केंद्र बिंदु बनाती है। इससे कवि का मुख्य संदेश – देशभक्ति की अनुपस्थिति में मनुष्य का हृदय निष्ठुर हो जाता है – जोरदार ढंग से उभरता है।
  • भावनात्मक गहराई: यह पंक्ति पाठक के मन में झकझोरने वाला प्रभाव छोड़ती है, जो कविता के भाव को मजबूत बनाता है।
  • देश-प्रेम का केंद्रीय संदेश: पूरी कविता का मूल यही है कि स्वदेश-प्रेम ही जीवन को सार्थक बनाता है, और इस पंक्ति में यह बात सीधे, तीखे और मार्मिक तरीके से व्यक्त हुई है।

इसलिए “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस कविता के लिए एक उपयुक्त और अर्थपूर्ण वैकल्पिक शीर्षक हो सकता है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?

उत्तर: 

(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर: मेरे द्वारा ऊपर दिए गए प्रत्येक (√) चिह्नित चित्र के साथ उसका तर्क भी दिया गया है। संक्षेप में, ‘स्वदेश प्रेम’ केवल बड़े-बड़े नारों या युद्ध में लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दैनिक जीवन में किए गए छोटे-छोटे कार्य भी शामिल हैं, जो देश, समाज और उसके नागरिकों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और सम्मान को दर्शाते हैं।

  • सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिकता: दूसरों की मदद करना, सामुदायिक कार्यों में भाग लेना, नियमों का पालन करना और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना—एक अच्छे नागरिक के गुण हैं, जो एक मजबूत और प्रगतिशील राष्ट्र की नींव रखते हैं।
  • राष्ट्रीय प्रतीकों और विरासत का सम्मान: अपने राष्ट्रध्वज का सम्मान करना और ऐतिहासिक स्थलों व प्राकृतिक संपदाओं की रक्षा करना—अपनी पहचान और गौरव को बनाए रखने के बराबर है।
  • योगदान और मेहनत: अपने-अपने क्षेत्रों में ईमानदारी और कड़ी मेहनत से काम करना (जैसे किसान का परिश्रम)—देश की अर्थव्यवस्था और समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • पर्यावरण चेतना: प्रकृति की देखभाल करना और पर्यावरण को बचाना—भविष्य की पीढ़ियों के लिए देश को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • सुरक्षा बलों के प्रति कृतज्ञता: जो लोग देश की रक्षा करते हैं, उनके प्रति सम्मान और समर्थन व्यक्त करना भी देशभक्ति का एक अहम हिस्सा है।

इन सभी कार्यों से मिलकर एक ऐसा समाज बनता है जो एकजुट, अनुशासित और अपनी भूमि के प्रति प्रेम व जिम्मेदारी की भावना से ओत-प्रोत होता है।

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में, 
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?


उत्तर: 

अपनी भाषा अपने गीत

(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
उत्तर: 
हिंदी:

  • “सारे जहाँ से अच्छा” – मोहम्मद इक़बाल
  • “जन गण मन” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  • “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” – श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’

गुजराती:

  • “जय हिंद! जय हिंद!” – झवेरचंद मेघाणी
  • “હું છું ભારતીય” (मैं भारतीय हूँ) – आधुनिक देशभक्ति रचना

मराठी:

  • “झेंडा उंचा राहिला पाहिजे” – वि. स. खांडेकर
  • “माझा देश महान” – देशभक्ति गीत

बंगाली:

  • “आमार सोनार बांगला” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
  • “एकला चलो रे” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

तमिल:

  • “தமிழா தமிழா” (तमिऴा तमिऴा) – लोकप्रिय तमिल देशभक्ति गीत
  • “விடுதலை விடுதலை” (विदुथलै विदुथलै) – स्वतंत्रता गीत

(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
उत्तर: कक्षा में विद्यार्थी निम्न में से किसी एक गीत को वाद्य यंत्रों या तालियों के साथ गा सकते हैं:

  • “सारे जहाँ से अच्छा”: यह गीत सरल, लोकप्रिय और भावपूर्ण है।
  • “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा”: समूह गायन के लिए उपयुक्त है।
  • क्षेत्रीय गीत: कोई विद्यार्थी अपनी मातृभाषा का देशभक्ति गीत गाकर प्रस्तुति दे सकता है।

तिरंगा झंडा – कब प्रसन्न और कब उदास

राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न हुआ होगा।
उत्तरः

तिरंगा झंडा तब प्रसन्न हुआ होगा, जब मैंनेः

  • सुबह राष्ट्रगान के समय सावधान मुद्रा में खड़े होकर पूरे सम्मान से गान किया।
  • स्कूल में सफाई अभियान में भाग लिया और अपने आस-पास कचरा नहीं फैलाया।
  • अपने मित्र की पढ़ाई में मदद की और किसी से झगड़ा नहीं किया।
  • समय पर गृहकार्य पूरा किया और अध्यापकों का सम्मान किया।
  • पानी और बिजली की बचत की, जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।

तिरंगा झंडा तब उदास हुआ होगा, जब मैंनेः

  • स्कूल की प्रार्थना के समय ध्यान नहीं दिया और हँसी-मज़ाक किया।
  • प्लास्टिक की थैली का उपयोग किया और उसे ज़मीन पर फेंक दिया।
  • किसी साथी से रूखा व्यवहार किया।
  • मोबाइल या टीवी में ज़्यादा समय बर्बाद किया और पढ़ाई से ध्यान हटाया।

झरोखे से

आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।

उत्तरः विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

साझी समझ

आपने स्वदेश’ कविता और खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर: ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ – दोनों में देश-प्रेम बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया है।

  • ‘स्वदेश’ कविता में कवि कहता है कि अगर किसी के दिल में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, तो वह पत्थर के जैसा है। यह कविता हमें सिखाती है कि अपने देश से प्यार करना बहुत जरूरी है।
  • ‘खादी गीत’ में बताया गया है कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आज़ादी की पहचान है। जब लोग विदेशी कपड़ों की जगह खादी पहनते थे, तो वे आज़ादी की लड़ाई में साथ देते थे।

दोनों कविताओं में यह बात साफ़ है कि देश के लिए कुछ भी करना, चाहे वह कविता लिखना हो, खादी पहनना हो, या देश की सेवा करना हो – यह सब देश-प्रेम के तरीके हैं।
आप सभी मिलकर ‘खादी गीत’ को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़ सकते हैं, और समझ सकते हैं कि लोग आज़ादी के समय अपने देश के लिए कितनी मेहनत और प्यार दिखाते थे।

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं-

  • सारे जहाँ से अच्छा
    https://www.youtube.com/watch?v=xestTq6jdjI
  • दीवानों की हस्ती
    https://www.youtube.com/watch?v=n4LOnShHEC4
  • झाँसी की रानी
    https://www.youtube.com/watch?v=QpTL2qBOiwc

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

7. Proportional Reasoning – Textbook Solutions

NCERT Solutions: Proportional Reasoning-1

Page 162

Example 1:
(i) Are the ratios 3 : 4 and 72 : 96 proportional?
(ii) What is the HCF of 72 and 96?
Ans: 
(i) 
HCF of 3 and 4 = 1
∴ Ratio 3/4 is in its simplest form.
HCF of 72 and 96 = 24 (∵ 72 = 24 × 3 and 96 = 24 × 4)

∴ Ratio 72/96 in its simplest form is 3/4.
∴ Ratios 3 : 4 and 72 : 96 are proportional, because both ratios in their simplest form are the same.

(iii) HCF of 72 and 96 is equal to 24.

Example 2: Kesang wanted to make lemonade for a celebration. She made 6 glasses of lemonade in a vessel and added 10 spoons of sugar to the drink. Her father expected more people to join the celebration. So he asked her to make 18 more glasses of lemonade. 
Ans: Kesang’s original mixture: 6 glasses of lemonade → 10 spoons of sugar
Now she needs 18 more glasses of lemonade.
To keep the same sweetness, the ratios must be proportional:
6 : 10 :: 18 : ?
First term changes from 6 to 18.
Factor = 18 ÷ 6 = 3
Multiply sugar by the same factor
10 × 3 = 30
So, she should add 30 spoons of sugar to make 18 more glasses of lemonade with the same sweetness.

Page 163-166

Example 3: Nitin and Hari were constructing a compound wall around their house. Nitin was building the longer side, 60 ft in length, and Hari was building the shorter side, 40 ft in length. Nitin used 3 bags of cement but Hari used only 2 bags of cement. Nitin was worried that the wall Hari built would not be as strong as the wall he built because she used less cement. 
Is Nitin correct in his thinking?
Ans: 
For Nitin, the ratio of the length of the wall to the number of bags of cement = 60/3 =20/1
For Hari, the ratio of the length of the wall to the number of bags of cement = 40/2 =20/1
∴ Ratios in simplest form are equal.
∴ Ratios 60 : 3 and 40 : 2 are in proportion.
∴ Walls are equally strong.
∴ Nitin is not correct in his thinking.
Note: Both ratios show that 1 bag of cement is required for a wall of 20 ft.

Example 4: In my school, there are 5 teachers and 170 students. The ratio of teachers to students in my school is 5 : 170. Count the number of teachers and students in your school. What is the ratio of teachers to students in your school? Write it below.
Ans: In my school:
Number of teachers = 20
Number of students = 600
So the ratio of teachers to students is 20 : 600
Divide both by 20:
20 ÷ 20 = 1
600 ÷ 20 = 30
So the simplest form of the ratio is 1 : 30
Therefore, Teachers : Students = 1 : 30.

Example 5: Measure the width and height (to the nearest cm) of the blackboard in your classroom. What is the ratio of width to height of the blackboard?
Can you draw a rectangle in your notebook whose width and height are proportional to the ratio of the blackboard?

Compare the rectangle you have drawn to those drawn by your classmates. Do they all look the same?
Ans: 

Let the width and height of the blackboard in my classroom be 300 cm and 150 cm, respectively.
∴ Ratio of width to height = 300/150 cm = 2/1
Draw a line AB equal to 6 cm.
Let the height of the rectangle be x cm, so that the width and height of the rectangle are proportional to the ratio of the blackboard.
∴ 2 : 1 :: 6 : x
⇒ 2/1 = 6/x 
⇒ 2x = 6
⇒ x = 3
∴ The height of the rectangle is 3 cm.
Draw AD and BC perpendicular to AB and of length 3 cm. Join CD.
ABCD is the required rectangle.
Comparing the rectangles drawn by other classmates, I find that the ratios of width and height of all rectangles drawn by other classmates are proportional. Their rectangle are all similar, but they do not look the same.

Example 6: When Neelima was 3 years old, her mother was 10 times her age. What is the ratio of Neelima’s age to her mother’s age? What would be the ratio of their ages when Neelima is 12 years old? Would it remain the same? 
Ans:
Age of Neelima = 3 years
Mother’s age is 10 times the age of Neelima.
∴ Age of mother = 10 × 3 = 30 years
∴ Ratio of Neelima’s age to her mother’s age = 3/30 = 1/10 = 1 : 10
Now, Neelima is 12 years old.
Age of Neelima is 12 years, after 12 – 3 = 9 years.
After 9 years, age of mother = 30 + 9 = 39 years
∴ Ratio of Neelima’s age to her mother’s age = 

Remark: It must be noted that ratios 14 : 13 are not in proportion.
The rule is that when a fixed number k is added (or subtracted) from a ratio a : b, then the new ratio a + k : b + k may or may not be in proportion with the original ratio a : b.
In other words, a : b :: a + k : b + k may not be true.

Example 7: Fill in the missing numbers for the following ratios that are proportional to 14 : 21.
(i) ____ : 42
(ii) 6 : ____
(iii) 2 : ____
What factor should we multiply 14 by to get 6? Can it be an integer? Or should it be a fraction? (Page 164)
Ans:

The given ratio is 14 : 21.
(i) The ratio is ____ : 42.
Let the missing number be x.
14 : 21 :: x : 42
⇒ 14/21 = x/42
⇒ 2/3 = x/42
⇒ 3x = 2 × 42 = 84
⇒ x = 28
∴ The missing number is 28.

(ii) The ratio is 6 : ____
Let the missing number be x.
∴ 14 : 21 :: 6 : x
⇒ 14/21 = 6/x
⇒ 2/3 = 6/x
⇒ 2x = 3 × 6 = 18
⇒ x = 9
∴ The missing number is 9.

(iii) The ratio is 2 : ____
Let the missing number be x.
∴ 14 : 21 :: 2 : x
⇒ 14/21 = 2/x
⇒ 2/3 = 2/x
⇒ 2x = 6
⇒ x = 3
∴ The missing number is 3.
Second Part: Ratios under consideration are 14 : 21 and 6 : ____
Now, 6/14 =3/7 and 
∴ 14 should be multiplied by 3/7 to get 6.
∴ Required factor = 3/7
∴ Missing term in the ratio 6 : ____ is 

∴ The ratio 6 : ____ is 6 : 9.
The factor here is 3/7 and this is a fraction.

Example 8: Filter coffee is a beverage made by mixing coffee decoction with milk. Manjunath usually mixes 15 mL of coffee decoction with 35 mL of milk to make one cup of filter coffee in his coffee shop. In this case, we can say that the ratio of coffee decoction to milk is 15 : 35. If customers want ‘stronger’ filter coffee. Manjunath mixes 20 mL of the decoction with 30 mL of milk. The ratio here is 20 : 30. Why is this coffee stronger?
(i) And when they want ‘lighter’ filter coffee, he mixes 10 mL of coffee and 40 mL of milk, making the ratio 10 : 40. Why is this coffee lighter?

(ii) The following table shows the different ratios in which Manjunath mixes coffee decoction with milk. Write in the last column if the coffee is stronger or lighter than the regular coffee.
Ans:
In one cup of regular filter coffee: Coffee decoction = 15 mL
Milk = 35 mL
∴ Ratio of coffee decoction to milk = 15 : 35 = 3 : 7
Here, 3 + 7 = 10
∴ Coffee decoction in 10 mL filter coffee = 3 mL
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee =

In one cup of stronger filter coffee:
Coffee decoction = 20 mL
Milk = 30 mL
∴ Ratio of coffee decoction to milk = 20 : 30 = 2 : 3
Here, 2 + 3 = 5.
∴ Coffee decoction in 5 mL filter coffee = 2 mL
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee 

Since 40 mL > 30 mL, the latter coffee is stronger.

(i) In a cup of lighter filter coffee:
Coffee decoction = 10 mL
Milk = 40 mL
∴ Ratio of coffee decoction to milk = 10 : 40 = 1 : 4
Here, 1 + 4 = 5.
∴ Coffee decoction in 5 mL filter coffee = 1 mL
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee 

Since 20 mL < 30 mL, the third type of filter coffee is lighter.

(ii) 

S.No.1. Here 300 + 600 = 900
∴ Coffee decoction in 900 mL filter coffee = 300
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee = 

Since  this filter coffee is stronger.

S.No.2. Here 150 + 500 = 650
∴ Coffee decoction in 650 mL filter coffee = 150

∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee = 

Since this filter coffee is lighter.

S.No. 3. Here 200 + 400 = 600
∴ Coffee decoction in 600 mL filter coffee = 200

∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee = 

Since  this filter coffee is stronger.

S.No. 4. Here 24 + 56 = 80
∴ Coffee decoction in 80 mL filter coffee = 24 mL
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee 

Since 30 = 30, this filter coffee is regular.

S.No. 5. Here 100 + 300 = 400
∴ Coffee decoction in 400 mL filter coffee = 100 mL
∴ Coffee decoction in 100 mL filter coffee = 

Since 25 < 30, this filter coffee is lighter.

Figure it Out

Q1. Circle the following statements of proportion that are true.
(i) 4 : 7 :: 12 : 21
(ii) 8 : 3 :: 24 : 6
(iii) 7 : 12 :: 12 : 7
(iv) 21 : 6 :: 35 : 10
(v) 12 : 18 :: 28 : 12
(vi) 24 : 8 :: 9 : 3

Ans:  
(i) 4 : 7 :: 12 : 21.
This is true if 4/7 = 12/21
or if 4/7 = 4/7, which is true.
∴ The given statement is true.
(ii) 8 : 3 :: 24 : 6.
This is true if 8/3 = 24/6
or if 8/3 = 4 , which is false.
∴ The given statement is not true.
(iii) 7 : 12 :: 12 : 7.
This is true if 7/12 = 12/7, which is false.
∴ The given statement is not true.
(iv) 21 : 6 :: 35 : 10.
This is true if 21/6 = 35/10
or if 7/2 = 7/2, which is true.
∴ The given statement is true.
(v) 12 : 18 :: 28 : 12.
This is true if 12/18 = 28/12
or if 2/3 = 7/3
or 2 = 7, which is false.
∴ The given statement is not true.
(vi) 24 : 8 :: 9 : 3.
This is true if 24/8 = 9/3
Or if 3 = 3, which is true.
∴ The given statement is true.

Q2. Give 3 ratios that are proportional to 4 : 9. 
______ : ______   ______ : ______ ______ : ______ 
Ans: 
The given ratio is 4 : 9.

∴ 4 : 9 :: 8 : 18, 4 : 9 :: 12 : 27, and 4 : 9 :: 16 : 36
∴ Ratios 8 : 18, 12 : 27 and 16 : 36 are proportional to the given ratio 4 : 9.

Q3. Fill in the missing numbers for these ratios that are proportional to 18 : 24. 
3 : ______, 12 : ______, 20 : ______, 27 : ______
Ans: 

Q4. Look at the following rectangles. Which rectangles are similar to each other? You can verify this by measuring the width and height using a scale and comparing their ratios.
Ans: 
Using a scale, we measure the width and height of given rectangles.
Here, the ratio ‘Width : Height’ for given rectangles A, B, C, D, and E are respectively 1 : 3, 3 : 2, 9 : 4, 7 : 2 and 3 : 1.
These ratios are all distinct. The ratios of A and E are 1 : 3 and 3 : 1 respectively.
∴ For A and E, one side is 3 times the other side.
∴ Only rectangles A and E are similar.

Q5. Look at the following rectangle. Can you draw a smaller rectangle and a bigger rectangle with the same width to height ratio in your notebooks? Compare your rectangles with your classmates’ drawings. Are all of them the same? If they are different from yours, can you think why? Are they wrong?
Ans: 
For the given rectangle;
Width = 32 mm and height = 18 mm
∴ Ratio is 32 : 18.
We shall draw smaller and bigger rectangles and similar to the given rectangle by considering different ‘factors of change’.
Let the factor of change be 1/2.
∴ New width =  = 16 mm
and New height =  = 9 mm
A new, similar rectangle is shown in the figure.

Let ‘factor of change’ be 2.
∴ New width = 2 × 32 = 64 mm and new height = 2 × 18 = 36 mm
A new, similar rectangle is shown in the figure. The rectangles drawn by other classmates are all different, but they are all similar to the given rectangle.

Q6. The following figure shows a small portion of a long brick wall with patterns made using coloured bricks. Each wall continues this pattern throughout the wall. What is the ratio of grey bricks to coloured bricks? Try to give the ratios in their simplest form.

Ans:
(a) We consider one set of patterns in the given wall.

Number of grey bricks in one set of pattern = 2 + 3 + 4 = 9
Number of coloured bricks in one set of pattern = 3 + 2 + 1 = 6
∴ Ratio of grey bricks to coloured bricks = 9 : 6
We have 9 : 6 = 3 : 2
∴ Ratio in the simplest form = 3 : 2

(b) We use one set of patterns on the given wall
Number of grey bricks in one set of pattern
= 3 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 3
= 16
Number of coloured bricks in one set of pattern = 1 + (1 + 1) + (1 + 1) + (1 + 1) + (1 + 1) + (1 + 1) + 1
= 1 + 2 + 2 + 2 + 2 + 2 + 1
= 12
∴ Ratio of grey bricks to coloured bricks = 16 : 12
We have 16 : 12 = 4 : 3
∴ Ratio in the simplest form = 4 : 3.

Page 167

Q7. Let us draw some human figures. Measure your friend’s body—the lengths of their head, torso, arms, and legs. Write the ratios as mentioned below—

Now, draw a figure with head, torso, arms, and legs with equivalent ratios as above.
Ans: My friend’s body measurements:
(i) Head = 22 cm
(ii) Torso (neck to hip) = 50 cm
(iii) Arms (shoulder to fingertip) = 60 cm
(iv) Legs (hip to foot) = 80 cm
1. Head : Torso = 22 : 50
Simplify by dividing both by 2 → 11 : 25.
2. Torso : Arms = 50 : 60
Simplify by dividing both by 10 → 5 : 6.
3. Torso : Legs = 50 : 80
Simplify by dividing both by 10 → 5 : 8.
So the ratios are:

  • Head : Torso = 11 : 25
  • Torso : Arms = 5 : 6
  • Torso : Legs = 5 : 8

Example 8: For the mid-day meal in a school with 120 students, the cook usually makes 15 kg of rice. On a rainy day, only 80 students came to school. How many kilograms of rice should the cook make so that the food is not wasted?
The ratio of the number of students to the amount of rice needs to be proportional. So, 120 : 15 :: 80 : ?
What is the factor of change in the first term? 

Ans: 
For 120 students, the rice required is 15 kg.
Let x kg of rice be required for 80 students.
∴ Ratios 120 : 15 and 80 : x are in proportion.
∴ 120 : 15 :: 80 : x
⇒ 120/15 = 80/x
⇒ x = 10
∴ 10 kg of rice is required.
Also, factor of change in the first term = 80/120 = 2/3

Alternative Method:
Factor of change in second term = x/15
Since the quality of food is the same, we have 2/3 = x/15
⇒ 3x = 30
⇒ x = 10
∴ 10 kg of rice is required.

Example 9: (i) A car travels 90 km in 150 minutes. If it continues at the same speed, what distance will it cover in 4 hours?
If it continues at the same speed, the ratio of the time taken should be proportional to the ratio of the distance covered.
(ii) 150 : 90 :: 4 : x
Is this the right way to formulate the question?
(iii) How can you find the distance covered in 240 minutes?
Ans: 

(i) We have, 4 hours = 4 × 60 = 240 minutes
In 150 minutes, the distance covered = 90 km
Let x km be covered in 4 hours, i.e., in 240 minutes.
∴ The ratios 150 : 90 and 240 : x are in proportion.
∴ 150 : 90 :: 240 : x
(ii) Since units must be the same in comparing ratios, the given proportion 150 : 90 :: 4 : ? is meaningless.
We have 4 hours = 240 minutes
∴ The proportion 150 : 90 :: 240 : ? is correct.
(iii) We have 150 : 90 :: 240 : x
⇒ 150/90 = 240/x
⇒ 5/3 = 240/x
⇒ 5x = 3 × 240
⇒ x = 144
∴ Distance covered in 4 hours = 144 km.

Example 10: A small farmer in Himachal Pradesh sells each 200 g packet of tea for ₹ 200. A large estate in Meghalaya sells each 1 kg packet of tea for ₹ 800. Are the weight-to-price ratios in both places proportional? Which tea is more expensive? Why? (Page 169)
Ans: 
We have 1 kg = 1000 g
In Himachal Pradesh, 200 g of tea costs ₹ 200.
∴ Ratio of weight to price in Himachal Prdesh = 200 : 200 = 1 : 1
In Meghalaya, 1000 g tea costs ₹ 800.
∴ Ratio of weight to price in Meghalaya = 1000 : 800 = 5 : 4
The ratios 1 : 1 and 5 : 4 are not proportional, because 1/1 ≠ 5/4
Price of 200 g tea in Himachal Pradesh = ₹ 200
Price of 1000 g tea in Himachal Pradesh = 

Since 1000 > 800, tea is more expensive in Himachal Pradesh.

Page 170-171

Q1. The Earth travels approximately 940 million kilometres around the Sun in a year. How many kilometres will it travel in a week?
Ans: 
We know that:
1 million = 10 lakh = 10,00,000
and 1 year = 365/7 weeks.
940 million kilometres, i.e., 940 × 10,00,000 kilometres, are travelled by the Earth in 1 year, i.e., in 365/7 weeks.
Let the Earth travel x kilometres in 1 week
∴ The ratios 940 × 10,00,000 : 365/7 and x : 1 are in proportion.

⇒ x = 1,80,27,397 (nearly)
∴ In 1 week, Earth travels nearly 1,80,27,397 kilometres around the Sun.

Q2. A mason is building a house in the shape shown in the diagram. He needs to construct both the outer walls and the inner wall that separates two rooms. To build a wall of 10-feet, he requires approximately 1450 bricks. How many bricks would he need to build the house? Assume all walls are of the same height and thickness.
Ans:

Number of bricks required for a 10 ft wall =1450
∴ Ratio of length of wall to number of bricks = 10 : 1450

Total length of walls = AI + CH + DE + FG + IG + AF + CD
= 12 + (9 + 12) + 9 + 12 + (9 + 15) + (9 + 15) + 6
= 108 ft
Let x bricks be required for a 108 ft long wall.
∴ Ratio of length of wall to number of bricks = 108 : x
These ratios are in proportion.
∴ 10 : 1450 :: 108 : x
⇒ 10/1450 = 108x
⇒ 1/145 = 108x
⇒ x = 145 × 108 = 15,660
∴ Number of required bricks = 15,660.

Q: Puneeth’s father went from Lucknow to Kanpur in 2 hours by riding his motorcycle at a speed of 50 km/h. If he drives at 75 km/h, how long will it take him to reach Kanpur? Can we form this problem as a proportion 50 : 2 :: 75 : ____
Would it take Puneeth’s father more time or less time to reach Kanpur? Think about it. 
Ans: 

Time taken at the speed of 50 km/h = 2 hours
∴ Distance = Speed × Time
= 50 × 2
= 100 km
At speed of 75 km/h, time taken = 100/75 = 4/3 hours
∴ Ratio of speed to time in both cases are 50 : 2 and 75 : 4/3
Here, 50/2 = 25 and 

∴ The ratios 50 : 2 and 75 : 4/3 are not in proportion.

∴ We cannot write 50 : 2 :: 75 : 4/3.

At a speed of 75 km/h, Puneeth’s father will take 4/3 hours to reach Kanpur, which is less than 2 hours.

Example 11: Prashanti and Bhuvan started a food cart business near their school. Prashanti invested ₹ 75,000 and Bhuvan invested ₹ 25,000. At the end of the first month, they gained a profit of ₹ 4,000. They decided that they would share the profit in the same ratio as their investment. What is each person’s share of the profit?
Ans: 
Investment of Prashanti = ₹ 75,000
Investment of Bhuvan = ₹ 25,000
∴ Ratio of investment = 75000 : 25000 = 3 : 1
Total profit = ₹ 4,000
∴ Share of Prashanti =

= ₹ 3,000

∴ Share of Bhuvan = 

= ₹ 1,000

Verification: ₹ 3,000 + ₹ 1,000 = ₹ 4,000, the total profit.

Example 12: A mixture of 40 kg contains sand and cement in the ratio of 3 : 1. How much cement should be added to the mixture to make the ratio of sand to cement 5 : 2? 
Ans: 
Ratio of sand and cement = 3 : 1
Weight of mixture = 40 kg
∴ Weight of sand in mixture = 

Weight of cement in the mixture = 

Let the weight of cement in the new mixture be x kg, so that the new ratio is 5 : 2.
∴ Ratios 30 : x and 5 : 2 are in proportion.
⇒ 30/x = 5/2
⇒ 5x = 60
⇒ x = 12
Weight of cement added = 12 kg – 10 kg = 2 kg

Page 175

Q1. Divide ₹4,500 into two parts in the ratio 2 : 3.
Ans: 
Given ratio = 2 : 3
Amount to be divided = ₹ 4,500
∴ First part = 

= 2 × 900
= ₹ 1,800
∴ Second part = 

= 3 × 900
= ₹ 2,700
∴ Two parts are ₹ 1,800 and ₹ 2,700.
Verification:
1,800 : 2,700 = 1,800/2,700 = 18/27 = 2/3 = 2 : 3 and 1,800 + 2,700 = 4,500.

Q2: In a science lab, acid and water are mixed in the ratio of 1 : 5 to make a solution. In a bottle that has 240 mL of the solution, how much acid and water does the solution contain?
Ans:

Ratio of acid and water = 1 : 5
Quantity of solution = 240 mL
∴ Quantity of acid = 

= 40 mL
∴ Quantity of water = 

= 200 mL

∴ Quantities of acid and water in the solution are 40 mL and 200 mL.
Verification:
40 : 200 = 40/200 = 1/5 = 1 : 5 and 40 + 200 = 240.

Q3. Blue and yellow paints are mixed in the ratio of 3 : 5 to produce green paint. To produce 40 mL of green paint, how much of these two colours are needed? To make the paint a lighter shade of green, I added 20 mL of yellow to the mixture. What is the new ratio of blue and yellow in the paint?
Ans: Ratio of Blue and yellow paints in mixture = 3 : 5
To produce 40 mL of green paint, quantity of Blue pain needed = 3/(3 + 5) × 40 mL = 3/8 × 40 mL = 15 mL
∴ Quantity of yellow pain needed = 5/8 × 40 mL = 25mL
Now, add 20 mL of yellow to the mixture.
Then, the ratio of blue and yellow in the new mixture =15 : (25 + 20) = 15 : 45 = 1 : 3

Q4. To make soft idlis, you need to mix rice and urad dal in the ratio of 2 : 1. If you need 6 cups of this mixture to make idlis tomorrow morning, how many cups of rice and urad dal will you need?
Ans: Required ratio of rice and urad = 2 : 1 and total quantity of mixture = 6 cups
∴ Amount of rice required = 2/(2 + 1) × 6 = 2/3 × 6 = 4 cups
∴ Amount of urad required = 1/(2 + 1) × 6 = 1/3 × 6 = 2 cups

Q5. I have one bucket of orange paint that I made by mixing red and yellow paints in the ratio of 3 : 5. I added another bucket of yellow paint to this mixture. What is the ratio of red paint to yellow paint in the new mixture?
Ans: 
Let the capacity of one bucket be x L.
Ratio of red paint and yellow paint = 3 : 5
∴ Quantity of red paint in the bucket =

∴ Quantity of yellow paint in the bucket =

One bucket of yellow paint is added to the mixture.
∴ New quantity of red paint in the mixture = 3x/8
∴ New quantity of yellow paint in the mixture = 

∴ New ratio of red paint and yellow paint in the mixture = 3x/8:13x/8 = 3 : 13

Page 176-177

Q1. Anagh mixes 600 mL of orange juice with 900 mL of apple juice to make a fruit drink. Write the ratio of orange juice to apple juice in its simplest form.
Ans: 
Quantity of orange juice = 600 mL
Quantity of apple juice = 900 mL
∴ Ratio of orange juice to apple juice = 600 : 900
Ratio in the simplest form = 600 : 900 = 2 : 3

Q2. Last year, we hired 3 buses for the school trip. We had a total of 162 students and teachers who went on that trip and all the buses were full. This year we have 204 students. How many buses will we need? Will all the buses be full?
Ans: 

Number of buses for 162 students and teachers = 3
Since the buses were full, the capacity of 1 bus = 162/3 = 54
∴ Ratio of number of seats to the number of buses is 54 : 1.
We have
54 : 1 = 2(54) : 2(1) = 108 : 2
54 : 1 = 3(54) : 3(1) = 162 : 3
54 : 1 = 4(54) : 4(1) = 216 : 4
∴ Capacity of 4 buses = 216
∴ For 204 students, we shall need 4 buses.
Since 216 – 204 = 12, we have 12 vacant seats in the buses.

Q3. The area of Delhi is 1,484 sq. km and the area of Mumbai is 550 sq. km. The population of Delhi is approximately 30 million and that of Mumbai is 20 million people. Which city is more crowded? Why do you say so?
Ans: 
Area of Delhi = 1,484 sq.km
Population of Delhi = 30 million
Area of Mumbai = 550 sq. km
Population of Mumbai = 20 million
∴ Ratio of area to population for Delhi = 1484 : 30
∴ Ratio of area to population for Mumbai = 550 : 20
Factor of change of area = 550/1484 = 0.371 (nearly)
Factor of change of population = 20/30 = 0.667 (nearly)
Since 0.667 > 0.371, Mumbai is more crowded than Delhi.

Alternative Method:
Ratio of area to population for Delhi = 1484 : 30
Let the density of Delhi and Mumbai be the same, and there be x people in Mumbai.
∴ The ratios 1,484 : 30 and 550 : x are in proportion.
∴ 1,484/30 = 550/x
⇒ 1484x = 30 × 550 = 16,500
⇒ x = 16500/1484 = 11.118
There should be 11.118 million people in Mumbai. But the population of Mumbai is 20 million.
∴ Mumbai is more crowded than Delhi.

Q4. A crane of height 155 cm has its neck and the rest of its body in the ratio 4 : 6. For your height, if your neck and the rest of the body also had this ratio, how tall would your neck be?
Ans:
The ratio of the height of the neck and the height of the rest of the body of a crane is 4 : 6.
My height is 65 inches, i.e., 165 cm.
Let the ratio of the height of my neck and the height of the rest of my body also be 4 : 6.
∴ Height of my neckcm = 66 cm

Q5. Let us try an ancient problem from Lilavati. At that time weights were measured in a unit named palas and niskas was a unit of money. “If palas of saffron costs 3/7 niskas, O expert businessman! tell me quickly what quantity of saffron can be bought for 9 niskas?”
Ans: 
Here, the unit of weight in palas and the unit of money are niskas.
Cost of  palas of saffron = 37 niskas
∴ Ratio of weight to price is 

or 5/2 : 3/7
or 35 : 6
Let x palas of saffron be bought for 9 niskas.
∴ Ratio of weight to price is x : 9.
These ratios are in proportion.
∴ 35 : 6 :: x : 9
⇒ 35/6 = x/9
⇒ 6x = 35 × 9
⇒ x = 52.5
∴ 52.5 palas of saffron can be bought for 9 niskas.

Q6. Harmain is a 1-year-old girl. Her elder brother is 5 years old. What will be Harmain’s age when the ratio of her age to her brother’s age is 1 : 2?
Ans: 

The ages of Harmain and her brother are 1 year and 5 years.
Let x years, the ratio of their ages be 1 : 2.
Age of Harmain after x years = (1 + x) years.
Age of her brother after x years = (5 + x) years.
∴ After x years, ratio of their ages = 1 + x : 5 + x
The ratios are in proportion.
∴ 1 : 2 :: 1 + x : 5 + x

⇒ 5 + x = 2(1 + x)
⇒ 5 + x = 2 + 2x
⇒ 2x – x = 5 – 2
⇒ x = 3
∴ After 3 years, the age of Harmain = 1 + 3 = 4 years.
Verification:
After 3 years, age of her brother = 5 + 3 = 8 years
Also, the ratio of their ages = 4 : 8 = 1 : 2.

Q7. The mass of equal volumes of gold and water are in the ratio 37 : 2. If 1 litre of water is 1 kg in mass, what is the mass of 1 litre of gold?
Ans: 

The ratio of masses of gold and water, when their volumes are the same, is 37 : 2.

Mass of 1 litre of water = 1 kg
Let the mass of 1 litre of gold = x kg
∴ With equal volumes, the ratio of masses of gold and water is x : 1.
These ratios are in proportion.
∴ 37 : 2 :: 1 : x
⇒ 37/2 = x/1
⇒ x = 372
Thus, the mass of 1 litre of gold is 37/2 kg.

Q8. It is good farming practice to apply 10 tonnes of cow manure for 1 acre of land. A farmer is planning to grow tomatoes in a plot of size 200 ft by 500 ft. How much manure should he buy?
Ans: 

We have 1 ton = 1,000 kg
∴ 10 tonnes = 10 × 1,000 = 10,000 kg
Also, 1 acre = 43,560 sq. ft.
∴ Ratio of cow manure to area of land in kg and sq. ft. = 10,000 : 43,560
Size of plot = 200 ft. by 500 ft.
∴ Area of plot = 200 × 500 = 1,00,000 sq. ft.
Let cow manure be x kg.
∴ Ratio of cow manure to area of plot = x : 1,00,000
These ratios are in proportion.
∴ 10,000 : 43,560 :: x : 1,00,000

⇒ 43,560x = 10,000 × 1,00,000 = 1,00,00,00,000

⇒ x = 22956.84
∴ Required cow manure = 22956.84 kg = 22.95684 tonnes.

Q9. A tap takes 15 seconds to fill a mug of water. The volume of the mug is 500 mL. How much time does the same tap take to fill a bucket of water if the bucket has a 10-litre capacity?
Ans: 

Time taken by the tap for 500 mL of water = 15 seconds
∴ Ratio of volume to time = 500 : 15
We know 1 litre = 1,000 mL
10 litre = 10 × 1,000 = 10,000 mL
Let the time taken to fill a bucket of 10,000 mL be x seconds.
∴ Ratio of volume to time = 10,000 : x
These ratios are proportional.
∴ 500 : 15 :: 10,000 : x

⇒ 500x = 1,50,000
⇒ x = 300
∴ Time to fill bucket = 300 seconds
= 300/60 minutes
= 5 minutes.

Q10. One acre of land costs ₹15,00,000. What is the cost of 2,400 square feet of the same land?
Ans: 

We know that 1 acre = 43,560 square feet.
∴ Cost of 43,560 sq. ft. land = ₹ 15,00,000
∴ Ratio of area of land to cost = 43,560 : 15,00,000
Let the cost of 2,400 sq. ft. of land be ₹ x.
∴ Ratio of area of land to cost = 2,400 : x
These ratios are proportional.
∴ 43,560 : 15,00,000 :: 2,400 : x

⇒ x = 82,644.63
∴ Cost of land = ₹ 82,644.63.

Q11. A tractor can plough the same area of a field 4 times faster than a pair of oxen. A farmer wants to plough his 20-acre field. A pair of oxen takes 6 hours to plough an acre of land. How much time would it take if the farmer used a pair of oxen to plough the field? How much time would it take him if he decides to use a tractor instead?
Ans: 
Ratio of efficiency of a tractor to a pair of oxen = 4 : 1
Time taken by a pair of oxen to plough 1 acre of field = 6 hours
∴ Time taken by a tractor to plough 1 acre field = 6/4 = 1.5 hours
∴ Time taken by a pair of oxen to plough 20 20-acre field = 20 × 6 = 120 hours
∴ Time taken by a tractor to plough a 20-acre field = 20 × 1.5 = 30 hours

Q12. The ₹10 coin is an alloy of copper and nickel called ‘cupro-nickel’. Copper and nickel are mixed in a 3 : 1 ratio to get this alloy. The mass of the coin is 7.74 grams. If the cost of copper is ₹906 per kg and the cost of nickel is ₹1,341 per kg, what is the cost of these metals in a ₹10 coin?
Ans: 
Ratio of copper and nickel in ₹ 10 coin = 3 : 1
Mass of one ₹ 10 coin = 7.74 grams
∴ Mass of copper in one ₹ 10 coin = 

= 5.805 grams

Mass of nickel in one ₹ 10 coin = 

= 1.935 grams

Cost of 1 kg copper = ₹ 906

∴ Cost of 1000 grams of copper = ₹ 906

∴ Cost of 5.805 grams copper = 

Cost of 1 kg nickel = ₹ 1341
∴ Cost of 1000 grams of nickel = ₹ 1341

∴ Cost of 1.935 grams nickel = 

∴ In one ₹ 10 coin, the cost of copper and the cost of nickel are respectively ₹ 5.26 and ₹ 2.59.

3. a story of numbers – Textbook Solutions

Page 48

Questions (Implied from Reema’s Curiosity):

Q1: Since when have humans been counting?

Ans: Humans have been counting since at least the Stone Age (around 10,000 years ago) to track quantities of food, livestock, trade goods, ritual offerings, and to predict events like lunar phases or seasons.

Q2: What was their need for counting?

Ans: The need arose to quantify resources (e.g., food, livestock), manage trade, record ritual offerings, and track time for events like new moons or seasonal changes.

Q3: What were they counting?

Ans: They counted food items, animals in livestock, trade goods, ritual offerings, and days for calendrical purposes.

Q4: Since when have people been writing numbers in the modern form?

Ans: The modern form (Hindu numerals, 0–9) originated in India around 2000 years ago, with the earliest known use in the Bakhshali manuscript (c. 3rd century CE). Aryabhata (c. 499 CE) formalized their use, and they spread globally by the 17th century.

Q5: How would the Mesopotamians have written 20, 50, 100?

Ans: The Mesopotamian (Babylonian) system was a base-60 positional system using symbols for 1 (⟐) and 10 (⟐). Numbers were grouped into powers of 60, with a placeholder for zero in later periods. 
Assuming the simplified notation from Section 3.4:

  • 20: 20 = 20 × 1 = ⟐⟐ (two 10s).
  • 50: 50 = 5 × 10 = ⟐⟐⟐⟐⟐ (five 10s).
  • 100: 100 = 1 × 60 + 40 × 1 = ⟐,⟐⟐⟐⟐ (one 60 and four 10s). 

Note: Commas separate place values for clarity, though spacing was inconsistent in practice.

Page 51

Q1. How do we ensure that all cows have returned safely aftergrazing?

Ancient humans used sticks to count their herd of cows through a very practical, physical method:

  • For each cow in the herd, one stick was set aside.
  • After the cows went out to graze, the herder would collect a stick for each cow that returned.
  • If a stick remained with no cow to match it, that meant a cow was missing; if all sticks matched, then all cows had returned.

Q2. Do we have fewer cows than our neighbour?

Ancient humans could compare herds without words by using physical objects—typically sticks, stones, or tallies—to represent each cow. Here’s how they would determine if they had fewer cows than their neighbor:

  • Each person would create a collection of sticks, one stick for each cow in their herd.
  • They would then place their collections side by side.
  • By pairing off the sticks one by one from each herd, they could see which collection finished first.
  • If your pile of sticks was exhausted before your neighbor’s, this showed you had fewer cows.
  • The difference in the length (or count) of the two piles directly told you how many fewer cows you had.

This method worked because it relied entirely on one-to-one correspondence, requiring no written numbers or words—just an exact physical representation.

Q3. If there are fewer, how many more cows would we need so that we have the same number of cows as our neighbour?

If you find that you have fewer cows than your neighbor after comparing your piles of sticks (one stick per cow):

  • Take your pile of sticks and your neighbor’s pile of sticks.
  • Pair them one-to-one as far as possible.
  • The number of sticks left (unpaired) in your neighbor’s pile tells you exactly how many cows you would need to add to your herd to have the same number as your neighbor.
  • In other words, you simply count the extra sticks in your neighbor’s pile after pairing, and that is the answer.

How will you use such sticks to answer the other two questions (Q2 and Q3)?

Ans: Same as above.

Page 53

Q: How many numbers can you represent in this way using the sounds of the letters of your language?

Ans: Using only the sounds of English letters, you can represent at most 26 distinct numbers, since there are 26 letters. Letters don’t naturally map to numbers, so without creating combinations or a naming system, this method is limited. For numbers beyond 26, you’d need to combine letter sounds or use a more complex system.

Q: Do you see a way of extending this method to represent bigger numbers as well? How?

Ans: To represent bigger numbers using letter sounds, we need a fixed, ordered system—called a number system. While using letter sounds is convenient, it’s limited as there are only 26 letters. To extend it for bigger numbers, we must combine letter sounds or symbols to create a longer, standard sequence—just like Roman or Hindu number systems do.

Page 54

Figure it Out

Q1. Suppose you are using the number system that uses sticks to represent numbers, as in Method 1. Without using either the number names or the numerals of the Hindu number system, give a method for adding, subtracting, multiplying and dividing two numbers or two collections of sticks.

Ans: Using sticks (Method 1) to perform arithmetic operations:

  • Addition:
    Combine two collections of sticks into a single larger collection. The total number of sticks now represents the sum.
  • Subtraction:
    Remove sticks from one collection to match the number in another. The remaining sticks represent the difference.
  • Multiplication:
    Think of multiplication as repeated addition. For example, to multiply 3 by 4, create 4 groups each having 3 sticks, then combine all the groups into one pile and count sticks.
  • Division:
    Divide a collection of sticks into equal smaller groups. The number of groups you can make represents the quotient, and leftover sticks (if any) are the remainder.

Q2. One way of extending the number system in Method 2 is by using strings with more than one letter—for example, we could use ‘aa’ for 27. How can you extend this system to represent all the numbers? There are many ways of doing it!

Ans: Extending a letter-based number system like Method 2 (‘a’ to ‘z’ representing 1 to 26):

To represent numbers beyond 26, use combinations of letters similar to how letters form words. For example:

  • ‘a’ = 1, ‘b’ = 2, …, ‘z’ = 26
  • ‘aa’ = 27, ‘ab’ = 28, ‘ac’ = 29, and so on.

This works like a base-26 system, where each position represents powers of 26, similar to how digits work in the decimal system (base-10).

You can keep extending to three letters, four letters, etc., allowing representation of all natural numbers.

Q3. Try making your own number system.

Ans: Do it Yourself!

Hint: Try these steps:

  • Choose simple symbols or objects (like stones, shells, hand signs, or colors).
  • Assign each symbol a specific value, starting from 1.
  • Decide on a method to combine symbols to form larger numbers — for example, repetition to indicate quantity (like tally marks), or place value methods (like grouping symbols in sets).
  • Create rules for arithmetic operations based on how you combine or separate these symbols.

For instance, you could use colored beads where each color counts as a certain number, and putting beads together adds their values; different bead strings could represent larger numbers.

This approach both honours ancient counting methods and encourages creative thinking about the concept of numbers.

Page 56

Q: Can you see how their number names are formed? 

Ans: The Gumulgal number system forms number names by counting in twos, combining the words “urapon” (1) and “ukosar” (2):

  • 1: urapon
  • 2: ukosar
  • 3: ukosar-urapon (2 + 1)
  • 4: ukosar-ukosar (2 + 2)
  • 5: ukosar-ukosar-urapon (2 + 2 + 1)
  • 6: ukosar-ukosar-ukosar (2 + 2 + 2)

Q: Can you see how the names of the other numbers are formed?

Ans: The pattern uses “ukosar” for each group of 2 and “urapon” for an additional 1, building numbers additively based on twos and ones.

  • 3 = 2 + 1, 
  • 4 = 2 + 2, 
  • 5 = 2 + 2 + 1, 
  • 6 = 2 + 2 + 2.

Gumulgal called any number greater than 6 ras.

Page 57

Q: Quickly count the number of objects in each of the following boxes:

Ans: Let’s count:

Observation:

  • You can instantly recognize smaller quantities (1–4).
  • For larger groups (like grapes, flowers, sticks), you likely had to count or estimate.
  • This supports the idea that human perception easily handles up to 4 items instantly, but beyond that, counting is needed.

Page 58

Q: What could be the difficulties with using a number system that counts only in groups of a single particular size? How would you represent a number like 1345 in a system that counts only by 5s?

1. Lack of Flexibility

  • You can only count in fixed steps (e.g., 5, 10, 15…), so it’s hard to represent numbers that aren’t exact multiples of that size, 
  • Example: 1,234 can’t be represented accurately. 

2. Representation Becomes Lengthy or Complicated

  • To represent numbers like 1, 2, or 3, you’d have to invent special symbols or combinations, since they don’t fit in the group size.
  • Example: Representing the number 3 might need a symbol like “~~~” (three dashes), or a new symbol altogether, adding unnecessary complexity for small values.

3. Complex Arithmetic Systems

  • Adding, subtracting, or comparing numbers becomes harder because there’s no positional value system or digits.
  • Example: In our normal number system, adding 243 and 159 is easy because we use place values.
    For example:
    243 = 2 hundreds + 4 tens + 3 ones
    159 = 1 hundred + 5 tens + 9 ones
    We can align the digits and add them column by column.
  • But in a system where you only use symbols or count in fixed steps (like 5s), there’s no such place value.
    For example, if ‘A’ = 5, then:
    1. A + A = 10 — but there’s no clear way to write 10 unless you define a new symbol for it.
    2. AAAAA (5 times A) = 25, and AAAAAA = 30 — but to compare them, you have to count each symbol every time.

4. Inefficiency for Large Numbers:

  • Counting big numbers would require repeating the base unit multiple times, which is slow and impractical.

Representing 1345 in a System That Counts Only by 5s:

1345 can be written as: 1345 = (5 × 269) + 0

So, you would represent it as “269 groups of 5” and “0 extra units.”

In a simple group-of-5 system, you’d need 269 marks or symbols, each standing for 5, which is very inefficient for large numbers.

Page 59

Figure it Out

Q1. Represent the following numbers in the Roman system.

(i) 1222

(ii) 2999

(iii) 302

(iv) 715

Ans:

Explanation:

(i) 1222

Break it down:
1000 + 200 + 20 + 2 = M + CC + XX + II
Answer: MCCXXII

(ii) 2999

Break it down:
2000 + 900 + 90 + 9 = MM + CM + XC + IX
Answer: MMCMXCIX

(iii) 302

Break it down:
300 + 2 = CCC + II
Answer: CCCII

(iv) 715

Break it down:
700 + 10 + 5 = DCC + X + V
Answer: DCCXV

Page 60

Q: Do it yourself now: LXXXVII + LXXVIII

Ans: Step 1: Write all symbols together:
L + L + X + X + X + X + X + V + V + I + I + I + I + I

Step 2: Group and simplify:

  • I + I + I + I + I = V
  • V + V = X
  • X + X + X + X + X = L

Step 3: Now combine:
L + L = C, plus remaining X and V

Final Answer: CLXV

Q: How will you multiply two numbers given in Roman numerals, without converting them to Hindu numerals? Try to find the product of the following pairs of landmark numbers: V × L, L × D, V × D, VII × IX.

Ans: You cannot multiply directly in Roman numerals on an abacus. You must:

  1. Convert Roman → Hindu-Arabic
  2. Multiply using abacus
  3. Convert result back → Roman numeral

This method ensures accurate and efficient multiplication.

Note:

  • _X = 10,000, so _XX = 20,000, and _XXV = 25,000
  • Roman numerals above 3,999 use overlines to indicate multiplication by 1,000

Q: DAREDEVIL CONTEST: Multiply CCXXXI and MDCCCLII

  • CCXXXI = 200 + 20 + 11 = 231
  • MDCCCLII = 1000 + 700 + 50 + 2 = 1752

Multiplication in Roman numerals is impractical without conversion.
So, convert to Hindu-Arabic numerals:

231 × 1752 = 404712

Converting 404712 to Roman Numerals:

404712 = CD (400,000) + IV (4) + DCC (700) + XII (12)

So, Roman numeral: _CDIVDCCXII
(where CD means 400,000)

Page 60-70

Figure it out

Q1. A group of indigenous people in a Pacific island use different sequences of number names to count different objects. Why do you think they do this? 

Ans: Different sequences help keep track of various categories of objects. This method is practical in daily life, like using one set of words for counting coconuts and another for people. It allows them to focus on context, improve accuracy, and avoid confusion.

Q2. Consider the extension of the Gumulgal number system beyond 6 in the same way of counting by 2s. Come up with ways of performing the different arithmetic operations (+, –, ×, ÷)for numbers occurring in this system, without using Hindu numerals. Use this to evaluate the following:

(i) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) + (ukasar-ukasarukasar-urapon)

(ii) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) – (ukasar-ukasarukasar)

(iii) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) × (ukasar-ukasar)

(iv) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar) ÷ (ukasar-ukasar)

Ans: First, define base terms:

  • urapon = 1
  • ukasar = 2

So:

  • ukasar-urapon = 3
  • ukasar-ukasar = 4
  • ukasar-ukasar-urapon = 5
  • ukasar-ukasar-ukasar = 6
  • ukasar-ukasar-ukasar-urapon = 7
  • ukasar-ukasar-ukasar-ukasar = 8
  • ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon = 9
  • etc.

(i) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) + (ukasar-ukasar-ukasar-urapon)

  • First term: 4 ukasar + 1 urapon = 9
  • Second term: 3 ukasar + 1 urapon = 7

Add using parts:

  • 4 + 3 = 7 ukasar
  • 1 + 1 = 2 urapon = 1 ukasar

Total: 7 ukasar + 1 ukasar = 8 ukasar

Answer: 8 ukasar or ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-ukasar

(ii) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) – (ukasar-ukasar-ukasar)

  • First term = 9
  • Second term = 6

Subtract by cancelling:

  • Remove 3 ukasar from 4 ukasar → 1 ukasar remains
  • 1 urapon stays

Answer: ukasar + urapon = ukasar-urapon

(iii) (ukasar-ukasar-ukasar-ukasar-urapon) × (ukasar-ukasar)

Multiply:

  • First term = 4 ukasar + 1 urapon = 9
  • Second term = 2 ukasar = 4

Use repeated addition:

  • 9 × 4 = 36
  • 36 = 18 ukasar

Answer: 18 ukasar
→ Write out 18 repetitions of “ukasar” if needed, or say “18 ukasar” in Gumulgal form.

(iv) (ukasar × 8) ÷ (ukasar-ukasar)

  • Numerator: 8 × ukasar = 8 × 2 = 16
  • Denominator: ukasar-ukasar = 4

Divide:

  • 16 ÷ 4 = 4
    → 4 = ukasar-ukasar

Answer: ukasar-ukasar

Q3: Identify the features of the Hindu number system that make it efficient when compared to the Roman number system.

Ans: Features of the Hindu number system that make it efficient:

  • Uses place value (units, tens, hundreds…)
  • Has only 10 symbols (0–9) to write any number
  • Includes zero, making calculations easier
  • Easy to use for large numbers and arithmetic operations

Q4: Using the ideas discussed in this section, try refining the number system you might have made earlier.

Ans: Do it Yourself!

Hint: Tips to refine your number system

  • Add symbols for higher values to reduce repetition
  • Introduce place value (just like Hindu numerals)
  • Define clear rules for operations (+, –, ×, ÷)
  • Possibly create shortcuts or grouping patterns (like grouping by 5s or 10s) to improve speed and consistency.

Page 62

Q1: Represent the following numbers in the Egyptian system: 10458, 1023, 2660, 784, 1111, 70707.

1. 10,458

Let’s break it down:

  • 1 × 10,000 
  • 4 × 100
  • 5 × 10
  • 8 × 1 

Representation:

2. 1023

Let’s break it down:

  • 1 × 1,000
  • 0 × 100
  • 2 × 10 
  • 3 × 1

Representation:

3. 2660

Let’s break it down:

  • 2 × 1,000 
  • 6 × 100 
  • 6 × 10
  • 0 × 1

Representation:

4. 784

Let’s break it down:

  • 7 × 100 
  • 8 × 10 
  • 4 × 1

Representation:

5. 1111

Let’s break it down:

  • 1 × 1,000
  • 1 × 100
  • 1 × 10
  • 1 × 1 

Representation:

6. 70707

Let’s break it down:

  • 7 × 10,000
  • 0 × 1,000
  • 7 × 100 
  • 0 × 10
  • 7 × 1

Representation:

Q2: What numbers do these numerals stand for?

Ans: Using the Egyptian Number System:

  • 2 × 10= 2 × 100 = 200
  • 7 × 10 = 70
  • 3 × 1 = 3

Total value: 200 + 70 + 3 = 273

Ans: Using the Egyptian Number System:

  • 4 × 10= 4 × 1,000 = 5,000
  • 3 × 102 = 3 × 100 = 300
  • 1 × 10 = 10
  • 2 × 1 = 2

Total = 4,000 + 300 + 10 + 2 = 4,312

Q: Express the number 143 in this new system.

Ans: Let us start grouping, starting with the size 53 = 125, as this is the largest landmark number smaller than 143. We get—

143 = 125 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1.

Using the standard symbols,

So the number 143 in the new system is:

Page 63Figure it Out

Q1. Write the following numbers in the above base-5 system using the symbols in Table 2: 15, 50, 137, 293, 651.

Ans: Representing in base-5 system

1. 15

  • 25 is too big.
  • Largest power: 5 (51), can use 3 times (5×3 = 15).
  • 15 = 5+5+5 = 3×5
  • Base-5 symbols: 

2. 50

  • Largest power 52=25, fits twice.
  • 5×2=50; nothing left.
  • Base-5 symbols:

3. 137

  • Largest power 53=125 fits once. 137−125 = 12
  • Next, 51=5 fits twice. 12−10 = 2
  • Next, 5= 1 fits twice.
  • 137 = 125 + 5 + 5 + 1 + 1
  • Base-5 symbols:

4. 293

  • 5⁴ = 625 is too big.
  • 5³ = 125 fits twice (125 × 2 = 250). 293 − 250 = 43
  • 5² = 25 fits once. 43 − 25 = 18
  • 5¹ = 5 fits three times. 18 − 15 = 3
  • 5⁰ = 1 fits three times.
  • 293 = 125 + 125 + 25 + 5 + 5 + 5 + 1 + 1 + 1
  • Base-5 symbols: 

5. 651

  • 5⁴ = 625 fits once. 651 − 625 = 26
  • 5² = 25 fits once. 26 − 25 = 1
  • 5⁰ = 1 fits once.
  • 651 = 625 + 25 + 1
  • Base-5 symbols:

Q2. Is there a number that cannot be represented in our base-5 system above? Why or why not?

Ans: No, every whole number can be represented in base-5.
This is because base-5 is a positional numeral system, and like base-10, it can represent any non-negative integer using combinations of digits 0–4.

Q3. Compute the landmark numbers of a base-7 system. In general, what are the landmark numbers of a base-n system? The landmark numbers of a base-n number system are the powers of n starting from n0 = 1, n, n2, n3, …

Ans:  Landmark numbers of base-7:

  • 7⁰ = 1
  • 7¹ = 7
  • 7² = 49
  • 7³ = 343
  • 7⁴ = 2401

In general, the landmark numbers of a base-n system are:
1, n, n², n³, n⁴, …
That is, powers of n, starting from n0 = 1.

Page 65

Figure it Out

Q1. Add the following Egyptian numerals:

Ans: Try it yourself!

Q2. Add the following numerals that are in the base-5 system that we created:

Remember that in this system, 5 times a landmark number gives the next one!

Ans: Let’s convert this to numerals

First numeral (left side)

This is: 1 circle, 2 hexagons, 1 square, 2 triangles

Value:

  • 1 × 125 = 125
  • 2 × 25 = 50
  • 1 × 5 = 5
  • 2 × 1 = 2

Sum: 125 + 50 + 5 + 2 = 182

Second numeral (right side):

Value:

  • 3 × 125 = 375
  • 1 × 25 = 25
  • 2 × 5 = 10
  • 2 × 1 = 2

Sum: 375 + 25 + 10 + 2 = 412

Page 66

Q: How to multiply two numbers in Egyptian numerals?

Let us first consider the product of two landmark numbers.

1. What is any landmark number multiplied by (that is 10)? Find the following products—

(i) 10 × 10 = 100

100 =

(ii) 100 × 10= 1,000

1,000 =

(iii) 1,000 × 10 = 10,000

10,000 =

(iv) 10,000 × 10 = 100,000

100,000 = 

Each landmark number is a power of 10 and so multiplying it with10 increases the power by 1, which is the next landmark number.

2. What is any landmark number multiplied by (102)? Find the following products—

(i) 10 × 100 = 1,000

1,000 =

(ii) 100 × 100 = 10,000

10,000 =

(iii) 1,000 × 100 = 100,000

100,000 =

(iv) 10,000 × 100 = 1,000,000

1,000,000 =

Each landmark number represents a power of 10, so multiplying it by 102 increases the power by 2, resulting in the landmark number that is two steps higher.

Page 67

Q: Find the following products—

Here are the computations for each part:

(i) 10 × 100,000 = 1,000,000

1,000,000 =

(ii) 100 × 1,000 = 100,000

100,000 = 

(iii) 1,000 × 1,000 = 1,000,000

1,000,000 = 

(iv) 10,000 × 1,000,000 = 10,000,000,000 = 1010

Thus, the product of any two landmark numbers is another landmark number!

Q: Does this property hold true in the base-5 system that we created? Does this hold for any number system with a base?

Ans: In any place-value system, each “landmark number” is just a power of the base:

  • In base-10 → 10, 100, 1,000 are powers of 10
  • In base-5 → 5, 25, 125 are powers of 5

When you multiply a landmark by the base, it just moves to the next bigger landmark.

Q: What can we conclude about the product of a number and (10), in the Egyptian system?

(i)

Ans: 

As these are numbers, the distributive law holds. So,

(ii)

Ans: We can expandas

Applying the distributive property 

Now find the following products—

Ans: Applying the distributive property 

Page 69-70

Figure it Out

Q1. Can there be a number whose representation in Egyptian numerals has one of the symbols occurring 10 or more times? Why not?

Ans: No, you cannot have one symbol appear 10 or more times in a standard Egyptian numeral.

Reason:
Egyptian numerals use a form of additive system—each symbol represents a power of ten (1, 10, 100, 1,000, etc.). To write a number, you repeat the symbol as many times as needed (up to 9). But as soon as you reach 10 of a symbol, you replace it with a single symbol of the next higher value.

Example:

  • Nine arches (10s) = 90
  • Ten arches (10s) would be written as one spiral (100), not 10 arches.

Q2. Create your own number system of base 4, and represent numbers from 1 to 16.

Ans: Try it yourself!

Hint: Let’s assign easy-to-draw symbols to each digit (in place of usual 0, 1, 2, 3):

  • 0: • (dot)
  • 1: | (vertical line)
  • 2: = (double line)
  • 3: ∆ (triangle)

Base-4 has places: 4¹, 4⁰, etc.

Q3. Give a simple rule to multiply a given number by 5 in the base-5 system that we created.

Ans: Simple Rule: To multiply a number by 5 in base-5, add a zero to the right of the number (just as multiplying by 10 in decimal adds a zero).

Example:

  • In base-5, 213₅ × 5 = 2130₅.
  • In symbols (using previous base-5 system):Suppose ■ stands for the base-5 digit “1”, then this rule means you just add a new place with a 0 (the lowest symbol or blank).

Why? 
Because each shift to the left increases the place value by one power of 5, so the new number is five times as large.

Page 73Figure it Out

Q1. Represent the following numbers in the Mesopotamian system using—

(i) 63

(ii) 132 

(iii) 200 

(iv) 60

(v) 3605

Ans: 

(i) 63  

(ii) 132 

(iii) 200 

(iv) 60

(v) 3605

Q: Look at the representation of 60. What will be the representation for 3,600?

Ans:The representation for 3,600 is a single mark or symbol in the “2” diamond.

Page 76

Q: Represent the following numbers using the Mayan system:

(i) 77

(ii) 100 

(iii) 361 

(iv) 721

Ans: Try it Yourself!

Page 78

Q: Where does the Hindu/Indian number system figure in the evolution of ideas of number representation? What are its landmark numbers? And does it use a place value system?

Ans: The Hindu/Indian number system plays a crucial role in the evolution of number representation. It introduced two major innovations:

  1. The concept of zero as a digit, and
  2. A place value system based on base-10.

These ideas greatly simplified writing and calculating large numbers and influenced the development of modern numerals used worldwide today (often called Hindu-Arabic numerals).

Landmark numbers in this system are powers of 10, such as:

  • 1 (10⁰)
  • 10 (10¹)
  • 100 (10²)
  • 1,000 (10³), and so on.

Yes, the Hindu number system uses a place value system, meaning the position of a digit determines its value based on powers of 10. For example, in the number 345, the digit 3 represents 300 (3 × 100), 4 represents 40 (4 × 10), and 5 represents 5 (5 × 1).

This system laid the foundation for modern arithmetic and digital computation.

​Page 80Figure it Out

Q1. Why do you think the Chinese alternated between the Zong and Heng symbols? If only the Zong symbols were to be used, how would 41 be represented? Could this numeral be interpreted in any other way if there is no significant space between two successive positions?

Ans: Using Zong and Heng symbols:

  • The Chinese number system used Zong (vertical) and Heng (horizontal) symbols to show place value clearly.
  • They alternated the direction of the symbols at each place (units, tens, hundreds, etc.) to avoid confusion when reading the number.
  • This made it easier to know which digit belonged to which place even when spaces were small or missing.In Chinese system: 41 = 4 tens and 1 unit.

Using only Zong symbols, it would be written as:
(Zong for 4) followed by (Zong for 1) → looks like: IIII I
Without alternating the symbol direction or keeping proper spacing, IIIII could be misread as 5 (i.e., 1 five) instead of 41.

The lack of direction or spacing removes the clue that one part is “tens” and the other is “units”.

Q2. Form a base-2 place value system using ‘ukasar’ and ‘urapon’ as the digits. Compare this system with that of the Gumulgal’s.

Ans: To form a base-2 place value system using ‘ukasar’ and ‘urapon’, we assign:
• ‘ukasar’ = 0
• ‘urapon’ = 1

This system works just like the binary number system, where each position from right to left represents increasing powers of 2. For example:
• The first place is 2⁰ = 1
• The next is 2¹ = 2
• Then 2² = 4 and so on.

So, we can represent numbers like this

A group of indigenous people in Australia called the Gumulgal had the following words for their numbers.

In the Gumulgal System, we can name every number, but in the binary system, only the numbers shown in the table have names.

Q3. Where in your daily lives, and in which professions, do the Hindu numerals, and 0, play an important role? How might our lives have been different if our number system and 0 hadn’t been invented or conceived of?

Ans: Hindu numerals Usage 

  • Hindu numerals and the digit zero are used in everyday life, such as telling time, counting and managing money, reading prices, doing mathematics in school, writing phone numbers, etc. 
  • Professions like banking, teaching, engineering, and science rely heavily on this number system.
  • Zero is especially important because it helps in representing place value and making large numbers easy to write and understand

Without zero and the Hindu numeral system:

  1. Basic calculations would be very difficult.
  2. Trading and writing dates would be challenging
  3. Technology like computers and calculators wouldn’t exist
  4. Progress in all fields would be much slower

Q4. The ancient Indians likely used base 10 for the Hindu number system because humans have 10 fingers, and so we can use our fingers to count. But what if we had only 8 fingers? How would we be writing numbers then? What would the Hindu numerals look like if we were using base 8 instead? Base 5? Try writing the base-10 Hindu numeral 25 as base-8 and base-5 Hindu numerals, respectively. Can you write it in base-2?

Ans: If we had only 8 fingers, we might have used base-8. Similarly, with 5 fingers, we could have used base-5.

Let’s convert the base-10 number 25 into different bases:

1. Base-8:
25 ÷ 8 = 3 remainder 1
3 ÷ 8 = 0 remainder 3
So, 25 in base-8 = 31

2. Base-5:
25 ÷ 5 = 5 remainder 0
5 ÷ 5 = 1 remainder 0
1 ÷ 5 = 0 remainder 1
So, 25 in base-5 = 100

3. Base-2:
25 ÷ 2 = 12 remainder 1
12 ÷ 2 = 6 remainder 0
6 ÷ 2 = 3 remainder 0
3 ÷ 2 = 1 remainder 1
1 ÷ 2 = 0 remainder 1
So, 25 in base-2 = 11001

In base-8 or base-5 systems, the Hindu numerals would have included only the digits needed (0 to 7 for base-8, and 0 to 4 for base-5).