05. शुक्र तारे के सामान – Short Questions answer

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 
प्रश्न 1. ग्राम देवी के मणि भवन पर कौन-कौन से लोग गाँधी जी से मिलने आते थे । ‘शुक्र तारे के समान’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः ग्राम देवी के मणि भवन पर गाँधी जी से मिलने जुल्मों और अत्याचारों की कहानियाँ पेश करने के लिए पीड़ितों के दल के दल उमड़ते रहते थे।

प्रश्न 2. गाँधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई कहाँ नौकरी करते थे? 
उत्तरः गाँधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई सरकारी अनुवाद विभाग में नौकरी करते थे।

प्रश्न 3. अहमदाबाद से कौन से दो साप्ताहिक पत्र निकलते थे ?
उत्तरः अहमदाबाद से ‘यंग इंडिया’ और ‘नवजीवन’ में दो साप्ताहिक पत्र निकलते थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. गाँधी जी से ‘यंग इण्डिया’ के सम्पादक बनने की प्रार्थना क्यों की गयी थी?
उत्तरः गाँधी जी को ‘यंग इण्डिया’ के सम्पादक बनने की प्रार्थना इसलिए की थी, क्योंकि हार्नीमैन को देश-निकाला देने के बाद साप्ताहिक के लिए लिखने वालों की कमी रहने लगी थी। गाँधी जी भी अंग्रेजों के विरुद्ध लिखना चाहते थे। इसलिए उन्होंने इस प्रार्थना को स्वीकार कर लिया। 

प्रश्न 2. महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
उत्तरः महादेव भाई अपना परिचय ‘परि-बावर्ची-भिश्ती-खर’ के रूप में देते थे और इसमें गौरव का अनुभव करते थे। ऐसा व्यक्ति सभी प्रकार के काम सफलतापूर्वक कर लेता है। वे कभी-कभी स्वयं को गाँधी जी का ‘हम्माल’ (कुली) भी कहते थे।

प्रश्न 3. महादेव भाई के लेख व लिखावट की क्या विशेषताएँ थी? ‘शुक्र तारे के समान’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
महादेव जी की लिखावट की क्या विशेषताएँ थीं? 
उत्तरः महादेव जी द्वारा अखबारों में लिखे काॅलम बेज़ोड़ होते थे। वे गाँधी जी की सीख को पूरी तरह अपनाते थे कि किसी से भी कटुतापूर्ण विवाद न किया जाए। सत्यनिष्ठा से निकले तर्क को भी शालीनता के साथ, विवेक पूर्वक प्रस्तुत किया जाए। यही महादेव भाई के लेख व लिखावट की विशेषताएँ थीं।

प्रश्न 4. महादेव जी के किन गुणों ने उन्हें लोकप्रिय बनाया?
उत्तरः महादेव भाई का व्यक्तित्व अत्यन्त प्रभावशाली था। वे लोगों से विनम्रता से मिलते थे। उनका सम्पर्क शुक्र तथा चन्द्रमा की भाँति शीतल व निर्मल था। उनके व्यक्तित्व की मोहिनी का नशा कई-कई दिनों तक उतरता ही न था। लोग उन्हें भुला नहीं पाते थे।

प्रश्न 5. पंजाब में फौजी शासन ने क्या कहर बरसाया ?
उत्तरः पंजाब में फौजी शासन ने काफी आतंक मचाया। पंजाब के अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्हें उम्र केद की सजा देकर काला-पानी भेज दिया गया। 1919 में जलियाँवाला बाग में निर्दोष लोगों को गोलियों से भून दिया गया। ‘ट्रिब्यून’ के सम्पादक कालिनाथ राय को 10 साल की जेल की सजा दी गई।

प्रश्न 6. महादेव की साहित्यिक देन क्या है ?
उत्तरः महादेव को प्रथम श्रेणी की शिष्ट, सम्पन्न भाषा और मनोहारी लेखन-शैली की ईश्वरीय देन मिली थी। गाँधी जी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का अंग्रेजी अनुवाद इन्होंने किया। नरहरि भाई के साथ उन्होंने टैगोर द्वारा रचित साहित्य का उलटना-पुलटना शुरू किया। टैगोर द्वारा रचित ‘विदाई का अभिशाप’ शीर्षक नाटिका, ‘शरद बाबू की कहानियाँ’ आदि अनुवाद उस समय की उनकी साहित्यिक देन हैं।

प्रश्न 7. महादेव भाई की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?
उत्तरः सन् 1934-35 में गाँधी जी वर्धा के महिला आश्रम में और मगनबाड़ी में रहने के बाद अचानक मगनबाड़ी से चलकर गाँव की सरहद पर एक पेड़ के नीचे जा बैठे। उसके बाद वहाँ एक-दो झोंपड़े बने और फिर धीरे-धीरे मकान बनकर तैयार हुए, तब तक महादेव भाई, दुर्गा बहन और चि. नारायण के साथ मगनबाड़ी में रहे। वही से वे वर्धा की असह्य गर्मी में रोज सुबह पैदल चलकर सेवाग्राम पहुँचते थे। वहाँ दिन भर काम करके शाम को वापस पैदल आते थे। आते-जाते पूरे 11 मील चलते थे। रोज-रोज का यह सिलसिला लम्बे समय तक चला। कुल मिलाकर इसका जो प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, वही उनकी अकाल मृत्यु का कारण बना।

प्रश्न 8. शुक्र तारे के समान किसे बताया गया और क्यों ? 
उत्तरः शुक्र तारे के समान महादेव भाई देसाई को बताया गया है, जो गाँधी जी के परम सहयोगी थे। आकाश के तारों में शुक्र का कोई जोड़ नहीं। शुक्र, चन्द्र का साथी। जिस प्रकार शुक्र तारा नक्षत्र मण्डल में ऐन शाम या सवेरे घण्टे दो घण्टे दिखता है, पर अपनी आभा-प्रभा से आकाश को जगमगा देता है, उसी प्रकार महादेव भाई आधुनिक भारत की स्वतन्त्रता के उषाकाल में अपने स्वभाव व विद्वता से देश-दुनिया को मुग्ध करके अचानक अस्त हो गए।

प्रश्न 9. महादेव देसाई कौन थे ? उनका योगदान क्या रहा है ?
उत्तरः महादेव भाई गाँधी जी के मंत्री थे, जो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी प्रतिभा का प्रकाश शुक्र तारे के समान था। उन्होंने सेवा धर्म का पालन किया। पीड़ितों के जुल्मों की कहानी की संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार कर गाँधी जी के सामने पेश कीं, गाँधी जी की यात्राओं के, गतिविधियों के विवरण भेजते थे। पूरी सत्यनिष्ठा से काम करने की तालीम थी। मंत्रमुग्ध करने वाला सुन्दर और शुद्ध लेखन, जेट की सी गति से लिखते थे। कम उम्र में उनकी मृत्यु हो गई।

04. वैज्ञानिक चेतना के वाहक : चन्द्र शेखर वेंकटरमन – Short Questions answer

प्रश्न 1: रमन् की खोज ‘रामन प्रभाव’ क्या है?
उत्तर: 
1921 में चंद्रशेखर वेंकट रामण के मस्तिष्क में समुद्र की नीली आभा में क्या कारण है, इस पर विचार करते समय उन्होंने ‘रमन् प्रभाव’ की खोज की। उनके अनुसार, जब एक वर्गीय प्रकाश की किरणें किसी तरल या ठोस पदार्थ से गुज़रती हैं, तो गुजरने के बाद उनके वर्ण में परिवर्तन आ जाता है। प्रकाश की किरण के फोटान से ऊर्जा निकलती है या मिल जाती है। ऊर्जा के निकलने या पाने  के हिसाब से उसका वर्ण परिवर्तित हो जाता है। यही रामन प्रभाव है।

प्रश्न 2: रमन् के जीवन से भावी पीढ़ी को क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर: 
रमन् वैज्ञानिक दृष्टि और प्रबल राष्ट्रीय चेतना की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। उनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम भी उनकी तरह अपने आसपास घट रही विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं का अवलोकन वैज्ञानिक दृष्टि से करें, प्रकृति के बीच छिपे वैज्ञानिक रहस्यों को खोलें तथा देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास हेतु प्रयास करें।

प्रश्न 3: ‘रमन् प्रभाव’ की खोज से वैज्ञानिक क्षेत्र किस प्रकार लाभान्वित हुआ?
उत्तर: 
‘रमन् प्रभाव’ की खोज से पदार्थों की आणविक और परमाणविक संरचना का अध्ययन करना सरल हो गया। साथ ही पदार्थों का संश्लेषण प्रयोगशाला में करना संभव हो गया तथा अनेक उपयोगी पदार्थों का कृत्रिम रूप से निर्माण किया जाने लगा।

प्रश्न 4: रमन् के व्यक्तित्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
 रमन् उच्चकोटि के वैज्ञानिक तथा शोधकर्ता थे। वे भावुक प्रकृति प्रेमी होने के कारण समुद्र की नीली आभा में घंटों खोए रहते थे। उनकी गणित व भौतिकी में विशेष रुचि थी। उनमें प्रबल राष्ट्रीय चेतना थी। उन्होंने वाद्ययंत्रों के कंपन का रहस्य खोजा। उन्होंने ‘रमन् प्रभाव’ की खोज की। वे शुद्ध शाकाहारी, मदिरा से परहेज़ रखने वाले तथा भारतीय पहनावे को धारण करने वाले व्यक्ति थे। वे आगामी पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत थे।

03. तुम कब जाओगे, अतिथि – Short Questions answer

अति लघू उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कैलेण्डर की तारीख फड़फड़ाने का क्या आशय है? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
कैलेण्डर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही थीं? 
उत्तरः बेचैनी से दिन बीत रहे हैं। लेखक अपने अतिथि को दिखाकर दो दिनों से तारीखें बदल रहा था। ऐसा करके वह अतिथि को यह बताना चाह रहा था कि उसे यहाँ रहते हुए चौथा दिन शुरू हो गया है। तारीखें देखकर शायद उसे अपने घर जाने की याद आ जाए। यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देवता रूप बनाए रखता है, पर फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है।
व्याख्यात्मक हल:
अतिथि के जाने के इन्तजार में लेखक के दिन बहुत बेचैनी से बीत रहे हैं।
प्रश्न 2. स्नेहपूर्वक मिलने के बावजूद लेखक अपने मित्र के आने पर आशंका से क्यों ग्रस्त थे?
उत्तरः पता नहीं कब तक ठहरेगा।
व्याख्यात्मक हल:
मित्र के आने पर लेखक उससे बहुत स्नेह के साथ मिला लेकिन इसके साथ लेखक को अतिथि के अधिक दिन रुकने की शंका व भय था।

प्रश्न 3. डिनर पर मध्यमवर्गीय हिसाब से उच्च श्रेणी का भोजन क्यों परोसा गया? 
उत्तरः जिससे अतिथि के मन पर मेहमान नवाजी की छाप रहे और सम्भावना थी कि अतिथि एकाध दिन ही ठहरेंगे।

प्रश्न 4. लेखक का सौहार्द बोरियत में क्यों बदल गया? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः मेहमान के लम्बे समय तक टिकने व अनचाहा बोझ बनने के कारण।
व्याख्यात्मक हल:
लेखक का सौहार्द बोरियत में इसलिए बदल गया क्योंकि मेहमान को आए चार दिन हो चुके थे वह जाने का नाम नहीं ले रहा था अब वह एक अनचाहे बोझ के समान लग रहा था जिससे लेखक मुक्त होना चाहता था।

लघु उत्तरीय प्रश्न

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. उफ, तुम कब जाओगे, अतिथि? इस प्रश्न के द्वारा लेखक ने पाठकों को क्या सोचने पर विवश किया है?
उत्तरः इस प्रश्न द्वारा लेखक ने पाठकों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि अच्छा अतिथि कौन होता है? वह, जो पहले से अपने आने की सूचना देकर आए और एक-दो दिन मेहमानी कराके विदा हो जाए न कि वह, जिसके आगमन के बाद मेज़बान वह सब सोचने को विवश हो जाए, जो इस पाठ का मेज़बान निरन्तर सोचता रहा। उफ! शब्द द्वारा मेज़बान की उकताहट को दिखाया गया है।

प्रश्न 2. अच्छा अतिथि कौन कहलाता है ? 
उत्तरः वास्तव में अच्छा अतिथि तो वही होता है जो पहले से अपने आने की सूचना देकर आए और एक या दो दिन की मेहमानी कराकर विदा ले।

प्रश्न 3. लेखक का बटुआ क्यों काँप गया? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
अथवा
”अन्दर ही अन्दर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।“ कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तरः अतिथि के स्वागत-सत्कार में अधिक खर्च होने व आर्थिक स्थिति बिगड़ने के डर से लेखक का बटुआ काँप उठा।
व्याख्यात्मक हल:
जिस दिन अतिथि आया, मेजबान को उस दिन आशंका हुई कि कहीं वह कुछ दिन ठहरने की इच्छा से तो नहीं आया। उसकी आवभगत पर होने वाले खर्चे का अनुमान लगा कर लेखक भयभीत हो उठा था। उसे अपनी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की आशंका सताने लगी।

प्रश्न 4. मध्यम वर्गीय लोग अपने अतिथियों का स्वागत अपनी सीमा से बढ-चढ़कर क्यों करते हैं?उत्तरः मध्यमवर्ग में दिखावा छाया हुआ है इसलिए स्वागत-सत्कार में बजट बिगड़ जाता है और दो-चार दिन में ही हालत पतली हो जाती है।

प्रश्न 5. लेखक ने अतिथि का स्वागत किस प्रकार किया?
उत्तरः
 लेखक ने अतिथि का स्वागत एक स्नेह-सी मुस्कराहट के साथ किया तथा एक उच्च-मध्यम वर्ग के परिवार के समान उसे डिनर, लंच कराया तथा रात को सिनेमा भी दिखाने ले गया।

प्रश्न 6. अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने किस आशा के साथ अतिथि का सत्कार किया? और, किस रूप में?
उत्तरः
अगर विदा होते तो हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाते।
व्याख्यात्मक हल:
अतिथि के दूसरे दिन भी ठहर जाने के उपरान्त लेखक ने दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की और रात्रि में सिनेमा दिखाया। लेखक ने सोचा कि इसके बाद तुरंत भावभीनी विदाई होगी। वह अतिथि को विदा करने स्टेशन तक जाएँगे। इसी आशा के साथ लेखक ने दूसरे दिन भी अतिथि का सत्कार किया।

प्रश्न 7. कौन-सा आघात अप्रत्याशित था? इसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तरः तीसरे दिन अतिथि ने कहा कि वह धोबी को अपने कपड़े धोने के लिए देना चाहता है। यह एक अप्रत्याशित आघात था। इसमें मेहमान के कई दिन और रुकने की संभावना हो गई थी। इसके बाद लेखक अतिथि को देवता न मानकर मानव तथा राक्षस मानने लगा था। उसका अतिथि राक्षस का रूप लेता जा रहा था।

प्रश्न 8. ‘अतिथि सदैव देवता नहीं होता’ वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है। कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
‘अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।’ आशय स्पष्ट करते हुए बताइए कि आप इस बात से कहाँ तक सहमत हैं? 
उत्तरः यदि अतिथि थोड़ी देर तक टिकता है तो वह देवता रूप बनाए रखता है, पर फिर वह मनुष्य रूप में आ जाता है। उसका मान-सम्मान होता है, और ज्यादा दिन तक टिकने पर वह राक्षस का रूप ले लेता है। तब वह राक्षस जैसा बुरा प्रतीत होता है। लेखक की इस बात से मैं पूरी तरह सहमत हूँ।

प्रश्न 9. ‘सम्बन्धों का संक्रमण के दौर से गुजरना’-पंक्ति से क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तरः सम्बन्धों का संक्रमण के दौर से गुजरने का अर्थ है सम्बन्धों में परिवर्तन आना, सम्बन्धों में दरार आना। पहले जो सम्बन्ध आत्मीयतापूर्ण थे, वे अब तिरस्कार में बदलने लगे। लेखक की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी और सम्बन्ध बिगड़ने लगे।

प्रश्न 10. घर की स्वीटनेस कब समाप्त हो जाती है? ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः
 घर में किसी अतिथि के अधिक दिनों तक रुकने पर घर की मधुरता समाप्त हो जाती है। घर के सदस्यों को औपचारिकतावश शिष्टता का दिखावा करना पड़ता है और वे आराम से नहीं रह पाते।

प्रश्न 11. लेखक के मन में अतिथि को ‘गेट आउट’ कहने की बात क्यों आई ?
उत्तरः
 चार दिन की मेहमाननवाजी के पश्चात् लेखक की सहनशीलता जवाब दे गई, वह सोचने लगा कि अतिथि को शराफ़त से लौट जाना चाहिए अन्यथा ‘गेट आउट’ भी एक वाक्य है, जो इसे बोला जा सकता है।

प्रश्न 12. ‘अतिथि देवो भव’ उक्ति की व्याख्या करें। ‘तुम कब जाओगे अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तरः लेखक परम्परा के अनुसार हर अतिथि को देवता के समान समझता था। अतिथि पूज्य होता है लेकिन समयाभाव व महँगाई के कारण लोग आज अतिथि का पहले जैसा आदर सत्कार नहीं कर पाते।

प्रश्न 13. अतिथि के टिके रहने पर परिस्थितियों में क्या परिवर्तन आया?
उत्तरः जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में निम्नलिखित परिवर्तन आए-
(i) खाने का स्तर गिरकर खिचड़ी तक आ गया था।
(ii) वह उसे गेट आउट! कहने के लिए भी तैयार था।
(iii) अतिथि में उसे राक्षस का रूप दिखाई देने लगा था। वह मनुष्य वाली हरकतों पर उतरने के लिए तैयार था।

02. एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा – Short Questions answer

अतिलघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. पाठ तथा लेखिका का नाम बताइए।
उत्तरः
 पाठ-एवरेस्ट: मेरी शिखर यात्रा। लेखिका-बछेन्द्री पाल।

प्रश्न 2. लेखिका में किस चीज का आकर्षण था?
उत्तरः
 लेखिका में एवरेस्ट के प्रति कठिनतम चुनौतियों का सामना करने का आकर्षण था।

प्रश्न 3. बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ क्या देखा?
उत्तरः बछेन्द्री पाल ने एवरेस्ट की तरफ एक भारी बर्फ का बड़ा फूल (प्लूम) देखा।

प्रश्न 4. अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था? 
उत्तरः अग्रिम दल का नेतृत्व उपनेता प्रेमचन्द कर रहे थे।

प्रश्न 5. कैंप चार कहाँ और कब लगाया गया? 
उत्तरः कैंप-चार को 29 अप्रैल, 1984 को साउथ कोल में लगाया गया था। यह कैंप 7900 मीटर की ऊँचाई पर स्थापित किया गया था।

प्रश्न 6. लेखिका को सफलता के क्षण में किसकी याद आयी?
उत्तरः लेखिका को सफलता के क्षण में अपने माता-पिता की याद आयी।

लघु उत्तरीय प्रश्न 

(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. डाॅ. मीनू मेहता ने क्या जानकारियाँ दीं? 
उत्तरः डाॅ. मीनू मेहता ने निम्न जानकारियाँ दीं:

  • एल्यूमिनियम की सीढ़ियों से अस्थाई पुल बनाना होगा।
  • लट्ठों और रस्सियों का उपयोग करना होगा।
  • बर्फ की आड़ी-तिरछी दीवारों पर रस्सियों को बाँधना होगा।
  • अग्रिम दल के अभियान्त्रिक कार्यों के बारे में पूरी जानकारी दी।

प्रश्न 2. तेनजिंग ने लेखिका की तारीफ में क्या कहा ?
उत्तरः जब लेखिका ने स्वयं को नौसिखिया बताया तो तेनजिंग ने लेखिका के कंधे पर अपना हाथ रख तारीफ करते हुए कहा कि तुम एक पक्की पर्वतीय लड़की लगती हो, तुम्हें तो एवरेस्ट शिखर पर पहले ही प्रयास में पहुँच जाना चाहिए।

प्रश्न 3. बेस कैंप 3 में पर्वतारोहियों के साथ क्या दुर्घटना घटी ? 
उत्तरः जब लेखिका तथा दल के अन्य सदस्य सोए हुए थे तब रात में एक जोरदार धमाका हुआ। एक लम्बा बर्फ का पिण्ड ग्लेशियर से टूटकर उनके कैंप के ऊपर गिरा था जिसने कैंप को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। प्रत्येक व्यक्ति को चोट लगी थी परन्तु संयोगवश किसी की मृत्यु नहीं हुई थी।

प्रश्न 4. जय लेखिका को देखकर हक्का-बक्का क्यों रह गया? 
उत्तरः जय बछेन्द्री पाल का पर्वतारोही साथी था। उसे भी बछेन्द्री के साथ पर्वत-शिखर पर जाना था। शिखर कैम्प पर पहुँचने में उसे देर हो गई थी। वह सामान ढोने के कारण पीछे रह गया था। अतः बछेन्द्री उसके लिए चाय-जूस आदि लेकर उसे लेने के लिए पहुँची। जय ने यह कल्पना नहीं की थी कि बछेन्द्री उसकी चिन्ता करेगी। इसलिए जब उसने बछेन्द्री पाल को उसके लिए चाय-जूस लाया देखा तो वह हक्का-बक्का रह गया।

प्रश्न 5. साउथ पोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी कैसे शुरू की? 

अथवा

साउथ पोल कैंप पर पहुँचकर लेखिका ने क्या-क्या कार्य किए? 
उत्तरः साउथ कोल कैंप पहुँचकर लेखिका ने अगले दिन की महत्त्वपूर्ण चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने खाना, कुकिंग गैस तथा कुछ ऑक्सीजन सिलिण्डर इकट्ठे किए। अपने दल के दूसरे सदस्यों को मदद करने के लिए एक थर्मस में जूस और दूसरे में चाय भरने के लिए नीचे उतर गई।

प्रश्न 6. एवरेस्ट की चोटी पर कौन-सी समस्या खतरा बनकर खड़ी थी?
उत्तरः
 एवरेस्ट की चोटी शंकु के आकार की थी, जहाँ दो व्यक्तियों के एक साथ खड़े होने की जगह नहीं थी। हजारों मीटर सीधी ढलान पर फिसल जाने का डर था।

प्रश्न 7. चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति कैसी थी?
उत्तरः चढ़ाई के समय एवरेस्ट की चोटी की स्थिति डरावनी थी। चट्टानें सख्त और भुरभुरी थी हवा की गति तेज थी और चोटी शंकु के आकार की थी।

प्रश्न 8. एवरेस्ट शिखर पर पहुँचकर बछेन्द्री पाल ने स्वयं को किस प्रकार सुरक्षित रूप से स्थिर किया?
उत्तरः सँकरा व नुकीला होने के कारण। बर्फ के फावड़े से बर्फ की खुदाई की। घुटनों के बल बैठकर ‘सागरमाथे’ के शिखर का चुंबन किया।
व्याख्यात्मक हल:
एवरेस्ट शिखर सँकरा व नुकीला था। अतः वहाँ पहुँचकर स्वयं को सुरक्षित रूप से स्थिर करने के लिए बछेन्द्री पाल ने बर्फ के फावड़े से खुदाई की और उसके उपरान्त घुटनों के बल बैठकर ‘सागरमाथे’ के शिखर का चुंबन किया।

प्रश्न 9. कर्नल खुल्लर ने बछेन्द्री पाल को उसकी सफलता पर बधाई देते हुए क्या अनूठी बात कही
उत्तरः कर्नल खुल्लर ने बछेन्द्री पाल को बधाई देते हुए कहा कि मैं तुम्हारी इस अनूठी उपलब्धि के लिए तुम्हारे माता-पिता को बधाई देना चाहूँगा। वे बोले कि देश को तुम पर गर्व है और अब तुम ऐसे संसार में वापस जाओगी, जो तुम्हारे अपने पीछे छोड़े हुए संसार से एकदम भिन्न होगा।

01. दुःख का अधिकार – Short Questions answer

अतिलघुउत्तरीय प्रश्न                                                         प्रश्न 1. ‘दुःख का अधिकार’ कैसी कहानी है?
उत्तरः ‘दुःख का अधिकार’ एक मार्मिक प्रगतिवादी कहानी है।

प्रश्न 2. भगवाना की मृत्यु का क्या कारण था?
अथवा
उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था? 
उत्तरः भगवाना खरबूजे तोड़ रहा था तभी मेड़ की तरावट में लेटे साँप ने डस लिया।

प्रश्न 3. भगवाना के घर में कौन-कौन था?
उत्तरः भगवाना के घर में बूढ़ी माँ, उसकी पत्नी तथा बच्चे (एक लड़का व लड़की) थे।

प्रश्न 4. बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता? 
उत्तरः बुढ़िया के बेटे की मृत्यु के पश्चात् उसे कोई भी उधार नहीं देता क्योंकि उन्हें पैसा वापस मिलने में आशंका थी।

प्रश्न 5. बुढ़िया के बेटे का नाम क्या था?
उत्तरः बुढ़िया के बेटे का नाम भगवाना था।

लघु उत्तरीय प्रश्न 
(प्रत्येक 2 अंक)

प्रश्न 1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?
उत्तरः 
(i) उसकी पोशाक ही समाज में उसका दर्जा तय करती है।
(ii) पोशाक ही मनुष्य की उन्नति के बन्द दरवाजे खोल देती है।
(iii) पोशाक व्यक्तियों को समाज की विभिन्न श्रेणियों में बाँटती है।

प्रश्न 2. पोशाक हमारे लिए कब बन्धन और अड़चन बन जाती है?
उत्तरः जब हम जरा नीचे झुककर समाज की निचली श्रेणियों की अनुभूति को समझना चाहते हैं।
व्याख्यात्मक हल:
जब हम अपने से कम हैसियत रखने वाले मनुष्य के साथ बात करते हैं तो हमारी पोशाक हमें ऐसा नह° करने देती। हम स्वयं को बड़ा मान बैठते हैं और सामने वाले को छोटा मानकर उसके साथ बैठने तथा बात करने में संकोच का अनुभव करते हैं।

प्रश्न 3. लेखक को कब लगा कि उसकी पोशाक उसके लिए व्यवधान बन गई ?
उत्तरः लेखक वृद्धा की दशा देखकर व्यथित था। वह फुटपाथ पर बैठकर बुढ़िया के प्रति सहानुभूति प्रकट करना चाहता था। परन्तु ऐसा करने में उसकी पोशाक ही व्यवधान बन गई, क्योंकि लेखक ने आधुनिक ढंग के स्वच्छ वस्त्र पहने हुए थे, जो उसके कुलीन वर्ग से संबंधित होने का प्रमाण दे रहे थे। उसकी पोशाक ने उसमें बड़प्पन का अभिमान जगा दिया। जिसके कारण वह सबके सामने गरीब बुढ़िया का दर्द न बाँट सका।

प्रश्न 4. ‘दुःख का अधिकार’ कहानी में खरबूजे बेचने वाली के खरबूजे क्यों नहीं बिक रहे थे?
अथवा
खरबूजे बेचने वाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था? 
उत्तरः खरबूजे तो बेचने के लिए रखे थे, परन्तु बेचने वाली का मुँह ढ़का हुआ था और वह फफक-फफक कर रो रही थी।
व्याख्यात्मक हल:
फुटपाथ पर कुछ खरबूजे डलिया में और कुछ जमीन पर बिक्री के लिए रखे थे। खरबूजों के समीप एक अधेड़ महिला कपड़े से मुँह छिपाए सिर को घुटनों पर रखे फफक-फफक कर रो रही थी इसलिए उसके खरबूजे बिक नहीं पा रहे थे।

प्रश्न 5. बाजार में खड़े लोगों के मन में वृद्धा के प्रति घृणा पर अपनी प्रतिक्रिया प्रकट कीजिए।
उत्तरः बाजार में खड़े लोगों का वृद्धा के प्रति घृणा का भाव रखना अनुचित था। यह उनकी असंवेदनशीलता का प्रमाण था। एक गरीब माँ का बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही बाजार में आकर खरबूजे बेचना उसकी विवशता का सूचक है परन्तु उससे सहानुभूति रखने की अपेक्षा बाजार के धनी-मानी लोगों द्वारा उस पर कटाक्ष करना वास्तव में उनकी हृदयहीनता का परिचायक है।

प्रश्न 6. लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा कैसे लगाया? 
उत्तरः लेखक ने बुढ़िया के दुःख का अंदाजा अपने पड़ोस में पुत्र की मृत्यु से दुःखी एक संभ्रांत महिला की बात सोचकर लगाया।

प्रश्न 7. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था ?
उत्तरः भगवाना शहर के पास डेढ़ बीघा जमीन पर हरी तरकारियाँ तथा खरबूजे उगाया करता था। वह रोज ही उन्हें सब्जी मण्डी या फुटपाथ पर बैठकर बेचा करता था। इस प्रकार वह कछिआरी करके अपने परिवार का निर्वाह करता था।

प्रश्न 8. लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी? 
अथवा
‘दुःख का अधिकार’ पाठ में स्त्री बेटे की मृत्यु के दूसरे ही दिन खरबूज़े बेचने क्यों चल पड़ी?
उत्तरः सामाजिक और आर्थिक रूप से मनुष्य चाहे कितना ही निर्धन क्यों न हो परिवार में किसी की मृत्यु उसे शोक से भर देती है। हर व्यक्ति चाहता है, प्रियजनों की मौत पर रोना। बुढ़िया के घर पुत्र की मृत्यु होने पर सब कुछ दान दक्षिणा में चला गया। बीमार बहू और भूख से तड़पते बच्चों को वह देख न सकी और खरबूजे बेचने चल दी। यद्यपि अभी उसके जवान बेटे को मरे दूसरा दिन ही था।

10. नए इलाके में… खुशबू रचते हैं हाथ… – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: कवि क्या खोजता है?
उत्तर: कवि अपने पुराने पीपल के पेड़ को खोजता है। वह अपने टूटे हुए पुराने घर को खोजता है ।

प्रश्न 2: कवि को अपनी स्मृति पर भरोसा क्यों नहीं है?
उत्तर:
 आज संसार में इतना तेज विकास हो रहा है कि पुराने प्रतीक या चिह्न समाप्त हो जाते हैं। इससे स्मृति धोखा खा जाती है। व्यक्ति विश्वासपूर्वक कुछ नहीं कह सकता ।

प्रश्न 3: अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने कौन-कौन से निशान याद रखे थे? नए इलाके में कविता के आधार पर उत्तर लिखिए।
उत्तर: 
अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कवि ने निम्न निशान याद रखे थे। पीपल का पेड़, खाली पड़ा प्लॉट या ढहा हुआ मकान तथा एक मंजिला बिना रंग के फाटक वाला मकान।

प्रश्न 4: खुशबू रचने वालों को गंदे मुहल्ले के गंदे लोग क्यों कहा गया है?
उत्तर: 
खुशबू रचने वालों को, गंदे मुहल्ले के गंदे लोग इसलिए कहा जाता है कि खुशबू रचने वाले लोग गन्दे मुहल्लों में रहते हैं और स्वयं भी गन्दे होते हैं।

प्रश्न 5: बच्चों के हाथों को किसके समान बताया गया है?
उत्तर:
 बच्चों के हाथों को ‘जुही की कली की डाल’ के समान नाजुक व खुशबूदार बताया गया है।

प्रश्न 6: खुसबू रचते हैं हाथ शीर्षक कविता का मूल भाव लिखिए।
उत्तर:
 इस कविता को लिखने के पीछे कवि का उद्देश्य समाज के निचले तबके द्वारा किया जा रहा उत्कृष्ट कार्य प्रकाश में लाना है। कवि सामाजिक और आर्थिक विषमता के प्रति हमें सचेत और जागरूक करना चाहते हैं।

प्रश्न 7: ‘पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ’ किसके हैं ?
उत्तर:
 ‘पीपल के पत्ते से नए-नए हाथ’ बच्चों के हैं।

प्रश्न 8: खुशबू रचते हैं हाथ में कौन-सी समस्या समाज के लिए घातक है?
उत्तर: 
किसी भी देश के बच्चे ही उसका भविष्य होते हैं। इन बच्चों के बाल मज़दूर के रूप में काम करने से वे पढ़ लिख नहीं सकेंगे। उनके खेलने-कूदने के दिन मज़दूरी करने में बीत रहे हैं। ऐसे में ये बच्चे आजीवन मज़दूर बनकर रह जाएँगे। बाल मज़दूरी की यह समस्या समाज और राष्ट्र के लिए घातक है।

प्रश्न 9: कवि को कौन धोखा दे जाते हैं?
उत्तर: 
कवि को पुराने निशान अकसर धोखा दे जाते हैं, क्योंकि दुनिया तेजी से बदलती है। इस परिवर्तन में पुरानी पहचान की जगह बदल जाती है। वह पीपल के पेड़, ढहा हुआ घर, ज़मीन का खाली टुकड़ा आदि निशानों के सहारे अपने पुराने मकान को ढूंढने की कोशिश करता है, परंतु वह अपने काम में सफल नहीं होता।

प्रश्न 10: यह दुनिया कितने समय में पुरानी पड़ जाती है?
उत्तर:
 यह दुनिया एक दिन में पुरानी पड़ जाती है।

प्रश्न 11: गली में क्या- क्या बनता है?
उत्तर:
 उत्तर-गली में मुल्क की मशहूर अगरबत्तियाँ बनती हैं। यहाँ केवड़ा, गुलाब, खस और रातरानी अगरबत्तियों का निर्माण होता है।

प्रश्न 12: जो लोग खुशबू रचते हैं, उनके हाथ कैसे होते हैं?
उत्तर: 
खुशबू रचने वाले हाथों की नसें उभरी होती हैं, उनके नाखून घिसे होते हैं। उनके हाथ गंदे, कटे-पिटे तथा जख्मी होते हैं।

प्रश्न 13: कूड़े-करकट के ढेरों के बाद शब्दों से खुशबू रचने वालों के परिवेश के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर:
 ‘कूड़े-करकट के ढेरों के बाद’ शब्दों से ‘खुशबू रचने वालों’ के परिवेश के बारे में यह पता चलता है कि वे बहुत ही गंदे स्थानों पर रहते हैं।

प्रश्न 14: खुशबू रचने वालों को गंदे मुहल्ले के गंदे लोग क्यों कहा गया है ?
उत्तर: 
कवि ने खुशबू रचने वालों को गंदे मुहल्ले के गंदे लोग कहा है, क्योंकि वे लोग खुशबू उत्पन्न करने वाली अगरबत्तियों का निर्माण करते हैं, परंतु स्वयं गंदी बस्तियों में रहते हैं। उनका जीवन स्तर बेहद निम्न होता है । सभ्य समाज के लिए वे गंदे लोग हैं उन्हें कूड़े-करकट के ढेरों के पास रहना पड़ता है।

प्रश्न 15: ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
 इस कविता में कवि ने सामाजिक विषमताओं को बताया है। वह श्रमिकों की दशा का वर्णन करता है। दुनिया को खुशबू देने वाले लोग स्वयं गंदी बस्तियों में रहते हैं। उनका जीवन नरक के समान है ये भवावह स्थितियों में अपना जीवन बिता रहे हैं। समाज का कर्तव्य है कि वे इन उपेक्षित लोगों की दशा पर विचार करें तथा इन्हें सुधारने का प्रयास करें।

09. अग्नि पथ – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: कवि मनुष्य से क्या अपेक्षा करता है? अग्नि पथ कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर 1:
 कवि मनुष्य से यह अपेक्षा करता है कि वह अपना लक्ष्य पाने के लिए सतत प्रयास करे और लक्ष्य पाए बिना रुकने का नाम न ले।

प्रश्न 2: अग्निपथ का महान दृश्य कैसा है?
उत्तर: 
अग्निपथ का महान दृश्य है- संघर्षशील व्यक्ति का आँसू, खून पसीने से लथपथ होकर लक्ष्य मार्ग की ओर अग्रसर होना।

प्रश्न 3: कवि संघर्षशील व्यक्ति को कौन-सी शपथ दिलाता है?
उत्तर:
 कवि संघर्षशील व्यक्ति को शपथ दिलाता है कि वह संघर्ष के पथ पर चलते हुए न तो कभी थकेगा, न रुकेगा और न कभी मुड़कर पीछे देखेगा।

प्रश्न 4: घने वृक्षों को खड़े देखकर भी मनुष्य के मन में किन भावों का उदय नहीं होना चाहिए।
उत्तर: 
घने वृक्षों को खड़े देखकर मनुष्य के मन में कुछ पल आराम करने की बात मन में आती है। कवि नहीं चाहता कि संघर्षशील मानव के मन में आराम की इच्छा जागृत हो।

प्रश्न 5: घने वृक्ष और एक पत्र-छाँह का क्या अर्थ है? अग्निपथ कविता के अनुसार लिखिए।
उत्तर:
 ‘घने वृक्ष’ मार्ग में मिलने वाली सुविधा के प्रतीक हैं। इनका आशय है-जीवन की सुख-सुविधाएँ। ‘एक पत्र-छाँह’ का प्रतीकार्थ है-थोड़ी-सी सुविधा।

प्रश्न 6: अग्निपथ में क्या नहीं माँगना चाहिए?
उत्तर:
 ‘अग्निपथ’ अर्थात् – संघर्षमयी जीवन में हमें चाहे अनेक घने वृक्ष मिलें, परंतु हमें एक पत्ते की छाया की भी इच्छा नहीं करनी चाहिए। किसी भी सहारे के सुख की कामना नहीं करनी चाहिए।

प्रश्न 7: ‘चल रहा मनुष्य है। अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ, लथपथ, पथपथ। पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।’
उत्तर:
 इस पंक्ति में कवि दर्शाता है कि मनुष्य जीवन के कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ता जा रहा है। उसके आँसू, पसीना और खून से लथपथ होने के बावजूद वह हार नहीं मान रहा है और अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रश्न 8: ‘कवि बार-बार शपथ लेने के लिए क्यों कहता है?’
उत्तर:
 कवि मानव को कर्मशील बनाना चाहता है। कर्मशील मानव का जीवन आग पर चलने के समान होता है। वह चाहिए कि मार्ग की कठिनाइयों से घबराकर नहीं हारें और निरंतर आगे बढ़ें।

प्रश्न 9: ‘अग्निपथ कविता के आधार पर लिखिए कि क्या घने वृक्ष भी हमारे मार्ग की बाधा बन सकते हैं?’
उत्तर:
 अग्निपथ कविता में संघर्षमय जीवन को अग्निपथ कहा गया है और सुख-सुविधाओं को घने वृक्षों की छाया के समान दिखाया गया है। ये सुख-सुविधाएँ व्यक्ति को आलस्यपूर्ण बना सकती हैं और उसके पथ में बाधा बन सकती है।

प्रश्न 10: ”अग्निपथ’ कविता की मुख्य विशेषता क्या है?’
उत्तर:
 ‘अग्निपथ’ कविता में कवि ने शब्दों का कम-से-कम इस्तेमाल किया है और कुछ शब्दों की पुनरावृत्ति की है, जिससे एक प्रभाव उत्पन्न होता है।

प्रश्न 11: ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ से क्या आशय है? अग्निपथ कविता के आधार पर लिखिए।’
उत्तर:
 ‘अश्रु-स्वेद-रक्त से लथपथ’ का आशय है- संघर्षमय जीवन के दौरान मनुष्य के आँसू, पसीना और रक्त से लथपथ होने का। इसका मतलब है कि मनुष्य कठिनाइयों का सामना करके अपने मंजिल की दिशा में अग्रसर बढ़ता है।

प्रश्न 12: ‘अग्निपथ किसे कहा गया है और क्यों?’
उत्तर:
 ‘अग्निपथ’ कविता में कवि ने संघर्षमय जीवन को अग्निपथ कहा है। इसका मतलब है कि जीवन का पथ अग्नि के समान होता है और उस पर चलना आसान नहीं होता। यह एक कठिन संघर्षपूर्ण मार्ग होता है।

प्रश्न 13: ‘कवि यात्री को क्या माँगने को मना करता है तथा क्यों?’
उत्तर: 
कवि यात्री से एक पत्ते जितनी छाया मांगने से मना करता है क्योंकि वह मानव को तुच्छ सुविधाओं को त्यागकर बड़ी चुनौतियों का मार्ग दिखाना चाहता है।

प्रश्न 14: ‘कवि हरिवंश राय बच्चन ने मनुष्य से किस बात की शपथ लेने का आग्रह किया है और क्यों?’
उत्तर:
 कवि हरिवंश राय बच्चन ने मनुष्य से आग्रह किया है कि वह जीवन के संघर्षों के बावजूद अपने मंजिल की तरफ अग्रसर रहे। उन्होंने संघर्षमय जीवन को अग्निपथ कहकर दर्शाया है कि जीवन का पथ आसान नहीं होता और मनुष्य को संघर्ष के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 15: ”अग्निपथ’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।’
उत्तर:
 ‘अग्निपथ’ कविता का मूल भाव है निरन्तर संघर्ष करते हुए जीयो। इसमें पग-पग पर चुनौतियाँ और कष्ट हैं, लेकिन मनुष्य को उनसे हार नहीं मानना चाहिए और सदैव अग्रसर रहना चाहिए।

08. गीत – अगीत – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: नदी तटिनी के बारे में कवि क्या कहता है?
उत्तर:
 कवि बताता है कि नदी अत्यंत तीव्र गति से बहती है। उसके बहने में ऐसा स्वर सुनाई देता है मानो वह प्रेम गीत गा रही हो। वह किनारों से मन की बात कहकर अपने दिल का बोझ हल्का कर लेती है।

प्रश्न 2: पाटल कौन है? वह किस अवस्था में है?
उत्तर:
 पाटल गुलाब है तथा वह मौन अवस्था में तट पर खड़ा हुआ है।

प्रश्न 3: प्रेयसी गीत को सुनकर क्या विचार करती है?
उत्तर:
 प्रेमी द्वारा गाए जा रहे गीत को सुनकर प्रेयसी विचार करती है कि ईश्वर ने उसे इस गीत की एक कड़ी क्यों नहीं बनाया? उसे भी इस गीत का हिस्सा होना चाहिए था।

प्रश्न 4: निर्झरी कौन है?
उत्तर:
 निर्झरी नदी या झरना है।

प्रश्न 5: शुकी किस अवस्था में बैठी हुई है?
उत्तर:
 शुकी ने अपने पंख फुला रखे हैं और वह घोंसले में रखे अंडों को सेने का काम कर रही है।

प्रश्न 6: गीत और अगीत में कौन सुंदर है?
उत्तर: 
गीत और अगीत में अगीत सुंदर है, क्योंकि वह गीत का आधार है। वह गाया नहीं जाता, परंतु गीत को भावनाओं की शक्ति वही देता है। गीत गाया जाने के कारण सुंदर होता है, परंतु उसकी नींव अगीत ही होता है।

07. दोहे – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: नट किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है? रहीम के पद के आधार पर लिखिए।
उत्तर: नट कुण्डली मारने की कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है। वह कुण्डली में सिमट जाता है और छलाँग मारकर रस्सी के ऊपर चढ़ जाता है।

प्रश्न 2: अवध नरेश चित्रकूट में कब व क्यों रहे?
उत्तर:
 अवध नरेश श्रीरामचंद्र सीता व लक्ष्मण के साथ कुछ समय के लिए चित्रकूट में तब रहे थे, जब उन्हें वनवास मिला था। विपत्ति के समय शान्ति पाने के उद्देश्य से वे यहाँ रहे थे।

प्रश्न 3: रहीम पशु से भी तुच्छ किसे मानता है तथा क्यों?
उत्तर:
 रहीम ने पशु से तुच्छ कंजूस व्यक्ति को माना है, क्योंकि वह रीझकर भी कुछ दान नहीं करता।

प्रश्न 4: चित्रकूट का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
 चित्रकूट को अवध-नरेश श्रीराम का निवास माना जाता है। वे संकटमोचक हैं। जिस पर संकट पड़ता है, वे यहीं आते हैं।

प्रश्न 5: बिगड़ी बात दोबारा क्यों नहीं बन पाती?
उत्तर:
 कवि कहता है कि एक बार बात बिगड़ने से मन में संदेह उत्पन्न हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति कुतर्क करने लग जाता है।

प्रश्न 6: सागर की बड़ाई क्यों नहीं होती? रहीम के पद के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
 सागर की बड़ाई क्यों नहीं होती? रहीम के पद के आधार पर लिखिए।

प्रश्न 7: विपत्ति में मनुष्य का सहायक कौन होता है?
उत्तर:
 उत्तर – विपत्ति में मनुष्य का सहायक अपनी सम्पत्ति होती है। बाहरी सहायता से कोई लाभ नहीं होता है। कमल की रक्षा पानी करता है, न कि सूर्य।

प्रश्न 8: दु:खी व्यक्ति के साथ संसार कैसा व्यवहार करता है?
उत्तर: 
दुखी व्यक्ति का संसार मज़ाक उड़ाता है। वह उसके कष्टों को कम नहीं करता। अतः मनुष्य को अपनी पीड़ा दूसरे को नहीं कहनी चाहिए।

प्रश्न 9: रहीम ने किस लोकसत्य को बताया है?
उत्तर: 
कवि ने बताया है कि छोटी चीज अगर लोक हितकारी है तो वह धन्य है। समाज के काम न आने वाली बड़ी चीज का कोई लाभ नहीं है।

प्रश्न 10: कवि ने पानी का क्या महत्त्व बताया है?
उत्तर: 
कवि बताता है कि पानी के बिना संसार सूना है। पानी के अभाव में व्यक्ति, मोती तथा आटा तीनों निरर्थक हैं।

06. रैदास – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: ईश्वर ने किन-किन का उद्धार किया है?
उत्तर:
 ईश्वर ने नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना, सैन आदि का उद्धार किया है।

प्रश्न 2: रैदास का ईश्वर क्या करता है?
उत्तर:
 रैदास का ईश्वर गरीबों का पालक है। वह उनकी रक्षा करता है तथा कृपा बनाए रखता है। प्रभु उनके सिर पर छत रखकर उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाते हैं।

प्रश्न 3: कवि रैदास के स्वामी कौन हैं? वे क्या-क्या कार्य करते हैं?
उत्तर:
 कवि रैदास के स्वामी निराकार प्रभु हैं। वे अपनी असीम कृपा से नीच को भी ऊँच और अछूत को महान बना देते हैं।

प्रश्न 4: रैदास ने चकोर पक्षी का उदाहरण किस संदर्भ में दिया है?
उत्तर: 
चकोर पक्षी की चाँद के प्रति विश्वास के कारण रैदास ईश्वर के प्रति ऐसी ही भावना रखता है। वह भी अपने प्रियतम प्रभु को एकटक निहारना चाहता है।

प्रश्न 5: कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को क्या माना है? ‘रैदास के पद’ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
कवि ने स्वयं को पानी मानकर प्रभु को चंदन माना है।

प्रश्न 6: कवि स्वयं को क्या-क्या बताता है?
उत्तर:
 कवि स्वयं को पानी, मोर, चकोर, बाती, धागा, सुहागा तथा दास बताता है।

प्रश्न 7: कवि रैदास कैसी भक्ति करना चाहता है?
उत्तर:
 कवि रैदास ऐसी भक्ति करना चाहते हैं कि वह सदा अपने स्वामी का दास बना रहे। वे प्रभु का एक अंश बनकर रहना चाहते हैं। वे सोने के साथ सुहागे की तरह मिलना चाहते हैं।

प्रश्न 8: तुम घन बन हम मोरा-ऐसी कवि रैदास ने क्यों कहा है?
उत्तर: 
रैदास अपने प्रभु के अनन्य भक्त हैं, जिन्हें अपने आराध्य को देखने से असीम खुशी मिलती है। कवि ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि जिस प्रकार वन में रहने वाला मोर आसमान में घिरे बादलों को देख प्रसन्न हो जाता है, उसी प्रकार कवि भी अपने आराध्य को देखकर प्रसन्न होता है।

प्रश्न 9: कवि रैदास ने गरीब निवाजु किसे कहा है और क्यों?
उत्तर: 
कवि ने ‘गरीब निवाज़’ अपने आराध्य प्रभु को कहा है, क्योंकि उन्होंने गरीबों और कमज़ोर समझे जाने वाले और अछूत कहलाने वालों का उद्धार किया है। इससे इन लोगों को समाज में मान-सम्मान और ऊँचा स्थान मिल सकता है।

प्रश्न 10: कवि रैदास ने सोने व सुहागे की बात किस संबंध में कही है व क्यों?
उत्तर: 
सोने व सुहागे का आपस में घनिष्ठ संबंध है। सुहागे का अलग से अपना कोई अस्तित्व नहीं है। किंतु जब वह सोने के साथ मिल जाता है तो उसमें चमक उत्पन्न कर देता है।