3. टोपी शुक्ला – Short Questions answer

प्रश्न 1: ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर बताइए कि इफ़्फ़न की दादी मिली-जुली संस्कृति में विश्वास क्यों रखती थीं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी नमाज़ व रोज़े की बड़ी पाबंद थीं, किंतु जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता के चेचक निकली तो वह उसके पलंग के पास एक पैर पर खड़ी हुई और उन्होंने माता का नाम लेकर कहा, “ माता, मोरे बच्चे को माफ़ करयो ।” उनकी ससुराल में उर्दू बोली जाती थी, किंतु वे पूरबी बोली ही बोलती थीं। कट्टर मौलवी परिवार में गाने-बजाने की रोक थी, किंतु इफ़्फ़न की छठी में उन्होंने खूब गाना बजाना किया था। इस सब बातों से सिद्ध होता है कि वे मिली-जुली संस्कृति पर विश्वास करती थीं ।

प्रश्न 2: इफ़्फ़न की दादी की मौत का समाचार सुनकर टोपी पर क्या प्रभाव पड़ा? टोपी ने इफ़्फ़न को क्या कहकर सांत्वना दी?
उत्तर:
 इफ़्फ़न की दादी की मौत का समाचार सुनकर टोपी का बालमन शोक से भर उठा। इफ़्फ़न तो उसी समय घर चला गया और टोपी जिमनेज़ियम में जाकर एक कोने में बैठकर रोने लगा। शाम को वह इफ़्फ़न के घर गया, तो एक दादी के न रहने से उसे सारा घर खाली – खाली सा लगा। इफ़्फ़न की दादी के प्रति उसके मन में बहुत प्रेम था, बदले में ऐसा ही प्रेम उसे उनसे भी प्राप्त हुआ था, किंतु कभी ऐसी ममता उसे अपनी दादी से नहीं मिली थी। इसी कारण उसने इफ़्फ़न को यह कहकर सांत्वना दी कि ‘तोरी दादी की जगह अगर हमरी दादी मर गई होती, त ठीक भया होता’ अर्थात उसकी यानी इफ़्फ़न की दादी की जगह उसकी दादी मर गई होतीं, तो ठीक होता ।

प्रश्न 3: टोपी और बूढ़ी नौकरानी दोनों में एक-दूसरे के प्रति सद्भाव होने का क्या कारण था ? इनके व्यवहार से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: 
घर में टोपी और बूढ़ी नौकरानी दोनों की ही दशा एक जैसी थी। दोनों को ही घर के छोटे-बड़े सब डाँट-फटकार लेते थे। बूढ़ी नौकरानी सीता को तो यह सब चुपचाप सह लेने का अनुभव था। इसी कारण जब भी टोपी किसी बात पर दादी या घर के अन्य सदस्य का विरोध करता और उसे माँ रामदुलारी से पिटाई खानी पड़ती, तब सीता उसे अपनी कोठरी में ले जाकर समझाया करती थी। सीता के आँचल में जाकर टोपी को भी सुकून मिलता था। इनके व्यवहार से हमें यह शिक्षा मिलती है कि पीड़ा या कष्ट की स्थिति में एक-दूसरे का सहारा बनने से एक संबल मिलता है। इस प्रकार व्यक्ति को लगता है कि कोई तो है जो हमारे साथ है और जिससे वह अपना दुख-दर्द बाँट सकता है।

प्रश्न 4: ठाकुर हरिनाम सिंह कौन था? उसके लड़कों ने टोपी शुक्ला से दोस्ती क्यों नहीं की? यह उनकी किस भावना का व्यंजक है?
उत्तर: 
ठाकुर हरिनाम सिंह को इफ़्फ़न के पिता के तबादले के बाद बनारस का नया कलेक्टर बनाया गया था। ठाकुर हरिनाम सिंह के लड़के इफ़्फ़न के समान सभ्य नहीं थे, उन्हें अपने पिता के कलेक्टर होने का घमंड था। इसी घमंडी मानसिकता के चलते उन्हें टोपी अपने किसी चपरासी के बेटे के समान लगा, उन्होंने दोस्ती करने आए टोपी के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया और बाद में अपने अलसेशियन कुत्ते से कटवा दिया। यह उनकी अपने आप को ऊँचा तथा दूसरों को तुच्छ समझने की दूषित भावना का व्यंजक है।

प्रश्न 5: टोपी के पिता को भी यह पसंद नहीं था कि टोपी इफ़्फ़न से दोस्ती रखे, पर उन्होंने इसका फ़ायदा कैसे उठाया?
उत्तर: 
टोपी के पिता और घर के अन्य सदस्यों को बिलकुल भी यह पसंद नहीं था कि टोपी किसी मुसलमान के लड़के से दोस्ती करे या उसके घर आए-जाए पर टोपी को जाति-धर्म से क्या लेना-देना था। टोपी के पिता ने जैसे ही जाना कि इफ्फ़न के पिता कलेक्टर हैं तो उन्होंने अपने क्रोध को दबाया और तीसरे दिन ही दुकान के लिए कपड़े और चीनी का परमिट ले आए।

प्रश्न 6: इफ़्फ़न की दादी को मरने से पहले कौन-सी वस्तुएँ याद आईं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी पूरा जीवन अपने मायके से जुड़ी यादों को दिल में सहेजे रही थीं। इसलिए मरने से पहले उन्हें अपने मायके की कच्ची हवेली, अपने द्वारा लगाया गया आम का बीजू पेड़ आदि याद आए । वे अपने मायके की मिट्टी से भावात्मक रूप से जुड़ी थीं। इसी समय जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता सय्यद मुरतुज़ा हुसैन ने उनसे यह पूछा कि मरने के बाद लाश करबला जाएगी या नज़फ़, तो इस बात पर वे भड़ककर कहने लगीं कि यदि उससे उनकी लाश न सँभाली जाए, तो उनके मायके भेज दे।

प्रश्न 7: टोपी ने मुन्नी बाबू की किस असलियत से घर वालों से छिपाकर रखा था, और क्यों?
उत्तर: 
एक बार टोपी ने मुन्नी बाबू को रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाते देख लिया था, इस बात को छुपाने के लिए मुन्नी बाबू ने टोपी को इकन्नी की रिश्वत भी दी थी। इस रिश्वत का तो टोपी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, किंतु टोपी चुगलखोर नहीं था इसीलिए उसने अपने घरवालों को इसकी जानकारी नहीं दी थी।

प्रश्न 8: कैसे कहा जा सकता है कि इफ़्फ़न की दादी मिली-जुली संस्कृति में विश्वास रखने वाली महिला थीं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी नमाज़ व रोज़े की बड़ी पाबंद थीं, किंतु जब उनके बेटे यानी इफ़्फ़न के पिता के चेचक निकली तो वह उसके पलंग के पास एक पैर पर खड़ी हुई और उन्होंने माता का नाम लेकर कहा, “ माता, मोरे बच्चे को माफ़ करयो ।” उनकी ससुराल में उर्दू बोली जाती थी, किंतु वे पूरबी बोली ही बोलती थीं। कट्टर मौलवी परिवार में गाने-बजाने की रोक थी, किंतु इफ़्फ़न की छठी में उन्होंने खूब गाना बजाना किया था। इस सब बातों से सिद्ध होता है कि वे मिली-जुली संस्कृति पर विश्वास करती थीं ।

प्रश्न 9: इफ़्फ़न की दादी एक ज़मींदार की बेटी थीं। अपने ससुराल के वातावरण में अपने को ढालने में उन्हें किन असुविधाओं का सामना करना पड़ा? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी एक ज़मींदार की बेटी थीं। उनके मायके में सभी बहुत उदार थे। धार्मिक कट्टरता कहीं दूर-दूर तक नहीं थी, जबकि उनकी ससुराल का वातावरण धार्मिक कट्टरता से भरा था । यहाँ खाने-पीने से लेकर रीति-रिवाजों की पाबंदी थी। वे अपने मायके में खूब घी पिलाई काली हाँडी में जमाई गई दही जी भरकर खा लेती थीं, किंतु मौलवी परिवार में वे ऐसा नहीं कर पाती थीं। वे पूरबी बोलती थीं, जबकि मौलवी परिवार में उर्दू बोली जाती थी तथा पूरबी बोली को अनपढ़ व गँवारों की भाषा माना जाता था । इसी कारण ससुराल में उनकी आत्मा सदा बेचैन रही तथा वहाँ के वातावरण में वे कभी पूरी तरह नहीं ढल सकीं।

प्रश्न 10: इफ़्फ़न की दादी की मौत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: 
टोपी को अपनी दादी से कभी अपनापन नहीं मिला था, वे उसे बात-बात पर अपमानित करती रहती थीं, जबकि इफ़्फ़न की दादी से उसे भरपूर दुलार मिलता था और उनका एक-एक शब्द उसे शक्कर का खिलौना प्रतीत होता था । वह इफ़्फ़न के घर जाकर उन्हीं के पास बैठता था तथा अपनत्व व ममता का असीम सुख प्राप्त किया करता था। इसी आत्मिक लगाव के कारण इफ़्फ़न की दादी की मौत के बाद टोपी को उसका घर खाली खाली – सा लगा।

प्रश्न 11: इफ़्फ़न की दादी टोपी को अपने ही परिवार के सदस्यों के उपहास से किस तरह बचाती?
उत्तर: 
टोपी जबे इफ्फ़न के घर जाता तो वह इफ्फ़न की दादी के पास ही बैठने की कोशिश करता। वह इफ्फ़न की अम्मी और उसकी बाजी के पास न जाता न बैठता। वे दोनों प्रायः टोपी को उसकी बोली के लिए छेड़ती और हँसती। जब बात बढ़ने लगती तो दादी ही बीच-बचाव करती और कहती कि तू उधर जाता ही क्यों है। इस तरह वे टोपी को अपने परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए उपहास से टोपी को बचाती थी।

प्रश्न 12: टोपी पढ़ने में बहुत तेज़ था, फिर भी वह दो बार फ़ेल हो गया। उसकी पढ़ाई में क्या बाधाएँ आ जाती थीं?
उत्तर: 
टोपी पढ़ने में बहुत तेज़ था, फिर भी वह दो बार फेल हो गया क्योंकि पहले साल उसे पढ़ने ही नहीं दिया गया। वह जब भी पढ़ने बैठता, उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम निकल आता था या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती थी, जो घर के नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी और रामदुलारी रही सही कसर उसका छोटा भाई भैरव उसकी कॉपियों के पन्नों से हवाई जहाज़ बनाकर पूरा कर डालता था तथा दूसरे वर्ष परीक्षा के दिनों में उसे टाइफाइड हो गया था।

प्रश्न 13: टोपी को अध्यापक घृणा की दृष्टि से क्यों देखते थे? अंग्रेज़ी के अध्यापक ने उसे एक दिन क्या कहकर अनुत्साहित किया और क्यों?
उत्तर:
 टोपी के अध्यापक उसके नवीं कक्षा में फेल हो जाने के कारण उसे बुद्ध समझने लगे थे। उन्होंने एक सच्चे अध्यापक का कर्तव्य निभाते हुए उसकी परेशानियों को समझकर उन्हें दूर करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उससे चिढ़कर घृणा करने लगे। उनके मन में टोपी के प्रति ज़रा सी भी सहानुभूति नहीं थी । अंग्रेज़ी के अध्यापक ने एक बार उसे यह कहकर अनुत्साहित किया कि वह जवाब देने के लिए हाथ न उठाए, वह दो साल से यही पुस्तक पढ़ रहा है, तो उसे तो सारे जवाब ज़बानी याद हो गए होंगे, उसके सहपाठियों को अगले वर्ष हाईस्कूल का इम्तिहान देना है, उससे तो वे अगले साल भी पूछ लेंगे। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वे एक अच्छे अध्यापक नहीं थे, वे टोपी से घृणा करते थे और टोपी के द्वारा बार-बार उत्तर देने के लिए हाथ उठाने से वे झल्लाहट से भर उठे थे।

प्रश्न 14: इफ़्फ़न के पूर्वजों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर:
 इफ़्फ़न के दादा परदादा बहुत प्रसिद्ध मौलवी थे। वे काफ़िरों के देश में पैदा हुए और काफ़िरों के देश में मरे। वे यह वसीयत करके मरे कि लाश करबला ले जाई जाए। उनकी आत्मा ने इस देश में एक साँस तक न ली। उस खानदान में जो पहला हिंदुस्तानी बच्चा पैदा हुआ वह बढ़कर इफ़्फ़न का बाप हुआ। इसके बाद इफ़्फ़न और अन्य सदस्यों के रूप में यह परिवार भारत को होकर रह गया।

प्रश्न 15: टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही ? ‘टोपी शुक्ला’ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर:
 इफ़्फ़न की दादी स्नेहिल स्वभाव की थी। वह बच्चों से अत्यधिक स्नेह करती थीं। वह इफ़्फ़न के साथ टोपी को भी अपने पास बैठाकर कहानियाँ सुनाती थीं । यहाँ तक कि इफ़्फ़न के परिवार का कोई सदस्य कभी टोपी को उसकी बोली पर छेड़ता जब भी वह टोपी का ही पक्ष लेती थीं। टोपी की भाँति वह भी पूरबी बोली बोलती थीं जिससे टोपी को उनसे अपनेपन का एहसास होता था। जबकि टोपी की दादी का स्वभाव अच्छा न था । वह हमेशा टोपी को डाँटती – फटकारती रहती थीं। वह परंपराओं में बँधे होने के कारण कट्टर हिंदू थीं। वह टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने से भी रोकती थीं। इन्हीं सब कारणों से टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात कही ।

प्रश्न 16: टोपी एक दिन के लिए ही सही अपने बड़े भाई मुन्नी बाबू से क्यों बड़ा होना चाहता था?
उत्तर: 
इफ़्फ़न से दोस्ती करने के कारण जब टोपी की पिटाई हो रही थी तभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू ने दादी से शिकायत करते हुए कहा था कि यह (टोपी) एक दिन रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खा रहा था तो टोपी को बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वह कबाब को हाथ तक नहीं लगाता है। कबाब तो स्वयं मुन्नी बाबू ने खाया था। यह बात घर न बताने के लिए उसने इकन्नी रिश्वत दी थी। इसका मजा चखाने के लिए टोपी मुन्नी बाबू से बड़ा होना चाहता था।

प्रश्न 17: कलेक्टर साहब के लड़के टोपी के दोस्त क्यों नहीं बन सके?
उत्तर:
 कलेक्टर साहब के लड़के टोपी के दोस्त इसलिए नहीं बन सके क्योंकि वे तीनों बहुत घमंडी थे। उन्हें अपने पिता के पद तथा आर्थिक स्थिति पर गुमान था । वे बार-बार जानबूझकर टोपी से उसके पिता के पद के विषय में पूछते थे और वह भी अपमानजनक भाषा में। एक बार तो उन्होंने टोपी पर अपना कुत्ता छोड़ दिया था। उन्हें मानवीय संबंधों और दोस्ती की गरिमा का बिलकुल ज्ञान नहीं था ।

प्रश्न 18: टोपी ने दुबारा कलेक्टर साहब के बँगले की ओर रुख क्यों नहीं किया? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
दुबारा टोपी कलेक्टर साहब के बँगले की ओर नहीं गया क्योंकि नए कलेक्टर साहब के बेटों ने टोपी को अपने कुत्ते से कटवा दिया था और टोपी को पेट में चौदह इंजेक्शन लगवाने पड़े थे तथा कलेक्टर के बेटों ने टोपी को मारा भी था ।

प्रश्न 19: अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की दादी की इच्छा पूरी क्यों नहीं हो पाई ? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न की दादी के पति एक मौलवी थे और मौलवी के घर गाना-बजाना नहीं हो सकता था। दादी के अनुसार उनके पति हर अवसर पर बस मौलवी ही बने रहते थे । यही कारण था कि वे अपने बेटे की शादी में गाना-बजाना नहीं कर पाईं।

प्रश्न 20: टोपी मुन्नी बाबू की किस असलियत से परिचित था? उसने इसके बारे में घरवालों को जानकारी क्यों नहीं दी ? यह भी बताइए कि मुन्नी बाबू से टोपी की अनबन होने का क्या कारण था?
उत्तर: 
टोपी मुन्नी बाबू की इस असलियत से परिचित था कि वे कबाब खाते हैं क्योंकि उसने एक बार मुन्नी बाबू को रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाते हुए देख लिया था । इसके लिए मुन्नी बाबू ने उसे इकन्नी दी थी कि वह यह बात घर जाकर न कहे। ऐसा नहीं है कि टोपी ने इकन्नी को रिश्वत के रूप में स्वीकार करके मुन्नी बाबू की असलियत को घरवालों से छिपाकर रखा था, बल्कि बात यह थी कि वह भ्रातृभाव व भोलेपन के कारण मुन्नी बाबू की चुगली नहीं कर सका था । मुन्नी बहुत चतुर था। इस कारण जब ‘अम्मी’ संबोधन पर दादी ने टोपी को डाँटना शुरू किया, तो उसको लगा कि कहीं टोपी कबाब वाली बात दादी को न बता दे। इसी कारण उसने पहले ही झूठा आरोप टोपी पर लगा दिया कि उसने टोपी को एक दिन कबाब खाते हुए देखा है। यह आरोप सरासर झूठ था, जिसका टोपी विरोध कर रहा था। इसी कारण मुन्नी बाबू और टोपी में अनबन हुई थी।

2. सपनों के–से दिन – Short Questions answer

प्रश्न 1: पी०टी० अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: 
पी०टी० साहब बहुत ही सख़्त व अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे । विद्यालय में वे ज़रा-सी गलती होने पर विद्यार्थियों की चमड़ी उधेड़ देते थे । विद्यालय की प्रार्थना सभा में वे बच्चों को पंक्तिबद्ध खड़ा करते थे और यदि कोई बच्चा थोड़ी-सी भी शरारत करता, तो उसकी खाल खींच लेते थे । स्काउट परेड के आयोजन में इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती थी। बच्चों को अपने मार्गदर्शन में कुशलतापूर्वक परेड करवाते थे और परेड के समय बच्चों को ‘शाबाशी’ भी दे देते थे इसलिए बच्चों को उनकी यही ‘शाबाशी’ फ़ौज के तमगों-सी लगती थी और कुछ समय के लिए उनके मन में पी०टी० साहब के प्रति आदर का भाव जाग जाता था ।

प्रश्न 2: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि बच्चों की रुचि पढ़ाई में क्यों नहीं थी? माँ-बाप को उनकी पढ़ाई व्यर्थ क्यों लगती थी?
उत्तर: 
‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर बच्चों की रुचि पढ़ाई-लिखाई में इसलिए नहीं थी क्योंकि विद्यालय में उन्हें बुरी तरह दंडित किया जाता था। ज़रा-सी गलती होने पर उनकी चमड़ी उधेड़ दी जाती थी तथा उन्हें नई कक्षा में जाने पर भी पुरानी पुस्तकें व कॉपियाँ दी जाती थीं, जिनसे आती गंध नई कक्षा की सारी उमंग दूर कर देती थी। माँ-बाप पढ़ाई के प्रति जागरूक नहीं थे और सोचते थे कि वे छह महीने में पंडित घनश्याम दास से बच्चे को दुकान का हिसाब रखने की लिपि सिखवा देंगे, इसी कारण उन्हें बच्चों की पढ़ाई व्यर्थ लगती थी ।

प्रश्न 3: पी०टी० साहब की चारित्रिक विशेषताओं और कमियों का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए ।
उत्तर: 
‘सपनों के से दिन’ पाठ में पी०टी० साहब अनुशासनप्रिय, पक्षी प्रेमी, निश्चित व बेहद सख़्त अध्यापक के रूप में पाठकों के सामने आते हैं। वे अनुशासनप्रिय थे और चाहते थे कि स्कूल का प्रत्येक बच्चा अनुशासित रहे। वे पक्षियों से बहुत प्रेम करते थे, उन्होंने तोते पाले हुए थे और पूरा दिन वे तोतों को बादाम की गिरियाँ भिगो-भिगोकर खिलाते तथा उनसे बातें करते रहते थे। मुअत्तल होने के बाद भी उनके चेहरे पर ज़रा-सी भी चिंता नहीं दिखाई दी थी। इन सब विशेषताओं के अतिरिक्त उनके चरित्र में बच्चों के प्रति बेहद सख्ती की भावना रखने की कमी दिखाई देती है । वे ज़रा सी ग़लती हो जाने पर बच्चों की चमड़ी उधेड़ देते थे तथा कई बार बच्चों को ठुड्डों तथा बैल्ट के बिल्ले से मारा करते थे ।

प्रश्न 4: मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए जो तरीका था, वह आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन-मूल्यों के अनुसार उचित है या अनुचित ? तर्कसहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
 मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए बुरी तरह शारीरिक दंड देने का तरीका था, यह तरीका आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन मूल्यों के अनुसार बिल्कुल भी उचित नहीं है। इससे पुराने ज़माने के समान आज के बच्चों के मन में भी स्कूल के प्रति भय तथा पढ़ाई के प्रति अरुचि का भाव आ सकता है । आज की शिक्षा-व्यवस्था में विद्यार्थियों को अनुशासन जैसा जीवन-मूल्य सिखाने के लिए मनोवैज्ञानिक युक्तियों को अपनाने की व्यवस्था है। आज अध्यापक बच्चों को प्यार-दुलार के सहारे ही अनुशासित बनाने का प्रयास करते हैं ।

प्रश्न 5: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि पी०टी० साहब की ‘शाबाश’ बच्चों को फौज़ के तमगों-सी क्यों लगती थी?
उत्तर: 
पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज के तमगों-सी इसलिए लगती थी क्योंकि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे । वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी सी ग़लती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे, तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने फ़ौज के सारे लोग तमगे जीत लिए हों ।

प्रश्न 6: लेखक के बचपन के समय बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
अपने बचपन के दिनों में लेखक जिन बच्चों के साथ खेलता था, उनमें अधिकांश तो स्कूल जाते ही न थे और जो कभी गए भी वे पढ़ाई में अरुचि होने के कारण किसी दिन अपना बस्ता तालाब में फेंककर आ गए और फिर स्कूल गए ही नहीं। उनका सारा ध्यान खेलने में रहता था। इससे स्पष्ट है कि लेखक के बचपन के दिनों में बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।

प्रश्न 7: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के लेखक का मन पुरानी किताबों से क्यों उदास हो जाता है ?
उत्तर: 
लेखक का मूल पुरानी किताबों से इसलिए उदास हो जाता है क्योंकि लेखक को पुरानी किताबों से आती विशेष गंध उसे परेशान करती थी। आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर होने के कारण लेखक नई किताब नहीं खरीद पाता था । अन्य विद्यार्थियों की तरह लेखक में भी नई किताबों से पढ़ने की उमंग और उत्साह होता था, परंतु पुरानी किताबों को देखकर वह उदास हो जाता था।

प्रश्न 8: ख़ुशी से जाने की जगह न होने पर भी, लेखक को कब और क्यों स्कूल जाना अच्छा लगने लगा ?
उत्तर: 
लेखक खुशी से स्कूल जाना नहीं चाहता था । लेखक के लिए वह खुशी से जाने वाला स्थान नहीं था क्योंकि शिक्षकों की डाँट फटकार और पिटाई के कारण लेखक के मन में एक भय सा बैठ गया था इसके बावजूद जब उनके पी०टी० सर स्काउटिंग का अभ्यास करवाते थे, विद्यार्थियों को पढ़ाने-लिखने के बदले उनके हाथों में नीली-पीली झंडियाँ पकड़ा देते थे और विद्यार्थियों से परेड करवाते थे । पी०टी० साहब के संचालन में विद्यार्थी लेफ्ट राइट परेड करते हुए अपने आपको किसी फ़ौजी से कम नहीं समझते। इस दौरान लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगता था ।

प्रश्न 9: ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति बच्चों की क्या धारणा बन जाती है?
उत्तर: 
यह सत्य है कि मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति बच्चों के मन में एक भय बैठ जाता है। बच्चों के मन में विद्यालय के प्रति अरुचि उत्पन्न हो जाती है और पढ़ाई छोड़ देने की भावना भी पनपने लगती है। उनके मन में शिक्षक के प्रति घृणा का भाव भी उत्पन्न होने लगता।

प्रश्न 10: ‘सपनो के से दिन’ पाठ के लेखक गुरुदयाल सिंह एवं उनके साथियों को पीटी साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमग़ों जैसी क्यों लगती थी ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज की तमगों-सी इसलिए लगती थी कि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे। वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी-सी गलती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने फ़ौज के सारे तमगे जीत लिए हों ।

प्रश्न 11: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि स्काउट परेड करते समय लेखक स्वयं को ‘महत्त्वपूर्ण आदमी’ फ़ौजी जवान क्यों समझता था?
उत्तर: 
परेड करना बच्चों को बहुत अच्छा लगता था । मास्टर प्रीतमचंद लेखक जैसे स्काउटों को परेड करवाते थे तो इन बच्चों को बहुत अच्छा लगता था । जब प्रीतमचंद सीटी बजाते हुए बच्चों को मार्च करवाते थे, राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अबाउट टर्न कहते थे। तब बच्चे छोटे-छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ करते हुए ठक-ठककर अकड़कर चलते थे, तो उन्हें ऐसा लगता था मानो वे विद्यार्थी नहीं, बल्कि फ़ौजी जवान हों । धुली वर्दी, पॉलिश किए बूट और जुर्राबों को पहनकर बच्चे फ़ौजी जैसा महसूस करते थे।

प्रश्न 12: गरमी की छुट्टियों के पहले और आखिरी दिनों में लेखक ने क्या अंतर बताया है?
उत्तर: 
लेखक ने बताया है कि तब गरमी की छुट्टियाँ डेढ़-दो महीने की हुआ करती थीं। छुट्टियों के शुरू के दो-तीन सप्ताह तक बच्चे खूब खेल-कूद किया करते थे। वे सारा समय खेलने में बिताया करते थे। छुट्टियों के आखिरी पंद्रह-बीस दिनों में अध्यापकों द्वारा दिए गए कार्य को पूरा करने का हिसाब लगाते थे और कार्य पूरा करने की योजना बनाते हुए उन छुट्टियों को भी खेलकूद में बिता देते थे।

प्रश्न 13: फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से क्यों काँप उठते थे? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए ।
उत्तर: 
चौथी श्रेणी में मास्टर प्रीतमचंद बच्चों को फ़ारसी पढ़ाते थे । वे स्वभाव से काफ़ी सख्त थे। अगर बच्चे उनकी आशाओं पर पूरे नहीं उतरते थे, तो वे बच्चों को कड़ी सजा देते थे। बच्चों के मन में जो उनका भय समाया हुआ था उसके कारण फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे काँप उठते थे। फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से इसलिए काँप उठते थे क्योंकि मास्टर प्रीतमचंद ने फ़ारसी का शब्द रूप याद करके न लाने पर उनकी बुरी तरह पिटाई की थी, जबकि यह देखकर हेडमास्टर शर्मा जी ने उन्हें मुअत्तल भी कर दिया था, फिर भी बच्चों के मन में डर होने के कारण वे सोचते थे कि मुअत्तल होने के बावजूद कहीं मास्टर प्रीतमचंद उन्हें पढ़ाने के लिए न आ जाएँ। उनका यह डर तब समाप्त होता था जब मास्टर नौहरिया राम जी या फिर हेडमास्टर जी कक्षा में आ जाते थे।

प्रश्न 14: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर मास्टर प्रीतमचंद के व्यवहार की उन बातों का उल्लेख कीजिए, जिनके कारण विद्यार्थी उनसे नफ़रत करते थे।
उत्तर:
 पी०टी० साहब की शाबाश बच्चों को फ़ौज की तमगों सी इसलिए लगती थी कि बच्चे इसे अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि मानते थे । वस्तुतः पी०टी० साहब बड़े क्रोधी स्वभाव के थे और थोड़ी-सी गलती पर भी वे चमड़ी उधेड़ने की कहावत को सच करके दिखा देते थे। ऐसे कठोर स्वभाव वाले पी०टी० साहब जब बच्चों को शाबाश कहते थे, तो बच्चों को ऐसा लगता था मानो उन्होंने किसी फ़ौज के सारे तमगे जीत लिए हैं ।

प्रश्न 15: ‘सपनों के से दिन’ कहानी के आधार पर लिखिए कि छुट्टियों में लेखक कहाँ जाया करता था और वहाँ उसकी दिनचर्या क्या रहती थी।
उत्तर: 
अपने स्कूल की छुट्टियों में लेखक अपनी नानी के घर जाया करता था । लेखक की नानी उसे बहुत प्यार करती थी। वह ननिहाल के छोटे से तालाब में जाकर दोपहर तक नहाया करता था । नानी के घर दूध, घी खूब खाने को मिलता था। वहाँ दिन भर खेलना, खाना और नहाने के सिवा और कोई काम मक्खन, न होता था ।

प्रश्न 16: छात्रों के नेता ओमा के सिर की क्या विशेषता थी? ‘सपनों के से दिन’ के आधार पर बताइए ।
उत्तर: 
ओमा लेखक के बचपन का मित्र था । वे दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे । ओमा बहुत शरारती छात्र था। वह दूसरे विद्यार्थियों को मारता पीटता था और वह गंदी-गंदी गालियाँ भी दिया करता था । वह अत्यंत अनुशासनहीन छात्र था। वह बहुत ताकतवर भी था । वह चंचल स्वभाव का बालक था, जिसे पढ़ना-लिखना अच्छा नहीं लगता था। कक्षा में शिक्षक द्वारा दिए गए काम को ओमा कभी पूरा नहीं कर पाता था । शिक्षक के द्वारा पिटाई खाने को वह आसान समझता था । उनकी पिटाई का उस पर कोई असर नहीं पड़ता था क्योंकि उसका शरीर बहुत मज़बूत था, उसका ‘सिर’ भी बहुत बड़ा था । वह लड़ाई में ‘सिर’ से ही वार करता था इसलिए बच्चे ‘ओमा’ को ‘रेल – बंबा’ कहकर पुकारते थे।

प्रश्न 17: पीटी मास्टर प्रीतमचंद को देखकर बच्चे क्यों डरते थे?
उत्तर: 
पीटी मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल के समय में कभी भी हमने मुसकराते या हँसते न देखा था। उनका ठिगना कद, दुबला पतला परंतु गठीला शरीर, माता के दागों से भरा चेहरा और बाज-सी तेज आँखें, खाकी वरदी, चमड़े के चौड़े पंजों वाले बूट-सभी कुछ ही भयभीत करने वाला हुआ करता। उनका ऐसा व्यक्तित्व बच्चों के मन में भय पैदा करता और वे डरते थे।

प्रश्न 18: हेडमास्टर ने प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?
उत्तर:
 हेडमास्टर शर्मा जी ने देखा कि प्रीतमचंद ने छात्रों को मुरगा बनवाकर शारीरिक दंड दे रहे हैं तो वे क्रोधित हो उठे। उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश दिया। उन्होंने प्रीतमचंद के निलंबन का आदेश रियासत की राजधानी नाभा भेज दिया। वहाँ के शिक्षा विभाग के डायरेक्टर हरजीलाल के आदेश की मंजूरी मिलना आवश्यक था। तब तक प्रीतमचंद स्कूल नहीं आ सकते थे।

प्रश्न 19: हेडमास्टर शर्मा जी का छात्रों के साथ कैसा व्यवहार था?
उत्तर: 
हेडमास्टर शर्मा जी अनुशासन प्रिय परंतु विनम्र व्यक्ति थे। वे बच्चों को मारने-पीटने में विश्वास नहीं रखते थे। वे बहुत प्रेम से छात्रों को पढ़ाते थे और नाराज़गी भी आँखों से ही प्रकट करते थे। बहुत गुस्सा होने पर गाल पर हल्की-सी चपत लगाकर बच्चों को सुधार देते थे । वे क्रूरता से कोसों दूर थे और इसी कारण मास्टर प्रीतमचंद की बर्बरता वे सहन नहीं कर सके और उन्होंने तुरंत प्रभाव से विद्यालय से निकलवा दिया। वे एक अच्छे प्रशासक, गुरु तथा उदारमना थे।

प्रश्न 20: ग़रीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना क्यों कठिन था ? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 
ग़रीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना इसलिए कठिन था क्योंकि एक तो निर्धनता ही सबसे बड़ी बाधा थी। शुल्क, गणवेश आदि खरीदने के लिए ऐसे परिवार पैसे व्यय नहीं करते थे। दूसरे बच्चों को ही पढ़ाई में रुचि नहीं थी और न ही परिवार वाले पढ़ाई की अनिवार्यता मानते और समझते थे। बच्चों के थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें किसी पारिवारिक व्यवसाय, कहीं हिसाब-किताब लिखने आदि में झोंक दिया जाता था।

1. हरिहर काका – Short Questions answer

प्रश्न 1: हरिहर काका को पुलिस सुरक्षा क्यों प्रदान की गई?
उत्तर:
 हरिहर काका पर दो बार आक्रमण किया गया था, जिसमें बाल-बाल उनकी जान बची। एक बार ठाकुरबारी के साधु-संतों ने हरिहर काका का अपहरण कर लिया था और जान से मारने की कोशिश की। इसी प्रकार अपनी ज़मीन भाइयों के नाम नहीं करने पर उनके सगे भाइयों ने उन्हें कह दिया कि वे हरिहर को मारकर ज़मीन में गाड़ देंगे। अगर समय पर पुलिस नहीं आती, तो शायद हरिहर काका की जान भी जा सकती थी । हरिहर काका की जान की सुरक्षा व अपहरण से बचाने के लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई।

प्रश्न 2: लेखक ठाकुरबारी से घनिष्ठ संबंध क्यों न बना सका?
उत्तर: 
लेखक मन बहलाने के लिए कभी-कभी ठाकुरबारी में जाता था लेकिन वहाँ के साधु-संत उसे फूटी आँखों नहीं सुहाते। वे काम-धाम करने में कोई रुचि नहीं लेते हैं। ठाकुर जी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूड़ी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें अगर कुछ आता है तो सिर्फ बात बनाना आता है। ठाकुरबारी के साधु-संतों की अकर्मण्यता और उनकी बातूनी आदतों के कारण लेखक ठाकुरबारी से अपना घनिष्ठ संबंध नहीं बना सकता।

प्रश्न 3: हरिहर काका की दयनीय स्थिति का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर:
 हरिहर काका की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। इस भरी दुनिया में वे अकेले रहने लगे। उनके मन में भय, उदासी, हताशा व निराशा ने घर कर लिया था। उनका एक बार अपहरण भी कर लिया गया था। उनके भाइयों ने और ठाकुरबारी के साधु, संतों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा भी था। उनको जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इसके अतिरिक्त उनकी दो-दो पत्नियाँ स्वर्ग सिधार चुकी थी। वे निःसंतान थे। इस भरी दुनिया में वे अकेले रहने पर विवश थे। वे मज़बूर व लाचार थे, असहाय थे।

प्रश्न 4: हरिहर काका ने सबसे बात करना बंद क्यों कर दिया था?
उत्तर:
 हरिहर काका के साथ उनके भाइयों ने और परिवार के अन्य सदस्यों ने दुर्व्यवहार किया था, हरिहर काका को जान से मारने की कोशिश की थी। हरिहर काका को जान से मारने की कोशिश की थी। हरिहर काका को जिस महंत पर विश्वास था उसने भी काका के विश्वास को तोड़ा था । हरिहर काका पूरी तरह सदमें में थे। उनके मन में रिश्तों के प्रति कडुवाहट और अविश्वास की भावना घर कर गई थी इसीलिए काका ने सबसे बात करना बंद कर दिया था। वे उदास परेशान व निराश रहने लगे थे।

प्रश्न 5: हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर किस तरह उतारा? उनकी इस प्रतिक्रिया को आप कितना उचित समझते हैं?
उत्तर:
 हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर उतारते हुए कहा, ‘समझ रही हो कि मुफ्त में खिलाती हो, तो अपने मन से यह बात निकाल देना। मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है। उसमें तो मैं दो-चार नौकर रख लूं, आराम से खाऊँ, तब भी कमी नहीं होगी। मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ। मेरे धन पर तो तुम सब मौज कर रही हो, लेकिन अब मैं तुम सब को बताऊँगा।” उनकी इस प्रतिक्रिया को उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे बात बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना अधिक थी।

प्रश्न 6: ठाकुरबारी के विषय में लोगों के क्या विचार थे?
उत्तर: 
ठाकुरबारी के विषय में लोगों के मन में बहुत अंधविश्वास भरा था। लोगों को लगता था कि अगर उनके घर पुत्र का जन्म हुआ है तो ठाकुर जी की कृपा से । अगर मुकदमों में जीत हुई है तो ठाकुर जी की कृपा से। अगर उनके खेतों में अच्छी फ़सल आई है तो वह भी ठाकुर जी की कृपा से ही आई है। अगर ‘लड़की’ की शादी तय हुई है तो वह ठाकुर जी की कृपा से ही तय हुई है। लोगों के खलिहान में फ़सल आने पर प्रथम फ़सल ठाकुर जी के नाम ही कर दिया जाता था ।

प्रश्न 7: परिवार वालों से हरिहर काका के असंतुष्ट होने की बात महंत को कैसे पता चली? यह सुनकर महंत ने क्या किया?
उत्तर: 
हरिहर काका जिस वक्त घर की औरतों को खरी-खोटी सुना रहे थे, उसी वक्त ठाकुरबारी के पुजारी जी उनके दालान पर ही विराजमान थे। वार्षिक हुमाध के लिए वह घी और शकील लेने आए थे। उन्होंने लौटकर महंत जी को विस्तार के साथ सारी बात बताई। उनके कान खड़े हो गए। यह सुनकर हाथ आए अवसर का लाभ उठाने के लिए महंत जी ने टीका तिलक लगाया और कंधे पर रामनामी लिखी चादर डाल ठाकुरबारी से चल पड़े।

प्रश्न 8: हरिहर काका का दिल जीतने के लिए ठाकुरबारी के महंत जी ने क्या-क्या उपाय अपनाया?
उत्तर: 
हरिहर काका का दिल जीतने के लिए महंत जी ने स्वादिष्ट भोजन खिलाने और धर्म-चर्चा करने जैसे उपाय अपनाए। उन्होंने रात में हरिहर काका को भोग लगाने के लिए जो मिष्टान्न और व्यंजन दिए, वैसे उन्होंने कभी नहीं खाए थे। घी टपकते मालपुए, रस बुनिया, लड्डू, छेने की तरकारी, दही, खीर…। इन्हें पुजारी जी ने स्वयं अपने हाथों से खाना परोसा था। पास में बैठे महंत जी धर्म-चर्चा से मन में शांति पहुँचा रहे थे।

प्रश्न 9: हरिहर काका परिवार वालों का बदलता व्यवहार आपको क्या सोचने के लिए विवश करता है? कहानी के आधार पर बताएँ ।
उत्तर:
 हरिहर काका के परिवार वालों का बदलता व्यवहार समाज की संवेदनहीनता एवम् स्वार्थपरता का परिचय देता है। आधुनिक समाज में रिश्तों का महत्त्व बहुत कम हो गया है। लोगों के मन में धन के प्रति लालच की भावना बढ़ गई है। हमारे चारों तरफ़ अविश्वास का वातावरण बढ़ रहा है। इसलिए हमें सावधान रहने की आवश्यकता है । हरिहर काका की भाँति रह रहे बड़े बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता होने की आवश्यकता है।

प्रश्न 10: हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में हो रही देरी के बारे में महंत जी ने क्या अनुमान लगाया? इसके लिए उन्हें क्या विकल्प नजर आया?
उत्तर:
 हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में जो देरी हो रही थी, उसके बारे में महंत जी ने यह अनुमान लगाया कि हरिहर धर्म-संकट में पड़ गया है। एक ओर वह चाहता है कि ठाकुर जी को लिख दें, किंतु दूसरी ओर भाई के परिवार के माया-मोह में बँध जाता है। इस स्थिति में हरिहर का अपहरण कर जबरदस्ती उससे लिखवाने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं। बाद में हरिहर स्वयं राजी हो जाएगा।

प्रश्न 11: उम्र का फासला भी आत्मीय संबंधों के बीच बाधा नहीं बनता – कथावाचक और हरिहर काका के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
 कथावाचक और हरिहर काका के बीच बड़े ही मधुर व आत्मीय संबंध थे । हरिहर काका के प्रति कथावाचक की दोस्ती और कथावाचक के प्रति हरिहर काका का अनन्य प्रेम यह स्पष्ट कर देता है कि उम्र का फासला आत्मीय संबंधों के बीच बाधा नहीं बन सकता। हरिहर काका लेखक को (जब वह छोटा था) अपने कंधों पर बैठा कर घुमाते थे । वे दोनों आपस में खुल कर बातें करते थे।

प्रश्न 12: ‘यह कहानी अंध भक्ति और ठाकुरबारी के चरित्र को उजागर करती है’ सोदाहरण स्पष्ट करें।
उत्तर: 
लोग ठाकुरबारी के प्रति मान्यता रखते थे कि उनकी कृपा से ही लोगों को पुत्र की प्राप्ति होगी, मुकद्दमों में जीत होगी, अच्छी फसल होगी, लड़की की शादी अच्छे घर में होगी, लड़कों को नौकरी मिलेगी आदि अंधविश्वासों से लोग भरे हुए थे। उनका मानना था कि ठाकुरबारी में प्रवेश करते ही उनके सारे पाप धुल जाते हैं और वे पवित्र हो जाते हैं। जबकि सत्य यह था कि ठाकुरबारी के साधु-संत कोई काम-धाम नहीं करते थे, दोनों जून हलवा पूड़ी खाते थे, दिन भर बातें बनाते थे और आराम से पड़े रहते थे।

प्रश्न 13: महंत जी ने हरिहर काका का अपहरण किस तरह करवाया?
उत्तर:
 हरिहर काका से उनकी जमीन का वसीयत करवाने के लिए महंत जी ने उनके अपहरण का रास्ता अपनाया। इसके लिए आधी रात के आसपास ठाकुरबारी के साधु-संत और उनके पक्षधर भाला, आँडासा और बंदूक से लैस एकाएक हरिहर काका के दालान पर आ धमके। हरिहर काका के भाई इस अप्रत्याशित हमले के लिए तैयार नहीं थे। इससे पहले कि वे जवाबी कार्रवाई करें और गुहार लगाकर अपने लोगों को जुटाएँ, तब तक ठाकुरबारी के लोग उनको पीठ पर लादकर चंपत हो गए।

प्रश्न 14: हरिहर काका को छुड़ाने में असफल रहने पर उनके भाई क्या सोचकर पुलिस के पास गए?
उत्तर: 
हरिहर काका के भाई उन्हें ठाकुरबारी से छुड़ा पाने में असफल रहे तो वे यह सोचकर पुलिस के पास गए कि जब वे पुलिस के साथ ठाकुरबारी पहुँचेंगे तो ठाकुरबारी के भीतर से हमले होंगे और साधु-संत रँगे हाथों पकड़ लिए जाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ठाकुरबारी के अंदर से एक रोड़ा भी बाहर नहीं आया। शायद पुलिस को आते हुए उन्होंने देख लिया था।

प्रश्न 15: भाइयों की किन बातों से हरिहर काका का दिल पसीज गया और वे ठाकुरबारी से घर लौट आए?
उत्तर:
 ठाकुरबारी में एक सुंदर कमरे में एक सुंदर पलंग पर बैठे हरिहर काका सेवकों से घिरे हुए थे। उसी समय सुबह तड़के ही तीनों भाई ठाकुरबारी जाकर हरिहर काका के पैर पकड़कर रोने लगे। अपनी पत्नियों की गलती के लिए माफ़ी माँगी तथा दंड देने की बात कही। साथ ही खून के रिश्ते की भी माया फैलाई, जिससे हरिहर काका का दिल पसीज गया और वे ठाकुरबारी से घर लौट आए।

प्रश्न 16: तीसरी शादी करने से हरिहर काका ने क्यों मना कर दिया?
उत्तर:
 तीसरी शादी करने से हरिहर काका ने मना कर दिया क्योंकि उनकी उम्र धीरे-धीरे ढल रही थी तथा धार्मिक संस्कारों की वजह से भाईयों का परिवार अपना ही परिवार मान लिया था। वह इत्मीनान और प्रेम से अपने भाइयों के परिवार के साथ ही रहना चाहते थे। उनके भाई और भाईयों की पत्नियाँ भी हरिहर काका की खूब देखभाल करने लगीं थीं ।

प्रश्न 17: हरिहर काका ने खाने की थाली बीच आँगन में क्यों फेंक दी ?
उत्तर:
 हरिहर काका ने अपनी खाने से भरी थाली बीच आँगन में फेंक दी थी क्योंकि उन्हें, उनके छोटे भाई की पत्नी रूखा-सूखा खाना लाकर परोस दिया जिसमें केवल भात, मट्ठा और आचार था, जबकि उसने अपने पति को सुंदर-सुंदर व्यंजन खाने को दिए थे। यह देखते ही हरिहर काका के बदन में आग लग गई और क्रोध से भर गए थे।

प्रश्न 18: गाँव के नेता जी ने हरिहर काका के समक्ष क्या प्रस्ताव रखा?
उत्तर:
 गाँव के नेता जी ने हरिहर काका के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि तुम्हारी ज़मीन में “हरिहर उच्च विद्यालय” नाम से एक हाईस्कूल खोल दिया जाएगा। इससे तुम्हारा नाम अमर हो जाएगा। तुम्हारी ज़मीन का सही उपयोग होगा और गाँव के विकास के लिए गाँव को एक स्कूल मिल जाएगा।

प्रश्न 19: ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाए गए हरिहर काका अपने घर के किस वातावरण से अनजान थे?
उत्तर: 
ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाने के बाद अपने ही घर में हरिहर काका के बारे में नया वातावरण तैयार हो रहा था। उन्हें ठाकुरबारी से जिस दिन वापस लाया गया था, उसी दिन से उनके भाई और रिश्ते-नाते के लोग समझाने लगे थे कि विधिवत अपनी जायदाद वे अपने भतीजों के नाम लिख दें। वह जब तक ऐसा नहीं करेंगे तब तक महंत की गिद्ध-दृष्टि उनके ऊपर लगी रहेगी।

प्रश्न 20: ठाकुरबारी के साधु-संतों का कौन-सा आचरण लेखक के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न कर रहा था?
उत्तर: 
ठाकुरबारी में अपना मन बहलाने के लिए फालतू समय काटने के लिए हरिहर काका व लेखक भी जाते थे। परंतु साधु-संतों का आचरण लेखक के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न कर रहा था क्योंकि साधु-संतों करने में कोई रुचि नहीं थी। ठाकुरजी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूरी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें अगर कुछ आता है, तो सिर्फ़ बाते बनाना आता था।

3. टोपी शुक्ला – Worksheet Solutions – ||

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: किसके पिता जी हिंदुस्तान में पैदा होने वाले पहले बच्चे थे ?
(क) टोपी के
(ख) इफ़्फ़न के
(ग) किसी के नहीं
(घ) नौकरानी के
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 2: टोपी इफ़्फ़न से क्या कहता है ?
(क) दादी बदलने को
(ख) खाना बदलने को
(ग) टोपी बदलने को
(घ) बदलने को
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 3: इफ़्फ़न टोपी को क्या कहता ?
(क) टोपी की दादी बूढ़ी है जल्दी मर जाएगी
(ख) उसके पिता की ट्रांसफर हो जाएगी
(ग) कोई नहीं
(घ) पिता की ट्रांसफर हो जाएगी
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 4: कबाब किसने खाए थे ?
(क) टोपी ने
(ख) इफ़्फ़न ने
(ग) टोपी के भाई मुन्नी बाबू ने
(घ) दादी ने
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 5: किसके पिता का तबादला हो गया ?
(क) टोपी के
(ख) इफ़्फ़न के
(ग) नौकरानी के
(घ) किसी के नहीं
उत्तर: (
ख)

प्रश्न 6: टोपी ने क्या कसम खाई ?
(क) किसी से दोस्ती नहीं करेगा
(ख) इफ़्फ़न के साथ जायेगा
(ग) किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा जिसके पिता की नौकरी बदली वाली हो
(घ) लड़के से मित्रता नहीं करेगा
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 7: किसके जाने के बाद टोपी अकेला हो गया ?
(क) इफ़्फ़न के जाने के बाद
(ख) इफ़्फ़न के पिता के जाने के बाद
(ग) मुन्नी बाबू के जाने के बाद
(घ) पिता के जाने के बाद
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 8: इफ़्फ़न की दादी शादी में गीत क्यों नहीं गा पाई ?
(क) इफ़्फ़न के दादा के कारण
(ख) भूल गई थी
(ग) मुस्लिम होने के कारण
(घ) दादा के कारण
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 9: टोपी ने नौंवी कक्षा कौन सी श्रेणी में पास की ?
(क) पहली
(ख) दूसरी
(ग) तीसरी
(घ) चौथी
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 10: टोपी के पास होने पर उसकी दादी ने क्या कहा ?
(क) शाबाश
(ख) तीसरे वर्ष में तीसरी श्रेणी में पास तो हो गए हो
(ग) कुछ नहीं
(घ) पास तो हो गए हो
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 11: टोपी के पिता को क्या पसंद नहीं था?
(क) टोपी का इफ़्फ़न से दोस्ती रखना
(ख) टोपी के बात करने का ढंग
(ग) टोपी का फेल होना
(घ) टोपी का अपने भाइयों से झगड़ना
उत्तर: (क)

प्रश्न 12: टोपी के पिता को भी यह पसंद नहीं था कि टोपी इफ़्फ़न से दोस्ती रखे, पर उन्होंने इसका फ़ायदा कैसे उठाया?
(क) टोपी को पास करवा कर
(ख) अपनी दूकान को नया बनवा कर
(ग) दुकान के लिए कपड़े और चीनी का परमिट ले कर
(घ) टोपी का उसके भाइयों से झगड़ा सुलझा कर
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 13: टोपी का असली नाम क्या था?
(क) नारायण शुक्ला
(ख) बलभद्र नारायण शुक्ला
(ग) बलभद्र शुक्ला
(घ) टोपी शुक्ला
उत्तर: (ख)

प्रश्न 14: सय्यद जरगाम मुरतुज़ा को सभी प्यार से क्या पुकारते थे?
(क) इफ़्फ़न
(ख) सय्यद जरगाम
(ग) सय्यद मुरतुज़ा
(घ) सय्यद
उत्तर: (क)

प्रश्न 15: इफ़्फ़न की दादी को पति से क्या एक शिकायत थी?
(क) हर वक्त जब भी देखो बस मौलवी ही बने रहते थे
(ख) हर वक्त टोपी पहने रहते थे
(ग) जब भी देखो घूमते रहते थे
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर: 

प्रश्न 16: इफ़्फ़न की दादी टोपी से हमेशा कौन सा सवाल पूछ कर बात आगे बढ़ाती थी?
(क) कि उसकी दादी क्या कर रही है
(ख) कि उसकी अम्मा क्या कर रही है
(ग) कि उसके पिता क्या कर रहे है
(घ) कि वह क्या खाना चाहता है
उत्तर: 

प्रश्न 17: टोपी ने क्या कसम खाई?
(क) किसी से दोस्ती नहीं करेगा
(ख) इफ़्फ़न के साथ जायेगा
(ग) किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा जिसके पिता की नौकरी बदली वाली हो
(घ) लड़के से मित्रता नहीं करेगा
उत्तर: 

प्रश्न 18: कबाब किसने खाये थे?
(क) टोपी ने
(ख) इफ़्फ़न ने
(ग) टोपी के भाई मुन्नी बाबू ने
(घ) दादी ने
उत्तर: 

प्रश्न 19: इफ़्फ़न की दादी शादी में गीत क्यों नहीं गा पाई?
(क) इफ़्फ़न के दादा के कारण
(ख) क्योंकि वह भूल गई थी
(ग) टोपी के कारण
(घ) इफ़्फ़न के कारण
उत्तर: 

प्रश्न 20: टोपी इफ़्फ़न से क्या कहता है?
(क) दादी बदलने को
(ख) टोपी बदलने को
(ग) खाना खाने को
(घ) घर बदलने को
उत्तर: (क)

Extra Questions

प्रश्न 1: इफ़्फ़न की दादी टोपी को अपने ही परिवार के सदस्यों के उपहास से किस तरह बचाती थी?
या
इफ़्फ़न की दादी टोपी को क्यों डाँटती थी और टोपी को उनकी डाँट कैसी लगती थी?
उत्तर: 
जब भी टोपी इफ़्फ़न के घर जाता था तो उसकी दादी के ही पास बैठने की कोशिश करता था। इफ़्फ़न की अम्मी और बड़ी बहन से तो वह बातचीत करने की कभी कोशिश नहीं करता था। क्योंकि वे दोनों ही टोपी की बोली पर हँसने के लिए उसे छेड़तीं थी परन्तु जब बात बढ़ने लगती थी तो दादी बीच-बचाव करवा देतीं थी और टोपी को डाँटते हुए कहती  थी कि वो क्यों उन सब के पास जाता है उनके पास कोई काम नहीं होता उसे परेशान करने के आलावा। ये कह कर दादी टोपी को अपने पास बुला लेती थी। टोपी को इफ़्फ़न की दादी की डाँट का हर एक शब्द शक़्कर की तरह मीठा लगता था। पके आम के रस को सूखाकर बनाई गई मोटी परत की तरह मज़ेदार लगता। तिल के बने व्यंजनों की तरह अच्छा लगता और वह दादी की डाँट सुन कर चुपचाप उनके पास चला आता।

प्रश्न 2:  इफ़्फ़न और उसकी दादी के संबंधों पर प्रकाश डालिए और स्पष्ट कीजिए कि बच्चे प्यार के भूखे होते हैं। वे उसी के बनकर रह जाते हैं जिनसे उन्हें प्यार मिलता है।
उत्तर: 
इफ़्फ़न के परिवार में उसकी दादी, उसके अब्बू-अम्मी और दो बहनें थीं। इफ़्फ़न को अपनी दादी से बहुत ज्यादा प्यार था। प्यार तो उसे अपने अब्बू, अम्मी, बड़ी बहन और छोटी बहन नुज़हत से भी था परन्तु दादी से वह सबसे ज्यादा प्यार किया करता था। अम्मी तो कभी-कभार इफ़्फ़न को डाँट देती थी और कभी-कभी तो मार भी दिया करती थी। बड़ी बहन भी अम्मी की ही तरह कभी-कभी डाँटती और मारती थी।
अब्बू भी कभी-कभार घर को न्यायालय समझकर अपना फैसला सुनाने लगते थे। नुजहत को जब भी मौका मिलता वह उसकी कापियों पर तस्वीरें बनाने लगती थी। बस एक दादी ही थी जिन्होंने कभी भी किसी बात पर उसका दिल नहीं दुखाया था। वह रात को भी उसे बहराम डाकू, अनार परी, बारह बुर्ज, अमीर हमज़ा, गुलबकावली, हातिमताई, पंच फुल्ला रानी की कहानियाँ सुनाया करती थी। इससे स्पष्ट होता है कि बच्चे प्यार के भूखे होते हैं। और वे उसी के होकर रह जाते हैं, जिनसे उन्हें प्यार मिलता है। जिस तरह इफ़्फ़न को भी अपनी दादी से सबसे ज्यादा प्यार था।

प्रश्न 3: कुछ बच्चों को अपने माता-पिता के पद और हैसियत का कुछ ज्यादा ही घमंड हो जाता है। ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
इफ़्फ़न के पिता कलेक्टर थे। उनका तबादला हो जाने के कारण उनके स्थान पर नए कलेक्टर हरनाम सिंह आए। वे उसी बँगले में रहने लगे जिसमें इफ़्फ़न का परिवार रहता था। जब इफ़्फ़न को याद करके टोपी उस बँगले में पहुँचा तो, माली और चपरासी टोपी को पहचानते थे, इसलिए चौकीदार ने उसे अंदर जाने दिया। वहाँ नए कलेक्टर के तीनों बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। उन्होंने टोपी से अभद्रता से बातचीत ही नहीं की बल्कि मारपीट भी की।
इतना ही नहीं, उन्होंने टोपी पर अपना अलसेशियन कुत्ता भी छोड़ दिया जिसके कारण टोपी को सात सुइयाँ लगवानी पड़ीं। ऐसा उन्होंने अपने कलेक्टर पिता के पद और हैसियत के घमंड में किया। क्योंकि उन्हें पता था कि वे चाहे कुछ भी करे कोई उन्हें कुछ नहीं कर सकता, उनके पिता उनकी सभी गलतियों पर पर्दा डाल सकते हैं इसलिए उनका जो मन चाहे वे कर सकते हैं या किसी को भी नुक्सान पहुँचा सकते हैं।

प्रश्न 4: इफ़्फ़न की परदादी और दादी मुस्लिम होते हुए भी कौन से हिन्दू धर्म का अनुसरण करती थी?
उत्तर: 
इफ़्फ़न की परदादी नियमित रूप से नमाज पढ़ने वाली बीबी थीं। करबला, नजफ़, खुरासान, काज़मैन और न जाने कहाँ-कहाँ की यात्रा कर के आई थीं। परन्तु जब कोई घर से जाने लगता तो वह दरवाज़े पर पानी का एक घड़ा जरूर रखवातीं और माश का एक टोटका भी जरूर उतरवातीं। यह एक हिन्दू रीती-रिवाज़ के अंतर्गत आता है। इफ़्फ़न की दादी भी नमाज़-रोज़े का नियम के अनुसार पालन करने वाली थी।
परन्तु जब इकलौते बेटे को चेचक के दाने निकले तो वह चारपाई के पास एक टाँग पर खड़ी हुई और बोली कि माता मेरे बच्चे को माफ़ कर दो।  ऐसा इसलिए कहा क्योंकि हिन्दू धर्म में चेचक को माता कहा जाता है। इसके अलावा जब उनके बेटे की शादी के दिन आए तो गाने बाजाने के लिए उनका दिल तड़पने लगा, परन्तु इस्लाम के आचार्यों के घर गाना-बजाना भला कैसे हो सकता था? बेचारी का दिल उदास हो गया। लेकिन इफ़्फ़न के जन्म के छठे दिन के स्नान/पूजन/उत्सव पर उन्होंने जी भरकर उत्सव मना लिया था।

प्रश्न 5: ऐसी कौन सी बात हो गई थी, जिसने टोपी को मुसीबत में डाल दिया था?
उत्तर: 
एक दिन जब टोपी अपने परिवार के साथ खाना खा रहा था तो, उस दिन ऐसा हुआ कि टोपी को बैंगन का भुरता ज़रा ज्यादा अच्छा लगा। टोपी की माँ खाना परोस रही थी। टोपी ने कह दिया कि अम्मी, ज़रा बैंगन का भुरता। अम्मी! यह शब्द सुनते ही मेज़ पर बैठे सभी लोग चौंक गए, उनके हाथ खाना खाते-खाते रुक गए। वे सभी लोग टोपी के चेहरे की ओर देखने लगे। सभी यह सोच रहे थे कि यह “अम्मी” शब्द इस घर में कैसे आया।
ऐसा लग रहा था जैसे रीति-रिवाजों की दीवार हिलने लगी हो। टोपी की दादी ने टोपी से सवाल किया कि ये लफ़्ज़ उसने कहाँ से सीखा? टोपी ने उत्तर दिया कि यह उसने इफ़्फ़न से सीखा है। इफ़्फ़न का नाम सुनते ही टोपी की माँ बोल पड़ी कि कहीं किसी मियाँ यानि मुस्लिम के लड़के से तो दोस्ती नहीं कर ली है। उस दिन टोपी की बड़ी बुरी दशा हुई थी। टोपी की दादी तो उसी वक्त खाने की मेज़ से उठ गई थी और टोपी की माँ ने टोपी को फिर बहुत मारा था।

प्रश्न 6: टोपी ने अपना कोट नौकरानी के बेटे को क्यों दिया और इसका खामयाज़ा टोपी को कैसे भुगतना पड़ा?
उत्तर: 
ठण्ड के दिन थे और मुन्नी बाबू के लिए कोट का नया कपड़ा आया और भैरव के लिए भी नया कोट बना लेकिन टोपी को मुन्नी बाबू का पुराना कोट मिला। वैसे कोट बिलकुल नया ही था क्योंकि जब वह बनाया गया तब वह मुन्नी बाबू को पसंद नहीं आया था। फिर भी बना तो उन्हीं के लिए था। भले ही वह उसे ना पहनते हो। इसी वजह से टोपी ने वह कोट उसी वक्त नौकरानी के बेटे को दे दिया। वह खुश हो गया। नौकरानी के बच्चे को दे दी गई कोई भी चीज़ वापिस तो ली नहीं जा सकती थी, इसलिए तय हुआ कि टोपी ठण्ड ही खाएगा।
टोपी छोटा था इसलिए ठण्ड खाने का अर्थ समझा नहीं और भोलेपन से बोला कि वह कोई ठण्ड नहीं खाएगा। वह तो भात खाएगा। इस पर टोपी की दादी बोली कि वह तो जूते खाएगा। टोपी उनकी इस बात पर झट से बोल पड़ा कि क्या उन्हें इतना भी नहीं पता कि जूता खाया नहीं जाता बल्कि पहना जाता है। टोपी के इस तरह बोलने पर मुन्नी बाबू गुस्से से टोपी को डाँटते हुए बोले कि वह दादी का अपमान क्यों कर रहा है? इस पर भी टोपी उल्टा जवाब देता हुआ बोला कि तो क्या वह उनकी पूजा करे? यह सुनते ही दादी ने बहुत अधिक शोर मचाना शुरू कर दिया और टोपी की माँ ने टोपी को पीटना शुरू कर दिया।

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: ‘अम्मी’ शब्द पर टोपी के घरवालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: 
अम्मी! यह शब्द सुनते ही खाने की मेज़ पर बैठे सभी लोग चौंक गए, उनके हाथ खाना खाते-खाते रुक गए। वे सभी लोग टोपी के चेहरे की ओर देखने लगे। ‘अम्मी’ शब्द उर्दू का था और टोपी हिन्दू था, उसके मुँह से यह शब्द सुन कर ऐसा लग रहा था जैसे रीति-रिवाजों की दीवार हिलने लगी हो। टोपी की दादी सुभद्रादेवी तो उसी वक्त खाने की मेज़ से उठ गई और टोपी की माँ रामदुलारी ने टोपी को बहुत मारा। 

प्रश्न 2: दस अक्तूबर सन पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?
उत्तर:
 दस अक्तूबर सन पैंतालीस का ऐसे तो कोई महत्त्व नहीं है परन्तु टोपी के जीवन के इतिहास में इस तारीख का बहुत अधिक महत्त्व है, क्योंकि इस तारीख को इफ़्फ़न के पिता बदली पर मुरादाबाद चले गए। इफ़्फ़न की दादी के मरने के थोड़े दिनों बाद ही इफ़्फ़न के पिता की बदली हुई थी। टोपी दादी के मरने के बाद तो अपनेआप को अकेला महसूस कर ही रहा था और अब इफ़्फ़न के चले जाने पर वह और भी अकेला हो गया था। इसीलिए टोपी ने दस अक्तूबर सन पैंतालीस को कसम खाई कि अब वह किसी भी ऐसे लड़के से कभी भी दोस्ती नहीं करेगा जिसके पिता कोई ऐसी नौकरी करते हो जिसमें बदली होती रहती हो।

प्रश्न 3: टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?
उत्तर:
 इफ़्फ़न के घर में टोपी का सबसे अधिक मेलमिलाप उसकी दादी से था। दादी की बोली उसे बहुत पसंद थी और टोपी की माँ की बोली भी वही थी। टोपी को इफ़्फ़न की दादी का हर एक शब्द शक़्कर की तरह मीठा लगता था। पके आम के रस को सूखाकर बनाई गई मोटी परत की तरह मज़ेदार लगता। तिल के बने व्यंजनों की तरह अच्छा लगता और वह दादी की डाँट सुन कर चुपचाप उनके पास चला आता। टोपी को अपनी दादी बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती थी। इसीलिए टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात कही।

प्रश्न 4: पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?
उत्तर: 
इफ़्फ़न को अपनी दादी से बहुत ज्यादा प्यार था। प्यार तो उसे अपने अब्बू, अम्मी, बड़ी बहन और छोटी बहन नुज़हत से भी था परन्तु दादी से वह सबसे ज्यादा प्यार किया करता था। अम्मी तो कभी-कभार इफ़्फ़न को डाँट देती थी और कभी-कभी तो मार भी दिया करती थी। बड़ी बहन भी अम्मी की ही तरह कभी-कभी डाँटती और मारती थी। अब्बू भी कभी-कभार घर को न्यायालय समझकर अपना फैसला सुनाने लगते थे। नुजहत को जब भी मौका मिलता वह उसकी कापियों पर तस्वीरें बनाने लगती थी। बस एक दादी ही थी जिन्होंने कभी भी किसी बात पर उसका दिल नहीं दुखाया था। यही कारण था कि पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह था।

प्रश्न 5: इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा?
उत्तर: 
टोपी और दादी में एक ऐसा सम्बन्ध हो चूका था जिसे शायद अगर इफ़्फ़न के दादा जीवित होते तो वह भी बिलकुल उसी तरह न समझ पाते जैसे टोपी के घरवाले न समझ पाए थे। दोनों अलग-अलग अधूरे थे। एक ने दूसरे को पूरा कर दिया था। दोनों ही प्यार के प्यासे थे और एक ने दूसरे की इस प्यास को बुझा दिया था।
दोनों अपने-अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे क्योंकि दोनों को ही उनके घर में कोई समझने वाला नहीं था। दोनों ने एक दूसरे के अकेलापन को दूर कर दिया था। दादी जितना प्यार इफ़्फ़न से करती थी उतना ही टोपी से भी करती थी। दादी दोनों को ही कहानियाँ सुनाया करती थी।  इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा इसलिए भी लगा क्योंकि टोपी इफ़्फ़न के घर में केवल दादी से ही मिलने जाया करता था। 

प्रश्न 6: टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथा के आलोक में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
 टोपी हिन्दू धर्म से था और इफ़्फ़न की दादी मुस्लिम थी। परन्तु टोपी और दादी का रिश्ता इतना अधिक अटूट था कि टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने के लिए मार भी पड़ी थी परन्तु टोपी दादी से मिलने, उनकी कहानियाँ सुनाने और उनकी मीठी पूरबी बोली सुनने रोज इफ़्फ़न के घर जाता था।
दादी रोज उसे कुछ-न-कुछ खाने को देती पर टोपी कभी नहीं खता था। उसे तो दादी का हर एक शब्द गुड़ की डली की तरह लगता था। टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। दोनों एक दूसरे को खूब समझते थे।

प्रश्न 7: टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। बताइए:
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे?
उत्तर:
 वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था परन्तु उसे कोई पढ़ने ही नहीं देता था। जब भी टोपी पढ़ाई करने बैठता, तो कभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम याद आ जाता या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती जो नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी। अगर ये सारी चीज़े न होती तो कभी उसका छोटा भाई भैरव उसकी कापियों के पन्नों को फाड़ कर उनके हवाई जहाज़ बना कर उड़ाने लग जाता। यह तो थी पहले साल की बात। दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया था। जिसके कारण वह पढ़ाई  नहीं कर पाया और दूसरी साल भी फेल हो गया।

(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर:
 मास्टरों ने उसकी ओर ध्यान देना बिलकुल ही छोड़ दिया था, कोई सवाल किया जाता और जवाब देने के लिए जब टोपी भी हाथ उठाता, तो कोई मास्टर उससे जवाब नहीं पूछता था। वहीद जो कक्षा का सबसे तेज़ लड़का था, उसने टोपी से कहा कि वह उन लोगों के साथ क्यों खेलता है। उसे तो आठवीं कक्षा वालों से दोस्ती करनी चाहिए क्योंकि वे लोग तो आगे दसवीं कक्षा में चले जाएँगे और टोपी को तो आठवीं वालों के साथ ही रहना है तो उनसे दोस्ती करना टोपी के लिए अच्छा होगा। टोपी ने किसी न किसी तरह एक साल को झेल लिया। परन्तु जब सन इक्यावन में भी उसे नवीं कक्षा में ही बैठना पड़ा तो वह बिलकुल गीली मिट्टी का पिंड हो गया, क्योंकि अब तो दसवीं में भी कोई उसका दोस्त नहीं रह गया था। जो विद्यार्थी सन उनचास में आठवीं कक्षा में थे वे अब दसवीं कक्षा में थे। जो सन उनचास में सातवीं कक्षा में थे, वे टोपी के साथ पहुँच गए थे। उन सभी के  बीच में वह अच्छा-ख़ासा बूढ़ा दिखाई देने लगा था।

(ग) टोपी की भावनात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए।
उत्तर: 
बच्चे फ़ेल होने पर मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। वे उसी कक्षा में अपने से छोटे विद्यार्थियों के साथ बैठने में शर्म महसूस करते हैं। अध्यापको को चाहिए की वे फेल हुए बच्चों पर भी उतना ही ध्यान दें, जितना दूसरे बच्चों पर दिया जाता है। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान पर ही नहीं परखना चाहिए।

प्रश्न 8: इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?
उत्तर:
 कस्टोडियन अर्थात सरकारी कब्ज़ा। इफ़्फ़न की दादी के मायके वाले जब कराची में रहने चले गए तो उनके पुराने घर की देखभाल के लिए कोई नहीं रह गया था। उनका उनके घर पर कोई मालिकाना हक़ भी नहीं रहा था। इसी कारण इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में चला गया।

3. टोपी शुक्ला – Worksheet Solutions – |

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: टोपी शुक्ला कहानी का लेखक कौन है ?
(क) गुरदयाल सिंह
(ख) खुशवंत सिंह
(ग) राही मासूम रज़ा
(घ) कोई नहीं
उत्तर: (ग)

प्रश्न 2: टोपी को बचपन में कहाँ से प्यार मिलता था ?
(क) अपने मित्र की दादी माँ से
(ख) अपने परिवार की नौकरानी से
(ग) दोनों से
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 3: टोपी का पहला मित्र कौन था ?
(क) इफ़्फ़न
(ख) उसकी माता जी
(ग) उनकी नौकरानी
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 4: किसके पास रहते हुए टोपी स्वयं को कभी अकेला नहीं समझता था ?
(क) नौकरानी के पास
(ख) इफ़्फ़न के पास
(ग) किसी के पास नहीं
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 5: टोपी कौन सी कक्षा में दो बार फेल हुआ ?
(क) आठवीं
(ख) दसवीं
(ग) नौवीं कक्षा में
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 6: टोपी की किस बात से घर में बवाल खड़ा हो गया था ?
(क) नौवीं कक्षा में फेल होने से
(ख) माता जी को अम्मी बुलाने से
(ग) किसी बात से नहीं
(घ) दोस्तों के साथ खेलने से
उत्तर:
 (ख)

प्रश्न 7: इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थी ?
(क) खुली हवा में सांस लेने के लिए
(ख) दूध दही और घी खाने के लिए
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 8: टोपी शुक्ला पाठ का मुख्य पात्र कौन है ?
(क) टोपी
(ख) इफ़्फ़न
(ग) इफ़्फ़न की दादी
(घ) नौकरानी
उत्तर: (
क)

प्रश्न 9: टोपी शुक्ला पाठ का मूल भाव क्या है ?
(क) बचपन की मासूमियत और प्रेम भाव में अपनापन दर्शाना
(ख) बचपन की लड़ाईया दिखाना
(ग) कोई नहीं
(घ) प्रेमभाव
उत्तर: (
क)

प्रश्न 10: टोपी को अपनी दादी सुभद्रा अच्छी क्यों नहीं लगती ?
(क) क्योंकि सुंदर नहीं है
(ख) लड़ती है
(ग) डांटती रहती है
(घ) कोई नहीं
उत्तर: (
ग)

प्रश्न 11: उर्दू और हिंदी कौन सी भाषा के दो नाम हैं ?
(क) हिंदवी
(ख) फ़ारसी
(ग) कोई नहीं
(घ) उर्दू
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 12: टोपी खुद को भरे पूरे घर में अकेला क्यों समझता है ?
(क) क्योंकि सब उसको डांटे है
(ख) मुन्नी बाबू और भैरव भी सब को उसके विरुद्ध भटकाते हैं
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 13: कौन दोनों दूध देने वाली गाय चराते थे ?
(क) पैगंबर मोहम्मद और अवतार श्री कृष्ण
(ख) टोपी और इफ़्फ़न
(ग) कोई नहीं
(घ) अवतार
उत्तर:
 (क)

प्रश्न 14: लेखक नामों के चक्कर को अजीब क्यों मानता है ?
(क) क्योंकि नाम से किसी का स्वरूप नहीं बदलता
(ख) क्योंकि नाम सभी भाषा में होते है
(ग) कोई नहीं
(घ) क्योंकि नाम नाम होते हैं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 15: मरते समय इफ़्फ़न की दादी को अपना मायका क्यों याद आ रहा था ?
(क) अपनी माँ के कारण
(ख) अपनी खूबसूरत यादो और वहाँ बिताए अच्छे समय के कारण
(ग) कोई नहीं
(घ) अच्छे समय के कारण
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 16: इफ़्फ़न और टोपी अलग अलग धर्म के थे, फिर भी एक थे, ऐसे क्यों ?
(क) क्यूंकि वे धर्म को नहीं मानते थे
(ख) वे प्यार को मानते थे
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 17: कहानी कहते हुए इफ़्फ़न की दादी ऐसे क्यों कहती थी कि “आँखों की देखी नहीं कहती। …… “?
(क) क्योंकि कहानियाँ सुनी हुई थी
(ख) कहानियाँ देखी नहीं थी
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 18: लेखक के अनुसार आपस में प्यार कब पनपता है ?
(क) जब विचार मिलते हो
(ख) जब धर्म मिलते हो
(ग) जब परिवार मिलते हो
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 19: टोपी प्यार की चाहत में इधर उधर क्यों भटकता था ?
(क) क्यूंकि उसे वहां से प्यार मिलता था
(ख) उसके परिवार से उसे प्यार नहीं मिलता था
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 20: परिवार का आधार क्या होता है ?
(क) विश्वास और प्यार
(ख) पैसा
(ग) धर्म
(घ) प्यार
उत्तर: 
(क)Extra Questions 

प्रश्न 1: टोपी एक दिन के लिए ही सही अपने बड़े भाई मुन्नी बाबू से क्यों बड़ा होना चाहता था?
उत्तर:
 इफ़्फ़न से दोस्ती करने के और इफ़्फ़न की ही तरह माँ को अम्मी कह देने के कारण जब टोपी की पिटाई हो रही थी तभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू ने दादी से शिकायत करते हुए कहा था कि उसने टोपी को एक दिन रहीम कबाबची की दुकान पर कबाब खाते देखा था। यह झूठ था इसलिए टोपी को बहुत गुस्सा आया, क्योंकि वह कबाब को हाथ तक नहीं लगाता था। कबाब तो स्वयं मुन्नी बाबू ने खाया था। यह बात घर न बताने के लिए उसने इकन्नी रिश्वत दी थी। इसका मजा चखाने के लिए टोपी मुन्नी बाबू से बड़ा होना चाहता था। ताकि वह मुन्नी बाबू से बदला ले सके। 

प्रश्न 2: लेखक ने इफ़्फ़न और टोपी को दो आज़ाद व्यक्ति क्यों कहा हैं?
उत्तर: 
लेखक ने इफ़्फ़न और टोपी को दो आज़ाद व्यक्ति इसलिए कहा हैं क्योंकि भले ही इफ़्फ़न और टोपी हमेशा इकट्ठे रहते थे परन्तु दोनों का विकास एक-दूसरे से आज़ाद तौर पर हुआ अर्थात इन दोनों के विकास में एक-दूसरे का कोई योगदान नहीं है। इन दोनों को दो तरह के घरेलू रीती रिवाज़ मिले। इन दोनों ने ही जीवन के बारे में हमेशा से अलग-अलग सोचा।

प्रश्न 3: प्रेम जाति और उम्र का बंधन नहीं मानता है। “टोपी शुक्ला” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
टोपी और इफ्फ़न की दादी में घनिष्ठ प्रेम था। टोपी कट्टर हिंदूवादी ब्राहमण परिवार का था तो इफ्फ़न की दादी पक्की रोज़ा-नमाज़ रखने वाली। यह भेद भी इन दोनों को एक-दूसरे से प्रेम करने से न रोक सका। टोपी और दादी में एक ऐसा सम्बन्ध हो चूका था जिसे शायद अगर इफ़्फ़न के दादा जीवित होते तो वह भी बिलकुल उसी तरह न समझ पाते जैसे टोपी के घरवाले नहीं समझ पाए थे। दोनों अलग-अलग अधूरे थे।
एक ने दूसरे को पूरा कर दिया था। दोनों ही प्यार के प्यासे थे और एक ने दूसरे की इस प्यास को बुझा दिया था। दोनों अपने-अपने घरों में अजनबी और भरे घर में अकेले थे क्योंकि दोनों को ही उनके घर में कोई समझने वाला नहीं था। दोनों ने एक दूसरे का अकेलापन दूर कर दिया था। एक बहत्तर बरस की थी और दूसरा आठ साल का। इससे स्पष्ट होता है कि प्रेम जाति और उम्र का बंधन नहीं मानता है।

प्रश्न 4: किन बातों से पता चलता है कि टोपी को इफ्फ़न की दादी बहुत प्रिय थीं?
उत्तर: 
टोपी जब भी इफ्फ़न के घर जाता था तो उसकी दादी के पास ही बैठता था। वह दादी की पूरबी को सुनकर खुश होता था। दादी उसके दुख और उसकी भावनाओं को समझती थीं। इफ़्फ़न की अम्मी और बाजी जब टोपी की हँसी उड़ाती तो दादी बीच-बचाव करके उसे अपने पास बुला लेती थी। वे टोपी को कहानियाँ सुनाते हुए खुश रखती थी। उनके मरने की खबर सुनकर टोपी उदास हो जाता है और एक कोने में बैठकर रोने लगता है। यहाँ तक कि टोपी इफ़्फ़न को सहानुभूति देता हुआ कहता है कि इफ़्फ़न की दादी की जगह उसकी दादी मर गई होती तो ठीक हुआ होता। इन बातों से पता चलता है कि टोपी को इफ़्फ़न की दादी प्रिय थीं।

प्रश्न 5: दसवीं कक्षा में पहुँचने में टोपी को दो साल क्यों लग गए?
उत्तर: 
नवीं कक्षा में तो टोपी सन उनचास ही में पहुँच गया था, परन्तु दसवीं कक्षा में पहुँचते-पहुँचते साल बावन हो चूका था। ऐसी बात नहीं थी कि वह मुर्ख या मन्दबुद्धि था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था परन्तु उसे कोई पढ़ने ही नहीं देता था। जब भी टोपी पढ़ाई करने बैठता था तो कभी उसके बड़े भाई मुन्नी बाबू को कोई काम याद आ जाता था या उसकी माँ को कोई ऐसी चीज़ मँगवानी पड़ जाती जो नौकरों से नहीं मँगवाई जा सकती थी, अगर ये सारी चीज़े न होती तो कभी उसका छोटा भाई भैरव उसकी कापियों के पन्नों को फाड़ कर उनके हवाई जहाज़ बना कर उड़ाने लग जाता। यह तो थी पहले साल की बात। दूसरे साल उसे टाइफ़ाइड हो गया था। जिसके कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाया और दूसरी साल भी फेल हो गया। 

प्रश्न 6: जब अंग्रेजी-साहित्य के मास्टर ने टोपी को कक्षा में बेइज्जत किया तो अबदुल वहीद ने ऐसी कौन सी बात कही जिससे टोपी को गुस्सा आ गया?
उत्तर: 
जब अंग्रेजी-साहित्य के मास्टर ने टोपी को कक्षा में बेइज्जत किया तो अबदुल वहीद ने एक ऐसी बात कही जिससे टोपी को बहुत अधिक गुस्सा आ गया। अबदुल वहीद ने टोपी से कहा कि वह उन लोगों के साथ क्यों खेलता है। उसे तो आठवीं कक्षा वालों से दोस्ती करनी चाहिए क्योंकि वे लोग तो आगे दसवीं कक्षा में चले जाएँगे और टोपी को तो आठवीं वालों के साथ ही रहना है तो उनसे दोस्ती करना टोपी के लिए अच्छा होगा। यह बात टोपी को बहुत बुरी लगी और ऐसा लगा जैसे यह बात उसके दिल के आर-पार हो गई हो। और उसने उसी समय कसम खाई कि इस साल उसे टाइफ़ाइड हो या टाइफ़ाइड का बाप, वह पास होकर ही दिखाएगा।  प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1 बालमन किसी स्वार्थ या हिसाब से चलायमान नहीं होता। बचपन प्रेम के रिश्ते के अलावा किसी और रिश्ते को कबूल नहीं करता।
‘टोपी शुक्ला’ पाठ में टोपी अपने परिवार के एक सदस्य को बदलने की बात करता है। उसकी सोच के आधार पर उसकी मनोदशा का वर्णन कीजिए। (CBSE 2022-23)
उतर:
 प्रेम केवल अपनापन देखता है जाति या धर्म नहीं, टोपी शुक्ला को अपनेपन की तलाश थी जो उसे इफ़्फ़न की दादी में दिखी, टोपी को इफ़्फ़न की दादी बहुत अच्छी लगती थी उनकी हर एक शब्द शक़्कर की तरह मिठ्ठा लगता था। इसलिए इफ़्फ़न की दादी से टोपी का बहुत गहरा सम्बन्ध बन गया था। और अपनी दादी से नफ़रत थी क्योंकि स्वयं की दादी सदैव डांटती रहती और कभी भी उसके मनोभावों को समझने का प्रयास नहीं करती थी इसलिए टोपी ने अपनी दादी को इफ़्फ़न की दादी से बदलना चाहा । वह इफ़्फ़न की दादी के प्यार व अपनापन से वह बहुत प्रभावित था।

प्रश्न 2: वह तो जब डॉक्टर साहब की जमानत जब्त हो गई तब घर में ज़रा सन्नाटा हुआ और टोपी ने देखा कि इम्तहान सिर पर खड़ा है।
वह पढ़ाई में ‘जुट गया। परंतु ऐसे वातावरण में क्या कोई पढ़ सकता था? इसलिए उसका पास ही हो जाना बहुत था।
“वाह!” दादी बोलीं, “भगवान नज़रे-बद से बचाए। रफ़्तार अच्छी है। तीसरे बरस तीसरे दर्जे में पास तो हो गए।….”
टोपी ज़हीन होने के बावजूद कक्षा में दो बार फेल हो गया। जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों से हार मान लेना कहाँ तक उचित है?टोपी जैसे बच्चों के विषय में आपकी क्या राय है? (CBSE 2021-22)
उतर: 
ज़हीन (बुद्धिमान) होने के बावजूद भी टोपी नौवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। उसकी पारिवारिक परिस्थितियाँ उसकी पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करती थीं। जब भी वह पढ़ने बैठता तो बड़े भाई या माँ को कोई काम याद आ जाता, जो सिर्फ़ वही कर सकता था। छोटा भाई उसकी कॉपियां खराब कर दिया करता था। दूसरे साल उसे टाइफाइड हो गया। डॉक्टर भूगु नारायण चुनाव के लिए खड़े हो गए और घर में चुनावी माहौल छा गया परंतु फिर उसने दृढ़ निश्चय किया कि वह किसी भी तरह परीक्षा पास ज़रूर करेगा और उसने कर दिखाया। सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय से जो काम उसने तीसरे साल में किया उसे पहले साल में भी कि जा सकता था। परिस्थितियां सदैव हमारे अनुकूल नहीं होती परंतु उनका सामना करके कर्तव्य पथ पर बढ़कर ही हम लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 3: रामदलुारी की मार से टोपी पर क्या प्रभाव पड़ा? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। (CBSE 2020-21)
उतर:
 राम दुलारी की मार का टोपी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। एक दिन खाने की मेज पर टोपी ने अपनी मां (रामदुलारी) को ‘अम्मी’ कह कर पुकारा। टोपी के मुख से अम्मी शब्द सुनकर घरवालों के होश उड़ गए। सभी की आंखें टोपी पर जम गई। फिर दादी के पूछने पर टोपी ने बताया कि ‘अम्मी’ शब्द उसने अपने दोस्त इफ्फ़न के घर से सीखा है। जिस दिन सभी को पता चला कि टोपी ने मुस्लिम लड़के से दोस्ती कर रखी है। टोपी की माँ ने टोपी को बहुत मारा और एक ही बात बार-बार पूछ रही थी कि क्या अब वह इफ़्फ़न के घर जाएगा? इसके उत्तर में हर बार टोपी “हाँ” ही कहता था। टोपी की माँ टोपी को मारते-मारते थक गई परन्तु टोपी ने यह नहीं कहा कि वह इफ़्फ़न के घर नहीं जाएगा। वह इतना पिट गया था कि उसका सारा बदन दुख रहा था। जब टोपी की पिटाई हो रही थी, उसी समय मुन्नी बाबू एक और बात जोड़ कर बोल दिया कि टोपी को दुकान पर कबाब खाते देखा था। कबाब का नाम सुनते ही टोपी की माँ नफ़रत के साथ दो कदम पीछे हट गई और “राम, राम” कहने लगी। । टोपी बहुत उदास हो गया । क्योंकि मुन्नी बाबू झुठ बोल रहा था । वह बस यही सोचता रहा था। कि काश वह एक दिन के लिए मुन्नी बाबू से बड़ा हो पाता और उसे सबक सीखा पाता।

प्रश्न 4. ‘मित्रता और आत्मीयता जाति व भाषा के बंधनों से परे होते है’ – टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। (CBSE 2017-18)
उतर: 
टोपी की मित्रता इफ़्फ़न नाम के लड़के से थी जो मुस्लिम धर्म से था। टोपी जब भी इफ़्फ़न के घर जाता था तो उसकी दादी के ही पास बैठने की कोशिश करता था। उसे इफ़्फ़न की दादी से अपनापन महसूस होता था। वह ज्यादा से ज्यादा समय अपने मित्र की दादी के साथ बिताना चाहता था । उसकी दादी की बोली टोपी के दिल में उतर गई थी। दादी और पोते के मित्र के बीच लंबा उम्र का अंतराल परंतु दोनों के मन मिल गए, टोपी को जो प्यार अपने घर में नहीं मिलता था वह उसे मित्र, उसकी दादी और अपने घर की नौकरानी से पाने की कोशिश करता था।

प्रश्न 5. टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर बच्चो की मनोवृत्ति पर किस प्रकार प्रकाश डाला गया है | (CBSE 2016-17)
उतर:
 टोपी अपने भरे-पूरे घर में भी अकेलापन महसूस करता था उसकी भावनाओं को कोई नहीं समझता था । दादी भी हमेशा टोपी की छोटी – छोटी गलतियों पर गुस्सा करती थी। टोपी को जो प्यार इफ़्फ़न की दादी से मिला वो अपनी खुद की दादी से कभी नहीं मिला। टोपी के भाई मुन्नी बाबू और भैरव जो थे उनसे भी झगड़ा होता था । टोपी का अच्छा मित्र इफ़्फ़न था वह इफ़्फ़न के घर जाता था और इफ़्फ़न के दादी से कहानियां सुनता, टोपी को वहां अपनापन महसूस होता था परंतु इफ़्फ़न मुस्लिम होने के कारण उनके बीच मजहब की दीवार थी टोपी के घरवाले टोपी को इफ़्फ़न के घर जाने से मना करते थे, फिर इफ़्फ़न की दादी के मरने के बाद तो अकेला महसूस कर ही रहा था और इफ़्फ़न के पिता बदली पर मुरादाबाद चले गए। मित्र के जाने के बाद टोपी स्कूल में भी अकेला हो गया । बुद्धिमान होने के बावजूद भी टोपी नौवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। जिस कारण अन्य साथियों ने मजाक बनाया और अंग्रेजी-साहित्य के मास्टर ने टोपी को कक्षा में बेइज्जत किया। जिसके कारण टोपी बहुत दुखी था।

प्रश्न 6: इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है?
उत्तर: 
इफ़्फ़न टोपी का पहला दोस्त था। दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे थे। दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते थे। टोपी का इफ़्फ़न की दादी से भी बहुत गहरा नाता था क्योंकि जो प्यार और अपनापन टोपी को उसके घर में नहीं मिला वह इफ़्फ़न और इफ़्फ़न की दादी से मिला। इसलिए कहा जा सकता है कि इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 7: इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं?
उत्तर:
 इफ़्फ़न की दादी किसी इस्लामी आचार्य की बेटी नहीं थी बल्कि एक जमींदार की बेटी थी। दूध-घी खाती हुई बड़ी हुई थी परन्तु लखनऊ आ कर वह उस दही के लिए तरस गई थी। जब भी वह अपने मायके जाती तो जितना उसका मन होता, जी भर के खा लेती क्योंकि लखनऊ वापिस आते ही उन्हें फिर मौलविन बन जाना पड़ता। यही कारण था कि इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर जाना चाहती थीं। 

प्रश्न 8: दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाई?
उत्तर: 
दादी की शादी एक मौलवी परिवार में हुई थी और मौलवियों के घर में शादी-ब्याह के अवसर पर कोई गाना-बजाना नहीं होता। इसी वजह से दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी नहीं कर पाई।

2. सपनों के–से दिन – Worksheet Solutions – ||

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर 

प्रश्न 1: ननिहाल जाने पर लेखक को क्या सुख मिलता था ?
(क) खूब खाने को मिलता था
(ख) नानी का प्यार भी खूब मिलता था
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 2: आज का बचपन पुराने समय के बचपन से कैसे भिन्न है ?
(क) बच्चो के पास खुला समय नहीं है
(ख) बच्चे भोले होते थे
(ग) बच्चे माता पिता का कहना मानते थे
(घ) बच्चो के पास खुला समय नहीं है
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 3: लेखक ने अपना बचपन कैसे व्यतीत किया ?
(क) अपने साथियों के साथ आनंद के साथ
(ख) बहुत रो धो कर
(ग) कोई नहीं
(घ) दोनों
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 4: लेखक गर्मियों की छुट्टियां कैसे व्यतीत करता था ?
(क) नानी के घर जाकर
(ख) मौज मस्ती करते हुए
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 5: लेखक को गर्मी की छुट्टियों में क्या बात दुखी करती थी ?
(क) छुट्टियों में मिला काम
(ख) दोस्तों संग खेलना
(ग) नानी का घर छोड़ के जाना
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 6: उन दिनों बच्चों का अपने अभिभावकों के साथ कैसा संबंध था ?
(क) अभिभावक बच्चो के काम में रुचि नहीं रखते थे
(ख) बच्चो को अपना अधिकार समझते थे
(ग) शाबाशी भी नहीं देते थे
(घ) सभी
उत्तर: 
(घ)

प्रश्न 7: बच्चों के लिए किसकी शाबाशी ज्यादा मायने रखती थी?
(क) अध्यापकों की
(ख) पी. टी सर की
(ग) अभिभावकों की
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 8: फ़ौज में भर्ती करने के लिए अफसरों के साथ नौटंकी वाले क्यों आते थे ?
(क) नौटंकी करने
(ख) फ़ौज के सुख, आराम और बहादुरी को दिखने के लिए
(ग) कोई नहीं
(घ) बहादुरी को दिखने के लिए
उत्तर:
 B

प्रश्न 9: लेखक और उनके साथियों का नेता कौन था ?
(क) ओमा
(ख) हेडमास्टर
(ग) पी. टी सर
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (क)

प्रश्न 10: स्कूल की पिटाई का डर भुलाने के लिए लेखक किसके बारे में सोचा करता था ?
(क) पिता जी के बारे में
(ख) नानी के घर के बारे में
(ग) ओमा और बहादुर लड़को के बारे में जो स्कूल की पिटाई को स्कूल का काम करने से ज्यादा अच्छा मानते थे
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 11: लेखक के साथ खेलने वाले बच्चों की हालत कैसी होती थी?
(क) बच्चों के पैर नंगे होते थे
(ख) उन्होंने फटी-मैली कच्छी पहनी होती थी।
(ग) उनके कुर्ते बिना बटनों के होते थे।
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर: 
(घ)

प्रश्न 12: ननिहाल जाने पर लेखक को क्या सुख मिलता था?
(क) वहाँ उसे नानी खूब दूध-दही, मक्खन खिलाती थी
(ख) वह उसे बहुत प्यार करती थी
(ग) वहाँ वह तालाब में खूब नहाता और बाद में नानी से जो जी में आए मांग कर खाता था
(घ) उपरोक्त सभी
उत्तर: 
(घ)

प्रश्न 13: बच्चे पीटी सर से क्यों डरते थे?
(क) पीटी सर का स्वभाव बहुत सख्त था
(ख) उन्होंने भारी जुते पहने होते थे
(ग) उनके मुँह पर फोड़े-फुंसियाँ थी
(घ) उनका चहरा भयानक था
उत्तर:
 (क)

प्रश्न 14: ओमा के सिर की टक्कर का नाम लेखक और उसके साथियों ने क्या रखा हुआ था?
(क) रेल-डिब्बा
(ख) रेल-बम्बा
(ग) रेल-इंजन
(घ) रेल-पटरी
उत्तर:
 (ख)

प्रश्न 15: जो बच्चे पढाई में रूचि नहीं रखते थे, वे बस्ता कहाँ फेंक आते थे?
(क) नदी में
(ख) खेत में
(ग) तालाब में
(घ) क्यारियों में
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 16: लेखक हर साल गर्मियों की छुट्टियों में कहाँ जाता था?
(क) मामा के घर
(ख) चाचा के घर
(ग) दादी के घर
(घ) नानी के घर
उत्तर:
 (घ)

प्रश्न 17: मास्टर प्रीतमचंद ने अपने घर पर क्या पाल रखा था?
(क) तोते
(ख) बकरियाँ
(ग) कुत्ते
(घ) खरगोश
उत्तर: (क)

प्रश्न 18: नानी लेखक के किस ढंग से प्रसन्न होती थी?
(क) बोलने के ढंग
(ख) कम खाने के कारण
(ग) बोलने के ढंग और कम खाने के कारण
(घ) आदर – सम्मान करने के कारण
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 19: लेखक ने मनोविज्ञान का विषय कब पढ़ा?
(क) अध्यापक की ट्रेनिंग में
(ख) दसवीं कक्षा में
(ग) बारवीं कक्षा में
(घ) बी. ए. में
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 20: ओमा कौन था?
(क) लेखक का मामा
(ख) लेखक का चाचा
(ग) लेखक का सहपाठी
(घ) लेखक का अध्यापक
उत्तर:
 (ग)

Extra Questions: 25 to 30 Words 

प्रश्न 1: लेखक ने ‘सस्ता सौदा’ किसे कहा है? और क्यों?
उत्तर:
 लेखक ने सस्ता सौदा’ उस समय के मास्टरों द्वारा की जाने वाली पिटाई को कहा है। इसका कारण यह है कि उस समय के अध्यापक गरमी की छुट्टियों के लिए दो सौ सवाल दिया करते थे। बच्चे इसके बारे में तब सोचते जब उनकी छुट्टियाँ पंद्रह-बीस बचती। वे सोचते थे कि एक दिन में दस सवाल करने पर भी बीस दिन में पूरा हो जाएगा। दस दिन छुट्टियाँ और बीतने पर वे बीस सवाल प्रतिदिन पूरा करने की बात सोचते पर काम न करते। अंत में मास्टरों की पिटाई को सस्ता सौदा समझकर उसे ही स्वीकार कर लेते थे। 

प्रश्न 2: मास्टर प्रीतम चंद और हेडमास्टर शर्मा जी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
मास्टर प्रीतम चंद जो स्कूल के ‘पीटी’ थे वे बहुत ही सख्त अध्यापक थे। सभी लड़के उनसे बहुत डरते थे क्योंकि उन जितना सख्त अध्यापक न कभी किसी ने देखा था और न सुना था। यदि कोई लड़का अपना सिर प्रार्थना के समय इधर-उधर हिला लेता या पाँव से दूसरे पाँव की पिंडली खुजलाने लगता तो वह उसकी ओर बाघ की तरह झपट पड़ते और उन पर लात-घूसों की बरसात कर देते।
परन्तु हेडमास्टर शर्मा जी उनके बिलकुल उलट स्वभाव के थे। वह पाँचवीं और आठवीं कक्षा को अंग्रेजी स्वयं पढ़ाया करते थे। लेखक और लेखक के साथियों में से किसी को भी याद नहीं था कि पाँचवी कक्षा में कभी भी उन्होंने हेडमास्टर शर्मा जी को किसी गलती के कारण किसी को मारते या डाँटते देखा या सूना हो।

प्रश्न 3: पीटी मास्टर प्रीतमचंद में ऐसी क्या बात थी जिसको देखकर बच्चे डरते थे?
उत्तर:
 पीटी मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल के समय में कभी भी किसी ने मुस्कुराते या हँसते नहीं देखा था। उनका छोटा कद, दुबला-पतला परन्तु पुष्ट शरीर, चेचक के दागों से भरा चेहरा और बाज़ सी तेज़ आँखें, खाकी वर्दी, चमड़े के चौड़े पंजों वाले जूत-ये सभी चीज़े बच्चों की  भयभीत करने वाली होती थी। उनके जूतों की ऊँचीएड़ियों के निचे भी उसी तरह की खुरियाँ लगी रहतीं थी, जैसे ताँगे के घोड़े के पैरों में लगी रहती है।यदि मास्टर प्रीतमचंद सख्त जगह पर भी चलते तो खुरियों और किलों के निशान वहाँ भी दिखाई देते थे। उनका ऐसा व्यक्तित्व बच्चों के मन में भय पैदा करता था और वे उनसे डरते थे।

प्रश्न 4: फ़ारसी की कक्षा में मास्टर प्रीतमचंद ने किस तरह शारीरिक दंड दिया जिसे लेखक और उनके साथी आजीवन नहीं भूल पाए?
उत्तर:
 मास्टर प्रीतमचंद बच्चों को चौथी कक्षा में फ़ारसी पढ़ाते थे। एक सप्ताह बाद ही प्रीतमचंद ने बच्चों को शब्द रूप याद करके आने और उसे जबानी सुनाने को कहा पर कठिन होने के कारण कोई भी लड़का न सुना सका। यह देख प्रीतमचंद को गुस्सा आया और उन्होंने बच्चों को मुरगा बना दिया। उनके द्वारा लड़कों को मुरगा बनाने का ढंग बड़ा ही कष्टदायी था। जब मास्टर जी ने सभी विद्यार्थियों को अपने-अपने कान पकड़ने और अपनी पीठ ऊँची रखने के लिए कहा तो पीठ ऊँची करके कान पकड़ने से, तीन-चार मिनट में ही टाँगों में जलन होने लगती थी। लेखक के जैसे कमज़ोर बच्चे तो टाँगों के थकने से कान पकडे हुए ही गिर पड़ते थे। उनके द्वारा दिया गया यह शारीरिक दंड लेखक और उनके साथी आजीवन नहीं भूल सके।

प्रश्न 5: जब हेडमास्टर ने प्रीतमचंद को बच्चों को  शारीरिक दंड देते हुए देखा तो उन्होंने मास्टर प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?
उत्तर:
 हेडमास्टर शर्मा जी ने देखा कि मास्टर प्रीतमचंद ने छात्रों को मुरगा बनवाकर शारीरिक दंड दे रहे हैं। यह पहला अवसर था कि उन्होंने पीटी प्रीतमचंद की उस असभ्यता एवं जंगलीपन को देखा था।  उन्होंने  सहन नहीं किया और वह भड़क गए थे। उन्होंने इसे तुरंत रोकने का आदेश दिया। उन्होंने प्रीतमचंद के निलंबन का आदेश रियासत की राजधानी नाभा भेज दिया। वहाँ के शिक्षा विभाग के डायरेक्टर हरजीलाल के आदेश की मंजूरी मिलना आवश्यक था। ऐसी स्वीकृति मिल जाने के बाद पीटी प्रीतमचंद को हमेशा के लिए स्कूल से निकाल दिया जाना था।

प्रश्न 6: मास्टर प्रीतमचंद के निलंबन के बाद भी बच्चों के मन में उनका डर किस तरह समाया था?
उत्तर:
 विद्यालय के लड़के पीटी मास्टर प्रीतमचंद की पिटाई से इतने डरे हुए थे कि यह पता होते हुए भी कि पीटी मास्टर प्रीतमचंद को जब तक नाभा से डायरेक्टर ‘बहाल’ नहीं करेंगे तब तक वह स्कूल में कदम नहीं रख सकते, फिर भी जब भी फ़ारसी की घंटी बजती तो बच्चों की छाती धक्-धक करती फटने को आती। परंतु जब तक शर्मा जी स्वयं या मास्टर नौहरिया राम जी कमरे में फ़ारसी पढ़ाने न आ जाते, तब तक तो सभी बच्चों के चेहरे मुरझाए ही रहते थे। इस तरह उनका डर बच्चों के मन में जमकर बैठ चुका था।

Extra Questions: 60 से 70 शब्दों में 

प्रश्न 1: लेखक की पढ़ाई में हेडमास्टर शर्मा जी का योगदान स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 
लेखक के घर में किसी को भी पढ़ाई में कोई रूचि नहीं थी। यदि नयी किताबें लानी पड़तीं (जो लेखक के समय में केवल एक-दो रूपये में आ जाया करतीं थी) तो शायद इसी बहाने लेखक की पढ़ाई तीसरी-चौथी कक्षा में ही छूट जाती। लेखक लगभग सात साल स्कूल में रहा तो उसका एक कारण लेखक को पुरानी किताबें मिल जाना भी था। कापियों, पैंसिलों, होल्डर या स्याही-दवात में भी मुश्किल से साल भर में एक-दो रूपये ही खर्च हुआ करते थे। परन्तु उस जमाने में एक रूपया भी बहुत बड़ी सम्पति या दौलत हुआ करती थी।
लेखक के स्कूल के हेडमास्टर शर्मा जी एक लड़के को उसके घर जा कर पढ़ाया करते थे। वे बहुत धनी लोग थे। उनका लड़का लेखक से एक-दो साल बड़ा होने के कारण लेखक से एक कक्षा आगे पढ़ता था। हर साल अप्रैल में जब पढ़ाई का नया साल आरम्भ होता था तो शर्मा जी उस लड़के की एक साल पुरानी पुस्तकें लेखक के लिए ले आते थे। इससे लेखक ने सातवीं तक की पढ़ाई कर ली। इस तरह उसकी पढ़ाई में स्कूल के हेडमास्टर शर्मा जी का विशेष योगदान था।

प्रश्न 2: लेखक और उनके साथी पीटी मास्टर के किस रूप को अद्भुत मानते थे?
उत्तर:
 अपने निष्कासन के बाद कई सप्ताह तक पीटी मास्टर जब स्कूल नहीं आए तब लेखक और उसके साथियों को पता चला कि बाज़ार में एक दूकान के ऊपर उन्होंने जो छोटी-छोटी खिड़कियों वाला चौबारा किराए पर ले रखा था, पीटी मास्टर वहीं आराम से रह रहे थे। उन्हें निष्कासित होने की थोड़ी सी भी चिंता नहीं थी। जिस तरह वह पहले आराम से पिंजरे में रखे दो तोतों को दिन में कई बार, भिगोकर रखे बादामों की गिरियों का छिलका उतारकर खिलाते थे, वे आज भी उसी तरह आराम से पिंजरे में रखे उन दो तोतों को दिन में कई बार, भिगोकर रखे बादामों की गिरियों का छिलका उतारकर खिलाते और उनसे बातें करते रहते हैं। लेखक और उसके साथियों के लिए यह चमत्कार ही था कि जो प्रीतमचंद पट्टी या डंडे से मार-मारकर विद्यार्थियों की चमड़ी तक उधेड़ देते, वह अपने तोतों से मीठी-मीठी बातें कैसे कर लेते थे? उनका यह रूप देख कर लेखक स्वयं में सोच रहा था कि क्या तोतों को उनकी आग की तरह जलती, भूरी आँखों से डर नहीं लगता होगा? लेखक और उसके साथियों की समझ में ऐसी बातें तब नहीं आ पाती थीं, क्योंकि तब वे बहुत छोटे हुआ करते थे। वे तो बस पीटी मास्टर के इस रूप को एक तरह से अद्भुत ही मानते थे।

प्रश्न और उत्तर 

प्रश्न 1: मास्टर प्रीतमचंद का विद्यार्थियों को अनुशासित रखने के लिए जो तरीका था, वह आज की शिक्षा-व्यवस्था के जीवन-मूल्यों के अनुसार उचित है या अनुचित? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मास्टर प्रीतमचंद बहुत सख्त शिक्षक थे, और वे अक्सर अपने छात्रों को अनुशासित करने के लिए शारीरिक दंड देने का तरीका अपनाते थे। जो आज की शिक्षा प्रणाली में उचित नहीं है। इससे बच्चों के मन में स्कूल के प्रति डर हो सकता है, और पुराने दिनों की तरह उनकी पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है। आज की शिक्षा प्रणाली में, बच्चों को अनुशासन जैसा जीवन-मूल्य सिखाने के लिए मनोवैज्ञानिक युक्तियों को अपनाने की व्यवस्था है। शिक्षक आजकल छात्रों को प्यार और स्नेह के साथ अनुशासित करने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 2: पी०टी० साहब की चारित्रिक विशेषताओं और कमियों का उल्लेख अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: “सपनों के से दिन” पाठ में पी०टी० साहब बेहद सख्त शिक्षक के रूप में पाठकों के सामने आते हैं। वे अनुशासनप्रिय थे और चाहते थे कि विद्यालय का प्रत्येक विद्यार्थी अनुशासन में रहे। वे पक्षियों से बहुत प्रेम करते थे, उन्होंने दो तोते पाले हुए थे और दिन में कई बार, भिगोकर रखे बादामों की गिरियों का छिलका उतारकर खिलाते तथा उनसे मीठी मीठी बातें करते रहते थे। विद्यालय से निष्कासित होने पर भी उनके चेहरे पर जरा-सी भी चिंता नहीं दिखाई दी थी। इन सब विशेषताओं के अतिरिक्त उनके चरित्र में बच्चों के प्रति बेहद सख्ती की भावना रखने की कमी दिखाई देती है। स्कूल में वह छात्रों की जरा सी गलती के लिए फटकार लगा देते थे। तथा कई बार ठुड्डों और बेल्ट के बिल्ले से भी मारा करते थे।

प्रश्न 3: पी०टी० अध्यापक कैसे स्वभाव के व्यक्ति थे? विद्यालय के कार्यक्रमों में उनकी कैसी रुचि थी? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: पी.टी. साहब बहुत सख्त और अनुशासन प्रिय शिक्षक थे। स्कूल में वह छात्रों की जरा सी गलती के लिए फटकार लगा देते थे। स्कूल की प्रार्थना सभा में वह बच्चों को कतार में खड़ा करते थे और अगर कोई बच्चा शरारत करता तो उसकी चमड़ी उधेड़ देते थे। स्काउट परेड के आयोजन में वह अहम भूमिका निभाते थे। तथा अपने मार्गदर्शन में बच्चों से कुशलतापूर्वक परेड करवाते थे और परेड अच्छा करने पर बच्चों को “शाबाशी’” भी दे देते थे इसलिए बच्चों को उनकी यही “शाबाशी’ फ़ौज के तमगों-सी लगती थी और कुछ समय के लिए उनके मन में पी०टी० सर के लिए सम्मान का भाव जाग जाता था।

प्रश्न 4: कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती-पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता है?
उत्तर: कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती। यह बात लेखक के बचपन की एक घटना से सिद्ध होती है -लेखक के बचपन के ज्यादातर
साथी राजस्थान या हरियाणा से आकर मंडी में व्यापार या दुकानदारी करने आए परिवारों से थे। जब लेखक छोटा था तो उनकी बातों को बहुत कम ही समझ पाता था और उनके कुछ शब्दों को सुन कर तो लेखक को हँसी आ जाती थी। परन्तु जब सभी खेलना शुरू करते तो सभी एक-दूसरे की बातों को बहुत अच्छे से समझ लेते थे। उनका व्यवहार एक दूसरे के लिए एक जैसा ही रहता था।

प्रश्न 5: पीटी साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मास्टर प्रीतम चंद जो स्कूल के ‘पीटी’ थे, वे लड़कों की पंक्तियों के पीछे खड़े-खड़े यह देखते रहते थे कि कौन सा लड़का पंक्ति में ठीक से नहीं खड़ा है। सभी लड़के उस ‘पीटी’ से बहुत डरते थे क्योंकि उन जितना सख्त अध्यापक न कभी किसी ने देखा था और न सुना था। यदि कोई लड़का अपना सिर भी इधर-
उधर हिला लेता या पाँव से दूसरे पाँव की पिंडली खुजलाने लगता, तो वह उसकी ओर बाघ की तरह झपट पड़ते और ‘खाल खींचने’ (कड़ा दंड देना, बहुत अधिक मारना-पीटना) के मुहावरे को सामने करके दिखा देते। यही कारण था कि जब स्कूल में स्काउटिंग का अभ्यास करते हुए कोई भी विद्यार्थी कोई गलती न करता, तो पीटी साहब अपनी चमकीली आँखें हलके से झपकाते और सभी को शाबाश कहते। उनकी एक शाबाश लेखक और उसके साथियों को ऐसे लगने लगती जैसे उन्होंने किसी फ़ौज के सभी पदक या मैडल जीत लिए हों।

प्रश्न 6: नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
उत्तर: हर साल जब लेखक अगली कक्षा में प्रवेश करता तो उसे पुरानी पुस्तकें मिला करतीं थी। उसके स्कूल के हेडमास्टर शर्मा जी एक बहुत धनी लड़के को उसके घर जा कर पढ़ाया करते थे। हर साल अप्रैल में जब पढ़ाई का नया साल आरम्भ होता था तो शर्मा जी उस लड़के की एक साल पुरानी पुस्तकें लेखक के लिए ले आते थे।
उसे नयी कापियों और पुरानी पुस्तकों में से ऐसी गंध आने लगती थी कि उसका मन बहुत उदास होने लगता था। आगे की कक्षा की कुछ मुश्किल पढ़ाई और नए मास्टरों की मार-पीट का डर और अध्यापक की ये उम्मीद करना कि जैसे बड़ी कक्षा के साथ-साथ लेखक सर्वगुण सम्पन्न या हर क्षेत्र में आगे रहने वाला हो गया हो। यदि लेखक और उसके साथी उन अध्यापकों की आशाओं पर पूरे नहीं हो पाते तो कुछ अध्यापक तो हमेशा ही विद्यार्थियों की ‘चमड़ी उधेड़ देने को तैयार रहते’ थे।

प्रश्न 7: स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण ‘आदमी’ फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता है?
उत्तर: जब लेखक धोबी द्वारा धोई गई वर्दी और पालिश किए चमकते जूते और जुराबों को पहनकर स्काउटिंग की परेड करते तो लगता कि वे भी फौजी ही हैं। मास्टर प्रीतमसिंह जो लेखक के स्कूल के पीटी थे, वे लेखक और उसके साथियों को परेड करवाते और मुँह में सीटी ले कर लेफ्ट-राइट की आवाज़ निकालते हुए मार्च करवाया करते थे।
फिर जब वे राइट टर्न या लेफ्ट टार्न या अबाऊट टर्न कहते तो सभी विद्यार्थी अपने छोटे-छोटे जूतों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर जूतों की ठक-ठक करते और ऐसे घमंड के साथ चलते जैसे वे सभी विद्यार्थी न हो कर, बहुत महत्वपूर्ण ‘आदमी’ हों, जैसे किसी देश का फौज़ी जवान होता है, अर्थात लेखक कहना चाहता है कि सभी विद्यार्थी अपने-आप को फौजी समझते थे।

प्रश्न 8: हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?
उत्तर: मास्टर प्रीतमचंद लेखक की चौथी कक्षा को फ़ारसी पढ़ाने लगे थे। अभी मास्टर प्रीतमचंद को लेखक की कक्षा को पढ़ते हुए एक सप्ताह भी नहीं हुआ होगा कि प्रीतमचंद ने उन्हें एक शब्दरूप याद करने को कहा और आज्ञा दी कि कल इसी घंटी में केवल जुबान के द्वारा ही सुनेंगे। दूसरे दिन मास्टर प्रीतमचंद ने बारी-बारी सबको सुनाने के लिए कहा तो एक भी लड़का न सुना पाया।
मास्टर जी ने गुस्से में चिल्लाकर सभी विद्यार्थियों को कान पकड़कर पीठ ऊँची रखने को कहा। जब लेखक की कक्षा को सज़ा दी जा रही थी तो उसके कुछ समय पहले शर्मा जी स्कूल में नहीं थे। आते ही जो कुछ उन्होंने देखा वह सहन नहीं कर पाए। शायद यह पहला अवसर था कि उन्होंने पीटी प्रीतमचंद की उस असभ्यता एवं जंगलीपन को सहन नहीं किया और वह भड़क गए थे। यही कारण था कि हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को  मुअतल कर दिया। 

प्रश्न 9: लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
उत्तर: बचपन में लेखक को स्कूल जाना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता था परन्तु जब मास्टर प्रीतमसिंह मुँह में सीटी ले कर लेफ्ट-राइट की आवाज़ निकालते हुए मार्च करवाया करते थे और सभी विद्यार्थी अपने छोटे-छोटे जूतों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर जूतों की ठक-ठक करते और ऐसे घमंड के साथ चलते जैसे वे सभी विद्यार्थी न हो कर, बहुत महत्वपूर्ण ‘आदमी’ हों, जैसे किसी देश का फौज़ी जवान होता है ।
स्काउटिंग करते हुए कोई भी विद्यार्थी कोई गलती न करता तो पीटी साहब अपनी चमकीली आँखें हलके से झपकाते और सभी को शाबाश कहते। उनकी एक शाबाश लेखक और उसके साथियों को ऐसे लगने लगती जैसे उन्होंने किसी फ़ौज के सभी पदक या मैडल जीत लिए हों। यह शाबाशी लेखक को उसे दूसरे अध्यापकों से मिलने वाले ‘गुड्डों’ से भी ज्यादा अच्छा लगता था। यही कारण था कि बाद में लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगने लगा।

प्रश्न 10: लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुटियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?
उत्तर: जैसे-जैसे लेखक की छुट्टियों के दिन ख़त्म होने लगते तो वह दिन गिनने शुरू कर देता था। हर दिन के ख़त्म होते-होते उसका डर भी बढ़ने लगता था।  अध्यापकों ने जो काम छुट्टियों में करने के लिए दिया होता था, उसको कैसे करना है और एक दिन में कितना काम करना है यह सोचना शुरू कर देता। जब लेखक ऐसा सोचना शुरू करता तब तक छुट्टियों का सिर्फ एक ही महीना बचा होता।
एक-एक दिन गिनते-गिनते खेलकूद में दस दिन और बीत जाते। फिर वह अपना डर भगाने के लिए सोचता कि दस क्या, पंद्रह सवाल भी आसानी से एक दिन में किए जा सकते हैं। जब ऐसा सोचने लगता तो ऐसा लगने लगता जैसे छुट्टियाँ कम होते-होते भाग रही हों। दिन बहुत छोटे लगने लगते थे।  लेखक ओमा की तरह जो ठिगने और बलिष्ट कद का उदंड लड़का था उसी की तरह बनने की कोशिश करता क्योंकि वह छुट्टियों का काम करने के बजाय अध्यापकों की पिटाई अधिक ‘सस्ता सौदा’ समझता था। और काम न किया होने के कारण लेखक भी उसी की तरह ‘बहादुर’ बनने की कल्पना करने लगता।

प्रश्न 11: पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: लेखक ने कभी भी मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल के समय में मुस्कुराते या हँसते नहीं देखा था। उनके जितना सख्त अध्यापक किसी ने पहले नहीं देखा था। उनका छोटा कद, दुबला-पतला परन्तु पुष्ट शरीर, माता के दानों से भरा चेहरा यानि चेचक के दागों से भरा चेहरा और बाज़ सी तेज़ आँखें, खाकी वर्दी, चमड़े के चौड़े पंजों वाले जूत-ये सभी चीज़े बच्चों को भयभीत करने वाली होती थी।
उनके जूतों की ऊँची एड़ियों के निचे भी खुरियाँ लगी रहतीं थी। अगले हिस्से में, पंजों के निचे मोटे सिरों वाले कील ठुके होते थे। वे अनुशासन प्रिय थे यदि कोई विद्यार्थी उनकी बात नहीं मानता तो वे उसकी खाल खींचने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। वे बहुत स्वाभिमानी भी थे क्योंकि जब हेडमास्टर शर्मा ने उन्हें निलंबित कर के निकाला तो वे गिड़गिड़ाए नहीं, चुपचाप चले गए और पहले की ही तरह आराम से रह रहे थे।

प्रश्न 12: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के सम्बन्ध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में जिन युक्तियों को अपनाया गया है उसमें मारना-पीटना और कठोर दंड देना शामिल हैं। इन कारणों की वजह से बहुत से बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। परन्तु वर्तमान में इस तरह मारना-पीटना और कठोर दंड देना बिलकुल मना है। आजकल के अध्यापकों को सिखाया जाता है कि बच्चों की भावनाओं को समझा जाए,उसने यदि कोई गलत काम किया है तो यह देखा जाए कि उसने ऐसा क्यों किया है। उसे उसकी गलतियों के लिए दंड न देकर, गलती का एहसास करवाया जाए। तभी बच्चे स्कूल जाने से डरेंगे नहीं बल्कि ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल जाएँगे।

प्रश्न 13: प्रायः अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बर्बाद न करने की नसीहत देते हैं। बताइए:
(क) खेल आपके लिए क्यों जरुरी है?
उत्तर: खेल जितना मनोरंजक होता है उससे कही अधिक सेहत के लिए आवश्यक होता है। कहा भी जाता है कि ‘स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है।’ बच्चों का तन जितना अधिक तंदुरुस्त होगा, उनका दिमाग उतना ही अधिक तेज़ होगा। खेल-खेल में बच्चों को नैतिक मूल्यों का ज्ञान भी होता है जैसे- साथ-साथ खेल कर भाईचारे की भावना का विकास होता है, समूह में खेलने से सामाजिक भावना बढ़ती है और साथ-ही-साथ प्रतिस्पर्धा की भावना का भी विकास होता है। 

(ख) आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिनसे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?
उत्तर: जितना खेल जीवन में जरुरी है, उतने ही जरुरी जीवन में बहुत से कार्य होते हैं जैसे- पढाई आदि। यदि खेल स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, तो पढाई भी आपके जीवन में कामयाबी के लिए बहुत आवश्यक है। यदि हम अपने खेल के साथ-साथ अपने जीवन के अन्य कार्यों को भी उसी लगन के साथ पूरा करते जाएँ जिस लगन के साथ हम अपने खेल को खेलते हैं तो अभिभावकों को कभी भी खेल से कोई आपत्ति नहीं होगी।

2. सपनों के–से दिन – Worksheet Solutions – |

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: सपनो के से दिन के लेखक कौन हैं ?
(क) मिथिलेश्वर
(ख) रही मासूम
(ग) गुरदयाल सिंह
(घ) कोई नहीं
उत्तर: (ग)

प्रश्न 2: स्कूल के पी.टी. सर का क्या नाम था ?
(क) मास्टर प्रीतमचंद
(ख) हरीश चंद
(ग) मुकुंद लाल
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 3: मास्टर प्रीतमचंद कतारों के पीछे खड़े खड़े क्या देखते थे ?
(क) लड़कों को
(ख) कौन सा लड़का कतार में ठीक से नहीं खड़ा
(ग) कोई नहीं
(घ) कता
उत्तर:
 B

प्रश्न 4: लड़के किसके डर से कतार खड़े रहते ?
(क) मास्टर प्रेमचंद की घुड़की के डर से
(ख) मार के डर से
(ग) कोई नहीं
(घ) घुड़की के डर से
उत्तर: (क)

प्रश्न 5: पी. टी सर कौन से मुहावरे को प्रत्यक्ष कर दिखाते थे ?
(क) खाल खींचने
(ख) खाल झाड़ने
(ग) कान मरोड़ने
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (क)

प्रश्न 6: पी. टी सर खाल खींचने के मुहावरे को कब प्रत्यक्ष दिखाते थे ?
(क) जब कोई लड़का अपना सिर हिलाता
(ख) जब कोई लड़का पिंडली खुजलाता
(ग) कोई नहीं
(घ) दोनों
उत्तर: 
(घ)

प्रश्न 7: अब किस दंड पर पूरी तरह प्रतिबंध है ?
(क) मानसिक
(ख) कोई भी दंड
(ग) शारीरिक दंड
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 C

प्रश्न 8: इस पाठ के माध्यम से लेखक ने किन दिनों का वर्णन किया है ?
(क) आजादी के दिनों का
(ख) अंग्रेजो के दिनों का
(ग) अपने स्कूल के दिनों का
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 9: बच्चों को स्कूल में अपनी पढ़ाई से अधिक क्या अच्छा लगता है ?
(क) कंप्यूटर क्लास
(ख) जिम
(ग) अपने साथियों के साथ खेलना
(घ) कोई नहीं
उत्तर: (ग)

प्रश्न 10: हेडमास्टर लड़के की किताबे लाकर क्यों देते थे ?
(क) उसे पढ़ने का शौंक था
(ख) किताबें इकठी करने का शौंक था
(ग) लेखक के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 11: लेखक किसकी मदद से अपनी पढ़ाई जारी रख सका ?
(क) अपने घर वालों की मदद से
(ख) दोस्तों की मदद से
(ग) हेडमास्टर साहब की मदद से
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 12: लेखक के समय में अभिभावक बच्चो को स्कूल भेजने में दिलचस्पी क्यों नहीं लेते थे ?
(क) बच्चो को अपने साथ काम में लगा लेते थे
(ख) उनको लगता था इन्होने कौन सा है तहसीलदार बनना है
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 13: बचपन में घास अधिक हरी और फूलों की सुगंध अधिक मनमोहक लगती है इस कथन से क्या भाव है ?
(क) बच्चे अपनी दुनिया में मस्त होते है
(ख) बच्चे अल्हड़ होते हैं
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

उत्तर: (ग)

प्रश्न 14: हेडमास्टर साहिब का विद्यार्थियों के साथ कैसा व्यवहार था ?
(क) कड़क
(ख) कठोर बहुत ही मृदुल था ,
(ग) वे बच्चों को बिलकुल डांटते नहीं थे
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 15: लेखक के समय शिक्षा का क्या महत्व था ?
(क) बहुत ही गहरा
(ख) शिक्षा बहुत मायने रखती थी
(ग) लोग शिक्षा के महत्व से पूरी तरह अनजान थे
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 16: सपनो के से दिन पाठ पाठक को कैसा अनुभव करवाता है ?
(क) लेखक ने हमारे बचपन की बात लिख दी
(ख) अच्छा
(ग) बुरा
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 17: बच्चे पिटाई होने पर भी खेलने क्यों जाते हैं ?
(क) बच्चो को खेल प्यारा होता है
(ख) उनको पिटाई जैसी ही लगती है
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 18: बच्चे “रेल बम्बा” किसको कहते थे ?
(क) अपने नेता ओमा के सर की टक्कर को
(ख) रेल की सीटी को
(ग) रेल इंजन को
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 19: ओमा कैसा बच्चा था ?
(क) निडर और बहादुर
(ख) शरारती
(ग) तेज तर्रार
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 20: लेखक को बचपन में स्कूल जाते हुए किन चीजों की महक आज भी याद है ?
(क) नीम के पत्तों की
(ख) फूलो की तेज गंध
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

Extra Questions: 25 to 30 Words

प्रश्न 1: ‘बच्चों को खेल सबसे अच्छा लगता है और वे मिलजुल कर खेलते हैं।’  “सपनों के-से दिन” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए
उत्तर: ‘सपनों के-से दिन’  पाठ से ज्ञात होता है कि लेखक और उसके बचपन के साथी मिल-जुलकर खेलते थे और सभी की हालत एक सी होती थी। जब खेल-खेल में लकड़ी के ढेर से निचे उतरते हुए भागते, तो बहुत से बच्चे अपने-आपको चोट लगा देते थे और कई जगह चोट खाए हुए खून के ऊपर जमी हुई रेत-मिट्टी से लथपथ पिंडलियाँ ले कर अपने-अपने घर जाते तो सभी की माँ-बहनें उन पर तरस नहीं खाती बल्कि उल्टा और ज्यादा पीट देतीं।कई बच्चों के पिता तो इतने गुस्से वाले होते कि जब बच्चे को पीटना शुरू करते तो यह भी ध्यान नहीं रखते कि छोटे बच्चे के नाक-मुँह से लहू बहने लगा है और ये भी नहीं पूछते कि उसे चोट कहाँ लगी है। परन्तु इतनी बुरी पिटाई होने पर भी दूसरे दिन सभी बच्चे फिर से  खेलने के लिए चले आते। 

प्रश्न 2: लेखक के गाँव के बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अपने बचपन के दिनों में लेखक जिन बच्चों के साथ खेलता था, उनमें से ज्यादातर साथी उसी के परिवार की तरह के थे। उन परिवारों में से बहुत के बच्चे तो स्कूल ही नहीं जाते थे और जो कभी गए भी, पढाई में रूचि न होने के कारण किसी दिन बस्ता तालाब में फेंक आए और फिर स्कूल गए ही नहीं और उनके माँ-बाप ने भी उनको स्कूल भेजने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की। उनका सारा ध्यान खेलने में रहता था। इससे स्पष्ट है कि लेखक के गाँव के बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।

प्रश्न 3: “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि जो बच्चे बचपन में नहीं पढ़ पाए उसके लिए उनके माता-पिता किस तरह जिम्मेदार थे?
उत्तर:
 जो बच्चे पढाई में रूचि न होने के कारण बस्ता तालाब में फेंक आते थे और फिर कभी स्कूल नहीं गए, उनके माँ-बाप ने भी उनको दोबारा कभी स्कूल भेजने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की। यहाँ तक की राशन की दुकान वाला और जो किसानों की फसलों को खरीदते और बेचते हैं वे भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना जरुरी नहीं समझते थे। अगर कभी कोई स्कूल का अध्यापक उन्हें समझाने की कोशिश करता तो वे अध्यापक को यह कह कर चुप करवा देते कि उन्हें अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा कर कोई तहसीलदार तो बनाना नहीं है।
जब उनका बच्चा थोड़ा बड़ा हो जायगा तो पंडित घनश्याम दास से हिसाब-किताब लिखने की पंजाबी प्राचीन लिपि पढ़वाकर सीखा देंगे और दूकान पर खाता लिखवाने लगा देंगे। स्कूल में अभी तक यह कुछ भी नहीं सीख पाया है। इससे स्पष्ट है कि बच्चों की पढ़ाई न हो पाने के लिए अभिभावक अधिक जिम्मेदार थे।

प्रश्न 4: “सपनों के से दिन” पाठ में लेखक ने अपने स्कूल का वर्णन किस प्रकार से किया है?
उत्तर: 
लेखक ने अपने स्कूल का वर्णन करते हुए बताया है कि स्कूल के अंदर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर गली की तरह के लम्बे सीधे रास्ते में बड़े ढंग से कटे-छाँटे झाड़ उगे थे जिन्हें लेखक और उनके साथी डंडियाँ कहा करते थे। उनसे नीम के पत्तों की तरह महक आती थी, जो आज भी लेखक अपनी आँखों को बंद करके महसूस कर सकता है। उस समय स्कूल की छोटी क्यारियों में फूल भी कई तरह के उगाए जाते थे जिनमें गुलाब, गेंदा और मोतिया की दूध-सी सफ़ेद कलियाँ भी हुआ करतीं थीं। लेखक के स्कूल में केवल छोटे-छोटे नौ कमरे थे, जो अंग्रेजी के अक्षर एच (H) की तरह बने हुए थे। 

प्रश्न 5: स्कूल की छोटी क्यारियों में उगाए गए कई तरह के फूलों का लेखक और उनके साथी क्या करते थे?
उत्तर: 
लेखक के स्कूल की छोटी क्यारियों में कई तरह के फूल उगाए जाते थे जिनमें गुलाब, गेंदा और मोतिया की दूध-सी सफ़ेद कलियाँ भी हुआ करतीं थीं। ये कलियाँ इतनी सूंदर और खुशबूदार होती थीं कि लेखक और उनके साथी चपरासी से छुप-छुपा कर कभी-कभी कुछ फूल तोड़ लिया करते थे। उनकी बहुत तेज़ सुगंध लेखक आज भी महसूस कर सकता है। परन्तु लेखक को अब यह याद नहीं कि उन फूलों को तोड़कर, कुछ देर सूँघकर फिर उन फूलों का वे क्या करते थे। शायद वे उन फूलों को या तो जेब में डाल लेते होंगे और माँ उसे धोने के समय निकालकर बाहर फेंक देती होगी या लेखक और उनके साथी खुद ही, स्कूल से बाहर आते समय उन्हें बकरी के मेमनों की तरह खा या ‘चर’ जाया करते होगें।

प्रश्न 6: लेखक ने छुटियों के पहले और आखरी दिनों के फर्क का अंतर किस तरह स्पष्ट किया है?
उत्तर: 
लेखक के समय में स्कूलों में, साल के शुरू में एक-डेढ़ महीना ही पढ़ाई हुआ करती थी, फिर डेढ़-दो महीने की छुटियाँ शुरू हो जाती थी। लेखक को छुटियों के पहले और आखरी दिनों का फर्क याद है। पहले के दो तीन सप्ताह तो खूब खेल कूद में बीतते थे। हर साल ही छुटियों में लेखक अपनी माँ के साथ अपनी नानी के घर चले जाता था। जैसे-जैसे उनकी छुट्टियों के दिन ख़त्म होने लगते तो वे लोग दिन गिनने शुरू कर देते थे। एक-एक दिन गिनते-गिनते खेलकूद में दस दिन और बीत जाते। काम न किया होने के कारण स्कूल में होने वाली पिटाई का डर अब और ज्यादा बढ़ने लगता।
जैसे-जैसे दिन ‘छोटे’ होने लगते अर्थात छुट्टियाँ ख़त्म होने लगती डर और ज्यादा बढ़ने लगता। छुट्टियों के आखिरी पंद्रह-बीस दिनों में अध्यापकों द्वारा दिए गए कार्य को पूरा करने का हिसाब लगाते थे और कार्य पूरा करने की योजना बनाते हुए उन छुट्टियों को भी खेलकूद में बिता देते थे।

Extra Questions: 60 से 70 शब्दों में

प्रश्न 1: जिस साल लेखक नानी के घर नहीं जा पाता था, उस साल लेखक अपने घर से दूर जो तालाब था, वहाँ जाया करता था। उस तालाब में लेखक और उसके साथी किस तरह खेलते थे अपने शब्दों में वर्णन कीजिए?
उत्तर: लेखक और उसके साथी कपड़े उतार कर पानी में कूद जाया करते थे, थोड़े समय बाद पानी से निकलकर भागते हुए एक रेतीले टीले पर जाकर रेत के ऊपर लोटने लगते थे। गीले शरीर को गर्म रेत से खूब लथपथ करके फिर उसी तरह भागते थे। किसी ऊँची जगह जाकर वहाँ से तालाब में छलाँग लगा देते थे। जैसे ही उनके शरीर से लिपटी रेत तालाब के उस गंदे पानी से साफ़ हो जाती, वे फिर से उसी टीले की ओर भागते। कई बार तालाब में कूदकर ऐसे हाथ-पाँव हिलाने लगते जैसे उन्हें बहुत अच्छे से तैरना आता हो।
परन्तु एक-दो को छोड़, लेखक के किसी साथी को तैरना नहीं आता था। कुछ तो हाथ-पाँव हिलाते हुए गहरे पानी में चले जाते तो दूसरे उन्हें बाहर आने के लिए सलाह देते कि ऐसा मानो जैसे किसी भैंस के सींग या पूँछ पकड़ रखी हो। उनका हौसला बढ़ाते। कूदते समय मुँह में गंदला पानी भर जाता तो बुरी तरह खाँस कर उसे बाहर निकालने का प्रयास करते थे। कई बार ऐसा लगता कि साँस रुकने वाली है परन्तु हाय-हाय करके किसी न किसी तरह तालाब के किनारे तक पहुँच ही जाते थे।

प्रश्न 2: मास्टर प्रीतम चंद जो स्कूल के ‘पीटी’ थे, उनसे सब क्यों डरते थे और लेखक और उनके साथियों को क्या ध्यान रखना पड़ता था?
उत्तर: 
मास्टर प्रीतम चंद जो स्कूल के ‘पीटी’ थे, उनसे सब डरते थे। वे लड़कों की पंक्तियों के पीछे खड़े-खड़े यह देखते रहते थे कि कौन सा लड़का पंक्ति में ठीक से नहीं खड़ा है। उनकी धमकी भरी डाँट तथा लात-घुस्से के डर से लेखक और लेखक के साथी पंक्ति के पहले और आखरी लड़के का ध्यान रखते, सीधी पंक्ति में बने रहने की पूरी कोशिश करते थे। सीधी पंक्ति के साथ-साथ लेखक और लेखक के साथियों को यह भी ध्यान रखना पड़ता था कि आगे पीछे खड़े लड़कों के बीच की दुरी भी एक समान होनी चाहिए।
सभी लड़के उस ‘पीटी’ से बहुत डरते थे क्योंकि उन जितना सख्त अध्यापक न कभी किसी ने देखा था और न सुना था। यदि कोई लड़का अपना सिर भी इधर-उधर हिला लेता या पाँव से दूसरे पाँव की पिंडली खुजलाने लगता तो वह उसकी ओर बाघ की तरह झपट पड़ते और ‘खाल खींचने’ (कड़ा दंड देना, बहुत अधिक मारना-पीटना) के मुहावरे को सामने करके दिखा देते।

प्रश्न 3: बचपन में बच्चों को स्कूल जाना पसंद नहीं होता किन्तु कुछ परिस्थितियों में बच्चे स्कुल जाना पसंद करते हैं। पाठ के आधार पर उन परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: 
लेखक के अनुसार उनके बचपन में भी स्कूल सभी के लिए ऐसी जगह नहीं थी जहाँ ख़ुशी से भाग कर जाया जाए। पहली कच्ची कक्षा से लेकर चौथी कक्षा तक, केवल पाँच-सात लड़के ही थे जो ख़ुशी-ख़ुशी स्कूल जाते होंगे बाकि सभी रोते चिल्लाते ही स्कूल जाया करते थे। फिर भी कभी-कभी कुछ ऐसी स्थितियाँ भी होती थी जहाँ बच्चों को स्कूल अच्छा भी लगने लगता था। वह स्थितियाँ बनती थी जब स्कूल में स्काउटिंग का अभ्यास करवाते समय पीटी साहब सभी बच्चो के हाथों में नीली-पीली झंडियाँ पकड़ा कर वन टू थ्री कहते और बच्चे भी झंडियाँ ऊपर-निचे, दाएँ-बाएँ हिलाते जिससे झंडियाँ हवा में लहराती और फड़फड़ाती। झंडियों के साथ खाकी वर्दियों तथा गले में दो रंग के रुमाल लटकाए सभी बच्चे बहुत ख़ुशी से अभ्यास किया करते थे। कभी-कभी लेखक और उसके साथियों को ऐसा भी लगता था कि कई साल की सख्त मेहनत से जो पढ़ाई उन्होंने प्राप्त की थी, पीटी साहब के अनुशासन में रह कर प्राप्त की ‘गुडविल’ का रॉब या घमंड उससे बहुत बड़ा था। यह ऐसा भी था कि आपको रोज डाँटने वाला कोई ‘अपना’ यदि साल भर के बाद एक बार ‘शाबाश’ कह दें तो यह किसी चमत्कार-से कम नहीं लगता है।

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुट्टियों के काम को पूरा करने के लिए योजनाएँ तैयार करते थे। क्या आप की योजनाएँ लेखक की योजनाओं से मेल खाती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2021-22)
उतर: लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए तरह-तरह की योजनाएँ बनाया करते थे। जैसे- हिसाब के मास्टर जी द्वारा दिए गए दो सौ सवालों को पूरा करने के लिए रोज़ दस सवाल निकाले जाने पर बीस दिन में पूरे हो जाएँगे, लेकिन खेल-कूद में छुट्टियों भागने लगती, तो मास्टर जी की पिटाई का डर सताने लगता फिर लेखक रोज़ के पंद्रह सवाल पूरे करने की योजना बनाते, तब उसे छुट्टियां भी बहुत कम लगने लगती और दिन बहुत छोटे लगने लगते तथा स्कूल का भय भी बढ़ने लगता। ऐसे में लेखक पिटाई से डरने के बावजूद उन लोगों की भाँति बहादुर बनने की कल्पना करने लगते थे, जो छुट्टियों का काम पूरा करने की बजाय मास्टर जी से पिटाई खाना ही अधिक बेहतर समझते थे।

प्रश्न 2: स्कुल किस प्रकार की स्थिति में अच्छा लगने लगता है और क्यों ? (CBSE 2019-20)
उत्तर: मास्टर जी जब परेड करवाते तो सभी विद्यार्थी अपने छोटे-छोटे जूतों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर जूतों की ठक-ठक करते जैसे वे सभी विद्यार्थी न हो कर, कोई बहुत महत्वपूर्ण ‘आदमी’ हों । स्काउटिंग पड़े और स्काउटिंग और पिकनिक जैसे कार्यक्रम हों।करते हुए कोई भी विद्यार्थी कोई गलती न करता तो पीटी साहब अपनी चमकीली आँखें हलके से झपकाते और सभी को शाबाश कहते। तो लेखक और उसके दोस्तों को बहुत अच्छा लगता था। स्काउटिंग के दिनों में स्कूल उन्हें बेहद अच्छा लगने लगता था। अतः स्कूल जाना उसी स्थिति में अच्छा लगता है, जब पढ़ाई न करनी पड़े और स्काउटिंग और पिकनिक जैसे कार्यक्रम हों।

प्रश्न 3. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ ‘सपनों के-से दिन’ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में विचार प्रकट कीजिए । (CBSE 2018-19)
उत्तर: पाठ ‘सपनों के से दिन’ में विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए उन्हें कई प्रकार के शारीरिक दंड दिए जाते थे। पिटाई भी इतनी अधिक की चमड़ी उधेड़ने वाली कहावत चरितार्थ, दंड ऐसा कि बच्चे चक्कर खा जाए, बच्चों का कोमल मन ऐसे बर्बरता पूर्ण व्यवहार से अधिक उदंड या फिर दब्बू बना देता है, पढ़ाई: लिखाई में अरुचि आ सकती है इन्हीं कारणों को समझकर मनोचिकित्सकों के अनुसार शारीरिक दंड उचित नहीं है । आज की शिक्षा प्रणाली में प्यार, समझ, सूझ: बुझ व समस्या की जड़ पर पहुँच कर उसका निदान करने में विश्वास होना चाहिए । शारीरिक दंड का आज की शिक्षा नीति में कोई स्थान नहीं है।

प्रश्न 4: सपनों के से दिन पाठ के आधार पर आजकल स्कूली शिक्षा प्रणाली में क्या परिवर्तन आए हैं? (CBSE 2016-17)
उत्तर: आज की स्कूली शिक्षा प्रणाली शारीरिक दंड या किसी भी प्रकार के दंड का विरोध करती है, छात्रों की मनोदशा पर विशेष ध्यान दिया जाता है अब छात्रों को मारना या पीटना कानूनी अपराध है। आजकल बच्चों को सुधारने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते हैं। इस प्रकार उनमें अनुशासन, सम्मान, सहयोग, परस्पर प्रेम, निष्ठा आदि गुणों का विकास होता है। जब बच्चे स्कूल में अच्छा करते हैं, तो उन्हें उपहारों से पुरस्कृत किया जाता है, जैसे ट्रॉफी या प्रमाण पत्र। जो अपने आप में शिक्षा के क्षेत्र में उठाया गया एक बहुत बड़ा कदम है। यूँ भी मारने-पीटने से बच्चों के मन में शिक्षा के प्रति अरुचि ही पैदा होती है। तनाव मुक्त एवं शांत मित्रवत वातावरण में प्रदान की जाने वाली शिक्षा जीवन के लिए अधिक लाभदायक सिद्ध होगी।

प्रश्न 5. सपनों के से दिन पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बचपन का समय सबसे अच्छा होता है। (CBSE 2015-16)
उत्तर: ‘सपनों के से दिन’ पाठ में लेखक के बचपन की मस्ती के दिन बड़े निराले थे। लेखक कहता है कि पूरे साल में केवल वे लोग दो महीने ही पढ़ाई करते थे और बाकी समय मौज मस्ती ही करते थे। पढ़ाई से सबको डर लगता था। लेखक और उसके साथी अक्सर स्कूल जाने में आनाकानी करते थे। लेकिन उन्हें पीटी सर की स्काउट क्लास पसंद थी क्योंकि उन्हें खाकी वर्दी पहनने और कुछ फील्ड स्टंट करने का मौका मिलता था। हालांकि पीटी सर काफी सख्त थे, लेकिन स्कूल के प्रधानाचार्य बहुत दयालु थे।
छुट्टियों में जो भी गृह कार्य मिलता, उसे कल पर टालते रहते और सारी छुट्टियां खेलने-कूदने में ही निकाल देते थे। बाद में जब छुट्टियां खत्म होने का समय आता तो जैसे-तैसे या तो गृह कार्य पूरा कर लेते या फिर गृहकार्य पूरा न कर पाने के कारण शिक्षक की पिटाई को एक सस्ता-सौदा समझकर गृह कार्य को यूँ ही छोड़ देते थे।
लेखक छुट्टियों में गाँव में अपनी नानी के घर जाता और वहाँ पर खूब मौज मस्ती करता। लेखक की नानी उसे खूब लाड प्यार दुलार करती और घी-मक्खन-दूध पिलाती। लेखक पूरे गाँव में मौज मस्ती करता, तालाब में नहाता, रेत के टीलों पर लौटता और खेत-खलिहानों में अपने साथियों के साथ भटकता रहता था। इस तरह ‘सपनों के से दिन’ पाठ में लेखक के बचपन के दिन सबसे अच्छे थे।

प्रश्न 6: छात्रों के नेता ओमा के सिर की क्या विशेषता थी? “सपनों के से दिन” के आधार पर बताइए।
उत्तर: ओमा लेखक के बचपन का मित्र था। वे दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे। ओमा बहुत शरारती और अनुशासनहीन छात्र था। ओमा की बातें, गालियाँ और उसकी मार-पिटाई का ढंग सभी से बहुत अलग था। वह देखने में भी सभी से बहुत अलग था। उसका मटके के जितना बड़ा सिर था, जो उसके ढाई फुट के छोटे कद के शरीर पर ऐसा लगता था जैसे बिल्ली के बच्चे के माथे पर तरबूज रखा हो। बड़े सिर पर नारियल जैसी आँखों वाला उसका चेहरा बंदरिया के बच्चे जैसा और भी अजीब लगता था।। वह लड़ाई में ‘सिर” से ही वार करता था इसलिए बच्चे “ओमा’ को ‘रेल-बंबा’ कहकर पुकारते थे।

प्रश्न 7: हेडमास्टर शर्मा जी का छात्रों के साथ कैसा व्यवहार था?
उत्तर: हेडमास्टर शर्मा जी अनुशासन प्रिय होने के साथ-साथ बहुत ही दयालु और विनम्र व्यक्ति थे। वह बच्चों की पिटाई में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि वह उन्हें प्यार से पढ़ाते थे। जब उन्हें बहुत गुस्सा आता था तो वे छात्रों के गाल पर हल्के से थप्पड़ मारकर उन्हें सुधार देते थे। वे क्रूरता से कोसों दूर थे, इसलिए मास्टर प्रीतमचंद की क्रूरता को बर्दाश्त नहीं कर सके। और उन्हे तुरंत स्कूल से निकलवा दिया। वे एक अच्छे प्रशासक, शिक्षक और बहुत उदार व्यक्ति थे।

प्रश्न 8: गरीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना क्यों कठिन था? ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: गरीब घरों के लड़कों का स्कूल जाना इसलिए कठिन था क्योंकि एक तो गरीबी ही सबसे बड़ी बाधा थी। शुल्क देने, पेन: पेंसिल, किताबें आदि खरीदने के लिए ऐसे परिवार पैसे खर्च नहीं करते थे। दूसरी बात बच्चों को ही पढाई में रूचि न होने के कारण किसी दिन बस्ता तालाब में फेंक आए और उनके माँ-बाप ने भी उनको स्कूल भेजने के लिए कोई जबरदस्ती नहीं की। बच्चा थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें किसी पारिवारिक व्यवसाय या हिसाब-किताब लिखने आदि में झोंक दिया जाता था।

प्रश्न 9: “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक छात्र-जीवन में छुट्टियों के लिए मिले काम को कैसे पूरा करता या।
उत्तर: लेखक छुट्टियों में मिले गृह कार्य को पूरा करने के लिए तरह-तरह की योजनाएँ बनाता था, परंतु छुट्टियों में काम पूरा नहीं कर पाता था। विद्यालय से मिले काम के अनुसार वह समय-सारणी भी बनाता था, परंतु उस काम को पूरा नहीं कर पाने की स्थिति में स्कूल में होने वाली पिटाई का डर अब और ज्यादा सताने लगता। फिर से अपना डर भगाने के लिए सोचते कि दस या पंद्रह सवाल भी आसानी से एक दिन में किए जा सकते हैं। जब ऐसा सोचने तो दिन बहुत छोटे लगने लगते थे। लेखक उस स्थिति में अपने मित्र “ओमा’, की तरह बहादुर बनने की कल्पना करता था। ओमा काम करने की अपेक्षा शिक्षकों द्वारा की गई पिटाई को सस्ता सौदा समझता था।

प्रश्न 10: ‘फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे डर से क्यों कांप उठते थे? “सपनों के से दिन” पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: चौथी श्रेणी में मास्टर प्रीतमचंद बच्चों को फ़ारसी पढ़ाते थे। वे काफी सख्त शिक्षक थे। अगर बच्चे उनके सामने शरारत करे तो वे बच्चों को बहुत डांटते फटकारते थे। बच्चों के मन में डर इतना था कि फ़ारसी की घंटी बजते ही बच्चे काँप उठते थे। एक बार मास्टर प्रीतमचंद ने फ़ारसी का शब्द-रूप याद करने को दिया था और न याद करने पर बच्चों की बुरी तरह पिटाई की, यह सब देखकर हेडमास्टर शर्मा जी सहन नहीं कर सके और उन्हें स्कूल से निलंबित कर दिया, फिर भी बच्चों के मन से डर नही गया वे सोचते थे कि निलंबित होने के बाद भी कहीं मास्टर प्रीतमचंद उन्हें पढ़ाने के लिए न आ जाएँ। राम जी मास्टर या प्रधानाध्यापक जी के कक्षा में आ जाने पर ही उनका यह डर समाप्त होता था।

1. हरिहर काका – Worksheet Solutions

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: हरिहर काका कहानी के लेखक कौन हैं ?

(क) गुरदयाल सिंह

(ख) मिथिलेश्वर

(ग) कोई नहीं

(घ) दयाल सिंह

उत्तर: (ख)

प्रश्न 2: ठाकुरबारी के प्रति गांव वालों के मन में क्या है?
(क) अपार श्रद्धा
(ख) घृणा
(ग) नफरत
(घ) प्रेम
उत्तर:
 (क)

प्रश्न 3: ठाकुरबारी के गांव के लोगों ने मंदिर कैसे बनवाया था?
(क) पैसो से
(ख) ठाकुर के पैसो से
(ग) चंदा इकट्ठा करके
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 4: गांव के लोग अपनी सफलता का श्रेय किसको देते हैं?
(क) सरपंच को
(ख) ठाकुरबारी जी को
(ग) स्वयं को
(घ) कोई नहीं
उत्तर: (ख)

प्रश्न 5: ठाकुरबारी में लोग अपनी श्रद्धा कैसे व्यक्त करते है ?
(क) रुपए देकर
(ख) जेवर
(ग) सभी
(घ) अन्न देकर
उत्तर: (ग)

प्रश्न 6: ठाकुरबारी के नाम पर कितने खेत हैं ?
(क) १० बीघे
(ख) २० बीघे
(ग) ३० बीघे
(घ) २ बीघे
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 7: गांव वालों की अपार श्रद्धा से उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है ?
(क) अंधभक्ति
(ख) अविश्वास
(ग) धार्मिक प्रवृत्ति का
(घ) विश्वास की
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 8: महंत और हरिहर काका के भाई एक ही श्रेणी के क्यों हैं ?
(क) दोनों दुर्व्यवहार करते हैं
(ख) दोनों ने ज़मीन हथियाने का षड्यंत्र किया
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर: 
(ग)

प्रश्न 9: महंत ने हरिहर काका की किस परिस्थिति का लाभ उठाया ?
(क) पारिवारिक मजबूरी का
(ख) गरीबी का
(ग) पारिवारिक नाराजगी का
(घ) नाराजगी का
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 10: महंत ने हरिहर काका को किस आधार पर ब्लैकमेल किया ?
(क) भावनात्मक आधार पर
(ख) परिवार के नाम पर
(ग) धर्म के नाम पर
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 11: कथा वाचक और हरिहर काका के में क्या संबंध है ?
(क) दोनों दोस्त हैं
(ख) एक ही परिवार से हैं
(ग) दोनों एक ही गांव के निवासी हैं
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 12: हरिहर काका कथा वाचक को कैसे घुमाया करते थे ?
(क) साइकिल पर
(ख) अपने कंधे पर बैठा कर
(ग) पैदल
(घ) अंगुली पकड़ कर
उत्तर: 
(ख)

प्रश्न 13: हरिहर काका की संपत्ति के दावेदार कौन थे ?
(क) महंत
(ख) हरिहर काका के भाई
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
 (ग)

प्रश्न 14: हरिहर काका और कथावाचक आपस में कैसे बातें करते थे ?
(क) खुल कर
(ख) छुप कर
(ग) कोई नहीं
(घ) घुल घुल कर
उत्तर: 
(क)

प्रश्न 15: हरिहर काका के गांव में यदि मीडिया होती तो उनकी स्थिति कैसी होती ?
(क) लड़ाई झगड़े होते
(ख) वास्तविकता का सबको पता चलता और उनकी स्थिति बेहतर होती
(ग) कोई नहीं
(घ) बात और बढ़ती
उत्तर:
 (ख)

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। उत्तराधिकारी के कानून पर जो जितना जानता है, उससे दस गुना अधिक उगल देता है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। रहस्य खत्म नहीं होता, आशंकाएँ बनी ही रहती हैं। लेकिन लोग आशंकाओं को नजरअंदाज कर अपनी पक्षधरता शुरू कर देते हैं।

हरिहर काका सभी के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए थे। हरिहर काका मामले में गाँव वालों की राय तर्क सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2022-23)

उत्तर: गाँव वालों की अलग-अलग राय होने के कारण दो दल बन गए थे।
गाँव में एक तरफ़ चटोरे किस्म के लोग थे जो ठाकुरबारी में प्रसाद के बहाने तर माल खाते थे। वे महंत के पक्षधर थे। वे चाहते थे कि हरिहर काका को अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिख देनी चाहिए। इससे उन्हें पुण्य मिलेगा तथा उनकी कीर्ति स्थायी रहेगी।
दूसरा दल ठाकुरबारी के धार्मिक पाखंड को भली- भांति जानने वालों का था। वे भाइयों के परिवार के समर्थक थे। उनकी राय थी कि हरिहर काका को अपनी जमीन भाइयों के नाम लिख देनी चाहिए। उन्हें यही राय न्यायपूर्ण प्रतीत होती थी।

प्रश्न 2: कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं  देखा हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनः स्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती है, मुँह खोलने की जरूरत नहीं पड़ती।
हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (CBSE 2021-22)
उत्तर: हरिहर काका और लेखक के बीच बहुत ही मधुर एवं आत्मीय संबंध थे | लेखक गाँव में जिन लोगों का सम्मान करते थे हरिहर काका उनमें से एक थे। हरिहर काका की आँखों में लेखक ने उस दुख को देखा जो रिश्तों की गर्माहट के भावों को नकारता हुआ तथा पाँव पसारती हुई, स्वार्थ लिप्सा और धर्म की आड़ में फलने-फूलने का अवसर पा रही हिंसा प्रवृत्ति को उजागर करता है।
ठाकुरबारी के महंत एवं हरिहर काका के भाइयों का एकमात्र उद्देश्य हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन को हथियाना था। इसके लिए उन्होंने कई तरह के हथकंडे अपनाए और हरिहर काका पर बहुत जुल्म और अत्याचार किए। उनके विश्वास को ठेस पहुँचाई। ठाकुरबारी के महंत ने ज़बरदस्ती सादे कागज़ पर अँगूठे के निशान लिए, उन्हें मारा-पीटा तथा हाथ पाँव और मुँह बांधकर कमरे में बंद कर दिया। हरिहर के भाइयों ने भी ऐसा ही किया। भौतिक सुखों की होड़, रिश्तों की अहमियत को औपचारिकता और आडंबर का जामा पहनाना इत्यादि के कारण हरिहर की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई थी।

प्रश्न 3: महंत और अपने भाई हरिहर काका को एक जैसे क्यों लगने लगते है? ‘हरिहर काका’ कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए (CBSE 2020-21)|
उत्तर: हरिहर काका को महंत और अपने सगे भाई एक जैसे इसलिए लगने लगते है क्योंकि दोनों ही स्वार्थ में डूबे हुए थे । और दोनों ही हरिहर काका के जमीन-जायदाद को हड़पना चाहते थे ।और उनकी जमीन को पाने के लिए वे किसी भी हद तक गिर सकते थे। यहां तक कि दोनों हरिहर काका की जान तक लेने को तैयार थे । दिखावा करने के अलावा दोनों कुछ नहीं करते थे ।

प्रश्न 4: ‘हरिहर काका एक सीधे साधे और भोले किसान की अपेक्षा चतुर हो चले थे’ कथन के संदर्भ में 60-70 शब्दों में विचार व्यक्त कीजिए (CBSE 2019-20)
उत्तर: 
हरिहर काका को जहाँ पहले सीधे-सादे और भोले किसान के रूप में चित्रित किया गया है, वहीं कटु अनुभवों के चलते उनमें चातुर्य कौशल भी दिखाई पड़ता है। अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। इसलिए अपनी ज़मीन-जायदाद को लालची लोगो से बचाना चाहते थे। एक बार ठाकुरबारी के महंत ने भी हरिहर काका से लाभ उठाने की योजना बनाई । महंत ने काका से कहा कि ठाकुरबारी के नाम जमीन दान करने से उन्हें पुण्य मिलेगा और वे सीधे स्वर्ग जाएंगे। और काका के सगे भाई भी उनसे उनकी ज़मीन-जायदाद को अपने नाम करने को कहते हैं और इसके बदले में उनका आदर-सत्कार व देखभाल करते हैं। हरिहर काका महंत और अपने भाइयों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते, पर किसी की भी बात को नहीं मानते, क्योंकि वह जानते थे, कि इसी गाँव में कई लोगों ने अपनी जमीन-जायदाद को अपने रिश्तेदारों या किसी और के नाम लिख दिया। बाद में उनका जीवन किसी कुत्ते की तरह हो गया और उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं था। हरिहर काका धोखे में नहीं पड़ना चाहते थे। इसलिए वे जीते-जी अपनी जमीन किसी के भी नाम नहीं करना चाहते थे।

प्रश्न 5: ‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर बताइए कि धर्म के नाम पर किस तरह साधारण जन की भावनाओं से खेला जाता है? (CBSE 2018-19)

उतर:  ‘हरिहर काका’ पाठ में धर्म के नाम पर सीधे – सादे गाँव के लोगों को ठाकुरबारी के नाम पर बेवकूफ बनाया जाता है और धर्म के ठेकेदारों द्वारा जैसे महंत इत्यादि लोग केवल आराम से ठाट – बाट का जीवन व्यतीत करते है तथा लोगों से पैसा, जमीन हड़पना, समय आने पर गुंडागर्दी मारपीट या हिंसा पर उतर आना और काका जैसे लोगों से जमीन हथियाने के लिए पहले बहलाना – फुसलाना फिर न मानने उन्हें बंधक बनाकर जबरदस्ती अंगूठा लगवाना इत्यादि काम करते है।

प्रश्न 6: समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? ‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर बताइए । (CBSE 2017-18)

उतर:  ‘आधुनिक युग रिश्ते भावनाओं की सीमाओं से परे केवल धन-दौलत पर आधारित है, हरिहर काका अपनी मर्जी से चाहे सब कुछ अपने भाइयों को ही देते लेकिन भाइयों के लालच व आतुर स्वभाव के कारण उनकी असलियत सामने आ गई, ठाकुरबारी के महंत यूं तो धर्म का ठेकेदार परंतु वह भी लालच के कारण इंसानियत की सारी हदों को पार कर गया। हरिहर काका को न तो अपनों से प्यार मिला और न ही दूसरों से हमदर्दी। आज के रिश्ते केवल दिखावे के लिए है और अंदर से खोखले।

प्रश्न 7: हरिहर काका पाठ के कौन से अंश ने आपके मन को अधिक प्रभावित किया और क्यों? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: यह सत्य है कि हरिहर काका पाठ का कुछ अंश बहुत मार्मिक हैं जो पाठकों के मन को छू लेते हैं, परंतु जब अपने सगे भाइयों के द्वारा हरिहर ‘काका’ पर हमला किया जाता है, तो वह अंश ‘क्रूरता’ की सीमा को पार कर जाता है। आज समाज से लोगों के संस्कार और पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं। ज्यादातर लोग अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते रखते हैं। लेकिन सच यह है कि सुख-दुख में रिश्ते ही काम आते हैं, परंतु यह अत्यंत दुख की बात है आज की दुनिया में लोग स्वार्थी होते जा रहे हैं। इससे रिश्तों से प्यार और भाईचारे की भावना गायब हो रही है। इस कहानी में भी अगर पुलिस समय पर नहीं आती तो परिवार वाले हरिहर काका की हत्या कर देते। आज रिश्तों से ज्यादा पैसे को महत्व दिया जा रहा है।

प्रश्न 8: हरिहर काका ने आँगन में थाली उठाकर क्यों फेंक दी?
उत्तर: हरिहर काका अपने घर के दालान में बीमार पड़े थे, लेकिन उनके भाई के घर वाले उनका ध्यान नहीं रख रहे थे । इसलिए हरिहर काका बहुत दुखी थे। इसी बीच शहर में क्लर्की करने वाले भतीजे का एक दोस्त गांव आया तो घर में उसके लिए अच्छे पकवान बनाए गए, लेकिन हरिहर काका को रूखा-सूखा ही खाना परोसा। इसी कारण हरिहर काका ने खाने की थाली उठाकर आँगन में फेंक दी। 

प्रश्न 9: ‘अपने भी पराये बन जाते हैं- संपत्ति के लिए’ हरिहर काका कहानी के आधार पर सिद्ध कीजिए।
उत्तर: हरिहर काका कहानी से यह पता चलता है कि संपत्ति के लिए अपने भी पराये बन जाते हैं। हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन के लिए गाँव के ठाकुरबारी के महंत व साधु संत ही नहीं, बल्कि हरिहर काका के सगे भाई-बन्धु भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने लग गए थे। एक बार उनके भाइयों ने उनके साथ बहुत ही ज्यादा बुरा व्यवहार किया, जबरदस्ती बहुत से कागजों पर उनके अँगूठे के निशान ले लिए और उनके विरोध करने पर वे काका पर प्रहार भी करने लगे थे। काका के चिल्लाने पर उन्होंने उनके मुँह में कपड़ा भी ठूंस दिया। अब ऐसा कोई भी बुरा व्यवहार बाकी नहीं रहा है जो उनके साथ न हुआ हो । इस प्रकार हम देखते हैं कि हरिहर काका को अपने ही लोगों से ठेस पहुँची।

प्रश्न 10: हरिहर काका की नजर में महंत कब घृणित और दुराचारी नज़र आने लगा?
उत्तर:  हरिहर काका गाँव के एक सम्मानित बुजुर्ग थे । उनके पास पंद्रह बीघा जमीन थी । पर उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए उनके तीनों भाई तथा ठाकुरबारी के महंत उनकी जमीन को हड़पने के लालच में थे। हरिहर काका के जिंदा रहते हुए अपनी जमीन किसी के नाम न लिखने के फैसले ने महंत को परेशान कर दिया। तब महंत ने काका को अगवा कर जमीन के कागजात पर अंगूठा लगाने को मजबूर किया और इसके बाद उन्हें बहुत बुरी तरह प्रताड़ित किया। महंत के इसी छलावे के कारण हरिहर काका को वह घृणित और दुराचारी नजर आने लगा।

3. टोपी शुक्ला – Textbook Worksheet – ||

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: किसके पिता जी हिंदुस्तान में पैदा होने वाले पहले बच्चे थे ?
(क) टोपी के
(ख) इफ़्फ़न के
(ग) किसी के नहीं
(घ) नौकरानी के

प्रश्न 2: टोपी इफ़्फ़न से क्या कहता है ?
(क) दादी बदलने को
(ख) खाना बदलने को
(ग) टोपी बदलने को
(घ) बदलने को

प्रश्न 3: इफ़्फ़न टोपी को क्या कहता ?
(क) टोपी की दादी बूढ़ी है जल्दी मर जाएगी
(ख) उसके पिता की ट्रांसफर हो जाएगी
(ग) कोई नहीं
(घ) पिता की ट्रांसफर हो जाएगी

प्रश्न 4: कबाब किसने खाए थे ?
(क) टोपी ने
(ख) इफ़्फ़न ने
(ग) टोपी के भाई मुन्नी बाबू ने
(घ) दादी ने

प्रश्न 5: किसके पिता का तबादला हो गया ?
(क) टोपी के
(ख) इफ़्फ़न के
(ग) नौकरानी के
(घ) किसी के नहीं

प्रश्न 6: टोपी ने क्या कसम खाई ?
(क) किसी से दोस्ती नहीं करेगा
(ख) इफ़्फ़न के साथ जायेगा
(ग) किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा जिसके पिता की नौकरी बदली वाली हो
(घ) लड़के से मित्रता नहीं करेगा

प्रश्न 7: किसके जाने के बाद टोपी अकेला हो गया ?
(क) इफ़्फ़न के जाने के बाद
(ख) इफ़्फ़न के पिता के जाने के बाद
(ग) मुन्नी बाबू के जाने के बाद
(घ) पिता के जाने के बाद

प्रश्न 8: इफ़्फ़न की दादी शादी में गीत क्यों नहीं गा पाई ?
(क) इफ़्फ़न के दादा के कारण
(ख) भूल गई थी
(ग) मुस्लिम होने के कारण
(घ) दादा के कारण

प्रश्न 9: टोपी ने नौंवी कक्षा कौन सी श्रेणी में पास की ?
(क) पहली
(ख) दूसरी
(ग) तीसरी
(घ) चौथी

प्रश्न 10: टोपी के पास होने पर उसकी दादी ने क्या कहा ?
(क) शाबाश
(ख) तीसरे वर्ष में तीसरी श्रेणी में पास तो हो गए हो
(ग) कुछ नहीं
(घ) पास तो हो गए हो

प्रश्न 11: टोपी के पिता को क्या पसंद नहीं था?
(क) टोपी का इफ़्फ़न से दोस्ती रखना
(ख) टोपी के बात करने का ढंग
(ग) टोपी का फेल होना
(घ) टोपी का अपने भाइयों से झगड़ना

प्रश्न 12: टोपी के पिता को भी यह पसंद नहीं था कि टोपी इफ़्फ़न से दोस्ती रखे, पर उन्होंने इसका फ़ायदा कैसे उठाया?
(क) टोपी को पास करवा कर
(ख) अपनी दूकान को नया बनवा कर
(ग) दुकान के लिए कपड़े और चीनी का परमिट ले कर
(घ) टोपी का उसके भाइयों से झगड़ा सुलझा कर

प्रश्न 13: टोपी का असली नाम क्या था?
(क) नारायण शुक्ला
(ख) बलभद्र नारायण शुक्ला
(ग) बलभद्र शुक्ला
(घ) टोपी शुक्ला

प्रश्न 14: सय्यद जरगाम मुरतुज़ा को सभी प्यार से क्या पुकारते थे?
(क) इफ़्फ़न
(ख) सय्यद जरगाम
(ग) सय्यद मुरतुज़ा
(घ) सय्यद

प्रश्न 15: इफ़्फ़न की दादी को पति से क्या एक शिकायत थी?
(क) हर वक्त जब भी देखो बस मौलवी ही बने रहते थे
(ख) हर वक्त टोपी पहने रहते थे
(ग) जब भी देखो घूमते रहते थे
(घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 16: इफ़्फ़न की दादी टोपी से हमेशा कौन सा सवाल पूछ कर बात आगे बढ़ाती थी?
(क) कि उसकी दादी क्या कर रही है
(ख) कि उसकी अम्मा क्या कर रही है
(ग) कि उसके पिता क्या कर रहे है
(घ) कि वह क्या खाना चाहता है

प्रश्न 17: टोपी ने क्या कसम खाई?
(क) किसी से दोस्ती नहीं करेगा
(ख) इफ़्फ़न के साथ जायेगा
(ग) किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा जिसके पिता की नौकरी बदली वाली हो
(घ) लड़के से मित्रता नहीं करेगा

प्रश्न 18: कबाब किसने खाये थे?
(क) टोपी ने
(ख) इफ़्फ़न ने
(ग) टोपी के भाई मुन्नी बाबू ने
(घ) दादी ने

प्रश्न 19: इफ़्फ़न की दादी शादी में गीत क्यों नहीं गा पाई?
(क) इफ़्फ़न के दादा के कारण
(ख) क्योंकि वह भूल गई थी
(ग) टोपी के कारण
(घ) इफ़्फ़न के कारण

प्रश्न 20: टोपी इफ़्फ़न से क्या कहता है?
(क) दादी बदलने को
(ख) टोपी बदलने को
(ग) खाना खाने को
(घ) घर बदलने को

Extra Questions

प्रश्न 1: इफ़्फ़न की दादी टोपी को अपने ही परिवार के सदस्यों के उपहास से किस तरह बचाती थी?
या
इफ़्फ़न की दादी टोपी को क्यों डाँटती थी और टोपी को उनकी डाँट कैसी लगती थी?

प्रश्न 2:  इफ़्फ़न और उसकी दादी के संबंधों पर प्रकाश डालिए और स्पष्ट कीजिए कि बच्चे प्यार के भूखे होते हैं। वे उसी के बनकर रह जाते हैं जिनसे उन्हें प्यार मिलता है।

प्रश्न 3: कुछ बच्चों को अपने माता-पिता के पद और हैसियत का कुछ ज्यादा ही घमंड हो जाता है। ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4: इफ़्फ़न की परदादी और दादी मुस्लिम होते हुए भी कौन से हिन्दू धर्म का अनुसरण करती थी?

प्रश्न 5: ऐसी कौन सी बात हो गई थी, जिसने टोपी को मुसीबत में डाल दिया था?

प्रश्न 6: टोपी ने अपना कोट नौकरानी के बेटे को क्यों दिया और इसका खामयाज़ा टोपी को कैसे भुगतना पड़ा?

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: ‘अम्मी’ शब्द पर टोपी के घरवालों की क्या प्रतिक्रिया हुई?

प्रश्न 2: दस अक्तूबर सन पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है?

प्रश्न 3: टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही?

प्रश्न 4: पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से ही विशेष स्नेह क्यों था?

प्रश्न 5: इफ़्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली-सा क्यों लगा?

प्रश्न 6: टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मज़हब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथा के आलोक में अपने विचार लिखिए।

प्रश्न 7: टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया। बताइए:
(क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे?

(ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

(ग) टोपी की भावनात्मक परेशानियों को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए।

प्रश्न 8: इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में क्यों चला गया?

वर्कशीट के समाधान “टोपी शुक्ला – 2

3. टोपी शुक्ला – Textbook Worksheet – |

बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1: टोपी शुक्ला कहानी का लेखक कौन है ?
(क) गुरदयाल सिंह
(ख) खुशवंत सिंह
(ग) राही मासूम रज़ा
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 2: टोपी को बचपन में कहाँ से प्यार मिलता था ?
(क) अपने मित्र की दादी माँ से
(ख) अपने परिवार की नौकरानी से
(ग) दोनों से
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 3: टोपी का पहला मित्र कौन था ?
(क) इफ़्फ़न
(ख) उसकी माता जी
(ग) उनकी नौकरानी
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 4: किसके पास रहते हुए टोपी स्वयं को कभी अकेला नहीं समझता था ?
(क) नौकरानी के पास
(ख) इफ़्फ़न के पास
(ग) किसी के पास नहीं
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 5: टोपी कौन सी कक्षा में दो बार फेल हुआ ?
(क) आठवीं
(ख) दसवीं
(ग) नौवीं कक्षा में
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 6: टोपी की किस बात से घर में बवाल खड़ा हो गया था ?
(क) नौवीं कक्षा में फेल होने से
(ख) माता जी को अम्मी बुलाने से
(ग) किसी बात से नहीं
(घ) दोस्तों के साथ खेलने से

प्रश्न 7: इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थी ?
(क) खुली हवा में सांस लेने के लिए
(ख) दूध दही और घी खाने के लिए
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 8: टोपी शुक्ला पाठ का मुख्य पात्र कौन है ?
(क) टोपी
(ख) इफ़्फ़न
(ग) इफ़्फ़न की दादी
(घ) नौकरानी

प्रश्न 9: टोपी शुक्ला पाठ का मूल भाव क्या है ?
(क) बचपन की मासूमियत और प्रेम भाव में अपनापन दर्शाना
(ख) बचपन की लड़ाईया दिखाना
(ग) कोई नहीं
(घ) प्रेमभाव

प्रश्न 10: टोपी को अपनी दादी सुभद्रा अच्छी क्यों नहीं लगती ?
(क) क्योंकि सुंदर नहीं है
(ख) लड़ती है
(ग) डांटती रहती है
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 11: उर्दू और हिंदी कौन सी भाषा के दो नाम हैं ?
(क) हिंदवी
(ख) फ़ारसी
(ग) कोई नहीं
(घ) उर्दू

प्रश्न 12: टोपी खुद को भरे पूरे घर में अकेला क्यों समझता है ?
(क) क्योंकि सब उसको डांटे है
(ख) मुन्नी बाबू और भैरव भी सब को उसके विरुद्ध भटकाते हैं
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 13: कौन दोनों दूध देने वाली गाय चराते थे ?
(क) पैगंबर मोहम्मद और अवतार श्री कृष्ण
(ख) टोपी और इफ़्फ़न
(ग) कोई नहीं
(घ) अवतार

प्रश्न 14: लेखक नामों के चक्कर को अजीब क्यों मानता है ?
(क) क्योंकि नाम से किसी का स्वरूप नहीं बदलता
(ख) क्योंकि नाम सभी भाषा में होते है
(ग) कोई नहीं
(घ) क्योंकि नाम नाम होते हैं

प्रश्न 15: मरते समय इफ़्फ़न की दादी को अपना मायका क्यों याद आ रहा था ?
(क) अपनी माँ के कारण
(ख) अपनी खूबसूरत यादो और वहाँ बिताए अच्छे समय के कारण
(ग) कोई नहीं
(घ) अच्छे समय के कारण

प्रश्न 16: इफ़्फ़न और टोपी अलग अलग धर्म के थे, फिर भी एक थे, ऐसे क्यों ?
(क) क्यूंकि वे धर्म को नहीं मानते थे
(ख) वे प्यार को मानते थे
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 17: कहानी कहते हुए इफ़्फ़न की दादी ऐसे क्यों कहती थी कि “आँखों की देखी नहीं कहती। …… “?
(क) क्योंकि कहानियाँ सुनी हुई थी
(ख) कहानियाँ देखी नहीं थी
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 18: लेखक के अनुसार आपस में प्यार कब पनपता है ?
(क) जब विचार मिलते हो
(ख) जब धर्म मिलते हो
(ग) जब परिवार मिलते हो
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 19: टोपी प्यार की चाहत में इधर उधर क्यों भटकता था ?
(क) क्यूंकि उसे वहां से प्यार मिलता था
(ख) उसके परिवार से उसे प्यार नहीं मिलता था
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं

प्रश्न 20: परिवार का आधार क्या होता है ?
(क) विश्वास और प्यार
(ख) पैसा
(ग) धर्म
(घ) प्यार

Extra Questions

प्रश्न 1: टोपी एक दिन के लिए ही सही अपने बड़े भाई मुन्नी बाबू से क्यों बड़ा होना चाहता था?

प्रश्न 2: लेखक ने इफ़्फ़न और टोपी को दो आज़ाद व्यक्ति क्यों कहा हैं?

प्रश्न 3: प्रेम जाति और उम्र का बंधन नहीं मानता है। “टोपी शुक्ला” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4: किन बातों से पता चलता है कि टोपी को इफ्फ़न की दादी बहुत प्रिय थीं?

प्रश्न 5: दसवीं कक्षा में पहुँचने में टोपी को दो साल क्यों लग गए?

प्रश्न 6: जब अंग्रेजी-साहित्य के मास्टर ने टोपी को कक्षा में बेइज्जत किया तो अबदुल वहीद ने ऐसी कौन सी बात कही जिससे टोपी को गुस्सा आ गया?

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1 बालमन किसी स्वार्थ या हिसाब से चलायमान नहीं होता। बचपन प्रेम के रिश्ते के अलावा किसी और रिश्ते को कबूल नहीं करता।
‘टोपी शुक्ला’ पाठ में टोपी अपने परिवार के एक सदस्य को बदलने की बात करता है। उसकी सोच के आधार पर उसकी मनोदशा का वर्णन कीजिए। (CBSE 2022-23)

प्रश्न 2: वह तो जब डॉक्टर साहब की जमानत जब्त हो गई तब घर में ज़रा सन्नाटा हुआ और टोपी ने देखा कि इम्तहान सिर पर खड़ा है।
वह पढ़ाई में ‘जुट गया। परंतु ऐसे वातावरण में क्या कोई पढ़ सकता था? इसलिए उसका पास ही हो जाना बहुत था।
“वाह!” दादी बोलीं, “भगवान नज़रे-बद से बचाए। रफ़्तार अच्छी है। तीसरे बरस तीसरे दर्जे में पास तो हो गए।….”
टोपी ज़हीन होने के बावजूद कक्षा में दो बार फेल हो गया। जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों से हार मान लेना कहाँ तक उचित है?टोपी जैसे बच्चों के विषय में आपकी क्या राय है? (CBSE 2021-22)

प्रश्न 3: रामदलुारी की मार से टोपी पर क्या प्रभाव पड़ा? ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर स्पष्ट करें। (CBSE 2020-21)

प्रश्न 4. ‘मित्रता और आत्मीयता जाति व भाषा के बंधनों से परे होते है’ – टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। (CBSE 2017-18)

प्रश्न 5. टोपी शुक्ला पाठ के आधार पर बच्चो की मनोवृत्ति पर किस प्रकार प्रकाश डाला गया है | (CBSE 2016-17)

प्रश्न 6: इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है?

प्रश्न 7: इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं?

प्रश्न 8: दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाई?

वर्कशीट के समाधान “टोपी शुक्ला – 1