प्रश्न 1:गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है? उत्तर: गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में यह व्यंग्य छिपा है कि असल में उद्धव भाग्यवान नहीं, बल्कि बहुत दुर्भाग्यशाली हैं। वे कृष्ण के साथ रहते हुए भी उनके अनोखे प्रेम और सौंदर्य का आनंद नहीं ले पाते। वे प्रेम की गहराई और उसमें मिलने वाले सच्चे सुख से बिल्कुल अनजान हैं।
प्रश्न 2: उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है? उत्तर: गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना निम्नलिखित उदाहरणों से की है –
गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते से की है जो जल में रहते हुए भी उससे प्रभावित नहीं होता है|
वह जल में रखे तेल के मटके के समान हैं, जिस पर जल की एक बूँद भी टिक नहीं पाती।
प्रश्न 3: गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं? उत्तर: गोपियों ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं-
गोपियाँ उद्धव के व्यवहार को कमल के पत्ते के समान बताती हैं जो पानी में रहकर भी उससे अछूता रहता है यानी वे प्रेम के मूरत कृष्ण के संग रहकर भी उसका अर्थ नहीं जान पाए हैं|
गोपियाँ उन्हें ‘बड़भागी’ कहती हैं जो कृष्ण के संग रहकर भी प्रेम के बंधनों से मुक्त है| उन्हें प्रेम के मायने नहीं पता हैं|
वे उद्धव के योग सन्देश को कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं जो उनसे नहीं खाई जाती यानी वे उन बातों को नहीं समझ सकतीं|
प्रश्न 4: उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया? उत्तर: गोपियाँ श्रीकृष्ण के आगमन की आशा में बैचैन थीं। वे एक-एक दिन गिन रही थी और अपने तन-मन की व्यथा को चुपचाप सहती हुई कृष्ण के प्रेम रस में डूबी हुई थीं। परन्तु कृष्ण ने स्वयं ना आकर योग का संदेश देने के लिए उद्धव को भेज दिया। विरह की अग्नि में जलती हुई गोपियों को जब उद्धव ने कृष्ण को भूल जाने और योग-साधना करने का उपदेश देना प्रारम्भ किया, तब गोपियों की विरह वेदना और भी बढ़ गयी । इस प्रकार उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरह अग्नि में घी का काम किया।
प्रश्न 5: ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है? उत्तर: ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से प्रेम की मर्यादा न रहने की बात की जा रही है। कृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ उनके वियोग में जल रही थीं। कृष्ण के आने पर ही उनकी विरह-वेदना मिट सकती थी, परन्तु कृष्ण ने स्वयं न आकर उद्धव को योग संदेश के साथ भेज दिया जिसने गोपियों के उनकी मर्यादा का त्याग करने पर आतुर कर दिया है|
प्रश्न 6: कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ? उत्तर: गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को विभिन्न प्रकार से दिखाया है- गोपियों ने अपनी तुलना उन चीटियों के साथ की है जो गुड़ (श्रीकृष्ण भक्ति) पर आसक्त होकर उससे चिपट जाती है और फिर स्वयं को छुड़ा न पाने के कारण वहीं प्राण त्याग देती है।उन्होंने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताया है। जिस प्रकार हारिल पक्षी सदैव अपने पंजे में कोई लकड़ी अथवा तिनका पकड़े रहता है, उसे किसी भी दशा में नहीं छोड़ता। उसी प्रकार गोपियों ने भी मन, कर्म और वचन से कृष्ण को अपने ह्रदय में दृढ़तापूर्वक बसा लिया है।वे जागते, सोते स्वप्नावस्था में, दिन-रात कृष्ण-कृष्ण की ही रट लगाती रहती हैं।
प्रश्न 7: गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है ? उत्तर: गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा ऐसे लोगों को देने की बात कही है जिनका मन चंचल है और इधर-उधर भटकता है। उद्धव अपने योग के संदेश में मन की एकाग्रता का उपदेश देतें हैं, परन्तु गोपियों का मन तो कृष्ण के अनन्य प्रेम में पहले से ही एकाग्र है। इस प्रकार योग-साधना का उपदेश उनके लिए निरर्थक है। योग की आवश्यकता तो उन्हें है जिनका मन स्थिर नहीं हो पाता, इसीलिये गोपियाँ चंचल मन वाले लोगों को योग का उपदेश देने की बात कहती हैं।
प्रश्न 8: प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें। उत्तर: गोपियों ने योग साधना को निरर्थक बताया है| उनके अनुसार यह उन लोगों के लिए हैं जिनका मन अस्थिर है परन्तु गोपियों का हृदय तो श्रीकृष्ण के लिए स्थिर है| वे उनकी भक्ति में पूरी तरह से समर्पित हैं| योग ज्ञान उनके लिए कड़वी ककड़ी के समान है जिसे खाना बहुत ही मुश्किल है। यह ज्ञान गोपियों के लिए बिमारी से अधिक कुछ नहीं है|
प्रश्न 9: गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए ? उत्तर: गोपियों के अनुसार राजा का धर्म है कि वह प्रजा को ना सताए और प्रजा के सुखों का ख्याल रखे|
प्रश्न 10: गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन सा परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं ? उत्तर: गोपियों को लगता है कि कृष्ण ने अब राजनीति सिख ली है। उनकी बुद्धि पहले से भी अधिक चतुर हो गयी है। पहले वे प्रेम का बदला प्रेम से चुकाते थे, परंतु अब प्रेम की मर्यादा भूलकर योग का संदेश देने लगे हैं। कृष्ण पहले दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित रहते थे, परंतु अब अपना भला ही देख रहे हैं। उन्होंने पहले दूसरों के अन्याय से लोगों को मुक्ति दिलाई है, परंतु अब नहीं। श्रीकृष्ण गोपियों से मिलने के बजाय योग के शिक्षा देने के लिए उद्धव को भेज दिए हैं। श्रीकृष्ण के इस कदम से गोपियों के मन और भी आहत हुआ है। कृष्ण में आये इन्ही परिवर्तनों को देखकर गोपियाँ अपनों को श्रीकृष्ण के अनुराग से वापस लेना चाहती है।
प्रश्न 11: गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए? उत्तर: गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ इस प्रकार है – साहसी – गोपियों पूरी तरह से निडर हैं| वह उद्धव को कोसने से परहेज नहीं करतीं| वह उनके योग साधना के सन्देश को कड़वी ककड़ी और बिमारी बताती हैं| व्यंग्यात्मकता – गोपियों ने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से व्यंग्य करती हैं| वे उद्धव को ‘बड़भागी’ कहती हैं चूँकि वह श्रीकृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते रहे| यह कहकर वह उद्धव का उपहास करती हैं| स्पष्टता – वे स्पष्ट शब्दों में उद्धव को बताती हैं कि वे कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह से लीन हैं इसलिए उनके योग सन्देश का उनपर कुछ असर नहीं पड़ने वाला है|
प्रश्न 12: संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ बताइये। उत्तर: भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ हैं-
निर्गुण और निराकार भक्ति से ज्यादा सगुण और साकार भक्ति को ज्यादा महत्व दिया गया है|
योगसाधना का महत्व प्रेम की एकनिष्ठाता के सामने कम है|
गोपियों विरह वेदना झेल रही हैं|
गोपियों ने सरलता, मार्मिकता, उपालंभ, व्यगात्म्कथा, तर्कशक्ति आदि के द्वारा उद्धव के ज्ञान योग को तुच्छ सिद्ध किया है।
गोपियों ने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताकर अनन्य प्रेम का परिचय दिया है|
अनुप्रास, उपमा, दृष्टांत, रूपक, व्यतिरेक, विभावना, अतिशयोक्ति आदि अनेक अलंकारों का सुन्दर प्रयोग किया है।
शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।
इसमें भी संगीतात्म्कता का गुण सहज ही दृष्टिगत होता है।
रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 13: गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए| उत्तर: गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, हम निम्न तर्क दे सकते हैं –
प्रेम कर विरह की वेदना के साथ योग साधना की शिक्षा देना कहाँ का न्याय है?
अपनी बात पूरी ना कर पाने वाले कृष्ण एक धोखेबाज हैं|
कृष्ण अपने अन्य प्रेम करने वाले सगों को योग साधना का पाठ क्यों नहीं पढ़ाते?
प्रश्न 14: उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखिरत हो उठी? उत्तर: गोपियों के पास उनके मन श्री कृष्ण के लिए प्रेम तथा भक्ति की अद्भुत शक्ति थी जिस कारण उद्धव जैसे ज्ञानी को भी उन्होंने अपने तर्कों से हरा दिया|
प्रश्न 15: गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए। उत्तर: गोपियों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि श्री कृष्ण ने सीधी उनसे प्रेम को भूलाने की बात ना कर उन्हें उद्धव द्वारा योग संदेश का माध्यम अपनाने को कह रहे हैं| गोपियों का कथन कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं, आज की राजनीति में नजर आ रहा है। आज के राजनीति में नेता भी मुद्दों के बारे में साफ़-साफ़ नहीं कहते और मुद्दों को घुमा-फिराकर पेश करते हैं|
प्रश्न 1: इफ़्फ़न टोपी शुक्ला की कहानी का महत्त्वपूर्ण हिस्सा किस तरह से है? उत्तर: इफ़्फ़न और टोपी शुक्ला दोनों गहरे दोस्त थे। एक दूसरे के बिना अधूरे थे परन्तु दोनों की आत्मा में प्यार की प्यास थी। इफ़्फ़न तो अपने मन की बात दादी को या टोपी को कह कर हल्का कर लेता था परन्तु टोपी के लिए इफ़्फ़न और उसकी दादी के अलावा कोई नहीं था। अत इफ़्फ़न वास्तव में टोपी की कहानी का अटूट हिस्सा है।
प्रश्न 2: इफ़्फ़न की दादी अपने पीहर क्यों जाना चाहती थीं? उत्तर: इफ़्फ़न की दादी मौलवी की बेटी न होकर ज़मीदार की बेटी थी। वह वहाँ दूध, घी, दही खाती थी। लखनऊ आकर वह इसके लिए तरस गई क्योंकि यहाँ मौलविन बन कर रहना पड़ता था। इसलिए उन्हें पीहर जाना अच्छा लगता था।
प्रश्न 3: इफ़्फ़न की दादी अपने बेटे की शादी में गाने-बजाने की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर पाई? उत्तर: दादी का विवाह मौलवी परिवार में हुआ था जहाँ गाना बजाना पसंद नहीं किया जाता था। इसलिए बेचारी दिल मसोस कर रह गईं।
प्रश्न 4: “अम्मी” शब्द पर टोपी के घरवालों की क्या प्रतिक्रिया हुई? उत्तर: “अम्मी” शब्द को सुनते ही सबकी नज़रें टोपी पर पड़ गई। क्योंकि यह उर्दू का शब्द था और टोपी हिंदू था। इस शब्द को सुनकर जैसे परम्पराओं की दीवारें डोलने लगीं। घर में सभी हौरान थे। माँ ने डाँटा, दादी गरजी और टोपी की जमकर पिटाई हुई।
प्रश्न 5: दस अक्तूबर सन् पैंतालीस का दिन टोपी के जीवन में क्या महत्त्व रखता है? उत्तर: दस अक्तूबर सन् पैंतालिस को इफ़्फ़न के पिता का तबादला हो गया और वे चले गए। अपने प्रिय दोस्त के चले जाने से वह बहुत दुखी हुआ। उसने कसम खाई कि वह कोई ऐसा दोस्त नहीं बनाएगा जिसकी बदली हो जाती है। एक तो इफ़्फ़न की दादी जिससे वह बहुत प्यार करता था वह नहीं रहीं फिर इफ़्फ़न चला गया तो यह दिन उसके लिए महत्वपूर्ण दिन बन गया।
प्रश्न 6: टोपी ने इफ़्फ़न से दादी बदलने की बात क्यों कही? उत्तर: इफ़्फ़न की दादी टोपी को बहुत प्यार करती थी। उनकी मीठी-मीठी बोली उसे तिल के लडू या शक्कर गुड जैसी लगती थी। टोपी की माँ भी ऐसा ही बोलती थी परन्तु उसकी दादी उसे बोलने नहीं देती थी। उधर इफ़्फ़न के दादा जी व अम्मी को उनकी बोली पंसद नहीं थी। अतःइफ़्फ़न की दादी और टोपी की माँ दोनों एक स्वर की महिलाएँ थीं। यही सोचकर टोपी ने दादी बदलने की बात की।
प्रश्न 7: पूरे घर में इफ़्फ़न को अपनी दादी से विशेष स्नेह क्यों था? उत्तर: इफ़्फ़न की दादी उसे बहुत प्यार करती थी, हर तरह से उसकी सहायता करती थी। उसके अब्बू अम्मी उसे डाँटते थे, उसकी बाजी औरनुज़हत भी उसको परेशान करती थी। दादी उसको रात में अनार परी, बहराम डाकू, अमीर हमला, गुलब काबली, हातिमताई जैसी अनेक कहानियाँ सुनाती थी। इसी कारण वह अपनी दादी से प्यार करता था।
प्रश्न 8: इफ़्फ़न की दादी के देहान्त के बाद टोपी को उसका घर खाली सा क्यों लगा? उत्तर: इफ़्फ़न की दादी जितना प्यार इफ़्फ़न को करती उतना ही टोपी को भी करती थी, टोपी से अपनत्व रखती थी। उसे भी कहानियाँसुनाती थी, उसकी माँ का हाल चाल पूछती। उनकी मृत्यु के बाद टोपी को ऐसा लगा मानो उस पर से दादी की छत्रछाया ही खत्म हो गई है। इसलिए टोपी को इफ़्फ़न की दादी की मृत्यु के बाद उसका घर खाली सा लगा।
प्रश्न 9: टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मजहब और जाति के थे पर एक अनजान अटूट रिश्ते से बँधे थे। इस कथन के आलोक में अपने विचार लिखिए। उत्तर: टोपी हिंदू धर्म का था और इफ़्फ़न की दादी मुस्लिम। परन्तु जब भी टोपी इफ़्फ़न के घर जाता दादी के पास ही बैठता। उनकी मीठी पूरबी बोली उसे बहुत अच्छी लगती थी। दादी पहले अम्मा का हाल चाल पूछतीं। दादी उसे रोज़ कुछ न कुछ खाने को देती परन्तु टोपी खाता नहीं था। फिर भी उनका हर शब्द उसे गुड़ की डली सा लगता था। इसलिए उनका रिश्ता अटूट था।
प्रश्न 10: टोपी नवीं कक्षा में दो बार फ़ेल हो गया। बताइए − (क) ज़हीन होने के बावजूद भी कक्षा में दो बार फ़ेल होने के क्या कारण थे? (ख) एक ही कक्षा में दो-दो बार बैठने से टोपी को किन भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा? (ग) टोपी की भावात्मक परेशानियों को मद्येनज़र रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलाव सुझाइए? उत्तर: (क) टोपी बहुत ज़हीन (बुद्धिमान) था परन्तु दो बार फ़ेल हो गया क्योंकि पहली बार जब भी वह पढ़ने बैठता मुन्नी बाबू को कोई न कोई काम निकल आता या रामदुलारी कोई ऐसी चीज़ मँगवाती जो नौकर से नहीं मँगवाई जा सकती। इस तरह वह फेल हो गया। दूसरे साल उसे मियादी बुखार हो गया था और पेपर नहीं दे पाया इसलिए फ़ेल हो गया था। (ख) पहली बार एक कक्षा छोटे बच्चों के साथ बैठना पड़ा। दूसरे साल सातवीं के बच्चों के साथ बैठना पड़ा था। इसलिए उसका कोई दोस्त नहीं बन पाया था। अध्यापक भी बच्चों को न पढ़ने के कारण फ़ेल होने का उदाहरण टोपी का नाम लेकर देते थे, उसका मज़ाक उड़ाते थे। मास्टरभी उसे नोटिस नहीं करते थे। उससे कोई उत्तर नहीं पूछते बल्कि कहते अगले साल पूछ लेंगे या कहते इतने सालों में तो आ गया होगा। इस तरह सभी उसे भावनात्मक रूप से आहत करते थे। फिर अंत में इन चुनौतियों को स्वीकार कर उसने सफलता प्राप्त की। (ग) बच्चे फ़ेल होने पर भावनात्मक रूप से आहत होते हैं और मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। वे शर्म महसूस करते हैं। इसके लिए विद्यार्थी के पुस्तकीय ज्ञान को ही न परखा जाए बल्कि उसके अनुभव व अन्य कार्य कुशलता को भी देखकर उसे प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
प्रश्न 11: इफ़्फ़न की दादी के मायके का घर कस्टोडियन में क्यों चला गया? उत्तर: कस्टोडियन पर जाना अर्थात् सरकारी कब्जा होना। दादी के पीहर वाले जब पाकिस्तान में रहने लगे तो भारत में उनके घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहा। इस पर मालिकाना हक भी न रहा। इसलिए वह घर सरकारी कब्जे में चला गया।
बोध प्रश्न प्रश्न 1: कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती− पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं? उत्तर: पाठ के लेखक श्री गुरदयाल सिंह जी बताते हैं कि बचपन में उनके आधे से अधिक साथी हरियाणा या राजस्थान से व्यापार के लिए आए परिवारों से संबंधित थे। उनके कुछ शब्द सुनकर लेखक व उसके अन्य साथियों को हँसी आ जाती थी। बहुत से शब्द समझ में नहीं आते थे। किंतु जब वे सब मिलकर खेलते थे तब सभी को एक-दूसरे की बातें खूब अच्छी तरह समझ में आ जाती थीं। पाठ के इसी अंश से यह बात सिद्ध होता है कि कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधक नहीं होती है |
प्रश्न 2: पीटी साहब की शाबाश फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए। उत्तर: पीटी साहब प्रीतमचन्द बहुत सख्त अध्यापक थे। यदि कोई कतार से सिर इधर-उधर हिला लेता या दूसरी पिंडली खुजलाने लगता इस पर वे उसे लड़के की ओऱ बाघ की तरह झपट पड़ते। परन्तु जब बच्चे कोई भी गलती न करते तो पी. टी. साहब उन्हें शाबाश कहते। बच्चे शाबाश शब्द सुनकर खुश होते और उन्हें लगता कि जैसे फौज में सिपाही को तमंगे दिए जाते हैं वैसा ही तमगा उन्हें भी मिल गया है।
प्रश्न 3: नई श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था? उत्तर: नईश्रेणी में जाने पर लेखक को हैडमास्टर जी एक अमीर घर के बच्चे की पुरानी किताबें लाकर देते थे। परन्तु इन नयी कापियों और पुरानी किताबों आती विशेष गंध से लेखक का बालमन उदास कर जाती थीं क्योंकि नयी श्रेणी का मतलब और कठिन पढाई और नए मास्टरों से पिटाई का भय होता था। पुराने मास्टरों की भी अपेक्षाएं बढ़ जाती थी। उन्हें लगता था की नयी श्रेणी में आने से बच्चें तेज हो गए हैं और अपेक्षाओं की प्रति न होने पर वे चमड़ी उधेरने में देर न लगाते।
प्रश्न 4: स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण आदमी फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था? उत्तर: स्काउट परेड में लेखक साफ़ सुथरे धोबी के घुले कपड़े, पॉलिश किए हुए बूट, जुराबों को पहन कर जब लेखक ठक-ठक करके चलता था तो वह अपने आपको फ़ौजी से कम नहीं समझता था। अकड़कर चलता तो अपने अंदर एक फ़ौजी जैसी आन-बान-शान महसूस करता था।
प्रश्न 5: हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया? उत्तर: एक दिन मास्टर प्रीतमचंद ने कक्षा में बच्चों को फ़ारसी के शब्द रूप याद करने के लिए दिए । परन्तु बच्चों से यह शब्द रूप याद नहीं हो सके। इसपर मास्टर जी ने उन्हें मुर्गा बना दिया। बच्चे इसे सहन नहीं कर पाए कुछ ही देर में लुढ़कने लगे। उसी समय नम्र ह्रदय हेडमास्टरजी वहाँ से निकले और बच्चों की हालत देखकर सहन नहींकर पाए और पीटी मास्टर को मुअत्तल कर दिया।
प्रश्न 6: लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा? उत्तर: ‘सपनों के-से दिन’ पाठ के लेखक गुरदयाल सिंह के अनुसार उन्हें तथा उनके साथियों को बचपन में स्कूल जाना अच्छा नहीं लगता था। चौथी कक्षा तक कुछ लड़के को छोड़कर अन्य सभी साथी रोते-चिल्लाते हुए स्कूल जाया करते थे। स्कूल में धोबी पिटाई तथा मास्टरों की डाँट-फटकार के कारण स्कूल उन्हें एक नीरस व भयानक स्थान प्रतीत होता था, जिसके प्रति उनके मन में एक भय-सी बैठ गया था। इसके बावजूद कई बार ऐसी स्थितियाँ आती थीं जब उन्हें स्कूल जाना अच्छा भी लगता था। यह मौका तब आता था जब उनके पीटी सर स्काउटिंग का अभ्यास करवाते थे। वे पढ़ाई-लिखाई के स्थान पर लड़कों के हाथों में नीली-पीली झंडियाँ पकड़ा देते थे, वे वन-टू-श्री करके इन झंड़ियों को ऊपर-नीचे करवाते थे। हवा में लहराती यह झंडिया बड़ी अच्छी लगती थीं। अच्छा काम करने पर पीटी सर की शाबाशी भी मिलती थी, तब यही कठोर पीटी सर बच्चों को बड़े अच्छे लगते थे। ऐसे अवसर पर स्कूल आना अच्छा व सुखद प्रतीत होता था।
प्रश्न 7: लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति बहादुर बनने की कल्पना किया करता था? उत्तर: लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए तरह-तरह की योजनाएँ बनाया करता था। जैसे-हिसाब के मास्टर जी द्वारा दिए गए 200 सवालों को पूरा करने के लिए रोज़ दस सवाल निकाले जाने पर 20 दिन में पूरे हो जाएँगे, लेकिन खेल-कूद में छुट्टियाँ भागने लगतीं, तो मास्टर जी की पिटाई का डर सताने लगता। फिर लेखक रोज़ के 15 सवाल पूरे करने की योजना बनाता, तब उसे छुट्टियाँ भी बहुत कम लगने लगतीं और दिन बहुत छोटे लगने लगते तथा स्कूल का भय भी बढ़ने लगता। ऐसे में लेखक पिटाई से डरने के बावजूद भी उन लोगों की भाँति बहादुर बनने की कल्पना करने लगता, जो छुट्टियों को काम पूरा करने की बजाय मास्टर जी से पिटना ही अधिक बेहतर समझते थे।
प्रश्न 8: पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। उत्तर: पाठ के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि पीटी सर प्रीतमचंद बहुत सरल अध्यापक थे। उनके व्यक्तित्व की विशेषताएँ इस प्रकार हैंI बाह्य व्यक्तित्व-पीटी सर अर्थात् प्रीतमचंद ठिगने कद के थे, उनका शरीर दुबला-पतला पर गठीला था। उनका चेहरा चेचक के दागों से भरा था। उनकी आँखें बाज की तरह तेज़ थीं। वे खाकी वर्दी, चमड़े के पंजों वाले बूट पहनते थे। उनके बूटों की ऊँची एड़ियों के नीचे खुरियाँ लगी रहती थीं। बूटों के अगले हिस्से में पंजों के नीचे मोटी सिरों वाले कील ठुके रहते थे। आंतरिक व्यक्तित्व
कुशल अध्यापक-प्रीतमचंद एक कुशल अध्यापक थे। वे चौथी श्रेणी के बच्चों को फ़ारसी पढ़ाया करते थे। वे मौखिक अभिव्यक्ति एवं याद करने पर बल दिया करते थे। वे छात्रों को दिन-रात एक करके पढ़ाई करने की शिक्षा दिया करते थे।
कुशल प्रशिक्षक-वे कुशल प्रशिक्षक थे। वे छात्रों को स्काउट और गाइड की ट्रेनिंग दिया करते थे वे छात्रों से विभिन्न रंग की झंडियाँ पकड़ाकर हाथ ऊपर-नीचे करके अच्छी ट्रेनिंग दिया करते थे। उनके इस प्रशिक्षण कार्य से छात्र सदा प्रसन्न रहा करते थे। वे उस पर छात्रों द्वारा सही काम करने पर शाबाशी भी देते थे।
कठोर अनुशासन प्रिय-प्रीतमचंद अनुशासन प्रिय होने के कारण कठोर अनुशासन बनाए रखते थे। वे छात्रों को भयभीत रखते थे। यदि कोई लड़का अपना सिर इधर-उधर हिला लेता था तो वे उस पर बाघ की तरह झपट पड़ते थे। प्रार्थना करते समय भी वह अनुशासनहीन छात्रों को दंडित करते थे।
कोमल हृदयी-प्रीतम चंद बाहर से कठोर किंतु अंदर से कोमल थे। उन्होंने अपने घर में तोते पाल रखे थे, वे उससे बात करते थे और उसे भीगे हुए बादाम भी खिलाया करते थे। इसके अलावा वे छात्रों द्वारा सही काम किए जाने पर उन्हें शाबाशी भी देते थे।
प्रश्न 9: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए। उत्तर: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई युक्तियाँ इस प्रकार से हैं—पीटी साहब बिल्ला मार-मारकर बच्चों की चमड़ी तक उधेड़ देते थे। तीसरी-चौथी कक्षाओं के बच्चों से थोड़ा-सा भी अनुशासन भंग हो जाता, तो उन्हें कठोर सज़ा मिलती थी ताकि वे विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन की नींव दृढ़ बना सकें। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को प्रोत्साहित तथा उत्साहित करने के लिए उन्हें ‘शाबाशी’ भी दी जाती थी। लेकिन वर्तमान में स्वीकृत मान्यताएँ इसके विपरीत हैं। शिक्षकों को आज विद्यार्थियों को पीटने का अधिकार नहीं है इसलिए विद्यार्थी निडर होकर अनुशासनहीनता की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि आज पहले की भाँति विद्यार्थी शिक्षकों से डरते नहीं हैं। इसके लिए विद्यालय और माता-पिता दोनों जिम्मेवार हैं। बच्चों में अनुशासन का विकास करने के लिए उन्हें शारीरिक व मानासिक यातना देना उचित नहीं। उन्हें प्रेमपूर्वक नैतिक मूल्य सिखाए जाने चाहिए, जिनसे उनमें स्वानुशासन का विकास हो सके।
प्रश्न 10: बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी–मीठी यादों को लिखिए। उत्तर: बचपन की और विशेषकर स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादें मन को गुदगुदाती रहती हैं। ये यादें सभी की निजी होती हैं। मेरी भी कुछ ऐसी यादें मेरे साथ हैं। मैं जब नवीं कक्षा में पढ़ती थी मेरी माँ किसी कारणवश बाहर गई थीं। इसलिए मैं बिना गृहकार्य किए और बिना लंच लिए स्कूल पहुँची। पहले तो अध्यापिका से खूब डॉट पड़ी, फिर आधी छुट्टी में मुझे अध्यापिका ने खिड़की के पास खड़ा पाया तो डॉट लगा दी। अगले पीरियड में मुझे बहुत बेचैनी हुई कि अध्यापिका मेरे बारे में क्या सोच रही होंगी, मैं अध्यापिका कक्ष में उनसे मिलने गई। उन्हें देखते ही मेरा रोना छूट गया। उन्होंने रोने का कारण पूछा तो मैंने रोते-रोते उन्हें कारण बताया कि मेरी माता जी घर पर नहीं हैं। उन्होंने मुझे सांत्वना दी फिर मुझे अपने डिब्बे से खाना खिलाया। आज भी मैं इस घटना को याद करती हूँ तो अध्यापिका के प्रति भाव-विभोर हो उठती हूँ।
प्रश्न 11: प्राय अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए − (क) खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं। (ख) आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिससे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो। उत्तर: (क) खेल प्रत्येक उम्र के बच्चे के लिए जरूरी हैं। खेल की बच्चे के शारीरिक-मानसिक विकास में अहम भूमिका होती है। खेल बच्चे की सोच को विस्तृत तथा विकसित करते हैं। इनसे बच्चे में सामूहिक रूप से काम करने की भावना का संचार होता है। बच्चे में प्रतिस्पर्धा तथा प्रतियोगिता हेतु आगे बढ़ने की होड़ और दौड़ में भाग लेने की इच्छा पैदा होती है। खेलों में भाग लेने से बच्चे को अपना तथा अपने देश का नाम रोशन करने का सुअवसर प्राप्त होता है। (ख) मैं अपने अभिभावकों के लिए वही नियम और कायदों को अपनाऊँगा, जिनसे उनकी भावनाओं को ठेस न पहुँचे इसलिए मैं समय पर खेलूंगा और समय पर खेलकर वापस आऊँगा। खेलने के साथ पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दूंगा। मैं खेलने में उतना ही समय खर्च करूँगा, जितना आवश्यक होगा। अर्थात् मैं केवल वही नियम और कायदे अपनाऊँगा, जिनसे मेरे अभिभावकों को सुख-शांति मिलेगी।
प्रश्न 1: कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं? उत्तर: कथावाचक जब छोटे थे, तब से ही हरिहर काका उन्हें बहुत प्यार करते थे। जब वे बड़े हो गए, तो हरिहर काका के मित्र बन गए। गाँव में इतनी गहरी दोस्ती और किसी से नहीं हुई। हरिहर काका उनसे खुलकर बातें करते थे। यही कारण था कि कथावाचक को उनके एक-एक पल की खबर थी। शायद अपना मित्र बनाने के लिए काका ने स्वयं ही उन्हें प्यार से बड़ा किया और इंतजार किया।
प्रश्न 2: हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे? उत्तर: हरिहर काका को अपने भाइयों और महंत में कोई अंतर नहीं लगा। दोनों एक ही श्रेणी के लगे। उनके भाइयों की पत्नियों ने कुछ दिन तक तो हरिहर काका का ध्यान रखा, फिर बची-खुची रोटियाँ दीं, नाश्ता नहीं देती थीं। बीमारी में कोई पूछने वाला भी न था। जितना भी उन्हें रखा जा रहा था, वह उनकी ज़मीन के लिए था। इसी तरह महंत ने एक दिन तो बड़े प्यार से खातिर की, फिर ज़मीन को अपने ठाकुरबाड़ी के नाम करने के लिए कहने लगे। काका के मना करने पर उन्हें अनेक यातनाएँ दी गईं। अपहरण करवाया, मुँह में कपड़ा ठूँसकर एक कोठरी में बंद कर दिया, जबरदस्ती अँगूठे का निशान लिया गया तथा उन्हें मारा-पीटा गया। इस तरह दोनों ही केवल ज़मीन-जायदाद के लिए हरिहर काका से व्यवहार रखते थे। अतः उन्हें दोनों एक ही श्रेणी के लगे।
प्रश्न 3: ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है? उत्तर: कहा जाता है कि गाँव के लोग भोले होते हैं। असल में, गाँव के लोग अंधविश्वासी और धर्मभीरु होते हैं। मंदिर जैसे स्थान को वे पवित्र, निष्कलंक और ज्ञान का प्रतीक मानते हैं। पुजारी, पुरोहित, महंत जैसे जितने भी धर्म के ठेकेदार हैं, उन पर अगाध श्रद्धा रखते हैं। वे चाहे कितने भी पतित, स्वार्थी और नीच हों, पर उनका विरोध करने से डरते हैं। इसी कारण ठाकुरबाड़ी के प्रति गाँव वालों की अपार श्रद्धा थी। उनका हर सुख-दुख उससे जुड़ा था।
प्रश्न 4: अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। उत्तर: अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। वे जानते हैं कि जब तक उनकी ज़मीन-जायदाद उनके पास है, तब तक सभी उनका आदर करते हैं। ठाकुरबाड़ी के महंत उन्हें इसलिए समझाते हैं क्योंकि वे उनकी ज़मीन ठाकुरबाड़ी के नाम करवाना चाहते हैं। उनके भाई उनका आदर-सत्कार भी ज़मीन के कारण ही करते हैं। हरिहर काका ऐसे कई लोगों को जानते हैं, जिन्होंने अपने जीते-जी अपनी ज़मीन किसी और के नाम लिख दी थी और बाद में उनका जीवन नरक बन गया था। वे नहीं चाहते थे कि उनके साथ भी ऐसा हो।
प्रश्न 5: हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बरताव किया? उत्तर: हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले लोग महंत के आदमी थे। महंत ने हरिहर काका को कई बार ज़मीन-जायदाद ठाकुरबाड़ी के नाम कर देने को कहा, परंतु वे नहीं मान रहे थे। महंत ने अपने चेले और साधु-संतों के साथ मिलकर उनके हाथ-पैर बाँध दिए, मुँह में कपड़ा ठूँस दिया और जबरदस्ती अँगूठे के निशान ले लिए। फिर उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया। जब पुलिस आई, तो वह स्वयं गुप्त दरवाज़े से भाग गया।
प्रश्न 6: हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे? उत्तर: कहानी के आधार पर गाँव के लोगों को बिना बताए ही पता चल गया कि हरिहर काका को उनके भाई नहीं पूछते। इसलिए सुख-आराम का प्रलोभन देकर महंत उन्हें अपने साथ ले गया। भाई मन्नतें करके काका को वापस ले आते हैं। इस तरह गाँव के लोग दो पक्षों में बँट गए। कुछ लोग महंत की तरफ़ थे, जो चाहते थे कि काका अपनी ज़मीन धर्म के नाम पर ठाकुरबाड़ी को दे दें ताकि उन्हें सुख-आराम मिले और मृत्यु के बाद मोक्ष व यश प्राप्त हो। महंत ज्ञानी है, वह सब कुछ जानता है। लेकिन दूसरे पक्ष के लोग कहते थे कि ज़मीन परिवारवालों को दी जाए। उनका कहना था कि इससे उनके परिवार का पेट भरेगा, और मंदिर को ज़मीन देना अन्याय होगा। इस तरह दोनों पक्ष अपने-अपने हिसाब से सोच रहे थे, परंतु हरिहर काका के बारे में कोई नहीं सोच रहा था। इन बातों का एक कारण यह भी था कि काका विधुर थे और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। पंद्रह बीघा ज़मीन के लिए लोगों का लालच स्वाभाविक था।
प्रश्न 7: कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, “अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।” उत्तर: जब काका को असलियत पता चली और उन्हें समझ में आ गया कि सभी लोग उनकी ज़मीन-जायदाद के पीछे हैं, तो उन्हें वे सभी लोग याद आ गए जिन्होंने परिवारवालों के मोह-माया में आकर अपनी ज़मीन उनके नाम कर दी और मृत्यु तक तिल-तिल करके मरते रहे, दाने-दाने को मोहताज हो गए। इसलिए उन्होंने सोचा कि इस तरह जीने से तो एक बार मरना अच्छा है। जीते-जी ज़मीन किसी को भी नहीं देंगे। ये लोग चाहें तो मुझे एक बार में ही मार दें। अतः लेखक ने कहा कि अज्ञान की स्थिति में मनुष्य मृत्यु से डरता है, परंतु ज्ञान होने पर वह मृत्यु-वरण के लिए तैयार रहता है।
प्रश्न 8: समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए। उत्तर: आज समाज में मानवीय एवं पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। अधिकतर व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते-नाते निभाते हैं। अब रिश्तों से ज्यादा रिश्तेदारों की कामयाबी और स्वार्थ-सिद्धि की अहमियत है। रिश्ते ही व्यक्ति को अपने-पराए में अंतर करना सिखाते हैं। रिश्तों के माध्यम से व्यक्ति की समाज में विशेष भूमिका निर्धारित होती है। रिश्ते ही सुख-दुख में काम आते हैं। यह दुख की बात है कि आज के इस बदलते दौर में रिश्तों पर स्वार्थ की भावना हावी होती जा रही है। रिश्तों में प्यार और बंधुत्व समाप्त हो गया है। इस कहानी में भी यदि पुलिस न पहुँचती, तो परिवार वाले काका की हत्या कर देते। इंसानियत तथा रिश्तों का खून साफ़ नज़र आता है जब महंत और परिवारवालों को काका के लिए अफसोस नहीं, बल्कि उनकी हत्या न कर पाने का अफसोस है। ठीक इसी प्रकार, आज रिश्तों से ज्यादा धन-दौलत को अहमियत दी जा रही है।
प्रश्न 9: यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे? उत्तर: यदि हमारे आसपास हरिहर काका जैसी स्थिति में कोई व्यक्ति हो, तो हम उसकी सहायता निम्न प्रकार से करेंगे:
सबसे पहले हम उसके घरवालों को समझाएँगे कि वे अपने पवित्र कर्तव्य के प्रति सचेत रहें।
असहाय व्यक्ति के खान-पान, रहन-सहन, वस्त्र आदि की व्यवस्था समयानुसार करेंगे।
उसके परिवार के सदस्यों को समझाएँगे कि यदि तुम असहाय व्यक्ति की सहायता करोगे, तो उसका फल अवश्य मिलेगा। अर्थात् उसकी ज़मीन और संपत्ति स्वतः ही तुम्हें मिल जाएगी।
धूर्त महंत, पुजारी और साधुओं के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएँगे और पुलिस को बताएँगे कि इन्हें लालच ने अंधा कर दिया है। ये असहाय व्यक्ति की ज़मीन पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं।
भाइयों, महंत, साधु और पुजारियों की खबर मीडिया को देंगे ताकि उनका दुष्प्रचार हो सके और सरकारी हस्तक्षेप से उन्हें उनके किए की सजा मिले। साथ ही, हरिहर काका जैसे व्यक्ति को न्याय मिल सके।
प्रश्न 10: हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: हरिहर काका का जिस प्रकार धर्म और घर, अर्थात् खून के रिश्तों से, विश्वास उठ चुका था, उससे वे मानसिक रूप से बीमार हो गए थे। वे बिल्कुल चुप रहते थे और किसी की भी किसी बात का कोई उत्तर नहीं देते थे। यदि वर्तमान दृष्टिकोण से देखा जाए, तो आज मीडिया की अहम भूमिका है। लोगों को सच्चाई से अवगत कराना उसका मुख्य कार्य है। जनसंचार के माध्यम से घर-घर तक बात पहुँचाई जा सकती है। इसके द्वारा लोगों और समाज तक बात पहुँचाना आसान हो जाता है। यदि हरिहर काका की बात मीडिया तक पहुँच जाती, तो शायद स्थिति कुछ भिन्न होती। वे अपनी बात लोगों के सामने रख पाते और स्वयं पर हुए अत्याचारों के विषय में लोगों को जागरूक कर सकते। मीडिया हरिहर काका को न्याय दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती और उन्हें स्वतंत्र रूप से जीने की व्यवस्था उपलब्ध करवाने में मदद करती। जिस दबाव में वे जी रहे थे, वैसी स्थिति मीडिया की सहायता मिलने के बाद नहीं रहती।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए – प्रश्न 1: कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था? उत्तर: कर्नल कांलिज ने वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए जंगल में खेमा लगाये हुए था।
प्रश्न 2: वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे? उत्तर: वज़ीर अली ने कई वर्षों से अंग्रेज़ों की आँख में धूल झोंककर उनकी नाक में दम कर रखा था। इसलिए वे वज़ीर अली से तंग आ चुके थे।
प्रश्न 3: कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा? उत्तर: कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि धूल के उड़ने से उसने अंदाज लगाया कि लोग ज़्यादा हैं और वज़ीर को ढूंढ़ रहे हैं।
प्रश्न 4: सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है? उत्तर: सवार खुद वज़ीर अली था जो कि बहुत बहादुर था और शत्रुओं को ललकार रहा था।लिखित (क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
प्रश्न 1: वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी? उत्तर: वज़ीर अली रॉबिनहुड की तरह साहसी, हिम्मतवाला और बहादुर था। वह भी रॉबिनहुड की तरह किसी को भी चकमा देकर भाग जाता था। वह अंग्रेज़ी सरकार की पकड़ में नहीं आ रहा था। कम्पनी के वकील को उसने मार डाला था। उसकी बहादुरी के अफ़साने सुनकर ही कर्नल को रॉबिनहुड की याद आती थी।
प्रश्न 2: सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा? उत्तर: सआदत अली वज़ीर अली का चाचा और नवाब आसिफउदौला का भाई था। जब तक आसिफउदौला के कोई सन्तान नहीं थी,सआदत अली की नवाब बनने की पूरी सम्भावना थी। इसलिए उसे वज़ीर अली की पैदाइश उसकी मौत लगी।
प्रश्न 3: सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था? उत्तर: सआदत अली आराम पसंद अंग्रेज़ों का पिट्ठू था। अंग्रेज़ कर्नल को उसे तख्त पर बिठाने का मकसद अवध की धन सम्पत्ति पर अधिकार करना था। उसने अंग्रेज़ों को आधी सम्पत्ति और दस लाख रूपये दिए। इस तरह सआदत अली को गद्दी पर बैठने से उन्हें लाभ ही लाभ था।
प्रश्न 4: कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की? उत्तर: कंपनी के वकील की हत्या करने के बाद वज़ीर अली आजमगढ़ भाग गया और वहाँ के नवाब ने उसकी सहायता की और उसे सुरक्षित घागरा पहुँचा दिया। तब से वह वहाँ के जंगलों में रहने लगा।
प्रश्न 5: सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया? उत्तर: बड़ी चतुराई से वजीर अली कारतूस लेने कर्नल के खेमे में सवार बनकर आया था। जाते समय कर्नल ने नाम पूछा तो उसने वज़ीर अली बताया। उसे सामने देखकर कर्नल हक्का-बक्का रह गया।(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
प्रश्न 1: लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है? उत्तर: लेफ़्टीनेंट को जब कर्नल ने बताया कि कंपनी के खिलाफ़ केवल वज़ीर अली ही नहीं बल्कि दक्षिण में टीपू सुल्तान, बंगाल में नवाब का भाई शमसुद्दौला भी है। इन्होंने अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहेज़मा को आक्रमण के लिए निमत्रंण दिया है। यह सब देखकर लेफ़्टीनेंट को आभास हुआ कि कंपनी के खिलाफ़ पूरे हिन्दूस्तान में लहर दौड़ गई है।
प्रश्न 2: वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया? उत्तर: वज़ीर अली को उसके नवाबी पद से हटा दिया गया और बनारस भेज दिया गया। फिर कलकत्ता बुलाया तो वज़ीर अली ने कंपनी के वकील, जोकि बनारस में रहता था, उससे शिकायत की परन्तु उसने शिकायत सुनने की जगह खरीखोटी सुनाई। इस पर वज़ीर अली को गुस्सा आ गया और उसने वकील का कत्ल कर दिया।
प्रश्न 3: सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए? उत्तर: सवार वज़ीर अली अकेला ही घोड़े पर सवार होकर अंग्रेज़ों के खेमे में पहुँच गया और कर्नल को दिखाया कि वह भी वज़ीर अली के खिलाफ़ है। उसने कर्नल से अकेले में मिलने के लिए कहा। कर्नल मान गया और वज़ीर अली के दस कारतूस माँगने पर उसने दे दिए। इस तरह सवार ने कर्नल से कारतूस हासिल किए।
प्रश्न 4: वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: वज़ीर अली को अंग्रेज़ों ने अवध के तख्ते से हटा दिया पर उसने हिम्मत नहीं हारी। वज़ीफे की रकम में मुश्किल डालने वाले कंपनी के वकील की भी हत्या कर दी। अंग्रेज़ों को महीनों दौड़ाता रहा परन्तु फिर भी हाथ नहीं आया। अंग्रेज़ों के खेमे में अकेले ही पहुँच गया,कारतूस भी ले आया और अपना सही नाम भी बता गया। इस तरह वह एक जाँबाज़ सिपाही था।(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
प्रश्न 1: मुट्ठीभर आदमी और इतना दमखम। उत्तर: इस पंक्ति में वज़ीर अली के साहस और वीरता का परिचय है। वह थोड़े से सैनिकों के साथ जंगल में रह रहा था। अंग्रेज़ों की पूरी फ़ौज उसका पीछा कर रही थी फिर भी उसे पकड़ नहीं पा रही थी।
प्रश्न 2: गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है। उत्तर: यह कथन लेफ़्टीनेंट का है। जब वज़ीर अली अंग्रेज़ों के खेमे में अकेला ही आ रहा था परन्तु इतनी तेज़ी से आ रहा था, इतनी धूल उड़ रही थी कि मानों कई सैनिक आ रहे हो, पूरा एक काफ़िला आ रहा हो। लेफ़्टीनेंट कहता है सैनिक तो एक ही नज़र आ रहा है।भाषा अध्यन
प्रश्न 1: निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए − खिलाफ़, पाक, उम्मीद, हासिल, कामयाब, वजीफ़ा, नफ़रत, हमला, इंतेज़ार, मुमकिन। उत्तर:खिलाफ़-विरूद्धपाक-पवित्रउम्मीद-आशाहासिल-प्राप्तकामयाब-सफलवजीफ़ा-छात्रवृतिनफ़रत-घृणाहमला-आक्रमणइंतेज़ार-प्रतीक्षामुमकिन-संभव
प्रश्न 2: निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए − आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूट कर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख्श देना, हक्का बक्का रह जाना। उत्तर: (क) आँखों में धूल झोंकना −चोर ने पुलिस के आँखों में धूल झोंककर चोरी कर ली। (ख) कूट-कूट कर भरना − झाँसी की रानी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। (ग) काम तमाम कर देना − बिल्ली ने चूहे का काम तमाम कर दिया। (घ) जान बख्श देना − देश के दुशमनों की जान नहीं बख्शनी चाहिए। (ङ) हक्का-बक्का रह जाना − अचानक चाचाजी को सामने देखकर सब हक्के-बक्के रह गए।
प्रश्न 3: कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए − (क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है। (ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई। (ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया। (घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी। (ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था। उत्तर: (क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है। संबंध कारक (ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई। संबंध कारक, अधिकरण कारक (ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया। कर्म कारक, अपादान कारक (घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी। सप्रंदान कारक, संबंध कारक (ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था। अधिकरण कारक
प्रश्न 4: नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए − (क) घोड़ा पानी पी रहा था। (ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए। (ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था। (घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे। उत्तर: (क) घोड़े ने पानी पिया। (ख) बच्चों ने दशहरे का मेला देखा। (ग) रॉबिनहुड ने गरीबों की मद्द की। (घ) देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।
प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए − (क) कर्नल ने कहा सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है (ख) सवार ने पूछा आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है (ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बाते कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति कह रहा था दुशमन कभी भी हमला कर सकता है उत्तर: (क) कर्नल ने कहा, “सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है?” (ख) सवार ने पूछा, “आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलशकर की क्या ज़रूरत है?” (ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”परियोजना
प्रश्न 1: ‘एकांकी’ और ‘नाटक’ में क्या अंतर है? कुछ नाटकों और एकांकियों की सूची तैयार कीजिए। उत्तर: ‘एकांकी’ नाम से ही स्पष्ट है- एक + अंकी, अर्थात् एक अंक वाली। ऐसा छोटा-सा नाटक जिसमें एक अंक हो तथा जिसमें जीवन की किसी समस्या या घटना का चित्रण हो, उसे एकांकी कहते हैं। इसके मंचन के लिए कम पात्रों, कम समय तथा कम साज-सज्जा की आवश्यकता होती है। नाटक एक दृश्य-श्रव्य रचना होती है। इसमें पाँच या उससे अधिक अंक होते हैं। नाटक में एक मुख्य कहानी तथा उससे जुड़ी अन्य कहानियाँ भी हो सकती हैं। यह एक बड़ी रचना होती है जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण अनेक दृश्यों और अंकों में किया जाता है। इसके मंचन के लिए अनेक पात्रों, अधिक समय तथा ढेर सारी साज-सज्जा की आवश्यकता होती है।
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए – प्रश्न 1: शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है? उत्तर: शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नही की जाती अगर इसी में थोड़ा-सा ताँबा मिला दिया जाए तो यह गिन्नी बन जाता है। ऐसा करने से सोने की मजबूती और चमक दोनों बढ़ जाती है।
प्रश्न 2: प्रैक्टिकल आईडियालिस्ट किसे कहते हैं? उत्तर: जो लोग आदर्श बनते हैं और व्यवहार के समय उन्हीं आर्दशों को तोड़ मरोड़ कर अवसर का लाभ उठाते हैं, उन्हें प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट कहते हैं।
प्रश्न 3: पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है? उत्तर: जिसमें लाभ हानि सोचने की गुजांइश नहीं होती है उसे शुद्ध आदर्श कहते हैं।
प्रश्न 4: लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात क्यों कही है? उत्तर: जापानी लोग उन्नति की होड़ में सबसे आगे हैं। वे महीने का काम एक दिन में करने का सोचते हैं। इसलिए लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात कही है।
प्रश्न 5: जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते है? उत्तर: जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।
प्रश्न 6: जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है? उत्तर: जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वहाँ की सजावट पारम्परिक होती है। वहाँ अत्यन्त शांति और गरीमा के साथ चाय पिलाई जाती है। शांति उस स्थान की मुख्य विशेषता है।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
प्रश्न 1: शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है? उत्तर: शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती। ताँबे से सोना मजबूत हो जाता है परन्तु शुद्धता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार व्यवहारिकता में शुद्ध आर्दश समाप्त हो जाते हैं। सही भाग में व्यवहारिकता को मिलाया जाता है तो ठीक रहता है।
प्रश्न 2: चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं? उत्तर: चाजीन द्वारा अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, चाय के बर्तन लाना, तौलिए सेपोछ कर चाय डालना आदि सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण, अच्छे व सहज ढंग से कीं।
प्रश्न 3: टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों? उत्तर: इसमें केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था क्योंकि भाग-दौड़ की ज़िदंगी से दूर भूत-भविष्य की चिंता छोड़कर शांतिमय वातावरण में कुछ समय बिताना इस जगह का उद्देश्य होता है।
प्रश्न 4: चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया? उत्तर: चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसका दिमाग सुन्न होता जा रहा है, उसकी सोचने की शक्ति धीरे-धीरे मंद हो रही है। इससे सन्नाटे की आवाज भी सुनाई देने लगी। उसे लगा कि भूत-भविष्य दोनों का चिंतन न करके वर्तमान में जी रहा हो। उसे बहुत सुख मिलने लगा।
(ख) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –
प्रश्न 1: गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए? उत्तर: गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। यह आन्दोलन व्यावहारिकता को आदर्शों के स्वर पर चढ़ाकर चलाया गया। इन्होंने कई आन्दोलन चलाए − भारत छोड़ो आन्दोलन, दांडी मार्च, सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन आदि। उनके साथ भारत की सारी जनता थी। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर पूर्ण स्वराज की स्थापना की। भारतीयों ने भी अपने नेता के नेतृत्व में अपना भरपूर सहयोग दिया और हमें आज़ादी मिली।
प्रश्न 2: आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रांसगिकता स्पष्ट कीजिए। उत्तर: ईमानदारी, सत्य, अहिंसा, परोपकार, परहित, कावरता, सहिष्णुता आदि ऐसे शाश्वत मूल्य हैं जिनकी प्रांसगिकता आज भी है। इनकी आज भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी पहले थी। आज के समाज को सत्य अहिंसा की अत्यन्त आवश्यक है। इन्हीं मूल्यों पर संसार नैतिक आचरण करता है। यदि हम आज भी परोपकार, जीवदया, ईमानदारी के मार्ग पर चलें तो समाज को विघटन से बचाया जा सकता है।
प्रश्न 3: अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब| (i) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो। (ii) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो। उत्तर: (i) मेरे जीवन का आदर्श है कि मैं न तो रिश्वत लेता हूँ और न रिश्वत देता हूँ। यद्यपि इसकी वजह से मुझे कई बार हानि उठानी पड़ी है। मुझे नगर-निगम का प्रमाणपत्र इसलिए देर से मिला कि मैंने एक संबंधित अधिकारी को रिश्वत नहीं दी। वैसे इससे मुझे कोई विशेष हानि नहीं हुई पर निगम कार्यालय के दस चक्कर अवश्य लगाने पड़े। (ii) मेरा आदर्श है कि मैं अपने छात्रों को नकल नहीं करने देती। मैंने अपने इस आदर्श में व्यावहारिकता का पुट यह दिया है कि मैं अब नकल तो नहीं करने देती; पर नकल करनेवालों पर केस न बनाकर उनकी नकल की सामग्री फाड़ देती हूँ या उनकी कॉपी बदल देती हैं। इससे उनका साल खराब नहीं होता।
प्रश्न 4: शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना, गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है?स्पष्ट कीजिए। उत्तर: गाँधीजी ने जीवन भर सत्य और अहिंसा का पालन किया। वे आदर्शों को उंचाई तक ले जाते हैं अर्थात वे सोने में ताँबा मिलाकर उसकी कीमत कम नही करते थे बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ा देते थे। गाँधीजी व्यवहारिकता की कीमत जानते थे। इसीलिए वे अपना विलक्षण आदर्श चला सके। लेकिन अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्वर पर उतरने नहीं देते थे।
प्रश्न 5: गिरगिट कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘अवसरवादिता’ और ‘व्यवहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है? उत्तर: गिरगिट कहानी में स्वार्थी इंस्पेक्टर पल-पल बदलता है। वह अवसर के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेता है। ‘गिन्नी का सोना’ कहानी में इस बात पर बल दिया गया है कि आदर्श शुद्ध सोने के समान हैं। इसमें व्यवाहिरकता का ताँबा मिलाकर उपयोगी बनाया जा सकता है। केवल व्यवहारवादी लोग गुणवान लोगों को भी पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति आदर्शों को छोड़कर आगे बढ़ें तो समाज विनाश की ओर जा सकता है। समाज की उन्नति सही मायने में वहीं मानी जा सकती है जहाँ नैतिकता का विकास,जीवन के मूल्यों का विकास हो।
प्रश्न 6: लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं? उत्तर: लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के कारण बताएँ हैं कि मनुष्य चलता नहीं दौड़ता है, बोलता नहीं बकता है, एक महीने का काम एक दिन में करना चाहता है, दिमाग हज़ार गुना अधिक गति से दौड़ता है। अतरू तनाव बढ़ जाता है। मानसिक रोगों का प्रमुख कारण प्रतिस्पर्धा के कारण दिमाग का अनियंत्रित गति से कार्य करना है।
प्रश्न 7: लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: लेखक के अनुसार सत्य वर्तमान है। उसी में जीना चाहिए। हम अक्सर या तो गुजरे हुए दिनों की बातों में उलझे रहते हैं या भविष्य के सपने देखते हैं। इस तरह भूत या भविष्य काल में जीते हैं। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। वर्तमान ही सत्य है उसी में जीना चाहिए।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –
प्रश्न 1: समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है। उत्तर: आदर्शवादी लोग समाज को आदर्श रूप में रखने वाली राह बताते हैं। व्यवहारिक आदर्शवाद वास्तव में व्यवहारिकता ही है। उसमें आदर्शवाद कहीं नहीं होता है।
प्रश्न 2: जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है? उत्तर: जहाँ व्यवहारिकता होती है वहां आदर्श टिक नही पाते। वास्तव में व्यवहारिकता ही अवसरवादिता का दूसरा नाम है।
प्रश्न 3: हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं। उत्तर: जीवन की भाग-दौड़, व्यस्तता तथा आगे निकलने की होड़ ने लोगों का चैन छीन लिया है। हर व्यक्ति अपने जीवन में अधिक पाने की होड़ में भाग रहा है। इससे तनाव व निराशा बढ़ रही है।
प्रश्न 4: सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों। उत्तर: चाय परोसने वाले ने बहुत ही सलीके से काम किया। झुककर प्रणाम करना, बरतन पौंछना, चाय डालना सभी धीरज और सुंदरता से किए मानो कोई कलाकार बड़े ही सुर में गीत गा रहा हो।
भाषा अध्यन
प्रश्न 1: नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग किजिए −व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत उत्तर: (क) व्यावहारिकता − दादाजी की व्यावहारिकता सीखने योग्य है। (ख) आदर्श − आज के युग में गाँधी जैसे आदर्शवादिता की ज़रूरत है। (ग) सूझबूझ − उसकी सूझबूझ ने आज मेरी जान बचाई। (घ) विलक्षण − महेश की अपने विषय में विलक्षण प्रतिभा है। (ङ) शाश्वत − सत्य, अहिंसा मानव जीवन के शाश्वत नियम हैं।
प्रश्न 2: नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए −(क)माता-पिता=……………….(ख)पाप-पुण्य=……………….(ग)सुख-दुख=……………….(घ)रात-दिन=……………….(ङ)अन्न-जल=……………….(च)घर-बाहर=……………….(छ)देश-विदेश=……………….
उत्तर:(क)माता-पिता=माता और पिता(ख)पाप-पुण्य=पाप और पुण्य(ग)सुख-दुख=सुख और दुख(घ)रात-दिन=रात और दिन(ङ)अन्न-जल=अन्न और जल(च)घर-बाहर=घर और बाहर(छ)देश-विदेश=देश और विदेश
प्रश्न 3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए −(क)सफल=……………..(ख)विलक्षण=……………..(ग)व्यावहारिक=……………..(घ)सजग=……………..(ङ)आर्दशवादी=……………..(च)शुद्ध=……………..
प्रश्न 4. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए −शुद्ध सोना अलग है। बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए। ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दुसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भों में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए − उत्तर, कर, अंक, नग उत्तर:(क)उत्तर-मैंने सभी प्रश्नों के उत्तर लिख लिए हैं। तुम्हें उत्तर दिशा में जाना है।(ख)कर-हमने सभी कर चुका दिए हैं। मंत्री जी ने अपने कर कमलों से दीप प्रज्ज्वलित किया।(ग)अंक-राम के परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं। बच्चा अपनी माँ की अंक में बैठा है।(घ)नग-हीरा एक कीमती नग है। हिमालय एक बड़ा नग है।
प्रश्न 5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए − (क) 1. अँगीठी सुलगायी। 2. उस पर चायदानी रखी। (ख) 1. चाय तैयार हुई। 2. उसने वह प्यालों में भरी। (ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया। 2. तौलिये से बरतन साफ़ किए। उत्तर: (क) अँगीठी सुलगायी और उसपर चायदानी रखी। (ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी। (ग) बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिए से बरतन साफ़ किए।
प्रश्न 6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए − (क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है। 2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं। (ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था। 2. उसमें पानी भरा हुआ था। (ग) 1. चाय तैयार हुई। 2. उसने वह प्यालों में भरी। 3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए। उत्तर: (क) यह चाय पीने की एक विधि है जिसे जापानी चा-नो-यू कहते हैं। (ख) बाहर बेढब सा एक मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था। (ग) जब चाय तैयार हुई तो उसने प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।
योग्यता विस्तार
प्रश्न 1: पाठ में वर्णित ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र- एक छह मंजिली इमारत की छत पर झोपड़ीनुमा कमरा है, जिसकी दीवारें दफ़्ती की बनी है। फ़र्श पर चटाई बिछी है। वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण है। बाहर ही एक बड़े से बेडौल मिट्टी के बरतन में पानी रखा है। लोग यहाँ हाथ-पाँव धोकर अंदर जाते हैं। अंदर बैठा चाजीन झुककर सलाम करता है। बैठने की जगह की ओर इशारा करता है और चाय बनाने के लिए अँगीठी जलाता है। उसके बर्तन अत्यंत साफ़-सुथरे और सुंदर हैं। वातावरण इतना शांत है कि चायदानी में उबलते पानी की आवाज साफ़ सुनाई दे रही है। वह बिना किसी जल्दबाजी के चाय बनाता है। वह कप में दो-तीन घूट भर ही चाय देता है जिसे लोग धीरे-धीरे चुस्कियाँ लेकर एक डेढ़ घंटे में पीते हैं।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों दीजिए – प्रश्न 1: बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे? उत्तर: आबादी बढ़ने के कारण स्थान का अभाव हो रहा था इसलिए बिल्डर नई-नई इमरातें बनाने के लिए बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे।
प्रश्न 2: लेखक का घर किस शहर में था? उत्तर: लेखक का घर ग्वालियर शहर में था।
प्रश्न 3: जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है? उत्तर: एकल परिवारों का चलन होने के कारण जीवन डिब्बों जैसे फलैटों में सिमटने लगा है।
प्रश्न 4: कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे? उत्तर: कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक बिल्ली ने तोड़ दिया था दूसरा बिल्ली से बचाने के चक्कर में माँ से टूट गया। कबूतर इससे परेशान होकर इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –
प्रश्न 1: अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं? उत्तर: अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद करते हैं क्योंकि वे हमेशा दूसरों के दुःख में दुखी रहते थे। नूह को पैगम्बर या ईश्वर का दूत भी कहा गया है। उनके मन में करूणा होती थी।
प्रश्न 2: लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों? उत्तर: लेखक की माँ दिन छिपने या सूरज ढलने के बाद पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं क्योंकि उस समय वे रोते हैं, रात में फूल तोड़ने पर वे श्राप देते हैं।
प्रश्न 3: प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ? उत्तर: प्रकृति में आए असंतुलन का परिणाम भूकंप, अधिक गर्मी, वक्त बेवक्त की बारिश, अतिवृष्टि, साइकलोन आदि और अनेक बिमारियाँ हैं।
प्रश्न 4: लेखक की माँ ने पूरे दिन रोज़ा क्यों रखा? उत्तर: लेखक के घर एक कबूतर का घोंसला था जिसमें दो अंडे थे। एक अंडा बिल्ली ने झपट कर तोड़ दिया, दूसरा अंडा बचाने के लिए माँ उतारने लगीं तो टूट गया। इस पर उन्हें दुख हुआ। माँ ने प्रायश्चित के लिए पूरे दिन रोज़ा रखा और नमाज़ पढ़कर माफी माँगती रहीं।
प्रश्न 5: लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। उत्तर: लेखक पहले ग्वालियर में रहता था। फिर बम्बई के वर्साेवा में रहने लगा। पहले घर बड़े-बड़े होते थे, दालान आंगन होते थे अब डिब्बे जैसे घर होते हैं, पहले सब मिलकर रहते थे अब सब अलग-अलग रहते हैं, इमारतें ही इमारतें हैं पशु-पक्षियों के रहने के लिए स्थान नहीं रहे,पहले अगर वे घोंसले बना लेते थे तो ध्यान रखा जाता था पर अब उनके आने के रास्ते बंद कर दिए जाते हैं।
प्रश्न 6: डेरा डालने से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: डेरा डालने का अर्थ है कुछ समय के लिए रहना। बड़ी-बड़ी इमारतें बनने के कारण पक्षियों को घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल रही है। वे इमारतों में ही डेरा डालने लगे हैं।
प्रश्न 7: शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए? उत्तर: शेख अयाज़ के पिता जब कुँए से नहाकर लौटे तो काला च्योंटा चढ़ कर आ गया। भोजन करते वक्त उन्होंने उसे देखा और भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए। वे पहले उसे घर छोड़ना चाहते थे।(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
प्रश्न 1: बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा? उत्तर: बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहाँ तक कि समुद्रस्थलों को भी छोटा किया जा रहा है। पशुपक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब कारणों से प्राकृतिक का सतुंलन बिगड़ गया है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कभी गर्मी, कभी तेज़ वर्षा इन के कारण कई बिमारियाँ हो रही हैं। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
प्रश्न 2: लेखक की पत्नी को खिड़की मे जाली क्यों लगवानी पड़ी? उत्तर: लेखक के घर में कबतूर ने घोंसला बना लिया था जिसमें दो बच्चे थे उनको दाना खिलाने के लिए कबूतर आया जाया करते थे, सामान तोड़ाकरते थे। इससे परेशान होकर लेखक की पत्नी ने मचान के आगे घोंसला सरका दिया और वहाँ जाली लगवानी पड़ी।
प्रश्न 3: समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला? उत्तर: कई सालों से बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे और उसकी ज़मीन हथिया रहे थे। समुद्र सिमटता जा रहा था। उसने पहले टाँगें समेटी फिर उकडू बैठा फिर खड़ा हो गया। फिर भी जगह कम पड़ने लगी जिससे वह गुस्सा हो गया। उसने गुस्सा निकालने के लिए तीन जहाज फेंक दिए। एक वार्लीके समुद्र के किनारे, दूसरा बांद्रा मे कार्टर रोड के सामने और तीसरा गेट वे ऑफ इंडिया पर टूट फूट गया।
प्रश्न 4: मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: इन पंक्तियों में बताया गया है कि सभी प्राणी एक ही मिट्टी से बने हैं और अंत में हमारा शरीर व्यक्तिगत पहचान खोकर उसी मिट्टी में मिल जाता है। यह पता नही रहता कि उस मिट्टी में कौन-कौन से मिट्टी मिली हुई है यानी मनुष्य में कितनी मनुष्यता है और कितनी पशुता यह किसी को पता नहीं होता।(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
प्रश्न 1: नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था। उत्तर: प्रकृति के साथ मनुष्य खिलवाड़ करता रहा है परन्तु प्रकृति की भी एक हद तक सहने की शक्ति होती है। इसके गुस्से का नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था। इसने तीन जहाजों को गेंद की तरह उछाल दिया था।
प्रश्न 2: जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है। उत्तर: महान तथा बड़े लोगों में क्षमा करने की प्रधानता होती है। किसी भी व्यक्ति की महानता क्रोध कर दण्ड देने में नहीं होती है बल्कि किसी की भी गलती को क्षमा करना ही महान लोगों की विशेषता होती है। समुद्र महान है। वह मनुष्य के खिलवाड़ को सहन करता रहा। पर हर चीज़ की हद होती है। एक समय उसका क्रोध भी विकराल रूप में प्रदर्शित हुआ। वैसे तो महान व्यक्तियों की तरह उसमें अथाह गहराई,शांति व सहनशक्ति है।
प्रश्न 3: इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है। उत्तर: बस्तियों के फैलाव से पेड़ कटते गए और पक्षियों के घर छिन गए। कुछ की तो जातियाँ ही नष्ट हो गईं। कुछ पक्षियों ने यहाँ इमारतों में डेरा जमा लिया।
प्रश्न 4: शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए। उत्तर: शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में उनकी यह भावना छिपी हुई थी कि वे पशु-पक्षियों की भावनाओं को समझते थे। वे चीटें को भी घर पहुँचाने जा रहे थे। उनके लिए मनुष्य पशु-पक्षी एक समान थे। वे किसी को भी तकलीफ नहीं देना चाहते थे।भाषा अध्यन
प्रश्न 1: उदारण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए; जैसे −(क)माँ ने भोजन परोसा।कर्ता(ख)मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।………………….(ग)मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।………………….(घ)कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।………………….(ङ)दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।………………….
उत्तर:(क)माँ ने भोजन परोसा।कर्ता(ख)मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।संप्रदान(ग)मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।कर्म(घ)कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।अधिकरण(ङ)दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।अधिकरण
प्रश्न 2. नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए − चींटी, घोड़ा, आवाज़, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा। उत्तर:चींटी-चीटियाँघोड़ा-घोड़ेंआवाज़-आवाज़ेंबिल-बिलफ़ौज-फ़ौजेंरोटी-रोटियाँबिंदु-बिंदु (बिदुओ को)दीवार-दीवारेंटुकड़ा-टुकड़े
प्रश्न 3. निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे किजिए − (क) आजकल ……………… बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना) (ख) पूरे कमरे को ……………… दो। (सजा/सज़ा) (ग) माँ दही …………… भूल गई। (जमाना/ज़माना) (घ) …………. चीनी तो देना (जरा/ज़रा) (ङ) दोषी को ………… दी गई। (सजा/सज़ा) (च) महात्मा के चेहरे पर……………. था। (तेज/तेज़) उत्तर: (क) आजकल ….ज़माना..…. बहुत खराब है। (ख) पूरे कमरे को .…सजा..…. दो। (ग) माँ दही ….जमाना… भूल गई। (घ) …ज़रा.… चीनी तो देना (ङ) दोषी को ..सज़ा…. दी गई। (च) महात्मा के चेहरे पर ..तेज.. था।परियोजना कार्य
प्रश्न 1: अपने आसपास प्रतिवर्ष एक पौधा लगाइए और उसकी समुचित देखभाल कर पर्यावरण में आए असंतुलन को रोकने में अपना योगदान दीजिए। उत्तर: अपने जन्मदिन पर पौधे लगाएँ तथा पर्यावरण संतुलन में योगदान दें।
प्रश्न 2: किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए जब अपने मनोरंजन के लिए मानव द्वारा पशु-पक्षियों का उपयोग किया गया हो। उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों विशेषकर पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में मेले मनोरंजन का उत्तम साधन माने जाते हैं। इस साल मुझे दीपावली की छुट्टियों में अपने एक सहपाठी के साथ उसके गाँव जाने का अवसर मिला जो महोबा उत्तर प्रदेश में है। इस गाँव में दीपावली के एक दिन पूर्व मेला लगता है, जहाँ लोग दीपावली की खरीददारी करते हैं। इसी मेले में मैंने देखा कि कुछ लोग नर भेड़ों को लड़ा रहे थे। ये भेड़े एक-दूसरे पर उछल-उछल कर सीगों से हमलाकर रहे थे जिससे उनके सिर टकराने से उत्पन्न टक की आवाज़ साफ़ सुनी जा सकती थी। करीब आधे घंटे बाद जब उनमें एक गिर गया तो दूसरे को उसके मालिक ने पकड़ लिया। उसकी जीत हो गई थी। यह मेरे लिए अद्भुत अवसर था जब मैंने मनुष्य को अपने मनोरंजन हेतु नर भेड़ों को लड़ाते देखा।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए – प्रश्न 1: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है? उत्तर: राष्ट्रपति द्वारा ‘तीसरी फिल्म’ को स्वर्णपदक से सम्मानित किया गया था। इस फ़िल्म को मास्को फिल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कार से सम्मानित किया गया बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन के द्वारा सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का अवार्ड दिया गया था।
प्रश्न 2: शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं? उत्तर: शैलेंद्र ने अपने जीवन में केवल एक ही फ़िल्म का निर्माण किया। ‘तीसरी कसम’ ही उनकी पहली व अंतिम फ़िल्म थी।
प्रश्न 3: राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए। उत्तर: राजकपूर के द्वारा निम्नलिखित फिल्में निर्देशित की गई है जैसे कि बाबी, मेरा नाम जोकर, संगम , श्री 420, सत्यम् शिवम् सुन्दरम् आदि फ़िल्में निर्देशित की ।
प्रश्न 4: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म के नायक व नायिकाओं के नाम बताइए और फ़िल्म में इन्होंने किन पात्रों का अभिनय किया है? उत्तर: ‘तीसरी कसम’ के नायक राजकपूर और नायिका वहीदा रहमान थीं। राजकपूर ने इस फ़िल्म में ‘हीरामन’ गाड़ीवान का किरदार और वहीदा रहमान द्वारा नौटंकी कलाकार ‘हीराबाई’ का किरदार निभाया गया था।
प्रश्न 5: फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ का निर्माण किसने किया था? उत्तर: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म का निर्माण गीतकार शैलेन्द्र ने किया था।
प्रश्न 6: राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी? उत्तर: राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ के निर्माण के समय इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि इस फ़िल्म के एक भाग को बनाने में ही छह साल का समय लग जाएगा।
प्रश्न 7: राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया? उत्तर: ‘तीसरी कसम’ की कहानी सुनते जब राजकपूर ने फ़िल्म में काम करने के लिए अपना पारिश्रमिक एडवांस में माँगने की बात की तब शैलेन्द्र का चेहरा मुरझा गया।
प्रश्न 8: फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे? उत्तर: समीक्षक राजकपूर को कला मर्मज्ञ तथा आँखों से बात करनेवाला कलाकार मानते थे।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में ) लिखिए –प्रश्न 1: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को सेल्यूलाइट पर लिखी कविता क्यों कहा गया है? उत्तर: फणीश्वरनाथ रेनू द्वारा लिखी गई ‘ तीसरी फिल्म’ जोकि एक साहित्यिक रचना है। सेल्यूलाइट का अर्थ होता है किसी नजारे को वैसे का वास कैमरे पर उतार देना, उसका चित्रांकन करना। किसी विषय के बारे में संपूर्ण जानकारी होना। यह फिल्म भी कविता के समान भावुकता, सहानुभूति, अधिकता,से परिपूर्ण है। जिसको कैमरे की रील पर उतारा गया है। इसलिए इसे सेल्यूलाइट पर लिखी कविता कहा गया है।
प्रश्न 2: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे? उत्तर: यह फ़िल्म एक सामान्य कोटि की मनोरंजक फ़िल्म न होकर एक उच्च कोटि की साहित्यिक फ़िल्म थी। इस फ़िल्म में अनावश्यक मनोरंजक मसाले नहीं डाले गए थे साथ ही फ़िल्म वितरक इस फ़िल्म की करुणा को पैसे के तराजू में तौल रहे थे और कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं थे इसलिए ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को खरीददार नहीं मिल रहे थे।
प्रश्न 3: शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है? उत्तर: शैलेन्द्र के अनुसार हर कलाकार का यह कर्तव्य है कि वह दर्शकों की रुचियों को ऊपर उठाने का प्रयास करें न कि दर्शकों का नाम लेकर सस्ता और उथला मनोरंजन उनपर थोपने का प्रयास करे।
प्रश्न 4: फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है? उत्तर: फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों को इतना ग्लोरिफ़ाई इसलिए कर दिया जाता है कि क्योंकि उनका मकसद केवल टिकट- विंडो पर अधिक से अधिक मात्रा में टिकट बिकवाना और उसके बदले पैसा कमाना होता है। वे दुख को इस प्रकार बढ़ा चढ़ाकर दिखाते हैं जिससे कि दर्शकों का भावनात्मक शोषण किया जा सके। जो की वास्तव में बिल्कुल भी सत्य नहीं होता। पंरतु दर्शक उसे पूरा सच मान लेते हैं। और भावुक हो उठते हैं।इसलिए वे त्रासद स्थितियों को ग्लोरिफ़ाई करते हैं।
प्रश्न 5: ‘शैलेन्द्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं’ − इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: राज कपूर वैसे भी आँखों से बात करनेवाले कलाकार माने जाते थे। शैलेन्द्र ने राजकपूर की इन्हीं भावनाओं को अपने गीतों से शब्दों की अभिव्यक्ति प्रदान की। कहने का तात्पर्य यह है कि राजकपूर जो कुछ भी अपनी फिल्मों के माध्यम से कहना चाहते थे उसे गीतकार शैलेन्द्र अपने गीतों के माध्यम से प्रकट कर देते थे।
प्रश्न 6: लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं? उत्तर: शोमैन ऐसे व्यक्ति को कहते है जो अपने ही जीवनकाल में एक किंदवंती बन चूका हो, जिसका नाम सुनकर ही फ़िल्में बिकती हो और उसका नाम ही दर्शक को सिनेमाघर तक खींच सकता हो। और उनकी सभी फ़िल्में और उनका व्यक्तित्व शोमैन के मानदंडों पर खरी उतरती थी। अत: लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है।
प्रश्न 7: फ़िल्म ‘श्री 420’ के गीत ‘रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ’ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की? उत्तर: फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ के गीत ‘रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ’ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति इसलिए की क्योंकि उनके अनुसार साहित्यिक सोच और जनसामान्य की सोच में अंतर होता है इसलिए दर्शक चार दिशाएँ तो जानते हैं परन्तु दसों दिशाओं का ज्ञान सभी को नहीं होगा। जिसके कारण दर्शक और कहानीकार या गीतकार के बीच में उचित तालमेल का अभाव हो रहा था।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में ) लिखिए –प्रश्न 1: राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों के आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई? उत्तर: राजकपूर जैसे अनुभवी निर्माता-निर्देशक के आगाह करने के बावजूद शैलेन्द्र फ़िल्म बनाना चाहते थे क्योंकि उन्हें धन सम्मान की कामना नहीं थी वे तो केवल अपनी आत्मतुष्टि,अपनी मन की भावनाओं की अभिव्यक्ति और दर्शकों के मन को छूना चाहते थे। इसलिए नफ़ा नुकसान के परे और अपने कलाकार मन के साथ समझौता न करते हुए तीसरीकसम फ़िल्म का निर्माण किया।
प्रश्न 2: ‘तीसरी कसम’ में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए। उत्तर: तीसरी कसम फ़िल्म में हीरामन का किरदार कुछ इस तरह निभाया कि जैसे उन्होंने हीरामन को आत्मसात करते हुए भी अपने आप को उस पर हावी नहीं होने दिया था और कलाकार की यह सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। राजकपूर ने हीरामन गाड़ीवान का भोलापन, हीराबाई में अपनापन खोजना, उसकी उपेक्षा पर अपने ही आप से जूझना आदि को बड़ी ही खूबसूरती से पेश किया है।
प्रश्न 3: लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है? उत्तर: तीसरी कसम एक शुद्ध साहित्यिक फ़िल्म थी। इस कहानी के मूल स्वरुप में जरा भी बदलाव नहीं किया गया था। शैलेन्द्र ने इस फ़िल्म में दर्शकों के लिए किसी भी प्रकार के काल्पनिक मनोरंजन को जबरदस्ती ठूँसा नहीं गया था। इस फ़िल्म ने कहानी की मूल आत्मा अर्थात् भावुकता के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया था इसलिए लेखक ने ऐसा लिखा है कि ‘तीसरी कसम’ ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है।
प्रश्न 4: शैलेन्द्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं। अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: शैलेन्द्र के द्वारा लिखे गए गीत भावनाओं से परिपूर्ण थे उनके गीत दिल की अंतरात्मा से निकलते थे। उन्होंने धन कमाने की लालसा में गीत कभी नहीं लिखे। उनके द्वारा लिखे गए गीत लोगों को बहुत पसंद आते थे। वह सभी के हृदय को छू लेते थे उनके गीतों में जरा भी बनावट नहीं। उनके गीत की गहराई मनुष्य के हृदय को अंदर तक छू लेती थी। उनके गीतों में संवेदना और प्रेम आदि के भाव विद्यमान थे।
प्रश्न 5: फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेन्द्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए? उत्तर: तीसरी कसम फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेन्द्र की पहली और अंतिम फ़िल्म थी। यह फ़िल्म उन्होंने बिना किसी व्यावसायिक लाभ, प्रसिद्धि की कामना न करते हुए केवल अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए बनाई थी। उनके सीधे-साधे व्यक्तित्व की छाप उनकी फ़िल्म के किरदार हीरामन में बखूबी दिखाई देती है। शैलेन्द्र फ़िल्म निर्माण के खतरों से परिचित होकर भी एक शुद्ध साहित्यिक फ़िल्म का निर्माण कर अपने साहसी होने का परिचय दिया है। सिद्धांतवादी होने के कारण उन्होंने अपनी फ़िल्म में कोई भी परिवर्तन स्वीकार नहीं किया।
प्रश्न 6: शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है। शैलेन्द्र ने अपने जीवन की विशेषता को ही अपनी फिल्म द्वारा प्रदर्शित किया है उनके गीत भावुक गुण वाले थे। वह अपनी फिल्म में बिल्कुल भी झूठा दिखावा नहीं करते थे। उनका मानना था कि एक कलाकार का फर्ज दर्शकों की इच्छा को सुरुचि पूर्ण ढंग से पूरा करना होता है। उन्होंने झूठे किरदार को कभी नहीं अपनाया। उनके गीतों की विशेषता थी कि वह समुंद्र के समान गहरे और नदी के समान शांत रूप से बहते हुए दिखाई पड़ते थे उनके गीतों में बिल्कुल भी बनावट नहीं थी। । जो विशेषता उनकी जिंदगी की थी उसी को उन्होंने अपनी फिल्म के द्वारा प्रदर्शित किया।
प्रश्न 7: लेखक के इस कथन से कि ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: मैं लेखक के विचार से पूरी तरह सहमत हूँ क्योंकि इस फ़िल्म को देखकर कविता जैसी अनुभूति होती ही है। यह फ़िल्म कवि शैलेन्द्र की कोमल भावनाओं की प्रस्तुति थी जिसे फ़िल्म के जरिए उतारा गया था। ‘तीसरी कसम’ जैसी संवेदनशील और भावनात्मक अनुभूति देने वाली फ़िल्म वही बना सकता था जो इन सभी भावनाओं से ओतप्रेत हो।
(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –प्रश्न 1: ….. वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। उत्तर: इसका आशय है कि शैलेंद्र एक आदर्शवादी भावुक हृदय कवि थे। उन्हें अपार संपत्ति तथा लोकप्रियता की कामना इतनी नहीं थी, जितनी आत्मतुष्टि, आत्मसंतोष, मानसिक शांति, मानसिक सांत्वना आदि की थी, क्योंकि ये सद्वृत्तियाँ धन से नहीं खरीदी जा सकतीं, न ही इन्हें कोई भेंट कर सकता है। इन गुणों की अनुभूति तो अंदर से ईश्वर की कृपा से ही होती है। इन्हीं अलौकिक अनुभूतियों से परिपूर्ण थे-शैलेंद्र, तभी तो वे आत्मतुष्टि चाहते थे।
प्रश्न 2: उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे। उत्तर: इस पंक्ति का आशय यह है कि कवि शैलेन्द्र का यह मानना था कि हर कलाकार का यह कर्तव्य है कि वह दर्शकों की रुचियों को ऊपर उठाने का प्रयास करें न कि दर्शकों का नाम लेकर सस्ता और उथला मनोरंजन उनपर थोपने का प्रयास करे।
प्रश्न 3: व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है। उत्तर: इसका अर्थ है कि व्यथा, पीड़ा, दुख आदि व्यक्ति को कमज़ोर या हतोत्साहित अवश्य कर देते हैं, लेकिन उसे पराजित नहीं करते बल्कि उसे मजबूत बनाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। हर व्यथा आदमी को जीवन की एक नई सीख देती है। व्यथा की कोख से ही तो सुख का जन्म होता है इसलिए व्यथा के बाद, दुख के बाद आने वाला सुख अधिक सुखकारी होता है।
प्रश्न 4: दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है। उत्तर: ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म गहरी संवेदनात्मक तथा भावनात्मक थी। उसे अच्छी रुचियों वाले संस्कारी मन और कलात्मक लोग ही समझ-सराह सकते थे। कवि शैलेंद्र की फ़िल्म निर्माण के पीछे धन और यश प्राप्त करने की अभिलाषा नहीं थी। वे इस फ़िल्म के माध्यम से अपने भीतर के कलाकार को संतुष्ट करना चाहते थे। इस फ़िल्म को बनाने के पीछे शैलेंद्र की जो भावना थी उसे केवल धन अर्जित करने की इच्छा करने वाले व्यक्ति नहीं समझ सकते थे। इस फिल्म की गहरी संवेदना उनकी समझ और सोच से ऊपर की बात है।
प्रश्न 5: उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं। उत्तर: इसका अर्थ है कि शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी, उनके गीत जन सामान्य के लिए लिखे गए गीत थे तथा गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी, तभी तो आज भी इनके द्वारा लिखे गए गीत गुनगुनाए जाते हैं। ऐसा लगता है, मानों हृदय को छूकर उसके अवसाद को दूर करते हैं।
भाषा अध्यन
प्रश्न 1: पाठ में आए ‘से’ के विभिन प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए। (क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। (ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ। (ग) फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ थे। (घ) दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने के गणित जानने वाले की समझ से परे थी। (ङ) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे। उत्तर: (क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया। (ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ। (ग) फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ थे। (घ) दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने के गणित जानने वाले की समझ से परे थी। (ङ) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे।
प्रश्न 2: इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए – (क) ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी। (ख) उन्होंने ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था। (ग) फ़िल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा। (घ) खालिस देहाती भुच्च गाड़ीवान जो सिर्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं। उत्तर: इस पाठ में आए निम्नलिखित वाक्यों की संरचना पर ध्यान दीजिए (क) ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी। (ख) उन्होंने ऐसी फ़िल्म बनाई थी जिसे सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था। (ग) फ़िल्म कब आई, कब चली गई, मालूम ही नहीं पड़ा। (घ) खालिस देहाती भुच्च गाड़ीवान जो सिर्फ दिल की जुबान समझता है, दिमाग की नहीं।
प्रश्न 3: पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों से वाक्य बनाइए − चेहरा मुरझाना, चक्कर खा जाना, दो से चार बनाना, आँखों से बोलना उत्तर: चेहरा मुरझाना – अपना रिजल्ट सुनते ही उसका चेहरा मुरझा गया। चक्कर खा जाना – बहुत तेज़ धूप में घूमकर वह चक्कर खाकर गिर गया। दो से चार बनाना – धन के लोभी हर समय दो से चार बनाने में लगे रहते हैं। आँखों से बोलना – उसकी आँखें बहुत सुन्दर हैं लगता है वह आँखों से बोलती है।
प्रश्न 4: निम्नलिखित शब्दों के हिन्दी पर्याय दीजिए − (क) शिद्दत……………… (ङ) नावाकिफ …………….. (ख) याराना……………… (च) यकीन …………….. (ग) बमुश्किल…………….. (छ) हावी …………….. (घ) खालिस……………… (ज) रेशा …………….. उत्तर: (क) शिद्दत – तीव्रता (ङ) नावाकिफ – अपरिचित, अनजान (ख) याराना – दोस्ती, मित्रता (च) यकीन – विश्वास (ग) बमुश्किल – कठिनाई से (छ) हावी – दवाब, भारी (घ) खालिस – शुद्ध (ज) रेशा – बारीक कण, तंतु
प्रश्न 5: निम्नलिखित का संधिविच्छेद कीजिए − (क) चित्रांकन …………..+…………… (ख) सर्वोत्कृष्ट ………….+…………… (ग) चर्मोत्कर्ष …………..+…………… (घ) रूपांतरण ……………+…………. (ङ) घनानंद ……………+…………… उत्तर:- (क) चित्रांकन = चित्र + अंकन (ख) सर्वोत्कृष्ट = सर्व + उत्कृष्ट (ग) चर्मोत्कर्ष = चरम + उत्कर्ष (घ) रूपांतरण = रूप + अंतरण (ङ) घनानंद = घन + आनंद
प्रश्न 6: निम्नलिखित का समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए − (क) कला मर्मज्ञ …………… (ख) लोकप्रिय …………… (ग) राष्ट्रपति …………… उत्तर:
योग्यता विस्तार
प्रश्न 1: फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए। उत्तर: छात्र स्वयं पढ़ें।
प्रश्न 2: समाचार पत्रों में फ़िल्मों की समीक्षा दी जाती है। किन्हीं तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए और तीसरी कसम’ फ़िल्म को देखकर इस फ़िल्म की समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए। उत्तर: छात्र स्वयं पढ़ें।
परियोजना कार्य
प्रश्न 1: फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए। उत्तर: छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 2: ‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।
उत्तर:
प्रश्न 3: लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए। उत्तर: छात्र स्वयं करें।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो-पंक्तियों में दीजिए – प्रश्न 1: तताँरा-वामीरो कहाँ की कथा है? उत्तर: तताँरा-वामीरो अंदमान निकोबार द्वीप समुह की लोक कथा है।
प्रश्न 2: वामीरो अपना गाना क्यों भूल गई? उत्तर: अचानक समुद्र की ऊँची लहर ने वामीरो को भिगो दिया, इसी हड़बडाहट में वह गाना भूल गई।
प्रश्न 3: तताँरा ने वामीरो से क्या याचना की? उत्तर: तताँरा ने वामीरो से याचना की कि वह कल उसी समुद्री चट्टान पर आए।
प्रश्न 4: तताँरा और वामीरो के गाँव की क्या रीति थी? उत्तर: तताँरा और वामीरो के गाँव की रीति थी कि विवाह संबंध बाहर के किसी गाँव वाले से नहीं हो सकता था।
प्रश्न 5: क्रोध में तताँरा ने क्या किया? उत्तर: क्रोध में तताँरा का हाथ कमर पर लटकी तलवार पर चला गया और उसने तलवार निकाल कर ज़मीन में गाड़ दी।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए –
प्रश्न 1: तताँरा की तलवार के बारे में लोगों का क्या मत था? उत्तर: तताँरा की तलवार लकड़ी की थी औऱ हर समय तताँरा की कमर पर बँधी रहती थी। वह इसका प्रयोग सबके सामने नहीं करता था। लोगों का मानना था कि उसमे अद्भुत दैवीय शक्ति थी। वास्तव में वह तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।
प्रश्न 2: वामीरों ने तताँरा को बेरूखी से क्या जवाब दिया? उत्तर: वामीरों ने तताँरा को बेरूखी से जवाब दिया कि पहले वह बताए कि वह कौन है जो इस तरह प्रश्न पूछ रहा है।
प्रश्न 3: तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु से निकोबार में क्या परिवर्तन आया? उत्तर: तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु की घटना के बाद निकोबारी दूसरे गांवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध रखने लगे।
प्रश्न 4: निकोबार के लोग तताँरा को क्यों पसंद करते थे? उत्तर: निकोबार के लोग तताँरा को उसके आत्मीय स्वभाव के कारण पसन्द करते थे। वह नेक ईमानदार और साहसी था। वह मुसीबत के समय भाग भागकर सबकी मदद करता था।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए –
प्रश्न 1: निकोबार द्वीप समूह के विभक्त होने के बारे में निकोबारियों का क्या विश्वास है? उत्तर: निकोबारियों का विश्वास था कि पहले अडंमान निकोबार दोनों एक ही द्वीप थे। इनके दो होने के पीछे तताँरा-वामीरो की लोक कथा प्रचलित है। ये दोनों प्रेम करते थे। दोनों एक गाँव के नहीं थे। इसलिए रीति अनुसार विवाह नहीं हो सकती थी। रूढ़ियों में जकड़ा होने के कारण वह कुछ कर भी नहीं सकता था। उसे अत्यधिक क्रोध आया और उसने क्रोध में अपनी तलवार धरती में गाड़ दी और उसे खींचते खींचते वह दूर भागता चला गया। इससे ज़मीन दो भागों में बँट गई – एक निकोबार और दूसरा अंडमान।
प्रश्न 2: तताँरा खूब परिश्रम करने के बाद कहाँ गया? वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए। उत्तर: तताँरा दिनभर खूब परिश्रम करने के बाद समुद्र के किनारे टहलने निकल गया। शाम का समय था और समुद्र से ठंडी हवाएँ आ रही थी। पक्षियों की चहचहाट धीरे-धीरे कम हो रही थी। डुबते हुए सूरज़ की किरणें समुद्र के पानी पर पड़कर सतरंगी छटा बिखेर रही थी। समुद्र का पानी बहते हुए आवाज़ कर रहा था मानो कोई गीत गा रहा हो। पूरा वातावरण बहुत मोहक लग रहा था।
प्रश्न 3: वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के जीवन में क्या परिवर्तन आया? उत्तर: वामीरो से मिलने के बाद तताँरा बहुत बैचेन रहने लगा। वह अपनी सुधबुध खो बैठा। वह शाम की प्रतिक्षा करता जब वह वामीरो से मिल सके। वह दिन ढलने से पहले ही लपाती की समुद्री चट्टान पर पहुँच गया। उसे एक-एक पल पहाड़ जैसा लग रहा था।
प्रश्न 4: प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति प्रदर्शन के लिए किस प्रकार के आयोजन किए जाते थे? उत्तर: प्राचीन काल में हष्ट पुष्ट पशुओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किए जाते थे। लड़ाकू साँडों, शेर, पहलवानों की कुश्ती, तलवार बाजी जैसे शक्ति प्रदर्शन के कार्यक्रम होते थे। तीतर, बटेर की लड़ाई, पंतगबाजी, पैठे लगाना जिसमें विशिष्ठ सामग्रियाँ बिकती। खाने पीने की दुकाने, जानवरों की नुमाइश, ये सभी मनोरंजन के आयोजन होते थे।
प्रश्न 5: रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगें तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। क्यों? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: रूढ़ियां और बंधन समाज को अनुशासित करने के लिए बनते हैं परन्तु जब इन्हीं के द्वारा मनुष्य की भावना आहत होने लगे, बंधन बनने लगे और बोझ लगने लगे तो उसका टूट जाना ही अच्छा होता है। इस कहानी के सन्दर्भ में देखा जाए तो तांतरा-वामीरो का विवाह एक रूढ़ि के कारण नही हो सकता था जिसके कारण उन्हें जान देनी पड़ती है। इस तरह की रूढ़ियाँ किसी भला करने की जगह नुकसान करती हैं। समयानुसार समाज में परिवर्तन आते रहते हैं और रूढ़ियाँ आडम्बर प्रतीत होती हैं इसलिए इनका टूट जाना बेहतर होता है।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –
प्रश्न 1: जब कोई राह न सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमें शक्ति भर उसे धरती में घोंप दिया और ताकत से उसे खींचने लगा। उत्तर: तताँरा-वामीरो को पता लग गया था कि उनका विवाह नहीं हो सकता था। फिर भी वे मिलते रहे। एक बार पशु पर्व मे वामीरो तताँरा से मिलकर रोने लगी। इस पर उसकी माँ ने क्रोध किया और तताँरा को अपमानित किया। तताँरा को भी क्रोध आने लगा। अपने गुस्से को शान्त करने के लिए अपनी तलवार को ज़मीन में गाड़ कर खींचता चला गया। इस कारण धरती दो हिस्सों में बंट गयी।
प्रश्न 2: बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की देह पर डूबती किरणों की तरह कभी भी डूब सकती थी। उत्तर: तताँरा ने वामीरो से मिलने के लिए कहा और वह शाम के समय उसकी प्रतीक्षा भी कर रहा था। जैसे-जैसे सूरज डूब रहा था, उसको वामीरो के न आने की आशंका होने लगती। जिस प्रकार सूर्य की किरणें समुद्र की लहरों में कभी दिखती तो कभी छिप जाती थी, उसी तरह तताँरा के मन में भी उम्मीद बनती और डूबने लगती थी।
भाषा अध्यन
प्रश्न 1: निम्नलिखित वाक्यों के सामने दिए कोष्ठक में (✓) का चिह्न लगाकर बताएँ कि वह वाक्य किस प्रकार का है − (क) निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) (ख) तुमने एकाएक इतना मधुर गाना अधूरा क्यों छोड़ दिया? (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) (ग) वामीरो की माँ क्रोध में उफन उठी। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) (घ) क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम? (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) (ङ) वाह! कितना सुदंर नाम है। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) (च) मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक) उत्तर:(क)निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे।विधानवाचक(ख)तुमने एकाएक इतना मधुर गाना अधूरा क्यों छोड़ दिया?प्रश्नवाचक(ग)वामीरो की माँ क्रोध में उफन उठी।विधानवाचक(घ)क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम?प्रश्नवाचक(ङ)वाह! कितना सुदंर नाम है।विस्मयादिबोधक(च)मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा।विधानवाचक
प्रश्न 2: निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए − (क) सुध-बुध खोना (ख) बाट जोहना (ग) खूशी का ठिकाना न रहना (घ) आग बबूला होना (ङ) आवाज़ उठाना उत्तर: (क) सुध-बुध खोना – अचानक बहुत से मेहमानों को देखकर गीता ने अपनी सुधबुध खो दी। (ख) बाट जोहना – शाम होते ही माँ सबकी बाट जोहने लगती। (ग) खुशी का ठिकाना न रहना – आई. ए. एस. की परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर मोहन का खुशी का ठिकाना न रहा। (घ) आग बबूला होना – शैतान बच्चों को देखकर अध्यापक आग बबूला हो गए। (ङ) आवाज़ उठाना – प्रगतीशील लोगों ने रूढ़ियों के खिलाफ आवाज़ उठाई।
प्रश्न 3: नीचे दिए गए शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग करके लिखिए −शब्दमूल शब्दप्रत्ययचर्चित————————————–साहसिक————————————–छटपटाहट————————————–शब्दहीन————————————–
प्रश्न 4: नीचे दिए गए शब्दों में उचित उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए −——————+आकर्षक=————————————+ज्ञात=————————————+कोमल=————————————+होश=————————————+घटना=——————
प्रश्न 5: निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए − (क) जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ। (मिश्रवाक्य) (ख) फिर तेज़ कदमों से चलती हुई तताँरा के सामने आकर ठिठक गई। (संयुक्त वाक्य) (ग) वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ी। (सरल वाक्य) (घ) तताँरा को देखकर वह फूटकर रोने लगी। (संयुक्त वाक्य) (ङ) रीति के अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था। (मिश्रवाक्य) उत्तर: (क) जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है जब मैं विचलित हुआ हूँ। (ख) फिर तेज़ कदमों से चलती हुई आई और तताँरा के सामने आकर ठिठक गई। (ग) वामीरो कुछ सचेत होकर घर की तरफ़ दौड़ी। (घ) उसने तताँरा को देखा और वह फूटकर रोने लगी। (ङ) रीति के अनुसार यह आवश्यक था कि दोनों एक ही गाँव के हों।
प्रश्न 6: नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए तथा ‘और’ शब्द के विभिन्न प्रयोगों पर ध्यान दीजिए-
पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहा करता था। (दो पदों को जोड़ना)
वह कुछ और सोचने लगी। (‘अन्य’ के अर्थ में)
एक आकृति कुछ साफ़ हुई… कुछ और … कुछ और… (क्रमशः धीरे-धीरे के अर्थ में)
अचानक वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ गई। (दो उपवाक्यों को जोड़ने के अर्थ में)
वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था। (‘अधिकता’ के अर्थ में)
उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। (‘निकटता’ के अर्थ में)
उत्तर: छात्र स्वयं करें।
प्रश्न 7: नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द लिखिए − भय, मधुर, सभ्य, मूक, तरल, उपस्थिति, सुखद।
प्रश्न 8: नीचे दिए गए शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए − समुद्र, आँख, दिन, अँधेरा, मुक्त।
उत्तर: समुद्र-सागर, जलधिआँख-नेत्र, चक्षुदिन-दिवस, वासरअँधेरा-तम, अंधकारमुक्त-आज़ाद, स्वतंत्र
प्रश्न 9: नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए − किंकर्तव्यविमूढ़, विह्वल, भयाकुल, याचक, आकंठ।
उत्तर: किंकर्तव्यविमूढ़ − बहुत परेशानी में ठाकुर साहब से ढेरो पैसे इनाम मिलने पर वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया। विह्वल − गीता बूढ़ी माँ के अंतिम क्षणों में विह्वल हो गई। भयाकुल − वह अकेले अंधेरे घर में भयाकुल हो गया। याचक − दरवाज़े पर एक याचक खड़ा था। आकंठ − वह बहुत ही मधुर आकंठ से गीत गा रही थी।
प्रश्न 10: ‘किसी तरह आँचरहित एक ठंडा और ऊबाऊ दिन गुज़रने लगा’ वाक्य में दिन के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया गया है? आप दिन के लिए कोई तीन विशेषण और सुझाइए। उत्तर: (क) ठंडा, ऊबाऊ (ख) सुदंर, शुभ, ठंडा।
प्रश्न 11: इस पाठ में देखना’ क्रिया के कई रूप आए हैं-‘देखना’ के इन विभिन्न शब्द-प्रयोगों में क्या अंतर है? इसी प्रकार ‘बोलना’ क्रिया के विभिन्न शब्द-प्रयोग बताइए। उत्तर:
प्रश्न 12: नीचे दिए गए वाक्यांशों को पढ़िए- (क) श्याम का बड़ा भाई रमेश कल आया था। (संज्ञा पदबंध) (ख) सुनीता परिश्रमी और होशियार लड़की है। (विशेषण पदबंध) (ग) अरुणिमा धीरे-धीरे चलते हुए वहाँ जा पहुँची। (क्रिया विशेषण पदबंध) (घ) आयुष सुरभि का चुटकुला सुनकर हँसता रहा। (क्रिया पदबंध) ऊपर दिए गए वाक्य (क) में रेखांकित अंश में कई पद हैं जो एक पद संज्ञा का काम कर रहे हैं। वाक्य (ख) में तीन पद मिलकर विशेषण पद का काम कर रहे हैं। वाक्य (ग) और (घ) में कई पद मिलकर क्रमशः क्रिया विशेषण और क्रिया का काम कर रहे हैं। ध्वनियों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं और वाक्य में प्रयुक्त शब्द ‘पद’ कहलाता है; जैसे‘पेड़ों पर पक्षी चहचहा रहे थे।’ वाक्य में ‘पेड़ों’ शब्द पद है क्योंकि इसमें अनेक व्याकरणिक बिंदु जुड़ जाते हैं। कई पदों के योग से बने वाक्यांश को जो एक ही पद का काम करता है, पदबंध कहते हैं। पदबंध वाक्य का एक अंश होता है। पदबंध मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं-
संज्ञा पदबंध
क्रिया पदबंध
विशेषण पदबंध
क्रियाविशेषण पदबंध
वाक्यों के रेखांकित पदबंधों का प्रकार बताइए − (क) उसकी कल्पना में वह एक अद्भुत साहसी युवक था। (ख) तताँरा को मानो कुछ होश आया। (ग) वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता। (घ) तताँरा की तलवार एक विलक्षण रहस्य थी। (ङ) उसकी व्याकुल आँखें वामीरों को ढूँढने में व्यस्त थीं। उत्तर: (क) विशेषण पदबंध (ख) क्रिया पदबंध (ग) क्रिया विशेषण पदबंध (घ) संज्ञा पदबंध (ङ) संज्ञा पदबंध
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए − प्रश्न 1: कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था? उत्तर: 26 जनवरी 1930 को गुलाम भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था, जिसमें कलकत्ता वासियों की भागीदारी साधारण थी। 26 जनवरी 1931 को उसकी पुनरावृत्ति थी, लेकिन इस बार कलकत्ता में इसकी तैयारियाँ जोरों पर थीं। इसलिए यह दिन कलकत्ता वासियों के लिए महत्वपूर्ण था।
प्रश्न 2: सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था? उत्तर: सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।
प्रश्न 3: विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई? उत्तर: बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जैसे ही झंडा गाड़ा, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और लोगों पर लाठियाँ चलाई।
प्रश्न 4: लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे? उत्तर: लोग अपने-अपने मकानों और सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर यह बताना चाहते थे कि वे खुद को आज़ाद समझ कर आज़ादी मना रहे हैं, और उनमें जोश और उत्साह है।
प्रश्न 5: पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को क्यों घेर लिया था? उत्तर: आज़ादी मनाने के लिए पूरे कलकत्ता शहर में जनसभाओं और झंडारोहण उत्सवों का आयोजन किया गया था, इसलिए पुलिस ने पार्कों और मैदानों को घेर लिया था।
लिखित(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए –
प्रश्न 1: 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं ? उत्तर: 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए कई तैयारियाँ की गईं। केवल प्रचार पर दो हजार रुपये खर्च किए गए थे। कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को उनके कार्य समझाए। कलकत्ता शहर में जगह-जगह झंडे लगाए गए थे। कई स्थानों पर जुलूस निकाले गए और झंडा फहराया गया। टोलियाँ बनाकर भीड़ उस स्थान पर जुटने लगी जहाँ सुभाष बाबू का जुलूस पहुँचना था।
प्रश्न 2: ‘आज जो बात थी वह निराली थी’− किस बात से पता चलरहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: आज का दिन निराला इसलिए था क्योंकि यह स्वतंत्रता दिवस मनाने की पहली पुनरावृत्ति थी। पुलिस ने सभा करना गैरकानूनी बताया था, लेकिन सुभाष बाबू के आह्वान पर पूरे कलकत्ता में जुलूस और सभाओं की जोशीली तैयारी की गई थी। पूरा शहर झंडों से सजा था और कौंसिल ने मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ने का सरकार को खुला चैलेंज दिया था। पुलिस भरपूर तैयारी के बाद भी कामयाब नहीं हो पाई।
प्रश्न 3: पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था? उत्तर: पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला था कि कोई भी जनसभा करना या जुलूस निकालना कानून के खिलाफ़ होगा। सभाओं में भाग लेने वालों को दोषी माना जाएगा। वहीं कौंसिल ने नोटिस निकाला था कि मोनुमेंट के नीचे चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। इस प्रकार ये दोनों नोटिस एक-दूसरे के खिलाफ़ थे।
प्रश्न 4: धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया? उत्तर: जब सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया, तो स्त्रियाँ जुलूस बनाकर चलीं, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके परिणामस्वरूप कुछ लोग वहीं बैठ गए, कुछ घायल हो गए और कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसी कारण जुलूस टूट गया।
प्रश्न 5: डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर रहे थे, उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फ़ोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए। उत्तर: डॉ. दास गुप्ता लोगों की फ़ोटो खिचवा रहे थे। इससे अंग्रेज़ों के जुल्म का पर्दाफ़ाश किया जा सकता था, दूसरा यह भी पता चल सकता था कि बंगाल में स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत काम हो रहा है।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए –
प्रश्न 1: सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी? उत्तर: सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की महत्वपूर्ण भुमिका रही थी। भारी पुलिस व्यवस्था के बाद भी जगह-जगह स्त्री जुलूस के लिए टोलियाँ बन गई थीं। मोनुमेंट पर भी स्त्रियों ने निडर होकर झंडा फहराया, अपनी गिरफ्तारियाँ करवाई तथा उनपर लाठियाँ बरसाई। इसके बाद भी स्त्रियाँ लाल बाज़ार तक आगे बढ़ती गईं।
प्रश्न 2: जुलूस के लाल बाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई? उत्तर: जुलूस के लाल बाज़ार आने पर भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस डंडे बरसा रही थी, लोगों को लॉकअप में भेज रही थी। स्त्रियाँ भी अपनी गिरफ़तारी दे रही थीं। दल के दल नारे लगा रहे थे। लोगों का जोश बढ़ता ही जा रहा था। लाठी चार्ज से लोग घायल हो गए थे। खून बह रहा था। चीख पुकार मची थी फिर भी उत्साह बना हुआ था।
प्रश्न 3: ‘जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए। उत्तर: यहाँ पर अंग्रेजी राज्य द्वारा सभा न करने के कानून को भंग करने की बात कही गई है। वात्सव में यह कानून भारतवासियों की स्वाधीनता को दमन करने का कानून था इसलिए इसे भंग करना उचित था। इस समय देश की आज़ादी के लिए हर व्यक्ति अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार था। अंग्रेज़ों ने कानून बनाकर आन्दोलन, जुलूसों को गैर कानूनी घोषित किया हुआ था परन्तु लोगों पर इसका कोई असर नहीं था। वे आज़ादी के लिए अपना प्रदर्शन करते रहे, गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का प्रयास करते रहे थे।
प्रश्न 4: बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में कलकत्ता वासियों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी ज़ोर-शोर से की थी। पुलिस की सख्ती, लाठी चार्ज, गिरफ़तारियाँ, इन सब के बाद भी लोगों में जोश बना रहा। लोग झंडे फहराते, वंदे मातरम बोलते हुए, खून बहाते हुए भी जुलूस निकालने को तत्पर थे। जुलूस टूटता फिर बन जाता। कलकत्ता के इतिहास में इतने प्रचंड रूप में लोगों को पहले कभी नहीं देखा गया था।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –
प्रश्न 1: आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया। उत्तर: हजारों स्त्री पुरूषों ने जुलूस में भाग लिया, आज़ादी की सालगिरह मनाने के लिए बिना किसी डर के प्रदर्शन किया। पुलिस के बनाए कानून कि, जुलूस आदि गैर कानूनी कार्य, आदि की भी परवाह नहीं की। पुलिस की लाठी चार्ज होने पर लोग घायल हो गए। खून बहने लगे परन्तु लोगों में जोश की कोई कमी नहीं थी। बंगाल के लिए कहा जाता था कि स्वतंत्रता के लिए बहुत ज़्यादा योगदान नहीं दिया जा रहा है। आज की स्थिति को देखकर उन पर से यह कंलक मिट गया।
प्रश्न 2: खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी? उत्तर: पुलिस ने कोई प्रदर्शन न हो इसके लिए कानून निकाला कि कोई जुलूस आदि आयोजित नहीं होगा परन्तु सुभाष बाबू की अध्यक्षता में कौंसिल ने नोटिस निकाला था कि मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिक्षा पढ़ी जाएगी। सभी को इसके लिए आंमत्रित किया गया, खूब प्रचार भी हुआ। सारे कलकत्ते में झंडे फहराए गए थे। सरकार और आम जनता में खुली लड़ाई थी।
भाषा अध्यन
प्रश्न 1: रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं- सरल वाक्य – सरल वाक्य में कर्ता, कर्म, पूरक, क्रिया और क्रिया विशेषण घटकों या इनमें से कुछ घटकों का योग होता है। स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होने वाला उपवाक्य ही सरल वाक्य है। उदाहरण- लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूमने लगे। संयुक्त वाक्य – जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र या मुख्य उपवाक्य समानाधिकरण योजक से जुड़े हों, वह संयुक्त वाक्य कहलाता है। योजक शब्द-और, परंतु, इसलिए आदि। उदाहरण- मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। मिश्र वाक्य – वह वाक्य जिसमें एक प्रधान उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, मिश्र वाक्य कहलाता है। उदाहरण- जब अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा तब पुलिस ने उनको पकड़ लिया। निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए- I. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार गया और वहाँ पर गिरफ़्तार हो गया। (ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे। (ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया। II . ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए। उत्तर: I. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार पहुँच कर गिरफ़्तार हो गया। (ख) हज़ारों लोगों की भीड़ मैदान में टोलियाँ बनाकर घूमने लगी। (ग) सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में लाल बाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।
II.सरल वाक्य − (क) वह स्वभाव से बड़े अध्ययनशील थे। (ख) उनकी रचनाओं को समझना छोटे मुँह बड़ी बात है। संयुक्त वाक्य− (क) अभिमान किया और दीन दुनिया दोनों से गया। (ख) मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा। मिश्र वाक्य− (क) मैंने बहुत चेष्टा की कि इस पहेली का कोई अर्थ निकालूँ लेकिन असफल रहा। (ख) मैं कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है।
प्रश्न 2: निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और समझिए कि जाना, रहना और चुकना क्रियाओं का प्रयोग किस प्रकार किया गया है। (क) 1. कई मकान सजाए गए थे। 2. कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लगाए गए थे। (ख) 1. बड़े बाज़ार के प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था। 2. कितनी ही लारियाँ शहर में घुमाई जा रही थीं। 3. पुलिस भी अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त देकर प्रदर्शन कर रही थीं। (ग) 1. सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था, वह प्रबंध कर चुका था। 2. पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था। उत्तर: उपरिलिखित वाक्यों को पढ़ने और समझने से पता चलता है कि इनमें ‘जाना’, ‘रहना’ और ‘चुकना’ क्रियाओं का प्रयोग मुख्य क्रिया के रूप में न करके रंजक क्रिया के रूप में किया गया है। इससे इनकी मुख्य क्रियाएँ संयुक्त क्रिया बन गई हैं।
प्रश्न 3: नीचे दिए गए शब्दों की संरचना पर ध्यान दीजिए- विद्या + अर्थी – विद्यार्थी ‘विद्या’ शब्द का अंतिम स्वर ‘आ’ और दूसरे शब्द ‘अर्थी’ की प्रथम स्वर ध्वनि ‘अ’ जब मिलते हैं तो वे मिलकर दीर्घ स्वर ‘आ’ में बदल जाते हैं। यह स्वर संधि है जो संधि का ही एक प्रकार है। संधि शब्द का अर्थ है- जोड़ना। जब दो शब्द पास-पास आते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि बाद में आने वाले शब्द की पहली ध्वनि से मिलकर उसे प्रभावित करती है। ध्वनि परिवर्तन की इस प्रक्रिया को संधि कहते हैं। संधि तीन प्रकार की होती है-स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि। जब संधि युक्त पदों को अलग-अलग किया जाता है तो उसे संधि विच्छेद कहते हैं; जैसे- विद्यालय – विद्या + आलय नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए −
उत्तर:
योग्यता विस्तार
प्रश्न 1: भौतिक रूप से दबे हुए होने पर भी अंग्रेजों के समय में ही हमारा मन आजाद हो चुका था। अत: दिसंबर सन् 1929 में लाहौर में कांग्रेस का एक बड़ा अधिवेशन हुआ, इसके सभापति जवाहरलाल नेहरू जी थे। इस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास किया गया कि अब हम ‘पूर्ण स्वराज्य से कुछ भी कम स्वीकार नहीं करेंगे। 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान की प्रतिज्ञा की। उसके बाद आज़ादी प्राप्त होने तक प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। उत्तर: यह पाठ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित है, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) के संदर्भ में। इस अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अध्यक्षता की थी, और इस अधिवेशन में यह ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ था कि “पूर्ण स्वराज्य” (पूर्ण स्वतंत्रता) से कुछ भी कम स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद, 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने अपने देश की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान देने की प्रतिज्ञा ली। इस दिन को स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक के रूप में मनाने के लिए, हर वर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता था। भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद, 26 जनवरी का दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा, क्योंकि इस दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था और भारत एक गणराज्य बना। निष्कर्ष:
1929 में लाहौर अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज्य” की मांग की गई।
26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता के लिए बलिदान की प्रतिज्ञा ली गई।
26 जनवरी का दिन स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महत्वपूर्ण दिनों में से एक है और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
प्रश्न 2: डायरी-यह गद्य की एक विधा है। इसमें दैनिक जीवन में होने वाली घटनाओं, अनुभवों को वर्णित किया जाता है। आप भी अपनी दैनिक जीवन से संबंधित घटनाओं को डायरी में लिखने का अभ्यास करें। उत्तर: 09 जनवरी, 2016 शनिवार
जनवरी महीने का पूर्वार्ध बीतने को है। लगता है इस बार दिल्ली से सरदी रूठी ही रहेगी। सरदी का बहाना करके भी बिस्तर में देर तक नहीं पड़ा रह सकता। अरे! हाँ, याद आया आज तो हमें माता-पिता के साथ चिड़ियाघर देखने जाना है। उठकर जल्दी तैयार होता हूँ। अरे! यह क्या पिता जी कार साफ़ करा रहे हैं। लगता है, वे कार से चिड़ियाघर जाना चाहते हैं। लगता है कि उन्हें याद नहीं कि आज तो दिल्ली की सड़कों पर आड (विषम) नंबर की गाड़ियाँ ही चलेंगी। हमारी कार तो इवन (सम) नंबर की है। पिता जी, उसमें समान रखवाएँ, इससे पहले यह याद दिलाता हूँ। उनसे कहता हूँ कि या तो मेट्रो से चलें या कल रविवार को। आज तो इवन नंबर की कार में चलना ठीक न रहेगा, है न।
मोहित
प्रश्न 3: जमना लाल बजाज, महात्मा गांधी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाने जाते हैं, क्यों? अध्यापक से जानकारी प्राप्त करें। उत्तर: जमनालाल बजाज, बजाज उद्योग घराने के संस्थापक थे। कभी वे राजस्थान के प्रसिद्ध व्यापारी हुआ करते थे। ये अपनी व्यावसायिक एवं प्रशासनिक कुशलता से अंग्रेजों के प्रिय बन गए। इन्हें राय बहादुर की उपाधि देकर अंग्रेजों ने सम्मानित किया। जमनालाल को जब गांधी जी का सान्निध्य मिला तो वे गांधी जी से अत्यंत प्रभावित हुए और गांधी जी के शिष्य बन गए। इससे उनका स्वाभिमान जाग उठा और उन्होंने अंग्रेजों का सम्मान लौटाया ही नहीं बल्कि गांधी जी अनुयायी भी बन गए। उनके द्वारा वर्धा में सेवा संघ की स्थापना की गई। वे गांधी जी के सिद्धांत सत्य और अहिंसा का पालन करते थे। अपने सिद्धांत के प्रति ऐसा समर्पण देख गांधी जी उन्हें अपना पुत्र मानने लगे। कालांतर में जमनालाल को गांधी जी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाना जाने लगा।
प्रश्न 4: ढाई लाख का जानकी देवी पुरस्कार जमना लाल बजाज फाउंडेशन द्वारा पूरे भारत में सराहनीय कार्य करने वाली महिलाओं को दिया जाता है। यहाँ ऐसी कुछ महिलाओं के नाम दिए जा रहे है- श्रीमती अनुताई लिमये 1993 महाराष्ट्र; सरस्वती गोरा 1996 आंध्र प्रदेश; मीना अग्रवाल 1996 असम, सिस्टर मैथिली 1999 केरल; कुंतला कुमारी आचार्य 2001 उड़ीसा। इनमें से किसी एक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कीजिए। उत्तर: श्रीमती अनुताई लिमये (Anutai Limaye) को वर्ष 1993 में जानकी देवी बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें महाराष्ट्र में ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। जीवन परिचय
जन्म: अनुताई लिमये का जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव में हुआ था।
शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में प्राप्त की और बाद में सामाजिक कार्यों में रुचि विकसित की।
परिवार: उनके परिवार का सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान था, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली।
कार्यक्षेत्र: अनुताई लिमये ने ग्रामीण महिलाओं के लिए कई पहलें शुरू कीं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, और स्वावलंबन के क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई, और अन्य कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों की स्थापना की, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। पुरस्कार और सम्मान: उनके समर्पित कार्यों के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें से जानकी देवी बजाज पुरस्कार प्रमुख है। यह पुरस्कार उन्हें ग्रामीण भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया। निष्कर्ष: अनुताई लिमये का जीवन हमें यह सिखाता है कि एक व्यक्ति के समर्पण और मेहनत से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उनके कार्यों ने न केवल महिलाओं को सशक्त किया, बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए।
परियोजना कार्य
प्रश्न 1: स्वतंत्रता आंदोलन में निम्नलिखित महिलाओं में जो योगदान दिया, उसके बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करके लिखिए- (क) सरोजिनी नायडू (ख) अरुणा आसफ अली (ग) कस्तूरबा गांधी उत्तर:(क) सरोजिनी नायडू
योगदान: सरोजिनी नायडू भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता और कवियत्री थीं। उन्हें “भारत की बुलबुल” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। सरोजिनी नायडू महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थीं और 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उत्तर प्रदेश की पहली महिला गवर्नर बनीं।
मुख्य योगदान:
उन्होंने 1916 में लखनऊ कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लिया।
उन्होंने नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रमुख सदस्य थीं और महिला आंदोलन की प्रवर्तक के रूप में खड़ी हुईं।
(ख) अरुणा आसफ अली
योगदान: अरुणा आसफ अली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख नेता और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य योगदान:
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान, उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस का ध्वज फहराया और यह एक प्रतीक बन गया।
वह अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रही।
अरुणा आसफ अली को उनकी साहसिकता और देशभक्ति के लिए जाना जाता है।
(ग) कस्तूरबा गांधी
योगदान: कस्तूरबा गांधी महात्मा गांधी की पत्नी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की निडर सहयोगी थीं। उन्होंने भारतीय महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य योगदान:
कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी के साथ नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया।
उन्होंने भारतीय महिलाएं को जागरूक किया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।
कस्तूरबा गांधी ने भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए कई सामाजिक कार्य किए।
प्रश्न 2: इस पाठ के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में कलकत्ता (कोलकाता) के योगदान का चित्र स्पष्ट होता है। आज़ादी के आंदोलन में आपके क्षेत्र का भी किसी न किसी प्रकार का योगदान रहा होगा। पुस्तकालय, अपने परिचितों या फिर किसी दूसरे स्रोत से इस संबंध में जानकारी हासिल कर लिखिए। उत्तर: स्वतंत्रता संग्राम में कलकत्ता (कोलकाता) का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ की कई प्रमुख घटनाओं और आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी। इस शहर से स्वतंत्रता संग्राम के कई महान नेता और क्रांतिकारी जुड़े थे, जिनमें सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ ठाकुर (रवींद्रनाथ टैगोर), सरोजिनी नायडू और अन्य महान नेता शामिल हैं। कोलकाता का योगदान:
स्वदेशी आंदोलन:
1905 में बंटवारे का विरोध: 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन ने जोर पकड़ा। बंगाल के विभाजन का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को भारतीय समाज को तोड़ने और अपनी सत्ता को स्थिर करने के लिए किया गया था, लेकिन इसे कोलकाता में सशक्त विरोध मिला।
बंगाल विभाजन के खिलाफ प्रदर्शन: कोलकाता में भारतीयों ने स्वदेशी वस्त्र पहनने, ब्रिटिश सामान का बहिष्कार करने और अपनी स्वतंत्रता की मांग को मजबूती से उठाया।
नेतृत्व और विचारक:
सुभाष चंद्र बोस: सुभाष चंद्र बोस का कोलकाता में अत्यधिक प्रभाव था। उनका जन्म भी इसी शहर में हुआ था, और यहाँ से ही उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय सेना को नई दिशा दी।
रवींद्रनाथ टैगोर: रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय संस्कृति और समाज के लिए अपने लेखन और विचारों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया। उनका गीत “जन गण मन” राष्ट्रीय गीत के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
कोलकाता में आंदोलनों की शुरुआत:
भारत छोड़ो आंदोलन: 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कोलकाता में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। यहाँ के लोगों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सक्रिय रूप से विरोध किया।
कांग्रेस का अधिवेशन: 1906 में कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसमें स्वराज की मांग को स्वीकार किया गया और यह आंदोलन को एक नई दिशा मिली।
मेरे क्षेत्र का योगदान (उदाहरण): मुझे अपने क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी जानकारी पुस्तकालय से मिली। यहाँ के लोग विशेष रूप से महात्मा गांधी के असहमति आंदोलन, नमक सत्याग्रह, और भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़े थे। हमारे क्षेत्र के लोग विभिन्न प्रदर्शनों और विरोधों में शामिल हुए थे। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने गांवों में ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और कई ने जेल यात्रा की। साथ ही, महात्मा गांधी की विचारधारा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियाँ हमारे क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित करती थीं। गाँवों में महिलाओं और बच्चों ने भी योगदान दिया और उन्होंने अंग्रेजों का विरोध करते हुए सशक्त भूमिका निभाई। निष्कर्ष: स्वतंत्रता संग्राम में कोलकाता का योगदान ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसने न केवल कई महान नेताओं और आंदोलनों को जन्म दिया, बल्कि पूरे भारत में स्वतंत्रता संग्राम के लिए जागरूकता और प्रेरणा का स्रोत भी बना। प्रत्येक क्षेत्र में इस प्रकार का योगदान स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक था।
प्रश्न 3: ‘केवल प्रचार में दो हजार रुपया खर्च किया गया था।’ तत्कालीन समय को मद्देनज़र रखते हुए अनुमान लगाइए कि प्रचार-प्रसार के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया होगा? उत्तर: तत्कालीन समय अर्थात् 1930-31 में प्रचार-प्रसार के लिए बहुत सारे झंडे बनवाए गए होंगे, प्रचार के पंपलेट (इश्तिहार) छपवाकर बाँटे गए होंगे, दीवारों पर नारे या स्लोगन लिखे गए होंगे। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को दूर-दराज के क्षेत्रों में आने-जाने (प्रचारार्थ) के लिए कुछ नकद भी दिया गया होगा।
प्रश्न 4: आपको अपने विद्यालय में लगने वाले पल्स पोलियो केंद्र की सूचना पूरे मोहल्ले को देनी है। आप इस बात का प्रचार बिना पैसे के कैसे कर पाएँगे? उदाहरण के साथ लिखिए। उत्तर: मैं अपनी कॉलोनी के आसपास स्थित झुग्गी बस्तियों में अपने मित्रों के साथ जाऊँगा और पल्स पोलियो ड्राप पिलवाने का अनुरोध करूँगा तथा पोलियो के खतरे से भी सावधान करूंगा।