5. अधः प्रदत्तानि वाक्यानि पठित्वा मातृभाषायां/प्रान्तीयभाषायाम्/आङ्ग्लभाषायां वा अनुवादं कुर्वन्तु – (क) भारतभूमौ पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति। हिन्दी अनुवाद: भारतभूमि में पवित्र नदियाँ बहती हैं। आङ्ग्ल अनुवाद: Sacred rivers flow on the land of India.
विवरणम्: वाक्यं भारतस्य नदीनां पवित्रतां सूचति।
(ख) भारतस्य मस्तके हिमालयः मुकुटरूपेण शोभते। हिन्दी अनुवाद: भारत के मस्तक पर हिमालय मुकुट के रूप में शोभित है। आङ्ग्ल अनुवाद: The Himalaya shines as a crown on India’s head.
विवरणम्: हिमालयस्य भारतस्य गौरवं वर्णितम्।
(ग) भारतभूमौ श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते। हिन्दी अनुवादः भारत की भूमि में श्रेष्ठ पर्वत शोभा पाते हैं। English translation:In the land of India, magnificent mountains stand majestically.
(घ) राष्ट्रद्वजे केसरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः सन्ति। हिन्दी अनुवादः राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया, श्वेत और हरित तीन रंग होते हैं। English translation: Our national flag has three colours – saffron, white and green.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश् नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही है?
संतों से
भक्तों से
वैजंती से
श्रीकृष्ण से(*)
उत्तर: श्रीकृष्ण से विश्लेषण: इस पद में मीरा श्रीकृष्ण से विनती कर रही हैं कि वे उनके नैनों (आँखों) में बस जाएँ। यह उनकी भक्ति और प्रेम की अभिव्यक्ति है।
(2) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?
प्रेम और भक्ति (*)
प्रकृति की सुंदरता
युद्ध और शांति
ज्ञान और शिक्षा
उत्तर: प्रेम और भक्ति विश्लेषण: इस पद में मीरा श्रीकृष्ण के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम को व्यक्त करती हैं, जो इसका मुख्य विषय है।
(3) “बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
सर्दी
गर्मी
वर्षा (*)
बसंत
उत्तर: वर्षा विश्लेषण: इस पद में सावन के महीने और वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन है, जिसमें बादल, बारिश, और शीतल हवा का चित्रण किया गया है।
(4) “बरसे बदरिया सावन की” पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—
प्रसन्न है (*)
दुखी है
उदास है
चिंतित है
उत्तर: प्रसन्न है विश्लेषण: इस पद में मीरा सावन के आगमन और श्रीकृष्ण के आने की भनक से प्रसन्न और उत्साहित हैं, जो उनके आनंदमय भाव को दर्शाता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि इन पदों को पढ़ने के बाद उनके भावों और शब्दों से यह स्पष्ट होता है कि मीरा का भाव भक्ति और प्रेम से भरा हुआ है।
पहले पद “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” में मीरा सीधे श्रीकृष्ण से विनती करती हैं, इसलिए इसका सही उत्तर श्रीकृष्ण है।
इस पद का भाव बहुत प्रेमपूर्ण और भक्ति से भरा हुआ है, इसलिए इसका मुख्य विषय प्रेम और भक्ति ही हो सकता है।
“बरसे बदरिया सावन की” पद में सावन का मौसम, बादल, वर्षा, और ठंडी हवा का वर्णन किया गया है, इसलिए यह वर्षा ऋतु का चित्रण करता है।
इस पद को पढ़कर ऐसा लगता है कि मीरा बहुत प्रसन्न हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि श्रीकृष्ण आने वाले हैं, इसलिए उनके भाव प्रसन्नता को दर्शाते हैं।
मेरे समूह के साथी भी जब इन पदों को ध्यान से पढ़ेंगे और उनके भावों को समझेंगे, तो वे भी इस बात से सहमत होंगे। अगर उन्होंने अलग उत्तर चुने हैं, तो हम मिलकर पद के शब्दों और उनके अर्थों पर चर्चा करके सही उत्तर तक पहुँच सकते हैं।
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “नहीं नहीं बुदंन मोह बासे, शीतल पवन सोहबन की।” उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में मीरा कहती हैं कि उन्हें बादल और ठंडी हवा बहुत अच्छे लगते हैं। ‘नहीं नहीं बुदंन’ का मतलब है – बादल इधर-उधर घूम रहे हैं और ‘शीतल पवन’ यानी ठंडी हवा चल रही है। ये सब सावन के मौसम की सुंदरता को दर्शाता है। मीरा इन प्राकृतिक चीजों को देखकर आनंदित हो रही हैं। विचार: इससे हमें समझ में आता है कि मीरा प्रकृति से बहुत जुड़ी हुई थीं और उन्होंने प्रकृति की सुंदरता को भी अपने भक्ति भाव से जोड़ा है।
(ख) “मीरा के प्रभु संत सुखदाई, भक्त वल्लभ गोपाला।” उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में मीरा अपने प्रभु श्रीकृष्ण की महिमा बता रही हैं। वे कहती हैं कि श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले हैं और भक्तों के प्यारे हैं। विचार: इससे हमें पता चलता है कि मीरा को अपने प्रभु पर बहुत विश्वास और प्रेम है। वह उन्हें सभी भक्तों और संतों के लिए सबसे प्रिय और सुख देने वाला मानती हैं।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है? उत्तर:
श्रीकृष्ण की मोहनी मूर्ति (आकर्षक रूप) और साँवली सूरत का वर्णन।
उनकी विशाल आँखें (नैना बने विशाल) जो मन को मोह लेती हैं।
उनके होठों पर मुरली और सीने पर वैजंती माला की शोभा।
कमर पर छोटी घंटिकाएँ और पैरों में नूपुर, जो मधुर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
वे संतों को सुख देने वाले और भक्तों के प्रिय हैं।
(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है? उत्तर:
सावन के बादल बरस रहे हैं, जो मन को भाते हैं।
मीरा का मन श्रीकृष्ण के आने की भनक से उमंग से भर गया है।
चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आ रहे हैं।
बिजली चमक रही है और छोटी-छोटी बूँदें बरस रही हैं।
शीतल हवा बह रही है, जो मन को सुकून देती है।
मीरा आनंद और मंगल गीत गा रही हैं।
कविता की रचना
“मीरा के प्रभु संत सुखदाई” “मीरा के प्रभु गिरधरनार” इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अन्य काव्य रचनाओं के अंत में अपने नाम को समर्पित कर दिया करते थे। आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी (जैसे— कविता में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि।)
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए। उत्तर: कविता की विशेषताएँ:
छोटी-छोटी पंक्तियाँ, जो गेय और सरल हैं।
श्रीकृष्ण के लिए विभिन्न नामों का प्रयोग (नंदलाल, गिरधर, गोपाल)।
भक्ति और प्रेम का गहरा भाव।
प्रकृति का सुंदर चित्रण (सावन, बादल, बिजली)।
मीरा का अपने नाम का उल्लेख (कविता में हस्ताक्षर)।
मधुर शब्दों और ध्वनियों का उपयोग (जैसे नूपुर, मुरली)।
सरल और बोलचाल की भाषा (भोजपुरी प्रभाव)।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर: हमारे समूह ने पाठ “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” को ध्यान से पढ़ा और उसमें पाई गई विशेषताओं की यह सूची बनाई है, जिसे हम कक्षा में साझा कर रहे हैं:
छोटी-छोटी पंक्तियाँ: कविता की सभी पंक्तियाँ छोटी हैं, जिससे कविता गाने या याद करने में सरल बनती है।
भक्ति और प्रेम की भावना: पूरी कविता में मीरा का श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति दिखाई देती है।
श्रीकृष्ण के अलग-अलग नाम: कविता में श्रीकृष्ण को नंदलाल, गिरधर, गोपाला जैसे नामों से पुकारा गया है।
प्राकृतिक दृश्य का वर्णन: सावन, बादल, ठंडी हवा और बिजली जैसे शब्दों से सुंदर प्रकृति का चित्रण किया गया है।
कवयित्री का आत्म-उल्लेख: मीरा ने अपने नाम का उल्लेख करते हुए इसे कविता में जोड़ा है, जो उनके समय की एक विशेष शैली थी।
मधुर और भावपूर्ण शब्द: कविता में नूपुर, मुरली जैसे मधुर शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो संगीत और नृत्य का वातावरण बनाते हैं।
सरल भाषा: कविता की भाषा सरल है और बोलचाल के शब्दों का उपयोग किया गया है, जिससे इसे समझना आसान होता है।
निष्कर्ष: यह कविता भक्ति, संगीत, प्रकृति और आत्म-समर्पण की सुंदर अभिव्यक्ति है, जिसे मीरा ने बहुत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा? उत्तर:
संभावित संदेश: बादलों ने गरजते हुए कहा होगा, “हे मीरा, गोपाल आ रहे हैं! सावन की बूँदों में उनकी मुरली की तान सुनाई देगी। तैयार हो जाओ, गिरधर तुम्हारे नैनों में बसने वाले हैं!”
कैसे कहा होगा: बादल मधुर और गहरी आवाज में, बिजली की चमक और हवा की सनसनाहट के साथ यह संदेश दे सकते थे, जो मीरा के मन को आनंद से भर दे।
(ख) यदि आपको मीरा से बात करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या सुनेंगे? उत्तर: क्या कहेंगे: मैं मीरा से कहूँगा, “आपकी भक्ति और कविताएँ आज भी लोगों के दिलों को छूती हैं। आपका श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम प्रेरणादायक है।” क्या पूछेंगे:
श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
राजकुमारी होने के बावजूद आपने साधु जीवन क्यों चुना?
सावन के महीने में आपको श्रीकृष्ण की याद कैसे आती थी?
शब्दों के रूप
अगले पृष्ठ पर शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
(क) “मोहिन मूरति सँवारि सूरति, नैना बने विशाल!” इस पंक्ति में “सँवारि” शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर “साँवली” शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं, जिन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए।
उत्तर:
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए—
उत्तर:
पंक्ति से पंक्ति
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखांकित करके मिलाइए— उत्तर:
कविता का सौंदर्य
“बसरे बदरियासावन की”
इस पंक्ति में लिखित शब्दों पर ध्यान दीजिए क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी? इस पंक्ति में “बसरे” और “बदरिया” दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों “ब” से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में “ब” वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूंढकर लिखिए। उत्तर: कविता का सौंदर्य: ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति ‘बरसे बदरिया सावन की’ पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्दों में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। यह आवृत्ति कविता में ध्वनि की मधुरता और लयात्मकता को बढ़ाती है। पाठ में से अन्य उदाहरण: “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे” यहाँ ‘न’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है, जो नन्हीं बूंदों के गिरने की ध्वनि को दर्शाती है। “उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया” इस पंक्ति में ‘म’ और ‘ड़’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है, जो बादलों के उमड़ने और गरजने का आभास कराती है। “शीतल पवन सोहावन की” यहाँ ‘स’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है, जो शीतल हवा के प्रवाह का संकेत देती है। “दामिन दमकै झर लावन की” इस पंक्ति में ‘द’ वर्ण की आवृत्ति है, जो बिजली की चमक और झरने की ध्वनि को दर्शाती है। विशेषता: कविता में वर्णों की आवृत्ति का प्रयोग काव्यात्मक सौंदर्य और संगीतात्मकता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इससे कविता में ताल, लय और ध्वनि का प्रभाव गहराई से उभरकर सामने आता है। मीरा बाई की कविता में ‘ब’, ‘न’, ‘म’, और ‘स’ जैसे वर्णों की आवृत्ति से कविता में एक मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है, जो पाठक के मन में सावन ऋतु का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है।
रूप बदलकर
पाठ के किसी एक पद को एक अन्य रूप में लिखिए उदाहरण के लिए— ‘सावन के बादल बरस रहे हैं..’ या ‘सावन की बदरिया बरसती है…’ आदि । उत्तर: अनुच्छेद: सावन की बदरिया सावन का महीना आते ही आसमान में काले-काले बादल उमड़-घुमड़ कर छा जाते हैं। चारों दिशाओं से बादलों का आगमन होता है और बिजली की चमक के साथ वर्षा की झड़ी लग जाती है। हल्की-हल्की बूंदें ठंडी हवाओं के साथ धरती पर गिरती हैं, जिससे वातावरण में ठंडक और ताजगी आ जाती है। सावन के इन मेघों के बरसने से मन प्रसन्न हो उठता है। मीरा के मन में भी खुशी का संचार हो जाता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह वर्षा श्रीकृष्ण के आगमन का संदेश लेकर आई है। बादलों की गर्जना, ठंडी पवन और बूंदों की रिमझिम ध्वनि से जैसे पूरा वातावरण गूँज उठता है। ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी प्रकृति श्रीकृष्ण के स्वागत में आनंद-गान कर रही है। सावन का यह सुहाना मौसम मीरा के मन को आनंदित कर देता है और वे प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा में मगन हो जाती हैं।
मुहावरे
“बसरे मेरे नैमिन में ‘नंदलाला'” नैनों या आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जब हमें कोई व्यिक्त या वस्तु इतनी अधिक प्रिय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं, जैसे — उसकी छवि मेरी आँखों में बस गई है। ऐसा ही एक अन्य मुहावरा है— आँखों में घर करना। नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं। अपने परिजनों , साथियों, शिक्षकों , पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समिझए और इनका वाक्यों में प्रयोग कीजिये।
आँखों का तारा
आँखों पर पढ़ना
आँखों से आकाश ओढ़ना
आँखों से खिलना
आँखें फटना
आँखों पर आना
आँखों से सूरज
आँखों से उठाना
आँखों से झलकना
आँखों में चमकना
उत्तर: आँखों से जुड़े मुहावरों के अर्थ और वाक्य:
आँखों का तारा: बहुत प्रिय व्यक्ति। वाक्य: मेरा छोटा भाई मेरे लिए आँखों का तारा है।
आँखों पर पड़ना: किसी का ध्यान आकर्षित करना। वाक्य: उसकी सुंदर पोशाक मेरी आँखों पर पड़ गई।
आँखों के आगे अँधेरा छाना: निराशा या चिंता में डूब जाना। वाक्य: परीक्षा में कम अंक आने से मेरी आँखों के आगे अँधेरा छा गया।
आँख दिखाना: डराना या धमकाना। वाक्य: उसने मुझे आँख दिखाकर चुप कराने की कोशिश की।
आँखें फटना: बहुत आश्चर्य होना। वाक्य: उसकी नई कार देखकर मेरी आँखें फट गईं।
आँख भर आना: भावुक होकर रोना। वाक्य: उसकी दुखभरी कहानी सुनकर मेरी आँखें भर आईं।
आँखें चुराना: शर्मिंदगी या अपराधबोध में नजरें नहीं मिलाना। वाक्य: गलती करने के बाद उसने मुझसे आँखें चुराईं।
आँखों से उतारना: बहुत प्यार से देखना। वाक्य: माँ अपने बच्चे को आँखों से उतारती है।
आँखों में खटकना: कुछ बुरा या परेशान करने वाला लगना। वाक्य: उसका व्यवहार मुझे आँखों में खटक रहा है।
आँखों में चमकना: उत्साह या खुशी दिखना। वाक्य: नया खिलौना पाकर उसकी आँखों में चमक आ गई।
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके से पाठ के सामने प्रस्तुत कीजिए, उदाहरण के लिए—
गान करना
भाव-नृत्य प्रस्तुति करना
कविता पाठ करना आदि
उत्तर: हमने पाठ “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” का पहला पद चुना है— “बसो मेरे नैनन में नंदलाल, बसो मेरे नैनन में…” इस पद को हमने निम्नलिखित तरीकों से प्रस्तुत किया:
गान करना: समूह के कुछ सदस्यों ने राग में इस पद को गाया। उन्होंने मीरा की भक्ति और भाव को स्वर और लय में पिरोकर प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति शांति और श्रद्धा का अनुभव कराती है।
भाव-नृत्य प्रस्तुति: कुछ छात्रों ने इस पद पर भाव-नृत्य किया। उन्होंने श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की प्रेम-भक्ति को हाव-भाव, मुद्राओं और गतियों के माध्यम से दर्शाया।
कविता पाठ करना: अन्य छात्रों ने इस पद का भावपूर्ण कविता-पाठ किया। उन्होंने उच्चारण, ठहराव और भाव-प्रदर्शन का ध्यान रखते हुए इसे प्रस्तुत किया।
इस तरह हम सभी ने मिलकर मीरा की भक्ति-भावना को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया और श्रीकृष्ण के प्रति उनकी श्रद्धा को समझा और महसूस किया।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) “बरसे बदरिया सावन की”
1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपको गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आता है? वर्णन कीजिए। उत्तर: सावन के महीने में मेरे गाँव में मौसम पूरी तरह से बदल जाता है। काले-काले बादल आसमान में छा जाते हैं और हल्की-हल्की बारिश शुरू हो जाती है। चारों ओर हरियाली फैल जाती है। पेड़-पौधे ताजगी से भर जाते हैं। ठंडी हवाएँ चलने लगती हैं और वातावरण में एक नई स्फूर्ति आ जाती है। नदी-नाले और तालाब पानी से भर जाते हैं। खेतों में धान की फसलें लहलहाने लगती हैं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू हर किसी का मन मोह लेती है। सावन में गाँव का दृश्य अत्यंत मनमोहक और सुंदर हो जाता है।
2. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए (उदाहरण के लिए – बिजली के कड़कने या बूंदों के टपकने की ध्वनियाँ)। उत्तर: सावन में कई तरह की मधुर ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
बिजली की कड़कन: यह ध्वनि कभी-कभी डराती है, लेकिन बारिश के संकेत के रूप में रोमांच भी पैदा करती है।
बूँदों की रिमझिम: जब बूँदें टिन की छत पर गिरती हैं, तो एक मधुर संगीत जैसा लगता है।
नदी और नालों की कल-कल: बारिश से जलधारा का प्रवाह बढ़ जाता है और कल-कल की ध्वनि आनंदित कर देती है।
मेंढकों की टर्र-टर्र: तालाब के किनारे मेंढक टर्राते हैं, जो सावन की पहचान बन जाती है।
कोयल की कूक: सावन में कोयल की मधुर कूक वातावरण को संगीतमय बना देती है।
इन ध्वनियों को सुनकर मन में आनंद, ताजगी और उल्लास का अनुभव होता है। ऐसा लगता है कि पूरी प्रकृति खुशी मना रही है। मन में उत्साह और स्फूर्ति का संचार हो जाता है।
3. वर्षा ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने में आनंद आता है? उत्तर: वर्षा ऋतु में मुझे कई गतिविधियाँ करने में आनंद आता है, जैसे:
कागज की नाव बनाना: बरसाती पानी में नाव को बहते देखना बहुत सुखद लगता है।
बारिश में भीगना: दोस्तों के साथ बारिश में नाचना और गाना।
कीचड़ में फुटबॉल खेलना: कीचड़ में खेलना थोड़ा कठिन होता है, लेकिन बहुत मजेदार भी।
तालाब में तैरना: सावन में तालाब भर जाते हैं, और तैरने में बहुत मजा आता है।
पतंगबाजी: हल्की बारिश के बीच रंग-बिरंगी पतंग उड़ाना एक अद्भुत अनुभव है।
4. सावन के महीने में हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। आपके घर, परिवार या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए। उत्तर: मेरे गाँव में सावन के महीने में रक्षा बंधन प्रमुख रूप से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और उनके लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई बहन को उपहार देते हैं और जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं। सावन की फुहारों के बीच रक्षा बंधन का त्योहार मनाना बहुत खास लगता है। सुबह से ही बहनें राखी की तैयारी में जुट जाती हैं। मिठाइयों की खुशबू और त्योहार का उल्लास पूरे घर में फैल जाता है। भाई-बहन की हँसी-खुशी और प्यार का यह पर्व सावन की हरियाली के बीच मन में नई ऊर्जा और उमंग का संचार करता है।
(ख) बसो मेरे नैनन में नंदलाल इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं।
1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए। उत्तर: मेरे जीवन में मेरी माँ वह व्यक्ति हैं जो सदैव मेरी सहायता करती हैं और मुझे आनंदित करती हैं। चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, माँ हमेशा मेरी ढाल बनकर खड़ी रहती हैं।
सहायता और समर्थन: जब भी मैं किसी समस्या में होता हूँ, माँ अपनी समझदारी और अनुभव से मुझे सही राह दिखाती हैं। परीक्षा के समय मुझे प्रोत्साहित करती हैं और आत्मविश्वास बढ़ाती हैं।
खुशियाँ और स्नेह: माँ का प्यार और दुलार मुझे हर परिस्थिति में सुकून देता है। उनके हाथ का बना खाना और सुबह की दुलार भरी मुस्कान मेरे लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है।
संस्कार और सिखावन: माँ ने मुझे सच्चाई और ईमानदारी का पाठ सिखाया है। कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की सीख भी माँ से ही मिली है।
माँ मेरे लिए न केवल एक मार्गदर्शक हैं, बल्कि मेरी सबसे अच्छी मित्र भी हैं। उनके बिना मेरा जीवन अधूरा है। उनके स्नेह और देखभाल से मैं सदैव आनंदित और सुरक्षित महसूस करता हूँ।
2. कवयित्री ने पद में ‘नूपुर’ और ‘ध्रुव तारा’ जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है। किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं। आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए। उत्तर: मैं अपने दादा जी का वर्णन करना चाहूँगा। दादा जी मेरे परिवार के सबसे स्नेही और अनुभवी सदस्य हैं।
व्यक्तित्व: दादा जी का चेहरा हमेशा मुस्कुराता रहता है। उनका सफेद धोती-कुर्ता और माथे पर लाल तिलक उनकी पहचान है।
आदतें और व्यवहार: सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। वे हर शाम बगीचे में पौधों को पानी देते हैं और बच्चों को कहानियाँ सुनाते हैं।
खास बातें: उनकी कहानी सुनाते समय चेहरे की चमक और हाथों के इशारे बच्चों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। जब भी कोई बात समझानी होती है, वे हमेशा कहानी के माध्यम से सीख देते हैं।
उनका हौसला: दादा जी हमेशा कहते हैं, “कभी हार मत मानो, कोशिश करते रहो।” वे मेरे जीवन में प्रेरणा का स्रोत हैं।
दादा जी की छोटी-छोटी बातें जैसे प्यार से पुकारना, बच्चों के सिर पर हाथ फेरना और आशीर्वाद देना, मेरे दिल को खुशी और सुकून देती हैं। उनके साथ समय बिताना मेरे लिए सबसे आनंददायक क्षण होता है।
विशेषताएँ
“मोहिन मूर्ति साँवली सूरति, नैना बने विशाला”
(क) इस पंक्ति में कवियित्री ने श्रीकृष्ण की मोहिनी मूर्ति, साँवली सूरति और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातें सबसे अधिक आकर्षित किया ? उत्तर: श्रीकृष्ण की कई विशेषताएँ मुझे अत्यधिक आकर्षित करती हैं:
मोहिनी मूरत: श्रीकृष्ण की सुंदर और मोहक छवि, जिनके साँवले स्वरूप में गजब की आकर्षण है। उनकी बाँसुरी की मधुर ध्वनि जो मन को मोह लेती है।
साँवरी सूरत: सांवले रंग के बावजूद उनका आकर्षण अनोखा है। उनके व्यक्तित्व में सहजता और सादगी का मेल है।
भक्तवत्सलता: श्रीकृष्ण का अपने भक्तों के प्रति स्नेह, जो उन्हें हर परिस्थिति में सहारा देता है। उनका गोपियों के प्रति अपनत्व और प्रेम मुझे अत्यधिक प्रभावित करता है।
(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है ? अपने जीवन से जुड़े कसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए। उत्तर: मुझे किसी व्यक्ति का ईमानदारी का गुण सबसे अधिक आकर्षित करता है। क्यों: ईमानदार व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता है और दूसरों का विश्वास जीतता है। ऐसे लोग निडर और सशक्त होते हैं क्योंकि उन्हें अपने कर्मों पर गर्व होता है। उदाहरण: मेरे पिताजी का ईमानदारी से जीवन जीना मुझे सबसे अधिक प्रेरित करता है। एक बार जब दुकान में गलती से ज्यादा पैसे लौटाए गए, तो उन्होंने तुरंत लौटाकर सही पैसे ले लिए। इस घटना से मैंने सीखा कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, सच्चाई और ईमानदारी का रास्ता कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उनके इस गुण ने मुझे सिखाया कि सच्चाई में ही सच्चा सुख है।
(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए। उत्तर: बाह्य और आंतरिक विशेषताएँ: 1. बाह्य विशेषताएँ (दिखने वाली):
रंग और कद: मैं साँवला हूँ और मेरी कद मध्यम है।
पहनावा: मुझे हल्के रंग के कपड़े पहनना पसंद है, जो मेरी सादगी को दर्शाते हैं।
2. आंतरिक विशेषताएँ (व्यवहार से प्रकट):
सहनशीलता: कठिन परिस्थिति में भी मैं धैर्य नहीं खोता और शांतिपूर्वक सोचता हूँ। जब परीक्षा में कम अंक आए, तो मैंने मेहनत जारी रखी और अगले बार अच्छे अंक लाए।
सहृदयता: दूसरों की सहायता करना मुझे सुख देता है। एक बार एक घायल पक्षी को मैंने पानी और दाना देकर उसकी देखभाल की।
मधुर ध्वनियाँ
“अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल।। क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल।।” इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। उन वस्तुओं के नाम पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए। आगे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न करने वाले कुछ वाद्ययंत्रों के विषय में पहेलियाँ दी गई हैं। इन्हें पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर मिलाइए-
उत्तर:
चित्र करते हैं बातें
नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए-
यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र है। इस चित्र के आधार पर मीरा के संबंध में एक अनुच्छेद लिखिए।
उत्तर: मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र उनकी भक्ति और सादगी को दर्शाता है। चित्र में मीरा को साधारण वस्त्रों में, हाथ में तानपुरा लिए हुए दिखाया गया है, जो उनकी संगीतमय भक्ति को व्यक्त करता है। उनके चेहरे पर शांति और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम का भाव है। पृष्ठभूमि में रंगीन फूल और प्रकृति का चित्रण सावन के महीने की सुंदरता को दर्शाता है। यह चित्र मीरा की भक्ति, संगीत, और प्रकृति प्रेम को जीवंत करता है।
सावन से जुड़े गीत
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढिए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत, कविता आदि लिख सकते हैं। कक्षा के सभी सदस्य द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए। उत्तर: सावन के महीने में गाए जाने वाले गीतों का भारतीय लोकसंस्कृति में विशेष महत्व है। सावन का मौसम हरियाली, वर्षा और उमंग का प्रतीक है। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक लोकगीत, खेलगीत और भक्ति गीत गाए जाते हैं। सावन का प्रसिद्ध लोकगीत: “सावन का महीना, पवन करे सोर, झूला पड़े तरु पर, रिमझिम बरसे घनघोर। काहे को सजनी, रोवत है, तेरा मन घबराए, सावन का महीना, पवन करे सोर।” भावार्थ: यह गीत सावन के महीने में प्रेम और मिलन की आस से भरा हुआ है। झूला झूलने की परंपरा और सावन की फुहारें इसमें जीवंत रूप से व्यक्त होती हैं। यह गीत विशेषकर उत्तर भारत में गाया जाता है और इसका भाव प्रिय के विरह में तड़प और मिलने की आस को दर्शाता है। प्रस्ताव: कक्षा के सभी छात्र-छात्राओं से अनुरोध है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सावन गीत एकत्र करें। सभी गीतों को संकलित कर एक पुस्तिका तैयार की जाएगी, जिसे कक्षा के पुस्तकालय में रखा जाएगा। इससे न केवल सांस्कृतिक विविधता का पता चलेगा बल्कि हमारी लोकसंस्कृति से भी परिचय होगा।
खोजबीन
आपने पढ़ा कि मीरा श्रीकृष्ण की आराधना करती थीं। आपने कक्षा 6 की पुस्तक भरत में पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं। उत्तर:सूरदास: श्रीकृष्ण भक्ति के महान कवि सूरदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे। वे श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त माने जाते हैं। सूरदास की रचनाओं में बालकृष्ण की बाल-लीलाओं और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों का सजीव चित्रण मिलता है। सूरदास की प्रसिद्ध रचना: कृष्ण की बाल-लीला “मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो। ख्याल परायो नंदकिसोर, ननदी संग कन्हैया। मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो।” भावार्थ: इस पद में सूरदास ने बालकृष्ण की मासूमियत और शरारत का वर्णन किया है। जब माता यशोदा श्रीकृष्ण को माखन चोरी का दोष देती हैं, तो कृष्ण अपनी मासूमियत भरे अंदाज में कहते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। साहित्यिक विशेषताएँ:
भक्ति रस: रचनाओं में भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेमभाव।
सरल भाषा: ब्रज भाषा में रचित, जिसमें सहजता और कोमलता है।
बाल-लीला वर्णन: कृष्ण के बाल रूप का अत्यंत मोहक चित्रण।
सजीव चित्रण: पाठक के समक्ष दृश्य को जीवंत करने की क्षमता।
आज की पहेली
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इसकी अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्दों में से खोजिए और लिखिए— उत्तर:
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कवयित्री मीरा के बारे में और जान-समझ सकते हैं-
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है?
प्रेम-प्रीति
मिल-जुलकर रहना
लोभ और पाप (★)
निर्भय विचरण
उत्तर: लोभ और पाप विश्लेषण: कविता में कहा गया है कि पक्षियों के मन में लोभ और पाप नहीं होता। वे अपने श्रम से प्राप्त संसाधनों से संतुष्ट रहते हैं और अतिरिक्त संसाधन दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। इसलिए सही उत्तर “लोभ और पाप” है।
(2) “सब मिल-जुलकर रहते हैं ये, सब मिल-जुलकर खाते हैं।” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है?
असमानता और विभाजन
प्रतिस्पर्धा और संघर्ष
समानता और एकता (★)
स्वार्थ और ईर्ष्या
उत्तर: समानता और एकता विश्लेषण: यह पंक्ति दर्शाती है कि पक्षी एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते और खाते हैं, जो समानता और एकता का प्रतीक है। इसलिए सही उत्तर “समानता और एकता” है।
(3) “वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?
आकाश में उड़ते रहना
बंधन में रहना
स्वच्छंद रहना (★)
संचय करना
उत्तर: स्वतंत्र रहना विश्लेषण: कविता में पक्षी मनुष्य को स्वतंत्र और निर्भय जीवन जीने की सीख देते हैं। वे कहते हैं कि मनुष्य को बंधनों (जैसे लोभ, स्वार्थ) से मुक्त होकर स्वच्छंद जीवन जीना चाहिए। इसलिए सही उत्तर “स्वतंत्र रहना” है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने। उत्तर: हमने इन उत्तरों को इसलिए चुना क्योंकि वे कविता के मुख्य संदेश—स्वतंत्रता, एकता, और लोभ से मुक्ति—को सबसे अच्छे से व्यक्त करते हैं। कविता पक्षियों के सरल, स्वच्छंद, और सहयोगी जीवन से मनुष्य को प्रेरणा लेने की बात कहती है।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए। इनके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: पंक्तियों पर चर्चा
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि चिड़िया हमें प्रेम और आपसी सहयोग से जीने की सीख देती है। पक्षी एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते हैं और सभी के साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करते हैं। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने जीवन में प्रेम और एकता को अपनाना चाहिए।
(ख) “उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, प्रताड़न नहीं।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि पक्षियों का मन शुद्ध और निष्कपट होता है। उनके मन में न तो लोभ होता है, न पाप और न ही दूसरों को कष्ट देने की भावना। यह हमें सिखाता है कि हमें भी लोभ और बुरे विचारों से दूर रहकर साधारण और संतोषी जीवन जीना चाहिए।
(ग) “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि पक्षी बिना किसी डर के खुले आकाश में स्वतंत्र रूप से उड़ते हैं। यह उनकी स्वतंत्रता और निर्भयता को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि हमें भी अपने जीवन में डर और बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्रता का आनंद लेना चाहिए।
सोच-विचार के लिए
नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रश्न दिए गए हैं। कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? उत्तर: पक्षियों का आपसी सहयोग हमें सिखाता है कि हमें भी समाज में एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए। जब हम सहयोग करते हैं, तो कार्य आसान हो जाते हैं और समाज में शांति बनी रहती है। उदाहरण के लिए, यदि हम अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर काम करें, तो हम बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। यह भावना हमें स्वार्थ और अकेलेपन से बचाती है।
(ख) “जो मिलता है, अपने श्रम से उतना भर ले लेते हैं” पक्षी अपनी आवश्यकताओं भर ही संचय करते हैं। मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है? उत्तर: पक्षी केवल अपनी जरूरत के अनुसार संसाधन लेते हैं और बाकी दूसरों के लिए छोड़ देते हैं। लेकिन मनुष्य का स्वभाव अक्सर लालची होता है। मनुष्य अपनी जरूरत से ज्यादा संचय करने की कोशिश करता है, जैसे अधिक धन, संपत्ति या संसाधन इकट्ठा करना। यह लोभ मनुष्य को स्वार्थी बनाता है और समाज में असमानता को बढ़ाता है।
(ग) “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” पक्षी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों में क्यों बताया गया है? उत्तर: पक्षी स्वच्छंद हैं क्योंकि वे बिना किसी लोभ, स्वार्थ या डर के खुले आकाश में उड़ते हैं। उनके जीवन में कोई बंधन नहीं है। लेकिन मनुष्य ने अपने पैरों में बेड़ियाँ डाल ली हैं, जैसे लोभ, स्वार्थ, ईर्ष्या और सामाजिक बंधन। ये बेड़ियाँ मनुष्य को स्वतंत्रता से वंचित करती हैं और उसे मानसिक रूप से बंधन में रखती हैं।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलाकर संवाद कीजिए—
1. चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता है और किन कार्यों को करने की स्वतंत्रता नहीं है? उत्तर:स्वतंत्रता है: मनुष्य को अपनी पसंद का भोजन खाने, अपनी शिक्षा प्राप्त करने, अपने विचार व्यक्त करने, और अपनी इच्छाओं को पूरा करने की स्वतंत्रता है। वह अपनी जिंदगी के निर्णय स्वयं ले सकता है और अपनी इच्छाओं के अनुसार जीवन जी सकता है। स्वतंत्रता नहीं है: मनुष्य को दूसरों को नुकसान पहुँचाने, किसी के अधिकारों का उल्लंघन करने, समाज की नैतिकता और नियमों को तोड़ने, या पर्यावरण को नष्ट करने की स्वतंत्रता नहीं है। समाज और कानून ने कुछ प्रतिबंध लगाए हैं ताकि समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहे।
2. चिड़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है? उत्तर: चिड़िया का जीवन: चिड़िया स्वतंत्र और संतोषी होती है। वह अपनी जरूरत के हिसाब से भोजन लेती है और कहीं भी अपना घर बना सकती है। वह बिना किसी चिंता के अपने दिन बिताती है और हमेशा आकाश में उड़ती रहती है। वह किसी तरह के बंधन या लोभ से मुक्त होती है। मनुष्य का जीवन: मनुष्य का जीवन जटिल और बंधनों से भरा होता है। वह अपने समाज और परिवार के नियमों का पालन करता है। मनुष्य को भविष्य की चिंता, धन और प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष, और समाज के दबावों का सामना करना पड़ता है। उसका जीवन अधिक संरचित और जिम्मेदारियों से भरा हुआ होता है।
3. चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों? उत्तर: मैं अपना घर समुद्र के किनारे बनाना चाहूँगा, जहाँ शांति और प्राकृतिक सुंदरता हो। वहाँ हवा ताजगी से भरी होती है और मैं वहाँ एक सरल, खुशहाल जीवन जी सकता हूँ। वहाँ मुझे प्राकृतिक सौंदर्य, ताजगी और शांति का अनुभव होगा, जो मुझे मानसिक शांति दे सकेगा।
4. यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते? उत्तर: अगर मैं चिड़िया की भाषा समझ सकता, तो मैं उससे पूछता कि वह आकाश में उड़ते समय किस तरह का अनुभव करती है। मैं यह भी जानना चाहता कि वह स्वतंत्र रूप से उड़ते हुए दुनिया को कैसे देखती है और क्या उसे कभी डर लगता है। मैं उससे यह भी पूछता कि वह दुनिया के बारे में क्या सोचती है और क्यों वह इतनी स्वतंत्र और खुश रहती है।
कविता की रचना
“सब मिल-जुलकर रहते हैं वे सब मिल-जुलकर खाते हैं।” रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए ये शब्द लिखने-बोलने में एक जैसे हैं। इस तरह की शैली प्रायः कविता में आती है। अब आप सब मिल-जुलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए— संकेत— सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे सब मिल-जुलकर गाते हैं…………… ………………………………. ……………………………….. उत्तर: संकेत— सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे सब मिल-जुलकर गाते हैं सब मिल-जुलकर उड़ते हैं वे खुले गगन में नाचते हैं। सब मिल-जुलकर जीते हैं वे प्रेम-प्रीति में बंधते हैं।
भाषा की बात
पीपल की ऊँची डालि पर बैठी चिड़िया गाती है! तुम्हें याद क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है? रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘गाती’ और ‘सुनाती’ रेखांकित शब्दों से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। वे शब्द जिनसे कार्य करने का होने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। कविता में ऐसे क्रिया शब्दों को ढूँढ़कर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए। उत्तर: कविता से लिए गए क्रिया शब्द:
बैठी
गाती
सुनाती
सीखो
रहते
खाते
लेते
उड़ते
करते
क्रिया शब्दों से बने नए वाक्य:
बैठी: रीमा बगीचे में पेड़ के नीचे बैठी है।
गाती: वह रोज़ सुबह मधुर भजन गाती है।
सुनाती: दादी रोज़ रात को हमें कहानी सुनाती हैं।
सीखो: हमें अपने अनुभवों से कुछ नया सीखो।
रहते: हम सब एक ही कॉलोनी में रहते हैं।
खाते: पक्षी दाने चुगते हैं और खुशी से खाते हैं।
लेते: बच्चे दुकान से टॉफी लेते हैं।
उड़ते: पतंगे आकाश में ऊँचाई तक उड़ते हैं।
करते: हम हर काम पूरे मन से करते।
पाठ से आगे
भावों की बात
(क) जब आप नीचे दिए गए दृश्य देखते हैं तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए और बताइए। आप नीचे दिए गए भावों में से शब्द चुन सकते हैं। आप किसी भी दृश्य के लिए एक से अधिक शब्द भी चुन सकते हैं।
उत्तर:
(ख) उपर्युक्त भावों में से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते हैं? भावों के नाम लिखकर उन स्थितियों के लिए एक-एक वाक्य लिखिए। (संकेत— आत्मविश्वास— जब मैं अकेले पड़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ।)
उत्तर:
आत्मविश्वास: जब मैं अकेले मंच पर कविता सुनाता हूँ। वाक्य: मैं मंच पर निडर होकर कविता सुनाता हूँ, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है।
प्रेम: जब मैं अपने छोटे भाई को कहानी सुनाता हूँ। वाक्य: मैं अपने भाई से बहुत प्रेम करता हूँ, इसलिए हर रात उसे कहानी सुनाता हूँ।
आनंद: जब मैं अपने दोस्तों के साथ खेलता हूँ। वाक्य: दोस्तों के साथ खेलने में मुझे बहुत आनंद आता है।
करुणा: जब मैं घायल जानवर को देखकर उसकी मदद करता हूँ। वाक्य: घायल कुत्ते को देखकर मेरे मन में करुणा जागी और मैंने उसे पानी दिया।
गर्व: जब मेरी चित्रकला स्कूल में प्रदर्शित की जाती है। वाक्य: मेरी पेंटिंग स्कूल की दीवार पर लगी देख मुझे बहुत गर्व हुआ।
शांति: जब मैं पेड़ के नीचे बैठकर किताब पढ़ता हूँ। वाक्य: हरियाली में बैठकर पढ़ाई करने से मन को बहुत शांति मिलती है।
उत्साह: जब हमें स्कूल पिकनिक पर ले जाया जाता है। वाक्य: स्कूल पिकनिक की खबर सुनते ही मैं उत्साह से भर गया।
दया: जब मैं किसी गरीब को खाना देता हूँ। वाक्य: भूखे बच्चे को खाना देते समय मेरे मन में दया का भाव आया।
चिंता: जब मेरा दोस्त बीमार होता है। वाक्य: जब राहुल स्कूल नहीं आया, तो मुझे उसकी तबीयत की चिंता हुई।
हँसी: जब कोई मजेदार कहानी सुनाता है। वाक्य: दादी की मजेदार कहानी सुनकर मेरी हँसी नहीं रुकी।
आज की पहेली
कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़े। अब आपके सामने पक्षियों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पक्षियों को पहचानकर सही चित्रों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए-
1. दिखने में हूँ हरा-हरा कहता हूँ सब खरा-खरा खाता हूँ मैं मिर्ची लाल कहते सब मुझे मिडूलाल। उत्तर: तोता
2. सुंदर काले मेरे नैन श्वेत श्याम है मेरे डैन उड़ता रहता हूँ दिन-रैन खेलूँ पानी में तो आए चैन। उत्तर: चकवा
3. संदेश पहुँचाना मेरा काम देता हूँ शांति का पैगाम करता हूँ मैं गूटर-गूँ आओगे पास तो हो जाऊँगा छू। उत्तर: कबूतर
4. पीता हूँ बारिश की बूँदें रखता हूँ फिर आँखें मूँदे देखो चकोर है मेरी साथी बिन उसके घूमें ऊँधें ऊँधें। उत्तर: चातक
5. रहता है घर के आस-पास रंग है उसका काला खास जो भी दोगे खाता है वो झुंड में आ जाता है वो। उत्तर: कौवा
6. कुहू कुहू मधुर आवाज सुनाती घर अपना मैं कहाँ बनाती काली हूँ पर काक नहीं बतलाओ मैं क्या कहलाती। उत्तर: कोयल
7. तन मेरा सफेद गर्दन मेरी लंबी नाम बताओ सच्ची-सच्ची कहलाता हूँ मैं जलपक्षी। उत्तर: हंस
चित्र की बात
इन तीनों चित्रों को ध्यान से देखिए और बताइए– आप पक्षियों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों? उत्तर: मैं पक्षियों को तीसरे चित्र में यानी हरे-भरे पेड़ों पर बने प्राकृतिक घोंसले में देखना पसंद करूंगा/करूंगी। क्योंकि वहाँ वे स्वतंत्र और सुरक्षित रहते हैं। वे अपनी मर्जी से उड़ सकते हैं, चहचहा सकते हैं और अपने घर खुद बना सकते हैं। यह उनका प्राकृतिक वातावरण है, जहाँ वे खुश रहते हैं। पिंजरे में बंद होना या ऊँची इमारतों के बीच रहना उनके लिए उचित नहीं, क्योंकि वहाँ उन्हें आज़ादी और सुकून नहीं मिलता।
निर्भय विचरण
“सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं” कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और इन चित्रों को देखिए। इन चित्रों को देखकर आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं? (संकेत- जैसे इन चित्रों में कौन निर्भय विचरण कर रहा है?) उत्तर: इन चित्रों को देखकर निम्नलिखित विचार मन में आते हैं:
पहला चित्र (सफारी का दृश्य): इस चित्र में एक बस है जिसमें लोग बैठे हुए हैं और बस के चारों ओर जंगल का दृश्य है। बाहर एक शेर और एक भालू निर्भयता से विचरण कर रहे हैं। यहाँ जानवर स्वतंत्रता का आनंद ले रहे हैं, वे खुले में घूम रहे हैं। यह दृश्य जंगल सफारी का प्रतीक है, जहाँ जानवर स्वाभाविक रूप से निर्भय होकर रहते हैं।
दूसरा चित्र (चिड़ियाघर का दृश्य): इसमें जानवर पिंजरों में बंद हैं और लोग उन्हें देखने आ रहे हैं। शेर और बंदर दोनों पिंजरों में कैद हैं, जबकि लोग स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं। यहाँ जानवरों की स्वतंत्रता छिन गई है और वे सीमित दायरे में बंधे हुए हैं।
कविता के संदर्भ में विचार: कविता की पंक्तियाँ “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं” हमें स्वतंत्रता का एहसास कराती हैं। पहले चित्र में शेर और भालू की स्वतंत्रता निर्भय विचरण का प्रतीक है, जबकि दूसरे चित्र में उनकी स्वतंत्रता छीन ली गई है।
साथ-साथ
“वन में जितने पंछी हैं, खंजन, कपोत, चातक, कोकिल; काक, हंस, शुक आदि वास करते सब आपस में हिलमिल!”
1. वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं। आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है? उत्तर: पशु-पक्षी हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं। उदाहरण के लिए, पक्षी कीटों को खाकर फसलों की रक्षा करते हैं, और उनके बीज फैलाने से पेड़-पौधे उगते हैं। पशु जैसे गाय और भैंस हमें दूध और खाद प्रदान करते हैं। इनके बिना पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, और हमारी खाद्य श्रृंखला प्रभावित होगी।
2. हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं? उत्तर: हम अपने परिवेश में रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता निम्नलिखित तरीकों से कर सकते हैं:
पक्षियों के लिए पानी और दाना रख सकते हैं।
पेड़-पौधे लगाकर उनके लिए आवास बना सकते हैं।
कूड़ा-कचरा न फैलाकर उनके पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं।
पशुओं को भोजन और पानी देकर उनकी देखभाल कर सकते हैं।
जंगलों की कटाई रोकने के लिए जागरूकता फैला सकते हैं।
शब्द एक अर्थ अनेक
“उनके मन में लोभ नहीं है”, है”, इस पंक्ति में ‘मन’ का अर्थ ‘चित्त’ (बुद्धि) है, किंतु ‘मन’ शब्द के अन्य अर्थ भी हो सकते हैं। अब नीचे कुछ और पंक्तियों दी गई हैं, उन्हें भी पढ़िए-(क) आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है। (ख) व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा। उपर्युक्त वाक्यों में ‘मन’ शब्द का प्रयोग अलग-अलग अर्थों/संदर्भों में किया गया है। इस प्रकार हम देखते हैं कि एक ही शब्द दूसरे संदर्भ में अलग-अलग अर्थ दे रहा है। आइए, इससे संबंधित एक और रोचक उदाहरण देखते हैं- “मंगल ने मंगल से कहा कि मंगल को मंगल पर मंगल होगा।” (संकेत – इस वाक्य में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से दिन, ग्रह और शुभ कार्य की चर्चा कर रहा है।) आगे कुछ और ऐसे ही शब्द दिए गए हैं। दिए गए शब्दों का अलग-अलग अर्थों या संदर्भों में प्रयोग कीजिए- (क) कर ________________________________________________________ (ख) जल ________________________________________________________ (ग) अर्थ ________________________________________________________ (घ) फल ________________________________________________________ (ङ) आम ________________________________________________________ उत्तर: (क) कर
अर्थ (टैक्स): सरकार को हर साल आयकर देना पड़ता है।
अर्थ (हाथ): उसने अपने कर से सुंदर चित्र बनाया।
(ख) जल
अर्थ (पानी): हमें प्रतिदिन शुद्ध जल पीना चाहिए।
अर्थ (चमक): उसका चेहरा खुशी से जल उठा।
(ग) अर्थ
अर्थ (मतलब): इस कविता का गहरा अर्थ है।
अर्थ (धन): उसने बहुत सारा अर्थ कमाया।
(घ) फल
अर्थ (फल): मुझे आम खाना पसंद है।
अर्थ (परिणाम): मेहनत का फल मीठा होता है।
(ङ) आम
अर्थ (फल): आम फलों का राजा है।
अर्थ (सामान्य): यह एक आम बात है।
रचनात्मकता
(क) खुले आसमान में, पेड़ों की टहनियों, छतों और भवनों आदि पर बैठे या उड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते हैं। अपनी पसंद के ऐसे कुछ दृश्यों का कोलाज बनाकर कक्षा में प्रदर्शित कीजिए। उत्तर:
(ख) ‘स्वतंत्रता और प्रेम’ का संदेश देने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसमें इस कविता की कोई पंक्ति या संदेश भी शामिल कीजिए। उत्तर:
हमारा पर्यावरण
मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यों की एक सूची बनाइए, जिनसे पर्यावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस संकट की स्थिति से बचने के लिए क्या-क्या के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं? लिखिए। आप इस कार्य में शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं। (संकेत- जैसे ऊँचे भवनों का निर्माण…….) उत्तर: पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले कार्य:
जंगलों की कटाई।
प्लास्टिक और कूड़े का अंधाधुंध उपयोग।
प्रदूषण (वायु, जल, ध्वनि)।
अवैध शिकार।
बड़े-बड़े भवनों और सड़कों का निर्माण।
उपाय:
अधिक से अधिक पेड़ लगाना।
प्लास्टिक का उपयोग कम करना और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना।
प्रदूषण कम करने के लिए साफ ऊर्जा (सौर, पवन) का उपयोग करना।
शिकार पर रोक लगाना और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र बनाना।
पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाना।
परियोजना कार्य
(क) पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते हैं। आप अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में देखिए कि किन-किन कार्यों में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कार्यों की सूची बनाइए। अब इनमें प्रयोग किए जा रहे प्लास्टिक के थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए और लिखिए। (संकेत- जैसे- हम प्लास्टिक के थैले की जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग किन-किन कार्यों में कर सकते हैं।) उत्तर: पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक थैलों के प्रयोग और उनके विकल्पों की सूची: प्लास्टिक थैलों के प्रयोग वाले कार्य: हम अपने विद्यालय, आस-पास और घरों में निम्नलिखित कार्यों में प्लास्टिक के थैलों का प्रयोग होते देखते हैं:
सब्ज़ी और फल लाने में
किराने का सामान लाने में
टिफिन या खाना ले जाने में
स्कूल के प्रोजेक्ट मटेरियल रखने में
दूध या ब्रेड जैसी पैक वस्तुएँ लाने में
गीले कपड़े या जूते रखने में
कूड़ा फेंकने के लिए
इन कार्यों में प्लास्टिक के थैलों के विकल्प: निष्कर्ष: अगर हम इन दैनिक कार्यों में प्लास्टिक थैलों की जगह कागज़, कपड़े या जूट के थैले अपनाएं, तो हम पर्यावरण को बहुत हद तक प्रदूषण से बचा सकते हैं। हमें बार-बार इस्तेमाल किए जा सकने वाले थैले रखने की आदत डालनी चाहिए। (ख) सभी विद्यार्थी ‘पर्यावरण बचाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक तैयार करें और उसकी प्रस्तुति विद्यालय प्रांगण में करें। उत्तर: नुक्कड़ नाटक: “पर्यावरण बचाओ” स्थान: विद्यालय प्रांगण समय: 5–7 मिनट पात्र:
सूत्रधार (Narrator)
पेड़ (1 या 2 छात्र)
जानवर (जैसे गाय, पक्षी, कुत्ता आदि)
मनुष्य 1 (प्लास्टिक फेंकने वाला)
मनुष्य 2 (सिगरेट पीने वाला)
मनुष्य 3 (पर्यावरण रक्षक)
बच्चे (जागरूकता फैलाने वाले)
सभी पात्र मिलकर गीत या नारा लगाते हैं
नाटक की शुरुआत सूत्रधार: (लाउड वॉइस में) “हमारे चारों ओर का वातावरण यानी पर्यावरण, हमें जीवन देता है – पेड़, पानी, हवा, जानवर – सब कुछ। पर आज इंसान खुद अपने हाथों से इसे नष्ट कर रहा है। देखिए यह दृश्य…”
दृश्य 1: प्रदूषण का प्रभाव (एक मनुष्य कूड़ा फैला रहा है, पेड़ पर प्लास्टिक लिपटा है, जानवर खाने के लिए कुछ ढूँढ रहा है) जानवर: (दुखी होकर) “मुझे खाने को कुछ नहीं मिलता, सब जगह कूड़ा और प्लास्टिक है।” पेड़: “मेरी साँसे घुट रही हैं। धुएं और प्लास्टिक से मैं बीमार हो गया हूँ।” पक्षी: “मुझे अब उड़ने के लिए साफ आसमान नहीं मिलता।”
दृश्य 2: चेतावनी सूत्रधार: “अगर ऐसे ही चलता रहा, तो एक दिन धरती पर जीवन नहीं बचेगा। अब समय है कुछ करने का!”
दृश्य 3: बदलाव की शुरुआत मनुष्य 3 (पर्यावरण रक्षक): “हमें अब समझदारी दिखानी होगी – पेड़ लगाओ, प्लास्टिक हटाओ, कचरा डस्टबिन में डालो, और जल बचाओ!” बच्चे मिलकर: “हम सब मिलकर करेंगे ये काम, धरती माँ को देंगे आराम। प्लास्टिक नहीं – कपड़े के थैले, पेड़ लगाएँ हर इक गली-मोहल्ले!”
अंत में नारा (सभी मिलकर): “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ!” “प्लास्टिक हटाओ, धरती बचाओ!” “हर बच्चा अब ये माने, धरती को स्वच्छ बनाएँ!” (इच्छानुसार एक छोटा गीत या स्लोगन पर नृत्य भी जोड़ा जा सकता है)
संदेश: “अगर हम आज नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी। पर्यावरण बचाना, हम सबकी जिम्मेदारी है!”
साझी समझ
आप इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियों पर लेख लिखिए। उत्तर: प्रवासी पक्षियों पर लेख प्रवासी पक्षी क्या होते हैं प्रवासी पक्षी वे पक्षी होते हैं जो एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। यह यात्रा वे भोजन की तलाश में, सर्दी से बचने या प्रजनन के लिए करते हैं। हर साल कुछ पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके भारत आते हैं। भारत में आने वाले कुछ प्रमुख प्रवासी पक्षी
साइबेरियन क्रेन: यह पक्षी साइबेरिया से उड़कर राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में सर्दियों में आता है।
ग्रेटर फ्लेमिंगो: यह पक्षी गुजरात के कच्छ के रण में हर साल बड़ी संख्या में आता है।
अमूर फाल्कन: यह पक्षी मणिपुर और ओडिशा से होते हुए चीन तक जाता है और हजारों किलोमीटर की यात्रा करता है।
बार हेडेड गूज: यह पक्षी तिब्बत से उड़कर हिमाचल प्रदेश की पोंग झील में आता है। यह बहुत ऊंचाई पर उड़ने वाला पक्षी है।
ब्लू टेल्ड बी ईटर: यह गर्मियों में भारत आता है और छोटे कीड़ों को खाता है।
भारत में प्रवासी पक्षियों के प्रमुख स्थल
चिल्का झील ओडिशा में स्थित है जहां हजारों प्रवासी पक्षी हर साल आते हैं।
पोंग झील हिमाचल प्रदेश में स्थित है और बार हेडेड गूज का मुख्य ठिकाना है।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में स्थित है जहां साइबेरियन क्रेन हर साल आता है।
प्रवासी पक्षियों की समस्याएं इन पक्षियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जैसे इनके रहने की जगहें नष्ट हो रही हैं। मौसम में बदलाव से इन्हें परेशानी होती है। कुछ जगहों पर इनका शिकार भी किया जाता है।
हम क्या कर सकते हैं हमें इन पक्षियों के रहने के स्थानों को सुरक्षित रखना चाहिए। लोगों को इनके बारे में जानकारी देनी चाहिए। इनका शिकार रोकने के लिए सख्त कानूनों का पालन करना चाहिए।
निष्कर्ष: प्रवासी पक्षी हमारे पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी हैं। हमें मिलकर इनकी रक्षा करनी चाहिए ताकि ये पक्षी हर साल भारत आते रहें और हमारी प्रकृति को सुंदर बनाते रहें।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बारे में और भी जान-समझ सकते हैं-
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
वे गुरु के प्रति शिष्य की निष्ठा को परखना चाहते थे।
वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्वपूर्ण नहीं मानते थे।
वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन व समर्पण को जांचना चाहते थे। (★)
वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
उत्तर: वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन व समर्पण को जांचना चाहते थे। स्पष्टीकरण:बिरजू महाराज ने कहा कि वे कई वर्षों तक नृत्य सिखाने के बाद शिष्य की सच्ची लगन देखकर ही गंडा बाँधते हैं। इससे पता चलता है कि वे शिष्य के समर्पण और लगन को महत्व देते थे, न कि भेंट की सामर्थ्य या परंपरा की औपचारिकता को।
(2) “जीवन में उतार-चढ़ाव तो होते ही हैं।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा। (★)
कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।
किसी विशेष समय में घर में सुख-समृद्धि थी। (★)
नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
उत्तर: पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा। किसी विशेष समय में घर में सुख-समृद्धि थी। स्पष्टीकरण: बिरजू महाराज ने बताया कि उनके पिता के देहांत के बाद आर्थिक तंगी आई, जिससे परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। साथ ही, शुरुआती जीवन में हवेली और सिपाहियों के साथ सुख-समृद्धि भी थी। अन्य विकल्पों का पाठ में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
(3) बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
संगीत, नृत्य, नाटक और अन्य कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।
कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। (★)
कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। (★)
वर्तमान समय में कला एक सफल माध्यम नहीं है।
उत्तर: कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। स्पष्टीकरण: बिरजू महाराज ने कहा कि लय के साथ खेलना बच्चों को अनुशासन और संतुलन सिखाता है, और यह उनके बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कला को एक खेल के रूप में भी देखा, जिसमें सीखने के कई अवसर हैं।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि:
बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा को शिष्य की लगन पर आधारित किया, जो उनकी शिक्षण शैली की गहराई को दर्शाता है।
उनके जीवन में सुख-समृद्धि और आर्थिक तंगी दोनों का उल्लेख है, जो उनके उतार-चढ़ाव को स्पष्ट करता है।
कला को खेल मानकर और इसके बौद्धिक लाभों को देखकर मैंने ये विकल्प चुने।
मिलकर करें मिलान
पाठ से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उनके सही संदर्भ या अवधारणाओं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर:
शीर्षक
इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं, तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों चुना? लिखिए। उत्तर: नया शीर्षक: “कथक के महाराज: बिरजू महाराज की कहानी” कारण: यह शीर्षक बिरजू महाराज की कथक में महारत और उनके जीवन की प्रेरणादायक कहानी को दर्शाता है। यह आकर्षक और प्रासंगिक है, जो पाठकों का ध्यान खींचेगा।
पंक्तियों पर चर्चा
साक्षात्कार में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और इन पर विचार करें। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए।
“तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।”
उत्तर: अर्थ: बिरजू महाराज के चाचा ने उनसे कहा कि नौकरी करने से उनका ध्यान नृत्य से हट जाएगा, और वे कथक में पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाएँगे। विचार: यह वाक्य दर्शाता है कि कला के लिए पूर्ण समर्पण चाहिए। नौकरी जैसे अन्य कार्य कला की साधना में बाधा बन सकते हैं।
“लय हम नर्तकों के लिए देवता है।”
उत्तर: अर्थ: लय को नर्तक के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय माना गया है, जैसे कोई देवता। विचार: यह वाक्य लय की महत्ता को दर्शाता है, जो नृत्य को सुंदर और संतुलित बनाती है। लय के बिना नृत्य अधूरा है।
“नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।”
उत्तर: अर्थ: नृत्य केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है; इसमें मन का ध्यान और तपस्या जैसी मेहनत भी शामिल है। विचार: यह वाक्य नृत्य को एक आध्यात्मिक और समर्पित कला के रूप में प्रस्तुत करता है, जो साधना की तरह है।
“कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।”
उत्तर: अर्थ: कथक में गर्दन की हल्की और कोमल गति को चिराग की लौ की तरह सुंदर और नाजुक बताया गया है। विचार: यह वाक्य कथक की कोमलता और सौंदर्य को दर्शाता है, जो इसे अन्य नृत्यों से अलग बनाता है।
सोच-विचार के लिए
1. साक्षात्कार को एक बार पुन: पढ़ें और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
(क) बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे? उत्तर: बिरजू महाराज ने औपचारिक प्रशिक्षण से पहले घर के कथक माहौल में देख-देखकर कथक सीखा। उनके पिता, चाचा और परिवार में कथक का अभ्यास होता था, जिससे वे छोटी उम्र में ही नवाब के दरबार में नाचने लगे थे।
(ख) नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है? उत्तर: संगीत की समझ नृत्य के लिए जरूरी है क्योंकि नृत्य में लय और ताल का विशेष महत्व है। बिरजू महाराज ने कहा कि लय नृत्य को सुंदरता और संतुलन देती है। अगर नर्तक को सुर-ताल की समझ हो, तो वह गलत लय को पहचान सकता है और नृत्य को बेहतर बना सकता है।
(ग) नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी? उत्तर: बिरजू महाराज को मशीनों और यंत्रों में रुचि थी। वे पेचकस और छोटे औजार रखते थे और पंखा, फ्रिज जैसी मशीनें ठीक करते थे। उन्हें चित्रकला में भी रुचि थी, और उन्होंने लगभग सत्तर चित्र बनाए।
(घ) बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है? उत्तर: बिरजू महाराज ने अभिभावकों से कहा कि अगर बच्चे को संगीत या नृत्य में रुचि है, तो उसे लय के साथ खेलने दें। कला एक खेल की तरह है, जो अनुशासन, संतुलन और बौद्धिक विकास सिखाती है। उन्होंने बच्चों को संगीत सीखने की सलाह दी, क्योंकि यह मन की शांति के लिए जरूरी है।
2. पाठ में से उन प्रसंगों की पहचान करें और उन पर चर्चा करें, जिनसे पता चलता है कि—
(क) बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उत्तर: प्रसंग: उन्होंने कथक में नवाचार किए, जैसे भाव-भंगिमाओं को शामिल करना और आधुनिक कवियों की रचनाओं पर नृत्य रचना। वे तबला, हारमोनियम बजाते थे और गाना भी गाते थे। मशीनों को ठीक करने और चित्रकला में उनकी रुचि थी। चर्चा: ये प्रसंग दर्शाते हैं कि बिरजू महाराज केवल नर्तक नहीं थे, बल्कि संगीत, चित्रकला और तकनीकी कार्यों में भी निपुण थे।
(ख) बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा। उत्तर: प्रसंग: उनकी माँ ने आर्थिक तंगी में भी उन्हें अभ्यास जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पुरानी साड़ियों के सोने-चाँदी के तार बेचकर परिवार का गुजारा किया और बिरजू की तालीम के लिए भेंट दी। चर्चा: माँ की प्रेरणा और त्याग ने बिरजू को कठिन समय में भी कथक की साधना करने की शक्ति दी।
(ग) बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर थे। उत्तर: प्रसंग: उन्होंने अपनी बेटियों को कथक सिखाया, जबकि उनकी बहनों को नहीं सिखाया गया था। वे मानते थे कि लड़कियों को शिक्षा और हुनर सीखना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बनें।
चर्चा: ये प्रसंग दिखाते हैं कि बिरजू महाराज ने लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया और महिलाओं की शिक्षा को महत्व दिया।
शब्दों की बात
(क) पाठ में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें— आपने इन शब्दों पर ध्यान दिया होगा कि मूल शब्द के आगे या पीछे कोई शब्दांश जोड़कर नया शब्द बना है। इससे शब्द के अर्थ में परिवर्तन आ गया है। शब्द के आगे जुड़ने वाले शब्दांश उपसर्ग कहलाते हैं, जैसे— अदृश्य → अ + दृश्य आवरण → आ + वरण प्रशिक्षण → प्र + प्रशिक्षण यहाँ पर ‘अ’, ‘आ’ और ‘प्र’ उपसर्ग हैं। शब्द के पीछे जुड़ने वाले शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं और मूल शब्द के अर्थ में नवीनता, परिवर्तन या विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जैसे— सीमित → सीमा + इत सुंदरता → सुंदर + ता भारतीय → भारत + ईय सामूहिक → समूह + इक यहाँ पर ‘इत’, ‘ता’, ‘ईय’ और ‘इक’ प्रत्यय हैं। उत्तर: पाठ में दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय का उपयोग हुआ है:
आजीविका: आ + जीविका (उपसर्ग: आ)
प्रशिक्षण: प्र + शिक्षण (उपसर्ग: प्र)
आधुनिक: आ + धुनिक (उपसर्ग: आ)
पारंपरिक: परंपरा + इक (प्रत्यय: इक)
शास्त्रीय: शास्त्र + ईय (प्रत्यय: ईय)
(ख) नीचे दो तबले दी गई हैं—एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, और दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता से नए शब्द बनाइए। उत्तर:
(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए। उत्तर:
अद्भुत (उपसर्ग अद् + भुत)। वाक्य: बिरजू महाराज का नृत्य अद्भुत होता था।
कलाकार (मूल शब्द कला + प्रत्यय कार)। वाक्य: वे एक महान कलाकार के रूप में प्रसिद्ध हुए।
नृत्यांगना (मूल शब्द नृत्य + प्रत्यय अंगा)। वाक्य: उन्होंने कई नृत्यांगनाओं को प्रशिक्षित किया।
मंचन (मूल शब्द मंच + प्रत्यय न)। वाक्य: उनका कथक नृत्य मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता था।
प्रेरणा (मूल शब्द प्रेरण + प्रत्यय आ)। वाक्य: उन्हें अपनी माँ से प्रेरणा मिली।
अभिनय (उपसर्ग अभि + नय)। वाक्य: उनके नृत्य में अभिनय की अद्भुत झलक होती थी।
सांस्कृतिक (मूल शब्द संस्कृति + प्रत्यय क)। वाक्य: बिरजू महाराज ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को विश्वभर में पहुँचाया।
शब्दों का प्रभाव
पाठ में आए नीचे दिए गए वाक्य पढ़ें— 1. “कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाकर वाक्य पिढ़ए और पहचािनए कि क्या परिवर्तन आया है? उत्तर: इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाने पर वाक्य का प्रभाव बदल जाता है। ‘इतना’ शब्द कला की विशिष्टता और प्रभाव को अधिक गहराई से व्यक्त करता है। इसे हटाने से वाक्य का प्रभाव हल्का हो जाता है और कथिकों की कला की महत्ता कम प्रतीत होती है।
पाठ में आए अन्य वाक्यों में ऐसे शब्द खोजें और उन्हें रेखांकित करें, जिनके प्रयोग से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है। अन्य वाक्य और शब्द:
वाक्य: “लय एक तरह का आवरण है, जो नृत्य को सुंदरता प्रदान करती है।”
शब्द: ‘आवरण’ – यह शब्द लय को एक विशेष गुण के रूप में दर्शाता है।
वाक्य: “नृत्य करना एक तरह से अदृश्य शक्ति को निमंत्रण देना है।”
शब्द: ‘अदृश्य’ – यह नृत्य को आध्यात्मिक बनाता है।
पाठ से आगे
कला का संसार
(क) बिरजू महाराज— “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतीकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखें कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं? उत्तर: कथक की प्रस्तुतियों में आए परिवर्तन इस प्रकार हैं:
मंचीय रूप में विकास: पहले कथक दरबारों और मंदिरों में प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन अब यह मंच पर नाट्य रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है।
कथावाचन का समावेश: बिरजू महाराज ने कथक में भाव और अभिनय के साथ कथावाचन जोड़ा, जिससे नृत्य की प्रस्तुति और अधिक प्रभावशाली और संवादपूर्ण बन गई।
नई विषयवस्तु का चयन: परंपरागत धार्मिक कथाओं के साथ-साथ सामाजिक, ऐतिहासिक और समकालीन विषयों को भी कथक में शामिल किया गया।
लाइटिंग और संगीत में प्रयोग: मंच पर रौशनी, बैकग्राउंड संगीत और तकनीकी प्रभावों का उपयोग कर कथक को और आकर्षक बनाया गया।
दर्शकों से संवाद: बिरजू महाराज ने कथक को केवल देखने की कला न बनाकर, दर्शकों से जुड़ने की कला बना दिया वे दर्शकों को समझाते, मुस्कुराते और भावों से जोड़ते थे।
(ख) लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए। (इस प्रश्न के उत्तर के लिए आप अपने सहपाठियों, अभिभावकों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।) उत्तर:
(ग) “बैरगिया नाला जुलुम जोर, नौ कथिक नचावें तीन चोर। जब तबला बोले धीन–धीन, तब एक-एक पर तीन-तीन।” इस पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले उपर्युक्त पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: लोकगीत: सावन की आई बहार रे, बदरिया बरसे झमाझम रे। मोर नाचे, कोयल गाए, हरियाली छाए चारों धाए रे।
साक्षात्कार की रचना
प्रस्तुत ‘साक्षात्कार’ के आधार पर बताइए—
(क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी? उत्तर: साक्षात्कार से पहले निम्नलिखित तैयारियां की गई होंगी:
बिरजू महाराज के जीवन, कथक करियर, और उपलब्धियों पर शोध किया गया होगा।
उनके कथक घराने और योगदान के बारे में जानकारी एकत्र की गई होगी।
बच्चों के लिए सरल और प्रासंगिक प्रश्न तैयार किए गए होंगे।
साक्षात्कार का समय और स्थान निश्चित किया गया होगा।
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे? उत्तर: इस साक्षात्कार में निम्लिखित प्रश्न जोड़ना चाहेंगे:
कथक सीखने की शुरुआत करने वाले बच्चों को आप क्या सलाह देंगे?
विदेशों में कथक की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए आपने क्या प्रयास किए?
कथक के भविष्य को आप कैसे देखते हैं?
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे? उत्तर: यदि मुझे सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, या घरेलू सहायक का साक्षात्कार लेना हो, तो प्रश्न इस प्रकार होंगे:
आपने यह काम क्यों और कब शुरू किया?
आपके काम में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
दिनभर के काम के बाद आप अपने परिवार के साथ समय कैसे बिताते हैं?
आपके सपने और भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
सृजन
आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन होने जा रहा है।
(क) आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए। उत्तर: कथक भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है जिसकी उत्पत्ति उत्तर भारत में हुई। यह नृत्यकला “कथक” शब्द से बनी है, जिसका अर्थ है – “कहानी कहने वाला”। कथक की विशेषता इसकी सुंदर मुद्राएँ, भावपूर्ण अभिनय (अभिनय), घुंघरूओं की लयबद्ध झंकार, तथा ताल की सटीकता में निहित होती है। इसमें कलाकार तालबद्ध घूमनों, तेज़ पैर की थापों और आँखों के भावों से कथा को प्रस्तुत करता है। प्रसिद्ध कथक नर्तक बिरजू महाराज जी ने इस नृत्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। यह नृत्य सिर्फ कला नहीं, भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है। इस नृत्य के माध्यम से रामायण, महाभारत जैसी कथाएँ भी प्रस्तुत की जाती हैं।
(ख) इस कार्यक्रम की सूचना देने के लिए एक विज्ञापन तैयार करें। उत्तर: सूचना/विज्ञापन विद्यालय में कथक नृत्य कार्यक्रम सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय में एक विशेष कथक नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएँ अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। तिथि: 15 मई 2025 समय: प्रातः 10:30 बजे स्थान: विद्यालय सभागार विशेष आकर्षण: बिरजू महाराज शैली में कथक प्रस्तुति सभी से अनुरोध है कि समय पर उपस्थित होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करें। — प्रधानाचार्य, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
(ग) यदि इस नृत्य कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है और वह नृत्य का आनंद लेना चाहे तो इसके लिए विद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था की जानी चाहिए? उत्तर: यदि कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है, तो विद्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह भी नृत्य का आनंद ले सके। इसके लिए एक प्रशिक्षित स्वयंसेवक या टिप्पणीकार को नियुक्त किया जाना चाहिए जो उन्हें कार्यक्रम के दौरान मुँहज़ुबानी रूप में नृत्य की प्रत्येक गतिविधि, भाव-भंगिमा, वेशभूषा, मंच सजावट और कथा की जानकारी दे। यह विवरण धीमी आवाज़ में या हेडफोन के माध्यम से दिया जा सकता है ताकि अन्य दर्शकों को असुविधा न हो। इसके साथ-साथ कथक के संगीत, ताल और घुंघरुओं की आवाज़ से वह दर्शक नृत्य के भावों को अनुभव कर सकता है। इस प्रकार की व्यवस्था उन्हें भी सम्मानपूर्वक सांस्कृतिक अनुभव का अवसर प्रदान करेगी और समावेशी वातावरण को बढ़ावा देगी।
आज की पहेली
“अगर नर्तक को सुर-ताल की समझ है तो वह जान पाएगा कि यह लहरा ठीक नहीं है, इसके माध्यम से नृत्य अंगों में प्रवेश नहीं करेगा।” संगीत में लय को प्रदर्शित करने के लिए ताल का सहारा लिया जाता है। किसी भी गीत की पंक्तियों में लगने वाले समय को मात्राओं द्वारा ठीक उसी प्रकार मापा जाता है, जैसे दैनिक जीवन में समय को सेकंड के द्वारा मापा जाता है। ताल कई मात्रा समूहों का संयुक्त रूप होता है। संगीत के समय को मापने की सबसे छोटी इकाई ‘मात्रा’ होती है और ताल कई मात्राओं का संयुक्त रूप होता है। जिस तरह घंटे में मिनट और मिनट में सेकंड होते हैं, उसी तरह ताल में मात्रा होती है। आज हम आपके लिए ताल से जुड़ी एक अनोखी पहेली लाए हैं। एक विद्यार्थी ने अपनी डायरी में अपने विद्यालय के किसी एक दिन का उल्लेख किया है। उस उल्लेख में संगीत की कुछ तालों के नाम आए हैं। आप उन तालों के नाम ढूँढिए—
अब नीचे दी गई शब्द पहेली में से संगीत की उन तालों के नाम ढूँढकर लिखें।
उत्तर: शब्द पहेली और डायरी के उल्लेख से तालों के नाम:
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?
दुख और निराशा
आनंद और प्रसन्नता (*)
भय और चिंता
क्रोध और विरोध
उत्तर: आनंद और प्रसन्नता विश्लेषण: कविता में वर्षा को खुशी, उत्साह और प्रकृति की सुंदरता के साथ दर्शाया गया है। मोर नृत्य करते हैं, मेंढक गीत गाते हैं, और किसान प्रसन्न होकर गीत गाते हैं। यह सब आनंद और प्रसन्नता का भाव दिखाता है।
(2) “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
बादलों के घिरने का दृश्य (*)
बिजली के गिरने का दृश्य
ठंडी हवा के बहने का दृश्य
आमोद छा जाने का दृश्य
उत्तर: बादलों के घिरने का दृश्य विश्लेषण: इन पंक्तियों में आकाश में बादलों की अनूठी छटा और घने बादलों का छा जाना दर्शाया गया है, जो वर्षा से पहले बादलों के घिरने का दृश्य है।
(3) कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्योंकि—
कवि वर्षा को विशेष ऋतु मानता है।
वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं। (*)
वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है। (*)
वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है। (*)
उत्तर: वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं। वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है। वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है। विश्लेषण: कवि वर्षा को विशेष मानता है क्योंकि जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं, सुख लाती है, और यह एक अनोखी प्राकृतिक घटना है।
(4) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।
हमें वर्षा ऋतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।
उत्तर: वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है। विश्लेषण: यह पंक्ति बताती है कि वर्षा के बिना हरियाली, फसलें, और जीवन संभव नहीं है। यह पृथ्वी के जीवन और सुंदरता का आधार है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें? उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकिः
मैंने “आनंद और प्रसन्नता” को वर्षा ऋतु का मुख्य भाव इसलिए चुना, क्योंकि पूरी कविता में चारों ओर खुशियाँ, नृत्य, गीत, हरियाली और प्रसन्नता का वर्णन किया गया है। कहीं भी दुख या डर जैसा भाव नहीं है।
“बादलों के घिरने का दृश्य” मैंने इसलिए चुना क्योंकि “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियाँ साफ़ तौर पर आकाश में काले बादलों के जमने को दर्शाती हैं।
वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।, “वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है” और “वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है”, ये दोनों उत्तर मुझे सही लगे, क्योंकि कविता में दिखाया गया है कि वर्षा से सभी जीव-जंतु और मानव आनंदित होते हैं और यह दृश्य बहुत ही विशेष व सुंदर होता है।
“वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है”- यह उत्तर मैंने इसलिए चुना, क्योंकि कविता के अंत में कहा गया है कि “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर”, जो यह स्पष्ट करता है कि वर्षा से ही धरती हरी-भरी और सुंदर बनती है।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें और विचार करें। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “फिरते लाखों पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।” उत्तर: अर्थः गर्मी की ऋतु में जो पपीहे तपन से व्याकुल थे, वे अब वर्षा के आगमन से राहत महसूस कर रहे हैं और उड़ते-फिरते दिखाई देते हैं। वहीं, मोर वर्षा के स्वागत में वन में नृत्य कर रहे हैं। मेरे विचारः वर्षा ऋतु का आगमन केवल मौसम का बदलाव नहीं लाता, बल्कि यह जीव-जंतुओं के जीवन में भी खुशियाँ और उत्साह भर देता है। यह पंक्ति हमें यह समझाती है कि प्रकृति के प्राणी भी ऋतुओं के परिवर्तन से प्रभावित होते हैं और अपनी खुशी का सुंदर ढंग से प्रदर्शन करते हैं।
(ख) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर, गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” उत्तर: अर्थः हंस एक सीधी और अनुशासित कतार में चलते हैं, जो देखने में बहुत सुंदर लगता है। किसान भी वर्षा के समय प्रसन्न होकर मन लगाकर गीत गाते हुए खेतों में काम करते हैं। मेरे विचारः इस पंक्ति में प्राकृतिक सौंदर्य और मानव जीवन में वर्षा के सकारात्मक प्रभाव का चित्रण है। जैसे हंसों की कतार सुंदरता और अनुशासन का प्रतीक है, वैसे ही किसान भी वर्षा से प्रसन्न होकर अपने कार्य में आनंद पाते हैं। यह दिखाता है कि वर्षा केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि मानव समाज में भी उल्लास का कारण बनती है।
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान करें— उत्तर:
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए— (क) कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों? उत्तर: कविता में मालिनें (बाग की देखभाल करने वाली स्त्रियाँ) और किसान गीत गा रहे हैं।
मालिनें बागों में सुंदर गीत गा रही हैं क्योंकि वर्षा से बागों में हरियाली और सुंदरता लौट आई है।
किसान खेतों में काम करते हुए मनमोहक गीत गा रहे हैं क्योंकि वर्षा ने उनकी फसलों की उम्मीदें जगा दी हैं और वे प्रसन्न हैं।
(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” “तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” दी गई दोनों पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इनमें वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए। उत्तर: अंतर:
पहली पंक्ति में वर्षा से पहले का दृश्य है, जहाँ बिजली चमकती और बादल गरजते हैं। यह प्रकृति की शक्ति और उथल-पुथल को दर्शाता है।
दूसरी पंक्ति में वर्षा के बाद का दृश्य है, जहाँ तालाबों में पानी भरने से जलचर जीव प्रसन्न होते हैं। यह शांति और खुशी का दृश्य है।
संबंध:
दोनों पंक्तियाँ वर्षा के अलग-अलग पहलुओं को दिखाती हैं। बिजली और बादलों की गर्जना वर्षा की शुरुआत है, जो तालाबों में पानी लाती है। यह पानी जलचर जीवों की प्रसन्नता का कारण बनता है।
दोनों दृश्य वर्षा के चक्र का हिस्सा हैं: पहले बादल और बिजली, फिर पानी और जीवन का उत्सव।
(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: कविता “वर्षा-बहार” में मुख्य रूप से वर्षा ऋतु की सुंदरता और इसके महत्व को दर्शाया गया है। यह बताती है कि वर्षा प्रकृति को ताजगी, हरियाली, और खुशी देती है। सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे, और मनुष्य वर्षा से आनंदित होते हैं। कविता यह भी कहती है कि वर्षा पृथ्वी की शोभा और जीवन का आधार है।
(घ) “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिलते हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है? उत्तर: इस पंक्ति का उद्देश्य सिर्फ गुलाब की सुंदरता नहीं, बल्कि वर्षा ऋतु में प्रकृति की ताजगी, सुगंध और सजीवता को दर्शाना है। यह पंक्ति वर्षा से आए परिवर्तन और वातावरण में फैली प्रसन्नता और जीवन के उत्सव का प्रतीक भी है।
(ङ) कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे— ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है। उत्तर: सकारात्मक गतिविधियों वाली पंक्तियाँ:
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” (गीत गाना)
“करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” (नृत्य करना)
“मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” (गीत गाना)
“खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” (सुगंध फैलाना)
“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर” (गीत गाना)
शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों?:
“वर्षा-बहार” शीर्षक वर्षा के साथ आने वाली खुशी और उत्सव को दर्शाता है। ये सकारात्मक गतिविधियाँ जैसे गीत गाना, नृत्य करना, और सुगंध फैलाना दिखाती हैं कि वर्षा प्रकृति और मनुष्यों में नई ऊर्जा और आनंद भर देती है।
“बहार” शब्द वसंत या खुशी का प्रतीक है, और वर्षा इस खुशी को लाती है, जिससे यह शीर्षक उपयुक्त है।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है? उत्तर: मानव जीवन पर प्रभाव:
कृषि पर असर: बिना वर्षा के फसलें नहीं उगेंगी, जिससे भोजन की कमी हो सकती है।
पानी की कमी: नदियाँ, तालाब, और कुएँ सूख जाएँगे, जिससे पीने और सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा।
आर्थिक नुकसान: किसानों की आय कम होगी, और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी।
पशु-पक्षियों पर प्रभाव:
खाद्य और पानी की कमी: जंगल सूख जाएँगे, जिससे पशु-पक्षियों को भोजन और पानी नहीं मिलेगा।
प्रजनन पर असर: पानी की कमी से कई प्रजातियों का जीवन चक्र प्रभावित होगा।
आवास का नुकसान: सूखे के कारण जंगल और तालाब सूख जाएँगे, जिससे पशु-पक्षियों के रहने की जगह कम होगी।
(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत – आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।) उत्तर: सकारात्मक प्रभाव:
वर्षा की शुरुआत: बिजली और बादल वर्षा का संकेत देते हैं, जो फसलों और पानी की उपलब्धता के लिए अच्छा है।
प्रकृति की सुंदरता: बिजली की चमक और बादलों की गर्जना प्रकृति की शक्ति और सुंदरता को दर्शाती हैं, जो लोगों को आनंद देती हैं।
नकारात्मक प्रभाव:
भय और खतरा: बिजली गिरने से लोगों, पशुओं, और संपत्ति को नुकसान हो सकता है।
बाढ़ का खतरा: तेज गर्जना के साथ भारी वर्षा से बाढ़ आ सकती है, जो फसलों और घरों को नष्ट कर सकती है।
यातायात में रुकावट: बिजली और गर्जना के साथ तेज वर्षा सड़कों को बंद कर सकती है।
(ग) “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे? उत्तर: वर्षा आने पर पक्षी और जीव अपनी खुशी को विभिन्न तरीकों से व्यक्त करते हैं। जैसे:
मोर: वर्षा शुरू होते ही मोर अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाकर नृत्य करते हैं, जैसे वे प्रकृति के साथ उत्सव मना रहे हों।
पपीहे: वे मधुर स्वर में गीत गाते हैं, जो उनकी खुशी और गर्मी से राहत को दर्शाता है।
मेंढक: तालाबों में पानी भरने पर मेंढक टर्र-टर्र की आवाज करते हैं, जो उनके लिए गीत की तरह है।
हंस: वे सुंदर कतारों में तैरते या उड़ते हैं, जो उनकी प्रसन्नता और अनुशासन को दिखाता है।
अन्य पक्षी: कोयल, तोते, और अन्य पक्षी चहचहाकर अपनी खुशी व्यक्त करते हैं।
आपकी रचनाएँ
(क) कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए। उत्तर: जब वर्षा की पहली बूँदें धरती पर गिरती हैं, तो जंगल में एक उत्सव सा शुरू हो जाता है। मोर अपने सुंदर नीले-हरे पंख फैलाकर धीरे-धीरे नाचने लगते हैं। उनकी हरकतें ऐसी हैं जैसे वे बादलों का स्वागत कर रहे हों। पास के तालाब में मेंढक टर्र-टर्र की मधुर आवाज में गीत गा रहे हैं। पानी की बूँदों के साथ तालाब में छोटी-छोटी लहरें बन रही हैं, और मेंढक उछल-उछलकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। पेड़ों की पत्तियाँ हवा में हिल रही हैं, और चारों तरफ ठंडक और ताजगी फैल रही है। यह दृश्य ऐसा है जैसे प्रकृति एक रंगीन मंच पर नृत्य और संगीत का प्रदर्शन कर रही हो।
(ख) वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए। उत्तर: कहानी: इंद्रदेव और जंगल की खुशी एक बार एक छोटे से गाँव के पास एक घना जंगल था। उस जंगल में मोर, मेंढक, हंस, और कई पेड़-पौधे थे। लेकिन उस साल गर्मी बहुत तेज थी, और जंगल सूख रहा था। मोर के पंख मुरझा गए, मेंढकों के तालाब सूख गए, और किसानों के खेत बंजर हो गए। सभी ने इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना की। एक रात, जंगल के सबसे बूढ़े बरगद के पेड़ ने सभी जीवों को बुलाया और कहा, “हमें इंद्रदेव को अपनी खुशी दिखानी होगी।” मोर ने कहा, “मैं नाचूँगा!” मेंढकों ने कहा, “हम गीत गाएँगे!” और हंसों ने कहा, “हम सुंदर कतार में उड़ेंगे!” अगले दिन, जैसे ही सूरज उगा, मोर ने अपने पंख फैलाए और नाचने लगा। मेंढक तालाब के किनारे गाने लगे, और हंस कतार बनाकर आकाश में उड़ने लगे। उनकी खुशी देखकर इंद्रदेव प्रसन्न हो गए। उन्होंने घने बादल भेजे, बिजली चमकी, और मूसलाधार वर्षा शुरू हो गई। जंगल फिर से हरा-भरा हो गया। गुलाब खिलने लगे, और उनकी सुगंध चारों तरफ फैल गई। किसान खेतों में गीत गाने लगे। यह सब देखकर बरगद का पेड़ मुस्कुराया और बोला, “वर्षा-बहार हमारी एकता और खुशी की देन है।” कविता से संबंध: यह कहानी कविता की पंक्तियों जैसे “करते हैं नृत्य वन में”, “मेंढक लुभा रहे हैं”, और “गाते हैं गीत कैसे” से प्रेरित है, जो वर्षा की खुशी को दर्शाती हैं।
(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों? उत्तर: मैंने चित्र में घने बादल, बिजली चमकती हुई, बरसती हुई बारिश, हरे-भरे पेड़ और खेत बनाए हैं। बीच में रंग-बिरंगे मोर नृत्य करते हुए दिखाए हैं। तालाब के किनारे मेंढक ‘टर्र-टर्र’ करते हुए गा रहे हैं। साथ ही कुछ किसान खेत में काम करते हुए गीत गा रहे हैं। इस चित्र में मैंने वर्षा ऋतु की खुशियों, प्रकृति की ताजगी और सभी जीव-जंतुओं की प्रसन्नता को दर्शाने की कोशिश की है, जैसा कि कविता में वर्णित है।
शब्द से जुड़े शब्द
अपने समूह में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए—
उत्तर:
कविता की रचना
“वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘वर्षा’ एक ऋतु का नाम है। ‘बहार’ ‘वसंत’ का दूसरा नाम है। यहाँ ‘वर्षा’ और ‘बहार’ को एक साथ दिया गया है जिससे वर्षा ऋतु की सुंदरता को स्पष्ट किया जा सके। इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे— कविता की कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य के रूप में हैं, तो कुछ में वाक्य संरचना सरल नहीं है। अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर: कविता “वर्षा-बहार” की विशेषताएँ:
वर्षा और बहार का मिलन: कविता में “वर्षा” और “बहार” दो शब्दों को एक साथ जोड़ा गया है। “वर्षा” का मतलब है बारिश, और “बहार” का मतलब है वसंत या सुंदरता का समय। यह शब्द हमें वर्षा के दौरान प्रकृति की सुंदरता और ताजगी का अहसास कराते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण: कविता में वर्षा से जुड़ी खूबसूरत प्राकृतिक घटनाओं का वर्णन है। जैसे, “बिजली चमक रही है”, “झरने बह रहे हैं”, और “पानी बरस रहा है”। ये पंक्तियाँ हमें वर्षा के समय के दृश्य को महसूस कराती हैं।
जीवों की खुशी: कविता में यह भी दिखाया गया है कि वर्षा के समय जीव-जंतु जैसे मोर, मेंढक, और पपीहे खुशी से नाचते और गाते हैं। ये सभी प्रकृति की खुशी को व्यक्त करते हैं।
सकारात्मकता और ऊर्जा: कविता में कई बार सकारात्मक शब्दों का उपयोग हुआ है, जैसे “सौरभ उड़ा रहा है”, “नृत्य करना”, और “गीत गाना”। यह कविता जीवन में खुशियाँ और ऊर्जा फैलाने का काम करती है।
गहरे अर्थ वाले शब्द: कविता में कुछ शब्द और वाक्य ऐसे हैं जो गहरे अर्थ रखते हैं। जैसे “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” का मतलब है कि पूरी दुनिया की सुंदरता बारिश पर निर्भर करती है।
सहज और सरल भाषा: कविता की भाषा बहुत सरल है, जैसे “पानी बरस रहा है”। लेकिन कुछ जगहों पर भाषा थोड़ी गहरी और भावनात्मक भी होती है, जैसे “वर्षा एक अद्भुत प्राकृतिक घटना है”।
प्राकृतिक घटनाओं का चित्रण: कविता में वर्षा के दौरान जो भी प्राकृतिक घटनाएँ होती हैं, जैसे बादल गरजना या झरने बहना, उनका सुंदर चित्रण किया गया है।
भावनाएँ और आनंद: कविता सिर्फ दृश्य नहीं दिखाती, बल्कि इसमें खुशी, उल्लास और आनंद जैसी भावनाएँ भी हैं। जैसे मोर का नृत्य और मेंढक का गाना।
रूपक और अलंकार का प्रयोग: कविता में रूपक (जैसे, “वर्षा-बहार”) और अलंकार का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कविता और भी सुंदर और आकर्षक बनती है।
कविता का सौंदर्य
(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए। जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं, उन पर घेरा बनाइए।
उत्तर:
(ख) अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों? उत्तर: ऊपर दिए गए शब्द (बरखा, गगन, मेघ, जल) सबसे अधिक जँचते हैं क्योंकि:
ये शब्द काव्यात्मक और सरल हैं, जो कविता की लय और भाव के साथ मेल खाते हैं।
ये शब्द बच्चों के लिए परिचित हैं और कविता को और सुंदर बनाते हैं।
अन्य शब्द जैसे “वृष्टि” या “व्योम” थोड़े जटिल हैं, जो कविता की सरलता को कम कर सकते हैं।
विशेषण
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” इस पंक्ति में ‘सुंदर’ शब्द ‘गीत’ की विशेषता बता रहा है, अर्थात यह ‘विशेषण’ है। ‘गीत’ एक संज्ञा शब्द है जिसकी विशेषता बताई जा रही है, अर्थात यह ‘विशेष्य’ शब्द है।
(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए—
उत्तर:
(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए— उत्तर:
ऋतु और शब्द
“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते” ‘ताप’ शब्द ग्रीष्म ऋतु से जुड़ा शब्द है। भारत में मुख्य रूप से छह ऋतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। लोग इन ऋतुओं में कुछ विशेष शब्दों का उपयोग करते हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर कौन-सी ऋतु का स्मरण होता है? इन शब्दों को तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए—
उत्तर:
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं? उत्तर: वर्षा के समय हमारे क्षेत्र में बहुत से परिवर्तन आते हैं। जैसे:
हरियाली: पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं, और खेतों में फसलें लहलहाने लगती हैं।
ठंडक: गर्मी कम हो जाती है, और मौसम सुहाना हो जाता है।
पानी: नदियाँ और तालाब भर जाते हैं, और पानी की कमी दूर होती है।
जीव-जंतु: मेंढक, मोर, और पक्षी सक्रिय हो जाते हैं।
(ख) बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए। उत्तर:
अनुभव: बारिश में स्कूल जाना मजेदार लेकिन मुश्किल होता है। छाता लेकर चलना पड़ता है, और सड़कों पर कीचड़ हो जाता है। बैग को गीला होने से बचाना मुश्किल होता है।
रोचक घटना: एक बार बारिश में स्कूल जाते समय मेरा छाता उलट गया, और मैं पूरी तरह भीग गया। मेरे दोस्त हँसने लगे, और हम सब मिलकर बारिश में नाचने लगे। यह बहुत मजेदार था!
(ग) वर्षा ऋतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं? उत्तर: पसंद:
बारिश में भीगना और कागज की नाव बनाकर पानी में तैराना।
गरम चाय और पकौड़े खाना।
खिड़की से बारिश का दृश्य देखना।
नहीं कर पाते:
बाहर खेलना, क्योंकि मैदान गीला और फिसलन भरा होता है।
साइकिल चलाना, क्योंकि सड़कें गीली होती हैं।
कपड़े जल्दी सुखाना, क्योंकि धूप नहीं होती।
(घ) बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं? उत्तर: सुरक्षा:
पक्षी पेड़ों की घनी पत्तियों या छतों के नीचे छिपते हैं।
कुत्ते और बिल्लियाँ सूखी जगह जैसे घर के बरामदे में शरण लेते हैं।
चींटियाँ अपने बिलों को मजबूत करती हैं।
समस्याएँ:
भोजन की कमी, क्योंकि कीड़े और बीज पानी में बह जाते हैं।
ठंड लगना, खासकर छोटे पक्षियों और पशुओं को।
रहने की जगह का गीला होना, जिससे उनके बिल या घोंसले खराब हो जाते हैं।
(ङ) अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ऋतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए। उत्तर: कविता: बारिश की बहार आए बादल काले-काले, लाए ठंडक प्यारी-प्यारी। खेतों में लहराए फसलें, गाए कोयल गीत सुहानी।
रिमझिम बूँदें गिरतीं नाचें, बच्चे कागज की नाव चलाएँ। गली में मेंढक टर्र-टर्र गाएँ, मम्मी पकौड़े गरम बनाएँ।
पेड़-पौधे हरे-हरे लहरे, गुलाब की खुशबू मन भाए। हम सब मिलकर गीत गाएँ, बारिश की बहार मनाएँ।
साक्षात्कार
“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” मान लीजिए कि आप अपने विद्यालय की पत्रिका के पत्रकार हैं। आप एक किसान का साक्षात्कार कर रहे हैं जो वर्षा के आने पर अपने खेतों में गीत गा रहा है।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर उस किसान के साक्षात्कार के लिए कुछ प्रश्न लिखिए। उत्तर: किसान के साक्षात्कार के लिए प्रश्न:
आपका नाम क्या है, और आप कितने समय से खेती कर रहे हैं?
वर्षा के आने पर आपको कैसा लगता है?
आप खेतों में काम करते समय गीत क्यों गाते हैं?
इस बार की वर्षा से आपकी फसलों को क्या लाभ हुआ?
क्या बारिश कभी आपके लिए मुश्किलें भी लाती है?
(ख) अपने समूह के साथ मिलकर इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए। आपके समूह का कोई सदस्य किसान की भूमिका निभा सकता है। अन्य सदस्य पत्रकारों की भूमिका निभा सकते हैं। उत्तर: साक्षात्कार का अभिनय प्रस्तुति के लिए सुझावः
समूह के एक सदस्य किसान की भूमिका निभाएगा, जो अपने खेतों में काम करते हुए गीत गा रहा होगा।
अन्य सदस्य पत्रकारों की भूमिका निभाएंगे, जो किसान से ऊपर दिए गए प्रश्न पूछेंगे।
अभिनय में किसान अपने अनुभव और भावनाएँ खुले दिल से बताएगा।
पत्रकार ध्यान से सुनेंगे और उत्सुकता से प्रश्न पूछेंगे।
यह अभिनय कक्षा में जीवन्तता और व्यावहारिकता लाने के लिए किया जा सकता है।
वर्षा के दृश्य
(क) वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे आकाश में इंद्रधनुष। उत्तर: वर्षा के उन दृश्यों की सूची जिनका उल्लेख कविता में नहीं है:
आकाश में इंद्रधनुष का सुंदर रंगीन चक्र।
बारिश के बाद धरती पर गीली मिट्टी की खुशबू।
बारिश में बच्चों का नाच-गाना और खेलना।
पानी में कूदते हुए मछलियाँ।
खेतों में पानी जमा होना और छोटे-छोटे तालाब बनना।
बारिश के कारण बनने वाले छोटे-छोटे नदी-नाले।
छतों और पेड़ों से टपकती बूंदें।
बारिश के बाद बादलों के हटने पर साफ नीला आसमान।
(ख) वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए। उत्तर: आकाश में पहले बिजली चमकती है और बाद में उसकी आवाज़ यानी बिजली कड़कने की ध्वनि सुनाई देती है। इसका कारण यह है कि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत तेज होती है, इसलिए हम पहले चमक देखते हैं और बाद में आवाज़ सुनते हैं। कभी-कभी दोनों साथ-साथ भी लग सकते हैं, जब बिजली बहुत पास से गिरती है।
(ग) आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए? उत्तर: वर्षा से पहले और वर्षा के बाद पेड़ या पौधे में अंतरः वर्षा से पहले:
पत्तियाँ सूखी और धूल भरी होती हैं।
पौधे मुरझाए हुए लगते हैं।
मिट्टी सूखी और सख्त होती है।
वर्षा के बाद:
पत्तियाँ चमकदार और साफ हो जाती हैं।
पौधे ताजे और हरे दिखते हैं।
मिट्टी गीली और नरम हो जाती है, और नए अंकुर निकलते हैं।
(घ) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” कविता में हंसों के कतार में अर्थात पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत — चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि) उत्तर: “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” – पंक्तिबद्ध रूप में चलने वाले अन्य दृश्य:
चींटियाँ: खाना ढोते समय कतार में चलती हैं।
बच्चे: स्कूल में प्रार्थना के लिए कतार में जाते हैं।
गाड़ियाँ: ट्रैफिक में पंक्तिबद्ध चलती हैं।
पक्षी: प्रवास के दौरान कतार में उड़ते हैं, जैसे बगुले।
वर्षा में ध्वनियाँ
(क) कविता में वर्षा के अनेक दृश्य दिए गए हैं। इन दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई दे रही होंगी? अपनी कल्पना से उन ध्वनियों को कक्षा में सुनाइए। उत्तर: कविता में वर्षा के दृश्य और उनमें सुनाई देने वाली ध्वनियाँ:
बूँदों की रिमझिम आवाज
बादलों की गड़गड़ाहट
मेंढकों की टर्र-टर्र
हवा के चलने की सरसराहट
पत्तियों पर पानी टपकने की आवाज
किसानों और मालिनों के गीत
(ख) “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” कविता में मेंढकों की टर्र-टर्र को भी प्यारा गीत कहा गया है। आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं? उत्तर: बेसुरी ध्वनियाँ जैसे मेंढकों की टर्र-टर्र तब अच्छी लगती हैं जब:
वे प्रकृति के उत्सव का हिस्सा हों, जैसे वर्षा के समय।
वे खुशी और राहत का संकेत दें, जैसे गर्मी के बाद वर्षा।
वे परिचित हों, जैसे गाँव में तालाब के पास मेंढकों की आवाज।
सृजन
“बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है” ‘आमोद’ या ‘मोद’ दोनों शब्दों का अर्थ होता है– आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता। कविता में वर्षा ऋतु में ‘आमोद’ के दृश्यों का वर्णन किया गया है। कविता के इन दृश्यों को हम नीचे दिए गए उदाहरण की तरह अनुच्छेद में भी लिख सकते है- “हवा की ठंडक थी, बारिश की रिमझिम बूँदें गिर रही थीं, मोर नृत्य कर रहे थे और मेंढक खुश होकर गाना गा रहे थे। ये सभी मिलकर वर्षा ऋतु को एक उत्सव जैसा बना रहे थे। बागों में गुलाब की खुशबू और आम के पेड़ों पर नए फल देखकर पक्षी और लोग, सभी प्रसन्न हो गए थे। किसान अपने खेतों में काम करते हुए इस प्राकृतिक आनंद के भागीदार बन रहे थे।” अब नीचे दिए गए ‘आमोद’ से जुड़े विभिन्न दृश्यों का एक-एक अनुच्छेद में वर्णन कीजिए—
उत्तर:
बारिश के बाद उपवन में सैर: बारिश के बाद उपवन में सैर करना बहुत सुखद होता है। पेड़ों की पत्तियाँ पानी से धुलकर चमक रही होती हैं। गीली मिट्टी की सुगंध हवा में फैली होती है। पक्षी चहचहा रहे होते हैं, और रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं। ठंडी हवा चेहरे को छूती है, और मन में शांति और खुशी भर जाती है। यह ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने एक नया रंग बिखेर दिया हो।
परिवार के किसी प्रिय सदस्य या मित्र से वर्षों बाद मिलना: वर्षों बाद किसी प्रिय मित्र से मिलना मन को आनंद से भर देता है। हम एक-दूसरे को गले लगाते हैं, और पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। चाय की चुस्कियों के साथ हँसी-मजाक चलता है। बाहर बारिश की रिमझिम आवाज इस मुलाकात को और खास बनाती है। यह पल ऐसा होता है जैसे समय रुक गया हो, और केवल खुशी बाकी रह जाए।
सर्दियों का पहला हिमपात: सर्दियों का पहला हिमपात देखना जादुई होता है। सफेद बर्फ धीरे-धीरे जमीन पर गिरती है, और चारों तरफ चाँदी जैसी चमक फैल जाती है। बच्चे बर्फ के गोले बनाकर खेलते हैं, और बड़ों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है। ठंडी हवा और बर्फ की नरमी मन को शांति देती है। यह दृश्य प्रकृति का एक अनोखा उपहार लगता है।
कोई उत्सव: उत्सव का माहौल खुशी और उमंग से भरा होता है। लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं, और घरों में मिठाइयाँ बनती हैं। बच्चे पटाखे छुड़ाते हैं, और बड़ों के बीच हँसी-ठिठोली चलती है। बाहर बारिश की बूँदें इस उत्सव को और रंगीन बनाती हैं। नाच, गाना, और स्वादिष्ट भोजन मिलकर हर दिल में आनंद भर देते हैं।
मित्रों संग खेलना: मित्रों के साथ खेलना हमेशा मजेदार होता है। बारिश के बाद जब मैदान हरा और गीला होता है, हम फुटबॉल खेलते हैं। कीचड़ में फिसलना और हँसना हमें और उत्साहित करता है। खेल के बाद हम सब मिलकर ठंडी हवा में कहानियाँ सुनाते हैं। यह समय दोस्ती और खुशी का अनमोल पल होता है।
किसी प्रिय पुस्तक को पढ़ना: बारिश की रिमझिम के बीच अपनी पसंदीदा किताब पढ़ना बहुत सुकून देता है। खिड़की के पास बैठकर, गरम चाय की चुस्कियाँ लेते हुए, मैं कहानी की दुनिया में खो जाता हूँ। बारिश की आवाज और किताब की कहानी मिलकर मन को शांति और आनंद देती हैं। यह समय ऐसा होता है जैसे मैं अपने सपनों में जी रहा हूँ।
किसी कार्य को पूरा करना या सफल प्रदर्शन करना: किसी कार्य को पूरा करने की खुशी अनमोल होती है। जैसे, स्कूल का प्रोजेक्ट खत्म करने के बाद जब शिक्षक तारीफ करते हैं, तो मन गर्व से भर जाता है। बाहर बारिश की बूँदें इस खुशी को और बढ़ा देती हैं। मैं अपने दोस्तों के साथ इस सफलता को मिठाई खाकर मनाता हूँ। यह पल मेहनत का फल लगता है।
समुद्र के किनारे शांत सवेरा या शाम: समुद्र के किनारे सवेरा बहुत शांत और सुंदर होता है। लहरों की हल्की आवाज और ठंडी हवा मन को सुकून देती हैं। सूरज की किरणें पानी पर चमकती हैं, और आसमान में पक्षी उड़ते हैं। बारिश की हल्की बूँदें इस दृश्य को और खास बनाती हैं। यह पल प्रकृति के साथ एकता का एहसास कराता है।
वर्षा से जुड़े गीत
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
प्रश्न: हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत और लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत और लोकगीत खोजिए और लिखिए। इस कार्य के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता ले सकते हैं। उत्तर: वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत हिंदी लोकगीत: “सावन की बौछारों में, मन मयूर नाचे, मोर के पंख फैलाए, मीठी बांसुरी बजे।” “आओ सखी, मचलें हम, बारिश में भीगने चलें, रिमझिम बूँदें गिर रही हैं, चलो, हर खुशी गाने चलें।”
प्रश्न: अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत और लोकगीत खोजिए और लिखिए। सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को संकलित करके ‘वर्षा-गीतों’ की एक पुस्तिका तैयार कीजिए। उत्तर: पुस्तिका का शीर्षक: “वर्षा के गीत” (i) गीत – “सावन आया” सावन आया, बूँदें छाईं, संग में मोर नाचे, खुशियाँ आईं। रिमझिम बूँदें, गाती हैं ध्वनियाँ, हरियाली छाई, बगिया में खुशियाँ। (लोकगीत) विशेष: यह गीत सावन की शुरुआत और वर्षा की बूँदों के गिरने के साथ आनंद की अनुभूति को व्यक्त करता है।
(ii) गीत – “मोर का नृत्य” मोर का नृत्य, प्यारी बांसुरी की तान, सावन की धारा में बहता प्यार का अभिवादन। वर्षा की बूँदें, छनकती बंसी, मोर नाचते जाएं, हवाओं में नयी झंकार। (कृषक गीत) विशेष: वर्षा में मोर के नृत्य को संजीवता और प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में गाया गया है।
(iii) गीत – “बरखा आई” बरखा आई, खुशी का संग लाई, पानी में खिली क्यारी, बगिया महकाई। हवा ने किया गीत, मिट्टी में रंग घोला, बरखा की रिमझिम, जीवन में सुख लाया। (लोकगीत) विशेष: यह गीत वर्षा की रिमझिम बूँदों के गिरने से उत्पन्न होने वाले सुख और शांति की भावना को व्यक्त करता है।
(iv) गीत – “जल बूँदें” जल बूँदें गिरने लगीं, बगियाँ महक उठीं, आत्मा ने नए जीवन की शांति पाई। चरणों में वर्षा की धारें बही, आकाश में नये रंग, भूमि में बहार आई। (राजस्थानी लोकगीत) विशेष: यह गीत वर्षा के समय भूमि और आकाश के सौंदर्य का वर्णन करता है और उसके प्रभावों को दर्शाता है।
आज की पहेली
आपने वर्षा से जुड़ी एक कविता पढ़ी है। अब भारत की विभिन्न ऋतुओं से जुड़ी कुछ पहेलियाँ पढ़िए और उन्हें बूझिए—
1. “जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया। आम पके तो रस टपके, समय कौन-सा ये झलके?” उत्तर: ग्रीष्म ऋतु (गर्मी)
2. “पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरे। नदियाँ नाले भर दें और, बूझो किसका है ये जोर?” उत्तर:वर्षा ऋतु (बरसात)
4. “फूल खिलें, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए। बागों में खुशबू छा जाए, बूझो ऋतु ये क्या कहलाए?” उत्तर: वसंत ऋतु
5. “बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए। धुंध की चादर लाए रात, बूझो किस ऋतु की बात?” उत्तर: शिशिर या हेमंत ऋतु (सर्दी)
6. “पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए। पेड़ करें खुद को तैयार, कौन-सी ऋतु का है ये सार?” उत्तर: पतझड़
साझी समझ
अब इस कविता पर अपने साथियों के साथ विचार-विमर्श कीजिए। उत्तर: विचार-विमर्श के बिंदु:
1. वर्षा ऋतु की सुंदरता का चित्रण
वर्षा ऋतु को कवि ने कितनी खूबसूरती से प्रकृति, पक्षियों, और मानव जीवन से जोड़ा है?
आपको कविता में वर्षा का कौन-सा दृश्य सबसे अधिक पसंद आया और क्यों?
2. प्रकृति का जीवन से संबंध
वर्षा से किस-किस को लाभ होता है?
कविता में किन प्राकृतिक और जीव-जंतुओं का वर्णन किया गया है?
3. मानव जीवन में वर्षा का प्रभाव
वर्षा ऋतु में किसान क्यों खुश होते हैं?
क्या आप कभी खेत में काम करते हुए किसी किसान को गीत गाते देखे हैं?
4. पशु-पक्षियों की प्रतिक्रियाएँ
मोर, मेंढक और पपीहे वर्षा में क्या करते हैं?
इन क्रियाओं से आपको क्या अनुभव होता है?
5. भावनात्मक जुड़ाव
वर्षा ऋतु आने पर आपके मन में क्या भाव आते हैं?
क्या आपने कभी तेज बारिश, बिजली और गरजते बादल का अनुभव किया है?
चर्चा का उद्देश्य: इस चर्चा का उद्देश्य यह है कि बच्चे कविता को केवल शब्दों में न पढ़ें, बल्कि उसके भाव और चित्रों को समझें और महसूस करें। यह भी समझें कि वर्षा ऋतु केवल एक मौसम नहीं है, बल्कि यह जीवन, आनंद और प्रकृति की पुनः जागृति का प्रतीक है।
पाठ सेमेरी समझ(क) पाठ के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) “बिना बिचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
मन में शांति बनी रहती है।
अपना काम बिगड़ जाता है। (*)
जग में होत हँसाय।
उत्तर: अपना काम बिगड़ जाता है। विश्लेषण: पाठ में कहा गया है कि बिना सोचे-समझे काम करने से काम बिगड़ जाता है और लोग उसका मजाक उड़ाते हैं। इससे व्यक्ति को हँसी का पात्र बनना पड़ता है।
(2) “चित में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?
प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख
बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता (*)
खान-पान, सन्मान और राग-रंग का अभाव
दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास
उत्तर: बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता विश्लेषण: पाठ के अनुसार, बिना विचार किए काम करने से मन में अशांति रहती है।
(3) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की (*)
अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की
उत्तर: अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की विश्लेषण: यह पंक्ति सलाह देती है कि अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
(4) “जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है?
हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।(*)
उत्तर: हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए। विश्लेषण: इस पंक्ति का अर्थ है कि हमें सहज और सरल तरीके से जीवन जीने पर ध्यान देना चाहिए, जो स्वाभाविक रूप से हमारे सामने आता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकिः
कवि ने स्पष्ट रूप से बताया है कि बिना सोच-विचार के कार्य करने से पछताना पड़ता है, और मन को चैन नहीं मिलता।
उन्होंने यह भी कहा है कि बीती बातों को भूलकर भविष्य की चिंता करनी चाहिए।
साथ ही, यह भी सलाह दी है कि जो बात या काम सहजता से हो, उसी में ध्यान लगाना चाहिए ताकि दुर्जन हँसे नहीं और मन भी शांत रहे।
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनी गई कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। उसका काम बिगड़ जाता है और लोग उसका मजाक उड़ाते हैं, जिससे वह हँसी का पात्र बन जाता है। विश्लेषण: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर कोई बिना पढ़ाई की योजना बनाए परीक्षा देता है, तो वह असफल हो सकता है और लोग उसका मजाक उड़ा सकते हैं।
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ।” उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि अतीत की गलतियों या असफलताओं को भूलकर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। जो चीजें सहज और सरल तरीके से हमारे सामने आती हैं, उन पर मन लगाना चाहिए। विश्लेषण: यह पंक्ति हमें प्रेरित करती है कि हमें पुरानी बातों में उलझने के बजाय भविष्य की ओर देखना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर कोई खेल में हार गया, तो उसे उस हार को भूलकर अगले खेल की तैयारी करनी चाहिए।
मिलकर करें मिलाननीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं, उनसे संबंधित अर्थ वाली स्तंभ 2 की पंक्तियों से उनका मिलान कीजिए— उत्तर:
सोच-विचार के लिएपाठ को एक बार पुनः पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं? उत्तर: कविता में बिना विचार किए किए गए कार्यों के परिणामस्वरूप पछतावा और निराशा का उल्लेख किया गया है। जब कोई व्यक्ति बिना सोचे-समझे काम करता है, तो उसे बाद में अपने किए पर पछताना पड़ता है, और उसका कार्य न केवल खुद के लिए बल्कि समाज में भी हंसी का कारण बनता है। इससे व्यक्ति का मन अशांत रहता है और वह दूसरों से सम्मान या खुशी नहीं प्राप्त कर पाता है। इस प्रकार, बिना विचार किए गए कार्यों से जीवन में परेशानियाँ आती हैं और व्यक्ति को पछताना पड़ता है।
(ख) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कुंडलिया में जो बातें सैकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए। उत्तर: हाँ, कुंडलिया में कही गई बातें आज भी उपयोगी हैं। यह सिखाती है कि कोई भी काम करने से पहले सोच-विचार करना जरूरी है। उदाहरण के लिए:
अगर कोई बिना सोचे ऑनलाइन लिंक पर क्लिक कर देता है, तो उसका बैंक खाता हैक हो सकता है।
अगर कोई बिना योजना के बिजनेस शुरू करता है, तो उसे नुकसान हो सकता है। ये बातें हमें सतर्क रहने और जल्दबाजी से बचने की सीख देती हैं।
(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों के अर्थ शब्दकोश से देखकर लिखिए। प्रत्येक के लिए एक-एक उदाहरण भी दीजिए। उत्तर: सन्मान अर्थ: सम्मान, आदर, या प्रतिष्ठा। उदाहरण:
उसने हमेशा अपने वरिष्ठों का सन्मान किया।
हमें दूसरों के विचारों का सन्मान करना चाहिए।
मनहिं अर्थ: मन में, मानसिक रूप से। उदाहरण:
वह हमेशा अपने मनहिं सच का पालन करता है।
मनहिं शांति के लिए ध्यान करना आवश्यक है।
भावै अर्थ: पसंद करना, आकर्षित होना। उदाहरण:
उसे यह गाना बहुत भावा।
मुझे उन लोगों का स्वभाव बहुत भावता है जो ईमानदार होते हैं।
अनुमान और करना सेअपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए। (क) आपने पढ़ा है कि “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय…।” कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी अपने साथियों के साथ मिलकर बनाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। उत्तर: कहानी का शीर्षक: जल्दबाजी का पछतावा मेरा मित्र राहुल बहुत उत्साही था। एक दिन उसे एक ऑनलाइन विज्ञापन दिखा, जिसमें लिखा था, “इस ऐप को डाउनलोड करें और ₹1000 का कैशबैक पाएँ।” राहुल ने बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक किया और ऐप डाउनलोड कर लिया। उसने अपनी बैंक डिटेल्स भी दर्ज कर दीं। कुछ ही मिनटों में उसके खाते से ₹5000 कट गए। राहुल घबरा गया और मुझे फोन किया। हमने तुरंत बैंक में शिकायत की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रभाव: राहुल को न केवल पैसों का नुकसान हुआ, बल्कि वह कई दिनों तक तनाव में रहा। उसने सीखा कि कोई भी ऑनलाइन लेन-देन करने से पहले उसकी सत्यता की जाँच करनी चाहिए। प्रस्तुति: हम कक्षा में इस कहानी को नाटक के रूप में प्रस्तुत करेंगे, जिसमें राहुल की जल्दबाजी और उसका पछतावा दिखाया जाएगा।
(ख) कल्पना कीजिए कि “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ…।” कविता निम्नलिखित के लिए लिखी गई है—
आप
आपका कोई सहपाठी
आपका कोई परिजन
आपके कोई शिक्षक
कोई पक्षी
कोई पशु
इनकी कौन-कौन सी समस्याएँ होंगी? यह कविता उन्हें कैसे प्रेरित करेगी? उत्तर:
आप: समस्या: आप शायद किसी परीक्षा में असफल हो गए हों और उसका दुख आपको परेशान कर रहा हो। प्रेरणा: यह कविता आपको सिखाएगी कि पुरानी असफलता को भूलकर अगली परीक्षा की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।
सहपाठी: समस्या: आपका सहपाठी किसी दोस्त से झगड़े के कारण उदास है। प्रेरणा: कविता उसे प्रेरित करेगी कि वह पुराने झगड़े को भूलकर नए दोस्त बनाने और भविष्य पर ध्यान दे।
परिजन: समस्या: आपके पिता को बिजनेस में नुकसान हुआ हो। प्रेरणा: कविता उन्हें प्रेरित करेगी कि वे पुराने नुकसान को भूलकर नई योजना बनाएँ।
शिक्षक: समस्या: शिक्षक को किसी छात्र के खराब प्रदर्शन का दुख हो। प्रेरणा: कविता उन्हें प्रेरित करेगी कि वे पुरानी बातें भूलकर छात्रों को बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करें।
पक्षी: समस्या: एक पक्षी का घोंसला टूट गया हो। प्रेरणा: कविता उसे प्रेरित करेगी कि वह पुराने घोंसले को भूलकर नया घोंसला बनाए।
पशु: समस्या: एक कुत्ते को मालिक ने छोड़ दिया हो। प्रेरणा: कविता उसे प्रेरित करेगी कि वह पुराने मालिक को भूलकर नया घर खोजे।
(ग) कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे? उत्तर: मैं उस व्यक्ति से कहूँगाः “भाई! जो बीत गया, उसे अब बदला नहीं जा सकता। लेकिन अगर आप अतीत को भूलकर आज और कल पर ध्यान दें, तो ज़िंदगी फिर से हँसी-खुशी की ओर बढ़ सकती है। बीती बातों को मन पर मत हावी होने दो, क्योंकि आगे का रास्ता तुम्हारे हाथ में है।”
शब्द से जुड़े शब्दनीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘चित’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द कुंडलियाँ में से चुनकर लिखिए— उत्तर:
कविता की रचना
इन पंक्तियों को लय के साथ बोलकर देखिए। इन्हें बोलते समय क्या अलग लगा था? आपने ध्यान दिया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने में बराबर समय लगता है। इस कारण इन कुंडलियों की सुंदरता बढ़ गई है। आप ध्यान देंगे तो इन कुंडलियों में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी जैसे प्रत्येक कुंडलिया का पहला या दूसरा शब्द अक्सर समान पाया जाता है। ये दो पंक्तियाँ कहीं सीधे संवाद की तरह सुनाई पड़ती हैं। ऐसा लगता है मानो कोई हमें संवाद या बातों के रूप में उपदेश दे रहा हो। अतः कुछ विशेषताएँ आपको दोनों कुंडलियों में दिखाई देंगी, कुछ विशेषताएँ केवल इनमें से किसी एक में दिखाई देंगी।
(क) अब आप पाठ में दी गई दोनों कुंडलियाँ को ध्यान से देखिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इनकी विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। उत्तर:
(ख) नीचे एक स्तंभ में कविता की पंक्तियों की कुछ विशेषताएँ दी गई हैं और उनसे संबंधित पंक्तियाँ दूसरे स्तंभ में दी गई हैं। कविता की विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— (संकेत – आप कविता की पंक्तियों में कुछ और विशेषताएँ भी खोज सकते हैं।) उत्तर:
काल से जुड़े शब्द“बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेहु।” इस वाक्य में “बीती” शब्द अतीत यानी ‘भूतकाल’ के कार्यों को व्यक्त कर रहा है और “आगे” शब्द ‘भविष्य’ के कार्यों को व्यक्त कर रहा है। इसी प्रकार ‘वर्तमान’ समय में होने वाले कार्यों को ‘आज’ जैसे शब्दों से व्यक्त किया जा सकता है। रोचक बात यह है कि अनेक शब्दों का प्रयोग बीते हुए समय, आने वाले समय और वर्तमान समय को बताने वाले, तीनों प्रकार के वाक्यों में किया जा सकता है।
(क) नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए तीनों प्रकार के ‘काल’ व्यक्त करने वाले तीन-तीन वाक्य बनाइए—
उत्तर:
(ख) आपने जो वाक्य बनाए हैं, उन्हें ध्यान से देखिए। पहचानिए कि इन वाक्यों में किन शब्दों से पता चल रहा है कि वाक्य में कार्य भूतकाल में हुआ, वर्तमान काल में हुआ है या भविष्य काल में होगा? वाक्यों में उन शब्दों को रेखांकित कीजिए। उत्तर:
पाठ से आगे आपकी बात(क) “खटकत है जिय माहि कियो जो बिना बिचारे।” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए। उत्तर: हाँ, मैंने ऐसा अनुभव किया है। एक बार मैंने जल्दबाजी में अपने दोस्त को गलत मैसेज भेज दिया, जिसमें कुछ ऐसी बातें थीं जो उसे नहीं बतानी थीं। बाद में मुझे बहुत पछतावा हुआ और वह बात मेरे मन में कई दिनों तक खटकती रही। इस घटना से मैंने सीखा कि कोई भी मैसेज भेजने से पहले उसे अच्छे से पढ़ लेना चाहिए।
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” का अर्थ है ‘अतीत को भूलना और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।’ क्या आप इस बात से सहमत हैं? क्यों? उदाहरण देकर समझाइए। उत्तर: हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। अतीत की गलतियों में उलझने से समय और ऊर्जा बर्बाद होती है। उदाहरण के लिए, अगर मैं किसी खेल में हार गया, तो उस हार को बार-बार सोचने के बजाय मुझे अगले खेल की तैयारी करनी चाहिए। इससे मैं बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूँ। यह कविता हमें सिखाती है कि भविष्य की योजनाएँ बनाकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
(ग) पाठ में दी गई दोनों कुंडलियाँ के आधार पर आप अपने जीवन में कौन-कौन से बदलाव लाना चाहेंगे? उत्तर: मैं अपने जीवन में निम्नलिखित बदलाव लाना चाहूँगा:
सोच-विचार करना: कोई भी निर्णय लेने से पहले मैं अच्छी तरह सोच-विचार करूँगा, जैसे कि ऑनलाइन खरीदारी करने से पहले वेबसाइट की सत्यता जाँच लूँगा।
अतीत को भूलना: पुरानी गलतियों को भूलकर भविष्य की योजनाओं पर ध्यान दूँगा, जैसे कि अगर मैं किसी परीक्षा में कम अंक लाया, तो उसे भूलकर अगली परीक्षा की तैयारी करूँगा।
सहज जीवन जीना: मैं सरल और सहज तरीके से जीवन जीने की कोशिश करूँगा, जैसे कि अनावश्यक चीजों पर ध्यान देने के बजाय अपनी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर ध्यान दूँगा।
(घ) “खान पान सन्मान राग रंग मनहि न भावै।” इस पंक्ति में खान-पान, सन्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात की गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। उत्तर: मैं सन्मान को सबसे आवश्यक मानता हूँ। कारण: सन्मान व्यक्ति के आत्मविश्वास और खुशी को बढ़ाता है। अगर किसी को सन्मान नहीं मिलता, तो वह कितना भी अच्छा खान-पान या राग-रंग प्राप्त कर ले, उसे सुख नहीं मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर स्कूल में शिक्षक मेरी मेहनत की प्रशंसा करते हैं, तो मुझे बहुत खुशी मिलती है और मैं और मेहनत करता हूँ। सन्मान व्यक्ति को प्रेरित करता है और समाज में उसकी पहचान बनाता है।
हँसी
“जग में होत हँसाय”
(क) कभी-कभी लोग दूसरों की गलतियों पर ही नहीं, उनके किसी भी कार्य पर हँस देते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी कुछ स्थितियों की सूची बनाइए, जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई हो। उत्तर: ऐसी कुछ स्थितियाँ जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई हो सूची:
जब कोई दोस्त गलती से अपनी जूते की जगह उल्टे चप्पल पहन कर आ गया।
जब मैं खुद मंच पर कविता सुनाते समय अटक गया और शब्द भूल गया।
एक सहपाठी ने जल्दी में अपने स्कूल बैग में खाने का डिब्बा नहीं रखा और खाली टिफिन लेकर आ गया।
एक दिन एक लड़का दौड़ते-दौड़ते गिर गया लेकिन उठकर खुद भी हँसने लगा।
किसी ने ‘साधू बाबा’ की जगह ‘साबू बाबा’ बोल दिया और सब हँस पड़े।
(ख) ऐसी दोनों स्थितियों में आपको कैसा लगता है और दूसरों को कैसा लगता होगा? उत्तर:ऐसी दोनों स्थितियों में कैसा लगता है मेरा और दूसरों का अनुभवः जब कोई मुझ पर हँसाः
मुझे शर्मिंदगी और दुख महसूस हुआ।
लगा कि सब मेरा मज़ाक बना रहे हैं।
आत्मविश्वास कुछ देर के लिए कम हो गया।
जब मैंने किसी पर हँसी कीः
शुरुआत में मज़ा आया, लेकिन बाद में गलती का एहसास हुआ।
यह महसूस हुआ कि मेरी हँसी से सामने वाले को बुरा लग सकता है।
(ग) सोचिए कि कोई व्यक्ति आपकी किसी भूल पर हँस रहा है। ऐसे में आप क्या कहेंगे या क्या करेंगे ताकि उसे एहसास हो जाए कि इस बात पर हँसना ठीक नहीं है? उत्तर: मैं निम्नलिखित कहूँगा या करूँगा:
विनम्रता से समझाना: “यार, गलती तो सबसे होती है, इस पर हँसने की बजाय मुझे सुधारने में मदद कर।”
उदाहरण देना: “अगर तुम्हारी ऐसी गलती हो और मैं हँसूँ, तो तुम्हें कैसा लगेगा?”
शांत रहना: अगर वह नहीं समझता, तो मैं शांत रहकर उसकी बात को अनदेखा कर दूँगा।
सोच-समझकर“बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।”
(क) आज के समय में कुछ लोग जल्दी में कार्य कर देते हैं या जल्दी में निर्णय ले लेते हैं। कुछ ऐसी स्थितियाँ बताइए जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है। उत्तर: ऐसी स्थितियाँ जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है:
ऑनलाइन खरीदारी: बिना जाँच किए किसी अनजान वेबसाइट से सामान खरीदना, जिससे धोखाधड़ी हो सकती है।
परीक्षा में जल्दबाजी: प्रश्न को बिना पढ़े उत्तर लिख देना, जिससे गलत उत्तर हो सकता है।
यातायात नियम तोड़ना: जल्दी में बिना हेलमेट के बाइक चलाना, जिससे चालान या दुर्घटना हो सकती है।
(ख) मान लीजिए कि आपको या आपके किसी परिजन को नीचे दिए गए संदेश मिलते हैं। ऐसे में आप क्या करेंगे?
* राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल- https://cybercrime.gov.in उत्तर: संदेश और आप क्या करें: 1. आपका बैंक खाता बंद होने वाला है। तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। किसी लिंक पर क्लिक न करें। 2. बधाई हो! आपने ₹10 लाख जीत लिए हैं। किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। ऐसे मैसेज स्कैम होते हैं। 3. गलती से आपके नंबर पर ₹1000 भेज दिए गए हैं। कृपया वापस भेज दें। पैसा भेजने से पहले अपने बैंक खाते की जांच करें। भेजें नहीं। 4. आपका सिम बंद होने वाला है, लिंक पर क्लिक करें। अपने मोबाइल सेवा प्रदाता से संपर्क करें। लिंक पर क्लिक न करें। 5. आपके मोबाइल पर 70% छूट, लिंक पर क्लिक करें। ये फ़िशिंग लिंक हो सकता है। साइट पर न जाएं। 6. खाता बंद हो जाएगा, तुरंत ₹5000 भेजें। घबराएं नहीं। अपने बैंक से पुष्टि करें। पुलिस को सूचित करें। 7. एप डाउनलोड करें और ₹1000 जीतें। अनजान एप डाउनलोड न करें। यह डिवाइस को नुकसान पहुँचा सकता है। 8. गिरफ्तारी का वारंट है, जुर्माना भरें। किसी अज्ञात व्यक्ति को पैसे न भेजें। पुलिस से संपर्क करें। 9. गाड़ी जीतने का दावा कर ₹50,000 का टैक्स मांगा गया है। यह फ्रॉड है। किसी भी रकम को भेजने से बचें। 10. लिंक क्लिक करें और ₹100 जीतें। छोटे ईनाम के लालच में लिंक न खोलें। यह धोखा हो सकता है। 11. टी.वी. या अन्य समस्या का हल देने के लिए रिमोट एक्सेस दें। किसी को रिमोट एक्सेस न दें। वे आपकी निजी जानकारी चुरा सकते हैं। 12. फोटो भेजें, वीडियो कॉल करें आदि। किसी अजनबी से ऐसा व्यवहार न करें। तुरंत पुलिस को सूचित करें।
(ग) नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। इन स्थितियों में बिना सोचे-समझे कार्य करने या निर्णय लेने के क्या परिणाम हो सकते हैं—
सोशल मीडिया पर झूठा संदेश या असत्य समाचार पर भरोसा करके उसे सबको भेज दिया।
उत्तर: परिणामः 1. लोगों में भय, भ्रम या अफ़वाह फैल सकती है। 2. आप पर झूठी जानकारी फैलाने का आरोप लग सकता है। 3. इससे समाज में अशांति या विवाद पैदा हो सकते हैं। 4. साइबर कानून के अनुसार, कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है।
जल्दबाजी में बिना हेलमेट के बाइक चलाने पर पुलिस ने चालान काट दिया।
उत्तर: परिणामः 1. आपकी और दूसरों की जान को खतरा हो सकता है। 2. पुलिस द्वारा चालान या जुर्माना लगाया जा सकता है। 3. सड़क दुर्घटना में गंभीर चोट या मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। 4. यह कानूनी नियमों का उल्लंघन है।
बिना माता-पिता से पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च कर दिए।
उत्तर: परिणामः 1. घर के वित्तीय नुकसान हो सकता है। 2. माता-पिता की नाराज़गी और डाँट सहनी पड़ सकती है। 3. आपका भविष्य का विश्वास और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। 4. यह आदत आगे चलकर लत (addiction) बन सकती है।
आज की पहेली
“खान पान सन्मान” इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल एक मात्रा का बार-बार उपयोग किया गया है। (आ की मात्रा) ऐसे ही दो वाक्य नीचे दिए गए हैं जिसमें केवल एक मात्रा का उपयोग किया गया है— नीली नदी धीमी थी चींटी चीनी चाट गई अब आप इसी प्रकार के वाक्य अलग-अलग मात्राओं के लिए बनाइए। ध्यान रहे, आपके वाक्यों का कोई न कोई अर्थ होना चाहिए। आप एक वाक्य में केवल एक मात्रा को बार-बार या बिना मात्रा वाले शब्दों का ही उपयोग कर सकते हैं। उत्तर:
खोजबीन के लिए
आपने इस पाठ में गिरिधर कविराय की कुंडलिया “बिना विचारे जो करै….।” को पढ़ा। अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके एक अन्य कहानी “बिना विचारे करो न काम” सुन सकते हैं- बिना विचारे https://www.youtube.com/watch?v=9zEP4YEP-rs उत्तर: विद्यार्थी स्वयं वीडियो देखे और इसकी खोजबीन करे।