04. वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकटरमन – Short and Long Question answer

प्रश्न 1: रामन के प्रारंभिक जीवन पर प्रकाश डालिए?
उत्तर: 
चंद्रशेखर वेंकट रामन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर में हुआ था। वे एक विशेषज्ञ भौतिकविज्ञानी थे और उन्होंने अपने विशेषज्ञता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। उनके पिता भी एक गणित और भौतिकी के शिक्षक थे, जिनका प्रभाव रामन के शैक्षिक प्रवृत्तियों पर बड़ा था। उनका बचपन विज्ञान के प्रति उनकी गहरी रुचि के साथ गुजरा, और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय और स्थानिक शिक्षा संस्थानों से प्राप्त की। वे अपनी पढ़ाई को और भी आगे बढ़ाते गए और उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज, मद्रास से अपनी पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जहाँ से उन्होंने भौतिकी में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की।

प्रश्न 2: ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस की प्रयोगशाला के बारे में बताइए?
उत्तर:
 ‘इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ़ साइंस’ या आई.ए.ई.सी.एस. भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संगठन थी जिसकी स्थापना महेंद्रलाल सरकार ने की थी। इसका उद्देश्य था विज्ञान की प्रोत्साहन देना, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, और भारत में विज्ञान की शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना। इस संगठन के तहत विज्ञानिकों को आवश्यक संसाधनों की प्राप्ति के लिए समर्थन प्रदान किया जाता था।

प्रश्न 3: रामन्‌ वाद्य यंत्रों में खोज क्यों करना चाहते थे?
उत्तर:
 रामन्‌ की खोज की एक मुख्य दिशा थी वाद्य यंत्रों के प्रदर्शन के क्षेत्र में। उन्होंने सबूत देने का इरादा किया कि भारतीय वाद्य यंत्र भी उतने ही उच्च गुणवत्ता और प्रदर्शन क्षमता के साथ हो सकते हैं जैसे कि विदेशी वाद्य यंत्र। उन्होंने भारतीय वाद्य यंत्रों के साथ-साथ विदेशी वाद्य यंत्रों में भी खोज कर दिखाया कि यह भ्रांति गलत है और भारतीय यंत्र भी अच्छे प्रदर्शन क्षमता रखते हैं।

प्रश्न 4: रमन प्रभाव क्या है?
उत्तर:
 रमन प्रभाव एक भौतिकीय प्रभाव है जिसमें प्रकाश के बिखरने के प्रक्रिया में वर्णक्रम में परिवर्तन होता है। यह प्रक्रिया सबसे पहले भारतीय भौतिकविज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रामन द्वारा 1928 में प्रस्तुत की गई थी। जब प्रकाश किसी द्रव्य के साथ मिलता है, तो कुछ तरह की किरणों का बिखरना या परावर्तन होता है, जिससे प्रकाश के वर्ण में परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन उस द्रव्य की मोलेक्युलर संरचना के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

प्रश्न 5: रामन्‌ को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
उत्तर: 
रामन्‌ को उनके योगदान के लिए कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

  • 1930: नोबेल पुरस्कार (भौतिकी)
  • 1954: भारत रत्न
  • रोम का मेथ्यूसी पुरस्कार
  • रॉयल सोसाइटी का ह्यूज पुरस्कार
  • फिलाडेल्फिया इंस्टिट्यूट का फ्रैंकलिन पुरस्कार
  • सोवियत रूस का अंतर्राष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार


प्रश्न 6: रामन्‌ की खोज से भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में क्या बदलाव लाए?
उत्तर:
 रामन्‌ की खोज ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए रामन प्रभाव के प्रयोग से प्रकाश के बिखरने के तरीके का अध्ययन किया गया और यह पता चला कि प्रकाश के बिखरने के प्रक्रिया में एक नई दिशा को प्रमोट किया जा सकता है। इससे विज्ञानिकों को पदार्थों की संरचना के बारे में नई जानकारी प्राप्त हुई और यह उन्हें अधिक समझने और अनुसंधान करने का अवसर प्रदान किया।

प्रश्न 7: रामन्‌ के साथ स्टॉकहोम में क्या हुआ?
उत्तर: 
जब रामन्‌ स्टॉकहोम गए थे ताकि उन्हें नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जा सके, तो वह एक प्रस्तावना प्रस्तुत करने के लिए वहाँ पहुँचे। इस प्रस्तावना के दौरान, उन्हें विज्ञानिकों के साथ मिलकर उनके शोध कार्यों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर मिला। उन्होंने अल्कोहल पर रामन प्रभाव का प्रदर्शन किया, जिसमें प्रकाश के वर्ण में परिवर्तन आता है। यह उनके शोध कार्य की एक महत्वपूर्ण दिशा थी और इससे वे विज्ञानिक समुदाय में एक महत्वपूर्ण योगदान करने में सफल रहे।

प्रश्न 8: रमन की खोज से आइंस्टाइन का क्या संबंध है?
उत्तर:
 रामन की खोज की एक महत्वपूर्ण परिणामिकता थी जो आइंस्टाइन के विचारों को प्रायोगिक रूप में समर्थन प्रदान करती थी। आइंस्टाइन की सापेक्ष तात्त्विकता के अनुसार, प्रकाश की किरणों का बिखरना और परावर्तन विशिष्ट तरीके से होता है जब यह किसी पदार्थ में प्रवेश करता है। रामन की खोज ने इस दिशा को प्रायोगिक रूप में प्रमाणित किया जब उन्होंने दिखाया कि प्रकाश के बिखरने के प्रक्रिया में वर्णक्रम में परिवर्तन होता है, जो पदार्थ की संरचना के बारे में जानकारी प्रदान करता है, जिससे आइंस्टाइन की सिद्धांतों को समर्थन मिला।

प्रश्न 9: रमन ने “रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट” की स्थापना क्यों की?
उत्तर: 
रमन ने बंगलौर, भारत में “रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट” की स्थापना उनके दृष्टिकोण में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए की। उन्हें भारतीय वैज्ञानिकों को उच्चतर शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता महत्वपूर्ण लगी थी, जिससे वे विद्यार्थियों को बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती और वे देश में ही उन्नत तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते। इसके अलावा, उन्होंने इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स नामक वैज्ञानिक पत्रिका की स्थापना भी की, जिससे विज्ञान समुदाय में विज्ञानिक अनुसंधान की प्रोत्साहन की गई।

प्रश्न 10: रमन विवाद क्या था?
उत्तर:
 ‘रमन विवाद’ भारतीय विज्ञान समुदाय में एक महत्वपूर्ण विवाद था जो चंद्रशेखर वेंकट रामन के और विज्ञान समुदाय के बीच में था। 1930 में रामन्‌ के द्वारा रामन प्रभाव की खोज के बाद, उन्होंने एक शोध लेख प्रकाशित किया जिसमें वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे थे कि प्रकाश के बिखरने का कारण क्या है। इसमें उन्होंने यह माना कि प्रकाश के बिखरने का कारण अलकोहल जैसे द्रव्यों में है, जो बाद में गलत साबित हुआ। इसके परिणामस्वरूप, कुछ भारतीय वैज्ञानिकों ने रामन्‌ के विचारों का खंडन किया, जिनमें भगवान चंद्रशेखर वेंकट रामन के अनुयायी भी शामिल थे। इस विवाद के कारण, रामन्‌ की खोज पर सवाल उठे और इसका परिणामस्वरूप उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से वंचित कर दिया गया। हालांकि, बाद में उनकी खोज सत्य सिद्ध हुई और उन्हें 1930 में ही नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

03. तुम कब जाओगे, अतिथि – Short and Long Question answer

प्रश्न 1: अतिथि को आया देख लेखक की क्या दशा हुई और क्यों?
उत्तर: अतिथि को असमय आया देख लेखक ने सोचा कि यह अतिथि अब पता नहीं कितने दिन रुकेगा और इसके रुकने पर उसका आर्थिक बजट भी खराब हो जाएगा। इसका अनुमान लगाते ही लेखक का दृश्य किसी अज्ञात आशंका से धड़क उठा।

प्रश्न 2: लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से कौन-सा कार्य कर रहा था और क्यों?
उत्तर: 
लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से तारीखें बदल रहा था। ऐसा करके वह अतिथि को यह बताना चाह रहा था कि उसे यहाँ रहते हुए चौथा दिन शुरू हो गया है। तारीखें देखकर शायद उसे अपने घर जाने की याद आ जाए

प्रश्न 3: अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने किस आशा के साथ अतिथि का सत्कार किया? और, किस रूप में?
उत्तर: 
अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की और रात्रि में सिनेमा दिखाया। लेखक ने सोचा कि इसके बाद तुरंत भावभीनी विदाई होगी। वह अतिथि को विदा करने स्टेशन तक जाएँगे। इसी आशा के साथ लेखक ने दूसरे दिन भी अतिथि का सत्कार किया।

प्रश्न 4: बातचीत की उछलती गेंद चर्चा के क्षेत्र के सभी कोनों से टप्पे खाकर फिर सेंटर में आकर चुपचाप पड़ी हैं – तुम कब जाओगे अतिथि पाठ के आधार पर कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
 लेखक ने अतिथि से घर-परिवार, दोस्तों, नौकरी, राजनीति, फिल्म, साहित्य, परिवार नियोजन, महँगाई और पुरानी प्रेमिकाओं तक के विषय में काफी बातें कर ली थीं। अब उनके सारे विषय खत्म हो चुके थे। बातचीत रूपी गेंद विषय रूपी कमरे के सारे कोनों को छू आई थी और अब वह शांत पड़ी थी। इस सबका कारण अतिथि का लेखक के घर लंबे समय तक रुकना था। लेखक को लगने लगा था कि यदि अतिथि का मन बातों में ज्यादा ही रम गया तो वह और जम जाएगा और फिर एक ही बात करते-करते उसे बोरियत भी होने लगी थी। इसलिए उनकी बातचीत पर विराम लगा हुआ था। यदि अतिथि समय से खुशी-खुशी चला जाता, तो यह स्थिति कभी उत्पन्न नहीं होती।

प्रश्न 5: तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
उत्तर: 
तीसरे दिन सुबह अतिथि ने लॉण्ड्री में कपड़े देने को कहा क्योंकि वह उससे कपड़े धुलवाना चाहता था।

प्रश्न 6: कैलेण्डर की तारीख फड़फड़ाने का क्या आशय है? तुम कब जाओगे अतिथि पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
अतिथि के जाने के इन्तजार में लेखक के दिन बहुत बेचैनी से बीत रहे थें।

प्रश्न 7: अतिथि सदैव देवता नहीं होता’ वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है। तुम कब जाओगे, अतिथि? पाठ के आधार पर कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
: यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देवता रूप बनाए रखता है, पर फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है। उसका मान-सम्मान होता है, और ज्यादा दिन तक टिकने पर वह राक्षस का रूप ले लेता है। तब वह राक्षस जैसा बुरा प्रतीत होता है।

प्रश्न 8: जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन आए? क्या यह परिवर्तन सही थे?
उत्तर:
 जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो उसकी आवभगत में कमी आई। लेखक के व्यवहार में परिवर्तन आ गया। सौहार्द धीरे-धीरे बोरियत में बदल गया। शब्दों का लेन-देन मिट गया और चर्चा विषय खत्म हो गए। बढ़िया लंच और डिनर ने खिचड़ी का स्थान ले लिया। लेखक को अतिथि थोड़ा-थोड़ा राक्षस प्रतीत होने लगा। यहाँ तक कि लेखक का मन उसे गेट आउट कहने को करने लगा। अतिथि के कई दिन तक रुकने पर घर का बजट बिगड़ जाता है। महँगाई के जमाने में जब अपना परिवार पालना कठिन होता है तब अतिथि का खर्च उठाते-उठाते मेहमान के प्रति व्यवहार में परिवर्तन आना स्वाभाविक है।

02. एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा – Short and Long Question answer

प्रश्न 1: अंगदोरजी के पाँव ठंडे क्यों पड़ जाते थे? एवरेस्ट-मेरी शिखर यात्रा पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर: अंगदोरजी कुशल पर्वतारोही था। वह बिना ऑक्सीजन के बर्फ़ पर चलने का अभ्यस्त था। इसलिए वह यात्रा में ऑक्सीजन नहीं लगाता था। पंरतु बिना ऑक्सीजन के उसके पैर ठंडे पड़ जाते थे।

प्रश्न 2: एवरेस्ट-मेरी शिखर यात्रा पाठ के आधार पर बताइए बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ क्या देखा?
उत्तर: 
बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ एक भारी बर्फ का का बड़ा फूल (प्लूम) देखा।

प्रश्न 3: एवरेस्ट शिखर पर पहुँचकर बछेन्द्री पाल ने स्वयं को किस प्रकार सुरक्षित रूप से स्थिर किया?
उत्तर: 
एवरेस्ट शिखर सँकरा व नुकीला था। अतः वहाँ पहुँचकर स्वयं को सुरक्षित रूप से स्थिर करने के लिए बछेन्द्री पाल ने बर्फ के फावड़े से खुदाई की और उसके उपरान्त घुटनों के बल बैठकर ‘सागरमाथे’ के शिखर का चुंबन किया।

प्रश्न 4: एवरेस्ट की शिखर यात्रा में किन-किन लोगों ने लेखिका बछेन्द्री पाल को सहयोग दिया?
उत्तर:
 एवरेस्ट की शिखर यात्रा में अभियान दल के नेता कर्नल खुल्लर, उपनेता प्रेमचंद, साथी अंगदोरजी तथा डॉक्टर मीनू मेहता ने लेखिका को सफलता प्राप्त करने में उल्लेखनीय सहयोग दिया। कर्नल खुल्लर ने लेखिका को शिखर यात्रा के प्रारंभ से लेकर अंत तक हिम्मत बँधायी, उसका साहस बढ़ाया। उन्होंने अभियान दल के सभी सदस्यों की मृत्यु को सहजता से स्वीकार करने का पाठ पढ़ाकर उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त किया। उपनेता प्रेमचंद ने पहली बाधा खंभु हिमपात की स्थिति से उन्हें अवगत कराया और सचेत किया कि ग्लेशियर बर्फ की नदी है तथा बर्फ का गिरना जारी है। अतः सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए। डॉक्टर मीनू मेहता ने एल्युमीनियम की सीढ़ियों से अस्थायी पुल बनाने, लट्ठों एवं रस्सियों का उपयोग, बर्फ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधना आदि सिखाया। अंगदोरजी ने लेखिका को लक्ष्य तक पहुँचने में सहयोग दिया तथा प्रोत्साहित भी किया।

प्रश्न 5: शिखर पर चढ़ने वालों को किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है? एवरेस्ट- मेरी शिखर यात्रा पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर: 
जो पर्वतारोही हिमालय पर्वत के शिखर पर चढ़ते हैं, उन्हें खराब मौसम और बर्फ के तूफ़ान का मुकाबला करना ही पड़ता है।

प्रश्न 6: एवरेस्ट-मेरी शिखर यात्रा पाठ के सन्दर्भ में बताइए एवरेस्ट अभियान दल कब रवाना हुआ?
उत्तर:
 एवरेस्ट अभियान दल दिल्ली से काठमांडू के लिए 7 मार्च को हवाई जहाज से रवाना हुआ।

प्रश्न 7: ‘एवरेस्ट-मेरी शिखर यात्रा’ पाठ के आधार पर बताइए जय लेखिका को देखकर हक्का-बक्का क्यों रह गया?
उत्तर:
 जय बछेन्द्री पाल का पर्वतारोही साथी था। उसे भी बछेन्द्री के साथ पर्वत-शिखर पर जाना था। शिखर कैम्प पर पहुँचने में उसे देर हो गई थी। वह सामान ढोने के कारण पीछे रह गया था। अतः बछेन्द्री उसके लिए चाय-जूस आदि लेकर उसे लेने के लिए पहुँची। जय ने यह कल्पना नहीं की थी कि बछेन्द्री उसकी चिन्ता करेगी। इसलिए जब उसने बछेन्द्री पाल को उसके लिए चाय-जूस के साथ देखा तो वह हक्का-बक्का रह गया।

प्रश्न 8: एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा पाठ के आधार पर बताइए मई की रात को कैंप तीन में क्या घटना घटी और एक अन्य साथी ने लेखिका की जान कैसे बचाई?
उत्तर: 
15-16 मई, 1984 को बुद्ध पूर्णिमा के दिन जब लेखिका ल्होत्से की बर्फीली सीधी ढलान पर नाइलॉन के बने तंबू के कैंप तीन में गहरी नींद में सोई हुई थी तभी रात में लगभग 12:30 बजे उसके सिर के पिछले हिस्से में एक ज़ोरदार धमाके के साथ कोई सख्त चीज टकराई। वह बर्फ का बड़ा विशालकाय पंज था। जिसने कैंप को तहस-नहस करने के साथ सभी व्यक्तियों को चोटिल किया। लेखिका तो बर्फ के नीचे फंस गयी थी।
तभी लोपसांग अपनी स्विस छुरी की मदद से उनके तंबू का रास्ता साफ करने में सफल हो गया तथा उसने ही लेखिका के चारों तरफ के कड़े जमे बर्फ की खुदाई कर लेखिका को बर्फ की कब्र से बाहर खींच कर निकाला। इस तरह लेखिका की जान बची।

01. दुःख का अधिकार – Short and Long Question answer

प्रश्न 1: खरबूजे बेचने आई महिला फफक-फफक कर क्यों रोए जा रही थी? दुःख का अधिकार पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर: महिला खरबूजे बेचने आई थी और वह फफक-फफक कर रो रही थी क्योंकि एक दिन पहले ही उसका जवान बेटा साँप के डसने से चल बसा था। उसके घर में पोते-पोती और बीमार बहू के लिए खाने को कुछ भी नहीं था। इस परिस्थिति में, शोक मनाने की जगह उसे खरबूजे बेचने की विवशता थी। बेटे की मृत्यु का दुःख उसके दिल को चीर रहा था, जिसके कारण वह रो रही थी।

प्रश्न 2: किस आधार पर हमारे समाज में व्यक्ति का स्तर निर्धारित किया जाता है? दुःख का अधिकार पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर: हमारे समाज में व्यक्ति का स्तर मुख्यतः उसकी पोशाक के आधार पर निर्धारित किया जाता है। एक व्यक्ति की पहचान उसकी पोशाक से होती है, क्योंकि यही उसे अधिकार और दर्जा दिलाती है।

प्रश्न 3: भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?
उत्तर: भगवाना शहर के पास डेढ़ बीघा जमीन पर हरी तरकारियाँ और खरबूजे उगाया करता था। वह रोज़ इन्हें सब्ज़ी-मण्डी या फुटपाथ पर बैठकर बेचता था। इस प्रकार, वह कृषि करके अपने परिवार का निर्वाह करता था।

प्रश्न 4: यशपाल जी की कहानी दुःख का अधिकार में दुख मनाने का अधिकार सबको क्यों नहीं है?
उत्तर: दुःख की अनुभूति समाज के प्रत्येक वर्ग द्वारा की जाती है; हालाँकि, दुःख मनाने का अधिकार सभी को नहीं है। यह विशेष अधिकार केवल सम्पन्न वर्ग को प्राप्त है, क्योंकि उनके पास शोक मनाने के लिए आवश्यक सहूलियतें और समय होता है। इसके विपरीत, गरीब वर्ग की विवशता उन्हें दुःख मनाने की सुविधा नहीं प्रदान करती। वे तो अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए रोज़ी-रोटी की उलझनों में ही जूझते रहते हैं। इस तरह, दुःख मनाने का भी एक अधिकार होता है, जो केवल कुछ लोगों के पास होता है।

प्रश्न 5: दुःख का अधिकार पाठ के आधार पर बताइए बुढ़िया के बेटे का नाम क्या था?
उत्तर: बुढ़िया के बेटे का नाम भगवाना था।

प्रश्न 6: लेखक ने बुढ़िया के दुःख का कारण किस प्रकार पता लगाया? दुःख का अधिकार पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर: लेखक ने बुढ़िया के दुःख का कारण आस-पड़ोस की दुकानों से पूछकर पता लगाया था। इस प्रक्रिया में उन्होंने स्थानीय लोगों से जानकारी प्राप्त की, जिससे उन्हें बुढ़िया के दुःख की वास्तविकता का पता चला।

प्रश्न 7: भगवाना के इलाज और उसकी मृत्यु के बाद घर की आर्थिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: भगवाना के इलाज में घर का आटा और अनाज तक समाप्त हो गया था। उसकी मृत्यु के बाद, कफ़न के इंतजाम के लिए छोटे-मोटे आभूषण तक बिक गए। अब उसके घर में खाने की भी किल्लत होने लगी। इस तरह, घर की आर्थिक स्थिति बिल्कुल खराब हो गई थी।

प्रश्न 8: इस पाठ का शीर्षक दुःख का अधिकार कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस पाठ का शीर्षक दुःख का अधिकार सटीक एवं सार्थक है। लेखक यह बताना चाहता है कि यद्यपि दुःख प्रकट करना हर व्यक्ति का अधिकार है, परन्तु हर कोई ऐसा कर नहीं सकता। एक ओर, सम्पन्न महिला है जो बिना किसी जिम्मेदारी के अपने दुःख का प्रदर्शन कर सकती है। उसके पास डॉक्टर, सेवा-कर्मी, साधन, धन और समय है, जिससे वह पुत्र-शोक मनाने में सक्षम है। वहीं, गरीब लोग अभागे हैं; वे चाहे तो भी शोक प्रकट करने के लिए आसानी से दो आँसू नहीं बहा सकते। उनके सामने खड़ी भूख, गरीबी और बीमारी नंगा नाच करने लगती है। इस प्रकार, दुःख प्रकट करने का अधिकार गरीबों को नहीं है, क्योंकि उनके पास इससे निपटने के लिए आवश्यक साधन नहीं होते।

10. खुशबू रचते हैं हाथ… – Short Questions answer

अतिलघूउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. ‘जूही की डाल-से खुशबूदार हाथ’ पंक्ति में किन लोगों के हाथों का वर्णन है?
उत्तरः ‘जूहू की डाल से खुशबूदार हाथ’ नव युवतियों की वय के हाथों का वर्णन किया है।

प्रश्न 2. ‘गन्दे मुहल्लों के गन्दे लोग’ कौन होते हैं? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तरः ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ का आशय है कि वे मजदूर जो खुशबूदार अगरबत्तियाँ बनाते हैं, वे ही अपने परिश्रम द्वारा सारे संसार को खुशबू देते हैं।
व्याख्यात्मक हल:
‘गुन्दे मुहल्ले के गन्दे लोग’ यहाँ अगरबत्तियाँ बनाने वाले निम्नवर्गीय लोगों को कहा गया है।

प्रश्न 3. खुशबू रचने वाले हाथ किन परिस्थितियों में तथा कहाँ रहते हैं ?
उत्तरः खुशबू रचने वाले हाथ कई गलियों के बीच कई नालियों के पार कूड़े-करकट के ढेरों के बाद बदबूदार इलाके में रहते हैं। इनकी अलग बस्ती होती है।

प्रश्न 4. ‘खुशबू’ ‘रचने वालों को’ ‘गंदे मुहल्ले के गंदे लोग’ क्यों कहा गया है?
उत्तरः ‘खुशबू रचने वालों को, गंदे मुहल्ले के गंदे लोग’ इसलिए कहा जाता है कि खुशबू रचने वाले लोग गन्दे मुहल्लों में रहते हैं और स्वयं भी गन्दे होते हैं।

प्रश्न 5. प्रस्तुत कविता में कवि ने किस विषमता का पर्दाफाश किया है ?
उत्तरः प्रस्तुत कविता में कवि ने सामाजिक विषमता का पर्दाफाश किया है।

प्रश्न 6. ‘गंदे मुहल्लों में खुशबुओं वाली अगरबत्तियाँ बनती हैं’, इस कथन में क्या विरोध है?
उत्तरः श्रमिक स्वयं दुख झेल कर दूसरों को सुखी करता है।
व्याख्यात्मक हल:
सारे संसार को खुशबू से महका देने वाली खुशबूदार अगरबत्तियों को बनाने वाले श्रमिकों की गरीबी के कारण कई नालियों के पार कूड़े-करकट के ढेरों के बाद बदबूदार इलाकों में रहना पड़ता है। ये लोग स्वयं भी गन्दे होते हैं। वहाँ के गंदे माहौल में रहना  इनकी मजबूरी होती है। वह स्वयं दुख सहता है और संसार को खुशबू से महकाकर सुखी करता है।

लघूउत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. ‘गंदगी में रहकर भी खुशबू का निर्माण’-कथा के द्वारा कवि देश की किस विषमता की ओर इशारा कर रहा है ?
उत्तरः गंदगी में रहने वाले ये मजदूर अगरबत्तियों का निर्माण कर खुशबू फैलाते हैं। कवि ने ऐसा कहकर देश में व्याप्त अर्थिक विषमता की ओर संकेत किया है और मजदूरों की दीन-हीन दशा की ओर कवि इशारा करता है।

प्रश्न 2. हमारे देश में मानसिक और शारीरिक श्रम करने वालों में किस प्रकार का भेदभाव किया जाता है? खुशबू रचते हाथ कविता के आलोक में लिखिए।
उत्तरः हमारे देश में मानसिक श्रम करने वाले को मध्य वर्ग का, पढ़ा-लिखा तथा सम्मानपूर्ण स्थान मिलता है जबकि शारीरिक श्रम करने वाले गरीब मजदूरों को निम्न वर्ग का, अशिक्षित जाहिल समझा जाता है। समाज में उन्हें सम्मान प्राप्त नहीं होता है।

प्रश्न 3. मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ कहाँ बनती हैं ?
उत्तरः देश की मशहूर खुशबूदार अगरबत्तियाँ जहाँ बनती हैं, वहाँ गन्दगी होती है। ये अगरबत्तियाँ चारों तरफ बदबू से भरी बस्तियों तथा कूड़े के ढेर वाली गलियों में बसे गंदे मोहल्लों में बनती है।

प्रश्न 4. जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल केसा होता है?
उत्तरः जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं वहाँ माहौल अत्यन्त गन्दा होता है। सुगन्धित अगरबत्तियाँ बनाने वाले लोग गन्दे मोहल्लों में रहते हैं। ये लोग स्वयं भी गन्दे होते हैं तथा दुनिया-भर की गन्दगी के बीच रहते हैं। वहाँ का माहौल रहने योग्य नहीं होता पर वहाँ रहना इनकी मजबूरी है।

प्रश्न 5. ‘पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?
उत्तरः कवि उन बच्चों के बारे में कहना चाहता है जिनके हाथ पीपल के नए-नए पत्तों की तरह कोमल होते हैं तथा अगरबत्ती बनाते-बनाते उनके हाथों की कोमलता एवं सुगन्ध गायब हो जाती है।

प्रश्न 6. ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता सामाजिक विषमताओं को किस प्रकार बेनकाब करती है ?
उत्तरः ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता समाज के निर्माण में योगदान करने वाले लोगों के साथ होने वाले उपेक्षा भाव को बेनकाब करती है। कवि सामाजिक और आर्थिक विषमता को मिटाने के प्रति लोगों को सचेष्ट करना चाहता है कि श्रमिक वर्ग को भी जीने के लिए उचित वातावरण मिलना चाहिए।

प्रश्न 7. जो लोग खुशबू की रचना, सजाने-सँवारने का काम करते हैं, उनके हाथ केसे होते हैं ?
अथवा
कविता में कितने तरह के हाथों की चर्चा हुई?
उत्तरः जो लोग खुशबू की रचना, सजाने-सँवारने का काम करते है उनके हाथ निम्न प्रकार के होते हे। उनके हाथ घिसे नाखून वाले होते हैं। उभरी नसों वाले कटे-फटे, ज़ख्मों से फटे होते हैं। पीपल के पत्तों से कोमल होते हैं। जूही की डाली के समान नाजुक होते हैं।

प्रश्न 8. ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता में कवि किस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता है और क्यों ?
उत्तरः जहाँ अगरबत्तियाँ बनती हैं, वहाँ का माहौल बदबूदार होता है। वे दुनिया की निकृष्टतम बस्तियाँ हैं। इन गंदी बस्तियों में श्रमिक रहते हैं। वहाँ जीने की दशाएँ बेहद खराब हैं तथा श्रमिकों की दीन-हीन दशा की ओर कवि ध्यान आकर्षित करना चाहता है।

10. नए इलाके में…  – Short Questions answer

अति लघू उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. इस कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है ? 
उत्तर: इस कविता में निम्नलिखित पुराने निशानों का उल्लेख किया है-
(i) पीपल का पेड़,
(ii) ढहा हुआ मकान,
(iii) जमीन का खाली टुकड़ा,
(iv) बिना रंग वाला लोहे का फाटक,
(v) इक मंजिला मकान।

प्रश्न 2. कवि अपने घर के लिए कहाँ से मुड़ता था तथा उसका मकान कैसा था ?
उत्तर: कवि अपने घर के लिए खाली पड़े जमीन के टुकडे़ से बाएँ मुड़ता था। कवि का मकान एक मंजिला था उस पर बिना रंग वाला लोहे का फाटक चढ़ा था।

प्रश्न 3. ‘नए इलाके में’ शीर्षक कविता का मूल भाव लिखिए।
उत्तर: इस कविता को लिखने के पीछे कवि का उद्देश्य समाज के निचले तबके द्वारा किया जा रहा उत्कृष्ट कार्य प्रकाश में लाना है। कवि सामाजिक और आर्थिक विषमता के प्रति हमें सचेत और जागरूक करना चाहते हैं।

प्रश्न 4. कवि रास्ता क्यों भूल जाता है? 
उत्तर:  कवि रास्ता भूल जाता है क्योंकि  इस इलाके में नए-नए घर बन गए हैं |

प्रश्न 5. कवि निशानों की क्यों बात करता है?

उत्तर: तीव्रता से हो रहे बदलावों को बताने के लिए | 

लघू उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. कवि को क्या उम्मीद है ?
उत्तर: कवि को यह उम्मीद है कि कोई-न-कोई पूर्व परिचित व्यक्ति उसे अवश्य पहचान लेगा और उसे आवाज देकर बुलायेगा अर्थात इस परिर्वतनशील समय में भी कुछ-न-कुछ अवश्य बचा रह गया है।

प्रश्न 2. नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?
उत्तर: नए निर्माण होते इलाके में कवि के रास्ता भूलने का कारण हैμइन इलाकों में हर रोज नए-नए निर्माण होना, नए इलाके बसना तथा बनाए गए निशानों का न मिलना। अर्थात् कवि नए परिवर्तन के कारण रास्ता भूल जाता है।

प्रश्न 3. कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है?
उत्तर: कवि एक घर पीछे या दो घर आगे इसलिए चल देता है, क्योंकि नित्य नए परिवर्तन कवि की बनाई पहचान तथा पिछली बार के निशानों को मिटा देते हैं। इसलिए कवि अपने एक मंजिल रूपी घर तक नहीं पहुँच पाता।

प्रश्न 4. अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने कौन-कौन से निशान याद रखे थे । ‘नए इलाके में’ कविता के आधार पर उत्तर लिखिए । 
उत्तर: अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने निम्न निशान याद रखे थे। पीपल का पेड़, खाली पड़ा प्लाॅट या ढहा हुआ मकान तथा एक मंजिला बिना रंग के फाटक वाला मकान।

प्रश्न 5. स्मृति के भरोसे क्यों नहीं रहा जा सकता ?
उत्तर: स्मृति के भरोसे इस दुनिया में अधिक समय तक नहीं रहा जा सकता। यहाँ वास्तविकता का सामना करना ही पड़ता है। यहाँ पल-पल परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में स्मृति धोखा खा जाती है।

प्रश्न 6. कवि नए शहर में अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए किन-किन निशानों को खोजता है ?
उत्तर: 

  • पीपल का पेड़
  • ढहा हुआ घर
  • जमीन का खाली टुकड़ा/बिना रंग वाला लोहे का फाटक 

प्रश्न 7. व्याख्या कीजिए − यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि नए इलाके में उसकी स्मृति भी उसका साथ छोड़ देती है। यहाँ नित नई-नई इमारतें बन रही हैं। इस कारण से वह इस नए इलाके का जो रेखाचित्र बनाकर उसे याद रखता है, वह हर रोज़ बदल जाता है। इसलिए कवि को अब अपनी स्मृति पर भी भरोसा नहीं है। 

प्रश्न 8. व्याख्या कीजिए − समय बहुत कम है तुम्हारे पास आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देखकर

उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने समय की कमी की ओर इशारा किया है क्योंकि उसने अपना काफी समय अपने घर को ढूँढने में बर्बाद कर दिया। आज के इस प्रगतिशील समय में हर इंसान प्रगति की सीढ़ियों को पार करने में लगा हुआ है परन्तु कवि अपनी पहचान भी भूल गया है। समय के इस अभाव के कारण वह किसी के भी साथ आत्मीय सम्बंध नहीं बना पाता है।

09. अग्नि पथ – Short Questions answer

अतिलघूउत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. अग्निपथ कविता में कवि किसको संबोधित कर रहा है?
उत्तरः अग्निपथ कविता में कवि जीवन पथ पर आगे बढ़ने वाले मुसाफिर को संबोधित कर रहा है।

प्रश्न 2. ‘घने वृक्ष’ और ‘एक पत्र-छाँह’ का क्या अर्थ है ?
उत्तरः ‘घने वृक्ष’ मार्ग में मिलने वाली सुविधा के प्रतीक हैं। इनका आशय है-जीवन की सुख-सुविधाएँ। ‘एक पत्र-छाँह’ का प्रतीकार्थ है-थोड़ी-सी सुविधा।

प्रश्न 3. ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ से क्या आशय है ?
उत्तरः ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ का आशय है – संकटों से पूरी तरह ग्रस्त मनुष्य। मार्ग में आने वाले कष्टों को झेलता हुआ तथा परिश्रम की थकान को दूर करता हुआ मनुष्य अपने-आप में सुन्दर होता है।

प्रश्न 4. ‘अग्निपथ’ कविता के माध्यम से कवि क्या सन्देश देना चाहते हैं ?
उत्तरः कवि यह सन्देश देना चाहते हैं कि हमें जीवन-पथ पर सँभलकर चलना है, अपनी मंज़िल तक पहुँचना है। क्योंकि जीवन संघर्षों तथा चुनौतियों से भरा हुआ है, इसमें सुख की कामना तथा विश्राम लक्ष्य प्राप्ति में बाधक है।

प्रश्न 5. ‘माँग मत’, ‘कर शपथ’, ‘लथपथ’ इन शब्दों की पुनरावृत्ति क्यों की गई है ? ‘अग्निपथ’ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तरः शब्दों की पुनरावृत्ति करके कवि कर्मठ व्यक्तियों को जीवन-पथ की कठिनाइयों से जूझने के लिए दृढ़ करके तैयार करना चाहता है। चाहे उनके मार्ग में अनगिनत कठिनाइयाँ उन्हें घेर लें, तब भी वह जीवनपथ पर संघर्ष से नहीं थकेगा।

लघूउत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. ‘‘पथ पर थम जाने से हम किस लाभ से वंचित रह जाते है’ ’कविता ‘अग्निपथ’ के आधार पर उत्तर दीजिए।
उत्तरः यह जीवन पथ अग्निपथ के समान संघर्षों, कष्टों, बाधाओं से भरा हुआ है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जो इस पथ की बाधाओं से घबराकर बीच में ही थम जाते हैं वे अपना लक्ष्य (मंजिल) प्राप्त नहीं कर पाते।

प्रश्न 2. ‘अग्निपथ’ में क्या माँगना चाहिए ?
उत्तरः ‘अग्निपथ’ अर्थात-संघर्षमयी जीवन में हमें चाहे अनेक घने वृक्ष मिलें, परंतु हमें एक पत्ते की छाया की भी इच्छा नहीं करनी चाहिए। किसी भी सहारे के सुख की कामना नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 3. यह कविता आपको क्यों प्रभावित करती है ?
उत्तरः इस कविता में जीवन को संघर्षमय, कष्टमय और दुःखमय बताया गया है तथा मनुष्य को इसकी चुनौतियों का सामना करने का आग्रह किया गया है। यह चुनौती सशक्त एवं प्रभावी बन पड़ी है।

प्रश्न 4. कवि ने ‘अग्निपथ’ किसके प्रतीक स्वरूप प्रयोग किया है ?
उत्तरः कवि ने ‘अग्निपथ’ जीवन की कठिनाई से पूर्ण मार्ग के लिए प्रयुक्त किया है। वह मानता है कि जीवन में पग-पग पर संकट हैं, चुनौतियाँ और कष्ट हैं। इस प्रकार यह जीवन संघर्षपूर्ण है।

प्रश्न 5. कवि ने कौन-से दृश्य को सबसे महान् कहा है? ‘अग्निपथ’ कविता के आधार पर उत्तर लिखिए।
उत्तरः कवि ने संघर्षमयी जीवन को सबसे महान् कहा है, क्योंकि कभी यह जीवन पथ फूलों की शय्या है तो कभी काँटों की। पर हमें अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए। यह कविता हमें जीवन में संघर्ष करते हुए निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

प्रश्न 6. संघर्ष करते रहने वाला व्यक्ति क्या कभी थक सकता है ? यदि हाँ तो किन स्थितियों में।
उत्तरः सच्चा संघर्ष करने वाला व्यक्ति तब तक नहीं थकता जब तक उसे लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो जाती। उसके लिए थकावट लक्ष्य के मार्ग को त्यागना है न कि लक्ष्य पर चलने के लिए लंबा मार्ग अपनाना। वह केवल उन स्थितियों में थकता है जब उससे लक्ष्य के मार्ग पर चलते-चलते कोई चूक न हो जाये।

प्रश्न 7. ‘एक पत्र छाँह भी माँग मत’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः प्रस्तुत कविता में कवि ने संघर्षमय जीवन को ‘अग्निपथ’ कहते हुए मनुष्य को यह सन्देश दिया है कि राह में सुख रूपी छाँह की चाह न कर, अपनी मंजिल की ओर कर्मठतापूर्वक बिना थकान महसूस किए बढ़ते ही जाना चाहिए।

प्रश्न 8. ‘अग्निपथ’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।
उत्तरः इस कविता का मूल भाव है निरन्तर संघर्ष करते हुए जियो। कवि जीवन को अग्निपथ अर्थात् आग से भरा पथ मानता है। इसमें पग-पग पर चुनौतियाँ और कष्ट हैं। मनुष्य को इन चुनौतियों से नहीं घबराना चाहिए और इनसे मुँह भी नहीं मोड़ना चाहिए बल्कि आँसू पीकर, पसीना बहाकर तथा खून से लथपथ होकर भी निरन्तर संघर्ष पथ पर अग्रसर रहना चाहिए।

प्रश्न 9. ‘तू न थमेगा कभी! तू न मुड़ेगा कभी!’ पंक्ति में कवि मनुष्य को क्या प्रेरणा देना चाहता है ?
उत्तरः ‘अग्निपथ’ संघर्षमय जीवन का प्रतीक है। जीवन-पथ पर आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास देता है सीमित सुख-साधनों में गुज़ारा करना तथा कठोर परिश्रम तथा निडरता की आवश्यकता है।

प्रश्न 10. अग्निपथ के मुसाफिर को क्या शपथ लेनी चाहिए और क्यों?
उत्तरः अग्निपथ के मुसाफिर को संघर्ष के रास्ते पर चलते रहने की शपथ लेनी चाहिए। तभी वह अपने लक्ष्य पर पहुँच पाएगा। वह जीवन भर संघर्ष से थकेगा नहीं। चाहे अनगिनत कठिनाइयाँ घेर लें। परन्तु वह जीवन रूपी पथ पर चलकर अपनी मंजिल को प्राप्त करेगा।

08. गीत – अगीत – Short Questions answer

प्रश्न 1: शुक और शुकी पेड़ पर क्या करते हैं? कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर:
 शुक पेड़ की घनी डाल पर बैठा सूरज की सतरंगी किरणों का स्पर्श पाकर मधुर गीत गाता है तथा घोंसले में बैठी शुकी शुक का गीत सुनकर प्रसन्न होती है। प्रेम में मग्न हो वह अंडों पर पंखों को फैलाकर उन्हें सेने लगती है। कवि कहना चाहता है कि पशु-पक्षियों में भी प्रेम एवं वात्सल्य की अनुभूति होती है।

प्रश्न 2: नदी और गुलाब क्या कर रहे हैं? कविता के आधार पर बताइए।
उत्तर:
 नदी अपने तटों से विरह की बात कर रही है। वह अपने कष्टों की बात तटों से सुनकर अपने मन को हल्का कर लेती है। दूसरी तरफ गुलाब अकेला खड़ा है। वह सोच रहा है कि यदि ईश्वर ने उसे स्वर दिया होता तो वह भी अपने मन की बात संसार को बता सकता था।

प्रश्न 3: नदी-तट पर खड़े गुलाब की मनोदशा क्या है?
उत्तर: 
नदी-तट पर खड़ा गुलाब यह सोचता है कि यदि ईश्वर ने उसे भी बोलने के लिए स्वर प्रदान किया होता तो वह भी अपने पतझर के सपनों के गीत संसार को सुना देता। स्वर न होने के कारण वह अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर सकता।

प्रश्न 4: ‘गीत-अगीत’ कविता में कवि की दुविधा क्या है? उसने अपनी दुविधा को किन उदाहरणों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है?
उत्तर: 
‘गीत-अगीत’ कविता में कवि की दुविधा है कि अपनी वेदना को मन-ही-मन अनुभव करना ठीक है या उसे प्रकट करना। वह निम्न उदाहरणों से अपनी दुविधा व्यक्त करता है- नदी और किनारा, निर्झरी और गुलाब, शुक और शुकी, विरही गायक और उसकी राधा।

प्रश्न 5: कवि ने ‘अगीत’ को गीत के समान महत्त्व क्यों दिया है?
उत्तर: 
कवि गीत को भावनाओं का प्रकटीकरण मानता है। इसमें भावनाओं का महत्त्व शब्दों से अधिक है। शब्द बाह्य है, भावना अन्दरूनी। बाह्य अलंकरण मात्र होता है। शब्द उमड़ने से पहले जो भावनाएँ हृदय में होती हैं, उन्हीं का महत्त्व होता है। ये भावनाएँ हर मनुष्य में होती हैं। शब्दों के माध्यम से प्रकटीकरण सभी नहीं कर पाते। हृदय में उमड़ने वाली भावनाएँ किसी गीत से कम नहीं होतीं। अतः ‘अगीत’ का महत्त्व गीत के समान ही है।

प्रश्न 6: प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंधों के बारे में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंधों के बारे में निम्नलिखित स्पष्टीकरण हैं-

  • प्रकृति का श्रृंगार पशु-पक्षी हैं और प्रकृति इनका शृंगार है।
  • प्रकृति की सुषमा को देखकर ही पशु-पक्षी मस्त होते हैं।
  • ये प्रकृति को अपने सुरों से संगीतमयी बनाते हैं।
  • प्रकृति के हर रूप के साथ रहकर पशु-पक्षी अपना स्नेह दर्शाते हैं।
  • पशु-पक्षी प्रकृति की सफाई करके पर्यावरण को शुद्ध भी करते हैं।


प्रश्न 7: ‘गीत-अगीत’ कविता में कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर:
 इस कविता में कवि ने गीत-अगीत में अंतर स्पष्ट किया है। गीत वह होता है, जिसे स्वर दिया जा सके तथा स्वर न पाने वाले को अगीत कहा जाता है। कवि ने प्रकृति, पक्षियों तथा मानवों का उदाहरण देकर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि जो भावनाएँ व्यक्त नहीं हो पातीं, उनका महत्त्व कम नहीं होता। वे दूसरे की प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।

प्रश्न 8: मनुष्य प्रकृति के किस रूप से आंदोलित होता है?
उत्तर:
 मनुष्य प्रकृति के अनेक रूपों से आंदोलित होता है, जो निम्नलिखित हैं-

  • प्रकृति का मोहक व शांत वातावरण उसे शांति प्रदान करता है।
  • प्रात:कालीन सूर्य से उसे उल्लास व स्फूर्ति प्राप्त होती है।
  • घुमड़ते बादलों को देखकर मनुष्य प्रसन्न होता है। उसमें आशा का संचार होता है।
  • मनुष्य को प्रकृति अपने साथ हँसती रोती जान पड़ती है।


प्रश्न 9: गीत-अगीत में अंतर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
गीत व अगीत—दोनों ही के भाव सौंदर्यपूर्ण, ममता व प्रेम से परिपूर्ण हैं। प्रेमी की पुकार सुनकर प्रेमिका खिंची चली आती है और नीम की छाया में छिपकर उसका गीत सुनती है। गाने में लीन प्रेमी और सुनने में लीन प्रेमिका। एक शब्दों से अपना प्रेम प्रकट करता है तो दूसरा मौन रहकर गाया जाने वाला गीत है और मौन रहकर प्रेम की अभिव्यक्ति अगीत है। दोनों ही अत्यन्त सुंदर हैं।

07. दोहे – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. प्रेम की डोर किससे बँधी है?
उत्तरः
 प्रेम की डोर विश्वास से बँधी है।

प्रश्न 2. एक को साधने का क्या अर्थ है? रहीम के दोहे के अनुसार लिखिये। 
उत्तरः एक को साधने का अर्थ है किसी एक पर विश्वास करके कार्य करना, अर्थात् ईश्वर को मूल मानकर उनकी साधना करना।

प्रश्न 3. अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा? 
उत्तरः
 अवध नरेश श्री राम पर संकट आने पर यानि वनवास के दौरान वे कुछ समय के लिए चित्रकूट आ गए थे।

प्रश्न 4. नट किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
उत्तरः नट कुण्डली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है। वह कुण्डली में सिमट जाता है और छलाँग मारकर रस्सी के ऊपर चढ़ जाता है।

प्रश्न 5. सागर की बड़ाई क्यों नहीं होती?
उत्तर:
 उसके जल से किसी की प्यास न बुझने के कारण सागर की बड़ाई नहीं होती।

प्रश्न 6. रहीम के अनुसार हिरन अपना सर्वस्व कैसे न्यौछावर कर देता है? 
उत्तरः 
रहीम के अनुसार हिरन नाद पर प्रसन्न होकर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है।

प्रश्न 7. लाख कोशिश करने के बाद भी बिगड़ी बात नहीं बनती क्यों?
उत्तरः जिस प्रकार एक बार दूध के खराब होने पर उससे मक्खन नहीं बनाया जा सकता, उसी प्रकार लाख कोशिश करने पर भी बिगड़ी बात नहीं बनाई जा सकती।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रहीम ने प्रेम के सम्बन्ध में किसका उदाहरण दिया है? प्रेम और धागे में क्या समानता है?
उत्तरः इसके संबंध में रहीम ने धागे का उदाहरण दिया है। प्रेम धागे के समान कोमल और अखण्ड होता है। जिस प्रकार धागा यदि एक बार टूट गया तो फिर जुड़ नहीं पाता और यदि जोड़ भी दिया जाये तो उसमें गाँठ पड़ जाती है, वैसा ही प्रेम संबंध है। इसलिए प्रेम रूपी धागा कभी तोड़ना नहीं चाहिए।

प्रश्न 2. ‘रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय’ कवि रहीम ने क्यों कहा है?
उत्तरः रहीम के अनुसार मनुष्य को अपने मन की व्यथा अपने मन में ही छिपाकर रखनी चाहिए। उसे किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 3. अपना दुःख दूसरों के सामने प्रकट क्यों नहीं करना चाहिए?
अथवा
हमें अपना दुःख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है? 

उत्तरः अपना दुःख दूसरों पर प्रकट नहीं करना चाहिए क्योंकि असंवेदनशील लोग प्रत्यक्षतः तो सहानुभूति प्रकट करते हैं परन्तु पीठ पीछे उपहास करते हैं। इस प्रकार दुःख कम होने की अपेक्षा बढ़ जाता है।

प्रश्न 4. एक के साधने से सब कैसे सध जाता है?
उत्तरः (i) एक काम को साधने से सब काम वैसे ही सँवर जाते हैं जैसे जड़ में पानी देने से फूल, पत्ती, पूर्ण पेड़ का विकास होता है।
(ii) एक ही परमात्मा के साधने से अन्य सारे काम स्वयं ही सध जाते हैं।
(iii) वही तो सबका मूल है।
(iv) जड़ (मूल) सींचने से फल-फूल स्वयं ही (वृक्ष) लहलहा उठते हैं। उसी प्रकार परमात्मा को साधने से सभी काम सध जाते हैं और पूरे हो जाते हैं।

प्रश्न 5. रहीम ने सागर जल की अपेक्षा पंक जल को धन्य क्यों कहा है?
उत्तरः रहीम ने सागर के जल को व्यर्थ इसलिए कहा है, क्योंकि यह पीने के काम नहीं आता। सागर में अथाह जल होने पर भी लोग प्यासे मरते हैं। इसकी तुलना में पंक-जल गंदा होते हुए भी इसलिए धन्य है, क्योंकि इसे पीकर छोटे-छोटे जीवों की प्यास बुझती है। इस प्रकार यह जल उपयोगी है जबकि सागर के जल का कोई उपयोग नहीं है।

प्रश्न 6. ‘जहाँ काम आवै सुई, कहा करे तरवारि’-पंक्ति का आशय पठित दोहे के आधार पर कीजिए।
उत्तरः हर वस्तु का अपना महत्व होता है, सभी उपयोगी सिद्ध होते हैं। बड़े को देखकर छोटे को अनदेखा नहीं करना चाहिए। सुई की आवश्यकता पड़ने पर तलवार काम नहीं आती। जीवन में छोटी से छोटी वस्तु का अपना महत्व होता है।

प्रश्न 7. विपत्ति के समय अपनी ही सम्पत्ति क्यों काम आती है? 
उत्तरः दूसरे की सम्पत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता है। हो सकता है जरूरत के समय पर वह व्यक्ति ना नुकर करे। इसलिए विपत्ति के समय अपनी सम्पत्ति ही काम आती है।

प्रश्न 8. जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता है? 
उत्तरः 
जलहीन यानी पानी बिना कमल की रक्षा सूर्य भी नहीं कर सकता, यद्यपि सूर्य ही कमल को खिलाता है। वह कमल खिलेगा जो पानी के मध्य स्थित है। अर्थात् दूसरा भी हमारी मदद तभी कर पाता है जब हमारे पास कुछ होता है। साधनहीन की कोई मदद नहीं करता।

प्रश्न 9. ‘मोती, मानुष, चून’ के सन्दर्भ में पानी के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः ‘मोती’ के सन्दर्भ में पानी का अर्थ चमक (कान्ति) है। इसी चमक से वह कीमती बनता है। ‘मानुष’ के सन्दर्भ में ‘पानी’ इज्जत, मान-सम्मान का प्रतीक बनकर आता है। इसी से मनुष्य का समाज में स्थान निश्चित होता है। ‘चून’ के सन्दर्भ में पानी ही उसे गूँदने के काम आता है और तभी इससे खाना पकना संभव होता है।

06. रैदास – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश

प्रश्न 1. कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को क्या माना है? ‘रैदास के पद’ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को चंदन माना है।

प्रश्न 2. रैदास के आधार पर बताइए कि चंदन को पानी की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तरः पानी की सहायता से ही उसका सुगंधित लेप बनाया जा सकता है।

प्रश्न 3. चन्दन की सुगंध अंग-अंग में बस जाने से रैदास का भाव क्या है? 
उत्तरः राम की भक्ति उनके शरीर के हर अंग में समा गई है।

प्रश्न 4. स्वयं को बाती कहकर रैदास क्या सिद्ध करना चाहते हैं?
उत्तरः मनुष्य ईश्वरीय कृपा से प्रकाशित होता है। रैदास यह सिद्ध करना चाहते हैं कि वे बाती की तरह ईश्वर के प्रेम में सदा जलते रहते हैं।

प्रश्न 5. सुहागे से मिलने पर सोने में क्या परिवर्तन आता है? 
उत्तरः सुहागा से मिलकर सोना शुद्ध व चमकीला हो जाता है।

प्रश्न 6. रैदास की भक्ति किस प्रकार की है? 
उत्तरः रैदास की भक्ति दास्य भाव की है।

प्रश्न 7. ‘रैदास’ ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?

अथवा

रैदास ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है? उनके स्वामी की कोई दो विशेषताएँ भी बताइए।
उत्तरः रैदास ने अपने स्वामी को गरीब निवाजु, लाल, गोविन्द, गुसाई, हरि आदि नामों से पुकारा है। स्वामी की नजर में भक्त की भक्ति श्रेष्ठ व उनका प्रेम सर्वाेपरि है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. कवि रैदास ने भगवान और भक्त की तुलना किन-किन चीजों से की है? 

अथवा

पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना किन-किन चीजों से की है, उनका उल्लेख कीजिए। 
उत्तरः रैदास के लाल की विशेषता है कि वह दीनदयालु, गरीब निवाजु हैं। ईश्वर समदर्शी है। जो नीची जाति वालों को भी अपनाकर उन्हें समाज में ऊँचा स्थान देता है। वह असंभव को भी संभव कर सकता है।

प्रश्न 2. रैदास ईश्वर के साथ किन-किन रूपों में एकाकार हो गए हैं? 
उत्तरः रैदास ईश्वर के साथ चंदन-पानी, घन वन-मोर, चाँद चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सुहागा-सोना आदि रूपों में एकाकार हो गए हैं।
व्याख्यात्मक हल:
रैदास की आत्मा परमात्मा के प्रेम में उसी तरह एकाकार हो गई है जिस तरह चंदन-पानी, घनवन-मोर, चाँद-चकोर, दीपक-बाती, मोती-धागा, सुहागा-सोना आदि एक दूसरे के बिना अधूरे व महत्वहीन हो जाने के कारण एकाकार हो गए हैं।

प्रश्न 3. रैदास की भक्ति में कौन-सा भाव उभरकर आया है? उनकी कविता से प्रमाण दीजिए।
उत्तरः दास्यमान, प्रमाण -‘तुम स्वामी हम दासा’
व्याख्यात्मक हल:
रैदास की भक्ति दास्य भाव की है। वे स्वयं को लघु, तुच्छ और दास कहते हैं। वे प्रभु को दीनदयाल, भक्तवत्सल कहते हैं व स्वयं को दास और प्रभु को उनका स्वामी बताते हुए कहते हैं-“तुम स्वामी हम दासा।”

प्रश्न 4. कवि रैदास ने प्रभु को निडर क्यों कहा है?

अथवा

रैदास के ‘लाल’ की क्या विशेषता है? 
उत्तरः कवि ने प्रभु को निडर कहा है क्योंकि वह दीन, दयालु, गरीब निवाजु है। वे समदर्शी हैं। वे नीची जाति वालों को भी अपनाकर उन्हें समाज में ऊँचा स्थान देते हैं। वह असंभव को भी संभव कर सकते हैं।

प्रश्न 5. रैदास ने ईश्वर की किस गरीब निवाज की अनोखी आदत का उल्लेख किया है? कवि ‘गरीब निवाजु’ किसे कहते हैं और क्यों?
उत्तरः गरीब को अमीर और राजा बना देता है।
व्याख्यात्मक हल:
कवि रैदास ने अपने प्रभु को ‘गरीब निवाजु’ कहा है। इसका अर्थ है-दीन-दुखियों, गरीबों पर दया करने वाला। प्रभु ने रैदास जैसे अछूत को संत की पदवी प्रदान कर उसे आदर, सम्मान का पात्र बना दिया। प्रभु गरीब को अमीर और राजा बना देता है।

प्रश्न 6. ‘जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ – रैदास की पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः इसका आशय यह है कि वह ईश्वर गरीब नवाज है जिन्हें अस्पृश्य, अछूत मानकर यह संसार ठुकराता है उन्हें वह अपनी शरण में लेकर उनका कल्याण करता है। उनके दुःख को देखकर द्रवित होता है। उनके दुःख को दूर करता है।

प्रश्न 7. अनेक साधु-सन्तों के नाम लेकर कवि क्या स्पष्ट करना चाहते हैं? 
उत्तरः अनेक साधु सन्तों के नाम लेकर कवि ईश्वर की दयालुता को स्पष्ट करना चाहते हैं। वे निम्न कोटि के व्यक्तियों को भी अपनी कृपा से उच्च पद प्रदान करते हैं। वे दीनदुखियों के सहायक हैं।
व्याख्यात्मक हल:
कवि कबीर, नामदेव, त्रिलोचन, सधना, सैनु जैसे गरीब व निम्न कोटि के व्यक्तियों को संत का सम्मान दिलाने के ईश्वरीय कृपा के गुण को बताकर प्रभु की महिमा का वर्णन करना चाहता है।

प्रश्न 8. रैदास के इन पदों का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए। 
उत्तरः रैदास के दो पद संकलित हैं। दोनों पदों में ईश्वर के गुणों का बखान करके उसका गुणगान किया गया है। प्रथम पद में ईश्वर को महान् एवं स्वयं को उसका दास बताया है। दूसरे पद में प्रभु को अछूतों, गरीबों तथा दीनों का उद्धारक बताया गया है प्रभु अपनी कृपा से अछूतों को भी समाज में सम्मानजनक पद दिलवा देता है। हमें उसी ईश्वर की पूजा-उपासना करनी चाहिए।