2. सपनों के–से दिन – Textbook Worksheet – ||

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: ननिहाल जाने पर लेखक को क्या सुख मिलता था ?
(क) खूब खाने को मिलता था
(ख) नानी का प्यार भी खूब मिलता था
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 2: आज का बचपन पुराने समय के बचपन से कैसे भिन्न है ?
(क) बच्चो के पास खुला समय नहीं है
(ख) बच्चे भोले होते थे
(ग) बच्चे माता पिता का कहना मानते थे
(घ) बच्चो के पास खुला समय नहीं है

प्रश्न 3: लेखक ने अपना बचपन कैसे व्यतीत किया ?
(क) अपने साथियों के साथ आनंद के साथ
(ख) बहुत रो धो कर
(ग) कोई नहीं
(घ) दोनों

प्रश्न 4: लेखक गर्मियों की छुट्टियां कैसे व्यतीत करता था ?
(क) नानी के घर जाकर
(ख) मौज मस्ती करते हुए
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 5: लेखक को गर्मी की छुट्टियों में क्या बात दुखी करती थी ?
(क) छुट्टियों में मिला काम
(ख) दोस्तों संग खेलना
(ग) नानी का घर छोड़ के जाना
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 6: उन दिनों बच्चों का अपने अभिभावकों के साथ कैसा संबंध था ?
(क) अभिभावक बच्चो के काम में रुचि नहीं रखते थे
(ख) बच्चो को अपना अधिकार समझते थे
(ग) शाबाशी भी नहीं देते थे
(घ) सभी

प्रश्न 7: बच्चों के लिए किसकी शाबाशी ज्यादा मायने रखती थी?
(क) अध्यापकों की
(ख) पी. टी सर की
(ग) अभिभावकों की
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 8: फ़ौज में भर्ती करने के लिए अफसरों के साथ नौटंकी वाले क्यों आते थे ?
(क) नौटंकी करने
(ख) फ़ौज के सुख, आराम और बहादुरी को दिखने के लिए
(ग) कोई नहीं
(घ) बहादुरी को दिखने के लिए

प्रश्न 9: लेखक और उनके साथियों का नेता कौन था ?
(क) ओमा
(ख) हेडमास्टर
(ग) पी. टी सर
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 10: स्कूल की पिटाई का डर भुलाने के लिए लेखक किसके बारे में सोचा करता था ?
(क) पिता जी के बारे में
(ख) नानी के घर के बारे में
(ग) ओमा और बहादुर लड़को के बारे में जो स्कूल की पिटाई को स्कूल का काम करने से ज्यादा अच्छा मानते थे
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 11: लेखक के साथ खेलने वाले बच्चों की हालत कैसी होती थी?
(क) बच्चों के पैर नंगे होते थे
(ख) उन्होंने फटी-मैली कच्छी पहनी होती थी।
(ग) उनके कुर्ते बिना बटनों के होते थे।
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 12: ननिहाल जाने पर लेखक को क्या सुख मिलता था?
(क) वहाँ उसे नानी खूब दूध-दही, मक्खन खिलाती थी
(ख) वह उसे बहुत प्यार करती थी
(ग) वहाँ वह तालाब में खूब नहाता और बाद में नानी से जो जी में आए मांग कर खाता था
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 13: बच्चे पीटी सर से क्यों डरते थे?
(क) पीटी सर का स्वभाव बहुत सख्त था
(ख) उन्होंने भारी जुते पहने होते थे
(ग) उनके मुँह पर फोड़े-फुंसियाँ थी
(घ) उनका चहरा भयानक था

प्रश्न 14: ओमा के सिर की टक्कर का नाम लेखक और उसके साथियों ने क्या रखा हुआ था?
(क) रेल-डिब्बा
(ख) रेल-बम्बा
(ग) रेल-इंजन
(घ) रेल-पटरी

प्रश्न 15: जो बच्चे पढाई में रूचि नहीं रखते थे, वे बस्ता कहाँ फेंक आते थे?
(क) नदी में
(ख) खेत में
(ग) तालाब में
(घ) क्यारियों में

प्रश्न 16: लेखक हर साल गर्मियों की छुट्टियों में कहाँ जाता था?
(क) मामा के घर
(ख) चाचा के घर
(ग) दादी के घर
(घ) नानी के घर

प्रश्न 17: मास्टर प्रीतमचंद ने अपने घर पर क्या पाल रखा था?
(क) तोते
(ख) बकरियाँ
(ग) कुत्ते
(घ) खरगोश

प्रश्न 18: नानी लेखक के किस ढंग से प्रसन्न होती थी?
(क) बोलने के ढंग
(ख) कम खाने के कारण
(ग) बोलने के ढंग और कम खाने के कारण
(घ) आदर – सम्मान करने के कारण

प्रश्न 19: लेखक ने मनोविज्ञान का विषय कब पढ़ा?
(क) अध्यापक की ट्रेनिंग में
(ख) दसवीं कक्षा में
(ग) बारवीं कक्षा में
(घ) बी. ए. में

प्रश्न 20: ओमा कौन था?
(क) लेखक का मामा
(ख) लेखक का चाचा
(ग) लेखक का सहपाठी
(घ) लेखक का अध्यापक


Extra Questions: 25 to 30 Words

प्रश्न 1: लेखक ने ‘सस्ता सौदा’ किसे कहा है? और क्यों?

प्रश्न 2: मास्टर प्रीतम चंद और हेडमास्टर शर्मा जी में अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3: पीटी मास्टर प्रीतमचंद में ऐसी क्या बात थी जिसको देखकर बच्चे डरते थे?

प्रश्न 4: फ़ारसी की कक्षा में मास्टर प्रीतमचंद ने किस तरह शारीरिक दंड दिया जिसे लेखक और उनके साथी आजीवन नहीं भूल पाए?

प्रश्न 5: जब हेडमास्टर ने प्रीतमचंद को बच्चों को  शारीरिक दंड देते हुए देखा तो उन्होंने मास्टर प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?

प्रश्न 6: मास्टर प्रीतमचंद के निलंबन के बाद भी बच्चों के मन में उनका डर किस तरह समाया था?

Extra Questions: 60 से 70 शब्दों में

प्रश्न 1: लेखक की पढ़ाई में हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 2: लेखक और उनके साथी पीटी मास्टर के किस रूप को अद्भुत मानते थे?

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए जो तरीका था, वह आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन-मूल्यों के अनुसार उचित है या अनुचित? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 2: पी०टी० साहब की चारित्रिक विशेषताओं और कमियों का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए।

प्रश्न 3: पी०टी० अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी? अपने शब्दों में लिखिए।

प्रश्न 4: कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती-पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता है?

प्रश्न 5: पीटी साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 6: नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?

प्रश्न 7: स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण ‘आदमी’ फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता है?

प्रश्न 8: हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?

प्रश्न 9: लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

प्रश्न 10: लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुटियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?

प्रश्न 11: पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न 12: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट कीजिए।

प्रश्न 13: प्रायः अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बर्बाद न करने की नसीहत देते हैं। बताइए:
(क) खेल आपके लिए क्यों जरुरी है?

(ख) आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिनसे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?

वर्कशीट के समाधान “सपनों के-से दिन – 2

2. सपनों के–से दिन – Textbook Worksheet – |

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: सपनो के से दिन के लेखक कौन हैं ?
(क) मिथिलेश्वर
(ख) रही मासूम
(ग) गुरदयाल सिंह
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 2: स्कूल के पी.टी. सर का क्या नाम था ?
(क) मास्टर प्रीतमचंद
(ख) हरीश चंद
(ग) मुकुंद लाल
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 3: मास्टर प्रीतमचंद कतारों के पीछे खड़े खड़े क्या देखते थे ?
(क) लड़कों को
(ख) कौन सा लड़का कतार में ठीक से नहीं खड़ा
(ग) कोई नहीं
(घ) कता

प्रश्न 4: लड़के किसके डर से कतार खड़े रहते ?
(क) मास्टर प्रेमचंद की घुड़की के डर से
(ख) मार के डर से
(ग) कोई नहीं
(घ) घुड़की के डर से

प्रश्न 5: पी. टी सर कौन से मुहावरे को प्रत्यक्ष कर दिखाते थे ?
(क) खाल खींचने
(ख) खाल झाड़ने
(ग) कान मरोड़ने
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 6: पी. टी सर खाल खींचने के मुहावरे को कब प्रत्यक्ष दिखाते थे ?
(क) जब कोई लड़का अपना सिर हिलाता
(ख) जब कोई लड़का पिंडली खुजलाता
(ग) कोई नहीं
(घ) दोनों

प्रश्न 7: अब किस दंड पर पूरी तरह प्रतिबंध है ?
(क) मानसिक  
(ख) कोई भी दंड  
(ग) शारीरिक दंड 
(घ) कोई नहीं 

प्रश्न 8: इस पाठ के माध्यम से लेखक ने किन दिनों का वर्णन किया है ?
(क) आजादी के दिनों का
(ख) अंग्रेजो के दिनों का
(ग) अपने स्कूल के दिनों का
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 9: बच्चों को स्कूल में अपनी पढ़ाई से अधिक क्या अच्छा लगता है ?
(क) कंप्यूटर क्लास
(ख) जिम
(ग) अपने साथियों के साथ खेलना
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 10: हेडमास्टर लड़के की किताबे लाकर क्यों देते थे ?
(क) उसे पढ़ने का शौंक था
(ख) किताबें इकठी करने का शौंक था
(ग) लेखक के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 11: लेखक किसकी मदद से अपनी पढ़ाई जारी रख सका ?
(क) अपने घर वालों की मदद से
(ख) दोस्तों की मदद से
(ग) हेडमास्टर साहब की मदद से
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 12: लेखक के समय में अभिभावक बच्चो को स्कूल भेजने में दिलचस्पी क्यों नहीं लेते थे ?
(क) बच्चो को अपने साथ काम में लगा लेते थे
(ख) उनको लगता था इन्होने कौन सा है तहसीलदार बनना है
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 13: बचपन में घास अधिक हरी और फूलों की सुगंध अधिक मनमोहक लगती है इस कथन से क्या भाव है ?

(क) बच्चे अपनी दुनिया में मस्त होते है
(ख) बच्चे अल्हड़ होते हैं
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 14: हेडमास्टर साहिब का विद्यार्थियों के साथ कैसा व्यवहार था ?
(क) कड़क
(ख) कठोर बहुत ही मृदुल था ,
(ग) वे बच्चों को बिलकुल डांटते नहीं थे
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 15: लेखक के समय शिक्षा का क्या महत्व था ?
(क) बहुत ही गहरा
(ख) शिक्षा बहुत मायने रखती थी
(ग) लोग शिक्षा के महत्व से पूरी तरह अनजान थे
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 16: सपनो के से दिन पाठ पाठक को कैसा अनुभव करवाता है ?
(क) लेखक ने हमारे बचपन की बात लिख दी
(ख) अच्छा
(ग) बुरा
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 17: बच्चे पिटाई होने पर भी खेलने क्यों जाते हैं ?
(क) बच्चो को खेल प्यारा होता है
(ख) उनको पिटाई जैसी ही लगती है
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 18: बच्चे “रेल बम्बा” किसको कहते थे ?
(क) अपने नेता ओमा के सर की टक्कर को
(ख) रेल की सीटी को
(ग) रेल इंजन को
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 19: ओमा कैसा बच्चा था ?
(क) निडर और बहादुर
(ख) शरारती
(ग) तेज तर्रार
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 20: लेखक को बचपन में स्कूल जाते हुए किन चीजों की महक आज भी याद है ?
(क) नीम के पत्तों की
(ख) फूलो की तेज गंध
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

Extra Questions: 25 to 30 Words

प्रश्न 1: ‘बच्चों को खेल सबसे अच्छा लगता है और वे मिलजुल कर खेलते हैं।’  “सपनों के-से दिन” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 2: लेखक के गाँव के बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3: “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि जो बच्चे बचपन में नहीं पढ़ पाए उसके लिए उनके माता-पिता किस तरह जिम्मेदार थे?

प्रश्न 4: “सपनों के से दिन” पाठ में लेखक ने अपने स्कूल का वर्णन किस प्रकार से किया है?

प्रश्न 5: स्कूल की छोटी क्यारियों में उगाए गए कई तरह के फूलों का लेखक और उनके साथी क्या करते थे?

प्रश्न 6: लेखक ने छुटियों के पहले और आखरी दिनों के फर्क का अंतर किस तरह स्पष्ट किया है?

Extra Questions: 60 से 70 शब्दों में

प्रश्न 1: जिस साल लेखक नानी के घर नहीं जा पाता था, उस साल लेखक अपने घर से दूर जो तालाब था, वहाँ जाया करता था। उस तालाब में लेखक और उसके साथी किस तरह खेलते थे अपने शब्दों में वर्णन कीजिए?

प्रश्न 2: मास्टर प्रीतम चंद जो स्कूल के ‘पीटी’ थे, उनसे सब क्यों डरते थे और लेखक और उनके साथियों को क्या ध्यान रखना पड़ता था?

प्रश्न 3: बचपन में बच्चों को स्कूल जाना पसंद नहीं होता किन्तु कुछ परिस्थितियों में बच्चे स्कुल जाना पसंद करते हैं। पाठ के आधार पर उन परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुट्टियों के काम को पूरा करने के लिए योजनाएँ तैयार करते थे। क्या आप की योजनाएँ लेखक की योजनाओं से मेल खाती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2021-22)

प्रश्न 2: स्कुल किस प्रकार की स्थिति में अच्छा लगने लगता है और क्यों ? (CBSE 2019-20)

प्रश्न 3. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ ‘सपनों के-से दिन’ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में विचार प्रकट कीजिए । (CBSE 2018-19)

प्रश्न 4: सपनों के से दिन पाठ के आधार पर आजकल स्कूली शिक्षा प्रणाली में क्या परिवर्तन आए हैं? (CBSE 2016-17)

प्रश्न 5. सपनों के से दिन पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बचपन का समय सबसे अच्छा होता है। (CBSE 2015-16)

प्रश्न 6: छात्रों के नेता ओमा के सिर की क्या विशेषता थी? “सपनों के से दिन” के आधार पर बताइए।

प्रश्न 7: हेडमास्टर शर्मा जी का छात्रों के साथ कैसा व्यवहार था?

प्रश्न 8: गरीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना क्यों कठिन था? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए।

प्रश्न 9: “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक छात्र-जीवन में छुट्टियों के लिए मिले काम को कैसे पूरा करता या।

प्रश्न 10: ‘फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से क्यों कांप उठते थे? “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर लिखिए।

वर्कशीट के समाधान “सपनों के-से दिन – 1

1. हरिहर काका – Textbook Worksheet

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: हरिहर काका कहानी के लेखक कौन हैं ?
(क) गुरदयाल सिंह
(ख) मिथिलेश्वर
(ग) कोई नहीं
(घ) दयाल सिंह

प्रश्न 2: ठाकुरबारी के प्रति गांव वालों के मन में क्या है?
(क) अपार श्रद्धा
(ख) घृणा
(ग) नफरत
(घ) प्रेम

प्रश्न 3: ठाकुरबारी के गांव के लोगों ने मंदिर कैसे बनवाया था?
(क) पैसो से
(ख) ठाकुर के पैसो से
(ग) चंदा इकट्ठा करके
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 4: गांव के लोग अपनी सफलता का श्रेय किसको देते हैं?
(क) सरपंच को
(ख) ठाकुरबारी जी को
(ग) स्वयं को
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 5: ठाकुरबारी में लोग अपनी श्रद्धा कैसे व्यक्त करते है ?
(क) रुपए देकर
(ख) जेवर
(ग) सभी
(घ) अन्न देकर

प्रश्न 6: ठाकुरबारी के नाम पर कितने खेत हैं ?
(क) १० बीघे
(ख) २० बीघे
(ग) ३० बीघे
(घ) २ बीघे

प्रश्न 7: गांव वालों की अपार श्रद्धा से उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है ?
(क) अंधभक्ति
(ख) अविश्वास
(ग) धार्मिक प्रवृत्ति का
(घ) विश्वास की

प्रश्न 8: महंत और हरिहर काका के भाई एक ही श्रेणी के क्यों हैं ?
(क) दोनों दुर्व्यवहार करते हैं
(ख) दोनों ने ज़मीन हथियाने का षड्यंत्र किया
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 9: महंत ने हरिहर काका की किस परिस्थिति का लाभ उठाया ?
(क) पारिवारिक मजबूरी का
(ख) गरीबी का
(ग) पारिवारिक नाराजगी का
(घ) नाराजगी का

प्रश्न 10: महंत ने हरिहर काका को किस आधार पर ब्लैकमेल किया ?
(क) भावनात्मक आधार पर
(ख) परिवार के नाम पर
(ग) धर्म के नाम पर
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 11: कथा वाचक और हरिहर काका के में क्या संबंध है ?
(क) दोनों दोस्त हैं
(ख) एक ही परिवार से हैं
(ग) दोनों एक ही गांव के निवासी हैं
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 12: हरिहर काका कथा वाचक को कैसे घुमाया करते थे ?
(क) साइकिल पर
(ख) अपने कंधे पर बैठा कर
(ग) पैदल
(घ) अंगुली पकड़ कर

प्रश्न 13: हरिहर काका की संपत्ति के दावेदार कौन थे ?
(क) महंत
(ख) हरिहर काका के भाई
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 14: हरिहर काका और कथावाचक आपस में कैसे बातें करते थे ?
(क) खुल कर
(ख) छुप कर
(ग) कोई नहीं
(घ) घुल घुल कर

प्रश्न 15: हरिहर काका के गांव में यदि मीडिया होती तो उनकी स्थिति कैसी होती ?
(क) लड़ाई झगड़े होते
(ख) वास्तविकता का सबको पता चलता और उनकी स्थिति बेहतर होती
(ग) कोई नहीं
(घ) बात और बढ़ती

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। उत्तराधिकारी के कानून पर जो जितना जानता है, उससे दस गुना अधिक उगल देता है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। रहस्य खत्म नहीं होता, आशंकाएँ बनी ही रहती हैं। लेकिन लोग आशंकाओं को नजरअंदाज कर अपनी पक्षधरता शुरू कर देते हैं।
हरिहर काका सभी के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए थे। हरिहर काका मामले में गाँव वालों की राय तर्क सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2022-23)

प्रश्न 2: कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं  देखा हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनः स्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती है, मुँह खोलने की जरूरत नहीं पड़ती।
हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (CBSE 2021-22)

प्रश्न 3: महंत और अपने भाई हरिहर काका को एक जैसे क्यों लगने लगते है? ‘हरिहर काका’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए (CBSE 2020-21)|

प्रश्न 4: ‘हरिहर काका एक सीधे साधे और भोले किसान की अपेक्षा चतुर हो चले थे’ कथन के संदर्भ में 60-70 शब्दों में विचार व्यक्त कीजिए (CBSE 2019-20)

प्रश्न 5: ‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर बताइए कि धर्म के नाम पर किस तरह साधारण जन की भावनाओं से खेला जाता है? (CBSE 2018-19)

प्रश्न 6: समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? ‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर बताइए । (CBSE 2017-18)

प्रश्न 7: हरिहर काका पाठ के कौन से अंश ने आपके मन को अधिक प्रभावित किया और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।

प्रश्न 8: हरिहर काका ने आँगन में थाली उठाकर क्यों फेंक दी?

प्रश्न 9: ‘अपने भी पराये बन जाते हैं- संपत्ति के लिए’ हरिहर काका कहानी के आधार पर सिद्ध कीजिए।

प्रश्न 10: हरिहर काका की नजर में महंत कब घृणित और दुराचारी नज़र आने लगा?

वर्कशीट के समाधान “हरिहर काका – 1

3. टोपी शुक्ला – पाठ का सार

लेखक परिचय

टोपी शुक्ला पाठ के लेखक राही मासूम रज़ा जी हैं | इनका जन्म 1 सितम्बर 1927 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर के गंगौली गाँव में हुआ था। इन्होंने गाँव में ही शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद अलीगढ़ विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में अपनी PhD पूर्ण की। वहीं पर कुछ वर्षों तक अध्यापन कार्य भी करते रहे। फिर रज़ा साहब मुंबई चले गए, जहाँ पर उन्होंने सैंकड़ों फिल्म स्क्रीप्टस , संवाद और लिरिक्स लिखे। भारत के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘महाभारत’ की स्क्रिप्ट , डायलॉग और लिरिक्स ने उन्हें इस क्षेत्र में कभी न मिटने वाली प्रतिष्ठा दिलाई।

राही साहब ने अपने लेखन के माध्यम से जनता को बाँटने वाली ताकतों, राजनैतिक पार्टियां, विभिन व्यक्ति तथा संस्थानों का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने अहंकार, अंधविश्वास, और राजनीती के स्वार्थी गठबंधन आदि को भी बेनकाब किया है| राही साहब एक ऐसे कवी-कथाकार थे, जिनके लिए भारतीय मानवता हमेशा अधिक महत्वपूर्ण रही। राही साहब की लेखन भारतीयों की परेशानियों पर आधारित थीं। इनकी मृत्यु 15 मार्च 1992 को हुई थी।

पाठ प्रवेश

  • ‘टोपी शुक्ला’कहानी के लेखक ‘राही मासूम रजा’हैं। इस कहानी के माध्यम से लेखक बचपन की बात करता है। बचपन में बच्चे को जहाँ से अपनापन और प्यार मिलता है वह वहीं रहना चाहता है।
  • यह नामों का जो चक्कर होता है वह बहुत ही अजीब होता है। परन्तु खुद देख लीजिए कि केवल नाम बदल जाने से कैसी-कैसी गड़बड़ हो जाती है। यदि नाम कृष्ण हो तो उसे अवतार कहते हैं और अगर नाम मुहम्मद हो तो पैगम्बर (अर्थात पैगाम देने वाला)। कहने का अर्थ है की एक को ईश्वर और दूसरे को ईश्वर का पैगाम देने वाला कहा जाता है। नामों के चक्कर में पड़कर लोग यह भूल जाते हैं कि दोनों ही दूध देने वाले जानवरों को चराया करते थे। दोनों ही पशुपति, गोवर्धन और ब्रज में रहने वाले कुमार थे।
  • प्रस्तुत पाठ में भी लेखक ने दो परिवारों का वर्णन किया है जिसमें से एक हिन्दू और दूसरा मुस्लिम परिवार है। दोनों परिवार समाज के बनाए नियमों के अनुसार एक दूसरे से नफ़रत करते हैं परन्तु दोनों परिवार के दो बच्चों में गहरी दोस्ती हो जाती है। ये दोस्ती दिखती है कि बच्चों की भावनाएँ किसी भेद को नहीं मानती।
  • आज के समाज के लिए ऐसी ही दोस्ती की आवश्यकता है। जो धर्म के नाम पर खड़ी दीवारों को गिरा सके और समाज का सर्वांगीण विकास कर सके।

पाठ का संक्षिप्त सार

‘टोपी शुक्ला’ कहानी राही मासूम रजा द्वारा लिखे उपन्यास का एक अंश है। इस कहानी के माध्यम से लेखक  ने बताया है कि बचपन में बच्चे को जहाँ से अपनापन और प्यार मिलता है, वह वहीं रहना चाहता है। टोपी को बचपन में अपनापन अपने परिवार की नौकरानी और अपने मित्र की दादी माँ से मिलता है। वह उन्हीं लोगों के साथ रहना चाहता है।
कहानी ‘टोपी’ के इर्द-र्गिद  घूमती है। वह इस कहानी का मुख्य पात्र है। टोपी के पिता डाक्टर हैं। उनका परिवार भरा-पूरा है। यह परिवार अत्यधिक संस्कारवादी है। घर में किसी भी वस्तु की कमी नहीं है। टोपी का एक दोस्त है – इफ़्फ़न। टोपी हमेशा उसे इफ़्फ़न कह कर पुकारता था। इफ़्फ़न को बुरा अवश्य लगता था, परंतु फिर भी वह उससे बात करता था क्योंकि दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे थे। दोनों के घर अलग-अलग थे। दोनों के मज़हब अलग थे। फिर भी दोनों में गहरी दोस्ती थी। दोनों में प्रेम का रिश्ता था।
इस कहानी के दो पात्र हैं- बलभद्र नारायण शुक्ला यानी टोपी आरै सययद ज़रगाम मुर्तुज़ा यानी इफ़्फ़न। इफ़्फ़न के दादा आरै परदादा प्रसिद्ध् मौलवी थे। इफ्फन के दादा-परदादा मौलवी थे। वे जीवित रहते हुए हिन्दुस्तान में रहे थे, परंतु उनकी लाश को करबला ले जाकर दफनाया गया। इफ्फन के पिताजो उनके खानदान में पहले बच्चे थे, जो हिंदुस्तानी थे। इफ्फन को दादी मौलवी परिवार से नहीं थी। वह एक ज़मींदार परिवार की तथा पूरब की रहने वाली थी। उनकी ससुराल लखनऊ में थी, जहाँ गाना-बजाना बुरा समझा जाता था। इफ्फन के पिता की शादी पर उनके मन में विवाह के गीत गाने की इच्छा थी, परंतु इफ्फन के दादा के डर से नहीं गा पाई। उन्हें इफ्फन के दादा से केवल एक शिकायत थी कि वे सदा मौलवी बने रहते थे।
इफ्फन की दादी जब मरने लगीं, तो उसे अपनी माँ का घर याद आने लगा। इफ्फन उस समय स्कूल गया हुआ था। उसे अपनी दादी से बहुत प्यार था। वह उसे रात के समय कहानियाँ सुनाया करती थी। दादी पूरबिया भाषा बोलती थी, जो उसे अच्छी लगती थी। टोपी को भी उसकी दादी की भाषा अच्छी लगती थी। टोपी को इफ्फन को दादी अपनी माँ जैसी लगती थी। उसे अपनी दादी से नफ़रत थी। वह इफ्फन के घर जाकर उसकी दादी से बात करता था।

एक दिन टोपी ने अपने घर में जैसे ही अपनी माँ के लिए अम्मी शब्द का प्रयोग किया, उसी क्षण उनके यहाँ तूफ़ान आ गया। माँ से ज्यादा उसकी दादी भड़क गई। बाद में उसकी माँ से बहुत पिटाई हुई। उसके भाई मुन्नी बाबू ने माँ से झूठ कह दिया था कि उसने कबाब खाए हैं, जबकि कबाब मुन्नी बाबू ने खाए थे। सबने मुन्नी बाबू के झूठ को सच समझ लिया। टोपी के पास अपनी सफाई देने का कोई रास्ता नहीं था।
अगले दिन टोपी स्कूल गया तब उसने इफ़्फ़न को सारी घटना बताई। भूगोल के चौथे पीरियड में दोनों स्कूल से भाग गए। उन्होनें पचंम की दुकान से केले खरीदे। टोपी केवल फल खाता था। टोपी इफ्फन से कहता है कि क्यों न वह अपनी दादी बदल लें। इफ्फन ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि उसकी दादी उसके पिताजी की माँ भी थी। इफ्फन ने उसे दिलासा देते हुए कहा कि फ़िक्र मत करो, तुम्हारी दादी जल्दी मर जाएगी क्योंकि बूढ़े लोग जल्दी मर जाते हैं। इतने में नौकर ने आकर सूचना दी कि  इफ़्फ़न की दादी मर गई हैं। शाम को जब टोपी इफ़्फ़न के घर गया तो वहाँ सन्नाटा पसरा पडा़ था। वहाँ लोगों की भीड़ जमा थी। टोपी के लिए सारा घर मानो खाली हो चुका था। टोपी ने इफ़्फ़न से कहा तोरी दादी की जगह हमरी दादी मर गई होती तब ठीक भया होता।
जल्दी ही इफ्फन के पिता का तबादला हो गया। उस दिन टोपी ने कसम खाई कि आगे से किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा, जिसके पिता की नौकरी बदलने वाली हो। इफ्फन के जाने के बाद टोपी अकेला हो गया। उस शहर के अगले कलेक्टर हरिनाम सिंह थे। उनके तीन लड़के थे। तीनों लड़कों में से कोई उसका दोस्त न बन सका। डब्बू बहुत छोटा था। बीलू बहुत बड़ा था। गुड्डू केवल अंग्रेज़ी बोलता था। उनमें से किसी ने टोपी को अपने पास फटकने न दिया। माली और चपरासी टोपी को जानते थे इसलिए वह बँगले में घुस गया। उस समय तीनों लड़के क्रिकेट खेल रहे थे। उनके साथ टोपी का झगड़ा हो गया। डब्बू ने अलसेशियन कुत्ते को टोपी के पीछे लगा दिया। टोपी के पटे में सात सइुयाँ लगीं तो उसे होश आया। फिर उसने कभी कलेक्टर के बँगले का रुख नहीं किया।
इसके बाद टोपी ने अपना अकेलापन घर की बूढ़ी नौकरानी सीता से दूर किया। सीता उसे बहुत प्यार करती थी। वह उसका दुख-दर्द समझती थी। घर के सभी सदस्य उसे बेकार समझते थे। घर में सभी के लिए सर्दी में गर्म कपड़े बने, परंतु टोपी को मुन्नी बाबू का उतरा कोट मिला। उसने इसे लेने से इनकार कर दिया। उसने वह कोट घर की नौकरानी केतकी को दे दिया। उसकी इस हरकत पर दादी क्रोधित हो गई। उन्होंने उसे बिना गर्म कपड़े के सर्दी बिताने का आदेश दे दिया।
टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया था, जिस कारण उसे घर में और अधिक डाँट पड़ने लगी थी। जिस समय वह पढ़ने बैठता था, उसी समय घर के सदस्यों को बाहर से कुछ-न-कुछ मँगवाना होता था। स्कूल में भी उसे अध्यापकों ने सहयोग नहीं दिया। अध्यापकों ने उसके नवीं में लगातार तीन साल फेल होने पर उसे नज़रअंदाज़ कर दिया था। पिछले दर्जे के छात्रों के साथ बैठना उसे अच्छा नहीं लगता था। कोई भी ऐसा नहीं था, जो उसके साथ सहानुभूति रखता; उसे परीक्षा में पास होने के लिए प्रेरित करता। घर और स्कूल में किसी ने भी उससे अपनापन नहीं दिखाया। उसने स्वयं ही मेहनत की और तीसरी श्रेणी में नवीं पास कर ली। उसके नवीं पास करने पर दादी ने कहा कि उसकी रफ्तार अच्छी है। तीसरे वर्ष में तीसरी श्रेणी में पास तो हो गए हो।

कठिन-शब्दों के अर्थ

  • घपला – गड़बड़
  • मौलवी – इस्लाम धर्म का आचार्य
  • काफ़िर – गैर मुस्लिम
  • वसीयत – अपनी मृत्यु से पहले ही अपनी सम्पति या उपभोग की वस्तुओं को लिखित रूप से विभाजित कर देना
  • करबला – इस्लाम का एक पवित्र स्थान
  • नमाजी – नियमित रूप से नमाज पढ़ने वाला
  • हाँडियाँ – मिट्टी का वह छोटा गोलाकार बरतन
  • मियाँ – पति
  • कस्टोडियन – जिस सम्पति पर किसी का मालिकाना हक़ न हो उसका सरक्षण करने वाला विभाग
  • बीजू पेड़ – गुठली की सहायता से उगाया गया पेड़
  • बेशुमार – बहुत सारी
  • अमावट – पके आम के रस को सूखाकर बनाई गई मोटी परत
  • तिलवा – तिल के बने व्यंजन
  • चुभलाना – मुँह में कोई खाद्य पदार्थ रखकर उसे जीभ से बार-बार हिलाकर इधर-उधर करना
  • जुग़राफ़िया – भूगोल शास्त्र
  • सरक गए – निकल गए
  • अय्यसा – ऐसा
  • तोहरी – तुम्हारी
  • सकत्यो – सकता
  • फ़िकर – चिंता
  • मसहूर – प्रसिद्ध
  • क्लम्ज़ी – भद्दा
  • अकड़ – घमंड
  • लप्पड़ – थपड़
  • शुशकार – कुत्ते को किसी के पीछे लगाने के लिए नीलाले जाने वाली आवाज़
  • भुकीं – चुभी
  • रुख – चेहरा

2. सपनों के–से दिन – पाठ का सार

पाठ का परिचय

यह पाठ प्रसिद्ध लेखक गुरदयाल सिंह की आत्मकथा से लिया गया एक अंश है। इसमें उन्होंने अपने बचपन की शरारतों, कठिनाइयों, खेल-कूद, स्कूल जीवन, और उस समय के सामाजिक माहौल को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। यह पाठ बचपन की उन भावनाओं को उजागर करता है जिन्हें हम सबने कभी न कभी जिया है, पर शब्दों में ढाल नहीं पाए। लेखक की शैली इतनी आत्मीय है कि पाठक को लगता है जैसे यह उसकी अपनी ही कहानी हो।

गुरदयाल सिंह

मुख्य बिंदु

  • बचपन के खेल: बच्चे नंगे पाँव, फटे कपड़ों में लकड़ी के ढेर पर खेलते, गिरते, चोट खाते, फिर भी अगले दिन खेलने आते।
  • परिवार और मुहल्ला: ज़्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से, गाँवों से आए, स्कूल नहीं जाते थे, दुकानदारी सीखते।
  • स्कूल का डर: बच्चे स्कूल को “कैद” मानते, मास्टरों की पिटाई से डरते, छुट्टियों में भी होमवर्क का डर।
  • प्रकृति की यादें: घास, फूल, और नीम जैसे पत्तों की खुशबू बचपन में बहुत अच्छी लगती थी।
  • छुट्टियों का मज़ा: ननिहाल में दूध-मक्खन, तालाब में नहाना, रेत पर खेलना, पर छुट्टियाँ खत्म होने का डर।
  • मास्टरों का डर: मास्टर प्रीतम चंद सख्त, पिटाई करते; हेडमास्टर शर्मा जी दयालु, बच्चों को बचाते।
  • स्कूल की यादें: स्काउटिंग, परेड, और मास्टर की “शाबाश” बच्चों को फौजी जैसा महसूस कराती।
  • पुरानी किताबें: नई कक्षा में पुरानी किताबों की गंध उदासी लाती, मास्टरों की मार का डर रहता।
  • प्रीतम चंद की सजा: फारसी पढ़ाने में सख्ती, सजा दी, पर शर्मा जी ने रोका, उन्हें निलंबित किया।
  • प्रीतम चंद का व्यवहार: स्कूल में सख्त, पर घर में तोतों से प्यार से बात करते, जो बच्चों को अजीब लगता।

पाठ का सार

इस आत्मकथा के अंश में लेखक अपने बचपन की यादें बताते हैं। वे कहते हैं कि जब वह अपने दोस्तों के साथ खेलते थे, तो सब बच्चे एक जैसे दिखते थे—नंगे पाँव, मैले-फटे कपड़ों में और बिखरे बालों के साथ। खेलते-खेलते वे गिर जाते, जिससे उन्हें चोट लग जाती। लेकिन घर पर उनकी चोट देखकर कोई दया नहीं करता, बल्कि माँ-बाप डाँटते या मारते थे। फिर भी बच्चे अगली सुबह बिना डरे फिर से खेलने निकल जाते। लेखक उस समय यह सब नहीं समझ पाए थे, पर जब वे शिक्षक बनने की ट्रेनिंग में गए और बाल मनोविज्ञान पढ़ा, तब उन्हें यह समझ आया कि बच्चों को खेलना कितना जरूरी और प्रिय लगता है। लेखक बताते हैं कि उनके ज़्यादातर दोस्त स्कूल नहीं जाते थे, या फिर उन्हें पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं थी। उनके माँ-बाप भी पढ़ाई को ज़रूरी नहीं मानते थे और सोचते थे कि बच्चों को व्यापार या दुकानदारी के काम सिखा देना ही काफी है। लेखक के कुछ साथी राजस्थान और हरियाणा से आए हुए थे। उनकी भाषा थोड़ी अलग थी, इसलिए उनकी बातों पर पहले हँसी आती थी, पर खेलते समय सब एक-दूसरे की बातें समझने लगते थे।

बचपन में लेखक को लगता था कि घास ज़्यादा हरी होती है और फूलों की खुशबू बहुत प्यारी लगती है। उन्हें अब भी उस समय के फूलों की खुशबू याद है। स्कूल के साल की शुरुआत में एक-डेढ़ महीने पढ़ाई होती थी और फिर डेढ़-दो महीने की छुट्टियाँ लग जाती थीं। लेखक हर साल अपनी माँ के साथ ननिहाल जाते थे। अगर कभी ननिहाल नहीं जा पाते, तो घर के पास तालाब पर चले जाते और वहाँ दोस्तों के साथ खूब नहाते। तालाब में कूदते समय कभी-कभी बच्चों के मुँह में गंदा पानी चला जाता था। छुट्टियाँ धीरे-धीरे खत्म होने लगतीं और स्कूल जाने का डर बढ़ने लगता। मास्टर जी बहुत सारे सवाल हल करने के लिए देते थे, इसलिए बच्चे छुट्टियों के काम का हिसाब लगाने लगते थे। दिन छोटे लगने लगते और स्कूल की सख़्ती याद आकर डराने लगती थी। कुछ लड़के ऐसे भी थे जिन्हें काम करने से बेहतर लगता था कि मास्टर से पिटाई ही खा लें। इन बच्चों का नेता ओमा था, जो सबसे अलग और अनोखा था। उसका सिर बहुत बड़ा था, जैसे किसी बिल्ली के बच्चे के माथे पर तरबूज रखा हो। वह हाथ-पाँव से नहीं, बल्कि सिर से लड़ता था। जब वह किसी के पेट या छाती में सिर मारता, तो वह लड़का दर्द से चिल्ला उठता। उसकी इस टक्कर को सबने ‘रेल-बम्बा’ नाम दे रखा था।

लेखक का स्कूल बहुत छोटा था। उसमें केवल नौ कमरे थे, जो अंग्रेज़ी के अक्षर ‘H’ की तरह बने हुए थे। सबसे पहला कमरा हेडमास्टर श्री मदनमोहन शर्मा जी का था। वे हर दिन प्रेयर के समय बाहर आते थे। पी.टी. के अध्यापक प्रीतम चंद बच्चों को लाइन में खड़ा करते थे। वे बहुत सख्त थे और कभी-कभी बच्चों को सज़ा भी देते थे। लेकिन हेडमास्टर जी का स्वभाव बिल्कुल अलग था। वे पाँचवीं और आठवीं कक्षा को अंग्रेज़ी पढ़ाते थे और कभी किसी बच्चे को नहीं मारते थे। सिर्फ कभी-कभी गुस्से में हल्की चपत लगा देते थे। कुछ बच्चों को छोड़कर बाकी सभी बच्चे रोते हुए स्कूल जाते थे। फिर भी स्कूल कभी-कभी अच्छा लगता था, खासकर जब पी.टी. टीचर हमें रंग-बिरंगी झंडियाँ देकर स्काउटिंग का अभ्यास करवाते थे। अगर हम अच्छा काम करते, तो वे ‘शाबाश’ कहकर हमारी तारीफ भी करते थे।

लेखक को हर साल अगली कक्षा में जाने पर पुरानी किताबें मिल जाती थीं। हमारे हेडमास्टर एक अमीर लड़के को उसके घर जाकर पढ़ाते थे। वह लड़का लेखक से एक कक्षा आगे था, इसलिए उसकी पुरानी किताबें लेखक को मिल जाती थीं। इन्हीं किताबों की मदद से लेखक अपनी पढ़ाई जारी रख पाया। बाकी चीज़ों पर पूरे साल में सिर्फ एक-दो रुपये खर्च होते थे। उस समय एक रुपये में एक सेर घी और दो रुपये में एक मन गेहूं मिल जाता था। इसलिए ज़्यादातर अच्छे घरों के ही बच्चे स्कूल जाते थे। लेखक अपने परिवार का पहला लड़का था जो स्कूल गया।

यह समय दूसरे विश्व युद्ध का था। नाभा रियासत के राजा को अंग्रेज़ों ने सन् 1923 में गिरफ़्तार कर लिया था। युद्ध शुरू होने से पहले उनकी मृत्यु तमिलनाडु के कोडैकनाल में हो गई थी। उनका बेटा उस समय इंग्लैंड में पढ़ रहा था। उन दिनों अंग्रेज़ लोग गाँव-गाँव जाकर नौजवानों को फौज में भर्ती करने के लिए नौटंकी वालों को साथ ले जाते थे। वे फौज की अच्छी ज़िंदगी दिखाकर युवाओं को फौज में जाने के लिए आकर्षित करते थे। जब लेखक स्काउटिंग की वर्दी पहनकर परेड करते थे, तो उन्हें भी वैसा ही गर्व और उत्साह महसूस होता था।

लेखक ने मास्टर प्रीतमचंद को कभी हँसते हुए नहीं देखा। उनका पहनावा ऐसा था कि बच्चे उन्हें देखकर डर जाते थे। सभी उनसे डरते और उन्हें पसंद नहीं करते थे क्योंकि वे बहुत सख्त सज़ा देते थे। वे चौथी कक्षा में फ़ारसी पढ़ाते थे। एक बार बच्चों को एक शब्द ठीक से याद न होने पर उन्होंने सभी को मुर्गा बना दिया। जब हेडमास्टर शर्मा जी ने यह देखा तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। वे प्रीतम सिंह पर चिल्लाए और बोले, “तुम क्या कर रहे हो? क्या ऐसे छोटे बच्चों को सज़ा दी जाती है? अभी के अभी इसे बंद करो!” वे गुस्से से काँपते हुए अपने कमरे में चले गए। इस घटना के बाद प्रीतम सिंह कई दिनों तक स्कूल नहीं आए। शायद हेडमास्टर ने उन्हें नौकरी से हटा दिया था। अब फ़ारसी पढ़ाने का काम शर्मा जी या मास्टर नाहरिया राम जी ने संभाल लिया। पी.टी. मास्टर स्कूल की बजाय अपने घर में आराम करते रहते थे। उन्हें अपनी नौकरी की कोई चिंता नहीं थी। वे अपने दो पिंजरे वाले तोतों को रोज़ कई बार भीगे बादाम खिलाते और उनसे प्यार से बातें करते। यह सब लेखक और उनके दोस्तों को बहुत अजीब लगता था। वे सोचते थे कि इतना सख्त पी.टी. मास्टर तोतों से इतनी प्यार भरी बातें कैसे कर सकता है! यह बात उनकी समझ से बाहर थी, इसलिए वे उन्हें किसी जादुई इंसान जैसा मानते थे।

पाठ से शिक्षा

यह पाठ हमें बचपन की यादों के जरिए यह सिखाता है कि बच्चे खेलना बहुत पसंद करते हैं, चाहे उन्हें मार ही क्यों न पड़ जाए। गरीब बच्चों का बचपन कठिनाइयों से भरा होता है, फिर भी वे छोटे-छोटे पलों में खुशी ढूँढ ही लेते हैं। स्कूल और पढ़ाई कभी-कभी बच्चों के लिए डर और बोझ बन जाते हैं, खासकर जब पढ़ाई कठिन हो या शिक्षक सख्त हों। लेकिन जब कोई शिक्षक प्यार और समझदारी से पेश आता है, तो बच्चे उनसे सच्चा सम्मान और लगाव महसूस करते हैं। यह पाठ यह भी बताता है कि शिक्षक का व्यवहार बच्चों पर बहुत गहरा असर डालता है। साथ ही, यह भी सिखाता है कि अनुशासन जरूरी है लेकिन उसमें दया और समझ भी होनी चाहिए। बचपन के दिनों की सादगी, मासूमियत और संघर्ष हमें जीवन की सच्ची कीमत समझाते हैं।

शब्दार्थ

  • नंगे पाँव: बिना जूते-चप्पल के
  • फटी-मैली सी कच्छी: फटी और गंदी अंडरवियर
  • तार-तार हो जाना: बहुत बुरी तरह फट जाना
  • पिटाई करतीं: मार लगाना
  • गुस्सैल: जो बहुत जल्दी गुस्सा हो जाए
  • बस्ता तालाब में फेंक आए: स्कूल का बैग तालाब में फेंक दिया
  • तहसीलदार: सरकारी अफसर
  • लंडा पढ़वाकर: बाजार की लिपि (शॉर्टहैंड) सिखवाकर
  • मुनीमी: हिसाब-किताब लिखने का काम
  • अलिफ बे जीम-च: उर्दू और फ़ारसी के अक्षरों के नाम
  • एह खेडण दे दिन चार: खेलने-कूदने के दिन बहुत जल्दी बीत जाते हैं (लोक कहावत)
  • डंडियाँ: रास्ते में उगे झाड़ीनुमा पौधे
  • मोतिया: सफेद रंग का खुशबूदार फूल
  • चपड़ासी: स्कूल में काम करने वाला सहायक व्यक्ति
  • बहियाँ: हिसाब-किताब की बही (कॉपी)
  • गंध: महक या खुशबू
  • गाल पर चपत: गाल पर हल्की मार
  • ‘गुड’ झे: “Good” शब्द का बहुवचन (गुड़ियों की तरह कई गुड)
  • फौज के तमगे: सेना में मिलने वाले मेडल या सम्मान
  • हरफनमौला: जो हर काम में माहिर हो
  • चमड़ी उधेड़ना: बहुत बुरी तरह मारना
  • डिसिप्लिन: अनुशासन
  • खुरियाँ: जूतों के नीचे लगी धातु की कीलें (जैसे घोड़े की नाल)
  • मोच आना: मांसपेशियों में खिंचाव आ जाना
  • मुअत्तल करना: कुछ समय के लिए नौकरी से हटाना
  • बहाल करना: नौकरी पर दोबारा वापस लाना
  • डायरेक्टर: विभाग का उच्च अधिकारी
  • महकमाए तालीम: शिक्षा विभाग
  • चौबारा: ऊपर की मंज़िल या छोटा कमरा जो ऊपर हो
  • तोतों को बादाम की गिरियाँ: तोतों को बादाम खिलाना
  • रेल-बम्बा: बहुत ज़ोर से सिर मारने की ताकत (रेल इंजन जैसा टक्कर)
  • पीठ ऊँची करो: झुककर कान पकड़ते समय पीठ सीधी करने का आदेश
  • फुंकारना: गुस्से में साँड़ की तरह आवाज़ करना
  • टाँगों में जलन: पैर में दर्द या थकान महसूस होना
  • मुस्कराते न देखा: कभी हँसते नहीं देखा
  • सतिगुर के भय से प्रेम: डर से सम्मान और लगाव पैदा होना

1. हरिहर काका  – पाठ का सार

कहानी का परिचय

“हरिहर काका” एक हिंदी कहानी है जो एक गाँव के बुजुर्ग व्यक्ति हरिहर काका के जीवन और उनकी मुश्किलों के बारे में बताती है। हरिहर काका एक साधारण किसान हैं जो अपने परिवार और गाँव की ठाकुरबारी (मंदिर) के बीच फंस जाते हैं। उनके पास कुछ जमीन है, जिसे उनके भाई और ठाकुरबारी के लोग अपने नाम करवाना चाहते हैं। इस वजह से उन्हें बहुत दबाव और अन्याय का सामना करना पड़ता है। 

कहानी में दिखाया गया है कि हरिहर काका को उनके भाइयों और ठाकुरबारी के साधुओं द्वारा परेशान किया जाता है। उनकी जमीन के लिए उन पर दबाव डाला जाता है और यहाँ तक कि उन्हें बंधक भी बनाया जाता है। कहानी यह दर्शाती है कि समाज में लालच और सत्ता की वजह से कैसे एक साधारण व्यक्ति को परेशान किया जा सकता है। साथ ही, यह हरिहर काका की हिम्मत और उनकी सच्चाई की लड़ाई को भी दिखाती है। यह कहानी सामाजिक अन्याय, परिवारिक रिश्तों, और धार्मिक संस्थानों के दुरुपयोग को उजागर करती है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में सही और गलत के बीच की लड़ाई कितनी जटिल हो सकती है।

मुख्य बिंदु

  • हरिहर काका की स्थिति: हरिहर काका एक गाँव में रहते हैं और उनकी जमीन को लेकर विवाद है। उनके भाई और ठाकुरबारी (मंदिर) वाले उनकी जमीन हड़पना चाहते हैं।
  • परिवार और ठाकुरबारी का दबाव: हरिहर काका के भाई उन्हें जमीन अपने नाम करने के लिए दबाव डालते हैं। ठाकुरबारी के लोग भी उनके अंगूठे के निशान लेकर जमीन हड़पने की कोशिश करते हैं।
  • हरिहर काका का अपहरण: ठाकुरबारी के लोगों ने हरिहर काका को बंधक बनाकर उनके अंगूठे के निशान लिए, लेकिन पुलिस ने उन्हें बचा लिया।
  • काका का दुख और विश्वास: हरिहर काका को अपने भाइयों और ठाकुरबारी वालों पर भरोसा नहीं रहा। वे अपनी जमीन किसी को नहीं देना चाहते, चाहे कुछ भी हो जाए।
  • गाँव का माहौल: गाँव में ठाकुरबारी का बहुत प्रभाव है। लोग वहाँ पूजा करते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे लालच और धोखे का केंद्र मानते हैं।
  • हरिहर काका का फैसला: काका अपनी जमीन न भाइयों को देते हैं, न ठाकुरबारी को। वे डर के बावजूद अपनी बात पर अडिग रहते हैं।
  • सामाजिक अन्याय: कहानी में लालच, धोखे और परिवार में विश्वासघात की समस्या दिखाई गई है। हरिहर काका समाज और परिवार के अन्याय का शिकार हैं।
  • पुलिस और सुरक्षा: पुलिस ने काका को बचाया, और अब उनकी सुरक्षा के लिए पहरा है। लेकिन गाँव में जमीन को लेकर तनाव बना हुआ है।

पाठ का सार

कहानी ‘हरिहर काका’ गाँव में रहने वाले एक बुज़ुर्ग व्यक्ति की कहानी है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी से बिताया, लेकिन जीवन के अंतिम समय में उन्हें बेबसी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। उनके अपने परिवार के लोग स्वार्थी हो गए थे और हर कोई अपनी फायदेमंदी में लगा हुआ था।

कहानी में लेखक हरिहर काका से गहराई से जुड़ा हुआ है। बचपन में हरिहर काका लेखक को बहुत प्यार करते थे, उसे कंधे पर बैठाकर घुमाते थे। बड़े होने पर लेखक और हरिहर काका अच्छे दोस्त बन गए। अब जब हरिहर काका बूढ़े हो गए हैं, उन्होंने बोलना बंद कर दिया है और शांत रहते हैं। लेखक के अनुसार उनके जीवन की कहानी जानना ज़रूरी है। वे उसी गाँव के रहने वाले हैं जहाँ लेखक रहता है।

गाँव आरा नामक कस्बे से 40 किलोमीटर दूर है। गाँव में ठाकुर जी का एक बड़ा मंदिर है, जिसे ठाकुरबारी कहा जाता है। यहाँ लोग मन्नत माँगते हैं और विश्वास करते हैं कि मन्नत ज़रूर पूरी होती है। मंदिर के पास बहुत सी ज़मीन है। पहले हरिहर काका मंदिर में नियमित जाते थे, पर अब उन्होंने वहाँ जाना बंद कर दिया है।

हरिहर काका के चार भाई हैं। सब विवाहित हैं और उनके बच्चे भी बड़े हो गए हैं। हरिहर काका के खुद के बच्चे नहीं हैं। वे अपने भाइयों के साथ रहते हैं। उनके पास 60 बीघा खेत हैं, जिनमें से 15-15 बीघा हर भाई के हिस्से में आता है। सभी खेती पर निर्भर हैं। भाइयों ने अपनी पत्नियों को हरिहर काका की सेवा करने को कहा, और कुछ समय तक बहुएँ उनकी सेवा करती रहीं, लेकिन बाद में सेवा में लापरवाही होने लगी। एक दिन ऐसा भी आया जब उन्हें पीने के लिए पानी देने वाला भी कोई नहीं था। बचा-खुचा खाना उनकी थाली में परोसा जाने लगा।

एक दिन उनके भतीजे का मित्र शहर से आया। उसके लिए स्वादिष्ट खाना बनाया गया, लेकिन काका को वही रूखा-सूखा खाना मिला। वे गुस्से में थाली उठाकर आँगन में फेंक देते हैं और बहुओं को डाँटते हैं। उस समय मंदिर के पुजारी वहीं मौजूद थे। उन्होंने जाकर महंत को सारी बात बताई। महंत ने इसे अच्छा संकेत मानते हुए काका को मंदिर बुलवाया।

महंत ने हरिहर काका को समझाया कि वे अपनी ज़मीन मंदिर के नाम कर दें ताकि उन्हें बैकुंठ (मोक्ष) की प्राप्ति हो और लोग उन्हें हमेशा याद रखें। काका थोड़े परेशान हो जाते हैं और सोचने लगते हैं। महंत ने मंदिर में उनके रहने-खाने की व्यवस्था कर दी। जैसे ही यह बात भाइयों को पता चली, वे उन्हें मनाने ठाकुरबारी आए लेकिन काका वापस नहीं गए। फिर अगली सुबह वे फिर आए, उनके पाँव पकड़ कर रोने लगे, माफ़ी माँगी। काका को दया आ गई और वे घर लौट आए।

अब घर में उनकी बहुत सेवा होने लगी। उन्हें जो भी चाहिए होता, तुरंत मिल जाता। गाँव में उनकी चर्चा होने लगी। घर के लोग अब ज़मीन अपने नाम करवाना चाहते थे। लेकिन हरिहर काका ने ऐसे कई उदाहरण देखे थे जिनमें लोग ज़मीन लिखवाकर बाद में पछताए थे। महंत भी बार-बार उन्हें ज़मीन मंदिर को देने के लिए समझाते रहते थे, लेकिन काका पर कोई असर नहीं हुआ।

इसके बाद महंत चिंता करने लगे और एक योजना बनाई। उन्होंने अपने लोगों को हथियारों से लैस कर काका का अपहरण करवा दिया। भाइयों और गाँव वालों को जब यह पता चला तो वे मंदिर पहुँचे, लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला। फिर उन्होंने पुलिस बुला ली। अंदर महंत ने ज़बरदस्ती काका से सादे कागज़ों पर अँगूठा लगवा लिया। काका बहुत हैरान थे कि महंत ऐसा कर सकते हैं।

पुलिस ने जैसे-तैसे दरवाज़ा खुलवाया। एक कमरे में काका रस्सियों से बँधे मिले, मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था। उन्हें छुड़ाया गया और भाई उन्हें घर ले गए। अब उनकी बहुत निगरानी होने लगी। रात में दो-तीन लोग उनके पास सोते और दिन में हथियारों से लैस लोग उनके साथ चलते।

फिर उन पर ज़मीन देने का दबाव बनने लगा। एक दिन भाइयों ने उन्हें धमकाया कि अगर ज़मीन नहीं दी तो मारकर घर में गाड़ देंगे। काका ने साफ इनकार किया तो उन्होंने काका की पिटाई कर दी और मुँह में कपड़ा ठूँस दिया। काका ने चिल्लाने की कोशिश की। गाँव वाले इकट्ठा हुए। महंत को खबर मिली, वह पुलिस के साथ पहुँचे। पुलिस ने काका को छुड़ाया और उनका बयान लिया। उन्होंने बताया कि भाइयों ने ज़बरदस्ती उनसे कागज़ों पर अँगूठा लगवाया है।

अब काका ने पुलिस सुरक्षा की माँग की। वे अब अकेले रहने लगे हैं। उन्होंने एक नौकर रख लिया है। कुछ पुलिसकर्मी उनकी रक्षा करते हैं और उनके पैसों से ऐश करते हैं। एक नेता ने उन्हें ज़मीन पर स्कूल खोलने का सुझाव दिया, पर काका ने मना कर दिया। गाँव में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। लोग सोचते हैं कि उनकी मौत के बाद महंत साधुओं को बुलाकर ज़मीन पर कब्ज़ा कर लेगा।

अब हरिहर काका गूंगे जैसे हो गए हैं। वे चुपचाप बैठे रहते हैं और खाली आँखों से आसमान की ओर देखा करते हैं।

कहानी से शिक्षा

“हरिहर काका” कहानी हमें यह सिखाती है कि जब लोग लालची हो जाते हैं और अपनों के साथ धोखा करते हैं, तो बहुत दुख होता है। हरिहर काका एक सीधे-सादे और अच्छे इंसान थे, लेकिन उनके अपने भाइयों और मंदिर वालों ने उनकी ज़मीन हथियाने के लिए उन्हें धोखा दिया और जबरदस्ती की। इस कहानी से हमें यह समझ आता है कि हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए और जब हमारे साथ गलत हो, तो उसका विरोध करना चाहिए, चाहे सामने अपने ही परिवार वाले हों या ताकतवर लोग। यह कहानी यह भी दिखाती है कि लालच रिश्तों को बिगाड़ देता है और हमें अपने हक की रक्षा करनी चाहिए।

शब्दार्थ

  • यंत्रणाओं: यातनाओं
  • आसक्ति: लगाव
  • मझधार: बीच में
  • ठाकुरबारी: देवस्थान
  • संचालन: चलाना
  • दवनी: गेहूँ/धान निकालने की प्रक्रिया
  • अगउम: प्रयोग में लाने से पहले देवता के लिए निकाला गया अंश
  • प्रवचन: उपदेश
  • मशगूल: व्यस्त
  • तत्क्षण: उसी पल
  • अकारथ: बेकार
  • बय: वसीयत
  • वय: उम्र
  • महटिया: टाल जाना
  • छल, बल, कल: धोखा, शक्ति, बुद्धि
  • आच्छादित: ढका हुआ

10. तताँरा–वामीरो कथा – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर: पाठ का नाम- तताँरा वामीरो कथा, लेखक- लीलाधर मंडलोई|

प्रश्न 2: तताँरा समुद्री बालू पर बैठकर क्या कर रहा था?
उत्तर:  तताँरा समुद्र के किनारे विचारमग्न था। वह समुद्री बालू पर बैठकर सूरज की अंतिम रंग-बिरंगी किरण को निहार रहा था।

प्रश्न 3: तताँरा वामीरो कहाँ की कथा है?
उत्तर: तताँरा वामीरो निकोबार द्वीप की कथा है।

प्रश्न 4: वामीरो अपना गाना क्यों भूल गई?
उत्तर: लहरों से भीग जाने के कारण वामीरो के ध्यान में खलल आया और वह अपना गाना भूल गई।

प्रश्न 5: तताँरा और वामीरो के गाँव की क्या रीति थी?
उत्तर: तताँरा और वामीरो के गाँव की रीति थी कि कोई भी अपने गाँव से बाहर विवाह नहीं कर सकता था।

प्रश्न 6: किसकी तन्द्रा भंग हो गयी?
उत्तर:  तताँरा वामीरो का मधुर स्वर सुनकर सुध-बुध खोये बैठा था कि अचानक समुद्र की एक लहर उठी और उस पर पड़ी जिससे उसकी तन्द्रा भंग हो गयी।

प्रश्न 7: तताँरा ने युवती से क्या पूछा?
उत्तर:  तताँरा ने युवती से पुछा कि उसने अचानक इतना मधुर गीत गाना क्यों छोड़ दिया।

प्रश्न 8: तताँरा ने वामीरो से क्या याचना की?
उत्तर:  तताँरा ने वामीरो से रोज समुद्र तट पर आने की याचना की।

प्रश्न 9: क्रोध में तताँरा ने क्या किया?
उत्तर: क्रोध में तताँरा ने अपनी तलवार पूरी ताकत से जमीन में घुसेड़ दी। उसके बाद उसने उस द्वीप को दो टुकड़ों में चीर दिया।

प्रश्न 10: तताँरा और वामीरो किस-किस गाँव के थे?
उत्तर:  तताँरा पासा गाँव का था तथा वामीरो लपाती गाँव की थी|

9. डायरी का एक पन्ना – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: पाठ और लेखक का नाम बताइए।
उत्तर: 
पाठ का नाम- डायरी का एक पन्ना, लेखक- सीताराम सेकसरिया।

प्रश्न 2: कलकत्तावासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर: 26 जनवरी 1931 को कलकत्तावासी महात्मा गाँधी द्वारा घोषित आजादी की सालगिरह मना रहे थे इसलिए वह दिन उनके लिए महत्वपूर्ण था।

प्रश्न 3: लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?
उत्तर: लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर बताना चाहते थे कि वे अपने को आज़ाद समझ कर आज़ादी मना रहे हैं। उनमें जोश और उत्साह है।

प्रश्न 4: सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?
उत्तर: सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।

प्रश्न 5: घायलों की देख-रेख कौन कर रहा था?
उत्तर: घायलों की देख-रेख डॉ. दासगुप्ता कर रहे थे|

प्रश्न 6: हरिश्चंद्र सिंह झंडा फहराने कहाँ गए?
उत्तर: हरिश्चंद्र सिंह तारा सुंदरी पार्क में झंडा फहराने गए थे।

प्रश्न 7: किस जुलूस मैं बहुत सी लड़कियों को गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: गुजराती सेविका संघ ने जो जुलूस निकाला उस में बहुत-सी लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

प्रश्न 8: कौंसिल की तरफ से क्या नोटिस निकाला गया था?
उत्तर: कौंसिल की तरफ से नोटिस निकाला गया की 26 जनवरी 1931 को शाम के ठीक 5 बजकर 25 मिनट पर झंडा फहराया जायेगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।

प्रश्न 9: मोन्यूमेंट को पुलिस ने भोर से ही क्यों घेर लिया था?
उत्तर: पुलिस ने सभास्थल को भर से ही घेर लिया था उद्देश्य यह था की किसी तरह शाम को होने वाली सभा को रोका जा सके।

प्रश्न 10: लड़कियों ने झंडोत्सव कहाँ मनाया इनमें कौन-कौन शामिल थीं?
उत्तर: लड़कियों ने मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडोत्सव मनाया उसमें जानकी देवी मदालसा जैसी प्रसिद्ध समाज सेविका थीं।

प्रश्न 11: कानून भंग का काम से क्या आशय है यह काम क्यों शुरू किया गया?
उत्तर: 1931 में महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया गया था इसमें बिना किसी तोड़ फोड़ संघर्ष या उत्तेजना के सरकारी कानूनों का उलंघन करना था।

2. पद – Very Short Questions answer

प्रश्न 1: ‘काटी कुंजर पीर’ के अनुसार कुंजर की क्या पीड़ा थी और वह कैसे दूर हुई?
उत्तर:
 मगरमच्छ ने हाथी का एक पैर पकड़ रखा था जिस कारण उसे पीड़ा हो रही थी। परन्तु हाथी उससे अपना पैर नहीं छुड़ा पा रहा था। हाथी ने जा प्रभु का स्मरण किया और विष्णु भगवान ने हाथी का कष्ट हरने के लिए मगरमच्छ को मारा था जिससे हाथी की पीड़ा दूर हुई|


प्रश्न 2: कवियत्री का हृदय किसके लिए अधीर है?
उत्तर: 
मीरा का हृदय अपने प्रिय श्रीकृष्ण के लिए अधीर है। वे श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहती हैं। श्रीकृष्ण के दर्शन प्राप्त न होने के कारण ही उनका हृदय बेचैन हो उठता है।


प्रश्न 3: मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
उत्तर:
 मीराबाई कहती हैं कि श्रीकृष्ण के माथे पर मोर के पंखों का मुकुट सुशोभित है और उन्होंने पीले वस्त्र पहने हैं। उनके गले में वैजंती माला शोभा पा रही है। श्रीकृष्ण जब बाँसुरी बजाते हैं, तो बहुत मनमोहक लगते हैं।


प्रश्न 4: दासी बनकर मीरा क्या करना चाहती हैं?
उत्तर: 
दासी बनकर मीरा श्रीकृष्ण के भवन के सामने सुंदर बाग लगाना चाहती हैं। वे वृंदावन के कुंजों और गलियों में उनका गुणगान करना चाहती हैं।


प्रश्न 5: कवियत्री किस रंग की साड़ी पहनना चाहती हैं और क्यों?
उत्तर: 
कुसुंबी रंग प्रेम का प्रतीक होता है। मीरा कुसुंबी रंग की साड़ी पहनकर श्रीकृष्ण से इसलिए मिलना चाहती हैं ताकि वे अपना प्रेम उनके सामने प्रकट कर सकें|


प्रश्न 6: श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज किस प्रकार बचाई थी?
उत्तर:
 जब दुःशासन भरी सभा में द्रौपदी का चीर सबके सामने खींचने का प्रयास कर रहा था तब श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के वस्त्र को बढ़ाकर उसे अपमानित होने से बचाया था। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी|


प्रश्न 7: भाव-भक्ति को जागीर क्यों कहा गया है?
उत्तर: 
मीरा श्रीकृष्ण की सच्ची उपासिका थीं। किसी भी भक्त के लिए उसका आराध्य ही सबसे बड़ी जागीर होता है और उसको पाने का साधन है – भक्ति। मीरा भी अपनी भक्ति के माध्यम से श्रीकृष्ण को पाना चाहती थीं। इसी कारण अपनी भाव-भक्ति को सबसे बड़ी जागीर मानती थीं।


प्रश्न 8: मीरा श्रीकृष्ण की सेवा करके वेतन रूप में क्या पाना चाहती हैं?
उत्तर:
 मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण की सेवा करके उनके नाम-स्मरण को वेतन के रूप में पाना चाहती हैं| इससे वो हर समय अपने प्रियतम को याद करती रहें। वे एक क्षण के लिए भी प्रभु से दूर नहीं रहना चाहती हैं।


प्रश्न 9: श्रीविष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा किस रूप में की थी? 
उत्तर:
 विष्णु भगवान ने प्रह्लाद की रक्षा नृसिंह का अवतार लेकर की थी। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद उनका भक्त था।उन्होंने अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की थी|


प्रश्न 10: मीराबाई  श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या करने को तैयार हैं?
उत्तर:
 मीराबाई श्रीकृष्ण को पाने के लिए उनकी सेविका बनकर निरंतर समीप रहना चाहती हैं। वे बड़े-बड़े महलों का निर्माण करवाकर उनके बीच में खिड़कियाँ बनवाना चाहती हैं ताकि वे श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य को निहार सकें|  वृंदावन की कुंज गलियों में श्रीकृष्ण की लीलाओं का गायन करना चाहती हैं। मीरा कुसुंबी साड़ी में आधी रात को यमुना के तट पर उनके दर्शन करना चाहती हैं|

1. साखी – Very Short Questions answer

1. ऐसी बाँणी बोलिये, … औरन कौ सुख होइ।।
कस्तूरी कुंडलि बसै, … दुनियाँ देखै नाँहि।।

(क) मनुष्य को कैसी वाणी बोलनी चाहिए?
उत्तर:: 
मनुष्य को मीठी वाणी बोलनी चाहिए|

(ख) मीठी वाणी बोलने से सुनने वालों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर: 
मीठी वाणी बोलने से सुनने वालों को सुख और शान्ति प्राप्त होती है|

(ग) मृग कस्तूरी को कहाँ ढूँढता रहता है?
उत्तर: मृग कस्तूरी को जंगल में ढूँढता रहता है|

(घ) अज्ञानी व्यक्ति ईश्वर को कहाँ-कहाँ  ढूँढता है?
उत्तर: अज्ञानी व्यक्ति ईश्वर को विभिन्न धार्मिक स्थानों में ढूँढता रहता है|

2. जब मैं था तब हरि नहीं, … जब दीपक देख्या माँहि।।
सुखिया सब संसार है, …. जागै अरु रोवै।।

(क) मनुष्य को ईश्वर की प्राप्ति कब होती है?
उत्तर: जब मनुष्य के मन से अंहकार का नाश होता है तब ईश्वर की प्राप्ति होती है|

(ख) दीपक जलाने से क्या होता है?
उत्तर: दीपक जलाने से आस-पास का अन्धकार मिट जाता है और प्रकाश फ़ैल जाता है|

(ग) कबीर के अनुसार दुनिया क्यों सुखी है?
उत्तर: कबीर के अनुसार दुनिया इसलिए सुखी है क्योंकि वो केवल खाने और सोने का काम करती है, उन्हें किसी प्रकार की चिंता नहीं है|

(घ) कबीर क्यों दुखी हैं?
उत्तर: कबीर इसलिए दुखी हैं क्योंकि प्रभु को पाने की आशा में हमेशा चिंता में रहते हैं।

3. बिरह भुवंगम तन बसै, … जिवै तो बौरा होइ।।
निंदक नेडा राखिये, … निरमल करै सुभाइ।।

(क) किस स्थिति में व्यक्ति पर कोई मन्त्र का असर नहीं होता?
उत्तर: 
जब किसी मनुष्य के शरीर के अंदर अपने प्रिय से बिछड़ने का साँप बसता है तब उसपर कोई मन्त्र का असर नहीं होता|

(ख) ईश्वर वियोगी की हालत कैसी हो जाती है?
उत्तर: 
ईश्वर वियोगी की दशा पागलों की तरह हो जाती है?

(ग) निंदा करने वाले व्यक्ति को कहाँ रखना चाहिए?
उत्तर: निंदा करने वाले व्यक्ति को सदा अपने पास रखना चाहिए|

(घ) हम बिन साबुन-पानी के निर्मल कैसे रह सकते हैं?
उत्तर: निंदक को सदा अपने पास रखकर हम बिन साबुन-पानी के निर्मल रह सकते हैं|

4. पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, … पढ़ै सु पंडित होई।।
हम घर जाल्या आपणाँ, … जे चले हमारे साथि।।

(क) कबीर के अनुसार कौन ज्ञानी नहीं बन पाया?
उत्तर: 
कबीर के अनुसार मोटी-मोटी पुस्तकें पढ़ने वाले व्यक्ति ज्ञानी नहीं बन पाए|

(ख) कबीर के अनुसार पंडित कौन है?
उत्तर: 
कबीर के अनुसार जिसने प्रभु का एक अक्षर भी पढ़ लिया है, वह पंडित है| 

(ग) कबीर ने ज्ञान कैसे प्राप्त किया है?
उत्तर: 
कबीर ने मोह-माया रूपी घर को जलाकर ज्ञान प्राप्त किया है|

(घ) कबीर के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिए क्या करना होगा?
उत्तर: 
कबीर के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिए मोह-माया के बंधनों से आजाद होना होगा|

अति लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1: मीठी वाणी बोलने से क्या होता है?
उत्तर: 
मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले के मन से क्रोध और घृणा की भावना का नाश होता हैं। साथ ही खुद के तन और अपने हृदय को भी शीतलता मिलता है।

प्रश्न 2: मृग कस्तूरी को वन में क्यों ढूँढता रहता है?
उत्तर: कस्तूरी हिरण के नाभि में होती है परन्तु इस बात से अनजान हिरन कस्तूरी के सुगंध में मोहित होकर वन में ढूँढता रहता है|

प्रश्न 3: ईश्वर कहाँ निवास करता है और मनुष्य उसे कहाँ ढूँढता है?
उत्तर: ईश्वर प्रत्येक मनुष्य के हृदय में निवास करता है परन्तु अज्ञानता के कारण मनुष्य उसे देख नहीं पाता इसलिए मनुष्य ईश्वर को मंदिर-मस्जिद, गुरुद्वारे और तीर्थ स्थलों में जाकर ढूँढता है।

प्रश्न 4: हमें निंदक को अपने पास क्यों रखना चाहिए?
उत्तर: हमें निंदक को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि वे हमारे बुराइयों को बतायेंगे जिसे सुनकर हम उन बुराइयों को दूर कर पायेंगे| इस तरह हमारा स्वभाव बिना साबुन-पानी के स्वच्छ हो जाएगा|

प्रश्न 5: कबीर की साखियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: कबीर की साखियों का मुख्य उद्देश्य जीवन को सही तरीके से जीने की शिक्षा देना है| कबीर ने इन साखियों में अपने प्रत्यक्ष ज्ञान का संकलन किया है जिससे मनुष्य जीवन के आदर्श मूल्यों को सीख सकता है| इनमें कबीर ने आडंबरों पर गहरी चोट की है और जीवन वास्तविक उद्देश्य यानी ईश्वर को जानने पर ध्यान दिया है|

प्रश्न 6: कबीर के अनुसार सच्चा ज्ञान क्या है?
उत्तर: 
कबीर के अनुसार पुस्तकों द्वारा पाया गया ज्ञान व्यर्थ है| सच्चा ज्ञान ईश्वर को जानना है क्योंकि वही एकमात्र सत्य है और कण-कण में व्याप्त है|

प्रश्न 7: ‘ज्ञान प्राप्ति’ का मार्ग कठिन क्यों है?
उत्तर: 
‘ज्ञान प्राप्ति’ का मार्ग कठिन इसलिए है क्योंकि इसपर चलने के लिए हमें मोह-माया के बंधनों से आजाद होना पड़ता है| सुख और इससे जुड़ी सामग्री का त्याग करना पड़ता है|


प्रश्न. 8. मृग कस्तूरी को वन में क्यों ढूँढता फिरता है? 
उत्तरः
 कस्तूरी मृग की नाभि में होती है किन्तु इस बात से अनजान वह उसकी सुगन्ध से उन्मत्त होकर उसे वन में खोजता है।

प्रश्न. 9. मृग किसका प्रतीक है? 
उत्तरः
 मृग अज्ञानी जीव का प्रतीक है।

प्रश्न. 10. सच्चा भक्त किसे कहा गया है ? 
उत्तरः
 कबीर के अनुसार, सच्चा भक्त वह है जो प्रभु के विरह में घायल हो, जिसने प्रभु के प्रेम का अनुभव किया हो। जो प्रियतम के मर्म का ज्ञाता हो।

प्रश्न. 11. कबीर के अनुसार ईश्वर का निवास कहाँ है ? 
उत्तरः 
कबीर के अनुसार ईश्वर कण-कण में समाया हुआ है। वह प्रत्येक हृदय में रचा-बसा हुआ है। जैसा कि उन्होंने कहा है-ऐसे घटि-घटि राम हैं, दुनिया देखे नाँहि।

प्रश्न. 12. ईश्वर कण-कण में व्याप्त है पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तरः
 ईश्वर कण-कण में व्याप्त है पर हम उसे उसी प्रकार नहीं देख पाते हैं, जैसे कस्तूरी मृग अपनी नाभि में स्थित कस्तूरी को ढूँढ़ नहीं पाता और वह उसे (कस्तूरी को) वन-वन (जंगल-जंगल) खोजता फिरता है।

प्रश्न. 13. ईश्वर से साक्षात्कार की अनुभूति कब होती है ? 
उत्तरः हृदय से अहंकार समाप्त हो जाने पर ईश्वर से साक्षात्कार की अनुभूति होती है।

प्रश्न. 14. कवि ने किस अंधकार के मिटने की बात कही है ? 
उत्तरः
 कवि ने अज्ञान के अन्धकार के मिटने की बात कही है।

प्रश्न. 15. किस स्थिति में मनुष्य पर मंत्र के उपचार का लाभ नहीं होता ? 
उत्तरः जब मनुष्य ईश्वर के विरह में व्याकुल होता है तब उसे किसी भी मंत्र के उपचार से लाभ नहीं होता।