08.बड़े भाई साहब- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

मौखिकनिम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –
प्रश्न 1: कथा नायक की रूचि किन कार्यों में थी?
उत्तर: कथा नायक की रूचि खेल कूद, कँकरियाँ उछालने, गप्पबाजी करने, कागज़ की तितलियाँ बनाने, उड़ाने, उछलकूद करने, चार दीवारी पर चढ़कर नीचे कूदने, फाटक पर सवार होकर उसे मोटर कार बना कर मस्ती करने में थी।

प्रश्न 2: बड़े भाई छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई से, हर समय यही सवाल पूछते “कहाँ थे”?
प्रश्न 3: दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में यह परिवर्तन आया कि वह स्वच्छंद और घमंडी हो गया। वह यह सोचने लगा कि अब पढ़े या न पढ़े, वह पास तो हो ही जाएगा। वह बड़े भाई की सहनशीलता का अनुचित लाभ उठाकर अपना अधिक समय खेलकूद में लगाने लगा।

प्रश्न 4: बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे और वे नवीं कक्षा में पढ़ते थे।

प्रश्न 5: बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?
उत्तर: बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कभी किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों आदि की तस्वीर बनाते, कभी एक ही शब्द कई बार लिखते तो कभी एक शेर को बार-बार सुन्दर अक्षरों में नक़ल करते। कई बार ऐसी शब्द रचना करते जिनका कोई अर्थ नही होता था।

लिखित(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?
उत्तर: छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय कि वह अब मन लगाकर पढ़ाई करेगा और बड़े भाई को कभी शिकायत का मौका नहीं देगा। रात ग्यारह बजे तक हर विषय का कार्यक्रम बनाया गया परन्तु पढ़ाई करते समय खेल के मैदान, उसकी हरियाली हवा के हलके-हलके झोंके, फुटबॉल की उछलकूद, कबड्डी, वॉलीबॉल की तेज़ी सब चीज़े उसे अपनी ओर खींचती थी इसलिए वह टाइम-टेबिल का पालन नहीं कर पाया।

प्रश्न 2: एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटे भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटे भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी प्रतिक्रिया बहुत भयानक थी। वह बहुत क्रोधित थे। उन्होंने छोटे भाई को बहुत डाँटा। उन्होंने उसे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा। गुल्ली-डंडा खेल की उन्होंने बहुत बुराई की। उनके अनुसार यह खेल भविष्य के लिए लाभकारी नहीं है। अतः इसे खेलकर उन्हें कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि अव्वल आने पर उसे घमंड हो गया है। उनके अनुसार घमंड तो रावण तक का भी नहीं रहा। अभिमान का एक-न-एक दिन अंत होता है। अतः छोटे भाई को चाहिए कि घमंड छोड़कर पढ़ाई की ओर ध्यान दे।

प्रश्न 3: बड़े भाई को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
उत्तर: बड़े भाई की उम्र छोटे भाई से पाँच वर्ष अधिक थी। वे होस्टल में छोटे भाई के अभिभावक के रूप में थे। उन्हें भी खेलने पतंग उड़ाने तमाशे देखने का शौक था परन्तु अगर वे ठीक रास्ते पर न चलते तो भाई के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी नही निभा पाते। अपने नैतिक कर्त्तव्य का बोध होने के कारण उन्हें अपने मन की इच्छाएँ दबानी पड़ती थीं।

प्रश्न 4: बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?
उत्तर: बड़े भाई साहब चाहते थे कि छोटा भाई हरदम पढ़ता रहे और अच्छे अंकों से पास होता रहे। इसलिए वे उसे हमेशा सलाह देते कि ज़्यादा समय खेलकूद में न बिताए, अपना ध्यान पढ़ाई में लगाए। वे कहते थे कि अंग्रेजी विषय को पढ़ने के लिए दिनरात मेहनत करनी पड़ती है। यदि मेहनत नहीं करोगे तो उसी दरजे में पड़े रहोगे।

प्रश्न 5: छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
उत्तर: छोटे भाई ने बड़े भाई की नरमी का अनुचित लाभ उठाया। उसपर बड़े भाई का डर नहीं रहा, वह आज़ादी से खेलकूद में जाने लगा, वह अपना सारा समय मौज-मस्ती में बिताने लगा। उसे विश्वास हो गया कि वह पढ़े न पढ़े पास हो जाएगा।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर: (50-60 शब्दों में) लिखिए –

प्रश्न 1: बड़े भाई की डाँट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर: छोटा भाई अभी अनुभवहीन था। वह अपना भला बुरा नहीं समझ पाता था। यदि बड़े भाई साहब उसे डाँटते फटकारते नहीं तो वह जितना पढ़ता था उतना भी नहीं पढ़ पाता और अपना समय खेलकूद में ही गँवा देता। उसे बड़े भाई की डाँट का डर था। इसी कारण उसे शिक्षा की अहमियत समझ में आई, विषयों की कठिनाइयों का पता लगा, अनुशासित होने के लाभ समझ में आए और वह अव्वल आया।

प्रश्न 2: बड़े भाई साहब पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
उत्तर: बड़े भाई साहब ने समूची शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि ये शिक्षा अंग्रेजी बोलने, लिखने, पढ़ने पर ज़ोर देती है। आए या न आए पर उस पर बल दिया जाता है। रटने की प्रणाली पर भी ज़ोर है। अर्थ समझ में आए न आए पर रटकर बच्चा विषय में पास हो जाता है। साथ ही अलजबरा, ज्योमेट्री निरंतर अभ्यास के बाद भी गलत हो जाती है। अपने देश के इतिहास के साथ दूसरे देश के इतिहास को भी पढ़ना पड़ता है जो ज़रूरी नहीं है। छोटे-छोटे विषयों पर लंबे चौड़े निबंध लिखना। ऐसी शिक्षा जो लाभदायक कम और बोझ ज़्यादा हो ठीक नहीं होती है।

प्रश्न 3: बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
उत्तर: बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी ज्ञान से नहीं आती बल्कि अनुभव से आती है। इसके लिए उन्होंने अम्माँ, दादा व हैडमास्टर की माँ के उदाहरण भी दिए हैं कि वे पढ़े लिखे न होने पर भी हर समस्याओं का समाधान आसानी से कर लेते हैं। अनुभवी व्यक्ति को जीवन की समझ होती है, वे हर परिस्थिति में अपने को ढालने की क्षमता रखते हैं।

प्रश्न 4: छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?
उत्तर: छोटे भाई को खेलना बहुत पसंद था। वह हर समय खेलता रहता था। बड़े भाई साहब इस बात पर उसे बहुत डांटते रहते थे। उनके डर के कारण वह थोड़ा बहुत पढ़ लेता था। परन्तु जब बहुत खेलने के बाद भी उसने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, तो उसे स्वयं पर अभिमान हो गया। अब उसके मन से बड़े भाई का डर भी जाता रहा। वह बेखौफ होकर खेलने लगा। एक दिन पतंग उड़ाते समय बड़े भाई साहब ने उसे पकड़ लिया। उन्होंने उसे समझाया और अगली कक्षा की पढ़ाई की कठिनाइयों का अहसास भी दिलाया। उन्होंने बताया कि वह कैसे उसके भविष्य के कारण अपने बचपन का गला घोंट रहे हैं। उनकी बातें सुनकर छोटे भाई की आँखें खुल गई। उसे समझ में आ गया कि उसके अव्वल आने के पीछे बड़े भाई की ही प्रेरणा रही है। इससे उसके मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।

प्रश्न 5: बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए?
उत्तर: बड़े भाई साहब अध्ययनशील हैं, हमेशा किताबे खोले बैठे रहते हैं, घोर परिश्रमी हैं। चाहे उन्हें समझ में न भी आए परिश्रम करते रहते हैं । वह वाकपदु भी हैं, छोटे भाई को तरह तरह से समझाते हैं। उन्हें बडप्पन का अहसास है। इसलिए वह छोटे भाई को भी समझाते हैं। अनुभवी होने से जीवन में अनुभव की महत्ता समझाते हैं।

प्रश्न 6: बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है?
उत्तर: बड़े भाई साहब ने जिदंगी के अनुभव की किताबी को ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण माना है। जो ज्ञान बड़ों को है वह पुस्तकें पढ़ कर हासिल नहीं होता है। ज़िंदगी के अनुभव उन्हें ठोस धरातल देते हैं जिससे हर परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। पुस्तकें व्यवहार की भूमि नहीं होती है। गलत-सही, उचित-अनुचित की जानकारी अनुभवों से ही आती है। अत: जीवन के अनुभव किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 7.  बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि −
(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।
(ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है।
(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।
(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
उत्तर: (क) पतंगबाजी के समय बड़े भाई ने समझाया कि वह बड़ा है, उसे गलत राह पर नहीं जाने देगा। वह भले ही फेल हो जाए पर छोटे भाई को फेल नहीं होने देगा। यह सुनकर छोटे भाई के मन मे बड़े भाई के लिए आदर भर आया।
(ख) बड़े भाई को ज़िंदगी का बड़ा अनुभव है। वे जानते हैं कि दादा ने अपनी मेहनत की कमाई से कुशलता से परिवार पालन किया है। वह यह भी जानते हैं कि अपनी इच्छाओं पर काबूकरके ही वह छोटे भाई को ठीक रख सकते हैं।
(ग) बड़े भाई साहब छोटे भाई को समझा रहे थे, उसी समय एक पतंग कट कर आई। छोटा भाई उसे लूटने दौड़ा परन्तु लम्बे होने के कारण बड़े भाई ने लूट ली। वे हॉस्टल की ओर दौड़े। ये उनके भीतर बच्चा होने का प्रमाण है।
(घ) बड़े भाई साहब छोटे भाई को ज़्यादा खेलने के लिए डाँटते, उसका भला बुरा समझाते, गलत-सही को समझाते। वह चाहते थे कि उनका छोटा भाई ठीक रहे और अव्वल आए।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1: इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
उत्तर: बड़े भाई साहब इम्तिहान पास होने को बहुत महत्व नहीं देते थे। वे कहते थे कि किताबे रट के पास हो सकते हैं परन्तु जीवन के अनुभवों और बुद्धि के विकास से इंसान बुद्धिमान बनता है।

प्रश्न 2: फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुडकियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
उत्तर: लेखक हर समय अपने खेलकूद, सैरसपाटे में मस्त रहता और बड़े भाई से डाँट खाता था परन्तु फिर भी खेलकूद नहीं छोड़ता था। जैसे संकटों में फँसकर भी मनुष्य अपनी मोहमाया नहीं छोड़ता है उसी प्रकार छोटा भाई खेलकूद को नहीं छोड़ता था।

प्रश्न 3: बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?
उत्तर: बड़े भाई साहब का विचार था कि यदि मकान की नीव ही कमज़ोर हो तो उसपर मंजिले खड़ी नहीं हो सकती हैं यानी अगर पढाई का शरुआती आधार ठोस नही हो तो आदमी आगे चलकर कुछ नही कर पाता। पढाई के साथ साथ उसके लिए अनुभव भी बहुत जरुरी है।

प्रश्न 4: आँखे आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
उत्तर: लेखक जब पतंग लूट रहा था तो उसकी आँखे आसमान की ओर थी और मन पतंग रूपी शहगीर की तरह। उसे पतंग एक दिव्य आत्मा जैसी लग रही थी जो धीरे-धीरे नीचे आ रही थी और वह उसे पाने के लिए दौड़ रहा था।

भाषा अध्यन

प्रश्न 1: निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा।
उत्तर:
सिर पर नंगी तलवार लटकना – सी.बी.आई ने जाँच शुरू करके सबके सिर पर नंगी तलवार लटका दी।
आड़े हाथों लेना – पुलिस ने चोर को आड़े हाथों ले लिया।
अंधे के हाथ बटेर लगना – कर्मचारी को जब रूपयों से भरा थैला मिला तो मानों अंधे के हाथबटेर लग गई।
लोहे के चने चबाना – मज़दूर दिन रात मेहनत करते हैं, पैसों के लिए वह लोहे के चने चबाते हैं।
दाँतों पसीना आना – राम की जिद्द् के आगे उनके पिताजी के दाँतों पसीना आ गया।
ऐरा-गैरा नत्थू खैरा – उस पार्टी में ऐरा-गैरा नत्थू खैरा भी आ गया।

प्रश्न 2: प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। इसीलिए इनकी कहानियाँ रोचक और प्रभावपूर्ण होती हैं। इस कहानी में आप देखेंगे कि हर अनुच्छेद में दो-तीन मुहावरों का प्रयोग किया गया है। उदाहरणतः इन वाक्यों को देखिए और ध्यान से पढ़िए-

  • मेरो जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था।
  • भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति बाण चलाते कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती। बड़े भाई साहब
  • वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँखफोड़ पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहत और फजीहत का अवसर मिल जाता।

निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरागैरा नत्थू-खैरा।
उत्तर:

प्रश्न 3: निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए।

तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिल
उत्तर:
प्रश्न 4: नीचे दिये वाक्यों में कौन-सी क्रिया है − सकर्मक या अकर्मक? लिखिए −

उत्तर:

प्रश्न 5: ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए −
विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार
उत्तर:
विचार-वैचारिक
इतिहास-ऐतिहासिक
संसार-सांसारिक
दिन-दैनिक
नीति-नैतिक
प्रयोग-प्रायोगिक
अधिकार-आधिकारिक

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इनमें से कहानियाँ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। कुछ कहानियों का मंचन भी कीजिए।
उत्तर: ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में लगभग तीन सौ कहानियाँ संकलित हैं। मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित इन कहानियों में ‘नमक का दारोगा’, ‘ईदगाह’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘बूढ़ी काकी’, ‘अलगोझा’, ‘पूस की रात’, ‘ठाकुर का कुआँ’, ‘गिल्ली-डंडा’ आदि हैं। छात्र इन्हें पढ़े और इनका मंचन स्वयं करें।

प्रश्न 2: शिक्षा रटंत विद्या नहीं है-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर: छात्र परिचर्चा का आयोजन स्वयं करें।

प्रश्न 3: क्या पढ़ाई और खेलकूद साथ-साथ चल सकते हैं-कक्षा में इस पर वाद-विवाद कार्यक्रम आयोजित कीजिए।
उत्तर: छात्र वाद-विवाद कार्यक्रम का आयोजन करें।

प्रश्न 4: क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है? इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: छात्र उक्त विषय पर कक्षा में चर्चा करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: कहानी में जिंदगी से प्राप्त अनुभवों को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बताया गया है। अपने माता-पिता बड़े भाई-बहिनों या अन्य बुजुर्ग/बड़े सदस्यों से उनके जीवन के बारे में बातचीत कीजिए और पता लगाइए कि बेहतर ढंग से जिंदगी जीने के लिए क्या काम आया-समझदारी/पुराने अनुभव या किताबी पढ़ाई?
उत्तर: छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2: आपकी छोटी बहिन/छोटा भाई छात्रावास में रहती/रहता है। उसकी पढ़ाई-लिखाई के संबंध में उसे एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
A75/3
आशीर्वाद अपार्टमेंट
सेक्टर 18, रोहिणी
दिल्ली।
10 जनवरी, 20XX
प्रिय अनुज विकास

शुभाशीष !

हम सभी घर पर सकुशल रहकर आशा करते हैं कि तुम भी छात्रावास में सकुशल रहकर पढ़ाई कर रहे होगे। विकास, दिसंबर माह में हुए तुम्हारे प्रश्नपत्रों के अंकों को देखने से पता चला कि तुम्हें अभी कुछ विषयों में विशेष रूप से मेहनत करने की आवश्यकता है। तुमने नवीं कक्षा में 92% अंक जो प्राप्त किए थे वहाँ तक पहुँचने के लिए अभी बहुत मेहनत करना है। हाँ एक बात पर विशेष ध्यान देना, गणित, विज्ञान, अंग्रेज़ी आदि तो रटने के विषय हैं ही नहीं। इन्हें रटने के बजाय समझने और अभ्यास द्वारा इनकी समझ बढ़ाने का प्रयास करना। रटा हुआ तथ्य बहुत जल्दी भूल जाता। है। देखा गया है कि रट्टू बच्चों का ग्रेड कभी अच्छा नहीं होता है।

एक बात और कि पढ़ाई के चक्कर में स्वास्थ्य की उपेक्षा मत करना। स्वास्थ्य ठीक रखने और प्रसन्नचित्त रहने का सर्वोत्तम उपाय खेल और व्यायाम हैं। समय पर पढ़ना और समय पर व्यायाम करना। उससे पढ़ाई की थकान और तनाव दूर होगा, स्फूर्ति बढ़ेगी मन प्रसन्न होगा तथा हर काम में मन लगेगा।

अंत में अपनी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर ध्यान देना। अपने आसपास साफ़-सुथरा रखना। शेष सब ठीक है।

तुम्हारा बड़ा भाई
आकाश

07.आत्मत्राण- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये 

प्रश्न 1: कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
उत्तर: कवि करुणामय ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि उसे जीवन की विपदाओं से दूर रखें और शक्ति दे कि इन मुश्किलों पर विजय पा सके। उसका विश्वास अटल रहे।

प्रश्न 2: ‘विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं’ − कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?
उत्तर: कवि का कहना है कि हे ईश्वर मैं यह नहीं कहता कि मुझ पर कोई विपदा न आए, मेरे जीवन में कोई दुख न आए बल्कि मैं यह चाहता हूँ कि मुझमें इन विपदाओं को सहने की शक्ति दें।

प्रश्न 3: कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?
उत्तर: कवि सहायक के न मिलने पर प्रार्थना करता है कि उसका बल पौरुष न हिले, वह सदा बना रहे और कोई भी कष्ट वह धैर्य से सह ले।

प्रश्न 4: अंत में कवि क्या अनुनय करता है?
उत्तर: अंत में कवि अनुनय करता है कि चाहे सब लोग उसे धोखा दे, सब दुख उसे घेर ले पर ईश्वर के प्रति उसकी आस्था कम न हो, उसका विश्वास बना रहे। उसका ईश्वर के प्रति विश्वास कभी न डगमगाए।

प्रश्न 5: ‘आत्मत्राण’ शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आत्मत्राण का अर्थ है आत्मा का त्राण अर्थात आत्मा या मन के भय का निवारण, उससे मुक्ति। कवि चाहता है कि जीवन में आने वाले दुखों को वह निर्भय होकर सहन करे। दुख न मिले ऐसी प्रार्थना वह नहीं करता बल्कि मिले हुए दुखों को सहने, उसे झेलने की शाक्ति के लिए प्रार्थना करता है। इसलिए यह शीर्षक पूर्णतया सार्थक है।

प्रश्न 6: अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।
उत्तर: अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना के अतिरिक्त परिश्रम और संघर्ष, सहनशीलता, कठिनाईयों का सामना करना और सतत प्रयत्न जैसे प्रयास आवश्यक हैं। धैर्यपूर्वक यह प्रयास करके इच्छापूर्ण करने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 7: क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?
उत्तर: यह प्रार्थना अन्य प्रार्थना गीतों से भिन्न है क्योंकि अन्य प्रार्थना गीतों में दास्य भावआत्म समर्पणसमस्त दुखों को दूर करके सुखशांति की प्रार्थना, कल्याण, मानवता का विकास, ईश्वर सभी कार्य पूरे करें ऐसी प्रार्थनाएँ होती हैं परन्तु इस कविता में कष्टों से छुटकारा नहीं कष्टों को सहने की शक्ति के लिए प्रार्थना की गई है। यहाँ ईश्वर में आस्था बनी रहे, कर्मशील बने रहने की प्रार्थना की गई है।

(ख) निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1. नत शिर होकर सुख के दिन में
 तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कहना चाहता है कि वह सुख के दिनों में भी सिर झुकाकर ईश्वर को याद रखना चाहता है, वह एक पल भी ईश्वर को भुलाना नहीं चाहता।

प्रश्न 2. हानि उठानी पड़े जगत्में लाभ अगर वंचना रही
 तो भी मन में ना मानूँ क्षय।

उत्तर: कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि जीवन में उसे लाभ मिले या हानि ही उठानी पड़े तब भी वह अपना मनोबल न खोए। वह उस स्थिति का सामना भी साहसपूर्वक करे।

प्रश्न 3. तरने की हो शक्ति अनामय
मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।

उत्तर: कवि कामना करता है कि यदि प्रभु दुख दे तो उसे सहने की शक्ति भी दे। वह यह नहीं चाहता कि ईश्वर उसे इस दुख के भार को कम कर दे या सांत्वना दे। वह अपने जीवन की ज़िम्मेदारियों को कम करने के लिए नहीं कहता बल्कि उससे संघर्ष करने, उसे सहने की शक्ति के लिए प्रार्थना करता है।

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीतों की रचना की है। उनके गीत-संग्रह में से दो गीत छाँटिए और कक्षा में कविता-पाठ कीजिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2: अनेक अन्य कवियों ने भी प्रार्थना गीत लिखे हैं, उन्हें पढ़ने का प्रयास कीजिए; जैसे
महादेवी वर्मा- क्या पूजा क्या अर्चन रे!
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला- दलित जन पर करो करुणा।
इतनी शक्ति हमें देना दाता
मन का विश्वास कमज़ोर हो न
हम चलें नेक रस्ते पर हम से
भूल कर भी कोई भूल हो न
इसे प्रार्थना को ढूँढ़कर पूरा पढ़िए और समझिए कि दोनों प्रार्थनाओं में क्या समानता है? क्या आपको दोनों में कोई भी अंतर प्रतीत होता है? इस पर आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर: ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ और ‘आत्मत्राण’ दोनों ही कविताएँ प्रार्थना हैं जो पारंपरिक प्रार्थनाओं से हटकर हैं। दोनों ही प्रार्थनाओं में दुख से उबारने या दुख हर लेने की प्रार्थना न करके प्रभु के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने की शक्ति पाने की प्रार्थना की गई है। दोनों ही प्रार्थनाओं का भाव एक समान है किंतु इतनी शक्ति हमें देना दाता में कवि स्वयं नेक रास्ते पर चलने की अभिलाषा भी प्रकट करता है।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: रवींद्रनाथ ठाकुर को नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है। उनके विषय में और जानकारी एकत्र कर परियोजना पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2: रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ को पुस्तकालय से लेकर पढ़िए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 3: रवींद्रनाथ ठाकुर ने कलकत्ता (कोलकाता) के निकट एक शिक्षण संस्थान की स्थापना की थी। पुस्तकालय की मदद से उसके विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4: रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक गीत लिखे, जिन्हें आज भी गाया जाता है और उसे रवींद्र संगीत कहा जाता है। यदि संभव हो तो रवींद्र संगीत संबंधी कैसेट व सी० डी० सुनिए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

06.कर चले हम फ़िदा- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1: क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?
उत्तर: यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। चीन ने तिब्बत की ओर से आक्रमण किया और भारतीय वीरों ने इस आक्रमण का मुकाबला वीरता से किया।

प्रश्न 2: ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’, इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?
उत्तर: हिमालय भारत के मान सम्मान का प्रतीक है। भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणों का बलिदान देकर भी देश के मानसम्मान को सुरक्षित रखा।

प्रश्न 3: इस गीत में धरती को दुल्हन क्यों कहा गया है?
उत्तर: जिस तरह दुल्हन को लाल जोड़े में सजाया जाता है उसी तरह भारतीय सैनिकों ने अपने प्राणो की आहुति देकर धरती को खून के लाल रंग से सजा दिया इसीलिए इस गीत में धरती को दुल्हन कहा गया है।

प्रश्न 4: गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि व जीवन भर याद रह जाते हैं?
उत्तर: गीतों में भावनात्मकता,मार्मिकता, सच्चाई, गेयता, संगीतात्मकता, लयबद्धता आदि गुण होते हैं’जिससे वे जीवन भर याद रह जाते हैं। कर चले हम फ़िदा’ गीत में बलिदान की भावना स्पष्ट रुप से झलकती है जो हर हिन्दुस्तानी की दिमाग में रच-बस जाते हैं।

प्रश्न 5: कवि ने ‘साथियों’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?
उत्तर: कवि ने ‘साथियों’ शब्द का प्रयोग सैनिक साथियों व देशवासियों के लिए किया है। सैनिकों का मानना है कि इस देश की रक्षा हेतु हम बलिदान की राह पर बढ़ रहे हैं। हमारे बाद यह राह सूनी न हो जाए। आने वाले भी देश की मान-सम्मान की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देने को तैयार रहें।

प्रश्न 6: कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?
उत्तर: कवि चाहता है कि यदि सैनिकों की टोली शहीद हो जाए, तो अन्य सैनिक युद्ध की राह पर बढ़ जाएँ। यहाँ देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के समूह के लिए ‘काफ़िले’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 7: इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?
उत्तर: ‘सर पर कफ़न बाँधना’ का अर्थ होता है मौत के लिए तैयार हो जाना। इस गीत यह शत्रुओं से रणभूमि में लड़ने की और संकेत करता है। सैनिक जब युद्धक्षेत्र में उतरते हैं तो वे देश की मान-सम्मान की रक्षा के लिए प्राण तक देने को तैयार रहते हैं।

प्रश्न 8: इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए?
उत्तर:  प्रस्तुत कविता देश के सैनिकों की भाषा में लिखा गया है जो की उनके देशभक्ति की भावना को दर्शाता है। ये कभी अपने देश की मान-सम्मान की रक्षा के लिए पीछे नही हटेंगे चाहे इन्हे अपने प्राणों को ही अर्पित क्यों न करना पड़े। साथ ही इन्हे आने वाली पीढ़ियों से अपेक्षाएं हैं की वे भी उनके शहीद होने के बाद इस देश के दुश्मनों डट कर मुकाबला करें। वे कह रहे हैं कि उन्होंने अंतिम क्षण तक रक्षा की अब ये जिमेवारी आप पर है। देश पर जान देने के मौके बहुत कम आते हैं। ये क्रम टूटना नही चाहिए।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिये।

प्रश्न 1:
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कैफ़ी आज़मी ने भारतीय जवानों के साहस की सराहना की है। चीनी आक्रमण के समय भारतीय जवानों ने हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों पर लड़ाई लड़ी। इस बर्फ़ीली ठंड में उनकी साँस घुटने लगी, साथ ही तापमान कम होने से नब्ज़ भी जमने लगी परन्तु वे किसी भी बात की परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहे और हर मुश्किल का सामना किया।

प्रश्न 2:
खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई

उत्तर: यह गीत की प्रेरणा देने वाली पंक्तियाँ हैं। कवि का भाव है कि भारतभूमि सीता की तरह पवित्र है। शत्रु रुपी रावण हरण करने के लिए उसकी तरफ़ बढ़ रहा है इसलिए उनका आग्रह है की हम आगे बढ़कर उनकी रक्षा करें तथा ऐसी लक्ष्मण रेखा खीचें की शत्रु बढ़ न पाये यानी उसे रोकने का प्रयास करें।

प्रश्न 3:
छू न पाए सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियों

उत्तर: कवि सैनिकों को कहना चाहता है कि भारत का सम्मान सीता की पवित्रता के समान में है। देश की रक्षा करना तुम्हारा कर्त्तव्य है। देश की पवित्रता की रक्षा राम और लक्ष्मण की तरह करना है। अत: राम तथा लक्ष्मण का कर्त्तव्य भी हमें ही निभाना है।

भाषा अध्यन

प्रश्न  1. इस गीत में कुछ विशिष्ट प्रयोग हुए हैं। गीत संदर्भ में उनका आशय स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
 कट गए सर, नब्ज़ जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे

उत्तर:
1. युद्ध क्षेत्र में शत्रुओं के कट जाए सर।
2. डर के मारे सबकी नब्ज़ जम गई।
3. शत्रु के हमले की जानकारी मिलते ही सब जान गए कि यह जान देने की रुत है।
4. स्टेज पर मंत्री के आते ही जयकारे के साथ हाथ उठने लगे।

प्रश्न 2: ध्यान दीजिए संबोधन में बहुवचन ‘शब्द रूप’ पर अनुस्वार का प्रयोग नहीं होता; जैसे- भाइयो, बहिनो, देवियो, सः जनो आदि।
उत्तर: 
छात्र इन उदाहरणों के माध्यम से समझें-

  • भाइयो- सफ़ाई कर्मचारियों के नेता ने कहा, भाइयो! कहीं भी गंदगी न रहने पाए।
  • बहिनो- समाज सेविका ने कहा, बहिनो! कल पोलियो ड्राप पिलवाने ज़रूर आना।
  • देवियो- पुजारी ने कहा, देवियो! देवियो! कलश पूजन में जरूर शामिल होना।
  • सज्जनो- सज्जनो! यहाँ सफ़ाई बनाए रखने की कृपा करें।

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: कैफ़ी आज़मी उर्दू भाषा के एक प्रसिद्ध कवि और शायर थे। ये पहले गज़ल लिखते थे। बाद में फ़िल्मों में गीतकार और कहानीकार के रूप में लिखने लगे। निर्माता चेतन आनंद की फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए इन्होंने यह गीत लिखा था, जिसे बहुत प्रसिद्धि मिली। यदि संभव हो सके तो यह फ़िल्म देखिए।
उत्तर: 
छात्र अपने माता-पिता की मदद से यह फ़िल्म देखें।

प्रश्न 2: ‘फ़िल्म का समाज पर प्रभाव’ विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर: 
फ़िल्म को समाज पर प्रभाव- फ़िल्में हमारे समाज का प्रतिबिंब होती हैं। तत्कालीन समाज में जो कुछ घटित होता है। उसका जीता-जागता चित्र फ़िल्मों में दिखाया जाती है। इनका निर्माण समाज के द्वारा समाज में उच्च मानवीय मूल्यों की स्थापना एवं सामाजिक विकास के लिए किया जाता है। फ़िल्मों से एक ओर जहाँ समाज का मनोरंजन होता है वहीं फ़िल्में समाज को संदेश देते हुए कुछ करने के लिए दिशा दिखा जाती हैं। ‘हकीकत’ कुछ ऐसी ही फ़िल्म थी जिसे देखकर अपनी मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने का जोश पैदा हो जाता है।
फ़िल्में सामाजिक बदलाव लाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सामाजिक कुरीतियाँ-दहेज प्रथा, नशाखोरी, जातिवाद आदि पर अंकुश लगाने में फ़िल्मों की भूमिका सराहनीय होती है। युवा पीढ़ी को संस्कारित करने तथा उनमें मानवीय मूल्य प्रगाढ़ करने में फ़िल्मों का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। समाज के सामने अच्छी फ़िल्में आएँ, यह निर्माताओं का दायित्व है।

प्रश्न 3: कैफ़ी आज़मी की अन्य रचनाओं को पुस्तकालय से प्राप्त कर पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। इसके साथ ही उर्दू भाषा के अन्य कवियों की रचनाओं को भी पढ़िए।
उत्तर: छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 4: एन० सी० ई० आर० टी० द्वारा कैफ़ी आज़मी पर बनाई गई फ़िल्म देखने का प्रयास कीजिए।
उत्तर: छात्र स्वयं करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: सैनिक जीवन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक निबंध लिखिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2: आज़ाद होने के बाद सबसे मुश्किल काम है ‘आज़ादी बनाए रखना’। इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: 
यह पूर्णतया सत्य है कि आजाद होना कठिन काम है। आज़ादी पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ता है, त्याग करना पड़ता है और हज़ारों को कुरबान होना पड़ता है। इतनी कठिनाई से प्राप्त आज़ादी को बनाए रखना भी आसान काम नहीं है। आजादी प्राप्ति के समय जो विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा क्षेत्र आदि के लोग अपनी इस संकीर्णता को छोडकर एकजुट होकर आजादी के लिए तन-मन-धन अर्थात् सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार थे और जिनके अथक प्रयासों से आज़ादी मिली वही बाद में जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र, भाषा आदि के नाम पर अलगाववाद का समर्थन करते नजर आते हैं, जिससे हमारी एकता पर अनेकता में बदलने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। ऐसी स्थिति का अनुचित लाभ उठाने के लिए कुछ शत्रु देश सक्रिय हो जाते हैं।
वे तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर हमें गुलाम बनाने की कुचेष्टा करते हैं। वे हमारी फूट का लाभ उठाते हैं। वे धन, छल-बल, कूटनीति का सहारा लेकर एकता को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। इसमें तनिक भी सफलता मिलते ही वे दंगे भड़काने का प्रयास करते हैं, भेदभाव को उकसाते हैं ताकि हम आपस में ही लड़-मरें। उन्हें तो इसी अवसर की प्रतीक्षा होती है। हमें भूलकर भी ऐसी स्थिति नहीं आने देनी चाहिए। यद्यपि कुछ लोग दिग्भ्रमित होकर गलत कदम उठा लेते हैं, परंतु हमें ऐसे लोगों को भी सही राह पर लाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए और अपनी आज़ादी को हर संभावित संकट से बचाना चाहिए। अतः पूर्णतया सत्य है कि आज़ाद होने के बाद सबसे मुश्किल काम है ‘आजादी बनाए रखना।

प्रश्न 3: अपने स्कूल के किसी समारोह पर यह गीत या अन्य कोई देशभक्तिपूर्ण गीत गाकर सुनाइए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

05.तोप- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1: विरासत में मिली चीज़ों की बड़ी सँभाल क्यों होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विरासत में मिली चीज़ों की बड़ी सँभाल इसलिए होती है क्योंकि ये वस्तुएँ हमें अपने पूर्वजों की, अपने इतिहास की याद दिलाती हैं। इनसे हमारा भावनात्मक संबंध होता है। इसलिए इन्हें अमूल्य माना जाता है। ये तात्कालिक परिस्थितियों की जानकारी के साथ दिशानिर्देश भी देती हैं।

प्रश्न 2: इस कविता से तोप के विषय में क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर: इस कविता में तोप के विषय में जानकारी मिलती है कि यह अंग्रेज़ों के समय की तोप है। 1857 में इसका प्रयोग शक्तिशाली हथियार के रुप में किया गया था। इसने अनगिनत शूरवीरों, स्वतंत्रता सेनानियों के धज्जे उड़ा दिए थे। लेकिंग आज यह तोप शांत है और एक बाग़ में निष्क्रिय खड़ी है। अब यह केवल दर्शनीय वस्तु है। चिड़िया इस पर अपना घोंसला बना रही है तथा बच्चे खेल रहे हैं।

प्रश्न 3: कंपनी बाग में रखी तोप क्या सीख देती है?
उत्तर: कंपनी बाग में रखी तोप हमें सिख देती है की कोई भी कितना ही ताकतवर क्यों न हो लेकिन एक दिन उसे शांत होना पड़ता है। इसके अलावा यह हमें अंग्रेज़ों के शोषण और अत्याचारों की याद दिलाती है और बतलाती है की सुरक्षा और हितों के प्रति सचेत रहें। यह हमारे उन तमाम शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने तथा उनके उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न 4.कविता में तोप को दो बार चमकाने की बात की गई है। ये दो अवसर कौन-से होंगे?
उत्तर: भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक चिह्न दो बड़े त्योहार 15 अगस्त और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस है। इन दोनों अवसरों पर तोप को चमकाकर कंपनी बाग को सजाया जाता है।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1: अब तो बहरहाल
 छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फ़ारिग हो
 तो उसके ऊपर बैठकर
 चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप।

उत्तर: इन पंक्तियों में कवि ने तोप की वर्तमान स्थिति को बताया है। 1857 की क्रांति में जिस तोप ने आतंक मचा रखा था वो आज बेबस थी। छोटे-छोटे बच्चे इसकी नाल पर बैठकर घुड़सवारी करते हैं। चिड़ियाँ भी इसपर बैठकर आपस में बातचीत करती हैं।

प्रश्न 2: वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।
उत्तर: आज कंपनी बाग़ का तोप विनाश करने लायक नही है। चिड़ियाँ और गौरये उसपर बैठकर फुदकती रहती हैं। इससे यह पता चलता है कि कोई भी कितना भी मजबूत और क्रूर क्यों न हो एक दिन उसे झुकना पड़ता है।

प्रश्न 3: उड़ा दिए थे मैंने
अच्छे–अच्छे सूरमाओं के धज्जे।
उत्तर: इन पंक्तियों में तोप ने अपनी गाथा को सुनाया है। वह बता रहा है की 1857 की क्रांति की सामने उसने अपने आगे किसी की नही सुनी थी। उसने कई वीरों  की नींद सुला दिया था।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1: कवि ने इस कविता में शब्दों का सटीक और बेहतरीन प्रयोग किया है। इसकी एक पंक्ति देखिए ‘धर रखी गई है यह 1857 की तोप’। ‘धर’ शब्द देशज है और कवि ने इसका कई अर्थों में प्रयोग किया है। ‘रखना’, ‘धरोहर’ और ‘संचय’ के रूप में।
उत्तर: 
छात्र स्वयं इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़े और समझें।

प्रश्न 2: ‘तोप’ शीर्षक कविता का भाव समझते हुए इसका गद्य में रूपांतरण कीजिए।
उत्तर:

‘तोप’ कविता का गद्य रूपांतरण- ईस्ट इंडिया कंपनी ने कंपनी बाग के प्रवेश द्वार पर जो तोप रखवायी थी, वह आज स्वतंत्र भारत में विरासत बनकर रह गई है। वर्ष 1857 की इस तोप को कंपनी बाग के साथ ही साल में दो अवसरों पर साफ़-सुथरा करते हुए चमकाया जाता है। जैसे कंपनी बाग हमें विरासत में मिली थी, उसी तरह ये तोप भी थी। आजकल सुबह-शाम कंपनी बाग में जो सैलानी टहलने के लिए आते हैं, उन्हें यह तोप बताती है कि किसी समय मैं बहुत ताकतवर थी। उस जमाने में मैंने अच्छे-अच्छे शूरमाओं की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।
आज स्थिति यह है कि इस पर लड़के घुड़सवारी करते हैं। वहाँ से बच्चों के हटते ही चिड़ियाँ उसके ऊपर बैठकर गप-शप करती हैं। गौरैयें तो और भी शैतानी करती हुई इसके अंदर घुस जाती हैं। ऐसा करके वे यह बताती हैं कि कितनी भी बड़ी तोप क्यों न हो, एक दिन तो उसका मुँह बंद हो ही जाता है अर्थात् अन्यायी कितना भी बड़ा क्यों न हो एक न एक दिन अंत अवश्य होता है।

04.पर्वत प्रदेश में पावस- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1: पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर: वर्षा ऋतु में मौसम बदलता रहता है। तेज़ वर्षा होती है। जल पहाड़ों के नीचे इकट्ठा होता है तो दर्पण जैसा लगता है। पर्वत मालाओं पर अनगिनत फूल खिल जाते हैं। ऐसा लगता है कि अनेकों नेत्र खोलकर पर्वत देख रहा है। पर्वतों पर बहते झरने मानो उनका गौरव गान गा रहे हैं। लंबेलंबे वृक्ष आसमान को निहारते चिंतामग्न दिखाई दे रहे हैं। अचानक काले काले बादल घिर आते हैं। ऐसा लगता है मानो बादल रुपी पंख लगाकर पर्वत उड़ना चाहते हैं। कोहरा धुएँ जैसा लगता है। इंद्र देवता बादलों के यान पर बैठकर नएनए जादू दिखाना चाहते हैं।

प्रश्न 2: ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
उत्तर: मेखलाकार का अर्थ है करघनी के आकार का। यहाँ इस शब्द का प्रयोग पर्वतों की श्रृंखला के लिए किया गया है। ये पावस ऋतु में दूरदूर तक करघनी की आकृति में फैले हुए हैं।

प्रश्न 3: ‘सहस्र दृग-सुमन’ से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
उत्तर: ‘सहस्र दृग-सुमन’ कवि का तात्पर्य पहाड़ों पर खिले हजारों फूलों से है। कवि को फूल पहाड़ों की आँखों के सामान लग रहे हैं इसीलिए कवि ने इस पद का प्रयोग किया है।

प्रश्न 4: कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
उत्तर: कवि ने तालाब की समानता दर्पण से की है क्योंकि तालाब भी दर्पण की तरह स्वच्छ और निर्मल प्रतिबिम्ब दिखा रहा है।

प्रश्न 5: पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की और क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
उत्तर: ऊँचे-ऊँचे पर्वत पर उगे वृक्ष आकाश की ओर देखते चिंतामग्न प्रतीत हो रहे हैं। जैसे वे आसमान की ऊचाइयों को छूना चाहते हैं। इससे मानवीय भावनाओं को बताया गया है कि मनुष्य सदा आगे बढ़ने का भाव अपने मन में रखता है।

प्रश्न 6: शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
उत्तर: 
वर्षा की भयानकता और धुंध से शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में धँस गए प्रतीत होते हैं।

प्रश्न 7: झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
उत्तर: झरने पर्वतों की गाथा का गान कर रहे हैं। बहते हुए झरने की तुलना मोती की लड़ियों से की गयी है।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1: है टूट पड़ा भू पर अंबर।
उत्तर: 
सुमित्रानंदन पंत जी ने इस पंक्ति में पर्वत प्रदेश के मूसलाधार वर्षा का वर्णन किया है। पर्वत प्रदेश में पावस ऋतु में प्रकृति की छटा निराली हो जाती है। कभीकभी इतनी धुआँधार वर्षा होती है मानो आकाश टूट पड़ेगा।

प्रश्न 2: −यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।

उत्तर: कभी गहरे बादल, कभी तेज़ वर्षा और तालाबों से उठता धुआँ − यहाँ वर्षा ऋतु में पल-पल प्रकृति वेश बदल जाता है। यह सब दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे बादलों के विमान में विराजमान राजा इन्द्र विभिन्न प्रकार के जादुई खेल-खेल रहे हों।

प्रश्न 3: गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
 उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
 हैं झांक रहे नीरव नभ पर
 अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

उत्तर: इन पंक्तियों का भाव यह है कि पर्वत पर उगे विशाल वृक्ष ऐसे लगते हैं मानो इनके हृदय में अनेकों महत्वकांक्षाएँ हैं और ये चिंतातुर आसमान को देख रहे हैं।

कविता का सौंदर्य 

प्रश्न 1: इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: प्रस्तुत कविता में जगह-जगह पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करके प्रकृति में जान डाल दी गई है जिससे प्रकृति सजीव प्रतीत हो रही है; जैसे − पर्वत पर उगे फूल को आँखों के द्वारा मानवकृत कर उसे सजीव प्राणी की तरह प्रस्तुत किया गया है।
“उच्चाकांक्षाओं से तरूवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर”
इन पंक्तियों में तरूवर के झाँकने में मानवीकरण अलंकार है, मानो कोई व्यक्ति झाँक रहा हो।

प्रश्न 2: आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है −
(क) अनेकशब्दों की आवृति पर
 (ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर
 (ग) कविता की संगीतात्मकता पर

उत्तर: (ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर
इस कविता का सौंदर्य शब्दों की चित्रमयी भाषा पर निर्भर करता है। कवि ने कविता में चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए प्रकृति का सुन्दर रुप प्रस्तुत किया गया है।

प्रश्न 3: कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर:
कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। कविता में इन स्थलों पर चित्रात्मक शैली की छटा बिखरी हुई है-
1. मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण फैला है विशाल!
2. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: इस कविता में वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों की बात कही गई है। आप अपने यहाँ वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर: 
वर्षा ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तन-वर्षा को जीवनदायिनी ऋतु कहा जाता है। इस ऋतु का इंतज़ार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से किया जाता है। वर्षा आते ही प्रकृति और जीव-जंतुओं को नवजीवन के साथ हर्षोल्लास भी स्वतः ही मिल जाता है। इस ऋतु में हम अपने आसपास अनेक प्राकृतिक परिवर्तन देखते हैं; जैसे-
ग्रीष्म ऋतु में तवे सी जलने वाली धरती शीतल हो जाती है।
धरती पर सूखती दूब और मुरझाए से पेड़-पौधे हरे हो जाते हैं।
पेड़-पौधे नहाए-धोए तरोताज़ा-सा प्रतीत होते हैं।
प्रकृति हरी-भरी हो जाती हैं तथा फ़सलें लहलहा उठती हैं।
दादुर, मोर, पपीहा तथा अन्य जीव-जंतु अपना उल्लास प्रकट कर प्रकृति को मुखरित बना देते हैं।
मनुष्य तथा बच्चों के कंठ स्वतः फूट पड़ते हैं जिससे प्राकृतिक चहल-पहल एवं सजीवता बढ़ती है।
आसमान में बादल छाने, सूरज की तपन कम होने तथा ठंडी हवाएँ चलने से वातावरण सुहावना बन जाता है।
नालियाँ, नाले, खेत, तालाब आदि जल से पूरित हो जाते हैं।
अधिक वर्षा से कुछ स्थानों पर बाढ़-सी स्थिति बन जाती है।
रातें काली और डरावनी हो जाती हैं।

03.मनुष्यता- अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1: कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?
उत्तर: कवि ने ऐसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है जो मानवता की राह मे परोपकार करते हुए आती है जिसके बाद मनुष्य को मरने के बाद भी याद रखा जाता है।

प्रश्न 2: उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?
उत्तर: उदार व्यक्ति परोपकारी होता है। अपना पूरा जीवन पुण्य व लोकहित कार्यो में बिता देता है। किसी से भेदभाव नहीं रखता, आत्मीय भाव रखता है। कवि और लेखक भी उसके गुणों की चर्चा अपने लेखों में करते हैं। वह निज स्वार्थों का त्याग कर जीवन का मोह भी नहीं रखता।

प्रश्न 3: कवि ने दधीचि कर्ण, आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर मनुष्यता के लिए क्या संदेश दिया है?
उत्तर: कवि ने दधीचि ,कर्ण आदि महान व्यक्तियों के उदाहरण देकर ‘मनुष्यता’के लिए यह संदेश दिया है कि परोपकार के लिए अपना सर्वस्व यहॉ तक कि अपने प्राण तक न्योंछावर तक करने को तैयार रहना चाहिए।यहॉ तक कि परहित के लिए अपने शरीर तक का दान करने को तैयार रहना चाहिए।दधीचि ने मानवता की रक्षा के लिए अपनी अस्थियॉ तथा कर्ण ने खाल तक दान कर दी।हमारा शरीर तो नश्वर हैं उसका मोह रखना व्यर्थ है।परोपकार करना ही सच्ची मनुष्यता है। हमें यही करना चाहिए।

प्रश्न 4: कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त है कि हमें गर्व रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
उत्तर: निम्नलिखित पंक्तियों में गर्व रहित जीवन व्यतीत करने की बात कही गई है-
रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में।
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में॥

प्रश्न 5: ‘मनुष्य मात्र बंधु है’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मनुष्य मात्र बंधु है से तात्पर्य है कि सभी मनुष्य आपस में भाई बंधु हैं क्योंकि सभी का पिता एक ईश्वर है। इसलिए सभी को प्रेम भाव से रहना चाहिए, सहायता करनी चाहिए। कोई पराया नहीं है। सभी एक दूसरे के काम आएँ।

प्रश्न 6: कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
उत्तर: कवि ने सबको एक साथ चलने की प्रेरणा इसलिए दी है क्योंकि सभी मनुष्य उस एक ही परमपिता परमेश्वर की संतान हैं इसलिए बंधुत्व के नाते हमें सभी को साथ लेकर चलना चाहिए क्योंकि समर्थ भाव भी यही है कि हम सबका कल्याण करते हुए अपना कल्याण करें।

प्रश्न 7: व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।
उत्तर: व्यक्ति को परोपकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए।साथ ही अपने अभीष्ट मार्ग पर एकता के साथ बढ़ना चाहिए। इस दौरान जो भी विपत्तियॉ आऍं,उन्हें ढकेलते हुए आगे बढ़ते जाना चाहिए।उदार ह्रदय बनकर अहंकार रहित मानवतावादी जीवन व्यतीत करना चाहिए।

प्रश्न 8: ‘मनुष्यता’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर: ‘मनुष्यता’ कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहता है कि हमें अपना जीवन परोपकार में व्यतीत करना चाहिए। सच्चा मनुष्य दूसरों की भलाई के काम को सर्वोपरि मानता है।हमें मनुष्य मनुष्य के बीच कोई अंतर नहीं करना चाहिए। हमें उदार ह्रदय बनना चाहिए । हमें धन के मद में अंधा नहीं बनना चाहिए। मानवता वाद को अपनाना चाहिए।

(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1: 
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?

उत्तर: इन पंक्तियों द्वारा कवि ने एक दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना को उभारा है। इससे बढ़कर कोई पूँजी नहीं है। यदि प्रेम, सहानुभूति, करुणा के भाव हो तो वह जग को जीत सकता है। वह सम्मानित भी रहता है। महात्मा बुद्ध के विचारों का भी विरोध हुआ था परन्तु जब बुद्ध ने अपनी करुणा, प्रेम व दया का प्रवाह किया तो उनके सामने सब नतमस्तक हो गए।

प्रश्न 2: 
 रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
 सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
 अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
 दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।

उत्तर: कवि कहता है कि कभी भूलकर भी अपने थोड़े से धन के अहंकार में अंधे होकर स्वयं को सनाथ अर्थात् सक्षम मानकर गर्व मत करो क्योंकि अनाथ तो कोई नहीं है।इस संसार का स्वामी ईश्वर तो सबके साथ है और ईश्वर तो बहुत दयालु ,दीनों और असहायों का सहारा है और उनके हाथ बहुत विशाल है अर्थात् वह सबकी सहायता करने में सक्षम है।प्रभु के रहते भी जो व्याकुल रहता है वह बहुत ही भाग्यहीन है।सच्चा मनुष्य वह है जो मनुष्य के लिए मरता है।

प्रश्न 3: 
 चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
 विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
 घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
 अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।

उत्तर: कवि कहता है कि अपने इच्छित मार्ग पर प्रसन्नतापूर्वक हंसते खेलते चलो और रास्ते पर जो कठिनाई या बाधा पड़े उन्हें ढकेलते हुए आगे बढ़ जाओ। परंतु यह ध्यान रखना चाहिए कि हमारा आपसी सामंजस्य न घटे और हमारे बीच भेदभाव न बढ़े।हम तर्क रहित होकर एक मार्ग पर सावधानीपूर्वक चलें।एक दूसरे को तारते हुए अर्थात् उद्धार करते हुए आगे बढ़े तभी हमारी समर्थता सिद्ध होगी अर्थात् हम तभी समर्थ माने जाएंगे जब हम केवल अपनी ही नहीं समस्त समाज की भी उन्नति करेंगे।सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए मरता है।

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1: अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:

  • रंतिदेव- भारत के प्रसिद्ध राजा थे। एक बार भीषण अकाल पड़ गया। उस अकाल से तालाब और कुएँ सूख गए। फ़सलें सूख गईं। राजकोष में अनाज का भंडार समाप्त हो गया। दयालु राजा रतिदेव से अपनी प्रजा का दुख देखा न गया। आखिर प्रजा के सुख-दुख को वे अपना दुख जो समझते थे। उन्होंने प्रजा को अनाज देना शुरू कर दिया। प्रजा की भारी भरकम संख्या के आगे अनाज कम पड़ने लगा, जो बाद में समाप्त हो गया। राज-परिवार को भी अब अकाल के कारण आधा पेट खाकर गुजारा करना पड़ रहा था। ऐसी स्थिति आ गई कि राजा को भी कई दिनों से भोजन न मिला था। ऐसी स्थिति में जब राजा को कई दिनों बाद खाने को कुछ रोटियाँ मिलीं तभी एक भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ गया। राजा से उसकी भूख न देखी गई और उसे खिला दिया। ऐसी मान्यता है कि उनके कृत्य से प्रभावित होकर ईश्वर ने उनका भंडार अन्न-धन से भर दिया।
  • दधीचि- इनकी गणना भारत के परमदानी एवं ज्ञानी ऋषियों में की जाती है। दधीचि अत्यंत परोपकारी थे। वे तप में लीन रहते थे। उन्हीं दिनों देवराज इंद्र उनके पास आए। साधना पूर्ण होते ही दधीचि ने इंद्र से आने का कारण पूछा। इंद्र ने बताया कि ऋषिवर! आप तो जानते ही हैं कि देवता और दानवों में युद्ध छिड़ा हुआ है। इस युद्ध में दानव, देवों पर भारी साबित हो रहे हैं। देवगण हारने की कगार पर हैं। यदि कुछ उपाय न किया गया तो स्वर्गलोक के अलावा पृथ्वी पर भी दानवों का कब्जा हो जाएगा। ऋषि ने कहा, “देवराज इसमें मैं क्या कर सकता हूँ? मैं तो लोगों की भलाई की कामना लिए हुए तप ही कर सकता हूँ।” इंद्र ने कहा, “मुनिवर, यदि आप अपनी हड्डियाँ दे दो तो इनसे बज्र बनाकर असुरराज वृत्तासुर को पराजित किया जा सकेगा और देवगण युद्ध जीत सकेंगे। इंद्र की बातें सुनकर दधीचि ने साँस ऊपर खींची जिससे उनका शरीर निर्जीव हो गया। उनकी हड्डियों से बने वज्र से असुर मारे गए और देवताओं की विजय हुई। अपने इस अद्भुत त्याग से दधीचि का नाम अमर हो गया।
  • कर्ण- यह अत्यंत पराक्रमी, वीर और दानी राजकुमार था। वह कुंती का पुत्र और अर्जुन का भाई था जो सूर्य के वरदान से पैदा हुआ था। सूर्य ने उसकी रक्षा हेतु जन्मजात कवच-कुंडल प्रदान किया था जिसके कारण उसे मारना या हराना कठिन था। कर्ण इतना दानी था कि द्वार पर आए किसी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटने देता था। महाभारत युद्ध में कर्ण ने दुर्योधन का साथ दिया। कर्ण को पराजित करने के लिए कृष्ण और इंद्र ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उससे कवच और कुंडल माँगा। कर्ण समझ गया कि यह उसे मारने के लिए रची गई एक चाल है फिर भी उसने कवच-कुंडल दान दे दिया और अपनी मृत्यु की परवाह किए बिना अपना वचन निभाया।

प्रश्न 2: ‘परोपकार’ विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:
‘परोपकार’ विषय पर आधारित कविताएँ और दोहे-

  • कविता- औरों को हसते देखो मनु, हँसो और सुख पाओ।
    अपने सुख को विस्तृत कर लो, सबको सुखी बनाओ।
    छात्र पुस्तकालय से ‘कामायनी’ लेकर कविता पढ़ें। (जयशंकर प्रसाद कृत ‘कामायनी’ से)
  • दोहे- यों रहीम सुख होत है, उपकारी के संग ।
    बाँटन वारे को लगै, ज्यो मेहदी को रंग ।।
    तरुवर फल नहिं खात है, नदी न संचै नीर।
    परमारथ के कारनै, साधुन धरा शरीर ।।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1: अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध’ की कविता ‘कर्मवीर’ तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।
उत्तर:

देखकर बाधा विविध बहु विघ्न घबराते नहीं।
रह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं।
काम कितना ही कठिन हो किंतु उकताते नहीं।
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं।
हो गए इक आन में उनके बुरे दिन भी भले।
सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले।
आज करना है जिसे करते उसे हैं आज ही।
सोचते कहते हैं जो कुछ कर दिखाते हैं वही।
हो गए इक आन में उनके बुरे दिन भी भले।
सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले-फले ।।
(‘अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध”)

प्रश्न 2: भवानी प्रसाद मिश्र की ‘प्राणी वही प्राणी है’ कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।
उत्तर:
 भवानी प्रसाद मिश्र की कविता ‘प्राणी वही प्राणी है’ छात्र पुस्तकालय से या इंटरनेट से प्राप्त करें और दोनों कविताओं के भावों की तुलना स्वयं करें।

02.पद – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास 

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-

प्रश्न 1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
उत्तर: मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है − प्रभु जिस प्रकार आपने द्रोपदी का वस्त्र बढ़ाकर भरी सभा में उसकी लाज रखी, नरसिंह का रुप धारण करके हिरण्यकश्यप को मार कर प्रह्लाद को बचाया, मगरमच्छ ने जब हाथी को अपने मुँह में ले लिया तो उसे बचाया और पीड़ा भी हरी। हे प्रभु! इसी तरह मुझे भी हर संकट से बचाकर पीड़ा मुक्त करो।

प्रश्न 2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मीरा का हृदय कृष्ण के पास रहना चाहता है। उसे पाने के लिए इतना अधीर है कि वह उनकी सेविका बनना चाहती हैं। वह बाग-बगीचे लगाना चाहती हैं जिसमें श्री कृष्ण घूमें, कुंज गलियों में कृष्ण की लीला के गीत गाएँ ताकि उनके नाम के स्मरण का लाभ उठा सके। इस प्रकार वह कृष्ण का नाम, भावभक्ति और स्मरण की जागीर अपने पास रखना चाहती हैं।

प्रश्न 3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रुप–सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
उत्तर: मीरा ने कृष्ण के रुप-सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहा है कि उनके सिर पर मोर के पंखों का मुकुट है, वे पीले वस्त्र पहने हैं और गले में वैजंती फूलों की माला पहनी है, वे बाँसुरी बजाते हुए गायें चराते हैं और बहुत सुंदर लगते हैं।

प्रश्न 4. मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मीराबाई की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की भाषा है, जो राजस्थानी,  ब्रज और गुजराती का मिश्रण है। पदावली कोमल, भावानुकूल व प्रवाहमयी है, पदों में भक्तिरस है तथा अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश, रुपक आदि अलंकार का भी प्रयोग किया गया है।

प्रश्न 5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या–क्या कार्य करने को तैयार हैं?
उत्तर: मीरा कृष्ण को पाने के लिए अनेकों कार्य करने को तैयार हैं। वह सेवक बन कर उनकी सेवा कर उनके साथ रहना चाहती हैं, उनके विहार करने के लिए बाग बगीचे लगाना चाहती है। वृंदावन की गलियों में उनकी लीलाओं का गुणगान करना चाहती हैं, ऊँचे-ऊँचे महलों में खिड़कियाँ बनवाना चाहती हैं ताकि आसानी से कृष्ण के दर्शन कर सकें। कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर आधी रात को कृष्ण से मिलकर उनके दर्शन करना चाहती हैं।

(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1. हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रुप नरहरि, धर्यो आप सरीर।

उत्तर: इस पद में मीरा ने कृष्ण के भक्तों पर कृपा दृष्टि रखने वाले रुप का वर्णन किया है। वे कहती हैं – “हे हरि ! जिस प्रकार आपने अपने भक्तजनों की पीड़ा हरी है, मेरी भी पीड़ा उसी प्रकार दूर करो। जिस प्रकार द्रोपदी का चीर बढ़ाकर, प्रह्लाद के लिए नरसिंह रुप धारण कर आपने रक्षा की, उसी प्रकार मेरी भी रक्षा करो।” इसकी भाषा ब्रज मिश्रित राजस्थानी है। ‘र’ ध्वनि का बारबार प्रयोग हुआ है तथा ‘हरि’ शब्द में श्लेष अलंकार है।

प्रश्न 2. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।

उत्तर: इन पंक्तियों में मीरा ने कृष्ण से अपने दुख दूर करने की प्रार्थना की है। हे भक्त वत्सल जैसे – डूबते गजराज को बचाया और उसकी रक्षा की वैसे ही आपकी दासी मीरा प्रार्थना करती है कि उसकी पीड़ा दूर करो। इसमें दास्य भक्तिरस है। भाषा ब्रज मिश्रित राजस्थानी है। अनुप्रास अलंकार है, भाषा सरल तथा सहज है।

प्रश्न 3. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
 भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

उत्तर: इसमें मीरा कृष्ण की चाकरी करने के लिए तैयार है क्योंकि इससे वह उनके दर्शन, नाम, स्मरण और भावभक्ति पा सकती है। इसमें दास्य भाव दर्शाया गया है। भाषा ब्रज मिश्रित राजस्थानी है। अनुप्रास अलंकार, रुपक अलंकार और कुछ तुकांत शब्दों का प्रयोग भी किया गया है।

भाषा अध्यन 

प्रश्न 1. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप लिखिए–
उदाहरण − भीर − पीड़ा/कष्ट/दुख; री − की
चीर …………… बूढ़ता ……………
धर्यो …………… लगास्यूँ ……………
कुण्जर …………… घणा ……………
बिन्दरावन …………… सरसी ……………
रहस्यूँ …………… हिवड़ा ……………
राखो …………… कुसुम्बी ……………
उत्तर –चीरवस्त्रबूढ़ताडूबनाधर्योधारणलगास्यूँलगानाकुण्जरहाथीघणाबहुतबिन्दरावनवृंदावनसरसीअच्छीरहस्यूँरहूँगींहिवड़ाहृदयराखोरखनाकुसुम्बीकेसरिया

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1. मीरा के अन्य पदों को याद करके कक्षा में सुनाइए।
उत्तर: छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2. यदि आपको मीरा के पदों के कैसेट मिल सकें तो अवसर मिलने पर उन्हें सुनिए।
उत्तर: 
छात्र स्वयं करें।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
उत्तर:
 छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2. पहले हमारे यहाँ दस अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाइए।
उत्तर:
 विष्णु के अन्य दस अवतार

  • मत्स्यावतार
  • कूर्मावतार
  • वाराहावतार
  • वामनावतार
  • नरसिंहावतार
  • परशुरामावतार
  • रामावतार
  • कृष्णावतार
  • बुद्धावतार
  • कल्कि अवतार

01.साखी – अध्याय समाधान

प्रश्न अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए −

प्रश्न 1. मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर. मीठी वाणी बोलने से हम सभी के चारों ओर का माहौल सुखद बन जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मीठी बोली हमारे अंतःकरण में सकारात्मक भाव भरती है। इससे हमारे मन में क्रोध और घृणा जैसे नकारात्मक भाव कम होते हैं और हम सभी खुश रहते हैं। इससे हमारे आसपास के लोग भी हमसे मिलने वाले समय में सुखी अनुभव करते हैं और हमारे तन को भी शीतलता प्राप्त होती है।

प्रश्न 2. दीपक दिखाई देने पर अँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. 
दीपक की चमक अंधकार को दूर करती है, इसी तरह भक्ति और ज्ञान की ज्योति मन के अंधकार को दूर करती है। साखी में भक्त नाम के व्यक्ति ने भगवान को जानने के लिए उनके चरणों में ज्ञान का दीपक जलाया। जब उन्हें भगवान का ज्ञान प्राप्त हुआ तो उनके मन के सारे अंधकार दूर हो गए और वह सच्ची भक्ति के साथ भगवान को प्रेम करने लगे। इस रूप में, दीपक जलाना अंधकार को दूर करता है जैसे कि ज्ञान का दीपक मन के अंधकार को दूर करता है।

प्रश्न 3. ईश्वर कण–कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?
उत्तर. 
ईश्वर कण-कण में व्याप्त है और कण-कण ही ईश्वर है। ईश्वर की चेतना से ही यह संसार दिखाई देता है। चारों ओर ईश्वरीय चेतना के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, लेकिन यह सब कुछ हम इन भौतिक आँखों से नहीं देख सकते। जब तक ईश्वर की कृपा से हमें दिव्य चक्षु (आँखें) नहीं मिलते, तब तक हम कण-कण में ईश्वर के वास को नहीं देख सकते हैं और न ही अनुभव कर सकते हैं।

प्रश्न 4. संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ ‘सोना’ और ‘जागना’ किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. 
कवि के अनुसार संसार में वो लोग सुखी हैं, जो संसार में व्याप्त सुख-सुविधाओं का भोग करते हैं और दुखी वे हैं, जिन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई है। ‘सोना’ अज्ञानता का प्रतीक है और ‘जागना’ ज्ञान का प्रतीक है। जो लोग सांसारिक सुखों में खोए रहते हैं, जीवन के भौतिक सुखों में लिप्त रहते हैं वे सोए हुए हैं और जो सांसारिक सुखों को व्यर्थ समझते हैं, अपने को ईश्वर के प्रति समर्पित करते हैं वे ही जागते हैं। वे संसार की दुर्दशा को दूर करने के लिए चिंतित रहते हैं।

प्रश्न 5. अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?
उत्तर. 
अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने बताया है कि हमें अपने आस-पास निंदक रखने चाहिए ताकि वे हमारी त्रुटियों को बता सके। निंदक हमारे सबसे अच्छे हितैषी होते हैं। उनके द्वारा बताए गए त्रुटियों को दूर करके हम अपने स्वभाव को निर्मल बना सकते हैं।

प्रश्न 6. ‘ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई’ −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर. 
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने प्रेम की महत्ता बताई है। यह उसका संदेश है कि ईश्वर को पाने के लिए सबसे आवश्यक चीज प्रेम है। जब तक हम प्रेम से नहीं जुड़ेंगे, तब तक हम ईश्वर को पाने से दूर होंगे। यह उसका संदेश है कि ज्ञान पाने के लिए बड़े-बड़े पोथे या ग्रन्थ पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। केवल परमात्मा का नाम स्मरण करने से ही सच्चा ज्ञानी बना जा सकता है। इसलिए, यह पंक्तियाँ भावात्मक और गंभीर संदेश देती हैं।

प्रश्न 7. कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर. 
कबीर ने अपनी साखियाँ सधुक्कड़ी भाषा में लिखी है। इनकी भाषा मिलीजुली है। इनकी साखियाँ संदेश देने वाली होती हैं। वे जैसा बोलते थे वैसा ही लिखा है। लोकभाषा का भी प्रयोग हुआ है;जैसे- खायै, नेग, मुवा, जाल्या, आँगणि आदि भाषा में लयबद्धता, उपदेशात्मकता, प्रवाह, सहजता, सरलता शैली है।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –

प्रश्न 1. बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
उत्तर. 
इस पंक्ति का अर्थ है कि भगवान के प्रति प्रेम रूपी विरह का सर्प किसी व्यक्ति के हृदय में बस जाता है। इस सर्प का प्रभाव इतना गहरा होता है कि उस पर कोई मंत्र असर नहीं करता। इस पंक्ति से समझना चाहिए कि भगवान के विरह में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है और उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं होता है। यह पंक्ति भक्ति के मार्ग पर चलने वाले लोगों को समझाती है कि भगवान के विरह का दुःख नहीं होता। भक्ति के माध्यम से भगवान के प्रति विश्वास और प्रेम बढ़ाना चाहिए

प्रश्न 2. कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।
उत्तर. 
इस पंक्ति में कबीर कहते हैं कि जिस प्रकार हिरण अपनी नाभि से आती सुगंध पर मोहित रहता है परन्तु वह यह नहीं जानता कि यह सुगंध उसकी नाभि में से आ रही है। वह उसे इधर-उधर ढूँढता रहता है। उसी प्रकार अज्ञानी भी वास्तविकता से अनजान रहता है। वे आनंदस्वरूप ईश्वर को प्राप्त करने के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में लिप्त रहता है। वह आत्मा में विद्यमान ईश्वर की सत्ता को पहचान नही पाता।

प्रश्न 3. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।
उत्तर. 
जब तक मनुष्य में अज्ञान रुपी अंधकार छाया होता है तब वह ईश्वर को नहीं पा सकता। अध्याय में साखी के माध्यम से कबीर द्वारा अहंकार और ईश्वर के साथ-साथ रहने की मुश्किलता का वर्णन किया गया है। इस पंक्ति में अहंकार को अंधकार के रूप में वर्णित किया गया है, जो हमें ईश्वर से दूर करता है। जब हम ईश्वर की प्राप्ति करते हैं, तब अहंकार दूर हो जाता है और हम जीवन में उदारता, समझदारी, और संतोष की स्थिति में पहुंचते हैं। कबीर द्वारा यह प्रतिबद्धता हमें साधने के लिए दी गई है कि हम अपने अहंकार को छोड़ कर ईश्वर को प्राप्त करें और उससे गहरे संबंध बनाए रखें।

प्रश्न  4. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
उत्तर. 
इस दोहे में कबीर ने बताया है कि एक व्यक्ति जो बड़े-बड़े शास्त्रों को पढ़ता है या ज्ञानी होने की भावना रखता है, वह सच्चा ज्ञानी नहीं होता। वास्तव में, ज्ञान वह होता है जो हमें सच्ची भक्ति और प्रेम से प्राप्त होता है। इस साखी से हमें यह सीख मिलती है कि वास्तव में ज्ञान का मूल आधार हमारी सच्ची भक्ति और प्रेम होता है। यह हमें यह भी बताता है कि ज्ञान को प्राप्त करने के लिए अध्ययन से ज्यादा अनुभव और सच्ची भक्ति की आवश्यकता होती है।

भाषा अध्यन

प्रश्न 1. पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए।
उदाहरण − जिवै – जीना

औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।
उत्तर.

  1. जिवै – जीना
  2. औरन – औरों को
  3. माँहि – के अंदर (में)
  4. देख्या – देखा
  5. भुवंगम – साँप
  6. नेड़ा – निकट
  7. आँगणि – आँगन
  8. साबण – साबुन
  9. मुवा – मुआ
  10. पीव – प्रेम
  11. जालौं – जलना
  12. तास – उसका

योग्यता विस्तार

प्रश्न 1. ‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है तथा व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
उत्तर. छात्र परिचर्चा का आयोजन स्वयं करें।

प्रश्न 2. कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर. मृगों की एक प्रजाति होती है-कस्तूरी मृग। ऐसा माना जाता है कि इस प्रजाति के मृगों की नाभि में कस्तूरी होती है जो निरंतर अपनी महक बिखेरती रहती है। इस कस्तूरी के बारे में खुद मृग को कुछ पता नहीं होता है। वे इस महकदार वस्तु को खोजते हुए यहाँ-वहाँ घूमते-फिरते हैं।

परियोजना कार्य

प्रश्न 1. मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
उत्तर. 
मीठी वाणी/बोली संबंधी दोहे-
(क) बोली एक अमोल है जो कोई बोले जानि ।
हिए तराजू तौलि के तब मुँह बाहर आनि ।।
(ख) कागा काको सुख हरै, कोयल काको देय।
मीठे वचन सुनाय के, जग अपनो करि लेय ।।
(ग) मधुर वचन है औषधी कटुक वचन है तीर ।
स्रवण द्वार हवै संचरै सालै सकल शरीर ।।

ईश्वर प्रेम संबंधी दोहा-
(घ) रहिमन बहु भेषज करत, व्याधि न छाँड़त साथ ।
खग मृग बसत अरोग बन हरि अनाथ के नाथ ।।
अन्य दोहों का संकलन छात्र स्वयं करें।

प्रश्न 2. कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।
उत्तर. छात्र दोहे कंठस्थ करें तथा अंत्याक्षरी खेलें।

09. The Book that Saved the Earth – Textbooks Solutions

Read and Find Out – Page No: 63

Q 1. Why was the twentieth century called the ‘Era of the Book’?
Ans: 
The twentieth century was often called the Era of the Book. In those days, there were books about everything, from  ant eaters to Zulus. Books taught people how to, and when to, and where to, and why to. They illustrated, educated, punctuated, and even decorated.

Q 2. Who tried to invade the earth in the twenty-first century?
Ans: 
The Martians tried to invade the earth in the twenty-first century.

Page No: 65
Q 1. What guesses are made by Think-Tank about the books found on earth?
Ans: 
Think-Tank makes guesses about the books found on earth was that they are sandwiches meant for communication later he says that they are for eye communication.

Think about It – Page No: 74

Q 1. Noodle avoids offending Think − Tank but at the same time he corrects his mistakes. How does he mange to do that?
Ans: 
Noodle avoided offending Think-Tank, but at the same time he corrected his mistakes. Whenever he had to say something contrary to what Think-Tank said, he would present his thoughts by referring to them as being of no particular importance. In this way he would correct Think-Tank’s errors without making him feel that he was being corrected.

Q 2. If you were in Noodle’s place, how would you handle Think-Tank’s mistakes?
Ans: 
If I were in Noodle’s place, I would have handled Think-Tank’s mistakes the same way as Noodle does.

Q 3. Do you think books are being replaced by the electronic media? Can we do away with books altogether?
Ans: 
No, Books aren’t being completely replaced by electronic media, as both have unique advantages. While e-media offers convenience, books provide focus, emotional connection, and reliable knowledge preservation. Both can coexist to meet different needs.

Q 4. Why are books referred to as a man’s best companion? Which is your favourite book and why? Write a paragraph about that book.
Ans: 
Books are known to be as man’s best companion. Humans can make mental and friendly relations with them. They can use them for knowledge as well as time pass purposes. Choose your favorite book and write one para about that.

08. Bholi- Textbooks Solutions

Read and Find Out – Page No. 47

Q1: Why is Bholi’s father worried about her?
Ans: Bholi was unlike other children. She didn’t have good looks or much intelligence. Bholi’s father was concerned about finding a suitable husband for her.

Q2: For what unusual reasons is Bholi sent to school?
Ans: The Tehsildar had instructed Bholi’s father, Ramlal, to send his daughters to school to set a good example. Ramlal’s wife was worried that sending their daughters to school might affect their chances of getting married. However, she agreed to send Bholi to school, thinking that with her lack of beauty and intelligence, Bholi’s chances of marriage were already less. As a result, Bholi was sent to school.

Read and Find Out – Page No. 48 

Q1: Does Bholi enjoy her first day at school?
 Ans: 
Yes, Bholi enjoyed her first day at school. At first, she was scared, but she was happy to see so many girls her own age there. She hoped one of them might become her friend. The pictures on the classroom wall also caught her attention and made her feel excited.

Q2: Does she find her teacher different from the people at home?
 Ans: 
Yes, Bholi found her teacher to be very different from the people at home. At home, no one ever spoke to her kindly, but her teacher talked to her gently and soothingly. At home, she was often ridiculed for stammering, but her teacher encouraged her to speak confidently instead of mocking her. This kindness deeply touched Bholi’s heart.

Read and Find Out – Page No. 51

Q1: Why do Bholi’s parents accept Bishamber’s marriage proposal?
Ans: Bholi’s parents agreed to Bishamber’s marriage proposal because they feared that Bholi might never receive another proposal and could remain unmarried for the rest of her life. Bishamber was a prosperous grocer and hadn’t demanded any dowry, which made the proposal even more appealing to them.

Q2: Why does the marriage not take place?
Ans: When Bishamber noticed the pock-marks on Bholi’s face, he demanded five thousand rupees from Ramlal as dowry. Due to the demand for dowry, Bholi refused to marry him.

Think about It – Page No. 55

Q1: Bholi had many apprehensions about going to school. What made her feel that she was going to a better place than her home?
Ans: Bholi had many apprehensions about going to school. She remembered how their old cow, Lakshmi, had been turned out of the house and sold. When she got a clean dress, bathed and oil was rubbed into her dry hair, only then she felt that she was going to a better place than her home.

Q2: How did Bholi’s teacher play an important role in changing the course of her life?
Ans: Bholi’s teacher played an important role in changing the course of her life. She was polite and friendly which touched her heart. She encouraged her every time and was affectionate towards her and said Bholi to put her fears of not being able to speak aside. The teacher transformed her into a confident person who could read, write, and speak clearly.

Q3: Why did Bholi at first agree to an unequal match? Why did she later reject the marriage? What does this tell us about her?
Ans: Bholi at first agreed to an unequal match because she was lucky to get a well-to-do bridegroom who owned a big shop, had a house of his own, and had several thousand in the bank. Moreover, he was not asking for any dowry. Bholi also heard her mother saying that he did not know about her pock-marks and her lack of sense. If the proposal was not accepted she might remain unmarried all her life. She later rejected the marriage because the bridegroom demanded five thousand rupees as dowry. On seeing the father pleading and humiliated she decided not to marry him.

Q4: Bholi’s real name is Sulekha. We are told this right at the beginning. But only in the last but one paragraph of the story is Bholi called Sulekha again. Why do you think she is called Sulekha at that point in the story?
Ans: The word Bholi means a simpleton. Throughout the story, she had been a simpleton hardly expressing her opinion. The word Sulekha means a person with a beautiful sense of letters. In this story, this word has a larger meaning of being a literate intelligent, and mature individual. After her education Bholi has changed to Sulekha and her assertion during the marriage is her announcement to the world that she is no more a Bholi but a Sulekha.